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"ये आपने अच्छा किया।" करुणा ने कहा__"दीदी ज़रूर इस संबंध में बड़े भइया से बात करेंगी।"
"हमसे बहुत बड़ी ग़लती हुई है करुणा।" अभय ने एकाएक अधीर होकर कहा__"आज मुझे एहसास हो रहा है कि क्यों मेरी देवी समान गौरी भाभी हम सबको छोंड़ कर इस हवेली से अलग खेतों में बने उस मकान पर रहती थी? सिर्फ इसी हरामज़ादे की वजह से करुणा। उस रात विराज आया था मुम्बई से, और सुबह उसने ही शिवा को मार मार कर अधमरा किया था। तब हमने सोचा था कि उसने बेवजह ही किसी खुंदक में शिवा को मारा था। जबकि अब मुझे सब बातों की समझ आई है कि क्यों विराज ने शिवा को मारा था?"
"क्या मतलब है आपका?" करुणा चौंकी।
"इसी नीच की वजह से करुणा।" अभय ने आवेश में कहा__"ये तो समझ ही गई हो तुम कि शिवा अपने ही घर की माॅ बहनों के बारे में ऐसी नीयत रखता है। उसने उसी नीयत से गौरी भाभी और हमारी फूल सी बच्ची निधि पर भी यही सब किया रहा होगा। इसी वजह से ये सब हुआ है।"
"लेकिन अगर ऐसी बात थी तो।" करुणा ने सोचने वाले भाव से कहा__"गौरी दीदी को इस बारे में बड़ी दीदी और बड़े भइया को बताना चाहिए था। अगर वो ये सब उनसे बताती तो वो अपने बेटे पर लगाम लगाती। लेकिन वो तो हवेली ही छोंड़ कर खेतों वाले मकान में गुड़िया के साथ रहने लगी थी। क्या सिर्फ इतनी सी बात की वजह से??"
"वजह तो हमें यही बताया था भइया भाभी ने कि गौरी भाभी ने प्रतिमा भाभी के कमरे से उनके जेवर चुराए थे।" अभय ने कहा__"और इतना ही नहीं बल्कि बड़े भइया को अपने रूप जाल में फसाने की कोशिश भी की थी। इस लिए बड़े भइया ने उन लोगों को हवेली से निकाल दिया था।"
"हाॅ तो ग़लत क्या था अभय?" करुणा ने अजीब भाव से कहा__"गौरी दीदी ने तो सच में बड़े भइया के साथ ग़लत करने की कोशिश की थी। इस सबका सबूत भी दिखाया था प्रतिमा दीदी ने हम लोगों को। उन फोटोग्राफ्स में साफ साफ दिखता था कि कैसे गौरी दीदी ने बड़े भइया को उनके ही कमरे में अपनी बाहों में जकड़ा हुआ था।"
"क्या ये स्वाभाविक बात लगती है करुणा कि बड़े भइया गौरी भाभी के साथ उस स्थित में हों और दूसरा कोई उस स्थिति में उनकी फोटो खींचे?" अभय ने सोचने वाले भाव से कहा__"जबकि उस स्थिति में होना तो ये चाहिए था कि अगर गौरी भाभी ने बड़े भइया को ग़लत नीयत से जकड़ा हुआ था तो इस सबका बड़े भइया विरोध करते, और गौरी भाभी को इस सबके लिए डाॅटते। दूसरी बात उन लोगों की उस वक्त की फोटो बनाने वाला कौन था?? अगर फोटो खींचने वाली प्रतिमा भाभी थी तो उन्हें फोटो खींचने की बजाय इस सबको रोंकना था। आखिर फोटो खींचने के पीछे उनका क्या उद्देश्य था? क्या सिर्फ ये कि हम सब उन फोटोज़ को देख कर ये यकीन कर सकें कि गौरी भाभी सच में बड़े भइया के साथ ये सब करने की नीयत रखती हैं या ये सब करती भी हैं???"
"आप कहना क्या चाहते हैं अभय??" करुणा ना समझने वाले भाव से बोली।
"आज के इस हादसे से मेरे सोचने का नज़रिया बदल गया है करुणा।" अभय ने गंभीर लहजे में कहा__"हम सब जानते थे कि विजय भइया और गौरी भाभी किसी देवी देवता से कम नहीं थे। उन्होंने भूल से भी किसी के साथ कभी भी कुछ ग़लत नहीं किया था। वो पढ़ाई लिखाई में भले ही ज़ीरो थे, लेकिन जब से उन्होने खेती बाड़ी का काम सम्हाला था तब से हमारे घर के हालात हज़ार गुना बेहतर हो गए थे। यहाॅ तक कि उनकी मेहनत और लगन से किसी भी चीज़ की कभी कोई कमी न रही थी। उनकी ही मेहनत और रुपये पैसे से इतनी बड़ी हवेली बनी और उनके ही पैसों से बड़े भइया ने अपने कारोबार की बुनियाद रखी थी। माॅ बाबूजी विजय भइया और गौरी भाभी को सबसे ज्यादा मानते थे। विजय भइया और गौरी भाभी ने कभी भी मुझे किसी बात के लिए कुछ नहीं कहा, बल्कि विजय भइया ने तो उस समय के हिसाब से मुझे एक बुलेट मोटर साइकिल खरीद कर दी थी। पूरे गाॅव में किसी के पास बुलेट नहीं थी। इतना ही नहीं उन्होंने अपने ही पैसों से बाबूजी के लिए एक शानदार कार खरीदी थी ताकि बाबूजी बड़े शान से उसमें सवारी करें। घर का बड़ा बेटा होने का जो फर्ज़ अजय भइया को निभाना चाहिये था वो फर्ज़ विजय भइया निभा रहे थे वो भी अपनी पूरी निष्ठा के साथ। मुझे याद है करुणा कि अजय भइया और प्रतिमा भाभी कभी भी विजय भइया और गौरी भाभी से ठीक से बात नहीं करते थे। बल्कि उनके हर काम में कोई न कोई नुक्स निकालते ही रहते थे। फिर समय गुज़रा और एक रात विजय भइया को किसी ज़हरीले सर्प ने काट लिया और वो इस दुनिया से चल बसे। उनके इस दुनिया से जाते ही हम सबकी खुशियों पर ग्रहण सा लग गया करुणा। माॅ बाबूजी को उनकी मौत से गहरा सदमा लगा था। हम सब उनके सदमे की वजह से परेशान हो गए थे। बड़े भइया और भाभी ने ही उन्हें सम्हाला था। एक दिन माॅ बाबूजी उसी कार से शहर जा रहे थे तो रास्ते में उनका एक्सीडेंट हो गया और वो दोनो उस एक्सीडेंट की वजह से कोमा में चले गए। समझ में नहीं आ रहा था कि ये सब क्या हो रहा था हम सबके साथ?"
"इन सब बातों को सोचने का क्या मतलब है अभय?" करुणा ने कहा__"जो होना था वो तो हो ही गया। इसमें कोई क्या कर सकता था भला?"
"मैं ये सब कभी नहीं भूला करुणा।" अभय ने कहा__"मैं कभी किसी से कुछ कहता नहीं मगर मेरे अंदर हमेशा ये सब गूॅजता रहता है। आज के इस हादसे ने मेरी आॅखें खोल दी है करुणा। इस हादसे ने ये सोचने पर मजबूर कर दिया है मुझे कि ये जो कुछ भी हुआ वो सब क्या सच था या फिर किसी झूॅठ को छुपाने के लिए उस पर इन सब बातों को गढ़ कर पर्दा डाला गया था? ये तो सच है करुणा कि माॅ बाप का खून और उनके अच्छे संस्कारों की वजह से ही कोई औलाद सही रास्तों पर चलते हुए भविश्य में अपने अच्छे काम और नाम की वजह से अपने माॅ बाप और कुल का नाम रोशन करते हैं। शिवा को देख कर अंदाज़ा लगाना कोई मुश्किल नहीं है कि उसकी परवरिश और उसके खून में कितनी गंदगी है। दुनियाॅ में बहुत से ऐसे माॅ बाप हैं जिनके एक ही बेटा होता है मगर वो अपने एक ही बेटों को क्या ऐसे संस्कार देते हैं जिसकी वजह से वो अपने ही घर की माॅ बहनो पर बुरी नीयत रखे?? नहीं करुणा नहीं....कम से कम मेरी जानकारी में तो ऐसे माॅ बाप और ऐसे बेटे नहीं हैं। ज़रूर इनमें ही कहीं न कहीं कोई ख़राबी है। मैने फैंसला कर लिया है कि मैं खुद सारी सच्चाई का पता लगाऊॅगा।"
"सच्चाई???" करुणा चौंकी__"कैसी सच्चाई अभय?"
"हमसे बहुत बड़ी ग़लती हुई है करुणा।" अभय ने एकाएक अधीर होकर कहा__"आज मुझे एहसास हो रहा है कि क्यों मेरी देवी समान गौरी भाभी हम सबको छोंड़ कर इस हवेली से अलग खेतों में बने उस मकान पर रहती थी? सिर्फ इसी हरामज़ादे की वजह से करुणा। उस रात विराज आया था मुम्बई से, और सुबह उसने ही शिवा को मार मार कर अधमरा किया था। तब हमने सोचा था कि उसने बेवजह ही किसी खुंदक में शिवा को मारा था। जबकि अब मुझे सब बातों की समझ आई है कि क्यों विराज ने शिवा को मारा था?"
"क्या मतलब है आपका?" करुणा चौंकी।
"इसी नीच की वजह से करुणा।" अभय ने आवेश में कहा__"ये तो समझ ही गई हो तुम कि शिवा अपने ही घर की माॅ बहनों के बारे में ऐसी नीयत रखता है। उसने उसी नीयत से गौरी भाभी और हमारी फूल सी बच्ची निधि पर भी यही सब किया रहा होगा। इसी वजह से ये सब हुआ है।"
"लेकिन अगर ऐसी बात थी तो।" करुणा ने सोचने वाले भाव से कहा__"गौरी दीदी को इस बारे में बड़ी दीदी और बड़े भइया को बताना चाहिए था। अगर वो ये सब उनसे बताती तो वो अपने बेटे पर लगाम लगाती। लेकिन वो तो हवेली ही छोंड़ कर खेतों वाले मकान में गुड़िया के साथ रहने लगी थी। क्या सिर्फ इतनी सी बात की वजह से??"
"वजह तो हमें यही बताया था भइया भाभी ने कि गौरी भाभी ने प्रतिमा भाभी के कमरे से उनके जेवर चुराए थे।" अभय ने कहा__"और इतना ही नहीं बल्कि बड़े भइया को अपने रूप जाल में फसाने की कोशिश भी की थी। इस लिए बड़े भइया ने उन लोगों को हवेली से निकाल दिया था।"
"हाॅ तो ग़लत क्या था अभय?" करुणा ने अजीब भाव से कहा__"गौरी दीदी ने तो सच में बड़े भइया के साथ ग़लत करने की कोशिश की थी। इस सबका सबूत भी दिखाया था प्रतिमा दीदी ने हम लोगों को। उन फोटोग्राफ्स में साफ साफ दिखता था कि कैसे गौरी दीदी ने बड़े भइया को उनके ही कमरे में अपनी बाहों में जकड़ा हुआ था।"
"क्या ये स्वाभाविक बात लगती है करुणा कि बड़े भइया गौरी भाभी के साथ उस स्थित में हों और दूसरा कोई उस स्थिति में उनकी फोटो खींचे?" अभय ने सोचने वाले भाव से कहा__"जबकि उस स्थिति में होना तो ये चाहिए था कि अगर गौरी भाभी ने बड़े भइया को ग़लत नीयत से जकड़ा हुआ था तो इस सबका बड़े भइया विरोध करते, और गौरी भाभी को इस सबके लिए डाॅटते। दूसरी बात उन लोगों की उस वक्त की फोटो बनाने वाला कौन था?? अगर फोटो खींचने वाली प्रतिमा भाभी थी तो उन्हें फोटो खींचने की बजाय इस सबको रोंकना था। आखिर फोटो खींचने के पीछे उनका क्या उद्देश्य था? क्या सिर्फ ये कि हम सब उन फोटोज़ को देख कर ये यकीन कर सकें कि गौरी भाभी सच में बड़े भइया के साथ ये सब करने की नीयत रखती हैं या ये सब करती भी हैं???"
"आप कहना क्या चाहते हैं अभय??" करुणा ना समझने वाले भाव से बोली।
"आज के इस हादसे से मेरे सोचने का नज़रिया बदल गया है करुणा।" अभय ने गंभीर लहजे में कहा__"हम सब जानते थे कि विजय भइया और गौरी भाभी किसी देवी देवता से कम नहीं थे। उन्होंने भूल से भी किसी के साथ कभी भी कुछ ग़लत नहीं किया था। वो पढ़ाई लिखाई में भले ही ज़ीरो थे, लेकिन जब से उन्होने खेती बाड़ी का काम सम्हाला था तब से हमारे घर के हालात हज़ार गुना बेहतर हो गए थे। यहाॅ तक कि उनकी मेहनत और लगन से किसी भी चीज़ की कभी कोई कमी न रही थी। उनकी ही मेहनत और रुपये पैसे से इतनी बड़ी हवेली बनी और उनके ही पैसों से बड़े भइया ने अपने कारोबार की बुनियाद रखी थी। माॅ बाबूजी विजय भइया और गौरी भाभी को सबसे ज्यादा मानते थे। विजय भइया और गौरी भाभी ने कभी भी मुझे किसी बात के लिए कुछ नहीं कहा, बल्कि विजय भइया ने तो उस समय के हिसाब से मुझे एक बुलेट मोटर साइकिल खरीद कर दी थी। पूरे गाॅव में किसी के पास बुलेट नहीं थी। इतना ही नहीं उन्होंने अपने ही पैसों से बाबूजी के लिए एक शानदार कार खरीदी थी ताकि बाबूजी बड़े शान से उसमें सवारी करें। घर का बड़ा बेटा होने का जो फर्ज़ अजय भइया को निभाना चाहिये था वो फर्ज़ विजय भइया निभा रहे थे वो भी अपनी पूरी निष्ठा के साथ। मुझे याद है करुणा कि अजय भइया और प्रतिमा भाभी कभी भी विजय भइया और गौरी भाभी से ठीक से बात नहीं करते थे। बल्कि उनके हर काम में कोई न कोई नुक्स निकालते ही रहते थे। फिर समय गुज़रा और एक रात विजय भइया को किसी ज़हरीले सर्प ने काट लिया और वो इस दुनिया से चल बसे। उनके इस दुनिया से जाते ही हम सबकी खुशियों पर ग्रहण सा लग गया करुणा। माॅ बाबूजी को उनकी मौत से गहरा सदमा लगा था। हम सब उनके सदमे की वजह से परेशान हो गए थे। बड़े भइया और भाभी ने ही उन्हें सम्हाला था। एक दिन माॅ बाबूजी उसी कार से शहर जा रहे थे तो रास्ते में उनका एक्सीडेंट हो गया और वो दोनो उस एक्सीडेंट की वजह से कोमा में चले गए। समझ में नहीं आ रहा था कि ये सब क्या हो रहा था हम सबके साथ?"
"इन सब बातों को सोचने का क्या मतलब है अभय?" करुणा ने कहा__"जो होना था वो तो हो ही गया। इसमें कोई क्या कर सकता था भला?"
"मैं ये सब कभी नहीं भूला करुणा।" अभय ने कहा__"मैं कभी किसी से कुछ कहता नहीं मगर मेरे अंदर हमेशा ये सब गूॅजता रहता है। आज के इस हादसे ने मेरी आॅखें खोल दी है करुणा। इस हादसे ने ये सोचने पर मजबूर कर दिया है मुझे कि ये जो कुछ भी हुआ वो सब क्या सच था या फिर किसी झूॅठ को छुपाने के लिए उस पर इन सब बातों को गढ़ कर पर्दा डाला गया था? ये तो सच है करुणा कि माॅ बाप का खून और उनके अच्छे संस्कारों की वजह से ही कोई औलाद सही रास्तों पर चलते हुए भविश्य में अपने अच्छे काम और नाम की वजह से अपने माॅ बाप और कुल का नाम रोशन करते हैं। शिवा को देख कर अंदाज़ा लगाना कोई मुश्किल नहीं है कि उसकी परवरिश और उसके खून में कितनी गंदगी है। दुनियाॅ में बहुत से ऐसे माॅ बाप हैं जिनके एक ही बेटा होता है मगर वो अपने एक ही बेटों को क्या ऐसे संस्कार देते हैं जिसकी वजह से वो अपने ही घर की माॅ बहनो पर बुरी नीयत रखे?? नहीं करुणा नहीं....कम से कम मेरी जानकारी में तो ऐसे माॅ बाप और ऐसे बेटे नहीं हैं। ज़रूर इनमें ही कहीं न कहीं कोई ख़राबी है। मैने फैंसला कर लिया है कि मैं खुद सारी सच्चाई का पता लगाऊॅगा।"
"सच्चाई???" करुणा चौंकी__"कैसी सच्चाई अभय?"