उस चूत में जिसमें कभी भी इतना बड़ा कुछ नहीं गया। यह सोचकर नीरा के पूरे बदन में उत्तेजना से सिरहन दौड़ गयी। इतने बड़े लण्ड से चुदवाने के बाद तो गधे के लण्ड से चुदवाना भी मुश्किल नहीं था। आलोक के हाथ जब नीरा को उस विशाल लण्ड से दूर हटाते महसूस हुए तो वोह पूरी शक्ति से अपने होंठ उसपर जकड़ने लगी। नीरा ने आलोक के लण्ड पे नीचे से अपनी मुठ्ठियां कस दीं और अपने होंठों में उस विशाल लौड़े को जकड़ लिया। लेकिन अपने मर्द-सहकर्मी की ताकत का वोह मुकाबला नहीं कर सकी जिसने जल्दी ही अपने लण्ड से नीरा का मुँह हटा दिया और नीरा की बगलों में अपने हाथ डालकर उसे उठाने लगा। अगले क्षण नीरा डेस्क पर बैठी हुई थी पर अभी भी आलोक का विशाल लौड़ा अपने दोनों हाथों में पकड़े हुए थी।
“मैंने तो सिर्फ तुम्हें उधार दिया था। रखने के लिये थोड़ा ही दिया था…” आलोक हँसते हुए बोला।
“क्या?”
“मेरा लौड़ा… अब तो इसे छोड़ दो…”
नीरा ने उसका लौड़ा छोड़ दिया और आलोक ने उसके पैर पकड़कर उसकी टाँगें ऊपर उठायीं और उन्हें खोलकर नीरा की चूत ताकने लगा- “हुम्म्म… अगली बार तुम्हारी ये चूत जरूर चूसूँगा। पर अभी तो यह रस टपका रही है। किसी दूसरे के वीर्य से भरी चूत में अपना लण्ड पेलने में मुझे कोई दिक्कत नहीं पर उसमें मैं अपनी जीभ नहीं पेल सकता…”
आलोक ने नीरा की टाँगें और ऊपर उठाकर अपने कँधों पे डाल दीं। नीरा डेस्क पे पीछे की तरफ गिरी तो उसने अपनी कोहनी और हाथ डेस्क पे टिकाकर खुद को सहारा दिया। नीरा ने अपनी फैली हुई टाँगों के बीच में से अपनी चूत में घुसने को तैयार उस विशाल मूसल पर नज़र डाली। जब आलोक ने अपना लौड़ा नीरा की चूत के द्वार पे रखा तो नीरा ने अपने साँस रोक ली। वोह उत्तेजित होने के साथ-साथ घबड़ायी हुई भी थी। नीरा को अपनी चूत पे दबाव महसूस हुआ तो वो लालसा से उस दबाव के श्रोत की तरफ ताकने लगी। आलोक अपना लण्ड पकड़कर नीरा के रिसती चूत में घुसेड़ने लगा।
नीरा उसके राक्षसी लौड़े को अपनी चूत में चीरते हुए धँसते देखने लगी। इतने मोटे और विशाल लण्ड को अंदर समायोजित करने के लिए अपनी चूत के सुर्ख होंठों को फैलते हुए देखकर नीरा बहुत उत्तेजित होने लगी। लेकिन जब सुपाड़े से थोड़ा ज्यादा लण्ड उसके चूत में घुसा तो सिर्फ उस दृश्य से ही नीरा की आह निकल गयी। बल्कि लण्ड बहुत ही बड़ा महसूस हो रहा था और चूत की दीवारों पे बहुत दबाव डाल रहा था। और फिर थोड़ा और लण्ड नीरा की चूत में समा गया… फिर और ज्यादा… फिर थोड़ा और ज्यादा… नीरा साँस नहीं ले पा रही थी और आखिर में उसने अपनी आँखें बंद करके अपना निचला होंठ काट लिया।
“कैसा लग रहा है अब?” आलोक ने नीरा के कान में फुसफुसा कर कहा।
नीरा ने अपनी आँखें खोलीं तो आलोक का चेहरा अपने चेहरे के पास पाया। और कहा- “ये पूरा नहीं समायेगा। मैं नहीं झेल पाऊँगी। बहुत ही बड़ा है तुम्हारा लण्ड…”
“मेरी प्यारी चुदक्कड़ रानी। तूने पूरा ले लिया है। मेरा पूरा लण्ड तेरी चूत में है अब…”
“ओह माय गाड… मुझे विश्वास नहीं हो रहा। इतना विशाल लण्ड मेरी चूत में… ओह माय गाड… ओह माय गाड… अब क्या?”
“लेकिन तुम्हारा लण्ड इतना बड़ा है। इससे तुम मुझे नहीं चोद सकते…”
“ना सिर्फ मैं इससे चोद सकता हूँ। बल्कि मैं तुम्हारी चूत इससे चोदूँगा…”
आलोक ने नीरा के जवाब का इंतज़ार नहीं किया और धीरे से अपना लौड़ा थोड़ा सा बाहर खींच के उतनी ही धीरे से फिर अंदर ठाँस दिया। नीरा की आँखें आलोक के चेहरे पे टीकी थीं पर उसे देख नहीं रही थी क्योंकी नीरा की सब इंद्रियां अपनी टाँगों के बीच में एकाग्रित थीं और उस विशाल मूसल लण्ड पर केंद्रित थीं जो उसकी चूत में घुसकर उन जगहों को स्पर्श कर रहा था जो अभी तक अनछूई थीं।
आलोक ने धीरे-धीरे चोदना चालू किया। हर बार जब वोह अपना लण्ड बाहर खींचता तो नीरा- “आआआहहह…” करती और और हर बार जब वोह अपना लण्ड वापस चूत में अंदर ठाँसता तो नीरा “ऊऊऊऊहहहह…” करके कराहती। जल्दी ही नीरा की कराहें “आआआहहह… ऊऊऊहहह… आआआहहहह… ऊऊऊहहह…” से “आआहह… ऊहह… आआहह… ऊहह…” में बदल गयीं और फिर जैसे-जैसे आलोक और जोर से चोदने लगा, नीरा सिर्फ “आँ… आँ… घों… घों…” करके घुरघुरा पा रही थी।
आलोक ने धीरे-धीरे चोदना चालू किया। हर बार जब वोह अपना लण्ड बाहर खींचता तो नीरा- “आआआहहह…” करती और और हर बार जब वोह अपना लण्ड वापस चूत में अंदर ठाँसता तो नीरा “ऊऊऊऊहहहह…” करके कराहती। जल्दी ही नीरा की कराहें “आआआहहह… ऊऊऊहहह… आआआहहहह… ऊऊऊहहह…” से “आआहह… ऊहह… आआहह… ऊहह…” में बदल गयीं और फिर जैसे-जैसे आलोक और जोर से चोदने लगा, नीरा सिर्फ “आँ… आँ… घों… घों…” करके घुरघुरा पा रही थी।
आलोक अब अपना ग्यारह इंच लंबा लण्ड पागलों की तरह जोर-जोर से धक्के मारता हुआ नीरा की चूत में पेल रहा था। नीरा अपनी टाँगों के बीच की सनसनी में खोयी हुई थी। उसने ऐसा कभी भी महसूस नहीं किया था जैसा कि वो अभी महसूस कर रही थी। नीरा को इतने बड़े लौड़े से चुदते हुए ख्याल आ रहा था कि किसी गधे से चुदने में कैसा लगेगा। नीरा की चूत को इतना फैलाकर चोदने के साथ-साथ वो लंबा-मोटा लौड़ा लगातार नीरा की क्लिट को भी घिस रहा था।
लम्बे लण्ड के जोरदार धक्कों को झेलती हुई नीरा के खुले हुए होठों से मस्ती भरी कराहटें और गालियां निकल रही थीं- “ऐंह… ऐंह… बहनचोद आलोक… चोद मुझे… कितना मोटा है तेरा लौड़ा… चोद हरामी…”
इसी तरह तीखे स्वर से चीखती-कराहती नीरा कई बार झड़ी पर आलोक उसे बिना रुके चोदता जा रहा था और नीरा फिर से कई बार झड़ी। इतनी बार झड़ने के कारण नीरा अब बदहवासी की हालत में थी। ठीक जिस समय नीरा को लगने लगा कि अगर वो एक बार भी फिर झड़ी तो उसकी जान ही निकल जायेगी, तभी आलोक के तेज़ लंबे धक्के छोटे-छोटे झटकों में परिवर्तित हो गये और आलोक ने नीरा की टाँगें कसकर अपनी बाँहों में पकड़ लीं। नीरा ने आलोक का वीर्य अपनी चूत में इतनी वेग से छूट कर बहते हुए महसूस किया कि ज़िंदगी में पहले कभी इतनी ज्यादा ताकत से वीर्य अपनी चूत में निकलता महसूस नहीं किया था। नीरा को ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने पानी का पाइप उसकी चूत में घुसेड़कर पूरा नल खोल दिया हो। जब आलोक का चिपचिपा लण्ड नीरा की चूत से बाहर निकला तो नीरा ने मुँह खोलकर साँस ली और अपने चूत को जकड़कर आलोक के लण्ड को चूत के अंदर ही रोकने की चेष्टा की।
जिस लण्ड को अपनी चूत में लेने से नीरा पहले डर रही थी उसी लण्ड से चुदवाने में उसे इतना आनंद और तृप्ति मिली थी कि वोह इतनी आसानी से छोड़ना नहीं चाहती थी। लेकिन अंत में वोह पूरा बाहर निकल आया और नीरा की चूत में से ढेर सारा वीर्य बाढ़ की तरह बाहर बहने लगा।
नीरा ने जब अपनी आँखें खोलीं तो आलोक को अपनी तरफ देखते हुए मुश्कुराते पाया। नीरा ने सीधे बैठकर अपनी बाँहें आलोक की गर्दन में डालकर उसका चेहरा अपनी तरफ खींचा और अपने होंठ आलोक के होंठों से दबाकर अपनी जीभ आलोक के मुँह में घुसेड़ दी। दोनों तब तक कामुक्ता से किस करते रहे जब तक आलोक साँस लेने के लिए पीछे नहीं हटा।
“तो मैं ये समझूँ कि तुम्हें चुदाई पसंद आयी? आलोक ने पूछा…”
नीरा ने कुछ जवाब नहीं दिया क्योंकी वोह अभी भी आनंद से कराह रही थी।
“तुम्हारे पास कोई टीशू पेपर या रूमाल वगैरह है? मैं पैंट पहनने से पहले अपना लण्ड साफ करना चाहता हूँ…”
नीरा जब अपने डेस्क से फिसलते हुए नीचे उतरी तो उसके चेहरे पर स्वप्नमय भाव थे। लेकिन वोह डेस्क से उतरकर खड़ी नहीं हुई, बल्कि, अपने घुटनों के बल बैठकर अपने सहकर्मी के चिपचिपे लौड़े को लालसा से देखने लगी। नीरा को अपनी चूत में से आलोक का वीर्य बाहर टपकता महसूस हो रहा था। नीरा ने सोचा कि इतने बड़े लण्ड से चुदने के बाद चूत का मुँह अभी भी खुला ही होगा। फिर उसने आलोक के नर्म पड़ चुके लण्ड पर वीर्य चिपका हुआ देखा।
बिना कुछ कहे नीरा अपने अँगुलियां चिपचिपे लण्ड पे फिराने लगी और फिर उसे अपनी अँगुलियों और अँगूठे के बीच में दबा लिया और उसे अपने होंठों के पास लाकर अपना मुँह खोल दिया। आलोक को विस्मय में डालते हुए नीरा ने अपने होंठ उस लिसलिसे लण्ड पर कस दिए और चूसने लगी। आलोक को नीरा की जीभ अपने सुपाड़े पर फिरती हुई महसूस हुई और फिर नीरा ने बिना साँस घुटे जितनी दूर तक हो सकता था अपने होंठ ज्यादा से ज्यादा आगे फिसला दिए। जब नीरा को पूरा विश्वास हो गया कि उसने लण्ड पे चिपटा सारा वीर्य चाट लिया है, उसके बाद ही नीरा ने लण्ड अपने मुँह से बाहर निकाला।
फिर अँगुलियों में आलोक का लण्ड पकड़कर उस हिस्से को चाटने लगी जो वोह अपने मुँह में नहीं ले पायी थी। बाद में उसने आलोक की गोटियों पर भी अपनी जीभ फिरायी। और नीरा बोली- “हुम्म… अब तो ठीक है कि अभी भी टीशू पेपर चाहिए?”
आलोक ने अविश्वास से नीरा को ताकते हुए सिर्फ अपना सिर हिलाया। उसने अपनी पैंट पहनी और क्लास-रूम के फर्श पर सिर्फ अपने सैंडल पहने बैठी नंगी टीचर की तरफ देखा। आलोक ने नीरा को बाय कहा तो नीरा आँख मारकर मुश्कुरा दी। आलोक के जाने के बाद भी नीरा वैसे ही फर्श पर अपनी ज़िंदगी की सबसे धुँआधार चुदाई के बाद की असीम संतुष्टि की दीप्ति में बैठी रही। नीरा ने खुद से वादा किया कि यह आखिरी बार नहीं था जब उसने इतने विशाल लौड़े से अपनी चूत चुदवायी थी। नीरा ने अपनी अँगुलियों से अपनी चूत के बाहर और जाँघों पे लगा वीर्य पोंछा और अपनी अँगुलियां चाटकर वीर्य का स्वाद लिया। उसने देखा कि काफी सारा वीर्य उसकी चूत से टपक कर फर्श पे भी पड़ा था। नीरा को एक गंदी शरारत सूझी और वो झुक कर फर्श पे से वीर्य चाटने लगी।
ज़िंदगी नीरा के लिए अब काफी हसीन हो गयी थी। एक औरत के लिए जो पहले चुदाई के लिए तरसती थी, वोह अब हफ्ते में कई बार चुदाई का मज़ा ले रही थी। रोहित जिसके साथ नीरा ने पहली बार व्याभिचार किया था, अभी भी नीरा को बहुत उत्तेजित करता था। नीरा इसका कारण नहीं जानती थी। शायद क्योंकी वोह पहला गैर-मर्द था जिसने उसे चोदा था या शायद इसलिए कि वोह नीरा का स्टूडेंट था। या फिर इसलिए की वोह अपने उम्र के हिसाब से ज्यादा जोशीला और उत्साही था।
नितेश के बारे में नीरा का ख्याल अलग था। नितेश भी उसका स्टूडेंट था पर नीरा उसके जीवन में पहली औरत थी और इस बात का नीरा पर बहुत प्यारा असर पड़ा था। साथ ही दूसरी बात यह थी कि नितेश काफी शर्मीला था और इस कारण चुदाई के समय भी उसका भोलापन बरकरार रहता था। विक्रम तो पूरा जवान आदमी था और चुदाई में काफी अनुभवी था और नीरा को बहुत अच्छे से चोदता था। लेकिन जब भी उसे आलोक से चुदवाना होता तो उसके मुँह से ही नहीं बल्कि चूत से भी लार टपकने लगती थी। आलोक का विशाल लण्ड नीरा की चुदासी चूत ऐसे चोदता था जैसे और कोई नहीं चोद सकता था।
इस सबके बाद भी नीरा संतुष्ट नहीं थी और चुदाई के नए-नए अनुभव लेने के लिए लालियत रहने लगी। एक दिन होटल में चुदाई के दौर के बाद नीरा ने रोहित से पूछा कि क्या वोह और नितेश आपस में दोस्त हैं।
“दोस्त जैसे ही हैं…”
“क्या मतलब?” नीरा ने पूछा।
“मैं नितेश को जानता हूँ और कभी-कभार बातें भी होती हैं पर ऐसी कोई गाढ़ी दोस्ती नहीं है…”
“कैसा लड़का है? तुझे अच्छा लगता है?”
“हाँ… मेरे ख्याल से अच्छा लड़का है…”
“मुझे भी बहुत पसंद है…”
“क्या मतलब है आपका?” रोहित ने पूछा।
रोहित के प्रश्न का जवाब देने से पहले नीरा ने क्षणभर के लिए सोचा कि उसे अपनी योजना पे आगे बढ़ना चाहिए या नहीं। उसके किसी भी प्रेमी को दूसरे के बारे में नहीं पता था, सिवाय आलोक के। जिसने नीरा को नितेश के साथ देखा था। नीरा ने धीरे से लंबी साँस ली और खुद को शाँत किया।
“रोहित, जो कुछ मैं तुझे बताऊँगी, तू किसी से नहीं कहेगा। प्रामिस?”
“हाँ… ठीक है…”
“नहीं… मैं सीरियस हूँ…”
“अरे मैडम… मैंने कभी भी किसी को हमारे बारे में नहीं बताया है। किसी को भी नहीं। तो आप मुझ भरोसा कर सकती हैं…”
नीरा ने आगे झुक कर अपने स्टूडेंट के माथे पे प्यार से चूमा- “थैंक्स… बात यह है कि नितेश और मैं अक्सर चुदाई करते हैं…”
“क्या कह रही हो? सच में… वाह…”
“तुझे इसमें कुछ दिक्कत तो नहीं है?” नीरा ने चिंतित होते हुए पूछा कि कहीं रोहित के अहम को चोट ना लगे।
“नहीं… बिल्कुल नहीं… मेरे ख्याल से तो यह बहुत अच्छी बात है। और किस-किससे चुदवा रही हैं आप?”
“रोहित… कभी किसी औरत से ऐसा सवाल नहीं करना चाहिए…”
“ओह सारी… लेकिन आपने ही बात शुरू की तो मैंने सोचा… आय एम सारी…”
“तेरी बात ठीक है कि मैंने ही यह बात शुरू की थी लेकिन मेरा मतलब अपनी सेक्स लाइफ के बारे में बात करना नहीं था…”
“तो फिर क्यों?”
नीरा ने फिर लंबी साँस लेकर खुद को संयमित किया- “मैं सोच रही थी अगर… उम्म्म… शायद तुम दोनों… मेरा विचार था कि कदाचित तुम दोनों और मैं एक साथ…”
“वाह क्या ख्याल है… मज़ा आ जायेगा…”
लेकिन नितेश के साथ नीरा का इस बारे में वातार्लाप बिल्कुल ही अलग था। नितेश को यह जानकर काफी धक्का लगा कि वोह अपनी टीचर का अकेला प्रेमी नहीं है और किसी दूसरे के सामने अपनी टीचर को चोदने के ख्याल के बारे में बहुत आशंकित था। लेकिन नीरा जानती थी कि जो कुछ वोह कहेगी, नितेश इंकार नहीं करेगा और फिर नीरा ने सब प्रबंध कर दिया।
नीरा ने पहले ही फाईव स्टार होटल में स्पेशल सूईट बुक कर दिया। नीरा को यह सोचकर दुष्टता भरी चुलबुलाहट अनुभव हुई कि चुदाई के लिए वोह पैसा खर्च कर रही थी। नीरा उस दिन सबसे पहले होटल पहुँची और फिर रोहित भी मुश्कुराता हुआ जल्दी ही वहाँ पहुँच गया। दोनों होटल के लाऊँज के बार में ड्रिंक पीते हुए नितेश का इंतज़ार करने लगे। दस मिनट बीते… फिर बीस मिनट… लेकिन नितेश का कुछ पता नहीं था।
“लगता है नितेश की फट गयी…” रोहित ने अपनी बीयर का घूँट पीते हुए कहा।
नीरा को काफी निराशा हुई पर फिर भी दोनों ने थोड़ा और इंतज़ार करने का फैसला किया। बेचैनी और उत्कंठा में नीरा तीन पैग पी चुकी थी, जब नितेश भागते हुए होटल के लाऊँज में दाखिल होता नज़र आया। रोहित ने हाथ हिलाकर उसे इशारा किया तो वोह हाँफता हुआ उनके पास आया।
“सारी मेरी बाईक पंक्चर हो गयी थी। इसलिए देर हो गयी…”
“क्या लेगा? बीयर?” रोहित ने पूछा।
“नहीं… नहीं… यहाँ नहीं… सूईट में पीने-पिलाने का सब इंतज़ाम है…” नीरा अपना चौथा पैग खतम करती हुई खड़ी हो गयी और तीनों सूईट की तरफ चल पड़े। नीरा के कदम नशे और हाई हील के कारण थोड़े बहक रहे थे पर वोह बिना सहारे के चल सकती थी। सूईट में आकर उन्होंने दरवाजा बंद किया और बाहर “डू नाट डिस्टर्ब” का टैग लगा दिया। सूईट बहुत ही आलिशान था।
दोनों लड़के खड़े हुए अपनी टीचर के निर्देश की प्रतिक्षा करने लगे क्योंकी यह सब नीरा का ही प्लान था। नीरा भी निश्चित नहीं थी कि कैसे शुरू करना है। नीरा ने अपनी बाँहें बढ़ाकर अपनी हथेलियां दोनों लड़कों के सीने पे रख दीं और धीरे से उन्हें ढकेलने लगी। दोनों लड़के पीछे की तरफ चलने लगे और जब दोनों की टाँगें पीछे पलंग से टकरायीं तो वोह बैठ गये और नीरा पलंग से दूर हट गयी।
नीरा ने एक बीयर की बोतल खोलकर दो ग्लासों में बीयर भरी और हैरान से बैठे अपने क्षात्रों को एक-एक ग्लास पकड़ाया और फिर पीछे हटकर अपने ब्लाऊज़ के हुक खोलने लगी। दोनों लड़के बीयर पीते हुए चुपचाप बैठे अपनी टीचर को नंगी होते देख रहे थे। जल्दी ही नीरा का ब्लाउज़ ज़मीन पर था और नीरा की नंगी चूंचियां अब दोनों लड़कों के सामने थीं। नीरा को ब्रा पहनना पसंद नहीं था और सिर्फ कालेज में या फिर जहाँ जरूरी हो वहीं वो ब्रा पहनती थी। फिर नीरा ने अपनी साड़ी और पेटीकोट भी उतार दिया। अब वोह टीचर अपने दो क्षात्रों के सामने सिर्फ पैंटी और मरून रंग के हाई हील सैंडल पहने खड़ी थी और उसकी पैंटी का इलास्टिक थोड़ा नीचे खिसका हुआ था।
नीरा दोनों लड़कों की तरफ देखकर कामुक्ता से मुश्कुरायी और अपनी पैंटी में हाथ डालकर ऊपर-नीचे फिराने लगी। पैंटी इतनी झीनी थी कि लड़कों को अपनी टीचर की अँगुलियां उसकी गीली चूत पे फिसलती साफ नज़र आ रही थीं। नीरा को दोनों लड़कों की जींस में ऊभार नज़र आ रहा था और अभी से ही दोनों अपने सख्त लौड़ों को व्यविस्थत कर रहे थे।
नीरा फिर पलंग के पास आयी जहाँ उसके दोनों क्षात्र बैठे बीयर पी रहे थे। वोह रोहित के ठीक सामने खड़ी होकर अपनी पैंटी में हाथ डाले अपनी क्लिट रगड़ते हुए अपने कुल्हे आगे-पीछे मटकाने लगी। फिर नीरा ने साईड में होकर नितेश के सामने भी ऐसा ही किया। रोहित ने अपना हाथ बढ़ाया तो नीरा ने उसके हाथ पे चपत मारकर उसे दूर हटा दिया। नीरा फिर दोनों लड़कों के बीच में खड़ी होकर घूम गयी और फिर अपनी टाँगें सीधी रखते हुए कमर से झुक गयी। नीरा ने अपनी टाँगों के बीच में से अपने पीछे बैठे लड़कों को अपनी छोटी-सी झीनी पैंटी में ढकी गाण्ड को ताकते हुए देखा। नीरा की अँगुली अब उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रही थी और यह भी लड़कों को दिख रहा था।
“चलो आओ… खींच दो इसे नीचे…” नीरा झुकी हुई अपनी टाँगों के बीच में से पीछे देखती हुई बोली।
रोहित ने पहले हाथ बढ़ाकर अपनी टीचर की पैंटी का इलास्टिक पकड़ा और उस महीन पैंटी को उसके चूतड़ों के ऊपर खींच दिया। इलास्टिक अब नीरा की चूत में घुसी अँगुली तक नीचे आ गया था। नितेश ने भी पैंटी पकड़कर नीचे खींचने में रोहित की मदद की। जब पैंटी नीरा के पैरों तक आ गयी तो नीरा ने अपनी चूत में से अँगुली निकाली और और दोनों हाथों से अपने चूत फैलायी। दोनों लड़के फिर से पलंग पर पीछे बैठकर अपनी बीयर खतम करते हुए हक्के-बक्के से अपनी टीचर का कामुक तमाशा देखने लगे। नीरा ने फिर अपनी टाँगों के बीच में से अपने हाथ हटाये और पीछे लेजाकर अपने चूतड़ पकड़कर उन्हें खींचते हुए अपनी गाण्ड खोल दी। वोह कुछ पल ऐसे ही रही और फिर घुटने सीधे रखते हुए अपनी कमर से झुक गयी और अपनी गाण्ड को फैलाकर अपने क्षात्रों को अपनी गाण्ड का छोटा सा छेद दिखलाने लगी।
रोहित ने पहले हाथ बढ़ाकर अपनी टीचर की पैंटी का इलास्टिक पकड़ा और उस महीन पैंटी को उसके चूतड़ों के ऊपर खींच दिया। इलास्टिक अब नीरा की चूत में घुसी अँगुली तक नीचे आ गया था। नितेश ने भी पैंटी पकड़कर नीचे खींचने में रोहित की मदद की। जब पैंटी नीरा के पैरों तक आ गयी तो नीरा ने अपनी चूत में से अँगुली निकाली और और दोनों हाथों से अपने चूत फैलायी। दोनों लड़के फिर से पलंग पर पीछे बैठकर अपनी बीयर खतम करते हुए हक्के-बक्के से अपनी टीचर का कामुक तमाशा देखने लगे। नीरा ने फिर अपनी टाँगों के बीच में से अपने हाथ हटाये और पीछे लेजाकर अपने चूतड़ पकड़कर उन्हें खींचते हुए अपनी गाण्ड खोल दी। वोह कुछ पल ऐसे ही रही और फिर घुटने सीधे रखते हुए अपनी कमर से झुक गयी और अपनी गाण्ड को फैलाकर अपने क्षात्रों को अपनी गाण्ड का छोटा सा छेद दिखलाने लगी।
नीरा सीधी होकर पीछे घूमी और रोहित के कँधे पर हाथ का सहारा लेते हुए अपने पैरों से अपनी पैंटी निकाली। नीरा अब सिर्फ हाई हील सैंडल पहने अपने क्षात्रों के सामने खड़ी थी जिन्होंने अभी भी पूरे कपड़े पहने हुए थे। नीरा अपने सैंडल पहने हुए ही बिस्तर पे कूद गयी। नितेश और रोहित ने गर्दन घुमाकर अपने पीछे अपनी टीचर को गद्दे पर उछलते देखा।
“अब तुम दोनों की बारी है…” नीरा साईड टेबल से व्हिस्की की बोतल उठाकर उसका ढक्कन खोलते हुए बोली और बोतल से सीधे बोतल पे मुँह लगाकर व्हिस्की के घूँट पीने लगी। नीरा को नशे में मदहोश होकर चुदवाना ज्यादा अच्छा लगता था।
दोनों लड़कों ने खड़े होकर अपने जूते उतारे। नितेश ने अपनी कमीज़ अपने सिर के ऊपर से खींची और रोहित अपनी पैंट उतारने लगा। नीरा एक हाथ से बोतल पकड़े व्हिस्की पीती हुई अपने सामने अपने क्षात्रों को नंगा होते देख रही थी और दूसरे हाथ से अपनी क्लिट रगड़ रही थी। कुछ ही पलों में दोनों लड़के नंगे थे लेकिन दोनों अनिश्चित थे कि आगे क्या करना है। इसलिए दोनों पलंग के साईड पे खड़े हो गये और उनके कड़क लौड़े खड़े हुए उनकी टीचर नीरा की तरफ इशारा कर रहे थे।
नीरा ने एक बड़ा सा घूँट पीकर व्हिस्की की बोतल साईड टेबल पर रख दी और पीठ के बल लेटते हुए गद्दे पर अपनी दोनों तरफ हाथों से थपकी कर इशारा किया। नीरा अब पर्याप्त नशे में थी। दोनों लड़के जल्दी से नीरा के दोनों तरफ आ गये और नीरा उन दोनों के लौड़े पकड़कर सहलाने लगी। रोहित जो कि स्वभाव से ज्यादा उत्साही था, उसने झुक कर अपनी टीचर के एक मम्मे को अपने मुँह में ले लिया। जब नीरा ने आनंद भरी सिसकरी ली तो नितेश ने भी झुक कर नीरा के दूसरे मम्मे को अपने मुँह में ले लिया।
नीरा तो जैसे जन्नत में थी। नितेश अपने लण्ड से उसका हाथ हटाता महसूस हुआ तो नीरा को लगा कि शायद वोह झड़ने वाला है और नीरा ने अपना हाथ हटा लिया क्योंकी वोह नितेश को शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी। लेकिन नीरा को बहुत आश्चर्य हुआ जब नितेश उसकी टाँगों के बीच में झुक कर उसकी चूत चाटने लगा। रोहित ने जब हरकत महसूस की तो उसने नीरा के मम्मे से मुँह हटाया।
उसने पहले तो नितेश को अपनी टीचर की चूत चाटते देखा फिर रोहित ने नीरा के चेहरे की तरफ देखा। नीरा मुश्कुरायी तो रोहित ने झुक कर अपने होंठ नीरा के होंठों पे रख दिये और दोनों किस करने लगे। इसके बाद रोहित अपनी टीचर के दोनों तरफ पैर रखकर उसके सीने पर बैठ गया और अपना कठोर लण्ड उसके होंठों पर दबा दिया। नीरा ने तत्परता से अपना मुँह खोलकर अपने स्टूडेंट का लण्ड अंदर ले लिया। अब नीरा एक स्टूडेंट का लण्ड चूस रही थी और दूसरा स्टूडेंट उसकी चूत चूस रहा था।
“ओह गाड…” रोहित चीखा जब उसका उबलता हुआ वीर्य उसकी टीचर के मुँह में बहने लगा। नीरा इसके लिए तैयार नहीं थी। अपनी पीठ के बल लेटे होने के कारण नीरा को वीर्य का पहला फुहारा सीधा अपनी हलक में घुसता हुआ महसूस हुआ। अपने मुँह में घुसे लण्ड के इर्द-गिर्द नीरा गोंगियाई और ठीक से साँस लेने के लिए उसने अपना सिर थोड़ा-सा ऊपर उठाया। ठीक उसी समय वीर्य की दूसरी धार से उसका मुँह भर गया। नीरा ने फुर्ती से सारा वीर्य गटक लिया।
जब झड़ना बंद हो गया तो रोहित अपनी टीचर के ऊपर से उठा। नीरा की आँखें नितेश से मिलीं तो नीरा को लगा जैसे उसके चेहरे पर यह सोचकर मुश्कुराहट थी कि झड़ने वाला वोह पहला नहीं था। नितेश ने नीरा की चूत चाटना जारी रखा और जल्दी ही नीरा कामोन्माद की चरम सीमा पर पहुँचकर जोर-जोर से कराह रही थी। इससे पहले कि नीरा का कामोन्माद ठंडा पड़ता, नितेश ने अपने घुटनों के बल बैठकर अपना लण्ड अपनी टीचर की चूत में पेल दिया। अंदर-बाहर कई धक्के मारने के बाद नितेश भी झड़ गया और तीनों हाँफते हुए होटल के सूईट के बिस्तर पे पड़े थे।
एक संक्षिप्त से आराम के बाद नीरा ने बैठकर फिर व्हिस्की की बोतल उठाकर कुछ घूँट पिये। फिर रोहित उठकर नीरा के ऊपर चढ़ गया और धीरे-धीरे अपने लण्ड से उसकी चूत चोदने लगा। नीरा ने जब नितेश को अपने चेहरे के पास बुलाया तो नितेश बिस्तर से नीचे उतरने लगा। नीरा ने जब अपनी नशे में बोझल आँखों से नितेश को नीचे उतरते देखा तो नितेश ने बताया कि वोह अभी बाथरूम जाकर आ रहा है। बीयर पीने से उसे पेशाब लगा था। नीरा को फिर एक शरारत सूझी।
“मूतने के लिए बाथरूम में जाने की क्या जरूरत है। इधर आ मेरे पास और अपनी टीचर को अपने लण्ड के सुनहरे अमृत का पान करवा दे…”
नितेश को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ और रोहित भी चोदते-चोदते एक पल के लिए रुक गया लेकिन फिर अपनी कामुक छिनाल टीचर का मतलब समझकर मुश्कुरा दिया और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। नितेश भौचक्का सा बिस्तर पे वापस चढ़कर नीरा के सिर के पास आ गया।
मेरे मुँह में अपना लण्ड डालकर धीरे से अपने अमृत की धार छोड़। नितेश ने नीरा के लिपिस्टक लगे होंठों के बीच अपना लण्ड घुसेड़कर धीरे-धीरे मूतना शुरू कर दिया। नीरा को नितेश के गरम पेशाब का खारा-सा स्वाद बहुत अच्छा लग रहा था और पेशाब गटकते हुए वोह अपनी इस हरकत की विकृतता के एहसास से बहुत उत्तेजित हो गयी और रोहित के लण्ड के इर्द-गिर्द अपनी चूत सिकोड़ कर झड़ने लगी। जब नितेश का मूतना बंद हो गया तो उसके बाद भी नीरा ने उसका लण्ड चूसना जारी रखा। नितेश का लण्ड फिर फूलकर नीरा के मुँह में कड़क हो गया।
रोहित अभी भी नीरा की चूत में अपना लण्ड पूरे जोश से ठाँस रहा था।
थोड़ी देर में नीरा ने नितेश को पीछे हटाया तो नितेश हैरानी से पीछे हटा और उसका लण्ड नीरा के मुँह से बाहर आ गया। लेकिन नितेश की निराशा जल्दी ही खतम हो गयी जब वोह नितेश का लण्ड अपनी चूँचियों के बीच में दबाकर रगड़ने लगी। नितेश भी आगे पीछे होकर अपनी टीचर की चूँचियां चोदने लगा। इस नये अनुभव से नितेश बहुत गरम हो गया और जल्दी ही अपनी टीचर के चेहरे और गर्दन पे अपने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी।
जब नितेश उसके ऊपर से हटा तो रोहित को अपनी टीचर का वीर्य से सना चेहरा दिखायी दिया और इस दृश्य से वोह भी झड़ने के निकट आ गया। रोहित ने उत्तेजना में अपना लण्ड नीरा की चूत से बाहर निकालकर अपनी मुठ्ठी में एक-दो बार आगे पीछे करके अपने वीर्य की जोरदार धार अपनी टीचर की चूंचियों तक छोड़ दी। उसके वीर्य की बाकी धारें नीरा के पेट पर गिरीं और आखिर में काफी सारा वीर्य नीरा की चूत के पास बह कर इकट्ठा हो गया।
“तुम लड़के बहुत मादरचोद हो। सालों…” वीर्य से सने अपने बदन को देखते हुए नीरा बोली। उसे अभी भी अपने चेहरे से वीर्य टपकता महसूस हो रहा था- “मुझे लगता है कि अब मुझे नहाना पड़ेगा…”
नीरा जब बिस्तर से उठकर खड़ी हुई तो नशे में उसका सिर घूम रहा था। वोह अपने हाई हील सैंडलों में नशे से डगमगाती बाथरूम में गयी और खुद को शीशे में देखा। वोह किसी बुक्काके ब्लू-फिल्म की नायिका जैसी दिख रही थी। नीरा चंचलता से हँसी और सैंडल पहने ही शावर में घुस गयी। उसे शावर का गुनगुना पानी काफी अच्छा लगा।
जब नीरा बाथरूम से बाहर निकली तो उसे अपने पेट में गुरार्हट महसूस हुई। उसने घड़ी देखी तो एहसास हुआ कि उनकी चुदाई काफी समय चली थी। उसने लड़कों से पूछा कि उन्हें भूख लगी है क्या? तो दोनों ने ‘हाँ’ कहा। वोह कमरे में खाना आडर्र नहीं करना चाहते थे इसलिए होटल के रेस्टोरेंट में जाने का निश्चय किया। तीनों ने अपने-अपने कपड़े पहने और रेस्टोरेंट में जाने से पहले नीरा ने एक बार रोहित का लण्ड मुँह में लेकर उसका भी पेशाब चटखारे लेकर पिया।
नीरा के कदम नशे में काफी बहक रहे थे। नितेश ने उसकी चाल देखकर एक बार कहा भी कि खाना सूईट में ही मँगवा लेते हैं, पर नीरा बोली कि वोह खुद को संभाल सकती है। रोहित ने नीरा को सहारा दिया और तीनों ने रेस्टोरेंट में आकर खाने का आडर्र दिया। नीरा ने यहाँ भी अपने लिये काकटेल मँगवायी। रोहित और नितेश दोनों ही नीरा को कालेज के बाहर होटल के कमरों में कई बार अलग-अलग चोद चुके थे और उन्हें एहसास था कि नीरा को अपने पीने पर कोई संयम नहीं था। इसलिए उन्होंने उसे मना नहीं किया जबकि वोह जानते थे कि सूईट में वापस जाते वक्त उन दोनों को नीरा को पकड़कर सहारा देना पड़ेगा।
जब वोह लोग खाना आने का इंतज़ार कर रहे थे रोहित को अपनी टाँगों के बीच नीरा के सैंडल की हील खरोंचती महसूस हुई। उसने नज़र उठाकर देखा तो नीरा आँखें मटकाकर मुश्कुराने लगी। नितेश को भी उस समय अपनी गोद में नीरा का पैर महसूस हुआ। टेबल क्लाथ के कारण किसी और को कुछ दिख नहीं सकता था। नीरा की नशे और वासना से भरी आँखों में शरारत नज़र आ रही थी। नीरा उन लड़कों की टाँगों के बीच में अपने पैर आगे पीछे करके उनके लौड़ों को अपने सैंडलों से रगड़ने लगी।
अपना ड्रिंक पीते हुए वोह धीरे से फुसफुसा कर बोली- “घबड़ाओ नहीं। अपने हथियार बाहर निकालकर मेरे पैरों पे रगड़ो…”
दोनों लड़कों ने आसपास देखा फिर धीरे से अपनी ज़िप खोलकर अपने लौड़े बाहर निकाले और नीरा के सैंडलों और पैरों पे रगड़ने लगे। नीरा चुपचाप अपना ड्रिंक पीती हुई अपने परों पे उनके लौड़ों के स्पर्श का रस ले रही थी। रोहित ने अपनी टीचर का पैर पकड़कर अपना लौड़ा पैर के तले और सैंडल के बीच में घुसा दिया जिससे नीरा अचानक चिंहुक उठी पर आसपास किसी ने ध्यान नहीं दिया। नितेश भी नीरा का पैर पकड़कर जोर-जोर से उसका सैंडल अपने लण्ड पे दबाते हुए रगड़ रहा था। दोनों क्षात्र जल्दी ही झड़ गये और अपने-अपने वीर्य की धार अपनी टीचर के पैरों और सैंडलों पर छोड़ दी। नीरा को अपने पैरों पर गरम वीर्य बहुत सुहाना लगा और उसकी खुद की चूत से भी रस बह रहा था। जब तक वेटर खान लाया, दोनों लड़कों ने अपने लण्ड वापस पैंट में डालकर ज़िप बंद कर लीं और नीरा ने वीर्य में तरबतर अपने सैंडल युक्त पैर नीचे कर लिए।
उन्होंने जल्दी से खाना खाया। नीरा इस दौरान दो ड्रिंक पी चुकी थी और जैसा के उसके क्षात्रों ने सोचा था। नीरा काफी नशे में थी। जब नीरा खड़ी होकर बुरी तरह डगमगाने लगी तो नितेश और रोहित ने नीरा की एक-एक बाँह अपने कँधों पे डालीं और अपने हाथ उसकी कमर में डालकर सहारा देते हुए कमरे में ले जाने लगे। सौभाग्य से रेस्टोरेंट लगभग खाली था और नीरा ने भी वहाँ कुछ बखेड़ा नहीं किया। फाईव स्टार होटल के स्टाफ के लिये तो ऐसी घटना कोई नयी बात नहीं थी।
सूईट में आकर जब वोह नीरा को बिस्तर पर बिठाने लगे तो नीरा ने उन्हें पीछे धकेला और अपने कपड़े उतारने लगी- “बहुत अच्छा लग रहा मुझे… चलो नंगे हो जाओ… अभी तो और चुदाई करनी है…” नीरा की आवाज भी बहक रही थी।
कुछ ही पलों में तीनों नंगे थे। नीरा ने अपने पैरों और सैंडलों पे अपने क्षात्रों का वीर्य देखा तो कुटिलता से उन्हें देखकर मुश्कुराई। उसके पैर की अँगुलियां वीर्य के सूखने से चिपचिपा रही थीं। फिर बिस्तर पर बैठकर नीरा ने दोनों को अपने सामने खड़ा होने को कहा और उनके लौड़े चूसने लगी। वोह कुछ देर एक का लण्ड चूसती और फिर दूसरे का। इसी तरह बारी-बारी से अदल-बदल कर दोनों लण्ड नीरा चूस रही थी। जब उसके क्षात्रों के लण्ड सख्त होकर खड़े हो गये तो नीरा ने ऊपर देखा।
“क्या तुम दोनों में से किसी ने कभी किसी लड़की की गाण्ड मारी है?” नीरा ने बहकती हुई आवाज में पूछा।
दोनों लड़के अपनी टीचर के मुँह से यह सवाल सुनकर चौंक गये और ‘ना’ में अपने सिर हिला दिए।