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ज़िंदगी भी अजीब होती है Restart



दूसरी तरफ मुझे भी वापिस जाना था मैने फिर से बॉस से बात की तो उन्होने कहा कि तेरा काम हो गया है एक दो दिन मे तेरी दोस्त को ट्रान्स्फर लेटर मिल जाएगा , मैने कहा तो सर मैं उसको लेकर ही वापिस आउन्गा तो वो बोले हाँ पर एक मिशन भी रेडी है आते ही काम पर लग जाना मैने कहा पक्का सर बस इधर का काम निपटा लूँ तो दोस्तो तीन दिन मे आख़िर निशा का तबादला देल्ही हो ही गया

फिर दो दिन बस समान पॅक करने मे लग गये पॅकर्स & मोवेर्स को मैने अपना देल्ही का अड्रेस दे दिया था एक अकेली जान का भी इतना ज़्यादा समान हो सकता है मैने सोचा नही था तो फिर समान देल्ही के लिए लोड करवाने के बाद फिर हुँने भी देल्ही की फ्लाइट पकड़ ली हालाँकि निशा ट्रेन से ट्रॅवेलिंग करना चाहती ती पर मेरे पास टाइम नही था काफ़ी काम पेंडिंग छोड़ा हुआ था मैने

तो फिर रात के करीब साढ़े ग्यारह बजे के आस पास हम लोग पालम एरपोर्ट उतर गये फॉरमॅलिटीस पूरी की फिर कॅब लेकर घर पर आ गये लॉक खोला तो धूल भरे घर ने हमारा स्वागत किया निशा बोली कैसा हाल कर रखा है तुमने इधर का तो मैने कहा यार वो मैं कई दिनो से आया ही नही हूँ इधर तो इसीलिए तो वो बोली चल कोई नही मैं सफाई कर लेती हूँ

तो मैने मना करते हुए कहा कि अरे नही तुम भी थकि हुवी हो मैं खाना ऑर्डर करता हूँ सफाई वफ़ाई बाद मे करेंगे तो निशा बोली मनीष मेरी एक विश पूरी करोगे , मैने कहा यार ये भी कोई कहने की बात है क्या तो वो बोली मैने देल्ही की चाँट के बारे मे बड़ा सुना है पर कभी मोका नही लगा तो मैं आज इधर हूँ तो अभी मेरा बड़ा दिल कर रहा है

मैने कहा बस इतनी सी बात चल फटा फट से कपड़े चेंज करले फिर चलते है बाहर तो वो बोली 12 हो रहे है रात के , और मैने सुना है कि देल्ही की रात सेफ नही होती तो हम फिर कभी चलेंगे मैने कहा यार चल अभी पर वो मना करने लगी तो मैने फिर जब खाना ऑर्डर किया तो निशा के लिए कुछ स्पेशल ऑर्डर कर दिया बस अब देखना था कि जब वो खाने का पॅकेट खोलेगी तो उसका क्या रियेक्शन होता है

दरअसल मैने रेस्टोरेंट से डिन्नर के साथ साथ कुछ चाट, पपड़ी और दही भल्ले, आलू टिक्की जितनी चीज़ो के भी नाम मुझे याद थे सब का ऑर्डर कर दिया था जब तक निशा नहा कर बाहर आई मैने थोड़ी बहुत सफाई कर दी थी अब था अकेला बंदा तो मेरे पास इतना कुछ फर्नीचर भी नही था बल्कि मैं तो सोता भी नीचे ही था गुड दी बिछा कर

मैने कहा निशा आज आज अड्जस्ट कर ले कल ही मैं तेरे लिए बेड खरीद लाउन्गा तो वो बोली कोई बात नही , और फिर वैसे भी दो चार दिन मे मेरा सामान भी आ ही जाएगा तो हम वो ही शेर कर लेंगे , सच मे यार उसकी ये सादगी ही उसकी खूबसूरती थी वरना एक बॅंक ऑफीसर के कितने नखरे होते है आप समझ सकते है ही पर सबसे अलग थी मेरी निशा

तो फिर जैसे ही ही डेलिवरी बॉय खाने का पार्सल देने आया तो मैं बहाना बना कर बाथरूम मे घुस गया और निशा को कहा की पार्सल कलेक्ट कर ले जब मैं वापिस आया तो निशा ने डिन्नर प्लेट्स मे लगा दिया था मुझे देखते ही वो उठी और मेरे सीने से लग गयी और बोली मनीष कितना ख़याल रखते हो मेरा, इतनी भी फिकर ना किया करो मेरी अगर मुझे तुम्हारी आदत हो गयी तो

मेरा जीना मुश्किल हो जाएगा पिछले कुछ दिनो मे पता है मैं एक अलग ही तरह की ज़िंदगी जी रही हूँ तुमने एक पल मे ही मेरी ज़िंदगी के मायने बदल दिए है मैं उसके बालो मे हाथ फिराते हुए बोला निशा तुम्हे क्या पता कितना अधूरा था मैं तुम्हारे बिना जानती हो जब भी गाँव जाता था तो मंदिर की बगीची मे मैं घंटो बैठ कर बस तुम्हारे साथ बिताए हुए पॅलो को याद किया करता था

कभी कभी तो ये सोच कर कि तुम पास हो ख़यालो मे ही तुमसे गुफ़्तुगू करने लग जाता था जब भी मैं तन्हा हो ता था हर पल बस तुम्हारा ही ख़याल होता था बस यही सोचता रहता था कि कहाँ गयी तुम , किस हाल मे होगी ये कहते कहते मेरी आँखो मे पानी आ गया तो निशा मेरे आँसू पोछते हुए बोली अब मैं साथ हू तुम्हारे चलो अब आओ और खाना खा लो ,

ठंडा हो रहा है और वैसे भी रात काफ़ी हो गयी है तो मुझे नींद भी आ रही है तो फिर हम ने अपना भोजन किया और फिर बिस्तर पर आ गये फिर बात करते करते पता ही नही चला कि कब नींद आई पता नही कितने बज रहे थे कि मेरी नींद खुल गयी दरअसल हुआ हूँ कि सोते सोते निशा ने अपनी एक टाँग मेरे उपर रख दी थी और मुझसे बिल्कुल छिपकर कर सो रही थी

उसकी गरम साँसे मुझे मदहोश करने लगी थी पर मैं अपनी भावनाओ को कंट्रोल करना चाहता था कही निशा मुझे ग़लत ना समझ ले और फिर अपनी भावनाए वैसे भी भड़क जाए तो फिर प्राब्लम हो जाती है तो मैने उसे अपने से परे किया पर उस दो पल मे ही मेरी धड़कने बढ़ गयी थी, तो फिर मैने करवट बदली और सो गया अगली सुबह मुझे एजेन्सी मे रिपोर्ट करनी थी

तो मैने निशा को कुछ ज़रूरी बाते बताई पास वाली मार्केट का अड्रेस दिया और फिर कहा कि मुझे आते आते रात हो जाएगी तो तुम देख लेना फिर मैं ऑफीस आ गया कुछ पुरानी फाइल्स रीड की बॉस आए नही थी अभी तक मुझे मेरी रिपोर्ट भी सब्मिट करनी थी तो दोपहर बाद वो आए कुछ परेशान लग रहे थे उन्होने मुझे कॅबिन मे बुलाया और एक प्रॉजेक्ट की फाइल देते हुए कहा कि इस फाइल को अच्छे से रीड कर्लो और अपनी बेसिक तैयारी कर्लो मैने कहा सर मैं मॅटर देख लेता हूँ तो मैं अपनी डेस्क पर आया और फाइल को रेड करने लगा और जैसे जैसे मैं वो सब पढ़ता गया मेरे माथे पर एक शिकन आ गयी कहाँ मैं सोच रहा था कि निशा के साथ टाइम स्पेंड करूँगा और कहाँ अब ये नया प्रॉजेक्ट पूरा करना था मैं बॉस के कॅबिन मे गया

और पूछा सर हमें कब निकलना है तो उन्होने कहा परसों चलते है मैने कहा यस सर फिर कुछ और मुद्दो पर डीस्कस्स करने के बाद मैं वापिस आ गया और कुछ इन्फर्मेशन्स को रीड करने लगा काम करते करते रात के दस बज गये थे तो फिर मैने अपना बॅग उठाया और घर की ओर हो लिया जब मैने बेल बजाई तो उस प्यारी सी लड़की ने दरवाजा खोला और मुस्कुराते हुए मेरा स्वागत किया

 


मैं तो घर की हालत देख कर सोचने लगा कि ये मेरा रूम ही है क्या निशा ने सब कुछ सॉफ करके अच्छे से व्यस्थित कर दिया था मैने पूछा तुमने खाना खाया तो पता चला कि वो मेरी ही राह देख रही थी मैने कहा यार मेरा कोई फिक्स नही है तू अपनी सेहत का ध्यान रखा कर , और हां मैं कुछ दिनो के लिए बाहर जा रहा हूँ वापिस आने मे थोड़ा टाइम लग जाएगा….

निशा बोली पर मैं अकेले कैसे रह पाउन्गी तो मैने कहा पर डियर ये तो हमारे काम का दस्तूर है ही मेरा काम ही ऐसा है कि आज यहाँ तो कल कही ओर पर तुम चिंता ना करना मैं जल्दी ही आ जाउन्गा और फिर एक-दो दिन मे तुम भी तो ड्यूटी पे जाना शुरू कर दोगि और तुम चिंता ना करो इधर तुम्हे किसी भी तरह की कोई प्राब्लम नही आएगी बस मस्त रहो

अब मैं क्या करू काम भी करना ज़रूरी था आख़िर उसी बात की तो सॅलरी मिलती थी मुझे पर दिल मेरा भी निशा के साथ रहने को कर रहा था पर फोज ने यही चीज़ बड़े बेहतरीन तरीके से सिखाई थी कि चाहे हालत कुछ भी हो अपने एमोशन्स को काबू मे रखो तो मैने कहा चल वो सब छोड़ और खाना खिला दो सुबह से कुछ खाया भी नही है तो निशा बोली हाथ मूह धो लो मैं परोस देती हूँ

तो फिर हम खाना खाने लगे मैने कहा अरे यार दाल क्यों बना दी तुमने तो वो बोली खाकर तो देखो अच्छी बनी है मैने कहा यार अब फोजी आदमी को बस दाल ही नही भाती है पर चलो अब तुमने बनाई है तो अच्छी ही होगी और फिर हम हँसी मज़ाक करते हुए पेट भरने लगे निशा ने पूछा घर कब जाओगे मैने कहा नही यार अब घर नही जाउन्गा अपना तो दाना पानी उठ गया है उधर से

निशा बोली माँ-बाप तो कहने के ही होते है जब तुम शादी मे जाओगे तो कोशिश करना मम्मी से सुलह करने की सब अड्जस्ट हो जाएगा कितने सुलझे हुए विचारों की लड़की थी ये और मैं कितना स्वार्थी हो गया था पर मैं भी तो मजबूर था डिन्नर के बाद मैने कहा आओ ज़रा वॉक करके आते है तो फिर हम अपने कॅंपस से बाहर निकल आए और रोड पर घूमने लगे

अचानक से निशा ने पूछा तुम शादी कब कर रहे हो मैने कहा यार तुझे सब पता तो है फिर क्यो पूछ रही है वो बोली ऐसे ही मैने कहा जब भी होगी तुझे तो पता चल ही जाएगा ना तो वो बोली हाँ वो तो है ही आख़िर मैं तुम्हारी स्पेशल गेस्ट जो हूँ और हँसने लगी फिर हम ने एक आइस्क्रीम खाई और घर आ गये अगले दिन मुझे निकलना भी था तो पॅकिंग की और फिर थोड़ी देर के लिए सो गया

अगले दिन जब मैं जाने को था तो उसने पूछा वैसे तुम जा कहाँ रहे हो मैने कहा दुबई, मैने उसको कुछ बुनियादी बाते समझाई उसका बॅंक चाँदनी चौक एरिया मे था तो उसको रूट वग़ैरहा समझाया और एक नंबर दिया मैने कहा अगर पीछे से तुम्हे कोई परेशानी हो तो इस नंबर पर कॉल करना मदद मिल जाएगी पता नही क्यो मुझे उसकी इतनी फिकर थी जबकि कई सालों से वो अकेली ही तो रह रही थी

अगले दिन मैं बॉस के साथ एरपोर्ट पहुच गया , अब मैं बता ता हूँ कि हम दुबई क्यो जा रहे थे दरअसल इंटरनॅशनल पीस समिट हो रहा था तो बॉस ने बोला था कि इस तरह की समिट्स मे डेलिगेशन मे कुछ एजेंट्स भी जाते है उनका काम होता है अदर कंट्रीज़ के डेलिगेशन्स से ख़ुफ़िया इन्फर्मेशन निकलवाना तो इस बार बॉस ने मुझे भी ले लिया था साथ

दुबई, रेगिस्तान मे बसी हुई जन्नत खूबसूरत इतना कि बस शब्दो मे बताना बड़ा ही मुश्किल 5 दिन का समिट था तो जाते ही बस थोड़ी बहुत देर आराम किया और फिर शाम को तैयार हो लिए उन की कॉन्फ्रेंसे के लिए सभी देशो के डेलिगेशन्स आए हुवे थे बस मेल मिलाप की फॉरमॅलिटीस ही चल रही थी पर चूँकि बॉस ने मुझे पहले ही बता दिया था कि

ख़ुफ़िया एजेंट्स भी होते है और फिर मुझे इतना ज़्यादा एक्सपीरियेन्स भी नही था तो मैं थोड़ा सा सावधान सा ही था मेन कॉन्फ्रेंस काफ़ी बोरिंग सी थी और मेरे पल्ले भी कुछ खास पड़ नही रहा था तो मैं बाहर आ गया और एक ड्रिंक लेने चला गया कुछ देर बाद बॉस की कॉल आई तो उन्होने पूछा कि कहाँ हो तुम मैने बता दिया वो बोले हॉल मे आ जाओ

कुछ देर मे इंडिया-पाकिस्तान की कंबाइन प्रेस कॉन्फ्रेंसे होने वाली है तो अपने जैसे भी होंगे ज़रा नज़र मार लेना और चूँकि ये इंटरनॅशनल समिट है तो थोड़ा सा प्रोफेशनलिसम दिखाओ ये कोई टाइम है क्या ड्रिंक लेने का तो मैने अपना शॉट वापिस रखा और बोला सर दो मिनट मे पहुचता हूँ और तेज तेज कदमो से हॉल की तरफ जाने लगा

 
बॉस ने मुझे इशारा किया और मैने अपनी सीट पकड़ ली प्रेस की तरफ से आ रहे सवालो का जवाब दिया जाने लगा और मैं अपनी आँखे इधर उधर दौड़ाने लगा तो मेरी नज़र पाकिस्तानी डेलिगेशन पर पड़ी जब मैने गोर से उधर देखा तो मेरे दिमाग़ ने एक झटका खाया , क्या ये वही थी,नही नही मुझे ज़रूर कोई ग़लत फहमी हुई है तो मैने बड़े ही गोर से दुबारा देखा

मैं गहरी सोच मे पड़ गया ये तो वही है पर ये यहाँ कर क्या रही है, पाकिस्तान डेलिगेशन के साथ इसका मतलब तो …….. ……….. …….. तो नही ऐसा नही हो सकता ये ज़रूर कोई और ही होगी क्या पता मेरी नज़रे धोखा खा रही हो तभी मेरी निगाहें उसकी नज़रो से मिली और उस मोहतार्मा का भी वही हाल हो गया जो मेरा हो रहा था एसी हाल मे भी उसके

माथे पर पसीने की कुछ बूंदे चल चला आई थी उफ़फ्फ़ साला ऐसा भी हो सकता है क्या हम तो खुद को ही तीस मार ख़ान समझते थे पर आज पता चला कि मैं तो बस एक चूतिया ही था, भरी महफ़िल मे हम दोनो रुसवा होने लगे थे एक दूजे की निगाहो के वार से मैने पास रखी बॉटल से दो घुट पानी पिया और अपनी सांसो को दुरुस्त किया आज मुझे पता चला था कि ये राह जो मैने चुनी थी कितनी मुश्किल भरी हो सकती है

मुझे अब कुछ पता नही था दिल तो कर रहा था कि अभी जाकर उस से पुछु कि तुम यहाँ पर कैसे,,……………………… ………………. ……………

जबकि जब वो अगर यहाँ पर थी तो मुझे ये भी पता तो था ही कि वो कॉन है क्या सख्शियत है उसकी पर वो सब झूठ था जो उसने मुझे बताया था कितनी आसानी से उसने मुझे अपने जाल मे फसा लिया था उफ्फ पर मैने भी सोच लिया था कि बस अब इसकी खबर तो लेनी ही है चाहे कुछ भी हो इसको धर ही लूँगा मैं अब मैं सोच रहा था तभी हमारी आँखे फिर से टकराई…….. ……………. …………. ………………ऑर

ऑर इस बार कुछ पॅलो तक हम आँखो आँखो मे एक दूसरे को देख ते ही रहे ,महक थी वो कहाँ वो जब एक चाइ की दुकान वाली बनी थी और अब यहाँ मैं एक पल मे ही समझ गया था कि ये गजब की एजेंट है आइएसआइ की, और हम तो बस एक नोसिखिए से ज़्यादा कुछ नही थे उसने अपने दुपट्टे को संभालते हुए एक गहरी नज़र मुझ पर डाली और उठ कर बाहर को चल दी

मैने अपनी कुर्सी छोड़ी और नज़र बचा कर मैने भी एग्ज़िट का रास्ता ले लिया मैं दौड़ कर उधर गया तो उसकी बस झलक सी ही दिखी बाहर को जाते हुए तो मैं तेज़ी से उस और दौड़ा बिल्डिंग से बाहर आते ही देखा कि उसने एक टॅक्सी ली और आगे बढ़ गयी मैने तुरंत ही अपने लिए भी एक टॅक्सी ली और उसके पीछे चलने को कहा करीब आधे घंटे बाद उसकी कॅब रुकी तो मैं भी उतर गया

वो एक छोटा सा केफे था महक अंदर एंटर हो गयी तो मैं भी घुस गया और उसके सामने वाली चेर पर बैठ गया कुछ देर तक हम दोनो बस एक दूजे की आँखो की भाषा पढ़ते रहे अब बात अलग हो गयी थी बल्कि मुझे प्रोटोकॉल यू तोड़ना ही नही था अगर ये ट्रॅप है तो मैं फस गया था बुरी तरह से वैसे भी अक्सर हमारे जैसे लोग खूबसूरती का शिकार हो ही जाया करते है

आख़िर मैने चुप्पी तोड़ते हुए कहा महक या जो भी नाम है तुम्हारा तुम यहाँ कैसे तो बड़ी ही सन्जीदगी से उसने जवाब दिया कि अब इस सवाल का कोई फ़ायदा नही है क्योंकि जवाब तो आप को पता लग गया ही है इस हमाम मे हम सब नंगे ही है और अब तो आप से ये भी नही पूछ सकती कि आप यहाँ कैसे बस इतना समझ लीजिए कि हम लोग अपने अपने वतन के लिए अपना अपना काम कर रहे है

बात तो उसकी सही थी और ये एक ऐसा सवाल था कि जिसका कोई जवाब हो ही नही सकता था पर मैं क्या करूँ वो जो कुछ दिनो की दोस्ती सी हो गयी थी उस से जब कितनी मासूम थी वो और आज उसी चेहरे के अंदर एक नक़ाब था अब क्या कहें हम किसी से अपना हाल ए दिल जनाब बस इतना जान लीजिए कि आँसू भी अपना ही नमक ना जाने मेरा मन मान ने को तैयार नही हो रहा था

कि महक आइएसआइ से जुड़ी हो सकती है पर यही सच्चाई थी, आख़िर हम सबने अपने अपने चेहरो पर नक़ाब ही तो ओढ़ रखे थे हर किसी के लिए हम अलग अलग सख्सियत ही तो थे, महक मुझे चाइ का कप पकड़ाते हुए बोली जनाब चाइ लीजिए पर मैने कप नही पकड़ा तो वो बोली जनाब फिकर ना करे कुछ मिलाया नही है इसमे और उसने दो चुस्किया ले ली उस कप मे से

फिर वो बोली आप चिंता ना करे , हमारी ये मुलाकात पूरी तरह से महफूज़ है तो मैने वो कप ले लिया और चाइ पीने लगा वो बोली सोचा नही था कि इस तरह आपसे दुबारा मुलाकात होगी , वरना मैं तो बस आपके साथ बिताए कुछ पलों को ही बस दिल मे कही समेटे हुए थी मैने कहा मैने भी नही सोचा था कि तुमसे इस तरह …… ……….. ………. मैने कहा तो अब क्या

तो वो बोली , तो कुछ नही आप अपना काम कीजिए और मैं अपना बस यही हक़ीक़त है और हमें इसे मान ना ही होगा वरना अंजाम तो आप बखुबी समझते है मैने कहा तो अपनी दुस्मन को यहीं पर गोली मार दूं तो महक एक कातिल अदा के साथ बोली हुजूर मर तो हम उस रात ही गये थे जब आपकी बाहों मे पनाह ली थी अब तो बस साँसे ही चल रही है आपकी अमानत है आप जब चाहे ले लीजिए

 


काश वो शाम ना होती, काश वो बात ना होती , काश ना वो होती ना मैं होता और ना होता वो दस्तूर तो वो मेरी एक दोस्त थी जिसके साथ थोड़े से पल उस वादी मे जिए थे मैने उसका तो पता नही पर एक तरफ दिल आ गया और दूसरी तरफ दिमाग़ जो चीख कर कह रहा था कि दुश्मन है वो दुश्मन है अब मेरी दुविधा तो बस मैं ही जानू तो मुझे अपना फ़ैसला लेना था

मैने कहा देखो महक या जो भी तुम्हारा नाम है तो उसने कहा सनम नाम है मेरा पर आप महक ही बुलाए अच्छा लगता है तो मैने कहा अगर मैं चाहू तो दो पल मे तुम्हे पकड़ सकता हू तुम हमारे लिए इंपॉर्टेंट साबित हो सकती हो तो उसने कहा यही बात आप पर भी लागू होती है जनाब ये साली एक अजीब सी सिचुयेशन खड़ी हो गयी थी मेरे सामने पर वो कहते है ना कि हम हम है बाकी सब पानी कम है

तो मैने एक पल मे ही गन निकल ली और उस पर तान दी पर वो भी शातिर थी पलक झपकने के पहले हम दोनो एक दूसरे के टारगेट पर थे वो बोली जनाब ये खेल आप के लिए नये होंगे पर मुझे आदत है इन खिलोनो से खेलने की गन अंदर रख लीजिए और वैसे भी ये दुबई है तो आप इधर ओपन्ली कोई पंगा नही चाहेंगे ना महक बोली एक दोस्त के नाते बस इतना ही चाहूँगी कि आज के बाद

हमारी कभी कोई मुलाकात ना हो क्योंकि अब जब भी मुलाकात होगी तो चीज़े अलग होंगी पर इतना ज़रूर है कि आप दोस्त थे और हमेशा रहेंगे कुछ नाते सर्हदो से परे होते है क्या बात कह गयी वो उस लाइन मे , मैने कहा तो एक जाम हो जाए वो बोली जनाब फिर कभी तो फिर उस छोटी सी मुलाकात के बाद हम अपने अपने रास्ते पर हो लिए ना उसने मूड़ के देखा और ना मैने

पर वो कहते है ना कि कुछ बाते भूली नही जाती है बस समझ लीजिए कुछ ऐसा ही था मैं फिर होटेल आया तो बॉस बोले कहाँ गुम हो गये थे तो मैने कहा सर बस इधर की स्पीच समझ नही आ रही थी तो बाहर निकल गया था बॉस बोले यार एक मेसेज इंटर्सेप्ट हुआ है कि अफ़ग़ानिस्तान बॉर्डर पर मिलाइटंट्स का एक नया ट्रैनिंग कॅंप खुला है और अपने दोस्तो का जो डेलिगेशन आया है उसमे से दो बन्दो का कॉंटॅक्ट उधर से है मैने कहा आप हुकम करो सर उठा लेते है अभी तो बॉस हँसते हुए बोले तू कभी नही सुधरेगा

बॉस बोले उठाना नही है बस तू थोड़ी बहुत इन्फर्मेशन निकाल ले बाकी फिर देखेंगे इधर कोई आक्टिविटी नही चाहिए वरना अगर लीक हो गयी तो इंटरनॅशनल समुदाय मे अपनी रेप्युटेशन पे फरक पड़ेगा फिर मैं अपने रूम मे चला गया फ्रेश वग़ैरा होकर बस कपड़े चेंज कर ही रहा था कि रूम का इंटरकम बज उठा तो मैने कॉल पिक करली

दूसरी तरफ महक थी उसने कहा जनाब खाने पर आपका इंतज़ार रहेगा अगर हो सके तो इतना अता फरमाइए और उसने अपना रूम नंबर बता दिया तो मैने भी सोचा कि जब दोस्ती है तो फिर निभाते है तो हम भी चल पड़े रूम नंबर 1581 की तरफ किसी सदियो से बिछड़ी हुई महबूबा की तरह मेरा इस्तकबाल किया उसने रूम मे लाइट ऑफ थी बस मोमबतियो से रोशनी की हुई थी

महक ने एक सुनहरा सा गाउन पहना हुआ था जो उसके गोरे बदन पर बड़ा ही जच रहा था दो पल के लिए मेरी नज़रे वही पर ठहर गयी तो वो मुस्कुराते हुए बोली मुझे उम्मीद थी कि आप हमारी मेहमान नवाज़ी को कबूल ज़रूर करेंगे मैने कहा जब आपने बुलाया है तो खाकसार को आना ही था महक ने खाना प्लेट मे डालते हुवे कहा आपका शुक्रिया मैं कैसे कहूँ

मैने कहा उसकी कोई ज़रूरत नही है महॉल कुछ रोमॅंटिक सा बना दिया था उसने पर हसरते कुछ जुदा जुदा सी लग रही थी पर इसे ही तो ज़िंदगी कहते है ना जाने कब किस मोड़ पर ले आए आदमी को हमेशा तैयार ही रहना चाहिए खाने के बाद उसने जाम बना दिया और मुझे दिया तो मैने कहा तुम नही लोगि क्या तो वो बोली आप कुछ घूट ले लीजिए मैं इसी मे से ले लूँगी

और फिर हम बारी बारी से एक ही गिलास से पीने लगे महक की होंठो पर कुछ बूंदे शराब की छलक आई थी तो मैं उसके उपर झुका और उसके लबों पर अपनी जीभ फिराने लगा गुलाब की ताज़ा पंखुड़ियो से सुर्ख लबरेज होठ उसके मेरे सूखे होठ पल भर मे ही तर हो गये उसका शरबती स्वाद मेरी रूह मे उतरने लगा महक ने अपने मूह थोड़ा सा खोल दिया

और मेरी जीभ को अपने मूह मे लेकर चूस्न लगी उफ़फ्फ़ कयामत सा हुस्न उसका उस पल मैं सबकुछ भूल गया , भूल गया कि वो कॉन है और मैं कॉन हूँ बस याद था तो वो बिताई रात और एक आज की ये रात जब वो फिर से मेरे पास थी जब तक सांस टूटने के कगार पर नही आ गयी हम दोनो एक दूसरे को चूमते ही रहे एक मुक़ाबला सा हो गया था

शायद कुछ इसलिए भी कि अब फीलिंग्स थोड़ी अलग हो गयी थी मैने उसे बेड पर पटका और उसके उपर आते हुए फिर से उसके रस से भरे होंठों को दबोच लिया महक मेरी शर्ट के बटन्स खोलने लगी मैने अंदर बनियान नही डाली थी तो वो मेरे सीने के बालो पर हाथ फिराने लगी अब मैने उसके होंठो को छोड़ा और उसके गाउन की रेशमी डोरियो को खीच दिया

ऑरेंज ब्रा-पैंटी क्या खूब फॅब रही थी उस के बदन पर मैने उसकी ब्रा को खोल दिया तो वो बेड पर घूम गयी मैं उसकी पीठ पर अपने गरम चुंबन अंकित करने लगा तो महक की एक आह निकल गयी मैने अपने दाँतों के निशान उसकी पीठ पर छोड़ दिए थे महक पलटी और फिर मुझे नीचे गिरा कर मुझ पर सवार हो गयी और मेरे सीने पर किस करने लगी

साथ ही साथ उसने मेरी पॅंट भी खोल दी और मेरे लंड को कपड़ो की क़ैद से आज़ाद कर दिया तो जल्दी ही वो उसकी मुट्ठी मे था महक ने जल्दी से उसको अपने मूह मे ले लिया और किसी आइस क्रीम की तरह से उसको चूसने लगी तो मेरा बदन एक ना बताई जाने वाली मस्ती मे भरने लगा मैं उसके सर को अपने लंड पर दबाने लगा महक के थूक से लंड की खाल चमड़े की तरह शाइन करने लगी थी

 


महक की जीभ मेरे सुपाडे पर किसी हंटर की तरह चलते हुए मेरे बदन मे सुरसूराहट कर रही थी तो मैने उसे अपने उपर 69 मे घुमा लिया और उसकी गीली पैंटी को नीचे करते हुए बिना कुछ सोचे समझे अपने होठ उस गरम चूत पर रख दिए तो महक का बदन पल भर के लिए काँप ही गया और उसने अपने मोटे मोटे सुडोल कुल्हो मे मेरे चेहरे को भीच लिया

पल भर मे ही मेरी जीभ उसकी योनि के अंदर पहुच गयी थी बड़ी गरम चूत हो रही थी उसकी और पानी तो हद से ज़्यादा बह रहा था जल्दी ही मेरा मूह उसके खारे पानी से भर गया था दूसरी तरफ वो मेरे अंडकोषो से खेलती हुई मेरे लंड को चूमे जा रही थी उसकी गरम जीभ से मैं पल पल पिघले जा रहा था अब हम दोनो ही भूल चुके थे कि हम लोग कॉन है कहा है

फिर मैने उसे अपने उपर से हटाया और वाइन की पूरी बॉटल उसके बदन पर उडेल दी महक कुछ बोल पाती उस से फेले ही मैने उन नशे से भरी बूँदो को चाटना शुरू कर दिया तो मस्ती से उसका रोम रोम फड़कने लगा था उसके माथे से लेकर उसके पाँवो तक एक एक अंग को मैं चाटे जा रहा था महक की सिसकारिया बहुत ही बढ़ गयी थी रोम रोम पुलकित हो रहा था

वाइन से भीगी हुई चूत पर अब मैं अपनी जीभ को गोल गोल घुमाने लगा था तो महक की जैसे साँसे ही बंद हो गयी थी महक ने अपनी टाँगे उठा कर मेरे चेहरे पर कस दी थी और उत्तेजना के सातवे शिखर को पहुचने लगी थी वो बेड की चादर को अपनी मुट्ठी मे मसल्ते हुए आहे भरने लगी थी और मेरा हाल भी उस से कुछ जुदा नही था हम दोनो के शरीर इस हद तक गरम हो चुके थे कि बस एक बरसात ही हमे ठंडा कर सकती थी

महक अपने मस्त बोबो को भीचते हुवे मुझे अपनी चूत का रस बहुत अच्छे से पिलाए जा रही थी उसकी हर एक सिसकी ये बता रही थी कि बस कुछ ही देर मे वो झड़ने वाली है तो मैं तेज तेज जीभ चलाने लगा उसकी योनि पर महक मेरी बाहों मे तड़प रही थी और मैं उसके हुस्न मे गुम हो जाने को तैयार था तभी उसकी टाँगो की पकड़ बेहद कड़ी हो गयी और उसकी कमर झटके खाने लगी महक की चूत से गरम पानी बहने लगा

उसके झड़ते ही मैने उसकी टाँगो को पकड़ कर चौड़ी किया और अपने सुपाडे को चूत पर रगड़ने लगा वो अपनी आँखे बंद किए हुए लंबी लंबी साँसे ले रही थी मेरे सुपाडे के गरम स्पर्श से महक चिहुन्क गयी और अगले ही पल मैने अपने फडफडाते हुए लंड को चूत पे लगा कर जो धक्का लगा या तो लंड उसकी कोमल फांको को फैलाते हुवे अंदर की ओर जाने लगा महक अपनी टाँगो को अड्जस्ट करते हुए लंड को चूत मे लेने लगी

अगले दो-तीन धक्को के साथ लंड महक की चूत मे घुस चुका था महक ने अपनी आँखे अभी भी नही खोली थी मैने उसकी कमर को पकड़ा और अपने हाथो से उधर दबाव बनाते हुए चूत पर घर्षण करने लगा ज्यो ज्यो मैं चूत पर धक्के लगाता तो उसकी बड़ी बड़ी गोल मटोल चूचिया हिलने लगी थी महक अपनी चूची को दबाते हुवे चुदाई का मज़ा लेने लगी थी

उसकी टाँगे अपने आप उपर को उठने लगी थी और मैने भी अब अपना पूरा ज़ोर उसपर डालते हुए उसके होंठो को अपने मूह मे भर लिया और उसको चूमते हुए चोदने लगा ना जाने इस चुदाई मे मुझे कुछ अलग सी फीलिंग हो रही थी उसके लंबे नाख़ून मेरी पीठ पर उस रात की कहानी को लिख रहे थे पर ये नशा ही कुछ ऐसा था कि बस जीतने वाला हार जाता है और हारने वाला जीत जाता है

महक का कामुक बदन और मेरा जोश उस कमरे के अंदर एक तूफान सा आ गया था हम दोनो अपनी अपनी तरफ से पूरा दम लगाते हुए एक दूजे के शरीर मे समाए हुए थे मैं उसके गोरे गालो को चूमता कभी उसकी गर्दन पर काट ता तो वो भी कम नही थी वो अपना हाथ नीचे ले गयी और मेरे अंडकोषो को दबाने लगी तो मेरी नसों मे बहता हुआ खून और भी तेज़ी से दौड़ने लगा था

अब मैने उसको घुमा कर टेढ़ा कर दिया और उसके पीछे आते हुवे उसकी साइड से अपना हाथ उसकी चूची पर रख दिया और उसको कस कर पकड़ते हुए उसकी टाँग को थोड़ा सा उठा कर अपने दूसरे हाथ से अपने लंड को चूत से सटा दिया तो महक और भी पीछे को हो गयी और उसी पल फिर से मेरा लंड रेंगते हुए उसकी टाइट चूत मे जाने लगा लंड के पूरी तरह से अंदर जाते ही

मैने उसके दोनो बोबो को मसलना शुरू कर दिया और उसकी चुदाई फिर से शुरू हो गयी महक की गान्ड से टकराती मेरी गोलियाँ एक अलग सी ही अनुभूति करवाए जा रही थी महक भी अब बार बार अपनी गान्ड को पीछे करते हुवे हिलने लगी थी तो चुदाई का आलम और भी मजेदार हो गया था महक की चुदाई थप थप करते हुए चल रही थी एक दूसरे से गुत्थम गुत्था हम दोनो अपने अपने जिस्मो की उस जलती हुई आग को ठंडा करने की भरपूर कोशिश कर रहे थे मैं पूरी रफ़्तार से महक को चोदे जा रहा था और वो भी मेरा भरपूर साथ दे रही थी दना दन धक्के पे धक्का लगा ते हुए हम दोनो एक दूजे के सामर्थ्य को तोल रहे थे मैं डिसचार्ज होने के करीब आ गया था तो मैने अपनी पूरी ताक़त झोक दी और फिर मेरे लंड से वीर्य की पिचकारियाँ निकलते हुए महक की चूत को भिगोने लगी

 
झड़ने के बाद मे मैने उसे अपने आप से चिपकाए रखा था थोड़ी देर बाद महक मुझ से अलग हो गयी और अपनी मस्त गान्ड को हिलाते हुए बाथरूम मे चली गयी मैं उठा और थोड़ा सा पानी पिया और खिड़की से बाहर को देखने लगा रात हो गई थी पर सहर रंगीन था मैं खिड़की के शीशे पर हाथ लगाए बाहर को देख रहा था कि महक आई और पीछे से मुझ से लिपट गयी

उसके हाथ मेरे सीने पर रेंगने लगी और थोड़ी देर बाद एक हाथ मेरे लंड पर आ गया तो वो उसके हाथो की गर्मी पाकर फिर से फूलने लगा महक मेरे शोल्डर पर अपने दाँतों से निशान बना ने लगी थी उसकी खुसबूदार साँसे मेरे कंधो पर पड़ते हुवे मुझ उत्तेजना का भान करवाने लगी थी थोड़ी देर मे ही मैं फिर से तैयार हो चुका था मैने उसको अपनी तरफ किया और

उसकी गुब्बारे जैसी चूचियो पर अपना मूह चलाने लगा तो उसकी छातियो मे फिर से तनाव आने लगा था उसकी चूची पीते पीते मैने उसकी गान्ड की दरार मे अपनी उंगली डाल कर सहलाना शुरू कर दिया था महक फिर से पागल होने लगी थी वही खड़े खड़े मैने उसको अपनी गोद मे उठा लिया और उसने लंड को अपनी चूत पा सेट किया और उस पर बैठ ती चली गयी

उसने अपने होठ फिर से मेरे होंठो से जोड़ लिए थे और मेरी बाहों मे उछलते हुए चूत को लंड पर उपर नीचे करने लगी थी हम दोनो की गरम साँसे एक दूसरे के मूह मे ही टकरा रही थी महक पूरी फुर्ती से उछल उछल कर लंड पर कूद रही थी मैं उसके चौड़े कुल्हो को पूरी मजबूती से थामे हुए था काफ़ी देर तक मैं ऐसे ही उसे अपनी बाहों मे झुलाता रहा

फिर वो मेरी गोद से उतरी और अपने हाथो को खिड़की पर जमाते हुवे मेरी तरफ पीठ करके अपनी गान्ड को बाहर की ओर करके झुक कर खड़ी हो गयी मैने अपने लंड पर थूक लगाया और उसने अपनी टाँगो को थोड़ा सा फैला दिया मैने लंड को चूत के मूह पर लगाया और स्रर्ररर से अंदर कर दिया महक ने एक आह भरी और अपनी गान्ड को पीछे की ओर धकेल दिया

अब मैं भी उस पर थोड़ा सा झूक गया और उसके कंधो को काट ते हुए उसकी चूत मे लंड अंदर बाहर करने लगा तो महक भी अपने कुल्हो को हिला हिला कर अपने जोश का सबूत दे रही थी उसकी पीठ पर उभर आई पसीने की नमकीन बूँदो को चाटने लगा था मैं. लिज़लीज़ी जीभ की आहट अपनी पीठ पर पाकर महक का बदन मस्ती से भर गया था और वो मेरी बाहों मे पिघलने लगी थी

महक ने अब अपनी दोनो जाँघो को आपस मे कस लिया था और उसकी चूत भी बहुत ज़्यादा गीली हो गयी थी मैने कुछ और धक्के लगाए ही थे कि महक पूरी तरह से खिड़की के शीशे पर झुक गयी और उसकी चूत से एक बार फिर से लावा बह चला तो उसकी चूत ने लंड को अपने मे बुरी तरह से कस लिया लंड उस दबाव को ज़्यादा देर तक नही सह पाया और वो भी उसकी चूत मे ही झड गया हम दोनो हान्फते हुए एक दूजे से अलग हुए

महक बेड पर लेट गयी और मैं बाथरूम मे पेशाब करने चला गया फिर आकर उसके पास ही लेट गया तो वो मुझसे चिपक गया मैं उसकी जुल्फे सहलाते हुए बोला तुम्हे मुझे यहाँ नही बुलाना चाहिए था तो वो बोली आज की रात ही तो है बीच मे कल से तो हम और हमारी राहें जुदा ही रहेंगी तो मैने सोचा कि पुरानी दोस्ती के कुछ पॅलो को जी लिया जाए

तो मैने उसके गालो को सहलाया और कहा तो ये बात है और उसकी गान्ड पर हाथ फिराने लगा उसकी गान्ड का छेद काफ़ी टाइट लग रहा था तो उसने पूछा जनाब के इरादे कुछ ठीक नही लग रहे है मैने कहा अब जब हम दोनो आज की रात साथ है तो फिर इरादे ठीक कैसे हो सकते है और उसकी गान्ड मे उंगली घुसाने लगा तो महक दर्द भरी सिसकारी लेते हुए बोली तो नवाबी शौक भी रखते हो

मैने कहा शोक बड़ी चीज़ है और फिर तुम हो तो बस तुम ही हो मैने महक के गालो पर अपना लंड फिराना शुरू कर दिया तो महक ने अपने मूह को थोड़ा सा खोला और अपने सुर्ख होठ लंड पर रख दिए और मेरे सुपाडे पर जो उसकी चूत के रस से सना हुआ था उसे चाटने लगी उसकी खुरदरी जीभ के असर से लंड में फिर से करेंट मे आने लगा था मैं उसके चेहरे पर झुके हुए उसे अपना लंड चूसने लगा था

 


सुडूप सुडूप करते हुए वो लंड को अपने गले की गहराइयो मे उतारने लगी थी उसकी लार से लंड एक बार फिर से भीग कर चमकने लगा था 10-12 मिनट तक वो बस लंड को अपने मूह मे ही भरे रही अब मैने उसे पलटाया और उसके मस्त कोमल कोमल कुल्हो की दरार पर लंड को घिसने लगा तो महक के बदन से सरसराहट होने लगी वो तड़प्ते हुवे बोली

ज़रा आराम आराम से करना उधर वरना कहीं चलने फिरने लायक ही ना रहूं मैं मैने कहा चिंता ना कीजिए बस मज़ा लीजिए मैने कहा कुछ लोशन वग़ैरह है क्या तुम्हारे पास तो उसने कहा कि मेरे बॅग मे पड़ा है मैने वहाँ से एक माय्स्टूराइसिंग क्रीम ली और अपने लंड पर और उसकी गान्ड पर अच्छे से लगा दी अब बारी थी उसकी गान्ड के छेद को खोलने की मैने उसकी टाँगो को थोड़ा सा फैलाया

और अपने पैरो की केँची बना कर उनमे फसा ली और फिर अपने लंड को गान्ड पर लगा कर अंदर डालने की कोशिश करने लगा तो महक बोली प्लीज़ आप आराम से करना मैने कोई जवाब नही दिया बल्कि थोड़ा सा ज़ोर से धक्का लगा दिया तो मेरा सुपाडा आधा उसकी गान्ड मे फस गया महक ने अपने दर्द को दाँतों मे भीच लिया और उसके हाथ बेड की चादर पर कसते चले गये

मैने फिर से थोड़ा सा ज़ोर लगाया और कुछ और हिस्सा अंदर की ओर जाकर फस गया महक की गान्ड का छेद लंड की मोटाई के अनुसार चौड़ा हो गया था वो कराहने लगी थी पर अब जब लंड घुसना है तो घुसना है दो मिनट का दर्द तो झेलना ही पड़ेगा उसको तो फिर हौले हौले से मेरा लंड किसी साँप की तरह से सरकते सरकते हुए महक की गान्ड मे जाकर गुम सा हो गया

तो उसने भी राहत की सांस ली पर उसको राहत इतनी आसानी से थोड़ी ना मिलने वाली थी मैने लंड को सुपाडे तक बाहर खीचा और फिर से एक ज़ोर का झटका मारते हुए अंदर डाल दिया तो इस बार वो चीख ही पड़ी पर अपनी पकड़ पूरी मजबूत थी तो बस उसको कस के रखा और धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा महक की गान्ड का छेद पूरी तरह से खुल गया था उसकी आँखो से आँसू निकल आए तो मैं अपनी जीभ से उस नमकीन पानी को चाटने लगा वो बोली बड़े बेदर्द हो मेरी पूरी जान ही निकाल दी है मैने कहा काश मेरे बस मे होता तेरी जान लेना वो तो ले नही सकता तो बस गान्ड ले कर ही काम चला रहा हूँ वो बोली आहिस्ता से पर मैने पूरी ताक़त से धक्के लगाने शुरू कर दिए थोड़ी देर मे ही उसकी दर्द भरी आहे मीठी सिसकियो मे बदल गयी

मैं पूरी फुर्ती से उसकी गान्ड मारे जा रहा था कितने गरम गद्देदार कूल्हे थे उसके जब लंड उनके बीच से अंदर बाहर होता तो मज़ा इतना की बस पूछो मत पर मैं ज़्यादा देर उसकी गान्ड नही मार पाया महक ने मना कर दिया तो मैने अपने लंड को चूत मे सरका दिया और उसके बोबो को दबाते हुए उसकी चूत मारने ल्गा कितनी कड़क चूचिया थी उसकी

आज वो भी अपनी गरमा गरम जवानी का रस घोंट घोंट कर मेरे उपर न्योछावर करे जा रही थी और मैं किसी प्यासे भंवरे की तरह उसका बूँद बूँद करके रस पिए जा रहा था महक की साँसे पल पल भारी हो ती जा रही थी और मेरा खून वीर्य बनकर बहने को तैयार हुए जा रहा था महक की टाँगे अब बिल्कुल उपर को हो गयी थी और वो मेरी गर्दन मे अपने हाथ डाले हुए मुझे किस करती हुई

अपनी कमर हिला हिला कर अपनी तरह से भी धक्के लगा रही थी और उपर से मैं लगा हुआ था उसके उपर तो दो जिस्म एक जान का ही सीन हो रहा था महक की रस से भरी चूत रिस रिस कर बह रही थी और फिर उसके हाथो ने मेरी पीठ पर अपनी पकड़ इतनी मजबूत हो गयी उसकी टाँगे मेरी कमरपर चिपक ही गयी थी और फिर उसका बदन इतनी ज़ोर से अकड़ गया कि वो चीखते हुए झड़ने लगी और ठीक उसी पल मेरे लंड से निकलता हुआ वीर्य उसके काम रस से मिलने लगा

पता नही मैं कितनी देर महक के उपर ही पड़ा रहा फिर मैं साइड मे लेट गया थोड़ी देर बाद ही महक को नींद आ गयी मैने अपने कपड़े संभाले और बाहर आ गया रात भी अपने आख़िरी पहर मे थी तो मैं अपने कमरे मे आ गया और बेड पर लेट कर सोने की कोशिश करने लगा तो मैने निशा को फोन लगा दिया कुछ घंटी जाने के बाद उसने कॉल पिक कर ली मेरी आवाज़ सुन कर वो बोली इतनी रात ही टाइम मिलता है क्या तुम्हे

मैने कहा सॉरी यार नींद खराब की तुम्हारी पर यार मेरा दिल नही लग रहा था तो सोचा दो पल तुमसे बात कर लेता हूँ तो नींद आ जाएगी वो बोली ये फिल्मी डायलॉग मत मारो और खुद भी सो जाओ और मुझे भी सोने दो सुबह मुझे बॅंक जाना है तो मैने कहा ठीक है अब आकर ही तेरी खबर लेता हू और दो चार बातों के बाद फोन रख दिया

और सोने की कोशिश करने लगा तभी मेरे फोन पर एक एमैल आया तो मैं उसे रीड करने लगा अब कहाँ नींद आनी थी मैने रूमसर्विस को दो गिलास दूध और कुछ ड्राइ फ्रूट्स का ऑर्डर दिया और फिर करीब आधे घंटे बाद मैं चुप चाप होटेल से बाहर खिसक लिया अब अपनी तकदीर मे दो पल का आराम कहाँ था ठंडी रात मे मैने पार्किंग मे खड़ी एक कार का लॉक तोड़ा

और उसे लेकर चल पड़ा अपनी मंज़िल की ओर करीब आधे घंटे बाद मैं एक बिल्डिंग के सामने खड़ा था सेक्यूरिटी गार्ड को छका कर मैं चुपके से एंटर कर गया और लिफ्ट लेकर 10थ फ्लोर की ओर चल पड़ा कुछ ही पॅलो मे मैं एक दरवाजे के सामने खड़ा था मैने अपनी गन पर साइलेनसर लगाया और मास्टर की से गेट को बिना आवाज़ किए खोल कर एंटर कर गया

दबे पाँव मैने तलाशी लेनी शुरू की तो पता चला कि फ्लॅट मे कोई नही था तो मैं अब चीज़ो को खंगालने लगा तो मुझे दो लॅपटॉप्स और कुछ फाइल्स जो किसी तरह का कोडेड ब्लूप्रिंट्स थे मिल गये अब मेरा वहाँ से खिसक लेना ही बेहतर था अपने रूम मे आया और काफ़ी देर तक उन ब्लूप्रिंट्स को समझन की कोशिश करने लगा पर कुछ खास समझ नही आया तो मैने लॅपटॉप को ऑन किया

कुछ प्रेज़ेंटेशन्स थे और बाकी मे बस मूवीस ही भरी थी पर उन प्रेज़ेंटेशन्स मे काफ़ी कुछ मसाला था तो मैने उसी टाइम अपने बॉस को जगाया और सारी बात बताई तो वो गंभीर स्वर मे बोले यार तूने तो यहाँ भी मोर्चा मार ही लिया बड़ी ही इंपॉर्टेंट इन्फर्मेशन है अब डेलिगेशन जाए भाड़ मे मैं उपर बात करता हूँ तुम जल्दी से एक शॉर्ट टीम बनाओ

और अपनी टास्क को हर हाल मे बिना किसी शक़ के कंप्लीट करना है और कोशिश करना कि यहाँ पर किसी को जान से नही मारना है वरना प्राब्लम हो जाएगी मैने कहा डॉन’ट वरी सर मैं अभी काम पर लग जाता हूँ और मैने अपनी ड्रेस चेंज करनी शुरू कर दी टाइम बहुत ही कम था और रात की फ्लाइट से हमे वापिस भी इंडिया जाना था कुछ घंटो की ही बात थी

 


बात कुछ यू थी कि लश्कर के कुछ लोग हमारे एनएसए चीफ जो कि हमारे साथ ही डेलिगेशन मे आए हुवे थे उनको किडनॅप करने का प्लान कर चुके थे पर हमारे एक सोर्स की वजह से हमे प्लान का पता चल गया था और हमारी परेशानी ये थी कि आज चीफ को आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी रिपोर्ट समिट मे देनी थी तो सब कुछ सेट था मैने तीन बार सेक्यूरिटी चेक कर ली थी

आने जाने का रूट भी देख लिया था कहाँ से क्या हो सकता है सबका एक मोक पायंट बना लिया था पर मैं जानता था कि अगर लश्कर की इनवोलव्मेंट होगी तो जाहिर है वो फ़िदायीन हमला करके चोका सकते है तो मैने खुद फ़ैसला किया कि मैं खुद चीफ के पीछे रहता हूँ पर्सनल असिस्टेंट बनकर सब काम पर्फेक्ट्ली था अपनी स्पीच के बाद चीफ ने टाय्लेट जाने की इच्छा की

और जैसे ही वो अंदर गये उन पर अटॅक हो गया , चूँकि मैं अब उनके साथ तो जा नही सकता था तो जैसे ही अंदर से हल्की सी आवाज़ आ ई मैं तुरंत ही बातरूम मे पहुच गया तो देखा कि चार लोग थे बॉस को पकड़ा हुआ था और उनका मूह रुमाल से बाँध दिया गया था पहले दो साइलेंट फाइयर मे ही मैने दो को तो उड़ा दिया था पर तभी उन दोनो ने चीफ को अपनी ढाल बना लिया

मैने कहा देख मेरा दिमाग़ खराब हो इस से पहले मामला सेट कर्लो मैं वादा करता हूँ कि तुम्हे जाने दूँगा पर तुम चीफ को इधर जाने दो तो उन्होने पश्तो भाषा और किसी और भाषा मे कुछ कहा जो मेरी बिल्कुल समझ नही आया पर इतना तो लगा कि ये लोग मेरी बात नही मानेंगे मैने माइक पर अपनी टीम मेंबर से कहा कि यार पूरी संभावना है कि

फाइरिंग होगी और गोलियो के साउंड से बात बिगड़ेगी तो तू इस फ्लोर के फाइयर अलार्म्स को ऑन कर्दे 3-4 मिनट मे मैं मामले को सम्हाल दूँगा उन्होने चीफ को कवर कर हुए था तो मैं भी बेबस सा था मेरी टीम ने उस पूरे फ्लोर पर अपनी मोजूदगी दर्ज कर दी थी और तभी फाइयर अलार्म बज उठा और स्प्रिंकलर्स से पानी टपकने लगा तो उन लोगो का ध्यान बँट गया और तभी चीफ ने अपनी उमर का ख़याल ना करते हुए

उनमे से एक की कलाई पर काट लिया तो उसने घबरा कर उन्हे धकेल दिया और अगले ही पल मैने उसे शूट कर दिया तो दूसरा वाला अँधा धुन्ध फाइयर करते हुए वॉशिंग रो की आड़ मे छुप गया मैने चीफ को खीचा और उनको साइड मे फेक दिया ताकि वो गोलियो की बोछार से सेफ रहे और खुद भी फाइयर करने लगा तभी मुझे मेसेज मिला कि होटेल की टीम

इधर ही आ रही है प्राब्लम को डिटेक्ट करने के लिए जितनी जल्दी हो सके काम पूरा करो मैने कहा चीफ को गेट से बाहर कर रहा हूँ बाहर सेक्यूरिटी दो तो फिर मैने जैसे तैसे करके चीफ को बाहर कर दिया और इसी थोड़ी सी लापरवाही मे मेरे कंधे को छूकर बुलेट निकल गया खून बहने लगा तो मैं दर्द से कराह उठा मैने पास के वॉश बेसिन को उखाड़ लिया और सामने की खिड़की पर दे मारा वो टर्रर्रैस्ट का ध्यान उधर बटा और उसी पल मे मैने स्लाइड करते हुए

उसके पाँव पर लात मार दी इस से पहले कि वो गिरता मैने उसका हाथ से पकड़ा और सामने की दीवार पर दे मारा उसका चेहरा शीशे से टकराया और पलक झपकने से पहले ही मैने उसका घुटना तोड़ दिया वो दर्द से करहने लगा मैने टीम को अंदर आने को कहा और कहा कि तलाशी लो साले के पास कही कोई एक्सप्लोसिव या साईनाइड तो नही है पर ऐसा कुछ नही मिला टाइम अब कम था मैने बॉस को कहा एक को ज़िंदा धर लिया है बॉस बोले

आइ विल मॅनेज, लिफ्ट का यूज़ करके पार्किंग लॉट मे पहुचो अपनी कार रेडी है और फिर अगले 5 मिनट मे हमारी कार दुबई की सड़को पर दौड़ रही थी

मेरे घाव से काफ़ी खून बह रहा था और दर्द भी बहुत हो रहा था बॉस का मेसेज आ गया था उन्होने बताया था कि चीफ को थोड़ी बहुत चोट लगी है बाकी कोई बड़ा इश्यू नही है बाकी जो तुम तोड़ फोड़ कर के गये हो मैं संभाल रहा हूँ तुम सीधा अबूधाबी के लिए निकलो वहाँ अपने आदमी मिलेंगे और फिर तुम वहाँ से सीधे देल्ही के लिए जा रहे हो

मैने कहा वो सब तो ठीक है सर मुझे मेडिकल ट्रीटमेंट की शायद ज़रूरत है तो वो बोले किसी भी तरह से अबूधाबी पहुचो सब इंतज़ाम है वहाँ पर तो फिर गाड़ी बस दौड़ती ही रही रास्ते मे कुछ पेनकिलर्स ले लिए थे और ज़ख़्म को बाँध लिया था पर आराम नही मिल रहा था तो खैर छुपते छुपाते रात को हम लोग उधर पहुच ही गये तो सबसे पहले मैने अपने घाव की ड्रेसिंग करवाई

पता ही नही चला कि कब दवाई के गहरे असर से नींद ने मुझे अपने आगोश मे ले लिया उठ ते ही रफ़ीक ने मेरा हाल पूछा और खाने की व्यवस्था की उसने बताया कि आप लोगो के नये पासपोर्ट रेडी है आप जब चाहे निकल सकते है आप बता दे तो मैं टिकेट्स का अरेंज्मेंट करवा देता हूँ मैने कहा वो सब तो ठीक है पर इस मेहमान का क्या तो वो बोला सर

आप इसे इधर ही छोड़ दे , इसे पानी के रास्ते से पहुचा दिया जाएगा मैने कहा बॉस से बात हुई तो उसने मुझे सब बताया वैसे भी अब इधर अपना कोई काम नही था तो मैने कहा ठीक है कल सुबह की टिककटेट्स करवा देना वो बोला हो जाएगा सिर अगले दिन हम ने देल्ही की फ्लाइट पकड़ ली लंड करते ही सबसे पहले आर&ऑ हेडक्वॉर्टर गया बॉस को तो दो दिन बाद आना था

तो मैं साइबर सेल गया और कुछ इंपॉर्टेंट इन्फर्मेशन के लिए बोला साथ ही अफ़ग़ान-पाकिस्तान बॉर्डर की जियोग्रॅफिकल इमेजस और उधर के लोकल अरेंज्मेंट की रिपोर्ट भी चाहिए थी मुझे काम करते करते रात काफ़ी हो गयी थी सोचा कि अब इतनी रात को निशा को तंग करना ठीक नही है तो फिर मैं ऑफीस मे ही काम करता रहा कुछ पेंडिंग पड़े प्रॉजेक्ट्स की फाइल भी क्लियर कर के रख दी

 
तो करीब 11 बजे मैं एजेन्सी से बाहर निकाला अपना बॅग उठाए और ऑटो पकड़ कर घर आ गया तो देखा की ताला लगा हुआ था चुपके से गेट खोला और फटकार के सो गया शाम करीब 7 बजे डोर बेल की आवाज़ से मेरी आँख खुली मैने गेट खोला तो निशा को देख कर दिल खुश हो गया उसने पूछा तुम कब आए मैने कहा बस दोपहर को आया था

उसने अपना बॅग रखा और बोली कॉफी बनाती हूँ तुम्हारे लिए मैने कहा नही तुम थकि हुई आई हो चेंज कर्लो मैं बना ता हूँ किचन मे गर्मी सी लग रही थी तो मैने शर्ट उतार कर रख दी पर मैं भूल गया था कि निशा से चोट छुपानी है वरना खम्खा चिंता करेगी पर ध्यान नही रहा था जब मैं कॉफी कप्स लेकर बाहर आया तो वो मेरे बाजू पर बँधी पट्टी को देख कर बोली अरे ये क्या हुआ है चोट कैसे लगी तो मैने कहा कुछ नही यार कुछ खरोचे लग गयी है वो बोली क्या करते रहते हो तुम अगर कोई सीरीयस इंजुरी हो जाती तो मैने कहा छोटा –मोटा चलता रहता है डियर उसके आने से इस दो कमरो के घर मे जैसे रोनक सी आ गयी थी बड़े करीने से सज़ा सा दिया था उस मकान को उसने कॉफी पीते पीते

मैं सोचने लगा कि जब मिथ्लेश मेरे जीवन मे आ जाएगी तो कितना अच्छा रहेगा बिल्कुल ऐसे ही वो मेरा ख़याल रखा करेगी, जब मैं शाम को थक कर आउन्गा तो वो मेरा हाल पूछेगी जब मैं बाहर रहूँगा तो मेरा इंतज़ार करेगी मैं इन्ही ख़यालो मे गुम था कि तभी निशा बोली कहाँ खो गये हो जल्दी से बताओ डिन्नर मे क्या खाओगे मैने कहा जो मर्ज़ी हो बना लो

उसके किचन मे जाते ही मैने झट से अपना इंडिया वाला सिमकार्ड फोन मे डाला और मिता को कॉल किया फर्स्ट रिंग मे ही उसने फोन उठा लिया और मुझ पर अपने सवालो की बरसात कर दी वो बोली कमिने कहाँ चला गया था तू पता है कितने दिन हो गये कितना परेशान थी मैं एक एक पल , पता है मेरा मन कितना घबरा रहा था मैने कहा यार ऐसी जगह पोस्टिंग थी

 


यहाँ नेटवर्क होता ही नही है बड़ी मुश्किल से आज कॉल किया है तब जा कर वो शांत हुई और फिर बोली कब आओगे मिलने के लिए मैने कहा यार अभी मामा के बेटे की शादी है तो 5-7 दिन उधर ही जाना होगा उसके बाद उधर से ही सीधा तेरे पास आता हूँ तो वो बोली ठीक है जब भी आओ बता देना मम्मी भी बोल रही है अजमेर आने को तो मैं उन्हे उसी टाइम बुला लूँगी

फिर तुम भी मिल लेना कुछ भी करके मना लेना सबको अब शादी मे कितनी देर है मैने कहा यार मैं तो खुद जल्दी से अपनी अमानत को अपने घर लाना चाहता हूँ पर क्या करू लाइफ का एक पल का भी पता नही है आज यहा कल कहाँ बस अबकी बार कर ही डालते है तो फिर बाते लंबी खिचती ही चली गयी अब कई दिनो बाद जो फोन किया था तो फिर दिल के अरमान शब्दो के रूप मे बाहर आने ही थे

मिता बोली आज कल तुम पराए पराए से लगने लगे हो पता नही क्यो मैने कहा यार कम से कम तू तो ऐसा ना बोल पता है कितनी मुश्किल भरी रही है मेरे सामने चलने को हाथ मे बुलेट का घाव हुआ पड़ा है तो मिता घबराते हुए बोली ओह! माइ गॉड कैसे लगी चोट तुम्हे और अभी तबीयत कैसी है मैने कहा इतना ओवर्रिक्ट ना कर अभी सब ठीक है इधर ऐसा तो चलता ही रहता है

काफ़ी देर तक बाते होती ही रही फिर मैने फोन कट कर दिया कुछ देर बाद निशा आके बोली तो झूठ क्यो बोला कि मामूली घाव है मैने कहा यार बस तुम चिंता करती इसी लिए नही बताया तो वो मेरे कंधे पर सिर टिकाते हुए बोली अब इतनी पराई भी नही हूँ मैं जो अपना हाले दिल छुपाने लगे हो मैं उसके सर को थपकते हुवे बोला पागल तुझसे कभी कुछ छिपाया है क्या मैने आजतक

तुम और मैं दो नो एक ही तो है मैं तुमसे कहाँ जुदा हूँ तो वो बोली चलो ज़्यादा फिल्मी बाते ना बनाओ और आ जाओ खाना खाते है मैने कहा चलो फिर अगले कुछ दिनो तक बस यही दिनचर्या चलती रही अपने दिन बीत रहे थे निशा साथ थी तो पता ही नही चला कि कब दिन हो कब रात ऐसे ही करके बस भाई की शादी मे करीब 8-9 दिन ही बचे थे तो मैने 15 दिन के लिए छुट्टी ले ली और जाने की तैयारिया करने लगा




उसकी हसरत है सामने बिठा के देखू

मैं मुखातिब हूँ और तेरा हाल भी पूच्छू

सीने मे छुपि है आग मुलाकात की ख्वाहिशों की

मेहंदी लगे हाथो मे तेरा नाम छुपा के रखूं

तू अश्क़ ही बन के समा जा मेरी आँखो मे

चाहत तो बस इतनी है मैं आईना देखु तो तेरा अक्स ही देखूं

ए इश्क़-ए-मोहब्बत पूच्छू इन्न गूछो सितारो और हवाओ से

तुझसे ही मगर आके कभी तेरा नाम ना पूच्छू

ए मेरे तमन्नाओ के सितारे तू बस यू ही रौशन रहे

तेरे आने तक तो मैं ये जिस्म शब-ए-गम को ना सौपुं

एक तेरी हसरत ही मेरी मुकाम हुई है

पूच्छू खुदा से भी तो तेरे सिवा कुच्छ ना पूच्छू

इश्क़ जालिम है जान पे बन आई है जान के भी

अब जिंदगी-ए-सफ़र को क्या पढ़ु पढ़ु तो बस तेरे ही नाम का कलमा पढ़ु




पता नही क्यो मुझे कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था एक बैचैनि सी लग रही थी मुझे,मैं अपना सर निशा की गोद मे रख कर लेट गया तो वो मेरे बालो मे अपनी उंगलिया . हुए बोली क्या बात है कुछ परेशान से लग रहे हो मैने कहा पता नही यार कभी कभी ऐसा हो जाता है कि मन भटकने सा लगता है वो बोली जॉब का प्रेशर है क्या

मैने कहा अरे नही यार बस ऐसे ही , लगता है कि जैसे एक ख़ालीपन सा है मेरे अंदर , लगता है जैसे कुछ छूट रहा है मेरे हाथो मे वो बोली स्ट्रेस हो गया है एक काम करो मैं तेल की मालिश कर देती हूँ सर मे आराम मिलेगा तो मैने मना करते हुए कहा नही बस तुम पास हो तो फिर किसी दवाई, किसी उपचार की ज़रूरत नही है इस दुनिया मे बस एक तुम ही तो हो जो इस कदर समझती हो मुझे

मैने कहा तू भी चल मामा के यहाँ पर बोर हो जाएगी तो उसने कहा नही , मैं कैसे आ सकती हूँ, फिर फॅमिली भी आएगी मैं कोई कॉंट्रोवर्सी नही चाहती और फिर चाह कर भी नही जा सकती बॅंक मे बहुत काम है आजकल देल्ही मे जॉब करना बड़ा ही मुश्किल है और हमारी ब्रांच तो वैसे ही इतनी बिज़ी रहती है मैने कहा यार पर मुझे तेरी चिंता लगी रहेगी तो वो बोली अच्छा जी

जैसे आपसे पहले तो मैं जी ही नही रही थी, भला मुझे क्या होगा तुम जाओ और अच्छे से शादी एंजाय करना और कुछ फोटो भी ले कर आना

हां पक्का लेकर आउन्गा मैने कहा , फिर मैने अशोक भाई को फोन किया और कहा कि मैं कल आ रहा हूँ शाम तक पहुच जाउन्गा तो उसने कहा कि आते ही फोन कर देना आज कल साधन शाम को कम ही चलते है तो मैं सहर आ जाउन्गा पिक करने को मैने कहा ठीक है भाई

 
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