नारायण मुस्कुराकर बोला "मुझे नहीं पता था कि हमारे स्कूल की सबसे ज़्यादा काम करने वाली लड़की एक लड़की
को बचाने के लिए इतना झूठ भी बोल सकती है.. वैसे तुम दोनो की जानकारी के लिए मैं बता दू कि उस पीयान
ने मुझे वो बॉटल भी दिखा दी थी और जहाँ वो शराब गिरी वो जगह भी"
ये सुनके रीत की आँखों में से आँसू टपकने लगे मगर रश्मि फिर भी नारायण से रीत की तरफ से
माफी माँगने लगी.. जब नारायण ने दोनो लड़कियों को जाने के लिए कहा तब रश्मि ने पलट कर कहा
"ठीक है सर वैसे आप भी कम नहीं हो जो लड़कियों को खेलते हुए खिड़की से देखते रहते हो.."
ये सुनके नारायण थोड़ा आश्चर्य चकित हो गया.. रश्मि ने आगे बढ़के और कहा "आपको क्या लगता है कि आप बहुत चालाक हो जो आपकी हर्कतो के बारे में किसी को पता नही चलेगा.... मैने एक नही कयि बारी आपको देखा है... वैसे आपको स्कूल के कपड़ो में लड़किया पसंद है ना इसलिए तो मैं रीत को स्कूल के कपड़ो में ही लेके आई हूँ"
रश्मि के बड़बोले अंदाज़ को देख कर नारायण तो हैरान परेशान ही रह गया.. उसी दौरान रीत ज़ोर ज़ोर से रोने का नाटक करने लगी... नारायण रस्मी को देख कर बोला "अपनी दोस्त को बोले नाटक बंद करें और मेरे पास आए.."
रीत ये सुनके नारायण के पास जाके खड़ी हो गयी.. ऊपर से नीचे रीत को देखने के बाद नारायण ने रीतको
उसकी टाइ पकड़के उसको खीचता हुआ अपने कमरे ले गया और उसको बिस्तर पे फेंक दिया.. रश्मि को लगा उसका
काम हो गया है और जब वो घर के बाहर जाने लगी तो नारायण बोला "तुम्हे जाने के लिए किसने कहा"
नारायण के इस निराले अंदाज़ को देख कर रश्मि पीछे नही हटी और अंदर कमरे के अंदर आ गई....
नारायण एक कूसरी पे बैठा हुआ था और उसने रस्मी को बोला "अगर तुम्हे माफी चाहिए तो जैसा मैं कहु वैसा
करना पड़ेगा" रीत और रश्मि ने मंज़ूरी दी.. फिर नारायण बोला "रश्मि रीत के पास जाओ और
उसके रसीले होंठो को जाके चूम लो" रश्मि रूपाल के पास गयी और 2 सेकेंड उसके गोर सेचेहरे को देख कर
उसने अपने होंठो को उसके होंठो पर टीका दिया.. रीत को पहले झिझक हुई मगर फिर वो भी रश्मि को चूमने लगी.. दोनो के हाथ एक दूसरे के बदन पे चल रहे थे.... नारायण को यकीन नही हुआ कि रश्मि उस छोटी उम्र
की लड़की को चूम रही है... वो नही जानता था कि रश्मि के ऐसे करने की वजह क्या है और उसको इस बात से कुच्छ
फरक भी नही था...
नारायण ने धौस जमाते हुए बोला "चलो अब दोनो एक दूसरे को उपर से नंगा करो
" जैसे कि पहले बताया था कि रश्मि एक शरीफ रिया सेन लगती थी मगर अब नारायण का नज़रिया बदल गया था...
दिखने में वो रिया सेन जैसी ही दुबली थी मगर अब शरीफ बिल्कुल भी नही थी....
नारायण की एक आवाज़ पर रश्मि ने रीत की शर्ट को उस नीली स्कर्ट के बाहर निकाला और बारी बारी उसके बटन्स
खोलने लगी.... रीत की शर्ट उतरते ही रश्मि के हाथ उसके मम्मो पे पड़े....
हर स्कूल गर्ल की तरह रीत ने भी सफेद ब्रा पहेन रखी थी.... रीत काफ़ी गोरी और लंबी थी..
उसका बदन सही सही जगह पर फूला हुआ था और उसके बाल काले घने थे...
ये मानलो कि पक्की पंजाबन थी रीत.... और उसके मुक़ाबले में रश्मि भी गोरी थी मगर काफ़ी पतली और लंबी थी..
. तो नारायण की किस्मत इतनी अच्छी थी कि उसको दो एकदम अलग तरह की लड़कियों को आज चोद्ने का मौका मिल रहा था....
दोनो लड़किया अपने घुटनो के बल नारायण के बिस्तर पे बैठी थी..... कमरे में एक बल्ब जला हुआ था जोकि काफ़ी
रोशनी दे रहा था.... रश्मि ने अपना सीधा हाथ रीत की पीठ की तरफ बढ़ाया और उसकी सफेद
ब्रा के हुक्स एक झटके में खोल दिया... रीत की पीठ पूरी नंगी हो गयी थी मगर वो ब्रा उसके
मम्मो पर टिकी रही.... इससे पता चल रहा था कि वो ब्रा कितनी टाइट थी और उसके मम्मे कितने गोल है....
रश्मि रीत के गर्दन को चूमते चूमते उसके स्तनो के तरफ बढ़ी और रीत की ब्रा को अपने दातों से
पकड़ के बिस्तर पे गिरा कर उसकी चुचियाँ को चूसने लगी... मस्ती में रीत अपने बालो में उंगलिया डालकर
ऊहह आहह कर रही थी.... रश्मि पूरी तरह रीत पर हाबी हो चुकी थी... उसने रीत को बिस्तर पे लिटा दिया और
उसके पेट पे जाके बैठ गई... रश्मि को किसी बात की भी झिझक नही थी और इस बात से नारायण का लंड काफ़ी खुश था.... रश्मि ने अपने कुर्ते को पकड़कर ज़मीन पर उतार फेका... उसने एक गुलाबी ब्रा पहेन रखी थी जिसका
एक स्ट्रॅप उसके कंधे से नीचे गिरा हुआ था.... जब रश्मि रीत के बदन को चूमने लगी तब रीत ने अपने
हाथो से रश्मि के ब्रा के हुक्स खोल दिए.... नारायण अपने जागे हुए लंड को ज़ोरो से सहलाने लगा...
रश्मि के स्तन छोटे तो थे मगर उनपे गहरे भूरे रंग की बड़ी चुचियाँ को देखते वो मचल उठा.....
रश्मि रीत के पेट के उपर से उठी और उसकी नीली स्कर्ट के अंदर हाथ डालकर उसने उसकी पैंटी को उतार दिया और
उसको नारायण के पास फेंक दिया... नारायण एक कुत्ते की तरह उसको सूँगने लग गया...
रश्मि ने रीत को स्कर्ट उपर कर दिया और उसकी गुलाबी चूत को चाटने लगी.... ये देख कर नारायण का गला
सूख गया था.... रीत की सिसकियाँ पूरे कमरे में फेल गयी थी..... रश्मि एक जंगली बिल्ली की तरह रीत की
चूत के पानी को दूध समझके चाटने लगी.... रीत की चूत भी रुकने का नाम नही ले रही थी...
नारायण इतना गरम हो गया था कि वो कुर्सी से उठा और अपने कपड़े जल्दी से उतारके फिर से बैठ गया...
दोनो लड़किया नारायण को नंगा देख कर हल्के हल्के गिलगियाने लगी.... नारायण का लंड भी पानी छोड़ने लगा
था जिसको देख कर रश्मि ने रीत को बिस्तर पे अकेले छोड़ दिया और अपने सर के लंड के पास चली गयी.....
रश्मि ने अपने नाख़ून नारायण की जाँघो पर एक एक करके बढ़ाए और सीधा उसके लंड को जाकड़ लिया....
अपना मुँह खोलते हुए उसने लंड को चूसना शुरू किया.... रीत भी बिस्तर से उठी नारायण की कुर्सी के पास जाके
खड़ी हो गयी... नारायण ने उसकी चिकनी कमर को पकड़ा और अपनी गोद मे बिठा दिया.... रीत की गान्ड
नारायण की उल्टी जाँघ पर थी और उसका उल्टा पाओ नारायण की सीधी टाँग पर.... नारायण रीत को चूमने लगा और
रीत ज़रा भी पिछे नही हटी... रश्मि ने मौका देखकर अपनी दो उंगलिया रीत की टाइट चूत में घुसा दी...
रीत दर्द के मारे चिल्लाई मगर रश्मि रुकी नही और अपनी उंगलिया अंदर बाहर करने लगी....
नारायण के लंड से अब रहा नही जा रहा था और वो कुर्सी से उठा और दोनो लड़कियों को कमर से पकड़कर बिस्तर
पे ले गया.... दोनो लड़कियों ने एक दूसरे को काफ़ी गरम कर दिया था इसलिए नारायण अब वक़्त बर्बाद नही करना चाहता था... उसने रीत को बिस्तर पे लिटा दिया और उसकी टाँगो को अपने कंधे पे रख दिया.... अपने लंड को उसकी गीली चूत में हल्के हल्के घुसाने लगा... रीत दर्द के मारे पागल हुई जा रही थी तो रश्मि ने उसके होंठो को अपने
होंठो से सिल दिया... नारायण अब रीत की चूत को चोद्ने लगा था.... रश्मि ने अपनी सलवार के नाडे को
खोला और उसे नीचे गिरा दिया.... उसने अपनी कच्छि को भी उतार फैंका और रीत के माथे की तरफ बैठ गयी ताकि
रीत उसकी चूत को चूस पाए.... रीत ने अपनी गुलाबी ज़ुबान निकाली और चूस को चाटना शुरू किया...
रश्मि की चूत नारायण की आँखों के सामने थी और उसपे बाल देख कर उसे अपनी पत्नी शन्नो की याद आ गयी...
नारायण अपना हाथ बढ़ाकर रश्मि की बड़ी चुचियाँ को मसल्ने लगा.... तीनो एक दूसरे को पूरी तरह खुश कर रहे थे....
रश्मि के जिस्म की प्यास बढ़ गयी थी और उसने नारायण से चुदवाने की इच्छा जगाई तो नारायण ने रीत की चूत
में से लंड निकाला और खुद बिस्तर पे लेट गया... रश्मि उसके लंड पे जाके बैठ गयी....
नारायण का लंड रश्मि की चूत में बड़ी आसानी से अंदर बाहर हो रहा था मानो कि रश्मि की चूत में तेल
डाला हुआ हो.... रीत से अकेले रहा नही गया और नारायण से अपनी चूत चुसवाने लगी....
पहली बारी नारायण को चुदाई मे इतना मज़ा आ रहा था.... उसे लग रहा था कि भगवान ने उसे भोपाल अकेले
आने का अफ़सर दिया है.... दोनो लड़किया मस्ती में मदहोश हो चुकी थी और अपने स्तनो को मसल्ने लगी थी...
जब नारायण थक गया तो रश्मि उसके लंड पर कूदने लगी....
फिर रश्मि और रीत नारायण के उपर से उठे और बोले "सर अब हम आपको मज़ा देंगे" दोनो रॅंडियो की तरह
नारायण के पैरो के पास बैठ गयी और बारी बारी उसके लंड को पकड़ा और चूसना शुरू कर दिया..
नारायण ने अपनी आँखें बंद करली क्यूंकी ये सब वो सपने में ही देखा करता था और आज हक़ीक़त में हो
रहा था.. नारायण के लंड पर दोनो लड़कियों की चूत का स्वाद आ रहा था... नारायण ने फिर अपने लंड को पकड़ा
और उसे ज़ोर से हिलाता हुआ अपना सारा पानी रश्मि और रीत के चेहरे पे डाल दिया.... उसका लंड धीरे धीरे
गिरने लगा.... वो इतना थक गया था कि उसे कुर्सी का सहारा लेके बैठना पड़ा... दोनो लड़किया एक दूसरे
को देख कर मुस्कुराने लगी और नारायण को उस हालत में छोड़के उस घर से चली गयी नारायण ने जल्द से
अपना लंड रश्मि की चूत में से निकाला और उसे हिलाने लग गया... पूरे कमरे में पसीने और वीर्य की
सुगंध भरी हुई थी... नारायण कुर्सी पे बैठा अभी भी पिछले गुज़रे हुए घंटे पर यकीन नही कर पा रहा था...
शाम को डॉली अकेले ड्रॉयिंग रूम रूम में बैठी बैठी टीवी देख रही थी... शन्नो अपने कमरे से निकली नही थी और
चेतन का कोई अता पता नही था... डॉलीने जब उसे कॉल भी करा तब उसने फोन को काट दिया और मैसेज करते हुए कहा कि वो शाम के बाद ही घर आएगा.... डॉली के पास उसकी दोस्त प्रिया से न्योता आया था उसके घर आने का
तो वो सोचने लगी कि इसके बाद तो उसे अपनी सहेली से मिलने का मौका तो मिलेगा ही नही तो क्यूँ ना वो आज ही चली जाए.... डॉली ने शन्नो को अभी बताना ज़रूरी नहीं समझा क्यूंकी वो कुच्छ ना कुच्छ बहाना करके उसे रोक लेती इसलिए वो जल्दी से स्लावार कुर्ता पहेन कर शन्नो के कमरे में गयी और उसे सारी बात बता दी...
शन्नो उसे तुरंत रुकने के लिए कहना चाहती थी क्यूंकी इस बीच में अगर चेतन आ गया तो नज़ाने क्या हो
जाएगा मगर उसके बोलने से पहले ही डॉली कमरे से चली गयी.... शन्नो बिस्तर से उठी नही वही काफ़ी देर तक
लेटी रही मगर उसकी दिल की धड़कने तब बढ़ गयी जब घर की घंटी बजने लगी... उसे पता चल गया था कि ये
उसका बेटा चेतन ही है मगर फिर भी ये ख़याल वो दिमाग़ से निकालने की पूरी कोशिश कर रही थी...
जब उसने दरवाज़ा खोला तो चेतन उसकी नज़रो के सामने खड़ा था... शन्नो ने शरम के मारे अपनी नज़रे
झुका ली और चेतन बिना कुच्छ कहें सीधा अपने कमरे में चला गया.... शन्नो भी फिर अपने कमरे को बंद
करके बैठ गयी.... शाम का सूरज काफ़ी देर पहले ढल चुका था और दोनो कमरे के दरवाज़े बंद पड़े थे...
डॉली की भी कोई खबर नही थी... शन्नो ने खड़ी में समय देखा तो 8 बजने वाले थे...
वो बाहर ड्रॉयिंग रूम रूम में गयी और डॉली के मोबाइल पर कॉल लगाया.... मगर इस कॉल के बाद उसकी परेशानी और
बढ़ गयी थी... डॉली अपनी सहेली के घर रुकने की माँग करने लगी और जब शन्नो ने उसे डाँट के घर
आने के लिए कहा तो उसकी सहेली प्रिया ने फोन पे शन्नो को मनाने की कोशिश करी और शन्नो को अंत में मानना ही पड़ा....
घड़ी पर समय बढ़ता जा रहा था और बड़ी हिम्मत दिखाकर शन्नो चेतन के कमरे की तरफ बढ़ी...
दरवाज़े को हल्के से खटखटाते हुए उसने एक दो बारी चेतन कोपुकारा मगर अंदर से कोई जवाज़ नही आई...
शन्नो ने धीरे से दरवाज़ा खोला तो चेतन बिस्तर पे पड़ा सो रहा था... शन्नो की धड़कने शांत हो गयी मगर फिर चेतन की आवाज़ आई "क्या हुआ"
शन्नो की ज़ुबान लड़खड़ाते हुए बोली "डॉली आज नही आएगी तो तुम्हे कुच्छ खाना खाना है"
उधर..................
" नारायण ने पहली बारी दो लड़कियों को साथ में चोदा और वो भी दोनो उसकी स्कूल की लड़किया थी....
अब इस चुदाई से नारायण की ज़िंदगी पर क्या असर पड़ेगा?? क्या वो इसे हसीन ख्वाब समझकर भूल जाएगा या
फिर ये हसीन लम्हा उसके अंदर का शैतान जगा देगा??
शन्नो और चेतन एक पूरी रात अकेले घर पे बिताएँगे... शन्नो को चेतन से डर है और शायद उसे अपनी जिस्म की प्यास
से भी डर है..."
ये सुनकर चेतन ने अपने उपर से चादर हटाई और शन्नो की तरफ देखते हुए बोला "तो इसका मतलब आज पूरी रात हम
खिड़की में से हल्की सी चाँद की रोशनी आ रही थी और शन्नो चेतन के चेहरे को देख कर और भी ज़्यादा घबडा गई...
उसके कदम वही रुके रह गये... चेतन बिस्तर से उठ कर उसकी तरफ बढ़ने लगा और शन्नो एक दम से मूडी और कमरे के बाहर जाने लगी... उसका एक कदम कमरे के बाहर जैसी ही पड़ा तभी उसका बदन उसके बेटे की गिरफ़्त में आ गया...
शन्नो ने घर आने के बाद कपड़े नही बदले थे... वो एक लाल हारे रंग के सलवार कुर्ते में थी जोकि गर्मी
के लिए बनाया गया था यानी के काफ़ी पतला कपड़ा था... उसके उपर जब चेतन अपना हाथ चला रहा था तो शन्नो को
वो अपने बदन पर ही महसूस हो रहा था.... शन्नो आधी कोशिश कर रही थी कि वो चेतन की पकड़ से निकल सके और
सच बात तो यह थी कि चेतन ने उसको बड़े प्यार से अपनी बाँहो में ले रखा था...
शन्नो की गर्दन को चूमते हुए वो बोला "मम्मी मुझे ज़बरदस्ती करना पसंद नहीं है"
ये कहकर उसने शन्नो को आज़ाद कर दिया मगर शन्नो वही खड़ी रही... शन्नो चेतन से नज़रे नहीं मिला पा रही थी
मगर उसने हल्के से पूछा "क्या मिल रहा है तुम्हे ये करके??" शन्नो अभी भी चेतन के बदन से कुच्छ फुट दूरी में थी.... चेतन बोला "मैने और मेरे दोस्तो ने अपनी एक टीचर को चोदा था... सच बोलू मुझे इस बारे में सोचना भी
पसंद नही था मगर जब मैने उसके बदन को पहली बारी नंगा देखा तो मेरे होश उड़ गये...
उस बदन पे लटक रहे तरबूज़ो को छुकर ही उनका रस पीने का मन कर गया.... उसकी चूत को चोद्ते हुए जो
खुशी मैने पाई वो मैं उस वक़्त ज़ाहिर नही कर सकता था...." इससे पहले कुच्छ और चेतन कह पाता शन्नो वहाँ से
चली गयी मगर चेतन ने उसे रोका नही वही खड़ा रहकर मुस्कुराता रहा....
शन्नो अपने कमरे में गयी और दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया.... उसका दिल अभी भी ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था....
वो सारे शब्द जो चेतन ने उसे कहें वो उसके दिमागे में घूम रहे थे... वो सोचने लगी कि मेरे बेटे ने अपनी
स्कूल की टीचर को भी चोद रखा है... मेरा बेटा कब इतना बड़ा हो गया पता ही नही चला...
ये सोचते सोचते उसका हाथ अपने आप सलवार के अंदर घुश गया और वो चौक गयी....
उसकी पैंटी चूत के पानी से गीली हुई पड़ी थी... उसे यकीन नही थाकि उसका बदन इस तरह हवस में डूबा
हुआ है कि उसके बेटे के छुने मात्र से ही उसका ये हाल हो गया है.... वो बिस्तर पे बैठी और अपने आप को शांत करने की कोशिश करती रही... उसको लगा कि अगर मैं अपने बदन को खुश कर पाई तो शायद मुझे किसी और की ज़रूरत ना हो...
उसने जल्दी से अपनी अलमारी खोली और अपनी स्लावार नीचे गिरा कर अपनी चूत में लंड डालने लगी...
वो लंड को ऑन तो नही कर सकती थी क्यूंकी उसका बेटा वो आवाज़ सुन लेता... काफ़ी कोशिशो के बाद भी उसके जिस्म की प्यास रुकी नही बल्कि और बढ़ गयी.... बारी बारी उसने अपने बदन को नंगा कर दिया और कभी अपने मम्मो को तो कभी अपनी चूत को शांत करने की कोशिश कर रही मगर कुच्छ फ़ायदा नहीं हुआ.... उसको हल्की हल्की आवाज़ अपने कमरे के बाहर से आने लगी... उसके दिल ने उसको कयि बार रोका कि वो अपने कदम को रोके मगर वो रुके नही...
तड़पति हुई उसने अपने कमरे का दरवाज़ा खोला और ड्रॉयिंग रूम रूम का टीवी चल रहा था.... उसे चेतन का चेहरा तो
दिखा नही मगर सामने गंदी पिक्चर चल रही थी... उस चुदाई के दृश्य को देखकर शन्नो का जिस्म गरम होने लगा....
अपने आप ही उसका हाथ अपने बदन को सहलाने लगा... उसने अपने आप को दरवाज़े के पीछे च्छुपाने की पूरी कोशिश
करी ताकि उसे चेतन ना देख सके मगर किसी ताक़त ने वो पूरा दरवाज़ा को धक्का देके खोल दिया...
चेतन ड्रॉयिंग रूम रूम में नहीं बल्कि उसके कमरे के दरवाज़े के पास ही खड़ा था.... उसे शन्नो की हर्कतो के बारे
में भी पता था... टीवी की रोशनी में शन्नो का नंगा बदन सॉफ से चेतन की आँखो के सामने था.....
इस बारी चेतन नही रुका और अपनी मम्मी के मम्मो पर एक दम से झपटा मार दिया....
बड़ी बेदर्दी से वो उन्न मम्मो को मसल्ने लगा..... शन्नो का दिल मना कर रहा था मगर उसकी चुचियाँ मस्ती में
सख़्त हो गयी थी..... चेतन ने ज़रा भी समय बर्बाद नही करा और अपनी एक उंगली शन्नो की चूत में घुसा दी और
शन्नो दर्द में उछल पड़ी.... शन्नो की चूत काफ़ी गीली हो चुकी थी तो चेतन की उंगली पूरी तरह अंदर बाहर जा रही थी.... चेतन अपना दूसरा हाथ शन्नो की पीठ पर ले गया और उसको बड़ी प्यार से सहलाने लग गया....
शन्नो एक एक कदम पीछे होती गयी मगर चेतन भी उसके साथ साथ पीछे जाता गया....
चेतन नेशन्नो को धक्का दिया और वो बिस्तर पे जा गिरी.... शन्नो के गोल मम्मे हल्की सी निकली हुई तोंद मोटी जांघें
बहता हुआ चूत का पानी और गोरा चेहरा चेतन के सामने मस्ती में झूल रहा था.... मगर चेतन ने शन्नो को
उसके बाद छुआ नही और वहाँ से वापस जाने लगा.... शन्नो बिस्तर से उठी और अपने बेटे को पीछे से जाकर रोक लिया.... शन्नो फर्श पे बैठी और चेतन के पाजामा को नीचे कर दिया... चेतन का लंड उसके चेहरे की तरफ उचक कर आया...
चेतन की तरकीब पूरी तरह कामयाब रही... उसकी मा पूरी तरह आगोश में थी और अब बलात्कार नही बल्कि
हवस का प्यार कहलाया जाएगा जैसा चेतन को पसंद था....
शन्नो ने अपने बेटे को लंड को पकड़ा और उसको चूमने लगी... चेतन ने शन्नो अपने लंड से दूर करा और अपने पाजामे
को अपनी टाँगो से निकालकर बिस्तर पे बैठ गया... शन्नो घुटनो पे चलके चेतन के पास गयी और चेतन के लंड
को चूसने लगी.... चेतन ने शन्नो के बालो को क्लिप की जाकड़ से आज़ाद किया और अपनी मम्मी को अपना लंड चूस्ते हुए देखने लगा.... ज़्यादा रोशनी ना होने के कारण चेतन ने पीछे की तरफ हाथ बढ़ाया और टेबल पे रखे लॅंप को ऑन कर दिया....
कमरे में रोशनी फेलते ही शन्नो ने लंड को चूसना बंद कर दिया मगर अभी भी उसके मुँह में लंड था...
अगले ही सेकेंड उसने चूसना फिर से शुरू करा... अपनी मम्मी को ऐसी रोमांचक हालत में देखकर चेतन का मन मस्ती
में झूम रहा था.... शन्नो को महसूस हो रहा था कि उसकी चूत इतनी गीली हो चुकी थी कि उसका पानी जाँघो से बहता
शन्नो को अपने बेटे से कहने में शरम आ रही थी मगर हर एक सेकेंड
उसकी चूत की प्यास और बढ़ने लगी थी.... और अगले ही सेकेंड उसके बेटे के लंड ने सारा पानी उसके मुँह में डाल दिया...
चेतन ने शन्नो के गले सहलाया और शन्नो ने पहली बारी वीर्य किसी का वीर्य निगला...
चेतन का लंड छोटा होते देख शन्नो के चेहरे पर मायूसी च्छा गयी... अब उसकी चूत की प्यास कौन भुजाएगा....
फिर चेतन ने शन्नो को बिस्तर पे लिटा दिया और वही पड़े डिल्डो को उठाकर चला दिया... वो डिल्डो शन्नो की आँखों के
सामने हिल रहा था... चेतन ने वो डिल्डो पहले अपनी मम्मी के मुँह में ठूँसा ताकि वो गीला हो जाए और फिर उसे
लेजाकर आहिस्ते आहिस्ते करके शन्नो की चूत में डालने लगा.... शन्नो दर्द के मारे चिल्ला रही थी और
चेतन को वो सुनके बड़ा आनंद मिल रहा था.... जब वो लंड आधा अंदर चला गया तो चेतन ने अपनी ज़ुबान बाहर
निकाली और शन्नो की गीली चूत को चाटने लगा.... उसका एक हाथ लंड को हिला रहा तो दूसरा अपनी मा के स्तनो को सहला रहा...... शन्नो की सिसकियाँ कमरे मे भर गयी थी.... शन्नो इतनी बेशरम हो गयी थी कि उसने अपने बेटे से भारी साँसें लेते हुए पूछा "क्या तुम्हारी मेडम मुझसे भी ज़्यादा अच्छी दिखती थी"
तो चेतन बोला "उसका बदन बिल्कुल आप ही की तरह था... मगर जब पहली बारी मेरी आँखो ने आपका नंगा बदन देखा
तो वो उसे भूल नही पाई..." चेतन का लंड फिर से जाग गया था और उसने अपना लंड शन्नो की चूत में डाल दिया....
वो फिर बोला "आपके बदन के लिए तो में ऐसी सौ मॅडमो को बेच डालू" ये बोलके चेतन अपना लंड
बुर्री तरह शन्नो की चूत में घुसाने लगा और शन्नो भी चेतन के लंड की ताक़त को महसूस कर पागल हुई जा रही थी... चेतन ने अपने सीधे हाथ से डिल्डो की रफ़्तार को फुल कर दिया और शन्नो की चुचीॉ को मसल्ने लगा...
शन्नो का पूरा बदन टूटा पड़ा था मगर वो किसी भी हालत में इसे रुकवाना नहीं चाहती थी....
आह आऊओह ऑश शन्नो अपनी सिसकिओं को रोक नही पा रही थी मगर फिर कमरे में शांति फेल गयी जब चेतन ने अपना लंड शन्नो का चूत में से निकाल कर उसके बदन पे छिड़क दिया..... कुच्छ देर तक दोनो मा बेटे बिस्तर पे लेटे
उधर भोपाल में सुधीर नारायण के घर रहने आ गया था... नारायण जब सुधीर की शकल देखता तो मन ही मन उसकी
किस्मत पे हंस पड़ता... वो सोचता बिचारे को ये भी नहीं मालूम शाम को ही उसकी गर्ल फ्रेंड को उसने इसी बिस्तर पे
नंगा करके चोदा था.... उसमें अब इतनी हिम्मत आ गयी थी कि आने वालो दिनो को अब वो रंगीन बना सकता था...
दिल्ली मे रात के कुच्छ 1 बज रहे थे और रिचा के खर्रातो की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी...
ललिता का पढ़ने का बिल्कुल भी मन नही था क्यूंकी उसका मन कुच्छ और बातो पे लगा हुआ था.... पूरे कमरे में
अंधेरा था और ललिता रिचा के लॅपटॉप पर गंदी मूवी (पॉर्न) देख रही थी... उनमें से कयि पॉर्न का नाम सर्वेंट से
था और उनमें नौकर-मालकिन के चोद्ने की कहानी थी.. ललिता को 99% लग गया था कि रिचा और उसके नौकर
परशु के बीच में कुच्छ ना कुच्छ तो चल रहा है.. उसने कानो में हेड फोन लगा रखे थे ताकि वो आवाज़
भी सुन पाए और रिचा को पता भी ना चले.... पॉर्न देख देख कर वो काफ़ी गरम हो गयी थी उसने अपने
बदन को रज़ाई से ढका हुआ था और अपनी चुचियाँ को कभी कबार हल्के से मसल रही थी....
उसना सोच रखा था कि थोड़ी देर और पॉर्न देखने के बाद वो रिचा के खिलौने से मज़े लेगी...
मगर उसके प्लान चौपट हो गया जैसी ही कमरे का दरवाज़ा खुला और बाहर से हल्की रोशनी कमरे में फेल गयी....
ललिता का मुँह दरवाज़े की तरफ नही था और घबरा गयी कि कहीं रिचा के मा-बाप ना हो.. जैसी उसने अडल्ट मूवी को
च्छूपा दिया (मिनट मे) वैसी ही उसकी नज़र दरवाज़े की ओर पड़ी और उसके सामने परशु खड़ा था..
ललिता की नज़रे परशु को झिझक में देख रही थी मगर परशु की आँखें ललिता को घूर रही थी...
परशु ने दरवाज़े को धीरे से बंद कर दिया और दबे पाओ ललिता की तरफ गया.. ललिता अभी भी उसको देखे जा रही...
उसको समझ नहीं आ रहा था कि वो अब क्या करें.. वो ललिता के सिर पे हाथ फेरने लगा गया और फिर अपने दूसरे हाथ से अपने पाजामे को नीचे उतार दिया..... उसने अंदर कुच्छ नही पहना और उसका लंड उचक कर ललिता के सामने आया..
लॅपटॉप की रोशनी में परशु का लंड सॉफ दिखाई दे रहा था.... उस रोशनी में ऐसा लग रहा था कि मानो वो लंड
नही बल्कि काला नाग हो.. परशु ने ललिता के हाथ को पकड़ा और अपने लंड को उसे सहलाने लग गया..
परशु का लंड एक दम से जागने लग गया...कुच्छ सेकेंड बाद ललिता अपने आप ही परशु के लंड को सहलाने लग गयी..
ललिता की नज़र परशु की नज़रो पे टिकी हुई थी.. फिर परशु ने हाथ बढ़ाया और ललिता मुँह को अपने लंड के पास ले गया..
उसने ललिता के होंठो को अपने लंड पे लगा दिया और उसके गुलाबी होंठो पे अपने लंड का हल्का सा पानी मलने लगा....
ललिता ने अपने आप ही अपना मुँह खोला और उस काले नाग को अंदर ले लिया...
धीरे धीरे उस लंड को वो चूसने लग गयी.. ललिता को पूरी तरह अपना मुँह खोलना पड़ा तब जाके वो परशु
का लंड को चूस पा रही थी वो भी पूरा नहीं ले पा रही थी... हल्के हल्के ललिता अपना मुँह आगे पीछे करे जा रही थी.. उसकी ज़ुबान परशु के लंड के मुँह से खेल रही थी..
ललिता की नज़रे अभी परशु की नज़र पे थी मगर वो फिर भी होश में थी... वो अपनी आँखो से परशु से अपनी जिस्म की प्यास मिटाने की भीक माँग रही थी मगर परशु ने उसके बदन को छुआ तक नही..... चुदाई की जो वीडियो चल रही थी उसमें उस लड़की की चीखे ललिता को और गरम कर रही थी.... और मज़े की हद तब हुई कि उस वीडियो मेजब वो लड़की आदमी से वीर्य की भीग माँगने लगी तभी परशु झार गया और उसने आपना सारा वीर्य ललिता के मुँह में ही डाल दिया.. उसने अपना हाथ बढ़ा कर ललिता के गले को छुआ और फिर उसने परशु का सारा पानी निगल लिया... परशु अपना काम करके चुप चाप चला गया... ललिता सोच में पड़ गयी कि कल परसो सुबह तक वो अपने घर चली जाएगी नज़ाने कल क्या होगा.
अगली सुबह जब ललिता की आँख खुली तो सबसे पहला सवाल रिचा ने उसे पूछा "ये कल रात क्या हो रहा था??"
ललिता ये सुनके घबरा गयी... रिचा ने सब कुच्छ देख लिया होगा ये सोचके उसकी जान निकले जा रही थी ..
फिर भी ललिता ने अंजान होके पूछा "क्या"
रिचा बोली "यार जब तू रात में पॉर्न देखती है तो ढंग से लॅपटॉप बंद कर दिया कर नहीं तो कोई खोलके देखलेगा...
समझा कर यार" ये सुनके ललिता की जान में जान आई मगर अब उसको परशु के सामने आने में डर लग रहा था..
काफ़ी देर तक ललिता परशु के दिखने का वेट करती रही मगर वो दिखा ही नहीं... फिर वो नहाने चली गयी..
वो याद करने लगी कल रात की जो भी घटा था जिस तरह से वो परशु का घोड़े जैसा लंड चूस रही थी...
सोचने में ही ललिता काफ़ी गरम हो गयी थी.. नहाने के बाद उसको अपना तौलिया नहीं मिल रहा था तो वो रिचा का नाम
ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी कि वो बाहर से तौलिया पकड़ा दे... रिचा ने चिल्ला के बोला "अभी आई" और फिर दरवाज़ा खुला..
ललिता दरवाज़े के पिछे छुपी हुई अपना हाथ बढ़ा कर तौलिया माँगने लगी..
उसको तौलिया तो पकड़ा दिया मगर उसका हाथ ज़ोर से पकड़ लिया.. ललिता ने हाथ को देखा तो वो परशु का
हाथ लग रहा था.. ललिता अपने हाथ को छुड़ाने की कोशिश करती रही.. परशु ने बड़ी ज़ोर से उसका हाथ जाकड़
रखा था.. किसी तरह उसने अपना हाथ छुड़ाया और दरवाज़ा बंद कर दिया.. उसे समझ नही आया कि
आवाज़ रिचा ने दी मगर तौलिया परशु लाया...
उधर सुबह जब शन्नो की आँख खुली तो वो और उसका बेटा चेतन दोनो ही नंगे लेटे हुए थे....
शन्नो की नज़र चेतन के हल्के छाती के बालो से जाकर उसके लंड पे पड़ी जोकि बिचारा चैन से सोया पड़ा था....
शन्नो का दिमाग़ उससे खेल खेलता उससे पहले शन्नो ने अपनी नज़रे हटा ली और बिस्तर से उठने लगी....
जैसी उसने अपना बदन हटाया बिस्तर से चेतन ने उसकी कलाई पकड़ ली..... शन्नो ने मूड के देखा तो उसका बेटा जाग
गया था और ज़ाहिर सी बात थी कि वो क्या चाहता था.... शन्नो के नंगे फूले हुए बदन को देख कर चेतन का
लंड हल्के से उठने लगा था.... चेतन बिस्तर से टिक कर बैठा और अपनी मा को अपनी तरफ खीच लिया...
शन्नो का हाथ उस लंड पर पड़ा तो उसे रुका नही गया.... शन्नो ने उसे चूसना शुरू करा....
चेतन बिस्तर पे बैठा हुआ अपनी मा को खुश होते हुए देख रहा था और शन्नो की नज़र उस लंड से हट नही रही थी....
शन्नो के गोल स्तन हवा में झूल रहे थे... उनमें इतना दूध भरा हुआ था कि उनको बेचके कोई भी अरबपति बन जाता.... चेतन ने अपना सीधा हाथ बढ़ाया और अपनी मा के स्तनो को दबाने लगा...
उस मज़े से शन्नो भी लंड को और मज़े में चूसने लगी और देखते देखते चेतन ने अपना सारा
पानी अपनी मा के सुंदर चेहरे पे डाल दिया.... शन्नो के माथे गाल और बालो तक वीर्य फेला हुआ था...
उसने चेतन की तरफ देखा और मुस्कुरा कर टाय्लेट चली गयी....
नारायण जब स्कूल में अपने कमरे में गया तो रश्मि अब तक आई नही थी...वो कुर्सी पे बैठा बैठा उसका इंतजार
कर रहा मगर उसका कुच्छ पता नही था.... उसका मन तो बहुत कर रहा था कि वो उसको कॉल करें मगर उसने नहीं करा.... असेंब्ली में जाने के वक़्त जब वो अपने कमरे से निकला तो उसके सामने रश्मि चलती हुई आ रही थी...
दोनो एक दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे.... जैसी रश्मि अपने कॅबिन में अपना समान रखने के लिए
जाने लगी नारायण ने उसकी गान्ड पे बड़े प्यार से हाथ फेरा और वहाँ से चला गया.....
नारायण सातवे आसमान पर था... फिर जब स्कूल शुरू हो गया तो दोनो काम में उलझ गये....
नारायण के कमरे में तीन टीचर्स आके उसके सामने खड़ी हुई थी.. तीनो स्कूल की सबसे ज़्यादा बड़ी,
उमर के हिसाब से, टीचर्स थी.... इतने समय से वो चाह रही थी कि लड़कियों को ट्राउज़र पहनने को बोला जाए ताकि उन्हे
स्कर्ट पहेन ने से रोका जा सके.... पहले जब नारायण से इस बारे में ज़िक्र हुआ था तब उसने रज़ामंदी दे दी थी
मगर अब उसने सोच समझकर बोला "देखिए सबसे पहली बात ट्राउज़र को हम पक्का नहीं कर सकते क्यूंकी
वैसे ही बच्चो के मा-बाप फीस से काफ़ी परेशान है और अब ट्राउज़र को कंपल्सरी कर दिया तो उनको
लगेगा कि ये भी स्कूल की चाल है पैसे ऐथ्ने की... "
टीचर्स भी परेशान होके बोली "तो सर हम करें भी क्या इन लड़कियों का.. नज़ाने कैसे स्कर्ट को पहनती है.. शरम नाम की तो चीज़ ही नहीं है इनमे.."
नारायण बोला "हम सिर्फ़ समझा सकते है इससे ज़्यादा हम कुच्छ करेंगे तो स्कूल की ये और नहीं सुनेंगे..
आप लोग बस कोशिश करें कि ये हदे पार ना हो"
नारायण अपने आप से काफ़ी खुश हो गया था कि कैसे उसने इस मसले को ऐसे सुलझाया कि किसी का भी नुकसान ना हो ख़ासकर से उसका..
कुच्छ शाम का वक़्त था और परशु रेडियो सुनके चाइ बना रहा था.. ललिता चुपके से किचन के पास गयी तो परशु की
गाने की आवाज़ उसे सॉफ सुनाई दे रही थी और गौर की बात ये थी कि वो लड़की आवाज़ में गा रहा था..
परशु की आवाज़ एक दम लड़कियों के जैसी आ रही थी.. ललिता को अब एहसास हुआ कि शायद परशु रिचा की आवाज़ निकालकर उसको गुमराह कर रहा है और रिचा का इन सब बातो में कोई हाथ नहीं है...
ललिता रिचा से इस बारे में बात करना चाहती थी मगर उसको समझ नहीं आ रहा था कि वो कहाँ से और कैसे शुरू करें..
कुच्छ देर बाद रिचा को उसके मा-बाप का कॉल आया कि आज रात वो एक पार्टी में जाएँगे तो तकरीबन 10 बजे तक घर आएँगे... उसके बाद किसी ना किसी तरह समय निकलता गया.. रात को खाना खाने के बाद कुच्छ 10:30 बजे रिचा
की मा ने कॉल करके बोला कि
"तुम्हारे पापा ने बहुत पीली है और मैं उनको गाड़ी चलाने नहीं दूँगी तो हम आज रात कौशीकजी के यहाँ ही रुक रहे है..."
जब ये सब रिचा ने ललिता को बताया तो उसने तुर्रंत पूछा "ओये जब कभी ऐसा होता है तो तू क्या अकेली परशु के साथ रुकती है??" रिचा ने कहा " हां नहीं तो मेरी दादी आ जाती है रुकने के लिए.. क्यूँ ऐसे क्यूँ पुच्छ रही है यार"
ललिता ने ये जवाब टाल दिया और फिर दोनो पढ़ने लगे..जब भी कमरे में परशु आता तो वो कुच्छ ज़्यादा ही मज़े
में लगता.. कभी कोई गंदी सी बी-ग्रेड पिक्चर का गाना गाने लगता तो कभी कोई भी फालतू बात करने लग जाता रिचा
और ललिता से .. ललिता को उसके ऐसे व्यवहार से काफ़ी चिंता हो रही थी.... वो अपनी नज़रे किताब से हटाने में भी घबरा रही थी....
फिर कुच्छ देर बाद जब परशु कमरे में आया तो ललिता टाय्लेट में थी.. परशु ने बिन्ति करके कहा
"रिचा अगर तुमको कोई दिक्कत ना हो तो मैं अपने भाई को बुला लू आज रात रुकने के लए.. वो हरयाणा से आया हुआ है और कल ही सुबह जा रहा है वापस"
रिचा ने एक दम से परशु को हां कह दिया औट ये भी समझा दिया कि वो सुबह पापा-मम्मी के आने से पहले चले
जाए नही तो खमखा डाँट पड़ेगी तुमको... समय काफ़ी बीत गया था और पढ़ पढ़ के दोनो लड़किया का दिमाग़
खराब हो गया था.... कुच्छ देर के बाद ललिता बाहर गयी पानी की बॉटल लेने के लिए तब पूरे घर में सिर्फ़ टीवी की रोशनी आ रही थी.. परशु सोफे पे बैठा हुआ कोई ब-ग्रेड पिक्चर देख रहा था जिसमे हेरोयिन बारिश में नाच रही थी..
परशु इतना घुसा हुआ था उसे देखने में कि उसको कुच्छ और होश ही नहीं था.... ललिता ने उसपे ज़्यादा ध्यान ना
देते हुए किचन में चली गयी.... फ्रिड्ज खोलके जब उसने पानी की बॉटल निकाल ली और एक दो घूट पीने लगी
उसी वक़्त किसीने उसकी स्कर्ट को उठा दिया और उसकी गान्ड पे हाथ फेरने लगा.. घबराकर उसने वो हाथ हटाया
फ्रिड्ज से सॅट कर खड़ी हो गई... उसने टीवी की ओर देखा तो वहाँ अभी कोई बैठा हुआ था और जब उसने सामने देखा था
तो परशु खड़ा हुआ था.. परशु ललिता के पास आया और उसका हाथ अपने लंड पे रख दिया जो कि पतलून के अंदर था..
परशु की गरम साँसें ललिता के चेहरे पे लग रही थी... उसकी नाक ललिता के गाल को च्छू रही थी....
किसी तरह ललिता अपना हाथ छुड़ा कर वहाँ से भाग गई.. जब वो कमरे में गयी तो उसने रिचा से पूछा
"ओये वो कौन आया हुआ है??"
रिचा ने पूछा "कौन?? कहाँ??" ललिता हड़बड़ा कर बोली "अर्रे कोई टीवी देख रहा है घर पे तेरे नौकर के साथ"