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सोफे पे हाथ रख के आकांक्षा चेतन के लंड का इंतजार करने लगी.... चेतन ने आकांक्षा की स्कर्ट को उपर उठा दिया
और उसकी पीली कच्छि को उतार फेका.... चेतन ने आकांक्षा के नितंब पे हाथ गढ़ाए और अपना लंड आकांक्षा की
चूत में डालने लगा... मगर उसने अंदर डाला नहीं बल्कि आकांक्षा की पीठ के निचले हिस्से पर अपना लंड हिलाने लग गया... आकांक्षा की चूत में से पानी टपक रहा था जिससे चेतन को सॉफ पता चल गया था कि उसकी मासी को कितनी
तड़प है लंड की... चेतन ने आकांक्षा से पूछा "अगर मेरा सख़्त लंड चाहिए तो उसके लिए तुम्हे भीक माँगनी पड़ेगी"
और जब आकांक्षा ने कहा "प्लीज़ अपने लंड से मेरी चुदाई करो चेतन... मैं और नहीं रुक सकती"
तो शन्नो के कान फटे के फटे रह गये... उसने अपनी चूत को देखा जोकि अभी भी गीली लंड की फरियाद कर रही थी
मगर वो लंड अब उसकी बहन की चूत में जाने वाला था... आकांक्षा के गिद्गिडाने पर आख़िर कार चेतन ने
अपना लंड अपनी मासी की चूत में डाला और आकांक्षा खुशी के मारे पागल हो गयी... चेतन उसको चोद्ने लगा और
आकांक्षा उसका भरपूर आनंद लेती रही.... चेतन ने आकांक्षा के टॉप को भी उतार दिया जिसमें उसकी मासी ने
खुद उसकी मदद करी... उसकी ब्रा के हुक्स खोलके जब चेतन ने आकांक्षा के मम्मे देख कर तो उसने आकांक्षा को
सोफे पे बिठा दिया और उसकी टाँगें चौड़ी करके चोद्ना फिरसे शुरू करा... आकांक्षा के मम्मे शन्नो के जितने बड़े
नहीं थे मगर उनको ज़रूर टक्कर दे सकते थे ख़ासतौर पे चुचियाँ की निप्पल इतनी मुलायम थी कि छुते ही
आकांक्षा मस्ती में काप उठती.... आकांक्षा के मम्मो उपर नीचे हीले जा रहे थे जिनको पकड़के चेतन ज़ोर से दबाए जा रहा था....
शन्नो फर्श से उठी और हार कर अपने कमरे में चली गयी... चेतन और आकांक्षा को कुच्छ फरक नहीं पड़ा और
उन्होने चुदाई को जारी रखा और फिर चोद्ते चोद्ते चेतन ने अपना सारा वीर्य अपनी मासी के बड़े मुलायम
मम्मो पे डाल दिया...
कुच्छ देर बाद आकांक्षा अपने आपको सॉफ कर के वहाँ से चली गयी और चेतन भी कहीं घर से बाहर चले गया....
शन्नो अभी भी नंगी थी और अपने कमरे से बाहर निकलके वो चेतन को ढूँढने लगी... वो नंगी अपने पूरे घर में
चेतन को ढूँढती रही मगर उसको उसका बेटा कही नहीं दिखा.... हारकर वो वापस अपने कमरे के बिस्तर पे
जाके बैठ गयी.... उसे यकीन हो गया था कि चेतन उसकी बहन आकांक्षा के साथ कहीं गया है...
उसे ज़रा सा भी गुस्सा चेतन पे नहीं आ रहा था मगर अपनी बहन से वो काफ़ी गुस्सा हो गयी थी या फिर ये कहो कि
जल गयी थी... उसके दिमाग़ में चलने लगा कि आकांक्षा उसे उम्र में छोटी है और ज़्यादा सुंदर भी दिखती है
तभी चेतन ने आकांक्षा के लिए उसको छोड़ दिया....
और उसकी पीली कच्छि को उतार फेका.... चेतन ने आकांक्षा के नितंब पे हाथ गढ़ाए और अपना लंड आकांक्षा की
चूत में डालने लगा... मगर उसने अंदर डाला नहीं बल्कि आकांक्षा की पीठ के निचले हिस्से पर अपना लंड हिलाने लग गया... आकांक्षा की चूत में से पानी टपक रहा था जिससे चेतन को सॉफ पता चल गया था कि उसकी मासी को कितनी
तड़प है लंड की... चेतन ने आकांक्षा से पूछा "अगर मेरा सख़्त लंड चाहिए तो उसके लिए तुम्हे भीक माँगनी पड़ेगी"
और जब आकांक्षा ने कहा "प्लीज़ अपने लंड से मेरी चुदाई करो चेतन... मैं और नहीं रुक सकती"
तो शन्नो के कान फटे के फटे रह गये... उसने अपनी चूत को देखा जोकि अभी भी गीली लंड की फरियाद कर रही थी
मगर वो लंड अब उसकी बहन की चूत में जाने वाला था... आकांक्षा के गिद्गिडाने पर आख़िर कार चेतन ने
अपना लंड अपनी मासी की चूत में डाला और आकांक्षा खुशी के मारे पागल हो गयी... चेतन उसको चोद्ने लगा और
आकांक्षा उसका भरपूर आनंद लेती रही.... चेतन ने आकांक्षा के टॉप को भी उतार दिया जिसमें उसकी मासी ने
खुद उसकी मदद करी... उसकी ब्रा के हुक्स खोलके जब चेतन ने आकांक्षा के मम्मे देख कर तो उसने आकांक्षा को
सोफे पे बिठा दिया और उसकी टाँगें चौड़ी करके चोद्ना फिरसे शुरू करा... आकांक्षा के मम्मे शन्नो के जितने बड़े
नहीं थे मगर उनको ज़रूर टक्कर दे सकते थे ख़ासतौर पे चुचियाँ की निप्पल इतनी मुलायम थी कि छुते ही
आकांक्षा मस्ती में काप उठती.... आकांक्षा के मम्मो उपर नीचे हीले जा रहे थे जिनको पकड़के चेतन ज़ोर से दबाए जा रहा था....
शन्नो फर्श से उठी और हार कर अपने कमरे में चली गयी... चेतन और आकांक्षा को कुच्छ फरक नहीं पड़ा और
उन्होने चुदाई को जारी रखा और फिर चोद्ते चोद्ते चेतन ने अपना सारा वीर्य अपनी मासी के बड़े मुलायम
मम्मो पे डाल दिया...
कुच्छ देर बाद आकांक्षा अपने आपको सॉफ कर के वहाँ से चली गयी और चेतन भी कहीं घर से बाहर चले गया....
शन्नो अभी भी नंगी थी और अपने कमरे से बाहर निकलके वो चेतन को ढूँढने लगी... वो नंगी अपने पूरे घर में
चेतन को ढूँढती रही मगर उसको उसका बेटा कही नहीं दिखा.... हारकर वो वापस अपने कमरे के बिस्तर पे
जाके बैठ गयी.... उसे यकीन हो गया था कि चेतन उसकी बहन आकांक्षा के साथ कहीं गया है...
उसे ज़रा सा भी गुस्सा चेतन पे नहीं आ रहा था मगर अपनी बहन से वो काफ़ी गुस्सा हो गयी थी या फिर ये कहो कि
जल गयी थी... उसके दिमाग़ में चलने लगा कि आकांक्षा उसे उम्र में छोटी है और ज़्यादा सुंदर भी दिखती है
तभी चेतन ने आकांक्षा के लिए उसको छोड़ दिया....