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Guest
मैं उसका तना हुआ मोटा लंड उसकी पॅंट और चड्डी से बाहर निकाल कर पकड़ी हुई थी और उस के लंड के मूह पर अपने हाथ का अंगूठा फिरा रही थी. उस के लंड का मूह गीला हो चुका था जिसकी वजह से मेरा अंगूठा बड़े आराम से घूम रहा था. वो अपने हाथ की बीच की उंगली मेरी चड्डी पर से मेरी चूत के बीच मे बड़े शानदार तरीके से घुमा रहा था और मेरी चूत जो थी कि अपना रस निकालते ही जा रही थी.
मैने फिर पूछा - क्या अंजू मेरे बारे मे जानती है ?
रमेश - हां. वो तुम्हारे बारे मे जानती है. मैने बताया है उसको.
मैं - क्या तुम हम दोनो को मिलाना पसंद करोगे ?
रमेश - क्यों नही. अगली बार जब तुम मेरे घर आओगी तो मैं तुम को उस से मिलने उस के घर ले चलूँगा.
मैं बोली - ठीक है.
अचानक वेटर हमारी टेबल पर आया और पूछने लगा कि हमे कुछ और तो नही चाहिए. हम ने अपने अपने टेबल के नीचे हाथों को जहाँ थे, वहीं रोक लिया और उन को हिलाना बंद कर्दिया. कोई हलचल नही की. लेकिन हम ने अपने अपने हाथ निशाने पर से नही हटाए थे. मैं अभी भी उस का खड़ा हुआ लंड पकड़े हुए थी और उस की उंगली मेरी चड्डी के उपर से मेरी चूत के बीच मे थी. हम ने खाने का ऑर्डर दिया और वेटर वापस चला गया.
हम एक दूसरे के चुदाई के हथियारो से खेल रहे थे और हम को बड़ा मज़ा आ रहा था. वो मेरी चूत के बीच मे, मेरी चड्डी के उपर से ही, मेरी चूत के दाने पर, अपनी उंगली कुछ इस तरह घुमा रहा था कि मैं अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ने लगी. मैं तो झरने के बहुत करीब थी. मैं अपने पैर बंद कर रही थी - खोल रही थी और वो अपनी उंगली का कमाल दिखा रहा था. मैं झरने के इतने पास आ गई थी कि मैने उस के लंड को हिलाना बंद कर दिया, उस पर हाथ फिराना बंद कर दिया. सिर्फ़ उस के तने हुए लंड को टाइट पकड़ कर बैठी थी. मैं एक रेस्टोरेंट मे, जहाँ और भी कई लोग थे, इतने लोगों के बीच मे बैठ कर झरने जा रही थी. अचानक ही मैं झर गई, बहुत ज़ोर से झरी थी मैं. पर मैने अपनी आवाज़ और बदन को काबू मे रखा ताकि किसी को पता ना चले. उस ने अपनी उंगली घुमानी बंद करदी थी और उंगली को मेरी चूत पर दबा कर रखा था. मैने अपने पैर टाइट कर लिए थे और उसके हाथ को अपनी चूत पर दबा लिया था.
मैं भी उस को अपने हाथ का मज़ा देना चाहती थी, इस लिए मैने फिर से धीरे धीरे उस के लंड पर मूठ मारना चालू कर दिया था. मैं अपना हाथ कुछ इस तरह हिला रही थी कि टेबल के उपर मेरा हाथ हिलता हुआ किसी की नही दिख रहा था, पर टेबल के नीचे मैं उस के लंड पर ज़ोर ज़ोर से मूठ मार रही थी. मेरे हाथ की कोहनी पूरी तरह टेबल के नीचे थी और मेरी हथेली मे था उस का लंबा, मोटा और गरमा गरम लंड. मैं उस के लंड को टाइट पकड़ कर उपर नीचे---- आगे पीछे कर रही थी. मुझे पता था कि उस का पानी निकालने मे बहुत वक़्त लगता है, इस लिए मैं अपना काम पूरा दिल लगा कर कर रही थी. काफ़ी समय बाद मैने फील किया कि वो अपने लंड से पानी बरसाने के लिए तय्यार हो रहा है तो मैं और ज़ोर ज़ोर से मूठ मारने लगी. उस ने अपना हाथ मेरे मूठ मारते हुए हाथ पर रख कर मुझे मूठ ना मारने का इशारा किया.
मैने फिर पूछा - क्या अंजू मेरे बारे मे जानती है ?
रमेश - हां. वो तुम्हारे बारे मे जानती है. मैने बताया है उसको.
मैं - क्या तुम हम दोनो को मिलाना पसंद करोगे ?
रमेश - क्यों नही. अगली बार जब तुम मेरे घर आओगी तो मैं तुम को उस से मिलने उस के घर ले चलूँगा.
मैं बोली - ठीक है.
अचानक वेटर हमारी टेबल पर आया और पूछने लगा कि हमे कुछ और तो नही चाहिए. हम ने अपने अपने टेबल के नीचे हाथों को जहाँ थे, वहीं रोक लिया और उन को हिलाना बंद कर्दिया. कोई हलचल नही की. लेकिन हम ने अपने अपने हाथ निशाने पर से नही हटाए थे. मैं अभी भी उस का खड़ा हुआ लंड पकड़े हुए थी और उस की उंगली मेरी चड्डी के उपर से मेरी चूत के बीच मे थी. हम ने खाने का ऑर्डर दिया और वेटर वापस चला गया.
हम एक दूसरे के चुदाई के हथियारो से खेल रहे थे और हम को बड़ा मज़ा आ रहा था. वो मेरी चूत के बीच मे, मेरी चड्डी के उपर से ही, मेरी चूत के दाने पर, अपनी उंगली कुछ इस तरह घुमा रहा था कि मैं अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ने लगी. मैं तो झरने के बहुत करीब थी. मैं अपने पैर बंद कर रही थी - खोल रही थी और वो अपनी उंगली का कमाल दिखा रहा था. मैं झरने के इतने पास आ गई थी कि मैने उस के लंड को हिलाना बंद कर दिया, उस पर हाथ फिराना बंद कर दिया. सिर्फ़ उस के तने हुए लंड को टाइट पकड़ कर बैठी थी. मैं एक रेस्टोरेंट मे, जहाँ और भी कई लोग थे, इतने लोगों के बीच मे बैठ कर झरने जा रही थी. अचानक ही मैं झर गई, बहुत ज़ोर से झरी थी मैं. पर मैने अपनी आवाज़ और बदन को काबू मे रखा ताकि किसी को पता ना चले. उस ने अपनी उंगली घुमानी बंद करदी थी और उंगली को मेरी चूत पर दबा कर रखा था. मैने अपने पैर टाइट कर लिए थे और उसके हाथ को अपनी चूत पर दबा लिया था.
मैं भी उस को अपने हाथ का मज़ा देना चाहती थी, इस लिए मैने फिर से धीरे धीरे उस के लंड पर मूठ मारना चालू कर दिया था. मैं अपना हाथ कुछ इस तरह हिला रही थी कि टेबल के उपर मेरा हाथ हिलता हुआ किसी की नही दिख रहा था, पर टेबल के नीचे मैं उस के लंड पर ज़ोर ज़ोर से मूठ मार रही थी. मेरे हाथ की कोहनी पूरी तरह टेबल के नीचे थी और मेरी हथेली मे था उस का लंबा, मोटा और गरमा गरम लंड. मैं उस के लंड को टाइट पकड़ कर उपर नीचे---- आगे पीछे कर रही थी. मुझे पता था कि उस का पानी निकालने मे बहुत वक़्त लगता है, इस लिए मैं अपना काम पूरा दिल लगा कर कर रही थी. काफ़ी समय बाद मैने फील किया कि वो अपने लंड से पानी बरसाने के लिए तय्यार हो रहा है तो मैं और ज़ोर ज़ोर से मूठ मारने लगी. उस ने अपना हाथ मेरे मूठ मारते हुए हाथ पर रख कर मुझे मूठ ना मारने का इशारा किया.