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Guest
गंद मारने की रफ़्तार और चूत मे उंगली घूमने की रफ़्तार, दोनो बढ़ती गई. मेरी गंद का दर्द गायब हो गया था और अब मज़ा ही मज़ा आ रहा था. होटेल के बंद कमरे मे हमारी चुदाई, मेरी गंद मरवाई जारी थी. हम दोनो, ताज़ा ताज़ा शादी किया हुआ सेक्सी जोड़ा, दुनिया से बेख़बर, अपनी पसंद का चुदाई वाले खेल मे मस्त था.
उनके मेरी चूत रगड़ने की वजह से, मेरी चूत मे उंगली करने की वजह से, मैं अपने झड़ने के करीब थी जो उनको मेरी हरकतों की वजह से पता चल गया .
उन्होने मेरी गीली फुददी पर से अपना हाथ हटा लिया और अपना पूरा ध्यान मेरी गंद मारने पर लगा दिया. मेरी गंद मे और उन के लौडे पर क्रीम लगी होने की वजह से, उनके लंड के मेरी गंद मे अंदर बाहर होने पर कुछ अलग तरह की आवाज़ आने लगी. चूत की चुदाई मे ऐसी आवाज़ नही आती है.
मैं झड़ने की ऐसी ऊँचाई पर पहुँच चुकी थी जैसे कि मैं बॉम्ब फटने की तरह झडुन्गि. उनके गरम लंड की गरमा गरम चुदाई से मेरी गंद भी अंदर से गरम हो गई. मैं महसूस कर रही थी कि उनका लंड मेरी गंद मे आते जाते और भी मोटा हो गया है, और भी कड़क, बिल्कुल लोहे के डंडे जैसा हो गया है. वो भी पहली बार मेरी गंद पूरी तरह मार कर भरपूर मज़ा ले रहे थे और बिना रुके मेरी गंद मारते जा रहे थे.
मेरे लिए ये हमेशा फ़ायदे की बात है कि मेरे पति बिना रुके, लगातार मुझे चोद्ते रहें. क्यों कि मुझे पता है कि अगर उन्होने बीच मे चुदाई रोकी तो उनके लंड का पानी निकलने मे और भी ज़्यादा वक़्त लगेगा.
बाहर इतनी ठंड थी पर होटेल के इस कमरे के अंदर चुदाई की गर्मी थी, यहाँ तक कि अगर हम हीटर बंद भी कर्देते तो हम को हमारी चुदाई के कारण ठंड नही लगने वाली थी. मेरी गंद उनके लंड के जबरदस्त धक्के सहन कर रही थी और हम को इतनी गर्मी लग रही थी कि सिर्फ़ पसीना निकलना बाकी था.
मेरी चोद्ने की मशीन……… मेरा पति……. मेरा चोदु……. मेरा प्यारा चुड़क्कड़ मुझे अपनी चुदाई का मज़ा, इस बार मेरी गंद मार कर दे रहा था. चुदाई की रफ़्तार तूफ़ानी हो चुकी थी और मैं घोड़ी बनी अपने पति से गंद मरवा रही थी.
प्यारे पढ़ने वालों ! मेरे पास शब्द नही है मैं आप को बताऊ कि पहली बार अपने पति से गंद मरवा कर मुझे कितना मज़ा आया. पर मैं जानती हूँ कि आप सब ने मेरी आप बीती पढ़ते हुए ज़रूर महसूस किया होगा.
मेरी गंद मारते मारते वो भी अपनी मंज़िल के पास थे, पर लगातार मेरी गंद मार रहे थे. मेरी चुचियाँ हवा मे झूल रही थी और उनके लंड के मेरी गंद मे हर धक्के के साथ हिल रही थी, नाच रही थी. मेरे पति को मेरे झड़ने के समय के बारे मे पूरा अंदाज़ा है. उनका हाथ फिर से मेरी चूत पर पहुँच कर कमाल करने लगा. तब तक मेरी चूत काफ़ी गीली हो चुकी थी. मेरा छुट रस निकल कर मेरे पैरो के जोड़ को गीला कर रहा था. उनकी उंगलियों के बीच मे मेरी चूत का दाना मसला जा रहा था. मुझे लग रहा था कि मैं अपनी गंद मरवाई के कारण ही झाड़ जाउन्गि. पर अब उनकी उंगलियाँ मेरी गीली चूत पर जो हरकत कर रही थी, मैं तो बस पहुँचने ही वाली थी. मेरी चूत और गंद दोनो ही मारी जा रही थी. मैं तो कहती हूँ कि हर लड़की को ज़रूर से गंद मर्वानी चाहिए. मैं पहुँचने वाली थी, झड़ने वाली थी और मैं अपने मूह से निकलने वाली आवाज़ों को रोक नही पा रही थी.
उनके मेरी चूत रगड़ने की वजह से, मेरी चूत मे उंगली करने की वजह से, मैं अपने झड़ने के करीब थी जो उनको मेरी हरकतों की वजह से पता चल गया .
उन्होने मेरी गीली फुददी पर से अपना हाथ हटा लिया और अपना पूरा ध्यान मेरी गंद मारने पर लगा दिया. मेरी गंद मे और उन के लौडे पर क्रीम लगी होने की वजह से, उनके लंड के मेरी गंद मे अंदर बाहर होने पर कुछ अलग तरह की आवाज़ आने लगी. चूत की चुदाई मे ऐसी आवाज़ नही आती है.
मैं झड़ने की ऐसी ऊँचाई पर पहुँच चुकी थी जैसे कि मैं बॉम्ब फटने की तरह झडुन्गि. उनके गरम लंड की गरमा गरम चुदाई से मेरी गंद भी अंदर से गरम हो गई. मैं महसूस कर रही थी कि उनका लंड मेरी गंद मे आते जाते और भी मोटा हो गया है, और भी कड़क, बिल्कुल लोहे के डंडे जैसा हो गया है. वो भी पहली बार मेरी गंद पूरी तरह मार कर भरपूर मज़ा ले रहे थे और बिना रुके मेरी गंद मारते जा रहे थे.
मेरे लिए ये हमेशा फ़ायदे की बात है कि मेरे पति बिना रुके, लगातार मुझे चोद्ते रहें. क्यों कि मुझे पता है कि अगर उन्होने बीच मे चुदाई रोकी तो उनके लंड का पानी निकलने मे और भी ज़्यादा वक़्त लगेगा.
बाहर इतनी ठंड थी पर होटेल के इस कमरे के अंदर चुदाई की गर्मी थी, यहाँ तक कि अगर हम हीटर बंद भी कर्देते तो हम को हमारी चुदाई के कारण ठंड नही लगने वाली थी. मेरी गंद उनके लंड के जबरदस्त धक्के सहन कर रही थी और हम को इतनी गर्मी लग रही थी कि सिर्फ़ पसीना निकलना बाकी था.
मेरी चोद्ने की मशीन……… मेरा पति……. मेरा चोदु……. मेरा प्यारा चुड़क्कड़ मुझे अपनी चुदाई का मज़ा, इस बार मेरी गंद मार कर दे रहा था. चुदाई की रफ़्तार तूफ़ानी हो चुकी थी और मैं घोड़ी बनी अपने पति से गंद मरवा रही थी.
प्यारे पढ़ने वालों ! मेरे पास शब्द नही है मैं आप को बताऊ कि पहली बार अपने पति से गंद मरवा कर मुझे कितना मज़ा आया. पर मैं जानती हूँ कि आप सब ने मेरी आप बीती पढ़ते हुए ज़रूर महसूस किया होगा.
मेरी गंद मारते मारते वो भी अपनी मंज़िल के पास थे, पर लगातार मेरी गंद मार रहे थे. मेरी चुचियाँ हवा मे झूल रही थी और उनके लंड के मेरी गंद मे हर धक्के के साथ हिल रही थी, नाच रही थी. मेरे पति को मेरे झड़ने के समय के बारे मे पूरा अंदाज़ा है. उनका हाथ फिर से मेरी चूत पर पहुँच कर कमाल करने लगा. तब तक मेरी चूत काफ़ी गीली हो चुकी थी. मेरा छुट रस निकल कर मेरे पैरो के जोड़ को गीला कर रहा था. उनकी उंगलियों के बीच मे मेरी चूत का दाना मसला जा रहा था. मुझे लग रहा था कि मैं अपनी गंद मरवाई के कारण ही झाड़ जाउन्गि. पर अब उनकी उंगलियाँ मेरी गीली चूत पर जो हरकत कर रही थी, मैं तो बस पहुँचने ही वाली थी. मेरी चूत और गंद दोनो ही मारी जा रही थी. मैं तो कहती हूँ कि हर लड़की को ज़रूर से गंद मर्वानी चाहिए. मैं पहुँचने वाली थी, झड़ने वाली थी और मैं अपने मूह से निकलने वाली आवाज़ों को रोक नही पा रही थी.