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ताकत की विजय

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लड़की बीस से ज्यादा की ना हो, शील पैक हो, और भरपूर जवान हो ...

ल. लेकिन... अवतार सिंह की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई बस हकलाते हुए लेकिन लेकिन ही बोल पाया था कि निरंजन चौधरी बोल पड़ा...

इस बार मेरा इरादा बलात्कार करने का है... भयानक हंसी के साथ बोला चौधरी ... साल भर पहले एक लड़की का रेप किया था, आहा, जन्नत का नजारा हो गया था... बलात्कार करने का आनंद ही कुछ और है ...

फिर तो लडकी को अगवा करना पडेगा

चाहे कुछ भी कर, मुझे कल तक लड़की चाहिए... कडक, जवानी से लकदक और अनछुई...

ज.. जी.

एक बात और सून ले...

अवतार सिंह उसे कातर द्रष्टि से देखने लगा...

निरंजन चौधरी के होंठ फैले और वह खुंखार स्वर में बोला

... अगर उसकी योनी से खून नहीं निकला तो तेरे जिगर से खून जरूर निकल जायेगा ...

अवतार सिंह के तिरपन कांप गये... फिर भी कुछ तो कहना ही था सो बोला... म. मैं अभी अपने आदमियों को रायपुर में ऐसी लड़की ढूंढने के लिए आदेश दे देता हूँ ...

बोला कुछ नहीं निरंजन चौधरी, उसने पैग होंठों से लगाया और चुस्कियां लेने लगा

कुल छ: आदमी बैठे थे कमरे में, बीच में टेबल पर स्कॉच की एक खाली बोतल के साथ एक आधी भरी हुई बोतल रखी थी तथा छहो के आगे भरे हुए पैग रखे हुए थे...

वे सभी निरंजन चौधरी एन्ड कम्पनी के विश्वासपात्र थे और सभी को मालूम था कि उनके गैंग के कर्ता धर्ता अवतार सिंह नहीं चौधरी एन्ड कम्पनी है...

अवतार सिंह ने उन्हें फोन करके फौरन वहां बुलाया था, सो उन्हें वहां पहुंचाना ही था

चुंकि अवतार सिंह की पोस्ट उन सबसे ऊंची थी और चौधरी की तरफ से भी अवतार सिंह को मैनेजर घोषित किया गया था, सो उसका कहा टालने की जुर्रत किसी में भी नहीं थी...

तभी अवतार सिंह कमरे में दाखिल हुआ...

सब ने उठकर उसका अभिवादन किया, अवतार सिंह ने खाली पड़ी एकमात्र कुर्सी थोड़ी पिछे खिसकाई और उस पर बैठ गया... वो सब भी अपने अपने स्थान पर बैठ गए

ऐसी इमरजेंसी मिंटिग बुलाने के पीछे क्या उद्देश्य है सिंह साहब... बैठते ही एक व्यक्ति बोला ...

अवतार सिंह ने उसकी तरफ़ देखा और बोला ... चौधरी साहब का हुक्मनामा सुनाना है ...

छहों एक दूसरे को देखने लगे

कैसा हुक्मनामा... एक ने पूछा

चौधरी साहब के लिए एक शानदार कमसिन, एकदम कुंआरी कली चाहिए और वह भी कल रात तक.. कल रात को ऐसी ही एक लड़की उनके बिस्तर पर होनी चाहिए...

इतनी सी बात के लिए इतनी इमरजेंसी मिंटिग.?

मेरी बात पर गौर नहीं किया तुमने शायद, अवतार सिंह बोलने वाले कि तरफ देखते हुए बोला... लड़की एकदम कुंवारी, अनछुई यानी सील पैक होनी चाहिए...

अब किसी के माथे पर तो लिखा नहीं होता कि वह कुंवारी कन्या है, उनमें से एक बोला... जिस लड़की को हम चौधरी साहब के पास लेकर जाये, क्या पता उसका बाजा कोई पहले ही बजा चुका हो...

अवतार सिंह ने उसे घूरा... ऐसी बात तुम चौधरी साहब के सामने कर सकते हो? चौधरी साहब का काम सिर्फ हुक्म सुनाना है और हमारा फर्ज उस हुक्म को पूरा करना है

 


इतना कहकर अवतार सिंह रूका, बारी बारी सब पर निगाह डाली फिर बोला,

अपने अपने इलाकों के बारे में तुम सब कुछ जानते ही होंगे, सोचो किसके इलाके में ऐसी कोई लड़की है जो खूबसूरत, जवान, कुंवारी होने के साथ साथ घरेलू भी हो.....

सभी गहरी सोच में पड़ गए...

मेरे इलाके में एक लड़की है तो सही लेकिन... तभी एक व्यक्ति बोला और कहते कहते रूक गया ...

लेकिन क्या ???

समस्या वहीं है जो अमरचंद ने बताई हैं, यह मैं कैसे कह सकता हूं कि वह कुंवारी कन्या है, हालाँकि वह घर से बाहर कम ही निकलती... जवान तो वह इतनी है कि उसका अंग अंग निमंत्रण देता नजर आता है, खूबसूरत इतनी कि चांद भी शरमा जाये ... मगर वह कुंवारी है या नहीं, इसके बारे में कुछ नहीं कह सकता ... क्या पता उसका किसी लड़के से टांका भीड चुका हो....

अवतार सिंह के चेहरे पर उलझन उभर आई...

यह तो वाकई गंभीर समस्या हो गई... एक ने कहा ...

इसका समाधान तो यही है कि उसको अगवा करके डॉक्टर के पास ले जाये और अगर डॉक्टर ओके कहता है तो ...

अपनी सलाह अपने पास रख... भुनभुनाते हुए अवतार सिंह ने उसकी बात काटी..

एक और तरीका है चौधरी साहब को संतुष्ट करने का..

अवतार सिंह बोलने वाले की तरफ देखने लगा... कैसा तरीका ?

लड़की अगर स्वयं चौधरी साहब के पास जाये...

ऐसा कैसे हो सकता है? कोई भी शरीफ लड़की ऐसे काम के लिए चौधरी साहब के पास क्यों जाने लगी? अगर हम किसी शरीफ लड़की को भी उनके पास भेजेंगे तो वो उसे चालू ही समझेंगे ...

आप पहले मेरी पूरी बात तो सुन लीजिए सिंह साहब...

अभी बात बची है ? बोल क्या कहना चाहता है तू...

आप चौधरी साहब को फोन कर दिजीये कि कल सुबह उनके पास एक लड़की आयेगी , अपनी पारखी नजरो से लडकी को पंसद नापसंद करेंगे .... अगर उन्हें लड़की पसंद आ गई तो बेशक वह चालू ही क्यों ना हो, हम पर कोई आंच नहीं आयेगी...

मगर कोई शरीफ लड़की उनके पास जायेगी ही क्यों ?

उसके लिए हमें सेन साहब की मदद लेनी होगी ...

एस पी साहब की ? चौंका अवतार सिंह...

जी हां ...

कैसी मदद?

प्रत्युतर में बात करने वाले के होंठों पर मुस्कान नाच उठी और उसी मुस्कान के साथ उसने अपनी स्कीम बताई...

उसकी स्कीम सुनकर अवतार सिंह कि आँखों में उसके लिए प्रशंसा के भाव उभर आये...

वाह, क्या स्कीम बनाई है तुमने आनन्द, मुझे पूरा विश्वास है कि चौधरी साहब फौरन इस स्कीम के लिए हा कर देंगे

तो फिर फोन कर दिजीये चौधरी साहब को, फिर सेन साहब को भी फोन कर दिजीये....

सेन साहब को तकलीफ देने की क्या जरूरत है थाने का इंस्पेक्टर मुझे अच्छी तरह से जानता है

फिर अवतार सिंह ने गर्दन घुमा कर उस व्यक्ति की तरफ देखा जिसने लड़की की बाबत बताया था, तुम बोलो राजकिशोर, क्या नाम है उस लड़की का ?

नाम तो मैं नहीं जानता, हां घर का पता बता सकता हूं ... राजकिशोर बोला

खूबसूरत तो है ना ?

मैंने कहा न, चांद भी देखे तो शरमा जाये

अवतार सिंह के होंठों पर भयानक कुटिल मुस्कान नाच उठी...

फिर हाथ धोना भूल गये भैया... विशाल का हाथ परे झटकते हुए रानी ने गुस्सा दर्शाया.. जाओ पहले हाथ धोकर आओ फिर नाश्ते को हाथ लगाना...

 


विशाल घूर कर उसे देखते हुए खडा हुआ... पिछले जनम में तू जरूर झांसी की रानी रही होगी... हर बात पर हुक्म झाड़ती रहती है

अब देर नहीं हो रही क्या ?

जा रहा हूं मेरी दादी अम्मा

विशाल ताली बजाने वाले अंदाज में हाथ जोड़ते हुए बोला

रानी के होंठों से बरबस हंसी निकल गयी

विशाल भी हंस पड़ा और हाथ धोने के लिए जैसे ही दरवाजे की तरफ बढ़ा... खट... खट... खट

दरवाजे के बाहर दस्तक हुई

विशाल के चेहरे पर हैरानी उभरी... इस वक्त कोन आ सकता है ?

मेरी होने वाली भाभी को वक दे रखा होगा ... रानी ने हंसते हुए मसखरी की...

विशाल भी हंसा और बाहर की ओर बढ़ते हुए बोला... मैं देखता हूँ ...

वह कमरे से बाहर निकला और आंगन को पार करते हुए बाहर वाले दरवाजे के करीब पहुंच कर जरा तेज स्वर में बोला .. कौन है ?

पुलिस...... दरवाजा खोलो... बाहर से कडकती आवाज आई...

पुलिस का नाम सुनकर विशाल का कलेजा धडक उठा... पुलिस उसके दरवाजे पर क्यों आई है, जबकि वह ऐसा वैसा कोई काम करता ही नहीं है

हो सकता है किसी और का पता पूछ रहे हो या किसी गलतफहमी में हो... यह सब सोचकर उसने दिल को समझाया और ऑल इज वेल ... ऑल इज वेल करते हुए दरवाजा खोल दिया

सामने भारी तोंद वाला इंस्पेक्टर जोगलेकर आठ दस सिपाहियों के साथ नजर आया

कहिये ? विशाल स्वर को न्रम बनाते हुए जोगलेकर से बोला ... क्या सेवा कर सकता हूं मैं आपकी ?

सेवा तो मैं तुम्हारी करूंगा बच्चू , जोगलेकर गुर्राया ... अफीम का धंधा करता है ना तू....

बुरी तरह से हडबडाया और घबराये स्वर में बोला विशाल ... य यह आप क्या कह रहे हैं साहब , म. मैं एक शरीफ और इज्जतदार आदमी हूं , मैंने तो आज तक अफीम देखी ही नहीं कि वह कैसी होती है .... आप मुझ पर नाहक इल्जाम लगा रहे हैं .....

तेरा नाम विशाल ही है न ? जोगलेकर उसके चेहरे को घूरते हुए गुर्राया ....

जी हां , ल. लेकिन मैं ऐसा वैसा कोई धंधा नहीं करता , म...मैं तो .....

विशाल की बात को बीच में ही काटकर एक कागज का पर्चा जेब से निकाल कर उसे लहराते हुए बोला जोगलेकर .... तेरे घर की तलाशी का सर्च वारंट साथ लाया हूं , मजिस्ट्रेट की तरफ से आदेश है , ले पढकर देख ले.....

विशाल की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा ..... उसने वारंट पढा तो उसका कलेजा उछल कर उसके हलक में आ गया .... यह मेरे साथ किसी की साजिश है इंस्पेक्टर, म मैं ....

वाह बेटे , एक तो खुद को शरीफ बता रहा है ऊपर से किसी की साजिश बता रहा है, साजिश तो चोर उच्चकों के साथ खेली जाती है ...

आप समझने की कोशिश कीजिए इंस्पेक्टर, म मैं सच कहता हूँ मैं ऐसा नहीं हूं ...

इसका पता अभी चल जाएगा कि तू कैसा है , अंदर चलो और पूरे घर की तलाशी लो... सिपाहियों को आदेश देते हुए एक बार फिर गुर्राया जोगलेकर ...

 


सिपाही विशाल को एक तरफ धकेलकर अंदर दाखिल हो गए ...

उधर अंदर के दरवाजे के बीच खडी रानी ने सिपाहियों को अंदर आते देखा तो उसका जिस्म थरथर कांपने लगा , माथे पर पसीना छलक आया, आँखों में खौफ और बेचैनी भर आई .. तेजी से वह दरवाजे से बाहर निकली और सिपाहियों के करीब से होते हुए जोगलेकर के सामने आ खड़ी हुई

मेरे भैया ऐसै नहीं है इंस्पेक्टर साहब , भगवान हमें इजत की रोटी दे रहा है फिर हम गलत धंधा क्यों करने लगे भला...

लेकिन जोगलेकर ने उसकी बात का जवाब नहीं दिया , बस एकटक रानी की भारी और नुकीली छातियों को घूरता रह गया साथ ही वह कामुकता और भद्दे अंदाज से होंठों पर जीभ फेरने लगा ...

विशाल ने उसकी यह हरकत देखी तो भीतर ही भीतर उसका खून खौल उठा ... बड़ी मुश्किल से उसने अपने आप पर काबू पाया और रानी की तरफ देखते हुए गुस्से से बोला... तू अंदर जा रानी

रानी खुद भी जोगलेकर की आँखों में तैरती वासना की हवस देख चुकी थी , सो वह पिछे हट गई

जोगलेकर के होंठों पर धूर्तता भरी मुस्कान नाच उठी.... तेरी बहन हैं ये ? विशाल की तरफ देखते हुए बोला ......

हां .... विशाल रूखे स्वर में बोला ......

जिस ढंग से मुस्कुरा कर जोगलेकर ने बात की थी उसे देखकर विशाल का दिल किया कि वह उसका मुंह तोड दे, मगर वह जानता था कि उसकी कोई भी हरकत उसके लिए भारी ही साबित होगी

भीतर ही भीतर खून का घूंट पीकर रह गया वो ....

तभी एक सिपाही कमरे से बाहर निकला और तेज कदमों से चलता हुआ जोगलेकर के पास आकर बोला .... बैड के नीचे से यह मिला है सर....

सिपाही ने पोलीथीन का एक लिफाफा जोगलेकर की ओर बढा दिया

लिफाफा देख कर विशाल के पैरों तले जमीन खिसक गई, आँखों में व्याकुलता और भय उभर आया

जोगलेकर ने लिफाफा लेकर उसके भीतर झांका , फिर हाथ डालकर उसमें से तारकोल की तरह का गोला निकाला

उसने उसे सुंघा और बडबडाया .... अफीम

यह... यह मेरी नहीं है, मुझे फंसाया जा रहा है ... एकदम से चीख पडा विशाल

तडाक .......

जोगलेकर का वजनी थप्पड़ विशाल के चेहरे पर पड़ा

विशाल के गाल पर जलन हो उठी , आँखों में आँसू भर आए...

हरामजादे ... हमीं पर इल्जाम लगा रहा है.... गिरफ्तार कर लो साले को... अफीम के साथ साथ यह और क्या क्या धंधे करता है, यह सब थाने में बतायेगा यह...

मैं बेगुनाह हूं इंस्पेक्टर , मेरा कोई कसूर नहीं है और यह अफीम भी मेरी नहीं है... गिड़गिड़ा उठा विशाल

तो फिर तेरे घर से कैसे निकली ?

मुझे नहीं मालूम , लेकिन मैं ऐसा कोई धंधा नहीं करता... विश्वास ना हो तो पूरे मोहल्ले वालों से पूछ लो....

 


जब सबूत सामने है तो पूछताछ की क्या जरूरत है , गिरफ्तार कर लो हरामजादे को... दहाड़ कर बोला जोगलेकर

अगले ही पल विशाल की कलाइयों में हथकड़ीया पड गई....

अपने भाई को हथकड़ी लगते देख रानी खुद को रोक नहीं पाई और जोगलेकर के सामने आकर हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाने लगी... मेरा भाई निर्दोष हैं साहब , हम ऐसा वैसा कोई गलत काम नहीं करते...

यह सब बातें अब अदालत में बोलना.... गुर्राया जोगलेकर ... वही से जमानत की कोशिश करना , हो सकता है तेरे भाई की जमानत हो जाये .

.

फिर वह सिपाहियों की ओर पलट कर बोला, ले चलो इसे...

जाते जाते उसने रानी के मांसल जिस्म पर भरपूर निगाह डाली और लम्बी सांस छोड़ते हुए भद्दी सी हंसी हंसने लगा....

विशाल यह सब देख कर अंदर ही अंदर जलभुन रहा था , मगर इस वक्त हालात के आगे मजबूर हो गया था..

तू भीतर जा रानी.... वह रानी से बोला, और घबराना मत, जब मैं बेगुनाह हूँ तो कानून मुझे किसी भी हालत में कैद नहीं कर सकता ....

तभी पीछे से सिपाही ने उसे धकेला...

विशाल लडखडाया, फिर सामने खड़ी जिप्सी की ओर बढ़ने लगा ....

पीछे जार जार आंसू बहाती रानी अपने भाई की हो रही बेइज्जती को देख रही थी .. पूरा मोहल्ला घरों से बाहर निकल कर तमाशबीनों की तरह विशाल को देख रहा था ...

लॉकअप में बंद कर दो साले को ... थाने में पहुंचते ही दहाडा जोगलेकर

आदेश मिलते ही दो सिपाही उसे धकेल कर लॉकअप की तरफ ले जाने लगे... लॉकअप में पहुंचा कर एक सिपाही ने उसकी पीठ पर जोरों की लात मारी

विशाल मुंह के बल गिरा, उसकी ठुड्डी पक्के फर्श से टकराई और फट गई... तेज दर्द भरी कराह निकल गई और साथ ही निकल आया ठुड्डी से खून..

वह पलटा और उन सिपाहियों को देखने लगा जो उसे लॉकअप में लाये थे

अब लॉकअप का ताला बंद कर रहा था और दूसरा उसकी तरफ़ देख कर मुस्कुरा रहा था

है भगवान । वह मन ही मन रो पड़ा... अपनी जिंदगी में मैंने आज तक किसी का बुरा नहीं किया, फिर यह मेरे किस पाप की सजा मिल रही है मुझे ? तू अच्छी तरह जानता है भगवान कि वह अफीम मेरी नहीं थी, फिर मेरे घर में कहाँ से आ गई

उसकी आँखों में आँसू उमड़ पडे... जिन्दगी में पहली बार थाने का मुंह देखना पड़ा था ... इससे बड़ी जलालत और क्या हो सकती थी उसके लिए

विशाल घुटनों में सिर रखकर सुबकने लगा ... इस वक्त उसे अपने से ज्यादा रानी की चिंता हो रही थी

क्या बीत रही होगी उस बेचारी पर.... मुझे आजाद कराने के लिए पता नहीं रानी को कहां कहां धक्के खाने पडेंगे

अब बेचारे विशाल को क्या मालूम कि यह सारा फसाद हुआ ही रानी के कारण था... निरंजन चौधरी की हवस का शिकार बनाने के लिए एक खुशहाल घर को उजाडा जा रहा था ......

continue...........................................

 
करीब १५ मिनट बाद एक सिपाही ने उसे आवाज लगाई.. ऐ.. चल नाश्ता कर ले

विशाल ने सिर उठाकर उसकी तरफ देखा, सिपाही हाथों में दो सूखी रोटी और एक कटोरी में दाल लिए खडा था

भूख तो विशाल की उसी वक्त मर गई थी जब जोगलेकर को अपने दरवाजे के सामने देखा था .... विशाल ने मुंह फेर लिया

शी.. शी... सिपाही ने उसे ईशारा किया

विशाल ने वापस उसकी तरफ देखा ....

सिपाही ने एक बार इधर उधर देखा, फिर विशाल की तरफ देखते हुए फुसफुसाया... तेरी बहन की आबरू खतरे में है

बुरी तरह उछल पडा विशाल, जैसे ततैया ( टांटीया) ने डंक मार दिया हो.... विशाल सिपाही को इस तरह देखने लगा जैसे आँखों ही आँखों में भस्म कर डालेगा....

मैं सच कह रहा हूँ दोस्त, मेरे करीब आ.. मैं बताता हूं तुझे कि तुम पर यह जुल्म क्यों हुआ है ...

विशाल फौरन उठा और लॉकअप के सीखचों के करीब आ गया ...

नाश्ता पकड़ और मेरी बात सुन... सिपाही बोला

सिपाही ने सीखचों के नीचे से थाली उसकी तरफ बढ़ा दी मगर विशाल ने थाली को हाथ तक नहीं लगाया, वह बस सिपाही की तरफ देखता रहा

सिपाही ने एक बार फिर गर्दन दांये बांये तथा पीछे घुमाई कि कोई उसे देख तो नहीं रहा, फिर विशाल की तरफ देखते हुए बोला... बस इतना समझ लो कि इस थाने में एक मै ही ऐसा शख्स हूं जिसने कभी रिश्वत नहीं ली... मेरा नाम आयुष है...

त. तुम कुछ बताने जा रहे थे....

हां ... तुम्हारी बहन की इज्जत को खतरा है....

ल... लेकिन....

मेरे पास इतना वक्त नहीं है, चुपचाप मेरी बात सुनते रहो.... जिस मजिस्ट्रेट ने वारंट पर साइन किये थे वह और हमारा एस पी, रायपुर का नेता निरंजन चौधरी और वकील सुरेश पाटील, ये चारों एक ही थैली के चट्टे बट्टे है.... निरंजन चौधरी के सामने तुम्हारी बहन को पेश करने के लिए ही तुम्हें जानबूझकर फंसाया गया है ताकि तुम कोई बवाल ना मचा सको....

विशाल की आँखों में खून उतर आया... मेरी बहन की तरफ आँख उठाने वालों की मै आँखें नोच डालूंगा, जिन्दा नहीं छोडूंगा किसी को भी....

तू कुछ नहीं कर पायेगा दोस्त, क्योंकि यह राक्षसों की नगरी है... यहां केवल रावण राज चलता है... अब तक तेरी बहन के कान में निरंजन चौधरी का कोई आदमी फूंक मार चुका होगा. .

कैसी फूंक.. विशाल ने पूछा

तभी पीछे से जोगलेकर की कडकती आवाज आई ... क्या बात हो रही है आयुष ?

एकदम से हडबडा उठा आयुष... उसने गरदन घुमा कर पीछे की तरफ देखा तो जोगलेकर उसकी तरफ़ बढ़ रहा था

म.. मैं तो नाश्ता देने आया था सर.... हडबडाया सा बोला आयुष

क्या मैंने तुम्हें इसे नाश्ता देने के लिए कहा था ? दहाडा जोगलेकर

म. म. मैंने सोचा कि ....

शटअप.... थाली उठा और वापस ले जा... ऐसे हरामीयों के लिए खाना नहीं बनता थाने में ... क्रोध से बोला जोगलेकर

घबराकर आयुष ने हाथ सीखचों के नीचे डाला और थाली वापस उठाकर खडा हो गया... उसने एक नजर विशाल पर डाली फिर वहां से हट गया

क्या कह रहा था वह तुमसे ? उसके जाते ही गुर्राया जोगलेकर

जवाब देने की बजाय विशाल ने झटके से मुंह फेर लिया ... इस वक्त उसे अपने से ज्यादा रानी की चिंता सता रही थी

रानी को बचाने के लिए उसका बाहर निकलना बहुत जरूरी था, जबकि उसे ऐसा कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था जिससे वह लॉकअप से बाहर निकल कर अपनी बहन की जिंदगी बर्बाद होने से बचा ले

साथ ही वह उस फूंक के विषय में भी सोच रहा था जिसका जिक्र आयुष ने किया था ....

फूंक तो लग चुकी थी..

विशाल के गिरफ्तार होने के आधे घंटे बाद ही लग चुकी थी

उस वक्त रानी अपने कमरे में बैठी दहाड़े मारकर रो रही थी ... विशाल की गिरफ्तारी तथा मोहल्ले में हुई अपनी बेइज्जती के कारण वह जैसे किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रही थी

उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपने भाई को बचाने के लिए क्या करें.... ना वह घर से कभी बाहर निकलती थी और ना ही किसी को जानती थी

और ऐसे पुलिस के मामले में कोई पडना भी नहीं चाहता है कि उसकी मदद के लिए सामने से कोई आगे आये

तभी तो वह बस रोती जा रही थी.... कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई

खट... खट... खट...

रोती हुई रानी उठी और पल्लू से आंसू पोंछते हुए दरवाजे की तरफ बढ़ गई

कौन है ?

दरवाजा खोलो बहन... बाहर से एक अजनबी आवाज आई

 


अजनबी ने उसे बहन कहकर संबोधित किया था सो रानी को दरवाजा खोलने में कोई हिचक नहीं हुई अत: उसने दरवाजा खोल दिया... सामने एक नितांत अजनबी व्यक्ति खडा था

मैं पिछले मोहल्ले में रहता हूँ बहन... अजनबी सहानुभूति स्वर में बोला, अभी अभी मुझे विशाल की गिरफ्तारी के बारे में पता चला तो फौरन यहा आ गया... क्या किया था उसने ?

मेरा भाई बेगुनाह है भाई साहब उसने कुछ नहीं किया ... रानी की आँखों से बहने वाले आंसुओं में तेजी आ गई उस व्यक्ति कि सहानुभूति महसूस करके

यह तो मैं भी जानता हूं कि विशाल ने कुछ नहीं किया ... विशाल को काफी पहले से ही जानता हूँ.... मगर फिर पुलिस उसे पकड़ कर थाने क्यूँ ले गई ?

हमारे घर से अफीम बरामद की है पुलिस ने... भगवान की सौगंध, हमें उस अफीम का कुछ पता नहीं था... मेरे भैया ने तो कोई अफीम देखी भी नहीं थी

पुलिस ने जानबूझकर फंसाया है विशाल को.. अवश्य ही पुलिस वालों ने खुद अफीम रखी होगी ताकि किसी तरीके से विशाल को गिरफ्तार किया जा सके.... अंधेरगर्दी मचा रखी है पुलिस ने, शरीफ लोगों को तंग करने का जैसे ठेका ही ले रखा है इन्होंने....

दो मीठे बोल सुनकर रानी की रुलाई और तेज हो गई...

रोओ मत बहन, विशाल को कुछ नहीं होगा... जब उसने कुछ किया ही तो फिर वह फंसेगा क्योकर

एक पल के लिए वह व्यक्ति रूका फिर बोला.... उसे छुडाने के लिए तुमने कुछ किया ?

म मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है भाई साहब.. अपने भाई को बचाने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा मुझे ...

मेरी मानो तो चौधरी साहब के पास चली जाओ तुम ... वह व्यक्ति बोला ( फूंक)

चौधरी साहब ? रानी के मुख से सवालिया स्वर निकला

देवता हैं, रायपुर के नेता है वे, जनसेवक... उनके दरवाजे पर गया कोई व्यक्ति खाली हाथ वापस नहीं लौटा... तुम उनके सामने जाकर अपना दुख दर्द बताओ.. फिर देखना क्या हालत करते हैं पुलिस वालों की... विशाल को छुडवा कर ही थाने से बाहर निकलेंगे

रानी की आँखों में आशा की हल्की सी किरण जागी

कहां रहते हैं ये चौधरी साहब ?

अरे... चौधरी साहब का घर नहीं जानती तुम... हैरानी से बोला वह अजनबी

मैं तो कभी घर से बाहर तक नहीं निकलती भाई साहब, मुझे बताईये कहा रहते हैं चौधरी साहब ... मैं अपने भाई के लिए झोली फैलाकर भीख मागूंगी, उनके पैरों को अपने आंसूओं से धो दूंगी... सबूकते सबूकते हुए बोली रानी

अगले चोक से रिक्शा लो.. उसको बस यहीं कह देना कि चौधरी साहब की कोठी पर जाना है... वह तुम्हें पहुंचा देगा

शुक्रिया भाई साहब ... आपने कठीन समय में आकर मुझे अपने भाई की मुक्ति का जो मार्ग दिखाया है उसके लिए मैं जीवन भर आपकी आभारी रहूंगी...

यह तो मेरा फर्ज था ... गम्भीरता से बोला वह व्यक्ति

मैं अभी चौधरी साहब के पास जाऊंगी... कहते हुए रानी अंदर की तरफ मुड़ गई

वह अजनबी भी वापिस मुड़ गया ... अगर उस वक्त कोई उसके होठों पर फैली मुस्कान देख लेता तो अवश्य ही वह खौफजदा हो जाता

सिंह साहब को खबर भेज दूँ ताकि वह आगे चौधरी साहब को सूचित कर दे कि शिकार जाल की तरफ बढ़ने जा रहा है... वह मन ही मन बड़बड़ाया और तेज कदमों से आगे बढता चला गया ...

*************

ट्रिन... ट्रिन... फोन की रिंग बजी...

निरंजन चौधरी ने हाथ में थमा पेग होंठों से लगाया और एक ही सांस में खाली करके टेबल पर रख कर करीब रखे हुए फोन का रिसीवर उठाकर कान से लगा लिया...

हैल्लो.... जनसेवक निरंजन चौधरी बोल रहा हूँ ... आवाज़ में जमाने भर की मिठास भरते हुए बोला ...

मैं अवतार सिंह बोल रहा हूँ चौधरी साहब... दूसरी तरफ से कहा गया

चौधरी का लहजा एकदम से बदल गया और फुंफकारते हुए बोला .. आधा दिन बीत गया है अवतार, याद है ना मैंने क्या कहा था?

वह आ रही है चौधरी साहब

निरंजन चौधरी की आँखों में शैतानी चमक उभर आई... कब ? कब आ रही है वो ?

राजकिशोर ने उसके कान में फूंक मार दी है.. अपने भाई को छुड़ाने की गुहार करने आपके पास किसी भी वक्त पहुंच सकती है

निरंजन चौधरी की नसें यह सुनकर ही तनने लगी... माल बढिया है न ? कुत्ते की तरह होंठों पर जुबान फिराते हुए बोला वह

आप खुद ही देख लीजिएगा, अगर पंसद आये तो रख लीजिएगा वर्ना जाने दीजिएगा ... मैं कोई और व्यवस्था करूंगा

ठीक है ...

उसे कैसे हैंडिल करना है यह तो आप जानते ही हैं

खूब अच्छी तरह जानता हूँ ...

धूर्तता से मुस्कुराया निरंजन चौधरी और पलंजर दबा कर एस पी राजीव सेन का नम्बर डायल करने लगा...

हैल्लो.... दूसरी तरफ से आवाज आते ही वह बोला, चौधरी बोल रहा हूँ

कहिये चौधरी साहब.. शिकार पहुंचा या नहीं ? जिस ढंग से दूसरी तरफ से पूछा गया था उससे साफ पता चलता था कि चौधरी ने अपने पार्टनरों को पहले ही सबकुछ बता रखा है

फौरन आ जाओ, शिकार अपने घोंसले से निकल कर हमारी तरफ आ रहा है

मैं फौरन आ रहा हूँ, कुंवारा बदन छुए एेसा लग रहा है जैसे बरसों बीत गए हो

हा... हा.. हा.. निरंजन चौधरी ने अट्टहास लगाया

 
प्रताप सिंह और सुरेश पाटील को भी फोन किया या नहीं ?

वे अभी अदालत में है, उन्हें रात को प्रसाद मिल जायेगा... अभी तुम जल्दी आओ

ओके, मैं आ रहा हूँ..

चौधरी ने फोन रखा और पैग तैयार करने लगा

एक नाजुक कुंवारी कली के बदन की कल्पना करते हुए उसकी आँखों में अभी से वासना के लाल डोरे तैरने लगे...

पैग बनाकर उसने जल्दी जल्दी खतम किया और उठकर बाहर के कमरे में आ गया

यह वह कमरा था जिसमें चौधरी अक्सर बैठ कर लोगों की शिकायतें, और उनके दुःख दर्द सुना करता था

एक तरह से यह उसका दरबार था

कमरे में एक रिवाल्विंग चेयर के सामने दस बारह कुर्सीयाँ लगी हुई थी... रिवाल्विंग चेयर के आगे एक छोटी टेबल पर एक कापी तथा बालपेन पडा था ... लोगों की शिकायतों को वह उन पर रौब डालने के लिए लिखा करता था ... उसका यह तरीका शिकायतकर्ता को काफी हद तक वहीं पर संतुष्ट कर देता था और वह यही समझता था कि अब उसका काम अवश्य हो जायेगा

यह अलग बात थी कि चौधरी केवल उन्हीं शिकायतों के लिए प्रशासन पर दबाव डालता था जिसमें उसका अपना फायदा होता था

करीब १५ मिनट बाद राजीव सेन कमरे में दाखिल हुआ

वह आई ? आते ही उसने पूछा

उसी का तो इंतजार कर रहा हूँ ... कुर्सी पर पहलू बदलते हुए बोला निरंजन चौधरी.. पर साला इंतजार भी क्या चीज होती है ये आज पता चला

हंसा राजीव सेन... जिंदगी में पहली बार आप किसी का इंतजार कर रहे हैं वरना अब तक आपने सभी को इंतजार करवाया है

उसकी बात पर चौधरी भी हंस पड़ा ..

ध्यान रखना, कहीं ऐसा ना हो कि उसके आने से पहले ही मीटर डाउन हो जाये ... हंसते हुए बोला राजीव सेन

मेरी फिक्र मत करो सेन, निरंजन चौधरी में अभी भी इतना कंरट है कि वह चार सौ चालीस वाल्ट के झटके मार सकता है... उसके हल में अभी भी इतनी धार है कि सूखी जमीन को फाडने की ताकत रखता है... हां, अपना हल संभाल कर रखना, कहीं जमीन पर पडते ही टूट ना जाये ...

निश्चित रहिये चौधरी साहब, रोज पांच सौ दंड पेलता हूँ ... अभी भी मेरे अंदर इतनी ताकत है कि कुंवारे बदन को भी नींबू की तरह निचोड़ डालू

आने दें उसे पता लग जाएगा... मुस्कुरा कर बोला चौधरी

*******

दरबान ने ऊपर से नीचे तक रानी को घूर कर देखा फिर उसके चेहरे पर निगाह जमाते हुए बोला... किससे मिलना है ?

रानी ने जोर से थूक निगली और सहमे स्वर में बोली... न नेताजी से

दरबान के होंठों पर अर्थ भरी मुस्कान आकर लुप्त हो गई, प्रत्यक्ष में बोला .. जा मिल ले नेताजी से...

रानी बुरी तरह से सहमी हुई हिरनी की तरह अंदर दाखिल हो गई

वो सामने वाला खूला दरवाजा देख रही हो, नेताजी का दरबार वहीं लगता है... वहीं चली जा

रानी ड्राइवे पर आगे बढ़ गई.. ड्राइवे के अंत में नीली बत्ती वाली एक एम्बेसेडर खडी थी तथा उसके आगे दो विदेशी गाडि़यां खड़ी थी... उन गाड़ियों की बगल से होती हुई रानी कम्पाउंड में दाखिल हुई और दांयी तरफ वाले खुले दरवाजे की तरफ देख झिझकने लगी... पैर आगे बढ़ाने का हौसला नहीं हो रहा था उसका..

मगर जब विशाल का चेहरा उसकी आँखों के आगे आया तो उसने हिम्मत जुटाई और भीतर दाखिल हो गई

रिवाल्विंग चेयर पर चौधरी बैठा हुआ था और उसके सामने एक कुर्सी पर राजीव सेन बैठा था

एक पुलिस अधिकारी को वहां देखकर रानी की हिम्मत जवाब देने लगी .. उसे लगने लगा कि उसे वहां से न्याय नहीं मिलेगा

तभी निरंजन चौधरी की नजर रानी पर पड़ी... राजीव सेन की गर्दन भी उसकी तरफ घूम गई..

रानी का रूप सौंदर्य तथा उसकी आग उगलती जवानी को देखकर दोनों के कलेजे उछल कर उनके हलक में आ गए , दिल जोर शोर से धडक उठे

पहली ही नजर में चौधरी की पारखी निगाहों ने भांप लिया कि वह अभी खिलती हुई नाजुक कली हे जिसे अभी तक किसी मर्द का स्पर्श नहीं हुआ है, हाथ नहीं लगा है

रानी का सौंदर्य देख राजीव सेन भी ठगा सा रह गया... उसका तो दिल कर रहा था कि वह अभी छलांग मार कर उसे दरवाजे पर ही पटक कर सारे कपड़े फाड़ कर उसके ऊपर चढ़ जाऊं

मगर किसी तरह उसने अपने पर काबू पाया और चौधरी की तरफ देखते हुए कहा... दुखियारी मालूम पड़ती है

हडबडा उठा चौधरी, जैसे नींद से जागा हो... और फिर होंठों पर नेताओं सरीखी मुस्कान लाते हुए बोला.. आओ देवी .. बोलो क्या कष्ट हे तुम्हें

रानी सहमी हुई आगे बढ़ी और चौधरी से कुछ दूर आकर ठिठक गई... उसने चोर नजरों से सेन की तरफ देखा

घबराओ नहीं, जो कहना है खुल कर कहो... यह निरंजन चौधरी का दरबार है और निरंजन चौधरी के दरबार से कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं जाता... बताओ क्या शिकायत है तुम्हारी

रानी ने एक बार फिर सेन की तरफ देखा फिर एकाएक उसकी आँखों से अविरल आंसू धारा बह निकली.. चेहरा बनने बिगड़ने लगा

अर अ अरे... तुम तो रोने लगी ... हडबडाहट का जबरदस्त प्रदर्शन किया निरंजन चौधरी ने

म मेरे भैया को बचा लिजिये नेताजी ... रानी हाथ जोड़कर बोली

क्या हुआ तुम्हारे भाई को

उसे पुलिस पकड़ कर ले गई है

चौधरी के चेहरे पर शोक जैसे भाव ऊभर आये... देखो देवी, अगर तुम्हारे भाई ने कोई गलत काम किया है तो कानूनन उसे सजा मिलनी ही चाहिए

वह बेगुनाह है नेताजी, मेरे भाई ने कुछ नहीं किया.. प पुलिस ने उसे बिना वजह पकड़ लिया है

ऐसा कैसे हो सकता है ... हैरानी प्रदर्शित की चौधरी ने

ए ऐसा ही हुआ है नेताजी

हुआ क्या.. कुछ बताओ तो सही

रोते हुए रानी ने उसे सब कुछ कह सुनाया... बीच बीच में वह राजीव सेन को भी देखती रही

 


रानी की बात पूरी होते ही चौधरी ने सेन की तरफ देखा और उलाहने भरे स्वर में बोला ... सुन रहे हो एस पी, यह है तुम्हारी पुलिस के कारनामें

वो चौधरी साहब ....

परसो ही तुम्हारे इंस्पेक्टर ने ऐसे ही एक बेगुनाह को पकड़ा था और पांच हजार रुपये रिश्वत मांगी थी... तब हमने उसे छुडाया था लेकिन हमारी गालियाँ खाकर भी तुम्हारे इंस्पेक्टर को होश नहीं आया

हो सकता है यह लड़की झूठ बोल रही हो... नर्वस होने की शानदार एक्टिंग की राजीव सेन ने

इसके चेहरे को देखो, इसकी आँखों से बहते आंसूओं को देखो... यह तुम्हें झूठ बोलती नजर आ रही है... गुस्से से गुर्राया निरंजन चौधरी

म मैं मामले की छानबीन करूंगा

और मामले की छानबीन में दो चार महीने तो लग ही जायेंगे... तब तक एक बेगुनाह हवालात में पडा सडता रहेगा ...

हडबडाया राजीव सेन

मुझे लगता है इस शहर से तुम्हारा और उस इंस्पेक्टर का दाना पानी उठ चुका है ... मैं अपने शहर के लोगों पर जुल्म होता नहीं देख सकता ... मैं आज ही सी. एम. से बात करूंगा

कैसी बातें करते हैं आप चौधरी साहब... राजीव सेन स्वर में चापलूसी लाते हुए बोला

तो फिर फौरन इसके भाई को छोड़ने का आदेश दो... कहकर चौधरी ने रानी की तरफ देखा

क्या नाम है तुम्हारे भाई का.?

जी.. विशाल ....

और तुम्हारा ?

रा.. रानी

एस पी को पडती डांट देख कर उस पर काफी प्रभाव पड़ा था... वह यही समझ रही थी कि अब विशाल छूट जायेगा

कितनी बड़ी गलतफहमी में थी वह... मगर उस बेचारी को भी कहां मालूम था कि वह दरिंदों के पास न्याय की गुहार लगाने आई है

बहादुर ... निरंजन चौधरी भीतर वाले दरवाजे की तरफ मुंह करके ऊंचे स्वर में बोला

तुरंत एक नौकर कमरे में दाखिल हुआ... मगर वह नौकर कम पहलवान अधिक नजर आता था

हुक्म मालिक ... वह हाथ जोड़ते हुए बोला

चौधरी ने रानी की तरफ देखा और कहा ... तुम इसके साथ अंदर जाकर बैठो देवी... यह एस पी खुद तुम्हारे भाई को लेकर यहां आयेगा ताकि हम भी अपनी तसल्ली कर सके कि वह बेगुनाह है या नहीं

रानी की आँखों में आशा की किरण जाग उठी

इसे ले जाओ बहादुर और चाय पानी पिलाओ.. उसने बहादुर की तरफ देखा और साथ ही आँख मार दी

बहादुर मुस्कुराया फिर रानी की तरफ देखते हुए कहा... आईये देवी जी

रानी उसके पीछे पीछे चलती हुई अंदर के कमरे में प्रवेश कर गई

उसके भीतर जाते ही दोनों की आँखें आपस में टकराई और होंठों पर मुस्कान नाच उठी

हमारे शहर में इतना शानदार हसीन तरीन माल है और अवतार सिंह ने उसे अब जाकर पेश किया.. हरामी कहीं का.... भुनभुनाते हुए बोला चौधरी

सचमुच, जवानी संभाले नहीं संभल रही इसकी, चेहरा देख कर ही पता चल रहा है कि अभी तक कच्ची कली है... होंठों पर आई लार पर जीभ फेरते हुए बोला राजीव सेन

मुझसे अब सब्र नहीं हो रहा... चौधरी अपनी धोती में औजार को सहलाते हुए बोला

पांच दस मिनट रूक जाये चौधरी साहब , तब तक वह भी संभल जायेगी

मगर पांच सात मिनट गुजारूंगा कैसे ?

पैग लगाईये , होशियारी भी आ जायेगी और.... बात अधूरी छोड़ राजीव सेन ने आंख दबा दी

चौधरी के होंठों पर मक्कारी से भरपूर मुस्कान नाच उठी

और पहली ही बार में कबाडा मत कर देना , कहीं ऐसा ना हो कि हमारी बारी आते आते वह किसी काम की न रहे

यह सुनकर चौधरी ने सीना चोडाया , गर्दन अकडाई और दंभ भरते हुए कहा ... तुम्हारी बारी तो एक दो घंटे बाद आयेगी , तब तक तुम स्कॉच चढाते रहना

दो घंटे ? हैरानी से बोला राजीव सेन

अरे भाई , बलात्कार करना है और फिर कुंवारी है तो मेहनत करनी पड़ेगी कि नहीं

हौले से हंस पड़ा राजीव सेन...

निरंजन चौधरी के कमरे में प्रवेश करते ही रानी जो कि बैड के कोने पर बैठी थी ,, हडबडा कर खडी हो गई

म. मेरा भाई आ गया नेताजी ?

आ जायेगा.. आ जायेगा.. चौधरी होंठों पर कुटील हंसी बिखेरता हुआ बोला, जब हमने कह दिया है तो समझ लो तुम्हारा भाई रिहा हो जायेगा

उसकी सुर्ख आंखे, भर्राई आवाज तथा चाल में हल्की लडखडाहट देख रानी का कलेजा जोरो से धडक उठा

औरत बेशक कुछ और समझे या न समझें मगर वह आदमी की नजरों को समझते देर नहीं लगाती

निरंजन चौधरी की आंखों में उसे हवस और वासना के कीड़े गिजगिजाते हुए साफ नजर आ रहे थे

अ आप मेरे भाई को घर भेज दीजियेगा नेताजी... म. मैं अपने घर जा रही हूँ... रानी घबराये स्वर में बोली और जैसे ही वह चौधरी के पास से निकलने को हुई, चौधरी ने उसकी बांह पकड़ ली...

ऐसी भी क्या जल्दी है देवी, तुम्हारे भाई के पास से अफीम बरामद हुई है , जानती हो कितना बड़ा केस है वह

रानी के चेहरे की रंगत पीली पड गई , आँखों में खौफ के साये गर्दिश करने लगे

जी में कुछ समझी नहीं ... बस इतना ही कह पाई वो अबला

फीस... निरंजन चौधरी उसकी छातियों पर निगाहें जमाते हुए धूर्तता से मुस्कुराया

फ. फीस.... क. कैसी फ. फीस... अटकते हुए बोली रानी

तेरे भाई को आजाद कराने की फीस, ज्यादा नहीं लूंगा

ल. लेकिन इस वक्त तो म. मेरे पास कुछ भी नहीं है

निरंजन चौधरी घिनौनी हंसी हंसा और बोला ... अरी तेरे पास तो खजाना दबा हुआ है और तू कहती हैं कि तेरे पास कुछ नहीं ... बस कुदाल से थोड़ी खुदाई करनी पड़ेगी.. प्यार का रस निकलेगा और हमें हमारी फीस मिल जायेगी

इतना कहकर निरंजन चौधरी ने रानी के यौवन कलशौं को सहला दिया..

रानी का पूरा जिस्म थर्रा गया... आँखों में छाया खौफ और गहरा गया

उसने अपने हाथ से उसके हाथ को हटाया और रूंआसे स्वर में बोली.. मुझे जाने दीजिए नेताजी

क्यों ? क्या भाई को नहीं छुडवाना ?

म. मैं अपने भाई को बचाने के लिए अच्छै वकील को कर लूंगी

निरंजन चौधरी के होंठों पर दरिंदगी से भरपूर अट्टहास उभरा... हा... हा... हा...

रानी के जिस्म से पसीने की धाराएं फूटने लगी.. चौधरी का अट्टहास उसकी रूह तक को कंपाता चला गया...

 


जिस वकील को तू करेगी वह भी तेरे से यही फीस वसूल करेगा... मजिस्ट्रेट भी तेरे भाई को आजाद करने से पहले दो तीन घंटे तेरे साथ गुजारने की फीस लेगा... इससे अच्छा तो यही है कि तू इस बात को अदालत में जाने ही न दे... शाम को मजिस्ट्रेट और वकील यहां आ जायेंगे, तू उन्हें खुश कर देना, सुबह तेरा भाई आजाद हो जायेगा

कमीने... रानी का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा... जनता का सेवक बनने का ढोंग रचा कर तू जनता को लूटने वाला राक्षस है... तू क्या समझता है कि मैं अपनी अस्मत तुझे सोंप दूंगी ?

बिल्कुल नहीं वहशी मुस्कान के साथ बोला चौधरी.. अगर तू मेरे कहते ही अपने कपड़े उतार देती तो मैं हरगिज तुमसे प्यार नहीं करता... क्योंकि उस सूरत में तू पहले से ही खेली खाई होती, जबकि अब तो मुझे पूरा विश्वास हो गया है कि तू एकदम मदमस्त कुंवारी, अनछुई कली है

म. मैं शोर मचा दूंगी... चीख उठी रानी... यह मत समझ कुत्ते की मुझे पाने में तू सफल हो जायेगा ... मैं अभी एस पी साहब को....

मेरे बाद उसी की तो बारी है

रानी के चेहरे पर भूचाल नाच उठा सिर पर जैसे कयामत ही टूट पडी हो...

त. तो क्या .....

तू ठीक समझ रही हैं मेरी जान... हम चारों ही तो कानून के मुहाफिज है... एक मुजरिमों को पकड़ने वाला एस पी राजीव सेन, दूसरा मुकदमा लडने वाला वकील सुरेश पाटील, तीसरा फैसला सुनाने वाला जज प्रताप सिंह और मुझे तो तू जानती ही है... जनसेवक, महिला सुधार समिती का अध्यक्ष निरंजन चौधरी ....

अब बोल कैसे बचा पायेगी तू अपने भाई को... इसलिए मेरा कहना मान, चुपचाप कपडे़ उतार दे और बिस्तर पर लेट जा... तेरा भाई भी आजाद हो जायेगा और आगे से तुझे पैसों की भी कमी नहीं रहेगी ...

तडाक .....

तभी रानी का गुस्से से भरपूर थप्पड़ उसके चेहरे पर पड़ा

कमीने कुत्ते ... देश के दुश्मन हो तुम.... अरे तुम्हें तो चौराहे पर खडा करके गोली मार देनी चाहिए... एक बात कान खोल कर सुन ले... मैं मर जाऊंगी लेकिन अपनी इज्जत तुम कुत्तों के हाथों नहीं लुटने दूंगी...

थप्प्पड़ खाकर जहां चौधरी का चेहरा आगबबूला हो गया वहीं दूसरी ओर रानी की दहाड़ सुन कर उसके होठों पर जहरीली मुस्कान नाच उठी...

मुझे तेरे से यही उम्मीद थी मेरी जान की तू कपड़े नहीं उतारेगी... यूं भी आज मैं रेप करने के मूड में हूं सो कपड़े उतरेंगे नहीं बल्कि फटेंगे ...

तू मुझे हाथ भी नहीं लगा सकता...

उसकी बात पूरी होते ही चौधरी ने झपट कर उसके कहर ढाते उरोजों को जोर से मसल दिया ..

रानी के होंठों से दर्द भरी चीख उबल पडी...

हाथ तो मैंने लगा दिया जानेमन और अब तो बहुत कुछ लगाऊंगा में....

अगले ही पल रानी के पैने नाखून उसके चेहरे पर खरोंचें बनाते चले गए और उनमे से खून रिसने लगा....

हौले से चीखते हुए चौधरी ने रानी के उरोजों को छोड़ा और हाथ अपने चेहरे पर फिराने लगा....

रानी तेजी से दरवाजे की तरफ दौडी...

मगर जैसे ही वह दरवाजे के करीब पहुंची, भूत की तरह बहादुर दरवाजे के बीचोंबीच आ खडा हुआ... उसने रानी की छातियों पर हाथ रखते हुए पीछे धकेल दिया ...

रानी चीखती हुई पीठ के बल पर जा गिरी और जब तक वह वापस उठती... फटाक से दरवाजा बंद हो गया... साथ ही बाहर से कुंडा लगाने की आवाज सुनाई दी

तभी निरंजन चौधरी उसके करीब आ गया ... चेहरे पर बनी खूनी लकीरों की वजह से वह बहुत भयानक नजर आने लगा था ... रानी को ऐसे लग रह था जैसे कोई रक्त पिपासु राक्षस खडा हो ...

इस कमरे से अब तू तभी बाहर निकल पायेगी जब हमारी इच्छा होगी... वह भयानक मुस्कान के साथ बोला... और अपनी इच्छा तो हम अभी फू करेंगे ...

रानी बिलखती हुई उसकी टांगों से लिपट गई...

मुझे जाने दीजिए चौधरी साहब, भगवान के लिए मेरी आबरू से मत खेलिये ...

लेकिन उस दरिंदे का दिल रानी की गिडगिडाहट पर जरा भी नहीं पिघला... वह झुका और रानी की चोटी पकड़ कर उसे खडा कर दिया...

प्यार का रस टपकाये बिना तो मैं तुझे किसी भी हालत में नहीं छोडूंगा ...

कहने के साथ ही उसने रानी के गिरेहबान में हाथ डालकर एक तेज झटका दिया ...

चर्र र्र र्र र्र की आवाज के साथ रानी की कमीज का अगला हिस्सा फटता चला गया और नीचे काले रंग की अंगिया में से उसकी यौवन रस से भरपूर गुलाबी छातियां नजर आने लगी ...

रानी के होंठों से चीख निकल गई ... वह स्वयं को बचाने की जी जान से कोशिश कर रही थी मगर उसके बाल उस वहशी के हाथों में होने की वजह से वह स्वयं को मुक्त कराने में नाकाम रही ...

अंगिया में छुपी रानी की भारी और गुलाबी छातियों को देखकर चौधरी पागल सा हो गया ...

तुरंत उसने बालों को छोडा और उसे अपने सीने से लगा कर जोरो से भींच लिया ...

स्वयं से चिपकाए हुए चौधरी ने रानी को उठाया और बैड पर लाकर पटक दिया तथा खुद उस पर सवार होकर उसकी छातियों के बीच दो अँगुलियाँ फसाई और अपनी तरफ झटका दिया...

कडक की हल्की सी आवाज के साथ अंगिया के हुक टूट गये और उसकी कमसीन कुंवारी गदराई छातियां फडफडा कर एक दूसरे से अलग हो कर छत की तरफ सिर उठाकर खडी हो गई ...

निरंजन चौधरी की सांसो में तेजी आने लगी... वह पागलों की तरह उसके कठोर उरोजों को मसलने लगा.... जैसे आज दुध की नदियां बहाने का संकल्प लिया हो...

छोड दे कुत्ते... छोड दे मुझे... रानी चीखती हुई उसे परे धकेलने लगी....

मगर नाकाम ....

और फिर आनन फानन चौधरी ने अपने कपड़े उतार दिए तथा पूरी तरह से मादरजात नंगा हो गया और फिर रानी की प्रैम गुफा में समाने की कोशिश करने लगा

रानी खुद को बचाने की बेइंतहा कोशिश कर रही थी... वह बार बार अपने कूल्हों को इधर उधर कर रही थी ... चौधरी को अपने उपर से हटाने की जी तोड़ मेहनत कर रही थी ...

चौधरी जब भी प्रैम गुफा के द्वार पर शॉट लगाता, रानी अपने कूल्हों को इधर उधर कर लेती ...

चौधरी की उत्तेजना पल प्रतिपल बढती जा रही थी, उसके शरीर का सारा लहू एक जगह इकट्ठा होकर विस्फोट करने को तैयार था ... अब उससे ज्यादा बरदाश्त नहीं हो पा रहा था सो उसने रानी की टांगों में अपनी टांगे कुछ इस तरह फंसा दी कि वह चाहकर भी अपने कूल्हों को हिला भी न सके ...

और फिर .....

( वह हो गया जो किसी भी लड़की के साथ किसी भी परिस्थिति में किसी के भी द्वारा कदापि नहीं होना चाहिए)

सहसा रानी को कोई दहकता ज्वालामुखी अपने अंदर समाता महसूस हुआ

रानी के होंठों से ह्रदय विदारक चीखें उबल पडी ... उसकी आँखें इस तरह फट गई जैसे पुतलियाँ बाहर आ गिरेगी... मुँह खुला का खुला रह गया

लेकिन चौधरी को उसकी चीख पुकार ने और वहशी बना दिया वह एक भूखे भेड़िये कि तरह उसके नाजुक जिस्म से खेलने लगा...

उसके उरोजों का मर्दन करते हुए गहरे गहरे शॉट लगाकर उसकी इज्जत की धज्जियां उड़ाता चला गया ...

रानी लुट गई ... बरसों से इज्जत के जिस अनमोल मोती को संभाल कर रखा था,, आज एक हैवान की हैवानियत के पैरों तले चकनाचूर हो चुका था

उसकी आँखों से आंसुओं का सैलाब बह निकला ...

मगर वह दरिंदा आंसुओं की परवाह किए बगैर अपनी हवस पूरी करने में जुटा रहा ...

और फिर, एकाएक रानी को ऐसा महसूस हुआ जैसे उसके भीतर कोई ज्वालामुखी विस्फोट हुआ हो... गर्म गर्म लावा उसकी प्रैम गुफा से होता हुआ उसकी कोख, कोख ही क्यूं उसके पूरे वज़ूद को जलाता चला गया ...

 
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