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Guest
रानी के होंठों से पुनः चीख निकल पड़ी... आंसूओं की रफ्तार में और भी तेजी आ गई...
निरंजन चौधरी रानी के ऊपर गिर कर कुत्ते की तरह हांफने लगा, साथ ही सख्ती से उसे अपने साथ भींच लिया...
रानी की जाघों के बीच दर्द का अम्बार फूट पड़ा और वह बिलख बिलख कर रोने लगी ..
मगर उसके आंसूओं और दर्द से बेखबर चौधरी उसके ऊपर से उठा और बैड से उतरकर कपड़े पहनने लगा
चौधरी ने कपड़े पहनकर रानी को बालों से पकड़कर उसका चेहरा ऊपर उठाया और उसकी आँखों में झांकते हुए मुस्कुराते हुए बोला... बड़ी कातिल जवानी है तेरी, एक ही बार में ऐसा मजा दे दिया जो बरसों तक याद रहेगा.. एकदम से डिब्बाबंद.... कसम से मेरी तो जिंदगी की आस पूरी हो गई ...
रानी की आँखों में दर्द भरे आंसू तेजी से बहते रहे , होंठों से एक लफ्ज भी नहीं बोल पाई वह...
लगता है अभी तेरा दिल नहीं भरा है.. अर्थ भरी गंदी हंसी के साथ बोला चौधरी ... घबरा मत, अभी वह आयेगा उससे अपना दिल भर लेना फिर शाम को मजिस्ट्रेट और वकील भी आ जायेंगे ... तेरी तो मौजां ही मौजां हो गई रानी.. एक ही दिन में चार चार.. क्या कहने तेरे..... हाहाहा
न. नहीं..... भगवान के लिए मुझे बख्श दो... रानी गिड़गिड़ा उठी... म. मैं तेरे आगे हाथ जोड़ती हूं चौधरी, मुझे और मत लूटो
जवाब देने के बजाय चौधरी ने उसके बालों को छोडा और दरवाजे से बाहर निकल गया... रानी फिर फूट फूट कर रोने लगी ....
निरंजन चौधरी की आँखों की चमक देख जहा राजीव सेन मुस्कुराया वहीं उसके चेहरे पर नाखूनों से बनी लकीरों को देखकर चौंका..
लगता है कुछ ज्यादा ही मेहनत करनी पड़ी है चौधरी साहब को... वह खडा होते हुए बोला...
मेहनत तो बहुत ज्यादा करनी पड़ी सेन... धम्म से सोफे पर बैठते हुए कहा चौधरी ने और बोतल उठाकर अपने लिए पैग बनाने लगा
और यह खरोंचो के निशान ?
हिरनी ने पंजा मारा था
हिरनी के पंजे कहा से निकल आए चौधरी साहब ?
हंसा चौधरी.. पैग को खाली किया और धोती के पल्ले से मुंह पोंछते हुए बोला... जब हिरनी को तकलीफ होगी तो कुछ न कुछ तो मारेगी ही, ध्यान रखना... इस हिरनी के खुर नहीं पंजे है और वो भी बहुत तेज
वो तो ध्यान रखना ही होगा, पर माल है तो टनाटन ना?
एकदम झकास ... आंख मारी चौधरी ने ...
यानी खुब मेहनत करनी पड़ेगी
मैंने रास्ता बना दिया है ... अब तुम्है इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी... फिर भी जितनी मेहनत पहले करते थे उससे ज्यादा तो करनी ही होगी
भद्दी हंसी हंसा राजीव सेन... फिर पैग भरकर एक सांस में ही गटागट पीकर गिलास खाली किया और झटके से खडा हो गया ...
मैं जाऊं ?
बिल्कुल जाओ... मैं दुआ करूंगा कि तुम सफलता के झंडे गाड़ कर वापस लोटो
कमीनी मुस्कान के साथ सेन कमरे से बाहर निकल आया...
दरवाजा खुलने की आहट सुन कर रानी ने गर्दन ऊपर उठाई तो उसकी आँखों में फिर वही खौफ़ के साये लहरा गये
रानी को अपनी तरफ देखते देख कर सेन हंसा और आंख मार दी ..
रानी ने नजरें परे कर ली और फौरन बैड की चादर अपने ऊपर ले ली
मुडकर उसने दरवाज़ा बंद किया और फिर रानी के करीब आकर बैड पर बैठते हुए बोला... पर्दा बेगानों से किया जाता है मेरी जान.. अपनो से नहीं ... हटाओ इस पर्दे को और आओ हम एक दूसरे में समा जायें...
अरे कुत्ते.. कानून की वर्दी पहन कर कानून की ही धज्जियां उड़ा रहा है तू.. और कुछ नहीं तो इस वर्दी की ही लाज तो रख लेता, जो कानून ने तुझे जनता की हिफाजत के लिए दी है...
निरंजन चौधरी रानी के ऊपर गिर कर कुत्ते की तरह हांफने लगा, साथ ही सख्ती से उसे अपने साथ भींच लिया...
रानी की जाघों के बीच दर्द का अम्बार फूट पड़ा और वह बिलख बिलख कर रोने लगी ..
मगर उसके आंसूओं और दर्द से बेखबर चौधरी उसके ऊपर से उठा और बैड से उतरकर कपड़े पहनने लगा
चौधरी ने कपड़े पहनकर रानी को बालों से पकड़कर उसका चेहरा ऊपर उठाया और उसकी आँखों में झांकते हुए मुस्कुराते हुए बोला... बड़ी कातिल जवानी है तेरी, एक ही बार में ऐसा मजा दे दिया जो बरसों तक याद रहेगा.. एकदम से डिब्बाबंद.... कसम से मेरी तो जिंदगी की आस पूरी हो गई ...
रानी की आँखों में दर्द भरे आंसू तेजी से बहते रहे , होंठों से एक लफ्ज भी नहीं बोल पाई वह...
लगता है अभी तेरा दिल नहीं भरा है.. अर्थ भरी गंदी हंसी के साथ बोला चौधरी ... घबरा मत, अभी वह आयेगा उससे अपना दिल भर लेना फिर शाम को मजिस्ट्रेट और वकील भी आ जायेंगे ... तेरी तो मौजां ही मौजां हो गई रानी.. एक ही दिन में चार चार.. क्या कहने तेरे..... हाहाहा
न. नहीं..... भगवान के लिए मुझे बख्श दो... रानी गिड़गिड़ा उठी... म. मैं तेरे आगे हाथ जोड़ती हूं चौधरी, मुझे और मत लूटो
जवाब देने के बजाय चौधरी ने उसके बालों को छोडा और दरवाजे से बाहर निकल गया... रानी फिर फूट फूट कर रोने लगी ....
निरंजन चौधरी की आँखों की चमक देख जहा राजीव सेन मुस्कुराया वहीं उसके चेहरे पर नाखूनों से बनी लकीरों को देखकर चौंका..
लगता है कुछ ज्यादा ही मेहनत करनी पड़ी है चौधरी साहब को... वह खडा होते हुए बोला...
मेहनत तो बहुत ज्यादा करनी पड़ी सेन... धम्म से सोफे पर बैठते हुए कहा चौधरी ने और बोतल उठाकर अपने लिए पैग बनाने लगा
और यह खरोंचो के निशान ?
हिरनी ने पंजा मारा था
हिरनी के पंजे कहा से निकल आए चौधरी साहब ?
हंसा चौधरी.. पैग को खाली किया और धोती के पल्ले से मुंह पोंछते हुए बोला... जब हिरनी को तकलीफ होगी तो कुछ न कुछ तो मारेगी ही, ध्यान रखना... इस हिरनी के खुर नहीं पंजे है और वो भी बहुत तेज
वो तो ध्यान रखना ही होगा, पर माल है तो टनाटन ना?
एकदम झकास ... आंख मारी चौधरी ने ...
यानी खुब मेहनत करनी पड़ेगी
मैंने रास्ता बना दिया है ... अब तुम्है इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी... फिर भी जितनी मेहनत पहले करते थे उससे ज्यादा तो करनी ही होगी
भद्दी हंसी हंसा राजीव सेन... फिर पैग भरकर एक सांस में ही गटागट पीकर गिलास खाली किया और झटके से खडा हो गया ...
मैं जाऊं ?
बिल्कुल जाओ... मैं दुआ करूंगा कि तुम सफलता के झंडे गाड़ कर वापस लोटो
कमीनी मुस्कान के साथ सेन कमरे से बाहर निकल आया...
दरवाजा खुलने की आहट सुन कर रानी ने गर्दन ऊपर उठाई तो उसकी आँखों में फिर वही खौफ़ के साये लहरा गये
रानी को अपनी तरफ देखते देख कर सेन हंसा और आंख मार दी ..
रानी ने नजरें परे कर ली और फौरन बैड की चादर अपने ऊपर ले ली
मुडकर उसने दरवाज़ा बंद किया और फिर रानी के करीब आकर बैड पर बैठते हुए बोला... पर्दा बेगानों से किया जाता है मेरी जान.. अपनो से नहीं ... हटाओ इस पर्दे को और आओ हम एक दूसरे में समा जायें...
अरे कुत्ते.. कानून की वर्दी पहन कर कानून की ही धज्जियां उड़ा रहा है तू.. और कुछ नहीं तो इस वर्दी की ही लाज तो रख लेता, जो कानून ने तुझे जनता की हिफाजत के लिए दी है...