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ताकत की विजय

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रानी के होंठों से पुनः चीख निकल पड़ी... आंसूओं की रफ्तार में और भी तेजी आ गई...

निरंजन चौधरी रानी के ऊपर गिर कर कुत्ते की तरह हांफने लगा, साथ ही सख्ती से उसे अपने साथ भींच लिया...

रानी की जाघों के बीच दर्द का अम्बार फूट पड़ा और वह बिलख बिलख कर रोने लगी ..

मगर उसके आंसूओं और दर्द से बेखबर चौधरी उसके ऊपर से उठा और बैड से उतरकर कपड़े पहनने लगा

चौधरी ने कपड़े पहनकर रानी को बालों से पकड़कर उसका चेहरा ऊपर उठाया और उसकी आँखों में झांकते हुए मुस्कुराते हुए बोला... बड़ी कातिल जवानी है तेरी, एक ही बार में ऐसा मजा दे दिया जो बरसों तक याद रहेगा.. एकदम से डिब्बाबंद.... कसम से मेरी तो जिंदगी की आस पूरी हो गई ...

रानी की आँखों में दर्द भरे आंसू तेजी से बहते रहे , होंठों से एक लफ्ज भी नहीं बोल पाई वह...

लगता है अभी तेरा दिल नहीं भरा है.. अर्थ भरी गंदी हंसी के साथ बोला चौधरी ... घबरा मत, अभी वह आयेगा उससे अपना दिल भर लेना फिर शाम को मजिस्ट्रेट और वकील भी आ जायेंगे ... तेरी तो मौजां ही मौजां हो गई रानी.. एक ही दिन में चार चार.. क्या कहने तेरे..... हाहाहा

न. नहीं..... भगवान के लिए मुझे बख्श दो... रानी गिड़गिड़ा उठी... म. मैं तेरे आगे हाथ जोड़ती हूं चौधरी, मुझे और मत लूटो

जवाब देने के बजाय चौधरी ने उसके बालों को छोडा और दरवाजे से बाहर निकल गया... रानी फिर फूट फूट कर रोने लगी ....

निरंजन चौधरी की आँखों की चमक देख जहा राजीव सेन मुस्कुराया वहीं उसके चेहरे पर नाखूनों से बनी लकीरों को देखकर चौंका..

लगता है कुछ ज्यादा ही मेहनत करनी पड़ी है चौधरी साहब को... वह खडा होते हुए बोला...

मेहनत तो बहुत ज्यादा करनी पड़ी सेन... धम्म से सोफे पर बैठते हुए कहा चौधरी ने और बोतल उठाकर अपने लिए पैग बनाने लगा

और यह खरोंचो के निशान ?

हिरनी ने पंजा मारा था

हिरनी के पंजे कहा से निकल आए चौधरी साहब ?

हंसा चौधरी.. पैग को खाली किया और धोती के पल्ले से मुंह पोंछते हुए बोला... जब हिरनी को तकलीफ होगी तो कुछ न कुछ तो मारेगी ही, ध्यान रखना... इस हिरनी के खुर नहीं पंजे है और वो भी बहुत तेज

वो तो ध्यान रखना ही होगा, पर माल है तो टनाटन ना?

एकदम झकास ... आंख मारी चौधरी ने ...

यानी खुब मेहनत करनी पड़ेगी

मैंने रास्ता बना दिया है ... अब तुम्है इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी... फिर भी जितनी मेहनत पहले करते थे उससे ज्यादा तो करनी ही होगी

भद्दी हंसी हंसा राजीव सेन... फिर पैग भरकर एक सांस में ही गटागट पीकर गिलास खाली किया और झटके से खडा हो गया ...

मैं जाऊं ?

बिल्कुल जाओ... मैं दुआ करूंगा कि तुम सफलता के झंडे गाड़ कर वापस लोटो

कमीनी मुस्कान के साथ सेन कमरे से बाहर निकल आया...

दरवाजा खुलने की आहट सुन कर रानी ने गर्दन ऊपर उठाई तो उसकी आँखों में फिर वही खौफ़ के साये लहरा गये

रानी को अपनी तरफ देखते देख कर सेन हंसा और आंख मार दी ..

रानी ने नजरें परे कर ली और फौरन बैड की चादर अपने ऊपर ले ली

मुडकर उसने दरवाज़ा बंद किया और फिर रानी के करीब आकर बैड पर बैठते हुए बोला... पर्दा बेगानों से किया जाता है मेरी जान.. अपनो से नहीं ... हटाओ इस पर्दे को और आओ हम एक दूसरे में समा जायें...

अरे कुत्ते.. कानून की वर्दी पहन कर कानून की ही धज्जियां उड़ा रहा है तू.. और कुछ नहीं तो इस वर्दी की ही लाज तो रख लेता, जो कानून ने तुझे जनता की हिफाजत के लिए दी है...

 


बात तो तू ठीक कह रही है... सोच भरे अंदाज में बोला सेन... सचमुच मुझे इस वर्दी की लाज रखनी चाहिए...

कहकर वह खडा हुआ और बेल्ट खोलते हुए फिर से बोला .. मैं इस वर्दी को उतारकर एक तरफ रख देता हूँ... वर्दी की लाज भी रह जायेगी और मेरा काम भी हो जायेगा ...

है ना लाख रुपये की बात

रानी की आँखों में फैली नफरत बढ़ती चली गई

कमीने अगर तेरी कोई बहन होती और उसके साथ कोई ऐसा करता तब तुझे पता चलता कि आबरू क्या होती है ....

मुस्कुराया राजीव सेन... शुक्र है मेरी कोई बहन नहीं...

तो अपनी बेटी के पास जा और उसके साथ बलात्कार कर... तिरस्कार और घ्रणा से राजीव सेन को देखते हुए बोली...

चट्टाक ....

सेन का भारी हाथ उसके गुलाबी गालों को लाल करता चला गया

रानी दर्द से चीखती हुई बैड पर गिर गई.. गिरते ही चादर एक तरफ सरक गई और रानी की छातियां दिखने लगी...

बहुत मुंह फाड रही है हरामजादी ... गुर्राया राजीव सेन

तेरी तिलमिलाहट कह रही है कि तू एक या दो जवान लडकियों का बाप हैं... मैं भगवान से यही प्रार्थना करूंगी कि उनके साथ भी यही सब कुछ हो जो मेरे साथ हो रहा है... बेहद नफरत भरे स्वर में बोली रानी ...

राजीव सेन ने उसकी बातों को अनसुना किया और उस पर छलांग लगा दी

रानी के होंठों से फिर दर्द भरी चीखे निकलने लगी...

लेकिन वह वर्दी वाला गुंडा उसकी इज्जत के परखच्चे उडाकर ही माना ...

कुछ देर बाद जब वह रानी के ऊपर से उठा तो उसके होठों को चूमा और फिर उसके गुलाबी उरोजो को मसलते हुए बोला जो कि पूरे लाल हुए पडे थे... जगह जगह दांतों के निशान बने हुए थे जो बयां कर रहे थे बर्बरता की इस कहानी को

सचमुच तू बेहद कडक माल है... ऐसा कडक माल मैंने अपनी जिंदगी में कभी नहीं भोगा ... मैं तेरे से वादा करता हूं कि तेरे भाई को अवश्य छोड़ दिया जायेगा, बस हमारे दो साथियों को और खुश करना होगा तुझे ... फिर इधर तू घर पहुंचेगी उधर तेरा भाई थाने से रिहा हो जायेगा ...

रानी कुछ नहीं बोली बस अपनी किस्मत को कोसते हुए रोती बिलखती रही ...

यह ले.. कपडों का एक जोड़ा रानी पर फेंकते हुए मजिस्ट्रेट प्रताप सिंह हंसते हुए बोला ... पहन ले इसे और जा अपने घर

रानी बस रोये जा रही थी ...

पहले चौधरी फिर राजीव सेन ने उसकी इज्जत लूटी फिर सुरेश पाटील ने तथा प्रताप सिंह ने उसकी इज्जत की धज्जियां उड़ा दी ... तार तार करके रख दिया उसके लाज के अनमोल गहने को...

इस वक्त चारों चांडाल उसके सामने खड़े हंस रहे थे और रानी उनके सामने पूर्णतया नग्न अवस्था में बैठी अपने नसीब को कोस रही थी

रो क्यों रही है रानी... तभी सुरेश पाटील बोल पड़ा... तेरा कुछ घिस तो नहीं गया... कुछ निकाला नहीं हमने तेरे में से बल्कि कुछ डाला ही है ...

उसकी बात पर सभी जोरो से हंसने लगे ..

उनकी यह हंसी ऐसी प्रतीत हो रही थी जैसे कब्रिस्तान में कई जिन्न एक साथ हंस रहे हो...

रानी ने रोते हुए उनके सामने ही कपड़े पहने और फिर चारों को बारी बारी से देखते हुए बोली... इतना याद रखो कुत्तों.. जुल्म की हुकूमत ज्यादा दिन नहीं चलती, तुम लोगों ने मेरे साथ जो किया है उसकी सजा तुम्हें मिल कर रहेगी ..

मगर सजा सुनाने वाला तो मैं हूँ... तभी प्रताप सिंह हंसते हुए बोला ...

उससे पहले अदालत में जिरह करके तेरी मिट्टी पलीद कर दूंगा और तुझे भरी अदालत में नंगा कर दूंगा ... वकील सुरेश पाटील ने कहा ...

अदालत में जाने की नौबत आयेगी तब ना... तभी सेन बोल पड़ा... उससे पहले तुझे हमारे खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करानी पडेगी... और पुलिस का मालिक मैं हूं , वहीं थाने में ही तुझे अपने सिपाहियों में बांट दूंगा.... एक ही रात में तेरी वो हालत हो जायेगी कि तू शादी करने लायक तक नहीं रहेगी ...

चौधरी क्यों पीछे रहता, वो भी जहरीली हंसी के साथ बोला... और मैं तो जनसेवक हूँ... जनता की सेवा करना मेरा धर्म है और जनता में मैंने क्या जगह बनाई है यह तुझे तब पता चलेगा जब मेरे खिलाफ आवाज उठाते ही जनता तेरी बोटी बोटी नोंच लेगी ...

हाहाहा.... हाहाहा.... चारों दरिंदे एक साथ अट्टहास करने लगे....

हमारे खिलाफ जाने के तमाम रास्ते तेरे लिए बंद है मेरी जान... निरंजन चौधरी आगे बोला.... इसलिए हमारे खिलाफ आवाज उठाने की सपने में भी मत सोचना , हम तुझे ऐसे ही नहीं छोड़ रहे हैं अगर विश्वास ना हो तो बेशक आजमा लेना ...

हां ... इसलिए तुम्हारी तथा तुम्हारे भाई की भलाई इसी में है कि जब भी हम तुझे याद करे तू फौरन से पहले हमारे पास चली आया करना... कसम से जिंदगी संवर जायेगी तेरी और नोट भी खुब मिलेंगे ... बोला प्रताप सिंह

चल अब जा... राजीव सेन ने आर पार की बात करने वाले धमकी भरे अंदाज में कहा.. जो तेरे दिल में आये कर लेना , दोनों रास्ते हमने सुझा दिये हैं आगे तेरी मर्जी कि तू किस रास्ते पर जायेगी ...

रानी कुछ नहीं बोली... वह सुबकती हुई दरवाजे की तरफ बढ़ने लगी

उसका बढता हुआ हर कदम उसके तन बदन में कराहें पैदा कर देता ... जाघों के बीच ऐसा लग रहा था जैसे बहुत बड़ा जख्म हो गया हो ...

ढंग से चल भी नहीं पा रही थी वो... फिर भी वह चल रही थी... रोती हुई , कहराती हुई , बिलखती आंसू बहाती हुई ...

कदमों की आहट सुनकर विशाल ने हवालात के दरवाजे की तरफ देखा ... दो सिपाही दरवाजे के पास पहुंच चुके थे तथा एक ताला खोल रहा था

दरवाजा खोला और एक सिपाही ने आगे बढ़कर उसे बूट की ठोकर रसीद कर दी

हरामी का पिल्ला... साला ऐसे बैठा है जैसे मां की बारात में आया हो... चल खडा हो

बिलबिलाते हुए विशाल खडा हो गया ...

चल , साहब बुला रहे हैं तुझे ... दूसरा उसके बालों को मुट्ठी में पकडते हुए बोला

पीडा से विशाल का चेहरा विक्रत हो गया

 


लेकिन इस वक्त उसे अपनी नहीं रानी की चिंता थी ... सुबह आयुष ने जो शब्द उससे कहे थे वे अभी भी उसके कानों में गूंज रहे थे

जिंदगी में पहली बार हवालात में बंद हुआ था सो वह हवालात से भागने की सारे दिन सोचता जरूर रहा मगर रास्ता कोई भी नजर नहीं आया... सारा दिन वह अपनी बहन के लिए तड़पने के अलावा कुछ नहीं कर पाया

उसे लगभग घसीटते हुए दोनों सिपाही जोगलेकर के ऑफिस में ले आए

कुर्सी पर जोगलेकर तोंद निकाले बैठा था... विशाल को देख कर पहले वह मुस्कुराया फिर आँखों में कहर लाते हुए गुर्राया ... जानता है सारा दिन मैं तेरे बारे में तफ्तीश करता रहा ...

विशाल कुछ नहीं बोला बस सूनी आँखों से उसे देखते रहा

हरामी.. झूठ बोलता है कि अफीम का धंधा नहीं करता

विशाल होंठों पर जीभ फेरकर रह गया ...

मगर चूंकि तू पहली बार थाने में आया है, इसलिए तरस खा कर तुझे छोड़ रहा हूं ... जा भाग जा यहां से... और याद रखना, अगर फिर तुने ऐसा कोई काम किया तो सात साल के लिए नपवा दूंगा ...

विशाल ने सिर झुका लिया ...

छोड़ दो इसे, जाने दो... जोगलेकर ने उन दोनों सिपाहियों से कहा जो उसे पकडे हुए थे ...

सिपाहियों ने उसे छोड़ दिया और विशाल सिर झुकाये हुए ही मुडा एंव थाने से बाहर निकल आया ...

उसके बाहर जाते ही जोगलेकर के होंठों पर क्रूर मुस्कान नाच उठी ...

दरवाजे को ताला न लगा देख कर विशाल को तसल्ली हुई कि रानी घर में ही है

आगे बढ़ कर उसने दरवाजा खटखटाया तो दबाव पडते ही दरवाजा थोडा खुल गया

विशाल का कलेजा जोरों से धडकने लगा.... है भगवान , मेरी रानी की रक्षा करना ... विशाल ने मन ही मन भगवान से प्रार्थना की और दरवाजा धकेल कर भीतर दाखिल हो गया ...

रानी.... उसने आवाज लगाई

मगर कोई जवाब नहीं मिला

किसी अनिष्ट की आशंका से विशाल का कलेजा जोरो से कांप उठा ... वह तेजी से आगे बढा और आंगन पार करता करता हुआ ऊंचे स्वर में बोला ... मैं आ गया हूँ रानी देखो तुम्हारा भैया आ गया है ... पुलिस ने मुझे छोड़ दिया है ...

जबाव में उसे कुछ भी सुनाई नहीं दिया ....

घर में मरघट सा सन्नाटा पसरा हुआ था ..

रा.... नी

जोर से चिल्लाया विशाल..

जवाब फिर वही , ढाक के तीन पात

रानीईीीीी

वह तेज कदमों से भीतर प्रवेश करता हुआ बोला मगर कमरे में उसे कोई नजर नहीं आया..

रानी... रानी... चिल्लाता हुए वह तेजी से पिछले कमरे की तरफ भागा ...

जैसे ही वह कमरे की दहलीज पर पहुंचा , उसके हलक से चीख निकल गई ...

रा--नी

बस यहीं शब्द निकला उसके लरजते होंठों से और मुंह खुला का खुला रह गया ...

सामने बडा ही हाहाकारी द्रस्य था .... दिल दहला देने वाला ..

फटी फटी आँखों से वह कमरे के बीचो बीच पंखे से झूलती रानी को देखने लगा , जिसकी गर्दन में उसकी चुनरी फंसी हुई थी तथा चुनरी का दूसरा सिरा पंखे से बंधा हुआ था ...

कुछ पल वह रानी को पथराई आँखों से देखता रहा ... फिर चीखते हुए रानी की लाश की तरफ झपटा और घुटनों के बल बैड पर खड़े होकर रानी के पैरों को पकड़ कर जोर जोर से रोने लगा ....

य.. यह क्या हो गया मेरी बहना ... यह क्या कर डाला तुने ... अपने भाई का इंतजार भी नहीं किया तुने ...

विशाल के आंसू रानी के पैरों को भिगोने लगे ...

रोते रोते सहसा उसकी नजर बैड के कोने पर पड़े कागज पर पड़ी .... कागज खुला हुआ था और उस पर कुछ लिखा हुआ था ...

विशाल ने रानी के पैरों को छोडा और घुटनों के बल चलता हुआ बैड के किनारे की तरफ बढ़ा ... झुक कर उसने कागज उठाया और पढने लगा

भैया....

अब मैं तुम्हें मुंह दिखाने के काबिल नहीं रही , तुम्हारे जाने के बाद एक आदमी आया और उसने मुझे रायपुर के जनसेवक कहलाने वाले निरंजन चौधरी के पास जाने की सलाह दी ... अपने भैया को बचाने के लिए मैं उसके पास गई और दामन फैला कर तुम्हें छुड़ाने की भीख मांगी...

लेकिन भैया , उसने मुझ गरीब को नही बख्शा... मेरे दामन को तार तार कर दिया ... मेरी आबरू लूट ली उसने... वही पर ही बस नहीं कि उस कमीने ने .. पुलिस के एक बड़े अधिकारी एस पी राजीव सेन ने , यहां की अदालत के वकील सुरेश पाटील ने और मजिस्ट्रेट प्रताप सिंह ने भी मेरी इज्जत की धज्जियां उड़ाते हुए मुझे कलंकित कर दिया ...

और फिर मुझे यह कहते हुए छोड़ दिया कि मैं उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती ... सचमुच भैया, मैं या तुम उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते, इसलिए मैंने अपनी जिंदगी समाप्त करने की ठान ली ...

लेकिन तुम खुद को कुछ मत करना भैया , मेरी कसम है तुम्हें ... तुम्है अपनी बहन के हुए अपमान का बदला लेना है ... उसकी इज्जत लूटने वाले दरिंदों को छोड़ना नहीं तुम ... अपनी बहन की आखिरी इच्छा समझ कर उसे पूरा करना मेरे प्यारे भैया ...

तुम्हारी अभागिन बहन

रानी........

टू बी कंटिन्यू ....

 
विशाल की आंखों में अंगारे दहकने लगे, चेहरा दहकती भट्टी के समान तपने लगा, उसके नथुनें फूलने लगे... उसने रानी के लिखे अाखिरी पत्र को मुट्ठी में भींच लिया ...

कुत्तों ... विशाल के होंठों से फूंफकार निकली... मेरी बहन को दिए एक एक जख्म का हिसाब लूंगा में तुमसे.. नहीं छोडूंगा मैं तुम कमीनो को.. नेस्तनाबूद कर डालूंगा... गुस्से की अधिकता के कारण उसके होंठों से थूक के छींटे उडने लगे... मेरी बहन की इज्जत लूटने के लिए तुम कुत्तों ने मुझे फंसाया और अपना ही आदमी भेज कर रानी को अपने पास आने के लिए कहलवा दिया .... मैं तुम्हारी चाल समझ गया हूं हरामखोरो... अब मैं तुम्हें नहीं छोडूंगा... नहीं छोडूंगा हरामजादों ....

छंलाग मार कर वह बैड से उतरा और घर के बाहर निकल कर जोर से चिल्लाया ...

अरे मोहल्ले वालों ... मर गए क्या सब के सब... देखो मेरी बहन को मार डाला उन जालिमों ने... मार डाला उसे ... मेरी बहन मर गई मोहल्ले वालों ...

विशाल की चीखों पुकार सुनकर आस पड़ोस के दरवाजे खुलने लगे और कुछ ही देर में उसके घर के आगे मोहल्ले वालों का जमघट लग गया ...

कैसे हुआ यह सब विशाल ? एक बुजुर्ग बोला..और किन जालिमों की बात कर रहे हो तुम... किन्होनें मारा रानी बेटी को ?

चौधरी ने ... विशाल के होंठों से जैसे अंगारे निकले...

चौधरी... कौन चौधरी ?

निरंजन चौधरी ... भेड की खाल में छुपा हुआ भेडिया है वो.. पुलिस के एस पी ने, मजिस्ट्रेट ने , वकील ने , चारों ने मिलकर मेरी बहन को मार डाला काका...

यह क्या कह रहे हो तुम विशाल ? एक अन्य व्यक्ति बोला.. चौधरी साहब पर तोहमत लगा रहे हो .. अरे उन्हें तो सारा शहर पुजता है, देवता हैं वो तो और तू उन्हीं पर इल्जाम लगा रहा है ?

वह देवता नहीं राक्षस है काशी भैया... विशाल रोते हुए बोला .. एक दरिंदा है वो.. लेकिन मैं तुमसे यह नहीं कहुंगा कि मेरे साथ मिलकर उसके खिलाफ आवाज बुलंद करो... मैं सिर्फ यह पूछना चाहता हूं कि मेरे गिरफ्तार होने के बाद क्या कोई आदमी हमारे घर आया था ?

हां .. आया तो था एक आदमी ..एक महिला बोली

कौन... कौन आया था ? मुझे बताओ सावित्री बहन कौन आया था ? उसी हरामजादे ने रानी को चौधरी के पास जाने की सलाह दी थी ....

रवी... वह महिला बोली

रवी... कौन रवी ? कहां रहता है वो?

वह पिछले मोहल्ले में रहता है .. सावित्री ने उसे रवी का पता बताया और बोली .. पता नहीं क्या बात की उसने रानी से कि उसके जाते ही वह भी चली गई थी ...

विशाल की आँखों में खून उतर आया... चेहरा तमतमा उठा

नहीं छोडूंगा... किसी को भी नहीं छोडूंगा... वह गुस्से में बड़बड़ाया और वापिस घर में भागा...

शीघ्र ही वह वापिस बाहर निकला तो उसके हाथ में कुल्हाड़ी थी ...

साक्षात यमदूत नजर आ रहा था इस वक्त विशाल...

य. यह तू क्या करने जा रहा है विशाल बेटे... बुजुर्ग बौखलाये स्वर में बोला

नामोनिशान मिटा दूंगा मैं उन भेड़ियों का.. मेरी बहन को मार कर वे जिंदा नहीं रह सकते... घायल शेर की तरह दहाड़ उठा विशाल ...

पागलपन हो गया है तू ... जानता है कानून को हाथ में ले रहा है तू...

किस कानून की बात कर रहे हो काका ? वह जो चौधरी के पैरों के तलवे चाटता है, वह जो मजिस्ट्रेट के मुंह से सजा बन कर गरीबों और बेगुनाहों के सिर पर पहाड़ बन कर टूटता है ... मैं नहीं मानता इस कानून को

नहीं विशाल , हम तुम्हें ऐसा गलत कदम उठाने नहीं देंगे

हट जाओ मेरे रास्ते से ... दहाडा विशाल और कुल्हाड़ी को हवा में लहराते हुए बोला ... कोई भी मेरा रास्ता रोकने की कोशिश ना कर, वर्ना मैं उसे भी अपना दुश्मन समझ कर मौत के घाट उतार दूंगा

भय और खौफ के मारे सभी पिछे हटते चले गए

आँखों में जुनून और हाथ में कुल्हाड़ी लहराते हुए विशाल भीड से बाहर निकला और पूरी रफ्तार से एक तरफ भागने लगा.

खटाक... खटाक... खटाक..

दरवाजे पर पड़ती चोटों को सुन कर रवी चौंक गया .. उसने हाथ में थमा पैग खाली किया और खडा हो गया ...

किस हरामी में इतनी हिम्मत हो गई कि मेरे घर का दरवाजा तोडे ...

गुस्से में भुनभुनाते हुए वह दरवाजे की तरफ बढ़ा...

दरवाजे के करीब पहुंच कर उसने जेब से रामपूरी चाकू निकाला और फिर मुंह से गंदी गाली निकालते हुए जैसे ही दरवाजा खोला ....

उसका कलेजा उछल कर हलक में आ अटका... तिरपन कांप गये पठ्ठे के..

सामने कुल्हाड़ी हाथ में लिए मौत का दूत बना विशाल खडा था और बरस रहे थे उसकी आँखों से अंगारे , जो सारी दुनिया को जला कर राख कर देना चाहते थे ...

वि. शा ल..

हां कुत्ते मैं . दहाडा विशाल. रानी को तुने ही चौधरी के पास भेजा था ना...

रवी उसका रौद्र रूप देख कर यह भी भूल गया कि उसके हाथ में चाकू है

खचाक....

तभी विशाल की कुल्हाड़ी उसके कंधे पर पडी और उसकी बांह अलग होकर परे जा गिरी

रवी के होंठों से तेज चीख निकल गई.. उसके कटे कंधे से खून का दरिया उमड पडा

तभी विशाल का पैर पूरे वैग से उसके पेट पर पड़ा

रवि पीठ के बल पीछे जा गिरा ...

कमीने ... विशाल उसके सीने पर पैर रखते हुए दहाडा... मेरी बहन मर गई, उसने आत्महत्या कर ली और उसे आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाला तू है ... तूने ही उसे चौधरी के पास जाने के लिए प्रेरित किया था ...

मुझे माफ कर दो विशाल.. मुझे माफ कर दो .... गिड़गिड़ा उठा रवी

माफी तो अब ऊपर जाकर रानी से मांग हरामजादे ... मैं तुम्हें हरगिज़ माफ नहीं करूंगा... सभी को मौत के घाट उतार डालूंगा... किसी को भी जिंदा नहीं छोडूंगा ... याााा...

बात पूरी होते ही विशाल ने कुल्हाड़ी ऊपर उठाई और भयानक रूप से चीत्कार करते हुए उसके सिर पर वार कर दिया ....

रवी की खोपडी दो हिस्सों में विभाजित हो गई... एक बारगी वह जोरों से छटपटाया फिर शांत हो गया....

बड़ा ही खौफनाक मंजर था कोई कच्चे दिल वाला देख ले तो हार्ट फेल हो जाये ....

विशाल के भीड में से निकलते ही मोहल्ले में जैसे चीखों पुकार मच गई

बहुत बड़ा जुल्म हुआ बेचारे के साथ ... एक बोला

चौधरी साहब ऐसे लगते तो नहीं ... दूसरा बोला ... आज तक उनके खिलाफ किसी ने शिकायत नहीं की ...

मगर विशाल भी तो ऐसा नहीं है ... पूरा मोहल्ला जानता है उसके बारे में ... फिर पुलिस ने उसे गिरफ्तार क्यों किया... तभी तीसरा व्यक्ति बोला

मुझे तो लगता है कि चौधरी ने रानी के लिए सारा षड्यंत्र रचा है... एक और बोल पड़ा

और रवी भी उसी का आदमी है... पहले वाला बोला ... तभी तो उसने रानी को चौधरी के पास जाने के लिए उकसाया

अरे तुम सब लोग बातें ही करते रहोगे कि पुलिस को फोन भी करोगे... एक बुजुर्ग बोला

सभी का ध्यान उसकी तरफ हो गया ...

खडे खडे मेरा मुँह क्या देख रहे हो... कोई पुलिस को फोन करो.... विशाल कुल्हाड़ी लेकर गया है , उसके सिर पर खून सवार हैं ... कहीं वह कुछ कर बैठा तो बेचारे की बाकी जिंदगी सलाखों के पीछे कट जायेगी .... इससे पहले कि वह कुछ करे, पुलिस को बुलाओ...

बात लाख रुपये की थी बुजुर्गवार की... तुरंत एक आदमी फोन करने के लिए भागा....

******-****

 


रवी का काम तमाम कर विशाल कुछ पल खून उगलती निगाहों से उसकी लाश को घूरता रहा.. फिर वह झटके से वापस मुडा और भागते हुए गली से बाहर की तरफ बढ़ने लगा ...

चौधरी ... वह घायल नाग की तरह फुंफकारा... अब तेरी बारी है ... मेरी बहन को मार कर तू भी जिंदा नहीं रह सकता... सभी की गर्दने धड से अलग कर दूंगा मैं...

उसके कपड़े खून के छींटों से भरे हुए थे ... कुल्हाड़ी की तेज़ धार से खून की बूंदे टपक रही थी... उसके चेहरे पर भी खून की छींटे पडी हुई थी जिसकी वजह से उसका चेहरा बेहद भयानक लग रहा था.. साक्षात परशुराम लग रहा था विशाल....

गली से बाहर निकल कर पूरी गति से वह निरंजन चौधरी की कोठी की ओर दौड़ने लगा...

आज तो सचमुच मजा आ गया .. पैग बनाते हुए राजीव सेन बोला

ऐसा मजा तो मुझे अपनी पत्नी के साथ भी नहीं आया... हंसते हुए कहा सुरेश पाटील ने

इतनी मस्ती करने के बाद भी दिल नहीं भरा क्या... पैग चुसकते हुए चौधरी ने चिकोटी ली..

तो कल फिर बुला लिजिये उसे.... मजिस्ट्रेट प्रताप सिंह बोला... देख लीजियेगा सिर के बल दौडी चली आयेगी...

न भी आई तो लाना खूब आता है, उसके भाई को फिर गिरफ्तार करवा दूंगा... तब उसे नाक रगड़ते हुए आना ही पड़ेगा... राजीव सेन हंसते हुए बोला

तभी फोन की रिंग बज उठी

ट्रिन... ट्रिन...

निरंजन चौधरी ने पैग खाली करके टेबल पर रखा और रिसीवर उठा कर बेहद सुशील और नर्म स्वर में बोला...

जनसेवक निरंजन चौधरी आपकी क्या सेवा कर सकता है महोदय

मैं जोगलेकर बोल रहा हूँ चौधरी साहब... घबराहट स्वर में बोला गया उधर से

निरंजन चौधरी चौंका और आवाज में रूआब लाते हुए बोला ... खैरियत तो है ?

रा.. नी...

क्या रानी ? चौंकते हुए बोला चौधरी

उ.. उसने आत्महत्या कर ली

क्... या... उछल पडा चौधरी

और विशाल रवी का खून करने के इरादे से कुल्हाड़ी लेकर उसके घर गया है

उस चिंटी के इतने पर निकल आए कि कत्ल करने के लिए सोचने लगे

उस सिर पर खून सवार है... दूसरी तरफ से कहा गया... उसके मोहल्ले से फोन द्वारा मुझे सूचित किया गया है कि उसने आप लोगों को भी खत्म करने का ऐलान कर दिया है ...

ओह... सोचे उभर आई चौधरी के चेहरे पर... यह तो बहुत बुरा हुआ

मेरे लिए क्या हुक्म है ? क्या गोली से उड़ा दूं उसे ?

नहीं... तेजी से बोला चौधरी... उसे खत्म नहीं करना है ...

तो फिर ?

उसे गिरफ्तार कर लो

जैसा आप कहें सर...

चौधरी ने फोन रखा और गहरी सांस छोड़ते हुए अपने साथियों से बोला ... रानी ने आत्महत्या कर ली..

क्या ...?

तीनों एक साथ चौंके.. जैसे बिच्छू ने काटा हो

बेवकूफ़ निकली वह.. भुनभुनाते हुए बोला चौधरी... क्या घट गया था उसका जो आत्महत्या कर ली ...

आप किसके कत्ल की बात कर रहे थे ? तभी राजीव सेन ने पूछा

चौधरी ने उन्हें सब कुछ बताया जो फोन पर बात हुई थी ...

यह क्या किया आपने ? उसकी बात खत्म होते ही राजीव सेन बोल पड़ा ... जोगलेकर को उसे गोली मारने का आदेश दे देना था ... गिरफ्तार करने का क्यो कहा ?

निरंजन चौधरी ने नजरें उसके चेहरे पर टिकाई और अपनी कनपटी ठकठकाते हुए बोला ... अक्ल से काम ले सेन.. अक्ल से

क्या मतलब ?

विशाल ने सारे मोहल्ले के सामने हम लोगों का नाम लिया है .. अगर वह पुलिस की गोली का शिकार हो गया तो पूरे शहर में यह बात फैल जायेगी कि हमने सचमुच ही रानी की इज्जत लूटी थी और उसे आत्महत्या के लिए मजबूर किया था.. . अगर उसे गिरफ्तार किया गया तो फिर अदालत में उस पर कत्ल का मुकदमा चलेगा और फैसला तो वही होगा जो हम चाहेंगे ... प्रताप सिंह उसे मौत की सजा सुना देगा और पब्लिक में हम लोगों की इमेज भी बनी रहेगी ...

 
चौधरी साहब ठीक कह रहे हैं सेन, इससे ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी और हमारा दुश्मन भी खत्म हो जाएगा... वकील सुरेश पाटील बोला

किस दुश्मन की बात कर रहे हो तुम ? बोला चौधरी .. जिसकी औकात हमारे एक छोटे से प्यादे के बराबर भी नहीं... अरे दुश्मन तो उसे माना जाता है जो कोई नुकसान पहुंचाने लायक हो, विशाल तो रेंगता हुआ ऐसा किडा है जिसे जब चाहो जूते से मसल दो... यह तो पब्लिक में अपनी इमेज बरकरार रखने के लिए हम उसे कानूनन मौत की सजा दे रहे हैं.. वरना अब तक तो उसका अंतिम संस्कार भी हो चुका होता

चौधरी की बात पर सब सहमत हुए और ठहाके लगाने लगे...

एक मजलूम और गरीब का उपहास उडाने वाले ठहाके ....

जोगलेकर ने जैसे ही रवी की लाश देखी... वह भीतर ही भीतर कांप उठा

इतनी बेरहमी से उसका कत्ल किया गया था कि रवी की लाश बेहद भयानक लगने लगी थी ...

यह शरीफ लौंडा तो बहुत खतरनाक निकला .. कहीं चौधरी साहब को नुकसान ना पंहुचा दे...

तुरंत अपने दो सिपाहियों की ड्यूटी लाश के पास लगाई और शेष चार को साथ लेकर जीप की तरफ भागा...

कुछ ही पलों में उसकी जीप आंधी तुफान बनी चौधरी के आवास की तरफ दौड़ती नजर आ रही थी.. अभी वह कुछ ही दूर पहुंचे थे कि सड़क के किनारे हाथ में कुल्हाड़ी लिए विशाल को भागते हुए देखा... विशाल पर नजर पडते ही जोगलेकर के चेहरे पर भयानक मुस्कान नाच उठी

शिकार पर नजर पड़ चुकी थी उसकी ...

तुरंत उसने रिवाल्वर निकाली और विशाल के हाथ का निशाना लगाकर ट्रिगर दबा दिया ...

धांय...

गोली उसके हाथ की बजाय कुल्हाड़ी के दस्ते पर पडी

विशाल का हाथ बुरी तरह से झनझना उठा और कुल्हाड़ी उसके हाथ से छूट कर सड़क पर जा गिरी... भयंकर हुंकार भरते हुए जैसे ही उसने झटके से गर्दन पिछे मोडी...

जोगलेकर के माथे पर पसीने की बूँदें चमक उठीं... वह यह तक भूल गया कि उसके हाथ में रिवाल्वर है ...

विशाल का खून से सना चेहरा इस कदर खुंखार नजर आ रहा था कि उसे देख कर बड़े से बड़ा दिल गुर्दे वाला भी दहल जाये...

इधर जोगलेकर पर निगाह पडते ही विशाल की आँखों में नफरत के शौले दहकने लगे... कमीने कुत्ते.. तू भी मेरी बहन की मौत में बराबर का हिस्सेदार है... आज मैं तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा...

बिना रिवाल्वर की परवाह किये दहाड़ते हुए विशाल उसकी तरफ़ झपटा ...

प. पकडो हरामी को... जोगलेकर जैसे नींद से जागा और एकदम से चिल्लाया ...

आनन फानन तीनों सिपाही तथा ड्राइवर जीप से उतर कर विशाल की तरफ लपके ...

आज तक किसी से लडा नहीं था विशाल , लडने का कोई दांवपेंच भी नहीं जानता था वह...

फिर भी वह उन सिपाहियों पर टूट पड़ा जो उसे पकड़ने के लिए करीब आ गए थे ... बिल्कुल ऐसा लग रहा था जैसे विशाल में कोई प्रेतात्मा प्रवेश कर गई हो ...

राह चलते लोग रूक कर तमाशा देखने लगे .. सिपाहियों को पिटते देख जहां कुछ लोग अचम्भित हो रहे थे तो वहीं कुछ लोग मन ही मन खुश हो रहे थे जो पुलिस के जुल्मों का शिकार हो चुके थे

तभी विशाल का जबरदस्त घूंसा एक सिपाही के मुंह पर पड़ा

सिपाही चीखता हुआ पीछे उलट गया , गिरते ही उसने सडक पर थूका तो खून के साथ उसके दो तीन दांत भी सडक पर आ गिरे ...

बेशक विशाल पर इस वक्त खून सवार था, उसका दिमाग जैसे पगला गया था ... फिर भी वह था तो अकेला ही, जबकि वे चार थे और बेचारा मारधाड़ में भी कोई पारंगत तो था नहीं ...

कब तक मुकाबला करता वह

तभी एक सिपाही ने अपने डंडे का जोरदार वार उसके सिर पर किया

विशाल के होंठों से घुटी घुटी सी चीख निकल गई और उसका हाथ अपने सिर पर जा पडा..

बस ... फिर तो उस पर डंडो लातों घुंसो की बौछार शूरू हो गई ...

विशाल की चीखें आसमान को छूने लगी .. देखने वालों में भी पुलिस की नृशंसता देख कर भय फैल गया, इस बुरी तरह से पिटाई की जा रही थी...

आखिर कब तक बर्दाश्त करता विशाल .. वह धडाम से सड़क पर गिरा और बेहोश हो गया ...

उसके जिस्म के कई हिस्सों से खून की धाराएं निकल पड़ी थी और सड़क पर भी ढेर सारा खून फैल गया था...

डाल दो हरामजादे को जीप में

जीप से उतरते हुए चिल्लाया जोगलेकर और फिर सडक पर पडी हुई कुल्हाड़ी की तरफ बढ़ गया .. कुल्हाड़ी के करीब पहुंच कर उसने जेब से रूमाल निकाला और सावधानी से कुल्हाड़ी को उठा लिया ...

वह वापस जीप में सवार हो गया.. कुल्हाड़ी को उसने बड़ी एहतियात से जीप में रखा और पीछे बैठे सिपाहियों से बोला ... होश ना आने पाये हरामजादे को ...

सिपाहियों ने सिर हिलाया और अपने पैरों में बेहोश पडे विशाल पर निगाहें टिका दी ...

क्रमशः
 
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

HAPPY NEW YEAR 2016

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मी लार्ड ... सुरेश पाटील जज की कुर्सी पर बैठे प्रताप सिंह के सामने सिर को हल्के से झुका कर बोला ... आज का मुकदमा एक ऐसे खूनी पर है जिसे पुलिस पहले भी चार पांच दफा गिरफ्तार कर चुकी है ... कहकर उसने कटघरे में खड़े विशाल की तरफ भाले की तरह उंगली की ..

यह नौजवान जिसे अदालत कटघरे में खड़ा देख रही है.. चेहरे से कितना मासूम और निर्दोष नजर आ रहा है ... लेकिन इसकी भोली सूरत पर मत जाईये मी लार्ड.. इस भोली सूरत के पीछे जो शैतान छुपा हुआ है उसे देखिये... इसने ना केवल रवी नाम के एक इज्जतदार नेक शहरी का बडे भयानक ढंग से कत्ल किया है बल्कि पुलिस के ऊपर भी हाथ उठाया है इसने... कांस्टेबल आसाराम के तो दो दांत तक तोड दिये हैं इसने ...

प्रताप सिंह ने गंभीर मुद्रा बनाये कटघरे में खड़े विशाल को देखा फिर सुरेश पाटील की तरफ देखता हुआ बोला....क्या पुलिस रवी की हत्या का कारण पता लगा सकी है ?

यस मी लार्ड , असल मे अभियुक्त विशाल अपनी बहन से धंधा करवाता था ....

यह झूठ है... हलक फाड़ कर चीख उठा विशाल ... मुझ पर मेरी बहन से धंधा कराने का इल्जाम लगाता है कुत्ते ...

मिस्टर विशाल, जज गुस्से में बोला... जानते भी हो कि अदालत में एक वकील को गाली देकर गुनाह कर रहे हो

विशाल ने खा जाने वाली निगाहों से प्रताप सिंह को देखा.. इससे पहले कि वह कुछ कहता, सुरेश पाटील बोल पड़ा ...

मेरे पास इस बात का गवाह है मी लार्ड, खुद जोगलेकर इसे अपनी बहन से धंधा करवाने के जुर्म में गिरफ्तार कर चुके हैं... लेकिन हर बार यह हाथ पैर जोड़कर और आगे से ऐसा न करने की कसमें खा कर छूट जाता था ...

सुरेश पाटील रूका.. उसने विशाल की तरफ देखा जो कि आग उगलती निगाहों से उसे घूर रहा था.. पाटील कुटिलता से मुस्कुराया और फिर जज की तरफ देखते हुए आगे कहने लगा...

रवी एक कुंवारा युवक था.. इस उम्र में हर इंसान को एक साथी की तलाश रहती है .. उसकी नजर जब विशाल की बहन पर पडी तो वह रानी पर दिलोंजान से फिदा हो गया और रोज रानी के घर के चक्कर लगाने लगा.... धीरे धीरे रानी के दिल में भी प्यार का अंकुर फूटा और वह भी रवी को चाहने लगी ...

मगर जब अभियुक्त विशाल को उनके प्यार की भनक लगी तो उसे सोने का अंडा देने वाली मुर्गी हाथ से निकलती नजर आई ... अगर रानी की शादी हो जाती तो अभियुक्त को हजारों की कमाई से हाथ धोना पड़ता सो इसने अपनी बहन को रवी से दूर रहने का हुक्म दे दिया ...

मगर प्यार कभी झूकता नहीं मी लार्ड , रानी ने अपने भाई के हुक्म की कोई परवाह नहीं की... नतीजा यह निकला कि विशाल ने अपनी बहन पर पहरे बिठा दिये, साथ ही उसे धमकी दे डाली कि अगर वह रवी से मिली तो वह रवी को जान से मार देगा....

कुछ रोज़ बीत गए ... इस बीच दोनों प्रेमियों का मिलन नहीं हो सका.. उधर रवी तडपा इधर रानी ....

रानी समझ गई कि उसका राक्षस भाई किसी भी कीमत पर उसका घर नहीं बसने देगा... सो उसने एक भयानक निर्णय कर लिया ...

उस रोज़ रानी ने पहले विशाल के भेजे चार ग्राहकों को खुश किया फिर उनके जाने रानी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली ...

विशाल ने जब सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की लाश देखी तो वह आग बबूला हो गया और रानी की मौत का जिम्मेदार रवी को मानते हुए घर से कुल्हाड़ी उठायी और जाकर रवी की हत्या कर दी ..और जब पुलिस ने इसका पीछा करके इसे पकडने की कोशिश की तो इसने पुलिस के साथ ही मार कुटाई शुरू कर दी... सुरेश पाटील एक पल के लिए रूका फिर कहने लगा ...

ऐसे घिनौने अपराधी को तो बीच चौराहे पर फांसी की सजा देनी चाहिए मी लार्ड , जो अपनी बहन को जबरदस्ती दूसरे मर्दो के साथ सोने के लिए मजबूर करता है और उसकी कमाई से अय्याशी करता हो... दॅट्स ऑल मी लार्ड ....

कहकर सुरेश पाटील ने एक निगाह विशाल पर डाली और अपनी कुर्सी पर जा बैठा ...

जज ने विशाल की तरफ देखा और गंभीर स्वर में बोला ... मिस्टर विशाल , तुम्हारे खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं.. क्या वो सच है ? क्या तुम अपनी बेगुनाही में कुछ कहना चाहते हो ?

विशाल हौले से हंस पड़ा

क्या कह रहा है मजिस्ट्रेट , नाटक मत कर और वहीं फैसला सुना जो तू और तेरे साथी पहले ही तय कर चुके हैं

 


तुम अदालत पर तोहमत लगा रहे हो ... जज गुस्से से बोला

किस अदालत की बात कर रहे हो प्रताप सिंह ? उसकी , जिसमें जज तथा वकील दोनों ही मुजरिम है .. अगर मैं तुम लोगों के खिलाफ सबूत भी पेश कर दूं तो भी तुम वही फैसला करोगे .. और वह फैसला है

सजा - ए - मौत

क्योंकि तुम सब जानते हो कि अगर मैं जिंदा रहा तो तुम में से किसी को भी जिंदा नहीं छोडूंगा .. क्योंकि मेरी बहन के हत्यारे हो तुम सब...

क्या सबूत है तुम्हारे पास जिसके बलबूते पर तुम अदालत की अवमानना कर रहे हो ...

विशाल ने जेब से रानी का लिखा आखिरी खत निकाला और उसे हवा में लहराते हुए अदालत में बैठे दर्शकों की तरफ देखते हुए बोला ...

यह मेरी बहन का लिखा पत्र है , खुदकुशी करने से पहले मेरी बहन ने यह पत्र मेरे नाम लिखा है भाईयों .. इसमें उसने साफ लिखा है कि निरंजन चौधरी , एस पी राजीव सेन , मजिस्ट्रेट प्रताप सिंह और यह वकील सुरेश पाटील उसकी इज्जत के लुटेरे है.. इन चारों ने मिलकर मेरी बहन की इज्जत लूटी जिसके कारण मेरी बहन को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा ...

हाँ , मैंने रवी की हत्या की है , मैं कुबूल करता हूं .. क्योंकि वह इन दरिंदों का आदमी था ... उसी ने मेरी बहन को बरगला कर इन हैवानों के पास भेजा था ...

सब कुछ बताता चला गया विशाल... फिर आगे बोला..

आप खुद ही सोचिए ऐसे दरिंदों से इंसाफ की क्या उम्मीद की जा सकती है.. मैं एक कमजोर गरीब बेबस इंसान इन दरिंदों से नहीं भिड सकता, क्योंकि यह चारों ताकत और पैसे से मालामाल है और मेरे पास क्या है ? कुछ भी नहीं..

ना पैसा.. ना ताकत

कहते कहते विशाल की आवाज भर्रा गई.. उसकी आँखों से आँसू बहने लगे

यह कैसी अदालत है मी लार्ड .. तभी सुरेश पाटील खडा होकर बोला .. जिसमें ना केवल वकील पर बल्कि जज पर भी बलात्कारी होने का इल्जाम लगाया जा रहा है.. अदालत की बार बार तौहीन की जा रही है..

जज ने गहरी सांस ली और कहा .. अदालत कोई भी फैसला करने से पहले अभियुक्त को अपनी सफाई में कहने का पूरा मौका देती है .. कहकर उसने विशाल की तरफ देखा .. अदालत रानी का लिखा पत्र चैक करेगी, अगर वह पत्र सचमुच रानी का लिखा हुआ होगा तो हम भरी अदालत में घोषणा करते हैं कि इस केस का फैसला कोई दूसरा जज करेगा...

जज की बात पूरी होते ही विशाल के पीछे खडा जोगलेकर आगे आया और लगभग झपटते हुए विशाल के हाथ से पत्र छीन लिया और आगे बढ़ कर जज की टेबल पर रख कर वापस आ गया..

जज ने वो पत्र लिया और बोला .. अदालत इस केस का फैसला कल सुनायेगी ...

जो कल करना है आज ही कर दे प्रताप सिंह .. क्यों नाटक कर रहा है.. मैं जानता हूं , तू कल यही कहेगा कि यह पत्र मेरी बहन का लिखा हुआ नहीं है

इसका मतलब तुमने अदालत को गुमराह करने के लिए अदालत में यह झूठा पत्र पेश किया है .. तभी तुम अभी से ऐसा कह रहे हो ताकि अदालत और जनता में सच्चे बन जाओ...

विशाल ने भी प्रतिवार किया ... अगर तू खुद को इतना ही कानून भक्त समझता है तो इस पत्र की एक एक कॉपी अदालत में मौजूद हर दर्शक को बांट , फिर कल को आकर सुनाना अपना फैसला

प्रताप सिंह के चेहरे की रंगत फीकी पड़ गई ... उसे सपने में भी विशाल से ऐसे दांवपेंच की कतई उम्मीद नहीं थी ..

वकील सुरेश पाटील के तो हाथ पांव ही फूल गये ...

बाजी सिर्फ एक ही पल में विशाल की तरफ पलटती नजर आने लगी थी ...

बड़ी मुश्किल से प्रताप सिंह ने स्वयं को संभाला और धीर गंभीर स्वर में बोला.. अदालत ऐसा कोई भी निर्णय लेने से पहले उस पर विचार विमर्श करेगी..

और विचार बनते बनते पत्र ही बदल जायेगा .. विशाल व्यंग्य भरे स्वर में बोला ...

ऐसा बिल्कुल नहीं होगा.. अदालत इस पत्र को इसी वक्त राइटिंग एक्सपर्ट के पास रवाना कर देगी और तुम्हारे घर से रानी की लिखी कोई तहरीर प्राप्त करके उसे भी एक्सपर्ट के पास भेज देगी

अब यह अदालत कल तक के लिए बरखास्त की जाती है ..

कहने के साथ ही प्रताप सिंह अपनी कुर्सी छोड़ कर खडा हुआ और तेजी से अपने चैम्बर की तरफ भाग चला.. उसे डर लग रहा था कि कहीं विशाल फिर कोई ऐसी वैसी बात ना कह दे जो उसकी मजिस्ट्रेट की छवि को बिल्कुल ही बिगाड़ दे और साथ ही केस के रूख को भी ...

 


अगले दिन...

अदालत ने इस केस के तमाम पहलुओं पर गौर किया.. प्रताप सिंह आवाज को भारी और गंभीर बनाते हुए अपने लिखे फैसले को पढते हुए बोला.. अदालत ने मुलजिम की म्रतका बहन रानी के पत्र को राइटिंग एक्सपर्ट को भी दिखाया लेकिन वह पत्र म्रतका की राइटिंग से मेल नहीं खाता... लिहाजा ये अदालत इस निर्णय पर पहुंची है कि मुलजिम विशाल एक बेहद चालाक और खतरनाक मुजरिम है, इसलिए अदालत मुलजिम विशाल को मुजरिम मानते हुए उसे खूनी करार देती है और साथ ही उसने जज की पवित्र कुर्सी पर जो कीचड़ उछाला है...

लिहाजा अदालत मुजरिम विशाल को अदालत का अपमान करने के जुर्म में एक महीने की बामशक्कत सजा देती है और मकतुल रवी का कत्ल करने तथा अपनी बहन को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के जुर्म में अदालत मुजरिम विशाल को फांसी की सजा का हुक्म देती है..

कठघरे में खड़े विशाल के होंठों पर दर्द भरी मुस्कान आई , आँखें नम हो गईं ...

मुझे माफ करना मेरी बहन , मैं तुम्हारी आखरी इच्छा पूरी नहीं कर पाऊंगा.. तू देख रही है कि मैं अकेला लाचार इन दरिंदों से लड़ने के काबिल नहीं हूं... कानून भी इनका है और पुलिस भी इनकी है.. अंदर तक टूट गया था विशाल इस करप्ट सिस्टम की वजह से ... उसकी आँखों से विवशता के आंसू छलक पडे...

मजिस्ट्रेट प्रताप सिंह ने अपने फैसले पर हस्ताक्षर किये और निब को तोड कर खडा हो गया..

बेशक विशाल उससे कुछ नहीं कह रहा था, फिर भी प्रताप सिंह की हिम्मत नहीं हुई कि वह उससे निगाहें मिला सके... कुर्सी छोड़ कर सीधा अपने चैम्बर की तरफ बढ़ गया...

एक बार फिर गलत फैसले की तारीख बन कर रह गई ये अदालत ...

**********

विशाल ने एक गहरी सांस ली और पुनीत शर्मा की तरफ देखते हुए कहा ... शर्मा जी, दस दिन और रह गए हैं.. दस दिन बाद मुझे फांसी पर लटका दिया जाएगा और कानून के चेहरे पर एक बदनुमा दाग लग जायेगा ... आपने मेरी पूरी कहानी सुन ली, अब क्या करना चाहेंगे यह आपकी इच्छा पर निर्भर करता है ...

पुनीत ने एक सिगरेट सुलगाई और कश लगा कर गंभीर स्वर में बोला... तुम्हारी कहानी सचमुच दर्द भरी है विशाल , तुम बिल्कुल बेगुनाह हो.. गुनहगार तो वे चारों कुत्ते हैं जो कानून की हिफाजत करने के बजाय कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं ...

मुझे अपनी मौत का गम नहीं है शर्मा जी.. विशाल का स्वर भर्रा गया.. गम तो इस बात का हो रहा है कि मैं अपनी बहन की आखिरी इच्छा को पूरी करने में नाकाम रहा ... रानी की तरह पता नहीं और कितनी बहनों की आत्मायें उन दरिंदों को मरता देखने के लिए तरस रही होगी ...

समझ लो उनकी मौत के परवाने पर मुहर लग गई विशाल.. पुनीत के स्वर में कठोरता आ गई.. रानी अगर तुम्हारी बहन थी तो मेरी भी बहन थी... रही तुम्हारे मरने की बात तो मैं तुम्हें वचन देता हूँ कि तुम पर अब जरा सी आंच भी नहीं आने दुंगा.. सजा तो उन्हें मिलेगी जो असली गुनहगार है... कहते कहते पुनीत का मासूम चेहरा भभकने लगा..

विशाल उसे ऐसे देखने लगा जैसे साक्षात भगवान को देख रहा हो...

ट्रिन... ट्रिन...

फोन की घंटी बज उठी

अवतार का फोन होगा , राजीव सेन फोन की तरफ हाथ बढाते हुए बोला .. पुनीत शर्मा की मौत की ख़बर सुनाने के लिए फोन किया होगा

उसने फोन उठाया और कान से लगा कर बोला ... हेल्लो

मैं रामभरोसे बोल रहा हूँ हुजूर.. दुसरी तरफ से आवाज आई

बुरी तरह से चौंका राजीव सेन

जेल से रामभरोसे का फोन आने का मतलब, भारी गडबड... कहीं विशाल जेल तोड़कर फरार तो नहीं हो गया.. उसने अपनी सोचो पर काबू पाया और सतर्क स्वर में बोला ... क्या बात है रामभरोसे ?

पुनीत शर्मा तो यहां आ चुका है

क्या ??? स्प्रिंग की माफिक उछल ही पड़ा राजीव सेन

उसे यूं उछलते देख उसके तीनों साथी भी चौंक गए

क्या बात है सेन ? क्या कह रहा है रामभरोसे ? चौधरी ने पूछा ..

पुनीत शर्मा यहां आ पहुंचा है ... माउथपीस पर हाथ रख कर जवाब दिया सेन ने ..

फिर से चौंक पडा चौधरी ...

ए ऐसा कैसे हो सकता है, उसके लिए तो हमारे आदमी बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे पर तैनात हैं...

राजीव सेन के पास भला इस बात का क्या जवाब होता सो वह वापिस हाथ हटाकर फोन पर बोला.... पहूंचा कब वह जेल में ?

अभी आठ दस मिनट ही हुये हैं हुजूर , विशाल के साथ बैठा हुआ है अभी

मगर वह वहां पहुंचा कैसे ?

जेल के बाहर कार खड़ी है , लगता है वह कार से ही आया है...

ठीक है तू उस पर नजर रख, हम देखते हैं कि क्या करना है

सेन ने फोन रखा और चौधरी की तरफ देखते हुए बोला .. वह अपनी कार से यहां आया है ..

उसका इस तरह यहां पहुंचना यही दर्शाता है कि वह अवश्य ही दमखम रखता है... मजिस्ट्रेट प्रताप सिंह ने अपना विचार व्यक्त किया...

फिर क्या किया जाए अब ? राजीव सेन सोफे पर पहलू बदलते हुए बोला ...

करना क्या है , लापरवाही से कहा चौधरी ने ... अवतार सिंह को फोन करो और उससे कहो कि वह अपने आदमियों को जेल की तरफ रवाना कर दे, वह हरामजादा वकील का बच्चा इस शहर से जिंदा बचकर नहीं जाना चाहिए

बिलकुल सही ... सुरेश पाटील ने चौधरी की बात का समर्थन किया ..

और अगर हमारे आदमियों के वहां पहुंचने से पहले ही पुनीत शर्मा वहां से निकल गया तो ? राजीव सेन ने अपनी शंका व्यक्त की

अभी आठ दस मिनट ही हुये हैं उसे विशाल के पास गए, आधा पौना घंटा तो वह लगायेगा ही... तब तक हमारे आदमी आराम से वहां पहुंच जायेंगे .. निरंजन चौधरी बोला...

यूं भी अगर वह वहां से पहले निकल भी गया तो भी उसका रूख हमारी तरफ ही हो, बशर्ते कि उसमें हम से टकराने का हौसला हो... सुरेश पाटील ने कहा...

फिर राजीव सेन रिसीवर उठा कर अवतार सिंह को फोन करने लगा...

लगता है ऊपरी अदालत में अपील करने का इरादा है आपका ? पुनीत शर्मा के ऑफिस में प्रवेश करते ही जेल अधीक्षक ने कहा ...

पुनीत शर्मा चुईगम चबाते हुए उसके सामने बैठ गया और मुस्कुरा कर बोला ...

आप क्या कहते हैं जेलर साहब, मुझे अपील करनी चाहिए कि नहीं ?

 
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