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कार में बैठे हुए राज ने नमिता का पर्स लेकर अपनी गोद में रख लिया और ख़ुद नमिता से सट कर बैठ गया। थोड़ा एक तरफ़ को होने के कारण ड्राइवर को अब राज की हरकत शायद ना दिखे। अब उसने नमिता के हाथ को अपने पैंट पर लौड़े के ऊपर रखा और दबाने का इशारा किया। नमिता का हाथ पर्स के नीचे होने के कारण ड्राइवर को मिरर से भी नहीं दिखेगा।
नमिता मुस्कुराकर उसके लौड़े को दाबने लगी। वह भी अपना हाथ नमिता की जाँघ पर रखकर उसको सहलाने लगा। जल्दी ही वह गरम हो गया और इसने अपनी ज़िपर खोल के नमिता को इशारा किया की वह अंदर हाथ डाल के मज़ा करे। नमिता ने अंदर हाथ डाला और उसके बॉल्ज़ और लौड़े को चड्डी के अंदर से छू कर मस्त होती चली गयी। अब राज ने एक हैंड्बैग नमिता की गोद में रखा और उसकी पैंट खोलकर उसकी पैंटी को सहलाने लगा।
जल्दी ही दोनों गरम हो चुके थे। फिर नमिता फुसफुसाई: चल अब बस कर नहीं तो मैं झड़ जाऊँगी और क्या पता तू भी झड़ जाए। राज हँसते हुए अपना हाथ वापस ले लिया। पर उसने नमिता को दिखाकर अपनी उँगलियाँ चाटीं। नमिता भी मस्ती में आके अपनी ऊँगली चाटी।
थोड़ी देर में राजधानी आ गयी और शानदार सड़कें और इमारतें दिखनी लगी। ड्राइवर ने एक बहुत बड़े माल के आगे कार रोकी और वह दोनों माल के अंदर चले गए ।
वो कई दुकानों में गए और ख़ूब हँसी मज़ाक़ किए।
नमिता बोली: चल तुझे कपड़े ले दूँ?
राज: क्या ले दोगी जींस या टी शर्ट।
नमिता: दोनों ले ले।
दुकान में काफ़ी भीड़ थी। नमिता एक काउंटर पर टी शर्ट देखने लगी तभी उसको अपने चूतरों पर एक हाथ का अहसास हुआ। वह मुस्करायी और सोची कि क्या लड़का है थोड़ी देर भी सबर नहीं कर सकता। नमिता भी हाथ के स्पर्श से मस्त हो रही थी। फिर वह बोली: राज बस कर, कोई देख लेगा।
तभी उसने देखा कि राज तो सामने खड़ा कपड़े देख रहा है। वह हड़बड़ा कर पीछे देखी तो एक अधेड़ सा आदमी खड़ा था और मुस्कुरा रहा था।
वह वहाँ से दूर चली गयी और राज के पास जाकर खड़ी हो गयी। वह आदमी हँसते हुए चला गया।
अब राज ने कुछ कपड़े पसंद किए। तभी नमिता बोली: देख यहाँ सेक्सी चड्डियाँ भी मिल रही हैं। ले ले अपने लिए।
राज: माँ चड्डी क्या करनी है आपको बिना चड्डी के ही सब दिखाता रहता हूँ।
नमिता: हा हा चल ले ले , बड़ा सेक्सी दिखेगा तू इसमें।
राज: ठीक है माँ आपको कौन सी पसंद है?
नमिता: ये वाली जॉकी की बड़ी सेक्सी है। तुम्हारे बड़े बॉल्ज़ को अच्छा सहारा मिलेगा।
राज: ठीक है माँ आपको ये पसंद है तो यही सही।
नमिता ने राज के कपड़े ख़रीदने के बाद कहा: चल अब खाना खाते हैं।
राज: चलो ड्राइवर कोई अच्छे रेस्तराँ में ले जाएगा।
जब दोनों रेस्तराँ में खाना खाने के लिए टेबल पर बैठे तो नमिता बोली: मैं हाथ धो कर आती हूँ। जब वह हाथ धो रही थी तो उसने देखा कि एक उसकी ही उम्र की औरत इंतज़ार कर रही थी अपनी बारी की। अचानक नमिता को लगा कि वह उस औरत पहचानती है। फिर नमिता बोली: इशा ? तुम इशा हो ना?
इशा: हाँ और तुम नमिता हो ना?
दोनों गलें लगीं। इशा: आज हम २० साल के बाद मिल रही है नमिता: हाँ स्कूल के बाद तो हम मिली ही नहीं ।
इशा: चल तुझे अपने परिवार से मिलाती हूँ। तेरे साथ कौन है?
नमिता: बस मैं और मेरा बेटा हैं। पति का देहांत हो गया है।
इशा: ओह , सॉरी, मेरे पति का बिसनेस है ।
बाहर आके वह नमिता को उस टेबल पर ले गयी जहाँ उसका परिवार बैठा था। नमिता ने देखा कि एक थोड़ा मोटा सा आदमी इशा का पति था। उसके पास एक लड़की एक स्कर्ट टॉप में बैठी थी। उसकी चूचियाँ अभी पूरी तरह से बड़ी भी नहीं हुई थी। उसके सामने एक स्मार्ट लड़का बैठा था और वह इशा को देखा और बोला: माँ कहाँ रह गयी थी आप?
इशा: बेटा इनसे मिलो ये मेरी सहेली नमिता है और ये रोहन हैं मेरा बेटा , १२ थ में पढ़ता है । ये मानसी है मेरी बेटी १० थ में है। ये मेरे पति हैं राकेश ।
नमिता ने राकेश को नमस्ते की और बच्चों को प्यार से मुस्कुरा कर देखी। तभी नमिता ने राज को आवाज़ दी और उसके आने पर बोली: ये मेरा बेटा राज है। १२थ में पढ़ता है। राज ने भी सबका अभिवादन किया।
राकेश: अरे आप लोग यहीं हमारे साथ बैठिए ना, साथ में खाना खाएँगे।
सब बातें करते हुए खाना खाने लगे। तभी नमिता का चम्मच नीचे गिर गया। वह झुकी नीचे चम्मच उठाने और उसकी आँख वहाँ टेबल के नीचे चल रहे खेल पर टिक गयी। उसने देखा कि राकेश का हाथ मानसी के स्कर्ट के अंदर था और वह उसकी जाँघ सहला रहा था। नमिता को थोड़ा सा आश्चर्य हुआ कि यहाँ तो बाप बेटी का चक्कर चल रहा है।
वह सोची कि क्या इशा को इसके बारे में पता है? फिर उसने देखा कि रोहैन भी बार बार इशा से चिपक कर बात कर रहा था।
तभी उसने देखा कि रोहन उसके कान में कुछ बोला और नमिता ने देखा कि उसकी एक बाँह उसकी एक चूची को दबा रही थी। और इशा उससे दूर होने का प्रयास भी नहीं कर रही थी।
नमिता को कुछ अजीब सा लगा ये सब और वो जानती थी कि इशा शादी के पहले भी मज़े से सेक्स का सुख लेती थी। शायद अभी भी कुछ ऐसा ही है।
तभी नमिता ने देखा कि राकेश रोहन को देखा और मानसी के कान में कुछ बोला। मानसी भी देखी कि रोहन का हाथ इशा की चूचि को साइड से दबा रहा था। दोनों सीक्रेट रूप से मुस्कुराने लगे।
नमिता को लगा कि ये शायद बहुत ही ख़ास परिवार है कुछ उसके ख़ुद के परिवार जैसा ही -इन्सेस्ट परिवार।
तभी इशा बोली: नमिता याद है हम लोग कितनी मस्ती करती थीं? बहुत अच्छे दिन थे वो भी।
नमिता: हाँ याद है बहुत मस्ती करते थे।
नमिता ने देखा कि राकेश की आँखें अब उसकी टॉप के ऊपर थीं। वह उसकी चूचियों को देखे जा रहा था। नमिता सोचने लगी कि ये आदमी तो बड़ा ही रंगीला है अपनी बेटी से तो मज़ा ले ही रहा है और अब मुझे भी देखे जा रहा है।
थोड़ी देर बाद सबने खाना खा लिया और इशा बोली: आप दोनों को अब हमारे घर चलना है क्योंकि इतने साल बाद मिले हैं, बहुत सी बातें करनी है।
नमिता: हमको वापस भी जाना है यहाँ से तीन घंटे लगेंगे हमको वापस पहुँचने में।
इशा: मैं कोई बात नहीं सुनूँगी अभी के अभी चलो , दो तीन घंटे बाद चले जाना।
नमिता: ठीक है यार तुमसे तो मैं जीत नहीं सकती चलो।
बाहर आके नमिता ने कार बुलायी और इशा और नमिता उसने बैठ गयी। इशा ने देखा कि राकेश नमिता की चूचियों को टॉप के ऊपर से घूर रहा था। इशा राज को रोहन के साथ आने को बोली।
दूसरी कार राकेश कार चला रहा था और राज उसकी बग़ल में आके बैठा था और पीछे भाई बहन बैठे थे।
बातें करते हुए राकेश राज से पढ़ाई के बारे में पूछ रहा था। तभी राज ने देखा शीशे में कि रोहन का हाथ मानसी की जाँघों पर था । उसे थोड़ा अजीब सा लगा कि वह भाई बहन है फिर भी।
तभी अचानक ज़ोर का ब्रेक लगा और राज भी आगे को झुका और जब वह मुड़ा तो उसने देखा कि मानसी की स्कर्ट ऊपर तक चढ़ी हुई थी और उसकी गुलाबी पैंटी दिख रही थी। तभी रोहन ने राज को पीछे देखते हुए देखा तो मानसी की स्कर्ट नीचे कर दिया। राज उसकी चिकनी जाँघ और उसकी पैंटी देख कर मस्त हो गया।
थोड़ी देर में सब उनके घर पहुँचे। अच्छा बड़ा सा घर था।
अंदर जाकर इशा नमिता और राज को ड्राइंग रूम में बैठायी और उनके लिए पानी लायी। इशा ने देखा कि अब उसका बेटा रोहन नमिता की चूचियों को घूर रहा था। वह सोची कि पहले बाप और अब बेटा नमिता को बहुत वासना भरी दृष्टि से देख रहे हैं। तभी उसकी नज़र राज पर पड़ी वह उसे ही घूर रहा था ।
इशा ने आह भरी और सोची कि यहाँ तो सब गरम हो रहे हैं। बाद में इशा नमिता को अपने बेड रूम में ले गयी और दोनों पुराने दिनों की बातें करने लगीं।
उधर राकेश मानसी के बेडरूम में आराम करने चला गया। और राज , मानसी और रोहन ,रोहन के बेडरूम में चले गए।
तीनों अपने स्कूल की बातें करने लगे।
रोहन बोला: मैं ज़रा चेंज करके आता हूँ। वह अपने कपड़े लेकर बाथरूम में घुसा और एक स्लीव्लेस गंजी और हाफ़ पैंट में बाहर आया। राज उसके मसल्ज़ देख कर काफ़ी प्रभावित हुआ। उसकी जाँघे भी राज की जाँघें जैसी बालों से भरी थी।
रोहन राज से बोला: यार तुम भी कपड़े बदल लो और आराम से बैठो। राज भी अपने बैग से कपड़े निकालके बाथरूम में जाकर चेंज किया और बाहर आया। मानसी उसको काफ़ी ध्यान से देख रही थी। राज के मसल्ज़ भी मस्त थे और उसकी जाँघें रोहन की जाँघों से ज़्यादा भारी थीं।
मानसी बोली: मैं भी कपड़े बदल आती हूँ, और अपने कमरे में चली गयी।
रोहन ये सोचके मुस्कुराया कि वहाँ तो पापा लेटे हुए हैं इसके कमरे में। चलो पापा तो मज़ा ले ही लेंगे।
क़रीब १५ मिनट बाद मानसी आयी तो उसकी साँस थोड़ा फूली हुई थी और वह आके उनके पास बिस्तर में बैठ गयी। रोहन मुस्कुराया क्योंकि वह जानता था की पापा ने मस्ती की होगी मानसी के साथ तभी वह गुलाबी हो रही है। अब उसने एक टॉप और स्कर्ट डाल ली थी और उसकी नाभि और पेट नंगा दिख रहा था। जब वह बैठ रही थी तो उसकी गुलाबी पैंटी राज और रोहन को दिख गयी और दोनों अपने लौड़े पैंट में अजस्ट करने लगे। फिर ५ बजे नमिता आयी और बोली: चलो बेटा चलें अब घर।
राज: जी माँ चलते हैं।
नमिता मुस्कुराकर उसके लौड़े को दाबने लगी। वह भी अपना हाथ नमिता की जाँघ पर रखकर उसको सहलाने लगा। जल्दी ही वह गरम हो गया और इसने अपनी ज़िपर खोल के नमिता को इशारा किया की वह अंदर हाथ डाल के मज़ा करे। नमिता ने अंदर हाथ डाला और उसके बॉल्ज़ और लौड़े को चड्डी के अंदर से छू कर मस्त होती चली गयी। अब राज ने एक हैंड्बैग नमिता की गोद में रखा और उसकी पैंट खोलकर उसकी पैंटी को सहलाने लगा।
जल्दी ही दोनों गरम हो चुके थे। फिर नमिता फुसफुसाई: चल अब बस कर नहीं तो मैं झड़ जाऊँगी और क्या पता तू भी झड़ जाए। राज हँसते हुए अपना हाथ वापस ले लिया। पर उसने नमिता को दिखाकर अपनी उँगलियाँ चाटीं। नमिता भी मस्ती में आके अपनी ऊँगली चाटी।
थोड़ी देर में राजधानी आ गयी और शानदार सड़कें और इमारतें दिखनी लगी। ड्राइवर ने एक बहुत बड़े माल के आगे कार रोकी और वह दोनों माल के अंदर चले गए ।
वो कई दुकानों में गए और ख़ूब हँसी मज़ाक़ किए।
नमिता बोली: चल तुझे कपड़े ले दूँ?
राज: क्या ले दोगी जींस या टी शर्ट।
नमिता: दोनों ले ले।
दुकान में काफ़ी भीड़ थी। नमिता एक काउंटर पर टी शर्ट देखने लगी तभी उसको अपने चूतरों पर एक हाथ का अहसास हुआ। वह मुस्करायी और सोची कि क्या लड़का है थोड़ी देर भी सबर नहीं कर सकता। नमिता भी हाथ के स्पर्श से मस्त हो रही थी। फिर वह बोली: राज बस कर, कोई देख लेगा।
तभी उसने देखा कि राज तो सामने खड़ा कपड़े देख रहा है। वह हड़बड़ा कर पीछे देखी तो एक अधेड़ सा आदमी खड़ा था और मुस्कुरा रहा था।
वह वहाँ से दूर चली गयी और राज के पास जाकर खड़ी हो गयी। वह आदमी हँसते हुए चला गया।
अब राज ने कुछ कपड़े पसंद किए। तभी नमिता बोली: देख यहाँ सेक्सी चड्डियाँ भी मिल रही हैं। ले ले अपने लिए।
राज: माँ चड्डी क्या करनी है आपको बिना चड्डी के ही सब दिखाता रहता हूँ।
नमिता: हा हा चल ले ले , बड़ा सेक्सी दिखेगा तू इसमें।
राज: ठीक है माँ आपको कौन सी पसंद है?
नमिता: ये वाली जॉकी की बड़ी सेक्सी है। तुम्हारे बड़े बॉल्ज़ को अच्छा सहारा मिलेगा।
राज: ठीक है माँ आपको ये पसंद है तो यही सही।
नमिता ने राज के कपड़े ख़रीदने के बाद कहा: चल अब खाना खाते हैं।
राज: चलो ड्राइवर कोई अच्छे रेस्तराँ में ले जाएगा।
जब दोनों रेस्तराँ में खाना खाने के लिए टेबल पर बैठे तो नमिता बोली: मैं हाथ धो कर आती हूँ। जब वह हाथ धो रही थी तो उसने देखा कि एक उसकी ही उम्र की औरत इंतज़ार कर रही थी अपनी बारी की। अचानक नमिता को लगा कि वह उस औरत पहचानती है। फिर नमिता बोली: इशा ? तुम इशा हो ना?
इशा: हाँ और तुम नमिता हो ना?
दोनों गलें लगीं। इशा: आज हम २० साल के बाद मिल रही है नमिता: हाँ स्कूल के बाद तो हम मिली ही नहीं ।
इशा: चल तुझे अपने परिवार से मिलाती हूँ। तेरे साथ कौन है?
नमिता: बस मैं और मेरा बेटा हैं। पति का देहांत हो गया है।
इशा: ओह , सॉरी, मेरे पति का बिसनेस है ।
बाहर आके वह नमिता को उस टेबल पर ले गयी जहाँ उसका परिवार बैठा था। नमिता ने देखा कि एक थोड़ा मोटा सा आदमी इशा का पति था। उसके पास एक लड़की एक स्कर्ट टॉप में बैठी थी। उसकी चूचियाँ अभी पूरी तरह से बड़ी भी नहीं हुई थी। उसके सामने एक स्मार्ट लड़का बैठा था और वह इशा को देखा और बोला: माँ कहाँ रह गयी थी आप?
इशा: बेटा इनसे मिलो ये मेरी सहेली नमिता है और ये रोहन हैं मेरा बेटा , १२ थ में पढ़ता है । ये मानसी है मेरी बेटी १० थ में है। ये मेरे पति हैं राकेश ।
नमिता ने राकेश को नमस्ते की और बच्चों को प्यार से मुस्कुरा कर देखी। तभी नमिता ने राज को आवाज़ दी और उसके आने पर बोली: ये मेरा बेटा राज है। १२थ में पढ़ता है। राज ने भी सबका अभिवादन किया।
राकेश: अरे आप लोग यहीं हमारे साथ बैठिए ना, साथ में खाना खाएँगे।
सब बातें करते हुए खाना खाने लगे। तभी नमिता का चम्मच नीचे गिर गया। वह झुकी नीचे चम्मच उठाने और उसकी आँख वहाँ टेबल के नीचे चल रहे खेल पर टिक गयी। उसने देखा कि राकेश का हाथ मानसी के स्कर्ट के अंदर था और वह उसकी जाँघ सहला रहा था। नमिता को थोड़ा सा आश्चर्य हुआ कि यहाँ तो बाप बेटी का चक्कर चल रहा है।
वह सोची कि क्या इशा को इसके बारे में पता है? फिर उसने देखा कि रोहैन भी बार बार इशा से चिपक कर बात कर रहा था।
तभी उसने देखा कि रोहन उसके कान में कुछ बोला और नमिता ने देखा कि उसकी एक बाँह उसकी एक चूची को दबा रही थी। और इशा उससे दूर होने का प्रयास भी नहीं कर रही थी।
नमिता को कुछ अजीब सा लगा ये सब और वो जानती थी कि इशा शादी के पहले भी मज़े से सेक्स का सुख लेती थी। शायद अभी भी कुछ ऐसा ही है।
तभी नमिता ने देखा कि राकेश रोहन को देखा और मानसी के कान में कुछ बोला। मानसी भी देखी कि रोहन का हाथ इशा की चूचि को साइड से दबा रहा था। दोनों सीक्रेट रूप से मुस्कुराने लगे।
नमिता को लगा कि ये शायद बहुत ही ख़ास परिवार है कुछ उसके ख़ुद के परिवार जैसा ही -इन्सेस्ट परिवार।
तभी इशा बोली: नमिता याद है हम लोग कितनी मस्ती करती थीं? बहुत अच्छे दिन थे वो भी।
नमिता: हाँ याद है बहुत मस्ती करते थे।
नमिता ने देखा कि राकेश की आँखें अब उसकी टॉप के ऊपर थीं। वह उसकी चूचियों को देखे जा रहा था। नमिता सोचने लगी कि ये आदमी तो बड़ा ही रंगीला है अपनी बेटी से तो मज़ा ले ही रहा है और अब मुझे भी देखे जा रहा है।
थोड़ी देर बाद सबने खाना खा लिया और इशा बोली: आप दोनों को अब हमारे घर चलना है क्योंकि इतने साल बाद मिले हैं, बहुत सी बातें करनी है।
नमिता: हमको वापस भी जाना है यहाँ से तीन घंटे लगेंगे हमको वापस पहुँचने में।
इशा: मैं कोई बात नहीं सुनूँगी अभी के अभी चलो , दो तीन घंटे बाद चले जाना।
नमिता: ठीक है यार तुमसे तो मैं जीत नहीं सकती चलो।
बाहर आके नमिता ने कार बुलायी और इशा और नमिता उसने बैठ गयी। इशा ने देखा कि राकेश नमिता की चूचियों को टॉप के ऊपर से घूर रहा था। इशा राज को रोहन के साथ आने को बोली।
दूसरी कार राकेश कार चला रहा था और राज उसकी बग़ल में आके बैठा था और पीछे भाई बहन बैठे थे।
बातें करते हुए राकेश राज से पढ़ाई के बारे में पूछ रहा था। तभी राज ने देखा शीशे में कि रोहन का हाथ मानसी की जाँघों पर था । उसे थोड़ा अजीब सा लगा कि वह भाई बहन है फिर भी।
तभी अचानक ज़ोर का ब्रेक लगा और राज भी आगे को झुका और जब वह मुड़ा तो उसने देखा कि मानसी की स्कर्ट ऊपर तक चढ़ी हुई थी और उसकी गुलाबी पैंटी दिख रही थी। तभी रोहन ने राज को पीछे देखते हुए देखा तो मानसी की स्कर्ट नीचे कर दिया। राज उसकी चिकनी जाँघ और उसकी पैंटी देख कर मस्त हो गया।
थोड़ी देर में सब उनके घर पहुँचे। अच्छा बड़ा सा घर था।
अंदर जाकर इशा नमिता और राज को ड्राइंग रूम में बैठायी और उनके लिए पानी लायी। इशा ने देखा कि अब उसका बेटा रोहन नमिता की चूचियों को घूर रहा था। वह सोची कि पहले बाप और अब बेटा नमिता को बहुत वासना भरी दृष्टि से देख रहे हैं। तभी उसकी नज़र राज पर पड़ी वह उसे ही घूर रहा था ।
इशा ने आह भरी और सोची कि यहाँ तो सब गरम हो रहे हैं। बाद में इशा नमिता को अपने बेड रूम में ले गयी और दोनों पुराने दिनों की बातें करने लगीं।
उधर राकेश मानसी के बेडरूम में आराम करने चला गया। और राज , मानसी और रोहन ,रोहन के बेडरूम में चले गए।
तीनों अपने स्कूल की बातें करने लगे।
रोहन बोला: मैं ज़रा चेंज करके आता हूँ। वह अपने कपड़े लेकर बाथरूम में घुसा और एक स्लीव्लेस गंजी और हाफ़ पैंट में बाहर आया। राज उसके मसल्ज़ देख कर काफ़ी प्रभावित हुआ। उसकी जाँघे भी राज की जाँघें जैसी बालों से भरी थी।
रोहन राज से बोला: यार तुम भी कपड़े बदल लो और आराम से बैठो। राज भी अपने बैग से कपड़े निकालके बाथरूम में जाकर चेंज किया और बाहर आया। मानसी उसको काफ़ी ध्यान से देख रही थी। राज के मसल्ज़ भी मस्त थे और उसकी जाँघें रोहन की जाँघों से ज़्यादा भारी थीं।
मानसी बोली: मैं भी कपड़े बदल आती हूँ, और अपने कमरे में चली गयी।
रोहन ये सोचके मुस्कुराया कि वहाँ तो पापा लेटे हुए हैं इसके कमरे में। चलो पापा तो मज़ा ले ही लेंगे।
क़रीब १५ मिनट बाद मानसी आयी तो उसकी साँस थोड़ा फूली हुई थी और वह आके उनके पास बिस्तर में बैठ गयी। रोहन मुस्कुराया क्योंकि वह जानता था की पापा ने मस्ती की होगी मानसी के साथ तभी वह गुलाबी हो रही है। अब उसने एक टॉप और स्कर्ट डाल ली थी और उसकी नाभि और पेट नंगा दिख रहा था। जब वह बैठ रही थी तो उसकी गुलाबी पैंटी राज और रोहन को दिख गयी और दोनों अपने लौड़े पैंट में अजस्ट करने लगे। फिर ५ बजे नमिता आयी और बोली: चलो बेटा चलें अब घर।
राज: जी माँ चलते हैं।