S
StoryPublisher
Guest
नमिता: अच्छा बाक़ी कभी और करेंगे अभी राज कभी भी आ सकता है। और राजू से तो मज़े कर रही है ना?
सुषमा: हाँ दोनों बाप बेटा लगे रहते हैं मेरे पीछे । राजू तो मम्मी मम्मी करके २/३ बार रोज़ चोद ही लेता है , हाँ उसके पापा कभी एक बार तो कभी दो बार ही करते हैं। और जब वह टूर पर रहते हैं तो राजू मुझे पूरा दिन नंगी ही रखता है और ४/५ बार चोद लेता है।
नमिता हँसते हुए: चल तेरे तो मज़े ही मज़े हैं। फिर राज से क्यों चूदना चाहती है?
सुषमा: वह बस ऐसे ही, तू कहती है ना कि उसका हथियार बहुत बड़ा है तो बस मन करता है। तुझे भी राजू से चुदवाना है क्या? बात करूँ उससे?
नमिता हँसते हुए बोली: यहाँ भी मम्मियों की अदला बदली हो जाएगी। और बेचारे राजन का क्या होगा?
सुषमा: इनको भी शामिल कर लेंगे। पर तब तीन मर्द हो जाएँगे और हम दो औरतें।
नमिता: फिर क्या हुआ? हम दो औरतों के पास छे छेद हैं तीन लौडों को तो सम्भाल ही लेंगीं हम दोनों।
दोनों हँसने लगी फिर सुषमा वापस जाने लगी और बोली कि चलो जल्दी प्रोग्राम बनाते हैं ।
नमिता सोचने लगी कि ये पड़ोस में भी ग्रूप सेक्स शुरू हो गया तो कहीं राज की पढ़ाई पर इसका बुरा असर तो नहीं पड़ेगा।
थोड़ी देर में राज वापस आया और अपने कमरे में जाकर अपने स्कूल की तैयारी करने लगा, अगले दिन की।
रात को खाना खाने के बाद बिस्तर पर आकर राज पूरा नंगा होकर लेट गया। उसका मोटा लौड़ा उत्तेजना से ऊपर नीचे हो रहा था और नाभि को छूने की कोशिश कर रहा था। नमिता उसकी हालत देखकर मुस्कुराती हुई अपने कपड़े भी उतार दी और नंगी उसकी बाहों में समा गयी।
अब दोनों एक दूसरे को चूमते हुए वासना की आँधी में बहने लगे। जल्दी ही नमिता की चूचियाँ राज के मुँह में थी और उसके हाथ उसके गोल गोल चूतरों पर घूम रहे थे। दोनों एक दूसरे की ओर करवट लेकर लेटे थे। अब नमिता ने अपनी एक टाँग उठाके राज के कमर पर रख दी और उसने राज के लौड़े को पकड़ कर अपनी बुर ने दाख़िल कर दिया। राज ने भी अपनी कमर का एक धक्का मारा और उसका लौड़ा उसकी बुर में घुसता चला गया। अब दोनों एक दूसरे के कमर पकड़कर एक दूसरे में समाने की कोशिश कर रहे थे। कमरे में फ़च फ़च और आऽऽह्ह्ह्ह्ह गूँज रहे थे। नमिता ने राज के बड़े बड़े आँड भी सहलाना चालू किया अत राज ने भी चूचि चूसते ही नमिता की गाँड़ के दरार में दो ऊँगली डालके उसे मस्त कर दिया।
अब चुदायी ज़ोरों पर थी और दोनों एक दूसरे की ओर धक्के मार रहे थे। फिर नमिता की हाय्य्य्य्य्य्य मैं गईइइइइइइ की आवाज़ आइ और वह झड़ने लगी । तभी राज भी ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म कहकर उसकी बुर में अपना रस छोड़ दिया।
राज: माँ कहीं तुम प्रेगनेंट हो गयी तो?
नमिता: नहीं बेटा , मैं गर्भ निरोधक दवाई लेती हूँ। तुमको परेशान होने की ज़रूरत नहीं है।
अब राज उसके सीने में अपना सिर रख कर सो गया।
सुबह नमिता उठी और राज के खड़े लौड़े को देखकर मुस्करायी और बाथरूम में फ़्रेश होकर चाय बना के लायी। राज को चूम कर उसने उठाया , अभी नमिता एक नायटी में थी और उसके नीचे उसने कुछ भी नहीं पहना था।
राज ने आँखें खोली और नमिता की हिलती हुई चूचियाँ दबाया और बोला: माँ मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ।
नमिता: मैं भी अपने बेटे से बहुत प्यार करती हूँ। ये कहते हुए उसने उसके लौड़े के सुपाडे को चूमा और चूस भी लिया। फिर नीचे जाके उसके बॉल्ज़ भी चूम लिए।
राज मस्ती से बोला: माँ मैं बाथरूम से आ रहा हूँ आप रुको।
वापस आके उसने नमिता का गाउन उतारा और नमिता को लिटाके उसके ऊपर आ गया और पाँच मिनट की चूमा चाटी के बाद ही उसकी चुदायी में लग गया। वह ऊपर से इतने ज़बरदस्त धक्के मार रहा था कि पूरा पलंग बुरी तरह से हिल रहा था और चूँ चूँ कर रहा था। जल्दी ही दोनों स्खलित हो गए।
थोड़ी देर बाद नमिता उठते हुए बोली: बेटा चलो अब तय्यार हो जाओ स्कूल जाना है।
नमिता ने नायटी पहनी और किचन में चली गयी । राज भी तय्यार होकर नाश्ते के टेबल पर आया और नाश्ता किया ।
अब वह नमिता को प्यार किया और चूमकर बोला: माँ स्कूल में आपकी याद आएगी।
नमिता: वहाँ सिर्फ़ पढ़ाई पर ध्यान देना। और हाँ आज से मैं ऑफ़िस जाऊँगी। पता नहीं कब वापस आऊँगी। तेरा खाना यहाँ टेबल पर रहेगा , खा लेना। अगर जल्दी आ सकी तो आ जाऊँगी।
राज: ठीक है माँ ।
अब वह फिर से नमिता को बाँहों में लेकर चूमा और फिर नीचे बैठ गया और बोला: माँ एक पप्पी दे दो प्लीज़।
नमिता हँसते हुए: बदमाश कहीं का।
ये कहते हुए उसने अपनी नायटी उठादी कमर से भी ऊपर । राज की आँखों के सामने फूली हुई बुर थी। उसने वहाँ मुँह डाला और सूँघने लगा। फिर उसने उसको चूमा और फिर नमिता को घुमाके उसके चूतरों को दबाया और दाँतों से हलके से काटा और वहाँ भी चूमने लगा। फिर उसने गाँड़ के छेद को भी सूँघा और वहाँ भी चूमा और गाँड़ में दो ऊँगली फिरायी ।
फिर वह खड़ा हुआ और बोला: माँ आप मस्त माल हो, जी कर रहा है कि अभी आपको चोद दूँ।
नमिता ने उसकी फूली हुई पैंट को देखा और वहाँ पैंट के ऊपर से लौड़े को दबाके बोली: इसको ठीक कर नहीं तो सब मैडम लोग बेहोश हो जाएँगी ।
राज ने हँसते हुए लौड़े को अजस्ट किया और बाहर चला गया।
नमिता अपने काम में लग गयी।
बाद में क़रीब १० बजे वो ऑफ़िस के लिए तय्यार होकर निकली। आज उसने लेग्गिंग और टॉप पहना था। वह बड़ी हसीन लग रही थी। उसने ऑटो किया और ऑफ़िस पहुँची।
बहुत दिनों के बाद ऑफ़िस आयी थी सो उसने सबका हाल चाल पूछा और उसको पता चला कि सुधाकर अभी भी अमेरिका में ही है। पर मनीष रात को वापस आ गया है।
मनीष के वापस आने का सुनकर उसे थोड़ी सी उत्तेजना हुई।
क़रीब एक घंटे के बाद उसको ख़बर आयी कि छोटे सांब बुला रहे हैं।
नमिता की चूचियाँ कड़ी होने लगी। उसके निपल्ज़ भी कड़े हो गए। आख़िर वह और मनीष कई बार चुदायी कर चुके थे। सुधाकर का बेटा होने के कारण वह वैसे भी उसके क़रीब ही था।
वह मनीष के कैबिन के सामने पहुँची और दरवाज़ा खटखटायी।
मनीष: अंदर आ जाओ।
नमिता अंदर गयी तो वहाँ मनीष अपनी कुर्सी पर बैठा था नमिता मनीष को देखती ही रह गयी। वह अच्छा तगड़ा दिख रहा था । उसका बदन भर गया था। मनीष की आँखें भी नमिता के अंगों पर घूम रही थी। मस्त माल लग रही थी। लेग्गिंग में कसी मांसल जाँघें तो जैसे क़यामत ही ढा रही थी। खुले गले का टॉप चूचियों को और उभार रहा था। बड़े बड़े आम किसी का भी ईमान ले सकते थे।
मनीष: आंटी दरवाज़ा बंद कर दो।
नमिता: बेटा ऐसे कैसे बंद कर दूँ? कोई आ गया तो?
मनीष: आंटी ये मेरा ऑफ़िस है , यहाँ जबतक मैं ना बुलाऊँगा कोई भीतर नहीं आएगा।
नमिता ने धीरे से दरवाज़े को लॉक किया।
मनीष अपनी कुर्सी से उठा और आकर नमिता से लिपट गया और उसको पागलों की तरह चूमने लगा। कभी गर्दन पर तो कभी गालों पर और फिर उसने अपने होंठ उसके होंठों से चिपका दिए। नमिता भी गरम होकर उसे चूमने लगी। अब मनीष के हाथ उसके नंगी कमर को सहलाने लगे और फिर चूतरों पर जा चिपके। अब वह चूतरों को दबाकर मस्ती से भर गया और नमिता को बोला: मम्मी दुद्दु पिलाओ ना।
मनीष हमेशा नमिता के साथ माँ बेटे का रोल प्ले करता था।
नमिता: चलो किसी होटेल में चलते हैं। यहाँ कैसे होगा?
मनीष: नहीं यहीं करेंगे। प्लीज़ टॉप उतारिए ना।
अब नमिता ने अपना टॉप उतार दिया और मनीष ब्रा में क़ैद उसकी चूचियों पर अपना मुँह रगड़ने लगा।
फिर वह बोला: मम्मी दुद्दु पिलाओ ना।
नमिता ने हाथ पीछे किए और ब्रा का स्ट्रैप निकाला और ब्रा भी उतार दी। अब मनीष ने उसको सोफ़े पर बिठा दिया और ख़ुद उसकी गोद में लेट गया और बोला: मम्मी दुद्दु दो।
नमिता ने अपनी एक छाती अपने हाथ में पकड़ी और उसको मनीष के मुँह पर टिका दिया। मनीष ने मुँह खोला और दूध चूसने लगा और दूसरे हाथ से उसकी दूसरे दूध को दबाने लगा।
फिर उसने बदल बदल के दोनों दूध पिए और फिर तृप्त होकर बोला: मम्मी, आज कितने दिनों के बाद अपने अपना दूध पिलाया।
नमिता हँसते हुए बोली: तुम यहाँ थे ही नहीं, तो मैं कैसे दूध पिलाती?
अब नमिता उसके शर्ट के अंदर हाथ डालकर उसकी बालों से भरी छाती सहला रही थी और उसके निपल भी मसल रही थी। मनीष के पैंट में तंबू साफ़ दिखाई पड़ रहा था, जिसे नमिता ने पकड़ा और दबाने लगी।
अब मनीष ने अपना लौड़ा अपने पैंट से बाहर निकाला और सोफ़े पर बैठी नमिता के सामने उसको झुलाने लगा। नमिता ने उसको पकड़ा और चूसने लगी। अब मनीष भी इसके मुँह को चोदने लगा।
फिर वह नमिता को खड़ा किया और उसकी लेग्गिंग को नीचे किया और पैंटी के ऊपर से उसकी बुर को दबाया और फिर गीली हो रही पैंटी को भी नीचे किया। अब वह झुका और उसकी बुर को चूमने और चाटने लगा। नमिता आऽऽहहहह कर उठी।
फिर उसने नमिता को टेबल के सहारे आगे को झुकाया और पीछे से उसकी बुर में अपना लौड़ा डाला और उसे चोदने लगा। नमिता हाऽऽऽयय्यय करके चुदवा रही थी। मनीष भी ह्म्म्म्म्म्म्म मम्मी आऽऽऽह मज़ा आ रहा है ना?
नमिता: हाँआऽऽऽऽऽऽऽ बेटाआऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽऽ हैएएएएएएएर। और जोओओओओओओओओर से चोओओओओओओओदो।
मनीष भी अब ज़ोर से धक्का मार रहा था और ठप्प ठप्प की आवाज़ से उसकी जाँघें नमिता के चूतरों से टकरा रही थीं। जल्दी ही दोनों झड़ने लगे। नमिता ने अपनी चीख़ दबायी क्योंकि वह ऑफ़िस में थी। अब उसका रस नमिता की बुर में गिरता चला गया। अब मनीष ने वहाँ रखा एक तौलिया उठाया और उसको नमिता के बुर पर रख दिया ताकि रस नमिता की लेग्गिंग ख़राब ना कर दे। नमिता भी तौलिए को बुर पर रख कर साफ़ की और बाथरूम में घुस गयी। मनीष भी पीछे से आ गया और बोला: मम्मी आपको सू सु करते ही देखना है।
नमिता कोमोड से थोड़ा उठकर उसको अपनी सूसु की धार दिखाने लगी जो उसके बुर से निकल रही थी। अब मनीष ने अपना हाथ उसकी सूसू की धार पर रखा और उसके पिशाब से अपने हाथ गीले करने लगा। गरम गरम पिशाब की धार उसको मस्त कर रही थी।
फिर नमिता ने अपनी बुर की सफ़ाई की, और अपने कपड़े पहन लिए। मनीष ने भी सफ़ाई करके अपने कपड़े ठीक किए। बाहर आकर मनीष ने नमिता को अपनी गोद में खिंच लिया और बोला: आंटी आपसे अलग रहने की इच्छा नहीं होती।
नमिता: मैं भी कहाँ तुमसे अलग रहना चाहती हूँ।
मनीष: आंटी आप मुझसे शादी करोगी?
नमिता: हट बेवक़ूफ़, मैं तेरे मम्मी की उम्र की हूँ, भूल गया क्या? पर अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी मम्मी बन सकती हूँ?
मनीष: वह कैसे?
नमिता: तुम्हारे पापा से शादी करके।
मनीष: पापा से ? वो कैसे?
नमिता: वो ऐसे कि वो मुझे प्रपोज़ कर चुके हैं, शादी के लिए।
मनीष हैरानी से : तो क्या आप पापा से भी चुदवाती हो?
नमिता: हाँ वो भी तुमसे मिलने के पहले से ही। मैं तुमसे तो बहुत बाद में मिली। तुम्हारे पापा के साथ तो मैं मेरे पति के मरने के कुछ महीने बाद से ही कर रही हूँ।
मनीष: आपने कभी बताया नहीं?
नमिता: इसलिए कि जब तुमसे मिली तो वह मुझसे मिलना बंद कर दिए थे और जवान लड़कियों के पीछे भाग रहे थे।
मनीष: तो फिर अब कैसे?
नमिता: पिछले दिनों हम एक साथ फ़ार्म हाउस में थे और वहीं वह मुझे शादी के लिए बोले, पर मैंने हाँ नहीं की है, तुम्हारे और राज के बारे में सोच के।
मनीष: अगर आप पापा से शादी करोगी तो हमारे रिश्ते कैसे होंगे?
नमिता: देखो अगर तुम मुझसे रिश्ता रखना चाहते हो तो मैं तुम्हारे पापा से बात करूँगी कि शादी तभी होगी जब मनीष को भी अपनी मम्मी से मज़ा लेने देंगे।
मनीष: आप सोचते हैं कि पापा मान जाएँगे? वह तो मेरी शादी कराने के चक्कर में हैं।
नमिता: अगर तुम शादी कर लो तो ये और भी आसान हो जाएगा।
मनीष हैरानी से: वो कैसे?
नमिता: तुम अपने पापा की बीवी से मज़े लेना, याने मुझसे मज़े लेना। और तुम्हारे पापा तुम्हारी बीवी से मज़े ले लेंगे। अपनी अपनी बीवी को तो मज़े देते ही रहोगे साथ ही साथ।
अचानक मनीष की गोद में बैठी नमिता को लगा कि मनीष का लौड़ा उसकी गाँड़ में गड़ने लगा है। वह समझ गयी कि मनीष उत्तेजित हो गया है।
मनीष: मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है, पापा मान जाएँगे क्या?
नमिता: उनको मेरे साथ एक जवान बहु भी चोदने को मिलेगी तो उनको क्या ऐतराज़ होगा?
मनीष उत्तेजित होकर बोला: तो आंटी आप इस बात को आगे बढ़ाइए। मेरी तो हाँ ही है।
नमिता उठते हुए बोली: ठीक है जब वह अमेरिका से आएँगे तो मैं बात करूँगी। वैसे वह आ कब रहे हैं वापस?
मनीष: तीन चार दिनों में ही।
अब नमिता ठीक है कहके मनीष को चुमी और बाहर चली आयी और बोल दी कि आज मैं जल्दी घर चली जाऊँगी।
नमिता घर पहुँची तो राज अभी आया नहीं था।
सुषमा: हाँ दोनों बाप बेटा लगे रहते हैं मेरे पीछे । राजू तो मम्मी मम्मी करके २/३ बार रोज़ चोद ही लेता है , हाँ उसके पापा कभी एक बार तो कभी दो बार ही करते हैं। और जब वह टूर पर रहते हैं तो राजू मुझे पूरा दिन नंगी ही रखता है और ४/५ बार चोद लेता है।
नमिता हँसते हुए: चल तेरे तो मज़े ही मज़े हैं। फिर राज से क्यों चूदना चाहती है?
सुषमा: वह बस ऐसे ही, तू कहती है ना कि उसका हथियार बहुत बड़ा है तो बस मन करता है। तुझे भी राजू से चुदवाना है क्या? बात करूँ उससे?
नमिता हँसते हुए बोली: यहाँ भी मम्मियों की अदला बदली हो जाएगी। और बेचारे राजन का क्या होगा?
सुषमा: इनको भी शामिल कर लेंगे। पर तब तीन मर्द हो जाएँगे और हम दो औरतें।
नमिता: फिर क्या हुआ? हम दो औरतों के पास छे छेद हैं तीन लौडों को तो सम्भाल ही लेंगीं हम दोनों।
दोनों हँसने लगी फिर सुषमा वापस जाने लगी और बोली कि चलो जल्दी प्रोग्राम बनाते हैं ।
नमिता सोचने लगी कि ये पड़ोस में भी ग्रूप सेक्स शुरू हो गया तो कहीं राज की पढ़ाई पर इसका बुरा असर तो नहीं पड़ेगा।
थोड़ी देर में राज वापस आया और अपने कमरे में जाकर अपने स्कूल की तैयारी करने लगा, अगले दिन की।
रात को खाना खाने के बाद बिस्तर पर आकर राज पूरा नंगा होकर लेट गया। उसका मोटा लौड़ा उत्तेजना से ऊपर नीचे हो रहा था और नाभि को छूने की कोशिश कर रहा था। नमिता उसकी हालत देखकर मुस्कुराती हुई अपने कपड़े भी उतार दी और नंगी उसकी बाहों में समा गयी।
अब दोनों एक दूसरे को चूमते हुए वासना की आँधी में बहने लगे। जल्दी ही नमिता की चूचियाँ राज के मुँह में थी और उसके हाथ उसके गोल गोल चूतरों पर घूम रहे थे। दोनों एक दूसरे की ओर करवट लेकर लेटे थे। अब नमिता ने अपनी एक टाँग उठाके राज के कमर पर रख दी और उसने राज के लौड़े को पकड़ कर अपनी बुर ने दाख़िल कर दिया। राज ने भी अपनी कमर का एक धक्का मारा और उसका लौड़ा उसकी बुर में घुसता चला गया। अब दोनों एक दूसरे के कमर पकड़कर एक दूसरे में समाने की कोशिश कर रहे थे। कमरे में फ़च फ़च और आऽऽह्ह्ह्ह्ह गूँज रहे थे। नमिता ने राज के बड़े बड़े आँड भी सहलाना चालू किया अत राज ने भी चूचि चूसते ही नमिता की गाँड़ के दरार में दो ऊँगली डालके उसे मस्त कर दिया।
अब चुदायी ज़ोरों पर थी और दोनों एक दूसरे की ओर धक्के मार रहे थे। फिर नमिता की हाय्य्य्य्य्य्य मैं गईइइइइइइ की आवाज़ आइ और वह झड़ने लगी । तभी राज भी ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म कहकर उसकी बुर में अपना रस छोड़ दिया।
राज: माँ कहीं तुम प्रेगनेंट हो गयी तो?
नमिता: नहीं बेटा , मैं गर्भ निरोधक दवाई लेती हूँ। तुमको परेशान होने की ज़रूरत नहीं है।
अब राज उसके सीने में अपना सिर रख कर सो गया।
सुबह नमिता उठी और राज के खड़े लौड़े को देखकर मुस्करायी और बाथरूम में फ़्रेश होकर चाय बना के लायी। राज को चूम कर उसने उठाया , अभी नमिता एक नायटी में थी और उसके नीचे उसने कुछ भी नहीं पहना था।
राज ने आँखें खोली और नमिता की हिलती हुई चूचियाँ दबाया और बोला: माँ मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ।
नमिता: मैं भी अपने बेटे से बहुत प्यार करती हूँ। ये कहते हुए उसने उसके लौड़े के सुपाडे को चूमा और चूस भी लिया। फिर नीचे जाके उसके बॉल्ज़ भी चूम लिए।
राज मस्ती से बोला: माँ मैं बाथरूम से आ रहा हूँ आप रुको।
वापस आके उसने नमिता का गाउन उतारा और नमिता को लिटाके उसके ऊपर आ गया और पाँच मिनट की चूमा चाटी के बाद ही उसकी चुदायी में लग गया। वह ऊपर से इतने ज़बरदस्त धक्के मार रहा था कि पूरा पलंग बुरी तरह से हिल रहा था और चूँ चूँ कर रहा था। जल्दी ही दोनों स्खलित हो गए।
थोड़ी देर बाद नमिता उठते हुए बोली: बेटा चलो अब तय्यार हो जाओ स्कूल जाना है।
नमिता ने नायटी पहनी और किचन में चली गयी । राज भी तय्यार होकर नाश्ते के टेबल पर आया और नाश्ता किया ।
अब वह नमिता को प्यार किया और चूमकर बोला: माँ स्कूल में आपकी याद आएगी।
नमिता: वहाँ सिर्फ़ पढ़ाई पर ध्यान देना। और हाँ आज से मैं ऑफ़िस जाऊँगी। पता नहीं कब वापस आऊँगी। तेरा खाना यहाँ टेबल पर रहेगा , खा लेना। अगर जल्दी आ सकी तो आ जाऊँगी।
राज: ठीक है माँ ।
अब वह फिर से नमिता को बाँहों में लेकर चूमा और फिर नीचे बैठ गया और बोला: माँ एक पप्पी दे दो प्लीज़।
नमिता हँसते हुए: बदमाश कहीं का।
ये कहते हुए उसने अपनी नायटी उठादी कमर से भी ऊपर । राज की आँखों के सामने फूली हुई बुर थी। उसने वहाँ मुँह डाला और सूँघने लगा। फिर उसने उसको चूमा और फिर नमिता को घुमाके उसके चूतरों को दबाया और दाँतों से हलके से काटा और वहाँ भी चूमने लगा। फिर उसने गाँड़ के छेद को भी सूँघा और वहाँ भी चूमा और गाँड़ में दो ऊँगली फिरायी ।
फिर वह खड़ा हुआ और बोला: माँ आप मस्त माल हो, जी कर रहा है कि अभी आपको चोद दूँ।
नमिता ने उसकी फूली हुई पैंट को देखा और वहाँ पैंट के ऊपर से लौड़े को दबाके बोली: इसको ठीक कर नहीं तो सब मैडम लोग बेहोश हो जाएँगी ।
राज ने हँसते हुए लौड़े को अजस्ट किया और बाहर चला गया।
नमिता अपने काम में लग गयी।
बाद में क़रीब १० बजे वो ऑफ़िस के लिए तय्यार होकर निकली। आज उसने लेग्गिंग और टॉप पहना था। वह बड़ी हसीन लग रही थी। उसने ऑटो किया और ऑफ़िस पहुँची।
बहुत दिनों के बाद ऑफ़िस आयी थी सो उसने सबका हाल चाल पूछा और उसको पता चला कि सुधाकर अभी भी अमेरिका में ही है। पर मनीष रात को वापस आ गया है।
मनीष के वापस आने का सुनकर उसे थोड़ी सी उत्तेजना हुई।
क़रीब एक घंटे के बाद उसको ख़बर आयी कि छोटे सांब बुला रहे हैं।
नमिता की चूचियाँ कड़ी होने लगी। उसके निपल्ज़ भी कड़े हो गए। आख़िर वह और मनीष कई बार चुदायी कर चुके थे। सुधाकर का बेटा होने के कारण वह वैसे भी उसके क़रीब ही था।
वह मनीष के कैबिन के सामने पहुँची और दरवाज़ा खटखटायी।
मनीष: अंदर आ जाओ।
नमिता अंदर गयी तो वहाँ मनीष अपनी कुर्सी पर बैठा था नमिता मनीष को देखती ही रह गयी। वह अच्छा तगड़ा दिख रहा था । उसका बदन भर गया था। मनीष की आँखें भी नमिता के अंगों पर घूम रही थी। मस्त माल लग रही थी। लेग्गिंग में कसी मांसल जाँघें तो जैसे क़यामत ही ढा रही थी। खुले गले का टॉप चूचियों को और उभार रहा था। बड़े बड़े आम किसी का भी ईमान ले सकते थे।
मनीष: आंटी दरवाज़ा बंद कर दो।
नमिता: बेटा ऐसे कैसे बंद कर दूँ? कोई आ गया तो?
मनीष: आंटी ये मेरा ऑफ़िस है , यहाँ जबतक मैं ना बुलाऊँगा कोई भीतर नहीं आएगा।
नमिता ने धीरे से दरवाज़े को लॉक किया।
मनीष अपनी कुर्सी से उठा और आकर नमिता से लिपट गया और उसको पागलों की तरह चूमने लगा। कभी गर्दन पर तो कभी गालों पर और फिर उसने अपने होंठ उसके होंठों से चिपका दिए। नमिता भी गरम होकर उसे चूमने लगी। अब मनीष के हाथ उसके नंगी कमर को सहलाने लगे और फिर चूतरों पर जा चिपके। अब वह चूतरों को दबाकर मस्ती से भर गया और नमिता को बोला: मम्मी दुद्दु पिलाओ ना।
मनीष हमेशा नमिता के साथ माँ बेटे का रोल प्ले करता था।
नमिता: चलो किसी होटेल में चलते हैं। यहाँ कैसे होगा?
मनीष: नहीं यहीं करेंगे। प्लीज़ टॉप उतारिए ना।
अब नमिता ने अपना टॉप उतार दिया और मनीष ब्रा में क़ैद उसकी चूचियों पर अपना मुँह रगड़ने लगा।
फिर वह बोला: मम्मी दुद्दु पिलाओ ना।
नमिता ने हाथ पीछे किए और ब्रा का स्ट्रैप निकाला और ब्रा भी उतार दी। अब मनीष ने उसको सोफ़े पर बिठा दिया और ख़ुद उसकी गोद में लेट गया और बोला: मम्मी दुद्दु दो।
नमिता ने अपनी एक छाती अपने हाथ में पकड़ी और उसको मनीष के मुँह पर टिका दिया। मनीष ने मुँह खोला और दूध चूसने लगा और दूसरे हाथ से उसकी दूसरे दूध को दबाने लगा।
फिर उसने बदल बदल के दोनों दूध पिए और फिर तृप्त होकर बोला: मम्मी, आज कितने दिनों के बाद अपने अपना दूध पिलाया।
नमिता हँसते हुए बोली: तुम यहाँ थे ही नहीं, तो मैं कैसे दूध पिलाती?
अब नमिता उसके शर्ट के अंदर हाथ डालकर उसकी बालों से भरी छाती सहला रही थी और उसके निपल भी मसल रही थी। मनीष के पैंट में तंबू साफ़ दिखाई पड़ रहा था, जिसे नमिता ने पकड़ा और दबाने लगी।
अब मनीष ने अपना लौड़ा अपने पैंट से बाहर निकाला और सोफ़े पर बैठी नमिता के सामने उसको झुलाने लगा। नमिता ने उसको पकड़ा और चूसने लगी। अब मनीष भी इसके मुँह को चोदने लगा।
फिर वह नमिता को खड़ा किया और उसकी लेग्गिंग को नीचे किया और पैंटी के ऊपर से उसकी बुर को दबाया और फिर गीली हो रही पैंटी को भी नीचे किया। अब वह झुका और उसकी बुर को चूमने और चाटने लगा। नमिता आऽऽहहहह कर उठी।
फिर उसने नमिता को टेबल के सहारे आगे को झुकाया और पीछे से उसकी बुर में अपना लौड़ा डाला और उसे चोदने लगा। नमिता हाऽऽऽयय्यय करके चुदवा रही थी। मनीष भी ह्म्म्म्म्म्म्म मम्मी आऽऽऽह मज़ा आ रहा है ना?
नमिता: हाँआऽऽऽऽऽऽऽ बेटाआऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽऽ हैएएएएएएएर। और जोओओओओओओओओर से चोओओओओओओओदो।
मनीष भी अब ज़ोर से धक्का मार रहा था और ठप्प ठप्प की आवाज़ से उसकी जाँघें नमिता के चूतरों से टकरा रही थीं। जल्दी ही दोनों झड़ने लगे। नमिता ने अपनी चीख़ दबायी क्योंकि वह ऑफ़िस में थी। अब उसका रस नमिता की बुर में गिरता चला गया। अब मनीष ने वहाँ रखा एक तौलिया उठाया और उसको नमिता के बुर पर रख दिया ताकि रस नमिता की लेग्गिंग ख़राब ना कर दे। नमिता भी तौलिए को बुर पर रख कर साफ़ की और बाथरूम में घुस गयी। मनीष भी पीछे से आ गया और बोला: मम्मी आपको सू सु करते ही देखना है।
नमिता कोमोड से थोड़ा उठकर उसको अपनी सूसु की धार दिखाने लगी जो उसके बुर से निकल रही थी। अब मनीष ने अपना हाथ उसकी सूसू की धार पर रखा और उसके पिशाब से अपने हाथ गीले करने लगा। गरम गरम पिशाब की धार उसको मस्त कर रही थी।
फिर नमिता ने अपनी बुर की सफ़ाई की, और अपने कपड़े पहन लिए। मनीष ने भी सफ़ाई करके अपने कपड़े ठीक किए। बाहर आकर मनीष ने नमिता को अपनी गोद में खिंच लिया और बोला: आंटी आपसे अलग रहने की इच्छा नहीं होती।
नमिता: मैं भी कहाँ तुमसे अलग रहना चाहती हूँ।
मनीष: आंटी आप मुझसे शादी करोगी?
नमिता: हट बेवक़ूफ़, मैं तेरे मम्मी की उम्र की हूँ, भूल गया क्या? पर अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी मम्मी बन सकती हूँ?
मनीष: वह कैसे?
नमिता: तुम्हारे पापा से शादी करके।
मनीष: पापा से ? वो कैसे?
नमिता: वो ऐसे कि वो मुझे प्रपोज़ कर चुके हैं, शादी के लिए।
मनीष हैरानी से : तो क्या आप पापा से भी चुदवाती हो?
नमिता: हाँ वो भी तुमसे मिलने के पहले से ही। मैं तुमसे तो बहुत बाद में मिली। तुम्हारे पापा के साथ तो मैं मेरे पति के मरने के कुछ महीने बाद से ही कर रही हूँ।
मनीष: आपने कभी बताया नहीं?
नमिता: इसलिए कि जब तुमसे मिली तो वह मुझसे मिलना बंद कर दिए थे और जवान लड़कियों के पीछे भाग रहे थे।
मनीष: तो फिर अब कैसे?
नमिता: पिछले दिनों हम एक साथ फ़ार्म हाउस में थे और वहीं वह मुझे शादी के लिए बोले, पर मैंने हाँ नहीं की है, तुम्हारे और राज के बारे में सोच के।
मनीष: अगर आप पापा से शादी करोगी तो हमारे रिश्ते कैसे होंगे?
नमिता: देखो अगर तुम मुझसे रिश्ता रखना चाहते हो तो मैं तुम्हारे पापा से बात करूँगी कि शादी तभी होगी जब मनीष को भी अपनी मम्मी से मज़ा लेने देंगे।
मनीष: आप सोचते हैं कि पापा मान जाएँगे? वह तो मेरी शादी कराने के चक्कर में हैं।
नमिता: अगर तुम शादी कर लो तो ये और भी आसान हो जाएगा।
मनीष हैरानी से: वो कैसे?
नमिता: तुम अपने पापा की बीवी से मज़े लेना, याने मुझसे मज़े लेना। और तुम्हारे पापा तुम्हारी बीवी से मज़े ले लेंगे। अपनी अपनी बीवी को तो मज़े देते ही रहोगे साथ ही साथ।
अचानक मनीष की गोद में बैठी नमिता को लगा कि मनीष का लौड़ा उसकी गाँड़ में गड़ने लगा है। वह समझ गयी कि मनीष उत्तेजित हो गया है।
मनीष: मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है, पापा मान जाएँगे क्या?
नमिता: उनको मेरे साथ एक जवान बहु भी चोदने को मिलेगी तो उनको क्या ऐतराज़ होगा?
मनीष उत्तेजित होकर बोला: तो आंटी आप इस बात को आगे बढ़ाइए। मेरी तो हाँ ही है।
नमिता उठते हुए बोली: ठीक है जब वह अमेरिका से आएँगे तो मैं बात करूँगी। वैसे वह आ कब रहे हैं वापस?
मनीष: तीन चार दिनों में ही।
अब नमिता ठीक है कहके मनीष को चुमी और बाहर चली आयी और बोल दी कि आज मैं जल्दी घर चली जाऊँगी।
नमिता घर पहुँची तो राज अभी आया नहीं था।