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* * * * * * * * * * मम्मी फ्लैशबैक में
मम्मी- तो सुनो सब लोग... लण्डवाले लण्ड मुठियाते हुए सुनो... चूतवालियां चूत खुजलाती हुई सुनो।
झरना- क्यों मम्मी? एक काम करते हैं कि चूतवालियां लण्ड को सहलाये और लण्डवाले चूत को खुजलाएं तो कैसा रहे?
मम्मी- “गुड आइडिया मेरी चुदक्कड़ बेटी। वेरी गुड...” तो सुनो- “शादी के कुछ ही महीने बाद की बात है। मैं अक्सर परचून की दुकान में जाती थी सामान लेने के लिए। लालाजी मेरी तरफ हमेशा लचाई नजर से देखते थे। इधर मेरे पतिदेव मेरी गाण्ड के पीछे पड़े हुए थे की मुझे गाण्ड मारनी है। पहली बार में इतना दर्द हुआ की मैंने गाण्ड मराई से तौबा कर ली...”
मम्मी- हाँ... तो बात हो रही थी लालाजी की जो सामान देने के बहाने मेर हाथ को छू लेता था। कभी आँख मार देता था। मैं शर्माती कुछ कह नहीं पाती थी। इससे लालाजी का हौसला बढ़ने लगा। एक दिन तो हद हो गई। साले ने सामान पकड़ने के बहाने मेरी चूचियों को ही दबा दी। मैंने घर में आकर तेरे बापू को सब खबर सुनाई। उसने पहले तो गुस्सा किया। फिर हम दोनों ने मिलकर ये फैसला किया।
शाम के टाइम मैं फिर से लाला की दुकान में पहुँची। दुकान उस टाइम खाली थी। लालाजी तो मुझे देखते ही चहकने लगे। सामान देने के बहाने मेरी चूचियां दबाने लगे।
मैंने हिम्मत जुटाके कहा- लालाजी आज ये शहर गये हैं।
लालाजी- अच्छा तो हमारी बल्ले-बल्ले है।
मम्मी- हाँ लालाजी... मैं भी आपसे मिलना चाहती हूँ। आज अच्छा मौका है। आधी रात को हमारे घर में आ जाना।
लालाजी- पर वहाँ तुम्हारी सास ससुर?
मम्मी- अरे वो तो तीर्थ यात्रा पर गये हुए हैं।
लालाजी- फिर तो मैं पक्का आऊँगा।
मम्मी- आधी रात को... मेरा दिल घबरा रहा था। एकाएक किसी के आने की पदचाप से मेरा दिल और तेजी से धड़कने लगा। हाय आगे क्या होगा?
लालाजी कमरे में आ गये। और मुझसे लिपट गये। मैं भी तेजी के साथ उनकी धोती खोलने लगी।
जीजाजी- हे... हाय मम्मी, तो क्या तुम लालाजी से चुदवा ली उस रात को?
मम्मी- चुपकर साला बहनचोद।
जीजाजी- खाली बहनचोद नहीं मम्मी मैं मदरचोड़ भी हूँ।
मम्मी- ठीक है, ठीक है... बीच में मत टोक और सुन आगे क्या हुआ? जैसे ही मैंने लालाजी को पूरा नंगा कर दिया। प्लान के मुताबिक मैंने एक आह्ह... निकाली। दरवाजे के बाहर तेरे बापू इसी पल का इंतेजार कर रहे थे। उन्होंने फट से दरवाजा ठकठकाया- ठक्क... ठक्क... ठक्क...
मम्मी- तो सुनो सब लोग... लण्डवाले लण्ड मुठियाते हुए सुनो... चूतवालियां चूत खुजलाती हुई सुनो।
झरना- क्यों मम्मी? एक काम करते हैं कि चूतवालियां लण्ड को सहलाये और लण्डवाले चूत को खुजलाएं तो कैसा रहे?
मम्मी- “गुड आइडिया मेरी चुदक्कड़ बेटी। वेरी गुड...” तो सुनो- “शादी के कुछ ही महीने बाद की बात है। मैं अक्सर परचून की दुकान में जाती थी सामान लेने के लिए। लालाजी मेरी तरफ हमेशा लचाई नजर से देखते थे। इधर मेरे पतिदेव मेरी गाण्ड के पीछे पड़े हुए थे की मुझे गाण्ड मारनी है। पहली बार में इतना दर्द हुआ की मैंने गाण्ड मराई से तौबा कर ली...”
मम्मी- हाँ... तो बात हो रही थी लालाजी की जो सामान देने के बहाने मेर हाथ को छू लेता था। कभी आँख मार देता था। मैं शर्माती कुछ कह नहीं पाती थी। इससे लालाजी का हौसला बढ़ने लगा। एक दिन तो हद हो गई। साले ने सामान पकड़ने के बहाने मेरी चूचियों को ही दबा दी। मैंने घर में आकर तेरे बापू को सब खबर सुनाई। उसने पहले तो गुस्सा किया। फिर हम दोनों ने मिलकर ये फैसला किया।
शाम के टाइम मैं फिर से लाला की दुकान में पहुँची। दुकान उस टाइम खाली थी। लालाजी तो मुझे देखते ही चहकने लगे। सामान देने के बहाने मेरी चूचियां दबाने लगे।
मैंने हिम्मत जुटाके कहा- लालाजी आज ये शहर गये हैं।
लालाजी- अच्छा तो हमारी बल्ले-बल्ले है।
मम्मी- हाँ लालाजी... मैं भी आपसे मिलना चाहती हूँ। आज अच्छा मौका है। आधी रात को हमारे घर में आ जाना।
लालाजी- पर वहाँ तुम्हारी सास ससुर?
मम्मी- अरे वो तो तीर्थ यात्रा पर गये हुए हैं।
लालाजी- फिर तो मैं पक्का आऊँगा।
मम्मी- आधी रात को... मेरा दिल घबरा रहा था। एकाएक किसी के आने की पदचाप से मेरा दिल और तेजी से धड़कने लगा। हाय आगे क्या होगा?
लालाजी कमरे में आ गये। और मुझसे लिपट गये। मैं भी तेजी के साथ उनकी धोती खोलने लगी।
जीजाजी- हे... हाय मम्मी, तो क्या तुम लालाजी से चुदवा ली उस रात को?
मम्मी- चुपकर साला बहनचोद।
जीजाजी- खाली बहनचोद नहीं मम्मी मैं मदरचोड़ भी हूँ।
मम्मी- ठीक है, ठीक है... बीच में मत टोक और सुन आगे क्या हुआ? जैसे ही मैंने लालाजी को पूरा नंगा कर दिया। प्लान के मुताबिक मैंने एक आह्ह... निकाली। दरवाजे के बाहर तेरे बापू इसी पल का इंतेजार कर रहे थे। उन्होंने फट से दरवाजा ठकठकाया- ठक्क... ठक्क... ठक्क...