नमकीन चूत का नमकीन रस मैंने भी सोने से पहले लुंगी पहन ली, बाथरूम में गया और फ्रेश होकर आ गया। प्यास लग रही थी तो पानी का जग उठाया तो खाली... धत्त तेरे की... पानी को भी अभी खतम होना था। मैं जग लेकर किचेन की ओर चल पड़ा। किचेन में नीचे... नीचे बिस्तर पे कोई था। मैंने लाइट जलाई तो देखा की वो कामवाली चम्पा है। उसे उसके मर्द के छोड़ने के बाद में सासूमाँ ने किचेन में जगह दे दी। इस तरह उनकी काम-ज्वाला भी शांत हो जाती थी और चम्पा को भी रात बिताने को एक ठीकना मिल गया था। चम्पा गहरी-गहरी सांसें ले रही थी। हर साँस के साथ उसकी छातियां नीचे ऊपर हो रही थीं। चम्पा सोने से पहले साड़ी खोलकरवल साया और ब्लाउज़ में ही सोई थी।
साया घुटने तक आ रखा था। मैंने हिम्मत करके साया को कमर तक किया तो कमरे में जैसे उजाला फैल गया। बुर एकदम सफाचट, बड़ी ही रसीली लग रही थी। मेरे मुँह में पानी आ गया और लण्ड में जोश आ गया।
मैंने पहले तो पानी पिया, जग में पानी भरा, लाइट बंद की और चल पड़ा। मेरे प्यारे पाठको... मैं चल पड़ा? किधर? बाहर अपने कमरे की तरफ? नहीं... चम्पा जहाँ सोई थी उस तरफ।
मैं उसके बगल में बैठ गया और उसकी जांघों को सहलाने लगा। चम्पा का पूरा बदन काँप गया। मैं समझ गया कि साली सोने का नाटक कर रही है। हमारी चुदाई चल रही थी तो उस टाइम खिड़की से कोई झाँक रहा है ये। तो मुझे पता चल गया था। पर चम्पा को यहाँ रसोई में सोता देखकर मैंने ये पक्का समझ लिया की साली ने पूरा सीन बिना पैसे दिए, बिना कोई टिकेट खरीदे देख लिया है। मुझे अब उससे पैसा वसूल करना था। सो उसकी चूचियां दबाने लगा। ब्लाउज़ के दो बटन तो पहले से खुल चुके थे। बाकी मैंने खोल दिए। कमरे की लाइट तो बंद थी, सिर्फ थोड़ा बहुत उजाला जो बाहर से आ रहा था। चेहरा पूरा पहचान में नहीं आ रहा था।
चम्पा भी मुझसे लिपट गई- वाह भैया... आप आ गये? मैं तो सोची थी... पहले आपने भाभी के भाई का लण्ड चूसा... फिर अम्माजी के गाण्ड में लण्ड पेलते रहे... फिर भाभीजी की बुर में लण्ड पेलते रहे। फिर अपनी दीदी को भी नहीं चोदा। मैं तो सब तरफ से निराश हो गई थी।
मैं धीरे से फुसफुसाया- पर बैगन तो ले गई थी ना... उसे घुसा लेती।
चम्पा- क्या भैया? आपके लण्ड में जो मजा है, वो बैगन में कहाँ? आपके लण्ड से चुदवाने के बाद तो मैं जानबूझकर अपने मर्द के घर से भागी हूँ। और आपके यहां किचेन में डेरा डाल रखी हूँ। सिर्फ और सिर्फ आपके लण्ड से मजा लेने को।
मैं- अच्छा... मम्मीजी की बुर को कौन चाटता है? मेरी बीवी की बुर को कौन चाटता है? अपनी बुर उनसे कौन चटवाता है जब मैं बाहर जाता हूँ?
चम्पा- हे... हे... हाय भैया, आपको ये भी पता है? मैं- और तू क्या समझती है मुझे पता नहीं है?
चम्पा- वो सब छोड़ो भैया और मेरी फुद्दी की खुजली मिटाओ। सुबह से गरमा गरम दृश्य देखकर बैगन, गाजर, मूली, सब आजमा चुकी हूँ भैया। अब तो सिर्फ ये आपका प्यारा लण्ड ही मेरी फुद्दी की खुजली मिटा सकता है।
मैं- इसीलिए तो आया हूँ मेरे चम्पारानी।
चम्पा- तो शुरू हो जाओ भैया, और देर ना करो। इससे पहले की मम्मी आ जाएं और चिल्लाने लगे... चोद के चले जाओ।
मैं- पर कहीं तू फिर से प्रेगनेन्ट ना हो जाए। इसीलिए मम्मी चिल्लाती है।
चम्पा- अरे भैया... मैंने अपनी फुद्दी के अंदर वो क्या कहते हैं? कापर... कापर-टी लगवा के रखी है ना... आप चिंता ना करो बुर में लण्ड पेले जाओ।
मैं- फिर तूने ये बात मम्मी को समझानी चाहिए थी ना?
चम्पा- कब समझाती भैया? आज दिन में ही तो लगवा के आई हूँ। बताऊँगी, सोच रही थी... तो आज तो घर में दिनभर और रात भर चुदाई पूराण ही चल रहा है।
मैं उसकी चूत में लण्ड सटाते हुए- तो पेल दें मेरी चंपकली?
चम्पा- हाँ हाँ... पेल दो भैया।