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दोस्त की शादीशुदा बहन complete

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झरना- सही कहा भाभी... रामू भैया के लण्ड से चुदवाने के बाद भी मेरी फुद्दी को भाई के लण्ड से चुदवाने में उतना ही मजा आया जितना पहले आता था। और तो और यहाँ भैया से अच्छी तरह चुदाई करवाके ससुराल जाकर वहाँ अपने पति से चुदवाती हूँ तो भी उतना ही मजा आता है।

जीजाजी- वाह... वाह... क्या बात कही है?

दीदी- “तो मेरे श्रोताओं, आज की कथा यहीं पे समाप्त होती है... बाकी की कल सुबह... बोलो चूत महारानी की...”

सब मिलकर- “जै...”

दीदी- बोलो लण्ड महाराज की...

सब मिलकर- “जै..."

दीदी- “तो चलो सब सोने की तैयारी करते हैं, सुबह उठना भी है। झरना तेरी तो कल एग्जाम है ना। कल पेपर में यही चुदाई कथा लिख आना...”

झरना- अरे हाँ भाभी, मैके में आई तो थी एग्जाम देने के लिए ही... पढ़ाई तो कुछ हो नहीं पाई... यहाँ आई तो तुम तो थी ही नहीं भाभी तो सारा का सारा काम मुझे संभालना पड़ा। और भैया तो मेरे फुद्दी के पीछे ही पड़े रहते थे, सुबह, दोपहर, शाम, रात.. हमेशा बुर में लण्ड पेलते ही रहते थे। अब आपने सही कहा कि पेपर में लण्ड चूत की कहानी ही लिखनी पड़ेगी। चलो सब सो जाते हैं।

दीदी और जीजाजी अपने कमरे में सोने चल दिए... मेरे लिए गेस्टरूम था ही। झरना अपने मम्मी के कमरे में सोने चल दी।

* * * * * * * * * *

 
नमकीन चूत का नमकीन रस मैंने भी सोने से पहले लुंगी पहन ली, बाथरूम में गया और फ्रेश होकर आ गया। प्यास लग रही थी तो पानी का जग उठाया तो खाली... धत्त तेरे की... पानी को भी अभी खतम होना था। मैं जग लेकर किचेन की ओर चल पड़ा। किचेन में नीचे... नीचे बिस्तर पे कोई था। मैंने लाइट जलाई तो देखा की वो कामवाली चम्पा है। उसे उसके मर्द के छोड़ने के बाद में सासूमाँ ने किचेन में जगह दे दी। इस तरह उनकी काम-ज्वाला भी शांत हो जाती थी और चम्पा को भी रात बिताने को एक ठीकना मिल गया था। चम्पा गहरी-गहरी सांसें ले रही थी। हर साँस के साथ उसकी छातियां नीचे ऊपर हो रही थीं। चम्पा सोने से पहले साड़ी खोलकरवल साया और ब्लाउज़ में ही सोई थी।

साया घुटने तक आ रखा था। मैंने हिम्मत करके साया को कमर तक किया तो कमरे में जैसे उजाला फैल गया। बुर एकदम सफाचट, बड़ी ही रसीली लग रही थी। मेरे मुँह में पानी आ गया और लण्ड में जोश आ गया।

मैंने पहले तो पानी पिया, जग में पानी भरा, लाइट बंद की और चल पड़ा। मेरे प्यारे पाठको... मैं चल पड़ा? किधर? बाहर अपने कमरे की तरफ? नहीं... चम्पा जहाँ सोई थी उस तरफ।

मैं उसके बगल में बैठ गया और उसकी जांघों को सहलाने लगा। चम्पा का पूरा बदन काँप गया। मैं समझ गया कि साली सोने का नाटक कर रही है। हमारी चुदाई चल रही थी तो उस टाइम खिड़की से कोई झाँक रहा है ये। तो मुझे पता चल गया था। पर चम्पा को यहाँ रसोई में सोता देखकर मैंने ये पक्का समझ लिया की साली ने पूरा सीन बिना पैसे दिए, बिना कोई टिकेट खरीदे देख लिया है। मुझे अब उससे पैसा वसूल करना था। सो उसकी चूचियां दबाने लगा। ब्लाउज़ के दो बटन तो पहले से खुल चुके थे। बाकी मैंने खोल दिए। कमरे की लाइट तो बंद थी, सिर्फ थोड़ा बहुत उजाला जो बाहर से आ रहा था। चेहरा पूरा पहचान में नहीं आ रहा था।

चम्पा भी मुझसे लिपट गई- वाह भैया... आप आ गये? मैं तो सोची थी... पहले आपने भाभी के भाई का लण्ड चूसा... फिर अम्माजी के गाण्ड में लण्ड पेलते रहे... फिर भाभीजी की बुर में लण्ड पेलते रहे। फिर अपनी दीदी को भी नहीं चोदा। मैं तो सब तरफ से निराश हो गई थी।

मैं धीरे से फुसफुसाया- पर बैगन तो ले गई थी ना... उसे घुसा लेती।

चम्पा- क्या भैया? आपके लण्ड में जो मजा है, वो बैगन में कहाँ? आपके लण्ड से चुदवाने के बाद तो मैं जानबूझकर अपने मर्द के घर से भागी हूँ। और आपके यहां किचेन में डेरा डाल रखी हूँ। सिर्फ और सिर्फ आपके लण्ड से मजा लेने को।

मैं- अच्छा... मम्मीजी की बुर को कौन चाटता है? मेरी बीवी की बुर को कौन चाटता है? अपनी बुर उनसे कौन चटवाता है जब मैं बाहर जाता हूँ?

चम्पा- हे... हे... हाय भैया, आपको ये भी पता है? मैं- और तू क्या समझती है मुझे पता नहीं है?

चम्पा- वो सब छोड़ो भैया और मेरी फुद्दी की खुजली मिटाओ। सुबह से गरमा गरम दृश्य देखकर बैगन, गाजर, मूली, सब आजमा चुकी हूँ भैया। अब तो सिर्फ ये आपका प्यारा लण्ड ही मेरी फुद्दी की खुजली मिटा सकता है।

मैं- इसीलिए तो आया हूँ मेरे चम्पारानी।

चम्पा- तो शुरू हो जाओ भैया, और देर ना करो। इससे पहले की मम्मी आ जाएं और चिल्लाने लगे... चोद के चले जाओ।

मैं- पर कहीं तू फिर से प्रेगनेन्ट ना हो जाए। इसीलिए मम्मी चिल्लाती है।

चम्पा- अरे भैया... मैंने अपनी फुद्दी के अंदर वो क्या कहते हैं? कापर... कापर-टी लगवा के रखी है ना... आप चिंता ना करो बुर में लण्ड पेले जाओ।

मैं- फिर तूने ये बात मम्मी को समझानी चाहिए थी ना?

चम्पा- कब समझाती भैया? आज दिन में ही तो लगवा के आई हूँ। बताऊँगी, सोच रही थी... तो आज तो घर में दिनभर और रात भर चुदाई पूराण ही चल रहा है।

मैं उसकी चूत में लण्ड सटाते हुए- तो पेल दें मेरी चंपकली?

चम्पा- हाँ हाँ... पेल दो भैया।

 
मैंने धक्का मारा। नीचे से चम्पा रानी ने चूतड़ उछाला तो लण्ड आधा चूत की गहराई में समा गया। दूसरे धक्के में लण्ड पूरा का पूरा समा गया।

चम्पा रानी- आज तो भैया... लगता है कि आपका लण्ड कुछ ज्यादा ही बड़ा हो गया है। कल से रोज रात को आप अम्माजी... झरना दीदी... और भाभीजी की चुदाई करके आना मेरे पास।

मैं- क्यों? चम्पा रानी... पहले क्यों नहीं?

चम्पा- देखो ना... तीनों की चुदाई के बाद लगता है कि आपका लण्ड कुछ और ज्यादा मोटा और लंबा भी हो। गया है। खूब मजा आ रहा है.. मुझे आज अपनी सुहागरात की बात याद आ गई। अच्छा भैया... एक बात पूछू, बुरा तो नहीं मनोगे?

मैं- क्या बात है चम्पा रानी... बोल?

चम्पा- क्या एक बार, सिर्फ एक बार भाभी के भैया से मैं चुदवा सकती हूँ? भैया... प्लीज बुरा नहीं मानना... सिर्फ एक बार... वैसे तो आपके साथ मुझे पूरा मजा आता है। पर जबसे उनका प्यारा सा लण्ड देखा है ना भैया। एक बार फुद्दी में लेने को जी कर रहा है। प्लीज भैया.. कोई प्लान बताओ ना।

मैं- अरे पहले मुझसे तो चुदवा? मैंने उसकी चूची दबाते हुए कहा।

चम्पा- “चुदवा तो रही हूँ भैया?” उसने मेरी कमर को अपने पैरों से घेरते हुए कहा- “मैं तो गई भैया जी... है मैं झड़ी... भाभी के भाई के लण्ड से चुदवाने के नाम से मजे में मेरी फुद्दी ने देखो पानी छोड़ दिया। प्लीज भैया... एक बार उन्हें भेजो ना मेरे पास...”

मैं- अच्छा एक काम कर ना। अभी मुझसे चुदवा ले फिर साले के कमरे में जाना।

चम्पा- उनके कमरे में... मैं? नहीं भैया मुझे शर्म आती है।

मैं- अच्छा सुन... मैं तेरी चुदाई करने के बाद उनके कमरे में जाकर पानी के जग को बदल दूंगा।

चम्पा- “पानी के जग को बदल देने से क्या वो मेरी चूत में अपना लण्ड घुसा देंगे? आप भी ना भैया...”

मैं- “अरे, पूरी बात तो सुन पगली...” मैंने चुदाई जारी रखते हुए कहा- “थोड़ी ही देर में उन्हें जब प्यास लगेगी तो खाली जग को लेकर वो किचेन में आएंगे। तू अपने ब्लाउज़ का दो बटन खोल लेना, साया को घुटने तक उठा देना... साला मेरा कड़क जवान है... तुझे इस अवस्था में देखकर रह नहीं पाएगा और तेरी प्यास बुझाने के साथसाथ अपनी भी प्यास बुझाएगा। तेरी मखमली फुद्दी में अपना प्यारा सा लण्ड घुसाएगा...”

चम्पा- वाह... भैया, क्या प्लान है? पर... जग वाली बात आपके भी दिमाग में कैसे आई भैया?

मैं- क्या मतलब है तेरा? कहीं तेरे दिमाग में भी तो नहीं आई है ना ये बात?

चम्पा- “अरे भैया... मैंने पहले से ही उनके कमरे में जाकर जग का सारा पानी बाथरूम में गिरा दिया है। उनको चुदाई के बाद प्यास जरूर से लगेगी भैया...” चम्पारानी अपनी गाण्ड उछालते हुए बोली- “और मेरी फुद्दी के नसीब में एक और मस्ताना लण्ड होगा भैया। हाय भैया... मैं झड़ी झड़ी...”

मैं अभी तक झड़ा नहीं था। हमच-हमच कर धक्का लगाए जा रहा था।

 
चम्पा- “क्या बात है भैया? आज तो बहुत ही ज्यादा जोश दिखा रहे हो? भाभी के भैया के जैसे ही चुदाई कर रहे हो... पूरा सौ का दम दिखा रहे हो। लण्ड भी आज मोटा और काफी लंबा लग रहा है। हाय मैं मर जावां गुड़ खाके... कहीं आप भाभी के भाई तो नहीं हो? है हे.. मुझे तो बड़ी शर्म आ रही है...”

मैं- अच्छा... तब तुझे शर्म नहीं आई जब खिड़की से हमारी चुदाई फ्री में देख रही थी? तब नहीं आई जब जग खाली करने गई थी? और अभी तो बोल रही थी कि मेरे लण्ड से बहुत ज्यादा मजा आएगा। अभी शर्म आ रही

चम्पा- मुझे शुरू से ही पता था भैया की आप भाभी के भाई हो?

मैं- तो... फिर इतना नाटक क्यों कर रही थी?

चम्पा- अरे भैया... नाटक कर रही थी तो आपको मजा आया की नहीं?

मैं- हाँ सचमुच काफी मजा आया और मेरा निकलने ही वाला है। कहाँ निकालूं?

चम्पा- वैसे तो मैंने जैसा कहा कापरटी लगवा रखी है... पर आज मैं आपके लण्ड का रस पीना चाहती हूँ। मुझे भी तो आपके रस को पीने का हक है।... है ना?

चम्पा मेरे लण्ड को चूस रही थे। मेरा लण्ड अपना रस उसके मुँह में उड़ेल रहा था। चम्पा मजे ले लेकर चूस रही थी की अचानक...

अचानक ही कमरे की बत्ती जल उठी। सारे कमरे में उजाला फैल गया। हम दोनों ने देखा तो दरवाजे के पास सासूमाँ... झरना... जीजाजी... और मेरी प्यारी दीदी खड़े हैं।

चम्पा घबरा गई।

सासूमाँ- हमें पता था बेटे की किछेन में आकर तू चम्पा को चोदे बिना नहीं जाने वाला। इसीलिए तेरे कमरे के बाहर निकलते ही तेरी प्यारी दीदी ने पहले मेरे बेटे को उठाया और मेरे कमरे में आ गये। हम दोनों को उठाया। तो मैंने गुस्से से कहा- “तुम दोनों को शर्म नहीं आई मेरे कमरे में नंगे ही चले आए?

झरना भी उठ गई और हाथ जोड़ कर कहने लगी- “प्लीज भैया... मुझे माफ कर दो... आज और नहीं चुदवा सकती..."

तब बहूरानी ने हमें समझाया और हम दरवाजे से सारी चुदाई का आनंद ले बैठे। कमरे में उजाला तो इतना नहीं था पर हमें मजा खूब आया। अब देखो तीन बज चुके है। चलो चुपचाप सो जाओ. सुबह की सुबह देखेंगे।

मैं कमरे में आकर पलंग के ऊपर लेट गया। दिन भर फिर रात भर की चुदाई से बदन में कुछ थकावट तो थी ही। थोड़े ही देर में नींद आ गई। नींद में... कोई खूबसूरत सपने में डूबा हुआ था की मेरी नींद खुली... कमरे में अंधेरा था और कोई मेरी लुंगी खोलकर लण्ड को चूस रहा था।

 
साथ बने रहने के लिए शुक्रिया दोस्तो
 
साथ बने रहने के लिए शुक्रिया दोस्तो
 
जोश के मारे मेरा लण्ड खड़ा हुआ जा रहा था। और वो साया उसके ऊपर झुका हुआ चूसे जा रहा था। मैंने सोचा की कौन हो सकता है ये? क्या सासूमाँ, या झरना, या दीदी, या फिर चम्पा... कौन? फिर उस साए ने एक पैकेट को फाड़ा और अगले ही पल मेरे लण्ड के ऊपर एक कंडोम को लपेटने लगा.. मैंने सोचा ये मेरे लौड़े के ऊपर कंडोम क्यों लगा रही है? मैंने तो दीदी... झरना... सासूमाँ... और चम्पा सभी को कंडोम के बिना ही चोदा था। फिर ये कंडोम क्यों? मेरी समझ में नहीं आ रहा था। फिर उसने बगल से क्रीम उठाकर अपनी उंगलियों की सहयता से अपने नीचे लगाने लगा। मैं ऐसे ही चुपचाप पड़ा हुआ था। मैंने सोचा कोई नया माल है? पर कौन हो सकता है?

फिर वो साया धीरे-धीरे मेरे लौड़े को एक हाथ से पकड़कर नीचे बैठने लगा... मेरे लण्ड का सुपाड़ा किसी छेद से टकराने लगा और अगले ही पल एक तंग छेद में लण्ड का सुपाड़ा घुसा और साए के मुँह से एक दर्द भरी धीमी सी आह्ह... निकली। मैंने उसकी जांघों पे हाथ रखा जो एकदम चिकने थे। पर कुछ अलग से थे। साए ने दुबारा कोशिश की तो लण्ड और आधा घुसा और साए के मुँह से और एक आह्ह... निकली। फिर उसने तीसरी और आखिर कोशिश में मेरे पूरे लण्ड को अपने अंदर लील लिया।

और इतने में ही बत्ती जल उठी... मैंने देखा... अरे... ये तो मेरे प्यारे से जीजाजी हैं... जो अपनी गाण्ड में मेरा लौड़ा घुसाए उछल कूद मचा रखे हैं...

दीदी ने ताली बजाते हुए कमरे में प्रवेश किया- “वाह... मेरे गान्डू सैयां वा... मुझे पता तो था की मेरे रामू भैया का इतना मस्ताना लण्ड देखकर और एक बार चूसने के बाद बिना गाण्ड मराए आपको चैन नहीं आएगा, पर इतनी जल्दी की मुझे उम्मीद नहीं थी। अरे आपको शर्म आनी चाहिए? कुछ तो सोचना चाहिए था? आपको पता है, परसों रात भर मेरे प्यारे से भाई ने मेरी फुद्दी की सेवा की है? कल दिन में तुम्हारी बहन.. तुम्हारी माँ और खास करके मेरी भी सेवा दिन और रात में... फिर चम्पा बाईं की फुद्दी में भी रस उड़ेला है। और अभी तीन बजे सोने के लिए आया ताकी कल दिन में फिर से हमारी फुदियों की सेवा कर सके। और आप... आप हैं की बेचारे को सोने नहीं दे रहे हो? आ गए गाण्ड मराने?”

कमरे में जब मैंने कहा- “चलो जी, एक राउंड चुदाई की हो जाए...”

आपने कहा- “थक गया हूँ सोने दो...”

तभी तो मैंने सोचा की आज मेरे सैंया, चुदाई के लिए कैसे मना कर रहे हैं? मुझे क्या पता था की उन्हें चुदाई का नहीं गाण्ड मराई का बहुत चढ़ा हुआ है, जो मेरा भाई का लण्ड ही उतार सकता है। अब गाण्ड में लण्ड डलवा तो चुके ही हो जल्दी-जल्दी गाण्ड हिलाओ... मेरे भाई को सोना भी है... ताकी कल फिर से हमारी फुदियों की सेवा कर सके।

भैया... मैं जानती हूँ कि तुम जागे हुए हो... किसी इंसान का लौड़ा दूसर कोई गाण्ड में घुसके उसके ऊपर फुदकने लगे और मेरे भाई को पता नहीं चले ये तो हो ही नहीं सकता?

मैं मुश्कुराया।

दीदी- “अरे देखते क्या हो भैया? उठो साले, इस जीजा कोई गाण्ड में ऐसा लण्ड पेलो की फिर ये गाण्ड मरवाना ही भूल जाए.”

जीजा- “हाँ हाँ साले साहब, लो मैं कुत्ते के पोज में आ जाता हूँ..” और अगले ही पल मेरा लण्ड उनके झुकने से गाण्ड में आगे-पीछे हो रहा था।

मेरी दीदी मुझसे लिपटते हुए मुझे जोश दिला रही थी- “हाँ भैया... और तेज... और तेज्ज...”

जीजा- अरे साली मुझे मरवाएगी क्या? अरे गाण्ड फट रही है मेरी?

दीदी- तो क्यों आ गये गाण्ड फड़वाने?

 
मैंने उन दोनों की बातें सुनकर जोश में आ चुके अपने लण्ड को जीजू की गाण्ड से थोड़ा बाहर निकाला और एक शानदार धक्का लगाया।

जीजू- “अरे माँ मरा रे... साले ने मेरी गाण्ड फाड़ दी... है हे... मुझे नहीं मरवानी गाण्ड... हाय... मर गया रे...”

तभी एक नई आवाज आई- अरे क्या हुआ बेटे? कौन चिल्ला रहा है तेरे कमरे में? हे राम... रे.. अरे मेरे बेटे की गाण्ड में तूने अपना ये विशाल के लण्ड पेल दिया?

दीदी- “अरे अम्मा तुम्हारा बेटा ही आया था मेरे इस मस्ताने भाई के मस्ताने लण्ड से गाण्ड मरवाने। इनको तो सुबह तक भी सबर नहीं था की सुबह गाण्ड मरा लेते, अभी की अभी मरवानी है गाण्ड। लो... मरवा लो गाण्ड और ले लो मजे? अभी कैसे मजा आ रहा है सैंया? जब हमारी गाण्ड मारते थे तो कहते थे क्यों नखरे कर रही हो? गाण्ड मराने में भी औरत को मजा आता है। अरे सैंया... गाण्ड मरवाने में हमको कोई मजा नहीं आता... वो तो आपकी लण्ड की तनतनाहट देखकर और आपका उतावलापन देखकर हाँ हाँ बोल देती हूँ... गाण्ड मरवाने में शायद आप गान्डुओं को ही ज्यादा मजा आता है...”

झरना- अरे ये क्या हो रहा है यहाँ पर? मुझको तो सुला दिया और खुद सब मजा लेने को इकट्ठे हो गये इस कमरे में। मुझे भी मजा लेना है। है रामू भैया ये आप किसे? अरे राम रे... मेरे भैया की गाण्ड में अपना लण्ड पेल दिए हो... अरे भैया... कैसे लग रहा है? मजा आ रहा है?

दीदी- हाँ हाँ बताइए मेरे सैंया? मजा आ रहा है ना गाण्ड मरवा कर?

इस बीच मेरे धक्के की स्पीड कम नहीं हुई थी।

जीजू- “साली, तेरी अम्मा को चोदूं.”

दीदी- “मेरे सैया मेरी अम्मा कहाँ बैठी हैं यहां? हाँ... आपकी अम्मा जरूर है यहाँ पे, चाहो तो चोद लो... मेरी अम्मा को चोदने के लिए तो आपको अपनी ससुराल जाना होगा। अच्छा अच्छा... अब समझी मेरी अम्मा को चोदने के बहाने आपको दमऊ भैया से गाण्ड मरवाना है... ऐसा कहो ना?

जीजू- “हाँ हाँ... मुझे अपने साले दमऊ से गाण्ड मरवाना है। बस... हो गई खुश? साले रामू के लण्ड ने तो मेरी गाण्ड का भरता ही बन दिया है। अरे, साले तेरा हुआ की नहीं? बस कर मेरे साले... बस कर। मेरी टाँगें, मेरी गाण्ड, मेरे हाथ, मेरा सारा शरीर जवाब दे दिया है... मेरे बाप... रुक जा...”

 
मैं- “लेकिन जीजू मेरा अभी तक निकला नहीं हैं.."

सासूमाँ, दीदी, झरना सब लोग एक साथ बोले- “मैं हूँ ना...”

जीजू- “हाँ हाँ साले साहब... हो सके तो तीनों को ही चोद लो..”

मैं- पगला गये हो क्या जीजू? अभी पूरी तरह थक गया हूँ। वो तो आपने लण्ड को खड़ा कर दिया इसीलिए बोल रहा था।

सासूमॉ- “तो एक काम करते है बेटा... हम सब बारी-बारी से तेरा लण्ड चूसते हैं... ठीक है, तुम लेट जाओ...”

मैं लेट गया और सब बारी-बारी से मेरा लण्ड चूसने लगे।

सासूमाँ- सब लोग ध्यान से सुनो... अभी मैं कमरे की लाइट बंद कर रही हूँ, बहू अब तेरी बारी है। झरना कल तेरा एग्जॅम है ना? चल बेटे तू भी आराम कर ले... बहू रानी अपने भैया का लण्ड चूसकरके तेरी गाण्ड में क्रीम लगा देगी ठीक है?

जीजू- “ठीक है अम्मा... पर मुझसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा है। ऐसा करता हूँ कि मैं इसी कमरे में सो जाता हूँ..."

झरना- “ऐसी गलती ना करो भैया? कहीं रामू भैया का लण्ड फिर से खड़ा हो गया तो... अबकी बार सचमुच आपकी गाण्ड को फाड़ ही देंगे...”

जीजू हड़बड़ाते हुए- “तूने सच कहा झरना... साले का कुछ भरोसा नहीं है..” जीजू लंगड़ाते हुए, और सासूमाँ और झरना हँसते हुए कमरे से बाहर निकले।

दीदी और मैं... मैं और दीदी...

मैं- “हे दीदी, चूसना चोदो और टाँगें फैला दो ना... प्लीज दीदी...”

दीदी- “मैं भी यही कहने वाली थी भैया... मेरा भी मूड बन गया था... बैंक यू भैया...”

 
मैं- दीदी, बैंक यू किस बात का?

दीदी- “मुझे बस में और यहाँ पे सबको चुदाई का सुख देने का..."

हाँ हाँ भैया इसी तरह चोदते रहो.. हाँ हाँ... भैया आपके साथ का मजा तो मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकती... आज तक मैंने जितने से भी चुदाया हो... पर आपका लौड़ा उनका सरदार रहेगा इतना मैं जरूर कहूँगी...

मैं- “अरे दीदी, मैंने आप लोगों को मजा दिया है तो बदले में मैंने भी तो मजा लिया है... ए तो इस हाथ ले और उस हाथ दे वाली बात है...”

दीदी- “बस बस भैया, मेरा निकलने वाला है... प्लीज अपना भी निकालो.. इससे पहले की सब फिर से आ जायें और मैं शर्म की मारी उनकी ओर देख ना पाऊँ.. आप अपना पानी मेरी फुद्दी में उड़ेल दो...”

सासूमाँ- अरे बहू इसीलिए तो हमने बत्ती बंद कर दी... मैं देख रही थी कि तू अपनी फुद्दी खुजला रही थी और गरम हो गई थी... इसीलिए सबको जाने का हुकुम सुना दी...”

दीदी- है सासूमाँ.. आप गई नहीं?

झरना- “मैं भी नहीं गई हैं भाभी..."

दीदी- और तुम्हारे भैया?

झरना- “वो सचमुच अपने कमरे में गये... और चिंता मत करो मैंने उनकी गाण्ड में क्रीम लगा दी है...”

दीदी- “बैंक यू झरना दीदी...”

झरना- बैंक यू की क्या बात है भाभी... वो मेरी चुदाई करके मुझे मजे देते हैं, आप भी मेरी फुद्दी चूसती हैं। मेरा कितना खयाल रखती हैं, और मैं इतना भी नहीं कर सकती?

दीदी- “तो प्लीज एक मेहरबानी और कर दे...”

झरना- क्या? बोलो भाभी?

दीदी- यहाँ मेरे बगल में लेट तो सही।

झरना- लो लेट गई।

दीदी- “अपनी टाँगें फैलाते हुए मोड़ ले... भैया, शुरू हो जाओ...”

 
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