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Guest
रुची थोड़ी ही देर में बहुत गरम हो गयी थी और उसकी चूत से पानी की धार बहने लगी तो ओम बोला "आ जाओ मनीष भाई देखो रांड कैसे पानी छोड़ रही है. चोदो साली को कुतिया बना के." ओम की बात सुनते ही मैंने अपना लंड रुची के मुह से निकाला और उसे कुतिया बना कर एक झटके में ही पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया.
अब ओम उसकी झूलती हुई चुचियो को चबाने लगा और रुची मस्ती में बोल उठी "उफ्फ्फ धीरे कर मादरचोद धीरे क्या काट खायेगा क्या. उफफ्फ्फ्फ़ इस्श्हह्ह्ह्ह" उसकी बात सुन कर ओम और तेज़ी से उसकी चुचिया झिंझोड़ने लगा पर अब रुची चिल्ला नहीं पाई क्योंकि मयंक ने अपनी बहन का मुह अपने मोटे लंड से भर दिया.
करीब १५ मिनट रुची को चोदने के बाद मैं जैसे ही हटा मयंक ने अपना लंड रुची के मुह से निकाल कर उसकी चूत में डाल दिया. मैं वापस रुची के मुह अपना लंड डाल कर हिलाने लगा और ओम से कहा "ओम भाई क्या कर रहे हो अभी इसका एक छेद खाली है." मेरी बात सुनते ही ओम बोला "अब ये बात तो मयंक बाबु को समझाओ. येही अपनी बहनिया का दर्द नहीं समझ रहे है. अरे भाई तुम नीचे लेट कर रुची की चूत चोदो तभी तो हम गांड में लंड डाल पाएंगे."
मयंक ने फ़ौरन पोजीशन बदली और बेड पर लेट कर रुची को अपने लंड पर बिठा लिया. ओम ने फ़ौरन रुची की गांड में अपना हलब्बी लंड डाल दिया. मैंने फिर से रुची का मुख चोदन शुरू कर दिया. करीब 2 घंटे हम तीनो पोजीशन बदल बदल कर रुची को चोदते रहे. कभी मेरा लंड रुची की गांड में, कभी मुह में और कभी चूत में घुसता रहा. रुची न जाने कितनी बार झड़ी होगी और हम तीनो भी काफी थक गए.
आखिर में हम तीनो ने रुची को फर्श पर बिठाया और एक साथ अपना माल उसके ऊपर छोड़ उसे नहला दिया. रुची हम तीनो के वीर्य से नहाई बहुत सेक्सी लग रही थी पर अब हम तीनो में दम नहीं बचा था की और सेक्स कर सके. हम तीनो बेड पर लेट गए और रुची अपने आपको साफ़ करने धीरे धीरे चलती हुई बाथरूम की तरफ चली गयी.
करीब आधे घंटे बाद हम थोडा नार्मल हुए तो हमने कपडे पहने. रुची और मयंक के मम्मी पापा के आने का टाइम भी हो गया था और मेरे मम्मी पापा तो काफी पहले ही घर आ चुके होंगे. मैंने ओम से कहा की कल सुबह मिलते है और घर वापस आ गया. काफी देर घर से बाहर रहने के कारण पापा थोडा नाराज थे और दीदी ने आग में घी डालते हुए कहा "पापा आजकल बस ये यूँही बिना बताये घंटो बाहर रहता है और पढाई में बिलकुल ध्यान नहीं देता."
दीदी की बात सुन कर पापा मुझे और डांटने लगे और दीदी की बात सुन कर मैं मन ही मन सोचने लगा की जब इसको मैं अपनी रांड बनाऊँगा तब मजा आयेगा.
अब ओम उसकी झूलती हुई चुचियो को चबाने लगा और रुची मस्ती में बोल उठी "उफ्फ्फ धीरे कर मादरचोद धीरे क्या काट खायेगा क्या. उफफ्फ्फ्फ़ इस्श्हह्ह्ह्ह" उसकी बात सुन कर ओम और तेज़ी से उसकी चुचिया झिंझोड़ने लगा पर अब रुची चिल्ला नहीं पाई क्योंकि मयंक ने अपनी बहन का मुह अपने मोटे लंड से भर दिया.
करीब १५ मिनट रुची को चोदने के बाद मैं जैसे ही हटा मयंक ने अपना लंड रुची के मुह से निकाल कर उसकी चूत में डाल दिया. मैं वापस रुची के मुह अपना लंड डाल कर हिलाने लगा और ओम से कहा "ओम भाई क्या कर रहे हो अभी इसका एक छेद खाली है." मेरी बात सुनते ही ओम बोला "अब ये बात तो मयंक बाबु को समझाओ. येही अपनी बहनिया का दर्द नहीं समझ रहे है. अरे भाई तुम नीचे लेट कर रुची की चूत चोदो तभी तो हम गांड में लंड डाल पाएंगे."
मयंक ने फ़ौरन पोजीशन बदली और बेड पर लेट कर रुची को अपने लंड पर बिठा लिया. ओम ने फ़ौरन रुची की गांड में अपना हलब्बी लंड डाल दिया. मैंने फिर से रुची का मुख चोदन शुरू कर दिया. करीब 2 घंटे हम तीनो पोजीशन बदल बदल कर रुची को चोदते रहे. कभी मेरा लंड रुची की गांड में, कभी मुह में और कभी चूत में घुसता रहा. रुची न जाने कितनी बार झड़ी होगी और हम तीनो भी काफी थक गए.
आखिर में हम तीनो ने रुची को फर्श पर बिठाया और एक साथ अपना माल उसके ऊपर छोड़ उसे नहला दिया. रुची हम तीनो के वीर्य से नहाई बहुत सेक्सी लग रही थी पर अब हम तीनो में दम नहीं बचा था की और सेक्स कर सके. हम तीनो बेड पर लेट गए और रुची अपने आपको साफ़ करने धीरे धीरे चलती हुई बाथरूम की तरफ चली गयी.
करीब आधे घंटे बाद हम थोडा नार्मल हुए तो हमने कपडे पहने. रुची और मयंक के मम्मी पापा के आने का टाइम भी हो गया था और मेरे मम्मी पापा तो काफी पहले ही घर आ चुके होंगे. मैंने ओम से कहा की कल सुबह मिलते है और घर वापस आ गया. काफी देर घर से बाहर रहने के कारण पापा थोडा नाराज थे और दीदी ने आग में घी डालते हुए कहा "पापा आजकल बस ये यूँही बिना बताये घंटो बाहर रहता है और पढाई में बिलकुल ध्यान नहीं देता."
दीदी की बात सुन कर पापा मुझे और डांटने लगे और दीदी की बात सुन कर मैं मन ही मन सोचने लगा की जब इसको मैं अपनी रांड बनाऊँगा तब मजा आयेगा.