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बहन का दर्द Complete

Flashback.......................

ये बात है १९७० की..... रति की नयी-नयी शादी हुई थी..... वो पहली बार...... ससुराल से मैके आई.... थी.... जैसा गाओं मे होता है....हर कोई नयी नवेली दुल्हन की खबर लेने को उत्सुक रहता है...

माँ ने पूछा कैसी है बेटी...

ठीक हूँ माँ....

और लाला जी (दामाद रामलाल)

उन्हे क्या होगा वो भी ठीक हैं....

माँ को उसकी उदासी कुछ रहस्यमई सी दिखी.....माँ मेरा 12थ का पेपर है...कुछ पढ़ाई कर लूँ...

उसका भाई बिरजू.... जो गाओं का सबसे लाड़ला लड़का था.... ना जाने कितनी भाभियों को अभी... तक चोद चुका था... बहुत ही शैतान... और बदमाश किसम का लड़का था.... जब उसे पता लगा कि उसकी बेहन रति गाओं वापस आ गयी है तो वो दौड़ कर अपने घर पहुँच गया....

रति जो अभी केवल 18 साल की ही होगी.... और बिरजू अभी कोई 20 साल का बांका जवान था.....

रति अपनी साड़ी उतार कर ब्लाउस पेटिकोट में थी....

उसे एक पल देख कर बिरजू दंग सा रहा गया...... पर उसे चेहरे पर एक टेन्षन सी दिखी.....

क्या हुआ ये इतने गुस्से मैं क्यों हो.....रति के कड़े चूचक देख कर उसका लंड वैसे ही फनफना गया..............

कुछ देर ऐसे ही घूरता रहा.....

ऐसे क्या देख रहा है....

कुछ नहीं इतने दिन बाद तू आई है.... तुझे देख रहा हूँ... और एक टक उसकी चूचिओ को निहरता रहा...

उसे ऐसे देखते हुए.....रति ने अपनी नज़रें घुमा ली और उसकी तरफ अपनी पीठ कर ली...

अब बिरजू उसकी मद मस्त गान्ड को घूर्ने लगा.....रति अपनी साड़ी की तह लगा रही थी.....बिरजू धीरे से उसकी पीछे गया.......और रति को अपनी.... बाहों में भर लिया......उसका लंड लोहे की रोड की तरह तन गया था......रति का मुलायम-मुलायम बदन पा कर तो वो बिल्कुल पागल हो गया....

रति चोन्कते हुई...... आए भैया क्या करते हो....चलो काम करने दो....

पर बिरजू कहाँ मान ने वाला था.... उसने रति को अपने से बिल्कुल सटा लिया और अपने लौडे का अहसास उसकी गान्ड पर दे दिया....लौंडिया सिहर गयी.... जिस अहसास के लिए वो तरस रही थी.....जो उसे अपने पति से नहीं मिला , पर हाई री किस्मत , मिला तो वो भी सगे भाई से.......

संस्कारों की एक दीवार थी ....लेकिन बिरजू तो जैसे पागल आवारा.......वो तो रति को छोड़ ही नहीं रहा था.....

क्या भैया ऐसे क्यों कर रहा..... है...

वो बोला अपनी बेहन पर बहुत प्यार आ रहा है....और उसे ऐसे ही मसलता रहा......अब तो रति भी स्पर्श सुख का भरपूर आनंद ले रही थी....

बिरजू उसके गालों को भर-भर के चूस-चूस कर चूमने लगा... लौंडिया गन-गना गयी.... हाई क्या करते हो भैया.... कोई ऐसा करता है अपनी बेहन से....और आहें भरने लगी.....

बिरजू सोच रहा था.... अब तो उसकी बेहन की सील खुल चुकी होगी... अब तो उसका भी कुछ हक़ बनता है....ये कह कर बिरजू उसे लेकर पास पड़ी खटिया पर बैठ गया..... और उसने रति को अपनी गोद में बिठा लिया..... और उसे चारों तरफ से मसल रहा था....

.आज बहुत मन कर रहा है अपनी बहना को प्यार करने का....वो बोला....

तभी उनकी माँ दरवाज़े पर आई....और उसने देखा.... बिरजू अपनी बेहन रति को गोद में ले कर.... मसल-मसल के प्यार कर रहा है....वो थोड़ी देर दरवाज़े पर खड़ी हो कर दोनो की रास लीला देखने लगी...और मन ही मन मंद-मंद मुस्का गयी...... उसने सोचा रति अब सयानी हो गयी है.... शादी भी हो गयी है इसकी...... पर शादी का सुख नहीं मिला इसे.....वो कुछ सोचते हुए आगे बढ़ गयी.....

दोनो अभी भी अपनी मस्ती मे मस्त थे.....बिरजू अपना हाथ रति के पेट पर और उसकी गोलाईयों के नीचे फेर रहा था... और कभी-कभी उसकी गूलाईयों को भी टच कर रहा था....

तभी माँ को देख कर रति उठने को हुई.... पर बिरजू ने उसे कस लिया...

अरे बिरजू बड़ा प्यार हो रहा है... अपनी बहना पर..... ठीक है बेटा... खूब करो....

हां माँ बहुत दिनो बाद आई है... इसलिए....

रति का मुहँ शरम से लाल हो रहा था...उसने बिरजू को कोहनी मारी....और उसका हाथ वहाँ से हटा दिया....और एक दम से खड़ी हो गयी... और माँ के पास चली गयी....

बिरजू अपने लंड को पायजामे मे छुपाने लगा....और खड़ा हो गया.... माँ और रति किचन मे खाना बनाने लगे..... सबने साथ मे खाना खाया....और सोने की तैयारी करने लगे.....

माँ बोली मैं बाहर घैर(जहाँ जानवर बाँधते हैं) पर सोने जा रही हूँ.....

रति बोली क्यों माँ.....

अरे मुझे पता नहीं क्यों अंदर नींद नहीं आती...

अरे माँ मैं बाहर सो जाउन्गा....बिरजू बोला....(वैसे वो माँ के इस प्रस्ताव से मन ही मन बहुत खुश था)..

.नहीं माँ बोली तुम दोनो अंदर कमरे में सो जाना....और बंद कर लेना...और दोनो बेड पर सो जाना... नीचे कोई कीड़ा भी काट सकता है....माँ ने एक हिदायत से कहा और बाहर चली गयी...

बिरजू की तो खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा......उसने जल्दी से दरवाजा अंदर से बंद कर लिया....

 
रति को भी बहुत शरम आ रही थी और उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि ये क्या हो रहा है....वो शरम से सिमटी हुई बेड पर बैठ गयी....

मुस्कुराता हुआ बिरजू दरवाज़ा बंद कर के मुड़ा...

कमरे मे रति छुई मुई सी शरमा रही थी... उसकी समझ मे नहीं आ रहा था... कि आगे क्या होने वाला है लेकिन फिर भी अपने सगे भाई के साथ हम बिस्तर होने मे उसे संकोच था.... यहाँ तक कि उसकी माँ की भी इसमे मौन सहमति थी... लेकिन फिर भी उसके संस्कार आड़े आ रहे थे....उसे लग रहा था... जैसे कोई पाप होने जा रहा था....उसने बिरजू की तरफ देखा..... वो तो जैसे उसको पाने के लिए मरा जा रहा था...

बिरजू पलंग पर आधा लेट गया....और रति को एक आग्रह भरी दृष्टि से देखने लगा....जैसे कह रहा हो आ जाओ मेरी बाहों में.... कमरे में एक मौन था.... कोई किसी से कुछ नहीं बोल रहा था......केवल आखें ही बाते कर रही थी.... बिरजू की अभी भी हिम्मत नहीं हो रही थी...

लेकिन कुछ सोचते हुए...बिरजू ने मौन तोड़ा और बोला...रोशनी बढ़ा दे....रति ने कमरे मे लटकी लालटेन की रोशनी धीमी कर दी.... कमरे मे अंधेरा छा गया......केवल लालटेन की बहुत मध्यम- मध्यम रोशनी और बाहर खिड़की से पूर्णिमा का चाँद.....

बिरजू ने एक बार खिड़की से बाहर देखा.... चाँद आज पूरे शब्बाब पर था और अपनी दूधिया रोशनी.....रति के चेहरे पर डाल रहा था.....रति को ऐसे खड़े देखते हुए... बिरजू बोला ऐसे क्यों खड़ी है... क्या खड़ी-खड़ी सोच रही है....चल आ सो जा....उसने आग्रह भरे सुर से कहा.... और पलंग पर दूसरी तरफ खिसक गया....

रति जैसे कोमा से बाहर आई.....हां..... क्या भैया...

चल सो जा...बिरजू फिर बोला....रात बहुत हो गयी है....

फिर रति ने पलंग की तरफ देखा... और उसने अभी भी साड़ी पहनी हुई थी...जैसे कि गाओं में लड़कियाँ शादी के बाद साड़ी ही पहनती हैं....उसने धीरे से अपनी लाल साड़ी उतार दी..और पास पड़ी एक कुर्सी पर रख दी... और धीरे-धीरे सकुचाती हुई.....पलंग पर आ गयी.....और लेट गयी.....

कमरे मे एक अनंत सन्नाटा सा पसरा हुआ.... था....सामने से चाँदनी की किरण सीधे रति के चेहरे पर पड़ रही थी.....और उसका गोरा मुखड़ा चाँदनी से नहा गया....

बिरजू की तरफ उसकी पीठ थी.... बिरजू ने धीरे से अपना हाथ रति की कमर पर रखा और उसे अपने से सटा लिया.... उसके मद-मस्त छोड़े-छोड़े चुतड़ों की दरार मे पेटिकोट के उपर से..... अपना.... जबरदस्त 9" का लंड .... उसकी गान्ड पर टिका दिया.....

बिरजू के लंड के अहसास से रति सिहर सी गयी.... उसके सारे शरीर मे एक सिरहन सी दौड़ गयी.....बिरजू धीरे-धीरे अपना लंड उसकी दरार मे ठेलने लगा.....

अठारह(18) साल की जवान लौंडिया जिसने कभी लंड का अहसास नहीं किया हो...... लंड के दबाब से गीली हो गयी.....और उसकी मखमली चूत से रस बहने लगा....

बिरजू ने धीरे से रति की सुराही दार गर्दन पर एक चुम्मा ले लिया...और उसके कान के पास...कान का एक कोना जिस मे वो एक बाली(एअर रिंग) पहने हुए थी....उसे अपने मुहँ से धीरे- धीरे काटने लगा...लौंडिया फिर सिहर गयी.... और सारे शरीर में खून का दबाब पूरे ज़ोर से संचारित होने लगा...दिल इतनी ज़ोर से धड़कने लगा जैसे.....निकल के बाहर आ जाएगा... रति झट- अपना हाथ अपने कान पर ले गयी...और अपने कान को बिरजू के मुहँ से छूटा लिया.... और अपना हाथ अपने कान पर रख लिया....

बिरजू ने तुरंत अपना अगला हमला कर दिया......उसने अपना हाथ जो उसकी कमर और पेट को सहला रहा था..... उसको जबरन चूचिओ पर रख दिया....और उसे कस के मसल दिया.... रति के मुँह से एक चीख सी निकल गयी....पर बिरजू नहीं रुका.... और उसने रति की चूचिओ को एक प्रकार से मसल्ने लगा.....और उसके ब्लाउस के बटन खोल दिए और कुछ बटन टूट गये....और उसने अपना हाथ सीधे.... अंदर डाला...उसे बड़ा आस्चर्य हुआ.... रति ने नीचे ब्रेसियार (ब्रा) पहन रखी थी.....

ज़्यादातर गाओं में लड़कियाँ शादी तक ब्रा नहीं पहनती इस लिए... उनकी चूचिओ बिना किसी बंधन के दिन दूनी रात चोगुनि बढ़ती जाती हैं.....अब जैसे उसकी शादी हो गयी थी तो शायद माँ ने उसे ब्रा खरीद कर दी थी....

ये ब्रा बिरजू के लिए नया चक्रव्यूह थी.... इस यन्त्र (मशीन) का सामना... उसे पहली बार हो रहा था... आज तक उसने जितनी भी चुदाई की थी किसी ने भी ब्रा नहीं पहनी थी.....उसे पता था... रति तो इसे खोलने से रही.... और उसे ये ही नहीं पता था...इस का हुक कहाँ होता है....आगे या पीछे...और उसे डर था उसने पहले ही उसके ब्लाउस के कई बटन तोड़ दिए हैं.... तो कहीं... रति नाराज़ नहीं हो जाए....वो उसकी चूचिओ को टटोल के ब्रा का हुक ढूढ़ने लगा.... रति के चेहरे पर एक मुस्कान सी आ गयी..... और वो मज़े से देखने लगी कि देखें अब बिरजू भैया क्या करते हैं....

अगले ही पल बिरजू ने उसका ब्लाउस उतार के नीचे फेंक दिया.... जिसके बटन पीठ पर थे...

रति की चूचियाँ उसकी टाइट ब्रेजियर में क़ैद थी... और उसकी चाबी (की) बिरजू को नहीं मिल रही थी....जब आगे सारा टटोलने के बाद.... बिरजू को कुछ नहीं मिला.... तो उसने रति की पीठ पर ब्रा पर हाथ फेरा.... ओमाइगॉड......यहाँ छुपा है... स्वर्ग का ख़ज़ाना.... उसने तुरंत अपनी उंगलियाँ डाल.... कर ब्रा का हुक खोल दिया... उसे ऐसा लगा जैसे.... उसे... अली बाबा का ख़ज़ाना मिल गया हो.... खुल- जा- सिम-सिम.... की तरह रति की दो बड़ी- बड़ी चूचियाँ....खुले आसमान के नीचे आ गयी....चाँदनी की रोशनी में दोनो चूचियाँ... कंचनजंघा के बर्फ़ीले पहाड़ सी लगीं.... बिरजू को जैसे मुहँ माँगा.... खिलोना... मिल गया.... था... अपनी जवान बेहन की मद मस्त चूचियाँ.... पा कर तो वो जैसे दीवाना हो गया...

वो आटे की तरह रति की चूचिओ को मसल्ने लगा.... और अपना लंड उसकी गान्ड में पेटिकोट के उपर से... उसकी दरार में धकेलने लगा....उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था... रति अभी भी उसकी तरफ पीठ करे हुए थी.... उसने रति को सीधा.... किया.... और उसकी मद मस्त चूचिओ पर अपना.... मुहँ लगा दिया..... फिर तो बिरजू मसल- मसल के अपनी बेहन की चूचिओ का रस पीने लगा....रति की चूत तो बस जैसे फूट ही पड़ रही थी.... वो एक उन्माद (एग्ज़ाइट्मेंट) में थी....और सेक्स की आग उस पर हावी हो चुकी थी...और वो भी बिरजू का सहयोग देने लगी.... बिरजू का लंड अब उसके पेट पर ठोकरें मार रहा था....

 
तभी बिरजू ने कोई 10 मिनट तक उसकी चूचिओ का मर्दन करने के बाद....

बिरजू ने रति का चेहरा चाँदनी की रोशनी में देखा... रति ने अपनी नाक में... एक बड़ी प्यारी सी नथ (बाली) पहन रखी थी.....और चाँदनी की चमक मे उसकी नथ का मोती चाँद की रोशनी में और दमकने लगा.... उसे ऐसा लगा जैसे चाँद भी रति की नथ में उतर आया हो...उसे अपनीी बहना की खूबसूरती पर गुमान होने लगा.....दोनो की आखें एक दूसरे से टकराई... और बिरजू ने.... उसकी नथ को चूम लिया.... हाई.... लौंडिया.... उन्माद के शिखर पर पहुँच गयी....

अचानक ! रति का मुहँ खुल गया....फिर बिरजू ने अपने लरजते होठ..... रति के होठों पर रख दिए....और बिरजू उसकी जीभ को अपने मुँह मे लेकर बेतहाशा चूसने लगा.... दोनो का स्मूचिंग किस कोई 10 मिनिट तक चला...रति की चूत से जैसे....पानी की धार रुकने का नाम ही नहीं... ले रही थी...दोनो जैसे एक दूसरे में समाना चाहते थे... और दोनो के लब ये बयान कर रहे.... थे और दूर चाँद भाई- बेहन का संगम देख कर मुस्करा रहा था.

रति जैसे ही होश में आई और अगले ही पल उसे अहसास हुआ कि वो अपने सगे भाई के साथ है....उसकी आखों से आँसुओं की धार टूट पड़ी...... नीचे उसकी चूत..का बाँध टूट गया.... और वो झर- झरा के झड गयी...

और साथ ही उसके.... आँसुओं का बाँध भी टूट पड़ा....और वो हिचकी ले-ले कर रो पड़ी.... और उसे अपने पाप बोध का अहसास हुआ......वो अधनंगी अवस्था में फूट-फूट कर रोने लगी....उसने बिरजू को एक धक्का सा दिया....और उठ कर खड़ी हो गयी....

बिरजू को जैसे कुछ समझ में ही नहीं आया.... बोला क्या हुआ... क्यों रो रही है....

भैया ये ग़लत है.... ये पाप है.... उसके गोरे मुखड़े से तो आसुओं की धार रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी.... बिरजू बड़े विस्मय की दृष्टि से रति को देखने लगा....और उसकी कुछ समझ में नहीं आया कि अचानक रति को क्या हो गया..... लेकिन वो रति को बहुत प्यार करता था...... वो चाहता तो अभी ज़बरदस्ती भी कर सकता था.... उसकी माँ की मौन सहमति थी....

लेकिन वो कुछ नहीं बोला.... और कमरे से बाहर जाने लगा....

कहाँ जा रहे हो भैया,,,,,,,,बिरजू जाते जाते दरवाजे पर रुक गया रति की आवाज़ सुनके,,,,,,लेकिन

बिरजू वापिस नही पलटा ऑर ऐसे ही उसकी बात का जवाब देने लगा,,,,,

मैं छत पर सोने जा रहा हूँ,,,,,,,,मुझे नही लगता कि अब हम दोनो को एक कमरे मे सोना

चाहिए,,,,,,,,इतना बोलकर बिरजू वहाँ से चला गया,,,,,,,,,,,बिरजू कमरे से निकल तो गया था लेकिन

अब सोना कहाँ था ये नही पता था बिरजू उपर वाली छत की तरफ चला गया जहाँ एक बड़ा झूला है,बिरजू उससी झूले पर लेट गया,,,

काफ़ी देर तक लेटा रहा लेकिन नींद नही आई,,,

बिरजू किसी सोच में डूबा हुआ था और सारे घटना क्रम पर सोचने लगा... तभी उसे सीढ़ियों की तरफ से एक साया उसकी तरफ आता नज़र आया ऑर वो रति थी,,,,,,,उसने एक शाल ओढ़ रखी थी

भैया तुम उपर क्यों आ गये,,,,,,,उसने बड़ी उदासी से पूछा,,,,

कुछ नही बस ऐसे ही ,,,मेरा दिल नही किया नीचे सोने को,,,,,बिरजू ने बड़े रूखे ऑर रूड अंदाज़

मे उसको जवाब दिया,,,,,,,,,,

भैया मुझे अकेले नींद नही आ रही,,,जैसे आपको भी नही आ रही,,,,,,,उसने फिर से उदासी से बोला,,,,,,,,

नींद बस आने ही वाली थी कि तुम आ गई,,,,अब जाओ नीचे मुझे सोने दो ,,बिरजू फिर से रूड

तरीके से बोला उसको,,,,,

भैया मुझे नींद नही आ रही बोला ना,,,अब उसका लहज़ा थोड़ा गर्म था,,,आपको पता है ना

बिरजू बचपन से आपके साथ सोती हूँ ,,,,,,,,,,अकेले सोना मुश्किल है मेरे लिए,,,

जानता हूँ लेकिन नीचे कमरे मे एक ही पलंग है

 
तभी उसने नज़रे झुका ली,,,ऑर बड़े शांत अंदाज़ मे बोली,,,,,,,,हम लोग बेड अलग कर के सो जाएँगें

भैया लेकिन नीचे चलो मुझे अच्छा नही लग रहा अकेले सोना ऑर तुम्हारा ऐसे यहाँ

मुझे तंग मत करो,,,,,,,,,,, जाके माँ को बुला लो मुझे नही जाना नीचे ,,,मुझे यहीं सोना है,,,,तू समझती क्यूँ नही मेरी बात को,,,,,जा यहाँ से अब गुस्सा मत दिला मुझे,,,,,,,,

वो चद्दर खींच रही थी ऑर बिरजू भी अपनी चद्दर को अपने हाथों से उसको खींचने से रोक रहा था तभी ज़ोर कुछ

ज़्यादा लग गया चद्दर पर ऑर वो उसके उपर गिर गई,,,,उसका आधा जिस्म उसके जिस्म के उपर था

जबकि जिस चद्दर की वजह से ये सब हुआ वो ज़मीन पर पड़ी थी,,,उसके गिरने से शॉल खुल गयी और रति के कठोर चूचक उसकी छाती से दब गये ऑर एक ही पल मे उसकी हालत खराब होने लगी,,

बिरजू अपनी बलिशट बाहों मे उसे जैसे कुचलना चाहता था.....रति की उन्नत चुचियाँ बिरजू के सीने की रगड़ से गुलाबी हो रहीं थी......

धोती में उसका लंड रति की जांघों मे फ्रिक्षन (घर्षण) पैदा कर रहा था......

फ़रवरी का महीना था ,गुलाबी ठंड में दोनों का शरीर..... एक आग पैदा कर रहा था... माहॉल में.....

रति का सर बिरजू के राइट साइड वाले कंधे पर था....बिरजू ने अपना दूसरा हाथ निकाला..... और रति की शॉल को पेट से उठा कर उस पर रख दिया.......

लौंडिया सिहर गयी.... और मुहँ से एक हल्की सी सिसकारी निकल गयी.... आआहा........

फिर हाथ उसकी कमर मे डाल कर बिरजू ने उसको अपने से बिल्कुल सटा लिया.......

अब बिरजू के लंड की तपिश और चुभन रति को अपनी जांघों मे महसूस हो रही थी.....

लेकिन फिर उसे पाप बोध का अहसास हुआ.... और बोली....भैया... हम भाई बेहन है....क्यों ये सब करके अपना रिश्ता मैला कर रहे हो....क्या ये सही है जो तुम चाह रहे हो.... और साथ- साथ वो अपने भाई का लंड और उस के अहसास से रोमांचित सी थी.....

तभी अचानक से मौसम बदला हल्की-हल्की बारिश शुरू हो गयी....जैसे रति की बेरूख़ी से आसमान भी रोने लगा हो....

तभी ठंड की एक लहर सी दौड़ी दोनो के अंदर... और रति ने बिरजू को अपनी शॉल मे ले लिया...और तभी उसे अहसास हुआ कि वो ऊपर से बिल्कुल नंगी है.....एक शॉल के अंदर दोनो का शरीर एक तपन में जल रहा था.....भैया बारिश तेज़ हो गयी है.... नीचे चलो...

नहीं मैं नहीं आ रहा तू जा नहीं तो सर्दी लग जाएगी....

नहीं मैं भी नहीं जाउन्गी अगर आप नहीं आओगे तो.....वो गुस्से से बोली....वो गुस्से मे बड़ी प्यारी लग रही थी.... हालाँकि बारिश हो रही थी और और बादल छा गये थे... लेकिन फिर भी पूर्णिमा का चाँद... बीच-बीच में अपनी झलक दिखा जाता था.....

और उसी एक झलक मे.... रति की नथ का मोती फिर एक बार जगमगा उठा.... और उसकी चमक सीधी....बिरजू की आखों मे पड़ी...और उसे अपनी बेहन पर एकदम से बड़ा प्यार आया.... और उसने रति को एकदम से... अपने सीने से सटा लिया.... और उसकी चूचियाँ उसके उन्नत सीने से एकदम से कुचल सी गयी...... और एक आवेश मे बिरजू बोल पड़ा.... रति मैं तेरे को बहुत चाहता हूँ....और मैं तेरे साथ ही ज़िंदगी बिताना चाहता हूँ....

भैया ये कैसे संभव है....हम सगे भाई बेहन हैं और कोई समाज हमें इसकी मंज़ूरी नहीं देगा....अगर आप अपनी बेहन को इतना प्यार करते हो तो उसके साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों कर रहे हो ? इस प्यार का क्या अंजाम होगा.... ये प्यार नहीं एक हवस है.....!.

फिर दोनो के बीच एक मौन सा छा गया....रति ने मौन तोड़ा..... आप बड़े हो मेरे से चलो आप ही मुझे समझा दो... मेरे को कन्वेन्स कर दो मैं आपकी हर बात मान लूँगीं... आप जैसा बोलगे मैं करूँगीं... सारा जीवन आपको समर्पित कर दूँगी...आपकी रखैल.... आपकी दासी बन के रहा लूँगीं.. पत्नी का दर्जा तो आप दे नहीं पाओगे....?. बारिश ने दोनो का तन बदन गीला कर दिया..... था....

फिर एक खामोशी सी छा गयी दोनो के बीच मे......और रति ने अपनी बात कंटिन्यू करते हुए...क्या...अपनी रंडी बनाना चाहते हो...

खामोश ! बिरजू लगभग शेर की तरह दहाड़ते हुए बोला.......

रति सिहर गयी...उसका रौद्र रूप देख कर....

तू क्या समझती है... मैं तेरे को पाने के लिए ये सब कर रहा हूँ.... तेरे को ज़रा सा भी अहसास है.... ग़लती से तेरी शादी एक नामर्द से हो गयी है... जो दिन भर चरस- गांजे मे डूबा रहता है....

जो सवाल तेरे मे अभी हैं उन सारे सवाल पर मेरी माँ से बात हो चुकी है... मैं भी नहीं चाहता था ये .... लेकिन माँ ने तेरी दुहाई और हमारे प्यार का वास्ता दिया.......और ये कसम ली मेरे से क़ी मैं ज़िंदगी भर शादी नहीं करूँगा..... केवल तेरा ख़याल रखूँगा.... अब तेरे पास दो विकल्प(ऑप्षन) हैं.... या तो तू सारी उमर कुँवारी रह.... या फिर सारी उमर बदचलन... जो बहुत सी औरतें आज भी कर रहीं हैं....हर किसी से तैयार हो जाती हैं चुदवाने को..... फिर या...... मैं जो तेरे लिए.... अपनी सारी ज़िंदगी की समर्पित कर चूका हूँ.....

रति मैं आज ये कह रहा हूँ.... अगर हमारे बीच आज कुछ नहीं बन पाया तो ये समझ..... कि आज के बाद हम दोनो इस सेक्स की दुनिया से बहुत दूर हैं..... मेरा प्रण निश्चित है..... तू साथ है या नहीं.... अगर तेरे कभी कदम डगमगाए..... तो उस दिन के लिए....तेरी गर्दन.... या उस की गर्दन... नहीं रहेगी.... चाहे..... सारी ज़िंदगी जैल मे ही क्यों ना कट जाए.....ये मेरी भीष्म प्रतिग्या है.......!

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लेकिन मैं तो समय हूँ......

मैं कुछ कर तो नहीं सकता.... लेकिन इस कहानी के सूत्र धार के रूप मे....

ये बता दूं.... ये प्रतिग्या अडिग और अमर रहने वाली है.... क्यों कि आज जो भी तारीख हो..... वो आज तक अमल है..... चलो मैं आपको अभी की तारीख बता ता हूँ.... रात के 12.01 मिनिट हो चुका है दिन बदल गया है.... 14थ फेब्रुवरी शुरू हो चुकी है....यानी कि वॅलिंटाइन डे...... उस समय शायद.वॅलिंटाइन का डे किसी को मालूम भी नहीं था... गाओं देहात मे....

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बारिश पूरे जोरों पर थी..... झूला हवा के बहाव से तेज़-तेज़ चल रहा था...... पूरा गाओं नींद के आगोश मे था..... कड़कती बिजली.... और मूसलाधार बारिश..... बार-बार रति की नथ का मोती चमका देते थे....जो बार-बार बिरजू को और उत्तेजित कर रहा था.... उसने एक बार फिर रति को अपने आगोश मे ले लिया.....

रति की आखों से तो गंगा जमना बहने लगी......उसे तो ये गुमान ही नहीं था कि उसका भाई उस-से इतना प्यार करता है..... उसके पास बिरजू के एक भी सवाल का जबाब नहीं था.... वो बस मंत्र मुग्ध सी बिरजू को सुन रही थी.........

बिरजू ने रति को अपने से बिल्कुल सटा लिया.... बारिश तो जैसे.... और तेज़ पर तेज़ होती जा रही...... बारिश की वजह से बिरजू को रति के आसू नहीं दिख रहे थे.... लेकिन जब उसने उसे अपने से चिपकाया तो उसे उसकी सिसकियाँ सुनाई... दी...

अरे पगली.. रोती क्यों जा रहीं है.......

वो फिर तो दहाड़ मार-मार कर रोने लगी..... भैया आप मुझे इतना प्यार करते हो.....

हां रति......

मुझे कहीं छोड़ तो नही जाओगे.....

कैसी बात करती है रति....मैं प्यार कर रहा हूँ कोई मज़ाक नहीं....

रति की चूत पनिया.... गयी फिर एक बार ..... उसका मन अंदर से एक दम से डोल गया..... आख़िर लंड का स्वाद है ही ऐसा..... तभी तो जमाने की लौंडिया.....इस अनोखे खिलोने की दीवानी हैं....

उधर बिरजू अपना हाथ रति के पेट , पीठ पर फिरा रहा था.....

बड़ा ही मन मोहक समा सा बँध गया था..... अब लब कुछ नहीं बोल रहे थे.... बस बरबस..... किसी अंजान चाहत... या अंजानी ताक़त से अपने आप काम बन रहा था.....

फिर उसने अपना हाथ का डाइरेक्षन घुमाया और उसे...कमर के पास लाता हुआ धीरे से..... रति के पेटिकोट के नाडे मे डाल दिया.... और उसका हाथ रति की गदराई गान्ड के उपरी हिस्से मे पहुँच गया......

और उसका मन खुशी से झूम उठा.... क्योंकि....? रति ने पेंटी भी नहीं.... पहनी हुई थी......अब तो उसका लंड सारे तट बंधन तोड़ कर आगे बढ़ना चाहता था......

उसने धीरे से ना जाने कब रति को पता भी नहीं चला अपनी धोती निकाल दी और लंड को खुली हवा मे छोड़ दिया..... लंड तो जैसे मौका ही ढूंड रहा था.... उसने अपना फन फफकार दिया.... और रतिया की जांघों के इर्द गिर्द..... सर्गोसियाँ करने लगा.....और अपना माल ढूँढने लगा....

रति तो जैसे पिघल सी ही गयी.... इस रोमांच से कि आज भैया... उसकी चूत का उद्घाटन करेंगें..... लेकिन दूसरे ही पल... उसे अपने रिश्ते का ख़याल फिर आया.... और थोड़ी दुखी भी हो गयी....पर फिर उसने सोचना बंद कर दिया... और मन से बोली... जो होगा देखा जाएगा.....

और उधर बिरजू थोड़ा कुछ ज़्यादा ही बोल्ड हो गया...... उसने रति का शॉल कुछ ज़्यादा ही उपर उठा दिया.... और लौंडिया की दोनो.... जबरात चूचियाँ....उसके हाथ मे आ गयी......

हाई... भैया ये क्या कर रहे हो..... लेकिन बिरजू ने उसकी एक ना सुनी...... और अपना काम जारी रखा.... और उसने बारी-बारी से उसकी मद मस्त चूचकों का जबरदस्त मर्दन करना जारी रखा....

क्या कर रहे हो भाई.... मुझे शरम आ रही है.....लेकिन उसका अंग- अंग मुस्कुरा रहा था......

बिरजू को ना जाने क्या सूझी.... और वो गाना गाने लगा.....

मेरे सपनो की रानी कब आएगी तू...$$$$$$$$$

बड़ा ही ख़ुसनूमा समा बँध चुका था...... इस गाने के दरमियाँ... बिरजू ने रति के सारे शरीर पर दम से हाथ फेरता रहा.... लौन्डिया भी मस्ती से गन-गना चुकी थी... और दो बार झड चुकी थी.....

बिरजू का खुन्टे जैसा लंड...... रति की चूत के मुहाने पर टिका हुआ था..... रति की चूत के पानी से वो भी पूरा तर हो चुका था.....

दोनो की नज़र..... फिर आकाश की तरफ उठी.... जहाँ चाँद धीर नीचे की ओर जा रहा था,,,,, और प्रेमी जोड़ा एक दूसरे में समाने के लिए तैयार था...... और बारिश अपने पूरे शाबाब पर थी...

रति मन्त्र मुग्ध हो कर बिरजू का गाना सुन रही थी..........गाना पूरा होने पर....बिरजू ने उसे चूमते हुए पूंच्छा कैसा लगा....बहुत सुंदर भाई आप सच में बहुत सुर में गाते हैं.....

ये सुन कर बिरजू ने एक बार फिर उसके गुलाबी गालों को चूम लिया.... गाल चूमने के कारण उसका लंड रति की चूत के और करीब आ गया......लौंडिया सिहर गयी..... फिर तो बिरजू ने उसके होंठो को अपने होंठो से सटा कर के बड़ा ही पॅशनेट स्मूचिंग किस किया

रति अब पूरी तरह से पिघल चुकी थी.......

बिरजू ने एक हाथ... रति के पेटिकोट के नाडे मे फसाया.... और उसकी गदराई गान्ड को थोड़ा उठा... के... पेटीकोत को नीचे खिसका दिया....... और फिर पैरों से... पेटीकोत को नीचे खिसका दिया.......

रति चाँदनी रात मे... खुले आकाश के नीचे बिल्कुल मदरजात नग्न अवस्था मे पड़ी थी.......

शरम से उसने अपनी आखें बंद कर ली और अपनी चुचियों को अपने हाथ से ढक लिया......

बिरजू तो जैसे... आज ही सारा रस पीना चाहता था......

भाई प्लीज़ अब आपने बहुत कर लिया.... बस अब इससे आगे नहीं......

बिरजू..... रति बहुत मज़ा आ रहा है... प्लीज़ अब मत रोक....

भैया मैं अपने पूरे फर्टाइल पीरियड मे हूँ.... और आपके इस मद मस्त लंड से पहली रात मे..... ही प्रेगञेन्ट हो जाऊंगी...... सो प्लीज़ लीव फॉर टुडे ओन्ली......

नहीं.... मेरी रानी... मैं पटना जा कर अपोलो हॉस्पिटा मे तेरा अबॉर्षन करवा दूँगा.... पर आज मेरे को मत रोक......

बड़ा ही पॅशनेट सेक्सी प्यार चल रहा था.... दोनों भाई बेहन का......

अब स्थिति ये आ गयी थी दोनो का भी अब अपने ऊपर बस नहीं था.....

बिरजू ने अपना लंड पकड़ा.... जो 2 घंटे की तपिश से किसी भी समय उफान से फटने वाला था......

और उसे रति की गुलाबी झान्टो से भरी चूत के मुहाने पर टिकाया......

लौंडिया.... सिहर गयी.... और समझ भी गयी क़ी अब उसे चुदना ही पड़ेगा.... अपने भाई के मज़बूत.... मदमस्त रसीले लंड से....

बिरजू ने एक बार लंड से अंगड़ाई ली और लंड... सीधा... रति की चूत पर टिका के... हल्का सा झटकककााअ माररराआ.... लंड चूत के माँस को चीरता हुआ.... अंदर सरक गया....

रति.... 9 इंच के लंड की आहट से ही नर्वस हो गयी.... भैया... संभाल के... आपका बहुत बड़ा लंड है...

जैसे तूने बड़े- बड़े लंड देखे है .....उसने अगला झटका थोड़ा ज़ोर से दिया.... और लंड सीधा... रति की चूत के गहराई मे घुस गया..... लौंडिया सिहर उठी.....और आहा...... आहा... करने लगी......

 
जब स्पीड बिरजू के मर्ज़ी के मुताबिक तेज हो गई तो रति ने उसकी गान्ड पर से हाथ उठाए

ऑर उन्ही हाथों से बिरजू की पीठ को सहलाने लगी और लिप्स से लिप्स को हटा लिए,,,,,,,,,,,,,,,,,,आहह

ऊवूऊवूयूवूऊवयाच्च ंमाज़्ज़जाअ आआ र्राहहा हहाई ब्बबाहही आपपंनी ब्बीहाआंन्णणन्

क्की कचहुद्दाआई क्काररननी म्मईए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,हहानन्न ऱतिद्ऱति बभहुत्त्त ंमाज़्ज़जजाअ एयाया

र्राहहाअ हहाऐी रटिल्ल क्काररत्ता हहाई ईससी हही न्नांनन्ग्गी क्कार्रक्कीए सस्सार्ररररा रटिन्न्न्न्

ऊओरर स्साररी र्रातत्ट आपपक्की कच्छूऊततत म्मार्रत्ता र्राहहुउऊउ ईकक प्पाल्ल बही ल्ल्लुउन्न्ड्ड़ कक्कूव

आप्प्प्पक्की कच्छूवतत ससीए ब्बाहहरर न्नाहही क्काररुउउ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,त्तूऊओ आअज्जज क्क्कीी

र्राआटतत्त ज्ज्जिट्टन्न्नाअ त्तीर्रा रटिल्ल्ल क्काररीए ब्बाहही उउन्न्ञटती द्दीर्रररर म्म्मीरी कचचड़दाी

क्काररूव म्माईंन न्नाहही ररूककन्नी व्वाल्ल्ली त्तीररी क्कूव ब्बास्स ईससी हही आपपंनीई इसस्स

ब्बाददी म्मूऊऊस्साल्ल्ल कककूऊ त्टीरी ससीए प्पील्लटटीए र्राहहूओ म्मीरी कच्छूवतत म्मईए,,,,,,

आहह उुउऊहह हमम्म्मममममम उूुुुुउऊहह

,,,,,,,,,,,,,,ऱतिऱति ससिर्रफफफ्फ़ चूत्त न्नाहही ग्गगाणन्ंदड़ बभी माअररननी हहाई म्मूउुज्ज्झीई

आप्प्पक्की ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,म्मीररी ब्बाहही ककूऊ कच्छूटतत सससी ज्ज्जययययाद्दा न्नास्शहाअ

बिरजू का लंड... सीधा रतिया.... की बच्चेदानी मे चोट... मार रहा था..... हर चोट पर रति 2- 2- फुट उछल रही थी....... आनंद की पराकाष्ठा (एक्सट्रीम) थी......हर धक्का पहले वाले धक्के से प्यारा था.....कोई आधे घंटे की बरबस चुदाई से दोनो का चरम (ऑर्गॅज़म) का वक्त आ गया.....बिरजू अपना लंड बाहर की तरफ खींचने लगा....

रति आनंद सागर से निकलती हुई बोली.... क्या हुआ भैया इसे क्यों निकाल रहे हो....

मैं बाहर झाड़ रहा हूँ.... कहीं तू पेट से ना हो जाए....

बड़ा ख़याल है अपनी बहना का..... वो मुस्काते हुए बोली.... अब आप अंदर ही फारिग हो जाओ... आज मैं आपका गाढ़ा - गाढ़ा पानी अपनी योनि मे लेकर पूरा सुख चाहती हूँ.....अगर प्रेगनेंट हुई तो आप बाप बन जाओगे... या रामलाल नमार्द अब मर्द कहलाने लगेगा.. और इसी एक पल में... बिरजू का लंड प्रवेश हो गया... रति की योनि मे......और ये कह कर रति फिर एक बार मुस्काई....

बिरजू ने रति का चेहरा चूम लिया.... और और आखरी धक्का..... दिया.... हाई....

दोनो क्या झड़े.... बिरजू के लंड से रति की चूत की बच्चेदानी सरा बोर हो गयी.... रति ने बिरजू को कस के पकड़ लिया.... वो बिरजू की आखरी बूँद तक का रस लेना चाहती थी......

रति की चूत बिरजू के वीर्य रस से भर चुकी थी.... और रति ने परम आनंद में अपनी आखें बंद कर ली....

बिरजू ने रति का गोरा मुखड़ा चूम लिया... रात के ठीक तीन बाज रहे थे.. रति बिरजू के बगल मे लेट गया.... सर्दी- की सर्द रात मे... दोनो पसीने- पसीने हो रहे थे.....बारिश भी बंद हो चुकी थी.......

थोड़ी देर मे रति ने अपनी आखें खोली.... आकाश मे चाँद अभी भी दूधिया... चाँदनी बिखैर रहा था....

और चाँद जैसे मुस्करा रहा था....... क्यों कि वो गवाह था... आज एक बेहन भाई की रस भरी चुदाई का......

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मैं तो समय हूँ और गवाह हूँ..... हर क्षण का रति और बिरजू के इस रस भरे मिलन का............................

 
ना जाने कितनी देर तक भाई बेहन का प्रेमी जोड़ा.... भीगे बदन एक दूसरे मे समाए लेटा रहा......समुंदर के भरते ही सैलाब महासागर तक पहुँचा और रति की वीरान कोख के महासागर मे एक बार फिर से सन्गमित रस एकत्रित होने लगा.क्योंकी बिरजू के वीर्य की हर एक बूँद ने रति की बच्चेदानी को सिंचित कर दिया था, सैलाब इस कदर उफानित था कि उसके कारण दोनो अपने जिस्म के बाहर भी महसूस कर रहे थे. रति को उसके अंदर अनेक नदियाँ बहती हुई महसूस हुई और जैसे ही झूले पर आया "निस्चल प्रेम" का तूफान थमा, रति और बिरजू के जिस्म स्थिल होकेर सुषुप्त अवस्था मे गिर पड़े

तभी रति ने देखा... सुबह होने वाली है और दोनो छत पर हैं... उसे लगा किसी ने देख लिया तो जग हंसाई हो जाएगी..... उसने जल्दी से बिरजू को उठाया,,, भैया सुबह हो गयी... चलो नीचे.... और दोनो नीचे आ गये....

बिरजू कमरे मे आ कर सो गया.... माँ भी जाग गयी..... उसने दरवाज़ा खोला माँ के लिए.... अपनी बेटी का चेहरा देख कर माँ समझ गयी कि रति की नथ उतर चुकी है...... उसने बड़े प्यार से..... उसका माथा चूम लिया..... रति शरमा के सिमट के रह गयी....पर उसका आज अंग-अंग मुस्कुरा रहा था....

दोनो माँ बेटी दैनिक क्रिया से निवृत हो गयी और पूजा करने लगी.... तभी बिरजू भी उठ गया.... वो भी फ्रेश हो कर आ गया... माँ ने दोनो के तिलक लगाया... और मुहँ मीठा करा दिया.... और एक धागा.... दोनो के हाथ मे बाँध दिया... बेटा ये तेरा वचन है.... सारी उमर अपनी बेहन का ख्याल रखना....

बिरजू ने माँ के पैर छुए..... और माँ बाहर खेतों की तरफ चली गयी.... वो शायद ज़्यादा से ज़्यादा वक़्त दोनो को अकेले देना चाहती थी.......

माँ के जाते ही बिरजू ने फिर.... रति को अपनी बाहों मे भर लिया....

क्या भैया... पूरी रात मे मन नहीं भरा क्या......

क्या तू ऐसी है जिस से एक रात मे मन भर जाए तेरे लिए तो सात जनम भी कम पड़ जाएँगे....

रति अपनी तारीफ़ सुन कर शरमा गयी...चलो छोड़ो.. सुबह- सुबह बहुत काम पड़े हैं करने को.....

लेकिन बिरजू कहाँ मानने वाला था....... उसने बाहर का दरवाज़ा बंद किया.... और रति को गोद मे उठा कर....अंदर वाले कमरे मे.... ले गया..... और देखते ही देखते..... उसने.... रति की लहंगा चोली उतार दी..............और झट से अपना मूसल जैसा लंड उसकी चूत मे पिरो दिया..... लौंडिया सिहर गयी.... और फिर बिरजू.... ने धक्के मारना शुरू कर दिया.......आधे घंटे की धुआँ-धार चुदाई से उसने रति का अंग-अंग हिला दिया..... दोनो फिर एक दूसरे से चिपटे लेटे रहे....

रति ने फिर उठने की कोशिश की लेकिन बिरजू ने फिर उसे पकड़ लिया......

अब क्या है भैया... कर तो लिया....

पर बिरजू तो रति से एक पल के लिए अलग नहीं होना चाहता था...

उसने फिर रति का हाथ पकड़ के उसे अपने पास लिटा लिया..

.क्याअ है माँ अभी आ जाएगी... क्या सोचेगी.....

माँ दोपहर से पहले नहीं आएगी...

अगर कोई आस पड़ोस का आ गया... तो क्या सोचेगा..कि दोनो भाई बेहन दरवाज़ा बंद कर के क्या कर रहें हैं....

कोई नहीं आएगा...

और फिर वो रति की जांघें फेलाने लगा....

अब क्या है... वो रुआंसी सी बोली...अभी -अभी तो किया है....

.पर बिरजू ने कभी किसी की सुनी है... उसका लंड तो जैसे साँप(स्नेक) अपना बिल ढूँढ लेता है उसी तरह.... फिर रति की योनि मे.... घुस गया..... दोनो फिर चिपट के लेटे रहे....

बिरजू बिना कुछ हिले डुले.... अपना लंड उसकी योनि मे डाले पड़ा रहा.... .. वो आनंद के गोते लगाती रही.... बिरजू का लंड था भी इतना मीठा- मीठा...... ना जाने वो कितनी देर तक ऐसे ही पड़े रहे.... तभी दरवाज़े पर दुस्तक हुई.... आउइ... वो बोली कोई आया है....

बिरजू ने जल्दी से अपना लंड निकाला... और लूँगी पहन कर... दरवाज़ा खोल दिया.. सामने माँ खड़ी थी... माँ सारा माजरा समझ गयी... अंदर देखा तो रति अपने कपड़े ठीक कर रही थी......माँ ने पूंच्छा... क्या चूल्हा नहीं जलाया....

हां माँ अभी जलाती हूँ... रति भाग कर रसोई मे घुस गयी.... माँ हंसते हुए...रति से बोली .... बिल्कुल अपने बाप पर गया.... है.... वो भी मुझे एक पल के लिए अकेला नहीं छोड़ते थे....

रति शरम से गढ़ी जा रही थी...

अब तो बिरजू का एक ही टॅशन हो गया... वो तो रात दिन रति की चूत मे अपना लंड डाले.... पड़ा रहता था....... और ये सिलसिला जब माँ भी घर मे होती तब भी चलता रहता.... और वो रति को अंदर वाले कमरे मे ले जाता...... और घंटो उसकी चूत में लंड डाल कर दोनो लेटे रहते....

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आज की तारीख याद कर लेना दोस्तों.......... 14थ फेब्रुवरी १९७०(वॅलिंटाइन डे)......................

ठीक नौ (9) मंत बाद.यानी(14 नवंबर1989) चिलदर्न्स डे पर......... रात के कोई

2 बजे रति को दर्द उठना (लेबर पेन) शुरू हुए....... और ठीक......3 बजे................... उसने..... एक लड़की को जनम दिया.......................

जिसका नाम अलका ..... है.......

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