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बहन का दर्द Complete

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रति: भैया ऐसे ज़ोर-ज़ोर से मत मस्लो....बहुत दर्द हो रहा है......

बिरजू: ओह सॉरी...ग़लती हो गयी......वो फिर उन्हे मुँह से चूसने लगता है.... उसका लंड रति की चूत के मुहाने पर कुलाची मारने लगता....है.....वो धीरे से लंड रति की चूत मे पिरो देता......है.....और डाल कर उस पर लेट जाता है....और उसके गाल चूस्ते हुए उस से बातें करना लगता है.......

रति: भैयाअ.....

बिरजू: हूँ.....

रति: अब इन दोनो के बारे मे क्या सोचा है.....

बिरजू:मैने तो अभी तक...हम दोनो के बारे मे भी नहीं सोचा....

रति: चलो हम सब के बारे मे सोचते है......अब आगे कैसे क्या करना....है...

बिरजू: पगली कल कुछ पता है...टेन्षन मत ले.... कुछ ना कुछ सोच लेंगें....

रति: आप तो हमेशा.......ऐसे ही आवारा मस्त रहते हैं...लेकिन मुझे हमारे भविष्य की चिंता है....

बिरजू: क्या आज दुनिया का आखरी दिन है....अभी सेक्स कर रहे है उस पर कॉन्सेंट्रेट कर....कल सुबह बात करेंगें ......क्या करना है....

रति: मुस्काते हुए..... कमर चलाने लगी.....और दोनो काम कीड़ा में मशगूल हो जाते हैं.......

सेक्स के पहले राउंड के बाद.... रति फिर सोच में पड़ गयी..... और मन ही मन सोचने लगी ...

क्या अलका रवि भी उन ही की तरह इन्सेस्ट सेक्स में जाएँगे... अगर गये तो उनका भविष्य क्या होगा ...?

हमारी (रति और बिरजू की) तो जैसे तैसे कट गयी..... अभी तो ये दोनो नयी दुनिया में कदम रखेगे..... कल दुनिया को क्या जबाब देगें....

बिरजू ने जब रति को इतनी गहरी सोच में देखा तो पूछा ...क्या सोच रही है पगली....

रति: भैया मेरा तो केवल वोही सवाल है ,,,अलका और रवि के बारे में सोच रही हूँ..और ये कह कर उसने करवट बदल ली.....

बिरजू रति की चौड़े-चौड़े चूतड़ो पर हाथ फेरते हुए..... लगता है तू बहुत चिंतित है दोनो के बारे में.....

रति: हां भैया ....

बिरजू: देख वॅलिंटाइन डे आने वाला है..... हम उन्हे कुछ प्राइवसी देते हैं दोनो को....देखते हैं कुछ होता है या नहीं......अभी तो हमें भी नहीं पता कि दोनो मैं कुछ है भी या नहीं....... अगर उनका प्यार सच्चा होगा तो फिर हम दोनो से बात करेगे....

रति : भैया ये वॅलिंटाइन डे क्या होता है.......

बिरजू: ये प्यार का दिन होता है... पगली पहले अंग्रेज लोग मनाते थे... कुछ सालों से इंडिया मे भी होने लगा है.....

रति: प्यार का भी कोई दिन होता है क्या......? इस तरह से तो हम रोज वॅलिंटाइन डे मानते हैं... तो क्या हमें 14थ फ़रवरी तक वेट करना पड़ेगा .....

बिरजू : हां..... पर ये शक़ तुझे कैसे हुआ कि दोनो के बीच मे कुछ चल रहा है.........

रति: पता नहीं आपने नोटीस किया या नहीं .....अलका की चुचिया और गान्ड नहीं देखी जब से रवि आया है....कितनी निखर आई है.... और आज कल वो अपने कपड़ों पर कितना ध्यान देने लगी है..... रवि भी उसे नये नये मॉडर्न कपड़े ला ला कर दे रहा है..... और बाइक पर रवि से कैसे चुचियाँ सटा के बैठ जाती है...जैसे भाई नही यार हो !

बिरजू: पगली चुचियाँ सटा के तो तू भी बैठती है मेरे साथ ....

रति: धात्त शरमाते हुए..... बैठती हूँ तो हमारे बीच में चल भी तो रहा है.....

बिरजू : हां वो तो है..... और रही बात उसकी चुचिओ और गान्ड की वो तो उसकी तेरे पर गयी है..... देख तेरी कितनी मस्तानी गान्ड है.....(रति की गान्ड पर हाथ फेरते हुए)..... जवान लौंडिया है यही तो उम्र है उसके नक्श निकलने के..... और हो सकता है उस में रवि भी हवा दे रहा हो ...इस में ग़लत क्या है..... पर ये बात तू सही कह रही है.... साली की गान्ड क्या मस्त है बिल्कुल वो जो नयी हेरोयिन आई है ना सोनाक्षी सिन्हा ...... बिल्कुल उसकी तरह गदराई और उभरी हुई गान्ड है हमारी अलका की ... आख़िर बेटी किस की है.... और ये कहते हुए उसने रति की गान्ड पर हाथ फेरा और प्यारा सा चुंबन उसके गाल पर रख दिया....

रति: हाई रे !............तुम अपनी भांजी को ऐसी नज़र से देखते हो..शरम नहीं है.....

बिरजू: वो मेरी बेटी भी है.......और इस में क्या ग़लत है..... उसकी गान्ड गदराई है तो ग़लत क्या है .... तुम भी तो बोल रही हो.....

रति : भैया सच मे बहुल बड़े लुच्चे हो ! बेहन बेटी किसी को मत छोड़ना....

बिरजू हँसने लगा और वो फिर एग्ज़ाइटेड हो गया उसके दिमाग़ मे अलका की गदराई गान्ड घूमने लगी.....

 
बिरजू ज़ोर से हंसते हुए.... ... रति की चौड़ी और उभरी हुई गान्ड से खेलने लगा......और उसकी चुचिओ को मसल्ने लगा......

रति : क्या भैया आप तो फिर से शुरू हो गये.....

बिरजू: तू साथ मे लेटी हो तो मैं हमेशा तैयार रहता हूँ..... और ज़ोर-ज़ोर से उसकी चुचिओ का मर्दन करने लगा और उसकी गान्ड की दरार में उंगली करने लगा.......

रत: चलिए वहाँ से हाथ हटाइए.....

बिरजू : रति मेरी प्यारी बेहन आज मुझे को गान्ड मारने का बहुत मन हो रहा है...शाम से तेरे को घाघरे मे देखा है दिमाग़ खराब हो गया है....और जब तू खेत मे मुतने बैठी थी....और गान्ड से घाघरा उठाया था...कसम से मेरा तो तभी मन कर रहा था कि वहीं.... तेरे को डाल कर गान्ड मर्दन कर दूं.....

रति: नहीं भैया ..गान्ड मरवाने में मेरे को बहुत दर्द होता है.... प्ल्स वहाँ मत डालना.... चाहो तो आगे से एक बार फिर कर्लो.... पर गान्ड को हाथ भी मत लगाना......

बिरजू ने पास पड़ी तेल की शीशी उठाई और अपने लौडे पर तेल मल लिया.....और ढेर सारा तेल.....रति की गान्ड में उंगली से डालने लगा.....

रति चिहुक गयी....और लगभग चिल्लाते हुए.... मना किया था ना.... और उठने की कोशिश करने लगी... पर बिरजू उसे अपनी टाँग के दबाव से नीचे डाले रहा.......

बिरजू लगभग गिडगिडते हुए रति से अनुरोध करने लगा.....प्ल्स मान जा मेरी प्यारी बहना....और आज मुझे करने दे.....

पर रति तैयार नहीं हो रही थी..क्यों कि उसे पता था...पिछली बार बिरजू ने जब उसकी गान्ड पिलाई की थी तो तीन दिनो तक उसकी गान्ड सूजी रही थी...और वो लंगड़ा लंगड़ा के चली थी.....

रति समझ गयी कि बिरजू आज उसकी गान्ड मारे बिना नहीं मानेगा ...और उसका गधे जैसा लंड उसके चुतड़ों की दरार में हड़कंप मचा रहा था...... उसने आखरी कोशिश की .... और बड़े प्यार से अनुरोध वाले स्वर मे बिरजू से बोली... मेरे प्यारे भैया आप चाहो तो दो बार मेरी आगे से ले लो...पर प्लीज़ गान्ड मत मारो बहुत दर्द होता है....

बिरजू : रति देख कितना तेल मल लिया है.... बड़े आराम से चला जाएगा.... तुझे ज़रा सा भी दर्द नहीं होगा.....

रति: आपने पिछली बार भी ऐसा ही कहा था ...पता है कितना दर्द हुआ था एक हफ्ते तक्क्क

बिरजू : मैं क्या अपनी प्यारी बेहन को तक़लीफ़ दूँगा.... मेरी रानी मान जा.....

रति नहीं मैं गान्ड महीन मरवाउन्गी.... चाहे कुछ भी हो जाए......

अब बिरजू को गुस्सा आ गया..... और उसने ऱौद्र रूप धारण कर लिया..... साली जब से रिक्वेस्ट पर रिक्वेस्ट कर रहा हूँ पर मानती नहीं....और उसने गुस्से में आज बोल दिया कि मारूँगा तो मारूँगा......और उसने रति को उल्टा लिटा दिया. और ज़बरदस्ती उसकी गान्ड पर चढ़ गया......

रति को बिरजू से ये उम्मीद नहीं थी..... बिरजू ने अपना लौडा रति की गान्ड के छेद पर टीकाया..... और एक झटका दिया.....तेल से सना लौडा गान्ड के छेद से हट गया और रति भी सहयोग नहीं कर रही थी..... पर बिरजू तो ज़िद्दी था शुरू का... इस बार उसने रति को अपने वजन से पूरा दबा लिया और लंड पूरा छेद पर टिकाया...... और गान्ड के छेद को खोलता हुआ ..... उसका आधा लंड रति की गान्ड को चीरता हुआा...... घुस गया...रति की एक चीईक्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्ख्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह निकली थी,,,,, माआआआआआआआआआआआआआआअरर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गाआआआआआआआआआआआयययययययययययययययययीीईईई.............................

बिरजू ने आगे हाथ बढ़ा कर..... रति की चुचियों को ज़ोर से मसला..... और उसका बायें गाल को चूस्ते और काट ते हुए................... रति की गान्ड मे दूसरा धक्का दिया...... और रति की चीख गूंजीईईईईईईई .................माआआआआआआआआआआआआआआआआआआअरर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गाआआयययययययययययययययययययीीईईईईई...............

बिरजू को लगा जैसे ये पूरा गाओं सर पर उठा लेगी...... उसने पीछे से अपने मुहँ से रति के मुहँ को दबा लिया....... और ज़बरदस्ती उसकी जीभ और होठों को चूसने लगा...........अब रति एक तरह से निढाल हो गयी..... गान्ड फॅट चुकी थी...पर इस बार तेल लगाने की वजह से दर्द पिछली बार से कम था......... पर गान्ड का छेद संकरा होता है इस लिए दर्द तो था ही......

बिरजू अब होले होले से अपना लंड रति की गान्ड में हिला रहा था..... ज़बरदस्ती ही सही पर रति को अब मज़ा आने लगा...बिरजू ने आज एक नया सुख का दरवाजा खोल दिया था...

रति आहाा अहाआ ...आआआआआआआआ कर रही थी वो दर्द और सुख का मिश्रण था......... बिरजू ने सोचा रति थोड़ा सेट्ल हो जाए.... इस लिए वो थोड़ा ठहर गया..... उसका लौडा रति की मस्तानी गान्ड में फ़सा हुआ था........ और वो उसके गुलाबी - गुलाबी गालों को चूस रहा था और चुचिओ का मर्दन कर रहा था.................

बिरजू ने रति के कान में कहा : अभी भी दर्द है"

रति लगभग रुआंसी होकर बोली , कोई ऐसे अपनी बेहन की गान्ड फाड़ता है ,

बिरजू ने कहा कॉन सा रोज- रोज करता हूँ आज मन हो गया एक दम से .और वो धीरे धीरे अपना लंड रति की गान्ड मे अंदर बाहर करने लगा थोड़ी देर बाद रति भी हल्के हल्के गान्ड हिला रही थी और आराम आराम से सिसकारी ले रही थी .

बिरजू अभी भी धीरे धीरे लंड अंदर बाहर कर रहा था तभी रति बोली , हाए मेरे चोदु सैयाँ जब गान्ड कुँवारी थी तो कैसे बेदर्दी से घुसा दिया और अब देखो कैसे शरीफो की तरह चोद रहा है , तेज़ धक्के मार ना भैया फाड़ दे ना इस गान्ड को ,

बिरजू सोचने लगा हाए अब तो यह रति अपनी गान्ड का गुड़गांवा बनवा के ही मानेगी.

बिरजू ने रति की कमर पकड़ी और अपना लंड अंदर बाहर करने लगा , बिरजू ने देखा कैसे रति के चूतड़ उसके हर धक्के पर थिरक रहे थे , इसे देखकर तो जैसे बिरजू पागल हो गया और अपना पूरा लौडा बाहर निकाल कर फिर अंदर डालते हुए ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा......ऱति अब मस्ती मैं चिल्लाने लगी....चोद ना चोद मुझे चोदरिया ..........आहह............मुंम्म्ममममिययययययययययययाआआआआआ...भैय्ाआआआआआआआआ.....मररर नाआआअ .......चूऊऊऊऊऊद्द्द्द्द्दद्ड नाआआआआअ....और वो ज़ोर ज़ोर से अपनी गान्ड बिरजू के लौडे पर हिलाने लगी करीब करीन 20 मिनट लगातार रति की गान्ड की खातिरदारी करने के बाद बिरजू का लौडा एकदम अकड़ने लगा और वो पागलो की तरह उसकी गान्ड मारने लगा ,

रति को तो जैसे होश नही था लेकिन रति थी हिम्मतवाली बिरजू के हर धक्के को मज़े और दर्द की सिसकारियाँ के साथ झेल रही थी.अचानक बिरजू के लंड से पिचकारियाँ रति की गान्ड मे गिरने लगी और बिरजू बुरी तरह झड़ने लगा, रति मस्ती से नहला से मेरी गान्ड अपने घोड़े जैसे लंड से , घोड़ी बनाकर चोद रहा है मेरा घोड़ा भैया मुझे हाई......इस घोड़ी की गान्ड तर कर दी तूने .........अब रति से संभलना मुश्किल हो गया य्चा शायद वो भी अपनी चूत झाड़ चुकी थी वो ऐसे ही बेड पर गिर गयी और बिरजू उसके उपर

बिरजू- थॅंक यू रति , , मेरी जान क्या मस्त गान्ड और चूत है तेरी कहकर उस पर गिर गया और ऐसे ही काफ़ी देर उस पर पड़ा रहा.

जब थोड़ी देर बाद दोनो उठे तो देखा बिस्तर रज वीर्य से सन चुका था बिरजू के लौडे पर मल लगा था , रति की आँखों में आँसू थे और चेहरे पर पूरी संतुष्टि और मुस्कुराहट , बिरजू ने रति को चूमा और उसे गोदी मैं उठा कर सोफे पर बिठाया और फिर बेड का गद्दा और शीट चेंज करने लगा.... रति अपने भैया को बड़े प्यार से निहारने लगी आख़िर लग भाग 20-25 साल की बोंडिंग थी दोनो में.....

बिरजू ने एक कपड़ा ले कर अपना लंड पोन्छा और रति को दिया.... रति ने भी अपनी गान्ड और चूत को उस से पोंछ लिया..... वो समझ गया रति बहुत थकि है और और उसकी गान्ड में बहुत दर्द है... उसने रति से पुछा बाथरूम जाएगी ...रति कुछ बोली नही और हां में अपना सर हिला दिया.... बिरजू ने धीरे से रति को अपनी गोद में उठा लिया और बाथरूम मे ले आया.... रति वहीं टाय्लेट में मूतने लगी....... उसकी चूत से धार निकली .... जो अक्सर चुदासी औरतों मे चुदने के बाद निकलती है............वहीं बिरजू ने भी पेशाब कर ली..... रति से खड़ा नहीं हुआ जा रहा था...बिरजू ने उसे सहारा दिया और पानी ले कर उसकी गान्ड और चूत को अच्छी तरह से धोया अपने लौडे को भी धोया और फिर तौलिए से पोंछ कर रति को फिर अपने गोद मे ले कर बिस्तर पर लिटा दिया... और बड़े प्यार से उसके चेहरे को चूमा.....

रति मन ही मन मुस्कुराती हुई बिरजू के सीने पर सिर रखकर मुस्कुराती हुई ही आँखे बंद करके उसके साथ नंगी ही सो गयी , थोड़ी देर बेहन की चूचिओ पर हाथ फिराते हुए बिरजू को भी कब नींद आ गयी उसे पता ही नही चला.

सुबह बिरजू देर तक सोता रहा और जब आँख खुली तो बेहन उसके पास नही थी बिरजू उठा बाहर हॉल में गया तो वहाँ रति दिखी वो थोड़ी लंगड़ा कर चल रही थी , उसकी नज़र बेहन के पैर पर गयी तो देखा उन्होने पंजे से टखने तक पट्टी बाँध रखी थी , बिरजू ने बेहन से पुछा क्या हुआ , तब रति ने कहा तुमने जो मेरी आयेज और पिछे से ठुकाई की है मेरी चाल बदलने का क्या बहाना लगाउन्गी इसीलिए यह पट्टी बाँध ली , बिरजू बेहन को गले से लगा लिया और पुछा कल कैसा लगा , रति ने शरमाते हुए मेरी छाती पर घूँसा मारा और कहा चल पागल सुबह सुबह ही शुरू हो गये तभी सीढ़ियों से किसी के आने की आवाज़ आई दोनो अलग हो गये अलका नीचे उतर रही थी ... उसने जब देखा कि माँ ने अपने पैर मे पट्टी बाँध रखी है तो उसने पुछा क्या हुआ माँ...

रति-अरे बेटा कुछ नहीं ज़रा बाथरूम में पैर मूड गया था..

अलका-अरे डॉक्टर को दिखाते हैं

-अरे कुछ नहीं ठीक हो जाएगा रति बोली....

 
सुबह रवि की नींद खुली... उसे अभी भी अलका का मारा हुआ चाँटा याद आ रहा था...

उसने रात आए हुए फोन पर बात की....उसका दिल सही में टूट चुका था...और लगा जैसे अलका की इस तरह बेरूख़ी से उसे लगा अब उसका यहाँ रहने का कोई मकसद ही नहीं बचा....

तभी नीचे से अलका की आवाज़ आई ... रवि मेरे को कॉलेज छोड़ कर आ जा.....

मैं नहीं आ पाउन्गा तुम चली जाओ....

ये सुन कर अलका गुस्से से तमतमाती हुई उपर रूम में आती है...और देखती है कि रवि अपना समान पॅक कर रहा है....

अलका: कहाँ जा रहा है ?

रवि: मैं जाय्न कने जा रहा हूँ...

अलका: पर तेरी छुट्टी तो अभी बाकी है...

रवि : हां लेकिन अब यहाँ रुकने का कोई मन नहीं है....

अलका: फालतू बात मत कर रवि ...चल नीचे चल माँ बुला रही है....

रवि-मुझे नहीं आना आप देख नहीं रही मैं अपना समान पॅक कर रहा हूँ...मुझे जाना है....

अलका की कुछ समझ मे नहीं आया.... और वो पैर पटकते हुए नीचे की तरफ आई और माँ से बोली कि रवि अपनी पॅकिंग कर रहा है जाने के लिए...

मा" क्यों....अभी तो उसकी छुट्टी बाकी है...

अलका: तुम ही पुंछ लो...

माँ: तुम दोनो का क्या कोई झगड़ा हुआ है...

अलका: मुझे क्या पड़ी उससे झगड़ने की...और वो पैर पटकते हुए... कॉलेज के लिए निकल गयी....

अलका को अपने किए पर पछतावा होता है और वह चलते चलते सोचती है उसने रवि के साथ कुछ ज़्यादा ही सख्ती दिखा दी,

उसे रवि को इतना बुरा भला नही कहना चाहिए था, आख़िर पूरी ग़लती रवि की तो नही थी उसके लिए वो भी काफ़ी हद

तक ज़िम्मेदार है, अलका अपने आप को कोस्ती हुई कॉलेज पहुँच जाती है,

कॉलेज ख़तम होने के बाद अलका गेट पर रवि का इंतजार करती है फिर रवि अपनी बाइक लेकर अलका के पास रोकता है,

अलका कहाँ थे आज तुम और मेरा फोन पिकप क्यों नही किया,

रवि- बैठो,

अलका . पहले मेरे सवाल का जवाब दो,

रवि -ज़रूरी नही कि मैं तुम्हारे हर सवाल का जवाब दूं,

अलका बाइक से चाबी निकाल कर अपनी ब्रा के अंदर डाल लेती है, और कल रात को ज़्यादा ज़ोर से थप्पड़ लग गया था क्या,

रवि उसको गुस्से से देखता हुआ, तुम्हारी जगह कोई और होता तो मैं उस थप्पड़ का जवाब देता,

अलका- तो ठीक है लो मैं अपना गाल आगे करती हूँ तुम भी मुझे मार लो,

रवि- दीदी बेकार की बातों से कुछ नही होना है चाबी दो और बाइक पर बैठो,

अलका- तुम खुद ही निकाल लो, रवि दीदी मैं बिल्कुल भी मज़ाक के मूड मे नही हूँ,

अलका- पर मुझे तो तुमसे खूब मज़ाक करने का मन कर रहा है, चलो बाइक से उतरो हम थोड़ी देर पार्क मे बैठ कर

बाते करेंगे,

रवि- मुझे आप से कोई बात नही करना,

अलका- पहले तुम मेरे साथ चलो बाद मे जितना गुस्सा करना है कर लेना और उसका हाथ पकड़ कर उसे बाइक से उतारने लगी,

 
रवि बाइक से उतर जाता है, अलका उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ पार्क की ओर ले जाने लगती है वह अपना हाथ अलका के हाथ से छुड़ाकर उसके साथ साथ चलने लगता है,

पार्क मे बेंच पर बैठते हुए, अलका रवि को देखती है उसका मूह फूला हुआ रहता है और वह अलका की और नही देखता

है,

अलका मुस्कुराते हुए, रवि जब तुम गुस्सा होते हो तो तुम्हारा चेहरा देख कर किसी छोटे बच्चे की याद आ जाती है,

रवि कोई जवाब नही देता है, अलका अपने कान पकड़ती हुई उसके मूह के सामने अपना मूह ले जाकर अच्छा बाबा अब मुझे

माफ़ भी कर दो आज के बाद मैं ऐसी ग़लती नही करूँगी,

रवि-नही दीदी तुम्हे माफी माँगने की ज़रूरत नही है, ग़लती मेरी ही है जो मैं पागलो की तरह तुम्हारे पीछे पड़ा रहता हूँ, जबकि मुझे समझना चाहिए कि मेरे जज्बातो से किसी को कोई फ़र्क नही पड़ता है,

अलका- अरे बाबा अब माफ़ भी कर दो, और अगर नही कर सकते तो जो सज़ा देना हो दे दो मुझे मंजूर है,

लेकिन अब थोड़ा मुस्कुरा दो, वैसे भी कल से तुमने मुझे एक बार भी आँख नही मारी है,

रवि अलका की बाते सुन कर थोड़ा सा मुस्कुरा देता है,

अलका- ये हुई ना बात, चलो अब बताओ कि मैने ज़्यादा ज़ोर से तुम्हे थप्पड़ मार दिया था क्या,

रवि- दीदी तुम थप्पड़ क्या मुझे जान से भी मार दो मुझे दर्द नही होगा, लेकिन तुमने जो कड़वी बाते मुझसे कही थी

वह मेरे दिल को चोट पहुचा गई,

अलका- रवि तू कितनी बड़ी बड़ी बाते करने लगा है, अब तू बड़ा हो गया है पर तेरी हरकते अभी भी बच्चो जैसी ही है,

रवि अलका को देखते हुए, दीदी एक बार और सोच कर बोलो क्या मैं तुम्हारे साथ बच्चो जैसी हरकत करता हूँ या बडो जैसी,

अलका उसकी बात सुन कर अपनी पॅल्को को नीचे झुका लेती है,

रवि- दीदी कभी तुम मुझसे अच्छे से पेश आती हो कभी मुझ पर नाराज़ हो जाती हो, ये सब क्या है, तुम खुद ही फ़ैसला

नही कर पा रही हो कि तुम्हे मेरे साथ किस तरह पेश आना चाहिए, तुम डिसिशन लेने मे बहुत कमजोर हो,

अलका- रवि ये बात नही है, मेरा दिल तो तुझे चाहता है लेकिन मेरा दिमाग़ मुझे इन सब चीज़ो की इजाज़त नही देता है,

रवि- और अगर तुम अपने दिमाग़ की बात मन कर मेरे करीब नही आती हो उसके बाद मैं खुद तुम्हे अपने करीब लाकर तुम्हे प्यार करता हूँ तो फिर तुम क्या करोगी, क्या फिर से मुझे मरोगी,

अलका अपना सर झुका लेती है और कुछ नही कहती है,

रवि- दीदी सच तो ये है कि तुम मुझसे दिलो जान से प्यार करने लगी हो, और ये बात तुम खुद भी जानती हो, तुम भी मेरी बाँहो मे आकर मुझे जी भर कर प्यार करना चाहती हो, यहाँ तक कि अब तुम मेरे बिना एक दिन नही रह सकती, दीदी मैं ठीक कह रहा हूँ ना,

अलका रवि को सीरीयस होते हुए देखती है, उसकी नज़रे एक टक बिना पलके झपकाए रवि को देखती है,

रवि- दीदी मैं ठीक कह रहा हूँ ना,

अलका- रवि अब हमे चलना चाहिए और उठने लगती है,

रवि उसका हाथ पकड़ कर अपने पास बैठते हुए, दीदी आज मुझे तुम्हारा फाइनल जवाब चाहिए,जब तक तुम जवाब नही दोगि हम यहाँ से नही जाएगे,

अलका -रवि मेरे पास तुम्हारी बातों का कोई जवाब नही है,

रवि- तो फिर मैं क्या मानु हाँ या ना,

अलका- रवि तुम्हे जो मानना है मान लो और अब चलो यहाँ से,

रवि- सोच लो तुमने कहा है कि जो मानना है मान लो, फिर बाद मे मुकरना नही,

अलका -क्या मतलब

रवि- यही कि मैं मान लेता हूँ कि तुम मुझसे प्यार करती हो, फिर बाद मे ये नही कहना कि मैं तुमसे प्यार नही करती,

अलका- मान ले मैने कह दिया कि मैं तुझसे प्यार करती हूँ फिर तू क्या करेगा,

रवि- दीदी फिर आज ही मैं तुम्हे पूरी नंगी करके तुम्हे चोदुन्गा,

अलका उसे गुस्से से देखती हुई, रवि मुझे तुम्हारी यही सब बाते अच्छी नही लगती, तुमको ज़रा सा मोका दो तो तुम अपनी हदे पार करने लगते हो,

रवि- अलका के बाल पीछे से पकड़ कर खींच कर उसके चेहरे को उपर उठाता है और दीदी तुम बहुत जिद्दी हो, लेकिन मैं भी तुम्हारा भाई हूँ और एक बात कान खोल कर सुन लो मैं तुम्हे चोदुन्गा मतलब चोदुन्गा चाहे उसके लिए मुझे दुनिया इधर की उधर करनी पड़े,

 
रवि- अलका के बाल पीछे से पकड़ कर खींच कर उसके चेहरे को उपर उठाता है और दीदी तुम बहुत जिद्दी हो, लेकिन मैं भी तुम्हारा भाई हूँ और एक बात कान खोल कर सुन लो मैं तुम्हे चोदुन्गा मतलब चोदुन्गा चाहे उसके लिए मुझे दुनिया इधर की उधर करनी पड़े,

अलका उसका हाथ छुड़ा कर झटकते हुए ठीक है तो ले चोद ले लेकिन उसके बाद क्या,मुझे रंडी बना कर बीच मजधार मे छोड़ देना फिर मेरा हाथ कौन थामेगा,

रवि- दीदी तुम मुझे ग़लत समझ रही हो,

अलका- मैं बिल्कुल ठीक समझ रही हूँ, ये सब तेरी वासना और हवस है और कुछ नही क्यो कि ये तू भी जानता है कि तू मेरा भाई है और तू मुझे सारी जिंदगी अपने साथ नही रख सकता है, अगर तू सारी जिंदगी मुझे अपने साथ रख सकता है तो मैं अपना जिस्म क्या अपनी सारी जिंदगी तेरे नाम लिखने को तैयार हूँ, पर वास्तविकता यह है, कि तू खुद जानता है कि ऐसा नही हो सकता, तो फिर किस आधार पर तू मुझसे प्यार करता है और मुझे पाना चाहता है,

रवि अब कुछ सीरीयस हो जाता है, और उसके पास अलका की बातों का कोई जवाब नही होता है,

अलका कुछ देर बैठने के बाद खड़ी हो जाती है और चल अब यहाँ से कह कर जाने लगती है,

रवि- दीदी और उठ कर अलका के पास जाता है, दीदी तुमने जो कहा वह बिल्कुल सच है और मेरे पास इस समय तुम्हारी बातों का कोई जवाब नही है लेकिन उससे भी बड़ा सच यह है कि मैं सिर्फ़ तुम्हारा जिस्म नही चाहता हूँ, मैं सचमुच तुमसे बेपनाह प्यार करता हू,

अलका- रवि मैं जानती हूँ कि तू मुझे सचमुच चाहता है, लेकिन हम अगर इस राह पर बढ़ते है तो हमारे प्यार का अंत अच्छा नही होगा, बस यही एक वजह है कि मैं तुझे अपना नही सकती,

रवि-ठीक है दीदी अब जिस दिन मेरे पास तुम्हारी बातों का जवाब होगा उसी दिन मैं तुम्हे आइ लव यू कहूँगा और कल ही मैं तुम्हारी बात का जवाब दे दूँगा चाहे उसके लिए मुझे रात भर जाग कर सोचना पड़े,

अलका- ठीक है सोच ले शायद कोई सही रास्ता निकल आए,

रवि- दीदी हर मुश्किल का रास्ता ज़रूर होता है, और इस मुस्किल का भी रास्ता ज़रूर होगा,

अलका- अब चले

रवि- दीदी एक मिनिट अगर मैं तुम्हे जीवन भर अपने साथ रखने का यकीन दिल दूँगा तो फिर क्या तुम अपने भाई के साथ पूरी नंगी होकर चुदवाओगी,

अलका मुस्कुराते हुए, अब चले,

रवि- अपनी दीदी की दोनो बाँहे पकड़ कर पहले जवाब दो, और उसकी आँखो मे देखने लगता है,

अलका- थोड़ा सा मुस्कुरा कर हाँ,

उसके मूह से हाँ सुनते ही रवि उसे अपनी बाहों मे भर लेता है और उसे पागलो की तरह ताबड तोड़ तरीके से चूमने लगता है कभी उसके गालो को कभी उसके होंठो को कभी उसकी गर्दन को,

अलका उसके इस तरह से चूमने से गरम हो जाती है और पहली बार वह दिल खोल कर उसके बदन से चिपक जाती है, दोनो 5 मिनिट तक एक दूसरे को चूमते रहते है फिर रवि उसको देखता है तो वह शर्मा कर अपनी नज़रे नीचे कर लेती है, रवि अलका के दूध को दबा देता है और अलका उसको हाथ उठाकर मारूँगी कहते हुए उसके सीने से लग जाती है और फिर दोनो बाइक की ओर जाकर उस पर सवार होकर अपने घर की ओर चलते हैं लेकिन तभी रवि को शरारत सूझती है वो बाइक घुमा कर यू टर्न लेता है....

अलका चीख कर पूछती है कहाँ जा रहा..है

रवि-दीदी सहर की तरफ ....आज तुम्हे शॉपिंग करवाता हूँ....कुछ दिनो में चला जाउन्गा.... चलो ..शॉपिंग चलते है...

अलका-पर घर पर माँ इंतेजार करेगी.....

रवि-यार चल ना माँ के लिए मामा हैं...

दोनो हंसते हुए ..सहर की तरफ उड़ निकलते हैं....

शॉपिंग माल के अंदर एक लॅडीस काउंटर पर अलका खड़ी हो जाती है,

रवि उसके पास जाकर दीदी क्या ले रही हो, अलका के हाथ मे पेंटी थी, रवि उसके हाथ से पेंटी ले कर उसे फैलाते हुए देख कर दीदी यह तो बहुत छोटी है तुम्हारे साइज़ के हिसाब से तो छोटी पड़ेगी,

 
अलका उसके हाथ से पेंटी छुड़ाते हुए उसे अपनी आँखे निकाल कर देखती हुई, यह मेरे लिए नही मम्मी के लिए है,

रवि- दीदी मम्मी भी पेंटी पहनती है क्या,

अलका उसे देखती हुई क्यो मम्मी क्या औरत नही है,

रवि- नही वो बात नही है, मैने तो सुना था कि औरते जब 40 पार हो जाती है तो पेंटी पहनना छोड़ देती है,

अलका- यह तूने कहा से सुना,

रवि- कई बुक्स मे पढ़ा है,

अलका- गंदी किताबें पढ़ पढ़ के ही तो तेरा दिमाग़ खराब हो गया है,

रवि- पर दीदी यह पेंटी जब तुंमहरे उपर ही छोटी होगी तो भला मम्मी के उपर कैसे फिट होगी,

अलका गुस्सा दिखाते हुए जब मम्मी पहनेगी तो तू जाकर खुद ही देख लेना,

रवि- दीदी तुम तो दिखाती नही मम्मी क्या खाक दिखाएगी,

अलका- रवि को घूरते हुए तो क्या तू मम्मी को भी पेंटी मे देखना चाहता है,

रवि- अरे मैं तो मज़ाक कर रहा हू,

अलका सभी समान का बॅग रवि को थमाते हुए अब चलो यहाँ से,

रवि: दीदी आज आप इस ड्रेस मे बहुत सेक्शकशकष्यययययययी लग रही हो....

अलका:कितना कमीना हो गया है तू ....सब के सामने ऐसे कोई बोलता है......

पर रवि नहीं रुकता....और ये आपकी लिपीसटिक..... तू लगाएला जब लिपीसटिक हेलेरा रडिस्ट्रिक्ट .$$$$$$... लूली पोप लगे ला ....कमरिया लचके ..... वो एक भोजपुरी गाना गाने लगता है...... उसको गाते देख आस पास के लोग उन दोनो को देखने लगते हैं....

अलका थोड़ा एमब्रेस्स्ड फील करने लगती है..... फुसफुसाते हुए... रवि चलो यहाँ से तमाशा मत करो....

रवि: धीरे से एक किस दे दो....

अलका; नहीं अब चल यहाँ से...

रवि: दीदी अभी आप के लिए एक चीज़ और लेनी है...

अलका: क्या ?

उसका हाथ पकड़ते हुए चलो ना.....और वो एक ज्वेल्लेरी शॉप में घुस जाता है.....

अलका: धीरे से यहाँ क्यों लाया है....

रवि अलका के गाल को खींचता हुआ.... मेली प्याली प्याली गुड़िया दीदी के लिए एक बर्तडे & वॅलिंटाइन गिफ्ट देने को....

अलका: ख़ुसी से ... तुझे मेरा बर्तडे याद था....

रवि: दीदी मैं आपका बर्तडे कैसे भूल सकता हूँ.....

अलका: प्ल्स यहाँ बिहेव ठीक से कर सब हमें ही देख रहे हैं....

रवि: हमें नहीं तुम्हे.... तुम माल ही इतना जबरदस्त हो....

रवि एक सेल्स गाल के पास जाता है..... और बोलता है... मेडम के लिए एक नथ दिखाओ....

नथ...? अलका सोच मे पड़ गयी... ये रवि को क्या हो गया...? लेकिन उसने सोचा अगर वो कुछ पूछेंगीं तो फिर वो

यहीं कहीं फिर शुरू ना हो जाए.......वैसे नथ लेने का उसका भी मन था बहुत दिनो से......

सेल्स गर्ल: मेडम कैसी नथ पसंद करेगिं आप... और किस बजेट में....

रवि: बजेट की आप चिंता मत करो बस मेडम को पसंद आनी चाहिए.... और प्ल्स आप प्राइज़ मत बताना .....

सेल्स गर्ल मुस्कुराते हुए... ठीक है सर....

जैसा अमूमन होता है .... लड़कियाँ ज्वेल्लेरी देख कर पागल हो जाती है वैसा ही अलका के साथ हुआ....

उसने ढेर सारी नथ मे से पाँच नाथ सेलेक्ट की.... और उसकी समझ में नहीं आ रहा था.... कॉन सी ले...

 
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