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यानी कि किसी और तरीके से, किसी संयोग से उसे मौत की खबर लग गई थी और उसने यह सोचकर चौधरी को उसकी कोठी पर भेजा था कि कहीं उसकी लैजर बुक पुलिस के हाथ न लग जाए । अब यह कहना मुहाल था कि उसको वह खबर इत्तफाक से लग गई थी या उसमें उसके अंडरवर्ल्ड बॉस होने का कोई चमत्कार था। = एक ए एस आई और दो पुलिसियों के साथ कमला स्टडी में दाखिल हुई ।
ए एस आई ने वहां कदम रखते ही चौधरी को पहचान लिया। "ओहो !" - वह बोला - "यह तो अपना पुराना यार चौधरी फंसा बैठा है !"
चौधरी तब भी खामोश रहा।
"क्या हुआ था ?" - ए एस आई ने मुझसे पूछा । मैंने बताया ।
"इसका थोबड़ा क्या रेल के इंजन से टकराया था ?"
मैं सिर्फ हंसा ।।
उन्होंने चौधरी के बंधन खोले और उसे हथकड़ियां पहना दीं। मैंने चौधरी की रिवॉल्वर उन्हें सौंप दी । उसे अपने आगे लगभग धकेलते हुए वे वहां से विदा हो गए । पीछे फिर मैं और कमला रह गए। मैंने जोर से जम्हाई ली और अपनी कलाई घड़ी पर निगाह डाली। चार बज चुके थे। लोगों के जागने का वक्त हो रहा था और मैं अभी तक सो नहीं पाया था। "मैं चलता हूं।"
"कहां चलते हो ?" - वह मादक स्वर में बोली।
घर ।"
"इस वक्त क्या जंगल में खड़े हो ?"
"मेरा मतलब है, अपने घर । बहुत थक गया हूं। जाकर सोऊंगा।"
वह मेरे करीब आई । उसकी गरम सांसें फिर मेरे चेहरे को झुलसाने लगीं। "कितना थक गए हो ? बहुत ज्यादा ?"
"नहीं । बहुत ज्यादा तो मैं कभी नहीं थकता।” मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया । वह लता की तरह मुझसे लिपट गई । मेरी सांसें फिर भारी होने लगीं। तौबा ! औरत थी या आग का गोला था ।
"अभी तुम क्या कह रहे थे ?" - वह मेरे कान की लौ को दांतों से चुभलाती हुई बोली।
"कुछ नहीं ।" - मैं बोला।
"कुछ तो कह रहे थे ?"
"नहीं ।”
"तुम कह रहे थे कि तुम थक गए हो ?"
"अच्छा ! मैंने कहा था ऐसा ?"
"हां ।"
"कौन कमबख्त थक गया है !"
"सुनो ।”
"हां ।"
"मत जाओ । यहीं रह जाओ।"
"नहीं । सुबह नौकर-चाकरों पर मेरी मौजूदगी का बुरा असर पड़ेगा। आखिर अभी ताजी-ताजी विधवा हुई हो।" मेरे उस एक फिकरे ने उसके भीतर जैसे कोई फ्यूज उड़ा दिया । पलक झपकते ही वह आग का गोला मेरी बांहों में बर्फ की सिल बन गया। वह मुझसे अलग हुई।
"राज !" - वह तिरस्कारपूर्ण स्वर में बोली ।
"एट यूअर सर्विस मैडम !" ।
"यू आर ए सन ऑफ बिच ।”
"नॉट "ए" सन ऑफ बिच । दि ओरिजिनल सन ऑफ बिच । इस जगत प्रसिद्ध बिच ने जितने सन पैदा किए थे, सब मेरे बाद किए थे।
" वह कुछ क्षण मुझे घूरती रही और फिर एकाएक मुस्कराई। फिर पहले जैसी दहकती-झुलसती मुस्कराहट ।
ए एस आई ने वहां कदम रखते ही चौधरी को पहचान लिया। "ओहो !" - वह बोला - "यह तो अपना पुराना यार चौधरी फंसा बैठा है !"
चौधरी तब भी खामोश रहा।
"क्या हुआ था ?" - ए एस आई ने मुझसे पूछा । मैंने बताया ।
"इसका थोबड़ा क्या रेल के इंजन से टकराया था ?"
मैं सिर्फ हंसा ।।
उन्होंने चौधरी के बंधन खोले और उसे हथकड़ियां पहना दीं। मैंने चौधरी की रिवॉल्वर उन्हें सौंप दी । उसे अपने आगे लगभग धकेलते हुए वे वहां से विदा हो गए । पीछे फिर मैं और कमला रह गए। मैंने जोर से जम्हाई ली और अपनी कलाई घड़ी पर निगाह डाली। चार बज चुके थे। लोगों के जागने का वक्त हो रहा था और मैं अभी तक सो नहीं पाया था। "मैं चलता हूं।"
"कहां चलते हो ?" - वह मादक स्वर में बोली।
घर ।"
"इस वक्त क्या जंगल में खड़े हो ?"
"मेरा मतलब है, अपने घर । बहुत थक गया हूं। जाकर सोऊंगा।"
वह मेरे करीब आई । उसकी गरम सांसें फिर मेरे चेहरे को झुलसाने लगीं। "कितना थक गए हो ? बहुत ज्यादा ?"
"नहीं । बहुत ज्यादा तो मैं कभी नहीं थकता।” मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया । वह लता की तरह मुझसे लिपट गई । मेरी सांसें फिर भारी होने लगीं। तौबा ! औरत थी या आग का गोला था ।
"अभी तुम क्या कह रहे थे ?" - वह मेरे कान की लौ को दांतों से चुभलाती हुई बोली।
"कुछ नहीं ।" - मैं बोला।
"कुछ तो कह रहे थे ?"
"नहीं ।”
"तुम कह रहे थे कि तुम थक गए हो ?"
"अच्छा ! मैंने कहा था ऐसा ?"
"हां ।"
"कौन कमबख्त थक गया है !"
"सुनो ।”
"हां ।"
"मत जाओ । यहीं रह जाओ।"
"नहीं । सुबह नौकर-चाकरों पर मेरी मौजूदगी का बुरा असर पड़ेगा। आखिर अभी ताजी-ताजी विधवा हुई हो।" मेरे उस एक फिकरे ने उसके भीतर जैसे कोई फ्यूज उड़ा दिया । पलक झपकते ही वह आग का गोला मेरी बांहों में बर्फ की सिल बन गया। वह मुझसे अलग हुई।
"राज !" - वह तिरस्कारपूर्ण स्वर में बोली ।
"एट यूअर सर्विस मैडम !" ।
"यू आर ए सन ऑफ बिच ।”
"नॉट "ए" सन ऑफ बिच । दि ओरिजिनल सन ऑफ बिच । इस जगत प्रसिद्ध बिच ने जितने सन पैदा किए थे, सब मेरे बाद किए थे।
" वह कुछ क्षण मुझे घूरती रही और फिर एकाएक मुस्कराई। फिर पहले जैसी दहकती-झुलसती मुस्कराहट ।