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Guest
"आई सी । ठीक है, तुम जा सकते हो ।” वह चेहरे पर हैरानी और अविश्वास के भाव लिए वहां से विदा हो गया।
"आप जूही चावला को जानती हैं" - मैंने कमला से पूछा।
"जानती हूं। यहां की पार्टियों में वह अक्सर आया करती है और हमेशा मेरे साथ बड़े अदब से पेश आती है। लेकिन यह मुझे कभी नहीं सूझा था कि मेरे हसबैंड की उसके साथ आशनाई हो सकती थी।"
"ऐसा कोई संकेत तो अभी भी हासिल नहीं ।"
"कैसे हासिल नहीं ? अपना ऑफिस छोड़कर उसके घर पर चावला साहब और किसलिए जाते ? जरूर उस कुतिया की वजह से ही वे मुझसे तलाक चाहते थे । मुझे इस बात का अन्देशा तो था कि मेरे मर्द की किसी गैर औरत से आशनाई थी लेकिन वह औरत जूही चावला थी, यह मुझे कभी नहीं सूझा था । हरामजादी मुझे आंटी कहा करती थी जबकि वो मुश्किल से दो या तीन साल छोटी होगी मुझसे ।"
"तलाक तो आप भी चाहती थीं अपने पति से ?"
"कोई भी गैरतमंद औरत अपने बेवफा पति से तलाक चाह सकती है। लेकिन मेरे तलाक चाहने में और मेरे पति के तलाक चाहने में फर्क है ?"
"क्या फर्क है ?"
"मेरा पति फोकट में मुझसे पीछा छुड़ाना चाहता था ।"
"जबकि आप जायदाद में हिस्से की और हर्जे-खर्चे की ख्वाहिशमंद थीं ?"
"हां ।"
"आप चाहती थीं कि इससे पहले आपका पति किसी बहाने आपको दूध में से मक्खी की तरह निकाल बाहर करें,
आप उसकी किसी गैर औरत से आशनाई साबित कर सकें और उस बिना पर हर्जे-खचे के साथ उससे तलाक हासिल कर सकें । इसीलिये आपको एक प्राइवेट डिटेक्टिव की सेवाओं की जरूरत थी ?"
"हां ।"
" "मेरा नाम कैसे सूझा आपको ?"
"किसी ने सुझाया था।"
"किसने ?"
"बलराज सोनी ने ।"
"आई सी ।" - मैं गंभीरता से बोला ।
“ड्रिंक और हो जाए ।" - मेरा खाली गिलास देखकर वह बोली ।
"हो जाये !" - मैं बोला - क्या हर्ज है !"
मेरा और अपना गिलास लेकर वह बार पर गई । हैनेसी के नये जाम तैयार करके वह वापिस लौटी। हम दोनों एक सोफे पर अगल-बगल बैठ गए । बड़े अफसोस की बात थी कि हम दोनों के बीच एक निहायत इज्जतदार फासला था
"आप जूही चावला को जानती हैं" - मैंने कमला से पूछा।
"जानती हूं। यहां की पार्टियों में वह अक्सर आया करती है और हमेशा मेरे साथ बड़े अदब से पेश आती है। लेकिन यह मुझे कभी नहीं सूझा था कि मेरे हसबैंड की उसके साथ आशनाई हो सकती थी।"
"ऐसा कोई संकेत तो अभी भी हासिल नहीं ।"
"कैसे हासिल नहीं ? अपना ऑफिस छोड़कर उसके घर पर चावला साहब और किसलिए जाते ? जरूर उस कुतिया की वजह से ही वे मुझसे तलाक चाहते थे । मुझे इस बात का अन्देशा तो था कि मेरे मर्द की किसी गैर औरत से आशनाई थी लेकिन वह औरत जूही चावला थी, यह मुझे कभी नहीं सूझा था । हरामजादी मुझे आंटी कहा करती थी जबकि वो मुश्किल से दो या तीन साल छोटी होगी मुझसे ।"
"तलाक तो आप भी चाहती थीं अपने पति से ?"
"कोई भी गैरतमंद औरत अपने बेवफा पति से तलाक चाह सकती है। लेकिन मेरे तलाक चाहने में और मेरे पति के तलाक चाहने में फर्क है ?"
"क्या फर्क है ?"
"मेरा पति फोकट में मुझसे पीछा छुड़ाना चाहता था ।"
"जबकि आप जायदाद में हिस्से की और हर्जे-खर्चे की ख्वाहिशमंद थीं ?"
"हां ।"
"आप चाहती थीं कि इससे पहले आपका पति किसी बहाने आपको दूध में से मक्खी की तरह निकाल बाहर करें,
आप उसकी किसी गैर औरत से आशनाई साबित कर सकें और उस बिना पर हर्जे-खचे के साथ उससे तलाक हासिल कर सकें । इसीलिये आपको एक प्राइवेट डिटेक्टिव की सेवाओं की जरूरत थी ?"
"हां ।"
" "मेरा नाम कैसे सूझा आपको ?"
"किसी ने सुझाया था।"
"किसने ?"
"बलराज सोनी ने ।"
"आई सी ।" - मैं गंभीरता से बोला ।
“ड्रिंक और हो जाए ।" - मेरा खाली गिलास देखकर वह बोली ।
"हो जाये !" - मैं बोला - क्या हर्ज है !"
मेरा और अपना गिलास लेकर वह बार पर गई । हैनेसी के नये जाम तैयार करके वह वापिस लौटी। हम दोनों एक सोफे पर अगल-बगल बैठ गए । बड़े अफसोस की बात थी कि हम दोनों के बीच एक निहायत इज्जतदार फासला था