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मेले के रंग सास, बहु, और ननद के संग complete

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गुलाबी बिस्तर पर बैठी हुई थी. उसका घाघरा उसकी कमर तक चढ़ा हुआ था और वह एक हाथ से अपनी चूत मे उंगली पेल रही थी. दूसरे हाथ से उसने तुम्हारे भैया का लंबा, मोटा लन्ड जड़ के पास पकड़ा हुआ था और अपना सर ऊपर-नीचे करके लन्ड को चूस रही थी. ऊपर से वह पूरी तरह नंगी थी और तुम्हारे भैया उसकी लटकती चूचियों को मसल रही थे. गुलाबी को काफ़ी मज़ा आ रहा था. वह "आह!! ऊंह!! ऊम्म!!" की सित्कारियाँ ले रही थी.

तुम्हारे भैया ने सिर्फ़ एक बनियान पहनी हुई थी जिसे उन्होने सीने पर चढ़ा दिया और कहा, "गुलाबी, इधर आ और मेरे निप्पलों को चूस दे."

गुलाबी उनके भूरे निप्पलों को मुंह मे लेकर बारी-बारी चूसने लगी.

कुछ देर बाद, तुम्हारे भैया ने गुलाबी को खींचकर अपने ऊपर लिटा लिया. अपने होंठ गुलाबी के नरम फुले फुले होठों पर रखकर उन्हे मज़े लेकर पीने लगे. गुलाबी भी जोश मे उनके होंठ पीने लगी.

तुम्हारे भैया ने गुलाबी की टांगों को अपने दोनो तरफ़ रखा, उसके घाघरे को कमर तक चढ़ा दिया जिससे उसके सुडौल चूतड़ नंगे हो गये. फिर उसके कमर को पकड़कर उसकी चूत को अपने खड़े लन्ड पर सेट किया और अपने मोटे सुपाड़े को गुलाबी की चूत के फांक मे ऊपर-नीचे करके रगड़ने लगे. उनके हाथ गुलाबी की नंगी चूचियों को मसल जा रहे थे.

गुलाबी मस्ती मे जोर से "आह!! उम्म!! ऊह!!" की आवाज़ें करने लगी.

रामु दरवाज़े की दरार मे आंखें गाड़े पड़ा था. मैने उसके पैंट के ऊपर से उसका लन्ड दबाया तो पाया कि लन्ड तो बहुत कड़ा हो गया है. मैने उसकी पैंट खोल दी, चड्डी उतार दी और उसका लन्ड लेकर हिलाने लगी.

रामु ने दरवाज़े की छेद से आंख हटायी तो मैने कहा, "कैसा लग रहा है गुलाबी को देखना?"

रामु ने शरमाकर कहा, "अच्छा ही लग रहा है, भाभी."

"मैने कहा था ना, जब बीवी किसी और मर्द से चुदती है तो पति को देखने मे बहुत मज़ा आता है?" मैने उसका लन्ड हिलाते हुए जवाब दिया.

सासुमाँ ने पीछे से मेरी ब्रा की हुक खोल दी और मेरी ब्रा अलग कर दी. वह बोली, "रामु, मन करे तो तु बहु की चूचियां पी सकता है."

रामु ने तुरंत मेरी नंगी चूचियों पर मुंह लगा दिया और बहुत जोश मे उन्हे चूसने लगा.

"हाय रामु, इतने गरम हो गये हो अपनी जोरु की चुदाई देखकर?" मैने कहा, "ज़रा मुझे अन्दर तो देखने दो!"

रामु और मैं दो अलग छेदों से अन्दर देखने लगे.

सासुमाँ रामु के पैरों के बीच बैठ गयी और उसका काला, मोटा लन्ड मुंह मे लेके चूसने लगी. रामु धीरे धीरे उनका मुंह चोदते हुए अन्दर का नज़ारा देखने लगा.

तुम्हारे भैया ने कुछ देर गुलाबी की चूत पर अपना सुपाड़ा रगढ़ा. फिर उसकी चूत के छेद पर सुपाड़े को सेट करके ऊपर की तरफ़ धक्का दिया.

गुलाबी बहुत ही गरम हो चुकी थी और उसकी चूत से बहुत पानी बह रहा था. लन्ड का सुपाड़ा आराम से उसकी चूत मे घुस गया. पर तुरंत ही उसने अपनी कमर उठायी और सुपाड़े को चूत से निकाल दिया.

"ई का कर रहे हैं, बड़े भैया!" वह बोली और मेरे पति के ऊपर से उतर गयी और नीचे ज़मीन पर खड़ी हो गई.

तुम्हारे भैया हैरानी और गुस्से मे चिल्ला उठे. "क्या कर रहा हूँ मैं? साली, इतनी देर से तुझे क्या लग रहा है क्या कर रहा हूँ मै? तुझे चोदने के लिये गरम कर रहा हूँ, और क्या!"

"पर हम ऊ सब नही करना चाहते, बड़े भैया." गुलाबी बोली और जल्दी से अपनी चोली पहनने लगी.

"चूतमरानी, तो फिर तु इतने देर से कर क्या रही थी?" तुम्हारे भैया भड़क कर बोले.

"बड़े भैया, आप गुस्सा मत हों!" गुलाबी गिड़गिड़ाकर बोली, "हम तो हमरे मरद को जलाने के लिये ई सब कर रहे थे. भाभी बोली हमको ई सब करने को."

"मीना ने तुझे कहा कि मेरा इस्तेमाल कर रामु को जलाने के लिये?" मेरे पति देव आश्चर्य से बिफर पड़े, "कैसी कैसी योजनायें बनाती रहती है यह पागल औरत! अगर मैं उससे प्यार नही करता तो उसका गला दबा देता!"

मैने अपने माथे पर अपना हाथ दे मारा.

सासुमाँ ने पूछा, "क्या हुआ, बहु?"

"माँ, कैसी मूर्ख लड़की है यह!" मैने कहा, "चूत मे लन्ड घुसने को है, अब कहती है उसे नही चुदवाना!"

सासुमाँ हंसी और रामु के लन्ड को फिर चूसने लगी.

उधर गुलाबी ने चोली पहन ली और दरवाज़े की तरफ़ जाने लगी.

मैने रामु को कहा, "क्यों रामु, तुम्हारी पतिव्रता जोरु तो बिना चुदे ही निकल आ रही है!"

"जब उसने चूची चुसवा ली, चूत मे लन्ड भी घिसवा ली, अब बचा ही क्या है?" रामु ने जवाब दिया, "अब चुदे न चुदे कोई फरक नही पड़ता है."

"तो तुम गुलाबी को चुदते देखना चाहते हो?" मैने पूछा.

"हाँ, भाभी. बहुत मज़ा आ रहा था." रामु बोला, "साली को अब बड़े भैया पटक के चोदे तो और मज़ा आये. बहुत छिनाली कर रही थी."

और हुआ भी यही.

तुम्हारे भैया गुस्से मे पलंग से उतरे और गुलाबी को पकड़कर बोले, "कहाँ जा रही है मेरा लौड़ा खड़ा करके, साली! तु आज यहाँ से चुदे बिना नही जायेगी! बहुत देख लिया तेरा रोज़ का तमाशा!"

बोलकर उन्होने गुलाबी की चोली जबरदस्ती खींचकर उतार दी.

"बड़े भैया, हमे छोड़ दीजिये!" गुलाबी लगभग रोकर बोली, "हमरी इज्जत मत लूटिये."

"तेरी इज़्ज़त है ही क्या?" मेरे वह बोले, "तु हमारे घर के नौकर की जोरु है. तुझे तो घर के सब मर्द जब चाहे तब चोद सकते हैं!"

उन्होने गुलाबी को पकड़कर पलंग पर पटक दिया और उसके घाघरे को कमर तक उठा दिया.

गुलाबी ने अपनी टांगें सिकोड़ ली तो उन्होने उसके घुटनों को पकड़ा और जोर लगाकर दोनो जांघों को अलग कर दिया. फिर उसके पैरों के बीच बैठ गये और उसके पैरों को पकड़ कर अपने कंधों पर रख लिया.

बेचारी गुलाबी ऊपर से नंगी, कमर पर सिर्फ़ अपना घाघरा लिये चूत खोलकर बिस्तर पर पड़ी थी.

वह गिड़गिड़ाकर बोली, "हमे बर्बाद मत कीजिये, बड़े भैया! हमसे बहुत बड़ी गलती हो गयी है. हमे माफ़ कर दीजिये!"

"छिनाल कहीं की, अपने मरद को जलाने के लिये मेरे साथ खिलवाड़ कर रही थी?" मेरे वह बोले.

उन्होने अपने मोटे लन्ड का सुपाड़ा गुलाबी की चूत पर सेट किया और कमर से एक करारा धक्का देते हुए कहा, "अब जब तेरी चूत फटेगी तु समझेगी मेरे साथ खिलवाड़ करने का क्या अंजाम होता है!"

गुलाबी की चूत बहुत ही गीली थी. ऊपर से वह रामु से लगभग रोज़ ही चुदवाती थी. फिर भी, जब तुम्हारे भैया का मोटा 8 इंच का लौड़ा एक धक्के मे पेलड़ तक उसकी चूत मे उतर गया तो वह दर्द से बिलबिला उठी, "हाय!! मर गये हम!! बड़े भैया, अपना औजार बाहर निकालिये! हम मर जायेंगे!!" उसके सुन्दर आंखों मे आंसू आ गये.

तुम्हारे भैया उसकी चूत मे अपना लौड़ा जड़ तक ठांसे पड़े रहे और गुलाबी उनके नीचे तड़पती रही. गुलाबी अपनी कमर घुमा घुमाकर लन्ड को बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी, पर 8 इंच के उस लौड़े ने जैसे एक खूंटे की तरह उसके छोटे से शरीर को पलंग मे ठोक रखा था.

देखकर रामु इधर काफ़ी उत्तेजित हो रहा था. मैने कहा, "देखो रामु, मेरे पति तुम्हारी प्यारी जोरु का कैसे बलात्कार कर रहे हैं."

रामु कुछ बोला नही. सासुमाँ के मुंह मे अपना लन्ड पेलता रहा और अन्दर का नज़ारा देखता रहा.

 
कुछ देर बाद गुलाबी का दर्द कम हो गया. अब तुम्हारे भैया ने उसकी टांगें पकड़कर अपना लन्ड सुपाड़े तक उसकी चूत से निकाला और फिर एक जोरदार धक्के से जड़ तक पेल दिया.

गुलाबी जोर से "उई!!" करके चिहुक उठी.

तुम्हारे भैया ने 10-12 बार ऐसे किया जिससे गुलाबी की चूत और ढीली हो गयी और उसे दर्द होना बंद हो गया.

गुलाबी की टांगें अब भी मेरे पति के कंधों पर थी. उसकी टांगों को पकड़कर वह अब धीरे धीरे ठाप लगाने लगे. उनका लन्ड गुलाबी की चूत के अन्दर बाहर होने लगा.

"हाय क्या चूत है तेरी, गुलाबी!" तुम्हारे भैया उसे चोदते हुए बोले, "ऐसी मस्त चूत तुने सिर्फ़ रामु के लिये रख छोड़ी है? तुझे तो अपनी चूत गाँव के सब मर्दों को चखानी चाहिये."

गुलाबी अपनी भीगी आंखें बंद किये पड़ी रही.

कुछ देर चोदने के बाद तुम्हारे भैया ने उसकी टांगें कंधे से उतार दी और उस पर झुककर उसके फुले फुले चूचियों को चूसने लगे. फिर उसके होठों पर झुककर उसके नर्म होठों को पीने लगे. उनके हाथ गुलाबी की चूचियों को मसल रहे थे और उनकी कमर धक्का दे दे कर गुलाबी की चूत मे लन्ड पेल रही थी.

"क्या हुआ, गुलाबी?" उन्होने प्यार से पूछा, "तुझे मज़ा नही आ रहा?"

"नही, बड़े भैया." गुलाबी ने धीरे से कहा.

"अरे हम इतना प्यार कर रहे हैं तुझे, फिर भी मज़ा नही आ रहा?" उन्होने ठाप लगाते हुए कहा.

"आप हमसे पियार करते हैं तो इतने जोर से काहे लन्ड डाले?" गुलाबी ने अपनी आंखों से आंसू पोछकर कहा, "कितना दर्द हुआ हमको!"

"वह तो शुरु शुरु मे होता है, पगली! तु इतना बड़ा लन्ड पहले नही ली है ना!" मेरे वह बोले. "अभी देख थोड़ी देर मे तुझे बहुत मज़ा आने लगेगा."

कुछ देर की चुदाई के बाद गुलाबी भी कसमसाने लगी. उसके हाथ मेरे उनके पीठ पर फिरने लगे और वह हर ठाप के साथ "ऊंह!! ऊंह!! ऊंह!!" की आवाज़ निकालने लगी.

"अब मज़ा आ रहा है ना, गुलाबी?" तुम्हारे भैया अपनी कमर चलाते हुए बोले.

"हूं!" गुलाबी ने जवाब दिया. वह अब मज़े से उनके होठों को पी रही थी. सुनकर मेरे उन्होने अपने चुदाई की रफ़तार बड़ा दी.

गुलाबी अब जोर जोर से कराहने लगी, "आह!! बड़े भैया! ऊह!! बहुत मजा आ रहा है, बड़े भैया!! ऊह!!"

"मैने कहा था ना, साली, बहुत मज़ा पायेगी?" उन्होने गुलाबी की चूत को पेलते हुए कहा, "उस दिन खेत मे मुझे से चुदा लेती...तो तुझे हर रात...अपने बिस्तर मे बीवी की तरह लेके सोता....और रात भर चोद चोद के मज़ा देता."

"हाय! और जोर से बड़े भैया! और जोर से मारो हमरी चूत!" गुलाबी अपनी कमर उठा उठाकर लन्ड लेते हुए बोली.

"इतने दिनो से...तेरी जवानी को चखने के लिये...तड़प रहा हूँ, साली!" उन्होने हांफ़ते हुए कहा.

"आह!! हाय हम झड़ जायेंगे!!" गुलाबी तड़पते हुए बोली.

"आज आयी है मेरे नीचे! आह!! क्या चूत पायी है साली तुने! आज नही तो कल तुझे जबरदस्ती चोदकर ही छोड़ता." मेरे पति ठाप लगाते हुए बोले.

"आह!! आह!! आह!! बड़े भैया, और जोर से चोदिये हमें!! आह!! आह!! आह!!" गुलाबी अब मस्ती मे अपने आपे से बाहर हो गयी थी.

"हाँ ले ना...जोर से मेरा लौड़ा ले...तु चाहती तो...शादी के अगले दिन से...यह मज़ा ले सकती थी...पर नही...साली रंडी, सती-सावित्री बने फिर रही थी!" मेरे उन्होने कहा और अपनी रफ़्तार और बड़ा दी.

"हाय! कितना मजा आ रहा है, बड़े भैया! आह!! आह!! ऊह!! फाड़ दो हमरी चूत को अपने मूसल से!! चोद चोदकर हमे रंडी बना दो, बड़े भैया!!" गुलाबी चुदाई की मस्ती मे सब कुछ भूलकर अनाप-शनाप बके जा रही थी.

"अब से...रोज़ चोदुंगा तुझे, गुलाबी!"

"हाँ, बड़े भैया! आह!! जब चाहे हमे चोद लेना! बस अब और जोर से चोदो हमे! आह!! आह!! आह!!" गुलाबी बोली.

"तेरे मरद के सामने...तुझे चोदुंगा."

"हाँ...सबके सामने चोद लेना हमे, बड़े भैया!" गुलाबी बोली और झड़ने लगी, "आह!! हमे गये, बड़े भैया!! आह!! और जोर से पेलो हमे!!"

तुम्हारे भैया बहुत जोर जोर से गुलाबी को चोदने लगे. उनका मोटा, लंबा लन्ड सुपाड़े तक उसकी चूत से निकल आता और फिर जोरदार धक्के से पेलड़ तक अन्दर चला जता. उनका पेलड़ जा जाकर गुलाबी की गांड पर टकरा रहा था. गुलाबी जोर जोर से बड़बड़ाते हुए झड़कर खलास हो गयी और तुम्हारे भैया के नीचे पस्त होकर पड़ी रही. मेरे वह फिर भी कुछ देर उसकी चूत को पेलते रहे.

"कैसा लग रहा है, रामु?" मैने पूछा.

"बहुत मस्त, भाभी!" वह बोला.

"तुम्हारे बड़े भैया का अब पानी छूटने वाला है." मैने कहा, "और वह अब तुम्हारी जोरु की चूत मे अपनी मलाई भर देंगे."

रामु सुनकर गनगना उठा.

"गुलाबी का पेट भी ठहर सकता है." मैने कहा, "तुम्हारी जोरु किसी पराये मर्द के बच्चे की माँ बन गयी तो क्या होगा?"

रामु ने कोई जवाब नही दिया. बस आंखे छेद पर गाड़े अन्दर का दृश्य देखता रहा.

उधर तुम्हारे बलराम भैया जोर जोर से कराहने लगे और हुचक हुचक के गुलाबी को चोदने लगे. "ओह!! मैं झड़ने वाला हूँ, गुलाबी!" वह बोले.

गुलाबी ने तुरंत आंखें खोली और उसका चेहरा डर से कांप उठा. उसकी चुदास उतर गयी थी और दिमाग फिर से काम करने लगा था.

वह चिल्लाकर बोली, "नही, बड़े भैया! ऐसा मत कीजिये! हमरा पेट ठहर जायेगा!"

"साली...चुदायेगी तो पेट तो ठहरेगा ही!"

"नही, बड़े भैया!" गुलाबी कमर हिलाकर अपनी चूत से उनके लन्ड को निकलने की कोशिश करती हुई बोली, "हम किसी को मुंह नही दिखा पायेंगे! मेरा मरद मुझे छोड़ देगा! हम बर्बाद हो जायेंगे!"

"तु पहली औरत है क्या...जो किसी और से चुदाकर...गर्भवति हो रही है?" उन्होने कहा. "मै तो तेरे चूत मे ही अपना पानी डालूंगा."

गुलाबी नीचे पड़े डर के मारे गिड़गिड़ाती रही और तुम्हारे बड़े भैया उसे बेरहमी से चोदते रहे.

 


गुलाबी बेचारी रोने लगी और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे.

उसके आंसू देखकर मानो मेरे उनको और जोश आ गया. वह जोर से कराह उठे, "आह!! ले साली रंडी!! अपने गर्भ मे मेरा वीर्य ले और पेट बना ले!!" फिर गुलाबी की चूत मे अपना लौड़ा जड़ तक घुसाकर वह "आह! आह!! आह! आह!" करके झड़ने लगे.

जब वीर्य की आखरी बून्द भी गुलाबी की चूत मे गिर गयी तब तुम्हारे भैया गुलाबी के ऊपर पस्त होकर लेट गये.

इधर रामु ने दरवाज़े से अपनी आंख उठायी और उसकी नज़र मुझ पर गई. तब तक मैने अपनी साड़ी, ब्लाउज़ और ब्रा उतार दी थी और अपने चूचियों को अपने हाथों से मसल रही थी. सासुमाँ नीचे बैठकर रामु के लन्ड को चूस रही थी और अपनी साड़ी मे हाथ घुसाये अपनी चूत मे उंगली कर रही थी.

मैने रामु को पकड़ा और उसके होठों को चूमने लगी. उसने मेरी पेटीकोट को खोलकर नीचे गिरा दिया जिससे मैं पूरी नंगी हो गयी. मैन रामु को लेकर दरवाज़े के सामने ही फ़र्श पर लेट गयी और बोली, "चोदो मुझे रामु! तुम्हारी जोरु का बलात्कार देखकर मुझे बहुत चढ़ गयी है. चोद के ठंडी करो मुझे!"

रामु तुरंत मेरे टांगों के बीच आ गया और मेरे चूत पर लन्ड रखकर जोर के ठाप के साथ पूरा अन्दर कर दिया. लन्ड अन्दर डालते ही मुझे जोर जोर से चोदने लगा.

"हम भी बहुत गरम हो गये हैं, भाभी, अपनी जोरु की चुदाई देखकर!" वह बोला और कमर उठा उठाकर मुझे पेलने लगा.

सासुमाँ ने मेरे गले को दोनो तरफ़ अपने घुटने रखे और अपनी साड़ी कमर तक चढ़ाकर अपनी बुर मेरे मुंह पर रख दी. वह बोली, "चाट मेरी चूत को, बहु!"

मैं सासुमाँ की बुर को चाटते हुए अपनी चूत मराने लगी. रामु मुझे चोद रहा था और सासुमाँ की चूचियों को पीछे से दबा रहा था. चुदाई के खेल मे इतना मज़ा आ सकता है, उसे आज ही पता चला था.

"साली, रंडी! तेरा पति मेरी जोरु को रंडी की तरह चोद रहा था!" रामु मुझे गाली देकर चोदते हुए बोला "आज मैं तुझे रंडी की तरह चोदुंगा!"

"हाँ, रामु, चोदो मुझे रंडी की तरह!" मैने कहा, "आह!! मैं तो तुम्हारी रखैल हूँ!! जब जी चाहे मुझे चोदा करो!!"

"जरूर छिनाल! तेरे जैसे बड़े घर की बहुओं को तो...नौकर का लन्ड ही पसंद आता है!" रामु बोला, "तुझे चोद चोदकर तेरे गर्भ मे अपना वीर्य भरूंगा. जैसे तेरा मरद मेरी जोरु का पेट बना रहा था, मैं भी तेरा पेट बनाऊंगा!"

"हाँ रामु!" मैन अपनी कमर उठाकर उसके ठाप लेती हुए बोली, "मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनना चाहती हूँ! तुम मुझे गर्भवती बनाओ!! आह!! मेरे राजा, कितना अच्छा चोद रहे हो!!"

सासुमा, मै, और रामु जमीन पर लेटे चुदाई कर रहे थे. हम इतने गरम थे कि जल्दी ही झड़ गये.

सासुमाँ मेरे मुंह पे अपनी बुर जोर से रगड़ती रगड़ती झड़ने लगी. मैं भी रामु के लन्ड का मज़ा लेते हुए झड़ने लगी. और रामु भी जल्दी ही मेरी चूत मे अपना पेलड़ खाली करके झड़ गया.

शांत होने के बाद मैने उठकर दरवाज़े के अन्दर झाँका तो पाया कि गुलाबी के आंसू सूख चुके थे और वह फिर से चुदासी हो गयी थी. उसने ने कमर मे लिपटा अपना घाघरा भी उतार दिया था और अब पूरी तरह नंगी थी. तुम्हारे भैया पूरी तरह नंगे होकर बिस्तर पर लेटे थी. गुलाबी उनके ऊपर चढ़ी हुई थी और उनको अपनी चूची पिला रही थी. फिर उसने उनका खड़ा लौड़ा अपनी चूत पर रखा और दबाव डालकर उसे जड़ तक अपने अन्दर ले लिया. उसकी चूत से तुम्हारे भैया का वीर्य निकलकर लौड़े पर गिरने लगा. गुलाबी कमर उठा उठाकर तुम्हारे भैया के लन्ड पर धीरे धीरे चुदने लगी.

सासुमाँ ने कहा, "बहु, यह सब देखने से हमारा काम नही चलेगा! हमें दोपहर का खाना भी बनाना है!"

मैने दरवाज़े से आंख हटायी और कहा, "हाँ, माँ! चलो हम रसोई मे जाते हैं. रामु को देखने दो अपनी बीवी की चुदायी."

रामु दरवाज़े मे आंख डाले अपनी पत्नी की दूसरे चरण की चुदाई देखने लगा. हम कपड़े पहनकर रसोई मे आ गये.

करीब घंटे भर बाद गुलाबी बुरी तरह चुदी हुई मेरे कमरे से निकली. उसके बाल बिखरे हुए थे. सिंदूर माथे पर फैल गया था. उसकी चोली और घाघरा सिलवटों से खराब हो गये थे. उसके कपड़ों से वीर्य की महक आ रही थी. पर वह बहुत खुश और संतुष्ट लग रही थी. मुझे देखकर शरमा गयी और अपने कमरे मे भाग गयी. जब वह नहा धोकर रसोई मे आयी तो उसने दिन भर मुझसे और सासुमाँ से कोई बात नही की.

गुलाबी की चुदाई समाप्त होने पर हमने रामु को हाज़िपुर बाज़ार भेज दिया था. वहाँ से लौटा तो ससुरजी ने उसे खेत मे भेज दिया. रात का खाना खाने के बाद ही उसे गुलाबी के साथ अकेले होने का मौका मिला. सासुमाँ के कहने पर मैं रामु और गुलाबी के कमरे के बाहर गयी और उनकी बातें सुनने लगी.

कमरे मे बत्ती जल रही थी और गुलाबी बिस्तर पर रामु की तरफ़ पीठ किये लेटी हुई थी. रामु ने उसके होंठों पर अपने होंठ रखकर चूमने की कोशिश की तो गुलाबी ने अपना मुंह फेर लिया और बोली, "सुनो जी, बत्ती बुझा दो तो! बहुत नींद आ रही है."

"हम तो तेरे को पियार कर रहे हैं." रामु थोड़ा रूठकर बोला.

"आज हम पियार-सियार नही कर सकते. आज हम बहुत थक गये हैं." गुलाबी बोली.

रामु कुछ देर अपनी पत्नी को देखता रहा. फिर बोला, "गुलाबी, का कर रही थी तु आज बड़े भैया के कमरे मे?"

"तुम सब देखे तो हो!" गुलाबी ने झट से जवाब दिया, "फिर काहे पूछ रहे हो?"

"हम तेरे मुंह से सुनना चाह रहे हैं."

"का सुनोगे?"

"वही जो तु कर रही थी बड़े भैया के साथ."

"हम बड़े भैया से चुदा रहे थे! बस सुन लिया?" गुलाबी गुस्से से बोली, "हम बहुत चुदाये उनसे. मजे ले लेकर. तुम्हारी तरह एक बार चोदकर वह सो नही गये. दुई दुई बार चोदे हमको. जब ऊ हमरे ऊपर से उतरे हम ठीक से चल भी नही पा रहे थे."

रामु अपनी पत्नी की अश्लील भाषा सुनकर एक तरफ़ स्तब्ध रह गया और दूसरी तरफ़ उत्तेजित भी हो रहा था.

"और कुछ सुनोगे?" गुलाबी जले पर नमक छिड़कते हुए बोली, "हम उनका लौड़ा चूसे. बहुत बड़ा, मोटा लौड़ा है बड़े भैया का. चूसकर इतना मजा आया कि जी कर रहा था सारा दिन चूसते ही रहें. हम उस दिन तुम्हारा लौड़ा चूसे तो कितनी बातें सुननी पड़ी!"

कमरे मे कुछ देर सन्नाटा रहा.

फिर रामु ने पूछा, "गुलाबी, तु क्यों की ई सब?"

"क्योंकि हम बड़े भैया से बहुत पियार करते हैं." गुलाबी बोली, "ऊ भी हम से बहुत पियार करते हैं. बहुत दिनो से हमको कह रहे थे कि गुलाबी हमसे चुदाओ, बहुत मजा पाओगी."

"क्यों, हमरा पियार तेरे को कम पड़ रहा था?" रामु ने उदास होकर पूछा.

"हाँ कम पड़ रहा था!" गुलाबी बोली, "भाभी हमको ठीके बोली थी - एक जवान औरत की प्यास एक मरद से नही बुझती है. हमे पराये मरदों से चुदवाना चाहिये. तब हमे जवानी का पूरा मजा मिलेगा. आज बड़े भैया से चुदाकर हमे पता लगा जवानी के खेल मे कितना मजा है!"

रामु उदास होकर बोला, "तु ई एक बार नही सोची कि तु ऐसा करेगी तो हमरे दिल को कितनी ठेस लगेगी? हम तुझसे कितना पियार करते हैं!’

गुलाबी बिस्तर से उठ बैठी और भड़क कर बोली, "हम तुमसे पियार नही करते हैं का? हमरा पियार तुमको कम पड़ रहा था जो खेत मे मालकिन को चोद रहे थे? हाँ? देखकर हमरे दिल को कितनी ठेस लगी, तुम सोचे एक बार?"

रामु ने गुलाबी का हाथ पकड़ा और लज्जित होकर बोला, "हमसे गलती हो गयी है, गुलाबी. हमको माफ़ कर दे. अब हम मालकिन को हाथ भी नही लगायेंगे. तु भी बड़े भैया से और मत चुदवा."

"नही. ऐसा नही हो सकता." गुलाबी हठ पर अड़ी रही.

"काहे?"

"हम बड़े भैया को वचन दिये हैं कि हम उनसे रोज चुदवायेंगे. ऊ हमको खुस होकर भाभी की चांदी की पायल भी दिये हैं. ई देखो." गुलाबी ने कहा और अपने पाँव पर पायल छनका कर दिखया.

"फिर हमरा का होगा, गुलाबी?" रामु ने पूछा.

"हम का जानें! तुम जितना चाहो मालकिन को चोदो." गुलाबी बोली, "और मौका मिले तो भाभी को भी चोद लेना, हम कुछ नही कहेंगे. पर हम जिससे चाहे चुदायेंगे, तुम हमरी चुदाई के बीच नही आना, हम कहे देते हैं!"

गुलाबी की बातों से रामु को निराशा के साथ एक भ्रष्ट किसम की उत्तेजने हो रही थी.

 
गुलाबी के कंधों को जोर से पकड़कर वह गुस्से से बोला, "ठीक है. तु सारे गाँव से चुदवाना चाहती है ना. जा चुदवा ले! और हम भी जिसे चाहेंगे चोदेंगे! पर एक बात कान खोलकर सुन ले! तु हमरी जोरु है! जब और जहाँ हम तेरी चूत मारना चाहेंगे तु चुपचाप चूत मरायेगी, समझी?"

"काहे? जबरदस्ती है का?" गुलाबी बोली.

"हाँ जबरदस्ती है!" रामु ने कहा और गुलाबी को बिस्तर पर जबरदस्ती लिटाकर उस पर चढ़ गया और उसको जबरदस्ती चूमने लगा.

"हाय ई का कर रहे हो! छोड़ो हमे!" गुलाबी अपने आपको छुड़ाने की कोशिश करके बोली.

"साली, रंडी! बड़े भैया तेरा बलात्कार कर रहे थे तब तु कुछ नही बोली. अब अपने पति को कहती है छोड़ो हमे!"

रामु ने एक हाथ से अपनी लुंगी उतार दी. उसका काला लन्ड ठनक कर खड़ा था. उसने अपने पैरों से गुलाबी की टांगों को जोर लगाकर अलग किया और एक हाथ से उसके घाघरे को कमर तक चढ़ा दिया. गुलाबी की नंगी बुर सामने आ गयी.

"कुतिया, तेरी चूत पर हमरा पहला हक बनता है!" रामु बोला, "तुझे हम जब चाहे चोदेंगे!"

गुलाबी जोर लगाकर अपने को छुड़ाने की कोशिश करने लगी.

रामु ने अपने लन्ड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रखा और कमर के धक्के से पूरा अन्दर पेल दिया.

"हटो! तुमरे लन्ड से हमरा कुछ नही होगा!" गुलाबी बोली, "हमरी प्यास सिर्फ़ बड़े भैया के लौड़े से बुझती है."

"चुप कर, छिनाल!" रामु ने गुलाबी के गाल पर एक चपत लगाई और कहा, "हमरे लौड़े से भाभी जैसी गरम औरत की प्यास बुझती है तो तेरी भी बुझेगी!"

"हाय, तुम भाभी को भी चोद लिये हो का?" गुलाबी ने हैरान होकर पूछा.

"और का?" रामु ने गर्व से कहा, "तु बड़े भैया से अन्दर चुदवा रही थी, तब हम बाहर भाभी को जमीन पर लिटाकर जी भर के चोदे! ऊ हमको कहीं, रामु जब मन करे तुम मुझे चोद सकते हो!"

रामु गुलाबी की चूत मे अपना लन्ड डाले पड़ा था. गुलाबी अब चुपचाप लेटी रही.

कुछ देर बाद गुलाबी बोली, "भाभी हमको अपने मरद से चुदवाने को कहीं...और इधर ऊ चुपके से हमरे मरद से चुदवा ली?"

"तु काहे बुरा मान रही है?" रामु ने कहा, "तु तो जानती है वह कितनी बड़ी चुदैल है. ऊ तो किसन भैया से भी चुदा रही है."

"हाय, राम! ई का कह रहे हो तुम?"

"अपनी आंखों से देखे हैं हम." रामु ने कहा, "कल खेत वाली झोपड़ी के सामने, चारपायी पर अपने देवर से चुदवा रही थी वो."

"हमे बिसवास नही होता." गुलाबी बोली.

"बिसवास नही होता तो कभी चुपके से देखना. ऊ ज़रूर किसन भैया के कमरे मे चुदवाने जाती होगी." रामु ने सलाह दी.

गुलाबी कुछ देर चुप रही तो रामु कमर उठा उठाकर उसे चोदने लगा.

वह बोला, "का सोच रही है रे, गुलाबी?"

"कुछ नही."

"तु किसन भैया के बारे मे सोच रही है का?"

"हाँ."

"कहीं तु उससे भी चुदवाने के बारे मे तो नही सोच रही?" रामु ने पूछा.

"नही तो." गुलाबी ने जवाब दिया, "पर ऊ हैं बहुत सुन्दर. कितने गोरे-चिट्टे हैं. बस हमरी उमर के ही हैं. तभी भाभी उनसे भी चुदवा रही होगी."

"तुझे मन कर रहा है का किशन भैया से चुदवाने का?"

"हूं." गुलाबी ने धीरे से कहा.

"भाभी तुझे सचमुच एक छिनाल बना दी है." रामु हंसकर बोला और गुलाबी को जोर जोर से चोदने लगा.

चूत मे मोटे लन्ड के आने-जाने से गुलाबी मे फिर चुदास जगने लगी थी. वह मस्ती मे सित्कारने लगी.

"एक बात सच बतायें?" रामु ने कमर चलाते हुए कहा.

"बताओ."

"आज बड़े भैया जब...तेरा बलात्कार कर रहे थे...हमे देखने मे बहुत मजा आया."

"हाय, सच?" गुलाबी ने अपनी कमर उठाकर ठाप खाते हुए कहा.

"हाँ रे. पता नही क्यों." रामु बोला, "फिर जब वह तेरी चूत मे अपना पानी डाले ना, तब भी हमको बहुत मजा आया."

"काहे?"

"बड़े भैया से चुदाकर तेरा गर्भ ठहर जाये तो कैसा रहे?"

"तुम्हे कैसे पता चलेगा?" गुलाबी हंसकर बोली, "हम तो रोज़ तुमसे भी चुदाते हैं!"

"कुछ भी हो, सोचकर हमे बहुत मजा आया." रामु बोला और चोदता रहा.

"सुन, तु जब बड़े भैया और किसन भैया से चुदाये ना..." रामु ने कहा.

"हाय, हम कहाँ किसन भैया से चुदाते हैं?" गुलाबी ने सित्कारी भरकर कहा.

"अगर तु चुदाये तो..." रामु ने कहा, "हमे जरूर दिखाना. हम तुझे पराये मरदों से चुदते हुए देखना चाहते हैं."

सुनकर गुलाबी बहुत गरम हो गयी. बोली, "क्यों नही? आज हमको इसलिये तो बड़े भैया के साथ इतना मजा आया. हमे पता था तुमे बाहर से हमे देख रहे हो."

इन बातों से दोनो पति पत्नी बहुत ही गरम हो गये थे. उनका लड़ाई-झगड़ा हवस के ज्वार मे बह गया और वह पूरे आनंद के साथ अपनी कमर चला चलाकर जवानी का मज़ा लेने लगे.

करीब आधे घंटे की चुदाई के बाद, गुलाबी जोर जोर से कराहने लगी. "हाय, मेरे राजा! आह!! और चोदो हमे! आह!! कितना मजा आ रहा है! जी करता है दिन रात किसी न किसी से चुदाते रहें!! हाय कितना मजा है जवानी के खेल मे!!"

रामु भी जोर जोर से चोद रहा था. "चुदा न साली छिनाल!" वह गुलाबी को बोला, "दिन भर चुदाती रह और हमें दिखा तु कितनी बड़ी रंडी है! अपना पेट बना पूरे गाँव से चुदाकर!! आह!! गुलाबी, हम झड़ने वाले हैं! मेरी जान! आह!! आह!! आह!! आह!! आह!!"

रामु और गुलाबी दोनो एक साथ झड़ गये और थक कर एक दूसरे से लिपटकर पड़े रहे.

मैं उनके दरवाज़े से हटकर सासुमाँ के कमरे मे गयी तो देख, तुम्हारे मामाजी नंगे लेटे हुए हैं और सासुमाँ उनका लन्ड चूस रही है.

"माँ! आप क्यों बाबूजी का लौड़ा चूस रही हैं?"

"क्यों वह तेरे मरद लगते हैं क्या?" सासुमाँ ने पूछा.

"कौशल्या, बहु का मतलब है तुम तो अब अपने बेटे की रखैल बन गयी हो. जाकर उसके साथ सोओ. मैं रोज़ की तरह बहु के साथ सोना चाहता हूँ." ससुरजी ने कहा.

"बलराम से आज कुछ नही होगा." सासुमाँ बोली, "आज दो दो बार गुलाबी को चोदा है उसने. और बहु तु तो सुबह रामु से भी चुदी है. जा, एक रात के लिये अपने पति के साथ सो. मुझे अपने पति से चुदवा कर अपनी प्यास बुझाने दे."

मैं अपने कमरे मे गयी तो तुम्हारे बलराम भैया लगभग सो ही चुके थे.

मुझे देखकर वह बोले, "मीना! कहाँ थी तुम? बहुत नीद आ रही है, जान! जल्दी से बत्ती बुझा दो."

हाँ क्यों नही आयेगी नींद, मैने सोचा. घर की नौकरानी को जो इतना चोदे हो दिन मे!

मैने बत्ती बुझा दी और हम दोनो सो गये.

तो वीणा, यह थी अब तक की खबर. आगे की खबर अगले ख़त मे लिखती हूँ!

तुम्हारी भाभी

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मैने चिट्ठी पड़ी और सोचने लगी. भाभी के घर का माहौल बहुत ही गरम होता जा रहा था. हाय, कितने मज़े मे थी मीना भाभी! ससुर हो तो ऐसा और सास हो तो ऐसी! क्या मेरी किस्मत मे कोई ऐसा परिवार होगा? या फिर मुझे किसी शरीफ़ आदमी से शादी करके ज़िन्दगी भर पतिव्रता होने का नाटक करना पड़ेगा? कहाँ मिलेगा ऐसा परिवार जहाँ मुझे मीना भाभी की तरह चुदाई का मज़ा मिलेगा?

सोचकर मैं उदास हो गई. मन को मनाने के लिये मैने भाभी की चिट्ठी का जवाब लिखा और भेज दिया.

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प्यारी भाभी,

तुम्हारी चिट्ठी मिली. पढ़कर हमेशा की तरह बहुत मज़ा आया. आखिर तुम्हारी गुलाबी बलराम भैया से चुद ही गयी! मुझे भी लग रहा था वह बिना बलात्कार के मानने वाली नही है. वैसे बेचारी का भी क्या दोष? अभी 18-19 साल की बच्ची ही तो है. मैं जल्द से जल्द इस गुलाबी से मिलना चाहती हूँ. बहुत ही नटखट लड़की लगती है! पर तुम लोग उस बेचारी को जैसे बर्बाद कर रहे हो, जब तक मैं उससे मिलूंगी वह शायद कोठे की रंडी बन चुकी होगी!

वैसे रामु और गुलाबी के झगड़े के बारे मे पढ़कर मुझे बहुत हंसी आयी. आगे क्या होता है जल्दी लिखना.

तुम्हारी वीणा

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भाभी की अगली चिट्ठी जल्दी ही आ गयी. अपनी बहन नीतु और माँ की नज़र बचाकर, अपने विश्वस्त बैंगन को लेकर मैं अपने कमरे मे घुस गयी और चिट्ठी पढ़ने लगी.

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प्यारी वीणा,

तुम्हारा ख़त मिला. पढ़कर बहुत अच्छा लगा. तुम्हारे दो सवालों का जवाब पहले दिये देती हूँ.

एक, खुले मे चुदवाने मे बहुत मज़ा आता है. पकड़े जाने का डर तो लगता ही है, और इसी से मज़ा दुगुना हो जाता है. कभी कभी मैं कल्पना करती हूँ कि मैं अपने देवर से खेत मे नंगी होकर चुदवा रही हूँ और सारे गाँववाले आ जाते हैं. ऐसा सच मे हो जाये तो मैं तो बर्बाद हो जाऊंगी! पर कल्पना करके मुझे बहुत उत्तेजना होती है.

दूसरे, न जाने क्यों रामु मुझे गालियाँ देता है तो मुझे बहुत चुदास चढ़ती है. तुम शायद नही समझोगी. पर अपने घर के नौकर से चुदवाते से समय गंदी गालियाँ सुनना मुझे बहुत अच्छा लगता है. रामु मुझे अपनी रखैल की तरह इस्तेमाल करता है और जब मौका मिले मुझे गालियाँ दे देकर जबरदस्ती चोदता है. शायद मुझे बलात्कार ही बहुत अच्छा लगता है. वैसे बाकी समय वह मुझे पूरी इज़्ज़त देकर ही बात करता है.

खैर, अब अपने घर की खबर पर आती हूँ जिसका तुम बेसब्री से इंतज़ार कर रही होगी.

अगले दिन समय मिलने पर मैने गुलाबी को जा पकड़ा. वह छत पर सुखे कपड़े समेट रही थी. वह मुझे देखकर झेंप गई.

"क्या बात है, गुलाबी! कल से तु मुझसे दूर दूर रह रही है?" मैने पूछा, "मुझसे नाराज़ तो नही है?"

"नही, भाभी. बस ऐसे ही. हम आपसे काहे नाराज़ होंगे भला?" गुलाबी बोली. वह मुझसे नज़रें ही नही मिला पा रही थी.

"रामु ने तो तुझे बता ही दिया होगा कि मैं उससे चुद चुकी हूँ." मैने कहा, "तुझे बुरा तो लग सकता है. आखिर तेरा खसम है रामु."

"तो का हुआ भाभी. हम भी तो आपके मरद से..." वह बोलते बोलते रुक गयी.

"बोल, बोल! रुक क्यों गई? क्या किया है तुने मेरे मरद से?" मैने उसके फूले फूले गाल की चुटकी लेकर पूछा.

"जाईये हम नही बता सकते." गुलाबी बोली, "हमें लाज आती है."

"आय हाय!" मैने कहा, "कल नंगी होकर मेरे पति से मज़े लेकर चुदवा रही थी, तब लाज नही आयी. अब बताते लाज आ रही है?"

गुलाबी आंखें नीची करके खड़ी रही तो मैने कहा, "बता ना गुलाबी. कैसा मज़ा किया तुने कल मेरे पति के साथ."

"आप तो सब देखीं दरवाज़े के बाहर से!" गुलाबी बोली.

"पर तेरे मुंह से सुनने का मन कर रहा है!" मैने कहा और उसकी चोली मे ढके एक चूची को मुट्ठी मे ले लिया. "कल तु मेरे उनका लौड़ा चूस रही थी, फिर उनके लन्ड पर अपनी चूत भी रगड़ रही थी. फिर चुदवाने से क्यो मना कर दिया?"

"हम सादी-सुदा औरत हैं ना. हम सोचे पराये मरद से चुदवाना ठीक नही होगा." गुलाबी बोली.

"पर पराये मर्द का लन्ड चूसना तुझे ठीक लगा?"

"ऊ तो हम अपने मरद से बदला लेने के लिये कर रहे थे." गुलाबी भोलेपन से बोली.

"और जब तेरे बड़े भैया ने तेरा बलात्कार किया, तब?" मैने पूछा.

"हम का करते, भाभी? हम तो मजबूर हो गये थे ना!" गुलाबी बोली, "अपनी राजी खुसी से हम थोड़े ही करवाये हैं?"

"पर चुदवाने मे मज़ा तो तुझे बहुत आया..."

"अब का करें भाभी! चूत मे लन्ड घुसता है तो अपने आप मजा आने लगता है." गुलाबी बोली, "जब बड़े भैया हमे जबरदस्ती चोदने लगे तो हमे बहुत मजा आने लगा. हम भी सोचे के अब बलात्कार तो हो ही रहा है, क्यों न मजा ही लिया जाये."

मैं जोर से हंस दी. मैने कहा, "गुलाबी, बहुत सयानी हो गयी है तु!"

मुझे उसकी चूचियों को दबाने मे बहुत मज़ा आ रहा था और वह भी मज़े लेकर चूची दबवा रही थी.

कुछ देर बाद गुलाबी ने पूछा, "भाभी, मेरा मरद कह रहा था आप किसन भैया के साथ भी कर ली हैं?"

"हूं." मैने जवाब दिया.

"सच भाभी?" गुलाबी ने उत्तेजित होकर पूछा.

"हूं."

"मेरा मरद बोला उसने आप दोनो को खेत वाली झोपड़ी के सामने चुदाई करते देखा है." गुलाबी ने कहा, "किसन भैया आपके साथ जबरदस्ती किये थे का?"

"नही रे, मैने ही उसे पटाया था." मैने कहा, "वह तो एकदम अनाड़ी था चुदाई के मामले मे. पर अब मैने उसे बहुत कुछ सिखा दिया है. अब तो दो-चार दिन हो गये हैं मुझे देवरजी से चुदवाते हुये."

"हाय भाभी! आप कैसे कर ली अपने देवर के साथ मुंह कला?" गुलाबी उत्तेजित होकर बोली.

"अरे देवर-भाभी की चुदाई तो सदियों से चली आ रही है!" मैने कहा, "तेरा कोई देवर है, गुलाबी?"

"गाँव मे है." गुलाबी ने कहा.

"उससे चुदवाने का मन करता है?"

"हाय, नही भाभी!" गुलाबी बोली, "हम तो पहले ई सब कभी सोचे ही नही!"

"पर अब तो तु अपने बड़े भैया से चुदकर सयानी हो गयी है." मैने कहा, "अब तो सोच सकती है ना."

गुलाबी खड़े-खड़े मुस्कुरा रही थी. फिर बोली, "हमार देवर तो बहुत दूर रहता है. पर आपका देवर तो साथ ही रहता है."

मैने गुलाबी की ठोड़ी को उंगली से ऊपर उठाया और कहा, "क्या रे गुलाबी. कहीं तेरा दिल मेरे देवर पर तो नही आ गया?"

"नही भाभी!" गुलाबी झेंपकर बोली, "हम तो ऐसे ही बोले."

"अरे शरमाती क्यों है? तुझे मेरा देवर पसंद है तो बोल ना!" मैने कहा, "बता, तुझे किशन पसंद है?"

"हूं." गुलाबी ने जवाब दिया.

"क्या करने का मन करता है उसके साथ?"

"वही सब जो आप करती हैं..." गुलाबी नज़रें चुरा के बोली.

"अच्छा, चुदवाने का मन करता है मेरे देवर से?"

"हूं."

"तो यह बात है!" मैने कहा, "बड़े भाई पे पर मुंह मारे एक दिन भी नही हुआ अब तुझे छोटे भाई को भी चखने का मन कर रहा है!"

गुलाबी ने बनावटी गुस्से से मुंह फूला लिया.

"गुलाबी, तुझे ऐसा क्या पसंद आ गया मेरे देवर मे?" मैने पूछा, "वह तो बिलकुल अनाड़ी छोकरा है."

"किसन भैया बहुत सुन्दर हैं." गुलाबी ने कहा, "कितने लंबे और गोरे चिट्टे हैं. और उम्र भी कम हैं."

"और कुछ?"

"बहुत सुन्दर होंठ हैं किसन भैया के." गुलाबी ने धीरे से कहा, "हमे पीने का मन करता है."

"ओहो! और कुछ पसंद आया उसका?" मैने पूछा, "उसका लन्ड कैसा लगा?"

"ऊ तो हम अभी तक देखे ही नही." गुलाबी बोली, "आप दोनो को चुदाई करते हुए तो मेरे मरद ने देखा था."

"तो देखना चाहती है मेरे देवर का लन्ड?"

"हूं." गुलाबी ने कहा, "पर हम कैसे देखें?"

"मैं बोलती हूँ देवरजी को अपना लन्ड तुझे दिखने को."

"हाय भाभी! आप बोलेंगी किसन भैया को?" गुलाबी ने उत्साहित होकर पूछा.

"क्यो नही!" मैने कहा, "जा तु देवरजी को जाकर बोल भाभी छत पर बुला रही है."

गुलाबी एक पल का इंतज़ार किये बिना सीड़ियों से भागकर नीचे किशन के कमरे मे चली गयी.

थोड़ी ही देर मे किशन उसके साथ ऊपर आया.

मै तार पे सूखती साड़ियों के बीच खड़ी थी. मुझे देखकर किशन बोला, "भाभी, आपने बुलाया मुझे?"

मैने किशन के गले मे अपनी बाहें डाली और कहा, "देवरजी, बहुत मन कर रहा था तुमसे चुदवाने का. घर पर तो कितने लोग हैं. इसलिये सोचा तुम्हे छत पर बुला लूं."

किशन हिचकिचा कर बोला, "भाभी, गुलाबी मेरे पीछे खड़ी है."

"तुम गुलाबी की फ़िक्र मत करो." मैने कहा, "उसे पता है मैं तुमसे चुदवा रही हूँ. क्यों गुलाबी?"

गुलाबी मेरी बात सुनकर मुस्कुरा दी.

किशन को कुछ एक पल लगे मेरी बात को समझने मे. फिर बोला, "आ-आपने गुलाबी को बता दिया हमारे बारे मे?"

"हूं! हम औरतें कुछ छुपाती नही हैं एक दूसरे से." मैने कहा, "गुलाबी भी मुझे सब बताती है उसने कहाँ और किस किससे मुंह काला करवाया है. पर छोड़ो यह सब! आओ ज़रा जल्दी से मेरी प्यास बुझाओ!"

"पर भाभी, यहाँ खुली छत पर...?" किशन ने पूछा.

"अच्छा है ना!" मैने कहा, "खुले आसमान के नीचे चुदवाना मुझे बहुत पसंद है. उस दिन खेत मे कितना मज़ा आया था ना? ऊपर से तार से इतने सारे कपड़े लटक रहे हैं, कोई देख भी नही सकेगा."

"पर कोई आ गया तो?"

"गुलाबी है ना!" मैने कहा, "वह ज़ीने के दरवाज़े पर पहरा देगी. कोई ऊपर आया तो हमे बता देगी."

किशन थूक गटक कर बोला, "भाभी, आप गुलाबी के सामने करेंगी?"

"तो क्या हुआ? गुलाबी बहुत खेल खाई लड़की है. तुम उसकी चिंता मत करो." मैने कहा, "गुलाबी भी देखना चाहती है हम देवर-भाभी कैसे चुदाई करते हैं."

"पर भाभी..."

"देवरजी, तुम्हे गुलाबी से शरम आ रही है क्या?" मैने पूछा, "शरमाओ मत. किसी और को दिखाके चुदाई करने मे बहुत मज़ा आता है."

किशन ने गुलाबी की तरफ़ देखा. वह बेशर्मों की तरह किशन को आंखों से भोगे जा रही थी. किशन जड़ होकर खड़ा रहा.

गुलाबी बोली, "भाभी, हम नीचे से दरी लेके आते हैं. आप दोनो उस पर लेटकर करना."

गुलाबी के नीचे जाते ही मैं किशन से लिपट गयी और पजामे के ऊपर से उसके लौड़े को सहलाने लगी. लौड़ा पहले से ही थोड़ा सख्त था. मेरे हाथ लगाने से अकड़ कर अपने पूरे आकर मे आ गया. किशन को अपनी तरफ़ खींचकर मैं उसके होठों को चूमने लगी.

थोड़ी देर मे किशन की झिझक भी दूर हो गई. वह मेरे होंठ पीने लगा और मेरी ब्लाउज़ मे कसी चूचियों को दबाने लगा. छत पर धूप बहुत सुहानी लग रही थी. थोड़ी थोड़ी हवा भी चल रही थी जिससे तार पर सूखते कपड़े हिल रहे थे. उनके बीच खड़े होकर हम देवर-भाभी जवानी का मज़ा लेने लगे.

किशन का जोश देखकर मैने अपने ब्लाउज़ के हुक खोल दिये. उसने जल्दी से मेरी ब्लाउज़ उतारकर एक तार पर रख दी. मैने आज ब्रा नही पहनी थी. मैं ऊपर से नंगी हो गयी थी और मेरा आंचल नीचे ज़मीन पर लटक रहा था.

किशन और मैं फिर से एक दूसरे के होंठ पीने लगे और किशन के हाथ मेरी नंगी चूचियों को मसलने लगे. मैने किशन का पजामा और चड्डी खोलकर नीचे गिरा दिया और उसके खड़े लन्ड को मुट्ठी मे लेकर हिलाने लगी.

"यह गुलाबी जाने कहाँ दरी ढूंढने गयी हैं!" मैने अधीर होकर कहा, "वह आये तो तुम्हारा लौड़ा अपनी चूत मे लूं! अब रहा नही जा रहा!"

"भाभी, दरी की क्या ज़रूरत है?" किशन ने कहा, "आप उधर छत की रेलिंग पर झुक जाइये, मैं पीछे से चोदता हूँ."

"हाँ, यही ठीक रहेगा." मैने कहा और अपनी साड़ी उतारने लगी.

देखकर किशन बोला, "भाभी, आप पूरी नंगी हो रही हैं? हम खुले छत पर हैं. कोई देख लेगा तो?"

"देवरजी, नंगे हुए बिना चुदाई का पूरा मज़ा कहाँ आता है?" मैने कहा, "चलो तुम भी नंगे हो जाओ. डरो मत, इस वक्त छत पर कोई नही आयेगा. और इस तरफ़ तो खेत ही खेत हैं. कोई देख भी नही पायेगा."

 
मैने अपनी साड़ी खोलकर तार पर लटका दी. फिर जल्दी से अपनी पेटीकोट भी उतार दी और पूरी तरह नंगी हो गयी. मेरा गोरा बदन धूप मे चमक रहा था. मैं अपने नंगी चूचियों को दोनो हाथों से मसलने लगी. देखकर किशन ने भी अपना कुर्ता और बनियान उतार दिया और नंगा हो गया. जवानी के हवस मे हम दोनो इतने पागल हो गये थे कि खुले आसमान के नीचे पूरे नंगे होकर चुदाई करना चाह रहे थे.

मैं छत की रेलिंग पर हाथ रखकर झुक गयी और अपने चूतड़ किशन की तरफ़ कर दिये.

किशन मेरे चूतड़ों के पीछे आ खड़ा हुआ और उसने अपना खड़ा लन्ड मेरी चूत पर रखा. मेरी चूत तो पहले से ही चू रही थी. उसने सुपाड़े से मेरी चूत के होठों को अलग किया और फिर कमर से धक्का देकर सुपाड़े को मेरी चूत मे घुसा दिया. मैने मस्ती की सित्कारी भरी और कहा, "आह!! देवरजी, बस अब पूरा पेल दो जल्दी से!"

किशन ने मेरी कमर को पकड़ा और एक जोर का धक्का देकर पूरा लन्ड मेरी चूत मे पेल दिया. गरम चूत मे मोटे लन्ड के सुखद अनुभूति से हम दोनो ही गनगना उठे.

मेरी कमर को पकड़कर किशन पहले धीरे, फिर थोड़ी रफ़्तार से मुझे कुतिया बनाके चोदने लगा. आज वह अपने पे बहुत संयम बनाये हुए था. उसकी ठाप की ताल पर मेरी चूचियां हिलने लगी. बीच-बीच मे वह मेरी चूचियों को मसल भी देता था.

हाय, वीणा! क्या मज़ा मिल रहा था छत पर चुदवाने मे!

किशन "ऊंघ! ऊंघ! ऊंघ! ऊंघ!" करके लन्ड पेल रहा था और मैं "आह! आह! आह! आह!" कर के जवाब दे रही थी.

हम करीब 5-10 मिनट ऐसे ही चुदाई करते रहे. उसमे मैं एक बार झड़ भी गई.

मैने किशन को कहा, "देवरजी, मेरे हाथ थक गये हैं! यह गुलाबी जाने कहाँ मर गयी है! दरी लाते लाते शायद किसी से चुदवाने लग गयी है."

"भाभी, बस और 5 मिनट ही लगेंगे!" किशन हांफ़ते हुए बोला, "मेरा बस होने ही वाला है."

"देवरजी! औरत की प्यास बुझने से पहले ही झड़ जाओगे? कैसे मर्द हो?" मैने कहा, "तुम्हारे भैया मुझे तब तक पेलते रहते हैं जब तक मैं झड़ झड़ के चूर नही हो जाती हूँ!"

किशन चुप हो गया और अपने सांसों को काबू मे करके मुझे पेलता रहा.

मैने किशन अपना लौड़ा मेरी चूत से निकालने को कहा. "देवरजी, तुम्हे आज एक नये तरीके से चुदाई सिखाती हूँ. तुम सीधे खड़े हो जाओ."

किशन सीधे खड़ा हो गया तो मैने उसके गले मे अपनी बाहें डाली और कहा, "मेरी कमर को पकड़ो और मुझे गोद मे ले लो!"

"क्यों, भाभी?" उसने पूछा.

"अरे करो ना! हम खड़े-खड़े चुदाई करेंगे." मैने कहा, "बहुत मज़ा आयेगा तुम्हे."

किशन ने मुझे पकड़ा तो मैने उसके गले का सहारा लेकर अपने पैरों से उसके कमर को जकड़ लिया. किशन ने दोनो हाथों से मुझे अपने सीने से चिपका लिया.

"देवरजी, अब एक हाथ से अपना लन्ड पकड़कर मेरी चूत मे सेट करो." मैने कहा.

किशन ने वैसा ही किया. जब लन्ड का सुपाड़ा मेरी चूत मे घुस गया मैने ऊपर से दबाव डालकर पूरा लन्ड अपनी चूत मे घुसा लिया.

वीणा, किशन तुम्हारे बलराम भैया की तरह बलवान नही है, इसलिये वह थोड़ा लड़खड़ा रहा था. पर मैं उसके गले का सहारा लेकर अपनी कमर ऊपर-नीचे करके चुदने लगी. मेरी चूचियां उसके सीने पर एकदम पिचक गयी थी और उसके किशोर सीने से रगड़ खा रही थी.

"हाय, देवरजी! क्या मज़ा आ रहा है खड़े-खड़े चुदवाने मे!" मैने कहा, "तुम्हे आ रहा है मज़ा?"

"ऊंघ!" किशन ने बस इतना ही जवाब दिया.

मैने हंसकर कहा, "देवरजी, सुबह शाम दो बार मुझे अपने लौड़े पर लेकर ऐसे चोदोगे, तो तुम्हे कसरत करने की ज़रूरत ही नही पड़ेगी."

"हाँ, भाभी!" किशन ने अपने फूलती सांसों को काबू मे करते हुए कहा.

मैं किशन की गोद मे चढ़े दो ही मिनट चुदी थी कि पीछे से गुलाबी की आवाज़ आई, "हाय भाभी! ई का कर रही हैं आप!"

गुलाबी की आवाज़ सुनते ही किशन ने मुझे छोड़ दिया और मैं ज़मीन पर आ गिरी. उसका लौड़ा मेरी चूत से निकल गया और बहुत जल्दी ढीला हो गया. वह शरमा के अपने हाथों से अपना लौड़ा ढकने लगा.

"कलमुही, कहाँ चुदाने गयी थी?" मैने गुलाबी को गुस्से से कहा. "कितनी देर लगती है तुझे एक दरी लाने मे?"

गुलाबी ने हम देवर-भाभी के नंगे बदन पर नज़र डाली और मुस्कुराकर बोली, "भाभी, पहिले तो हमे दरी मिल ही नही रही थी. फिर हम दरी लेकर आ रहे थे तो मेरा मरद पूछने लगा कि हम दरी लेके कहाँ जा रहे हैं. उसे समझाने मे ही इतना समय लग गया!"

उसने छत के दरवाज़े की तरफ़ हल्का सा इशारा किया, जिसका मैं यह मतलब समझी कि रामु वहाँ से छुपकर हमे देख रहा है.

किशन अभी भी बेचैन सा खड़ा था. गुलाबी उसके नंगे बदन को भूखी आंखों से देख रही थी.

"गुलाबी तु दरी बिछा." मैने कहा, "आधी चुदाई मे आके टोक दिया तुने. मेरी चूत लौड़े के लिये बुरी तरह कुलबुला रही है."

गुलाबी ज़मीन पर दरी बिछाने लगी और बोली, "भाभी, किसन भैया तो बहुत सरमा रहे हैं हमसे!"

"मैं अभी इसकी शरम दूर किये देती हूँ." मैने कहा और उसके हाथ धीले लौड़े पर से हटाकर उसे हिलाने लगी.

"भाभी, हम गुलाबी के सामने कैसे कर सकते हैं?" किशन बोला.

"तो क्या हुआ?" मैने कहा और दरी पर बैठ गई. "वह तो बस हमे देखेगी. कुछ करेगी थोड़े ही?"

मैने यह बताना उचित नही समझा कि छत के दरवाज़े के पास छुपा रामु भी हमारे कुकर्म को देख रहा है.

"पर भाभी, बहुत अजीब लग रहा है." किशन दरी पर बैठकर बोला, "हम नंगे हैं और गुलाबी ने कपड़े पहने हुए हैं."

थोड़ा अजीब तो मुझे भी लग रहा था. मैं पहले कभी गुलाबी के सामने नंगी नही हुई थी. पर मुझे हमारे हालत पर रोमांच भी हो रहा था.

मैने कहा, "तो फिर गुलाबी भी कपड़े उतार देगी. क्यों गुलाबी?"

"भाभी, हम भी कपड़े उतारें?" गुलाबी ने एक नज़र दरवाज़े की तरफ़ देखा और चौंककर कहा.

"हाँ, क्यों नही?" मैने कहा, "हम तेरे सामने नंगे हैं. तु हमारे सामने नंगी नही हो सकती?"

गुलाबी बार-बार दरवाज़े की तरफ़ देख रही थी और आना-कानी कर रही थी. मैने गुस्से से उसे देखा तो उसने हारकर अपनी चोली उतार दी, और नज़रें नीची करके खड़ी हो गई. उसके सांवली, भरी भरी चूचियां नंगी हो गयी तो किशन ललचाई नज़रों से उन्हे देखने लगा.

"क्यों, देवरजी, गुलाबी की चूचियां पसंद आयी?" मैने पूछा.

"हाँ, भाभी. बहुत सुन्दर हैं." किशन ने लार टपकाते हुए कहा, "पर आप जितनी सुन्दर नही हैं." उसने जल्दी से जोड़ा.

"बस बस, और मक्खन मत लगाओ! गुलाबी की चूचियां मुझे से बड़ी और ज़यादा मज़ेदार हैं." मैने कहा, "अब तुम भी उसे अपना लौड़ा खड़ा करके दिखाओ, जो वह देखने के लिये आयी है."

गुलाबी की चूचियों के दर्शन से किशन का लन्ड काफ़ी ताव मे आ गया था. मैं किशन के साथ दरी पर बैठ गयी. फिर अपना सर उसके जांघों के बीच झुकाया और उसके लन्ड को मुंह मे लेकर चूसने लगी. तुरंत उसका लन्ड तनकर खूंटे की तरह खड़ा हो गया.

मैने किशन के लौड़े को मुंह से निकाला और गुलाबी से पूछा, "बोल गुलाबी, कैसा लगा तुझे अपने किशन भैया का लन्ड?"

गुलाबी की आंखे वासना से लाल थी. वह अपने निप्पलों को चुटकी मे लेकर मींज रही थी. मुझे बोली, "बहुत सुन्दर है, भाभी."

"आ ज़रा हाथ मे लेकर देख."

"नही, भाभी." उसने दरवाज़े की तरफ़ देखा और कहा.

"साली, फिर तु सती-सावित्री बनने लगी!" मैने कहा, "तु जिससे डर रही है, उसकी हिम्मत नही कि तुझे कुछ बोले. आ, इधर आ."

गुलाबी ने एक बार दरवाज़े की तरफ़ देखा, फिर हमारे पास दरी पर आके बैठ गयी.

मैने किशन का खड़ा लन्ड गुलाबी के हाथ मे थमा दिया जिसे वह धीरे धीरे हिलाने लगी. उसका शरीर इस नये लन्ड को छूकर सिहर उठा.

किशन की नज़र न जाने कब से गुलाबी की जवानी पर थी. अब उसका सपना साकार होता दिखाई दे रहा था. उसने एक हाथ बढ़ा कर गुलाबी की एक चूची दबायी. गुलाबी मस्ती मे सित्कार उठी, "ओह!!"

"गुलाबी, किशन भैया के लन्ड को चूसने का मन कर रहा है?" मैने पूछा.

गुलाबी ने मुस्कुराकर मुझे देखा तो मैने उसके सर को पकड़कर किशन के लौड़े पर झुका दिया.

गुलाबी ने किशन के लन्ड को अपने नरम होठों मे ले लिया और धीरे धीरे चूसने लगी. किशन मज़े मे सित्कार उठा, "हाय, भाभी! आह!! उफ़!!"

मैं गुलाबी के नंगे चूचियों को हाथों से दबाने लगी.

गुलाबी काफ़ी गरम हो गयी थी. एक हाथ से किशन के लन्ड को पकड़कर चूस रही थी. अपना दूसरा हाथ उसने अपने घाघरे मे डाल दिया और अपनी चूत मे उंगली करने लगी.

"गुलाबी, घाघरा उतारकर आराम से बैठ." मैने कहा और उसके कमर से उसके घाघरे को खोल दिया.

 


अब वह मेरे और किशन की तरह पूरी नंगी हो गयी. उसके कसे जवान शरीर को देखकर तो किशन दिवाना सा हो गया.

"क्यों देवरजी, चोदोगे गुलाबी को?" मैने पूछा.

"हाँ, भाभी!" किशन ने कहा. उसका गोरा चेहरा तमतमा रहा था.

"गुलाबी, तु चुदायेगी मेरे देवर से?"

गुलाबी ने लौड़े पर से सर उठाया और सर हिलाकर रज़ामंदी जतायी.

"ठीक है, पर तु पहले दरी पर लेट जा. मैं तुझे ज़रा चख लेती हूँ."

"हाय, भाभी!" गुलाबी ने हैरान होकर पूछा, "आप औरत होकर हमे चखेंगी?"

"अरे बुद्धू, औरत के साथ भी बहुत मज़ा आता है." मैने कहा, "चल लेट जा!"

गुलाबी दरी पर लेट गई. उसकी जवान सांवली त्वचा धूप मे दमक रही थी. वह पूरी तरह नंगी थी, पर उसके गले मे मंगलसूत्र था, माथे पर सिंदूर, और हाथों मे कांच की चूड़ियाँ थी. पैरों मे मेरी चांदी की पायल थी जो मेरे पति ने उसे पहली बार चोदकर दिया था. 19 साल की यह जवान लड़की बहुत ही मन-मोहक लग रही थी.

मैने उसके दोनो जांघों को अलग किया और उस पर चढ़ गयी. अपनी चूचियों को उसकी नंगी चूचियों पर रखा और अपने गरम होठों से उसके होठों को पीने लगी. बहुत नर्म, नाज़ुक होंठ है गुलाबी के, वीणा! तुम जब आओगी ज़रूर चखकर देखना.

वीणा, औरत के होठों का स्वाद मर्द के होठों से अलग होता है. पर मुझे बहुत मज़ा आने लगा. गुलाबी भी मेरे नीचे लेटे अपनी चूत को मेरी चूत से रगड़ने लगी और मस्ती मे "उम्म!! उम्म!! उम्म!!" करने लगी. अब तक उसे इतनी चुदास चढ़ चुकी थी कि वह भुल गयी कि उसका पति छत के दरवाज़े के पीछे से उसके कुकर्मो को देख रहा है. या फिर अपने पति को दिखा दिखाकर अपना मुंह काला करवाने मे उसे एक विचित्र आनंद आ रहा था.

कुछ देर गुलाबी के होंठ पीकर मैं उसके चूचियों की तरफ़ आयी. बारी-बारी उसके मस्त चूचियों को मुंह मे लेकर मैं चूसने लगी. उसके काले, मोटे निप्पल सख्त होकर खड़े थे. अपनी जीभ मैने उन पर रगड़ी.

"हाय, भाभी! ऊंह!!" बोलकर गुलाबी चिहुक उठी.

"मज़ा आ रहा है, गुलाबी?" मैने उसके चूचियों को दबाते हुए पूछा.

"हाँ, भाभी...उफ़्फ़!!"

"जब कोई मर्द पास न हो, तो तु ऐसे किसी औरत के साथ भी अपनी प्यास बुझा सकती है, समझी?"

"हाँ भाभी! ईस्स!!" गुलाबी सित्कार के बोली.

मैने उसकी चूचियों को मसलना और पीना जारी रखा. वह मस्ती मे "आह! हाय!! उम्म!!" कर रही थी.

मैने और थोड़ा नीचे आ गयी और मैने उसकी सफ़ा की हुई सांवली बुर पर अपना मुंह रख दिया.

"हाय, भाभी!!" गुलाबी मज़े मे बोली, "ई सब का कर रही हैं आप!!"

"मज़ा आ रहा है कि नही?"

"बहुत मज़ा आ रहा है!" वह बोली.

इधर मेरी चूत की हालत भी बहुत खराब थी. किशन से चुदकर मैं एक बार ही झड़ी थी. मैने किशन को कहा, "देवरजी, मेरे पीछे आ जाओ और मुझे कुतिया बनाके चोदो."

किशन शायद गुलाबी की चूत मारने के इंतज़ार मे था. मैने कहा, "घबराओ मत, गुलाबी की चूत भी मिलेगी तुम्हे. पहले मुझे एक और बार चोदकर झड़ा दो."

किशन घुटने के बल मेरे चूतड़ों के पीछे बैठ गया और अपना खड़ा लन्ड मेरी चूत पर सेट कर के उसने अन्दर घुसा दिया. मैं मज़े से "आह!!" कर उठी.

किशन मुझे धीरे धीरे पेलने लगा और मैं गुलाबी की मस्त जवान चूत को चाटने लगी. उसकी छोटी सी चूत बहुत पानी छोड़ रही थी. मैं उसकी चूत के फूले फूले होठों को जीभ से चाटने लगी, कभी उसकी चूत के छेद मे जीभ देकर चोदने लगी, कभी उसकी चूत के टीट को हलके से छेड़ देती जिससे वह गनगना के अपनी पीठ को मोड़ लेती.

खुली छत पर गुलाबी, किशन और मैं इस तरह चुदाई कर रहे थे. किशन मेरी कमर पकड़कर मेरी चूत मे अपना लन्ड पेल रहा था. मैं गुलाबी की चूत चाट रही थी. और गुलाबी अपने नंगी चूचियों को अपने हाथों से नोच रही थी.

"हाय भाभी!! हम झड़ जायेंगे!" गुलाबी अचानक बोली और उसने मेरा सर पकड़कर अपनी चूत पर दबा लिया. "हाय! कितना मज़ा आ रहा है, भाभी! आह!! आह!! आह!!" वह बोली और झड़ने लगी. मैं उसके बुर पर अपना मुंह रगड़ती रही जब तक वह झड़कर शांत नही हो गयी.

ईधर मैं भी झड़ने वाली थी. अपनी कमर आगे पीछे करके किशन का लन्ड लेते हुए बोली, "और थोड़ा जोर से मेरे राजा! आह!! और थोड़ा जोर से!! उम्म!! उम्म!! आह!!"

किशन थोड़ा और जोर से पेलने लगा. लड़का कुछ ही दिनो मे काफ़ी अच्छा चोदू बन गया था.

उसके लन्ड की पेलाई से मैं फिर झड़ने लगी. अपनी चूत से उसके लन्ड को मैं कस कसकर दबाने लगी. "हाय, मैं गयी, देवरजी! आह!! ओह!! आह!! पेलते रहो मुझे, देवरजी! आह!! आह!! आह!! उम्म!! उफ़्फ़!! क्या मज़ा दे रहे हो!!"

झड़ने के बाद कुछ देर अपनी गांड ऊंची करके मैं पड़ी रही और किशन मुझे समान गती से चोदता रहा. फिर मैने उसे अपना लन्ड मेरी चूत से निकलने को कहा.

वह हटा तो मैं गुलाबी के ऊपर से उतर गयी और बोली, "चलो, देवरजी, अब गुलाबी को चोदने का सुख प्राप्त कर लो! वह भी तड़प रही है तुमसे चुदवाने के लिये."

नेकी और पूछ पूछ! किशन गुलाबी के नंगे बदन पर झपट पड़ा. उस पर चढ़कर उसके होंठ जोश मे पीने लगा और उसकी नंगी चूचियों को जोर जोर से मसलने लगा. एक नये मर्द के प्यार को पाकर जल्दी ही गुलाबी भी गरम हो गयी.

गुलाबी से और रहा नही जा रहा था. उसने किशन के लन्ड को अपनी चूत पर सेट किया और बोली, "हाय, किसन भैया! हमसे और रहा नही जा रहा! पेल दो हमरी चूत मे अपना औजार!"

किशन ने एक जोरदार धक्के से अपना पूरा लन्ड गुलाबी की चूत मे पेल दिया. गुलाबी थोड़ा सा चिहुक उठी, पर बोली, "आह!! हाय, किसन भैया, अब हमे बस चोद डालो!"

किशन गुलाबी को बेरहमी से चोदने लगा. जब उसका पेट गुलाबी के पेट से टकराता तो जोर के ठाप! की आवाज़ होती.

मैं समझ गयी यह लड़का अब 5 मिनट भी नही टिकेगा. पर गुलाबी भी झड़ने को आ गयी थी. वह किशन को जकड़कर उसके होठों को जी भर के पी रही थी और अपनी कमर उठा उठाकर उसके लन्ड को अन्दर ले रही थी.

"आह!! उम्म!! हाय भाभी, कितना अच्छा चोद रहे हैं, किसन भैया! उफ़्फ़!!" वह बड़बड़ाने लगी. "आप रोज उनसे चुदाकर मजा लेती हैं! ओह!! हाय, अब से हम भी रोज चुदायेंगे! आह!! आह!! ओह!!"

किशन का गोरा लन्ड गुलाबी की सांवली बुर मे पिस्टन की तरह अन्दर बाहर हो रहा था.

गुलाबी बस अब झड़ने ही वाली थी. मैने उसका एक हाथ पकड़ लिया. वह मेरा हाथ कस के पकड़कर झड़ने लगी. "आह!! आह!! आह!! हाय राम!! हम झड़ गये!! आह!! आह!! ओह!! ऊई माँ!!"

गुलाबी झड़कर निढाल हो गयी, पर किशन अब भी तेजी से चोदे जा रहा था.

मैने उसके कमर को पकड़कर खींचा और उसके लन्ड को गुलाबी की चूत से निकाल दिया.

"हाय, भाभी! क्या कर रही हैं आप!" वह झुंझलाकर बोला, "मेरा बस होने ही वाला है!"

"रुको ना, देवरजी! पानी निकालने की इतनी भी क्या जल्दी है?" मैने कहा, "मै तुम दोनो को एक नया मज़ा सिखाना चाहती हूँ. तुम गुलाबी के दोनो तरफ़ पाँव रखकर उसके चूचियों के बीच अपना लन्ड रखो."

किशन ने ऐसा किया तो मैने कहा, "अब उसकी चूचियों को पकड़कर अपने लौड़े पर दबाओ और बीच मे अपना लन्ड पेलो."

किशन ऐसा करने लगा तो उसे काफ़ी मज़ा आने लगा.

उसने कुछ देर गुलाबी की चूचियों को चोदा फिर बोला, "भाभी, मेरा अब माल निकलने वाला है. मैं और नही ठहर सकता."

"तो निकाल दो ना." मैने कहा.

"कहाँ, गुलाबी के सीने पर?"

"हाँ, और कहाँ?"

गुलाबी बोली, "हाय भाभी! किसन भैया अभी पानी निकालेंगे तो पूरा हमरे मुंह पर आ गिरेगा!"

"तो गिरे ना." मैने शरारती मुसकान के साथ कहा, "तुझे पता नही, मर्द की मलाई मुंह पर लगाने से त्वचा बहुत अच्छी रहती है?"

"नही भाभी, हमे तो घिन्न होती है!" गुलाबी बोली.

"एक बार लगवाकर देख. नही होगी घिन्न." मैने कहा.

गुलाबी आंखे जोर से बंद किये लेटी रही और किशन गहरी सांसें भरते हुए उसकी चूचियों को कुछ देर चोदता रहा.

फिर किशन जोर से "आह!! आह!! आह!! आह!!" करके अपना पानी छोड़ने लगा.

सफ़ेद सफ़ेद लसलसा वीर्य पिचकारी की तरह उसके लन्ड से निकलकर गुलाबी के गले और सांवले मुख पर गिरने लगा. 5-6 बार अपना पानी छिड़क कर वह पस्त हो गया और गुलाबी के ऊपर से उतरकर दरी पर बैठ गया. उसका थोड़ा वीर्य गुलाबी की चूचियों पर भी गिर गया था.

 


गुलाबी घिन्न से आंखें बंद किये लेटी रही. उसका सांवला चेहरा किशन के विपुल सफ़ेद वीर्य से भर गया था. मैं उसके चूचियों पर गिरे वीर्य को उसके निप्पलों पर मलने लगी. उसके निप्पल वीर्य से गोंद की तरह चिपचिपे हो गये और तनकर खड़े हो गये.

फिर मैं गुलाबी के मुंह पर झुक गयी और जीभ निकालकर उसके चेहेरे पर पड़े वीर्य को चाटने लगी.

गुलाबी घिन्न से गनगना कर बोली, "हाय भाभी, ई आप का कर रही हैं! आप किसन भैया के मलाई को चाट रही हैं?"

"अरे मलाई ही तो है." मैने कहा, "बहुत स्वादिष्ट होती है मर्द की मलाई. तु भी चखकर देख."

"नही भाभी! ई हम नही कर सकते!" गुलाबी बोली. वह अपनी होठों और आंखें जोर से बंद किये पड़ी रही.

"अरी चुदैल! मैं कहती हूँ, मुंह खोल!" मैने डांटकर कहा.

गुलाबी ने अपने होठों को थोड़ा खोला तो मैने एक उंगली से थोड़ा सा वीर्य उसके चेहरे से उठाया और उसके मुंह मे दे दिया.

गुलाबी ने तुरंत वीर्य के कतरे को गटक लिया और उबकी लेने लगी.

"साली, इतना बुरा तो नही है वीर्य का स्वाद!" मैने कहा, "मैं तो तेरे बड़े भैया का बहुत पीती रहती हूँ."

"हमे आदत नही है ना!" गुलाबी उबकी लेकर बोली.

"आदत पड़ जायेगी तो सीधे लौड़े से गटक गटक कर मलाई पिया करेगी." मैने कहा, "चल मुंह खोल!"

गुलाबी ने फिर मुंह खोला तो मैने और थोड़ा वीर्य उसके मुंह मे दिया. अब की बार वह वीर्य के कतरे को मुंह मे लिये कुछ देर पड़ी रही फिर गटक ली.

"कैसा लगा?" मैने पूछा.

"अच्छा है, भाभी." उसने कहा. उसने अब अपनी आंखें खोल ली थी.

"हूं. चल तेरे को बाकी की मलाई भी पिला देते हूँ." मैने कहा और उसके चेहरे से किशन के वीर्य को चाटकर अपने मुंह मे लेने लगी.

जब मैं पूरा वीर्य अपने मुंह मे ले ली, मैने गुलाबी के मुंह को पकड़कर जबरदस्ती खोला और अपने मुंह से अपना लार और किशन का वीर्य उसके मुंह मे गिरा दिया.

गुलाबी घिन्न से गनगना उठी और अपने हाथ पाँव फेंकने लगी. पर मैने अपने होठों से उसके होठों को दबा दिया और तब तक नही छोड़ा जब तक गुलाबी ने पूरा वीर्य गटक नही लिया.

किशन बैठकर अपनी भाभी और घर की नौकरानी की यह घिनौनी हरकत हैरान होकर देख रहा था.

"कैसा लगा, गुलाबी?" मैने पूछा.

"ठीक ही था, भाभी." उसने जवाब दिया.

"रोज़ पीयेगी तो तुझे वीर्य का स्वाद लग जायेगा." मैने कहा, "फिर तु चूत मे लेने की बजाय मुंह मे लेना ही पसंद करेगी."

हमारी चुदाई समाप्त हो चुकी थी और कुछ देर के लिये हम तीनो को शांति हो गयी थी. मैने उठकर अपनी साड़ी पहन ली और गुलाबी ने अपनी चोली और घाघरा पहन लिया.

किशन को कपड़े पहनता छोड़ हम दोनो छत के सीड़ियों पर आ गये. वहाँ रामु बैठा हुआ था और अब तक हमारे खेल को देख रहा था.

अपने पति को देखते ही गुलाबी मुंह छुपाकर हंसी और दौड़कर सीड़ी से नीचे चली गयी.

"साली, छिनाल! चुदवा ही ली तु किसन भैया से!" रामु ने पीछे से आवाज़ लगाई.

"कब से बैठे हो यहाँ, रामु?" मैने पूछा.

"जब से गुलाबी ऊपर आयी, भाभी." रामु ने कहा, "ऊ दरी लेकर ऊपर आ रही थी तो हम पूछे कि दरी का छत पर का काम है? तो ऊ बोली, भाभी और किसन भैया को चाहिये. हम समझ गये दाल मे कुछ काला है. बहुत जिरह करने पर बोली, आप और किसन भैया ऊपर चुदाई करना चाहते हैं."

"फिर?"

"हमे भी उत्सुकता हो रही थी आप दोनो को चुदाई करते देखने की. पर गुलाबी साफ़ मना कर दी."

"क्यों? वो क्यों मना करने लगी?" मैने पूछा.

"वही तो!" रामु बोला, "हम पूछे, गुलाबी, तु भी किसन भैया से चुदाने का कार्यक्रम बनायी है का? ऊ बोली, का पता! हम एक आजाद औरत हैं. मन करे तो चुदवा भी सकते हैं! कहिये, भाभी, ई कोई बात हुई?"

"फिर तुमने क्या कहा?"

"हम बोले, गुलाबी, तुझे किसन भैया से चुदवाना है तो चुदवा लेना, पर हमको देखने का बहुत मन है." रामु बोला, "ऊ तो सरम से पानी-पानी हो रही थी. राजी ही नही हो रही थी. बहुत मुसकिल से उसे राजी किये ऊपर आने के लिये."

"अच्छा किया तुमने, रामु. तुम्हे देखकर मज़ा आया?"

"अब का कहें भाभी, अपनी जोरु है. अपने सामने पराये मरदों से चुदवाते फिरेगी तो बुरा तो लगेगा ना!" रामु बोला, "पर देखकर मजा भी बहुत आया हमको, भाभी!"

मैं उसकी बात पर हंस दी. बोली, "चलो अच्छा है जो तुमको भी मज़ा आया."

मैं सीड़ी से नीचे जाने लगी तो रामु ने मेरा हाथ पकड़ लिया, "आप कहाँ चल दी, भाभी?"

"नीचे और कहाँ?" मैने पूछा.

"ऐसे ही?" रामु बोला, "आप लोगन की चुदाई देखकर हमरे लन्ड की का हालत है ई आप एक बार सोची?"

"तुम्हारी जोरु अपने कमरे मे गयी है. जाकर उसे चोद लो." उसका इरादा मैं खूब समझ रही थी. पर उसे चिढ़ाने के लिये मैने कहा.

रामु ने मुझे पकड़कर अपने सीने से चिपका लिया और मेरे होठों को चूमकर बोला, "हमे गुलाबी-सुलाबी को नही चोदना! हम तो तुझे चोदेंगे. यहीं, सीड़ियों पर. पूरी नंगी करके, रंडी की तरह चोदेंगे! कोई आ जाये तो देखेगा कैसे घर की बहु अपने नौकर से चुदवा रही है!"

"रामु, पागल मत बनो!" मैने कहा, "किशन छत पर कपड़े पहन रहा है. कभी भी आ सकता है."

"तो आ जाये ना!" रामु बोला, "तु तो उससे चुदा ही चुकी है."

"पर उसे नही पता ना मैं तुमसे भी चुदवा रही हूँ!"

"जब तेरी चूत मे मेरा काला लौड़ा देखेगा ना, सब समझ जायेगा."

"ओफ़्फ़ो! तुम समझते क्यों नही हो, रामु!" मैने कहा, "समय आने पर मैं उसे सब बता दूंगी. तब तुम चाहो तो दोनो मिलकर मेरी चूत मारना. पर अभी तुम मुझे यहाँ मत चोदो."

"तो कहाँ लेके चोदें?"

"अपने कमरे मे ले चलो." मैने कहा.

"वहाँ तो गुलाबी होगी."

"तो हो ना. उसके सामने ही चोद लेना." मैने कहा.

रामु और मैं सीड़ियों से नीचे आ गये और सीधे रामु और गुलाबी के कमरे मे चले गये. रामु की जबरदस्ती और बेइज़्ज़ती भरी भाषा से मैं फिर चुदास से भर उठी थी.

रामु ने मुझे कमरे के अन्दर धकेल दिया और दरवाज़ा बंद कर दिया.

कमरे के अन्दर गुलाबी आईने के सामने अपने बिखरे बालों को संवार रही थी. मुझे देखते ही बोली, "भाभी, आप यहाँ?"

"देख ना तेरा आदमी मुझे जबरदस्ती पकड़कर लाया है." मैने कहा और उसके खाट पर बैठ गयी.

"काहे भाभी?" गुलाबी ने पूछा.

"चोदने के लिये और क्या." मैने कहा, "तु किशन से चुदवा रही थी देखकर बहुत भड़क गया है. अब तो न जाने मेरा क्या हाल करेगा!"

"तेरी चूत को पेल पेलकर भोसड़ा बना देंगे!" रामु ने कहा और मुझे बिस्तर पर लिटाकर जबरदस्ती चूमने लगा.

"हाय दईया! तुम भाभी से यह कैसे बात कर रहे हो?" गुलाबी ने हैरान होकर पूछा.

"साली रंडी. इससे ऐसे ही बात करनी चाहिये!" रामु बोला, "मेरी भोली भाली जोरु को छिनाल बना डाली है! पहले तुझे अपने मरद से चुदवाई, फिर अपने देवर से चुदवाई. अब न जाने तुझे किस किससे चुदवायेगी!"

"हाय, रामु!" मैं सित्कारी लेकर बोली, "और मत तड़पाओ, मेरे राजा! मेरे कपड़े फाड़ दो. मुझे जल्दी से नंगी कर दो!"

गुलाबी खड़े होकर अपने पति की भद्दी भाषा और मेरी चुदास देखकर हैरान हो रही थी.

चुंबन के बौछारों के बीच मैने अपनी ब्लाउज़ सामने से खोल दी अपने चूचियों को नंगी कर दी. रामु बेरहमी से मेरी चूचियों को मसलने लगा.

"आह!! रामु, इतना जोर से मत मसलो! दर्द होता है!" मैने कहा.

"जी तो कर रहा है तेरी चूचियों को नोच ही डालूं!" रामु बोला, "न जाने कितने मर्दों ने इन्हे दबाया और चूसा है!"

"हाय रामु, और देर मत करो! आह!! मेरी चूत मे अपना लन्ड डाल दो!" मैने कहा, "गुलाबी, ज़रा रामु की पैंट उतार दे तो."

"जी, भाभी!" बोलकर गुलाबी पास आयी और रामु की पैंट के हुक और ज़िप खोलकर उसके पाँव से अलग कर दी. फिर उसके चड्डी को भी उतार दी.

रामु का काला, मोटा लन्ड तनकर खड़ा था. उसे पकड़कर गुलाबी ने कुछ देर हिलाया, फिर वह बोली, "उतार दिये हैं, भाभी."

मैने अपने घुटने सिकोड़ लिये तो साड़ी और पेटीकोट मेरे कमर पर आ गयी. मेरी चूत गुलाबी के सामने आ गयी. उसने अपने पति के लन्ड को पकड़ा और सुपाड़े को मेरी चूत के छेद पर सेट किया. फिर बोली, "सुनो जी, हम तुम्हारा लौड़ा भाभी की चूत पर लगा दिये हैं. अब अन्दर घुसा दो."

रामु हवशी की तरह मुझे चुमे जा रहा था. गुलाबी के कहने पर कमर के एक धक्के से पूरा लन्ड मेरी चूत मे पेल दिया और तबाड़-तोड़ ठाप लगाने लगा. उसका खाट ठापों के चोट से चरमराने लगा.

गुलाबी खड़े होकर अपने पति को एक परायी औरत को चोदते हुए देख रही थी. उसे ईर्ष्या या जलन होने की बजाय एक भ्रष्ट किस्म का आनंद आ रहा था. वह अपने घाघरे मे हाथ डालकर अपनी अभी-अभी चुदी चूत मे उंगली करने लगी. मुझे भी उसके सामने उसके पति से चुदवाने मे एक नया मज़ा आ रहा था.

रामु के बेरहम ठापों से मैं जल्दी ही झड़ने के करीब आ गयी. मैने कहा, "आह!! रामु, थोड़ा धीरे पेलो नही तो तुम झड़ जाओगे तो मेरा क्या होगा!"

"फिर तु किसी और से चुदवा लेना, साली! तेरे यारों की गाँव मे कोई कमी है क्या?" रामु अपनी कमर चलाते हुआ बोला, "हम तेरे को संतुष्ट करने के लिये...थोड़े चोद रहे हैं...हम तो अपनी प्यास बुझा रहे हैं...चुदाई मे रंडी की प्यास बुझी कि नही...कौन पूछता है?"

"ओह!! आह!! हाय मेरे राजा! और चोदो!! और थोड़ी देर पेलो...ओफ़्फ़!! मैं बस झड़ने वाली हूँ!" मैने चिल्लायी.

रामु के जोरदार ठापों से मैं जल्दी ही झड़ने लगी. उसके बालों को मुट्ठी मे पकड़कर और अपने पाँव को उसके कमर मे जकड़कर मैं खलास हो गयी. पिछले एक देड़ घंटे मे मेरा तीसरा स्खलन था. मैं थक कर रामु के नीचे पड़ी रही.

मुझे पस्त देखकर रामु बोला, "साली, कुतिया! हमसे पहिले ही झड़ गयी! अब तुझे चोदकर क्या मज़ा आयेगा!"

"अच्छा तो तुम गुलाबी को चोद लो." मैने कहा.

"उसे तो हम रोजे चोदते हैं." रामु बोला.

"उसे मैने एक नयी कला सिखायी है." मैने कहा, "क्यों, गुलाबी?"

गुलाबी मुस्कुराकर बोली, "सुनो जी, तुम भाभी की चूत से अपना लौड़ा निकालो. हम तुम्हे एक नया मजा देते हैं."

रामु ने मेरी चूत से अपना लन्ड निकाला और मेरे बगल मे लेट गया. उसका खड़ा लन्ड मेरी चूत के पानी से चमक रहा था.

गुलाबी उसके पैरों के बीच बैठी और उसके लन्ड को मुंह मे ले ली. मेरे चूत के पानी को उसने बहुत प्यार से चाटकर साफ़ किया.

"ई मा नया का है रे?" रामु बोला, "हमरा लौड़ा तो तु पहिले भी चूसी है."

"अरे रुको ना!" गुलाबी बोली और फिर पति के लन्ड को चूसने लगी.

कुछ देर की ही चुसाई के बाद रामु झड़ने को आ गया और बोला, "गुलाबी, हमरा पानी निकलने वाला है. तु मुंह हटा ले!"

"ऊंहूं." गुलाबी ने कहा और चूसना जारी रखा.

"आह!! पागल लड़की, मुंह हटा! हमरा पानी निकल रहा है! आह!! आह!! आह!! ऊह!!" बोलकर रामु झड़ने लगा. उसके पेलड़ से खूब सारा वीर्य गुलाबी के मुंह मे गिरने लगा.

पर आश्चर्य! गुलाबी ने अपना मुंह नही हटाया. उसने पूरा वीर्य अपने मुंह मे ही ले लिया.

जब रामु झड़कर शांत हुआ तो गुलाबी ने अपना मुंह लौड़े पर से उठाया और मेरी तरफ़ देखा. वीर्य इतना ज़्यादा था कि उसके मुंह मे नही समा रहा था. थोड़ा सफ़ेद वीर्य उसके होठों से रिस कर बाहर बहने लगा.

"हाय, गुलाबी! एक ही बार मेरे देवर की मलाई खाकर तुझे चस्का लग गया?" मैने पूछा, "कैसा लग रहा है स्वाद?"

"उम्म...उम्म...उम्म!" उसने बंद मुंह से जवाब दिया.

"ई का कर रही है, पिसाच औरत!" रामु ने हैरान होकर पूछा.

 
गुलाबी ने अपना मुंह खोला और रामु को अपना वीर्य से भरा मुंह दिखाया. मुंह खुलते ही थोड़ा सा लिसलिसा सफ़ेद वीर्य उसके मुंह से निकल आया और उसके गले पर बहने लगा. गुलाबी ने जल्दी से अपना मुंह बंद कर लिया.

फिर एक बार मे पूरे वीर्य को गले से उतारकर बोली, "तुम्हारी मलाई पी रहे हैं! बहुत स्वादिस्ट है!" फिर खिलखिला कर हंसने लगी.

"भाभी, आप का का सिखायी हैं इस बेचारी को?" रामु ने मुझे कहा, "एक दम कोठे की रंडी बना डाली हैं मेरी गुलाबी को!"

गुलाबी चहक के बोली, "तुम काहे परेसान हो रहे हो, जी? हमको मलाई पीने का मन हुआ तो हम पी लिये. तुमको थोड़े बोले पीने को. तुम बस हमरी चूत चाट दिया करो. हम उसी से खुस हो जायेंगे."

फिर अपने ठोड़ी और गले पर बहते वीर्य को उंगली से उठाकर अपने मुंह मे ले लिया.

"रामु, बीवी रंगीन मिज़ाज की हो तो उसे चोदकर भी मज़ा आता है." मैने कहा, "मैं यह सब तुम्हारे लिये ही कर रही हूँ."

सुनकर रामु चुपचाप लेटा रहा.

मैं अपने कपड़े ठीक करके कमरे से बाहर आयी और रसोई मे जाकर तुम्हारी मामीजी को आज की प्रगती की जानकरी दी. किशन ने गुलाबी को चोद लिया है सुनकर वह बहुत खुश हुई. वह जल्दी ही अपने छोटे बेटे से भी चुदवाना चाहती थी.

उस रात फिर सासुमाँ तुम्हारे बलराम भैया के कमरे मे सोई और देर रात तक माँ-बेटे मे चुदाई चलती रही. मैं दिन मे दो बार चुदवाकर काफ़ी थक गयी थी. पर ससुरजी ने मुझे रात को एक और बार चोदा फिर वह मेरे नंगे बदन को बाहों मे लेकर सो गये.

वीणा, आज का ख़त बस यहीं तक. मुझे ज़रूर बताना तुम्हे कैसी लगा.

तुम्हारी चुदैल भाभी

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भाभी की चिट्ठी वाकई बहुत गरम थी. पहली बार मैने सोनपुर मे विश्वनाथजी का वीर्य पिया था. शुरु शुरु मे मुझे भी बहुत घिन्न हुई थी, पर उन्होने मुझे जबरदस्ती अपना वीर्य पिला दिया था. पर बाद मे चलकर मुझे वीर्य का स्वाद लग गया. इसलिये मुझे आश्चर्य नही हुआ जब मैने पढ़ा कि गुलाबी ने अपने पति का वीर्य खुश होकर पिया.

मैने भाभी की चिट्ठी का जवाब भेजा.

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प्रिय चुदैल भाभी,

तुम्हारी चिट्ठी मिली. पढ़कर बहुत मज़ा आया. तुम्हारे घर मे तुमने कोई कुकर्म करना बाकी छोड़ा है क्या? तुमने एक बेचारी 18-19 साल की बच्ची को मर्द का वीर्य पीना सिखा दिया! खैर आगे की घटनाओं को जल्दी से लिखो. मैं बेसब्री से इंतज़ार कर रही हूँ!

तुम्हारी ननद वीणा

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अगले दिन मैं अपने घर के बैठक मे बैठकर चाय पी रही थी. अब क्या करूं घर पर शराब तो पी नही सकती! तभी बाहर से साईकिल की घंटी की आवाज़ आयी और साथ मे डाकिये ने मुझे आवाज़ लगायी, "बिटिया, तेरी भाभी की चिट्ठी है!"

मैं चाय छोड़कर बाहर भागी और डाकिये से चिट्ठी ले ली. काफ़ी बड़ा लिफ़ाफ़ा था. लग रहा था मीना भाभी के घर मे बहुत कुछ हुआ है.

जल्दी से भाभी की चिट्ठी लेकर अपने कमरे मे जाने लगी तो मेरी माँ बोली, "अरे तु चाय छोड़कर कहाँ चली!"

"बाद मे पी लूंगी, माँ!" मैने कहा और सीड़ी से ऊपर भागी.

"न जाने यह दोनो ननद-भाभी इतनी क्या चिट्ठियां लिखा करती हैं!" मेरी माँ बड़बड़ायी.

"अरे तुम तो हर बात मे परेशान होती हो!" मेरे पिताजी बोले, "जवान लड़कियों को आपस मे बहुत गप्पें बाँटनी होती है. तुम्हारे भाई की बहु तो हमारी वीणा से थोड़ी ही बड़ी है."

अपने कमरे मे पहुंचकर मैने भाभी की चिट्ठी खोली.

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मेरी प्यारी ननद रानी,

तुम्हारा ख़त मिला. तुम सच कहती हो. तुम जब तक गुलाबी से मिलोगी वह शायद हाज़िपुर के रंडी बाज़ार मे रंडीबाज़ी कर रही होगी! पहले तो बेचारी कितनी भोली सी थी. पर मेरी शिक्षा से वह बहुत जल्दी सयानी हो गयी है. लड़की मे बहुत चुदास है और नयी नयी चीज़ें आज़माने की इच्छा भी.

मैने अपने पिछले ख़त मे लिखा था कि मैने उसे अपने देवर से चुदवा दिया है और उसे मर्द का वीर्य पीना सिखाया है. आज की किश्त पढ़कर तुम समझोगी के गुलाबी को अभी काफ़ी गिरना बाकी है. मुझे तो उसे बर्बाद करने मे बहुत ही मज़ा आ रहा है!

अगले दिन सुबह की बात बताती हूँ. सासुमाँ, मैं और गुलाबी रसोई मे नाश्ता तैयार कर रहे थे.

सासुमाँ ने पूछा, "गुलाबी, घर पर झाड़ू लगा दी है क्या?"

"नही मालकिन, अभी नही." गुलाबी बोली, "हम सोचे पहिले नास्ते का काम निपटा लेते हैं."

"नही, तु अभी जा के झाड़ू लगा दे. पोछा बाद मे कर देना." सासुमाँ बोली, "आज खेत मे नही जाना है तो बाप और दोनो बेटे घोड़े बेचकर सो रहे हैं. उन्हे जगा भी देना."

गुलाबी का चेहरा चमक उठा और वह मेरी तरफ़ देखकर मुस्कुरा दी. कुछ तो शैतानी खुराफ़ात उसके दिमाग मे चल रहा था.

वह जल्दी से उठी और रसोई से भागकर निकल रही थी कि अपने पति से टकरा गई. रामु बाज़ार से सब्ज़ी, अंडा, मछली, वगैरह लेके आ रहा था.

अपनी बीवी को ऐसे भागते देखकर बोला, "अरे कहाँ पागल की तरह भागे जा रही है."

गुलाबी बिना जवाब दिये चली गयी तो रामु बोला, "न जाने क्या किये फिरती है, लड़की!"

"माँ ने उसे देवरजी और मेरे कमरे मे झाड़ू लगाने भेजा है." मैने कहा, "तभी इतनी खुश हो रही है."

सासुमाँ कढ़ाई मे कड़छी चला रही थी. वह बोली, "रामु, मैने सुना तेरी जोरु ने मेरे छोटे बेटे के साथ भी मुंह काला कर लिया है?"

"आप ठीके सुनी हैं, मालकिन." रामु ने सर झुकाकर कहा.

"मैने तो पहले ही कहा था, तेरी जोरु मेरे दोनो बेटों से चुदाने के लिये ललचा रही है." सासुमाँ बोली, "पर तु कहाँ रहता है आजकल? बीवी दूसरों से चुदती है और तु देखकर खुश हो लेता है?"

सुनकर मैं घूंघट मे मुंह छुपाकर हंस दी.

"ऊ बात नही है, मालकिन." रामु बोला.

"फिर मेरी बहु की चूत की सेवा मे लगा है क्या? उसकी सेवा के लिये तो बहुत मर्द हैं घर पर. वह तो किशन से भी चुदवा रही है." सासुमाँ बोली, "सुन, मेरे कमर मे बहुत दर्द है. नाश्ते के बाद मैं छत पर धूप मे बैठुंगी. तु आके ज़रा तेल लगा देना."

"हम गुलाबी को बोल देंगे ना मालिस करने के लिये." रामु बोला.

"चूतिये!" सासुमाँ बौखला के बोली, "मेरी चूत मारनी हो तो वह भी गुलाबी ही मारेगी क्या?"

"जी मालकिन, हमे मालिस कर देंगे." रामु मसला समझकर बोला.

रामु बार-बार रसोई के दरवाज़े की तरफ़ देख रहा था.

सासुमाँ बोली, "तु बार-बार बाहर क्या देख रहा है?"

"कुछ नही, मालकिन." रामु बोला.

"माँ, गुलाबी देवरजी के कमरे मे झाड़ू लगाने गयी है ना. उसी को लेके चिंतित है बेचारा." मैने कहा.

"इसमे चिंता की क्या बात है?" सासुमाँ कढ़ाई मे कड़छी चलाते हुए बोली, "सुबह-सुबह जवान लड़के के कमरे मे जायेगी तो चुदकर ही बाहर आयेगी."

"हम जायें, मालकिन?" रामु ने पूछा.

"कहाँ? जोरु को चुदते देखने?" सासुमाँ ने पूछा.

"जी." रामु ने धीरे से जवाब दिया.

"तु सच मे बहुत गिरा हुआ आदमी है रे, रामु." सासुमाँ बोली, "जा. दिल खुश कर ले."

"मै भी जाऊं, माँ?" मैने पूछा.

"हाँ, जा." सासुमाँ बोली, "पर जल्दी आ जाना. इधर बहुत काम."

रामु और मैं रसोई के बाहर आ गये. गुलाबी पहले किशन के कमरे मे झाड़ू लगाती है. हम वही गये.

किशन का दरवाज़ा बंद था, पर अन्दर देखना कोई मुश्किल नही था. रामु और मैं दो छेदों से अन्दर देखने लगे.

 


गुलाबी झाड़ू लगा रही थी और किशन खाट पर लेटे उसके घाघरे मे ढके सुडौल चूतड़ों को देख रहा था.

अचानक गुलाबी का हाथ पकड़कर किशन ने उसे अपने पास खींच लिया.

"हाय, किसन भैया!" गुलाबी बोली, "ई का कर रहे हैं!"

"मेरी जान, इतना काम कर रही है. थोड़ा प्यार भी कर ले!" किशन बोला.

"हमको बहुत काम है, किसन भैया." गुलाबी बोली, "अभी हमे छोड़ दीजिये. हम बाद मे आपके कमरे मे आके जितना चाहो पियार कर लेंगे."

पर किशन कहाँ मानने वाला था! नौजवान लड़कों का लन्ड सुबह-सुबह खड़ा हो जाता है.

उसने गुलाबी को जबरदस्ती बिस्तर पर लिटा दिया और उस पर चढ़कर उसके नरम होठों को पीने लगा. एक हाथ से वह गुलाबी की एक चूची को दबाने लगा और दूसरा हाथ उसके घाघरे मे घुसाकर उसकी चूत को सहलाने लगा. गुलाबी खी-खी करके हंसने लगी और किशन के चुंबनों का मज़ा लेने लगी.

कुछ देर की चुम्मा-चाटी के बाद किशन उठा और उसने अपना पजामा उतार दिया. उसने नीचे चड्डी नही पहनी थी. उसका लन्ड फनफना के खड़ा था.

गुलाबी के घाघरे को उठाकर उसने अपना लन्ड उसकी चूत पर रखा तो गुलाबी बोली, "किसन भैया, हमे देर हो रही है. हम ई सब बाद मे कर लेंगे."

"अभी तुझे जल्दी से एक पानी चोद लेता हूँ." किशन कमर का धक्का लगाते हुए बोला.

अपना लन्ड गुलाबी की चूत मे पेलने के बाद किशन उसे जोरों से चोदने लगा. गुलाबी भी सित्कार ले लेकर चुदवाने लगी.

पर 5-10 मिनट की चुदाई के बाद ही किशन गुलाबी की चूत मे झड़ गया.

"हाय, किसन भैया. आप इतनी जल्दी झड़ गये!" गुलाबी निराश होकर बोली, "हमे तो मज़ा ही नही आया."

"दोपहर के खाने के बाद आना तब इत्मीनान से चोदुंगा." किशन बोला, "अब जा यहाँ से वर्ना माँ सोचेगी तुझे झाड़ू लगाने मे इतनी देर क्यों लग रही है."

गुलाबी ने अपना घाघरा नीचे किया और बिस्तर से उतरकर बाहर आ गयी. बाहर रामु और मुझे देखकर खिसिया के हंस दी और झाड़ू लेकर मेरे कमरे मे भाग गयी.

मेरे कमरे मे मेरे पति देव - जो देर रात तक अपनी माँ को चुदाई का सुख देते रहे थे - एक चादर के नीचे पूरे नंगे सो रहे थे.

गुलाबी ने धीरे से अपने पीछे दरवाज़ा बंद किया और बिना आवाज़ किये झाड़ू लगाया.

फिर तुम्हारे भैया को पुकार के बोली, "बड़े भैया! उठ जाईये! सुबह हो गयी है!"

मेरे उन्होने आंखें खोली तो गुलाबी के चेहरे को अपने करीब पाया.

उन्होने उसके गले मे एक हाथ डालकर उसे अपने चौड़े सीने के ऊपर खींच लिया और बोले, "क्यों रे गुलाबी, कल कहाँ हवा हो गयी थी?"

"हम यही तो थे, बड़े भैया." गुलाबी उनके सीने पर लेटे लेटे बोली.

"फिर चुदवाने क्यों नही आयी?" वह बोले, "पायल मिल गयी तो मुझे भूल गयी क्या?"

"नही, बड़े भैया. हम तो आपको वचन दिये हैं कि आप जब चाहे हमे चोद सकते हैं." गुलाबी बोली.

"मुझे तो अभी तुझे चोदने का मन कर रहा है." मेरे वह बोले और गुलाबी को चूमने लगे.

"बाद मे, बड़े भैया." गुलाबी बोली, "हम अभी घर का काम कर रहे हैं."

"नही, गुलाबी, अभी." मेरे वह गुलाबी की चोली उतारते हुए बोले, "तुने मुझे वचन दिया है कि जब और जहाँ मुझे मन करे मैं तुझे चोद सकता हूँ. जब और जहाँ. और मुझे अब और यहीं तुझे चोदने का मन कर रहा है."

"ठीक है बड़े भैया." गुलाबी कमर से अपना घाघरा उतारती हुई बोली, "पर जल्दी कीजिये, नही तो मालकिन सोचेगी हम कहाँ इतना समय लगा रहे हैं."

घाघरा उतारते ही गुलाबी पूरी नंगी हो गयी.

तुम्हारे भैया ने अपना चादर हटाया और गुलाबी पर चढ़ गये. नंगे तो वह थे ही. अपना 8 इंच का खड़ा लन्ड गुलाबी की चूत पर रखकर उन्होने अन्दर पेला तो किशन का वीर्य उसकी चूत से निकल आया.

"यह क्या गुलाबी!" वह हैरान होकर बोले, "तेरी चूत तो पहले से ही भरी हुई है! सुबह-सुबह किससे से चुदवाकर आ रही है?"

"अपने मरद से, और किससे?" गुलाबी ने हाजिर-जवाबी से कहा, "हम अपने कमरे मे झाड़ू लगा रहे थे कि मुए ने हमे पटककर एक पानी चोद लिया."

"चलो, कोई बात नही." तुम्हारे भैया बोले, "इससे तेरी चूत काफ़ी चिकनी हो गयी है. पेलने मे मज़ा आ रहा है." बोलकर वह गुलाबी को चोदने लगे.

कमरे के अन्दर कुछ देर चुदाई चलती रही.

गुलाबी तुम्हारे भैया से लिपटकर चूत मे लन्ड ले रही थी, चूचियों को मिसवा रह थी और चुंबनों का आनंद ले रही थी. किशन से चुदवाकर उसकी प्यास बुझी नही थी. बीच-बीच मे वह कसकर उन्हे पकड़ लेती और "आह!! आह!! ऊन्ह!!" कर उठती.

इधर दरवाज़े के बाहर रामु और मैं अन्दर का नज़ारा देख रहे थे.

"कैसी रांड बन गयी है हमरी जोरु!" रामु बोला. "एक मरद से चुदाकर तुरंते दूसरे मरद का लन्ड लेने लग गयी है!"

"हाँ! काफ़ी सयानी हो गयी है, गुलाबी." मैने कहा. "वैसे एक के बाद एक दो मर्दों से चुदवाने का मज़ा ही अलग होता है. अभी देखो, तुम्हारे बड़े भैया से चुदकर तुम्हारे मालिक के कमरे मे जाती है तो क्या होता है."

"का होगा, भाभी?" रामु ने पूछा, "मालिक भी उसे चोदेंगे का?"

"क्या पाता!" मैने कहा और अन्दर देखने लगी.

वीणा, वास्तव मे तुम्हारे मामाजी का पूरा इरादा था आज गुलाबी को चोदने का. कल हम दोनो चुदाई के दौरान जब इस बारे मे बात कर रहे थे तो मैने उन्हे कहा कि गुलाबी अब काफ़ी खुल गयी है. अब वह चाहे तो उसे पटककर चोदने का अपना सपना पूरा कर सकते हैं.

 
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