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गुलाबी बिस्तर पर बैठी हुई थी. उसका घाघरा उसकी कमर तक चढ़ा हुआ था और वह एक हाथ से अपनी चूत मे उंगली पेल रही थी. दूसरे हाथ से उसने तुम्हारे भैया का लंबा, मोटा लन्ड जड़ के पास पकड़ा हुआ था और अपना सर ऊपर-नीचे करके लन्ड को चूस रही थी. ऊपर से वह पूरी तरह नंगी थी और तुम्हारे भैया उसकी लटकती चूचियों को मसल रही थे. गुलाबी को काफ़ी मज़ा आ रहा था. वह "आह!! ऊंह!! ऊम्म!!" की सित्कारियाँ ले रही थी.
तुम्हारे भैया ने सिर्फ़ एक बनियान पहनी हुई थी जिसे उन्होने सीने पर चढ़ा दिया और कहा, "गुलाबी, इधर आ और मेरे निप्पलों को चूस दे."
गुलाबी उनके भूरे निप्पलों को मुंह मे लेकर बारी-बारी चूसने लगी.
कुछ देर बाद, तुम्हारे भैया ने गुलाबी को खींचकर अपने ऊपर लिटा लिया. अपने होंठ गुलाबी के नरम फुले फुले होठों पर रखकर उन्हे मज़े लेकर पीने लगे. गुलाबी भी जोश मे उनके होंठ पीने लगी.
तुम्हारे भैया ने गुलाबी की टांगों को अपने दोनो तरफ़ रखा, उसके घाघरे को कमर तक चढ़ा दिया जिससे उसके सुडौल चूतड़ नंगे हो गये. फिर उसके कमर को पकड़कर उसकी चूत को अपने खड़े लन्ड पर सेट किया और अपने मोटे सुपाड़े को गुलाबी की चूत के फांक मे ऊपर-नीचे करके रगड़ने लगे. उनके हाथ गुलाबी की नंगी चूचियों को मसल जा रहे थे.
गुलाबी मस्ती मे जोर से "आह!! उम्म!! ऊह!!" की आवाज़ें करने लगी.
रामु दरवाज़े की दरार मे आंखें गाड़े पड़ा था. मैने उसके पैंट के ऊपर से उसका लन्ड दबाया तो पाया कि लन्ड तो बहुत कड़ा हो गया है. मैने उसकी पैंट खोल दी, चड्डी उतार दी और उसका लन्ड लेकर हिलाने लगी.
रामु ने दरवाज़े की छेद से आंख हटायी तो मैने कहा, "कैसा लग रहा है गुलाबी को देखना?"
रामु ने शरमाकर कहा, "अच्छा ही लग रहा है, भाभी."
"मैने कहा था ना, जब बीवी किसी और मर्द से चुदती है तो पति को देखने मे बहुत मज़ा आता है?" मैने उसका लन्ड हिलाते हुए जवाब दिया.
सासुमाँ ने पीछे से मेरी ब्रा की हुक खोल दी और मेरी ब्रा अलग कर दी. वह बोली, "रामु, मन करे तो तु बहु की चूचियां पी सकता है."
रामु ने तुरंत मेरी नंगी चूचियों पर मुंह लगा दिया और बहुत जोश मे उन्हे चूसने लगा.
"हाय रामु, इतने गरम हो गये हो अपनी जोरु की चुदाई देखकर?" मैने कहा, "ज़रा मुझे अन्दर तो देखने दो!"
रामु और मैं दो अलग छेदों से अन्दर देखने लगे.
सासुमाँ रामु के पैरों के बीच बैठ गयी और उसका काला, मोटा लन्ड मुंह मे लेके चूसने लगी. रामु धीरे धीरे उनका मुंह चोदते हुए अन्दर का नज़ारा देखने लगा.
तुम्हारे भैया ने कुछ देर गुलाबी की चूत पर अपना सुपाड़ा रगढ़ा. फिर उसकी चूत के छेद पर सुपाड़े को सेट करके ऊपर की तरफ़ धक्का दिया.
गुलाबी बहुत ही गरम हो चुकी थी और उसकी चूत से बहुत पानी बह रहा था. लन्ड का सुपाड़ा आराम से उसकी चूत मे घुस गया. पर तुरंत ही उसने अपनी कमर उठायी और सुपाड़े को चूत से निकाल दिया.
"ई का कर रहे हैं, बड़े भैया!" वह बोली और मेरे पति के ऊपर से उतर गयी और नीचे ज़मीन पर खड़ी हो गई.
तुम्हारे भैया हैरानी और गुस्से मे चिल्ला उठे. "क्या कर रहा हूँ मैं? साली, इतनी देर से तुझे क्या लग रहा है क्या कर रहा हूँ मै? तुझे चोदने के लिये गरम कर रहा हूँ, और क्या!"
"पर हम ऊ सब नही करना चाहते, बड़े भैया." गुलाबी बोली और जल्दी से अपनी चोली पहनने लगी.
"चूतमरानी, तो फिर तु इतने देर से कर क्या रही थी?" तुम्हारे भैया भड़क कर बोले.
"बड़े भैया, आप गुस्सा मत हों!" गुलाबी गिड़गिड़ाकर बोली, "हम तो हमरे मरद को जलाने के लिये ई सब कर रहे थे. भाभी बोली हमको ई सब करने को."
"मीना ने तुझे कहा कि मेरा इस्तेमाल कर रामु को जलाने के लिये?" मेरे पति देव आश्चर्य से बिफर पड़े, "कैसी कैसी योजनायें बनाती रहती है यह पागल औरत! अगर मैं उससे प्यार नही करता तो उसका गला दबा देता!"
मैने अपने माथे पर अपना हाथ दे मारा.
सासुमाँ ने पूछा, "क्या हुआ, बहु?"
"माँ, कैसी मूर्ख लड़की है यह!" मैने कहा, "चूत मे लन्ड घुसने को है, अब कहती है उसे नही चुदवाना!"
सासुमाँ हंसी और रामु के लन्ड को फिर चूसने लगी.
उधर गुलाबी ने चोली पहन ली और दरवाज़े की तरफ़ जाने लगी.
मैने रामु को कहा, "क्यों रामु, तुम्हारी पतिव्रता जोरु तो बिना चुदे ही निकल आ रही है!"
"जब उसने चूची चुसवा ली, चूत मे लन्ड भी घिसवा ली, अब बचा ही क्या है?" रामु ने जवाब दिया, "अब चुदे न चुदे कोई फरक नही पड़ता है."
"तो तुम गुलाबी को चुदते देखना चाहते हो?" मैने पूछा.
"हाँ, भाभी. बहुत मज़ा आ रहा था." रामु बोला, "साली को अब बड़े भैया पटक के चोदे तो और मज़ा आये. बहुत छिनाली कर रही थी."
और हुआ भी यही.
तुम्हारे भैया गुस्से मे पलंग से उतरे और गुलाबी को पकड़कर बोले, "कहाँ जा रही है मेरा लौड़ा खड़ा करके, साली! तु आज यहाँ से चुदे बिना नही जायेगी! बहुत देख लिया तेरा रोज़ का तमाशा!"
बोलकर उन्होने गुलाबी की चोली जबरदस्ती खींचकर उतार दी.
"बड़े भैया, हमे छोड़ दीजिये!" गुलाबी लगभग रोकर बोली, "हमरी इज्जत मत लूटिये."
"तेरी इज़्ज़त है ही क्या?" मेरे वह बोले, "तु हमारे घर के नौकर की जोरु है. तुझे तो घर के सब मर्द जब चाहे तब चोद सकते हैं!"
उन्होने गुलाबी को पकड़कर पलंग पर पटक दिया और उसके घाघरे को कमर तक उठा दिया.
गुलाबी ने अपनी टांगें सिकोड़ ली तो उन्होने उसके घुटनों को पकड़ा और जोर लगाकर दोनो जांघों को अलग कर दिया. फिर उसके पैरों के बीच बैठ गये और उसके पैरों को पकड़ कर अपने कंधों पर रख लिया.
बेचारी गुलाबी ऊपर से नंगी, कमर पर सिर्फ़ अपना घाघरा लिये चूत खोलकर बिस्तर पर पड़ी थी.
वह गिड़गिड़ाकर बोली, "हमे बर्बाद मत कीजिये, बड़े भैया! हमसे बहुत बड़ी गलती हो गयी है. हमे माफ़ कर दीजिये!"
"छिनाल कहीं की, अपने मरद को जलाने के लिये मेरे साथ खिलवाड़ कर रही थी?" मेरे वह बोले.
उन्होने अपने मोटे लन्ड का सुपाड़ा गुलाबी की चूत पर सेट किया और कमर से एक करारा धक्का देते हुए कहा, "अब जब तेरी चूत फटेगी तु समझेगी मेरे साथ खिलवाड़ करने का क्या अंजाम होता है!"
गुलाबी की चूत बहुत ही गीली थी. ऊपर से वह रामु से लगभग रोज़ ही चुदवाती थी. फिर भी, जब तुम्हारे भैया का मोटा 8 इंच का लौड़ा एक धक्के मे पेलड़ तक उसकी चूत मे उतर गया तो वह दर्द से बिलबिला उठी, "हाय!! मर गये हम!! बड़े भैया, अपना औजार बाहर निकालिये! हम मर जायेंगे!!" उसके सुन्दर आंखों मे आंसू आ गये.
तुम्हारे भैया उसकी चूत मे अपना लौड़ा जड़ तक ठांसे पड़े रहे और गुलाबी उनके नीचे तड़पती रही. गुलाबी अपनी कमर घुमा घुमाकर लन्ड को बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी, पर 8 इंच के उस लौड़े ने जैसे एक खूंटे की तरह उसके छोटे से शरीर को पलंग मे ठोक रखा था.
देखकर रामु इधर काफ़ी उत्तेजित हो रहा था. मैने कहा, "देखो रामु, मेरे पति तुम्हारी प्यारी जोरु का कैसे बलात्कार कर रहे हैं."
रामु कुछ बोला नही. सासुमाँ के मुंह मे अपना लन्ड पेलता रहा और अन्दर का नज़ारा देखता रहा.