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मोना अपने समय पर खाना लेकर आ गयी.
मोना के आते ही कुवरसिंघ ने रोना बंद किया.
अवी-अच्छा हुआ तुम आ गयी. देखो मेरे दोस्त को दर्द हो रहा है.
मोना-कुछ दिन दर्द तो होगा ही.
अवी-बाते कम करो और खाना खिला दो
मोना-पहले मालिश करनी होगी फिर खाना ,
अवी-कल से कुछ नही खाया मेरे दोस्त ने ,
मोना-खाना खाने के बाद मालिश नही कर सकते ,
अवी-जैसा करना है करो,ये लो मलम जखम पर लगाने के लिए और ट्यूब लंड पर लगा देना
मोना-वो तो बाद मे लगाना होगा. पहले सुबह की तरह गरम पानी से शरीर की मालिश कर देती हूँ
अवी-कुछ भी करो पर जल्दी करो
मोना अपने काम मे लग गयी. मोना ने पहले गरम पानी फिर गरम ब्रिक्स और फिर जखम पर मलम लगा दिया.
मालिश करने से कुवरसिंघ को राहत मिली.
कुवरसिंघ की चेहरे की मालिश करने के लिए मोना ने उसकी मंकी कॅप निकालने को कहा.
मैं ने मोना को चेहरे की मालिश करने से रोक दिया. चेहरे की मालिश करने को कुवरसिंघ ने मना किया.
मोना कुवरसिंघ के शरीर की मालिश करने लगी और कुवरसिंघ गरम कपड़े से अपनी आँखे सेकने लगा.
दूर से देख कर भी कुवरसिंघ की गंद का छेद दिख रहा था.पूरा खुल गया था.
कुवरसिंघ का लंड सुबह से वैसा ही पड़ा हुआ था.बेजान
कुवरसिंघ का चेहरा मार खाने से सूज गया था. मंकी कॅप और सूजन की वजह से कुवरसिंघ सच मे मंकी लग रहा था.
अब बारी थी खाना खाने की. पर एक प्राब्लम हो गयी.मोना के सामने खाना खाने के लिए मंकी कॅप निकालनी पड़ेंगी. और ये रिस्क मैं ले नही सकता था.
अवी-मोना ,मालिश हो गयी
मोना-हाँ, अब खाना खा सकता है तुम्हारा दोस्त
अवी-वो मैं खिला दूँगा ,अब तुम अपने घर जा सकती हो
मोना-टिफिन उसका क्या
अवी-वो सुबह लेकर चली जाना.
मोना-मतलब सुबह भी आना होगा
अवी-हां, और खाना लेकर आना
मोना को गुस्सा आ गया.मोना के कुछ कहने से पहले मैं मोना को लेकर बाहर आ गया.
मोना को थोड़ी देर समझाने के बाद मोना सुबह आने को तय्यार हो गयी.
चलो अब अंदर जाकर कुवरसिंघ को खाना खिलाता हूँ.
अंदर जाकर जो मैं ने देखा वो शायद ही मैं कभी देखने के बारे मे सोच सकता था.
पर सुबह कुवरसिंघ को बाथरूम का पानी पीते हुए देखने के बाद ये तो होना ही था.
कुवरसिंघ बैठ तो नही सकता था ,ना खड़ा रह सकता था. ऐसे मे कुवरसिंघ जो कल से भूका था, जो सिर्फ़ लंड के धक्के और मार खा रहा था ,वो लेट कर टिफिन मे रखा हुआ खाना कभी हाथ से तो कभी चाट कर खा रहा था.
एक कुत्ते की तरह कुवरसिंघ खाना खा रहा था. कल तक जो शेर की तरह रहता था उसे आज मैं ने कुत्ता बना दिया.
खाना ऐसे खा रहा था जैसे भिकारी को 5स्टार का खाना मिलता है और वो खाने पे टूट पड़ता है वैसे कुवरसिंघ खाना खा रहा था.
गाओं के ठाकुर का बेटा एक भिकारी बन गया था.
खाने क्या था, क्या हो सकता था, मोना ज़्यादा मेहनत तो नही लेगी, ऐसे मे खाने मे सिर्फ़ एक चीज़ हो सकती है वो थी खिचड़ी,
खिचड़ी के एक एक दाने को कुवरसिंघ खा रहा था. जैसे इस के बाद उसे कभी खाना नही मिलेगा
पानी भी उसी मग से पी रहा था जो मोना ने मालिश करने के बाद उसके पास वैसे ही रख दिया था.
कुवरसिंघ की हालत देख कर थोड़ा बुरा लग रहा था पर ऐसे लोगो के साथ ऐसा ही होना चाहिए,
मोना भी खूब निकली ,खाना एक छोटे टिफिन मे लाई थी. जिस से कुवरसिंघ का पेट भरा नही जिस की वजह से उसने टिफिन को चाट कर साफ किया.
खाना हो जाने के बाद कुवरसिंघ को दर्द बर्दास्त करने के लिए ताक़त मिल गयी.
अवी-हो गया ,खाना
कुवरसिंघ-हाँ, अब थोड़ा अच्छा लग रहा है
अवी-धीरे धीरे दर्द ख़तम हो जाएगा.
कुवरसिंघ-हाँ
अवी-अगर हॉस्पिटल मे होते तो जल्दी ठीक हो जाते
कुवरसिंघ-हॉस्पिटल मे कुछ दिन के बाद जाउन्गा. अभी गया तो मेरी बदनामी होगी
अवी- बदनामी की बात कर रहे हो ,तुम्हारा कौनसा नाम है, जो है वो ठाकुरजी का और रणजीतसिंघ का है ,अब उनका नाम भी मिट्टी मे मिल जाएगा.
मेरी बात सुनकर कुवरसिंघ ने अपना चेहरा नीचे कर लिया.
अवी-तुम क्यू चेहरा छुपा रहे हो ,चेहरा तो रणजीतसिंघ को छुपाना पड़ेगा तुम्हारी वजह से,
कुवरसिंघ की आँखे से पानी निकलने लगा.
अवी-अगर तुम रणजीतसिंघ के भाई ना होते ,तो तुम्हे ...
मेरी बात सुनकर कुवरसिंघ की हालत और खराब होने लगी.
अवी-रणजीतसिंघ तुम्हारे पाप छुपाता है और तुम ,ये लो पेन किल्लर खा लो
कुवरसिंघ ने चुप चाप मेरे हाथ से पेन किल्लर ले ली.
मैं ने गेट को अंदर से लॉक लगाया. मैं नही चाहता था कि कुवरसिंघ रात मे ग़लती से भाग जाए,
मैं ने जान बुझ कर ऐसी बाते कही ताकि कुवरसिंघ की नींद खराब हो जाए.
कुवरसिंघ को मेंटली टॉर्चर तो करना पड़ेगा.
उसे मैं चैन से कैसे सोने दे सकता था.
पेन किल्लर खाने के बाद मैं बेड पर और कुवरसिंघ नीचे सो गया.
मोना अपने समय पर खाना लेकर आ गयी.
मोना के आते ही कुवरसिंघ ने रोना बंद किया.
अवी-अच्छा हुआ तुम आ गयी. देखो मेरे दोस्त को दर्द हो रहा है.
मोना-कुछ दिन दर्द तो होगा ही.
अवी-बाते कम करो और खाना खिला दो
मोना-पहले मालिश करनी होगी फिर खाना ,
अवी-कल से कुछ नही खाया मेरे दोस्त ने ,
मोना-खाना खाने के बाद मालिश नही कर सकते ,
अवी-जैसा करना है करो,ये लो मलम जखम पर लगाने के लिए और ट्यूब लंड पर लगा देना
मोना-वो तो बाद मे लगाना होगा. पहले सुबह की तरह गरम पानी से शरीर की मालिश कर देती हूँ
अवी-कुछ भी करो पर जल्दी करो
मोना अपने काम मे लग गयी. मोना ने पहले गरम पानी फिर गरम ब्रिक्स और फिर जखम पर मलम लगा दिया.
मालिश करने से कुवरसिंघ को राहत मिली.
कुवरसिंघ की चेहरे की मालिश करने के लिए मोना ने उसकी मंकी कॅप निकालने को कहा.
मैं ने मोना को चेहरे की मालिश करने से रोक दिया. चेहरे की मालिश करने को कुवरसिंघ ने मना किया.
मोना कुवरसिंघ के शरीर की मालिश करने लगी और कुवरसिंघ गरम कपड़े से अपनी आँखे सेकने लगा.
दूर से देख कर भी कुवरसिंघ की गंद का छेद दिख रहा था.पूरा खुल गया था.
कुवरसिंघ का लंड सुबह से वैसा ही पड़ा हुआ था.बेजान
कुवरसिंघ का चेहरा मार खाने से सूज गया था. मंकी कॅप और सूजन की वजह से कुवरसिंघ सच मे मंकी लग रहा था.
अब बारी थी खाना खाने की. पर एक प्राब्लम हो गयी.मोना के सामने खाना खाने के लिए मंकी कॅप निकालनी पड़ेंगी. और ये रिस्क मैं ले नही सकता था.
अवी-मोना ,मालिश हो गयी
मोना-हाँ, अब खाना खा सकता है तुम्हारा दोस्त
अवी-वो मैं खिला दूँगा ,अब तुम अपने घर जा सकती हो
मोना-टिफिन उसका क्या
अवी-वो सुबह लेकर चली जाना.
मोना-मतलब सुबह भी आना होगा
अवी-हां, और खाना लेकर आना
मोना को गुस्सा आ गया.मोना के कुछ कहने से पहले मैं मोना को लेकर बाहर आ गया.
मोना को थोड़ी देर समझाने के बाद मोना सुबह आने को तय्यार हो गयी.
चलो अब अंदर जाकर कुवरसिंघ को खाना खिलाता हूँ.
अंदर जाकर जो मैं ने देखा वो शायद ही मैं कभी देखने के बारे मे सोच सकता था.
पर सुबह कुवरसिंघ को बाथरूम का पानी पीते हुए देखने के बाद ये तो होना ही था.
कुवरसिंघ बैठ तो नही सकता था ,ना खड़ा रह सकता था. ऐसे मे कुवरसिंघ जो कल से भूका था, जो सिर्फ़ लंड के धक्के और मार खा रहा था ,वो लेट कर टिफिन मे रखा हुआ खाना कभी हाथ से तो कभी चाट कर खा रहा था.
एक कुत्ते की तरह कुवरसिंघ खाना खा रहा था. कल तक जो शेर की तरह रहता था उसे आज मैं ने कुत्ता बना दिया.
खाना ऐसे खा रहा था जैसे भिकारी को 5स्टार का खाना मिलता है और वो खाने पे टूट पड़ता है वैसे कुवरसिंघ खाना खा रहा था.
गाओं के ठाकुर का बेटा एक भिकारी बन गया था.
खाने क्या था, क्या हो सकता था, मोना ज़्यादा मेहनत तो नही लेगी, ऐसे मे खाने मे सिर्फ़ एक चीज़ हो सकती है वो थी खिचड़ी,
खिचड़ी के एक एक दाने को कुवरसिंघ खा रहा था. जैसे इस के बाद उसे कभी खाना नही मिलेगा
पानी भी उसी मग से पी रहा था जो मोना ने मालिश करने के बाद उसके पास वैसे ही रख दिया था.
कुवरसिंघ की हालत देख कर थोड़ा बुरा लग रहा था पर ऐसे लोगो के साथ ऐसा ही होना चाहिए,
मोना भी खूब निकली ,खाना एक छोटे टिफिन मे लाई थी. जिस से कुवरसिंघ का पेट भरा नही जिस की वजह से उसने टिफिन को चाट कर साफ किया.
खाना हो जाने के बाद कुवरसिंघ को दर्द बर्दास्त करने के लिए ताक़त मिल गयी.
अवी-हो गया ,खाना
कुवरसिंघ-हाँ, अब थोड़ा अच्छा लग रहा है
अवी-धीरे धीरे दर्द ख़तम हो जाएगा.
कुवरसिंघ-हाँ
अवी-अगर हॉस्पिटल मे होते तो जल्दी ठीक हो जाते
कुवरसिंघ-हॉस्पिटल मे कुछ दिन के बाद जाउन्गा. अभी गया तो मेरी बदनामी होगी
अवी- बदनामी की बात कर रहे हो ,तुम्हारा कौनसा नाम है, जो है वो ठाकुरजी का और रणजीतसिंघ का है ,अब उनका नाम भी मिट्टी मे मिल जाएगा.
मेरी बात सुनकर कुवरसिंघ ने अपना चेहरा नीचे कर लिया.
अवी-तुम क्यू चेहरा छुपा रहे हो ,चेहरा तो रणजीतसिंघ को छुपाना पड़ेगा तुम्हारी वजह से,
कुवरसिंघ की आँखे से पानी निकलने लगा.
अवी-अगर तुम रणजीतसिंघ के भाई ना होते ,तो तुम्हे ...
मेरी बात सुनकर कुवरसिंघ की हालत और खराब होने लगी.
अवी-रणजीतसिंघ तुम्हारे पाप छुपाता है और तुम ,ये लो पेन किल्लर खा लो
कुवरसिंघ ने चुप चाप मेरे हाथ से पेन किल्लर ले ली.
मैं ने गेट को अंदर से लॉक लगाया. मैं नही चाहता था कि कुवरसिंघ रात मे ग़लती से भाग जाए,
मैं ने जान बुझ कर ऐसी बाते कही ताकि कुवरसिंघ की नींद खराब हो जाए.
कुवरसिंघ को मेंटली टॉर्चर तो करना पड़ेगा.
उसे मैं चैन से कैसे सोने दे सकता था.
पेन किल्लर खाने के बाद मैं बेड पर और कुवरसिंघ नीचे सो गया.