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कुवरसिंघ को उसकी हालत पर छोड़ कर मैं घर चला गया.
घर पे खाना खाने के बाद मैं कुवरसिंघ के पास जाने की जगह मंदिर चला गया.
कुवरसिंघ के पास जाता तो उसे समझाना पड़ता ,वो थोड़ी देर रोता रहेगा, मुझे उसे कुछ देर अकेला छोड़ना होगा ताकि वो नॉर्मल हो जाए.
मेरे पास कुवरसिंघ से ज़्यादा इम्पोर्टेंट काम करना था. पंडिताइन से मिलना था.
मैं मंदिर जाकर पंडिताइन को ढूँढने लगा.पर पंडिताइन कही पर भी दिख नही रही थी.
कुछ लोगो से पूछने के बाद पता चला कि पंडिताइन सुबह के बाद अपने घर चली गयी है.
शायद पंडिताइन ने सब संभाल लिया होगा .कल की तरह कोई डिस्टर्ब ना करे इस लिए पहले से घर चली गयी होगी.
मैं पांडियाइन के घर की तरफ चला गया. हमेशा की तरह पीछे का गेट सही था.
गेट के पास आते पंडिताइन ने गेट खोल दिया.और मुझे अंदर ले लिया.
पंडिताइन-कितनी देर कर दी तुम ने, मैं कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी
अवी-ग़लती आपकी है
पंडिताइन-मेरी कैसे
अवी-आपने मुझे कुछ बताया नही, मैं वहाँ आपका इंतज़ार कर रहा था.और आप यहाँ,
पंडिताइन-मैं तुम्हे बताना तो भूल गयी थी. जाने दो अब हम आराम से कर सकते है
अवी-आराम से तो करेंगे पर कल की तरह कोई आ गया तो
पंडिताइन-नही आएगा ,मैं ने पंडितजी को कहा है कि मेरी तबीयत ठीक नही है. मुझे आराम करना है.
अवी-फिर तो आज पूरा मज़ा करेंगे.
पंडिताइन-जो करना है करो पर जल्दी करो ,मैं भी प्यासी हूँ
अवी-आपकी प्यास तो बुझा दूँगा ,पर आज सब मेरे हिसाब से होगा. आप बीच मे मत बोलना
पंडिताइन-चलो ठीक है.
और मैं ने पंडिताइन को बेड पर लेटा दिया.और मैं उनके उपर आ गया.
पंडिताइन-कपड़े तो निकालने दो
अवी-आज कपड़े फाड़ दूँगा.
पंडिताइन-तुम्हारे लिए इतने अच्छे कपड़े पहने है उन्हे फाड़ोगे.
अवी-1 मिनट है आपके पास
पंडिताइन और मैं कपड़े निकाले लगे. मैं जिस स्पीड से कपड़े निकाल रहा था उसी स्पीड से पंडिताइन कपड़े निकालने लगी.
मेरे 4 कपड़े और पंडिताइन के 5 कपड़े, पंडिताइन के ब्रा और पैंटी निकालने से पहले मैं ने पंडिताइन को बेड पर पटक दिया.
पंडिताइन-ब्रा तो निकालने दो
मैं ने पंडिताइन की कोई बात नही सुनी और किस करने लगा.
पंडिताइन तो इसी का इंतज़ार कर रही थी.
कल पंडिताइन का पानी तो निकाल दिया था.पर लंड के बिना पानी निकालने पे वो सुकून नही मिलता जो लंड के धक्को से दर्द के बाद निकलता है.
ये तो हो गयी कल की बात ,आज सर से लेके चूत तक मज़ा लूँगा.
पंडिताइन के बूब्स पे ज़्यादा मेहनत करनी होगी. देखते है पंडितजी और रणजीतसिंघ ने पंडिताइन को कैसे हॅंडल किया है.
पंडिताइन को किस करने के साथ अगर मेरा लंड चूत को रगड़ता तो मज़ा आ जाता. पर पैंटी के वजह से ये हो नही रहा था.
मेरे दिमाग़ मे पैंटी निकालने का आइडिया आया ,लेकिन ऐसा करता तो पंडिताइन गरम हो जाती और किस करने के बाद डाइरेक्ट चूत पर हमला करना पड़ता ,
आज तो बूब्स का टेस्ट ले कर रहूँगा.
पंडिताइन को किस करने से पंडिताइन कितनी गरम औरत है इसका पता चल रहा था. पता नही पंडितजी पंडिताइन को कैसे हॅंडल करते होगे.
पंडिताइन के होंटो का रस पीने मे मज़ा आ रहा था.
पंडिताइन और मैं ,हम दोनो इस दिन का कब से इंतज़ार कर रहे थे. जिस के वजह से हमारा मिलन वाइल्ड हो रहा था.
पंडिताइन किस करने के साथ मेरे होंटो को काट रही थी.
पंडिताइन के ऐसा करने से मैं भी उसके होंटो का रस पीने मे पीछे नही रह रहा था
हमारी लड़ाई ऐसे चलती गयी. पंडिताइन तो हार मानने को तय्यार नही थी.पंडिताइन की जीत मेरे फ़ायदे की होगी.इस लिए मैं ने होंटो पे किस करते हुए गर्दन पर किस करने लगा.
गर्दन पर किस करते हुए मैं ने ब्रा मे से बूब्स बाहर निकाल लिए और अपने हाथ मे लेकर साइज़ चेक करने लगा.
बूब्स दिखने मे इतने अच्छे है तो टेस्ट मे कैसे होगे. ये तो टेस्ट कर के पता चलेगा.
मैं ने देर ना करते हुए अपना काम शुरू कर दिया.
एक आम को मसल कर चूसने लायक बनाने लगा. दूसरे आम को कच्चा ही खाने लगा.
पंडिताइन के निपल को चूसने और मसल्ने से मज़ा आ रहा था. एक निपल को उंगली से नरम करने लगा और दूसरे निपल को होंटो से नरम करने लगा.
पंडिताइन के बूब्स मेरे क़ब्ज़े मे थे ,बूब्स के वजह से पंडिताइन मेरे हाथ मे थी.
और पंडिताइन बूब्स चूसवाने से मदहोश हो गयी. पंडिताइन मेरे बालो मे हाथ घुमाने लगी.
पंडिताइन का रेस्पॉन्स पॉज़िटिव मिलते ,मेरा जोश और बढ़ गया.
इसका इनडाइरेक्ट असर पंडिताइन पर हुआ ,पंडिताइन के मुँह से शीष्कारिया निकलने लगी.
पंडिताइन की शीष्कारिया मेरी जीत का सबूत था. एक गेम पंडिताइन जीत गयी और एक मैं ,
अब दूसरे बूब्स की बारी थी. इस बूब्स को चूसने मे ज़्यादा मज़ा आ रहा था. ये कमाल था मेरे हाथ का
बूब्स को चूसने के साथ चाटने भी लगा. और पहले वाले बूब्स को मसल्ने लगा.
पंडिताइन को मुझे फिदा हो गयी. उसकी पकड़ मेरे उपर मज़बूत होती गयी.
पंडिताइन के हाथ कभी मेरे बालो पे तो कभी मेरी पीठ पर चले जाते
पंडिताइन के बूब्स चूस कर मैं खुश था और पंडिताइन भी खुश थी
बूब्स चूसने के बाद मैं चूत चूसूंगा ऐसा पंडिताइन को लग रहा होगा.
मैं ने इसका उल्टा किया ,मैं पंडिताइन के उपर से अलग हो कर पंडिताइन के बाजू मे लेट गया.
मेरे ऐसा करने से पंडिताइन कुछ देर मुझे देखती रही. फिर मेरे उपर आ गयी.
पंडिताइन -क्या हुआ
अवी-कुछ नही
पंडिताइन -फिर आगे क्यूँ नही गये
अवी-क्यू कि अब आपकी बारी है.
पंडिताइन -तो ऐसा कहो ना, ऐसे चुप रहोगे तो कैसे पता चलेगा.
अवी-अब पता चल गया ना ,तो हो जाइए शुरू
अब पंडिताइन की बारी थी. अब मैं आराम करूँगा और पंडिताइन गेम खेलेंगी