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मैं और मेरा परिवार

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कुवरसिंघ को उसकी हालत पर छोड़ कर मैं घर चला गया.

घर पे खाना खाने के बाद मैं कुवरसिंघ के पास जाने की जगह मंदिर चला गया.

कुवरसिंघ के पास जाता तो उसे समझाना पड़ता ,वो थोड़ी देर रोता रहेगा, मुझे उसे कुछ देर अकेला छोड़ना होगा ताकि वो नॉर्मल हो जाए.

मेरे पास कुवरसिंघ से ज़्यादा इम्पोर्टेंट काम करना था. पंडिताइन से मिलना था.

मैं मंदिर जाकर पंडिताइन को ढूँढने लगा.पर पंडिताइन कही पर भी दिख नही रही थी.

कुछ लोगो से पूछने के बाद पता चला कि पंडिताइन सुबह के बाद अपने घर चली गयी है.

शायद पंडिताइन ने सब संभाल लिया होगा .कल की तरह कोई डिस्टर्ब ना करे इस लिए पहले से घर चली गयी होगी.

मैं पांडियाइन के घर की तरफ चला गया. हमेशा की तरह पीछे का गेट सही था.

गेट के पास आते पंडिताइन ने गेट खोल दिया.और मुझे अंदर ले लिया.

पंडिताइन-कितनी देर कर दी तुम ने, मैं कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी

अवी-ग़लती आपकी है

पंडिताइन-मेरी कैसे

अवी-आपने मुझे कुछ बताया नही, मैं वहाँ आपका इंतज़ार कर रहा था.और आप यहाँ,

पंडिताइन-मैं तुम्हे बताना तो भूल गयी थी. जाने दो अब हम आराम से कर सकते है

अवी-आराम से तो करेंगे पर कल की तरह कोई आ गया तो

पंडिताइन-नही आएगा ,मैं ने पंडितजी को कहा है कि मेरी तबीयत ठीक नही है. मुझे आराम करना है.

अवी-फिर तो आज पूरा मज़ा करेंगे.

पंडिताइन-जो करना है करो पर जल्दी करो ,मैं भी प्यासी हूँ

अवी-आपकी प्यास तो बुझा दूँगा ,पर आज सब मेरे हिसाब से होगा. आप बीच मे मत बोलना

पंडिताइन-चलो ठीक है.

और मैं ने पंडिताइन को बेड पर लेटा दिया.और मैं उनके उपर आ गया.

पंडिताइन-कपड़े तो निकालने दो

अवी-आज कपड़े फाड़ दूँगा.

पंडिताइन-तुम्हारे लिए इतने अच्छे कपड़े पहने है उन्हे फाड़ोगे.

अवी-1 मिनट है आपके पास

पंडिताइन और मैं कपड़े निकाले लगे. मैं जिस स्पीड से कपड़े निकाल रहा था उसी स्पीड से पंडिताइन कपड़े निकालने लगी.

मेरे 4 कपड़े और पंडिताइन के 5 कपड़े, पंडिताइन के ब्रा और पैंटी निकालने से पहले मैं ने पंडिताइन को बेड पर पटक दिया.

पंडिताइन-ब्रा तो निकालने दो

मैं ने पंडिताइन की कोई बात नही सुनी और किस करने लगा.

पंडिताइन तो इसी का इंतज़ार कर रही थी.

कल पंडिताइन का पानी तो निकाल दिया था.पर लंड के बिना पानी निकालने पे वो सुकून नही मिलता जो लंड के धक्को से दर्द के बाद निकलता है.

ये तो हो गयी कल की बात ,आज सर से लेके चूत तक मज़ा लूँगा.

पंडिताइन के बूब्स पे ज़्यादा मेहनत करनी होगी. देखते है पंडितजी और रणजीतसिंघ ने पंडिताइन को कैसे हॅंडल किया है.

पंडिताइन को किस करने के साथ अगर मेरा लंड चूत को रगड़ता तो मज़ा आ जाता. पर पैंटी के वजह से ये हो नही रहा था.

मेरे दिमाग़ मे पैंटी निकालने का आइडिया आया ,लेकिन ऐसा करता तो पंडिताइन गरम हो जाती और किस करने के बाद डाइरेक्ट चूत पर हमला करना पड़ता ,

आज तो बूब्स का टेस्ट ले कर रहूँगा.

पंडिताइन को किस करने से पंडिताइन कितनी गरम औरत है इसका पता चल रहा था. पता नही पंडितजी पंडिताइन को कैसे हॅंडल करते होगे.

पंडिताइन के होंटो का रस पीने मे मज़ा आ रहा था.

पंडिताइन और मैं ,हम दोनो इस दिन का कब से इंतज़ार कर रहे थे. जिस के वजह से हमारा मिलन वाइल्ड हो रहा था.

पंडिताइन किस करने के साथ मेरे होंटो को काट रही थी.

पंडिताइन के ऐसा करने से मैं भी उसके होंटो का रस पीने मे पीछे नही रह रहा था

हमारी लड़ाई ऐसे चलती गयी. पंडिताइन तो हार मानने को तय्यार नही थी.पंडिताइन की जीत मेरे फ़ायदे की होगी.इस लिए मैं ने होंटो पे किस करते हुए गर्दन पर किस करने लगा.

गर्दन पर किस करते हुए मैं ने ब्रा मे से बूब्स बाहर निकाल लिए और अपने हाथ मे लेकर साइज़ चेक करने लगा.

बूब्स दिखने मे इतने अच्छे है तो टेस्ट मे कैसे होगे. ये तो टेस्ट कर के पता चलेगा.

मैं ने देर ना करते हुए अपना काम शुरू कर दिया.

एक आम को मसल कर चूसने लायक बनाने लगा. दूसरे आम को कच्चा ही खाने लगा.

पंडिताइन के निपल को चूसने और मसल्ने से मज़ा आ रहा था. एक निपल को उंगली से नरम करने लगा और दूसरे निपल को होंटो से नरम करने लगा.

पंडिताइन के बूब्स मेरे क़ब्ज़े मे थे ,बूब्स के वजह से पंडिताइन मेरे हाथ मे थी.

और पंडिताइन बूब्स चूसवाने से मदहोश हो गयी. पंडिताइन मेरे बालो मे हाथ घुमाने लगी.

पंडिताइन का रेस्पॉन्स पॉज़िटिव मिलते ,मेरा जोश और बढ़ गया.

इसका इनडाइरेक्ट असर पंडिताइन पर हुआ ,पंडिताइन के मुँह से शीष्कारिया निकलने लगी.

पंडिताइन की शीष्कारिया मेरी जीत का सबूत था. एक गेम पंडिताइन जीत गयी और एक मैं ,

अब दूसरे बूब्स की बारी थी. इस बूब्स को चूसने मे ज़्यादा मज़ा आ रहा था. ये कमाल था मेरे हाथ का

बूब्स को चूसने के साथ चाटने भी लगा. और पहले वाले बूब्स को मसल्ने लगा.

पंडिताइन को मुझे फिदा हो गयी. उसकी पकड़ मेरे उपर मज़बूत होती गयी.

पंडिताइन के हाथ कभी मेरे बालो पे तो कभी मेरी पीठ पर चले जाते

पंडिताइन के बूब्स चूस कर मैं खुश था और पंडिताइन भी खुश थी

बूब्स चूसने के बाद मैं चूत चूसूंगा ऐसा पंडिताइन को लग रहा होगा.

मैं ने इसका उल्टा किया ,मैं पंडिताइन के उपर से अलग हो कर पंडिताइन के बाजू मे लेट गया.

मेरे ऐसा करने से पंडिताइन कुछ देर मुझे देखती रही. फिर मेरे उपर आ गयी.

पंडिताइन -क्या हुआ

अवी-कुछ नही

पंडिताइन -फिर आगे क्यूँ नही गये

अवी-क्यू कि अब आपकी बारी है.

पंडिताइन -तो ऐसा कहो ना, ऐसे चुप रहोगे तो कैसे पता चलेगा.

अवी-अब पता चल गया ना ,तो हो जाइए शुरू

अब पंडिताइन की बारी थी. अब मैं आराम करूँगा और पंडिताइन गेम खेलेंगी

 


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पंडिताइन मेरे उपर से उठ गयी. और मेरा मोटा लंड को मुट्ठी मे भर लिया .और देखने लगी ,

मेरे साँप जैसे लंड को देख कर पंडिताइन ने मेरी तरफ देख कर स्माइल की.

फिर पंडिताइन ने मेरे लंड को एक हाथ से उपर नीचे करना शुरू कर दिया,

पंडिताइन के ऐसा करने से मैं पूरे मज़े लेने लगा.

पंडिताइन भी खुश थी मेरे लोहे जैसे लंड को हाथो मे लेकर ,

फिर पंडिताइन ने अपनी जीभ से मेरे लंड के टोपे को चाटने लगी. पंडिताइन का स्टाइल मज़ेदार था जिस से मैं पागल हो गया .

पंडिताइन ने अपना हाथ लंड से हटाया नही बल्कि अपनी जीभ से लंड को चाटना शुरू कर दिया.

टोपे को चाटने के बाद पंडिताइन मेरे लंड को धीरे धीरे अपने मुँह मे लेना शुरू कर दिया.

आड़ा लंड पंडिताइन के मुँह मे जाते ही मेरा मन हुआ की पंडिताइन के सर को पकड़ कर मुँह मे धक्के मारु . मुँह को चोदु,

लेकिन पहले पंडिताइन को उसका काम करने देता हूँ. पंडिताइन लंड को ज़्यादा से ज़्यादा मुँह मे लेने की कोशिश कर रही थी.

जितना लंड पंडिताइन के मुँह मे गया था वो काफ़ी था. फिर पंडिताइन ने लंड को चूसना शुरू किया. 3 4 बाहर लंड को मुँह से बाहर निकाल कर फिर अंदर ले लिया.

उसके बाद लंड को मुँह से बाहर निकाल कर पंडिताइन आंडो को चूसने लगी.पंडिताइन का तो जवाब नही था.

पंडिताइन मेरे लिए इतना कर रही है मैं भी पंडिताइन के लिए उसकी चूत चूसूंगा.

मैं ने पंडिताइन को रोक दिया. और मेरी तरफ गंद करके लंड चूसने को कहा. पंडिताइन ने वैसा ही किया पर उसके दोनो पैर एक तरफ थे. मैं ने पंडिताइन को सही पोज़ीशन मे लाया.

मैं इधर क्या कर रहा हूँ उस से पंडिताइन को क्या लेना देना वो तो लंड चूस कर खुश थी.

मैं ने पंडिताइन की पैंटी नीचे कर दी और चूत जो कब से मेरे जीभ का इंतज़ार कर रही थी उसे उसकी मंज़िल से मिला दिया.

चूत पर मेरी जीभ महसूस करते पंडिताइन ने लंड चूसना बंद किया और मेरी तरफ देखा,

मुझे चूत चूस्ते हुए देख कर पंडिताइन खुश हो गयी. और लंड को मज़े लेकर चूसने लगी.

हम दोनो एक दूसरे को चूस कर मज़ा देने लगे और लेने लगे.

मेरा पानी तो विद्या सुबह निकाल चुकी थी. अब इतनी जल्दी निकलने वाला नही था. लेकिन पंडिताइन की बात अलग थी.

अभी चूत चूसना शुरू किया था कि पंडिताइन ने पानी छोड़ना शुरू किया.

पानी निकलते ही पंडिताइन ने मेरा लंड मुँह से बाहर निकाला और अपना पानी मेरे मुँह मे डाल दिया.

पंडिताइन अपना पानी निकाल कर ठंडी पड़ गयी पर पूरी गर्मी निकालना बाकी था.

मैं ने पंडिताइन को अपने उपर से अलग किया

और बेड पर लिटा दिया.

पंडिताइन-अब और बर्दास्त नही होता ,डाल दो अंदर

अवी-कैसे डालु, दर्द या बिना दर्द

पंडिताइन -जैसा तुम चाहो

अवी-तो फैला दो अपने पैर

पैंडिताइन ने अपने पैर फैला दिया जिस से मैं ने

पंडिताइन के पैरो के बीच पोज़िशन ले ली.

पहले पंडिताइन को अपने लंड का टच करवाता हूँ.

मैं ने लंड पंडिताइन की चूत पर रखा और रगड़ने लगा.

पंडिताइन मेरे लंड को अपनी चूत पर महसूस करके अपना बदन हिला रही थी. ताकि लंड चूत मे चला जाए.

लंड को चूत मे डालने का समय आ गया था. मैं ने 2 शॉट मे पंडिताइन की चूत मे लंड डालने का सोचा.

पहला झटका मार कर आधा लंड पंडिताइन की चूत मे डाल दिया

.

लंड चूत मे जाते ही पंडिताइन की हल्की चीख निकल गयी.

पंडिताइन की चूत मे पंडितजी का छोटा लंड कही बार गया था .पर रणजीतसिंघ का बड़ा लंड बहुत कम बार गया था .

पंडिताइन बहुत दिन से प्यासी थी. मतलब चूत मे लंड गये हुए बहुत दिन हुए थे.

जिस से चूत टाइट हो गयी थी. इस का पता मुझे दूसरे झटके पे पता चला.

दूसरा झटका मारते ही पूरा लंड अंदर चला गया और पंडिताइन का पूरा मुँह खुल गया चीखने के लिए

पंडिताइन की चीख सुनकर लंड चूत मे फुदकने लगा.

पंडिताइन की चीख पर ज़्यादा ध्यान ना देते हुए मैं ने लंड बाहर निकाला फिर से चूत मे डाल दिया.

आआआहह ओउुुुुुुुुुुउउ आआआआहह,तुम दम दार हो

मैं ने पंडिताइन की चूत मे लंड वैसे ही रख कर अपनी कमर गोल गोल घुमाने लगा.

ऐसा करने से पंडिताइन का दर्द कम हुआ और पंडिताइन शीष्कारिया निकालने लगी.

आआआहह ओउुुुुुुुुुुउउ आआआआहह

ये मेरे लिए इशारा था कि मैं चूत का भोसड़ा बना दूं.

और मैं अपने काम मे लगा रहा.

पंडिताइन की चूत मे शुरू से ज़ोर दार लंबे धक्के मारने लगा.

मेरे धक्के से और ताक़त से पंडिताइन बहुत खुश हो गयी.

पंडिताइन की खुशी उनकी शीष्कारियो से पता चल रही थी.

पंडिताइन का बदन मेरे धक्के से टूट कर बिखर रहा था.

पंडिताइन को ऐसी चुदाई की आदत नही थी .जिस से वो बार बार अपने पैर अड्जस्ट कर रही थी.

मैं ने पंडिताइन की तकलीफ़ देख कर पंडिताइन को एक तरफ करवट लेकर लेटने को कहा .और एक पैर को मोड़ ने को कहा.

मैं ने अपने हाथ से पंडिताइन के चूतड़ को दबा दिया ताकि वो ज़्यादा हिले ना

और पोज़िशन लेते ही लंड चूत मे डाल दिया. पंडिताइन नयी पोज़िशन मे चुदाई करके खुश थी.

मेरा पूरा वेट पंडिताइन के उपर था और लंड चूत मे था.

फीचली बार से इस बार धक्के ज़्यादा दर्दनाक थे .पर ये दर्द पंडिताइन के लिए खुशी लेकर आया

पंडिताइन ने चूत ने पानी छोड़ दिया.

पानी निकला तो पोज़िशन चेंज.

पंडिताइन को रणजीतसिंघ की फेव पोज़िशन मे लाया. पंडिताइन को घोड़ी बना दिया.

क्यू की लंड चूत मे होता है और धक्को से चूतड़ लाल हो जाते है.

पंडिताइन की कमर पकड़ कर लंड को चूत मे पेलता गया.

ऐसा पेलता गया कि हर धक्के के बाद पंडिताइन आगे चली जाती .और मुझे पंडिताइन को नेक्स्ट धक्के के लिए पीछे खिचना पड़ता.

ऐसा करने से पंडिताइन को लंड के धक्को का मज़ा मिलने लगा.

पंडिताइन की चूत मे धक्के मारने से उसकी गंद का छेद हल्का सा खुल जाता.

पंडिताइन को पीछे खिचते हुए गंद के छेद को देख कर पागल हुआ जा रहा था.

जिस से नेक्स्ट धक्का जोरदार पड़ता.और हम दोनो को मज़ा आ जाता.

पांडियाइन की चुदाई मज़ेदार होती जा रही थी.

पंडिताइन अपना पानी निकाल कर चुदाई और मज़ेदार बना रही थी.

पानी निकला और पोज़िशन चेंज.

पंडिताइन को बेड के कॉर्नर पे बैठा कर अपनी चूत खोलने को कहा .और मैं खड़ा हो गया.

मैं खड़ा होकर पंडिताइन के चूत मे धक्के मारने लगा.

पंडिताइन के पैरो को अपने हाथो मे पकड़ कर धक्का लगाने लगा

पंडिताइन की चूत बहुत खुश हो गयी थी.

थोड़ी देर ऐसे खड़े होकर धक्के मारने के बाद मैं पंडिताइन के उपर आ गया.

पंडिताइन को किस करते हुए धक्का मारने लगा.

ऐसा करने से हम दोनो बेड पर आगे खिसकने लगे

हमे पता नही चला कि कब हम बेड पर आ गये.

लेकिन ये क्या पंडिताइन मुझे पीछे धकेलने लगी . और मैं पंडिताइन को आगे धकेलने लगा

ऐसा इस लिए हो रहा था क्यू कि मेरा वीर्य निकलने वाला था और पंडिताइन का पानी छूटने वाला था

ऐसे आगे पीछे धकेलने के चक्कर मे हम ठंडे पड़ गये

मैं ने पंडिताइन की चूत को अपने वीर्य से भर दिया.

 
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चुदाई तो हो गयी. पंडिताइन की चुदाई मे मज़ा बहुत आया.हम जैसा हाफ़ रहे थे वो ये साबित कर रहा था कि चुदाई कैसी हुई है.

पंडिताइन की चूत मे वीर्य तो डाल दिया. अब लंड बाहर निकालना था जो मुझे कभी पसंद नही था.

पंडिताइन की चूत से लंड निकाल कर बेड पर लेट गया.

पंडिताइन-तुम पहले क्यू नही मिले

अवी-क्या कहा.

पंडिताइन-अगर तुम पहले मिलते तो मैं तुम्हारे साथ शादी करती.

अवी-कुछ भी. आपकी एज और मेरी एज मे कितना फरक है

पंडिताइन-तुम्हे एज का फरक दिखा लेकिन चूत की गहराई का फरक नही समझा

अवी-चूत अंदर से काफ़ी टाइट थी.

पंडिताइन-रहेंगी ना, मेरे पति का लंड वहाँ तक कभी गया ही नही.

अवी-तो कहाँ तक गया.

पंडिताइन-जहा तुम्हारा आधा या आधे से थोड़ा ज़्यादा लंड गया था वहाँ तक मेरा पति का पहुँच पाता है.

अवी-और रणजीतसिंघ का तो मेरे जितना है

पंडिताइन-तुम्हे पता है रणजीतसिंघ के बारे मे

अवी-आपकी गंद मे जाते हुए देखा था

पंडिताइन-गंद और रणजीतसिंघ. दोनो से परेशान हूँ ,उनका नाम लेकर मज़ा खराब मत करो

अवी-क्यू क्या हुआ

पंडिताइन-होना क्या है. अपनी प्यास बुझाने रणजीतसिंघ के पास गयी थी.

अवी-तो बुझ गयी प्यास

पंडिताइन-कहाँ बुज़ी ,उसने तो और बढ़ा दी

अवी-उसका लंड तो मेरे जैसा है.

पंडिताइन-उस से क्या होता है.

अवी-मतलब

पंडिताइन-रणजीतसिंघ ने आज तक सिर्फ़ एक बार मेरी चूत मारी है. वो भी 3 साल पहले ,

अवी-क्या ,सिर्फ़ एक बार

पंडिताइन-हाँ, जब देखो तब गंद मारता रहता है. एक तो कही महीनो के बाद मिलती हूँ उसमे भी गंद मारता है. और मैं प्याससी रह जाती हूँ

अवी-तो आप रणजीतसिंघ के साथ करती क्यूँ है

पंडिताइन-पहली बार किया था ,प्यास बुज़ गयी. फिर रणजीतसिंघ जब भी मिला सिर्फ़ गंद मारता है. और मुझे मर्वानी पड़ती है.

अवी-जाने दो अब मैं हूँ ना

पंडिताइन-तुम तो हर बात मे बेमिसाल हो

अवी-किस किस बात मे

पंडिताइन-किस करना. बूब्स चूस ना ,चूत चूसना, रणजीतसिंघ ज़्यादातर किस और गंद मारता है.

अवी-और क्या पसंद आया

पंडिताइन-तुम्हारा लंड, मुझे तो नानी याद आ गयी.

अवी-मेरा और रणजीतसिंघ का तो एक जैसा लंड है.

पंडिताइन-तुम्हारा रणजीतसिंघ से अच्छा है

अवी-मैं ने देखा है रणजीतसिंघ का

पंडिताइन-तुम ने दूर से देखा होगा.मैं ने तुम्हारा और रणजीतसिंघ का लंड हाथ मे मुँह मे चूत मे लिया है ,मैं ग़लत कैसे हो सकती हूँ.

अवी-शायद आप सही हो

पंडिताइन-देखो रणजीतसिंघ का लंड तुम्हारे जितना लंबा है पर मोटा नही है. और तुम्हारा लंड गोरा है और उसका काला,दूर से देखने पर रणजीतसिंघ का लंड बड़ा लगता है.

अवी-जाने दो ,उस से हमे क्या करना है. आप खुश हो ना

पंडिताइन-बहुत खुश हूँ

अवी-तो हो जाए एक और राउंड

पंडिताइन-अभी नही कल करेंगे.

अवी-एक राउंड हो सकता है

पंडिताइन-हो तो सकता है ,पर इस चुदाई को याद करके मज़ा तो लेने दो

अवी-ये भी सही है. तो कल फिर करेंगे,लेकिन

पंडिताइन-लेकिन

अवी-कल मैं आपकी गंद मारूँगा

पंडिताइन-नही. तुम्हे करना है तो आगे से करो

अवी-चूत तो आज मार ली है

पंडिताइन-फिर रहने दो कल आने की ज़रूरत नही है.

अवी-मेरी पूरी बात तो सुन लो

पंडिताइन-बोलो

अवी-पहले चूत मारूँगा ,फिर गंद ,दोनो एक साथ क्या कहती हो

पंडिताइन-दोनो एक साथ

अवी-हाँ

पंडिताइन-फिर ठीक है पर पहले आगे से

अवी-हाँ, पहले आगे से करूँगा.तो कल मिलते है.

पंडिताइन-तो जा रहे हो

अवी-नही. थोड़ी देर आपके साथ सो लेता हूँ

पंडिताइन-मैं भी यही सोच रही थी.

पंडिताइन के साथ थोड़ी देर सोने का फ़ैसला किया पर उसमे भी ना मैं सो सका और ना पंडिताइन सो पाई.

पंडिताइन ने सोते हुए मेरे साथ मस्ती की. मैं भी कहाँ पीछे रहने वाला था.

मैं भी पंडिताइन के बूब्स को मसल कर मज़ा करने लगे.

पंडिताइन की चूत मे अबतक मेरा वीर्य था. जिस से मैं ने फिर से चुदाई करने की जगह बस होंटो और बूब्स पर मेहनत करने लगा.

1 घंटे तक पंडिताइन के साथ खेलने के बाद मैं ने पंडिताइन को गुड बाइ कर दिया

 


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पंडिताइन को अपना रस पिला कर मैं मेले की तरफ चला गया.

अगर मुझे मेले का काम ना मिलता तो मैं मेले को ज़्यादा अच्छे से एंजाय कर पाता

फिर भी मैं ने सब के लिए समय निकाल कर रखा.मेले मे 3 4 घंटे अपने भाई बहनों के साथ एंजाय कर के सब से बड़ी खुशी मिली. लेकिन भाई बहनों की वजह से मैं दूसरो के साथ मेले मे मस्ती नही कर पा रहा हूँ.

पहले दिन जिस तरह रुकसाना और रज़िया मिली उसी तरह और भी लड़किया मिल सकती थी. पर ये मेले का काम करना ज़रूरी था. हमारी परंपरा जो है.

कुवरसिंघ का काम जल्दी ख़तम करता हूँ ,फिर कुछ दिन मेले को एंजाय करूँगा.

यही सोच रहा था कि फिर से मुझे शीला दिखी. सविता के बाद मैं ने शीला को पटाने का सोचा था पर किसी ना किसी वजह से शीला के साथ आगे नही बढ़ पाया.

शीला प्रसाद ले रही थी. जैसे ही हमारी नज़र एक दूसरे पे पड़ी वैसे ही शीला ने अपना चेहरा दूसरी तरफ किया और वहाँ से चली गयी.

शीला ऐसे हाथ मे नही आएगी. इसके लिए कुछ और सोचना होगा.

थोड़ी देर मंदिर का काम देखने के बाद मैं हवेली की तरफ निकल पड़ा.

पहले मोना का काम करता हूँ ,वो काम ज़रूरी है.मोना और उसके मालिक का टेप जितनी जल्दी हो सके मिलना ज़रूरी था.

कुवरसिंघ ने मुझे टेप कहाँ रखा है ये बता दिया है. और मोना को टेप देने का काम भी मुझे दिया है. मतलब सब कुछ मेरे हाथ मे.

मैं हवेली मे जा तो रहा था पर ठकुराइन का डर भी था.रिस्क लेना ज़रूरी था.

वैसे मैं ने रणजीतसिंघ को कॉल करके पूछा कि वो कहाँ है. रणजीतसिंघ ने कहा कि वो और कामिनी एक फंक्षन मे है.

रणजीतसिंघ भी नही है. अब क्या करूँ, हवेली मे किसी भी हालत मे जाना है.

अगर आज नही गया तो कल जाना पड़ेगा. अगर कल भी रणजीतसिंघ बिज़ी रहा तो,मैं ने मन बना लिया और हवेली के पास पहुँच गया.

हवेली मे जाते ही मैं ने नौकरानी से ठकुराइन के बारे मे पूछा .नौकरानी ने बताया कि ठकुराइन अपने कमरे मे आराम कर रही है.

नौकरानी को उसका काम करने को कहा और उपर चला गया. मुझे अब सभी पहचाने लगे थे जिसके वजह से नौकरानी ने मुझे कुछ नही पूछा.

चलो अच्छा हुआ ठकुराइन अपने कमरे मे सो रही है. मैं कुवरसिंघ के विंग मे चला गया

कुवरसिंघ के विंग मे एक कमरा उसका बेडरूम और दूसरा कमरा उसका ऑफीस था.

मैं ने बेडरूम के गेट पर नोक किया.

रेशमा-कौन है,

अवी-भाभिजी मैं अवी

रेशमा-अंदर आ जाओ

मैं अंदर चला गया. रेशमा बेड पर बैठ कर किताब पढ़ रही थी.

रेशमा ने ब्लॅक कलर की साड़ी पहनी थी. शायद रेशमा का पसंदीदा कलर होगा.

रेशमा-तुम ,अचानक यहाँ, क्या हुआ

अवी-आप से एक काम था.

रेशमा-उनका(कुवरसिंघ) पता चल गया.

अवी-लगभग चल गया है

रेशमा-कहाँ है

अवी-वो तो अभी तक पता नही चला ,पर कल तक आप कुवरसिंघ से बात कर पाओगी

रेशमा-तुम्हे पता नही कि वो कहाँ है तो फिर मेरी बात कैसे होगी उनसे,उनका मोबाइल भी तो बंद है.

अवी-मैं ने अपने फ्रेंड को कुवरसिंघ का पता लगाने भेजा है ,कल तक कुवरसिंघ का पता चल जाएगा. आप बेफिकर रहिए.और

रेशमा-और क्या

अवी-और ये बात रणजीतसिंघ को मत बताईएगा.

रेशमा-क्यू?

अवी-क्यू कि कुवरसिंघ को पता चला तो वो आप पर गुस्सा करेंगे.

रेशमा-हाँ,सही कहा, लेकिन भाई साब ने मेरी मदद की है ,

अवी-वो अलग बात है, ये बात कुवरसिंघ को पता नही है.वो तो आप पर गुस्सा करेंगे

रेशमा-नही बताउन्गी. और वैसे भी भाई साब से मैं नज़र नही मिला पा रही हूँ.तो बात कैसे करूँगी.

अवी-वो क्यूँ?

रेशमा-उस दिन के वजह से

अवी-अच्छा ब्लॅक कलर की वजह से

मेरी बात सुनते रेशमा शरमा गयी.

अवी-भाभिजी मैं आपका इतना काम कर रहा हूँ और आप है कि चाय के लिए भी नही पूछा .

रेशमा-मैं तो भूल ही गयी.रूको अभी चाय बनाने को बोलती हूँ

अवी-क्या भाभी जी ,मुझे लगा आप अपने हाथ की चाय पिलाएगी.लेकिन आप तो, जाने दीजिए मैं चलता हूँ

रेशमा-रूको मैं चाय बनाकर लाती हूँ,

रेशमा चाय बनाने के लिए नीचे चली गयी. और मैं ने कुवरसिंघ के ऑफीस की चाबी कबॉर्ड से निकाल ली.

के मिलने के बाद मैं कुवरसिंघ के ऑफीस मे चला गया.

कुवरसिंघ के ऑफीस से मुझे बहुत कुछ काम की चीज़े मिलने वाली थी ,पर समय कम होने की वजह से मैं ने मोना का टेप ले लिया.

टेप मिलने के बाद मैं वापस कुवरसिंघ के बेडरूम मे आ गया.

थोड़ी देर बाद रेशमा चाय लेकर आ गयी.

अवी-भाभी आपकी चाय का जवाब नही. आज तक ऐसी चाय कभी पीने को नही मिली. थॅंक्स

रेशमा-इतनी भी कुछ खास नही है.

अवी-आप तो ऐसे ही कहेंगी. मैं तो एक और कप पीऊंगा.

रेशमा-सच मे तुम्हे इतनी पसंद आई.

अवी-आपको झूठ लग रहा है.

रेशमा-ऐसा नही है. मैं तो...ये लो ,जितनी चाहिए पी लो

मैं ने एक और कप चाय ली

अवी-भाभी एक बात पुछु

रेशमा-हाँ पूछो

अवी-आपका फेव कलर ब्लॅक है

रेशमा-नही तो,

अवी-फिर आप ब्लॅक कलर के कपड़े क्यू पहनती है. उस्दिन भी ब्लॅक कलर और आज भी.

रेशमा ने फिर से अपने नज़रें नीचे की.

अवी-भाभी आपको मेरी बात बुरी लगती होगी तो बता देना मैं तो बस मज़ाक करने के लिए बोलता हूँ

रेशमा ने मेरी बात का जवाब नही दिया.

अवी-आपने जवाब नही दिया ,मतलब आपको बुरा लगता है. आगे से मज़ाक नही करूँगा.और चाय ले लिए थॅंक्स

इतना कह कर मैं खड़ा हो गया.

रेशमा-वो मैं....

अवी-वो मैं

रेशमा-तुम्हे कैसे बताऊ

अवी-तो रणजीतसिंघ को बता दीजिए

रेशमा-मेरा मतलब है कि

अवी-जाने दीजिए ,वैसे चाय अच्छी थी

रेशमा-और लो ना

अवी-पहले 2 कप हो गयी ,ऐसे चाय पीता रहा तो डाइयेबेटिक हो जाएगी.और हाँ जल्दी कुवरसिंघ की खबर लेकर आ जाउन्गा.तब फिर से चाय पिला दीजिएगा.

रेशमा-इंतज़ार करूँगी.

रेशमा के साथ थोड़ी देर बात करने के बाद मैं रेशमा के बेडरूम से बाहर आ गया.

 
640

रेशमा के साथ बात करने के बाद मैं सीडियो से नीचे जा रहा था कि सामने से पायल आ रही थी.

पायल हवेली की बेटी.

पायल-हाई

अवी-हाई

पायल-आज हवेली मे कैसे आना हुआ.

अवी-रणजीतसिंघ से मिलने आया था.

पायल-भैया तो हवेली मे नही है.

अवी-इसी लिए तो वापस जा रहा हूँ

पायल-जाना ज़रूरी है.

अवी-क्या?

पायल-अगर तुम्हारे पास टाइम है तो ...मैं अकेली....मेरा मतलब था कि...तुम जा...

अवी-ऐसे क्यू बात कर रही हो ,वैसे ही रणजीतसिंघ नही मिला , रणजीतसिंघ से मिलना ज़रूरी था, क्यूँ ना मैं थोड़ी देर रुक कर रणजीतसिंघ का इंतज़ार करू

पायल-मैं भी यही कहना चाहती थी. चलो मेरे रूम मे बैठ कर इंतज़ार कर लो

अवी-(मुझे पता है कि तुम मेरे साथ बात करना चाहती हो) हाँ चलो

फिर मैं पायल के साथ उसके कमरे मे चला गया.

पायल का कमरा हवेली की शान था. हर एक चीज़ आँखे मे उतर रही थी.

पायल-खड़े क्यू बैठो

मैं सोफे की जगह बेड पर बैठ गया. पायल भी मेरे साथ बेड पर बैठ गयी .

अवी-तुम्हारा कमरा तो महल जैसा है और तुम रानी हो.

पायल-ये तो ऐसे ही...मुझे तो बिल्कुल भी पसंद नही है ये सब

अवी-क्या बात कर रही हो ,ये बेड देखो ,इस से सॉफ्ट कोई नही है. एक बार इस पे लेट जाउ तो जन्नत मिल जाए,

पायल-तो लेट जाओ, किस ने रोका है.

अवी-मैं कैसे ये तो तुम्हारा ...सॉरी आपका है

पायल-क्या आपका ,तुम्हारा ठीक है

अवी-आप ठाकुर है.

पायल-यही तो मुझे पसंद नही है. मैं तो यहाँ आकर ऐसे रेस्पेक्ट की वजह से परेशान हो जाती हूँ. अगर तुम भी मुझे परेशान करना चाहते हो तो यहाँ से जा सकते हो ,या फिर

अवी-फ्रेंड

पायल-स्मार्ट हो,

अवी-तो फ्रेंड से पर्सनल बाते पूछ सकते है

पायल-ह्म्म्म्म कंडीशन अप्लाइ

अवी-कैसी कंडीशन

पायल-ज़्यादा पर्सनल नही.

अवी-जैसे कि

पायल-वो पूछने पर बता दूँगी.वैसे तुम शहर मे पढ़ते हो ना

अवी-हाँ, तुम्हे कैसे पता

पायल-तुम्हारी बहन कोमल ने बताया था.

अवी-और तुम क्या करती हो

पायल-अभी इंजिनियरिंग कंप्लीट की है.और एमबीए करने वाली हूँ

अवी-मैं भी इंजिनियरिंग करने के बारे मे सोच रहा था.

पायल-किस ब्रांच मे करना है.

अवी-वो अभी तक सोचना नही. तुम ने किस मे किया है

पायल-कंप्यूटर इंजिनियरिंग

अवी-फिर तो तुम एक्सपर्ट होगी कंप्यूटर मे

पायल-टॉपर हूँ अपने कॉलेज की

अवी-फिर मेरी भी हेल्प कर दो

पायल-हेल्प

अवी-मुझे कंप्यूटर के बारे मे जानना है.

पायल-तुम्हारे पास उसके लिए समय है.

अवी-समय ही नही है.

पायल-कोई बात नही, जब कभी समय मिले तो आ जाना. मैं सिखा दूँगी.

अवी-थॅंक्स (मुझे कंप्यूटर सीखने मे इंटेरेस्ट नही है)

पायल-पहले सिखाने तो दो

अवी-वैसे एक और बात सीखनी थी

पायल-क्या?

अवी-वो उस्दिन कार तुम चला रही थी

पायल-हाँ, सॉरी वो ग़लती से तुम से टक्कर हो गयी.

अवी-वो छोड़ो ये बताओ तुम कार चलाना सीख रही थी.या चलाना आता है

पायल-तुम्हे बताया था ना

अवी-फिर से जानना था

पायल-मुझे कार चलानी आती है.लेकिन ये बात पिताजी को नही पता,

अवी-तो उस्दिन मुझे टक्कर क्यूँ मारी

पायल-मेरे पिताजी को अगर पता चलता कि मैं कार चला सकती हूँ और उनसे ये बात छुपाई है तो मुझ पे गुस्सा करते

अवी-तो इस लिए मेरा आक्सिडेंट किया

पायल-वो क्या हैना, मेरे पिताजी ने मुझे नयी कार दी. और मुझे चलाना सिखाने लगे. मुझे तो कार चलानी आती थी इस लिए बस नाटक करने लगी. लेकिन भाई और पिताजी बीच बीच मे डिस्टर्ब करने लगे और आक्सिडेंट हो गया.

अवी-मतलब तुम्हे कार चलानी अच्छे से आती है

पायल-हाँ,

अवी-तो मुझे सिखा सकती हो

पायल-तुम्हारे पास समय है कार सीखने के लिए

अवी-निकाल लूँगा. तुम सिख़ाओगी

पायल-मुझे क्या मिलेगा.

अवी-क्या चाहिए

पायल-मुझे मेला घुमाना पड़ेगा.

अवी-पिछली बार तुम ने कहा था.

पायल-तो मेला दिखाओगे

अवी-(मेला, पायल को मेरे भाई बहन के साथ दिखा सकता हूँ) हाँ, लेकिन साथ मे मेरे भाई बहन भी रहेंगे

पायल-उनके साथ तो और मज़ा आएगा.

अवी-तुम अपने पिताजी और ठकुराइन से पर्मिशन निकालो,

पायल-आज ही बात करती हूँ.

अवी-मेरा नंबर ले लो, मुझे कॉल करना

हम ने नंबर एक्सचेंज किए.

अवी-बहुत टाइम हो गया .अब चलना चाहिए

पायल-मैं कॉल करूँगी. वैसे तुम्हारा

अवी-मेरा

पायल-हंसते हुए तुम्हारा दर्द कैसा है

अवी-अब ठीक है

पायल-जल्दी ठीक हो जाओ वरना फ्यूचर मे प्राब्लम हो जाएगी

अवी-अब फिट हूँ

पायल-फिट ही रहा करो

अवी-बाइ

पायल-बाइ

 
641

मोना का टेप लेने के बाद रेशमा और पायल के साथ बात करने के बाद मैं घर3 चला गया.

लेकिन उस से पहले मोना को कॉल करता हूँ.

अवी-हेलो मोना

मोना-क्या हुआ, अभी आना है तुम्हारे फ्रेंड की मालिश करने

अवी-नही

मोना-फिर कॉल क्यू किया.

अवी-एक गुड न्यूज़ है

मोना-तुम्हारा फ्रेंड चला गया

अवी-नही. हमारा काम हो गया

मोना-मज़ाक मत करो

अवी-सच मे हमारा काम हो गया ,टेप मुझे मिल गयी

मोना-सच, मैं अभी तुम्हारे पास आती हूँ

अवी-यहाँ मत आना ,

मोना-काम हो गया तो पार्टी करते है

अवी-अभी काम पूरा नही हुआ

मोना-क्या मतलब

अवी-तुम्हे आज शहर जाना होगा.

मोना-शहर क्यूँ

अवी-पैसे कहाँ है

मोना-शहर मे

अवी-तो लेकर आ जाओ

मोना-तुम मुझे धोखा दे रहे हो

अवी-मेरे पैसे लाने को कह रहा हूँ.

मोना-ऐसा कहो ना. मैं कल ही पैसे लेकर आती हूँ

अवी-कल नही परसो ,और हाँ आज ही निकल जाओ शहर, और अपने मालिक को खुश करो

मोना-समझो हो गया बॉस

अवी-तो परसो मिलते है. मेरे कॉल का इंतज़ार करना.

मोना-इंतज़ार का फल पार्टी मना कर करेंगे.

अवी-मिलते है पार्टी मे

मोना को तो काम पर लगा दिया है अब कुवरसिंघ को देखता हूँ.

घर3 जाकर मैं कुवरसिंघ को देखना चाहता था कि वो कैसा है. सो रहा है या अभी तक रो रहा है.

लेकिन घर3 जाकर मुझे जोरदार झटका लगा.

गेट खोलते ही मेरे सामने जो नज़ारा था उसे देख कर मेरे हाथ पैर काँपने लगे.

मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा था कि मैं क्या करू

मैं तो गया काम से ,मेरा अब कुछ नही हो सकता.

मैं ने ये क्या कर दिया. कुवरसिंघ ये क्या किया तुम ने

मैं ने कुवरसिंघ को मार डाला.

कुवरसिंघ मर गया. साथ मे मुझे भी मरने के लिए छोड़ गया.

मुझे कुवरसिंघ के साथ रहना चाहिए था. रेशमा का वीडियो देखने के बाद कुवरसिंघ ने ये कदम उठा लिया.

मैं तो बस कुवरसिंघ को सबक सिखाने वाला था. लेकिन सब गया काम से

मैं क्या करूँ, मेरी पूरी लाइफ जैल मे कटेगी.

मेरे बाद चाची का क्या होगा ,रानी का क्या होगा.

बड़ी चाची मुझे जैल मे देख कर जीते जी मर जाएगी.

मैं ज़्यादा स्मार्ट बन ने की कोशिश कर रहा था. क्या ज़रूरत थी मुझे कुवरसिंघ के लफडे मे पड़ने की.

मैं अपनी मस्ती मे अच्छा था क्या ज़रूरत थी किसी के लफडे मे पड़ने की.

मैं ने ये ठीक नही किया.

कुवरसिंघ ने स्यूयिसाइड किया और मुझे फँसा गया.

मेरे साथ ये क्यूँ हुआ,

मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि मैं क्या करू.

मेरे दिमाग़ ने काम करना बंद किया था और दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था.

मैं कंट्रोल खोता जा रहा था. मेरे पैरो मे ताक़त नही थी खड़े रहने की.

मैं वही ज़मीन पर बैठ कर अपने किस्मत पे रोने लगा.

 


642

मैं अपनी किस्मत पे रो रहा था .मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा था.

लेकिन मेरी किस्मत को चाची और रानी की किस्मत का साथ था.

मैं रो रहा था कि मेरा मोबाइल बजने लगा. मैं ने मोना को कॉल करके गेट खोला था. मोबाइल मेरे हाथ मे था.

मैं ने मोबाइल मे देखा तो कॉल छोटी चाची का था. छोटी चाची का फोटो मेरे सामने आते ही मुझे छोटी चाची की बाते याद आ गयी.

चाची ने कहा था कि कोई भी प्राब्लम हो, छोटी या बड़ी, कभी घबराना मत ,हाइपर मत होना,खुद को शांत रखना, दिमाग़ को शांत रखना, और प्राब्लम को सॉल्व करने की कोशिस करना, हर प्राब्लम का कोई ना कोई सल्यूशन होता है बस सल्यूशन ढूँढना पड़ता है.

मैं ने चाची का कॉल कट किया और बाथरूम मे जाकर चेहरे पे पानी डाला. और खुद को नॉर्मल करने की कोशिस करने लगा.

मुझे कुवरसिंघ को ठिकाने लगाना होगा.

मैं कुवरसिंघ के पास चला गया.

कुवरसिंघ नीचे ज़मीन पर पड़ा हुआ था ,उसके गले मे रस्सी थी .और कुवरसिंघ के पास फॅन पड़ा हुआ था.

फॅन नीचे पड़ा हुआ है तो कुवरसिंघ...

मैं ने देर ना करते हुए कुवरसिंघ के साँसे चेक की.

कुवरसिंघ को चेक करते ही मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही था.

कुवरसिंघ की साँसे चल रही थी. कुवरसिंघ ज़िंदा है.

कुवरसिंघ स्यूयिसाइड कर रहा था पर कर नही पाया.फॅन नीचे गिर गया और कुवरसिंघ मरने से बच गया.

मैं ने फॅन को उठा कर दूर किया.और कुवरसिंघ के गले से रस्सी निकाल दी.

और कुवरसिंघ को गद्दे पर लिटा दिया. ऐसा करते हुए मेरे हाथो मे खून लग गया.

मैं ने कुवरसिंघ के सर को देखा तो वहाँ खून लगा हुआ था. फॅन सीधा कुवरसिंघ के सर पर गिरा होगा.

ये तो बाद मे सोचूँगा कि ये हुआ कैसे ,पहले कुवरसिंघ को ठीक करना होगा. कुवरसिंघ की हालत नाज़ुक थी.

पर कुवरसिंघ को कैसे ठीक करूँ, इसे हॉस्पिटल भी नही ले जा सकता.

कुछ सोच अवी, कुछ सोच, विद्या ,विद्या नर्स है .वो मेरे काम आ सकती है.

मैं ने देर ना करते हुए विद्या को कॉल किया.

अवी-हेलो विद्या

विद्या-हेलो

अवी-कहाँ हो तुम

विद्या-घर पे

अवी-घर मे कहाँ

विद्या-छत पर सूखे हुए कपड़े निकाल रही हूँ.

अवी-मेरी बात ध्यान से सुनो,

विद्या-सुन रही हूँ

अवी-तुम्हे अभी के अभी मेरे पास आना होगा.

विद्या-तुम हो कहाँ.

अवी-मैं खेत वाले घर3 मे हूँ, और हाँ साथ फर्स्ट एड्स बॉक्स लेकर आना

विद्या-फर्स्ट एड बॉक्स ,क्या हुआ तुम्हे

अवी-वो आकर देख लेना, और घर पे किसी को मत बताना, अगर कोई पूछे तो बताना कि बुआ के पास जा रही हो,

विद्या-समझ गयी. चाची को परेशान नही करना चाहते हो,काम हो जाएगा.

अवी-जल्द से जल्द आने की कोशिस करना

विद्या-बस निकल रही हूँ

चलो विद्या आकर कुवरसिंघ को देख लेंगी.

मैं फिर से बाथरूम मे जाकर अपना चेहरा सॉफ किया.

और छोटी चाची को कॉल करके दिल मे जो डर पैदा हुआ था उसे दूर कर दिया.

छोटी चाची से बात करने के बाद मुझे अच्छा फील हो रहा था.

छोटी चाची के एक प्यारी आवाज़ से मुझ मे नयी शक्ती आ गयी.

मैं जब भी मुसीबत मे होता हुआ तो छोटी चाची किसी ना किसी तरीके ,किसी भी रूप मे मेरी मदद के लिए आ जाती है.

अभी विद्या को कॉल करके कुछ ही देर हुई थी कि गेट पर नॉक हुआ.

अब कौन आ गया. मैं ने गेट की दरार से देखा तो बाहर विद्या थी.

विद्या इतनी जल्दी आ गयी. विद्या मेरे लिए कुछ भी कर सकती है. पर विद्या रणजीतसिंघ के लिए भी कुछ भी कर सकती है.

पहले विद्या का टेस्ट लेना होगा. गेट खोल कर विद्या को अंदर लेने की जगह मैं बाहर चला गया.

मुझे ठीक तक देख कर विद्या खुश हुई और शोक्ड भी हुई.

विद्या-हान्फते हुए तुम तो ठीक ठाक हो

अवी-पहले साँस लो फिर बात करते है.

विद्या ने लंबी लंबी सास लेकर खुद को नॉर्मल किया.

विद्या-अब बताओ क्या हुआ.

अवी-कुछ नही तुम से मिलने का मन हुआ और तुम्हे बुला लिया

विद्या-वेरी फन्नी

अवी-तुम से एक बात पूछनी थी.

विद्या-हाँ पूछो

अवी-तुम रणजीतसिंघ के भाई को जानती हो

विद्या-मिली तो नही पर फोटो मे देखा,लेकिन ये क्यू पूछ रहे हो. और फर्स्ट एड बॉक्स लेकर क्यूँ बुलाया है.

अवी-मैं ने ग़लती से रणजीतसिंघ को चाकू मार दिया है.

विद्या-क्या ?

अवी-हाँ, और मुझे तुम्हारी मदद चाहिए उसे आक्सिडेंट डेथ दिखाने के लिए

विद्या-ये तुम ने क्या किया.

अवी-जो हो गया सो हो गया अब मेरी मदद करो ,

विद्या-वो ज़िंदा है कि मार गया.

अवी-ज़िंदा है.

विद्या-मुझे क्यू बताया ये सब ,तुम दोनो मेरे मालिक हो

अवी-मतलब तुम मेरा साथ नही दोगी.

विद्या-मुझे सोचने दो ,

अवी-सोचने का समय नही है.

विद्या-ये सब हुआ कैसे

अवी-सुबह हमारा झगड़ा हुआ और अब मैं ने ,

विद्या-क्या रणजीतसिंघ ने तुम्हे देखा है

अवी-नही. मैं ने नकाब पहना था.

विद्या-तो हो गया काम ,हम रणजीतसिंघ को हॉस्पिटल लेकर जाएँगे

अवी-तुम पागल हो, ऐसे तो पोलीस केस हो जाएगा.

विद्या-मैं रणजीतसिंघ को मरने नही दूँगी.

अवी-और मेरा क्या

विद्या-मैं पोलीस को कहूँगी कि ये मैं ने किया है.

अवी-तो दोनो की मदद करना चाहती हो.

विद्या-हाँ,

अवी-तुम ग्रेट हो और हँसने लगा.

विद्या-हँस क्यू रहे हो

अवी-मैं ने तुम से झूठ कहा

विद्या-झूठ?

अवी-हाँ झूठ, रणजीतसिंघ को कुछ नही हुआ

विद्या-तुम भी ना ,डरा दिया था मुझे ,अगर रणजीतसिंघ को कुछ नही हुआ तो ये समान क्यू मँगाया

अवी-कल ना रणजीतसिंघ के भाई कुवरसिंघ पे कुछ गुन्डो ने हमला किया.

विद्या-कुवरसिंघ पे

अवी-हाँ, मैं ने उसको गुन्डो से बचा लिया ,पर आज उसने स्यूयिसाइड करने की कोशिस की

विद्या-स्यूयिसाइड ,कहाँ पर

अवी-अंदर है वो, फॅन से लटक रहा था कि फन नीचे गिर गया .और वो बच गया पर सर पे चोट लगी है. और उसकी हालत नाज़ुक है.

विद्या-तो चलो जल्दी. वरना मर जाएगा.

अवी-चलते है. पर ये बात किसी को मत बताना ,रणजीतसिंघ को भी नही.

विद्या-मैं तो रणजीतसिंघ से मिली भी नही इतने दिन से. तुम टेन्षन मत लो

फिर मैं विद्या को लेकर अंदर आ गया

 


643

मैं विद्या को लेकर अंदर चला गया.

विद्या को अंदर जाकर कुवरसिंघ की हालत दिखाई.

अवी-विद्या इसे कैसे भी करके ठीक कर दो

विद्या-पहले देखने तो दो,

अवी-जल्दी देख लो

विद्या ने कुवरसिंघ को चेक किया.विद्या के एक्सप्रेशन चेंज हो गये.

अवी-क्या हुआ विद्या

विद्या-इसकी हालत तो नाज़ुक है

अवी-इसी लिए तुम्हे बुलाया है

विद्या-मुझसे कुछ नही होगा.

अवी-मेरी विद्या के लिए कुछ मुश्किल नही हो सकता

विद्या-मस्का मत लगाओ ,करती हूँ कुछ

अवी-ये हुई ना बात

विद्या ने अपनी तरफ से पूरी कोशिस करने लगी.

विद्या-मैं तुम्हे एक इंजेक्षन लिख कर दे रही हूँ उसे लेकर आ जाओ, तब तक मैं बाकी का काम देखती हू

मैं ने टाइम देखा. अब शाम के 3.30 बज रहे थे. चलो इंजेक्षन लेकर आता हूँ. फिर मेले मे भी जाना है.

मैं इंजेक्षन लेने शहर चला गया.

तब तक पता नही विद्या क्या कर रही होगी.

मैं इंजेक्षन लेकर आ गया .और आते ही कुवरसिंघ को देख कर मेरी हँसी निकल गयी.

विद्या ने कुवरसिंघ का मुंडन कर दिया था.

अवी-ये क्या किया तुम ने

विद्या-सर पे चोट लगी थी. उसके लिए करना पड़ा

अवी-कोई बात नही.ये लो इंजेक्षन

विद्या ने कुवरसिंघ को इंजेक्षन लगा दिया.

विद्या-लो हो गया ,

अवी-अब सब ठीक है ना

विद्या-हाँ, सुबह तक इसे होश आ जाएगा. पर एक बार हॉस्पिटल मे दिखा देना

अवी-ठीक है दिखा दूँगा. थॅंक्स

विद्या-थॅंक्स से काम नही चलेगा.

अवी-तो क्या चाहिए

विद्या-तुम्हे पता है.

अवी-तुम भी ना ,चलो ठीक है ,लेकिन मेरा एक और काम करना होगा तुम्हे

विद्या-क्या?

अवी-मैं थोड़ी देर मे मेले मे जाउन्गा. तब तक तुम यही रुकना ,इस पे ध्यान रखना.

विद्या-ये तो कर दूँगी.पर मेरा इनाम कब मिलेगा.

अवी-अभी थोड़ा समय बाकी है मेले मे जाने के लिए

विद्या-इतने कम समय मे क्या होगा.

अवी-सिर्फ़ एक काम हो सकता है.

विद्या-वो क्या?

अवी-सुबह तुम ने मुझे खुश किया अब मैं करूँगा.

मेरे इतना कहते विद्या मेरे गले लग गयी.

 


644

विद्या मेरे गले लग गयी.

कुवरसिंघ नीचे बेहोश पड़ा हुआ था .और विद्या मेरे गले लगी हुई थी.

विद्या को मैं ने थोड़ा उपर उठा लिया और अपने विद्या के गंद को ज़ोर से दबा दिया.

विद्या-आउच ,क्या कर रहे हो ,दर्द हो रहा है

अवी-ये तो कुछ भी नही. जब चुदाई करेंगे तब तुम्हारा क्या होगा.

विद्या-डरा रहे हो

अवी-डर लग रहा है.

विद्या-मुझे क्यू डर लगेगा. जितना दर्द देना है दो ,पर जल्दी दो

अवी-आज प्यार ,फिर किसी दिन दर्द

और मैं ने विद्या को बेड पर लिटा दिया.विद्या ने मुझे अपने उपर खीच लिया.

और हमारे होंटो एक दूसरे से जुड़ गये.

विद्या मेरे साथ किस करने के लिए हमेशा तय्यार रहती है.और उसका जोश हमेशा मुझपे भारी रहता है.

विद्या के साथ किस करने से ऐसा लगता जैसे विद्या मुझे किस करना सिखा रही हो.

विद्या के दोनो होंटो का रस पीने मे मुझे मज़ा आता है.

विद्या के साथ मुझे हमेशा मज़ा मिलेगा यही सोच कर विद्या को अपने साथ रखा है.

विद्या को आराम से औरत बनाना चाहता था. और आज बहुत कम समय था मेरे पास.

विद्या को भी ये बात पता थी कि आज ज़्यादा कुछ नही होगा. पर जितना था वो काफ़ी था विद्या को खुश करने के लिए.

एक लंबा किस करने के बाद मैं ने विद्या की सलवार का नाडा पकड़ कर खोल दिया.

विद्या ने सलवार निकालने के लिए अपनी गंद उपर की ,और मैं ने सलवार के साथ पैंटी भी निकाल दी.

अवी-विद्या तुम और तुम्हारी

विद्या-तुम बाते बहुत करते हो और काम कम ,तुम तारीफ करने की जगह अपना काम करो, उस से मुझे ज़्यादा खुशी मिलेगी.

अवी-तुम्हारी खुशी मे मेरी खुशी है.

और मैं ने विद्या की प्यारी चूत पर किस किया.

विद्या ने राहत की सास ली. उसे जो चाहिए था वो मिलने वाला था.

विद्या ने अपनी चूत को अच्छे से मेनटेन करके रखा था.जिस से विद्या की चूत मुझे मदहोश कर रही थी.

मैं भी विद्या की चूत मे मदहोश होकर किस करने का पूरा आनंद ले रहा था.

चूत के होंटो से अपने होंटो मिलते ही ,ऐसा लग रहा था कि चूत मुझे किस कर रही है ,

जैसे होंटो पे किस करते हुए जीभ को चूस्ते है वैसे ही मैं ने अपनी जीभ चूत के मुँह मे डालने लगा ताकि विद्या की चूत को चूस सकूँ,

जीभ को पता था कि आगे क्या करना है. जीभ से चूत को चोदने लगा. जीभ के लपलपाने से चूत के अंदर तक सरसराहट होने लगी.

चूत तो मेरे काबू से बाहर जा रही थी. ऐसे मे मैं ने चूत के वीक पॉइंट पर हमला कर दिया.

चूत के दाने को जीभ से चाटने लगा, छेड़ने लगा,

ऐसा करने से चूत मेरे काबू मे आ गयी और चूत काबू मे आने का मतलब विद्या मेरे काबू मे आ गयी.

विद्या की नशीली चूत ने मेरी जीभ को नशे मे झूमने पे मज़बूर कर दिया ,जिस का मज़ा मैं और विद्या दोनो लेने लगे.

विद्या की चूत को चूसने के बाद मैं ने अपने होंटो से चूत के होंटो को लॉक किया .और मैं चूत के रस को बाहर निकालने के लिए चूसने लगा.

ऐसा करने से विद्या की चूत मे प्रेशर क्रियेट होने लगा.

चूत की माषपेशिया सिकुड़ने लगी.

विद्या तो मस्ती मे शीष्कारिया लेने लगी

विद्या ने बेडशीट को अपने हाथो मे कस के पकड़ कर ,अपने सर को इधर उधर घुमाने लगी.

चूत चूसने के लिए जैसे मैं दम मारता वैसे विद्या बेडशीट को कस के पकड़ कर अपनी गंद उपर कर देती ,जिस से दोनो को डबल मज़ा मिलता.

इस तरह चूत चूसने से मेरा जोश बढ़ रहा था.और जैसे ही विद्या ने अपनी गंद उपर की वैसे मैं ने अपना हाथ उसकी गंद के नीचे डाल दिया.

अब तो मज़ा और बढ़ गया. चूत चूसवाने के लिए विद्या गंद उपर करने लगी. और गंद उपर होते मैं कस के गंद को दबा देता ,जिस से विद्या की चूत चूसने मे मज़ा आ जाता.

विद्या को बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था.

गंद दबाने से वो अपना कंट्रोल खोती जा रही थी.

इस बार मैं ने भी जोश मे आकर जोरदार दम मारा,विद्या ने इस हमले को अपनी गंद कुछ ज़्यादा ही उपर कर उठा दिया .और गंद पर मेरा ज़ोर पड़ते हीविद्या का बदन अकड़ने लगा.

विद्या की गंद ऐसे ही हवा मे उठी हुई थी.

और विद्या के मुँह से चीख निकल गयी.

अवईीईईईईईईईईईईईईईईईईई

और विद्या ने अपनी गंद हवा मे रखते हुए जोरदार पिचकारी मेरे मुँह मे मारी.

चूत से पिचकारी निकलते हुए मैं पहली बार देख रहा था.

पिचकारी सीधी अंदर मेरे मुँह मे चली गयी ,सिर्फ़ एक धार निकली.

उसके बाद धीरे धीरे जैसे दूसरे की चूत से पानी निकलता है.वैसे निकलने लगा.

पिचकारी छोड़ने के बाद विद्या ने अपनी गंद नीचे पटक दी.

विद्या की चूत मुझे भी अपने साथ नीचे ले गयी. और सारा पानी पीने को मज़बूर किया.

गंद नीचे पटक ने के साथ विद्या ने लंबी सास लेते हुए अपने बदन को ढीला छोड़ दिया.

मैं अपना काम करता गया ,और चूत का रस पान करने लगा.

चूत से पानी पीने के बाद मैं विद्या के उपर आ गया .और विद्या के मुँह मे जीभ डाल दी.

विद्या अपने ही पानी को मेरी जीभ से चूसने लगी.

थोड़ी देर बाद मैं ने विद्या के आँखो पर किस किया.

विद्या-अवी आइ लव यू

अवी-लव यू टू डियर

विद्या-तुम जादूगर हो

अवी-और तुम सेक्स की देवी. अब बताओ मज़ा आया.

विद्या-इस मे इतना मज़ा आया तो पूरी चुदाई मे कितना आएगा

अवी-तुम सोच भी नही सकती इतना मज़ा आएगा.

विद्या-तो जल्दी दो ना मज़ा

अवी-अभी नही, आज के लिए इतना काफ़ी है. नेक्स्ट टाइम कुछ और करेंगे. स्टेप बाइ स्टेप

विद्या-ऐसे तो मैं तड़प्ती रहूंगी.

अवी-तड़प ने के बाद और मज़ा आता है. और तुम्हारे साथ पूरा मज़ा लेना चाहता हूँ

विद्या-जैसा तुम कहो, मैं तुम्हारी गुलाम हूँ

अवी-गुलाम नही. फ्रेंड ,अब कपड़े पहन लो

विद्या-क्यू, मुझे तो यही रुकना है ना

अवी-तो क्या नंगी रहोगी.

विद्या-तो क्या हुआ ,वो भी तो नंगा है

अवी-तुम मेरी हो .और तुम्हे कोई नंगा देके मुझे अच्छा लगेगा क्या

विद्या-ओके बॉस, ये गुलाम आज के बाद सिर्फ़ आपके सामने नंगी होगी.और किसी ने नही

विद्या ने कपड़े पहन लिए.मैं टाइम देखा तो 5.30 पीएम बज रहे थे.

आज तो गया काम से, कल जल्दी गया था और आज देर हो गयी.

मैं ने स्वेता दीदी को कॉल किया.और मेले मे आने को कहा .

विद्या को क्या करना है वो समझा कर मैं मेले मे चला गया.

मेले मे जाते ही पहले सब को सॉरी कहा फिर मेले मे एंजाय करने लगे.

कल की तरह आज भी गेम और खरीदी करने मे चला गया.

मेले मे घूमने के बाद मैं ने सबको वापस भेज दिया .और वापस घर3 चला गया.

घर3 मे विद्या ने कुवरसिंघ पे नज़र रखने के साथ साफ सफाई भी की.

अवी-ये क्या किया,

विद्या-कितनी गंदगी थी यहाँ पर ,तो थोड़ी साफ सफाई की

अवी-अच्छा काम किया. ये कुवरसिंघ कैसा है

विद्या-ठीक है,उसकी टेन्षन मत लो, सुबह या उस से पहले उठ जाएगा.

अवी-तो चलो तुम्हे छोड़ देता हूँ.

विद्या-चलो ,पर घर पे क्या कहूँगी. इतनी देर कहाँ थी.

अवी-सब साथ मे होंगे तो अपना काम करते रहना. और जो वहाँ पर नही होगा उसके साथ थी बोल देना .

विद्या-ये तो बढ़िया आइडिया है.

विद्या को सब समझने के बाद मैं उसको लेकर घर आ गया.

सब अपने अपने काम मे बिज़ी थे.

विद्या चुप चाप अपने काम मे लग गयी.

और मैं खाना खा कर वापस घर3 आ गया .

कुवरसिंघ अब नॉर्मल था ,चलो अच्छा हुआ. मैं ने थोड़ी देर मे अपना काम ख़तम किया और सो गया.

 
दोस्त आपकी कहानी की जितनी तारीफ़ की जाय उतनी कम है आपने इस साइट पर वो मुकाम हासिल किया जिसे शायद ही कोई छू पाये . दो लाख के आस पास पेज व्यू अपने आप मे एक हिमालय की चोटी है . जिसके पास फिलहाल तो मुझे कोई भी दिखाई नही दे रहा . मेरी तरफ से आपको ढेर सारी बधाई
 
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