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मैं और मेरा परिवार

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मोना अपने समय पर खाना लेकर आ गयी.

मोना के आते ही कुवरसिंघ ने रोना बंद किया.

अवी-अच्छा हुआ तुम आ गयी. देखो मेरे दोस्त को दर्द हो रहा है.

मोना-कुछ दिन दर्द तो होगा ही.

अवी-बाते कम करो और खाना खिला दो

मोना-पहले मालिश करनी होगी फिर खाना ,

अवी-कल से कुछ नही खाया मेरे दोस्त ने ,

मोना-खाना खाने के बाद मालिश नही कर सकते ,

अवी-जैसा करना है करो,ये लो मलम जखम पर लगाने के लिए और ट्यूब लंड पर लगा देना

मोना-वो तो बाद मे लगाना होगा. पहले सुबह की तरह गरम पानी से शरीर की मालिश कर देती हूँ

अवी-कुछ भी करो पर जल्दी करो

मोना अपने काम मे लग गयी. मोना ने पहले गरम पानी फिर गरम ब्रिक्स और फिर जखम पर मलम लगा दिया.

मालिश करने से कुवरसिंघ को राहत मिली.

कुवरसिंघ की चेहरे की मालिश करने के लिए मोना ने उसकी मंकी कॅप निकालने को कहा.

मैं ने मोना को चेहरे की मालिश करने से रोक दिया. चेहरे की मालिश करने को कुवरसिंघ ने मना किया.

मोना कुवरसिंघ के शरीर की मालिश करने लगी और कुवरसिंघ गरम कपड़े से अपनी आँखे सेकने लगा.

दूर से देख कर भी कुवरसिंघ की गंद का छेद दिख रहा था.पूरा खुल गया था.

कुवरसिंघ का लंड सुबह से वैसा ही पड़ा हुआ था.बेजान

कुवरसिंघ का चेहरा मार खाने से सूज गया था. मंकी कॅप और सूजन की वजह से कुवरसिंघ सच मे मंकी लग रहा था.

अब बारी थी खाना खाने की. पर एक प्राब्लम हो गयी.मोना के सामने खाना खाने के लिए मंकी कॅप निकालनी पड़ेंगी. और ये रिस्क मैं ले नही सकता था.

अवी-मोना ,मालिश हो गयी

मोना-हाँ, अब खाना खा सकता है तुम्हारा दोस्त

अवी-वो मैं खिला दूँगा ,अब तुम अपने घर जा सकती हो

मोना-टिफिन उसका क्या

अवी-वो सुबह लेकर चली जाना.

मोना-मतलब सुबह भी आना होगा

अवी-हां, और खाना लेकर आना

मोना को गुस्सा आ गया.मोना के कुछ कहने से पहले मैं मोना को लेकर बाहर आ गया.

मोना को थोड़ी देर समझाने के बाद मोना सुबह आने को तय्यार हो गयी.

चलो अब अंदर जाकर कुवरसिंघ को खाना खिलाता हूँ.

अंदर जाकर जो मैं ने देखा वो शायद ही मैं कभी देखने के बारे मे सोच सकता था.

पर सुबह कुवरसिंघ को बाथरूम का पानी पीते हुए देखने के बाद ये तो होना ही था.

कुवरसिंघ बैठ तो नही सकता था ,ना खड़ा रह सकता था. ऐसे मे कुवरसिंघ जो कल से भूका था, जो सिर्फ़ लंड के धक्के और मार खा रहा था ,वो लेट कर टिफिन मे रखा हुआ खाना कभी हाथ से तो कभी चाट कर खा रहा था.

एक कुत्ते की तरह कुवरसिंघ खाना खा रहा था. कल तक जो शेर की तरह रहता था उसे आज मैं ने कुत्ता बना दिया.

खाना ऐसे खा रहा था जैसे भिकारी को 5स्टार का खाना मिलता है और वो खाने पे टूट पड़ता है वैसे कुवरसिंघ खाना खा रहा था.

गाओं के ठाकुर का बेटा एक भिकारी बन गया था.

खाने क्या था, क्या हो सकता था, मोना ज़्यादा मेहनत तो नही लेगी, ऐसे मे खाने मे सिर्फ़ एक चीज़ हो सकती है वो थी खिचड़ी,

खिचड़ी के एक एक दाने को कुवरसिंघ खा रहा था. जैसे इस के बाद उसे कभी खाना नही मिलेगा

पानी भी उसी मग से पी रहा था जो मोना ने मालिश करने के बाद उसके पास वैसे ही रख दिया था.

कुवरसिंघ की हालत देख कर थोड़ा बुरा लग रहा था पर ऐसे लोगो के साथ ऐसा ही होना चाहिए,

मोना भी खूब निकली ,खाना एक छोटे टिफिन मे लाई थी. जिस से कुवरसिंघ का पेट भरा नही जिस की वजह से उसने टिफिन को चाट कर साफ किया.

खाना हो जाने के बाद कुवरसिंघ को दर्द बर्दास्त करने के लिए ताक़त मिल गयी.

अवी-हो गया ,खाना

कुवरसिंघ-हाँ, अब थोड़ा अच्छा लग रहा है

अवी-धीरे धीरे दर्द ख़तम हो जाएगा.

कुवरसिंघ-हाँ

अवी-अगर हॉस्पिटल मे होते तो जल्दी ठीक हो जाते

कुवरसिंघ-हॉस्पिटल मे कुछ दिन के बाद जाउन्गा. अभी गया तो मेरी बदनामी होगी

अवी- बदनामी की बात कर रहे हो ,तुम्हारा कौनसा नाम है, जो है वो ठाकुरजी का और रणजीतसिंघ का है ,अब उनका नाम भी मिट्टी मे मिल जाएगा.

मेरी बात सुनकर कुवरसिंघ ने अपना चेहरा नीचे कर लिया.

अवी-तुम क्यू चेहरा छुपा रहे हो ,चेहरा तो रणजीतसिंघ को छुपाना पड़ेगा तुम्हारी वजह से,

कुवरसिंघ की आँखे से पानी निकलने लगा.

अवी-अगर तुम रणजीतसिंघ के भाई ना होते ,तो तुम्हे ...

मेरी बात सुनकर कुवरसिंघ की हालत और खराब होने लगी.

अवी-रणजीतसिंघ तुम्हारे पाप छुपाता है और तुम ,ये लो पेन किल्लर खा लो

कुवरसिंघ ने चुप चाप मेरे हाथ से पेन किल्लर ले ली.

मैं ने गेट को अंदर से लॉक लगाया. मैं नही चाहता था कि कुवरसिंघ रात मे ग़लती से भाग जाए,

मैं ने जान बुझ कर ऐसी बाते कही ताकि कुवरसिंघ की नींद खराब हो जाए.

कुवरसिंघ को मेंटली टॉर्चर तो करना पड़ेगा.

उसे मैं चैन से कैसे सोने दे सकता था.

पेन किल्लर खाने के बाद मैं बेड पर और कुवरसिंघ नीचे सो गया.

 
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13थ डे

सुबह मैं अपने समय पर उठ गया .

कुवरसिंघ अब तक सो रहा था.वो तो सोता ही रहेगा.

मैं ने कुवरसिंघ को सोने दिया और मंदिर मे जाने की तय्यारी करने लगा .

कुवरसिंघ की हालत थोड़ी ठीक थी पर अभी भी कुवरसिंघ ना बैठ सकता था और ना खड़ा रह सकता था.

कुवरसिंघ को सोता हुआ छोड़ कर मैं घर चला गया.घर जाकर चाची बुआ और चाचा का आशीर्वाद लेकर सबके साथ मंदिर चला गया.

मंदिर मे रणजीतसिंघ अपनी फॅमिली के साथ आकर हमारा इंतज़ार कर रहा था.

रणजीतसिंघ अपनी बीवी कामिनी और ठाकुरजी ठकुराइन और ठकुराइन की बेटी आई थी.कुवरसिंघ की बीवी हमारे आने के बाद मंदिर मे आई.

कुवरसिंघ की बीवी रेशमा के चेहरे पे परेशानी दिख रही थी.रेशमा के चेहरे पे झूठी खुशी थी.

पता नही रेशमा क्यू परेशान थी, अपने पति की वजह से या फिर कुछ और बात हो सकती है.

मैं ने रेशमा पर ज़्यादा ध्यान नही दिया और मंदिर मे पूजा करके ठाकुरजी की फॅमिली के साथ बाते करने लगा.

थोड़ी देर बात करने के बाद मैं अपनी फॅमिली के साथ घर आ गया.

घर आते ही चाची ने मुझे नाश्ता दिया. 1 2 3 प्लेट नाश्ता कर लिया .क्या पता खाने के लिए वापस आ पाउन्गा या नही

नाश्ता करने के बाद मैं ने मोना को कॉल किया .

अवी-हेलो मोना

मोना-क्या है इतनी सुबह क्यू फोन क्यू किया.

अवी-सो रही थी

मोना-हाँ,

अवी-तुम खाना लेकर मेरे घर आ जाओ,मेरे फ्रेंड को भूक लगी है

मोना-तुम पागल हो गये हो, इतनी सुभह मैं खाना नही बनाने वाली.

अवी-(ये मोना भी ना) कल का कुछ बचा हुआ जो होगा वो लेकर आ जाओ

मोना-कल की खिचड़ी है

अवी-वही लेकर आ जाओ,

मोना-लेकिन एक प्राब्लम है

अवी-क्या?

मोना-वो खिचड़ी का बर्तन मैं ने खराब बर्तनो मे धोने के लिए रखा था

अवी-(कुवरसिंघ के लिए वो भी चल जाएगा) कोई बात नही .जो है ,जैसा है वो लेकर आधे घंटे मे मेरे घर3 पे आ जाओ

मोना-वो तुम्हारा फ्रेंड है उसे ऐसा खाना खिलाओगे

अवी-उसकी हालत देखते हुए कैसा भी खाना चल जाएगा.तुम बस लेकर आ जाओ,वरना वो भूख से मर जाएगा.

मोना-ठीक है ,खाना लेकर आ जाउन्गी.

मोना से बात करते हुए मैं घर3 आ गया.

कुवरसिंघ उठ चुका था ,मैं ने कुवरसिंघ को पानी दिया

कुवरसिंघ बिना मुँह धोए पानी पीने लगा.

अवी-अब कैसा है दर्द

कुवरसिंघ-दर्द तो अभी भी हो रहा है ,पर कल से थोड़ा कम है

अवी-अच्छी बात है,

कुवरसिंघ-कुछ अच्छी बात नही है, पीछे बहुत दर्द हो रहा है

अवी-पीछे कहाँ पीठ पर

कुवरसिंघ-पीठ पर नही गंद मे

अवी-वो भी धीरे धीरे कम हो जाएगा.

कुवरसिंघ-बस वो दर्द कम हो जाए ,फिर मैं कम से कम ठीक से सो तो पाउन्गा.

अवी-मुझे लगता है वो दर्द हॉस्पिटल जाकर ठीक होगा.

कुवरसिंघ-हॉस्पिटल नही, वहाँ गये तो मेरी बदनामी होगी

अवी-हॉस्पिटल नही तो ,तुम्हारा कोई दोस्त डॉक्टर होगा

कुवरसिंघ-है पर उसके पास गये तो वो भी मुझ पर हँसेगा.

अवी-ये बात है. वैसे मेरी पहचान के डॉक्टर है उनके पास जा सकते है.वो तुमको जानते भी नही ,

कुवरसिंघ-कौन है

अवी-वो दूसरे शहर मे है ,

कुवरसिंघ-दूसरे शहर ,फिर ठीक है ,लेकिन मेरी ऐसी हालत नही है कि कहीं जा साकु ,और वो डॉक्टर भरोसे के है ये कैसे पता चलेगा

अवी-उन पर मैं खुद से ज़्यादा भरोसा करता हूँ,

कुवरसिंघ-फिर ठीक है, थॅंक्स

अवी-थॅंक्स किस लिए

कुवरसिंघ-तुम ने मेरी इतनी मदद जो की

अवी-मैं ने तुम्हारी नही अपने फ्रेंड रणजीतसिंघ के भाई की मदद की. अगर तुम रणजीतसिंघ के भाई ना होते तो तुम्हारी कभी मदद नही करता,

कुवरसिंघ ने अपनी आँखे नीचे कर ली

अवी-तुम्हे लग रहा होगा कि तुम ने मुझे कितनी बार नीचा दिखाया फिर भी मैं तुम्हारी मदद कर रहा हूँ

कुवरसिंघ ने मेरी तरफ देखा

अवी-तुम ने मेरे साथ कैसा बर्ताव किया था फिर भी मैं तुम्हारी मदद इस लिए कर रहा हूँ क्यू की रणजीतसिंघ मेरा फ्रेंड .तुम्हारे भाई की वजह से आज तुम जिंदा हो

कुवरसिंघ की आँखो मे पानी आ गया.

अवी-अब फिर से रोना शुरू मत करो ,तुम्हे इतना अच्छा भाई मिला है जिसकी वजह से आज तुम जिंदा हो, तुम्हारे साथ तुम्हारे भाई का साथ है, जिस से ये दर्द भी ख़तम हो जाएगा.

कुवरसिंघ ज़ोर ज़ोर से रोने लगा.

अवी-अब क्यू रो रहे हो ,तुम्हारा भाई तुम्हारे साथ हमेशा रहता है. मैं ने देखा है, उस दिन पोलीस स्टेशन मे रणजीतसिंघ एक गर्ल के पैर छु कर तुम्हे माफ़ करने की रिक्वेस्ट कर रहा था. ठाकुर होकर सब के सामने उस गर्ल के पैर छु रहा था कि वो केस वापस ले , पता नही कौनसा केस था.

कुवरसिंघ-रोते हुए ,उस गर्ल के साथ मैं ने ज़बरदस्ती की थी

अवी-क्या ज़बरदस्ती, तुम इतने घटिया इंसान निकलोगे ये मुझे पता नही था.

कुवरसिंघ-वो मैं

अवी-तुम्हारे जैसे लोगो के साथ ऐसा ही होना चाहिए ,मैं बिना वजह तुम्हारी मदद कर रहा था. बिना वजह रणजीतसिंघ तुम्हे बचाने के लिए उसे गर्ल के पैर छु रहा था.

कुवरसिंघ ज़ोर से रोने लगा

अवी-मैं भी कैसी मुशिबत मे फस गया. एक अच्छे फ्रेंड की वजह से तुम्हारे जैसे घटिया इंसान की मदद कर रहा हूँ

कुवरसिंघ-मैं हूँ ही ऐसा ,मुझे उस्दिन मर जाना चाहिए था ,मेरे कर्मों की वजह से मेरी ये हालत हुई है, मैं ने भगवान जैसे भाई को मारने की कोशिस की थी, आज उसी भाई की वजह से जिंदा हूँ,

अवी-क्या कहा तुम ने रणजीतसिंघ को मारने की कोशिस की

और मैं ने कुवरसिंघ चेहरे पे थूक दिया. ऐसा करने से कुवरसिंघ और टूट गया.

मैं तो ऐसे ही दिन की तलाश मे था की कुवरसिंघ पे थूक सकूँ

अवी-तुम्हारे जैसा घटिया इंसान आज तक नही देखा मैं ने ,रणजीतसिंघ तुम्हे जान से ज़्यादा चाहता है उसे तुम ने मारने की कोशिस की,अगर ये बात रणजीतसिंघ को पता चली तो वो तुम से कितनी नफ़रत करेगा

कुवरसिंघ-उनको पता है

अवी-(ये तो मुझे भी पता है) रणजीतसिंघ को पता है फिर भी वो तुम्हे बचाने के लिए उस गर्ल के पैर छु रहा था, मान गये रणजीतसिंघ को ,वो है असली ठाकुर

कुवरसिंघ-सही कहा वो असली ठाकुर है और मैं ठाकुर के नाम पर धब्बा हूँ

और कुवरसिंघ ज़ोर ज़ोर से रोने लगा. रोते हुए कुवरसिंघ का दम घुटने लगा.

कुवरसिंघ को मैं मरने नही दूँगा.

मैं ने कुवरसिंघ को शांत किया और उसे पीने के लिए पानी दिया.

कुवरसिंघ को पानी पीने से थोड़ी राहत मिली पर उसने रोना बंद नही किया.

 


618

पानी पीने से कुवरसिंघ को राहत मिली.

कुवरसिंघ के शांत होते मैं ने फिर से अपना भाषण शुरू किया.

अवी-मुझे क्या है, वो तुम्हारा भाई है तुम उसके साथ जैसा चाहो वैसा कर सकते हो पर वो हमेशा तुम्हे प्यार करता रहेंगा.

कुवरसिंघ-मैं यहाँ से जाकर सब से पहले उनके पैर पकड़ कर माफी माँग लूँगा.

अवी-किस किस से माफी मागोंगे ,

कुवरसिंघ-उन सब से माफी मानूँगा ,जिस के साथ मैं ने बुरा किया था.

अवी-ये ठीक रहेगा क्या पता उनके माफ़ करने से तुम ठीक हो जाओगे,वैसे ये तुम्हारी हालत कैसे हुई.

कुवरसिंघ-ये मत पूछो ,उस रात को याद करता हूँ तो डर लगता है

अवी-उस रात ऐसा क्या हुआ

कुवरसिंघ-वो रात मेरी लाइफ की दर्दनाक रात थी.

अवी-मुझे तो तुम्हारी हालत देख कर ऐसा लगता है कि तुम्हारा रेप हुआ है

कुवरसिंघ-रोते हुए हाँ उस रात मेरा रेप हुआ है,

अवी-मुझे बता दो ,बताने से दर्द कम होता है.

कुवरसिंघ-तो सुनो, मुझे सविता नाम की औरत पसंद आ गयी .उसे भी मैं पसंद आया .और हम चुदाई करने लगे.उस रात हम चुदाई कर रहे थे ,कि पता नही कहाँ से उसका पति और उसके देवर आ गये और मेरे साथ ये सब किया जो तुम्हे दिख रहा है.

अवी-तो ये बात है

कुवरसिंघ-हाँ, मैं उन सब को छोड़ूँगा नही. उनको ऐसा सबक सिखाउन्गा की ,मैं उनको मार डालूँगा.

कुवरसिंघ की बात सुनकर मैं हँसने लगा.

कुवरसिंघ-हंस क्यू रहे हो

अवी-तुम घटिया के घटिया ही रहोगे

कुवरसिंघ-क्या मतलब

अवी-अभी थोड़ी देर पहले तुम अच्छे बनने की बात कर रहे थे और अब उनको मारने की बात कर रहे हो

कुवरसिंघ-तुम्हे दिख नही रहा कि उन लोगो ने मेरे साथ क्या किया

अवी-तुम ने भी तो उसकी बीवी, क्या नाम बताया था ,हाँ सविता ,उसके साथ तुम चुदाई करोगे तो क्या उसका पति तुम्हे छोड़ देगा

कुवरसिंघ-वो मुझे कुछ पता नही है. मैं उनको छोड़ूँगा नही.

अवी-(इसी का मुझे डर था) जो करना है कर लेना ,पर मेरे हिसाब से सविता के पति ने कुछ ग़लत नही किया.अगर उसकी जगह कोई और होता तो वो भी यही करता

कुवरसिंघ मेरी बात पर सोचने लगा.

अवी-क्या हुआ ,क्या सोच रहे हो

कुवरसिंघ-तुम वहाँ कैसे आए, वो तो जंगल था ,वहाँ तो कोई नही आता ,फिर तुम वहाँ कैसे आ गये.

अवी-मैं ने रात मे कुछ लोगो को इधर उधर कुछ ढूँढते हुए देखा ,मैं ने उन पर ध्यान नही दिया और कमरे मे आ गया.

फिर थोड़ी देर बाद किसी के चीखने की आवाज़ सुनाई दी.

चीखे इतनी दर्दनाक थी कि मेरी नींद खुल गयी.

मैं खेत मे इस लिए रहता था कि मेले मे आए लोगो का ध्यान रख सकूँ.

चीख सुनकर मैं समझ गया कि कोई मुसीबत मे है.

और मैं बाहर आकर देखने लगा कि किस की आवाज़ है. मैं बगीचे मे ढूँढने लगा ,कि आवाज़ किस की थी.

मैं बगीचे मे ढूँढ रहा था कि मुझे कुछ लोग जंगल से आते हुए दिखाई दिए. वो जहाँ से आ रहे थे वहाँ जाकर देखा तो तुम बेहोश पड़े हुए थे .मुझे लगा किसीने तुम्हे किडनेप करके यहाँ मार डाला है. तुम्हे चेक कर के देखा तो तुम ज़िंदा थे .

फिर क्या था मैं तुम्हे लेकर यहाँ आ गया. आगे क्या हुआ वो तुम्हे पता है.(अच्छा हुआ कुवरसिंघ ने उस आदमी के बारे मे कुछ सोचा नही. शायद मुझे भी सविता का देवर समझ रहा हो)

कुवरसिंघ-थॅंक्स ,अगर तुम ना होते तो आज मैं ज़िंदा नही होता

अवी-पहले तो तुम्हे देख कर लगा था कि तुम्हे मरने देना ठीक रहेंगा ,फिर रणजीतसिंघ के बारे मे याद आते तुम्हारी मदद की, रणजीतसिंघ जिस तरह तुम्हे बचाने के लिए उस गर्ल के पैर छु रहा था. उसे याद करके मुझे लगा कि तुम्हारे मरने से सबसे ज़्यादा दर्द रणजीतसिंघ को होगा ,और मैं रणजीतसिंघ को रोता हुआ नही देख सकता ,

कुवरसिंघ-तुम इस बात को मेरे भाई को मत बताना ,ये सुनकर उनको मुझसे ज़्यादा दर्द होगा.

अवी-तुम टेन्षन मत लो ,मैं किसी को भी इसके बारे मे नही बताउन्गा.देखो मैं ने मोना को भी नही बताया

कुवरसिंघ-तुम मोना को कैसे जानते हो

अवी-तुम भी जानते हो मोना को

कुवरसिंघ-हाँ, पर वो अलग स्टोरी है.तुम कैसे जानते हो मोना को

अवी-मोना और मैं ने साथ मे पढ़ाई की है. तभी से हम एक दूसरे को जानते है

कुवरसिंघ-वो दिख रहा है कैसे जानते हो

अवी-तुम्हे एक राज़ की बात बताता हूँ ,

कुवरसिंघ-क्या?

अवी-मैं ने मोना की चुदाई की है

कुवरसिंघ-क्या?

अवी-तभी तो वो तुम्हारी मदद करने को तय्यार हो गयी थी. वरना तुम्हारी कोई मदद नही कर सकता था

कुवरसिंघ-वैसे तुम ने उसे क्या बताया ,जो वो तय्यार हो गयी

अवी-वो तो तय्यार नही थी ,उसे खुद का कुछ काम था जिस की वजह से वो शहर से गाओं वापस आई थी. उसने मुझे बताया नही कि वो किस काम के लिए यहाँ आई है .पर मुझे लगा अगर उसके काम करने का प्रॉमिस किया तो वो तुम्हारी मदद कर देंगी.

फिर क्या था मैं ने कहा कि मेरा फ्रेंड मतलब तुम पोलीस ऑफीसर हो .अगर तुम ने मेरी मदद की मेरा फ्रेंड मतलब तुम उसकी मदद करोगे .फिर कही जाकर मोना तुम्हारी मदद के लिए तय्यार हुई.

कुवरसिंघ मेरी बात पर फिर सोचने लगा

अवी-क्या सोच रहे हो

कुवरसिंघ-आज इस दर्द की वजह से मुझे मेरी ग़लतियो पे पछतावा हो रहा है

अवी-कैसी ग़लतिया

कुवरसिंघ-मैं ने लड़कियो के साथ ज़बरदस्ती की ,और आज मेरी मदद एक लड़की कर रही है

अवी-लड़किया ऐसी ही होती है.

कुवरसिंघ-तुम नही समझे, मैं ने अपने भाई रणजीतसिंघ को अपना दुश्मन समझा था और आज उसकी की वजह से मैं ज़िंदा हूँ. मैं ने तुम्हे भी कितना बुरा भला कहा था ,फिर भी तुम मेरी मदद कर रहे हो ,और वो मोना भी मेरी मदद कर रही है.

अवी-इसको ज़िंदगी कहते है. जिसे हम तकलीफ़ पहुँचाते है वही हमारे ज़ख़्मो पे मलम लगाता है. मुझे ये पहले समझ मे आया .और तुम्हे अब

कुवरसिंघ-सही कहा. मैं ने जितने पाप किए है उनकी सज़ा मिली है ,ठीक होने के बाद सबसे पहले मैं अपने पापो को प्रायश्चित करूँगा.

अवी-कैसे

कुवरसिंघ-वो मुझे पता है,

अवी-जो करना है कर लेना. पर तुम ने ये नही बताया कि तुम मोना को कैसे जानते हो

कुवरसिंघ-वो ...वो भी मेरा एक पाप है

अवी-क्या किया था मोना के साथ तुमने

कुवरसिंघ-उसके साथ कुछ नही किया ,पर जो पाप करने वाला था उसे होने नही दूँगा.

अवी-मैं समझा नही

कुवरसिंघ-मोना मेरी वजह से शहर से गाओं आई है.

अवी-तुम्हारे वजह से, ठीक से बताओ

कुवरसिंघ मेरे सवाल का जवाब देने वाला था कि मोना ने गेट पर नोक किया.

 


619

मोना के आते ही कुवरसिंघ और मेरी बात बंद हो गयी.

अवी-अच्छा हुआ मोना तुम आ गयी ,देखो मेरे फ्रेंड की हालत बहुत खराब हो गयी है ,

मोना-तुम मेरी जान निकाल रहे हो

अवी-तुम्हे क्या हुआ

मोना-मैं ने अपनी लाइफ मे ऐसा काम नही किया और तुम मुझ से ऐसे काम करवा रहे हो

अवी-किसी की मदद करने से अच्छा कोई काम नही होता .

मोना-अब भाषण मत दो, ये लो इसमे खाना है , मैं मालिश की तय्यारी करती हूँ

मोना बाथरूम मे जाकर पानी गरम करने लगी.

अवी-(मुझे पता था कि खाने मे क्या लाया गया है, फिर भी नाटक तो करना था) देखते है खाने मे क्या है. ये तो खिचड़ी है

कुवरसिंघ के चेहरे पे कोई एक्सप्रेशन नही था.

अवी-सॉरी यार ,इस से ज़्यादा मैं कुछ नही कर सकता ,

कुवरसिंघ -कोई बात नही. जितना कर रहे हो उतना काफ़ी है.वैसे पेशेंट को खिचड़ी ही खाना चाहिए.

अवी-(समझदार होता जा रहा है कुवरसिंघ) मालिश करने के बाद खाना खा लेना

मोना-हटो ,मुझे मालिश करने दो

मोना कुवरसिंघ की मालिश करने लगी. मालिश करने के बाद जखमो पे मलम लगा दिया. गंद और लंड पर ट्यूब लगा दिया.

मोना ने कल रात और आज जल्दी मालिश ख़तम की.

मालिश ख़तम होते कुवरसिंघ खाना खाने लगा. कल रात की तरह कुत्ता बन गया.

मोना-अच्छा तो मैं चलती हूँ

अवी-इतनी जल्दी

मोना-मालिश हो गयी. अब रुक कर क्या करूँ

अवी-थोड़ी देर रुक जाओ .दोनो टिफिन साथ ले जाना.और रात मे फिर आना

मोना-कितने दिन करना होगा

अवी-एक 2 दिन और

मोना-उस से ज़्यादा नही करूँगी

अवी-मत करना

और मैं खड़ा होकर मोना को बाँहों मे ले लिया

मोना-क्या कर रहे हो .तुम्हारा फ्रेंड देख लेगा

अवी-वो खाना खा रहा है ,उसके खाना खाने तक थोड़ी मस्ती करते है.

कुवरसिंघ को भूख लगी थी. वो मोना के जाने का इंतज़ार नही कर सकता था.

कुवरसिंघ ने मंकी कॅप थोड़ी उपर की और खाना खाने लगा.

मोना को उसका चेहरा ना दिखे इस लिए मैं ने मोना को बाहों मे ले लिया.

कुवरसिंघ का मुँह हमारे दूसरी तरफ था जिस से वो सेफ था.

मोना-उसके सामने मैं नही करूँगी

अवी-(कुवरसिंघ के चेहरे पे मंकी कॅप के साथ कपड़ा भी लगा दिया था ,जिस से सिर्फ़ आँखे और मुँह मोना को दिख रहे थे.) उसके पीछे करते है

और मैं मोना को लेकर बेड पर आ गया .और मोना को बेड पर लिटा कर मैं उसके उपर आ गया .

मोना के नशीले होंटो को चूसने लगा.मोना पहले तो विरोध कर रही थी पर बाद मे मेरा साथ देने लगी

मोना के साथ देने से मुझे किस करने मे मज़ा आ रहा था.

किस करते हुए मैं ने एक हाथ को नीचे ले जाकर साड़ी के उपर चूत को मसल्ने लगा.

अब तो मोना की हालत खराब हो गयी थी.

मोना मेरी पीठ पर हाथ घुमाने लगी.

ये मैं ने क्या किया ,मोना गरम हो गयी. अब तो मोना का पानी निकालना पड़ेगा .वरना मोना सेक्स के नशे मे पूरा खेल खराब कर देगी.

मैं ने मोना को किस करना बंद किया.और मोना के उपर से उठ कर उसके टाँगो के पास बैठ गया.

मोना की साड़ी और पेटिकोट को उपर कमर तक कर दिया.

सारी और पेटीकोत उपर करते ही मोना की चूत मेरे सामने आ गयी. मोना ने पैंटी पहनी नही थी इसी के वजह से वो जल्दी गरम हो गयी.

मैं ने मोना की चूत को फिर से मसलना शुरू किया. और एक साथ 2 उंगली मोना की चूत मे डाल दी.

उंगली अंदर जाते ही मैं अपने काम मे लग गयी. मोना की चूत ने बहुत लंड का स्वाद चखा था इस लिए मैं मोना की चूत किसी भी कीमत पर चूसने वाला नही था

जीभ की जगह ,मोना की चूत से पानी निकालने का काम उंगलियो के उपर आ गया.

मैं उंगली को ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा.

कुवरसिंघ की वजह से मोना ने अपने होंटो पे हाथ रख कर शीष्कारिया रोकने लगी.

मोना कुछ ज़्यादा ही गरम हो गयी जिस की वजह से मोना का पानी जल्दी निकल गया

पानी निकलते ही मोना ठंडी पड़ गयी. मैं मोना के उपर से अलग हो गया.

मोना ने अपने कपड़े ठीक किए और मैं ने खुद को ठीक किया.

कुवरसिंघ का खाना भी हो गया.

कुवरसिंघ ने हम पे ज़्यादा ध्यान नही दिया. मोना टिफिन लेकर पतली गली से निकल गयी.

कुवरसिंघ के सामने मोना के साथ मस्ती करने से उसे ये तो पता चल गया कि मैं सच कह रहा था.

मोना के जाते मैं ने कुवरसिंघ को पेन किल्लर दी

अवी-ये लो पेन किल्लर ,

कुवरसिंघ ने पेन किल्लर खा ली .और सो गया.

मैं ने कुवरसिंघ को आराम करने दिया और मंदिर की तरफ चला गया.

 


620

कुवरसिंघ का काम जल्दी हो गया ,उसकी मालिश जल्दी कर दी मोना ने, जिस से मेरे पास काफ़ी समय था. मैं अपने काम भी कर सकता था.

मंदिर जाकर सबसे पहले पंडिताइन पर मेरी नज़र पड़ी.

पंडिताइन आज थोड़ा ज़्यादा ही सजधज कर आई थी. पंडिताइन खुश भी दिख रही थी.और खुशी की वजह मुझे पता थी.

पंडितजी अपने काम मे लगे हुए थे. पंडिताइन मुझे देखते ही पंडितजी को कुछ बोल कर अपने घर जाने लगी.

शायद ये मेरे लिए इशारा था.मैं भी पंडिताइन के पीछे पीछे चला गया.

पंडिताइन अपने घर जा चुकी थी जिसके वजह से मैं पीछे के गेट की तरफ चला गया.

मैं ने इधर उधर देखा और रास्ता साफ होते ही गेट पर खटखटाया, पंडिताइन ने पहले ही आवाज़ पर गेट खोल दिया.गाते खोलते ही मैं घर के अंदर और गेट बंद .

मैं अंदर जाकर पिछली बार की तरह बेड पर बैठ गया.

पंडिताइन-यहाँ क्यूँ आए हो

अवी-आपने तो कहा था कि आज जवाब देंगी

पंडिताइन-तुम्हे जवाब चाहिए

अवी-हाँ,

पंडिताइन-(इसके इसी भोलेपन पर चूत कुर्बान) तुम्हे यहाँ घर तक लाई हूँ, एक आवाज़ पर गेट खोला, बेड पर मेरे पास बिठाया है फिर भी तुम्हे जवाब चाहिए

अवी-(मुझे पता है कि तुम्हे मेरे साथ चुदाई करनी है) मैं समझा नही

पंडिताइन-(ये ऐसे नही समझेगा) मैं तुम्हारे साथ चुदाई करने को तय्यार हूँ .

अवी-सच

पंडिताइन-हाँ ,और बिना कॉंडम के

अवी-(मैं तो कॉंडम लाना भूल गया था अच्छा हुआ पंडिताइन बिना कॉंडम की चुदाई को तय्यार हो गयी) आपको पता नही मैं कितना खुश हुआ हूँ आपका जवाब सुनकर,

पंडिताइन-अब क्या सिर्फ़ बाते करोगे.

पंडिताइन के इतना कहते मैं पंडिताइन के उपर टूट पड़ा.

पंडिताइन को गले लगाकर बेड पर गिर गया. और पंडिताइन के चेहरे पे हर जगह किस करने लगा.

पंडिताइन मेरी बाहों से निकलने की कोशिस करने लगी. पंडिताइन ऐसा क्यूँ कर रही थी पता नही ,मैं अपने काम मे लगा हुआ था

पंडिताइन ने ताक़त लगा कर मुझे खुद से अलग कर लिया .और बेड से उतर गयी.

अवी-क्या हुआ

पंडिताइन-तुम शुरू करने से पहले बता नही सकते थे

अवी-आपको जवाब सुनकर एक अजीब सा जोश आ गया ,और इस जोश मे आपको बताना भूल गया.

पंडिताइन-(जोश मे जोरदार चुदाई होगी. मतलब डबल मज़ा आएगा.)

अवी-मेरा इस तरह करना आपको पसंद नही आया ,

पंडिताइन- पसंद आया पर इस तरह करने से मेरे कपड़े खराब हो सकते है. और किसी को शक हो सकता है.

अवी-तो निकाल दीजिए कपड़े

मेरे कहने से पहले पंडिताइन ने अपनी साड़ी निकाल कर ठीक से रख दी और साथ मे ब्लाउस भी निकाल दिया.

पंडिताइन ने ब्रा तो पहनी नही थी जिस की वजह से वो टॉपलेस हो गयी. पंडिताइन के बूब्स मेरे सामने और मेरे मुँह मे पानी आ गया.

फिर पंडिताइन ने पेटिकोट मे हाथ डाल कर पैंटी निकाल दी.और मेरी तरफ देखने लगी.

मुझे देखते पंडिताइन के चेहरे पे स्माइल आ गयी. पंडिताइन के कपड़े निकालते समय मैं ने अपने कपड़े निकाल दिए थे .और नंगा होकर बेड पर पंडिताइन का इंतज़ार करने लगा.

पंडिताइन-आज मज़ा आ जाएगा.

अवी-पेटिकोट क्यू नही निकाला ,इसे भी निकाल दो

पंडिताइन-इसे रहने दो ,अगर कोई आ गया तो गड़बड़ हो जाएगी.

मैं ने ज़्यादा देर ना करते हुए पंडिताइन का हाथ पकड़ कर अपने उपर गिरा दिया.

पंडिताइन ने खुद को ढीला छोड़ कर मेरे उपर आ गयी.

अवी-आज आपको कच्चा खा जवँगा

पंडिताइन-तो खा जाओ

अवी-कहाँ से शुरुआत करू, गुलाबी होंटो, रसभरे आम या रसमलाई चूत से

पंडिताइन-उपर से नीचे तक

पंडिताइन को ठीक से मेरे उपर ले कर पंडिताइन के होंटो के पास मेरे होन्ट आ गये.मैं ने अपने होंटो पर जीभ घुमाई ,ये देख कर पंडिताइन ने चेहरे पे स्माइल आ गयी .और इस स्माइल को किस करके ख़तम कर दिया

और शुरू हो गया चुदाई का खेल ,

खेल की शुरुआत हुई मुँह मीठा करने से, मैं पंडिताइन का मुँह मीता कर रहा था और पंडिताइन मेरा मुँह मीठा कर रही थी.

पंडिताइन होने के बाद भी खुद को अच्छे से मेनटेन करके रखा था. गाओं मे रह कर शहर की औरतो को मात दे रहा था पंडिताइन का रशीला बदन

पंडिताइन के होंटो मे रस की कोई कमी नही थी. अगर होंटो मे इतना रस होगा तो चूत मे कितना होगा.

पंडितजी तो अब पंडिताइन पे ध्यान नही देते होगे और रणजीतसिंघ तो गंद मारने मे एक्सपर्ट है .मतलब चूत मे रस की कोई कमी नही होगी. आज पंडिताइन की चूत का रस पी कर अपनी प्यास बुझा सकता हूँ

पंडिताइन के होंटो को चूसने के बाद पंडिताइन के मुँह मे जीभ डाल कर चूसने का इन्विटेशन दिया पर पंडिताइन को ये पसंद नही था .जिस की वजह से अब नीचे जाने का वक्त आ गया था.

पर पहले पंडिताइन को मेरे उपर से नीचे करना होगा. और ये काम आसानी से हो गया.

पंडिताइन मेरे नीचे आ गयी .पंडिताइन के बेड पर लेटने से मैं पंडिताइन के उपर आ गया. और पंडिताइन के पेटिकोट को उपर करके चूत के दर्शन किए.

पंडिताइन ने चूत चिकनी करके रखी थी . पंडिताइन को पता था कि आज मैं उनकी चुदाई करूँगा ,जिसकी वजह से पंडिताइन पूरी तय्यारी करके रेडी थी.

चूत को देखने के बाद मैं ने लंड को चूत पर सेट कर पंडिताइन के उपर आ गया.और बूब्स पर हमला बोल दिया.

ऐसा करने से मैं बूब्स के साथ साथ चूत पर लंड रगड़ने का मज़ा ले सकता था.

पंडिताइन को भी इसमे डबल मज़ा मिलने लगा.

पंडिताइन के बूब्स जितना सोचा था उस से काफ़ी टाइट थे. बूब्स पर ना पंडितजी ने और ना रणजीतसिंघ ने मेहनत की थी.

और ऐसे मज़ेदार मेहनत करने को मैं हमेशा तय्यार रहता हूँ.

मैं ने मेहनत करने की शुरुआत की थी की पंडिताइन ने मुझे रोक दिया.

अवी-क्या हुआ ,

पंडिताइन-इनके साथ बाद मे खेल लेना ,पहले नीचे ध्यान दो

अवी-ऐसे मे मज़ा नही आएगा.

पंडिताइन-कई महीने हो गये लंड लेकर चूत से पानी नही निकाला ,एक बार जल्दी से पानी निकाल दो,

अवी-(पंडिताइन गरम औरत है. जल्दी गरम हो जाती है ,इसी लिए बूब्स टाइट है.) चूत को गीला तो करना होगा

पंडिताइन-चूस्कर कर दो, तुम्हारा लंड चूत को टच होते मैं बर्दास्त नही कर पा रही हूँ

चलो आज पंडिताइन की इच्छा पूरी कर देता हूँ.

मैं पंडिताइन के उपर से उठ कर टाँगों को फैला कर चूत के पास अपनी जीभ ले जाने लगा.

पंडिताइन की चूत को पहले जीभ से चाट कर साफ किया .फिर चूत को चूसना शुरू किया.

पंडिताइन की बड़ी जाँघो मे छोटी चूत चूसने मे मज़ा आ रहा था.

पंडिताइन लगातार अपनी जाँघो को हिला रही थी. गान्ड को उपर उछाल रही थी.

पंडिताइन हद से ज़्यादा गरम हो चुकी थी .और चूत आग की भट्टी की तरह तप रही थी.

चूत को चूसने के बाद जब मैं ने जीभ से दाने को टच किया तो पंडिताइन ने अपनी जाँघो से मेरे सर को कस दिया.

मेरे सर पर हाथ रख कर चूत पे दबा दिया.

पंडिताइन-आआआहह मार गयी

और पंडिताइन की चूत से एक फव्वारा निकल गया. जिस से मेरा चेहरा गीला हो गया. और बाकी का रस मेरे मुँह से होता हुआ मेरे पेट मे चला गया.

पंडिताइन की चूत का रस देख कर मैं समझ गया कि पंडिताइन कितनी गरम हो चुकी थी.

थोड़ी देर ,मतलब चूत से आख़िरी बूँद बाहर निकलने तक पंडिताइन मेरे सर को पकड़े हुए थी.

जैसे पंडिताइन की गर्मी ठंडी हुई पंडिताइन मुर्दे की तरह बेड पर लेट कर हाँफने लगी.

मेरा सर अभी भी पंडिताइन की जाँघो के बीच था .

मैं चूत को चाट कर साफ करता गया .कि गेट पर खटखटाने की आवाज़ सुनाई दी.

आवाज़ सुनते पंडिताइन की मस्ती हवा मे उड़ गयी और मेरे हलक मे पंडिताइन का पानी अटक गया.

 
621

हम दोनो को साप सूंघ गया था.

कौन हो सकता है इस वक्त , सारा मज़ा खराब कर दिया.

पंडिताइन इस बात के लिए जैसे तय्यार थी.

पंडिताइन ने मुझे अलग कर के खड़ी हो गयी. और मुझे चुप रहने को कहा.

और पंडिताइन ने पेटिकोट का नाडा खोल दिया. पंडिताइन ये क्या कर रही थी. उनको कपड़े पहनने चाहिए ,वो तो कपड़े निकाल रही है.

पंडिताइन ने पेटिकोट का नाडा खोल दिया और पेटिकोट को उपर करके बूब्स को छुपा सके वहाँ तक ले जाकर नाडा फिर बाँध दिया.

पंडिताइन-तुम यही रूको

इतना कह कर पंडिताइन बाथरूम मे चली गयी ,बाहर से आवाज़ आ रही थी. पंडिताइन जल्दी से बाथरूम से बाहर आ गयी.

पंडिताइन के खुद को गीला कर लिया था .और सर और कंधों पे टवल लेकर गेट खोल दिया.

गेट के पास रहकर पंडिताइन ने कुछ बाते कही और गेट बंद कर दिया.और मेरे पास आ गयी.

अवी-कौन था

पंडिताइन-पंडितजी ने मुझे बुलाया है

अवी-तुम ने क्या कहा

पंडिताइन-नहा रही हूँ ये कह कर 10 मिनट मे आती हूँ कहा है.

अवी-ये क्या कर दिया. तुम ने नहाने का बहाना क्यूँ किया. ऐसे मे पंडितजी को शक हो जाएगा

पंडिताइन-नही होगा., मैने पंडितजी को कहा था कि मैं टाय्लेट जाकर आती हूँ ,और यहाँ तुम्हारे साथ मस्ती करने लगी. मस्ती करते हुए ज़्यादा समय हो गया इस लिए पंडितजी ने बुलाने भेजा.

अवी-पर ये नहाने का बहाना

पंडिताइन-टाय्लेट जाने के बाद नहाना पड़ता है. तुम उसकी टेन्षन मत लो

अवी-ठीक है ,पर अब क्या

पंडिताइन-मेरा तो हो गया .

अवी-और मेरा क्या

पंडिताइन-तुम्हे बहुत टाइम लगेगा और आज पासिबल नही है .कल हम आराम से करेंगे

अवी-(आज मेरे साथ क्या हो रहा है. पहले मोना की चुदाई नही कर पाया ,और अब पंडिताइन की चुदाई करे करके रह गया.) कल पक्का

और पंडिताइन अपना बदन पोछने लगी.और मैं ने कपड़े पहनने लगा.

पंडिताइन ने अपना पेटिकोट निकाल दिया. पंडिताइन मेरे सामने नंगी हो गयी.और झुक कर अपनी साड़ी और ब्लाउस उतारने लगी. झुकने से पंडिताइन की गंद मेरे आँखे के सामने आ गयी.

मेरा मन बदलने लगा .मैं ने पंडिताइन की गंद पर एक थप्पड़ मारा और पंडिताइन को देख कर स्माइल करके बाहर चला गया.

आज सब जल्दी जल्दी हो गया. कल के मुकाबले आज मैं थोडा आराम कर सकता हूँ.

2 दिन बहुत भाग दौड़ वाले थे .मैं थोड़ी देर के लिए रणजीतसिंघ के पास चला गया .पर रणजीतसिंघ टेंट मे नही था .रणजीतसिंघ की सेक्रेटरी अपना काम कर रही थी.

रणजीतसिंघ के ना होने से मैं घर चला गया .

घर आकर सब के साथ खाना खा लिया. खाना खाते हुए मस्ती करने की तो जैसे आदत लग गयी थी.

जब से मेला स्टार्ट हुआ था तब से ज़्यादातर समय पूरे फॅमिली का खाना हमारे यहाँ बन रहा था.

खाना खाने के बहाने से पूरी फॅमिली साथ मे टाइम बिताने लगी.

ऐसा नज़ारा देखने से दिल को सुकून मिला .पूरी फॅमिली का प्यार दिन ब दिन बढ़ रहा था.

रानी भी इन सब मे इतना गुल मिल गयी की उसके पास मेरे लिए टाइम ही नही था.

रानी के बिज़ी रहने से मैं दुखी भी था और खुश भी था. खुश इस लिए था कि रानी को सब पसंद करने लगे थे.किसी को लग ही नही रहा था कि रानी हमारी फॅमिली का हिस्सा नही है.

रानी के प्यार, नेचर ,और समझदारी से चाची और बुआ काफ़ी खुश थी.

ये मेला हम सब के लिए खुशी लेकर आया था.

 


622

पंडिताइन के साथ चुदाई किए बिना मैं घर आ गया.

घर आकर पहले मैं अपने कमरे मे चला गया. पर ये क्या मेरा कमरे तो मेरे बैठने के लिए जगह ही नही थी.

मेरे भाई बहन लॅपटॉप पर कुछ देख रहे थे.

अवी-दीदी ,तुम सब क्या देख रहे हो

स्वेता दीदी-नाम कारण का वीडियो देख रहे है.

अवी-(मैं तो यहाँ आराम करने आया था और अब लग रहा है कि मैं यहाँ क्यू आया)

मैं ने रानी को इशारा करके छत पर आने को कहा और कमरे से बाहर आ गया.

खाना खाने के बाद सोचा था कि आराम करूँगा पर अब,जाने दो ,रानी के साथ थोड़ी देर बात कर लेता हूँ

मैं छत पर जाकर रानी का इंतज़ार करने लगा.थोड़ी देर बाद रानी छत पर आ गयी.मैं रानी को लेकर टंकी के पीछे जाकर बैठ गया.

अवी-रानी साहिबा ,इस गुलाम के लिए समय निकालने के लिए शुक्रिया

रानी-ऐसा क्यूँ बोल रहे हो

अवी-ऐसा ना बोलूं तो क्या बोलूं, हर बार मैं तुम्हे बुलाता हूँ और तुम हो कि मुझे याद ही नही करती.कल भी मैं ने तुम्हे बुलाया था और आज भी

रानी-तुम्हारी ही बहनें मेरा साथ नही छोड़ती

अवी-तो क्या हुआ थोड़ा टाइम निकाला करो.

रानी-नही निकाल सकती

अवी-क्यूँ ?

रानी-हम ज़िंदगी भर साथ रहें इस की कोशिस कर रही हूँ ,और तुम हो कि ,कुछ दिन रुक नही सकते,

अवी-मैं तो रुक जाउन्गा पर इस दिल का क्या करूँ

रानी-कहाँ है दिल ,तुम्हारा दिल तो मेरे पास है.

अवी-तुम ,

और मैं ने रानी के गाल पर किस किया.

अवी-एक मिनट के लिए खड़ी हो जाओ

रानी-क्यूँ?

अवी-एक तो बात मान लिया करो

रानी खड़ी हो गयी

अवी-अब मेरी तरफ मुँह करके मेरी गोद मे बैठो

रानी-तुम भी ना

रानी मेरी गोद मे बैठ गयी.

रानी-अब

अवी-थोड़ी देर ऐसी ही बैठी रहो

रानी-किस नही करूँ

अवी-नही ,बस ऐसी ही बैठी रहो

रानी-क्या हुआ,मुझ से कुछ ग़लती हुई ,जो किस नही कर रहे

अवी-रूको तो

रानी को कुछ समझ नही आ रहा था. इतना अच्छा मोका है फिर मैं कुछ कर क्यूँ नही रहा हूँ.

थोड़ी देर ऐसे ही बैठने के बाद रानी को पता चल गया कि मैं ने रानी को गोद मे क्यूँ बैठाया है.रानी को मेरा लंड चुभने लगा.

रानी एक झटके मे खड़ी हो गयी.

रानी-तुम ,मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नही थी

और रानी के जाने के लिए मूडी ही थी कि मैं ने रानी का हाथ पकड़ कर फिर से अपनी गोद मे बैठा दिया. और रानी को किस किया.

अवी-तुम तो गुस्सा हो गयी , मैं तो बस मज़ाक कर रहा था.

रानी ने कुछ नही कहा

अवी-देखो कान पकड़ता हूँ ,दुबारा ऐसा मज़ाक नही करूँगा.इस बार माफ़ कर दो

रानी-ऐसा मत किया करो, बड़ी मुश्किल से कंट्रोल कर पाती हूँ ,

अवी-तो आज कंट्रोल मत करो

रानी-करना पड़ेगा ,मैं ने मम्मी से प्रॉमिस किया है ,शादी से पहले ऐसा वैसा कुछ नही करूँगी.

अवी-तुम और तुम्हारे प्रॉमिस ,

सीतल दीदी-रानी ,कहाँ हो

सीतल दीदी की आवाज़ सुनकर हमे जोरदार झटका लगा. मैं ने रानी को जाने को कहा.

टंकी से निकल कर रानी सीडियो की तरफ जाने लगी थी कि सीतल दीदी छत पर आ गयी.

सीतल दीदी-कहाँ थी तुम

रानी-वो मैं...मम्मी को कॉल कर रही थी .

सीतल दीदी-हो गयी बात

रानी-नही. मम्मी का नंबर बिज़ी दिख रहा है. शायद मम्मी भी मुझे कॉल कर रही होगी.

सीतल दीदी-कॉल करके जल्दी नीचे आना ,मामी बुला रही है तुम्हे

रानी-2 मिनट मे आती हूँ

अच्छा हुआ रानी ने सीतल दीदी को वही से नीचे भेज दिया.सीतल दीदी के नीचे जाते रानी मेरे पास आ गयी.

अवी-आज तो बाल बाल बच गये

रानी-देखा ,तुम्हारी बहनें मुझे एक मिनट के लिए अकेला नही छोड़ती.

अवी-और शादी के बाद मैं तुम्हे एक मिनट के लिए सोने नही दूँगा.

रानी-डरा रहे हो

अवी-बता रहा हूँ कि मैं तुम्हे कितना प्यार करने वाला हूँ

रानी-मुझसे तो कम ही करोगे.

अवी-चॅलेंज कर रही हो,

रानी-नही ,मैं कितना प्यार करूँगी वो बता रही हूँ .

अवी-मेरी गोद मे बैठ कर बताओ

रानी-अभी नही ,अभी जाना होगा नही तो फिर से कोई आ जाएगा

अवी-एक किस तो देती जाओ

रानी ने वो किया जिस के लिए वो पहले गुस्सा हुई थी.

रानी फिर से मेरी गोद मे बैठ गयी .और मुझे किस किया.

रानी-मैं हमेशा के लिए तुम्हारी गोद मे बैठना चाहती हूँ पर

अवी-पर डॉक्टर बन ने के बाद ,यही कहना चाहती हो ना

रानी-हाँ,

अवी-इसमे तो बहुत इंतज़ार करना पड़ेगा ,लेकिन तुम्हारे लिए इंतज़ार कर लूँगा ,

रानी-अब जाउ या ऐसी ही बैठी रहूं

अवी-दिल तो नही मान रहा पर आज के लिए इतना काफ़ी है

रानी-आइ लव यू

अवी-आइ लव यू टू

और रानी नीचे चली गयी.

थोड़ी देर बाद मैं भी नीचे आ गया. कुछ देर चाची के साथ बात करने के बाद मैं रणजीतसिंघ को मिलने चला गया.

सुबह रणजीतसिंघ नही मिला था ,इस लिए हवेली की तरफ चला गया.

 


623

मुझे रणजीतसिंघ से मिलना ज़रूरी था. कल से रणजीतसिंघ से ठीक से बात नही कर पाया.

मेले तक हवेली मे ना जाने की बात की थी ,पर आज मुझे रणजीतसिंघ से किसी भी हालत मे मिलना ज़रूरी था.इस लिए रणजीतसिंघ से मिलने के लिए हवेली चला गया.

हवेली की तरफ जा रहा था कि आगे से एक कार फुल स्पीड से मेरी तरफ आ रही थी.

जब वो कार मेरे पास आई तो मुझे अपनी बाइक रोकनी पड़ी. और वो कार हवा की तरह मेरे पास से निकल गयी.

मैं पलट कर उस कार को देख रहा था कि दूसरी कार मेरे पास आकर रुक गयी.

मैं ने पलट कर देखा तो ये रणजीतसिंघ की कार थी. और रणजीतसिंघ कार चला रहा था.

रणजीतसिंघ-तुम इस वक्त यहाँ कैसे

अवी-आपसे मिलने आया था.

रणजीतसिंघ-मैं तुम्हे कॉल करने का भूल गया. चलो जल्दी मेरे साथ

अवी-मैं बाइक से आता हू

रणजीतसिंघ-बाइक को छोड़ो ,कार मे बैठो जल्दी.मेरे पास टाइम कम है

मैं ने बाइक वही रहने दी और कार मे बैठ गया

रणजीतसिंघ-वो कार ज़्यादा दूर नही जानी चाहिए

अवी-कौन कौन था उस कार मे

रणजीतसिंघ-कुवरसिंघ की बीवी रेशमा थी.

अवी-वो तो बहुत तेज चला रही थी

रणजीतसिंघ-जल्दी जाना होगा

अवी-चलो फिर ,हम भी जल्दी चलते है.वैसे वो कहाँ जा रही है अकेले

रणजीतसिंघ-वही तो देखने के लिए पीछा कर रहा हूँ

अवी-लेकिन वो बहुत दूर निकल गयी होगी

रणजीतसिंघ-मेले के वजह से वो ज़्यादा दूर नही गयी होगी

अवी-ये सही कहा ,

और मैं रेशमा के कार के पीछे जाने लगे और हमे रेशमा की कार दिख गयी.

अवी-वो रही कार

रणजीतसिंघ-मैं ने कहा था कि वो ज़्यादा दूर नही गयी होगी.

अवी-मान गये

रणजीतसिंघ-अब बस उस कार पर नज़र बनाए रखना है.

हम कुवरसिंघ की बीवी रेशमा का पीछा करने लगे.

रणजीतसिंघ-आज पहली बार रेशमा को कार चलते हुए देख रहा हूँ ,

अवी-वैसे वो अकेली अपने बेटे को छोड़ कर जा कहाँ रही है

रणजीतसिंघ-वही देखने के लिए पीछा कर रहे है.

रेशमा की कार गाओं से शहर मे आ गयी और हम भी उसके पीछे पीछे शहर मे आ गये.

रेशमा की कार शहर से बाहर निकल कर हाइवे की तरफ निकल पड़ी.

हम एक सेफ डिस्टेन्स बना कर रेशमा की कार का पीछा कर रहे थे.

रेशमा की कार की स्पीड देख कर ऐसा लग रहा था कि एक मिनट के लिए अगर नज़र इधर उधर हो गयी तो रेशमा गायब हो सकती थी.और हुआ भी ऐसा ही

हाइवे से एक रास्ता दूसरे शहर तक जाने के लिए डिवाइड हो रहा था उसी रोड से लगातार 5 ट्रक हाइवे पर आ गये.

ट्रक आने से पहले रेशमा की कार आगे जा चुकी थी. और हम फँस गये. उन ट्रक को अपने साइड मे जाने तक हमे रुकना पड़ा.

5 ट्रक को निकलने मे टाइम लगा और जैसे ट्रक चले गये रणजीतसिंघ ने अपनी स्पीड बढ़ा दी.

पता नही रेशमा कितनी दूर चली गयी होगी.

रणजीतसिंघ के साथ साथ मैं भी परेशान था.

हम 2 3 किमी आगे आए थे कि फिर से हाइवे से एक और रास्ता (कच्चा रास्ता) दूसरे गाओं तक जाने के लिए डिवाइड हुआ,राइट टर्न था. कच्चा रोड था.

रणजीतसिंघ-अब किस तरफ जाना चाहिए.

अवी-सीधा चलते है ,

रणजीतसिंघ-वही कर के देखते है

हम ने हाइवे से सीधा चलने को फ़ैसला किया.

रणजीतसिंघ फुल स्पीड से कार चला रहा था.

हम 5 6 किमी और आगे गये पर रेशमा की कार कही दिखाई नही दी.

पर रोड पे एक कार खड़ी दिखाई दी .और ड्राइवर लिफ्ट माँग रहा था.

मैं ने रणजीतसिंघ को कार रोकने को कहा.

रणजीतसिंघ-क्या हुआ

अवी-एक मिनट के लिए उस कार के पास रुकिये

रणजीतसिंघ ने कार रोक दी. मैं जल्दी से कार से उतार कर ड्राइवर के पास गया.

ड्राइवर-भैया हमे आगे तक लिफ्ट चाहिए

अवी-लिफ्ट दूँगा पर मेरे सवाल का जवाब दो

ड्राइवर-कैसा सवाल

अवी-यहाँ से अभी कोई रेड कलर की कार जिसमे औरत ड्राइव कर रही थी गयी क्या

ड्राइवर-रेड कार तो नही पर वाइट कलर की कार गयी है और उसमे तो आदमी ड्राइविंग कर रहा था

अवी-थॅंक्स,

और मैं वापस रणजीतसिंघ के पास आ गया

रणजीतसिंघ-क्या हुआ

अवी-हमे वापस जाना होगा .5 6 किमी पर जो मोड़ था वहाँ गयी है रेशमा ,

रणजीतसिंघ ने कार घुमा ली

ड्राइवर-साब हमारे लिफ्ट का क्या.

हम ने जाते हुए कुछ रुपये ड्राइवर की तरफ फेक दिए .ताकि वो लिफ्ट माँग सके

रणजीतसिंघ-तुम ने उस ड्राइवर से क्यू पूछा, किसी ढाबे पे पूछ लेते

अवी-वो ड्राइवर सब से लिफ्ट माँग रहा था उसे तो पता ही होगा.

हम फिर से उसी मोड़ पर आ गये .

उसी राइट साइड वाले कच्चे मोड़ पर आ गये.

रणजीतसिंघ ने अपनी कार उस कच्चे रोड पे ले ली और रणजीतसिंघ रेशमा की कार को ढूँढने लगे.

आगे जाकर हमे एक फार्महाउस दिखा .और फार्महाउस के सामने 2 कार खड़ी थी .2 कार मे से एक कार रेशमा की थी

अवी-वो रही रेशमा की कार

रणजीतसिंघ ने अपनी कार को झाड़ियों मे छुपा दिया.

रणजीतसिंघ-चलो चल कर देखते है.

हम दीवार से जंप मारकर फार्महाउस के पास आ गये

हम फार्महाउस की खिड़की से अंदर देखने लगे. हॉल मे कुछ नही था.हम दूसरी खिड़की ढूँढने लगे.

हमे बेडरूम की खिड़की मिल गयी. और हम ने अंदर जो देखा वो देख कर शॉक हो गये.

कमरे मे रेशमा ब्लाउस और पेटिकोट मे खड़ी थी , रेशमा के साथ कमरे मे कोई और भी था

 


624

मैं और रणजीतसिंघ रेशमा का पीछा करते हुए फार्महाउस पर आ गये.

और हम बेडरूम की खिड़की से अंदर देखने लगे.

अंदर टोटल 4 लोग थे और 4 मे से 3 आदमी और 1 औरत थी.

वो औरत ब्लाउस और पेटिकोट मे खड़ी थी और वो 3 आदमी बेड पर बैठे हुए थे.

रूम मे कॅमरा लगा हुआ था .और फोटोग्राफर के पास जैसा स्टॅंड होता है उस पर रखा हुआ था ,और दूसरा कॅमरा एक आदमी के हाथ मे था.

उस औरत की पीठ हमारी तरफ थी जिस के वजह से हम उस का चेहरा नही देख पाए ,

मैं ने खिड़की खोलने की कोशिस की पर कोई फ़ायदा नही हुआ.

रणजीतसिंघ बस अंदर का नज़ारा देख रहा था.

मैं दूसरी तरफ की खिड़की के पास चला गया. यहाँ की खिड़की खुली हुई थी. मैं ने रणजीतसिंघ को मेरे पास बुलाया

रणजीतसिंघ-क्या है

अवी-ये खिड़की खुली हुई है.

मेरी बात सुनते रणजीतसिंघ खुश हो गया.

खिड़की को आहिस्ता से खोल दिया.

और जैसे उस औरत का चेहरा दिखाई दिया हम शॉक्ड हुए. ये रेशमा थी.

रेशमा 3 आदमियो के सामने ऐसे ब्लाउस और पेटिकोट मे क्यू खड़ी थी.

रेशमा मज़बूरी मे ये सब कर रही थी. रेशमा के आँखे से पानी निकल रहा था.

वो आदमी हँस रहे थे. मैं ने उन आदमियो के बारे मे रणजीतसिंघ से पूछा .(मुझे पता था कि वो कौन है फिर भी मैं ने उसको पूछ लिया)

अवी-आप इनको जानते है

रणजीतसिंघ-हाँ, ये तीनो कुवरसिंघ के खास दोस्त है.

अवी-क्या ?

रणजीतसिंघ ने जो कहा वो सुनकर मैं दंग हो गया.

कुवरसिंघ के खास दोस्त कुवरसिंघ की बीवी के साथ ये सब कर रहे थे.

कुवरसिंघ जो अपने भाई से ज़्यादा अपने दोस्त को इंपॉर्टेन्स देता था वो कुवरसिंघ के दोस्त कुवरसिंघ की बीवी की इज़्ज़त उतार रहे थे.

रेशमा-ऐसा मत करो ,मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ,

आदमी1-भाभी जी हम बस आपको बिना कपड़ो के देखना चाहते है

रेशमा-तुम मुझे भाभी कहते हो ,मुझे ,तुम्हे ये सब कर के क्या मिलेगा

आदमी2-हमे आपकी खूबसूरती का मज़ा लेना है,चलो अपना ब्लाउस खोलो

ये सुनते रणजीतसिंघ अंदर जाने की बात कर रहा था.

मैं ने रणजीतसिंघ को थोड़ी देर रुकने को कहा. पहले देख तो लेते है मामला कहाँ तक जाता है.

रेशमा-तुम लोग ये ठीक नही कर रहे हो. मैं अपने पति को तुम्हारे बारे मे बता दूँगी

आदमी1-बता देना, वो मादरचोद कुवरसिंघ तुम से ज़्यादा हम पे भरोसा करता है.

आदमी3-और अगर तुम ने कुवरसिंघ को बता दिया तो ये वीडियो इंटरनेट पे डाल दूँगा. चलो जल्दी ब्लाउस खोलो

रेशमा-जो करना है करो ,मैं जा रही हूँ यहाँ से ,और अपने पति को सब बता दूँगी

रेशमा की बात सुनकर तीनो कुछ देर के लिए सोच मे पड़ गये .फिर अचानक एक बीच मे बोल पड़ा

आदमी1-कहाँ है तुम्हारा पति ,और हँसने लगा

रेशमा ये सुनकर शॉक्ड हो गयी .

आदमी2-हमारी बात नही मानी तो ...और हँसने लगा

कुवरसिंघ तो मेरे पास है ,ये उस बात का फ़ायदा उठा रहे है.

रेशमा-तुम झूठ बोल रहे हो,

आदमी2-तुम ही बताओ कुवरसिंघ कहाँ है.

रेशमा सोचने लगी कि वो क्या करे

आदमी1-ज़्यादा मत सोचाओ ,हम जैसा कह रहे है वैसा करो वरना

रेशमा-नही नही मेरी पति को कुछ मत करना,

आदमी3-जल्दी अपना ब्लाउस और पेटिकोट निकालो

रेशमा के पास उनकी बात मानने के अलावा दूसरा रास्ता नही था.

रेशमा ने रोते हुए अपना ब्लाउस और पेटिकोट निकाल दिया.

रेशमा को ब्लॅक ब्रा पैंटी मे देख कर एक पल के लिए मैं और रणजीतसिंघ दोनो के मुँह खुले रह गये.

हमारी ये हालत हुई है तो कुवरसिंघ के दोस्त की क्या हालत हुई होगी.

वो तो लगातार रेशमा को घूर रहे थे. और रेशमा हाथो से अपने बदन को छुपाने की कोशिस कर रही थी.

आदमी2-ब्रा और पैंटी भी निकालो ,वरना तुम्हारा पति

रेशमा-ऐसा मत करो. मैं तुम्हारे बारे मे किसी को नही बताउन्गी.मुझे जाने दो

आदमी1-अगर दुबारा बात नही मानी तो तुम्हारे पति को मार डालूँगा.चलो जल्दी निकालो ब्रा और पैंटी

रेशमा ने रोते हुए अपनी ब्रा निकाल ली .

ये कुछ ज़्यादा ही हो रहा था ,हमे कुछ करना चाहिए था पर इस बार रणजीतसिंघ ने रुकने को कहा

पर वो तीनो नही रुके ,वो तीनो उठ कर रेशमा के पास गये .और रेशमा को पकड़ कर बेड पर पटक दिया.

वो तीनो इतने गरम हुए थे कि पैंटी निकालने तक रुक नही सके

रेशमा को बेड पर पटकने के बाद आदमी1 और आदमी2 रेशमा पर टूट पड़े,और आदमी3 रेकॉर्ड कर रहा था और स्टॅंड पर रखा हुआ कॅमरा बेड की तरफ घुमा दिया.

ये कुछ ज़्यादा ही हो रहा था.अब हमे कुछ करना था. रणजीतसिंघ ने मेरी बात मान ली

 


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रेशमा के साथ कुछ ज़्यादा ही हो रहा था.

कुवरसिंघ के दोस्त रेशमा पर टूट पड़े. रेशमा विरोध कर रही थी.

अब हमारी बारी थी पिक्चर मे आने की. लेकिन हम 2 और वो 3 थे.

हमे जो करना था वो सोच समझ कर करना था.मैं प्लान बना रहा था कि रणजीतसिंघ ने पॉकेट से गन निकाल ली.

गन से तो पूरा खेल हमारे हाथ मे आ जाएगा.

रणजीतसिंघ-चलो इनको दिखाते है कि ठाकुर क्या होता है.

अवी-चलो फिर

पहले रणजीतसिंघ और फिर मैं ने खिड़की से रूम मे एंट्री मारी.

हमारे आने की आवाज़ सुनकर सब पीछे देखने लगे.

रणजीतसिंघ को देख कर सब फ़्रीज़ हो गये. अब तो वो गये काम से.

रणजीतसिंघ ने गन निकाल कर उनकी तरफ कर दी.

गन देख कर उनकी ऐसी हालत हुई कि उनके पैरो के नीचे से ज़मीन खिसक गयी हो.

जिस तरह कुवरसिंघ के दोस्तो की हालत बुरी हुई थी उसी तरह रेशमा को कुछ समझ नही आ रहा था.वो भी फ़्रीज़ हो चुकी थी. रेशमा ने विरोध करना भी बंद कर दिया.

रणजीतसिंघ-हटो वहाँ से,

रणजीतसिंघ के इतना कहते ही मैं बेड के पास गया और उन दोनो को लात मार कर रेशमा के उपर से नीचे गिरा दिया.

दोनो मूर्ति की तरह बेड से नीचे लूड़क गये. उनको तो जैसे साप सूंघ गया था.

उनके अलग होते ही रेशमा रणजीतसिंघ और मेरे सामने पैंटी मे लेटी हुई थी. रणजीतसिंघ और मैं रेशमा को लगातार घूर्ने लगे. पर जब ये बात रेशमा को पता चली.जब उसे अपने नंगे पन का अहसास हुआ तब वो खुद को शर्मिंदा महसूष कर रही थी .

मैं ने होश ना खोते हुए जल्दी से रेशमा के कपड़े उठा कर रेशमा के उपर फेक दिए.

रेशमा ने अपने बदन को साड़ी से छुपा लिया.

कुवरसिंघ का एक दोस्त बेड की एक तरफ खड़ा था और उसके हाथ मे अभी भी कॅमरा था.

रणजीतसिंघ-अवी वो कॅमरा बंद करो

मैं ने वो कॅमरा उसके हाथ से छीन लिया. और रेकॉर्डिंग डेलीट करने की जगह सेव कर ली और कॅमरा अपने साथ रख लिया.

बेड की दूसरी तरफ वो दोनो थे जो रेशमा के साथ ज़बरदस्ती कर रहे थे.

रेशमा चुप चाप बैठी थी.

रणजीतसिंघ-तुम लोगो की हिम्मत कैसे हुई हमारे घर की बहू के साथ ऐसा करने

आदमी3-हमे माफ़ कर दो ,हम से ग़लती हो गयी.

रणजीतसिंघ-तुम लोग माफी के काबिल नही हो,अवी बहू को लेकर इधर आ जाओ

मैं ने रेशमा को सहारा दिया और गेट के पास लेकर चला गया. रणजीतसिंघ भी हमारे पास आ गया.

रणजीतसिंघ-बहू तुम ठीक हो ना

रणजीतसिंघ की बात सुनकर रेशमा रोने लगी.

रणजीतसिंघ-तुम लोगो की तो

और रणजीतसिंघ ने रेशमा को रोता हुआ देख कर कुवरसिंघ के दोस्त पर गोली चला दी. कुवरसिंघ का एक दोस्त मर गया.रणजीतसिंघ का निशाना पर्फेक्ट था.

रणजीतसिंघ ने गोली सर के बीचो बीच मारी

कुवरसिंघ का एक दोस्त खड़े खड़े यमराज के पास चला गया.

अपने दोस्त को गोली लगते हुए देख कर कुवरसिंघ का दूसरा दोस्त रणजीतसिंघ के पैरो मे गिर कर माफी माँगने लगा.

आदमी3-रणजीतसिंघ मुझे माफ़ कर दो

रणजीतसिंघ-तुम्हे माफ़ कर दूं, तुम तो कुवरसिंघ को भाई मानते थे. वो तुम्हारा दोस्त था. और दोस्त की बीवी के साथ ये सब करते हुए तुम ने दोस्ती के बारे मे कुछ भी नही सोचा

आदमी3-इस मे मेरी ग़लती नही है ,ये सब इन दोनो के कहने पे मैं बहक गया. इनके पास रेशमा की...

उसकी बात पूरी होने से पहले रणजीतसिंघ ने उसे भी गोली मार दी.

कुवरसिंघ का दूसरा दोस्त भी मर गया .

अपने सामने मुर्दा देख कर रेशमा ने अपने सर को मेरी बाहों मे छुपा लिया.

रणजीतसिंघ ने इस बीच एक ग़लती कर ली ,कुवरसिंघ के तीसरे दोस्त पर ध्यान नही दिया.

कुवरसिंघ के दोस्त ने इस बात का फ़ायदा उठाया और हम जिस खिड़की से अंदर आए थे उसी खिड़की से वो भागने लगा.

मेरी नज़र उस पर पड़ते मैं ने रणजीतसिंघ को उसके बारे मे बताया.

पर तब तक वो खिड़की से बाहर जंप मार चुका था.

रणजीतसिंघ-तुम बहू का ध्यान रखो मैं उसे पकड़ कर लाता हूँ.

इतना कह कर रणजीतसिंघ खिड़की से जंप मार कर कुवरसिंघ के दोस्त के पीछे भागने लगा.

अब रूम मे मैं और रेशमा रह गये.

रेशमा अभी भी मेरे बाहों मे अपना सर छुपाए हुए मेरे गले लग कर खड़ी थी.

अवी-भाभी अब सब ठीक है

रेशमा मेरी बात सुनकर मुझसे अलग हो गयी.

और अपनी साड़ी को ठीक करने लगी.

रेशमा-भाई साहब कहाँ गये

अवी-वो उस आदमी के पीछे गये है.आप बाथरूम मे जाकर कपड़े पहन लीजिए

रेशमा मेरी बात सुनकर बाथरूम मे चली गयी.

रेशमा के जाते ही मैं ने उन दोनो के मोबाइल निकाल कर स्विचऑफ कर दिए.और अपने पास रख लिए.

दूसरे कॅमरा की रेकॉर्डिंग सेव करके उसे फॉर्वर्ड करके देखने लगा. फिर दोनो कॅमरा और दोनो के मोबाइल वही रखी हुई बॅग मे रख दिए .

रेशमा के आने तक मैं रूम को अच्छे से देखने लगा ,कोई छुपा हुआ कॅमरा तो नही है

पर यहाँ पर कुछ नही मिला.

रेशमा कपड़े पहन कर बाथरूम से बाहर आ गयी.

अवी-आप ठीक है ना

रेशमा-हाँ, पर मेरे पति

अवी-उनको क्या हुआ

रेशमा-वो उन लोगो के पास है

अवी-वो रणजीतसिंघ संभाल लेगा. आप टेन्षन मत लो

रेशमा-कैसे ना लूँ उनके पास मेरी क्लिप है

अवी-कॅमरा से रेकॉर्डिंग डेलीट कर दी है

रेशमा-वो नही. एक और क्लिप है उनके पास जिस से मुझे ब्लॅकमेल करके यहाँ बुलाया था.

अवी-वो हम देख लेंगे .आप टेन्षन मत लो

हम बात कर रहे थे कि रणजीतसिंघ वापस आ गया.

अवी-मार दिया उसे

रणजीतसिंघ-वो भाग गया.

रेशमा-उसके पास मेरी क्लिप है

रणजीतसिंघ-कैसी क्लिप

अवी-भाभी की क्लिप बनाकर उनको ब्लॅकमेल करके यहाँ बुलाया था.

रणजीतसिंघ-वो जाएगा कहाँ उसे मैं ढूँढ लूँगा और क्लिप की टेन्षन मत लो उसका मोबाइल मेरे पास है

अवी-मोबाइल मिल गया.कैसे

रणजीतसिंघ-उसके साथ हाथापाई हुई ,वो तो भाग गया पर मोबाइल मेरे हाथ लग गया.ये लो मोबाइल

मैं मोबाइल मे क्लिप ढूँढने लगा. क्लिप मिल गयी.

अवी-ये वो क्लिप थी

रेशमा-हाँ

अवी-लो हो गयी डेलीट

रणजीतसिंघ-चलो अब यहाँ से

रेशमा-भाई साब आप ना होते तो

रणजीतसिंघ-बहू ये बाते घर जाकर करेंगे अभी चलो यहाँ से

हम फार्महाउस से बाहर आ गये .मैं ने वो बॅग अपने पास रख लिया.

रणजीतसिंघ-अवी तुम्हे कार चलानी आती है.

अवी-नही

रणजीतसिंघ-बहू तुम कार चला लोगि

रेशमा-जी भाईसाब

अवी-मैं भाभी के साथ आता हूँ ,आप अपनी कार लेकर चलिए

रणजीतसिंघ-मैं भी यही कहने वाला था.

मैं रेशमा के साथ उसकी कार मे बैठ गया और रणजीतसिंघ अपनी कार मे बैठ गये.

 
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