फ्लॅशबॅक 974
रमेश ने अपने दिल की बात पूजा को बताई
रमेश के प्यार करने का तरीका अलग था
वो जो बोलता उसमे उसका प्यार दिखाई देने लगा पूजा को
रमेश जो बोलता वो सब सच बोलता
रमेश ने अपने बारे में पूजा को सब कुछ बता दिया
पूजा से कितना प्यार करता है वो बताया
शादी के बाद वो कितना प्यार करेगा वो भी बताया
रमेश की बातों मे पूजा सीसी सिर्फ़ प्यार ही प्यार दिख रहा था
रमेश ने पूजा की ऐसी जगह प्रपोज़ किया जहाँ हर लड़का प्रपोज़ करने से डरता है
रमेश ने पहले पूजा को मंदिर मे प्रपोज किया फिर पूजा के पिताजी के सामने प्रपोज़ किया
रमेश को किसी बात का डर नही था और वो छुप छुप कर प्यार करने पे विश्वास नही रखता था , उसने जान बुझ कर पूजा को उसके पिताजी के सामने प्रपोज़ किया
रमेश मे इतना कॉन्फिडेन्स था कि वो पूजा की रक्षा कर सके
अच्छा जॉब पर था
खुद का घर था ,
दिखने मे अच्छा था जैसा पूजा को चाहिए वैसा था
पूजा के सपनो के राजकुमार जैसा था रमेश
रमेश की हर एक बात पूजा को पसंद आई उसका प्रपोज़ करना पूजा को प्यार करने के लिए मनाना
पहले प्यार को नाम देना चाहता है रमेश फिर पूजा को ज़िंदगी भर प्यार करना चाहता है
पूजा को भी रमेश पसंद था पर वो हाँ क्यू कह रही थी
ये बात रमेश ने भी नोटीस की , पूजा का उसको गले लगाना उसको प्यार करना , रमेश मंदा का नाम लेकर पूजा को जला रहा था ताकि पूजा के दिल की बात ज़ुबान पर आ जाए
रमेश ने झूठ मूठ का कमरे से बाहर जाने का नाटक किया
रमेश के बाहर जाते ही पूजा को लगा जैसे उसका सब कुछ लूट गया वो
उसकी आत्मा उससे दूर जा रही हो
पूजा को खुद पर गुस्सा आ गया
पूजा ने गुस्से मे खुद के बाल नोच लिए और भाग कर कमरे से बाहर आ गयी
पूजा-----
मैं वैसे ही रमेश के पीछे गयी.
मेरे बाल बिखरे हुए थे ,कपड़े मुरझाए हुए थे.
मेरा दुपट्टा मेरे बदन पे कम ज़मीन पर ज़्यादा था.
जैसे ही मैं बाहर आई रमेश घर से बाहर जाने वाला था कि.मैं ने रमेश का हाथ पकड़ लिया
रमेश रुक गया
मैं रमेश का हाथ पकड़ कर वापस कमरे मे ले जाने लगी
मेरी बात अभी पूरी नही हुई थी
पिताजी ने मेरी हालत देखी तो गुस्से मे उनकी आँख लाल हो गयी.
माँ को तो हार्ट अटॅक आते आते रह गया
पिताजी के कुछ कहने या करने से पहले मैं रमेश का हाथ पकड़ कर अपने कमरे मे ले गयी पास चली गयी
पहली बार डोर खुला रखा था
पर इस बार रमेश वापस मंदा के पास ना जाए इस लिए मैं ने डोर अंदर से बंद किया
रमेश मुझे देखता रह गया , और अंदर ही अंदर हंस रहा था , उसको पता लग गया कि मैं उसको मिल गयी हूँ
मैं ने डोर बंद कर दिया और डोर को अपनी पीठ लगा कर खड़ी हो गयी जैसे मुझे डर हो कि रमेश कही मुझसे दूर ना चला जाए
रमेश- मुझे यहाँ क्यू लेकर आई हो ,, और डोर क्यूँ बंद कर दिया
पूजा- मेरी बात पूरी नही हुई है
रमेश- तुमने बात सुरू कब की है
पूजा- तुमने मुझे बोलने कब दिया
रमेश- पूछा ना कि तुम मुझसे शादी करोगी , और तुमने कहा की नही
पूजा- मैं ने ऐसा कब कहा
रमेश- झूठ मत बोलो
पूजा- मैं ने कहा मुझे सोचने दो
रमेश- तुम सोचो तब तक मैं मंदा से मिलके आता हू
पूजा- यहाँ से बाहर जाके देखो , टाँग तोड़ दूँगी
रमेश- मेरी बीवी तो गुस्सा वाली भी है अच्छा हुआ पता चला ,,
पूजा- मैं तुम्हारी बीवी नही हूँ
रमेश- कौन हो तुम
पूजा- पूजा नाम है मेरा , 12त मे पढ़ती हूँ ,
रमेश- तुम्हारे घर मे कौन कौन है
पूजा- मेरे पिताजी जिनके हाथ मे गन है जो एक सेकेंड मे टुमरी जान ले सकते है , मेरी माँ , मेरे बड़े भैया , मेरी दो छोटी बहनें और एक प्यारा सा छोटा भाई
रमेश- 2 सालिया मिलेंगी , अच्छा है मेरे लिया
पूजा- क्या कहा
रमेश- मेरी साली.का नाम तो बताओ
पूजा- नेहा नीता , वो तुम्हारी साली नही है
रमेश- मतलब तुम्हें मैं पसंद नही हूँ
पूजा- सोचने दो
रमेश- अब क्या बूढ़ी होने तक सोचोगी , मेरी माँ शाम तक आ जाएगी , मंदा तो आज ही शादी भी करने को तय्यार हो जाएगी
पूजा- तुम मेरे पिताजी को कुस्ती मे हरा दोगे ना
रमेश- क्या ?
पूजा- वो क्या है ना कि मैं ने अपने फिराजी से कहा था कि जो उनके सामने खड़ा रह पाएगा उसी से शादी करूँगी
रमेश- बस इतनी सी बात है , एक झटके मे हरा दूँगा
पूजा- मेरे पिताजी अब तक बस एक बार हार चुके है कुस्ती मे और वो भी जानबूझ कर हारे थे
रमेश- व्हाट
पूजा- वो पहलवान है
रमेश- तुमने कहाँ फसा दिया
पूजा- इसी लिए मैं सोच रही थी
रमेश- तुम ये बताओ तुम मुझे प्यार करती हो कि नही
पूजा- तुम दिखने मे अच्छे हो ,, बॉडी भी अच्छी दिख रही है ,इंजिनियर हो , साफ दिल के हो ,
रमेश- तो मैं तुम्हें पसंद हूँ
पूजा- तुम्हारे प्रपोज़ करने का अंदाज़ा मुझे पसंद आया
रमेश- आज कल प्यार का नाम सुनते ही खून ख़राबा होता है , एक ग़लत फ़हमी से खून कर देते है इस लिए मैं चाहता था कि हमारे बीच कोई ग़लतफ़हमी या झूठ या छुपना छुपाना ना हो , उस लिए भगवान के सामने तुम्हें प्रपोज़ किया
पूजा- यही तो तुम्हारा स्टाइल पसंद आया
रमेश- और तुम्हारे पिताजी तुमसे प्यार करते है तो उनको भी लगेगा कि मुझे कुछ तो बात है जो उनके सामने उनकी बेटी को प्रपोज़ किया , गन से भी नही डरा , तुमसे कितना प्यार करता हू ये पता चल गया होगा तुम्हारे पिताजी को
पूजा- वो सब तो ठीक है , पर तुम हार गये तो
रमेश- प्यार करने वाले हारते नही है
पूजा- ये मूवी नही रियल है
रमेश- तुम्हें मुझपे विश्वास है ना
पूजा- तुमसे अभी तो मिली हूँ
रमेश- कभी कभी किसी के बारे में जाने को पूरी ज़िंदगी कम पड़ जाती है और कभी कभी एक पल मे सब कुछ पता चल जाता है
पूजा- तुम्हें विश्वास तो है पर अपने पिताजी पे तुमसे ज़्यादा विश्वास है
रमेश- क्या मतलब
पूजा- मुझे पिताजी पे विश्वास है कि वो कभी नही हारेंगे
रमेश- मैं तो तुम्हें पाने के लिए पूरी जान लगा दूँगा
पूजा- तुम्हें समझ नही रहे हो
रमेश- तुम मुझे प्यार करती हो और मुझसे शादी करना चाहती हो ना
पूजा- हाँ , पर मैं ये नही चाहती कि तुम हार जाओ फिर मुझे तुम्हें भूलना होगा
रमेश- डरो मत , तुम हाँ कहो फिर देखो ,मैं क्या करता हूँ
पूजा- क्या करोगे
रमेश- तुमसे शादी करूँगा
पूजा- ये भूल जाओ कि मैं भाग कर शादी करूँगी
रमेश- तुम्हारे पिताजी हमारी शादी करेंगे , और मैं भाग कर शादी करने पे विश्वास नही रखता , माता पिता के आशीर्वाद से शादी होनी चाहिए
पूजा- ठीक है मैं बात करती हूँ पिताजी से
रमेश- क्या कहोगी
पूजा- यही कि मुझे मेरे सपनो का राजकुमार मिल गया है
रमेश- ओह नो , अब मंदा को भूलना होगा
पूजा- क्या कहा
रमेश- मज़ाक कर रहा था , तुम गुस्से मे बहुत सुन्दर दिखती हो
पूजा- ज़्यादा मस्का मत लगाओ , कुस्ती खेलने को तय्यार हो जाओ
रमेश- कुस्ती की जगह पंजा लड़ाना नही चलेगा
पूजा- नही , और मैं तुम्हारे जीतने के बाद बताउन्गी कि मैं तुमसे शादी करूँगी कि नही
रमेश- जैसा तुम ठीक समझो
मैं रमेश से बात कर रही थी बाहर पता नही क्या हो रहा था
पिताजी बाहर खड़े सोचते रह गये कि ये हो क्या रहा है.
पिताजी ने गेट पर नॉक किया
पिताजी- पूजा क्या हो रहा है अंदर
पूजा-पिताजी रुकिये 2 मिनिट
रमेश से बात करने के बाद हम बाहर आ गये.
पिताजी-पूजा ये क्या हो रहा है, तुम अंदर क्या कर रही थी
पूजा-पिताजी रमेश मुझसे शादी करना चाहता है .
पिताजी- क्या , ये कौन है कहाँ से आया है कुछ पता नही है ,, इसकी हिम्मत कैसे हुई
पूजा- पिताजी रमेश आपसे कुस्ती खेलना चाहता है
पिताजी-क्या कहा
पूजा- रमेश आपको हरा कर मुझसे शादी करना चाहता है
पिताजी- ये तुम क्या कह रही है
पूजा- पिताजी मैं ने कहा था ना कि जो आपके सामने खड़ा होगा उस से शादी करूँगी ,
माजी-पूजा ये सब क्या है , ऐसे थोड़ी होती है शादी
पिताजी- तुम एक.मिनिट रूको
पूजा- रमेश ने मुझे अपने बारे में सब कुछ बता दिया है ,
पिताजी- पूजा तुझे पता है ना तू क्या कह रही है
पूजा- रमेश अच्छा लड़का है , आप कुस्ति खेलिए अगर रमेश जीत गया तो बात करेंगे वरना ये यहाँ से चला जाएगा , उस गन की ज़रूरत नही पड़ेगी
पिताजी- ठीक है ,
माजी- बिना बात किए शादी नही होगी पहले बता दे रही हूँ
पूजा- माँ जैसा तुम चाहोगी वैसा ही होगा
पिताजी- चलो अखाड़े मे
पूजा- पिताजी यही आँगन मे खेलते है बिना वजह पूरे गाँव को पता चल जाएगा
पिताजी- ठीक है
पिताजी कुश्ति की तैयारी करने लगे
रमेश मे कॉन्फिडेन्स तो था पर पता नही क्या होगा
पूजा को पता था कि उसके पिताजी कभी नही हारेंगे , उसको रमेश को भूलना होगा , इसी लिए उसने रमेश को हाँ नही कहा ,
पर रमेश के हारते ही पूजा को दिल टूट जाएगा
पूजा पहली बार दुआ कर रही थी कि उसके पिताजी ये कुश्ती हार जाए
उधर माँ पिताजी से बात कर रही थी
माजी- ये सब क्या है
पिताजी- तुम टेन्षन मत लो , इस लड़के को हरा दूँगा , ये चुप चाप यहाँ से चला जाएगा , खून ख़राबे से यही अच्छा है
माजी- आपकी बात सही है , पर पूजा क्या चाहती है ये पूछा आपने
पिताजी- पहले कुश्ती हो जाने दो फिर देखते है ,
पिताजी और रमेश तय्यार हो गये कुश्ती खेलने के लिए