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मैं और मेरा परिवार

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फ्लॅशबॅक 981

आज तो सीतल का बर्तडे है.

जिसके वजह से पिताजी को समधन के साथ बात करने का समय नही मिल रहा था.

पिताजी सुबह से काम मे लगे हुए .छोटू भाग भाग कर काम कर रहा था.

जयसिंघ भी अपनी भान के बर्तडे के लिए आया था

शालिनी का 8 वाँ महीना था जिस से वो ज़्यादा काम नही कर रही थी.

रमेश ने अपने दोस्तो को बुलाया था पर काम की वजह से वो आ नही पाए

जयसिंघ के आने से पिताजी खुश थे.शालिनी भी अपने पति के आने से खुश थी.

रमेश और जयसिंघ आते अपने अपने काम के बारे में बात करने लगे.

रमेश को जयसिंघ की कंपनी प्लॅनिंग अच्छी लगी.

रमेश अपने साले का दिमाग़ देख कर काफ़ी प्रभावित हुआ

फिर रमेश शहर चला गया केक लाने.

ठाकुर भी अपने फॅमिली के साथ बर्तडे के लिए आ गये

दो दोस्त मिलते फिर से बाते करनी सुरू हो गयी.

रमेश ने केक लाया .और सब केक काटने के लिए जमा हो गये

और नेहा ने सीतल का हाथ पकड़ कर केक काट लिया.

केक काटने के बाद सब को केक दिया .

और खाने की तय्यारी करने लगे.

नेहा और नीता मेहमानो को खाने खिलाने की तय्यारी करने लगे.

पिताजी ने सब को खाना खिला कर अपनी नवासी के लिए ड्यूवा माँग ली.

सब ने सीतल को ढेर सारा प्यार दिया .

पूजा अपनी बेटी के लिए काफ़ी खुश थी.

रमेश और पूजा को ठाकुर और बाकियो के तरफ से काफ़ी गिफ्ट मिले

नेहा और नीता गिफ्ट देखने लगी.

पिताजी दिन भर मेहमान को देख कर थक गये थे.

और आराम चेयर पे बैठ कर आराम करने लगे.

नेक्स्ट दिन.समधन देर तक सोती रही

माँ ने रमेश और पूजा को बुला कर बताया दीक्षा की समधन कल की वजह से तक गयी है उनको आराम की ज़रूरत है.

रमेश और पूजा को चिंता होने लगी.

पर माँ ने रमेश और पूजा को कहा कि समधन 1 महीना रुकने वाली है. उनको गाँव पसंद आया है कुछ दिन गाँव की हरियाली मे रहना चाहती है

समधन को गाँव मे रहने से अच्छा लग रहा है ये रमेश और पूजा को दिख रहा था.

रमेश अपनी माँ के लिए खुश था .और पूजा सास को अपने मायके मे खुश देख कर रिलॅक्स हो गयी.

माँ अपनी बहू का ध्यान रखते हुए नेहा नीता को बता रही थी कि क्या करना है कैसे करना है.

शालिनी को इन सब की आदत नही थी. पर उसकी बात कोई सुनता नही था.

शालिनी बिना काम के रह नही सकती थी वो दिमाग़ लगा के छोटे मोटे कामकर ही लेती थी.

समधन शालिनी की काफ़ी तारीफ करती थी जिसे सुनकर माँ को अच्छा लगता था.

माँ की एक इच्छा थी शालिनी जैसी बीवी छोटू को भी

मिल जाए तो चैन से भगवान के घर जा सकती है

इसी बीच वो दिन भी आ गया जिसका सबको इंतजार था.

सुबह से शालिनी को कुछ अजीब सा फील हो रहा था.

माँ शालिनी के पास बैठी थी. और उसका ख़याल रख रही थी

नेहा नीता स्वेता सीतल के साथ खेल रही थी.

अचानक घर मे शोर शराबा सुरू हो गया

शालिनी-आअहह माजी

माँ-क्या हुआ बहू

शालिनी-माजी वक्त आ गया है.आअहह

माँ-पूजा पूजा जल्दी आ, बहू को दर्द हो रहा है

पूजा-क्या हुआ माआ

पूजा ने शालिनी की हालत देखते उसके पास बैठ गयी.

माँ भागते हुए छोटू के पास गयी.

माँ-छोटू ,अपने पिताजी के पास जा .और जल्दी ठाकुर की कार लेकर बुला ,हॉस्पिटल जाना है

छोटू-मैं नही जाने वाला

माँ-तेरी भाभी को बच्चा होने वाला है

छोटू भाभी का नाम सुनते भागते हुए हवेली चला गया.

छोटू-पिताजी ,भाभी को बेटा हुआ है.

छोटू ने पूरा सीन चेंज किया.

बेटे का नाम सुनते ही पिताजी खुश हो गये.और ठाकुरके गले लग गये.

पिताजी-मैं दादा बन गया.

ठाकुर-बधाई हो

छोटू-माँ ने कार बुलाई है

पिताजी-चल यार

ठाकुर-चल जल्दी

पिताजी ठाकुर के साथ घर आ गये .

पिताजी-कहाँ है मेरा पोता

माँ-बहू को हॉस्पिटल ले जाना है. उसे दर्द हो रहा है,बच्चा अभी हुआ नही है

पिताजी-पिताजी गुस्से से छोटू की तरफ देखने .और वो छोटू को मारने वाले थे कि रुक गये

पिताजी-चलो जल्दी. छोटू की बात सही करनी है

पिताजी और माँ अपनी बहू को लेकर हॉस्पिटल चले गये.
 
फ्लश बॅक 982

शालिनी को हॉस्पिटल ले जाया गया.

ठाकुर आज ड्राइवर बन गया ताकि ज़्यादा लोगोको एक साथ हॉस्पिटल ले जा सके

पहले पूजा माँ पिताजी और शालिनी चली गयी.

फिर उनको छोड़ कर ठाकुर बाकी लोगो को ले गये. समधन घर पे रुक गयी स्वेता सीतल के साथ.

ठाकुरजी ने जयसिंघ के ऑफीस फ़ोन करके बता दिया कि शालिनी को हॉस्पिटल ले जाया गया है

नेना नीता हॉस्पिटल मे इधर उधर घूम रही थी.

बाकी सब डेलिवरी रूम के बाहर खड़े हो कर गुड न्यूज़ का इंतज़ार करने लगे

पिताजी अपने ख़याल मे इधर से उधर घूम रहे थे.

माँ दादी बन ने की न्यूज़ सुन ने को मरी जा रही थी.

जयसिंघ वहाँ से निकल चुका था.

और सब के इंतज़ार का वक्त ख़तम हो गया.

पिताजी को जो सुन ना था वो बताने के लिए डॉक्टर रूम से बाहर आ गये

डॉक्टर-मुबारक हो बेटा हुआ है

पिताजी के कान जिस वर्ड को सुन ने को बेकरार थे आख़िर वही सुन ने को मिला है.

पिताजी को क्या करूँ ना करूँ ऐसा हो रह था. कभी डॉक्टर से गले मिलने को हाथ बढ़ा रहे थे तो कभी ठाकुर के गले लगने के लिए

किस को बताऊ किस को ना बताऊ ऐसा हो रहा था.

तभी पिताजी की नज़र छोटू पे गयी.

पिताजी-ज़ोर से छोटू

अपना नाम इतने ज़ोर से वो भी पिताजी के मूह से सुनकर छोटू डर गया.

पिताजी भाग कर छोटू के पास आने लगे. छोटू की तो हालत खराब हो रही थी.

और पिताजी ने छोटू को गले लगा लिया.

पिताजी-छोटू तेरी बात सच हुई. मैं बहुत खुश हूँ.

अपने पिता के मूह से अपनी तारीफ सुनकर छोटू खुश हो गया.

नेहा और नीता एक दूसरे के गले लग गयी .और इधर उधर भागते हुए सब को बताने लगी कि वो बुआ बन गयी.

माँ के आँख मे खुशी के आसू आगये

पूजा-माँ आप रो रही है. आज तो खुशी का दिन है. आप दादी बन गयी है.

माजी-ये खुशी के आसू है.

सब खुशी मे पागल हो गये

पिताजी-डॉक्टर क्या हम

डॉक्टर-हाँ मिल सकते है. डेलिवरी नॉर्मल हुई है

माँ और पिताजी सब से पहले अंदर चले गये.

शालिनी अपने बेटे के साथ बेड पर लेटी हुई थी.

माजी-बहू

शालिनी-माजी ,आपका पोता

पिताजी ने पोते को उठा लिया. और अपने पोते को देखने लगे

माजी-तुम ठीक हो ना बहू

शालिनी-हाँ,

माँ ने अपने बहू के सर पर किस किया.

माजी-मुझे भी तो देखने दो

पिताजी-देख लो अपने पोते को, मुझ पे गया है

माजी-आप पे, आप को संभाल नही पाती और अब आपके पोते की कैसे संभालूंगी

नेहा-मुझे भी देखना है

नेहा ने अपने भतीजे को गोद मे लिया.

नेहा-कितना प्यारा है, अले अलेले मैं तुम्हारी बुआ. नेहा बुआ

नीता भी अंदर आ गयी. अपने भतीजे को देखने लगे.

फिर से पिताजी ने अपने पोते को गोद मेलिया

नेहा और नीता बाहर चली गयी.

नेहा-मैं ने पहले देखा ,मैं ने पहले देखा

नीता-तुझे मैं छोड़ूँगी नही. मुझे धक्का दे कर अंदर गयी थी

नेहा-पहले पकड़ के तो दिखा

और नेहा नीता हॉस्पिटल मे मस्ती करने लगी

एक एक करके बाकी सब ने भी नये मेहमान को देख लिया.

पूजा को खुशी हुइपर दिमाग़ मे एक जगह लग रहा था कि स्वेता सीतल से पिताजी कम प्यार करेंगे

पर शालिनी भाभी को देख कर पूजा ने इस बात मे ज़्यादा ध्यान नही दिया.

पूरे गाँव मे ये न्यूज़ हवा की तरह फैल गयी.

सब मिठाई के इंतज़ार मे थे

पिताजी ने पूरे गाँव मे मिठाई बाँटनी सुरू की

पिताजी इतने खुशे थे कि उनकी आँखो से खुशी के आसू निकल रहे थे

इतने भावुक हो गये थे कि उनको कुछ समझ नही आ रहा था.

सबको रोक रोक कर मिठाई दे रहे थे.

पिताजी ने पहली मिठाई गाँव के मंदिर मे भगवान को दी थी.और अपने पोते के लिए आशीर्वाद माँग लिया.

शाम तक जयसिंघ भी आ गया .जयसिंघ आते ही पहले शालिनी से मिला और अपने बेटे को देखने लगा.

जयसिंघ खुश था कि उसको बेटा हुआ है. शालिनी अपने पति को खुश देख कर दिल मे सुकून मिला

शालिनी के मायके मे भी बताया गया.

शालिनी को 2 दिन बाद हॉस्पिटल से छुट्टी मिल गयी.

पिताजी हॉस्पिटल से अपने पोते को घर ले जाने की जगह मंदिर ले गये.

अपने पोते को मंदिर मे भगवान के सामने रख कर पिताजी शंख बजाने लगे

पिताजी का अपने पोते को इस तरह प्यार करते हुए देख कर जयसिंघ की परेशानी बढ़ रही थी.

पिताजी ने पोते को मंदिर मे तिलक लगाया और घर ले कर आ गये.

घर आते ही पिताजी अपने पोते का साथ नही छोड़ रहे थे.

माँ के कहने पे पिताजी ने अपने पोते को नेहा की गोद मे दिया

2 दिन से माँ हॉस्पिटल मे रुकी थी.

पिताजी अपनी खुशी माजी के साथ बाँटने को बेचैन थे.

2 दिन मे पिताजी ने समधन की तरफ देखा भी नही.

माँ के घर आते ही पिताजी ने रात मे समधन को हॉल मे सोने को कहा.

पिताजी ने माँ को रात भर इतना प्यार किया कि माँ उनका प्यार देख कर उनके साथ प्यार करने लगी.

दोनो दादा दादी बने के खुशी मे रात भर जाग कर एक दूसरे को प्यार करने लगे
 
फ्लश बॅक 983

जयसिंघ ने एक महीने की छुट्टी ले ली.और अपनी बीवी और बेटे के साथ खुशी पल बिताने लगा.

पिताजी ज़्यादातर समय घर पे रहने लगे. अपने पोते को प्यार करने मे पूरा दिन निकालने लगे

पिताजी को अपनी बेटियो से प्यार ना करने से पूजा उदास हो गयी.

माँ ने ये बात देख ली और पिताजी को कमरे मे ले गयी

माँ-ये क्या हो रहा है.

पिताजी-अपने पोते को प्यार कर रहा हूँ

माँ-वो ठीक हाइपर पूजा की बेटियाँ ,वो भी हमारी पोती है

पिताजी-अब तक उनको प्यार करता आया था ,अब पोते को कर रहा हूँ

माँ-अचानक इसतरह करोगे तो पूजा और बहू मे दूरिया पैदा होगी.

पिताजी-मैं तो

माँ-आप स्वेता सीतल को उतना प्यार देंगे जितना पोते को दे रहे हो.

पिताजी-दे दूँगा. मुझे जाने दो

माँ-ऐसे नही, मेरी कसम खाओ

पिताजी-मैं ने कहा ना ,करूँगा तो करूँगा

माँ रोने लगी

माँ-मेरी कसम खाओ

पिताजी-तुम रोना बंद करो

माँ रोते हुए जाने लगी.

पिताजी-रूको. तुम्हारे सर की कसम ख़ाता हूँ,मैं सब को एक जैसा प्यार दूँगा. अब तो रोना बंद करो, तुम्हें रोता हुआ मैं नही देख सकता,

और पिताजी ने माँ को गले लगाया.

पिताजी-मैं सब को एक जैसा प्यार करता हूँ. जयसिंघ और पूजा को एक जैसा समझा है. अपने पोती पोते को एक जैसा प्यार दूँगा, अब तक मैं स्वेता को प्यार कर रहा था अब अचानक पोते के आने से उसको प्यार करने से तुम्हें ऐसा लग रहा कि मैं स्वेता को प्यार नही कर रहा हूँ , पर ऐसा नही है , मैं सबको एक जैसा प्यार करता हूँ तुम्हें तो पता है

माँ-मुझे पता है पर पूजा को उदास देख कर , इस लिए मैं आप से बात कर रही हूँ

पिताजी-चलो

माँ और पिताजी बाहर हॉल मे आ गये.

स्वेता अपने खिलोने के साथ खेल रही थी. वो घोड़े के साथ खेल रही थी.

माँ ने चुप के से स्वेता से खिलोना चुरा लिया .स्वेता अपना घोड़ा ना देख कर रोने लगी.

पूजा वही पर थी ,पर वो आगे आने से पहले पिताजी स्वेता के पास गये.

पिताजी-क्या हुआ मेरे बेटे को

स्वेता-घोड़ा घोड़ा

पिताजी-घोड़ा कहाँ गया.

पिताजी ढूँढने लगे और वही घोड़ा बन गये और स्वेता को अपने पीठ पर बैठा कर घोड़ा घोड़ा खेलने लगे

स्वेता अपने नाना को घोड़ा बन से हँसने लगी. पिताजी स्वेता को पूरे घर मे घुमाने लगे.

पिताजी को स्वेता के साथ खेलते हुए देख कर पूजा के आँख मे पानी आ गया.

पिताजी थोड़ी देर स्वेता के साथ खेलते रहे.

पिताजी की नज़र पूजा पर गयी उसकोरोता हुआ देख कर रुक गये .और पूजा के पास गये.

अपने पिता को देख कर पूजा उनके गले लग गयी.

पिताजी-तू मेरा शेरा बेटा है और हमेशा रहेंगी .

पिताजी सब को प्यार करने लगे .मतलब करते है

पिताजी का अपने पोते के तरफ इतना प्यार देख कर जयसिंघ को चिंता होने लगी.

शालिनी-देखिए पिताजी को ,कितना प्यार कर रहे है. छोटे बच्चे बन गये है.

जयसिंघ-उनका प्यार देख कर मुझे डर लग रहा है

शालिनी-फिर से शुरू मत हो जाना

जयसिंघ-कैसे शुरू ना हूँ ,बाद मे मुश्किल होगी

शालिनी-बाद का बाद मे देखेंगे. इस खुशी के पल को खराब मत कीजिए

जयसिंघ-पिताजी का प्यार बढ़ गया तो मैं तुम्हें शहर3 कैसे ले जाउन्गा

शालिनी-गाँव भी अच्छा है.

जयसिंघ-तुम मेरी तरफ हो या पिताजी की तरफ

शालिनी-आप मुझे बीच मे मत फसाइए

जयसिंघ-मैं जल्दी बात करूँगा. हम अपने बेटे के साथ शहर3 रहेंगे

शालिनी-कुछ दिन तो पिताजी को अपने पोते को प्यार करने दो.

जयसिंघ-ठीक है, तुम भी तो पिताजी को कह सकती हो .तुम कहो तुम्हारी बात मान जाएँगे

शालिनी-मैं ,बिल्कुल नही. आप और आपके पिताजी देख लीजिए.मैं और मेरा बेटा कहिए पे भी रहेंगे

जयसिंघ-ये नाम कब रख रहे है.

शालिनी-21 दिन बाद

जयसिंघ-तुम ने नाम सोचा

शालिनी-हाँ, पर उतना अच्छा नही लग रहा.आपने कुछ सोचा ,

जयसिंघ-राज कैसा रहेगा

शालिनी-ठीक है, पर हम क्यूँ सोच रहे है ,पिताजी ने कुछ सोचा होगा.

जयसिंघ-हाँ, वो हमे कुछ बोलने नही देंगे, उनको नाम रखने देते है. पिताजी खुश हो जाएँगे और फिर

शालिनी-आपको इसके सिवा दूसरा कुछ नही सूचता,एक किस ही कर दूं अपनी बीवी को ,ये भी नही होता.

शालिनी के कहते जयसिंघ ने किस करना सुरू किया .किस करना स्टार्ट किया था कि बेटे ने रोना सुरू किया

शालिनी-हटो ,भूक लगी है मेरे बेटे को

जयसिंघ-मुझे लगता है अब मेरे साथ ऐसा ही होगा,जब भी प्यार करूँगा तो हमारा बेटा बीच मे आएगा

शालिनी ने अपने बेटे को दूध पिला दिया
 
फ्लॅशबॅक 984

पर शुरू कहाँ से करे ये जयसिंघ को समझ नही आ रहा था

पर बीवी अपने पति के दिल की बात जान लेती है

शालिनी समझ गयी कि जयसिंघ परेशान क्यूँ है

शालिनी- क्या बात है , बेटे को प्यार करने की जगह परेशान दिख रहे हो

जयसिंघ-तुम्हें कल ही बताया मैं ने अपनी परेशानी

शालिनी- आप परेशान होते हो तो डरावने लगते हो

जयसिंघ-शालिनी मज़ाक नही

शालिनी- मेरे बच्चे को मज़ाक नही चाहिए

जयसिंघ-बताओ ना क्या करू मैं

शालिनी- क्या बताऊ

जयसिंघ-पिताजी के चेहरे की खुशी देखी तुमने

शालिनी- वो खुशी आपके चेहरे पे देखना था मुझे पर आप हो की परेशान हो

जयसिंघ-तो मेरी परेशानी दूर करो

शालिनी- करती हूँ , पहले अपने बेटे को प्यार करो

जयसिंघ-उसको बहुत प्यार करूँगा मैं बस तुम मेरी प्राब्लम सॉल्व कर दो

शालिनी- आप इतने डर क्यूँ रहे है

जयसिंघ-देखा नही पिताजी कैसे अपने पोते को प्यार कर रहे थे , और बोल रहे थे मेरा वारिस आ गया है

शालिनी- इतनी पुरानी परम्परा का वारिस बन गया है मेरा बेटा मैं खुश हूँ

जयसिंघ-शालिनी , तुम्हें मैं परेशान अच्छा लगता हूँ

शालिनी- आप रिलॅक्स हो जाइए मैं ने आपके प्राब्लम का हल् ढूँढ लिया

जयसिंघ-सच

शालिनी- हाँ , ऐसा हल ढूँढा है कि माजी पिताजी आप मैं और पूरा घर खुश हो जाएगा ( और मैं ने पिताजी को किया हुआ वादा की जयसिंघ को घर वापस लाउन्गी वो पूरा हो जाएगा )

जयसिंघ-वो कैसे

शालिनी- पहले बताइए कि सल्यूशन मिलने पे मुझे क्या मिलेगा

जयसिंघ-मेरी जान तुम्हारे नाम कर दूँगा

शालिनी- लगता है इस पिताजी के प्रॉमिस मे आपकी जान अटक गयी है ( इस प्रॉमिस की वजह से ,पिताजी को प्रॉमिस जयसिंघ ने किया था और पिताजी ने जो वादा लिया था मुझे से की जयसिंघ को घर लाउ दोनो पूरा हो जाएँगे )

जयसिंघ-बताओ ना

शालिनी- पहले कुछ बाते क्लियर कर दूं

जयसिंघ-हाँ बोलो

शालिनी- आपने कहा था कि मैं जैसा कहूँगी वैसा करोगे

जयसिंघ-हाँ , उसके सिवा दूसरा रास्ता नही है

शालिनी- एक कहावत है , कुछ कदम तुम चलो कुछ कदम हम चलते और मंज़िल मिल ही जाएगी

जयसिंघ-हाँ पता है , अब बोलो क्या करना होगा मुझे

शालिनी- स्टेप बाइ स्टेप चले

जयसिंघ-एस मेडम

शालिनी- मेरा सल्यूशन ऐसा है कि पिताजी को आपने जो प्रॉमिस किया वो पूरा होगा और आपका सपना भी पूरा हो जाएगा ( साथ मे मेरा वादा भी पूरा हो जाएगा )

जयसिंघ-मेरा सपना भी , बताओ ऐसा कौनसा सल्यूशन निकाला है तुमने

शालिनी- पहले बताइए आपकी कंपनी का प्रॉजेक्ट कैसा चल रहा है

जयसिंघ-पूछो ही मत , जितना सोचा था उस से ज़्यादा प्रॉफिट हुआ है

शालिनी- तो उस प्रॉफिट को संभाल के रखना

जयसिंघ-पर क्यूँ , उसपे तो मेरा अजीत और कुमार का हक है

शालिनी- उस प्रॉफिट से आपको एक और कंपनी खोलनी होंगी

जयसिंघ-व्हाट

शालिनी- आपने कहा था कि आपने कुमार के साथ कुछ शर्त रखी थी साथ मे कंपनी खोलने से पहले

जयसिंघ-हाँ ,

शालिनी- याद कीजिए वो शरत

जयसिंघ-कंपनी और पैसा कुमार का होगा काबिलियत मेरी होंगी , मुझे शेयर भी दिया कुमार ने

शालिनी- और कौनसी शर्त रखी थी , कंपनी के ब्रांच ओपन करना कुछ ऐसा ही याद आया

जयसिंघ-हाँ , कुमार ने कहा था कि कंपनी प्रॉफिट पे चलने पे इस कंपनी की एक ब्रांच इस गाँव मे खोलेगा , इस बात पे ही मैं तय्यार हुआ था कुमार के साथ काम करने को

शालिनी- और ये भी सोचा था कि इस से पार्ट्नरशिप से आप अपना सपना पूरा करोगे

जयसिंघ-हाँ ,

शालिनी- तो सल्यूशन ये है कि , गाँव और शहर के बीच मे एक कंपनी खोल लीजिए , जिस से आप इस गाँव के पास रह पाओगे

जयसिंघ-बोलती जाओ

शालिनी- आपको तो सिटी मे रहना पसंद है तो हम एक घर शहर मे बनाएँगे , जहाँ हम रहेंगे , मैं आप और हमारा बेटा , फिर तो आपको परेशानी नही होंगी ,

जयसिंघ-शहर3 से शहर छोटा है पर काम चल जाएगा

शालिनी- मतलब आपको परेशानी नही है

जयसिंघ-नही , मैं शहर मे रह लूँगा , एक कदम मैं आगे आ गया

शालिनी- आपको अपनी कंपनी से प्यार है , तो उसकी ब्रांच यहाँ खोल रहे है तो , इस से भी आपको प्राब्लम नही होंगी

जयसिंघ-शहर मे रहना और कंपनी की ब्रांच मेरे फाय्दे का है , आगे बोलो

शालिनी- यहा कंपनी की ब्रांच रहेंगी तो आप उस प्रॉफिट से जल्दी अपना सपना पूरा कर पायोगे

जयसिंघ-हाँ , ये भी मेरे फ़ायदा जैसा है

शालिनी-तो आप कुछ कदम आगे आ गये

जयसिंघ-अब पिताजी का क्या

शालिनी- पिताजी चाहते है उनका वारिस गाँव मे रहे

जयसिंघ-हाँ

शालिनी- और हम शहर मे रहेंगे

जयसिंघ-कुछ कुछ समझ रहा हूँ

शालिनी- हमारे बेटे के स्कूल जाने तक आप सुबह कंपनी मे जाओगे और मैं बेटे को लेकर गाँव मे आउन्गि , शाम मे आप हमे लेने आना फिर वापस शहर , कैसा रहा

जयसिंघ-ये तो बेस्ट रहेगा , दिन भर हमारा बेटा पिताजी के पास और शाम रात मे हमारे पास ,

शालिनी- तो आप इस से खुश हो

जयसिंघ-हाँ

शालिनी- पक्का खुश हो

जयसिंघ-हाँ , वैसे भी कंपनी के जाने के बाद मैं अपने बेटे से मिल तो नही पाउन्गा तब पिताजी मिल लेंगे

शालिनी- तो आपकी तरफ से कोई प्राब्लम नही है

जयसिंघ-नही , पर पिताजी

शालिनी- उनसे मैं बात करूँगी

जयसिंघ-सच

शालिनी- हाँ , मेरी बात वो मान जाएँगे

जयसिंघ-तो चलो पिताजी से बात करते है

शालिनी- अभी नही , जब कंपनी बन जाएगी तब , तब तक मैं यही रहूंगी

जयसिंघ-ये क्या बात हुई

शालिनी- आप जल्दी कुमार से बात कीजिए , और कंपनी का काम स्टार्ट कर दो , तब तक मैं यही रहूंगी और आप भी तो कंपनी के काम के लिए यही रहेंगे ना

जयसिंघ-ये तो मैं ने सोचा ही नही

शालिनी- मैं अपने बेटे के साथ यहा रहूंगी तो पिताजी खुश हो जाएँगे

जयसिंघ-हाँ , ये ठीक रहेगा

शालिनी- पिताजी का प्रॉमिस भी पूरा हो जाएगा और आप का बेटा आपके पास रहेगा , इस घर का वारिस उस घर मे रहेगा , आपका बेटा आके साथ शहर मे रहेगा

जयसिंघ-शालिनी तुम्हारा जवाब नही

शालिनी- बीवी आपकी हूँ , थोड़ा दिमाग़ तो होगा ही( शहर से आपको गाँव मे लाने के लिए मुझे ज़्यादा मेहनत नही करनी पड़ेगी )

जयसिंघ-तुम ग्रेट हो , तुमने सबको खुश कर दिया

शालिनी- आप खुश हो ना

जयसिंघ-हाँ , तुमने सारे प्राब्लम एक तीर से सॉल्व किए

शालिनी- तो

जयसिंघ-तुम यही रहोगी , मैं अपने बेटे का नाम रखते ही शहर3 जाउन्गा कुमार से बात करने

शालिनी- अच्छे से बात करना , ताकि कंपनी जल्दी स्टार्ट हो जाए

जयसिंघ-उसने मना किया तो मैं अपने शेयर के पैसो से छोटी कंपनी खोलूँगा यहाँ पर , चाहे तो शहर3 का घर बेच दूँगा

शालिनी- शहर3 का घर मत बेचना , वो आपकी मेहनत का घर है उसे वैसे ही रहने देना

जयसिंघ-जैसा तुम कहो ,

शालिनी- और कल खुश रहना

जयसिंघ-सारी परेशानी ख़तम अब खुशियाँ ही खुशियाँ होंगी

शालिनी- पिताजी भी खुश होंगे ये देख कर कि आप यहाँ गाँव मे कंपनी खोल रहे हो

जयसिंघ-हाँ , पिताजी बहुत खुश होंगे

शालिनी- और पिताजी तो शहर जाते रहते है नीता नेहा को मूवी दिखाने और समान लाने तो वो हमारे घर भी आएँगे शहर के

जयसिंघ-हाँ ,

शालिनी- कुछ दिन वहाँ रुकेंगे भी क्यूँ कि शहर भी उनके गाँव जैसा है

जयसिंघ-तुम्हारा जवाब नही

शालिनी- तो आपको परेशानी ख़तम हो गयी ऐसा समझू

जयसिंघ-एक सवाल

शालिनी- पूछिए

जयसिंघ-हम कंपनी खोलने के बाद क्यूँ बता रहे है पिताजी को

शालिनी- ताकि पिताजी को लगे कि अब दूसरा रास्ता नही है

जयसिंघ-समझ गया

शालिनी- तो

जयसिंघ-अब तो रात भर तुम्हें प्यार करूँगा

शालिनी- अभी तो डेलिवरी हुई है , अभी नही

जयसिंघ-पीछे से

शालिनी- कहा ना 1 महीना कुछ नही

जयसिंघ-तो मैं अपने बेटे को प्यार करता हूँ

शालिनी- हमारे बेटे को इस घर के बेटे को , ये इस घर का बेटा होगा

जयसिंघ-हाँ ,इस घर का वारिस

और शालिनी ने सबके बारे में सोचा

शालिनी को गाँव मे रहने मिलेगा

पिताजी को उनका वारिस मिल जाएगा

माजी का बेटा उनके पास आ जाएगा

शालिनी पिताजी को दिया हुआ वादा पूरा कर देगी

जयसिंघ शहर मे रहेगा वहाँ अपना घर बनाएगा

जयसिंघ पिताजी को दिया हुआ प्रॉमिस पूरा कर देगा

.जयसिंघ की कंपनी गाँव ने खुलेगी

जयसिंघ का सपना भी पूरा जो सकता है

नेहा नीता को उनकी भाभी मिल जाएगी

सब खुश हो जाएँगे
 
फ्लश बॅक 985

शालिनी ने जो जयसिंघ को उपाय बताया वो बेस्ट था

इस रास्ते से सब ठीक हो जाएगा

सबकी खुशी मिल जाएगी

जयसिंघ ने कुमार और अजीत को अपने बेटे के नाम करण पे बुलाने का सोचा

जयसिंघ अपने बेटे के होते ही गाँव मे रुका था

पर शालिनी का आइडिया सुनते ही जयसिंघ जल्द से जल्द कुमार और अजीत से बात करना चाहता था

कुमार से बात करके अपने बेटे के नाम करण पे बुला कर कंपनी के लिए जगह दिखा सकता है

ये आइडिया जयसिंघ के दिमाग़ मे आते ही उसने शालिनी को बता दिया

शालिनी ने जयसिंघ को सपोर्ट किया

जयसिंघ अजीत और कुमार से बात करने और अपने बेटे के नाम करण पे इन्वाइट करने शहर3 चला गया

कुमार को लगा था कि जयसिंघ को बेटा हुआ अब वो कुछ महीने वापस आएगा ही नही

और बिना जयसिंघ के कंपनी फिर से लॉस मे चली जाएगी जैसे जयसिंघ की शादी के वक्त हुआ था

पर कुमार को पता नही था कि जयसिंघ उसे एक झटका देने आ रहा है

जयसिंघ शहर3 मे आते ही सीधे कुमार के घर पे गया

कुमार जयसिंघ को सुबह सुबह अपने घर पे देख कर शॉक्ड हो गया

कुमार को तो लगा था कि जयसिंघ कुछ महीने आएगा ही नही

पर जयसिंघ को देखते ही कुमार खुश हो गया

जयसिंघ कुमार की बॅंक था , जयसिंघ के बिना कुमार कंपनी चला ही नही सकता

क्यूँ की सारे टेंडर जयसिंघ की काबिलियत की वजह से मिलते थे ,

कुमार के पास पैसा तो था पर क़ाबलियत तो जयसिंघ के पास थी

कुमार-जयसिंघ तुम , मैं कोई सपना तो नही देख रहा

जयसिंघ- ये हक़ीकत है

कुमार-पर तू वापस कैसे आ गया , वो भी इतनी जल्दी

जयसिंघ- तुझे खुश खबरी सुनाने आया हूँ

कुमार-अजीत ने बताया कि तुझे बेटा हुआ है

जयसिंघ- तेरे पास तो खबर जल्दी पहुँच जाती है

कुमार-पार्टनर है हम , इतनी खबर रखनी पड़ती है

जयसिंघ- मान गये तुझे

कुमार-पर तू गाँव से इतनी जल्दी वापस कैसे आ गया

जयसिंघ- तुझे क्या लगा था

कुमार-मुझे लगा कि कुछ महीने तू आएगा ही नही , जैसे शादी के समय रुक गया था

जयसिंघ- अब तो मैं हमेशा के लिए गाँव रुकने वाला हूँ

जयसिंघ की बात सुनते कुमार अपनी जगह पे खड़ा हो गया

उसे अपनी कानो पे विश्वास नही हो रहा था

जयसिंघ ने क्या कहा वो कुमार के दिमाग़ मे घूम रहा था

कुमार-क्या कहा तूने

जयसिंघ- मैं गाँव मे रहने वाला हूँ , हमेशा के लिए

कुमार-(ये शालिनी ने कहा होगा जयसिंघ से ) पर ऐसे कैसे तूने ये फ़ैसला किया

जयसिंघ- मैं अपने फ़ैसले खुद ले सकता हूँ

कुमार-पर हमारी कंपनी

जयसिंघ-वो तेरी कंपनी है

कुमार-तेरे बिना वो एक खंडहर बन जाएगी

जयसिंघ- कभी ना कभी तो तुझे देखनी पड़ेगी ये कंपनी

कुमार-ऐसा मत बोल , मैं बर्बाद हो जाउन्गा , मेरे उपर बहुत लोन है

जयसिंघ- वो तेरे बंगले का लोन है

कुमार-पर हुआ क्या तुझे , तू कहे तो तेरी पार्टनरशिप बढ़ा देता हूँ

जयसिंघ- कितनी

कुमार-(अपनी पार्टनर शिप बढ़ाने को ऐसा बोल रहा है ) तुझे कितनी चाहिए

जयसिंघ- अभी जितनी है उसकी डबल चाहिए

कुमार-40% , दे दी पर तू कंपनी छोड़ कर नही जाएगा

जयसिंघ- पेपर बना

कुमार-बना दूँगा

जयसिंघ- और अजीत को कुछ बताना मत

कुमार-पर साले तू भी कमीना निकला जो पाटनेर्शिप बढ़ा रहा है

जयसिंघ- कमीना भी तो तू है , दिमाग़ और पैसे कंपनी मे 50 50 होने चाहिए , मेरा दिमाग़ और तेरे पैसे , पर तूने मुझे सिर्फ़20% दिए है

कुमार-तो पहले माँग लेता तो मना नही करता

जयसिंघ- तब तूने और भी कुछ देने का वादा किया था

कुमार-कैसा वादा

जयसिंघ- भूल गया ,

कुमार-बात तो सिर्फ़ पार्टनरशिप की हुई थी

जयसिंघ- पर मैं पार्टनरशिप को तय्यार नही था

कुमार-हाँ पर बाद मे तूने हाँ कर दी

जयसिंघ- क्यूँ की थी याद कर

कुमार-कंपनी की ब्रांच निकालने की बात हुई थी

जयसिंघ- तो वो वादा पूरा करने का समय आ गया है

कुमार-क्या मतलब

जयसिंघ- अब जो प्रॉजेक्ट और टेंडर मिले है उस से प्रॉफिट बढ़ गया है

कुमार-तो

जयसिंघ- प्रॉजेक्ट और टेंडर दोनो एक साथ हॅंडल नही कर सकते एक कंपनी मे

कुमार-बोलता जा

जयसिंघ- अब हमे एक और ब्रांच ओपन करनी होगी ताकि वर्क डिवाइड हो सके

कुमार-पर नयी ब्रांच ओपन करने के लिए पैसे कहाँ है

जयसिंघ- अब जो प्रॉजेक्ट पे हम काम कर रहे है उसके प्रॉफिट से ब्रांच बना देंगे , ऐसा समझेंगे कि इस प्रॉजेक्ट मे प्रॉफिट हुआ ही नही

कुमार-(पूरा प्लान बना कर आया है जयसिंघ , ) अजीत , उसका क्या

जयसिंघ- उसके 2 % को मारो गोली , नयी ब्रांच ओपन हुई तो टेंडर ज़्यादा लाने की ज़िम्मेदारी मेरी

कुमार-तू जो कहता है उसको कभी विरोध किया ही नही मैं , अभी देख पार्टनरशिप मे 40% माँग लिए तो दे दिए ,

जयसिंघ- इसी लिए तो तू मेरा बेस्ट फ्रेंड है , मेरे भाई जैसा है तू

कुमार- तो पिछली बार की तरह कोई बंद कंपनी खरीद लेते है

जयसिंघ- नही , इस बार खुद बनाएँगे

कुमार-बनाने मे ज़्यादा खर्च आएगा

जयसिंघ- गाँव मे ज़मीन ही मिल सकती है वहाँ कहाँ बंद कंपनी मिलेंगी

कुमार-यही शहर3 के पास ओपन करते है ताकि दोनो कंपनी मिलके काम कर सके

जयसिंघ- नही , बात गाँव मे ब्रांच खोलने की हुई थी

कुमार-गाँव मे खोल लेंगे ( शालिनी ने जयसिंघ के दिमाग़ मे ये बात डाली होगी )

जयसिंघ- तो जगह देख ले

कुमार-अभी , अजीत बाहर गया है

जयसिंघ- अभी नही , तू मेरे बेटे के नाम करण पे गाँव आ फिर साइट देख लेंगे

कुमार-(पूरा प्लान बना लिया है कब क्या करना है , पहले पार्टनरशिप बढ़ा दी फिर ब्रांच खोलने के पैसे का इंतज़ाम भी कर लिया फिर साइट भी देख ली होगी )

जयसिंघ- क्या सोच रहा है

कुमार-आ जाउन्गा , तेरे बेटे के नाम करण पे

जयसिंघ- अजीत को भी लेकर आना वरना तू बोर हो जाएगा

कुमार-मैं गाँव मे रुकने वाला नही हूँ , शहर के होटेल मे रहूँगा

जयसिंघ- ठीक है , पर प्लॅनिंग करके आना

कुमार-वो तेरा काम है

जयसिंघ- देख मैं एक कंपनी की कितनी ब्रांच ओपन करता हूँ

कुमार-इंटरनेशनल बनाना है कंपनी को

जयसिंघ- बन गयी समझो , बस गाँव मे प्लांट लगने दो , फिर देखना मेरा कमाल

कुमार-और बता , क्या चल रहा है

जयसिंघ- तुझे यही बात बताने आया था शहर3 मे

कुमार-तेरा बेटा कैसा है

जयसिंघ- अपने दादाजी पे गया है

कुमार-अपने जैसे तेज बना देना

जयसिंघ- मेरा बेटा मुझसे भी तेज बनेगा

कुमार-और भाभिजी कैसी है

जयसिंघ- वो भी ठीक है , उसको डिसचार्ज भी मिल गया है

कुमार-चल बाकी की बाते कंपनी मे जाकर करते है

जयसिंघ- नही यार , मुझे वापस गाँव जाना है

कुमार-अभी तो आया है

जयसिंघ- मैं सिर्फ़ ये बताने आया था कि कंपनी की ब्रॅंचस ओपन करने का समय आ गया है

कुमार-तू ऐसे दिमाग़ लगाता जा और हम मिलके उस कंपनी को उँचाई पे ले जाएँगे

जयसिंघ- चकल अब मैं चलता हूँ , और पार्टनरशिप के पेपर बना देना

कुमार-तेरे बेटे के नाम करण पे तुझे गिफ्ट मे दूँगा

जयसिंघ- टाइम पर आना , तब तक मैं कुछ साइट देख लेता हू जो कंपनी खोलने के लिए अच्छी हों

कुमार-ये अच्छा रहेगा जिस से जल्दी काम ही जाएगा , पर

जयसिंघ- पर क्या

कुमार-कंपनी का काम इस प्रॉजेक्ट के कंप्लीट होने के बाद करेंगे

जयसिंघ- ठीक है , पर साइट खरीद लेंगे

कुमार-चल तुझे बस स्टॉप पर छोड़ देता हूँ

जयसिंघ- अब तो सोच रहा हूँ कार खरीद ही लूँ

कुमार-(बहुत उड़ रहा जयसिंघ) खरीद ले

जयसिंघ- चल फिर , गाँव आना टाइम पर

और जयसिंघ कुमार से मिलके उसी शाम वापस गाँव आ गया

और कुमार को एक नया टेन्षन दे दिया जयसिंघ ने

जयसिंघ डबल खुश था

एक यो पार्टनरशिप 20% से बढ़ कर 40% हो जाएगी और दूसरा ये कि कंपनी गाँव मे खुलेगी
 
फ्लश बॅक 986

अवी के नाम कारण के लिए नेहा और नीता की अलग प्लॅनिंग चल रही थी

नेहा-तुमने कुछ सोचा

नीता-राजेश

नेहा- राजेश खन्ना की दीवानी ,तू बस यही सोचेगी

नीता- अच्छा तो नाम है , राजेश

नेहा- बिल्कुल नही , कुछ और सोच

नीता- जतिन कैसा रहेगा

नेहा- पता है मुझे कि राजेश खन्ना का नाम पहले जतिन था , जतिन भी नही चलेगा

नीता- अच्छा नाम है जतिन

नेहा-कुछ अच्छा सोचो ,अमित,अमित कैसा रहेगा

नीता-ठीक है पर थोड़ा छोटा होता तो

नेहा-ओम अच्छा रहेगा.

नीता-नही, नयन कैसा है

नेहा-कुछ अच्छा सोच

नीता-सोच तो लेंगे पर पिताजी ने कुछ सोचा होगा

नेहा-मुझे कुछ नही पता ,नाम तो हम रखेंगे

नीता-और पिताजी

नेहा-पंडित जी जब नाम पूछेंगे उस से पहले तुम उनको ठाकुर के नाम से बाहर ले जाना

नीता-उस के बाद

नेहा-पंडितजी नाम पूछेंगे तो मैं माँ को कहूँगी कि पिताजी से पूछ कर आती हूँ .

नीता-फिर

नेहा-मैं हमारा नाम बता दूँगी.

नीता-आइडिया अच्छा है. पर नाम क्या रखे

नेहा-अवी कैसा रहेगा.

नीता-अवी ,अच्छा है,मुझे तो पसंद है.

नेहा-फिर पक्का रहा , अवी नाम रखेंगे

नीता-हमारे भतीजे का नाम अवी रहेगा

नेहा-अवी

नीता-चलो अब सोते है

नेहा-हाँ

नेहा नीता ने प्लान बना लिया ,नाम भी तय किया.

पर पिताजी ने भी नाम सोचा था.

अब देखना था कि कौन नाम रखता है.

आज नये मेहमान का नामकरण था

सुबह से सब तय्यारी मे लगे हुए थे

पिताजी ने पूरे गाँव के लिए खाने का इंतज़ाम किया था

शालिनी के मायके से उसके माता पिता भी आ गये.

नेहा और नीता ने सुबह जल्दी उठ कर खुद को तय्यार किया और नामकरण की तय्यारी मे लग गयी.

छोटू भाग भाग कर काम कर रहा था. सब को बुलाने का काम और लोगो को खाना खिलाने का काम छोटू को मिला था.

काफ़ी मेहमान आए थे.

जयसिंघ के कंपनी पार्टनर भी आए थे. जयसिंघ के दोस्त अजीत और कुवार. पैसा दोनो का था पर दिमाग़ और प्लान जयसिंघ के थे जिस से कंपनी आचे से चल रही थी.

जयसिंघ ने अपने दोस्तो का स्वागत किया.और अपने पिताजी से मिलाया

अजीत और कुवार जयसिंघ का घर देख कर पहले सोचा कहाँ आ गये .पर उनको आना पड़ा जयसिंघ को नाराज़ करना मतलब कंपनी बंद

जयसिंघ-पिताजी ये मेरे दोस्त मेरे पार्टनर अजीत और कुमार

पिताजी-नमस्ते,

अजीत-नमस्ते अंकल .आप से मिल कर अच्छा लगा .

पिताजी-इनको नाश्ता टी दिया कि नही.

जयसिंघ-ये अभी आए है

पिताजी-मेहमान नवाज़ी मे कोई कमी मत रखना

जयसिंघ-जी पिताजी

और पिताजी अपने काम मे लग गये. जयसिंघ को अच्छा लगा कि पिताजी ने उसके दोस्तो से बात की.

जयसिंघ ने अपने दोस्तो की खातिरदारी खुद करनी सुरू की,पिताजी अपने काम मे बिज़ी थे,

जयसिंघ ने कुमार को एक खास वजह से यहा बुलाया था

गाँव मे कंपनी खोलने के लिए

पंडितजी भी आ गये.और नाम कारण का प्रोग्राम सुरू हुआ

घर के अंदर सब लॅडीस बैठी हुई थी और बाकी सब घर के बाहर मंडप मे

पंडितजी ने नाम कारण करना सुरू किया.

जयसिंघ अपनी बीवी शालिनी के साथ पूजा मे बैठ गया .

शालिनी अपने बेटे को गोद मे रख कर पूजा कर रही थी.

पिताजी भी वही गेट के पास खड़े थे.

नेहा नीता अपना प्लान पर ध्यान दे रही थी.

स्वेता और सीतल का नाम करण .मे क्या हुआ था ये दोनो को पता है , जिस से नेहा को पता था कि पंडित जी नाम कब पूछते है.

नेहा ने नीता को इशारा किया.

नीता-पिताजी आपको ठाकुर जी बुला रहे है

पिताजी-इस वक्त ,कहो मैं थोड़ी देर मे आता हूँ

नीता-ठाकुरजी ने कहा है कि एक ज़रूरी बात करनी है. अभी बुलाया है

पिताजी-कहाँ पर

नीता-बाहर बैठे है

पिताजी बाहर चले गये

और पंडित जी ने बेटे का नाम पूछा

पंडित-बेटे का नाम

जयसिंघ शालिनी की तरफ देखने लगा

माजी-ये कहाँ रह गये

पूजा- पिताजी कहाँ गये

नेहा-माँ मैं बुला कर लाती हूँ

माजी-जा जल्दी. नाम पूछ कर आ

नेहा बाहर चली गयी और जल्दी वापस आकर नाम बता दिया.

नेहा बीच से वापस आ गयी

माजी-नाम बता

नेहा-अवी

पंडित जी अवी के नाम से पूजा करने मे लग गये.

सब नेहा की तरफ देखने लगे.

शालिनी और जयसिंघ को नाम बहुत पसंद आया

माँ को कुछ शक हुआ ,पिताजी बिना सिंग लगाया हुआ नाम नही बताएँगे

माँ के कुछ कहने से पहले पंडितजी ने पूजा सुरू कर दी

नेहा ने अपने भतीजे का नाम रख दिया.

थोड़ी देर बाद पिताजी अंदर आ गये. और अपने पोते का नाम बताने वाले थे कि माँ ने नाम बता दिया.

माजी-आपने अच्छा नाम रखा है , अवी, सबको पसंद आया है

पिताजी ने नाम सुनते ही चुप रहना सही समझा ,और चुप चाप पूजा ख़तम होने का इंतज़ार करने लगे

क्यूँ कि अब नाम रख दिया तो कुछ नही कर सकते

नाम करण होगा सब को नाम बहुत पसंद आया.

पिताजी ने माँ को इशारा किया और अपने कमरे मे बुलाया

पिताजी-नाम किसने रखा

माँ-आप ही ने तो बताया

पिताजी-किसने कहा

माँ-नेहा ने

पिताजी-बुलाओ उसे

माँ ने नेहा को बुलाया. नेहा के साथ नीता भी आ गयी.और शालिनी भी

पिताजी-नेहा

नेहा-पिताजी वो मैं

पिताजी-ज़ोर से नेहा

माजी-नेहा तुम ने ऐसा क्यूँ किया

नीता-मैं बताती हूँ. हमे सिंग नाम पसंद नही था.

नेहा ने अपना सर नीचे कर दिया

पिताजी के कुछ कहने से पहले शालिनी बीच मे बोल पड़ी

शालिनी-मुझे तो अवी नाम बहुत पसंद आया.

माजी-मुझे भी

नेहा ने रुआंसी से होकर पिताजी की तरफ देखा

नेहा को ऐसे पिताजी देख ही नही सकते

नेहा की आँख मे आसू पिताजी को अच्छे नही लगते

पिताजी-आज के बाद सिंग नाम कोई नही लगाएगा.नेहा नीता को नही पसंद तो आज से ऐसे ही नाम होंगे हमारी फॅमिली मे, नेहा ने अछा नाम रखा है ,अवी

अपने पिताजी की बात सुनकर नेहा उनके गले लग गयी.

अपने पिताजी मे आया बदलाव देख कर माजी खुश थी.

नाम रखने के बाद लोगो को खाना खिलाया गया.

नेहा बहुत खुश थी. और इस खुशी मे भाग भाग कर काम कर रही थी.

योगेंद्रसिंघ की बेटी होने से कोई बुरी नज़र से नही देखता था.

पर 4 आँख नेहा को उछल खुद करते हुए बराबर देख रही थी.

अजीत और कुमार नेहा की जवानी को अपने आँख मे क़ैद कर रहे थे.

अजीत की शादी हो चुकी थी और पर कुमार कुँवारा था.

दोनो नेहा के उछलते कूदते दूध को देख कर आँख सेक रहे थे.

अजीत ने इन्फो निकाली तो पता चला वो जयसिंघ की बहन नेहा है.जिसके बारे में उननो बहुत कुछ सुन रखा था जयसिंघ से

जयसिंघ की बहन होने से वो शांत हो गये पर दोनो के दिमाग़ मे कुछ और चल रहा था.

वो आज सिर्फ़ नेहा की जवानी देख सकते थे उसका मज़ा लेने के लिए कुछ और सोच लिया.

और सही समय का इंतज़ार करने लगे.

प्रोग्राम ख़तम हो गया.

मेहमान अपने अपने घर चले गये.

जयसिंघ के दोस्त भी चले गये.

पिताजी खुश थे नेहा नीता उनकी जान थी. नेहा ने नाम रखा और नाम रखने केलिए जो मेहनत की उस से उनको पता चला की दोनो अवी के लिए कितना खुश है.
 
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