फ्लॅशबॅक 984
पर शुरू कहाँ से करे ये जयसिंघ को समझ नही आ रहा था
पर बीवी अपने पति के दिल की बात जान लेती है
शालिनी समझ गयी कि जयसिंघ परेशान क्यूँ है
शालिनी- क्या बात है , बेटे को प्यार करने की जगह परेशान दिख रहे हो
जयसिंघ-तुम्हें कल ही बताया मैं ने अपनी परेशानी
शालिनी- आप परेशान होते हो तो डरावने लगते हो
जयसिंघ-शालिनी मज़ाक नही
शालिनी- मेरे बच्चे को मज़ाक नही चाहिए
जयसिंघ-बताओ ना क्या करू मैं
शालिनी- क्या बताऊ
जयसिंघ-पिताजी के चेहरे की खुशी देखी तुमने
शालिनी- वो खुशी आपके चेहरे पे देखना था मुझे पर आप हो की परेशान हो
जयसिंघ-तो मेरी परेशानी दूर करो
शालिनी- करती हूँ , पहले अपने बेटे को प्यार करो
जयसिंघ-उसको बहुत प्यार करूँगा मैं बस तुम मेरी प्राब्लम सॉल्व कर दो
शालिनी- आप इतने डर क्यूँ रहे है
जयसिंघ-देखा नही पिताजी कैसे अपने पोते को प्यार कर रहे थे , और बोल रहे थे मेरा वारिस आ गया है
शालिनी- इतनी पुरानी परम्परा का वारिस बन गया है मेरा बेटा मैं खुश हूँ
जयसिंघ-शालिनी , तुम्हें मैं परेशान अच्छा लगता हूँ
शालिनी- आप रिलॅक्स हो जाइए मैं ने आपके प्राब्लम का हल् ढूँढ लिया
जयसिंघ-सच
शालिनी- हाँ , ऐसा हल ढूँढा है कि माजी पिताजी आप मैं और पूरा घर खुश हो जाएगा ( और मैं ने पिताजी को किया हुआ वादा की जयसिंघ को घर वापस लाउन्गी वो पूरा हो जाएगा )
जयसिंघ-वो कैसे
शालिनी- पहले बताइए कि सल्यूशन मिलने पे मुझे क्या मिलेगा
जयसिंघ-मेरी जान तुम्हारे नाम कर दूँगा
शालिनी- लगता है इस पिताजी के प्रॉमिस मे आपकी जान अटक गयी है ( इस प्रॉमिस की वजह से ,पिताजी को प्रॉमिस जयसिंघ ने किया था और पिताजी ने जो वादा लिया था मुझे से की जयसिंघ को घर लाउ दोनो पूरा हो जाएँगे )
जयसिंघ-बताओ ना
शालिनी- पहले कुछ बाते क्लियर कर दूं
जयसिंघ-हाँ बोलो
शालिनी- आपने कहा था कि मैं जैसा कहूँगी वैसा करोगे
जयसिंघ-हाँ , उसके सिवा दूसरा रास्ता नही है
शालिनी- एक कहावत है , कुछ कदम तुम चलो कुछ कदम हम चलते और मंज़िल मिल ही जाएगी
जयसिंघ-हाँ पता है , अब बोलो क्या करना होगा मुझे
शालिनी- स्टेप बाइ स्टेप चले
जयसिंघ-एस मेडम
शालिनी- मेरा सल्यूशन ऐसा है कि पिताजी को आपने जो प्रॉमिस किया वो पूरा होगा और आपका सपना भी पूरा हो जाएगा ( साथ मे मेरा वादा भी पूरा हो जाएगा )
जयसिंघ-मेरा सपना भी , बताओ ऐसा कौनसा सल्यूशन निकाला है तुमने
शालिनी- पहले बताइए आपकी कंपनी का प्रॉजेक्ट कैसा चल रहा है
जयसिंघ-पूछो ही मत , जितना सोचा था उस से ज़्यादा प्रॉफिट हुआ है
शालिनी- तो उस प्रॉफिट को संभाल के रखना
जयसिंघ-पर क्यूँ , उसपे तो मेरा अजीत और कुमार का हक है
शालिनी- उस प्रॉफिट से आपको एक और कंपनी खोलनी होंगी
जयसिंघ-व्हाट
शालिनी- आपने कहा था कि आपने कुमार के साथ कुछ शर्त रखी थी साथ मे कंपनी खोलने से पहले
जयसिंघ-हाँ ,
शालिनी- याद कीजिए वो शरत
जयसिंघ-कंपनी और पैसा कुमार का होगा काबिलियत मेरी होंगी , मुझे शेयर भी दिया कुमार ने
शालिनी- और कौनसी शर्त रखी थी , कंपनी के ब्रांच ओपन करना कुछ ऐसा ही याद आया
जयसिंघ-हाँ , कुमार ने कहा था कि कंपनी प्रॉफिट पे चलने पे इस कंपनी की एक ब्रांच इस गाँव मे खोलेगा , इस बात पे ही मैं तय्यार हुआ था कुमार के साथ काम करने को
शालिनी- और ये भी सोचा था कि इस से पार्ट्नरशिप से आप अपना सपना पूरा करोगे
जयसिंघ-हाँ ,
शालिनी- तो सल्यूशन ये है कि , गाँव और शहर के बीच मे एक कंपनी खोल लीजिए , जिस से आप इस गाँव के पास रह पाओगे
जयसिंघ-बोलती जाओ
शालिनी- आपको तो सिटी मे रहना पसंद है तो हम एक घर शहर मे बनाएँगे , जहाँ हम रहेंगे , मैं आप और हमारा बेटा , फिर तो आपको परेशानी नही होंगी ,
जयसिंघ-शहर3 से शहर छोटा है पर काम चल जाएगा
शालिनी- मतलब आपको परेशानी नही है
जयसिंघ-नही , मैं शहर मे रह लूँगा , एक कदम मैं आगे आ गया
शालिनी- आपको अपनी कंपनी से प्यार है , तो उसकी ब्रांच यहाँ खोल रहे है तो , इस से भी आपको प्राब्लम नही होंगी
जयसिंघ-शहर मे रहना और कंपनी की ब्रांच मेरे फाय्दे का है , आगे बोलो
शालिनी- यहा कंपनी की ब्रांच रहेंगी तो आप उस प्रॉफिट से जल्दी अपना सपना पूरा कर पायोगे
जयसिंघ-हाँ , ये भी मेरे फ़ायदा जैसा है
शालिनी-तो आप कुछ कदम आगे आ गये
जयसिंघ-अब पिताजी का क्या
शालिनी- पिताजी चाहते है उनका वारिस गाँव मे रहे
जयसिंघ-हाँ
शालिनी- और हम शहर मे रहेंगे
जयसिंघ-कुछ कुछ समझ रहा हूँ
शालिनी- हमारे बेटे के स्कूल जाने तक आप सुबह कंपनी मे जाओगे और मैं बेटे को लेकर गाँव मे आउन्गि , शाम मे आप हमे लेने आना फिर वापस शहर , कैसा रहा
जयसिंघ-ये तो बेस्ट रहेगा , दिन भर हमारा बेटा पिताजी के पास और शाम रात मे हमारे पास ,
शालिनी- तो आप इस से खुश हो
जयसिंघ-हाँ
शालिनी- पक्का खुश हो
जयसिंघ-हाँ , वैसे भी कंपनी के जाने के बाद मैं अपने बेटे से मिल तो नही पाउन्गा तब पिताजी मिल लेंगे
शालिनी- तो आपकी तरफ से कोई प्राब्लम नही है
जयसिंघ-नही , पर पिताजी
शालिनी- उनसे मैं बात करूँगी
जयसिंघ-सच
शालिनी- हाँ , मेरी बात वो मान जाएँगे
जयसिंघ-तो चलो पिताजी से बात करते है
शालिनी- अभी नही , जब कंपनी बन जाएगी तब , तब तक मैं यही रहूंगी
जयसिंघ-ये क्या बात हुई
शालिनी- आप जल्दी कुमार से बात कीजिए , और कंपनी का काम स्टार्ट कर दो , तब तक मैं यही रहूंगी और आप भी तो कंपनी के काम के लिए यही रहेंगे ना
जयसिंघ-ये तो मैं ने सोचा ही नही
शालिनी- मैं अपने बेटे के साथ यहा रहूंगी तो पिताजी खुश हो जाएँगे
जयसिंघ-हाँ , ये ठीक रहेगा
शालिनी- पिताजी का प्रॉमिस भी पूरा हो जाएगा और आप का बेटा आपके पास रहेगा , इस घर का वारिस उस घर मे रहेगा , आपका बेटा आके साथ शहर मे रहेगा
जयसिंघ-शालिनी तुम्हारा जवाब नही
शालिनी- बीवी आपकी हूँ , थोड़ा दिमाग़ तो होगा ही( शहर से आपको गाँव मे लाने के लिए मुझे ज़्यादा मेहनत नही करनी पड़ेगी )
जयसिंघ-तुम ग्रेट हो , तुमने सबको खुश कर दिया
शालिनी- आप खुश हो ना
जयसिंघ-हाँ , तुमने सारे प्राब्लम एक तीर से सॉल्व किए
शालिनी- तो
जयसिंघ-तुम यही रहोगी , मैं अपने बेटे का नाम रखते ही शहर3 जाउन्गा कुमार से बात करने
शालिनी- अच्छे से बात करना , ताकि कंपनी जल्दी स्टार्ट हो जाए
जयसिंघ-उसने मना किया तो मैं अपने शेयर के पैसो से छोटी कंपनी खोलूँगा यहाँ पर , चाहे तो शहर3 का घर बेच दूँगा
शालिनी- शहर3 का घर मत बेचना , वो आपकी मेहनत का घर है उसे वैसे ही रहने देना
जयसिंघ-जैसा तुम कहो ,
शालिनी- और कल खुश रहना
जयसिंघ-सारी परेशानी ख़तम अब खुशियाँ ही खुशियाँ होंगी
शालिनी- पिताजी भी खुश होंगे ये देख कर कि आप यहाँ गाँव मे कंपनी खोल रहे हो
जयसिंघ-हाँ , पिताजी बहुत खुश होंगे
शालिनी- और पिताजी तो शहर जाते रहते है नीता नेहा को मूवी दिखाने और समान लाने तो वो हमारे घर भी आएँगे शहर के
जयसिंघ-हाँ ,
शालिनी- कुछ दिन वहाँ रुकेंगे भी क्यूँ कि शहर भी उनके गाँव जैसा है
जयसिंघ-तुम्हारा जवाब नही
शालिनी- तो आपको परेशानी ख़तम हो गयी ऐसा समझू
जयसिंघ-एक सवाल
शालिनी- पूछिए
जयसिंघ-हम कंपनी खोलने के बाद क्यूँ बता रहे है पिताजी को
शालिनी- ताकि पिताजी को लगे कि अब दूसरा रास्ता नही है
जयसिंघ-समझ गया
शालिनी- तो
जयसिंघ-अब तो रात भर तुम्हें प्यार करूँगा
शालिनी- अभी तो डेलिवरी हुई है , अभी नही
जयसिंघ-पीछे से
शालिनी- कहा ना 1 महीना कुछ नही
जयसिंघ-तो मैं अपने बेटे को प्यार करता हूँ
शालिनी- हमारे बेटे को इस घर के बेटे को , ये इस घर का बेटा होगा
जयसिंघ-हाँ ,इस घर का वारिस
और शालिनी ने सबके बारे में सोचा
शालिनी को गाँव मे रहने मिलेगा
पिताजी को उनका वारिस मिल जाएगा
माजी का बेटा उनके पास आ जाएगा
शालिनी पिताजी को दिया हुआ वादा पूरा कर देगी
जयसिंघ शहर मे रहेगा वहाँ अपना घर बनाएगा
जयसिंघ पिताजी को दिया हुआ प्रॉमिस पूरा कर देगा
.जयसिंघ की कंपनी गाँव ने खुलेगी
जयसिंघ का सपना भी पूरा जो सकता है
नेहा नीता को उनकी भाभी मिल जाएगी
सब खुश हो जाएँगे