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मैं और मेरा परिवार

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फ्लश बॅक 987

पिताजी अवी के आने से काफ़ी खुश थे. घर मे हर दिन दीवाली जैसा महॉल रहने लगा.

जयसिंघ 1 महीना गाँव मे रह कर शहर3 चला गया था.

कुमार को .कंपनी की साइट दिखा दी

जयसिंघ अब सब कुछ फाइनल करने के लिए शहर3 जा रहा था

कुमार से ये पूछने की गाँव की कंपनी का कन्स्ट्रक्षन कब स्टार्ट करेगा

इधर समधन भी अपने बेटे के ससुराल की खातिरदारी का स्वाद लेकर अपने शहर2 चली गयी.

समधन कितने दिन यहाँ रहती. पर जितने दिन रही उतने दिन अपनी ज़िंदगी के हसीन पल जी लिए. समधन गाँव से अपने समधी के साथ बिताए पल को अपने साथ ले गयी.

नेहा नीता अवी के साथ सारा दिन बिताने लगी.

इस बीच पिताजी को नेहा नीता की शादी की फिकर होने लगी.

नेहा नीता की एज की सारी लड़कियो की शादी हो चुकी थी. माँ ने भी पिताजी को ये बात याद दिला दी कि नेहा नीता की शादी करनी है.

पिताजी उस काम मे लग गये.

इसी बीच स्वेता का बर्तडे भी आ गया. पूजा को खुश रखने के लिए स्वेता का बर्तडे अच्छे से मनाया जाने का सोचा गया.

पिछली बार जिस तरह सीतल का बर्तडे मनाया था वैसे स्वेता का मानने की बात सब को बता दिया.

चलो इस बहाने से 5 महीने बाद समधन वापस गाँव आएगी. फिर से समधी का प्यार पाने के लिए.

पिताजी तय्यारी मे लग गये.

मेहमान भी स्वेता के बर्तडे के लिए आ गये.

इस बार समधन के साथ रमेश के दोस्त सुरेश और जतिन भी आ गये.

पिछली बार काम की वजह से नही आ सके थे पर इस बार सुरेश और जतिन कुछ सोचकर आए थे.

सुरेश और जतिन के आने का सुनते ही रमेश को सुरेश की बात याद आ गयी.

रमेश ने पूजा से बात करने का फ़ैसला किया.

रमेश-सुनो

पूजा-हाँ

रमेश-माँ के साथ सुरेश और जतिन भी आ रहे है

पूजा-ये तो अच्छी बात

रमेश-हाँ, पर वो सिर्फ़ स्वेता के बर्तडे के लिए नही आ रहे

पूजा-कंपनी के काम से आ रहे है यही कहना चाहते है ना. मुझे पता है

रमेश-और भी एक खास काम के लिए आ रहे

पूजा-ऐसा कौनसा काम आ गया उनको

रमेश-वो सुरेश कह रहा था कि

पूजा-क्या कह रहा था

रमेश-उसे शादी करनी है. उसकी एज भी हो गयी है

पूजा-ये तो अच्छी बात है.

रमेश-उसे एक लड़की भी पसंद है.

पूजा-सुरेश ने पसंद की और अपनी भाभी को नही बताया .आने दो उनको ,अच्छी खबर लेती हूँ

रमेश-ये नही पुछोगी कि वो लड़की कौन है.

पूजा-कौन है वो जिसे सुरेश ने पसंद किया

रमेश-नेहा,

पूजा-क्या कहा

रमेश-हमारी नेहा,तुम्हारी बहन

पूजा-ऐसे कैसे

रमेश-मुझे क्या पता, उस ने कहा कि नेहा से शादी करना चाहता है.

पूजा-उसने कहा और,

रमेश-क्यूँ तुम्हें ये सुनकर अच्छा नही लगा.

पूजा सोचने लगी.

रमेश-सुरेश को मैं बचपन से जानता हूँ ,अच्छा दोस्त है मेरा,मेरे भाई जैसा है , तुम भी तो जानती हो, ना ड्रिंक करता है ना स्मोकिंग , उसका दिल साफ है

पूजा-हाँ, पर कभी इस बारे में सोचा नही था.

रमेश-तो अब सोच लो

पूजा-मेरे सोचने से क्या होता है

रमेश-तुम्हें पसंद है ना सुरेश,

पूजा-मैं क्या कहूँ

रमेश-तुम्हारी बहन केलिए सुरेश अच्छा रहेगा.नेहा हमारे साथ शहर2 मे रहेगी

पूजा-सुरेश है तो अच्छा , मैं देखती हूँ क्या कर सकती हूँ

रमेश-ये हुई ना बात, पिताजी से बात करके देखो

पूजा-पहले नेहा से बात करूँगी. कब आ रहे है

रमेश-आज दोपेहर तक आ जाएँगे.

पूजा-ठीक है. मैं कुछ करती हूँ पर नेहा ने ना किया तो मैं कुछ नही करूँगी

रमेश-हाँ हाँ ,नेहा की मर्ज़ी के बिना कुछ नही होगा.

पूजा-चलो अब बर्तडे की तय्यारी करनी है

रमेश-रूको तो,

पूजा-क्या है

रमेश-जतिन भी

पूजा-जतिन का क्या

रमेश-जतिन नीता

पूजा-वो बाद मे पहले नेहा का सोचने दो,

रमेश-ठीक है. मेरे लिए इतना कर देना

पूजा-आपके लिए नही अपनी बहन के लिए करूँगी

रमेश-दोनो एक ही बात है

पूजा-हो गया हो तो मैं जा सकती हूँ

रमेश ने पूजा को किस किया और दोनो अपने अपने काम मे लग गये.

पूजा बर्तडे से ज़्यादा नेहा के बारे में सोच रही थी.

पिताजी से पहले नेहा से पूछना होगा.

कल बर्तडे शाम मे रखा है. सुबह नेहा को मंदिर लेकर जाउन्गी वही उस से पूछ लूँगी

पूजा ने सोच लिया कि नेहा और सुरेश को कल मंदिर लेकर जाएगी.

रमेश सुरेश और अपनी माँ को लेने शहर चला गया.

सुरेश शहर मे रुकने वाला था पर रमेश ने एक बार पिताजी से मिलने के लिए गाँव लेकर आ गया.

समधन को देखते ही पिताजी के चेहरे पे एक मुकसान आ गयी.

समधन ने भी मुश्कुरा कर समधी की स्माइल का जवाब दिया .और अंदर चली गयी.

रमेश अपने दोस्तो को लेकर पिताजी के पास आ गये

रमेश-पिताजी ये मेरे दोस्त है, आप तो जानते ही है

पिताजी-हाँ ,इनको तो जानता हूँ शादी मे पूरे काम इन दोनो ने किए थे

सुरेश ने पिताजी के पैर छु कर आशीर्वाद लिया.

पिताजी-जीते रहो बेटा.

रमेश-पिताजी ये दोनो मेरे दोस्त कम भाई ज़्यादा है

पिताजी-पूजा ने बताया था .और शादी मे जिस तरह तुम्हारे साथ थे उस से पता चल गया था. वैसे ये तुम्हारे साथ काम करते है ना

रमेश-हाँ पिताजी, मेरे साथ ही काम करते है, हम तो बचपन से साथ है.

सुरेश-पिताजी ,हमारी भतीजी नही दिख रही है

पिताजी-वो अपने मौसी के साथ होगी.नेहा नेहा स्वेता को लेकर बाहर आना

नेहा स्वेता को लेकर आ गयी.और बाहर आते ही उसकी नज़र सुरेश पे गयी.

सुरेश भी नेहा की खूबसूरती को अपनी आँख मे क़ैद करने लगा.

सुरेश 2 साल बाद नेहा को देख रहा था. पिछली बार सीतल के पैदा होते समय देखा था.

पिछली नेहा और आज की नेहा मे ज़मीन आसमान का फरक था.

नेहा आज उस स्टेज पर थी कि किसी को भी अपनी खूबसूरती मे डूबा सके

कुछ देर दोनो एक दूसरे से नैन मटक्का करते रहे.

पिताजी को किसी ने आवाज़ दी और वो वहाँ से चले गये.

पिताजी के जाते ही नेहा क़समकस मे थी कि क्या करे .

वो सुरेश से बात तो करना चाहती थी पर करने की हिम्मत नही थी.

रमेश-नेहा इधर आओ, वहाँ क्यूँ खड़ी हो

अपने जीजाजी की बात सुनते ही नेहा स्वेता को लेकर आ गयी.

रमेश-नेहा , देखो मेरे दोस्त आए है इनका पूरा ध्यान रखना ,कोई शिकायत नही मिलनी चाहिए

नेहा-जी जीजाजी

रमेश-तुम देखो सुरेश को क्या चाहिए मैं अंदर जाके आता हूँ

अब तो नेहा बुरी तरह से फस चुकी थी. उसके पसीने छूट रहे थे

जतिन भी वहाँ से निकल गया .

सुरेश-कैसी हो नेहा.

नेहा-जी

सुरेश-हमे याद किया कि नही.

नेहा-हाँ नही हाँ नही नही

सुरेश हँसने लगा.

सुरेश-मुझसे डरने की ज़रूरत नही. हम पहले भी तो मिले है.

नेहा-हाँ, तुम कब आए

सुरेश-कुछ देर हुई. तुम कहो ,पढ़ाई कैसी चल रही है.

नेहा-पढ़ाई तो हो गयी

सुरेश-आगे नही पढ़ना

नेहा-नही,

सुरेश-क्यूँ?

नेहा-माँ ने कहा कि... तुम्हारे लिए नाश्ता लाती हूँ

सुरेश-रूको

नेहा रुक गयी

सुरेश-तुम ......,कुछ नही,

नेहा-मैं नाश्ता लेकर आती हूँ

नेहा नाश्ता लेने चली गयी और पूजा सुरेश के पास आ गयी.

पूजा-कैसे हो देवर जी

सुरेश-भाभी जी आप, मैं ठीक हूँ.

पूजा-कहो हमारे गाँव मे कैसे आना हुआ

सुरेश-गाँव मे क्यूँ आते है. उसी लिए आया हूँ

पूजा-तुम्हारे भैया जब आए थे तब यहाँ से शादी करके गये थे

सुरेश-मैं भी शादी करके जाना चाहता हूँ.

पूजा-किस से मेरी सहेली मंदा से

सुरेश-आपकी बहन से ,नेहा से

पूजा-भाभी से साली बनाने का इरादा लगता है

सुरेश-भाभी मेरी साली बन जाओ ना

पूजा-भाभी हूँ तो इतना हसी मज़ाक करते हो जब साली बनूँगी तो ,नही बाबा मुझे नही बन ना साली

सुरेश-भाभी, अपने देवर के लिए, मैं वादा करता हूँ मैं देवर बन के रहूँगा.बस नेहा से मेरी शादी करवा दो

पूजा-पक्का वादा ना

सुरेश-हाँ,

पूजा-और

सुरेश-आप का गुलाम बन जाउन्गा ,

पूजा-फिर तो कुछ करना होगा .

सुरेश-मेरी प्यारी भाभी

पूजा-कल सुबह मंदिर आ जाना

सुरेश-मंदिर क्यूँ

पूजा-नेहा को लेकर आउन्गि. तुम बात कर लेना

सुरेश-ये तो बढ़िया रहेगा.

पूजा-हाँ तब तक नेहा के हाथ का नाश्ता करो

सुरेश-नेहा बना रही है

पूजा-हाँ, मैं ने तो यही सुना है, मैं जाती हूँ वरना नेहा यहाँ नही आएगी

पूजा अंदर जाने लगी.

सुरेश-भाभी

पूजा-हाँ

सुरेश-थॅंक्स

पूजा-अभी नेहा ने हाँ नही कहा .उसके हाँ करने के बाद थॅंक्स कहना.

पूजा अंदर चली गयी और सुरेश नेहा का इंतज़ार करने लगा.
 
फ्लश बॅक 968

सुरेश नेहा का इंतज़ार करने लगा. और जतिन वही पर इधर उधर घूमने लगा.

जतिन पूरे घर को घूम कर देख रहा था. बाहर से घर काफ़ी अच्छा दिख रहा था.

जतिन उपर देख कर चल रहा था कि किसी से टक्कर हो गयी.

टक्कर लगने से जतिन के कपड़ो पे पानी गिर गया.

नीता-देख के नही चल सकते

जातीं-तुम देख के नही चल रही थी.

और जतिन ने अपना सर उपर किया.

नीता-तुम ,

जतिन-मुझे लगा ही था कि ये तुम्हारे सिवा कोई नही कर सकता

नीता-क्या कहा, तुम देख के नही चल रहे थे

जतिन-कुछ भी हो मेरे कपड़े खराब कर दिए.

नीता-सॉरी

जातीं-तुम्हारे सॉरी बोल ने से कपड़े सूख तो नही जाएँगे.

नीता-मुझे धो मैं सूखा कर देती हूँ

जतिन-रहने दो क्या पता फिर खराब कर दो

नीता-मैं क्या ऐसी लगती हूँ

जातीं-नही तो क्या, इतने भाग कर चलने की ज़रूरत क्या थी.

नीता-कहा ना सॉरी

और नीता अपना मूह छोटा करके जाने लगी कि जतिन उसके सामने खड़ा हो गया

नीता दूसरे तरफ से जाने लगी थी कि जतिन फिर उसके सामने हो गया.

नीता-मुझे जाने दो, फिर कहोगे कि ,मैं ने

जातीं-मैं मज़ाक कर रहा था, ग़लती मेरी थी. मैं उपर देख के चल रहा था.

नीता-ग़लती मेरी थी. मुझे आराम से चलना चाहिए था

जातीं-जाने दो,

नीता-तुम कब आए ,और कुछ बताया नही.

जातीं-तुम्हें सर्प्राइज़ देना चाहता था

नीता-बहुत बड़ा सर्प्राइज़ दिया

जातीं-ये देखो तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूँ.

नीता-ब्रेसलेट ,मेरे लिए ,किस खुशी मे

जातीं-बस ऐसे ही लाया था.

नीता-ओह, कहीं तुम ब्रेस्लेट दे कर. भूल जाओ मैं ऐसी वैसी लड़की नही हूँ

जतिन-मैं तो बस

जतिन नर्वस हो गया

नीता-क्या मैं तो

जतिन-वो मैं ने

जतिन के पसीने छूट रहे थे नीता के सामने

नीता-सब समझती हूँ.हटो यहाँ से

और नीता वहाँ से चली गयी पर ब्रेस्लेट अपने साथ ले गयी.

जाते हुए एक बार जतिन की तरफ देखा.जतिन को ऐसे पतली हालत मे देख कर नीता हँसते हुए चली गयी.

इधर नेहा ने सुरेश के लिए नाश्ता बना लिया .और नाश्ता लेकर बाहर आ गयी.

सुरेश वही पर बैठ कर नेहा का इंतज़ार कर रहा था.

नेहा सुरेश को प्लेट देने वाली थी कि रमेश ने उठा ली

नेहा-जीजाजी वो

रमेश-क्या हुआ ,मेरे लिए नाश्ता लाई थी ना

नेहा-नही

रमेश-क्या?

नेहा-नही नही, आपके लिए ही था

रमेश-सुरेश ,ये जतिन कहाँ गया.

सुरेश-यही कही होगा

रमेश-नेहा ,सुरेश के लिए नाश्ता लेकर नही आई.

नेहा-वो मैं, अभी लेकर आती हूँ

रमेश-रहने दो, सुरेश ये तुम लो मैं जतिन को ढूँढ कर आता हूँ

नेहा नाश्ता सुरेश के लिए लाई थी पर जीजाजी के प्लेट लेते ही थोड़ा गुस्सा हो गयी

पर वापस सुरेश के नाश्ता लेने से नेहा खुश थी

रमेश चला गया. और सुरेश नेहा के हाथो का नाश्ता खाने ला

सुरेश-नेहा अच्छा नाश्ता बनाती हो

नेहा-मैं ने नही बनाया

सुरेश-मुझे लगा तुम ही ने बनाया होगा. पर कुछ भी हो नाश्ता अच्छा बनाया है

नेहा-थॅंक्स, कब तक रुकने वालो हो

सुरेश-जब तक काम नही होता.तब तक रुकुंगा.

नेहा-काम की वजह से आए हो मुझे लगा

सुरेश-तुम्हें क्या लगा

नेहा-कुछ नही,किस काम से आए थे

सुरेश-शादी करने

नेहा शोक्ड हो गयी

नेहा-क्या?

सुरेश-शादी के लिए लड़की ढूँढने आया था.

नेहा की दिलचस्पी बादने लगी

नेहा-कोई पसंद आई

सुरेश-हाँ एक पसंद तो है. उसी से बात करने आया हूँ

नेहा सुरेश की बात सुनकर उदास हो गयी.और बिना कुछ कहे वहाँ से चली गयी

नेहा के जाते ही जतिन और रमेश वहाँ आ गये.

रमेश-क्या बात हुई.

सुरेश-कुछ नही, कल भाभी नेहा को मंदिर लेकर आने वाली है. वही बता दूँगा.

रमेश-कुछ हिंट तो दी होगी

सुरेश-हाँ, इतना कहा कि शादी करने आया हूँ

रमेश-अच्छा है. कल ज़्यादा मेहनत नही करनी होगी.

सुरेश-जतिन तू गीला कैसे हो गया

जतिन-मत पूछ, नीता ने किया

रमेश-क्या हुआ

जतिन-नीता से बात करने गया था और वो गुस्सा हो गयी और मुझे नहला दिया

रमेश-तू भी ना. कल तू भी नीता से बात कर लेना

जतिन-उसको ये पसंद नही है.

रमेश-कल फिर ट्राइ करना

जतिन-नही, पहले सुरेश का होने दो वरना मेरी वजह सब बिगड़ जाएगा

रमेश-ठीक कहा. सुरेश का होते ही तेरा सोच लेंगे

सुरेश-अच्छा अब चलता हूँ ,कल आ जाउन्गा.

रमेश-यही रुक जा

सुरेश-नही यार, शहर मे वही रहने वाले है. जहाँ पहले रुके थे.

फिर सुरेश और जतिन रमेश को अलविदा करके शहर चले गये. वो भी कंपनी के काम से 1 महीने के लिए आए थे.
 
फ्लॅशबॅक 989

नेक्स्ट दे स्वेता का बर्तडे था. बर्तडे शाम मे रखा गया था. जिस से सब सुबह से अपने काम मे लग गये

पूजा ने नेहा और नीता को काम जल्दी ख़तम करने को कहा.

नेहा नीता अपनी दीदी के कहने के मुताबिक पूरा काम ख़तम करके पूजा दीदी के पास चली गयी.

नीता-दीदी हमारा काम हो गया.

पूजा-तुम दोनो तय्यार हो जाओ ,हम मंदिर जाके आते है.

नीता-10 मिनिट मे तय्यार होके आते है.

नेहा और नीता मंदिर जाने के लिए तय्यार होने लगी.

पूजा-पिताजी मैं स्वेता को मंदिर लेकर जा रही हूँ

पिताजी-ये तो अच्छी बात है. चलो मैं भी आता हूँ

पूजा-मैं नेहा नीता को लेकर जा रही हूँ. आप मेहमानो को देखो, भैया आ रहे है.

पिताजी-ठीक है. पर जल्दी आना ,यहाँ बहुत काम करना है.

पूजा-जी पिताजी. जल्दी आ जाउन्गी.

पिताजी की इजाज़त लेने के बाद पूजा ने स्वेता सीतल को तय्यार किया.

नेहा नीता भी तय्यार हो गयी. नेहा ने स्वेता को और नीता ने सीतल को अपने गोद मे उठा लिया .और पूजा के साथ मंदिर जाने लगी.

नेहा-दीदी जीजाजी कहाँ है, वो क्यू मंदिर नही आए

पूजा-वो थोड़ी देर बाद आ जाएँगे.

नीता-दीदी छोटू को अपने साथ ले लेते तो कितना अच्छा होता

नेहा-हाँ ,और भाभी को भी.

पूजा-सब को ले जाते तो देर हो जाती. हम यू जाएँगे और यू आ जाएँगे

नेहा-पर दीदी पूजा का सामान तो नही लिया

पूजा-तुम्हारे जीजाजी लेकर आ जाएँगे.

नीता-अवी को लाते तो कितना अच्छा होता

पूजा-तुम दोनो बाते करना बंद करो .और जल्दी चलो देर हो रही है

पूजा ने नेहा नीता को मूह बंद किया और जल्दी जल्दी मंदिर जाने लगे.

मंदिर मे आकर पूजा रमेश का इंतज़ार करने लगी

नेहा-दीदी अंदर चलो, दर्शन करते है.

पूजा-मेरे भगवान को आने दो फिर अंदर जाएँगे

नीता-भगवान को आने दो ,मैं समझी नही

पूजा-तुम्हारे जीजाजी की बात कर रही हूँ

नीता-लो दीदी आपके भगवान आ गये

नेहा-जीजाजी के साथ और भी कोई आ रहा है

पूजा-उनके दोस्त, सुरेश और जतिन होंगे

सुरेश का नाम सुनते ही नेहा ने पूजा की तरफ देखा. और सोचने लगी कि ये हो क्या रहा है.

तब तक रमेश अपने दोस्तो के साथ आ गये

पूजा-क्या देवर्जी ,काफ़ी देर कर दी

सुरेश-मैं तो सुबह से तय्यार बैठा था पर ये जतिन यहाँ आने से मना कर रहा था.

सुरेश की बात सुनते ही नीता जतिन की तरफ आँख बड़ी करके देखने लगी

जतिन नीता के ऐसा करते ही और डर गया.और अपना सर नीचे कर लिया

नीता को जतिन का ऐसे डरना अच्छा लग रहा था

पूजा-चलो पहले दर्शन करते है.

फिर सब कपल बन कर पूजा करने लगे. नेहा के साथ सुरेश ने दर्शन किए. जतिन को नीता के साथ दर्शन करना पड़ा

स्वेता के उज्ज्वल फ्यूचर के लिए पूजा और रमेश ने भगवान से आशीर्वाद लिया.

नेहा सुरेश के साथ दर्शन करने से शरमा रही थी.

पूजा के ज़ोर डालने पे नेहा ने सुरेश के साथ दर्शन किए

पूजा-नेहा तुम दर्शन करो हम मंदिर का चक्कर लगाते है.

नीता-मेरे दर्शन करने बाकी है

पूजा-तू चल मेरे साथ तुझ से एक काम है

नीता-कैसा काम

पूजा-तूने कल जतिन के साथ क्या किया था. वो पूछना है.चल वरना पिताजी को बोलूँगी

नीता ने एक बार जतिन की तरफ गुस्से से देखा और पूजा दीदी के साथ जाने लगी.

जतिन सोचने लगा कि भाभी ने उसे और फसा दिया. नीता तो अब उसकी जान ले लेगी.

नेहा और सुरेश को अकेला छोड़ कर सब मंदिर के चक्कर लगाने लगे.

नेहा को कुछ समझ नही आ रहा था कि ये हो क्या रहा है.

पूजा दीदी कर क्या रही है .उसको सुरेश के साथ अकेला क्यूँ छोड़ दिया.

इधर सुरेश सोच रहा था कि शुरुआत कैसे करे

सुरेश ने कल की बात को आगे ले जाना स्टार्ट किया.

सुरेश-नेहा

सुरेश की आवाज़ सुनकर नेहा अपने ख़यालो से बाहर आ गयी.

सुरेश-नेहा,

नेहा-हाँ

सुरेश-तुम्हारा गाँव बहुत प्यारा है

नेहा-सब यही कहते है.

सुरेश-जितना प्यारा ये गाँव है यहाँ के लोग भी उतने प्यारे है

नेहा-ये तो मुझे पता है.

सुरेश-तुम्हें पता है मैं यहाँ क्यूँ आया हू

नेहा ने मूह टेडा करके जवाब दिया

नेहा-हाँ, बताया था तुम ने कल कि शादी करने आए हो.

सुरेश-और भी कुछ कहा था

नेहा-तुम ने उस लड़की को पसंद किया है.

सुरेश-तुम्हें तो सब याद है

नेहा-पूजा शुरू करे

सुरेश-पहले कल की बात तो पूरी कर लेते है

नेहा-अब क्या बाकी है. तुम्हें लड़की पसंद है. उसे भी तुम पसंद होगे. अब बचा क्या है

सुरेश-मुझे तो वो पसंद है पर उसे मैं पसंद हूँ कि नही ये पता नही है

नेहा-क्या मतलब

सुरेश-मैं ने अब तक उसे बताया नही कि मैं उस से प्यार करता हूँ.

नेहा-तुम्हें बता देना चाहिए

सुरेश-अगर उस ने मना किया तो

नेहा-तुम्हें कौन मना करेगी, कोई पागल ही होंगी जो तुम्हें ना करेगी ,

सुरेश-अगर किया तो

नेहा-नही करेगी. धीरे से मैं होती तो हाँ करती.

सुरेश-क्या कहा

नेहा-कुछ भी तो नही.

सुरेश-जाने दो, तुम्हें लगता है ना मुझे उसे बताना चाहिए

नेहा-हाँ बता दो,

सुरेश ने नेहा का हाथ पकड़ लिया .

नेहा-क्या कर रहे हो

सुरेश ने जेब से रिंग निकाल ली.

और नेहा की उंगली मे पहना दी.

नेहा सुरेश के ऐसा करने से एक मूरत की तरह उसे देखती रह गयी.

सुरेश ये क्या कर रहा है. उसे क्यूँ रिंग पहना रहा है.

कहीं सुरेश उसे तो पसंद नही करता.अगर ऐसा हुआ तो कितना अच्छा होगा.

सुरेश ने नेहा को रिंग पहना दी

नेहा-ये क्या किया. मुझे रिंग क्यूँ पहना दी.

सुरेश-किसी को रिंग उस उंगली मे क्यूँ पहनाते है

नेहा-तुम तो ये रिंग

सुरेश-ये रिंग जिसके लिए थी उसे ही मिली है.

नेहा और सुरेश बात कर रहे थे कि नीता की नज़र उन दोनो पे गयी.

सुरेश के हाथ मे नेहा का हाथ देख कर नीता नेहा की तरफ भाग कर आ गयी.

पूजा-नीता रुक जा

नीता नही रुकी और नेहा के पास आ गयी

नीता-ये क्या हो रहा है.

नीता के आते ही सुरेश ने नेहा का हाथ छोड़ दिया .और नेहा ने रिंग वाला हाथ अपने दुपट्टे से छुपा दिया.

नेहा-क्या क्या, कुछ भी तो नही

नीता-फिर सुरेश ने तेरा हाथ क्यूँ पकड़ लिया था.

सुरेश-वो तो

सुरेश बोलने वाला था कि पूजा और रमेश आ गये

पूजा-नीता तू यहाँ क्यूँ आई

नीता-दीदी ये सुरेश

पूजा-तू चुप रह ,क्या हुआ नेहा

नेहा पूजा दीदी को क्या जवाब देती.

नेहा ने नीता का हाथ पकड़ लिया और वहाँ से भागने लगी.

पूजा-नेहा रुक कहाँ भाग रही है

नेहा नीता के साथ घर की तरफ भागने लगी.

नीता-क्या हुआ नेहा, हम भाग क्यूँ रहे है

नेहा-कुछ नही,

नीता-दीदी बुला रही है

नेहा-तू भागते रह

नेहा और नीता पूजा के आँख से दूर चली गयी.

पूजा-क्या किया तुम ने

सुरेश-मैं ने तो वही किया जिसके लिए यहा आए थे

पूजा-तो नेहा यहाँ से ऐसे क्यूँ भाग गयी.

सुरेश-मुझे नही पता.

पूजा-मुझे शुरू से बताओ

सुरेश-मैं ने उसको रिंग पहना दी. और नेहा को बता दिया कि ये रिंग उसके लिए थी.

पूजा-नेहा ने क्या कहा

सुरेश-वो कुछ बोलने वाली थी कि नीता बीच मे आ गयी.और वो यहाँ से भाग गयी

पूजा-फिर ये ऐसे क्यूँ भाग गयी.

रमेश- कही तूने किस तो नही कर दिया

सुरेश-नही. जैसे तूने प्रपोज किए था वैसे मैं ने किया.

रमेश-लगता है पूरी फॅमिली एक जैसी है

पूजा-क्या कहा.खबरदार जो मेरी फॅमिली को कुछ कहा तो

रमेश-मैं तो बस, ऐसे ही

सुरेश-अब क्या होगा. उसने तो जवाब नही दिया

पूजा-मुझे सोचने दो

पूजा-समझ गयी.

रमेश-क्या समझी

पूजा-तुम ने मुझे कहाँ प्रपोज़ किया था

रमेश-यही पर

पूजा-फिर मैं बिना जवाब दिए यहाँ से भाग गयी थी.मुझे तुम पसंद थे फिर भी भाग गयी

रमेश-तो तुम भागी क्यूँ थी

पूजा-डर और शरम की वजह से, और ये बात नेहा को पता है

रमेश-तो इसका मतलब है कि

पूजा-नेहा को सुरेश पसंद है. उसको लग रहा है कि तुम्हारी तरह सुरेश उसके पीछे भगेगा, और घर जाकर हाँ कर देगी.हमारी तरह होने का सोच रही थी.

सुरेश-फिर मैं क्या करूँ

रमेश-यहाँ खड़े मत रहो ,भागो जल्दी,

पूजा-नेहा तो अब तक घर पहुँच गयी होगी.

सुरेश-मैं जल्दी जाता हूँ, वो मेरा इंतज़ार कर रही होगी.

जातीं-भाग सुरेश भाग

सुरेश घर की तरफ भाग कर जाने लगा.

रमेश-नेहा हाँ कर देगी ना

पूजा-लग तो ऐसा रहा है. पर उसके दिल की बात मैं कैसे जान सकती हूँ.

रमेश-तुम जैसा सोच रही हो काश वैसा ही हो

इधर नेहा और नीता भागते हुए घर के पास पहुँच गयी.

नीता-नेहा क्या हुआ. हम ऐसे भाग क्यूँ रहे है

नेहा-बाद में बताउन्गी.

दोनो भागते हुए घर के अंदर चली गयी.

हॉल मे पिताजी ,जयसिंघ और जयसिंघ के दोस्त अजीत और कुमार बैठ कर बात कर रहे थे.

जयसिंघ-पिताजी आप क्या कहते हो

पिताजी-एक बार नेहा से पूछ लेते

जयसिंघ-वो तो हाँ ही करेगी. उसकी पसंद को मैं जानता हूँ

पिताजी-ठीक है. नेहा की शादी कुमार के साथ होगी

अपनी बेटी की शादी की बात सुनकर माँ खुश हो गयी.

पिताजी की बात सुनते ही नेहा वही गेट पर रुक गयी.

नेहा को अपने कानो पे विश्वास नही हो रहा था.

ऐसे कैसे, पिताजी और भैया ने उसकी शादी तय कर दी.

नेहा और नीता को गेट के पास खड़ा देख कर माजी नेहा के पास आ गयी.

माजी-नेहा, तेरी शादी पक्की हो गयी. देख तेरे भैया ने तेरे लिए दूल्हा ढूँढा है.

नेहा को कुछ समझ नही आ रहा था कि वो क्या कहे.

नीता ने नेहा को चुटकी लेकर होश मे लाया.

नेहा ने होश मे आते ही एक बार सब की की तरफ देखा .और बिना कुछ कहे अपने कमरे मे चली गयी.
 
फ्लश बॅक 990

पूजा नेहा नीता को लेकर मंदिर चली गयी.

बेटियो के मंदिर जाते ही पिताजी ने समधन को अपने कमरे मे बुलाया

पिताजी-क्या समधनजी, आप ने तो कल इस ग़रीब की तरफ देखा भी नही.मुझे से नाराज़ हो

समधन-आप से क्यूँ नाराज़ रहूंगी. आपको तो हर दिन याद करती थी

माजी-सुनिए, जयसिंघ आया है. आपको बुला रहा है

पिताजी-क्या हुआ, अच्छा समधन से बात कर रहा था कि.

माजी-समधन के साथ रात मे बात करना ,जयसिंघ आपको बुला रहा है. कुछ काम है उसे

पिताजी जयसिंघ के पास हॉल मे आ गये. जयसिंघ अपने दोस्तो के साथ बैठा हुआ था

पिताजी-जयसिंघ तुम कब आए

जयसिंघ-अभी आया पिताजी,

पिताजी-तुम्हारे दोस्त भी आ गये.अच्छा किया जो दोस्तो को लेकर आ गये.

जयसिंघ-पिताजी ये कुमार है .आपको तो पता है.

पिताजी-हाँ, पिछली बार मिलाया था तुम ने

जयसिंघ-पिताजी ये हमारे कंपनी मे 58% का पार्टनर है. कंपनी मे सारे पैसे इसने लगाए थे.

पिताजी-अच्छा ,

जयसिंघ-कंपनी इसकी वजह से सुरू कर पाए

कुमार-पैसे से क्या होता है. कंपनी तुम्हारे दिमाग़ की वजह से सुरू हुई है

जयसिंघ-दोनो एक ही बात है. वैसे पिताजी कुमार ने अभी तक शादी नही की है. शादी के लिए लड़की ढूँढ रहा है.

पिताजी-कुमार को तो कोई भी लड़की मिल जाएगी. ढूँढने की क्या ज़रूरत है. अमीर लोगो को लड़की ना नही करती.

जयसिंघ-मैं भी यही सोच कर कुमार को यहाँ लाया हूँ

पिताजी-क्या मतलब

जयसिंघ-कुमार को नेहा पसंद है. कुमार नेहा से शादी करना चाहता है.

पिताजी जयसिंघ की बात सुनकर उसकी तरफ देखते रह गये

जयसिंघ-हमारी नेहा कितनी किस्मत वाली है जो बड़े घर मे शादी होगी. नेहा की तो किस्मत खुल गयी.

माजी-ये लीजिए नाश्ता

पिताजी-आप लोग नाश्ता करो ,मैं अपनी पत्नी से बात करके आता हूँ

पिताजी ने जयसिंघ को इशारा किया और अपने कमरे मे बुला लिया. जयसिंघ पिताजी के जाने के बाद अपने दोस्तो से बहाना करके पिताजी के पास आ गया

पिताजी-जयसिंघ ये सब क्या है.

जयसिंघ-नेहा के लिए रिस्ता लाया हूँ

पिताजी-पहले मुझसे पूछ तो लेते

जयसिंघ-आपसे पूछ ही तो रहा हूँ. शादी तो आपको फिक्स करनी है. मैं तो सिर्फ़ लड़का लेकर आया हूँ

माजी कमरे मे आकर दोनो की बात सुन ने लगी.

पिताजी-शादी की बात क्या ऐसे करते है. तुम शहर3 जाकर सब भूल गये हो,

जयसिंघ-पिताजी वो मेरे दोस्त है. कुमार ने नेहा को पहले देख लिया है. उसे नेहा पसंद है.

जयसिंघ को इसमे कोई बुराई नही दिख रही थी

कुमार की नेहा से शादी हो गयी तो नेहा राज करेगी और कुमार गाँव मे कंपनी भी खोल देगा

पिताजी-उसके पसंद करने या ना करने से मुझे कुछ नही करना. शादी की बात करने से पहले कुछ बाते जान नी ज़रूरी होती है,

जयसिंघ-मैं उनके बारे में सब जानता हूँ.,कुमार अच्छा लड़का है, पैसे वाला है, नेहा को पसंद करता है. नेहा उसके साथ खुश रहेगी, राज करेगी नेहा.

पिताजी-तो तुम सब तय करके आए हो.

जयसिंघ-आप ग़लत समझ रहे है. मैं उसके साथ रहता हूँ तो कुछ बाते तो पता होगी ना, आप कुमार से बात कर लो अगर आपको नही पसंद तो माना कर देंगे.

पिताजी-पहली बात सुन लो ,नेहा को मैं शहर3 नही भेजने वाला .तो बात यही ख़तम होती है.

जयसिंघ-ये क्या बात हुई. पूजा भी तो शहर2 मे है, कितनी खुश है, फिर शहर3 मे क्या बुराई है

पिताजी-उसकी बात अलग है.

माजी- बेटा उस शहर3 ने तेरे पिताजी के मामा को उनसे छीन लिया था ,

जयसिंघ- माँ सब बदल गया है

जयसिंघ-बात अलग नही है, आप सबको अपने जैसा बनाना चाहते है. शहर3 मे कोई खराबी नही है, नेहा भी तो पूजा की तरह शहर2 मे रहने का सोच रही होगी.उसे कैसा लगेगा की पूजा की शादी शहर2 मे और उसकी गाँव मे कर दी तो.

पिताजी-नेहा ऐसी नही है.

जयसिंघ-पिताजी सब बदल रहा है. बदलाव के साथ हमे बदलना चाहिए. एक बार कुमार से बात तो कर लीजिए

माजी-बेटा कह रहा है तो एक बार बात तो कर लीजिए

पिताजी-तुम भी इसके तरफ से बोल रही हो

माजी-जयसिंघ ने कुछ सोचा होगा तभी तो अपनी बहन के लिए रिश्ता लाया है , पिछली बार पूजा के समय जय ने भी तो आपका साथ दिया था ,

पिताजी-तुम समझ नही रही हो,

माजी-आप बात तो कीजिए. गाँव मे बाते हो रही कि इतनी बड़ी हो गयी और नेहा नीता की अब तक शादी नही की.

पिताजी-लोगो के कहने से क्या मैं नेहा की शादी कर दूं

जयसिंघ-पिताजी उनकी शहर3 मे काफ़ी इज़्ज़त है. आपको क्या लगता है नेहा के लिए कैसा भी लड़का लाउन्गा. कुमार मे कुछ तो होगा तभी नेहा के लिए मैं ने उसके बारे में सोचा है

माजी-जयसिंघ इतना कह रहा है तो एक बार

पिताजी-ठीक है. चलो बात करते है

पिताजी ने बात करने के लिए हाँ करते ही जयसिंघ अपने पिताजी से कई सालो बाद गले लग गया. ये देख कर माँ खुश हो गयी इस बहाने पिता बेटे की दूरिया तो कम हो गयी.

पिताजी हॉल मे आ गये . कुमार और अजीत से उनके बारे में पूछने लगे

पिताजी ने सवालो की जो शुरुआत की रुकने का नाम नही ले रहे थे.

नेहा की लाइफ का सवाल था

पिताजी कभी कुमार के बारे में तो कभी उसके फॅमिली के बारे में पूछने लगे.

जयसिंघ अपने पिताजी को इतने बारीकी से सवाल पूछता हुआ देख कर खुश हो गया.

माजी ने शालिनी को बता दिया कि नेहा की शादी की बात हो रही है.

शालिनी को ये बात पता चलते ही उसने जयसिंघ को इशारा करके वहाँ से अपने कमरे मे बुला लिया

शालिनी-ये सब क्या है

जयसिंघ-नेहा के लिए कुमार का रिश्ता लाया हूँ

शालिनी-मुझे बिना पूछे

जयसिंघ-तुम्हें बताने वाला था

शालिनी-कब शादी के बाद,

जयसिंघ-गुस्सा मत करो, तुम्हें बाद मे बता दूँगा.

शालिनी-मुझे अभी बताओ

जयसिंघ-सब तो तुम्हारे सामने हो रहा है.मुझे वहाँ जाना होगा. तुम्हारे रात मे गिले शिकवे गायब कर दूँगा

और जयसिंघ वापस हॉल मे आ गया.

जयसिंघ-पिताजी कैसा लगा कुमार

पिताजी-कुमार है तो अच्छा

जयसिंघ-कुमार हमारी नेहा के लिए अच्छा रहेगा

पिताजी-वो तो ठीक है. पर मैं अभी कुछ नही कह सकता, मुझे नेहा से पूछना होगा.

जयसिंघ-नेहा से क्या पूछना, उसकी पसंद मुझे पता है

पिताजी-फिर भी नेहा की हाँ के बिना शादी नही होंगी

जयसिंघ-ठीक है उस से पूछ लेंगे, पर आपको कुमार पसंद है ना

पिताजी-कुमार मे कोई खराबी तो नही है.

जयसिंघ-इसका मतलब आपको पसंद है

पिताजी-तुम ने भी तो कुछ सोचा होगा, तभी नेहा लिए ये रिश्ता सही समझा,

जयसिंघ-माँ आप क्या कहती हो

माजी-जो इनका फ़ैसला है वही मेरा होगा

जयसिंघ-पिताजी को रिश्ता पसंद है

माजी-मैं भी इस रिश्ते से खुश हूँ

जयसिंघ-पिताजी माँ ने भी हाँ कर दी,पिताजी आप भी हाँ बोल ही दो

पिताजी-एक बार नेहा से पूछ लेते

जयसिंघ-वो तो हाँ ही करेगी. उसकी पसंद को मैं जानता हूँ

पिताजी-ठीक है. नेहा की शादी कुमार के साथ होगी

अपनी बेटी की शादी की बात सुनकर माँ खुश हो गयी.

पिताजी की बात सुनते ही नेहा वही गेट पर रुक गयी.

नेहा को अपने कानो पे विश्वास नही हो रहा था.

ऐसे कैसे, पिताजी और भैया ने उसकी शादी तय कर दी.

नेहा और नीता को गेट के पास खड़ा देख कर माजी नेहा के पास आ गयी

माजी-नेहा, तेरी शादी पक्की हो गयी .देख तेरे भैया ने तेरे लिए दूल्हा ढूँढा है.

नेहा को कुछ समझ नही आ रहा था कि वो क्या कहे.

नीता ने नेहा को चुटकी लेकर होश मे लाया.

नेहा ने होश मे आते ही एक बार सब की की तरफ देखा .और बिना कुछ कहे अपने कमरे मे चली गयी.

समधन-नेहा तो शरमा गयी

जयसिंघ-लीजिए पिताजी, नेहा ने भी हाँ कर दी.

पिताजी-ठीक है, एक अच्छी सी डेट देख कर इनकी शादी कर देंगे

जयसिंघ-पिताजी आज से अच्छा दिन कहाँ होगा. स्वेता का बर्तडे है. उनकी सगाई कर देते है

पिताजी-इतनी जल्दी

जयसिंघ-सब तो तय्यार है .लोगो को बुलाया भी तो है. लोगो को एक सर्प्राइज़ देंगे

पिताजी-जैसा तुम ठीक समझो

और पिताजी ने माँ की तरफ देखा. माँ की आँख मे खुशी के आसू देख लिए. अपनी पत्नी के आँख मे आसू देख कर पिताजी समझ गये की ये किस खुशी के है.

माँ तो यही चाहती थी कि पिताजी और जयसिंघ की दूरिया ख़तम हो. नेहा के शादी से ये कम तो होगी.

पिताजी ने माजी की तरफ देख कर शादी के लिए हाँ कर डाली.

माँ भी जानती थी कि पिताजी ने हाँ क्यूँ किया.

जयसिंघ अपने पिताजी की बात सुनकर खुश हो गया और अपने दोस्तो को मुबारक बाद देने लगा.

नीता नेहा की शादी की बात सुनकर खुशी के मारे सबको बताने लगी.

नेहा इस बीच अपने कमरे मे बैठ कर सोच रही थी कि कैसे पिताजी को मना कर सके

उसे तो पता भी नही लगा कि उसके कमरे मे चले जाने को उसकी हाँ समझ बैठे है.
 
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नेहा अपने कमरे मे बैठ कर सोच रही थी कि पिताजी को मना कैसे करे

नेहा अपने ख़यालो मे खोई हुई थी कि माँ उसके कमरे मे आ गयी

माजी-नेहा.

नेहा-माँ आप,

माजी-आज मैं तेरी वजह से बहुत खुश हूँ,

नेहा-मेरी वजह से

माजी-तूने शादी के लिए हाँ करके मुझे जो खुशी दी है वो किसी बेटी ने नही दी.

नेहा-शादी के लिए हाँ

नेहा के लिए ये एक शॉक था

माजी-तेरे हाँ करने से तेरे पिताजी और भैया को पहली बार एक साथ देखा है. तुम्हारे भैया ने ये रिस्ता लाया है. मैं तो डर रही थी कि अगर तेरे पिताजी ने ना कर दिया तो तेरे भैया कभी इस घर मे नही आएँगे.पर तेरे पिताजी ने तुझ पर फ़ैसला सोफा था, तेरे हा करते दोनो खुश हो गये .तूने ने घर को तूताने से बचा लिया.

नेहा अपनी माँ की बात सुनकर सुनती रह गयी. उसने कब हाँ कहा, उसको तो मना करना था. ये क्या हो रहा है

माजी-तेरे हाँ और ना करने पे ये घर ठीक होना था. अगर तू ना करती तो तेरे भैया शालिनी के साथ यहाँ से चले जाता. पूरा घर टूट जाता.पर मेरी बेटी कभी घर को टूट ने देगी, मुझे तुम पर पूरा विश्वास था.

नेहा-माँ वो मैं

माजी-कुछ मत बोल, मुझे पता है तू यही कहना चाहती है ना इतनी जल्दी सगाई करने की क्या ज़रूरत है.तेरे भैया ने कहा है. आज तो गजब हो गया कि तेरे पिताजी ने तेरे भैया की बात सुनी. उसे गले लगाया. सब तेरी वजह से हुआ है. मेरी नेहा ने किया है.

माँ नेहा से बात कर रही थी कि पिताजी अंदर आ गये

पिताजी-क्या बाते हो रही है

माजी-सगाई के बारे में बता रही थी.

पिताजी-नेहा तुम खुश हो ना

नेहा-आप को क्या लगता है

पिताजी-मैं तेरे मूह से सुनना चाहता हूँ. अगर तुझे शादी नही करनी तो मैं मना कर दूँगा.

माजी-ये क्या बोल रहे हो. जयसिंघ का तो सोचिए

पिताजी-क्या जयसिंघ, मुझे नेहा की खुशी देखनी है, मुझे उसके मूह से हाँ सुन ना है कि वो उस शादी को तय्यार है

माजी-जयसिंघ को आपने हाँ कहा है. अगर अब ना कहा तो वो

पिताजी-उसे जाना होगा तो वो चला जाए ,नेहा तू बता तू क्या सोचती है. मेरे लिए नेहा की खुशी से बढ़कर कुछ नही है

नेहा ने अपनी माँ की तरफ देखा जो उसकी तरफ उम्मीद से देख रही थी.

नेहा-आपने और भैया ने मेरे लिए अच्छा ही सोचा होगा. मैं शादी के लिए तय्यार हूँ

नेहा के हाँ करते ही पिताजी ने उसे गले लगा लिया. नेहा ने अपने पिताजी की आँख मे अवी के दूर जाने के नाम से दर्द देख लिया.जिस से नेहा ने हा कर दी.

नेहा अपने पिताजी को दर्द कैसे दे सकती है

माँ को जयसिंघ चाहिए था

पिताजी को अवी चाहिए था

पर नेहा को क्या चाहिए किसी ने पूछा ही नही

उसके एक हाँ करने पे पूरी फॅमिली का फ्यूचर डिपंड था. उसने हाँ करके अपने माता पिता को जो खुशी दी है वो सुरेश से कही ज़्यादा अनमोल थी

माँ और पिताजी ने नेहा को गले लगा लिया.

जयसिंघ और शालिनी भी नेहा से गले लग गयी.

उधर पूजा अपने पति के साथ घर पर पहुँच गयी. पूजा ने सुरेश को घर के बाहर बैठा हुआ देख कर उसके पास चली गयी.

पूजा-देवर्जी क्या हुआ.

सुरेश ने अपना सर उपर उठा लिया. उसकी आँख मे आसू थे

पूजा और रमेश समझ गये कि बात सीरीयस हो गयी है

रमेश-क्या हुआ,

सुरेश-नेहा शादी कर रही है

पूजा-ये तो खुशी की बात है

सुरेश-मेरे साथ नही. जयसिंघ के दोस्त कुमार के साथ कर रही है.

रमेश-ये कैसे हो सकता है

सुरेश-नेहा ने शादी के लिए हाँ की है

पूजा-ऐसा नही हो सकता

सुरेश-ऐसा ही हुआ है.

पूजा-मैं बात करती हूँ

सुरेश-कुछ फ़ायदा नही होगा. उसकी आज सगाई है

पूजा-तुम पागल हो गये हो. उसकी सगाई की बात मुझे तो पता होती

रमेश-पूजा तुम अंदर जाके देखो मैं सुरेश के पास रुकता हूँ

पूजा-देखना होगा कि बात क्या है.

पूजा अंदर चली गयी. जैसा सुरेश ने कहा वैसा ही माहौल पूजा को घर मे दिख रहा था.

पूजा के आते ही शालिनी पूजा के पास आ गयी.

पूजा-भाभी यहाँ क्या हो रहा है.

शालिनी-तुम कहाँ रह गयी थी ,चल बहुत काम है

पूजा-भाभी, यहाँ हो क्या रहा है.

शालिनी-नेहा की शादी पक्की हो गयी है.

पूजा-किस से

शालिनी-तुम्हारे भैया के दोस्त से

पूजा-ऐसे कैसे हो गयी. बिना मेरे रहते

माजी-क्या हुआ पूजा

पूजा-माँ ये मैं क्या सुन रही हूँ.

माजी-नेहा की शादी पक्की हो गयी है

पूजा-ऐसे कैसे, अचानक .और नेहा कहा है

माजी-तेरे मंदिर जाते ही तेरे भैया आ गये .और अचानक शादी की बात हो गयी. लड़का अच्छा था तो हम ने भी हाँ कर दी

पूजा-और नेहा

शालिनी-उसने भी हाँ कर दी

पूजा-क्या? नेहा ने हाँ कर दी

माजी-तू इतनी शॉक्ड क्यूँ हो

पूजा-मुझे नेहा से मिलना है. कहाँ है वो

शालिनी-अपने कमरे मे

पूजा नेहा के कमरे मे चली गयी.

नेहा अपने बेड पर लेट कर छत की तरफ देख रही थी.

पूजा-नेहा.

नेहा-दीदी आप ,

पूजा-नेहा मैं सिर्फ़ एक सवाल पूछूंगी ,

नेहा-कैसा सवाल

पूजा-तू सुरेश को पसंद करती है.

नेहा-ये कैसा सवाल है , मेरी आज सगाई है

पूजा-है कि नही

नेहा- आपने देर कर दी.

पूजा-कुछ देर नही हुई. मैं पिताजी से बात करती हूँ.

नेहा-दीदी नही, जैसा चल रहा है वैसा चलने दो

पूजा-क्या मतलब

नेहा-मेरी सगाई से सबको खुशी मिलेगी

पूजा-तेरा क्या ,तू खुश है.

नेहा-आज नही तो कल खुश हो जाउन्गी.

पूजा-तू ठीक नही कर रही.

नेहा-दीदी ,इस बात को यही ख़तम कर दो ,

पूजा-कैसे ख़तम कर दूं, तू मेरी बहन है.

नेहा-दीदी मैं किस्मत वाली हूँ जो आप मेरी दीदी है. आप मेरा अच्छा ही सोचेगी. पर मुझे भी तो फॅमिली के बारे में सोचना होगा.

पूजा-देख शालिनी भाभी को पता चलेगा तो यही कहेगी जो मैं कह रही हूँ

नेहा-उनको इस बारे में पता चला तो मैं खुद को कुछ कर लूँगी.

पूजा-ठीक है. कोंग्रट्ज़ तुम्हारी शादी होने वाली है.

और पूजा ने हाथ आगे बढ़ा दिया .और नेहा ने शाक़हन्ड कर लिया.

फिर पूजा ने नेहा को गले लगा लिया.

पूजा-सुरेश की रिंग तो निकाल दो ,

नेहा ने कुछ नही कहा

पूजा-नेहा मेरी बात मान , मैं सब ठीक कर दूँगी.मुझे एक मोका दे ,मैं बात करती हूँ पिताजी से

नेहा कुछ कहने वाली थी कि माँ अंदर आ गयी.

माजी-पूजा तू भी ना, यहाँ इतने काम है और तू यहाँ बाते कर रही है.

पूजा-माँ मेरा बात करना ज़रूरी है.

माजी-अभी तो सिर्फ़ सगाई हुई है .शादी के लिए टाइम है. शादी तक जी भर के बाते कर लेना. चल तेरी भाभी अकेले काम कर रही है

माँ पूजा को ज़बरदस्ती अपने साथ ले गयी.घर मे काम जो इतने ज़्यादा थे.

छोटू ने गाँव मे सब को बता दिया कि नेहा की सगाई होने वाली है.

न्यूज़ पता चलते ही गाँव की औरते मदद करने के लिए आ गयी.

नेहा अपने कमरे मे बैठ कर अपने फ्यूचर के बारे में सोचने लगी.

और बाकी सब नेहा की सगाई की तय्यारी करने लगे.
 
फ्लॅशबॅक 992

नेहा ने हाँ कर दिया पर उसको पता था कि उस ने क्या किया है.

नेहा अपने कमरे मे अकेले बैठी सोचती रही कि उसने सही किया या ग़लत फ़ैसला किया.

पूजा चाहती तो सब ठीक कर देती फिर भी नेहा ने अपने फ़ैसले पे रहना ठीक समझा.

पूजा के कमरे से निकलते ही नीता नेहा के कमरे मे घुस गयी.

नीता-नेहा ,

नेहा-हाँ

नीता-तू तो धोकेबाज निकली

नेहा-(नीता को सुरेश के बारे में पता है ,नही उसे नही पता) मैं ने क्या किया

नीता-हम ने का फ़ैसला किया था. कि एक साथ शादी करेंगे और तू अकेली शादी कर रही है

नेहा-तू इसकी बात कर रही है.

नीता-तूने क्या समझा

नेहा-मैं भी , भैया ने मेरे लिए लड़का लाए तेरे लिए नही लाए तो मैं क्या कर सकती हू.

नीता-भैया से मैं बहुत नाराज़ हूँ ,लाते तो दोनो के लिए लाते ,तेरी शादी होगी और मेरी नही

नेहा-तू खुश नही मेरे लिए

नीता-तेरे लिए तो जान दे दूं ,मैं तो इस लिए कह रही थी कि हम ने बचपन से सब काम साथ मे किए ,सुख दुख मे एक दूसरे का सहारा बने ,ऐसे मे अगर शादी एक साथ होती तो कितना अछा होता, एक ही जगा

नेहा-हाँ तू सही कह रही है ,अगर तू कहे तो मैं मना कर देती हूँ.

नीता-तू तो सेनटी हो गयी. चल मैं तुझे तय्यार कर देती हूँ ,मेरी बड़ी बहन की सगाई है सब देखते रह जाएँगे ऐसे तय्यार करूँगी.5 मिनिट बड़ी हुई तो भी तुम मुझसे बड़ी है. नेहा दीदी.

नीता ने पहली बार नेहा को दीदी कहा था ,जिसे सुनकर नीता उस से कितना प्यार करती है उस की आँखो से दिख रहा था.

नेहा की शादी की बात से नीता के आँखो मे उस से बिछड़ने का दुख दिख रहा था.नीता के आँख मे आसू थे

नेहा ने नीता को गले लगा लिया और दोनो एक दूसरे के गले लग कर रोने लगी.

जुड़वा बहनें जो थी. एक दूसरे के इतने करीब थी कि ऐसा लगता 2 जिस्म एक जान हो

दोनो ऐसे एक दूसरे के गले लग कर रोती रही. जब तक शालिनी अंदर ना आई.

शालिनी-क्या हो रहा है. ऐसे रो क्यूँ रही है

नीता-भाभी, नेहा मुझे छोड़ कर जा रही है. उसकी शादी होने जा रही है

शालिनी-शादी के लिए अभी टाइम है.

नीता-शादी तो एक महीने मे हो जाएगी ना

शालिनी-तो क्या हुआ, एक दिन सबकी शादी होती है सब को जाना होता है, मैं भी तो अपने घर को छोड़ कर आई हूँ. तेरी भी तो शादी होगी.

नीता-पर मैं नेहा के बिना कैसे रहूंगी.

शालिनी-मैं हूँ ना

नीता-मैं झगड़ा किस से करूँगी.

शालिनी-नीता एक काम करते है. तेरी शादी भी कुमार से करते है. एक दूल्हा 2 दुल्हन ,तुम दोनो तो एक जैसी दिखती हो. क्या कहती हो, तुम्हारे भैया से बात करू

नीता-भाभी ऐसा थोड़े ही होता है

शालिनी-तो मेरी प्यारी ननंद ,रोना बंद कर, देखो तेरी वजह से नेहा भी रो रही है.उसको खुशी देने की जगह रुला रही हो तुम, तू रोएगी तो नेहा भी रोएगी ना , तू क्या नेहा को रुला कर उसकी शादी करवाना चाहती है.

नीता-मैं क्यू ऐसा करूँगी. वो तो नेहा के जाने से अपने आप आँख मे पानी आ गया

शालिनी-चल अब रोना बंद कर और नेहा को तय्यार करने मे मेरी मदद कर ,नेहा को कुमार की कुमारी बनाना है.

नीता-क्या खूब कहा भाभी आपने ,कुमार की कुमारी,नेहा कुमारी नेहा कुमारी

नेहा-भाभी आप भी ना, देखो नीता कैसे चिड़ा रही है

शालिनी-नीता ,आज नेहा का दिन है

नीता-सॉरी सॉरी, आज नेहा को खुश रखना है.

नेहा-तेरा चिडाना मुझे अच्छा लगता है.

और नेहा ने नीता को गले लगा कर उसके सर पे किस किया.

शालिनी-तुम दोनो भी ना , ऐसे ही रहा करो ,ऐसे अच्छी लगती हो

और शालिनी ने अपने ननंद के सर कर हाथ घुमा कर आशीर्वाद दिया.

शालिनी-चलो अब, मैं मेरे मेक अप का समान लाती हूँ ,तब तक नेहा तुम फ्रेश हो जाओ

नीता-मैं नेहा को फ्रेश कर दूँगी.

शालिनी अपने कमरे मे जाकर मेकप का समान लाने चली गयी.

इधर पूजा ने रमेश को सारी बात बता दी.

रमेश को इस बात पे गुस्सा आ गया .क्या कमी थी सुरेश मे ,नेहा को ऐसा नही करना चाहिए था.

रमेश ने सुरेश को नेहा की बात बता कर और दुखी नही किया .उसे इसी बात का पता रहने दिया कि नेहा ने कभी उसे प्यार नही किया.

सुरेश को जतिन वहाँ से ले जाना चाहता था पर सुरेश एक बार नेहा को देख कर जाना चाहता था.

रमेश मंदिर से आने के बाद पहली बार पिताजी के सामने गया.

पिताजी-दामाद जी आप कहाँ थे

रमेश-यही इधर उधर था , क्या बात है

पिताजी-पूजा ने आपको बताया नही. मैं ही बता देता हूँ ,नेहा की शादी पक्की हुई है. जयसिंघ के दोस्त कुमार के साथ. आजसगाई है

रमेश ने ऐसे जवाब दिया कि जैसे कुछ खास बात ना हो

रमेश-ये तो अच्छी बात है.

पिताजी-हाँ, दामाद जी सब आपको देखना होगा. आप बड़े दामाद हो ,

रमेश-आप बेफिकर रहिए ,मैं मेहमानो को संभाल लूँगा.

पिताजी-पूजा ने तुम से शादी करके मुझे दामाद नही एक बेटा दिया है,

रमेश-अपनी साली के लिए इतना तो करना ही होगा.

पिताजी-दामाद जी सब इतना जल्दी हुआ कि आप से पूछे बिना हाँ कर दी, आप दिल मे मत लेना ,आपके बिना ये शादी नही होगी.

रमेश-मैं खुश हूँ नेहा के लिए, चलिए सगाई के लिए तय्यारी करते है. कम समय मे ज़्यादा काम करना है.

पिताजी-मुझे तुमसे यही उम्मीद थी.चलो

दामाद को खुश देख कर पिताजी रिलॅक्स हो गये. वरना पिताजी इस बात मे खोए हुए थे कि दामाद के होते हुए उनसे पूछे बिना इतना बड़ा फ़ैसला किया. अगर रमेश की जगा कोई और होता तो इसे अपना अपमान समझता

रमेश ये नही चाहता था कि उसकी वजह से या उसके दोस्त की वजह से कोई परेशानी हो. नेहा ही नही चाहती तो कोई क्या कर सकता है.

ससुर दामाद दोनो सगाई की तय्यारी मे लग गये

शालिनी अपने कमरे मे मेकप का बॉक्स लाने गयी थी. और नीता नेहा को फ्रेश होने मे मदद कर रही थी.

नेहा-मैं कर लूँगी.

नीता-तू कुछ मत बोल, मुझे करने दे

और नीता नेहा को नहलाने लगी.

नेहा को नहलाते हुए नीता की नज़र नेहा के उंगली मे पहनी हुई रिंग पर गयी.

नीता ने आज से पहले नेहा के उंगली मे वो रिंग नही देखी थी.

नीता-नेहा तूने ये रिंग कब ली

नीता ने रिंग की बात करके नेहा को फिर से सुरेश की याद आ गयी.

नेहा ने अपने रिंग की तरफ देखा और सुरेश केसाथ मंदिर मे बिताए हुए कुछ पल को याद करके रिंग को अपनी उंगली मे घुमाने लगी

नीता-क्या हुआ नेहा,

नेहा-कुछ नही,

नीता-फिर मेरे सवाल का जवाब नही दिया. ये रिंग तूने कब ली

नेहा-वो ,वो, मंदिर के पास पड़ी हुई मिली तो पहन ली

नीता-अब निकाल दे. वो ग़लत उंगली मे है

नेहा-ह्म

नीता-निकालना, वहाँ तो आज कोई और रिंग पहनाने वाला है.

नेहा को वो रिंग निकालते हुए ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी जान उसके शरीर से निकल रही हो

रिंग निकालते हुए नेहा के आँख मे पानी आ रहा था .पर नीता के नहलाने से उसके आसू छुप गये.

नेहा ने अपने दिल पर पत्थर रख कर रिंग निकाल दी. और सोचा कि सुरेश को वापस दे दे ,पर वो सुरेश से क्या कहेगी. कैसे वो सुरेश का सामना करेगी.

नेहा ने कुछ सोच कर रिंग को दूसरे हाथ की उसी उंगली मे पहन ली.

नीता-चल अब ,तुझे अप्सरा बनाती हूँ

नीता नेहा को नहला कर वापस उसके कमरे मे ले गयी.शालिनी दोनो का इंतज़ार कर रही थी.

नेहा के आते ही शालिनी और नीता ने उसको सजाना सुरू किया.

नेहा और नीता मे ज़्यादा फरक नही था पर नेहा का बदन नीता से ज़्यादा अट्रॅक्टिव था.

नेहा के खूबसूरत बदन पे हल्का सा मेक अप करते ही नेहा लाखों मे एक लग रही थी. उसको देखते, देखते रहने का मन हो रहा था.

नेहा की आँख से लेके गुलाबी लिप्स तक ,उसके बदन ने साड़ी पहनते साड़ी की वॅल्यू बढ़ा दी थी.ऐसी थी हमारी नेहा ,

इधर पिताजी, रमेश, जयसिंघ .और छोटू ने सगाई की सारी तय्यारी कर ली.

ठाकुर जी थोड़े गुस्से मे थे कि पिताजी ने उनको पूछा नही. पर पिताजी ने उनको मना ही लिया. उनका खास दोस्त जो था ,ठाकुर पिताजी से ज़्यादा देर गुस्सा नही रह सकते थे.

कुमार के माता पिता और अजीत की बीवी भी आ गयी.

कुमार की तरफ से बस इतने ही लोग थे.

गाँव के लोग अचानक पता चलने से कुछ समझ नही पाए पर योगेंद्र सिंग की बेटी होने से पूरे गाँव की बेटी हुई .जिस से हर

कोई अपने काम बीच मे छोड़ कर सगाई में आए थे

पहले स्वेता का केक काट कर उसका बर्तडे मनाया गया.

फिर नेहा को सगाई के लिए कमरे से बाहर लाया गया.

नेहा के बाहर आते ही हर कोई नेहा की खूबसूरती को देख रहा था

कुमार तो नेहा को इस रूप मे देख कर खुद को किस्मतवाला समझ रहा होगा.

सुरेश भी भीड़ के बीच मे नेहा को देख रहा था. सुरेश की नज़र नेहा के चेहरे पे कम हाथो पर ज़्यादा थी.

नेहा के हाथ मे अपनी रिंग ना देख कर सुरेश समझ गया कि... फिर दूसरे हाथ मे अपनी रिंग देख कर सुरेश ने अपने सर पर हाथ रख दिया

सुरेश सोच रहा होगा कि उसने लेफ्ट हॅंड की जगह राइट हॅंड मे रिंग पहना दी .
 
फ्लॅशबॅक 993

नेहा की सगाई अच्छे से हो गयी. कुछ गीले शिकवे थे पर सब ने अपनी भावनाओ पे कंट्रोल रखते हुए नेहा को उसके फ्यूचर के लिए आशीर्वाद दिया.

साघहै होते कुमार और अजीत अपनी फॅमिली के साथ शहर के होटेल मे चले गये. वो वही रुकने वाले थे.

सगाई होते ही हर किसी ने चैन की साँस ली.

सगाई को इतने कम समय मे मनाने के लिए सब ने कोई कसर नही छोड़ी.

सगाई होते ही नीता और नेहा अपने कमरे मे चली गयी. और नीता नेहा का दिमाग़ खाने लगी.

नेहा नीता की बाते तो सुन रही थी पर उसके दिमाग़ मे सुरेश की बात घूम रही थी.

स्वेता सीतल के सोते ही रमेश ने अपनी नाराज़गी पूजा पर निकालनी सुरू की.

रमेश पूजा से बहुत प्यार करता था ऐसे मे पूजा को मार नही सकता था ,

रमेश ने पूजा की ऐसी चुदाई की ,कि पूजाको अपने मूह पर कपड़ा रखना पड़ा.

पूजा को पता था कि रमेश ऐसे धक्के क्यूँ मार रहा है.

अपने पति की भावनाओ को समझते हुए पूजा चुप चाप दर्द बर्दास्त करते हुए धक्के खाती रही.

रमेश ने थके होने के बाद भी पूजा की 2 बार चुदाई की.

पूजा ने खुशी खुशी हर धक्के को बर्दास्त करना सही समझा और रमेश के गुस्से को अपनी चूत मे समा लिया.

रमेश होश मे आते ही पूजा की आँख मे पानी देख ,उसे किस किया .और वैसे पूजा को गले लग कर सो गया.

पिताजी ने भी माँ के साथ सेलेब्रेट किया इस खुशी को

जयसिंघ अपने पिताजी के हाँ करने से खुश था .उसकी खुशी शालिनी को महँगी पड़ने लगी.

जयसिंघ नॉर्मल रहते ही शालिनी की जम कर चुदाई करता है.

आज खुश होने से शालिनी की चूत मे भूचाल आया था.

शालिनी अपने पति को खुश देख कर खुद को अपने पति के सामने परोस दी

जयसिंघ ने शालिनी की चूत और गंद दोनो मे अपना वीर्य भर दिया और शालिनी से चिपक कर सो गया.

बिचारा छोटू, इसको हॉल मे सोना पड़ा

नेक्स्ट डे

कुमार और अजीत शादी की डेट फिक्स करने आ गये.

पिताजी ने ठाकुरजी और पंडित को बुला कर शादी की डेट निकाल ली.

शादी की डेट 1 महीने बाद की मिली.

डेट फिक्स होते ही सब शादी की तय्यारी मे लग गये.

जयसिंघ ने अपने दोस्तो की खातिरदारी की और शादी तक गाँव मे रुक कर शादी की तय्यारी मे लग गया.

जयसिंघ अपने पिताजी को खुश रखने के लिए सब कुछ करना चाहता था.

जैसे पूजा की शादी की थी उस से अच्छी नेहा की शादी करवाने वाला था

जयसिंघ ने पूजा की शादी की तरह सिल्वर के काय्न तय्यार किए

बाप बेटे को साथ मे देख कर माँ भी खुश थी. माँ दोनो को ऐसा ही देखना चाहती थी.

शादी की डेट फिक्स होने से नेहा खुश थी पर वो सुरेश पे गुस्सा थी. एक बार तो सुरेश उस से बात कर लेता.

सुरेश के ऐसा ना करने से नेहा गुस्सा हो गयी. और अपने शादी पे ध्यान देना सही समझा.

नीता नेहा की शादी से खुश थी. पर वो चाहती थी कि नेहा के साथ उसकी भी शादी हो

नेहा-नीता क्या हुआ.

नीता-मुझे भी शादी करनी है.

नेहा-पिताजी से बात करूँ

नीता-हाँ, तेरी जिस दिन शादी है मुझे भी तभी करनी है

नेहा-ये तो मुश्किल है ,

नीता-तू बात कर ना

नेहा-वो छोड़ ,ये सुन ,पूजा दीदी के बाद ये कमरा हमारा हुआ था ना. हम कितनी खुशी थी.

नीता-हाँ,

नेहा-मेरे जाने के बाद ,ये कमरा तेरे अकेले का होगा. सोच एक कमरा सिर्फ़ तेरा

नीता-तेरे बिना मैं कमरे का क्या करूँ, मुझे तू चाहिए .तेरे बिना मैं गोल्ड डाइमंड को हाथ ना लगाऊ,

नेहा-मैं भी तेरे बिना नही रह सकती, पर शादी के बाद हमे अलग तो होना होगा ना.

नीता-तू शादी मत कर ,

नेहा-तू भी ना,

नेहा ने नीता को गले लगा लिया और शादी तक साथ रहने का प्रॉमिस किया.

नीता इतने से नही मान ने वाली थी, पूजा और शालिनी के मनाने के बाद नीता कुछ हद तक समझ गयी.

नेहा की शादी की तय्यारी मे नीता उसके साथ साथ रह कर आख़िरी दिन नेहा के साथ रहना चाहती थी.

पिताजी ने शादी अपने घर से करने का फ़ैसला किया.

जयसिंघ को इसके लिए अपने दोस्तो को काफ़ी मनाना पड़ा.

जयसिंघ अपने दोस्तो की मर्ज़ी से ये चाहता था कि शादी शहर से हो पर पिताजी ये कैसे होने देते.

फाइनली तय हुआ कि शादी गाँव से होगी.

कुछ बातों मे पिताजी को पीछे हटना पड़ा तो कुछ बतो मे जयसिंघ को समझौता करना पड़ा.

पिताजी ठाकुरजी के साथ मिल कर अपनी बेटी नेहा की शादी यादगार बनाने के लिए कोई कमी नही छोड़ रहे थे.

नेहा के लिए बेहतरीन कपड़े और ज्युलरी ली गयी.

नेहा को जो लिया गया ,नेहा ने पिताजी से ज़िद्द करके नीता के लिए लेने को कहा.

नेहा के ऐसा करने से नीता की खुशी का कोई ठीक आना नही था.

दुल्हन एक थी पर दुल्हन बनेगी दो

शादी की पूरी तय्यारी हो गयी.

शादी मे लगने वाली सारी खरीदी और तय्यारी हो गयी.

नेहा के साथ साथ सब ने अपने लिए खरीदी कर ली.

शादी को अब सिर्फ़ 1 हफ़्ता बाकी था ऐसे मे जयसिंघ और पिताजी के बीच कुछ बात के लिए झगड़ा हुआ

पिताजी-ये सब हमारे यहाँ नही होता

जयसिंघ-पिताजी ,कुमार नेहा को खरीदी करने ले जाना चाहता है

पिताजी- वो पहले मिल लेता तो मैं कुछ नही कहता , पर अब शादी को बस 1 हफ़्ता बाकी है ,

जयसिंघ-पूजा भी तो जीजाजी के साथ घूमने गयी थी ना

पिताजी-तू अकेले जाने की बात कर रहा है. मैं नेहा को अकेले नही भेजूँगा.

जयसिंघ-पिताजी.दोनो अकेले घूमेगे तो एक दूसरे को जान सकते है, पूजा के वक्त मैं ने ऐसा कहा था तो आपने पूजा को जाने दिया था ना

पिताजी- तब पूजा के साथ उसकी सहेली और नेहा गयी थी

जयसिंघ- पिताजी , कुमार और नेहा को एक दूसरे को जाने दो , एक दूसरे के ख़याल मिलने का मोका दीजिए

पिताजी-और ख़याल नही मिले तो शादी तोड़ देंगे,

जयसिंघ-ऐसा थोड़े होगा. वो तो नेहा से बात करना चाहता है. पिछली बार कपड़े लेते हुए पूरी फॅमिली थी .उससे नेहा से बात करने नही मिला.

पिताजी-नेहा अकेली नही जाएगी.

जयसिंघ-मैं कुमार से पूछता हूँ

जयसिंघ ने कुमार से बात की ,कुमार ने हाँ कर दी .और कहा कि उसके साथ अजीत और उसकी बीवी भी रहेगी

जयसिंघ-कुमार को कोई ऐतराज़ नही है. उसके साथ तो अजीत और उसकी बीवी भी रहेगी

पिताजी-ठीक है. नीता जाएगी नेहा के साथ. नीता अपनी बहन के साथ रहना.

नीता-जी पिताजी

नेहा नीता ,कुमार और उसके दोस्त के साथ शहर घूमने के लिए चली गयी.

जयसिंघ पिताजी को मनाने मे कामयाब हुआ.

नेहा की शादी जब से कुमार के साथ हुई उसके बाद पहली बार नेहा कुमार के साथ अकेली बात करने जा रही थी.

कुमार के पास खुद की कार थी, नीता अपने होने वाले जीजाजी के कार मे बैठ कर काफ़ी एग्ज़ाइट हो गयी थी.

वही नेहा को इसमे ज़रा भी इंटेरेस्ट नही था .

अजीत की बीवी दोनो के मन की बाते जान ने की कोशिश करने लगी.
 
फ्लश बॅक 994

नेहा और नीता कुमार के साथ शहर आ गयी.

नीता-जीजाजी कहाँ ले जा रहे हो

कुमार-अपनी साली को भगा कर ले जा रहा हूँ

नीता-मुझे भगा कर ले जाने की क्या ज़रूरत है. नेहा है ना

कुमार-वो तो है पर तुम भी तो आधी घर वाली हो ,तुम्हें भी लेकर जाउन्गा

नीता-मैं भी यही चाहती हूँ (नेहा के साथ रहना)

कुमार-फिर तो मज़ा आएगा.घरवाली और आधी घरवाली के साथ

नीता-वो देखना होगा. पहले बताइए कहाँ ले जा रहे है

कुमार-तुम कहाँ जाना चाहती हो

नीता-मैं तो शॉपिंग करना चाहती हूँ.

कुमार-तो शॉपिंग चलते है.

कुमार की बात सुनकर नीता खुश हो गयी. और साली को खुश देख कर कुमार सोच रहा था कि नेहा के साथ नीता फ्री है.

नेहा उनकी बात चुप चाप सुन रही थी. कुमार उस से बात करने की जगह अपनी साली से बात कर रहा था.

कुमार ने शहर के बड़े शॉप के सामने कार रोक ली .शॉप देख कर नीता खुश हो गयी.

नीता-मैं तो यहाँ कब से आना चाहती थी.आप बहुत अच्छे है.

कुमार-बीवी नही कम से कम साली तो खुश हुई

नीता-चले जीजाजी

कुमार-चलो

कुमार नीता के साथ शॉप मे गया .नेहा अजीत और उसकी बीवी के साथ शॉप मे आई

अजीत नेहा से चिपक कर चल रहा था ,जो नेहा को पसंद नही था. पर वो कुमार का दोस्त होने से नेहा ने कुछ नही कहा.

शॉप मे आते ही नीता अपने लिए कपड़े लेने लगी. कुमार नीता को नये नये ड्रेस खरीद कर दे रहा था.

नेहा अजीत से दूर रहने के लिए उसकी बीवी के पास रहने लगी.

पर अजीत की बीवी ,अजीत और नेहा के बीच मे से कोई ना कोई बहाना करके चली जाती.

मोका देख कर अजीत नेहा को टच कर ही लेता.

नेहा को लग रहा था कि अजीत के मूह पे एक जोरदार थप्पड़ मार दे. पर वो ऐसा कर नही सकती थी.

नेहा भी दिमाग़ लगा कर अजीत से दूर चली जाती.

नेहा अजीत से दूर रहने के लिए नीता के पास चली गयी.

नेहा नीता को ड्रेस लेने मे मदद करने लगी.

पर यहाँ भी अजीत नेहा के पीछे खड़ा रह कर नीता की मदद के बहाने नेहा के बदन को सूंघ लेता.

कुमार भी वही था पर वो कुछ नही कह रहा था.

नेहा ने फाइनली अजीत से छुटकारा पाने के लिए बाथरूम मे चली गयी.

नेहा के जाते ही नीता अकेली हो गयी.इसी का फ़ायदा अजीत और कुमार ले रहे थे.

नीता तो अपनी मस्ती मे थी. उसको ड्रेस देख ने से फ़ुर्सत नही मिल रही थी.

कुमार के दिमाग़ मे क्या चल रहा था इस बात से नेहा और नीता अंजान थी.

नीता अपने जीजाजी के शॉपिंग करवाने से काफ़ी खुश थी.

नीता ने अपने लिए कुछ ड्रेस सेलेक्ट किए

नीता-इतने काफ़ी है.

कुमार-ट्राइ करके देख लो

नीता-उसके लिए घर जाना होगा.

कुमार-यहाँ पर कर सकते है. चलो दिखाता हूँ

कुमार नीता को शॉप मे बने हुए एक कमरे मे ले गया

कुमार-तुम यहाँ ट्राइ करके देखो .

नीता-आप बाहर तो जाइए

कुमार-मैं आँख बंद करता हूँ

नीता-आप बहुत नॉटी है.चलिए बाहर

कुमार बाहर आ गया .और नीता ड्रेस ट्राइ करने लगी.

कुमार नीता को ऐसे कमरे मे लाया था जहाँ वो अंदर का नज़ारा देख सके

कुमार बाहर आते ही ऐसी जगा चला गया जहाँ से वो कमरे के अंदर देख सके

नीता तो अपने ही दुनिया मे थी. वो ड्रेस ट्राइ करके देखने लगी.

नीता ने एक बार कमरे को देखा और फिर अपनी कमीज़ निकाल दी.

कमीज़ जैसे जैसे उपर जा रही थी वैसे वैसे कुमार की धड़कने तेज चल रही थी.

नीता ने अपनी कमीज़ निकाल कर नीचे रख दी.

नीता को ब्रा मे देख कर कुमार का पोपट खड़ा हो गया.

नीता के दूध जिनको नेहा के अलावा किसी और ने ग़लती से देखा होगा वो कुमार के सामने थे.

नीता के दूध ब्रा से बाहर निकाल कर कबड्डी खेलने को तय्यार दिख रहे थे.

नीता का गोरा बदन देख कर वो भी छुप कर ,कुमार को इतना मज़ा आ रहा था कि वो कमरे के अंदर चला जाए

नीता ने जल्दी दूसरी कमीज़ पहन ली जो उसे ट्राइ करनी थी.

कुमार-अच्छा नज़ारा था ,इतनी जल्दी क्या थी तो उसको ,थोड़ी देर रुक जाती

कमीज़ पहनते ही नीता ने अपनी सलवार का नाडा खोल कर सलवार निकाल दी.

सलवार गिरते ही कुमार का गला सुख गया. कुमार को नीता की पैंटी की झलक कुछ सेकेंड के लिए देखने को मिल गयी.

पैंटी ,और नंगी जांघे वो भी नेहा की जुड़वा बहन की ,कुमार को लग रहा था कि उसके एक हाथ मे नेहा और दूसरे हाथ मे नीता.

नीता की कमीज़ ना होती तो उसको ब्रा पैंटी मे देख कर कुमार वही मर जाता.

कुमार की धड़कने राजधानी एक्सप्रेस की तरह चल रही थी. और उसके शरीर का सारा खून लंड की तरफ जाने लगा.

नीता सलवार पहनने के लिए झुकी तो उसकी कमीज़ उपर हो गयी.

पर पैंटी नही दिखी पर इतना काफ़ी था कुमार को अपना लंड बाहर निकालने को

कुमार-और झुक ,थोड़ा और , इसकी तो ऐसे ही झुका कर गंद मारूँगा

नीता ने कपड़े पहन लिए .और नये ड्रेस को पहन कर मिरर मे देखने लगी.

नीता ने वही तरीका सुरू रखा.

पहले कमीज़ निकाल कर दूसरी कमीज़ पहन लेती. फिर सलवार ट्राइ करती.

नीता के ऐसा करने से कुमार को नीता को ब्रा पैंटी मे देखने को नही मिला

पर एक बार नीता ने पैंटी अड्जस्ट करने के लिए कमीज़ उपर की थी जिस से कुमार ने अच्छे से उसकी गंद को देख लिया.

इधर कुमार नीता के जवानी का मज़ा ले रहा था .

उधर नेहा बाथरूम से आ चुकी थी.

उसने शॉप मे इधर उधर देखा पर नेहा को नीता कही नही दिखी, और ना ही कुमार दिखा
 
नेहा-वो कहाँ है.

अजीत-मैं तो यही हूँ

नेहा-मैं कुमार की बात कर रही हूँ.

अजीत-कुमार तो आ जाएगा . चलो तुम्हें ड्रेस लेके देता हूँ

नेहा-नही चाहिए ,नीता कहाँ है.

अजीत-वो अपने जीजाजी के साथ खुश है

नेहा-क्या मतलब

अजीत-लो कुमार आ गया.

नेहा-नीता कहाँ है

कुमार-वो ड्रेस ट्राइ कर रही है. लो वो भी आ गयी.

नीता के आते ही नेहा उसको अलग ले गयी. और पूछने लगी कि वो कहाँ थी.

नीता ने बता दिया कि वो नये ड्रेस ट्राइ कर रही थी

फिर नीता ने नेहा को कुछ ड्रेस खरीदने को कहा.नेहा ने अगर कुछ ना लिया तो कुमार को अच्छा नही लगेगा.इस लिए वो भी कुछ खरीदने लगी.

अजीत-कहाँ था तू

कुमार-अपनी साली को ड्रेस दिला रहा था

अजीत-उसने तो ड्रेस ले लिए थे

कुमार-तो ट्राइ करवाने गया था

अजीत-कैसे हुए ,फिट थे कि नही

कुमार-नेहा की तरह है.

अजीत-नेहा को कब देखा तूने

कुमार-कपड़ो के उपर से इतनी हॉट लग रही है तो अंदर तो कयामत होगी.

अजीत-और नीता

कुमार-मत पूछ. वो भी कुछ कम नही है.

अजीत-अच्छे से बता

कुमार-मेरे लंड को हाथ लगाके देख

अजीत ने कुमार के लंड को टच किया

अजीत-इतनी कमाल की थी ,तेरा तो फटने को तय्यार है

कुमार-पूछ मत, उसकी गंद ने लंड खड़ा कर दिया.

अजीत-फाड़ क्यूँ नही दी

कुमार-फाड़ दूँगा ,पहले लंड को ठंडा करना होगा.चल होटेल चलते है

अजीत-इन दोनो का क्या करे

कुमार-इनको साथ लेते है. एक कमरे मे बैठा देंगे और मैं अपना लंड ठंडा कर दूँगा.

अजीत-मैं तो पहले अपना लंड खड़ा करूँगा

कुमार-तो चल.

अजीत-मैं अपनी बीवी को बुलाता हूँ ,तू इन दोनो को बुला

कुमार नेहा और नीता के पास आ गया.

कुमार-कुछ पसंद आया

नेहा-हां, एक 2 अच्छे ड्रेस है

कुमार-तो पॅक करवा लो ,हम होटेल जा रहे है

नेहा-होटेल क्यूँ

कुमार-फ्रेश होने ,

नेहा-हम फ्रेश ही तो है

कुमार-मुझे कुछ काम है होटेल मे ,चलो

नीता-नेहा ने ड्रेस ट्राइ नही किए

कुमार-होटेल मे करना .

नेहा को कुछ समझ नही आ रहा था .पर उसका ना करना ठीक नही होता इस से वो होटेल चलने को तय्यार हुई.

अजीत ने भी अपनी बीवी को होटेल चलने को कहा .

नेहा नीता कुमार के साथ होटेल जाने लगी. होटेल पास मे था जिस से वो जल्दी पहुँच गये.

नीता को अपने जीजाजी का फ्री नेचर अच्छा लगा.

इधर नेहा के दिमाग़ मे कुछ और चल रहा था.

कुमार के इस तरह होटेल मे लाने से नेहा को अजीब लग रहा था.

कुमार नेहा नीता को लेकर अपने रूम के पास आ गया

कुमार-तुम दोनो यहाँ रूको

नेहा-आप

कुमार-मैं अपना काम पूरा करके आता हूँ.

नेहा-ठीक है

कुमार की बात सुनकर नेहा रिलॅक्स हो गयी. उसको लगा था कि कुमार उसके साथ, पर यहाँ तो अलग हुआ.

नेहा खुश होकर नीता के साथ रूम मे चली गयी.
 
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