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Guest
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बातें बहुत हो चुकी थी, टाइम बहुत बर्बाद कर चुका था. पता नही मामी कितनी देर यहाँ रुकने वाली है. अगर मामी जल्दी चली गयी तो ,मुझे 2 3 बार तो मामी की चुदाई करनी है.
मामी बेड पर लेट कर मुझे अपने उपर आने के लिए कह रही थी.
अब ना बात करूँगा और ना समय बर्बाद करूँगा.
मैं मामी के उपर आ गया.और मामी के गुलाबी होंठो पे मैं ने अपने होंठ रख दिए.
मामी के होंठो को अपने होंठो से छुते ही मेरे अंदर एक अलग ही जोश आ गया.
ऐसा जोश जिसमे मामी के गुलाबी होंठ का गुलबीपन मैं पीने लगा. मामी के होंठो को चूसने लगा.
मामी भी मेरा पूरा साथ देते हुए मेरे होंठो को चूसने लगी.
मामी के होंठो को चूस्ते हुए मैं लंड को मामी की चूत पर मारने लगा. जैसे कि मेरा लंड मामी की चूत मे हो और मैं धक्के मार रहा हू.
मेरा लंड मामी की चूत पर दस्तक दे रहा था .मामी लंड को चूत पर महसूस करके और गरम हो गयी और पूरे जोश के साथ मेरे होंठो को चूसने लगी.
होंठो का गुलाबी रस पीने के बाद हम एक दूसरे के मुँह मे अपनी अपनी जीभ डाल कर एक दूसरे को चूसने का मज़ा दे रहे थे.
थोड़ी देर मैं मामी के होंठो का रास्पान करता रहा.
अब बारी थी मामी के बूब्स की ,मामी की गोल मटोल ,पके हुए आम नंगे मेरे सामने थे. पहले मैं आँखे से उसका लुफ्त उठाने लगा.
मामी के बूब्स टाइट लग रहे थे, शायद मामा मामी के आम को अच्छे से मसल्ते नही होगे. पहले मैं ने मामी के बूब्स को हाथो से दबा कर पक्का हुआ आम बनाने का फ़ैसला किया.
मैं ने अपना हाथ मामी के बूब्स पर रख कर मसल्ने लगा. और दूसरी बूब्स के निपल को अपने मुँह मे लेकर चूसने लगा.
एक बूब्स पर हाथ और दूसरे बूब्स का निपल मुँह मे, इस वजह से मामी मस्ती मे आहे भरने लगी.
आआआहह माँ ,क्या चूस्ता है तू ,ऐसे ही आअहह, तेरे आअहह मेरा पानी निकाल दिया ....चूस पी जा .....खा जा....मेरे पति ....मुझे चोद....आआहह....अपनी बहन....आअहह...ऐसे ही
मामी की हालत बूब्स चूस ने से ही खराब हो गयी. मामी अपनी पति का गुस्सा और नफ़रत मुझसे प्यार करके निकाल रही थी.
जिसका मैं पूरा फ़ायदा ले रहा था. मामी गुस्से और प्यार की वजह से मुझे पर भारी पड़ रही थी.
मामी का हर एक अंग खा जाने का मन हो रहा था.
मामी के खूबसूरत बदन पर ये गुलाबी निपल चार चाँद लगा रहे थे.
मामी ने खुद को अच्छे से मेनटेन करके रखा था.
इस एज मे मामी का पेट बाहर निकालना चाहिए था पर ऐसा नही हुआ. मामी ने अपनी खूबसूरती को अच्छे से संभाल कर रखा हुआ था
मामी के बूब्स और मामी के चूतड़ हर किसी को मामी का दीवाना बना सकता था.और मैं देवना बन भी गया.
मामी के बूब्स चूसने से मामी आहें भर रही थी.
मामी की शीष्कारियाँ सुनकर मैं ज़ोर ज़ोर से मामी के निपल चूस ने लगा .और जानवर की तरह दूसरे बूब्स को मसल्ने लगा.
मामी मज़े ले रही थी और मैं बूब्स चूस रहा था. थोड़ी देर एक बूब्स का मज़ा लेने के बाद मैं दूसरे बूब्स का मज़ा लेना शुरू किया. जैसे पहले बूब्स को चूस रहा था और दूसरे बूब्स को मसल रहा था वैसे ही अब भी वही कर रहा था.पर इस बार बूब्स बदल दिए थे.
जिस बूब्स को मसल ने से लाल कर दिया था उसे चाटकर गीला कर रहा था और जिस बूब्स को बूब्स को पहले चूस कर गीला किया था उसे अब मसल कर लाल कर रहा था.
मैं अपनी तरीके से मज़े ले रहा था और मामी अपने तरीके से,मामी मस्ती मे अपना सर पटक रही थी.और मैं बूब्स का मज़ा ले रहा था.
मामी कभी अपने हाथ को मेरी पीठ पर दबा देती तो कभी मेरे सर को पकड़ कर अपने बूब्स पर दबा देती. तो कभी मेरे हाथ जो बूब्स मसल रहा है उस पर अपना हाथ रख कर मुझे बूब्स मसल्ने मे साथ दे रही थी.
इधर मैं बूब्स के साथ खेल रहा था और उधर कभी मेरा लंड मामी की चूत पर दस्तक देता तो कभी मामी की नाभि मे जाकर फस जाता.
मामी की नाभि ने पेट की शोभा डबल कर दी थी. गोरा पेट ,पर्फेक्ट फिगर उस पर गहरी नाभि क्या कहूँ मामी कामदेव की रति थी.
मामा ने मामी पर ज़्यादा ध्यान नही दिया जिस की वजह से मुझे डाउट था कि मामी की नाभि ज़्यादा गहरी है या चूत
मामा ने पंकज की मम्मी की चुदाई के बाद मामी पर ध्यान नही दिया होगा तभी मुझे ऐसा डाउट हो रहा है.
चलो चेक कर देखता हूँ ,चूत मे लंड से ड्रिल कर के देखता हू पर पहले पहाड़ की हवा का मज़ा लेता हू. बूब्स के साथ पूरा मज़ा करता हू
मामी ने शीष्कारियाँ लेना बंद नही किया. ऊओ तू...बस....आआहह रुक जा...नीचे..,पानी आ....ऐसे ही...ऊओ माँ...मर गयी...आअहह...दर्द ...हो...ऐसे ही...मज़ा आ...आअहह
मामी की कोई बात पूरी नही हो रही थी. मैं होने भी नही दे रहा था. मामी के कुछ बोलते ही मैं बूब्स को काट देता.
मैं मामी के बूब्स को चूस था रहा और मसल था रहा .मेरे चूसने और मसल्ने से मामी के बूब्स लाल और थूक से गीले हो गये.
अब और बूब्स को मसलता रहा तो मामी को दर्द ज़्यादा होगा और मज़ा कम होगा.
इसी लिए मैं ने नीचे जाने का फ़ैसला किया.
मामी की टाँगो को फैला दिया. टाँगे फैलने से मामी की चूत खुल गयी.
मैं ने आज तक बहुत चूत देखी, कुवारि,चुदि हुई, फटी हुई, टाइट, गुलाबी चूत,बालो वाली चूत, ,मामी की चूत भी कुछ इसी तरह की थी.या फिर कहूँ मॅरीड औरतों मे सब से बेस्ट थी.
मामी की चूत पर बाल नही थे, गुलाबी छूट थी. एक बेटी की माँ होने के बाद भी चूत टाइट लग रही थी.मामा को थॅंक्स कहना चाहिए मुझे ,मामा ने मेरे लिए मामी की चूत टाइट रखी है.
मैं मामी की चूत को देखता रहा. मामी मुझे चूत को घूरते हुए देख कर अपने हाथ से चूत को छुपाने लगी.
मैं ने मामी के हाथ चूत से हटाए. हाथ से चूत के होंठो को खोल कर चूत को देखने लगा. चूत की गहराई देखने के लिए मैं ने चूत मे उंगली डाल दी.
उंगली अंदर डाल ने के बाद बाहर निकालने का मन नही हुआ,थोड़ी देर उंगली को चूत मे रहने दिया.
फिर मैं उंगली से चूत के दाने के साथ खेलने लगा , रगड़ने लगा. दाने को छुते ही मामी पागल हो गयी ,मामी मछली की तरह तड़पने लगी, अपनी गंद हिला ने लगी.
मामी को गंद उपर नीचे हिलाने मे मुश्किल हो रही थी ,मामी अपनी गंद को गोल घुमा कर मज़े लेने लगी.
उंगली से चूत के साथ खेलने के बाद अब बारी थी चूसने की.
मामी की चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.
मैं ने मामी की जाँघो को थोड़ा और खोल दिया जिस से मुझे चूत चूसने मे परेशानी ना हो.
मामी की चूत एकदम साफ दिखाई देने लगी.
चूत चूसने से पहले मैं मामी की चिकनी जाँघो को मसल ने लगा. मैं आँखो से चूत को चोद रहा था.
जाँघो को मसल्ने के बाद मैं ने जाँघो पर किस करना शुरू किया.
चूत मे उंगली करने के बाद चूत चूसना की बजाय मैं मामी की जाँघो पर किस कर रहा था. ऐसा करने से मामी की हालत खराब होने लगी.
सुबह से मामी की चूत मे खुजली हो रही थी.अब मामी की खुजली ख़तम करने का समय आ चुका था.
मैं ने मामी की चूत पे किस कर दिया .किस करते ही मामी के मुँह से आहह निकल गयी.
किस करने के बाद मैं अपनी जीभ मामी की चूत पर घुमाने लगा.
मामी की चूत गीली थी .मैं ने जीभ से मामी की चूत को पहले चाट कर साफ कर दिया और चूत को फिर से गीली करने के लिए चूसने लगा.
मामी जो करीब 1 घंटे से चूत के साथ कोई खेले इसका इंतज़ार कर रही थी.
मेरे चूसने से मामी को राहत मिली.पर पानी अभी निकला नही था जिस से मामी अपने चूतड़ उपर कर कर के अपनी चूत को मेरे मुँह के पास लाने लगी.
मामी की चूत उपर आने से मैं ने मामी की चूत को मुँह मे भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा.
मामी की चूत चूसने के बाद मैं ने अपनी जीभ को नुकीला कर के मामी की चूत मे डाल दिया. और फिर अपनी जीभ से मामी की चूत को चोदने लगा.
मामी की चूत को जीभ से चोदने के साथ मैं चूत का दाना अपने उंगली से दबाने लगा और ज़ोर ज़ोर से मामी की चूत चोदने लगा.
मामी ने अपनी गति बढ़ा दी. मामी पूरे जोश के साथ अपनी चूत मेरे मुँह पर दबा रही थी.
मामी के ऐसा करने से मुझे मज़ा और दर्द दोनो हो रहा था.मामी के उछलने से कभी कभी मेरी जीभ मेरे दाँतों मे लग जाती जिस से मुझे दर्द हो रहा था.
पर कुछ पाने के कुछ खोना पड़ता है. मामी को बीच मे रोकना ठीक नही होता.
मैं ऐसे ही जीभ से मामी को खुद दर्द ले कर मज़ा देने लगा.
मामी का पानी जल्दी निकलने वाला था जिस से मैं ने चूत चूसना जारी रखा.
थोड़ी देर मे मामी ने अपनी जाँघो से मेरे सर का कस के पकड़ लिया.
मामी ने अपने हाथ से मेरे सर को अपनी चूत पर दबा दिया.
जाँघो और हाथ की वजह से मैं हिल नही पा रहा था. मैं ने चूसना जारी रखा.
अचानक मामी का बदन अकड़ गया. मामी ने अपनी चूत उपर कर ली और 1 घंटे से जो सूनामी चूत मे रुका हुआ था वो बाहर निकल गया.
मामी की चूत का सूनामी मेरे मुँह मे चला गया.
मामी की चूत ने बहुत सारा पानी छोड़ा.मैं ने मामी का सारा पानी पी लिया.
पानी पीने के बाद मामी ने मेरे सर को छोड़ दिया.
मैं लंबी लंबी साँसे लेने लगा. मामी भी हाफ़ रही थी..