अपडेट 300
सारा ने छोटी चाची को अच्छे से चेक किया और चली गयी. माला भी अपने घर चली गयी.
फिर मैं ने चाची को नाश्ता करवाया और चाचा के आने के बाद मैं सारा के पास चला गया.
सारा-तुम यहाँ, मुझे लगा कि तुम आज अपनी चाची के पास रुकोंगे
अवी-वो तो रुकुंगा ही. मैं आप से पूछने आया था कि चाची को दर्द सुरू कब होगा.
सारा-हंसते हुए ,हो जाएगा
अवी-डेट तो आज की है.
सारा-डेट मे प्लस माइनस 5 दिन हो जाते है. जब दर्द होना सुरू हो जाएगा तब हम देख लेंगे.
अवी-मैं बस यही पूछने आया था.अब चलता हू
सारा-घर या चाची के पास
अवी-चाची के पास
फिर मैं चाची के पास चला गया.
आज घर जाने का मन नही हो रहा था.मैं हॉस्पिटल मे रुक गया.
स्वेता दीदी, पूनम दीदी और सीतल दीदी आज कॉलेज नही गयी. वो आज दिन भर हॉस्पिटल मे रुकने के लिए आई थी.
समय बीत रहा था. मैं कभी चाची की तरफ देखता तो कभी घड़ी की तरफ
मुझे समझ नही रहा था कि मुझे क्या हो रहा है. मेरा दिल बेचैन हो रहा था. डर लग रहा था.खुशी हो रही थी, एक अजीब सी हलचल सुरू थी मेरे दिमाग़ मे,
पता नही मुझे क्या हो रहा था. कभी मैं बैठ जाता तो ,कभी बाते सुनकर चाची की तरफ देखता कही चाची को दर्द होना तो सुरू नही हुआ.
वैसे स्वेता दीदी सब संभाल रही थी.
मुझे रात भर जागना था, इस लिए मैं 2.00 बजे घर चला गया. और थोड़ी देर आराम किया. पर बार बार चाची का ख़याल दिमाग़ मे आ रहा था.बार बार मैं मोबाइल की तरफ देख रहा था.
स्वेता दी का कॉल आएगा और मुझे जल्दी हॉस्पिटल जाना होगा. बस मैं मोबाइल की तरफ देख रहा था.
थोड़ी देर सोने के बाद मैं 5.00 बजे हॉस्पिटल चला गया.
मेरे आने के बाद स्वेता दीदी थोड़ी देर रुक कर रोहन ने के साथ घर चली गयी.
मैं छोटी चाची के पास रुक गया.
फिर शाम 8.00 बजे माला आ गयी. माला को चाची के पास रुकने को कहा और मैं चाचा को लेकर घर चला गया और जल्दी से खाना लेकर वापस आ गया.
ज़ोया ने चाची को चेक किया और चली गयी. मैं ने आज चाची के साथ खाना खा लिया. फिर थोड़ी देर बाद चाची सो गयी.
माला को रूम मे रुकने को कह कर ज़ोया के पास चला गया.
अवी-आज भी चाची को दर्द सुरू नही हुआ
ज़ोया-हो जाएगा. लगता है पापा बन ने की जल्दी है तुम्हे.
अवी-वो बात नही है. अगर छोटी चाची और सीमा चाची को एक साथ दर्द सुरू हो गया तो हम क्या करेंगे
ज़ोया-तो क्या हुआ. हम भी तो 2 है. सारा और मैं हू ना.सब संभाल लेंगे
अवी-और अगर तीनो चाची को एक साथ दर्द सुरू हुआ तो
ज़ोया-हम हर बात के लिए तय्यार रहते है. तुम टेन्षन मत लो
अवी-मेरी चाची है मैं टेन्षन नही लूँगा तो कौन लेगा
ज़ोया-तीनो को एक साथ दर्द हुआ तो हम दूसरे हॉस्पिटल से डॉक्टर बुलाते है.अब जाओ ,देखो , अपनी चाचियों को.
ज़ोया के साथ 2 3 मिनट बाते करने के बाद मैं वापस चाची के रूम मे आ गया.
चाची आराम से सो रही थी. माला भी थोड़ी देर बाद सो गयी.
पर आज मुझे नींद नही आ रही थी. अगर चाची को दर्द होना सुरू हो गया तो.मैं रात भर रूम मे बैठा रहा तो कभी मोबाइल पे गेम खेलने लगा.तो कभी घड़ी को देखते हुए चाची का ध्यान रख रहा था.
मैं रात भर रूम मे इधर से उधर घूमता रहा. रात भर मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था.
13थ डे
देखते देखते दिन निकलना सुरू हो गया.करीब सुबह के 5.00 बज रहे थे कि छोटी चाची की नींद खुल गयी.
छोटी चाची की आँख खुलते ही मैं छोटी चाची के पास चला गया.
छोटी चाची बेड से उतरना चाहती थी. छोटी चाची जैसे ही बेड से उतर रही थी की छोटी चाची के मुँह से एक चीख निकल गयी.
छोटी चाची ने अपने पेट पर हाथ रख दिए. छोटी चाची को दर्द होना सुरू हो गया.
मैं ने माला को जल्दी से जगाया.
माला ने छोटी चाची को देखा और समझ गयी कि अब क्या करना है. माला ने बेल बजा दी
छोटी चाची की चीख सुनकर बड़ी चाची और सुमन चाची भी उठ गयी.
थोड़ी देर मे 2 नर्स रूम मे आ गयी. और छोटी चाची को अपने साथ ले गयी.
बड़ी चाची और सीमा चाची समझ गयी कि क्या हो रहा है.
मैं ने स्वेता दीदी को कॉल किया और जल्दी से हॉस्पिटल आने को कहा.
करीब 20 मिनट बाद चाचा जी ,स्वेता दीदी आ गयी. स्वेता दीदी ने मुझे कहा कि तुम चाचा के साथ डेलिवरी रूम मे रूको मैं मामी के पास रुकती हू.
स्वेता दीदी बड़ी चाची के पास रुक गयी. उनको भी संभालना था.
मैं और चाचा डेलिवरी रूम के सामने बैठ गये.
थोड़ी देर मे ज़ोया और सारा डेलिवरी रूम के अंदर चली गयी. चाचा और मैं बाहर रुक कर खुश खबरी सुन ने का इंतज़ार करने लगे.
30 मिनट के बाद पूनम दीदी, सीतल दीदी,और ज्योति बुआ टॅक्सी से हॉस्पिटल मे आ गयी.
ज्योति बुआ बड़ी चाची के पास चली गयी. और स्वेता दीदी हमारे पास आ गयी.
सब की नज़र डेलिवरी रूम के गेट पर थी. कि कब गेट खुलेगा और कब खुश खबरी सुन ने को मिलेंगी .
चाचा जी अपने आँख बंद करके भगवान का नाम ले रहे थे. बीच बीच मे कह रहे थे कि बेटा हो ,भगवान बेटा हो.
मुझे चाचा जी पर गुस्सा आ रहा था. क्या बेटा और क्या बेटी दोनो एक जैसे है.
चाचा को बस इतना कहना चाहिए था कि बस मैं बाप बन जाउ.
1 घंटे के बाद रोहन अपनी भाभी के साथ हॉस्पिटल आ गया.
मेरी धड़कने बढ़ रही थी. जैसे जैसे समय लग रहा था मेरी बैचेनी बढ़ रही थी.
हम इधर से उधर चल रहे थे. सीतल दीदी कभी हमारे पास रुकती तो कभी बड़ी चाची के पास जाकर इधर का हाल बता देती.
2 घंटे के बाद डेलिवरी रूम का गेट खुल गया और ज़ोया बाहर आ गयी.
हम सब ज़ोया की तरफ देखने लगे.
ज़ोया-बेटा हुआ है
ये सुनकर हम सब उछल पड़े. मैं तो सबसे ज़्यादा खुश था पर बेटा होने से तो चाचा डॅन्स करने लगे.
मुझे चाचा जी पर गुस्सा आ रहा था पर छोटी चाची की खुशी के सामने मैं भी गुस्सा होने की बजाय खुश हो रहा था
स्वेता दीदी खुश खबरी सुनकर रोहन के गले लग गयी.
सीतल तो भागते हुए बड़ी चाची के पास चली गयी और बड़ी चाची और सीमा चाची को बता दिया कि छोटी चाची को बेटा हुआ है.
बड़ी चाची और सीमा चाची खुश हो गयी. मैं भी बड़ी चाची के पास आ गया. और उनको खुशख़बरी सुना दी,
स्वेता दीदी ने भी यही किया. पूनम दीदी भी सब को खुशकाबारी सुना रही थी.
हम तो खुशकाबारी सुनकर बहुत खुश थे. हॉस्पिटल मे जो मिल रहा था उसे बता रहे थे.
चाचा के चेहरे पे खुशी इस लिए थी कि बेटा हुआ है. मुझे लग रहा था कि चाचा के पास जाउ और उनको एक जोरदार थप्पड़ मारू,
करीब 5 घंटे के बाद हमे चाची से मिलने की इजाज़त मिल गयी. हम एक एक करके रूम मे चले गये.
सबसे पहले मैं ने चाचा को जाने दिया.
फिर मैं छोटी चाची को मिलने चला गया. छोटी चाची सो रही थी.
सोते हुए भी चाची के चेहरे पे खुशी थी.मैं ने छोटी चाची के सर पर किस किया और फिर अपने बेटे को किस किया.
छोटी चाची इतनी खुश थी कि बताने के लिए मेरे पास वर्ड नही है.
फिर शाम को चाची को अपने रूम मे शिफ्ट कर दिया.
मैं सब को फोन करके खुश खबरी दे रहा था.