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थोड़ी देर बाद हम नॉर्मल हो गये.
मैं काकी के उपर से अलग हो गया. लंड गंद से निकालने की वजह से काकी को राहत मिली.
मैं ने कॉंडम को निकाल कर फेक दिया. लंड पर वीर्य लगा था. लंड को साफ करना था .लंड को कैसे साफ करना था ये मुझे पता था.
मैं लंड को काकी के मुँह के सामने ले गया.
अवी-काकी इसे साफ तो कर दो
काकी-तुम्हे मैं छोड़ूँगी नही.
अवी-क्यू, मेरा लंड इतना पसंद आ गया जो पकड़ कर रखना चाहती हो.
काकी-ऐसे कोई चुदाई करता है. मेरी तो जान निकाल दी तुम ने.मैं भी तुम्हारी जान निकाल लूँगी.
अवी-ज़्यादा नाटक मत करो. तुम्हे पूरा मज़ा आया मेरे साथ चुदाई करके. आया कि नही.
काकी-पहले तो दर्द हुआ पर ऐसा दर्द बहुत दिनो के बाद मिला . इस लिए मेरी जान निकल गयी.
अवी-अब बोलो तुम मेरी जान निकालना चाहती हो या मैं फिर तुम्हारी जान निकाल लूँ.
काकी-तुम ही निकाल लो पर आगे से निकाल लेना
अवी-आगे से नही पीछे से निकालूँगा.
काकी-आगे से क्यू नही
अवी-चूत पर इतना बड़ा जंगल बना रखा है . मेरे शेर को जंगल पसंद नही है. उसे तो सिर्फ़ घुफ़ा चाहिए.
काकी-चूत को भेड़ियो से बचाने के लिए इतना बड़ा जंगल बनाया है.तुम्हारे शेर को ये जंगल अच्छा लगेगा.
अवी-मेरे शेर को खुले मैदान ज़्यादा पसंद है .और तुम्हारा पीछे का मैदान शेर को पसंद आ गया है.
काकी-मैदान मे तो घूम लिया है शेर ने ,अब जंगल का पानी भी पीने दो शेर को
अवी-ज़्यादा जंगल जंगल करती रहोगी तो पीछे के मैदान मे भी नही जाएगा मेरा शेर
काकी-थोड़ी देर के लिए, जंगल देख कर तो आने दो शेर को फिर वापस पीछे के मैदान मे डाल देना.
अवी-ठीक है. पर पहले शेर को साफ तो कर दो.
काकी लंड को जीभ से चाटने लगी. काकी ने लंड को चाट चाट कर साफ कर दिया.
अवी-साफ का कर रही हो. खड़ा भी करो
काकी लंड को मुँह मे लेकर चूसने लगी. काकी शेरनी की तरह लंड पर टूट पड़ी और चूस चूस कर लंड को खड़ा कर दिया.
लंड खड़ा होते ही काकी के मुँह से बाहर निकाल लिया.
और लंड पर कॉंडम लगा लिया.और लंड को काकी की चूत पर रगड़ने लगा
अवी-काकी तेरा जंगल बहुत बड़ा है. अगर तुम्हे मेरे शेर को जंगल मे आने देना है तो शेर को एक बार मे पूरा अंदर डालना होगा.
काकी-एक साथ, इतना बड़ा ,
अवी-एक साथ नही तो फिर पीछे मैदान मे डाल देता हू.
काकी-कुछ सोच कर ,डाल दो पर पानी निकालने तक अंदर रखना
अवी-ठीक है
मैं ने काकी की चूत पर लंड रख कर एक ज़ोर दार झटका मारा .ऐसा झटका मारा कि जंगल की बड़ी बड़ी झाड़ियों को चीरता हुआ शेर काकी की घुफ़ा मे घुस गया.
काकी की चीख निकल गयी. आहह मार डाला रे ,माँ दर्द हो रहा है, निकाल बाहर ,निकाल ना कमिने, आआअहह.मुझे किस मच्छर ने काटा था जो तेरा लंड एक बार मे लेने के लिए तय्यार हो गयी. आअहह निकाल ना कुत्ते
मैं कहाँ काकी की बात मानने वाला था. लंड अंदर डालने के बाद ज़ोर दार धक्के मारता गया.
धक्के लग रहे थे और काकी लंड बाहर निकालने को कह रही थी.
पर मैं ज़ोर दार धक्के मारता गया. क्यूँ कि जितनी जल्दी काकी का पानी निकल जाएगा उतनी जलदी काकी की गंद मे लंड जाएगा.
जैसा सोचा था वैसा ही हुआ ,थोड़ी देर मे काकी की चूत से पानी निकाल गया
पानी निकलने से काकी का दर्द कम हुआ. काकी को लगा कि अब उसको मज़ा मिलेगा. चूत मे लंड आराम से जाएगा.
पर ऐसा नही हुआ, चूत मे लंड जाने की बजाय बाहर आ गया. मैं ने लंड बाहर निकाल लिया.
लंड बाहर निकालने से काकी का दर्द और कम हुआ. काकी को अच्छा लगने लगा. काकी को लगा कि मैं लंड फिर अंदर डालूँगा. और मैं ने लंड को अंदर डाला.
लंड अंदर जाते ही काकी की चीख निकल गयी.
लंड चूत मे नही गंद मे गया था. मैं ने गंद मे लंड डाला था.
लंड अंदर डालने के बाद मैं ने काकी को कुछ बोलने ही नही दिया.इतनी ज़ोर दार तरीके से काकी की गंद मार रहा था.
गंद को फाड़ ही डाला था मैं ने. काकी के मुँह से जब भी आवाज़ निकालती वो चिल्लाने की ही होती.
काकी मुझे रोकने के लिए जब भी अपना मुँह खोलती मैं ज़ोर दार धक्का मार देता जिस से काकी बोलना कुछ और चाह रही थी और निकल कुछ और रहा था.
काकी ने कभी सोचा ही नही होगा कि मैं इस तरह उनकी चुदाई करूँगा.
एक बात अच्छी थी कि काकी की गंद काली थी. अगर काकी गोरी होती तो अब तक मेरे धक्को की वजह से लाल हो जाती
काकी मुझे पोज़िशन चेंज करने को बोल रही थी.पर मेरी ट्रेन रुकने का नाम ही नही ले रही थी.
काकी की ऐसी जोरदार चुदाई से मैं ज़्यादा देर खुद पर कंट्रोल नही कर पाया.
पर इतना तो कंट्रोल था कि अपना वीर्य काकी के मुँह मे डाल दूं.
लंड पक की आवाज़ के साथ गंद से बाहर आ गया. बाहर आने पर लंड ने अपने कपड़े निकाल दिए. और काकी के मुँह मे चला गया.
काकी की ऐसी हालत थी कि वो लंड चूस भी नही सकती थी.
मुझे ही काकी के मुँह मे 10 12 धक्के मार कर अपना वीर्य निकाल ना पड़ा.
काकी के मुँह से वीर्य बाहर निकल रहा था. काकी की बुरी हालत हो गयी थी.
काकी की हालत देख कर मैं ने जल्दी से यहाँ से चले जाने के फ़ैसला किया.