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मैं और मेरा परिवार

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सीमा चाची ने मुझे बड़ी चाची के बारे मे बता कर अच्छा किया.

बड़ी चाची ने बचपन से लेकर अब तक सिर्फ़ दुख ही देखा है.

पर बड़ी चाची को माँ बनाकर उनको थोड़ी खुशिया तो मिल गयी.

बड़ी चाची के बारे मे सोचते हुए मुझे नींद आ गयी.मैं पैंट पहनकर सो गया

फिर शाम को बड़ी चाची ने मुझे नींद से जगाया.

आँखे खोलते ही बड़ी चाची को सामने देख कर मैं चाची के गले लग गया.

ब चाची-क्या हुआ अवी ,बुरा सपना देखा क्या

अवी-हाँ ,

ब चाची-इतने बड़े हो गये और सपना देख कर डर रहे हो

अवी-मैं ने चाची को गले लगाया रखा

ब चाची-बहुत बुरा सपना था क्या

अवी-नही, सपना बहुत प्यारा था,आपकी तरह.

ब चाची-चल बदमाश ,अपनी चाची को डरा दिया

.चल अब फ्रेश हो जा

फिर बड़ी चाची ने मेरे सर पर किस किया और फिर मैं फ्रेश होने चला गया.

फ्रेश होने के बाद मैं हॉल मे बैठ कर चाचा और चाचियो के साथ बातें करने लगा.

चाचा ,चाचियो के साथ पूजा बुआ के घर क्यूँ गये थे ये मुझे पता नही चला.होगा कुछ काम.

फिर रात मे खाना खाने के बाद मैं कमरे मे जाकर छोटी चाची का इंतज़ार करने लगा.

छोटी चाची अपने काम ख़तम कर के अमित को चाचा के पास छोड़ कर मेरे कमरे मे आ गयी.

सी चाची-क्या कर रहे हो अवी

अवी-आपका इंतज़ार कर रहा था

सी चाची-मेरा इंतज़ार,क्यूँ

अवी-भूल गयी आप ,आप मुझे अपनी शादी के बारे मे बताने वाली हो

सी चाची-बताने वाली हू पर उस से पहले सुमन दीदी और सीमा दीदी की कहानी नही सुनोगे

अवी-नही ,मुझे आपकी कहानी सुन ना है.

सी चाची-क्यू

अवी-क्यू कि उनके बारे मे मुझे पता है

सी चाची-तुम्हें पूरी बात नही पता,

अवी-सब कुछ पता है, दोपेहर मे सीमा चाची ने बता दिया

सी चाची-दीदी ने बताया, फिर तो मेरे बारे मे भी बताया होगा

अवी-आपके बारे मे बताने वाली थी पर मैं ने सीमा चाची को रोक दिया. क्यू कि आपके बारे मे मुझे आप से सुन ना है

सी चाची-मेरी कहानी बताती हू पर पहले ये बताओ सीमा दीदी ने कहाँ तक बताया तुम्हे

अवी-सीमा चाची ने बड़ी चाची का बचपन, उनकी शादी,फिर सीमा चाची का बचपन ,फिर सीमा चाची की शादी,थोड़ा सा आपकी शादी के बारे मे भी बताया. और साथ मे ये भी बताया कि आप बहनों की तरह क्यू रहती हो

सी चाची-इतना सब कुछ बताया. चलो अच्छा हुआ मेरा काम सीमा दीदी ने कम कर दिया.

अवी-अब बस आपके बारे मे जान ना है

सी चाची-वो भी बताती हू पर पहले ये बताओ सीमा दीदी की बात सुन ने के बाद तुम ने क्या सोचा

अवी-मैं ने यही सोचा कि आप जो करती है वो सही होता है.

सी चाची-क्या किया मैं ने

अवी-आपने कहा कि बड़ी चाची को पता ना चलेगा तब तक हम चुदाई नही करेंगे. आज समझा कि आपने ऐसा क्यू कहा.

सी चाची-अच्छा हुआ तुम समझ गये

अवी-और मैं ने कल आपकी और सीमा चाची की बातें सुनी थी.

सी चाची-क्या,हमारी बातें,ये अच्छी बात नही है

अवी-सॉरी ,पर मुझे आपकी बातें सुन कर पता चला कि आप बड़ी चाची को बताने की पूरी कोशिस कर रही है. और आज सीमा चाची की बात सुन कर मैं आपको दुबारा कभी नही कहूँगा कि मुझे आपके साथ चुदाई

करनी है.

आप आराम से सही मोका देख कर बता देना .चाहे इसके लिए कितना भी समय लगे.मैं इंतज़ार करूँगा

सी चाची-(आज कही जाके मुझे सुकून मिला) ठीक है,मैं तुम्हें ज़्यादा इंतज़ार नही कराउन्गी

अवी-पता है मुझे, कि आप मुझे परेशान नही होने देगी.

सी चाची-चल वो सब छोड़ ये बता मेरी कहानी सुनेगा

अवी-हाँ

सी चाची- कहाँ से सुन ना पसंद करेगा.

अवी-बड़ी चाची और सीमा चाची की कहानी शादी से पहले से सुनी थी तो आप भी शादी के पहले से शुरू कीजिए

सी चाची-मैं तुम्हें अपने बचपन की कहानी सुनाती हू ,और शादी की, मेरी शादी के बाद की कहानी सीमा दीदी जैसी है

अवी-शुरू कीजिए ना

सी चाची-करती हू पर एक बार अमित को देख कर आती हू.

अवी-जल्दी आना

फिर छोटी चाची अमित को देखने चली गयी.

 


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छोटी चाची अमित को देख कर आ गयी. अमित चाचा के साथ सो रहा था.

चाची कमरे मे आते ही मेरे पास बेड पर बैठ गयी.

सी चाची-शुरू करू

अवी-हाँ कीजिए

सी चाची-पहले मेरी फॅमिली मे कौन कौन है वो बताती हू.

अवी-जिसका काम है उसकी बारे मे बताइए

सी चाची-मैं सब के बारे मे बताती हू.

मेरे पिताजी ने 2 शादिया की थी.

पहली माँ को 1 बेटा और 2 बेटियाँ थी.

सब से बड़ी मेरी बहन ,उसके बाद भाई और उसके बाद मैं थी.

मेरे दुनिया मे आने के बाद, माँ भगवान के घर चली गयी.

जब मुझे दुनिया मे आए हुए कुछ साल हुए थे कि माँ भगवान के पास चली गयी. मेरे लिए पिताजी को दूसरी शादी करनी पड़ी

पिताजी ने अपनी साली ,जो शादी के समय 18 साल की थी उस से शादी की

माँ की बहन मेरी माँ बन गयी.मेरी दूसरी माँ ने मुझे बहुत प्यार दिया.

जब मैं बड़ी हो गयी तो माँ मेरी दोस्त बन गयी. मेरी माँ मुझे हर बात बताती. मुझे तब ज़्यादा समझ नही थी फिर भी माँ ने मेरी बड़ी बहन की बजाय मुझे अपनी सहेली बना लिया.

मेरी दूसरी माँ को 2 बेटियाँ हुई. मैं अपनी छोटी बहनों के साथ बहुत ज़्यादा प्यार करने लगी. खेलने लगी.

कभी कभी तो ऐसा लगता कि मेरी फॅमिली मे मेरे पिताजी, माँ और हम तीन बहनें है. बड़ी बहन और मेरा बड़ा भाई तो अपनी ही दुनिया मे थे .उनको तो हमसे कुछ लेना देना नही था.

होगा भी कैसे वो मुझसे बड़े थे. मेरी बहन मुझसे 4 साल और मेरा भाई 3 साल बड़ा था.

ये थी हमारी फॅमिली.

अवी-इंट्रो तो हो गया अब कहानी शुरू करे

सी चाची-हाँ करते है.

हमारी फॅमिली के पास अपने खेत थे पर तीन साल से सूखा होने से और मेरी पहली माँ की बीमारी की वजह से वो खेत बेच ने पड़े

हम पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.

जैसे जैसे दिन बीत रहे थे वैसे वैसे मुश्किले बढ़ रही थी.

मेरे बाद और 2 बेटियाँ होने की वजह से अब घर मे खर्च बढ़ गया.

मेरे भाई ने पिताजी के साथ दूसरो के खेत मे जाना शुरू किया.

मेरी बड़ी बहन 12 क्लास तक पढ़ी थी.

अवी-12 क्लास तक ,इतनी ग़रीबी मे

सी चाची-सुनो तो

गाओं मे सेकेंडरी क्लास तक पढ़ने के लिए कुछ नही लगता. किताबें स्कूल से मिलती ,खाना भी मिलता,कपड़े भी मिलते है,स्कूल जाने के लिए साइकिल मिलती है, और खेलने के लिए भी मिल जाता. जिस से मेरी बहन सेकेंडरी क्लास तक पढ़ी.

अवी-आप अपनी बहन के बारे मे क्यू बता रही हो

सी चाची-उसी की वजह से मेरी लाइफ बदल गयी.

अवी-वो कैसे

सी चाची-तो सुनो

सेकेंडरी के बाद पढ़ना वो भी ऐसी ग़रीबी मे मुश्किल था. पर दीदी के सर ने दीदी को आगे पढ़ाने के लिए पिताजी को कहा

पिताजी ने मना किया. फिर सर ने कहा कि वो खुद पैसे लगाएँगे दीदी की पढ़ाई के लिए. सर ने पिताजी को कहा कि दीदी पढ़ने मे तेज़ है उनको पढ़ने दें

सिर क्यू पैसे लगा रहे है ये तो हमे बाद मे पता चला.

पिताजी ने दीदी को आगे पढ़ने के लिए इजाज़त दे दी. सर के पैसो से दीदी शहर जाकर पढ़ने लगी.

सर ने भी अपनी ट्रान्स्फर शहर के स्कूल जहाँ दीदी पढ़ती है वही करवा लिया.

हम तो अपने कामों मे लगे हुए थे.

हमे दीदी के बारे मे कुछ पता नही था.

सर दीदी को किताबो के साथ साथ अच्छे कपड़े भी देने लगे.

पिताजी ने एक दो बार दीदी को पूछा तो दीदी ने कहा कि पुराने कपड़े पहन कर कॉलेज गयी तो सब हँसते है.

पिताजी ने कुछ नही कहा,दीदी तो हमेशा बस से शहर जाती पर एग्ज़ॅम के समय वही शहर मे अपनी सहेली के घर रुकने के बहाना बनाती.

दीदी सहेली के घर नही सर के घर रुकती और सर के साथ चुदाई करती.

वैसे सर दीदी से 7 साल बड़े थे और उनकी अभी तक शादी नही हुई थी

जब भी दीदी एग्ज़ॅम ख़तम होने के बाद घर आती तो नये कपड़े लेकर आती.

अवी-आप सब को ये बात कब पता चली कि आपकी बहन और सर का चक्कर चालू है

सी चाची-12थ के एग्ज़ॅम के बाद भी दीदी आगे पढ़ती गयी.

सर और दीदी ने सब प्लान किया था कि कब क्या करना है. सर ने दीदी को टीचर बन ने को कहा.

दीदी ने टीचर कोर्स मे अड्मिशन ली. उसके बाद भी दीदी और सर का चक्कर चलता रहा.

दीदी टीचर बन गयी, सर ने अपनी पहचान से दीदी को उनकी के स्कूल टेआचर की जॉब दी.

दीदी शहर मे रह कर स्कूल मे पढ़ाने लगी. दीदी को अच्छे पैसे मिलने लगे. पर दीदी ने हमें एक पैसा भी नही दिया.शायद पढ़ने के लिए लोन लिया था उसे भरना होगा.

दीदी ने गाओं आना भी बंद किया.

दीदी दीवाली मे गाओं नही आई तब पिताजी ने शहर जाने का फ़ैसला किया.

जब पिताजी शहर गये तब पिताजी ने दीदी और सर को चुदाई करते हुए देख लिया.

पिताजी ने दीदी की पिटाई की और दीदी को गाओं वापस ले आए.

पिताजी ने ये बात किसी को नही बताई.

सर अच्छे थे, अच्छी जॉब थी.अगर दीदी पिताजी को कहती कि वो सर से शादी करना चाहती है तो पिताजी हाँ कर देते.

पर दीदी को सर के साथ चुदाई करते हुए देख कर पिताजी को गुस्सा आ गया. वो पिताजी ने सर के साथ दीदी की शादी करने से मना कर दिया.

अवी-फिर क्या हुआ

सी चाची- बताती हू पहले पानी तो पीने दो

चाची रशोई घर मे पानी पीने के लिए चली गयी.

 


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चाची अपनी बहन की स्टोरी क्यू बता रही है. क्या पता,शायद कुछ होगा तभी बता रही है

चाची पानी पीकर आ गयी

सी चाची- कहाँ थी मैं

अवी-आपके पिताजी गुस्सा हो गये

सी चाची-हाँ, मेरे पिताजी गुस्सा हो गये,

उसके बाद 1 हफ़्ता दीदी को घर मे रखा .

1 हफ्ते के बाद एक दिन सब मार्केट गये थे.घर पर मेरी दीदी, मेरा भाई और मैं थी.

भाई ने मुझे कहा कि मैं बीड़ी पी कर आता हू तुम घर पर रहना. दीदी को कही जाने मत देना

मुझे दीदी के बारे मे कुछ पता नही था. मैं ने भाई को हाँ कहा, भाई चला गया.

भाई के जाते ही सर आ गये. मुझे सर और दीदी के बारे मे कुछ पता नही था.

सर हमारे घर अक्सर आते रहते थे इस लिए मुझे सब नॉर्मल लगा

सर ने मुझे मिठाई खाने के लिए दी. मैं छोटी थी जिस से मिठाई देखते ही मुँह मे पानी आ गया.

मैं मिठाई खा रही थी और सर ने दीदी के बारे मे पूछा मैं ने बता दिया कि दीदी अंदर है.

इतना बोलते ही मुझे नींद आ गयी. सर ने मिठाई मे नींद का पाउडर डाला था.

मेरे सोते ही सर दीदी को अपने साथ भगाकर ले गये.

जब भाई आया और मुझे सोता हुआ देख कर ,उसे शक हुआ उसने घर मे दीदी को देखा .पर दीदी तो सर के साथ उड़ गयी थी.

दीदी को घर मे ना देख कर भाई ने मुझे उठया,,मैं सो रही थी ,जिस की वजह से भैया ने मेरे उपर पानी डाला. मिठाई ज़्यादा नही खाई थी जिस की वजह से मुझे होश आ गया पर सर भारी लग रहा था आँखे भारी थी ,

मेरे होश मे आते भैया ने पूछा कि दीदी कहाँ है.

मैं ने कहा मुझे क्या पता, अंदर होगी

अंदर नही है, मेरे जाने के बाद कौन आया था.

सर आए थे मिठाई लेकर,मिठाई खाते ही मुझे नींद आ गयी.

सर का नाम सुनते ही भाई ने मुझे ज़ोर दार थप्पड़ मारा और मार्केट की तरफ भागने लगे.

मैं भी रोते हुए भाई के पीछे पीछे भागने लगी.सारा गाओं हमे भागते हुए देख कर बातें करने लगा कि क्या हुआ है

भाई ने मार्केट जा कर पिताजी को बता दिया कि दीदी भाग गयी. पिताजी ने भाई को बस स्टॉप पर जाने जो कहा और खुद घर आ गये.

पिताजी ने आजू बाजू के घर मे पूछा उन्हो ने बताया कि आपकी बेटी को सर के साथ भागते हुए देखा.

पिताजी ने मुझे देखा और मेरे गाल पर थप्पड़ मारना शुरू किया. मिठाई चाहिए,ये ले मिठाई खा और थप्पड़ मारते गये और मैं रोती गयी.

माँ ने पिताजी को रोक दिया. और कहा कि इस मे इसकी क्या ग़लती है.

ये भी बड़ी होकर अपना मुँह काला कर देगी.

सब मुझको गुनहगार मान रहे थे. मुझे तो पता भी नही था कि मुझे थप्पड़ क्यू मारा गया है.

अवी-तो आपने बिना ग़लती के मार खाया

सी चाची-ग़लती, जाने दो पर उस दिन के बाद मैं ने फ़ैसला किया कि मैं हर काम सोच समझ कर करूँगी.ठंडी टी भी फुक कर पीउँगी.

अवी-तो इस तरह आप इतनी स्मार्ट बन गयी

सी चाची-हालत ने बना दिया.

अवी-तो क्या दीदी मिल गयी

सी चाची-हाँ, सर और दीदी दूसरे दिन गाओं मे वापस आ गये. शादी करके.

पिताजी को झटका लगा. पिताजी ने दीदी को घर से निकाल दिया.

और सारी ग़लती मुझ पर डाल दी.

हमारी फॅमिली की लड़की भाग गयी ये बात पूरे गाओं मे फैल गयी.

हमारा तो घर से निकलना बंद हो गया.

सिर्फ़ पिताजी और भाई घर के बाहर जाते.

अवी-फिर आपने पढ़ाई पूरी कैसे की

सी चाची-1 साल के बाद पिताजी ने पड़ोसी के घर जाने की इजाज़त दी.

वही जाकर अपनी सहेली की किताबें पढ़ने लगी.

फिर 17 नंबर का फॉर्म भर कर बीमार होने का कारण बता कर छुप के छुप एग्ज़ॅम दिया.

पिताजी सुबह जाते और शाम को आते जिस से मैं एग्ज़ॅम दे पाई. पर ये बात माँ को पता थी.

दीदी के इतना करने के बाद अगर पिताजी को पता चलता की मैं स्कूल जाती हू तो मेरी तो जान ले लेते.

अवी-बाकी की पढ़ाई और एग्ज़ॅम

सी चाची-वो भी सहेली की किताबें पढ़कर 12 थ की एग्ज़ॅम जान मुट्ठी मे रख कर पिताजी के काम पर जाने के बाद सहेली के साथ जाकर दी.

इसमे माँ ने मेरा बहुत साथ दिया.

और 12थ के बाद आगे की पढ़ाई शादी के बाद की

अवी-जान मुट्ठी मे रख कर पढ़ने की वजह से आप इतनी स्मार्ट हो

सी चाची-तुम्हें एक बता बताऊ

अवी-हाँ बताइए

सी चाची-पता नही लड़कियाँ भाग क्यू जाती है मुझे तो लगता है वो बहुत बड़ी ग़लती करती है.

वो अपनी ज़िंदगी जीने के लिए भाग जाती है पर उसके भाग जाने के बाद उसके भाई बहनों की ज़िंदगी नरक की तरह होती है.

लड़की के भाग जाने के बाद उसके भाई बहनों कि ज़िंदगी एक तरह से ख़तम हो जाती है.

उसके माता पिता कभी सर उठा कर नही जी पाते. वो तो जीते जी मर जाते है.

लड़की भाग कर अपनी ज़िंदगी जीना चाहती है पर उसके भाग जाने से उसके पीछे कितनी ज़िंदगी बर्बाद हो जाती है ये कभी नही देखती.

लड़कों का तो चल जाता है पर लड़की भाग गयी तो सब कुछ ख़तम हो जाता है.

लड़का माता पिता का सहारा होता है पर लड़की उनकी इज़्ज़त होती है.सहारा चला जाए तो हम गिर जाते है पर गिरने के बाद फिर खड़े हो सकते है. पर इज़्ज़त चली गयी तो दुबारा कमाना मुश्किल होता है

मेरी बहन सर के साथ भाग गयी. सर ने मेरी बहन को पढ़ाया ,जॉब दिलाई, अगर दीदी ने पिताजी को पूछ लिया होता तो वो मना नही करते.

माता पिता कभी बच्चों का बुरा नही चाहते पर बच्चे ये बात नही समझते उनको लगता है माता पिता उनका प्यार छीन रहे है.

2 दिन का प्यार....

अवी-हाँ बताइए

सी चाची-जब दीदी की शादी हुई तब मैं क्लास मे थी. दीदी के भाग जाने के बाद हमारी आज़ादी छीन ली गयी.

हम से ज़्यादातर लोगो ने रिस्ता तोड़ दिया. हम गाओं मे अकेले पड़ गये.

अवी-फिर क्या हुआ

सी चाची-दीदी की शादी के 2 साल बाद भाई के लिए लड़की देख रहे थे.

पर जो भी लड़की पसंद आती ,उसके माता पिता गाओं मे आकर हमारे और भाई के बारे मे पूछते तो उनको दीदी के भाग जाने के बारे मे पता चल जाता .और वो शादी करने से मना कर देते.

उसके बाद और 2 साल भाई के लिए लड़की ढूँढने मे चले गये पर भाई की शादी नही हुई.

पिताजी को टेन्षन आने लगा कि लड़के की शादी करने मे इतनी मुश्किल हो रही है तो अपनी 3 बेटियो की शादी कैसे करेंगे.

ना गाओं से कोई मदद मिल रही थी और ना पिताजी दीदी से मदद लेना चाहते थे.

दीदी कभी कभी हम से मिलने आती थी पर पिताजी ने उसको मिलने नही देते.

हम थक गये थे. पिताजी तो टूट गये थे,

भाई की शादी ना होने से वो भी उदास रहने लगे

फिर एक ही रास्ता था वो था भगवान का ,हम ने मंदिर मे जाकर पूजा की पर कुछ नही हुआ.

फिर हमे इस गाओं के मेले के बारे मे पता चला.

पर ये गाओं तो बहुत दूर था. ट्रेन से आने के लिए पूरी रात लग जाती.

फिर भी पिताजी ने यहाँ आने का फ़ैसला किया. पूरी फॅमिली के साथ यहाँ मेले मे आने का फ़ैसला किया

चाची बता रही थी कि चाचा ने चाची को आवाज़ दी. अमित उठ गया था. शायद उसे भूक लगी थी.

चाची भागते हुए अपने कमरे मे चली गयी.

और मैं चाची ने अब तक जो बताया है उसके बारे मे सोचने लगा

 
457

चाची इस बार अमित को अपने साथ ले आई.

अमित दूध पी रहा था और हम ने बातें शुरू की.

अवी-आप के पूछने से पहले मैं बताता हू कि आप मेले मे फॅमिली के साथ आने वाली थी

सी चाची-हाँ हम लंबा सफ़र तय करके इस गाओं मे आ गये.

यहाँ आने पर देखा यहाँ तो बहुत भीड़ थी. हम मेले के बीच के दिनो मे आए थे.

जिस से हमे रुकने के लिए जगह नही मिली,एक तरफ जंगल था और दूसरी तरफ गाओं और जो जगह बची थी वहाँ लोगो ने अपना डेरा डाल दिया था. हम जगह देख कर थक गये

एक तो मंदिर जंगल मे था और दूर दूर तक लोगो ने अपने रहने के लिए जगह बना ली थी.

हम परेशान हो गये. हमे परेशान देख कर तुम्हारे दादाजी हमारे पास आ गये.

दादाजी-क्या हुआ, कोई परेशानी है

मेरे पिताजी ने उनकी तरफ देखा

पिताजी-हाँ ,पर आप कौन हो

दादाजी-मैं इसी गाओं मे रहता हू. मेले मे देख रेख करना मेरा काम है

पिताजी-अच्छा हुआ आप मिल गये.

दादाजी-मुझे बताइए क्या हुआ

पिताजी-हमे रहने के लिए जगह नही मिल रही है

दादाजी-आप ग़लत समय पर आए हो ,इस समय मे तो जगह मिलना मुश्किल होता है. पर आप टेन्षन मत लो मैं देखता हू

पिताजी-आपकी मेहरबानी होगी.

तुम्हारे दादाजी ने हमे रहने के लिए अपने घर मे एक कमरा दिया. क्यू की जगह मिलना मुश्किल था.

हम सब एक कमरे मे रुक गये.

हम मेले मे जितने दिन रुके थे उतने दिनो में तुम्हारे दादाजी ने हमारे बारे मे पता कर लिया.

दादाजी को मेरा नेचर बहुत पसंद आ गया.

सुमन दीदी और सीमा दीदी ने हमारी बहुत खातिर दारी की

जिस दिन हम वापस आने के लिए तय्यार हो रहे थे कि दादाजी आ गये

दादाजी-आप लोगो के साथ दिन कैसे निकल गये पता नही चला

पिताजी-हमे भी. आपने जो हमारे लिए किया उसके लिए शुक्रिया.

दादाजी-वैसे आप जिस लिए आए थे वो काम हो गया

पिताजी-हो जाएगा. हमारी किस्मत बदलना मुश्किल है

दादाजी-मैं बदल सकता हू आपकी किस्मत

पिताजी-वो कैसे

दादाजी-आप मुझे आपकी समस्या बताइए

पिताजी ने दादाजी को दीदी की कहानी बता दी.

पिताजी-हमारे पास ना खेत है और ना मेरे बेटे की शादी हो रही है. और ना मेरी बेटियो की

दादाजी-इतनी सी बात, रुकिये अभी कुछ करता हू

दादाजी ने मेरे पिताजी को खेत लेने के लिए पैसे दिए.

पिताजी-ये मैं नही ले सकता

दादाजी-ले लीजिए, और दादाजी ने बाहर जो लड़की अपने माता पिता के साथ खड़ी थी उसको आवाज़ दी. ये लीजिए आपकी बहू

पिताजी-ये कौन है

दादाजी-ये इसी गाओं मे रहते है. लड़की अच्छी है. आप कुछ मत कहिए बस हाँ कर दीजिए

पिताजी-पर

दादाजी-पर वर छोड़िए, और अब आपकी बेटियो की बात तो 2 तो बहुत छोटी है .पर जो बड़ी है उसे मैं अपनी बहू बना लूँगा. और बाकी बेटियो की शादी करने का वचन देता हू

पिताजी-आपके बेटे की तो 2 शादिया हो चुकी है.

दादाजी-तो क्या हुआ. आपको तो पता है मेरे बेटे को बेटा नही हुआ है .आपकी बेटी का नेचर मुझे पसंद आया अब आप सोचिए क्या करना है.

पिताजी-आप इस लड़की की शादी अपने बेटे के साथ क्यू नही करवाते

दादाजी-वो इसी गाओं की लड़की है ,इसके साथ शादी नही करा सकता.

पिताजी-मुझे सोचने के लिए टाइम चाहिए.

दादाजी-ज़्यादा सोचेंगे तो सब बिगड़ जाएगा. आपके बेटे को अपने गाओं मे लड़की मिलना मुश्किल है. और मैं तो आपकी छोटी बेटियो की शादी भी करवा दूँगा.

पिताजी-मुझे अपनी बेटी से एक बार बात करनी है

दादाजी-कीजिए

पिताजी मेरे पास आ गये

पिताजी-बेटी तुम ने सुना वो क्या कह रहे थे

सी चाची-सुना मैं ने

पिताजी-मुझे तो लगता है तुम्हे उनके बेटे से अच्छा पति नही मिलेगा.तुम्हारा क्या फ़ैसला है. तुम्हारी बहन ने तो ग़लत फ़ैसला लेकर हमारी ज़िंदगी बर्बाद कर दी .अब आबाद करना तुम्हारे उपर है

सी चाची-मैं शादी करने के लिए तय्यार हू

पिताजी-तुम्हें पता है ना उनके बेटे की 2 शादी हो चुकी है

सी चाची-हाँ पता है.

दीदी की वजह से हमे ऐसे दिन देखने पड़ रहे है.अब मैं ने ना किया तो हमारी किस्मत नही बदलेगी.

मेरे हाँ करने से हमारे खेत वापस मिल जाएगे. भाई की शादी हो जाएँगी ,मेरी छोटी बहनों की शादी हो जाएगी. इस से ज़्यादा हमे क्या चाहिए. हमारा यहाँ आना सफल हो गया. आप हाँ कर दीजिए

पिताजी-एक बार और सोच लो

सी चाची-बस आप हाँ कर दो

पिताजी-हम तय्यार है

दादाजी-ये तो अच्छी बात है. हम कल ही आपके बेटे और बेटी की शादी करा देते है

पिताजी-कल

दादाजी-ये तो अच्छी बात है. हम कल ही आपके बेटे और बेटी की शादी करा देते है

पिताजी-कल

दादाजी-हाँ, अच्छे काम के लिए देर नही करनी चाहिए

छोटी चाची-फिर अगले दिन मेरी शादी हो गयी.और मेरे भाई की भी शादी हो गयी

 
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अवी-तो इस तरह आपकी शादी हुई

सी चाची-हाँ

अवी-सच सच बताना क्या आप शादी कर के खुश थी

सी चाची-नही

अवी-क्यू?

सी चाची-कोई लड़की क्या चाहती है. उसका पति सिर्फ़ उसका हो. पर यहाँ तो मेरा नंबर 3र्ड था.

अवी-तो क्या अब भी आप खुश नही हो

सी चाची-पहले ऐसे लगा था. पर सुमन दीदी और सीमा दीदी के प्यार के सामने मैं सब कुछ भूल गयी. बाद मे तुम मिल गये. अब अमित मिल गया. इतना अच्छा घर मिला. मान सम्मान मिला.

मेरे भाई की शादी हुई वो खुश है, मेरी छोटी बहनों की शादी अच्छे घर मे हो गई,हमारे खेत वापस मिल गये, पिताजी को उनकी इज़्ज़त वापस मिली, हमारी फॅमिली अब अच्छी हालत मे है. मेरा भाई बाप बन गया. मेरी माँ खुश है.

इतना कुछ मिला मुझे, मेरी वजह से इतना कुछ हुआ.

हाँ मेरे कुछ सपने थे पर मुझे अपने सपनो से ज़्यादा मिला.

मेरी बहन ने 1 घर को तोड़ा और 1 बसाया,मैं ने 2 घर बसाए.

कभी कभी आपको अपने अरमानो को भूल ना होता है. और जो ऐसा करता है उसे हमेशा ख़ुसीया मिलती है.

मुझे तुम्हारे जैसा पति चाहिए था. तब नही मिला पर अब तुम मिल गये.

अवी-आप ग्रेट हो

सी चाची-ग्रेट नही बस मैं ने अपनी फॅमिली के लिए अपने सपने तोड़ दिए और उसके बदले मे मुझे वो मिला जो मैं ने कभी सोचा नही था.

अवी-तो आपके लिए ये मेला बहुत मायने रखता है

सी चाची-हाँ

अवी-आपकी फॅमिली आएगी मेला देखने

सी चाची-मेरी भाभी फिर से माँ बनने वाली है जिस की वजह से नही आ सकती,मेरी वो फॅमिली नही आई तो क्या हुआ ये फॅमिली तो है

अवी-आपकी भाभी को कितने बच्चे है.

सी चाची-3र्ड टाइम माँ बन रही है. पर

अवी-पर क्या

सी चाची-पहली बार जब माँ बनी वो तुम्हारे दादाजी की वजह से

अवी-मतलब मैं समझा नही

सी चाची-जब भाभी की शादी हुई तो वो प्रेग्नेंट थी ,तुम्हारे दादाजी ने उसे माँ बनाया था.

अवी-तो क्या दादाजी ने अपना पाप छुपाने के लिए उसे आपकी भाभी बनाया.

सी चाची-हाँ, लेकिन कुछ भी हो इस सब से हर कोई खुश था.तुम्हारा दादाजी ने सब को खुशी दी.

अवी- मेले के बाद शादी कर के जब आप गाओं गयी तब आपको पता चला.

सी चाची-कभी गाओं जाने का मोका नही मिला,

अवी-फिर आपको कैसे पता.

सी चाची-जिस दिन पिताजी और दादाजी की बात हुई उसके बाद दादाजी ने मुझे अकेले मे ये बात बताई ,और कहा कि शादी करने से मना करना हो तो कर सकती हो.

तुम्हारे दादाजी ये बात छुपा सकते थे. पर उन्होने ऐसा नही किया. मुझे ये बात अच्छी लगी .मैं ने एक बार सब के तरफ देखा ,सब के चेहरे पे खुशी थी. उस लड़की के साथ उसके माता पिता. मेरी फॅमिली, तुम्हारे दादाजी. चाचा चाची. सब खुश थे. उनकी खुशी मेरे एक फ़ैसले पर डिपंड थी. और मैं ने हाँ कर दिया.

अभी तक मेरे भाई को लगता है कि उनकी पहली बेटी उनकी है.

अवी-(मैं तो दादाजी के नक्शे कदम पर चल रहा हू. मैं ने बात चेंज की) मुझे एक बात समझ नही आई.

सी चाची-कौनसी बात

अवी-अगर दादाजी चाचा की शादी उस लड़की से करते तो चाचा बाप बन जाते ,घर मे अपना खून रहता ,

सी चाची-ये भी सही था, पर ऐसा करने से गड़बड़ हो जाती.

अवी-कैसी गड़बड़

सी चाची-दादाजी ने गाओं की औरतो के साथ बहुत मस्ती की है. पर घर की औरतो पे कभी बुरी नज़र नही डाली, अगर तुम्हारे चाचा की शादी उस लड़की से होती तो वो लड़की तुम्हारे दादाजी के साथ चुदाई करती रहती और ये तुम्हारे दादाजी कभी नही करना चाहते थे

वो लड़की इसी गाओं की है ,लोगो को कभी ना कभी कही ना कही से पता चल जाता

उस लड़की के माता पिता यही रहते है जिस से उनका यहाँ आना जाना बढ़ जाता.

दादाजी तो ठाकुर के साथ मिल कर मस्ती करते थे, क्या पता इसके साथ भी मिलकर मस्ती की हो ,फिर तो

तुम समझ गये ना.

अवी -समझ गया. तो वो आपकी भाभी बनी .

सी चाची-हाँ,

अवी- फिर शादी के बाद आप की अपनी बहन से कभी बात हुई

सी चाची-नही,पर एक बार ज़रूर मिलूंगी अपनी बहन को

अवी-ज़रूर मिलना और बताना कि आप ने क्या कमाया और उसने ,

सी चाची-ऐसा नही करूँगी. उस को सिर्फ़ इतना पूछूंगी कि उसने पिताजी को एक बार पूछा क्यू नही.सर के प्रपोज़ करने के बाद पिताजी से बात करती .पिताजी उसकी शादी के लिए हाँ कर देते .

पर उससे पहले पिताजी ने वो देखा जो कोई पिता देखना नही चाहता. कोई भी पिता अपनी बेटी को किसी और के साथ चुदाई करते हुए देखेगा तो गुस्सा होगा ही.

दीदी को आराम से उनसे बात करनी चाहिए थी. पिताजी एक ना एक दिन मान जाते ,सर के लिए मना नही करते .पर मेरी दीदी ने ऐसा ना करते हुए भाग कर शादी की, एक बार तो पिताजी को समझाकर देखती, एक बार तो हमारे बारे मे सोचती. वो टीचर थी. अगर उसने ऐसा किया तो वो क्या अपने स्टूडेंट सीखा पाएँगी.

अवी-जाने दो ,वैसे आज एक बात मुझे पता चली

सी चाची-क्या?

अवी-यही कि मेरी तीनो चाची जैसा कोई नही है.

सी चाची-मुझ से ज़्यादा सुमन दीदी है. उनकी वजह से सब कुछ हो पाया

अवी-वो तो है

सी चाची-और कुछ पूछना है

अवी-हाँ

सी चाची-पूछो जल्दी,अमित दूध पीते हुए सो गया

अवी-क्या मुझे एक किस मिलेगी.

सी चाची-मैं दूं या तुम लोगे

अवी-आप दो

सी चाची-अपनी आँखे बंद करो

आँखे बंद करने के बाद छोटी चाची ने मुझे किस किया.

सी चाची-मुझे तुम्हारी हर बात पसंद आती है.

अवी-क्या?

सी चाची-कुछ नही ,चल सो जा ,कल ठाकुर के घर पे जाना है

फिर छोटी चाची अपने कमरे मे चली गयी.

बड़ी चाची और छोटी चाची ने बहुत मुश्किलो का सामना किया है. सीमा चाची भी तो मुस्किलो मे पैदा हुई है

 


459

कल तीनो चाची की कहानी सुनकर चाचियो के लिए मेरा प्यार और बढ़ गया.

सुबह सुबह बड़ी चाची ने मुझे जगाया.

और ठाकुर की हवेली जाने के लिए तय्यारी करने को कहा.

ब चाची-अवी उठो हमे ठाकुर की हवेली जाना है

अवी-इतनी सुबह.

ब चाची-हवन 9.00 बजे शुरू होगा हमे जल्दी जाना होगा

अवी-वाहा कब तक रुकना है

ब चाची-शाम तक.

अवी-कौन कौन आएगा.

ब चाची-हम सब और तुम्हारी बुआ.अब उठो फ्रेश हो जाओ

मैं उठ कर फ्रेश होने चला गया.

हम सब 7.00 बजे हवेली जाने के लिए तय्यार हो गये.

रति ने हवेली आने से मना किया, मुझे पता था कि रति ने ऐसा क्यू किया.

फिर हम सब हवेली की तरफ निकल पड़े.

ठाकुर की हवेली का क्या कहना. लाखों मे एक थी. हम सब तो देखते रह गये.

मैं इधर कई बार आया था पर जब भी देखूं तो हवेली नयी लगती थी.

कोमल तो हवेली देख कर खुश हो गयी. घर और किताब से आज कोमल बाहर निकली थी

कोमल-मैं तो पहले हवेली देखूँगी

अवी-जो भी करना है कविता और लीना को साथ रख कर करना

कोमल-उनको क्यूँ

अवी-जितना कहा है उतना करो ,

कोमल-चिल्ला क्यू रहे हो

अवी-चिल्ला नही बता रहा हू.

कोमल-ऐसे कोई बताता है

अवी-प्लीज़ कविता और लीना के साथ मिल कर काम करना

कोमल-ये तो पता है मुझे,मम्मी ने भी यही कहा था.

अवी-(ये ठाकुर साब का छोटा बेटा उसका पहले कुछ करना होगा.) बुआ ने कहा. फिर ठीक है

कोमल-चलो अब ,सब अंदर गये है

मैं कोमल के साथ हवेली मे चला गया.हवेली बाहर से जितनी संदर थी अंदर से उतनी आलीशान थी.

हवेली की हर एक चीज़ देखने लायक थी.

हम थोड़ी देर हवेली को देखते रहे.

हमारे आने की खबर ठाकुर और ठकुराइन हो हो गयी.

ठाकुर और ठकुराइन हम से मिलने के लिए हॉल मे आ गये. ठाकुर और ठकुराइन के आते ही सब ने उनको नमस्कार किया. मैं ने ठाकुर और ठकुराइन के पैर छुए

ठाकुर-इस की क्या ज़रूरत है.तुम भी तो अपने ही हो

ठकुराइन-सुमन तुमने अपने भतीजे को अच्छे संस्कार दिए है

ठकुराइन की बात सुन कर बड़ी चाची खुश हो गयी.

ब चाची-सब आपके आशीर्वाद का असर है.

फिर चाचा जी ठाकुर के साथ बैठ कर बातें करने लगे. चाची और बुआ ठकुराइन के साथ बैठ कर बातें करने लगी.

कोमल,कविता,लीना और राज हवेली देखने लगी.

मैं अकेला सोफे पर बैठ कर हवन की तय्यारी कैसे हो रही है उसको देखने लगा.

ठाकुर के बेटे और बहू और बेटी अपने अपने कमरे थे.

ब चाची-आपकी बहू कहीं दिखाई नही दे रही है

ठकुराइन-वो अपने कमरे मे हवन के लिए तय्यारी कर रही है

ब चाची-आपकी बेटी

ठकुराइन-वो अपने कमरे मे है.सुमन एक काम उपर जाके बहू को तय्यार होने मे मदद कर

ब चाची-मीना

सी चाची-जी दीदी

ब चाची-नीता के साथ उपर जा और बड़ी बहू और छोटी बहू को तय्यार होने मे मदद करो

छोटी चाची ने अमित को पूजा बुआ के पास रखा और नीता बुआ के साथ ठकुराइन की बहू को तय्यार करने के लिए चली गयी.

मैं सोफे पर बैठ कर हवेली को देखने लगा

ठकुराइन-तुम अकेले क्यू बैठ हो

ब चाची-क्या हुआ अवी

अवी-कुछ नही. बस हवेली को देख रहा था.

ठकुराइन-यहाँ बैठने से अच्छा है हवेली मे घूम लो और उपर रणजीतसिंघ मिल जाए तो नीचे बुला लेना

ब चाची-जाओ अवी हवेली देख लो

मैं उपर जाकर हवेली को देखने लगा. हवेली की संदरता को अपनी आँखे मे क़ैद करने लगा.

कोमल नीचे और बाहर बगीचे में घूम रही थी.

मैं उपर जाकर हवेली को देखने लगा.

हवेली के कमरे और गेट भी हवेली की तरह बड़े थे.

मैने उपर जाकर पहले कमरे के गेट को नॉक किया.मैं गेट के पास खड़ा था पर अंदर से कोई रेस्पॉन्स नही दे रहा था.

बाहर से पता नही चल रहा था कि कमरा खुला है या बंद है.

फिर मैं ने गेट को धक्का दिया. गेट खुल गया. कमरे मे कोई नही था.

तो ये कमरा खाली था. फिर मैं ने दूसरा कमरा देखा वो भी खाली था.

फिर मैं हवेली की दूसरी विंग मे गया.अब मैं हवेली की साउत की तरफ वाले विंग मे था. और वहाँ के गेट को नॉक करने की बजाय धक्का दिया.

गेट खुल गया. अंदर छोटी चाची,नीता बुआ,और ठकुराइन की दोनो बहू थी.

छोटी चाची और नीता बुआ ठकुराइन की बहू को तय्यार कर रही थी.

ठकुराइन की बहू उपर से नंगी थी.एक बहू ने सिर्फ़ ब्रा पहन रखी थी. और दूसरी बहू ब्लाउस पहना था पर ब्लाउस के हुक नही लगाए थे.उनकी ब्रा भी दिख रही थी.

मैं गेट खोलने के बाद ठकुराइन की बहू को देखता रहा. ब्रा मे क़ैद बूब्स क्या कहूँ दोनो बहू के बूब्स बढ़िया दिख रहे थे

एक बहू जो ब्लाउस मे थी उसके बूब्स बड़े थे .मतलब उसके बूब्स दूध से भरे हुए थे. यानी की ये छोटी बहू रेशमा है.

और जो ब्रा मे थी वो बड़ी बहू कामिनी है.

बड़ी बहू-ये कौन हो तुम और अंदर कैसे आए.

मैं तो बस उसके बूब्स को घूरता रहा.

सी चाची-ये मेरा भतीजा है, बड़ी बहू

बड़ी बहू-तुम्हारा भतीजा ,पर ये बिना नॉक किए अंदर कैसे आया और अब ये बाहर जाने के बजाय खड़ा क्यू है

सी चाची-मेरी ग़लती है मैं ने गेट बंद नही किया. अवी बाहर जाओ

अवी-सॉरी

और मैं कमरे से बाहर आ गया.

मुझे गेट पर नॉक करना चाहिए था पर जाने दो इसी बहाने से ठाकुर की बहू के बूब्स देखने को मिल गये

फिर मैं दूसरे कमरे मे गया और गेट पर नोक किया.तो अंदर से गुस्से मे आवाज़ आई कौन है.

मैं बिना कोई जवाब दिए दूसरे विंग मे चला गया. शायद वो कुवर सिंग होगा. ठाकुर का छोटा बेटा

अब मैं वेस्ट विंग मे था.इधर भी 2 कमरे थे, पहले कमरे का गेट खुला हुआ था. अंदर कोई नही था.

फिर मैने दूसरे कमरे के पास जाकर गेट नॉक किया तो अंदर से आवाज़ आई. कहा ना मैं आ रही हू फिर बार बार बुलाने क्यू आ रहे हो. माँ को कहो कि मैं आधे घंटे मे नीचे आती हू

तो ये कमरा ठाकुर की बेटी पायल का था.

गेट पर नोक करने का फ़ायदा नही हुआ पर बिना नोक किए अंदर गया था तो ठाकुर की बहू के बूब्स देखने मिल गये.

अब आख़िरी विंग थी नॉर्थ विंग. यहाँ पर मैं बिना नॉक किए कमरे मे जाउन्गा क्या पता कोई मिल जाए.

 


460

नॉर्थ विंग मे भी 2 कमरे थे .मैं पहले कमरे मे चला गया वहाँ पर कोई नही था.

ठाकुर की हवेली के कमरो मे जब कोई अंदर हो तभी बंद रहते है. ऐसे समय पर कमरा खुला रहा था.

फिर मैं आख़िरी कमरे के पास चला गया.कमरा खुला था ,पर गेट लगा हुआ था.

मैं ने ज़ोर से गेट खोल दिया. और अंदर चला गया .

अंदर जाते ही मैं शोक्ड हो गया. ये कमरा स्टोर रूम की तरह था. इस मे समान रखा हुआ था.

मैं समान देख कर शॉक्ड नही हुआ बल्कि सामने का नज़ारा देख कर शॉक्ड हुआ.

सामने एक आदमी एक औरत की साड़ी उपर करके घोड़ी बना कर चुदाई कर रहा था.

ये तो रंजीत सिंग है ठाकुर के बड़ा बेटा. और वो औरत कौन है.

उस औरत के कपड़े देख कर लग रहा है कि वो हवन करने जो पंडित आए है उनके साथ आई होगी.

और उपर हवन के लिए समान लेने आई हो और रंजीत सिंग ने उसे पकड़ कर चुदाई करना शुरू किया होगा.

मुझे देखते ही वो औरत खड़ी हो गयी. और अपनी साड़ी नीचे कर ली. रंजीत सिंग ने अपना लंड अंदर कर लिया.

वो औरत शरमा कर और डर के मारे यहाँ से जाना चाह रही थी पर गेट के पास मैं था जिस से वो कमरे की दूसरी तरफ चली गयी.

रणजीतसिंघ-कौन हो तुम और ऐसे अंदर कैसे आ गये,रूको तुम तो उस दिन वाले लड़के हो जिसका हमारे कार से आक्सिडेंट हुआ था

अवी-हाँ

रणजीतसिंघ-तुम यहाँ क्या कर रहे हो

अवी-वो मैं आपको नीचे बुलाने आया था

रणजीतसिंघ-कौन बुला रहा है

अवी-ठकुराइन

रणजीतसिंघ-ठीक है. उन से कहो मैं अभी आता हू

अवी-जी

रणजीतसिंघ-और सुनो इस कमरे मे क्या हो रहा था वो किसी को बताना मत

अवी-ऐसी बातें बताई कहाँ जाती है. आप बेफिकर हो जाइए मैं किसी को नही बताउन्गा

रणजीतसिंघ-तुम तो बड़े समझदार हो.तुम ने अपना नाम क्या बताया था

अवी-अवी

रणजीतसिंघ-अवी तुम तो समझदार हो पर तुम ने बीच मे आकर काम खराब कर दिया

अवी-मैं चला जाता हू आप लगे रहो

रणजीतसिंघ-अब पूरा जोश ख़तम हो गया. अब करके मज़ा नही आएगा.

अवी-वो तो है

रणजीतसिंघ-तुम ने कभी किया है

अवी-नही

रणजीतसिंघ-कोई बात नही. अगर दुबारा मिले तो तुम्हे भी मज़ा कराउन्गा.अब चलो नीचे

अवी-आप चलिए मैं समान लेकर आता हू

रणजीतसिंघ-ठीक है

और रंजीत सिंग नीचे चला गया. अब कमरे मे मैं और वो औरत थी जो अंदर छुप गयी थी.

मुझे तो कोई सामान नही लेना था. मैं तो उस औरत के साथ मज़ा करूँगा. अगर काम बन गया तो.

मैं ने गेट अंदर से बंद किया और कमरे मे उस औरत को ढूँढने लगा.

वो औरत अंदर छुपी हुई थी. मैं उसके पास चला गया.

वो मुझे अपने पास देख कर डर गयी.

अवी-कौन हो तुम

पंडिताइन-मैं... वो... हवन...

अवी-तुम्हें डर नही लगा ऐसा काम करते हुए

पंडिताइन-वो...मुझे माफ़ कर दो..मुझे जाने दो पंडित जी मेरा इंतज़ार कर रहे होगे

अवी-ऐसे कैसे जाने दूं, थोड़ा मुझे भी मज़ा करने दो

पंडिताइन-मुझे जाने दो,

अवी-(ये तो डर गयी है इसके साथ कुछ करने मे मज़ा नही आएगा)ठीक है जाओ पर मेरा एक काम करो

पंडिताइन-क्या करना होगा

अवी-अपनी चूत दिखाओ,

पंडिताइन-नही,

अवी-(जाने दे इसे कही गड़बड़ ना हो जाए) ठीक है मत दिखाओ .जाओ नीचे

मेरी बात सुनकर वो खड़ी हो गयी.

अवी-अब जल्दी दिखाओ ,नही तो...

उसने अपनी साड़ी उपर करना शुरू किया ,उसे लगा होगा कि अगर उसने मुझे चूत नही दिखाई तो मैं उसे जाने नही दूँगा.

अवी-(जाने दे बहुत टाइम पास कर लिया ,बहुत डरा लिया.) रहने दो,जाओ तुम नीचे

वो मेरी तरफ देखने लगी

अवी-जल्दी जाओ नही तो ...

वो कमरे से बाहर चली गयी.मैं भी उसके पीछे पीछे चला गया.

अवी-रूको

वो रुक गयी

अवी-(मैं ने इसे पहले भी देखा है पर याद नही आ रहा ) अपना नाम तो बता दो

पाड़िटाइन-मुझे सब पंडिताइन कहते है.

मैं उसके पास चला गया.

अवी-(ये पंडिताइन तभी मुझे लग रहा था कि मैं ने इसे कही देखा है) तो पंडिताइन मेरे शंख की पूजा कब करोगी

मेरी बात सुन कर उसका डर चला गया. और वो मेरी तरफ देख कर मुश्कुरा कर नीचे चली गयी.

अगर आज मेरे पास कॉंडम होता तो पंडिताइन की चूत फाड़ देता. रणजीतसिंघ से माँग भी नही सकता था ,वो मामी वाले कॉंडम भी शहर वाले घर2 मे रह गये.

कल शहर जाकर पहले कॉंडम खरीद लूँगा. क्या पता मेले मे कितने काम आ जाए.

कॉंडम ना होना तो बहाना था,दिल और लंड को मनाने के लिए. मेरे लंड को कुछ दिन आराम चाहिए .अभी जल्द बाज़ी करना ठीक नही था.

फिर मैं भी नीचे आ गया.

 


461

हवन के लिए सब नीचे आ गये. ठकुराइन की 2 बहू और बेटे भी आ गये. साथ मे ठाकुर की बेटी पायल भी आ गयी.

हवन शुरू हो गया. सब हवन करने मे लग गये. हवन जिस के लिए हो रहा था उस छोटी बहू को छोटी चाची ने इतना संदर बना दिया कि पूछो मत

एक तरफ मैं छोटी बहू रेशमा और बड़ी बहू कामिनी को देख रहा था. वही दूसरी तरफ पंडिताइन को भी देख कर आहे भर रहा था.

ठाकुर की बेटी पायल पर मेरा ध्यान नही था.

हवन 12 बजे तक चलता गया .हवन हो जाने के बाद पंडित और पंडिताइन को दक्षिणा दे कर भेज दिया.

मेरी दक्षिणा अभी बाकी थी जो पंडिताइन को देनी थी.

हवन हो जाने के बाद खाना खाने का प्रोग्राम शुरू हो गया.

ये प्रोग्राम भी 1 घंटे तक चलता रहा.

खाना खाने के बाद छोटी चाची और नीता बुआ रेशमा और कामिनी के साथ उपर चली गयी.

ठाकुर की बेटी पायल कोमल और बचा गॅंग को अपने कमरे मे ले गयी.

ठाकुर का छोटा बेटा कुवरसिंघ शहर चला गया.

चाचा जी ठाकुर और रणजीतसिंघ के साथ बातें करने लगे.

और बाकी जो बच गये वो ठकुराइन के साथ बातें करने लग गये.

मैं अकेला रह गया.मुझे अकेला देख कर ठाकुर का बड़ा बेटा रंजीत सिंग मेरे पास आ गया.

रणजीतसिंघ की एज साल थी फिर भी वो मुझसे दोस्त की तरह बात करने लगा. उसको ठाकुर होने या ना होने का कोई मतलब नही था. रंजीत सिंगी अपने पिताजी के उपर गया था. उनकी तरह रंजीत सिंग का नेचर था.

रणजीतसिंघ-तुम अकेले क्यू बैठ हो

अवी-बस ऐसे ही

रणजीतसिंघ-तुम्हे शायद कोई अपनी उमर का नही मिला ,

अवी-हाँ

रणजीतसिंघ-चलो मेरे साथ, हम बैठ कर बातें करते है

मैं रंजीत सिंग के कमरे मे चला गया

रणजीतसिंघ-तुम शराब पीते हो

अवी-नही

रणजीतसिंघ-पिया करो,जाने दो मैं पीता हू.

रणजीतसिंघ-तो कहो कैसी लगी हवेली

अवी-अच्छी है

रणजीतसिंघ-और मेरी पत्नी कामिनी वो कैसी लगी.

अवी-मैं कुछ समझा नही

रणजीतसिंघ-तुम हवन के समय कामिनी को देख रहे थे

अवी-(ये प्यार से पूछ रहा है या गुस्से से,या प्यार से पूछ कर गुस्सा करेगा) वो तो मैं इधर उधर देख रहा था. और जब मैं ने भाभी जी की तरफ देखा तो आपने देख लिया होगा.

रणजीतसिंघ-पक्का ऐसा था

अवी-हाँ

रणजीतसिंघ-चलो जाने दो.और बताओ मेरे जाने के बाद पंडिताइन के साथ क्या किया

अवी-कुछ भी नही

रणजीतसिंघ-बता भी दो,मुझे अपना दोस्त समझो

अवी-सच मे मैं ने कुछ नही किया

रणजीतसिंघ-तुम मेरे जाने के बाद 15 मिनिट के बाद नीचे आए और पंडिताइन के चेहरे पर हँसी थी.

अवी-मैं आपको बता ही देता हू

फिर मैं ने रणजीतसिंघ को सब कुछ बता दिया

रणजीतसिंघ-तुम ने अच्छा मोका गँवा दिया ,देख लेते चूत

अवी-वो बहुत डरी हुई थी

रणजीतसिंघ-तो क्या हुआ, इतना अच्छा मोका गँवा दिया तुमने

अवी-(क्या मैं ने मोका गँवाया)

रणजीतसिंघ-कोई बात नही अगर तुम मुझे दुबारा मिल गये तो तुम्हारे भी मज़े करवा दूँगा.

अवी-सच(मज़ा करवाना है तो कामिनी की चूत दिलवा दो)

रणजीतसिंघ-क्यू नही,पर मोका मिला तो

अवी-अच्छे कामो के लिए मोका मिल ही जाता है

रणजीतसिंघ-पर तुम्हे तो मोके का फ़ायदा उठाना नही आता

अवी-आप सिखा देना.

रणजीतसिंघ-मैं

अवी-आप के पास इतना एक्सपिरिन्स है उस मे से थोड़ा मुझे सिखा देना

रणजीतसिंघ-एक तो तुम पहली बार मिले हो. अगर फिर मिले तो ज़रूर तुम्हे मोका मिलवा दूँगा

अवी-अब तो मिलते रहना होगा

रणजीतसिंघ-तुम हो बड़े इंटरेस्टिंग ,ठीक है नेक्स्ट टाइम तुम्हें भी दिलवा दूँगा. वैसे तुम्हें ज़्यादा क्या पसंद है

अवी-किस बारे मे बात कर रहे हो

रणजीतसिंघ-चूत या गंद

अवी-गान्ड,और आपको

रणजीतसिंघ-मुझे भी

फिर मेरी और रंजीत सिंग की बातें चलती रही

रंजीत सिंग की दोस्ती काम की साबित हो सकती है.

जैसे दादाजी और ठाकुर साब की दोस्ती थी वैसी मुझे भी रणजीतसिंघ से दोस्ती बनानी होगी.

 


462

दूसरे कमरो मे देखते है क्या हो रहा है.

छोटी चाची और नीता बुआ कामिनी और रेशमा के साथ उपर गयी थी.

नीता बुआ कामिनी के साथ बातें कर रही थी और छोटी चाची रेशमा के साथ बातें कर रही थी.

सी चाची-तुम तो आज बहुत संदर लग रही हो

रेशमा-मेरा संदर दिखना और ना दिखना एक बराबर है

सी चाची-क्यू क्या हुआ

रेशमा-कुछ नही

सी चाची-मुझे बताओ शायद मैं तुम्हारी कोई मदद कर दूं

रेशमा-मेरी समस्या ऐसी है कि इसका कोई हल नही है

सी चाची-हर सवाल का जवाब होता है

रेशमा-ठीक है,फिर मेरी समस्या हल कर दो

सी चाची-बताओ तो सही

रेशमा-मेरा पति मेरे अलावा किसी और के साथ भी सोता है

सी चाची-क्या?

रेशमा-देखा ना मेरी बात सुनकर तुम शॉक्ड हो गयी .तुम क्या मेरी समस्या हल करोगी.

सी चाची-(ये देखना पड़ता है) किस के साथ चुदाई करता है

रेशमा-किसके साथ मत पूछो कितनो के साथ सोता है ये पूछो

सी चाची-मतलब एक नही बहुत सारी है.

रेशमा-हाँ, बहुत सारी है.

सी चाची-तुम्हे कैसे पता चला

रेशमा-मैं ने खुद देखा है

सी चाची-तो तुम ने कुछ किया क्यूँ नही

रेशमा-अगर एक होती तो कुछ करती.वो तो इतनो के साथ चुदाई करता है कि पूछो मत

सी चाची-वो ठाकुर है. ये सब तो ठाकूरो मे चलता रहता है

रेशमा-पर मुझे ये पसंद नही है कि मेरा पति किसी और के साथ चुदाई करे

सी चाची-वो तो किसी को भी पसंद नही होता

रेशमा-मैं तो अब इनसे परेशान हो गयी हू

सी चाची-तुम क्यू परेशान होती हो. एक ना एक दिन तुम्हारा पति ये सब बंद कर देगा

रेशमा-काश ऐसा हो,पर ये मुमकिन नही है

सी चाची-क्यू मुमकिन नही है.

रेशमा-क्या तुम इस पे कुछ कर सकती हो. क्या तुम मुमकिन बना सकती हो

सी चाची-(ये तो मैं भी नही कर सकती.पर कुछ तो दिलासा देना होगा) कोशिस करूँगी

रेशमा-कोशिस ,कोशिस से क्या होगा. तुम मेरा ये काम कर दो .मेरा ये काम कर दिया तो मैं तुम्हारी गुलाम बन जाउन्गी.

सी चाची-देखती हू(अगर काम हो गया तो अवी को रेशमा मिल जाएगी)

रेशमा-देखने से कुछ नही होगा

सी चाची-मुझे कुछ सोचने के लिए टाइम तो दो

रेशमा-टाइम दिया.पर मेरा काम कर देना

सी चाची-कर दूँगी.और बता क्या चल रहा है

रेशमा-अब तो सब ठीक चल रहा है. सिर्फ़ मेरे पति को छोड़ कर

सी चाची-तेरे दूध तो बहुत बड़े हो गये है

रेशमा-तेरे भी कहाँ कम है

सी चाची-वैसे ये तुम्हारी ननंद कब आई

रेशमा-1 हफ़्ता हुआ है. अब वो यही रहेगी

सी चाची-यहाँ रहेगी. देखना कही गाओं का कोई लड़का तेरी ननंद को उड़ा ना ले जाए

रेशमा-कौन ठाकुर की लड़की को हाथ लगाने का सोचेंगा.

सी चाची-आज कल सब लगाते है,वैसे देखा नही तुम ने उसके दूध कैसे कपड़ो से बाहर आने को मचल रहे है.उसकी गंद देखी ,कोई ऐसी गंद के लिए मारने को भी तय्यार हो जाए.

रेशमा-चुप कर अगर किसी ने सुन लिया तो गड़बड़ हो जाएगी.

सी चाची-मतलब तू भी मानती है मैं सही कह रही हू

रेशमा-जैसी माँ वैसी बेटी है

सी चाची-हाँ पूरी ठकुराइन पर गयी है.

रेशमा-हाँ,पर दोनो प्यासी रहती है.मेरा पति तो बाहर जाने के बाद भी मेरी चुदाई करता है पर वो मेरी ननंद हाथ से काम चलाती होगी और ठाकुर का तो पूछो मत ठकुराइन भी हाथ से काम चलती होगी.

इतना कह कर दोनो हँसने लगी.

रेशमा और छोटी चाची अपने अपने बच्चों को दूध पिलाते हुए बातें करती रही.

 


463

एक तरफ रेशमा और छोटी चाची बात कर रही थी और दूसरी तरफ कामिनी और नीता बुआ की बातें हो रही थी.

अब चलते है पायल के कमरे मे जहाँ कोमल और बच्चा गॅंग थे

पायल एक हॉट लड़की थी. गाओं मे कम शहर मे ज़्यादा रहती थी. शहर की हवा पायल को भी लगी थी पर उतनी नही जितनी लगनी चाहिए.पायल ने इसी साल अपना ग्रेज़ूएशन कंप्लीट किया था.

कविता और लीना और राज पायल के कमरे मे जाने के बाद पायल का लॅपटॉप देखने लगे.

पायल और कोमल बातें करने लगी.

पायल-तुम किस क्लास मे हो

कोमल-मैं साइन्स मे हूँ

पायल-साइन्स मतलब तुम शहर मे पड़ती हो

कोमल-हाँ.और तुम्हारा

पायल-मैं ने इसी साल ग्रॅजुयेट कंप्लीट किया है.

पायल-कोमल वो तुम्हारे साथ जो हवेली आया था वो कौन था

कोमल-कौन अवी

पायल-तो अवी नाम है उसका

कोमल-तुम जानती हो अवी को

पायल-नही बस ऐसे ही पूछ लिया. वो तुम्हारा भाई है

कोमल-हाँ,मेरे मामा का लड़का है

पायल-वो क्या करता है

कोमल-वो तो मेरे साथ ही पढ़ता है

पायल-तुम्हारे साथ ,उसे देख कर तो लगता है कि वो ग्रॅजुयेशन कर रहा होगा.

कोमल-नही ,वो मेरे साथ पड़ता है. हम एक ही क्लास मे है.

पायल-और

कोमल-और क्या

पायल-कुछ नही, और बताओ कोई बाय्फ्रेंड बनाया है

कोमल-नही, पहले पढ़ाई बाद मे बाय्फ्रेंड बनाउन्गी

पायल-मतलब मेरी तरह सिंगल हो.

कोमल-क्या तुमने भी, अभी तक बाय्फ्रेंड नही बनाया

पायल-कोई अच्छा लड़का मिला ही नही.तुम्हें तो मिला होगा कोई

कोमल- एक है पर...

पायल-पर क्या

कोमल-कुछ नही

फिर पायल और कोमल इधर उधर की बातें करनी लगी.

दूसरी तरफ कामिनी नीता बुआ से बात करने के बाद अपने कमरे मे चली गयी. रेशमा भी फ्रेश होने के लिए बाथरूम मे चली गयी.

फिर छोटी चाची नीता बुआ के पास चली गयी.

सी चाची-क्या बात हो रही थी कामिनी से

नीता बुआ-कुछ नही वो अपनी बातें बता रही थी

सी चाची-मुझे भी बताओ क्या बता रही थी.

नीता बुआ-यही कि उसका पति उसकी गंद ज़्यादा मारता है.

सी चाची-तभी पीछे से भैंस की तरह हो गयी है

चाची की बात सुनकर दोनो हँसने लगी

नीता बुआ-तू भी ना मीना ,लेकिन सही कहा तूने

सी चाची-और क्या बता रही थी.

नीता बुआ-यही कि उसने अपने पति को कहा है कि गंद मारने नही दूँगी. आप मेरी चूत मारिए गंद किसी और की मारा कीजिए

सी चाची-वो सांड अगर बाहर निकल गया तो कामिनी की तरह सबकी गंद हो जाएगी

नीता बुआ- कम से कम उसका पति...मेरा पति तो

सी चाची-तेरा पति भी 2 साल के बाद तुझे भैंस बना देगा. मेरी नीता भैंस

नीता बुआ-तू ना मेरे हाथ से मार खाएगी

सी चाची-डंडा आप लो और मार मुझे मार रही हो.

नीता बुआ-तू भी तो लेती होगी रोज

सी चाची-लेना पड़ता है.

नीता बुआ-चल वो सब छोड़ ,चल नीचे चलते है.मेले के बारे मे बातें हो रही होगी.

फिर नीता बुआ और छोटी चाची नीचे आ गयी.

मैं और रणजीतसिंघ भी नीचे आ गये.

कुवरसिंघ भी शहर से आ गया

 
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