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मैं और मेरा परिवार

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512

किरण मेरे बच्चे की माँ बन ने वाली है ये बात सुनकर मैं खुश हो गया.

फिर दोपेहर मे मैं घर3 आ गया.

इस समय ज़्यादातर तर लोग दर्शन करके मेले मे जाने से पहले थोड़ा आराम करते है.

मैं भी आराम करने के लिए घर3 आ गया.पर पहले सोचा कि शीला या सविता को देख लू.

शीला तो नही मिली पर सविता अपने फॅमिली के साथ बैठी थी. पर वो बार बार दूसरी तरफ देख रही थी. मैं ने सविता की नज़र का पीछा किया.

सविता कुवरसिंगी की तरफ देख रही थी.

मतलब कुवरसिंघ ने सविता को पटा लिया है. या फिर पटने वाली है.

कुवरसिंघ थोड़ी देर सविता के साथ नयन मटक्का करता रहा.फिर खेत मे दूसरी तरफ चला गया.

वहाँ जाकर कुवरसिंघ ने एक गर्ल को अपने पास बुलाया और अपने साथ कार मे लेकर चला गया. पता नही कहाँ लेकर गया था पर जहाँ भी लेकर गया,आज उसकी चुदाई करेगा.

कुवरसिंघ के जाने के बाद मैं घर3 जाकर मोना के बारे मे सोचने लगा. पर कुछ समझ नही रहा था.

फिर मैं सो गया.

दोपहर मे एक नींद पूरी करने के बाद मैं शाम को घर चला गया.

अपने भाई बहनों को मेला दिखाने के लिए.

मेरे घर आते ही सब तैयार हो गये.

राज-भैया आ गये, चलो मेला देखने

अवी-रूको, मुझे खाना खाने दो फिर चलते है, सुबह से सिर्फ़ नाश्ता किया है

मेरी बात सुनकर रानी खड़ी हो गई. रसोई घर मे जाने के लिए, पर तभी कोमल बीच मे बोल पड़ी

कोमल-अवी तुम बैठो मैं और रानी तुम्हारे लिए खाना लेकर आते है

कोमल रानी के साथ रशोई घर मे जाकर मेरे लिए खाना लेकर आ गई.

फिर मैं ने खाना खा लिया ,और मेले मे जाने के लिए तैयार हो गये. की बड़ी चाची ने मुझे आवाज़े दी.

अवी-चाची आपने बुलाया मुझे

ब चाची-हाँ एक काम था

अवी-बताइए क्या काम था

ब चाची-वो

अवी-वो

ब चाची-वो तुम कल की...

अवी-कल की

ब चाची-वो तुम कल की तरह मेले से मेरे लिए गरम गरम जलेबी ला सकते हो.

अवी-जलेबी, आप भी ना ,मैं तो डर गया था, मैं कल की तरह आपके लिए जलेबी लेकर आ जाउन्गा.

फिर मैं मेले मे चला गया

अवी-आज कैसे देखना है मेला

कविता- मौत का कुँआ,कल देखा नही था.

स्वेता दीदी-चलो मौत का कुँआ देखते है.

हम सब मौत के कुआ देखने के लिए चले गये. मैं ने हमेशा की तरह वहाँ के आदमी को कहा कि कुछ अच्छा दिखाना. और हम उपर जाकर मौत के कुँए का मज़ा लेने लगे.

खेल शुरू होते खड़े रहने की जगह हिलने वाली थी. जिस की वजह से राज तो स्वेता दीदी का हाथ पकड़ कर खड़ा हो गया.

मेरी जगह हमेशा फिक्स होती है. एक तरफ रानी तो दुसारी तरफ कोमल लेती थी.

कविता और लीना तो अपने तरीके से मज़ा लेती थी.

स्वेता दीदी ने रानी को इस बात के लिए कभी रोका नही कि वो मेरे साथ क्यू खड़ी है. अगर कभी ना रहे तो स्वेता दीदी कुछ सोच कर रानी को मेरे पास रहने के लिए आइडिया लगा लेती.

जैसे कल रानी को मेरे साथ झूले मे अकेले बैठाया था.

और कोमल तो किसी को मेरे दूसरे तरफ आने से पहले अपनी जगह बना लेती थी.

कोमल को मेरा साथ अच्छा लगता था ये मुझे पता था .इस लिए मैं ने इस बात पे ज़्यादा ध्यान नही दिया.

मौत के कुँए मे खड़े रहने की जगह हिलती थी जिस का मैं फ़ायदा उठा सकता था. पर यहाँ सब के होते हुए किसी के साथ मज़ा करता.

कोमल मेरा साथ छोड़ती नही थी. और रानी के साथ चिपकी रहती थी. बड़ी मुश्किल से रानी को सबकी नज़रों से बचा कर प्यार करना पड़ता था.

आज मौत के कुँए मे ज़्यादा लोग नही थे. और मैं ने ही कहा था ज़्यादा लोगो को अंदर ना भेजे ताकि मेरी बहनें खेल का मज़ा ले सके

पर कुछ भी हो मौत के कुँए मे मज़ा लिया जा सकता था.

चलो खेल भी शुरू हो गया.

पहले एक बाइक मौत के कुँए मे घूमने लगी.

वो बाइक वाला अच्छे करतब दिखा रहा था. वो कभी अपने हाथ छोड़ देता तो कभी अपने पैर बाइक के हॅंडल पर रख कर बाइक चलाता.

फिर बाइक मौत के कुँए के उपर तक आने लगी. जैसे जैसे वो उपर आने लगा वैसे वैसे हम जहाँ खड़े थे वो जगह हिलने लगी.

राज ने तो स्वेता दीदी के हाथ को पकड़ लिया.

मैं भी मज़े के लिए कुछ पकड़ लेता हूँ.

मैं ने कोमल का हाथ पकड़ लिया. हाथ पकड़ते ही कोमल मेरी तरफ देख कर हँसने लगी.

और मैं ने दूसरा हाथ रानी की कमर मे डाल दिया.

रानी ने मेरी तरफ देखा और खेल का मज़ा लेने लगी.

 
मैं हाथ को रानी के पिछवाड़े पर भी रख सकता था पर रानी को ये अच्छा नही लगता. और रानी को जो अच्छा नही लगता वो मैं करता नही.

लेकिन इस मौत के कुँए कभी अकेला या किसी और के साथ आया तो चुदाई करके जाउन्गा.

ये क्या दूसरी बाइक भी आ गई.

अब मौत के कुँए मे 2 बाइक थी .अब देखने मे मज़ा आ रहा था.

पर वो बाइक जल्दी रुक गई और उसकी जगह कार मौत के कुँए मे घूमने लगी.

बाइक उपर के हिस्से मे घूम रही थी और कार नीचे घूम रही थी.

मैं ने मज़ाक करने के लिए कोमल का हाथ कस के पकड़ लिया. कोमल मेरी तरफ देख कर हंस रही थी. मैं ने कोमल के गाल पर चुप के से पप्पी दी.

कोमल ने हँसना बंद किया. और शरमा कर अपनी आँखे मौत के कुँए पर लगा दी.

इधर मैं ने पप्पी ली थी कि उधर से रानी ने मुझे चिमती काटी

मैं ने रानी की तरफ देखा ,वो इशारो मे पूछ रही थी कि मुझे कब मिलेंगी.

मैं ने भी बोल दिया. बस कुछ देर मे

और शो ख़तम हो गया.

सब को बहुत मज़ा आया सिवाय राज के

हम वहाँ से जाने लगे थे कि मैं ने रानी को पीछे रह कर चलने को कहा.

एग्ज़िट गेट से उतरते समय रानी और मैं पीछे थे जिस से मैं ने मोका मिलते ही जल्दी से रानी के गाल पर किस किया.

रानी मेरे इस तरह किस करने से हँसने लगी.और आगे निकल कर मेरी बहनों के साथ चलने लगी.

राज-मुझे मज़ा नही आया. मुझे झूले मे बैठना है.

पूनम दीदी- चलो राज के लिए एक अच्छा सा झूला देखते है.

सीतल दीदी-पहले कुछ खा लेते है

राज-पहले झूले मे बैठ ते है. आप फिर कल की तरह खाना खाने के बाद झूले मे बैठ ने को मना करेंगी.

स्वेता दीदी-राज तो स्मार्ट हो गया. चलो उस ट्रेन वाले झूले मे बैठ ते है

लीना- उस मे तो मैं,कविता,और सिर्फ़ राज बैठ सकते है

कोमल-दीदी वो छोटे बच्चों के लिए है

रानी-आज छोटे बन कर देखते है. मज़ा आएगा.

स्वेता दीदी-मैं भी यही कह रही थी. जा अवी झूले वाले को पटा कर आ .

मैं उस झूले वाले के पास गया. वो हम सब को झूले मे बैठाने के लिए तैयार नही था. फिर मैं ने झूले वाले को कहा कि अगर कुछ हुआ तो उसके पैसे मैं दूँगा.

बड़ी मुश्किल से वो मान गया.

हम सब छोटे झूले मे बैठ गये.

झूले के पास जो लोग खड़े थे वो हमारी तरफ देख रहे थे

छोटे झूले बड़े बच्चों को मतलब हमे देख कर सब लोग शॉक्ड होकर देखने लगे.

हम तो झूले का मज़ा ले रहे थे.

बचपन मे बैठ ते थे ऐसे झूले मे और बड़े होने के बाद बैठने मे मज़ा आ रहा था.

झूले के पास ठाकुर की फॅमिली आ गई. वो भी हमे मज़ा करते हुए देख रही थी. बिचारी पायल वो हमे मज़ा करते हुए देख कर खुद पर नाराज़ हो गई.

चलो राज भी खुश हो गया.

अवी-अब क्या करेंगे.

पूनम दीदी-कल की तरह ,नाश्ता करते है फिर खरीदी करेंगे

स्वेता दीदी-आज गोलगप्पे खाते है

पूनम दीदी-वो तो हम अपने शहर मे भी खाते है

स्वेता दीदी-जो ठेले पर गोलगप्पे मे मज़ा आता है वो होटेल मे खाने मे कहाँ आएगा. होटेल मे हम डिन्नर कर सकते है पर गोलगप्पे खाने की असली मज़ा आता है तो नुक्कड़ पर लगी हुए ठेले की याद आती है

पूनम दीदी- सीधा सीधा बोल ना कल की जलेबी की तरह मज़ा आएगा. चल जल्दी,अब तो मुँह मे पानी आ गया.

हमारी गॅंग गोलगप्पे की दुकान पर चली गई. वो गोलगप्पे वाला हमे गोलगप्पे देता रहा हम खाते रहे.

ना हम ने उसे रुकने को कहा और ना वो खुद रुका

पेट मे जगह ही नही बची और गोलगप्पे खाने की

मुझे ही उसे रोकना पड़ा.

अवी-कितना खिलाओगे. तुम तो खिलाते जा रहे हो

गोलगप्पे वाला-साहब मैं जहाँ से हूँ वहाँ पर गोलगप्पे को गुपचुप कहते हैं, इसका मतलब गुपचुप गुपचुप खाते जाओ ना कुछ पूछो और ना कुछ बोलो, और जब गोलगप्पे मुँह मे होते है तो कुछ बोलने का मोका नही मिलता. और वो ख़तम हुआ कि हम दूसरा देते है.

अवी-समझ गया. कितने हुए

गोलगप्पे वाला- तीन लोगो को 20 20 रुपये के दिए और बाकी को 30 30 रुपये के दिए

अवी-240 रुपये के गोलगप्पे खाए हम ने, 10 मे 5,

पूनम दीदी- स्वेता आज समझी मैं कि इतने ज़्यादा लोग मेले मे क्यू आते है.मज़ा तो मज़ा मिलता है और खाने मे भी मज़ा आता है

स्वेता दीदी-ये सही कहा तुम ने ,चलो घूम कर गोलगप्पे को पचाते है

फिर 1 घंटे तक हम मेले मे घूमते रहे. आज इस से ज़्यादा कुछ नही किया.

फिर घर जाते हुए चाची के लिए जलेबी ले ली .

घर आते ही चाची ने जलेबी पर हमला बोल दिया.

 
513

चाची ने जलेबी का मज़ा लिया .फिर मैं खाना खा कर मेले मे वापस आ गया.

मेले मे कोई ना कोई पहचान वाला मिल रहा था जो मुझे पकड़ कर 10 15 मिनिट पकने लग जाता.

अगर और थोड़ी देर मेले मे रुका तो मैं पक पक कर जल जाउन्गा.

मैं घर3 आ कर इंतज़ार करने लगा उस लड़की का जो रणजीतसिंघ मेरे लिए भेज ने वाला था.

उस के आने तक मैं लॅपटॉप पर मूवी देखने लगा.1 घंटे के बाद गेट पर नॉक हुआ.

रणजीतसिंघ ने भेजी हुई लड़की आई होगी. मैं ने गेट खोला ,सामने एक औरत खड़ी थी.

औरत-तुम्हारा नाम क्या है

अवी-अवी

औरत-मुझे रणजीतसिंघ ने भेजा है.

रणजीतसिंघ ने कहा था कि लड़की भेजने वाला है पर ये तो औरत है. मुझे लगा कि कुवारि लड़की भेजेगा पर ये तो चूत का भोसड़ा है.

कल रणजीतसिंघ से बात करूँगा और कुवारि लड़की भेजने को कहूँगा.

इसको वापस भेजने मे बेवकूफी होगी. रणजीतसिंघ को बोल दूँगा कि मज़ा नही आया.चलो इसका भी टेस्ट करता हूँ .

मैं ने उस औरत को अंदर बुला लिया.

अवी-तुम्हारा नाम क्या है

औरत-नाम मे क्या रखा है. जो काम करना है कर लो

अवी-कही तुम रंडी तो नही हूँ

औरत-क्या कहा रंडी, रणजीतसिंघ के कहने पर आई हूँ नही तो तुम्हें बताती मैं क्या हूँ

अवी-(रंडी नही है) माफ़ करना, ग़लती हो गई.

औरत- कोई बात नही, वैसे तुम करने वाले हो

अवी-हाँ

औरत-कर पाओगे

अवी-फाड़ दूँगा.

औरत- तो जल्दी फाडो

मैं ने उस औरत को ठीक से देखा .दिखने मे तो ठीक ठाक थी.

बूब्स भी ज़्यादा बड़े नही थे

पर गंद बहुत बड़ी थी. रणजीतसिंघ ने मार मार कर ऐसी की होगी.

अवी-तुम ने रणजीतसिंघ के साथ किया है

औरत-मेरी गंद नही देखी ,ये रणजीतसिंघ ने बनाई है

अवी-तुम कब से

औरत-तुम बाते बहुत करते हो .जल्दी करो मुझे वापस जाना है

अवी-वापस इतनी रात मे

औरत-हाँ

अवी-तो करते है शुरू

मेरे कहते ही उसने अपनी सारी और पेटिकोट उपर कर लिया और मेरी तरफ गंद करके झुक गई.

उसकी बड़ी बड़ी गंद मेरे सामने आ गई.

अवी-ये क्या है

औरत-चुदाई करनी है ना.

अवी-मैं ऐसे नही करता

औरत-रणजीतसिंघ तो ऐसे ही करता है

अवी-मैं रणजीतसिंघ नही हूँ,क्या समझी.

औरत-तुम कैसे करते हो

अवी-कपड़े निकाल कर.पहले चूत फिर गंद

औरत-चूत, तुम रणजीतसिंघ के फ्रेंड हो ना

अवी-हाँ

औरत-फिर भी चूत मारने की बात कर रहे हो

अवी-बात नही कर रहा,मारने वाला हूँ

औरत-मैं भी चूत मे लेना चाहती हू. ये रणजीतसिंघ बस गंद के पीछे लगा रहता है. चलो आज चूत मे लंड जाएगा.

अवी-चलो निकालो कपड़े

औरत-ये भी ठीक है. नही तो कपड़े खराब हो जाएँगे

उस औरत ने कपड़े निकालना शुरू किया.

पहले सारी, फिर ब्लाउस, और पेटिकोट हो गया. वो नंगी हो गई.

ना उस ने ब्रा पहनी है और ना पैंटी पहनी है.

कपड़ो के उपर से जैसे इसकी गंद थी बिना कपड़ो के और ज़्यादा सेक्सी लग रही थी.

चूत पर बालों का गुछा बना हुआ था.

बाकी सब ठीक था.आज बालो वाली चूत मारता हूँ,इसका एक्सपीरियेन्स मिलना चाहिए

औरत-तुम भी निकालो

मैं ने भी अपने कपड़े निकाल दिए

वो फिर से झुक गई.

अवी-तुम बार बार झुकती क्यू हो

औरत-लंड नही डालोगे

अवी-पहले गीला तो करो

औरत-तुम ठीक से करना जानते हो. और तुम्हारा लंड साफ है ,अभी गीला करती हू

वो मेरे सामने अपने घुटनो के बल बैठ गई. और लंड को हाथ मे पकड़ लिया.

औरत-इस गाओं मे सबके लंड का लंबे और मोटे है

अवी-कितनो के लिए है

औरत-मैं रणजीतसिंघ और तुम्हारी बात कर रही हू

अवी-तुम्हें कैसे पसंद है

औरत-मुझे लंबे और मोटे पसंद है.

अवी-पसंद है तो शुरू हो जाओ, टाइम क्यू बर्बाद कर रही हो

उस ने लंड के टोपे पर अपनी जीभ घुमानी शुरू की.

औरत-तुम्हारा लंड तो टेस्टी है

अवी-खा मत जाना, बस चूसना

औरत-मज़ाक अच्छा करते हो, पता नही चुदाई कैसी करोगे

अवी-मेरी चुदाई को ज़िंदगी भर याद रखोगी.

औरत-देखते है.

उस ने फिर से लंड पर अपनी जीभ घुमाई. और पूरे लंड को मुँह मे लेकर चूसने लगी

अवी-तुम्हारे चूसने मे दम नही है

मेरी बात सुनकर वो ज़ोर ज़ोर से लंड को चूसने लगी.

ऐसे चूस रही है कि लग रहा है लंड खा जाएगी.

जोरदार तरीके से लंड चूस रही थी. पानी निकाल कर ही दम लेंगी.

अवी-रूको

वो नही रुकी ,लंड चूस्ति रही

ये ऐसे नही मानेंगी.

मैं ने उसके सर को पकड़ लिया और उसके मुँह मे लंड पेलने लगा.

उसके मुँह की चुदाई करने लगा. जोरदार धक्के मारने लगा.

उसको दर्द होने लगा. उसे सास लेने मे परेशानी होने लगी.

मैं ने धक्के मारना बंद किया. उस ने लंड मुँह मे से बाहर निकाला और खांसने लगी.

औरत-ये क्या कर रहे थे

अवी-तुम्हें रुकने को कहा था. पर तुम रुकी नही.

औरत-अब हो गया ना,

वो फिर से झुक गई

अवी-तुम बार बार झुकती क्यूँ हो

औरत-चुदाई नही करनी क्या.

अवी-पहले लंड तो गीला करो

औरत-अबी तो किया

अवी-लंड पर कॉंडम लगाया है. अब गीला करो

औरत-तुम भी ना. आओ इधर कर देती हू

वो कॉंडम के साथ लंड को चूसने लगी.

इस बार उसने थोड़ी देर लंड चूसने के बाहर निकाला

औरत-अब और कुछ बाकी है

अवी-सब हो गया.

वो फिर मेरी तरफ गंद करके झुक गई.

मैं उस पे हँसने लगा. जब देखो तब झुक कर मुझे गंद दिखाती है. रणजीतसिंघ को भी ऐसे ही दिखाती होगी तभी इसकी गंद इतनी बड़ी हो गई.

 


514

इसको झुकने की आदत लग गई है.

मैं ने उसके गंद पर थप्पड़ मारा.

अवी-उस बेड पर लेट जाओ

वो बेड पर जाकर लेट गई.

अवी-अपनी टाँगे फैला लो

उस्नी टाँगे फैला ली. अब बालों के बीच मे उसकी चूत की लाल लाइन दिखने लगी.

मैं ने थोड़ा थूक उसकी चूत पर लगाया और अपने लंड को उस की चूत पर रखा

अवी-कितनो के लिए है

औरत-डाल दो ,तुम्हारा 4र्थ नंबर होगा.

फिर मैं ने बस थोड़ा ज़ोर लगाया और ये क्या मेरा लंड उस की चूत मे पूरा उतर गया

चूत है या ब्लॅक होल, जो इतनी आसानी से लंड चूत मे ले लिया.

उसकी आँखों मे थोड़ा सा पानी आ गया.

पर चीख का कोई नामो निशान नही था.

ये किसे भेजा रणजीतसिंघ ने ,कल पूछूँगा रणजीतसिंघ को कि यही दोस्ती है.

अगर चीख नही निकल रही है तो रुकने से फ़ायदा नही होगा.

मैं धक्के मारने लगा.पहले धक्के के साथ ही उस को मज़ा आने लगा

वो शीष्कारिया लेने लगी.

आआआआआआआहहुउऊुुुुुुुुुुुउऊहह म्म्म्म्ममममममममममममाआआआआआआआअरर्र्र्र्र्र्र्ररर

और ज़ोर से चोदो मुझे फ़ाआआआआआआआआआआआाााद्दद्ड दे इसको बहुत तंग किया इसने.

मैं उसकी शीष्कारिया सुनकर जोरदार धक्के मारने लगा.

वो भी नीचे से धक्के मार रही थी और अपने बूब्स दबाने लगी.

5 मिनिट तक धक्के मारने के बाद वो झड गई.

औरत-आज बहुत दिन के बाद चूत मे लंड लेकर पानी छोड़ा है.

धक्के जोरदार मारने के लिए उसे घोड़ी बनाया

वो घोड़ी बन कर लंड लेने के नाम से खुश हो गई.

मैं उस से घोड़ी बना कर चोदने लगा

औरत-आआहह मादरचोद और जोर्र्र्र से मार, फाड़ साले फाड़, आअहह ऐसे ही फाड़ मादरचोद फाड़

वो गाली देते हुए शीष्कारियाँ ले रही थी.

आआहह और ज़ोर से मार ,अपनी बहन की चूत समझ कर फाड़ ,और बन जा बेहन्चोद

मैं ने उसके बालो को पकड़ लिया और दे दना दन धक्के मारने लगा.

आआहह साले मैं तो तुम्हें बच्चा...आहह तू तो सब का बाप...आहह मेरा निकल रहा है

वो फिर से झड गई.

उसकी चूत मे मेरा लंड रॉकेट की तरह अंदर जा रहा था.

उसकी चूत का भोसड़ा बनाने मे मज़ा आ रहा था.

ये क्या मेरा भी होने वाला है.

मैं ने उसकी कमर को पकड़ कर धक्के लगाने लगा.

और 10 12 धक्के मारने के बाद मेरा वीर्य निकल गया.मैं ने अपना वीर्य कॉंडम निकाल कर उसकी गंद पर डाल दिया

धक्के लगने बंद होते ही वो ज़ोर ज़ोर से हाँफने लगी.

लंड पर मेरा वीर्य लगा हुआ था. मैं लंड को उसके मुँह के पास ले गया.

और लंड को उसके मुँह मे डाल दिया.

अवी-चूस कर खड़ा कर ,तेरी गंद भी मारनी है

औरत-आराम तो करने दो

अवी-तुझे आराम नही लंड चाहिए.

और मैं चेर पर बैठ कर नॉर्मल होने लगा और उसको लंड चूसने को कहा.

वो लंड चूसने लगी.

पहले उसने लंड को साफ किया.और फिर लंड को चूसने लगी.

ज़ोया ने जो मेडिसिन दी थी उसे खाने से लंड जल्दी खड़ा हो गया.

औरत-ये क्या इतनी जल्दी खड़ा हो गया.

अवी-तेरी गंद का नाम सुनकर खड़ा हो गया.

औरत-पर अभी तो चुदाई की है और इतनी जल्दी खड़ा हो गया.

अवी-वो सब जाने दो, झुक कर गंद मे लंड लेने को तैयार हो जाओ

औरत-थोड़ा आराम तो करने दो

अवी- मैं ने कर लिया है.तुम्हें आराम करने की ज़रूरत नही है. चलो जल्दी झुक जाओ

वो झुक कर अपने गंद को बाहर निकाल कर अपने हाथो से चूतड़ को फैला कर मुझे गंद का छेद दिखने लगी.

मैं ने लंड पर कॉंडम लगाया और लंड पर थूक लगा कर ,गंद के छेद पर रख दिया.

और लंड को एक झटके मे पूरा अंदर डाल दिया.

इस बार भी उसकी चीख नही निकली. पर उसको दर्द हुआ ज़रूर

औरत-मदर्चोद एक बार मे क्यू डाला, धीरे धीरे डालता. दर्द हुआ ना मुझे

अवी-दर्द क्या होता है

और मैं पहले धक्के के साथ ज़ोर दार तरीके से उसकी गंद मारने लगा.

वो फिर से गालियाँ देते हुए मेरे लंड का मज़ा लेने लगी.

इसकी गंद का तो रणजीतसिंघ ने कचुंबर बना दिया था.

लंड आसानी से गंद मे अंदर बाहर हो रहा था.

इसका तो ढोल फटा हुआ है जो मैं और फाड़ रहा हू

गंद के छेद खुला होने के वजह से मैं ताबड़तोड़ धक्के मार रहा था.

वो हर धक्के के साथ अपनी गंद के छेद को कम ज़्यादा कर रही थी.

मुझे इसकी गंद मारने मे बहुत मज़ा आ रहा था.

पुचक पच आवाज़ों की साथ लंड उसकी गंद मे जा रहा था.

इसकी दूसरी चुदाई भी बढ़िया हुई.

पहली चुदाई फिर लंड चूसना फिर गंद मे लंड ,वो तो थक चुकी थी.

मैं भी अपना पानी निकालने के करीब था.

इस बार मैं उसके मुँह मे पानी निकालने के बारे मे सोच रहा था.

जैसे ही मुझे लगा की मेरा वीर्य निकलने वाला है मैं ने अपना लंड उसकी गंद से निकाल लिया.और कॉंडम को निकाल लिया.

उस लगा कि चुदाई हो गई. वो हान्फते हुए सास ले रही थी.

मैं ने देर ना करते हुए.उसकेमुंह मे लंड डाल कर धक्के मारने लगा.

उसे बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था. वो लंड बाहर निकालना चाहती थी.पर मैं ने उसके सर को अपने हाथो से पकड़ रखा था.

और मेरा वीर्य उसके गले मे उतरते हुए पेट मे चला गया.

और मैं वीर्य उसको पिला कर बेड पर लेट गया.

वो ज़ोर ज़ोर से हाफ़ रही थी. और मुझे गलिया भी दे रही थी.


 
515

थोड़ी देर बाद वो नॉर्मल हो गई.

औरत- तुम ने मेरी जान निकाल दी थी

अवी-मज़ा नही आया

औरत-इसे तुम मज़ा कहते हो

अवी-हाँ

औरत-फिर ठीक है.मुझे भी मज़ा आया.

अवी-और मज़ा लेना चाहोंगी.

औरत-2 बार करने के बाद फिर से पूछ रहे हो.सच मे मेरी जान निकालने का सोचा है तुम ने

अवी-इधर आओ

औरत-उधर आकर क्या करू

अवी-तुम्हारी गंद मारने का मन कर रहा है

औरत-मुझे नही करना. 2 बार बहुत हो गया.

अवी-इस बार तुम्हें मज़ा आएगा.

औरत-मज़ा

अवी-नये तरीके गंद मारता हू जिस मे तुम्हें बहुत मज़ा आएगा.

कुछ सोच कर वो झुक गई. और मेरी तरफ गंद कर ली

मैं खड़ा हो गया और उसकी गंद पर हाथ घुमाने लगा.

और फिर उसकी गंद पर थप्पड़ मारने लगा.

औरत-ये क्या कर रहे हो. दर्द हो रहा है

अवी-तुम्हारी गंद मार रहा हू

औरत-इस तरह

अवी-इसे भी गंद मारना कहते है

औरत-तुम और तुम्हारे घटिया मज़ाक ,हटो मुझे वापस जाना है

उसकी गंद पर थप्पड़ मार कर लाल कर दिया.और वापस जाकर बेड पर लेट गया.

वो अपने कपड़े पहन ने लगी

अवी-फिर कब मिलोगि

औरत-कभी नही

अवी-क्यू?

औरत-मेरी मर्ज़ी

और वो गेट खोल कर बाहर चली गई.

कुछ भी कहो इसके साथ मज़ा आया.

मैं क्या पागल हूँ जो दुबारा इसकी चुदाई करूँगा.

फिर मैं बाथरूम मे जाकर फ्रेश हो गया.

और लॅपटॉप मे उस औरत की चुदाई कॉपी कर ली .

और सोने लगा.

ये कुवरसिंघ का क्या करू, 15 लाख का सवाल है.

सब को गिफ्ट देने है.वो कहाँ से दूँगा.

कुछ ना कुछ तो सोचना होगा.

क्यू ना मोना को कहूँ कुवरसिंघ के साथ चुदाई करने को.

फिर कुवरसिंघ पे रेप का इलज़ाम लगा कर पोलीस कंप्लेंट करने की धमकी दे कर मोना के मालिक की क्लिप ले लू.

बदनामी के डर से कुवरसिंघ हमारे आगे झुक जाएगा.

और हमारा काम हो जाएगा.

ये ठीक रहेगा.

कल मोना से बात करके प्लान बता दूँगा.

कुवरसिंघ तो लग गया ठीकने .

फिर मैं सो गया

5थ डे

सुबह उठ कर मंदिर जाने के लिए तैयार हो गया.

तैयार हो जाने के बाद मैं घर चला गया.

चाची का आशीर्वाद ले कर हम सब मंदिर आ गये

रणजीतसिंघ मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगा. मैं ने भी स्माइल कर के बताया कि कल मज़ा आया.

पूजा शुरू हो गई.

रणजीतसिंघ और मैं पूजा करने लगे.

पंडितजी हमेशा की तरह हमे पूजा के बारे मे बताते गये और हम पूजा करते गये

पूजा जल्दी ख़तम हो गई.

हम सब ने दर्शन कर लिए. हमारे पूजा करने के बाद एंपी ने पूजा की ,फिर एमएलए और फिर सब दर्शन करने लगे

आज एंपी और एमएलए भी अपनी फॅमिली के साथ पूजा करने आए थे

फिर मैं अपनी फॅमिली के साथ घर आ गया.

घर आकर हम सब ने नाश्ता किया. और मैं कपड़े चेंज करके मंदिर चला गया.

 


516

मैं ने मंदिर के पास अपनी बाइक रखी और पंडिताइन के घर चला गया

मैं ने पीछे के गेट पर नॉक किया.

पंडिताइन ने गेट खोला.और मुझे अंदर ले लिया.

पंडिताइन-आज जल्दी आ गयी

अवी-हाँ, वो कल सिखाने मे मज़ा आया था इस लिए आज शिकाने के लिए जल्दी आ गया

पंडिताइन-तुम बैठो मैं दूध लेकर आता हू

पंडिताइन दूध लेने के लिए चली गई.

पंडिताइन-(कल इस ने जिस तरह किस किया था उस से लग रहा था कि ये पहले भी कर चुका है. पर सिर्फ़ किस करने से पता नही लगा सकती.कुछ सोचते हुए हाँ यही तरीका ठीक रहेंगा.)

और पंडिताइन दूध लेकर आ गई.

पंडिताइन-दूध पी लो

मैं ने दूध पी लिया.

पंडिताइन-कल जो सिखाया है वो याद है

अवी-हाँ याद है

पंडिताइन-पहले उसी से शुरुआत करते है

और पंडिताइन मेरे पास आ कर बैठ गई.

मैं ने देर ना करते हुए पंडिताइन के होंठो से अपने होंठ मिला दिए

और पंडिताइन के होंठो को कल की तरह चूसने लगा.

पंडिताइन आज के जमाने की पंडिताइन थी. पंडिताइन को पुराने तरीक़ो के साथ साथ नये तरीके का भी पता थे.

पंडिताइन को किस करने मे मुझे मज़ा आ रहा था

मैं पंडिताइन को किस कर रहा था.पंडिताइन भी मेरा पूरा साथ दे रही थी.

पर कल की तरह पंडिताइन के किस करने मे कुछ कमी लग रही थी

मैं तो किस करता गया.

फिर पंडिताइन ने मुझे रोक दिया.

पंडिताइन-अब तुम किस करते हुए मेरे पूरे कपड़े उतार देना .और फिर मेरी चूत को चूसना

अवी-मुझे तो ये सब आता नही है

पंडिताइन-करके नही देखोगे तो सीखोगे कैसे

अवी-कोशिस करता हूँ

पंडिताइन-ठीक से करना.

और मैं पंडिताइन के होंठो पर किस करने लगा.

फिर होंठो पे किस करते करते मैं पंडिताइन की गर्दन पर किस करने लगा.

पंडिताइन एक मूरत की तरह बैठ कर मुझे देख रही थी.

गर्दन पर किस करते हुए मैं पंडिताइन के ब्लाउस के पास आ गया.

मैं ने सारी का पल्लू नीचे सरका दिया और ब्लाउस के उपर से दूध पर किस करने लगा.

ये मैं क्या कर रहा हूँ, मुझे तो कुछ आता नही है,

पंडिताइन ने सिर्फ़ कपड़े निकालने को और चूत चूसने को कहा था..

मैं ने ब्लाउस पर किस करना बंद किया और ब्लाउस के हुक निकाल दिए.

पंडिताइन ने ब्रा नही पहनी थी ,पंडिताइन के बड़े बड़े दूध मेरे मुँह के सामने लटक ने लगे.

मेरी मुँह मे पानी आ रहा था पर मैं ने खुद पर कंट्रोल रखने का फ़ैसला किया.पर कंट्रोल नही हुआ .

और मैं ने पंडिताइन के बूब्स को एक हाथ से दबाते हुए दूसरे बूब्स को चूसने लगा.

पंडिताइन मेरी तरफ देखती रही.

फिर मैं ने खुद पर काबू करते हुए पंडिताइन के बूब को चूसना बंद किया .और पंडिताइन के पेट पर किस करते हुए नीचे आ गया.

मैं ने पंडिताइन के पेटिकोट मे हाथ डाल कर सारी को खोल दिया.

पंडिताइन बैठी होने के वजह से सारी नीचे नही गिरी.

फिर मैं ने पेटिकोट का नाडा भी खोल लिया.

और पेटिकोट को नीचे सरका ने लगा.

पंडिताइन ने अपनी गंद उपर करके मुझे पेटिकोट और सारी निकालने मे मदद की

पंडिताइन ने पैंटी भी नही पहनी थी

पंडिताइन का नंगा बदन देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया.

ये क्या आज पंडिताइन की चूत पर बाल नही थे.

बिना बालो की पंडिताइन की गुलाबी चूत देख कर दिल खुश हो गया

अवी-उस दिन तो चूत पर बाल थे

पंडिताइन-(क्या नॉतंकी करता है) मैं ने काट दिए. क्यू तुम्हें पसंद नही आई

अवी-आपकी चूत तो बहुत प्यारी है,

पंडिताइन-तो चूसो इसे

मैं ने पंडिताइन की चूत पर पहले किस किया और फिर चूत को चाटने लगा. और फिर चूसने लगा

पंडिताइन-(इसे तो सब आता है.मुझ से झूठ बोला , इसको मैं कुछ नही करने दूँगी.)

पंडिताइन-(ये चूस कर मुझे गरम तो कर रहा है.पर झूठ) रूको

मैं चूत चूस्ता रहा.

पंडिताइन-आआहह रूको

मैं रुक गया.

अवी-क्या हुआ. मैं अच्छा नही कर रहा.

पंडिताइन-(इसने झूठ कहा .जिस से मुझे इसके साथ करने का मन नही ,पर जिस तरह चूत चूस रहा था उस से मुझे मज़ा तो बहुत आया. क्या करू समझ नही आ रहा) आज के लिए इतना काफ़ी है, बाकी कल देखेंगे

अवी-मैं ने चूत चूसना तो शुरू किया था.

पंडिताइन-आज के लिए इतना काफ़ी है अब तुम जाओ यहाँ से

अवी-ठीक है, कल जल्दी आउन्गा

पंडिताइन-ह्म्म्म्म

पंडिताइन ने मुझे बीच मे रोक कर कल आने को कहा.

मैं पंडिताइन से अधूरा प्यार करके वापस चला गया.

 


517

- मेला 512

मैं पंडिताइन के घर से मंदिर चला गया.

ये पंडिताइन ने मुझे बीच मे क्यू रोका.

पंडिताइन ने तो कहा था पहले दूध, फिर लंड,फिर चूत और बाद मे चुदाई करेंगे.

फिर अचानक चूत चूसने को क्यू कहा.

क्या पंडिताइन को पता चल गया है कि मैं ने उसको झूठ कहा. क्या उनको पता चल गया कि मैं पहले भी चुदाई कर चुका हू

पर कैसे पता चला, किसी ने बताया होगा, एक मिनिट मेरी ग़लती की वजह से पंडिताइन को पता चला.

मैं ने कल जिस तरह पंडिताइन को किस किया उस से शायद पता चल गया होगा.

फिर कल क्यू नही कुछ कहा,और आज मुझे चूत क्यू चूसने दी.

शायद आज देखना चाहती होगी कि मैं चुदाई की है कि नही.

हाँ यही हुआ है.इस लिए मुझे बीच मे रोक लिया. और कल शायद मुझे चुदाई करने नही देगी.लेकिन कल तो मैं पंडिताइन की चुदाई ज़रूर करूँगा.

क्यू ना मैं कल पंडिताइन के कुछ पूछने से पहले सच बता दूं, जिस से पंडिताइन को अच्छा लगेगा और मुझे चुदाई करने मिल जाएगी.

यही सही रहेगा. मैं सोचते हुए मंदिर मे आ गया.

मंदिर मे सब काम ठीक तक चल रहा था.

सब अपना काम ठीक ठाक कर रहे थे

मैं मंदिर मे थोड़ी देर रुका और फिर घर3 की तरफ चला गया.

अबी सुबह के 10.30 बज रहे थे.

मैं खेत मे आकर शीला को ढूँढने लगा पर वो कही नही मिली.

सविता भी मौजूद नही थी. मैं घूमते हुए सब पे नज़र रख रहा था. और 4 दिन मे क्या हुआ उसके बारे मे पूछने लगा.

सब लोगो को रहने के लिए अच्छी जगह मिली थी जिस की वजह से सब लोग खुश थे

मैं लोगो से पूछ ताछ कर रहा था. कि तभी कुवरसिंघ की कार आ गई.

कार मे कुवरसिंघ नही था .कुवरसिंघ के नौकर थे.

कुवरसिंघ के नौकर कार से नीचे उतर गये. और फिर कार से एक गर्ल को बाहर निकाला

ये तो वही गर्ल है जो कल कुवरसिंघ अपने साथ ले गया था.

मैं ने उस गर्ल को ध्यान से देखा ,उसके होंठ सूज गये थे.

गर्ल के कपड़े कुछ जगह से फटे हुए थे.

गर्ल की ब्रा का स्ट्रीप टूटा हुआ था.

उसकी ड्रेस पर चूत के पास खून के दाग लगे हुए थे.

वो ठीक से खड़ी नही हो पा रही थी.

उसके की आँखे लाल हो हा गई थी. शायद रात भर रोती रही होगी.

कुवरसिंघ के नौकर ने जल्दी से एक कपड़े से उसको बढ़न छुपा दिया.

पर मेरी नज़र ने जो देखना था वो देख लिया था.

कुवरसिंघ ने कल इस गर्ल की ज़ोर दर चुदाई की.

शायद गर्ल चुदाई के लिए तैयार नही होगी .इसी लिए उसके कपड़े फटे हुए है और उसकी हालत ऐसी हो गई.

कुवरसिंघ के नौकर उस गर्ल को लोगों के लिए जो रहने की जगह बनाई थी वहाँ छोड़ कर चले गये.

वो गर्ल मुश्किल से लन्गडाते हुए अपने माता पिता के पास चली गई.

सुबह का समय होने से ज़्यादा लोग नही थे.

मैं उस गर्ल को देखने के लिए उनके पास चला गया. मतलब थोड़ी दूर से देखने लगा.

वो गर्ल अपने माँ के गले लग कर रो रही थी. और रोते हुए अपनी माँ को रात के बारे मे बताने लगी.

मैं वो सब सुनकर शॉक्ड हो गया. कुवरसिंघ और उसके दोस्तो ने इस के साथ ऐसा नही करना चाहिए था.

उस गर्ल की माँ उसका दर्द कम करने की कोशिस कर रही थी.

दोनो माँ बेटी रो रही थी.और रोते हुए वो गर्ल सो गई.

उस गर्ल का बाप कही दिख नही रहा था. शायद रात भर अपनी बेटी को गायब देख कर ढूँढने गया होगा.

मैं भी वहाँ से घर3 मे चला गया .और बेड पर लेट कर सोचने लगा.

कुवरसिंघ को ऐसा नही करना चाहिए था.

कुवरसिंघ को कोई ना कोई मिल जाती. बिचारी गर्ल की ज़िंदगी खराब कर दी. प्यार से ,उसकी सहमति से करता तो अलग बात होती पर इस तरह नही करना चाहिए था.

लेकिन कल वो गर्ल जिस तरह कुवरसिंघ के साथ गई थी उस से पता चलता है कि वो अपनी मर्ज़ी से गई थी.

पता करना होगा ,बता क्या है. वैसे वो ऐसा ही है. रति के साथ भी तो.पता नही कितनो का किया होगा.

मैं उस गर्ल के बारे मे और कुवरसिंघ के बारे मे सोचते हुए सो गया.

मैं 3 घंटे तक सोता रहा.

मोबाइल की आवाज़े सुनकर मेरी नींद खुल गई.

मैं ने मोबाइल मे देखा कॉल छोटी चाची का था.

अवी-हेलो

सी चाची-अमित के पापा कहाँ हो इस समय

अवी-अमित की माँ को सपने मे प्यार कर रहा हू.

सी चाची-सपने मे,

अवी-अब क्या करे अमित की माँ कुछ करने देती नही. मैं तो कब से तैयार हूँ अमित को नया भाई या बहन देने को

सी चाची-उसके लिए टाइम है. सो रहे थे

अवी-हां

सी चाची-आज खाना खाने नही आए

अवी-आज भूक नही है

सी चाची-आज खाना रानी ने बनाया है .कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही है, और तुम हो कि वहाँ सो रहे हो

अवी-2 मिनिट मे आया

सी चाची-सुनो तो

कॉल कट हो गया.

मैं जल्दी से फ्रेश हो गया और घर जाने के लिए बाइक स्टार्ट की.

मैं ने एक बार उस गर्ल की तरफ देखा पर वो वहाँ पर नही थी.

पता नही कहाँ गई.

मैं बाइक लेकर घर चला गया. रानी के हाथ का खाना खाने के लिए.

 
518

मुझे फ्रेश होकर घर जाने मे 15 मिनिट लग गये.

मैं घर जाते ही छोटी चाची के पास चला गया.

अवी-चाची रानी कहाँ है

सी चाची-रशोई घर मे

अवी-खाना गरम कर रही है

सी चाची-खाना बना रही है

अवी-खाना बना रही है, मैं समझा नही

सी चाची-वो मैं ने फोन पर तुम्हें जो बताया था वो झूठ था. मैं मज़ाक कर रही थी .और तूने मेरी बात सुन ने से पहले फोन बंद किया.

अवी-मज़ाक, आप ऐसा मज़ाक क्यू करती हो

सी चाची-मैं तो ऐसे ही

अवी-ऐसे ही, जाइए मैं आज से आप से बात नही करूँगा.

सी चाची-ग़लती हो गई ,दुबारा ऐसा मज़ाक नही करूँगी.

अवी-रानी कहाँ है

सी चाची-तुम ने मेरी बात नही सुनी इस लिए रानी को बुला कर खाना बनवा रही हू.ताकि तुम नाराज़ ना हो

अवी-मैं ने चाची के गाल पर किस किया. यही बात तो मुझे आपकी पसंद है.

सी चाची-तुम मुझ पे नाराज़ नही हो

अवी-आपने फोन पर जो कहा वही तो मिल रहा है. रानी के हाथो से बना हुआ खाना .फिर आप से नाराज़ क्यू होउंगा.

सी चाची-जा अपने कमरे मे मैं रानी को खाना लेकर भेजती हू

अवी-सिर्फ़ रानी को आप नही आएँगी

सी चाची-मैं कबाब मे हड्डी क्यू बनू

चाची रशोई घर मे चली गई और मैं अपने कमरे मे चला गया.

थोड़ी देर बाद रानी कमरे मे खाना लेकर आ गई.

अवी-प्लेट टेबल पे रख दो

रानी ने शरम की वजह से आँखे नीचे रखते हुए प्लेट टेबल पर रख दी.

रानी नर्वस थी. पहली बार उसके हाथ का खाना खा रहा था. एक बार गाजर का हलवा खाया था पर इस खाने मे अलग बात थी.

इतने कम समय मे रानी को मेरे लिए खाना बनाना पड़ा,

अवी-गेट बंद करके यहाँ बैठो

रानी मेरे इस तरह बात करने से और ज़्यादा नर्वस हो गई.

रानी ने गेट बंद किया और मेरे पास आकर बैठ गई.

छोटी चाची बाहर सब को संभाल लेंगी.

मैं ने प्लेट मे देखा. रानी ने कम समय मे बहुत कुछ बनाया है.

प्लेट पूरी भरी हुई थी,खाने मे स्वीट भी बनाया था. पता नही रानी ने ये सब इतनी जल्दी बनाया कैसे

मैं ने रानी की तरफ देखा वो नयी नवेली दुलहन की तरह नर्वस होकर अपनी उंगलियो के साथ खेल रही थी.

मुझे उसकी इस हरकत पे प्यार आ गया.

मैं ने पहला नीवाला लिया. सब्जी बहुत टेस्टी थी.

पर मैं कुछ ड्रामा करने के मूड मे था.

मैं ने मिर्च लगने का नाटक किया

अवी-आअहह आअहह कितनी मिर्च डाली है, तुम्हें खाना बनाना नही आता. पानी दो जल्दी

मेरी बात सुनकर रानी के पसीने छूट गये. वो पानी का ग्लास देखने लगी.

रानी जब गेट बंद करने गई थी तब मैं ने पानी का ग्लास छुपा दिया था.

रानी इधर उधर देख रही थी. पर उसे पानी का ग्लास नही मिला. उसे समझ नही आ रहा था कि क्या हो रहा है. उस ने को ग्लास यही रखा था पर गया कहाँ.

अवी-आअहह पानी कहाँ है, तुम्हें इतना भी पता नही कि खाने के साथ पानी भी लाना चाहिए

रानी-वो मैं ने ...मैं अभी लाती हू

अवी-जाने दो स्वीट खा लेता हू

मैं ने स्वीट का नीवाला ले लिया. स्वीट बहुत स्वादिष्ट था. रानी के होंठो की तरह स्वादिष्ट था.

अवी-ये क्या बनाया. स्वीट मे शुगर की जगह नमक डाला तुम ने, कैसे खाना बनाती हो.सब्जी मे मिर्च ज़्यादा डाल दी, पानी भी नही. कुछ दिमाग़ है या वो भी भेज दिया.

मेरी बात सुनते रानी की आँखे मे पानी आ गया. रानी रोने लगी.

कुछ ज़्यादा ही हो गया.

मैं ने रानी को गले लगा लिया. रानी मेरे गले लग कर रोने लगी.

अवी-कुछ नही हुआ. सब अच्छा बनाया है तुम ने ,मैं मज़ाक कर रहा था.

रानी-नही तुम झूठ बोल रहे हो, मुझे रोता हुआ देख कर, और रोने लगी

अवी-मैं मज़ाक कर रहा था.ये देखो पानी का ग्लास यही पर है.

रानी ने रोना बंद किया

रानी-पर सब्जी उसमे तो मिर्च ज़्यादा है.फिर से रोने लगी.

अवी-ऐसी सब्जी मैं ने पहली बार खाई है, बहुत स्वादिष्ट है. ऐसा लग रहा है ग़लती से उंगली ना खा जाउ

रानी-तुम झूठ भोल रहे हो

अवी-ये देखो मैं सब्जी खा रहा हू

मैं ने सब्जी का नीवाला खा लिया. और एक सब्जी का नीवाला रानी को खिला दिया. और फिर स्वीट का नीवाला भी रानी को खिला दिया.

रानी-इस मे तो सब ठीक है

अवी-मेरी रानी ने बनाया है इसमे कुछ गड़बड़ हो ही नही सकती. मैं तो मज़ाक कर रहा था

रानी-तुम बहुत गंदे हो.इतना अच्छा खाना खिलाने के बाद भी मुझे रुला दिया

और रानी ने मेरी चेस्ट पर 2 3 मुक्के मार दिए

और मेरे गले लग गई

अवी-तुम ने ऐसा खाना बनाना कहाँ से सीखा

रानी-मेरी मम्मी ने सिखाया मुझे

अवी-और क्या सिखाया

रानी-सब कुछ

अवी-खाना खिलाना सिखाया

रानी-हाँ,अबी तो खिलाया तुम्हें

अवी-तुम ने कहाँ खिलाया

रानी-सीधा सीधा बोलो ना मेरे हाथ से खाना है

अवी-तुम तो स्मार्ट हो,

रानी ने सब्जी का एक नीवाला मुझे खिला दिया.

अवी-आअहह मिर्च पानी पानी

रानी-अभी तो कहा था कि मिर्च नही है.

अवी-आअहह पानी पानी

रानी-बहुत नोतंकी बाज़ हो तुम, पानी चाहिए या किस चाहिए

अवी-पानी पानी

रानी ने मेरे होंठो पे किस किया.

अवी-अब अच्छा लगा, मीठा पानी पीने के बाद

रानी-तुम बहुत नोतंकी करते हो. आ करो ये लो स्वीट

रानी ने मुझे स्वीट खिलाया. और मैं ने रानी को किस किया

रानी-स्वीट खा कर मिर्ची लगी

अवी-नही

रानी-फिर किस क्यू किया

अवी-तुम्हारी मीठास तुम्हें वापस की

रानी-नोतंकी बाज हो तुम,पहले मिर्च लगने का नाटक करके मुझे किस करने को कहते हो और बाद मे स्वीट खा कर फिर से मुझे किस करके मिर्च लगने पर मैं तुम्हें किस करू इस लिए मेरा मुँह मीठा कर रहे हो

अवी-बहुत भूक लगी है

रानी मुझे खिलाती गई और हम किस करते गये.

कभी मैं रानी को खाना खिलाता तो कभी रानी मुझे खिलाती थी.

पर खाना किसी को भी खिलाओ किस बराबर मिल रहा था

रानी को प्यार करते हुए खाना खाने मे वो भी रानी के हाथो का ,दिल खुश हो गया.

अभी आधा खाना खा ख़तम हुआ था कि छोटी चाची ने गेट खोल दिया.

सी चाची-हँसते हुए मिर्च लगी है रानी को कहूँ पानी देने को

अवी-आप अंदर कैसे... रानी ने तो गेट बंद किया था

सी चाची-मैं ने रानी को कहा था कि अगर तुम ने गेट बंद करने को कहा तो बंद करने का नाटक करना. मुझे देखना था कि रानी खाना कैसे खिलाती है.

छोटी चाची की बात सुनकर रानी शरमा कर बाहर चली गई.

अवी-क्या चाची, थोड़ी देर रुक नही सकती थी.अच्छा खाना खा रहा था.

सी चाची-अछा बच्चू ,रानी से पहले मेरे हाथ का खाना ख़ाता था अब रानी आ गई तो चाची को भूल गया.

अवी-आपकी सौतन है. आपको बाजी मारनी पड़ेगी.

सी चाची-बहुत प्यारी सौतन है मेरी. अगर फिर उसको रुलाया तो देखना मैं क्या करूँगी

अवी-फिर तो देखना पड़ेगा.

सी चाची-एक बार रानी को आने दे इस घर मे फिर दिखाती हू तुझे,

अवी-अभी से प्लॅनिंग हो रही है,

सी चाची-हम ने तो बहुत कुछ सोच रखा है ,तू खाना खा मैं रानी की खिचाई करती हू

अवी-ज़्यादा मत करना.

सी चाची-मैं उसकी सास हूँ कुछ भी करूँगी तुम बीच मे मत आना

अवी-आप और आपकी बहू के बीच मे मैं क्यू आउन्गा.

सी चाची-समझदार हो

अवी-बेटा किसका हूँ,आपका

सी चाची-मुन्ना खाना खा ले, मैं मुन्नी के पास जा रही हू

छोटी चाची की बात ही अलग है, एक पल मे सौतन बना दिया, और एक पल मे बहू बना दिया.

 


519

रानी के हाथो का खाना खाने के बाद मैं वापस घर 3 आ गया.

और उस गर्ल को देखने चला गया.अभी भी वहाँ पर कोई नही था.

शायद वो हॉस्पिटल गये होंगे या फिर कंप्लेंट करने या फिर ठाकुर के पास शिकायत लेकर गये होंगे.

कैसे से पता करूँ, रणजीतसिंघ को फोन करता हू ,तब कुछ पता चलेगा.

मैं ने रणजीतसिंघ को कॉल किया पर रणजीतसिंघ ने कोई जवाब नही दिया.

मैं ने फिर फोन किया. इस बार रणजीतसिंघ ने फोन पिक अप किया.

अवी-हेलो

रणजीतसिंघ-मैं तुम्हें थोड़ी देर बाद फोन करता हू,अभी मैं बिज़ी हू

और रणजीतसिंघ ने फोन कट किया.

रणजीतसिंघ ने मुझे कुछ नही बताया. पर फोन पर मैं ने इनस्पेक्टर नाम सुन लिया. मेरा काम हो गया. मुझे जो पता करना था वो कर लिया

मैं बाइक लेकर सीधा पोलीस स्टेशन चला गया.

पोलीस स्टेशन मे वो गर्ल अपने माता पिता के साथ कंप्लेंट करने आई थी ,रणजीतसिंघ इनस्पेक्टर के साथ बात करके केस ना होने की कोशिस कर रहा था.

मैं चुप चाप जाकर रणजीतसिंघ के पास खड़ा हो गया. और रणजीतसिंघ और इनस्पेक्टर की बात सुन ने लगा.

इनस्पेक्टर-ठाकुर साब केस बहुत स्ट्रॉंग है.मैं कुछ नही कर सकता.

रणजीतसिंघ-इस बार कैसे भी करके संभाल लो. तुम्हें पैसे मिल जाएँगे

इनस्पेक्टर-मैं तो संभाल लूँगा .पर वो केस करना चाहते है.

रणजीतसिंघ-उनको मैं समझा देता हूँ.अगर केस हुआ तो आप संभाल लेना

इनस्पेक्टर-ठाकुर साब आप समझ क्यू नही रहे हो.उस गर्ल की मेडिकल रिपोर्ट से सब पता चल जाएगा. मैं कुछ नही कर सकता.

रणजीतसिंघ-हमारी इज़्ज़त का सवाल है,

इनस्पेक्टर-एक काम हो सकता है, आप उन से बात कर के देख लो. अगर वो मान गये तो सब ठीक हो जाएगा.

अवी-उन को मैं समझा दूँगा.

रणजीतसिंघ और इनस्पेक्टर मेरी तरफ देखने लगे

रणजीतसिंघ-तुम कब आए

इनस्पेक्टर-इनकी तारीफ,ये तो

रणजीतसिंघ-मेरा दोस्त है.

इनस्पेक्टर-तो तुम समझाओगे उनको ,और हँसने लगा

रणजीतसिंघ-मैं देखता हूँ इनस्पेक्टर आप बस रिपोर्ट मत लिखना

इनस्पेक्टर-ठीक है

रणजीतसिंघ मुझे साइड मे ले गया.

रणजीतसिंघ-तुम कब आए

अवी-अभी अभी आया.

रणजीतसिंघ-तुम क्या कह रहे थे इनस्पेक्टर को कि तुम समझाओगे उनको

अवी-वैसे हुआ क्या है

रणजीतसिंघ-अजीब हो तुम, तुम्हें कुछ पता नही और इतनी बड़ी बात कर दी. उस गर्ल के साथ कुवरसिंघ और उसके दोस्त ने चुदाई की है. अब वो गर्ल कंप्लेंट करना चाहती है. अगर कंप्लेंट हो गई तो हमारी इजाज़त खराब हो जाएगी

अवी-आप उस गर्ल के साथ सेटल्मेंट क्यू नही करते

रणजीतसिंघ-मैं करने को तैयार हू पर वो मेरी एक भी बात नही सुन रही है,

अवी-मैं ट्राइ करके देखूं

रणजीतसिंघ-तुम भी करके देख लो, जितना पैसे चाहे दे दो पर कंप्लेंट मत होने दो.कुवरसिंघ ने नाक मे दम करके रख दिया.

अवी-मैं पूरी कोशिस करूँगा.

रणजीतसिंघ इनस्पेक्टर के पास चला गया. और मैं उस गर्ल के पास

उस गर्ल को एक अलग कमरे मे अपने माता पिता के साथ रखा था.

मैं उस कमरे मे चला गया. कॉन्स्टेबल ने मुझे रोक दिया.

अवी-मुझे इनस्पेक्टर ने भेजा है. इन से बात करने के लिए

मैं ने उस कॉन्स्टेबल को बाहर भेज दिया.

अब कमरे मे वो गर्ल, उसके माता पिता ,मैं था.

अवी-नमस्ते ,

गर्ल का बाप-तुम कौन हो

अवी-मुझे अपना बेटा समझिए

गर्ल का बाप-किस लिए आए हो

अवी-आप से बात करनी है

गर्ल का बाप-हमे किसी से बात नही करनी,तुम जाओ यहाँ से

अवी-मैं बिना बोले तो जाउन्गा नही यहाँ से और अगर मैं चला गया तो आप को कंप्लेंट करके कुछ नही मिलेगा.आप को ना इंसाफ़ मिलेगा और ना आपका दर्द कम होगा

गर्ल का बाप-कहना क्या चाहते हो

अवी-मुझे जो कहना है वो मैं आपकी बेटी से कहूँगा.

गर्ल का बाप- जो कहना है हमारे सामने कहो

अवी-आपके सामने आपकी बेटी बोल नही पाएगी. और मुझे अपना हमदर्द समझिए ,बिना मेरी मदद के आप ठाकुर का कुछ नही बिगाड़ सकते.

गर्ल का बाप-इतने से हो और बड़ी बड़ी बाते कर रहे हो.हमे तुम से कोई बात नही करनी जाओ यहाँ से, हमे क़ानून पर पूरा विश्वास है, हमे इंसाफ़ ज़रूर मिलेगा. हमे किसी की मदद नही चाहिए

अवी-इतना विषवास है तो ये बताइए अभी तक आपकी कंप्लेंट क्यू नही लिखी गई. कुवरसिंघ को जैल मे क्यू नही डाला गया.

उस का बाप सोचने लगा.

अवी-आपको मेरी बात नही सुन नी तो मैं चला जाता हू

मैं बाहर जाने लगा था कि उस गर्ल ने मुझे रोक लिया.

गर्ल-रूको

गर्ल का बाप-क्या कर रही हो तुम, तुम्हें ये बहका देगा

गर्ल-मुझे इसकी बात सुन नी है

गर्ल का बाप-फिर हम भी यही रुकेंगे

अवी-मुझे अकेले मे बात करनी है

गर्ल-पिताजी आप हमे अकेला छोड़िए

गर्ल की माँ-कलमुंही है, पहले अपनी मर्ज़ी से चल कर मुँह काला किया और अब इस अजनबी पर भरोसा कर रही है

गर्ल-मेरी ग़लती से हुआ ना फिर मैं ठीक करूँगी.

गर्ल का बाप-जो करना है कर

उस के माता पिता कमरे से बाहर चले गये.

उस गर्ल की आँखे मे पानी आ गया.

मैं उस के पास जाकर बैठ गया. और उसको पानी दिया.

उस के लिए फ़ैसला करना मुश्किल था फिर भी वो पूरी हिम्मत करके लड़ने के लिए तैयार थी.

ग़रीब होने के बाद भी वो लड़ाई लड़ना चाहती है. मैं ने उसकी लड़ाई मे मदद करने का फ़ैसला किया.

 
520

अवी-तुम्हारा नाम पूछकर मैं समय बर्बाद नही करूँगा ,मैं कुछ सवाल पूछता हू तुम उसके जवाब दो ,फिर मैं तुम्हारी मदद करूँगा.

गर्ल-तुम हो कौन और मेरी मदद क्यू करना चाहते हो

अवी-मुझे नही जानती, मैं मंदिर मे पूजा करता हूँ .और ठाकुर के बाद इस गाओं मे मेरा राज चलता है.

गर्ल-अगर तुम ठाकुर को नीचा दिखने आए हो तो चले जाओ

अवी-मैं सिर्फ़ तुम्हारी मदद करने आया हू

गर्ल-और मदद कैसे करोंगे

अवी-तुम्हें कंप्लेंट करने से रोक कर

गर्ल-ये है तुम्हारी मदद ,तुम मेरी मदद करने आए हो या ठाकुर को बचाने

अवी-दोनो करने आया हूँ

गर्ल-कैसे घटिया इंसान हो तुम, अभी तुम ने मेरे माता पिता को कहा तुम्हें बेटा समझे ,और मुझे कंप्लेंट ना करने को कह रहे हो,

अवी-मैं तुम्हारी भलाई के लिए कह रहा हू. तुम्हें पता नही ठाकुर क्या कर सकते ,यहाँ पोलीस स्टेशन मे आकर तुम्हारे माता पिता को मार डाल सकते है.

और कंप्लेंट करने से 7 साल की सज़ा होती.बदला लेना है तो ऐसा लो कि वो ज़िंदगी भर दर्द मे तड़फता रहे., हर पल मरता रहे ऐसा बदला लो. या फिर कंप्लेंट करने के बाद उसे ज़िंदगी भर तड़फते हुए मरने के लिए छोड़ दो.

गर्ल-और ये कैसे होगा

अवी-वो बाद मे ,पहले तुम सोचो कि तुम्हारे कंप्लेंट करने से क्या होगा.

गर्ल-क्या होगा. उस ठाकुर को सज़ा होगी

अवी-ठाकुर को नही पूरे गाओं को सज़ा मिलेंगी, प्युरे ठाकुर फॅमिली को सज़ा मिलेंगी. ये 500 साल से चल रहे मेले को सज़ा मिलेंगी. तुम्हारी कंप्लेंट करने के बाद मेले का अस्तित्व ख़तरे मे आ सकता है.

गर्ल-तो तुम चाहते हो उस ठाकुर को सज़ा ना दूं

अवी-उसे तो सज़ा मिलेंगी पर अलग तरीके, ऐसी सज़ा जो वो ज़िंदगी भर तड़फ़ तड़फ़ कर अपने मरने का इंतज़ार करेंगा

गर्ल-ऐसी सज़ा कौन देगा

अवी-मैं दूँगा. मुझ पे विश्वास करो

गर्ल-पर

अवी-पर वर सब छोड़ो ,मुझे ये बताओ ये सब हुआ कैसे

गर्ल-वो मुझे हवेली दिखाने के बहाने से ले गया और मेरे साथ

अवी-तुम्हें पता था कि कुवरसिंघ क्यू ले कर जा रहा है.

गर्ल-नही

अवी-सच बताओ

गर्ल-हाँ, कुवरसिंघ मुझे बहला कर ले गया, मैं उसके लिए तैयार थी,मैं ने कुवरसिंघ के साथ अपनी मर्ज़ी से किया .

अवी-अपनी मर्ज़ी से किया तो ये नाटक क्यू कर रही हो

गर्ल-कुवरसिंघ के बाद उसके दोस्तो ने मेरे साथ किया जो मेरे मर्ज़ी से नही हुआ ,

अवी-उन 3 के खिलाफ कंप्लेंट करो

गर्ल-मैं 4 के खिलाफ करूँगी.क्यू कि मैं ने सुबह ये बात कुवरसिंघ को बताई तो वो मुझ पे हँसने लगा. उसने कहा कि वो ऐसा ही करता है सब लड़कियो के साथ ,सभी रोटी हुए जाती हैं ,तेरा साथ भी वही किया ,अगर तू मेरे साथ अपनी मर्ज़ी से नही करती तो मेरे दोस्तो ने जैसा किया है मैं भी यही करता . मैं ऐसा ही हू ,जा जो करना है कर ले मैं नही डरता किसी से ,और मुँह खोलने की कोशिस की तो जान से मार डालूँगा.

अवी-तो ये बात है

गर्ल-हां, उसके बाद कुवरसिंघ ने मेरे कपड़े फाड़ दिए और मुझे वैसे भेज दिया ताकि मैं डर के मारे कुछ ना करू. लेकिन उसे सबक सिखा कर रहूंगी. और दूसरी लड़की को उसके हाथो मे आने से बचाउन्गी

अवी-(इरादा अच्छा है इसका .इसकी मदद करनी चाहिए )तुम्हें भाई बहन है

गर्ल-मैं अकेली बेटी हूँ अपने माता पिता की

अवी-ग़रीब हो

गर्ल-हाँ

अवी-अब सुनो तुम कंप्लेंट मत करना, ठाकुर से मैं तुम्हारे फॅमिली के लिए 5 लाख रूपई दिलाउन्गा. तुम्हारी शादी करवाने की पूरी ज़िम्मेदारी ठाकुर लेगा.

गर्ल-मुझे पैसे नही चाहिए ,बस उस कमीने को सज़ा मिलनी चाहिए

अवी-सज़ा भी मिलेंगी, पर तुम्हारे माता पिता के लिए ये पैसे उनके फ्यूचर के लिए सहारा साबित होंगे. तुम्हारी शादी होगी तो तुम्हारे माता पिता के सर से बढ़ा बोझ दूर होगा. तुम्हारी माँ अब यही सोच रही होगी कि तुम्हारा क्या होगा, तुमसे कौन शादी करेगा.

गर्ल-और सज़ा

अवी-उसको सज़ा मैं दूँगा. बस तुम्हें मेला ख़तम होने तक यही रुकना होगा.

गर्ल-सज़ा दोगे कैसे

अवी-वो मुझ पर छोड़ो, उसकी सज़ा देख कर तुम खुश हो जाओगी.

गर्ल-एक तो तुम बता नही रहे हो, अगर बाद मे तुम पलट गये तो, इस से अच्छा है कि मैं कंप्लेंट करूँ

अवी-तुम्हें अभी बताया कि कंप्लेंट करने से पूरा गाओं बदनाम होगा. क्यू कि ये काम ठाकुर ने किया है.

गर्ल-फिर तुम बताते क्यूँ नही. मुझे अब किसी पे भरोसा नही है

अवी-मुझ पे भरोसा करने के सिवाय तुम्हारे पास दूसरा कोई रास्ता नही है

गर्ल-मैं कंप्लेंट कर सकती हू

अवी-तुम पागल हो, अच्छा मान लिया तुम ने कंप्लेंट की फिर क्या होगा. तुम्हें कोर्ट के चक्कर लगाने होगे. तुम हो ग़रीब हो,इतने पैसे लाओगी कहाँ से कि केस लड़ सको. और वो ठाकुर है वो तो पानी की तरह पैसे बहा देंगे. तुम्हारी मेडिकल रिपोर्ट चेंज कर सकते है. सब को खरीद सकते है.

चलो मान लेते तुम केस जीत गई फिर क्या होगा ,केस हाइ कोर्ट मे जाएगा. तारीख पे तारीख मिलती रहेंगी.

अगर ठाकुर को सज़ा हो गई .कितने साल की होगी, 7 साल 10 साल .वो तो जैल मे राजा की तरह रहेगा. क्या तुम ये चाहती हो,ठाकुर पॉलिटीशियन की मदद से 1 2 साल सज़ा कम भी करवा सकते है.

वो जाने दो, तुम्हारा क्या होगा.केस लड़ने के बाद तुम्हारे पास खाने के लिए पैसे नही होंगे, तुम्हारे साथ शादी कौन करेगा, तुम्हारे माता पिता तुम्हें घुट घुट कर मरते हुए देख कैसा महसूस करेंगे.

क़ानून ठाकुर को सज़ा ज़रूर देगा. पर पॉलिटीशियन ,पैसा सब कुछ बदल सकता है.ठाकुर जैल मे रह कर राजा की तरह रहेगा

अगर ठाकुर को फासी की सज़ा हुई तो बात अलग है. पर ठाकुर को फासी नही हो सकती.

मेरी बात सुनकर सोचने लगी.

गर्ल-तुम मुझे डरा रहे हो

अवी-जो रेआलिटी है वो तुम्हें बता रहा हू

गर्ल-मेरी कॉम्पलिन्ट करने से मेला कैसे बंद होगा.

अवी-ठाकुर से मेला चलता है. बस इतना ही कह सकता हू. तुम्हारे पास टाइम कम है.

गर्ल-मुझे सोचने दो

अवी-मैं ने जो कहा है उस से तुम्हारा ,तुम्हारे माता पिता का भला होगा. कुवरसिंघ को सज़ा भी देंगे, मेला भी चलता रहेगा.

गर्ल-मुझे अकेला छोड़ो

वो मेरी बात पे सोचने लगी. और मैं बाहर जाने लगा.

अवी-(मैं उसकी, गाओं की, मेले की, भलाई की बात कर रहा था.

क्या पता कंप्लेंट करने के बाद ठाकुर उसको मार भी डाल सकता है

उसकी बात भी सही है कंप्लेंट होनी चाहिए. पर बड़े लोगो के सामने ग़रीब दब जाते है.

ठाकुर अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए जी जान लगा देंगे. पैसे उनके लिए हाथ का मैल है

मैं उसकी ,उसके फॅमिली की, गाओं की,ठाकुर की फॅमिली की, मेले की सब की तकदीर उस पर डिपंड है

इस बार मेले का काम मुझे मिला था. अगर कंप्लेंट हो गई तो मेरी फॅमिली का नाम भी बदनाम हो जाएगा. हो जाने दो .नाम मे क्या रखा है, लेकिन इस मेले पे कितने घर का चूल्हा जलता है .कितने लोग इस मेले पे डिपेंड है. मेला बंद हो गया तो कितने लोगो पे इसका असर होगा.ठाकुर का क्या है उनके पास पैसे है. लेकिन जो अपनी जान हथेली पे रख कर मेले मे करतब दिखाते है उनका क्या होगा. इस मेला का इंतज़ार सब को होता है, इस मेले से सबको बहुत उम्मीद है. लोगो की रोज़ी रोटी का सवाल है.

अगर उस ने कंप्लेंट नही की तो मैं पूरी कोशिस करूँगा कुवरसिंघ को सबक सिखाने का. ऐसा सबक जो उस पर दाग लग जाएगा.

उसके कंप्लेंट करने पे बहुत कुछ दाँव पर लगा हुआ था. )

मेरे बाहर आते ही उस के माता पिता कमरे के अंदर चले गये.

रणजीतसिंघ मेरे पास आ गया.

रणजीतसिंघ-क्या हुआ

अवी-वो सोच रही है. मैं ने पूरी कोशिस की ,अब सब उस पर डिपंड है

रणजीतसिंघ उसके कमरे से बाहर निकलने का इंतज़ार कर रहा था.

 
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