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किरण मेरे बच्चे की माँ बन ने वाली है ये बात सुनकर मैं खुश हो गया.
फिर दोपेहर मे मैं घर3 आ गया.
इस समय ज़्यादातर तर लोग दर्शन करके मेले मे जाने से पहले थोड़ा आराम करते है.
मैं भी आराम करने के लिए घर3 आ गया.पर पहले सोचा कि शीला या सविता को देख लू.
शीला तो नही मिली पर सविता अपने फॅमिली के साथ बैठी थी. पर वो बार बार दूसरी तरफ देख रही थी. मैं ने सविता की नज़र का पीछा किया.
सविता कुवरसिंगी की तरफ देख रही थी.
मतलब कुवरसिंघ ने सविता को पटा लिया है. या फिर पटने वाली है.
कुवरसिंघ थोड़ी देर सविता के साथ नयन मटक्का करता रहा.फिर खेत मे दूसरी तरफ चला गया.
वहाँ जाकर कुवरसिंघ ने एक गर्ल को अपने पास बुलाया और अपने साथ कार मे लेकर चला गया. पता नही कहाँ लेकर गया था पर जहाँ भी लेकर गया,आज उसकी चुदाई करेगा.
कुवरसिंघ के जाने के बाद मैं घर3 जाकर मोना के बारे मे सोचने लगा. पर कुछ समझ नही रहा था.
फिर मैं सो गया.
दोपहर मे एक नींद पूरी करने के बाद मैं शाम को घर चला गया.
अपने भाई बहनों को मेला दिखाने के लिए.
मेरे घर आते ही सब तैयार हो गये.
राज-भैया आ गये, चलो मेला देखने
अवी-रूको, मुझे खाना खाने दो फिर चलते है, सुबह से सिर्फ़ नाश्ता किया है
मेरी बात सुनकर रानी खड़ी हो गई. रसोई घर मे जाने के लिए, पर तभी कोमल बीच मे बोल पड़ी
कोमल-अवी तुम बैठो मैं और रानी तुम्हारे लिए खाना लेकर आते है
कोमल रानी के साथ रशोई घर मे जाकर मेरे लिए खाना लेकर आ गई.
फिर मैं ने खाना खा लिया ,और मेले मे जाने के लिए तैयार हो गये. की बड़ी चाची ने मुझे आवाज़े दी.
अवी-चाची आपने बुलाया मुझे
ब चाची-हाँ एक काम था
अवी-बताइए क्या काम था
ब चाची-वो
अवी-वो
ब चाची-वो तुम कल की...
अवी-कल की
ब चाची-वो तुम कल की तरह मेले से मेरे लिए गरम गरम जलेबी ला सकते हो.
अवी-जलेबी, आप भी ना ,मैं तो डर गया था, मैं कल की तरह आपके लिए जलेबी लेकर आ जाउन्गा.
फिर मैं मेले मे चला गया
अवी-आज कैसे देखना है मेला
कविता- मौत का कुँआ,कल देखा नही था.
स्वेता दीदी-चलो मौत का कुँआ देखते है.
हम सब मौत के कुआ देखने के लिए चले गये. मैं ने हमेशा की तरह वहाँ के आदमी को कहा कि कुछ अच्छा दिखाना. और हम उपर जाकर मौत के कुँए का मज़ा लेने लगे.
खेल शुरू होते खड़े रहने की जगह हिलने वाली थी. जिस की वजह से राज तो स्वेता दीदी का हाथ पकड़ कर खड़ा हो गया.
मेरी जगह हमेशा फिक्स होती है. एक तरफ रानी तो दुसारी तरफ कोमल लेती थी.
कविता और लीना तो अपने तरीके से मज़ा लेती थी.
स्वेता दीदी ने रानी को इस बात के लिए कभी रोका नही कि वो मेरे साथ क्यू खड़ी है. अगर कभी ना रहे तो स्वेता दीदी कुछ सोच कर रानी को मेरे पास रहने के लिए आइडिया लगा लेती.
जैसे कल रानी को मेरे साथ झूले मे अकेले बैठाया था.
और कोमल तो किसी को मेरे दूसरे तरफ आने से पहले अपनी जगह बना लेती थी.
कोमल को मेरा साथ अच्छा लगता था ये मुझे पता था .इस लिए मैं ने इस बात पे ज़्यादा ध्यान नही दिया.
मौत के कुँए मे खड़े रहने की जगह हिलती थी जिस का मैं फ़ायदा उठा सकता था. पर यहाँ सब के होते हुए किसी के साथ मज़ा करता.
कोमल मेरा साथ छोड़ती नही थी. और रानी के साथ चिपकी रहती थी. बड़ी मुश्किल से रानी को सबकी नज़रों से बचा कर प्यार करना पड़ता था.
आज मौत के कुँए मे ज़्यादा लोग नही थे. और मैं ने ही कहा था ज़्यादा लोगो को अंदर ना भेजे ताकि मेरी बहनें खेल का मज़ा ले सके
पर कुछ भी हो मौत के कुँए मे मज़ा लिया जा सकता था.
चलो खेल भी शुरू हो गया.
पहले एक बाइक मौत के कुँए मे घूमने लगी.
वो बाइक वाला अच्छे करतब दिखा रहा था. वो कभी अपने हाथ छोड़ देता तो कभी अपने पैर बाइक के हॅंडल पर रख कर बाइक चलाता.
फिर बाइक मौत के कुँए के उपर तक आने लगी. जैसे जैसे वो उपर आने लगा वैसे वैसे हम जहाँ खड़े थे वो जगह हिलने लगी.
राज ने तो स्वेता दीदी के हाथ को पकड़ लिया.
मैं भी मज़े के लिए कुछ पकड़ लेता हूँ.
मैं ने कोमल का हाथ पकड़ लिया. हाथ पकड़ते ही कोमल मेरी तरफ देख कर हँसने लगी.
और मैं ने दूसरा हाथ रानी की कमर मे डाल दिया.
रानी ने मेरी तरफ देखा और खेल का मज़ा लेने लगी.