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मैं और मेरा परिवार

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521

रणजीतसिंघ उसके कमरे से बाहर निकलने का इंतज़ार कर रहा था.

उसके बाहर आने के बजाय उसका बाप बाहर आ गया. मुझे और रणजीतसिंघ को अंदर बुलाया

हम कमरे के अंदर चले गये.

गर्ल-मैं कंप्लेंट नही करूँगी...

मैं बीच मे बोल पड़ा

अवी-आपको इस को 5 लाख देने होंगे

रणजीतसिंघ-मिल जाएँगे

अवी-इसके माता पिता को 5 एकर ज़मीन देनी होगी.

वो गर्ल मेरी तरफ देखती रह गई.

रणजीतसिंघ-वो भी मिल जाएगी

अवी-इस की शादी कराने की ज़िम्मेदारी आपकी

रणजीतसिंघ-कुछ सोचते हुए, ये जहाँ रहती है वहाँ हमारी फॅक्टरी है, वहाँ के आसिटेंट मनेजर के साथ इस लड़की की शादी करा दूँगा.

अवी-वो मान जाएगा.

रणजीतसिंघ-वो अनाथ है, उसकी पढ़ाई ,और उसका सारा खर्च मेरे पिताजी ने किया था. वो हमारी बात मान जाएगा.

अवी-और कुछ

गर्ल का बाप-शुक्रिया बेटे, हमे पैसो से ज़्यादा इसकी शादी की चिंता हो रही थी. ये सब हो जाने के बाद इसके साथ शादी कौन करता. तुम ने हमारी सब से बड़ी मुश्किल हल कर दी.

रणजीतसिंघ-आप जाकर इनस्पेक्टर को बता दो

उसके माता पिता ,और रणजीतसिंघ इनस्पेक्टर के पास चले गये

गर्ल-तुम्हें तुम्हारी बात याद है ना

अवी-तुम टेन्षन मत लो ,कुवरसिंघ को सज़ा मैं दूँगा.

गर्ल-पर मुझे कैसे पता चलेगा उसे सज़ा मिली है

अवी-उसे जो सज़ा मिलेगी उसकी रेकॉर्डिंग करके तुम्हें दिखाउन्गा.

गर्ल-जब तक तुम उसे सज़ा नही दोगे तब तक मैं यही रुकूंगी.

अवी-ये ठीक रहेगा.

हम भी कमरे से बाहर आ गये.

रणजीतसिंघ ने इनस्पेक्टर को 1 लाख रुपये दिए.

उनको 5 लाख रुपये जो रणजीतसिंघ सेटल्मेंट करने लाया था वो उस के पिता को दे दिए.

वो अपने माता पिता के साथ चली गई.

अवी-अच्छा ,मैं चलता हूँ.

रणजीतसिंघ-तुम कहाँ जा रहे हो ,तुम मेरे साथ फार्म हाउस पर चलो तुम से बात करनी है

मेरे मना करने के बाद भी रणजीतसिंघ मुझे अपने साथ फार्महाउस पर ले गया.

फार्महाउस हवेली जैसा बनाया था.

रणजीतसिंघ मुझे अंदर ले गया. और नौकरानी को शराब लाने को कहा.

वो किसी भी तरह से नौकरानी नही लग रही थी.

नौकरानी शराब लेकर आ गई. और ग्लास मे शराब डालने लगी.

अवी-मैं नही पीता

रणजीतसिंघ-आज तुम ने मेरी मदद की है, हमारी इज़्ज़त बचाई है ,जश्न तो बनता है

अवी-पार्टी फिर कभी करेंगे. मैं आज जूस पीऊंगा.(मैं पार्टी कैसे कर सकता था, जिस दिन कुवरसिंघ को सज़ा दूँगा उसके बाद पार्टी करूँगा)

रणजीतसिंघ-इसके लिए कोल्ड्ड्रिंक लेकर आ जाओ .और म्यूज़िक लगाओ

रणजीतसिंघ ने टॉप टू बॉटम एक सीप मे पूरा ग्लास ख़तम कर दिया.

मैं कोल्ड ड्रिंक पीने लगा.

उस नौकरानी ने म्यूज़िक लगाया और रणजीतसिंघ के लिए एक और ग्लास बनाया और नाचने लगी.

रणजीतसिंघ ने फिर से एक सीप मे ग्लास ख़तम कर दिया

रणजीतसिंघ-देखो ,कैसे नाच रही है. पता है ये कओन है

अवी-कौन है

रणजीतसिंघ-रंडी है, इसको धोके से रंडी बनाया जा रहा था पर जब ये बात मुझे पता चली तो मैं ने इसको वहाँ से खरीद कर उस दलदल से बाहर निकाला. मैं ने सही समय पर उसको वहाँ से निकाल लिया.पर ये अपने घर जाने की बजाय यहाँ मेरे पास रहने की ज़िद्द करने लगी. और मैं ने रख लिया. यहाँ पर ये रानी की तरह रहती है. अपनी मर्ज़ी की मालिक है. मैं ने आज तक इसको हाथ नही लगाया.अगर मैं इसकी चुदाई करूँगा तो ये मना नही करेगी. पता है ये सब मैं तुम्हें क्यू बता रहा हू

अवी-क्यू बता रहे हो

रणजीतसिंघ-इस लिए कि अगर प्यार से काम होता है तो ज़बरदस्ती करने की ज़रूरत क्या है. मैं ने कितनो पे अहसान किए है मुझे पता नही .अगर मैं ने किसी को कहा तो कोई मना नही करेंगी. पर ज़बरदस्ती करने की ज़रूरत क्या है.

अवी-मैं आप की बात से सहमत हू

रणजीतसिंघ-मैं सब पे अहसान करता हूँ और तुम ने आज मुझ पर अहसान किया. हमारी इज़्ज़त बचाई है.

अवी-मैं ने सिर्फ़ दोस्ती निभाई है

रणजीतसिंघ-एक तुम हो और एक वो मेरा कमीना भाई कुवरसिंघ है.हमारे परिवार पर कलंक है.

अवी-फिर भी आप का भाई है

रणजीतसिंघ-भाई नही मेरी जान का दुश्मन है

अवी-जान का दुश्मन

और एक ग्लास खाली किया.

रणजीतसिंघ-2 बार मेरी जान लेने की कोशिस की उसने. वो तो अच्छा हुआ एक बार मेरी किस्मत अच्छी थी. और दूसरी बार मेरी बीवी ने जान बचाई

अवी-ये बात बड़े ठाकुर को पता है

रणजीतसिंघ-हाँ, इसी लिए मेले का काम मुझे दिया है

अवी-पर कुवरसिंघ ने ऐसा क्यू किया

रणजीतसिंघ-पूरी प्रॉपर्टी पे क़ब्ज़ा करना चाहता है.मैं तो तीन हिस्से करना चाहता था. पर वो है कि पूरी प्रॉपर्टी का मालिक बन ना चाहता है

अवी-तो आप क्यू ना उसे रास्ते से हटा देते है

रणजीतसिंघ-मैं ने ऐसा किया तो कुवर और मुझ मे क्या फरक रहेगा.

अवी-पर मुझे लगता है ,प्रॉपर्टी आप को मिलनी चाहिए( ठाकुर कुवरसिंघ को पैसे नही देते इसी लिए मोना के मालिक को ब्लॅकमेल कर रहा है)

रणजीतसिंघ-मुझे आधी भी मिली तो मैं खुश हो जाउन्गा.

और रणजीतसिंघ ने नौकरानी को मेरे पास बैठने को कहा.

वो मेरे पास आकर बैठ गई. और मेरे लंड को कपड़ो के उपर से सहलाने लगी.

रणजीतसिंघ-एक बात मेरी समझ मे नही आई कि तुम ने उस लड़की को समझाया कैसे

अवी-(क्या कहूँ) शादी के नाम से मान गई

रणजीतसिंघ-मुझे भी शादी की बात करनी चाहिए थी. तुम ने मुझ पर ,मेरी फॅमिली पर अहसान किया. हमारी इज़्ज़त

मैं ने उस नौकरानी का हाथ अलग कर दिया.

रणजीतसिंघ-एंजाय करो इस के साथ , ये अभी तक वर्जिन है, इसके साथ कुछ नही हुआ. मैं ने कुछ होने से पहले उसे बचा लिया था.

अवी-आज नही किसी और दिन

रणजीतसिंघ-कर लो ,बाद में और मिलेंगी.

मेरा मूड नही था. एक तो उस लड़की के साथ ये सब हुआ. और मेले मे जाने का समय हो रहा था.

अवी-आज नही फिर कभी

रणजीतसिंघ-तुम सच मे अजीब हो,सामने एक वर्जिन लड़की है और तुम हो कि मना कर रहे हो

अवी-मैं ऐसा ही हूँ

रणजीतसिंघ-मुझे तो लग रहा है कि कल मैं ने जिसे भेजा था उसके साथ किया या मना करते रहे

अवी-उसके साथ किया पर वो तो वर्जिन नही थी.

रणजीतसिंघ-तुम ने कहा था ना कि तुम पहली बार कर रहे हो इस लिए एक्सपीरियंस वाली को भेजी थी.आज वर्जिन ,इसे अपने साथ लेकर जाओ

अवी-ये तो मेरा जश्न है .इसकी सील मैं तोड़ूँगा पर अभी नही,और ये गिफ्ट है.और आज रात नही कल भेज ना. पर इसको नही.

रणजीतसिंघ-ठीक है किसी और को भेजूँगा. और ये तुम्हारी अमानत रहेगी मेरे पास. इसकी सील तुम तोड़ना जब तुम चाहो

और रणजीतसिंघ शराब पीने लगा.

वो नौकरानी फिर से मेरे लंड को सहलाने लगी.

अवी-ये ऐसे नही मानेगी.

रणजीतसिंघ-मना लो

अवी-तुम्हारा नाम क्या है

विधया-विद्या

अवी-तुम इतनी उतावली क्यूँ हो

विधया- तुम ने ठाकुर साब की मदद की ,मतलब मेरी मदद की, और ठाकुर साब ने कहा कि मैं तुम्हारी हूँ,तो आज से मुझ पर तुम्हारा हक है.

अवी-तुम ठाकुर की हर बात मानती हो

विधया-हाँ

अवी-क्यू?

विधया-ठाकुर साब ने मुझे रंडी बन ने से बचाया,मेरी जान बचाई है.

अवी-तुम्हारा घर कहाँ है

विधया-मैं अनाथ हू,मेरी माँ 3 महीने पहले मर गई.उसके बाद एक लड़के ने मेरा फ़ायदा उठाकर मुझे बेच दिया. वो अच्छा हुआ ठाकुर साब ने मुझे बचा लिया.अब मेरा सब कुछ ठाकुर साब का है और ठाकुर साब ने कहा कि मैं तुम्हारी हू तो, अब मेरा सब कुछ तुम्हारा है.

अवी-मेरे साथ मेरे घर चलोगि.

विधया-जहाँ ले जाओगे वहाँ चलूंगी.

अवी-मैं हमेशा के लिए कह रहा हूँ,

विधया-ठाकुर साब से पूछ लो.

अवी-रणजीतसिंघ

रणजीतसिंघ-हाँ बोलो

अवी-विद्या को मैं हमेशा के लिए अपने घर लेकर जाना चाहता हूँ

रणजीतसिंघ-तुम ने मेरी मदद की. विद्या को अपना गिफ्ट समझो.आज से विद्या पर सिर्फ़ तुम्हारा हक होगा. मैं भी इस से दूर रहूँगा. विद्या तुम जितनी हमारी सेवा और मदद और हमारी बात मानती थी आज से अवी की माना करो.जाओ विद्या समान पॅक करो.

अवी-विद्या मैं तुम पर फ़ैसला छोड़ता हूँ तुम चलना चाहोगी मेरे साथ

विद्या-हाँ, मुझे एक घर चाहिए था वो मुझे मिल गया.

अवी-जाओ समान पॅक करो

विद्या समान पॅक करने चली गई.

रणजीतसिंघ-विद्या के साथ क्या करोगे

अवी-चाची की मदद करने के लिए कोई चाहिए ना. रति है घर का काम करने के लिए पर बच्चों और चाची का ख़याल रखने के कोई तो चाहिए.( वैसे उसे देख कर पता नही मेरे मुँह से घर लेकर जाने की बात कैसे निकली. रति की शादी हो जाएगी. उसके बाद पार्मेनेंट चाची की मदद करने के लिए कोई चाहिए ना, ये अनाथ है ,यहाँ रहेंगी तो चार दीवारो मे क़ैद रहेंगी. मेरे साथ रहेंगी तो इसको नया घर मिलेगा, उसके लिए अच्छा होगा और मेरे लिए भी. और इस से रणजीतसिंघ के बारे मे पता भी कर सकता हू.)

रणजीतसिंघ-तुम अजीब हो, चलो कुछ काम की बात करते है

फिर मैं रणजीतसिंघ के साथ बाते करता गया.

विद्या ने बहुत समय लिया समान पॅक करने के लिए.

रणजीतसिंघ-विद्या अवी आज से तुम्हारा मालिक है.वो जो कहेंगा करना. हमारी नाक मत काट देना

विधया-आप बेफिकर रहिए, मेरी तरफ से कोई शिकायत नही होगी.

रणजीतसिंघ-खुश रहो.आज से तुम हमारी बात नही मनोगी बस अवी जो कहे वो करना ,

विद्या-जी,

फार्महाउस पर बहुत समय बर्बाद हुआ, शाम के 6.00 बज रहे थे. घर जाकर मेरी खैर नही होगी.

मैं विद्या को लेकर घर की तरफ निकल पड़ा.

 


522

विद्या को लेकर मैं घर की तरफ निकल पड़ा.

अवी-विद्या

विद्या-हाँ बोलिए.

अवी-देखो मुझे किसी के सामने ज़्यादा रेस्पेक्ट मत देना, आप मत कहना. मेरा नाम अवी है.

विद्या-समझ गई. दूसरो के सामने सिंपल रहना

अवी-सिंपल रहना. तुम कहाँ तक पढ़ी हो

विधा-मैं ने नर्सिंग किया है

अवी-ये तो अच्छी बात है, फिर तो तुम्हें अपने साथ ले जाकर ठीक कर रहा हूँ. तुम्हें पता है मैं तुम्हें क्यूँ लेकर जा रहा हूँ

विधा-तुम्हारी सेवा करने के लिए.

अवी-ग़लत, मेरी चाची और बच्चों का ख़याल रखने के लिए. क्या तुम रख पाओगी

विधा-हाँ, ये तो मेरा काम है.

अवी-और कभी कभी मेरा ख़याल रखना

विद्या-तुम बेफिकर रहो,

और मेरे गाल पर किस किया.

अवी-इसी तरह ख़याल रखना.

मैं ने बाइक रोक दी. और उसको किस किया.

फिर मैं विद्या को अपनी फॅमिली के बारे मे बताने लगा.

अवी-और मेरी गर्लफ्रेंड का नाम रानी है

विद्या-प्यारा नाम है.

अवी-और एक बात चाचा से दूर रहना पर उन पे नज़र रखना

विद्या-समझ गई. तुम्हारे चाचा ठर्की है.

अवी-हां, मुझे एक बात पूछनी थी कि तुम्हारी एज क्या है और तुम मेरे साथ आने को तैयार कैसे हुई

विद्या-मैं 22 साल की हूँ. और ठाकुर साब भी अच्छे थे. मेरा पूरा ख़याल रखते थे .वहाँ मुझे कोई तकलीफ़ नही थी. पर फार्महाउस पर अकेली रह कर मैं ज़िंदगी कैसे काट सकती थी.मुझे भी घर का सुख चाहिए था. मैं ठाकुर साब को ये कैसे कहती,

अवी-तुम्हारी ज़िंदगी

विद्या-तुम्हारी है.

अवी-वो देखो घर आ गया. मैं ने जैसा कहा है वैसा करना

विधा-मैं वैसा ही करूँगी.

मैं विद्या के साथ घर मे चला गया.

पहले तो मुझे देख कर मेरी बहनें गुस्सा हो गई पर बाद में विद्या को देख कर शॉक्ड हो गयी. विद्या के हाथ मे समान देख कर और ज़्यादा शॉक्ड हो गयी.

अवी-आओ विद्या.

चाची मुझे घूर के देख रही थी.

ब चाची-अवी कौन है ये और ये समान लेकर आई है इसका क्या मतलब

अवी-चाची इसका नाम विद्या है

ब चाची-मैं ने नाम नही पूछा ,ये कौन है.

अवी-चाची ये मुझे रास्ते मे मिली

मेरी बात सुनकर सब मेरी तरफ घूर के देखने लगे

ब चाची-ठीक से बताओ

अवी-चाची ये अनाथ है. इसका कोई नही है. इसे कुछ लोग बहला कर बेच रहे थे. ये वहाँ से भाग गई और स्यूयिसाइड करने जा रही थी. तो मैं ने इसे रोक लिया और यहाँ लेकर आ गया.

विद्या ने धीरे धीरे रोना शुरू किया.

सी चाची-अवी ये तुम ने अच्छा किया. क्यू दीदी

ब चाची-हाँ, पर तुम इसे इसके घर लेकर जाने की बजाय यहाँ क्यू लेकर आए हो.

अवी-चाची इस का कोई नही है. इस लिए यहाँ लेकर आया. जमाना बहुत खराब है क्या पता इसका क्या होता.तो मैं यहाँ लेकर आ गया वरना फिर शूसाइड करने चली जाती.

और मैं ने छोटी चाची की तरफ चुप के से इशारा किया.

सी चाची-ये तुम ने सही कहा. ये यही रहेगी. है ना दीदी

ब चाची-इसके बारे मे कुछ पता नही है,हम इसे कैसे रख सकते है.

अवी-घर काम मे मदद करेगी ये ही सोच कर रहने दीजिए

ब चाची-तुम सब क्या कहते हो

स्वेता दीदी- मामी मुझे लगता है विद्या को रहने देना चाहिए.

नीता बुआ-सुमन मुझे भी यही लगता है,बिचारी को सहारा मिल जाएगा.

म चाची-पर हमारे पास रति है घर का काम करने के लिए

अवी-विद्या बच्चों का ख़याल रखेगी. विद्या ने नर्सिंग किया है.

सी चाची-ये तो हमारे लिए अच्छी बात है क्यू दीदी, विद्या को रहने देते है .

और छोटी चाची ने बड़ी चाची को हाँ करने को कहा.छोटी चाची की वजह से बड़ी चाची ने हाँ कहा वरना बड़ी मुश्किल हो जाती

छोटी चाची के हाँ करने से बड़ी चाची ने आँखे बंद करके हाँ कर दी

ब चाची-ठीक है इसे रति वाला कमरा दे दो.और रति को रात मे रुकने की ज़रूरत नही पड़ेगी.

सी चाची-चलो विद्या मैं तुम्हें तुम्हारा कमरा दिखाती हूँ

विद्या छोटी चाची के साथ चली गई.

अवी-मैं फ्रेश होके आता हू

सब मुझे आवाज़े दे रहे थे पर मैं अपने कमरे मे चला गया.

और उस गर्ल के बारे मे सोचने लगा. कुवरसिंघ के लिए प्लान बनाने लगा.

मैं उस गर्ल के बारे मे सोच रहा था कि मुझे मेरी बहनों का ख़याल आया.

ये मैं क्या कर रहा हू. उस गर्ल को प्रॉमिस किया है पर मेरी बहनों के प्रॉमिस का क्या होगा.

मैं ने उनको मेला दिखाने का प्रॉमिस किया .लेकिन उस गर्ल का काम करना ज़्यादा ज़रूरी है.

पर ये मेला मेरी बहनों के लिए खास है. नेक्स्ट मेले तक सब की शादी हो जाएगी. इस मेला जैसी मस्ती वो पूरी लाइफ मे दुबारा नही कर पाएँगी.इस एज मे मेला देखना और शादी के बाद बहुत फरक होता है.

मैं क्या करूँ ,एक तरफ मेरी बहनें है और दूसरी तरफ वो गर्ल

क्या करूँ , छोटी चाची इस समय पर मुझे क्या सजेशन देती. क्या छोटी चाची को पुच्छू, नही उनको इन से दूर रखना अच्छा होगा.क्या करू ,छोटी चाची मुझे क्या करने को कहती.

छोटी चाची कहती देखो अवी , ये पल दुबारा कभी नही आएँगे ,बचपन कभी वापस नही आता, बड़े होने पर ऐसा नही लगना चाहिए कि बचपन मे मस्ती नही की, लेकिन मस्ती के साथ जो काम मिलते है उनको भी पूरा करना चाहिए.

जैसे चाची ने कहा था कि एग्ज़ॅम के समय दादाजी की डेथ हो गई

 


तो ,एग्ज़ॅम भी दो और अपनी ज़िम्मेदारी पूरी करो. हाँ मुझे याद है ,चाची ने कहा था कि क्या 3 घंटे एग्ज़ॅम के लिए निकाल कर अपनी ज़िम्मेदारी भी पूरी की जा सकती है. बस करने का खुद पे विश्वास हो.

आज भी वही सिचुयेशन है. मुझे उस गर्ल के साथ साथ अपनी बहनों का भी सोचना चाहिए. मैं दोनो काम कर सकता हूँ. बहनों के लिए मेला दिखाने का टाइम निकाल सकता हूँ.

कुवरसिंघ का काम भी करूँगा और अपनी लाइफ को डिस्ट्रब नही होने दूँगा.सब स्टेप बाइ स्टेप करूँगा.

इस तरह उस गर्ल का काम भी हो जाएगा .और मैं फॅमिली को टाइम भी दे पाउन्गा.

मैं वापस हॉल मे आ गया. मेरी बहनें मेले मे ना जाने से उदास थी

अवी-दीदी क्या हुआ,सब ठीक हैना ,

स्वेता दीदी-हाँ, पर हम तुमसे नाराज़ है.

अवी-मेले मे ना जाने से ,वो विद्या की वजह से देर हो गई. इस बार माफ़ कर दो ,कल पक्का जाएँगे.

स्वेता दीदी-विद्या ,ठीक है माफ़ किया पर तुम्हें सज़ा तो मिलेगी.

अवी- क्या करना होगा मुझे

कविता-50 उठक बैठक लगानी होगी.

अवी-क्या?

सीतल दीदी-करो शुरू नही तो 100 लगाने होगी

मैं उठक बैठक लगाने लगा. वो अच्छा हुआ कि रानी ने काउंट करना शुरू किया

रानी के वजह से मुझे 50 की जगह 40 उठक बैठक लगानी पड़ी.

राज-दीदी आज क्या करेंगे

स्वेता दीदी-घर चल कर मूवी देखते है

सस्ते मे निपट गया.

मैं अपने कमरे मे जाकर आराम करने लगा. आज का दिन अजीब था. पहले पंडिताइन फिर वो गर्ल, उसके बाद रानी फिर वो वापस वो गर्ल और अब विद्या. मैं तो थक गया.

मैं आराम कर रहा था कि छोटी चाची मेरे कमरे मे आ गई.

अवी-आपकी का इंतज़ार कर रहा था.

सी चाची-अच्छी लड़की है.

अवी-तो आपने उसके बारे मे सब पूछ लिया.

सी चाची-उसी ने शुरू से लेकर रणजीतसिंघ तक उसके बाद यहाँ तक सब बता दिया.

अवी-भरोसे लायक है ना

सी चाची-हाँ, विद्या की वजह से काम आसान हो जाएगा. और वो नर्स है. जिस की वजह से बच्चन का ख़याल अच्छे से रख सकती है.

अवी-मैं वही सोच कर उसे यहाँ लाया हूँ.

सी चाची-वो सब ठीक है, विद्या ने मुझे बताया कि तूने रणजीतसिंघ की मदद जिस की वजह से रणजीतसिंघ ने तुम्हें विद्या दी.ऐसी क्या मदद की तुम ने

विद्या को मैं ने बता दिया था कि छोटी चाची से कुछ मत छुपाना.

अवी-वो सब मेला ख़तम हो जाने के बाद बताउन्गा.

सी चाची-हिंट तो दे

अवी-अभी नही ,सब बाद में बताउन्गा. अभी मुझे आराम करके मेले मे जाना है

सी चाची-बता ना, एक किस दूँगी

अवी-वो तो वैसे भी देंगी आप ,

सी चाची-मैं विद्या से पूछ लूँगी.

अवी-उसे कुछ पता नही है

सी चाची-तुझे बताने मे क्या जाएगा.

अवी-अभी बताउन्गा तो आपको सुन ने मे मज़ा नही आएगा.कुछ दिन के बाद बताउन्गा.

सी चाची-किस भी तभी मिलेगी.

और छोटी चाची कमरे से चली गई और मैं ने अपनी आँखे बंद की

छोटी चाची वापस कमरे मे आई और मेरे होंठो पर किस करके चली गई.

मुझे चाची की यही बात पसंद है .

 


523

फिर मैं मेले की बजाय घर3 चला गया.

और कुवरसिंघ का क्या करना है वो सोचने लगा.

मेरा पहला प्लान तो शुरू होने से पहले ख़तम हो गया था. मैं ने सोचा था कि मोना को कुवरसिंघ के साथ सेक्स करने को कहूँगा और फिर रेप का केस करने की धमकी दे कर अपना काम निकाल लूँगा. पर आज जो हुआ उसके बाद मुझे कुछ और सोचना होगा.

उस लड़की को मैं ने प्रॉमिस किया है. उसके बारे मे सोचना होगा.

पर कल कुवरसिंघ को ज़बरदस्ती करने की ज़रूरत पड़ी क्यू पहले ये सोचना होगा.

मोना को इस काम मे लगा देता हू. 2 3 दिन मे मोना अपना काम कर लेगी. तब मैं कुवरसिंघ के दोस्तो की इन्फर्मेशन निकाल लूँगा.

इन सब का मुझ पे असर ना हो इस लिए मैं अपने डेली के काम करता रहूँगा .वरना बिना वजह छोटी चाची परेशान होगी.

मैं ने कुवरसिंघ को ठिकाने लगाने का 1स्ट प्लान बना दिया जिस मे मोना का इस्तेमाल करना होगा.

मोना को कल ही काम पे लगा दूँगा.

मैं प्लान बनाकर आराम कर रहा था कि रज़िया आ गई

रज़िया-अवी तुम अंदर हो

ये तो रज़िया की आवाज है, ये इतनी जल्दी कैसे आ गई.

मैं ने गेट खोला. ये रज़िया ही थी.

अभी तो 9.00पीएम बज रहे है फिर ये इतनी जल्दी यहाँ कैसे आ गई.मैं ने रज़िया जो अंदर बुलाया.

अवी-तुम इतनी जल्दी यहाँ कैसे

रज़िया-मैं तो 11.00पीएम बजने का इंतज़ार कर रही थी .ऐसे ही घूमते हुए इधर आई तो यहाँ की लाइट चालू देखी तो सोचा तुम से मिल लूँ

अवी-(मैं ने मेले के लिए जो सोच रखा था उसे डिस्ट्रब नही होने दूँगा) अच्छा किया जो आ गई. चलो शुरू करते है.

रज़िया-मैं रुकसाना को बता कर नही आई हूँ

अवी-तो क्या हुआ. अभी 1 घंटे मे एक राउंड करते है. फिर जाकर रुकसाना को बताकर वापस आ जाना. ऐसे करेंगे तो 3 राउंड हो जाएँगे.

रज़िया-ऐसा कहो ना

और मैं ने रज़िया को गले लगा लिया और होंठो को चूसने लगा.

आज कल मेरे साथ ऐसा हो रहा था कि सेक्स किए बिना मेरा दिमाग़ काम नही करता था.

रज़िया तो 4 दिन से इसी का इंतज़ार रही थी.

मैं ने रज़िया के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और किस करते हुए चूसने लगा .

रज़िया को किस करते बेड पर ले गया. और दोनो किस करते हुए बेड पर लेट गये.

इस बीच हमारा किस करना चलता रहा.

थोड़ी देर बाद मैं ने किस तोड़ दिया.

अवी-तुम्हें कच्चा खा जाने का मन हो रहा है.

रज़िया- और मुझे लॉलीपोप चूसने का

अवी-पहले मैं

और मैं ने रज़िया के गाल पे किस कर दिया और अपना हाथ रज़िया की सलवार मे डाल दिया.

और रज़िया की चूत मसल्ते हुए फिर से होंठो को चूसने लगा.

रज़िया को पूरा जाकड़ लिया और किस करने लगा .

होंठो को चूसने से साथ मैं रज़िया के गर्दन तक आया गया और उसे चूसने लगा ,चाटने लगा रज़िया पागल हो रही थी

रज़िया ने मुझे धक्का दे कर खड़ी हो गई और अपने कपड़े निकाल कर ब्रा और पैंटी मे मेरे साथ फिर से उसी पोज़िशन मे लेट गई.

मैं फिर से रज़िया के गर्दन को चाट ने लगा. कभी काटता तो कभी उनको चूस्ता .

रज़िया के मुँह से आवाज़े निकल रही थी आहह अवईीई आराआाँ से काट्त्त्ट्टनाआ दुख रहााआअ हाइईईईई

मैं गर्दन पे किस करते हुए उसके पेट पे आ गया और पेट पे किस करने लगा.

पेट को किस करते हुए मेरी नज़र रज़िया की नाभि पर गई.

रज़िया की नाभि देख कर मैं पागल हो गया और नाभि मे अपनी जीभ घुसा घुसा उसे चाटने लगा .

नाभि की गहराई मे जीभ डाल दी .और उसका मज़ा लेने लगा .गहराई के बाद मुझे माउंटन पर जाना था.

मैं ने रज़िया की ब्रा उतार दी .

रज़िया के कबूतर आज़ाद हो गये .

बूब्स को देखते ही मैं बूब्स को मुँह मे ले कर चूसने लगा

रज़िया की हर एक बात पर्फेक्ट थी.

बूब्स को चूस्ते हुए मैं ने जोश मे आकर बूब्स को इतनी ज़ोर से काटा कि रज़िया की चीख निकल गयी,

आहह आआओिइ माअरररे गई आराम से करो

ये तुम्हारे ही तो है

मैं ने देखा तो रज़िया के बूब्स जहाँ मैं ने काटता था वहाँ लाल निशान हो गये थे .

मैं ने उस जगह को चाट कर रज़िया को ठंडक पहुँच फिर मैं रज़िया के उपर से अलग हो गया.

मेरे अलग होते ही रज़िया मेरे उपर आ गई और मेरी जीन्स उतार दी .और एक झटके मे अंडरवेर उतार कर लंड के दर्शन करने लगी.

रज़िया ने समय बर्बाद ना करते हुए मेरे लंड को मुँह मे लेकर चूसने लगी .

क्या चूस रही थी रज़िया,मैं तो जन्नत मे था

रज़िया मेरे लंड को लगातार चूसे जा रही थी जैसे कोई लोलीपोप हो

थोड़ी देर बाद मुझे रज़िया को रोकना पड़ा.

अवी- रज़िया तुम तो लंड चूसने मे एक्सपर्ट हो गई.

रज़िया-4 दिन से रोज लोलीपोप खा कर प्रॅक्टीस कर रही थी.

अब मेरी बारी थी, अब मैं रज़िया के उपर आ गया.

और रज़िया की पैंटी उतार दी.और अपनी टीशर्ट भी उतार कर फेक दी.

रज़िया की चिकनी चूत देख कर मैं ने दो उंगली उसमे डाल दी

उंगली अंदर जाते रज़िया के मुँह से शीष्कारी निकल गई .रज़िया को मज़ा आ रहा था

उंगली को चूत मे डाल कर बाहर निकाला और उंगली को चाट ने लगा .

फिर मैं ने रज़िया की चूत के होंठ खोल दिए और अंदर तक अपनी जीभ घुसा के चाटने लगा

रज़िया पागल हो रही थी .रज़िया की चूत का रस मुझे पागल कर रहा था .

मैं ने चूत के दाने को काट लिया तो रज़िया एकदम उछल पड़ी.

और फिर से चूत को चूसने लगा .रज़िया की छोटी चूत मेरे बड़े मुँह मे आराम से आ गई.

मैं पागलो की तरह चूत को चूस रहा था क्या टेस्ट था चूत का पूछो मत

चूत के साथ खेलने से रज़िया शीष्कारी लेने लगी. उसके मुँह से आवाज़े निकल रही थी

अहह और ज़ोर से काटो आओववीिइ आइ लव्व्व्व उूुुुउउ बहुत मज़्ज़्ज़ाआआअ आआ र्हााआअ हाीइ

रज़िया की शीष्कारिया मेरा जोश बढ़ा रही थी.

मैं ने भी रज़िया की चूत चूस चूस कर पानी पानी कर दी.

मैं कभी अपनी जीभ को नुकीली करके उसकी चूत मे अंदर तक डाल देता.

ऐसा करने से रज़िया उछल पड़ी वो पागल हुए जा रही थी .

रज़िया को बर्दस्त नही हुआ और अपना पानी मेरे मुँह मे डाल कर ठंडी पड़ गई.

रज़िया-कितना तडपाओगे डाल भी दो अंदर

मैं ने रज़िया को सीधा लिटाया और रज़िया के पैर उपर किए और रज़िया की चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा

फिर मैं ने एक जोरदार झटका मारा लंड आधा अंदर चला गया .फिर एक और झटका मारा तो रज़िया की चीख निकल गई

आआअहह म्माआआआआआआररररर गैईइ..तुम्हारा लुन्न्ञन्द मेरिइइ जान ले लेगा.

मैं ने रज़िया के गाल पर प्यार से 2 थप्पड़ मारे

अवी-रुकु या मारू

रज़िया-मार डालो

मैं थोड़ी देर रुक गया. मार डालो का मतलब धक्के मारना नही था बल्कि रुकने को कह रही थी.

थोड़ी देर रुकने के बाद मैं रज़िया की चूत मे धक्के मारने लगा.

मेरे रुकने की वजह से रज़िया को आराम मिला और अब मेरे धक्को का जल्दी साथ देने लगी.

मैं रज़िया को चोदने लगा .

लंड के धक्के के साथ एक पॅच की आवाज़े निकल जाती.

रज़िया के लॉक की चाबी मेरा लंड था.मेरा लंड रज़िया का लॉक खोल रहा था.

ऐसा खोलने लगा था कि जब दुबारा चाबी लॉक मे डालु तो पानी जल्दी पीने को मिल जाए.

मैं जोरदार धक्को के साथ रज़िया की चूत मार रहा था.

पूरे कमरे मे पॅच पच की आवाजी आ रही थी रज़िया के मुँह से शीष्कारी निकल रही थी.

आआआअहह जूऊऊऊऊऊऊऊओरर्र्र्ररर आए चहूओद्दद्दूव

मेरे धक्को की वजह से रज़िया की चूत बिल्कुल गीली थी .रज़िया 2 बार झाड़ चुकी थी

अब मैं ने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी.

मैं भी अब झड़ने वाला था और एक चीख के साथ मेरी ज़ाआाआअँ मे आआआआ राआााआ हुउऊउ और मैं रज़िया की चूत मे झड गया.

और रज़िया की चूत पिंक कलर से वाइट हो गई.

रज़िया की चूत मे वीर्य डालने के बाद मैं बेड पर गिर गया.

 


524

रज़िया की चुदाई के बाद मैं बेड पर लेट गया.

रज़िया-तुम थक गये

अवी-हां,

रज़िया-एक और बार बाकी है,

अवी-तुम रुकसाना को बताकर आओ तब तक मैं आराम करता हू.

रज़िया-अभी गई और अभी आई.

अवी-ऐसा मत करना. अपने समय पर आना .और रुकसाना को कुछ मत बताना कि तुम्हारी चुदाई हो गई है नही तो ग़लत मतलब निकाल लेगी कि तुम्हारी ज़्यादा और उसकी कम कर रहा हूँ

रज़िया-ठीक है नही बताउन्गी. मैं पहले बाथरूम मे जाकर आती हूँ.

रज़िया बाथरूम मे चली गई.फिर फ्रेश होने के बाद कपड़े पहन कर रुकसाना के पास चली गई.

और मैं आराम करने लगा.

रज़िया रुकसाना को बता कर अपने समय पर आ गई.

अवी-इतनी जल्दी आ गई

रज़िया-मैं अपने समय पर आई हूँ

अवी-तो कितने राउंड बाकी है

रज़िया-रुकसाना के साथ कितने किए थे

अवी-2

रज़िया-मेरे साथ 3 राउंड, 1 हो गया 2 बाकी है.

अवी-चलो ठीक है.आज तुम्हारी चूत फाड़ देता हू

रज़िया-फाड़ दो ,बहुत तंग करती है.

अवी-आज के बाद नही करेगी.

मैं ने पिछली बार की तरह रज़िया को गले लगा लिया

और रज़िया के रसीले मदभरे होंठो पे अपने होंठ रख दिए…और दीवानो की तरह किस करने लगा.

कभी उपर का होंठ तो कभी नीचे का.तो कभी दोनो एक साथ चूसने लगा.

रज़िया मेरे रोमॅन्स के नशे मे खो गई.

रज़िया ने मेरी पीठ को कस के पकड़ लिया. और मुझे किस करने लगी.

मेरा भी एक हाथ रज़िया के बालो को सहला रहा था. तो दूसरा हाथ उस की कमर मे था.और किस करता रहा.

फिर मैं अपना हाथ कमर से पीछे ले जा के रज़िया की गंद को सहलाने लगा.

गंद को सहलाने से रज़िया भी जोश मे आकर मुझे किस करने लगी.

गंद को सहलाते हुए मैं रज़िया के गर्दन पे तो कभी कानो पे किस करने लगा.

रज़िया पूरी मस्ती मे थी. उस का हर एक अंगग मचल रहा था. रोम रोम सिहर उठा था.

मैं ने रज़िया को अलग कर दिया और धक्का दे कर बेड पर लिटा दिया.

मैं सिर्फ़ अपने जोश मे था.

रज़िया की आँखों मे चमक आ गई. लंड को देखने से उसकी प्यास नज़र आ रही थी.

फिर मैं ने रज़िया की प्यास को और भड़काने के लिए अंडरवेर नही निकाला .

और उसके पैर को हाथो मे ले लिया और उस पे किस करता हुआ रज़िया की जाँघो तक आ गया.

रज़िया ने अपने होंठो को दातों तले दबा रही थी.

और कभी बेडशीट तो कभी मेरी पीठ को अपने नाखूनो से नोच रही थी

फिर मैं ने रज़िया को अपने गोद मे बिठा लिया. रज़िया के गर्दन और बूब्स को कपड़ो के उपर से ही किस करने लगा.

फिर मैं ने रज़िया की कमीज़ निकाल दी

टाइट ब्रा मे कसे हुए रज़िया के बूब्स कमाल लग रहे थे.

मैं ने रज़िया को फिर से बेड पे लेटा दिया. और दोनो हाथो मे दोनो बूब्स ब्रा के उपर से ही ज़ोर से पकड़ लिए.और उस की नाभि पे किस करने लगा.

गुदगुदी के कारण रज़िया मछली की तरह मचल रही थी.शीष्कारी ले रही रही थी.

मेरे पैर रज़िया के पैरो को सहला रहे थे.

मैं ने रज़िया की सलवार उतार दी. अब रज़िया बस ब्रा और पैंटी मे थी.

वाइट ब्रा & पैंटी रज़िया पर काफ़ी सेक्सी लग रही थी.

थोड़ी देर पहले मैं ने इस बात पर ध्यान नही दिया था. पर अब ऐसा लग रहा था कि रज़िया को देखता रहूं.

मैं ने रज़िया के कबूतर को आज़ाद किया .मैं ने रज़िया के ब्रा के हुक्स खोल दिए.

रज़िया के बूब्स कमाल के थे.थोड़ी देर पहले दबाने के बाद भी एकदम टाइट थे. जैसे उसके बूब्स को किसी ने टच ना किया हो.

गोल गोल और पिंक निप्पल्स वाले जो अब सेक्स के नशे की वजह से पायंटेड हो गये थे.

मैं ने रज़िया के निप्पल्स पर हमला बोल दिया .सिर्फ़ निप्पल्स पर हमला बोला था पूरे बूब्स पर नही.

मैं पागलो की तरह रज़िया के निप्पल्स को चूस ने लगा.

कभी कभी मैं निप्पल्स को दातों से काट भी रहा था. रज़िया तो एग्ज़ाइट के मारे पागल हो रही थी.

मेरा लंड अंडरवेर से बाहर आने को बेताब रहा था.

मैं ने अपनी अंडरवेर उतार दी. मेरा लंड रज़िया के साथ ओरल सेक्स करने से पूरा खड़ा हो गया था.

फिर मैं ने रज़िया की पैंटी भी उतार दी.

फिर से मैं रज़िया की चूत को देखने लगा . पिंक होंठो की चिकनी चूत मेरे आँखे के सामने थी.

मुझे खुद पर कंट्रोल नही हो रहा था.रज़िया पूरी नंगी होकर कयामत दिख रही थी.

मैं ने रज़िया के कमर को बहुत प्यार से पकड़ा और उस के पैर को खोल कर अपना लंड रज़िया की चूत पे रख दिया.

रज़िया की चूत एक्साइत की वजह से और ओरल सेक्स की वजह से पूरी गीली हो चुकी थी.

मैं ने लंड को चूत से अलग कर दिया. रज़िया मेरी तरफ गुस्सा से देखने लगी.

मैं ने चूत पर किस किया और फिर से लंड को चूत पर रख दिया.

फिर रज़िया की कमर को ज़ोर से पकड़ मैं ने अपनी कमर से एक ज़ोरदार झटका दिया.

पकक की आवाज़ करते हुए मेरा लंड रज़िया की चूत के अंदर तक पूरा चला गया.

रज़िया की मुँह से ज़ोर की चीख निकली, अम्म्मिईिइ..,..

आअहह मररर्र्ररर गैइइí उन्मह तुम मेरिइईईईईईईईई जानणन्न् लेकर्रररर ही राहोंगे.

मैं ने रज़िया की चूत से लंड बाहर निकाला. रज़िया के आँखे मे ठंडे आँसू आ गये थे.

मैं ने रज़िया के होंठो पर किस किया .और फिर लंड चूत पे रख कर 2 झटकों मे अंदर डाल दिया.

इस बार रज़िया को ज़्यादा दर्द नही हुआ.

मैं ने धीरे धीरे रज़िया की चूत मारना शुरू किया.

रज़िया ने जल्दी जल्दी दर्द की चीखों को शीष्कारी मे बदल दिया.

मेरिइईईईईईईईईईईईईईईईईई जाअंन्नचननननननननननणणन् ऊऊहौर जोर्र्र्रर से मरूऊओ

मैं ने रज़िया की कमर को पकड़ा और अपने धक्के मारता गया.

कमर को हिला हिला कर मैं रज़िया की चूत मे अपना लंड के टोपे से ले के आंडो तक डाल रहा था.

धीरे धीरे मैं ने अपनी गति बढ़ा दी. मेरे धक्के मरने की गति लास्ट गियर पर थी. जिस से रज़िया की चूत मे ज़ोर दार धक्के लग रहे थे.

रज़िया ने अपनी चूत से पहला पानी 5 मिनट मे के बाद छोड़ा.

रज़िया झड गई.

पर मेरी प्यास इतने से पानी से नही बुझने वाली थी.

कम से कम 2 बार और पानी निकालना था मुझे रज़िया की चूत से.

मैं अपने मिशन पर लग गया. रज़िया की खुजली मिटाने मे पूरी ताक़त लगा रहा था.

पर अब मुझे पोज़िशन चेंज करनी थी.

मैं ने रज़िया को अपने उपर ले लिया और नीचे से कमर उठा उठा के रज़िया को चोदने लगा.

और रज़िया के बूब्स चुसते हुए नीचे से लंड पेल रहा था.

मैं ही क्यू एनर्जी वेस्ट करू. मैं ने थोड़ी देर बाद रज़िया को अपने लंड की सवारी करने को कहा.

रज़िया भी अपनी गंद उठा उठा के कूद रही थी.

मैं रज़िया के चूतड़ो को दोनो हाथो मे थामे हुए मज़ा ले रहा था.

रज़िया के पानी छोड़ते ही मैं ने रज़िया को मिशनरी स्टाइल मे चोदना चालू किया.

फिर मैं ने रज़िया के दोनो पैर अपने कंधो पे ले लिए और हवा मे उठा के रज़िया की चुदाई करने लगा.

रज़िया बस चिल्ला रही थी,उईईइ अम्म्मि, बस अवईिइ आआहह….मैं मरररर जाउन्गी अवईिइ.अम्म्म्मममी…

मैं ने रज़िया के बूब्स पागलो की तरह चूस रहा था और पूरी ताक़त से अपना लंड रज़िया की नाज़ुक चूत मे अंदर बाहर कर रहा था.

फिर मैं ने रज़िया को घोड़ी बना दिया और पीछे से अपना लंड उसकी चूत मे डाल दिया.

और खड़े खड़े ही उस को चोदने लगा.

इस बार मेरी गति और बढ़ गई.पर मुझे एक और बार रज़िया की चुदाई करनी थी इस के लिए मैं ने अपना वीर्य रज़िया के मुँह मे डाल दिया.

और रज़िया के पूरा वीर्य पीने के बाद मैं ने लंड बाहर निकाला.

हम दोनो तक के बेड पे लेटे रहे

 


525

हम दोनो तक के बेड पे लेटे रहे.

थोड़ी देर बाद हम नॉर्मल हो गये पर कुछ करने के हिम्मत बहुत कम थी.

अवी-रज़िया

रज़िया-हाँ

अवी-मज़ा आया

रज़िया-हाँ

अवी-एक और राउंड बाकी है

रज़िया-मुझ से नही होगा.मैं थक चुकी हूँ

अवी-ऐसी कंडीशन मे करके देखते है, मज़ा आता है या नही.

रज़िया-नही होगा मुझसे

अवी-होगा तो मुझसे भी नही पर ट्राइ करके देखते हैं

रज़िया-तुम ज़िद्द क्यू कर रहे हो.

अवी-मुझे बताओ पहली चुदाई कैसी थी.

रज़िया-अच्छी थी. बहुत मज़ा आया.

अवी-और दूसरी बार

रज़िया-और ज़्यादा मज़ा आया था.

अवी-एक और बार करोगी तो ज़्यादा मज़ा आएगा.

रज़िया-सुबह कर लेंगे.

अवी-सुबह नही होगा. अभी करते है .ज़्यादा दर्द हुआ तो रोक देंगे

रज़िया-ठीक है पर तुम्हारा लंड खड़ा हो जाएगा.

अवी-ऐसे ही डालता हूँ. इसी लिए तो कहा ऐसी ही कंडीशन मे करते है

रज़िया-फिर ठीक है. पर जो करना है तुम करना.

रज़िया के हाँ करते ही मैं वापस रज़िया के उपर आ गया.

वैसे मैं मेडिसिन खा कर रज़िया की जोरदार चुदाई कर सकता था पर मुझे ढीले लंड से चुदाई करके देखना था. ढीला लंड चूत मे जाने के बाद कितना मज़ा आएगा और लंड चूत मे रह कर कितनी जल्दी खड़ा होगा.

मैं धक्के तो नही लगा सकता था पर बिना धक्को की चुदाई करके देखना चाहता था.

मैं रज़िया के उपर आ कर लंड को रज़िया की चूत पर रख दिया.

मेरा ढीला लंड चूत मे रखते ही अंदर चला गया.

रज़िया-डालो ना

अवी-लंड अंदर चला गया है.

रज़िया-क्या बात कर रहे हो. मुझे तो लगा 2 उंगली डाल दी होंगी.

अवी-यही तो करके देखना चाहता था.

रज़िया-मारो धक्के

अवी-तुम मार सकती हो

रज़िया-नही

अवी-फिर मैं भी नही मार सकता(इस से पहले मैं लगातार 3 चुदाई कर चुका हूँ पर दोपेहर मे सोने के बाद शाम को घर आने पर सोने की वजह से शरीर पहले जैसी ताक़त नही फील कर रहा था. फिर भी पूरी ताक़त लगा कर 2 बार चुदाई कर चुका हू ,बीच मे 1 घंटे का ब्रेक मिला था जिस वजह से दूसरी चुदाई हो पाई. पर 3र्ड चुदाई मुश्किल लग रही थी.)

मैं ने लंड को रज़िया की चूत मे रख दिया जिस से हमारे शरीर एक दूसरे से चिपक गये.

मैं ने अपने शरीर को बिना उपर उठाए ,रज़िया के बदन को चिपका कर रख के अपनी कमर हिला रहा था.

हमारी चुदाई बिना धक्को के शुरू हो गई.

अवी-रज़िया कैसा लग रहा है

रज़िया-एक अलग ही मज़ा आ रहा है. अभी थोड़ी देर पहले तुम्हारा लंबा लंड लिया था और अब आधे से कम लंबा लंड लेकर ,क्या बताऊ कभी गुदगुदी, तो कभी मज़ा, तो कभी खुजली बढ़ने लगती. तो कभी चूत मे अजीब सी हलचल हो रही है ,मुझे ऐसा लग रहा है कि लंबे लंड की जगह ये आधा लंड मेरा पानी जल्दी निकाल देगा.

अवी-वो क्यू

रज़िया-तुम्हारा लंड दाने के साथ छेड़छाड़ कर रहा है.

मैं अपनी कमर धीरे धीरे घुमाता रहा.

रज़िया के होंठ कभी बोलने के लिए तो कभी गुदगद्दी की वजह से हँसने के लिए तो कभी शीष्कारी लेते हुए अचानक बंद हो जाते.

मेरा लंड भी खड़ा हो रहा था.

अवी-रज़िया निकालु बाहर

रज़िया-बाहर मत निकालना, अंदर ही खड़ा होने दो मुझे फील करना है

लंड धीरे धीरे खड़ा हो रहा था.लंड 6 इंच तक खड़ा हो गया.

मैं ने चूत पर दबाव बनाए रखा ,जिस से मेरा लंड चूत मे कसता जा रहा था. लंड पर दबाव बढ़ने से खड़ा हो रहा था.

रज़िया ने अपनी आँखे बंद कर ली.

मैं ने अपनी बची हुई ताक़त लगा कर 10 12 धक्के मार दिए,

10 12 धक्को से लंड खड़ा हुआ , मेरी ताक़त ख़तम हो गई.

मैं रज़िया के उपर पूरा वेट दे कर गिर गया.

इतना पानी निकालने से रज़िया ने आँखे बंद की थी. मैं ने भी अपनी आँखे बंद की.

आँखे बंद करने से हम उसी पोज़िशन मे सो गये.

लंड पूरा खड़ा होकर रज़िया की चूत मे वैसा ही रह गया.

पता नही रात मे क्या हुआ.

सुबह जब मेरी आँखे खुली तो रज़िया बेड के नीचे ज़मीन पर सो रही थी.

मैं भी बेड से नीचे गिरने वाला था.

सो जाने के बाद क्या हुआ कुछ याद नही आ रहा था.

मैं ने रज़िया की तरफ देखा तो उसके पेट पर वीर्य के दाग थे.

मुझे तो कुछ याद नही कि रात मे क्या हुआ .पर मुझे ये पता था कि मैं ने दूसरी चुदाई मे वीर्य रज़िया के मुँह मे डाला था .तो इसके पेट पर वीर्य कैसे आया.

6थ डे

मैं ने टाइम देखा तो सुबह के 5.00 बज रहे थे.

मैं ने रज़िया को उठा कर पूछने का फ़ैसला किया.

अवी-रज़िया उठो

रज़िया-सोने दो ना अम्मी

इसकी अम्मी की तो

मैं ने रज़िया की चूत मे 2 उंगली एक झटके मे डाल दी.

रज़िया फटाक से उठ गई

रज़िया-क्या हुआ

अवी-वही तो रात मे क्या हुआ.

रज़िया रात की बात याद करके हँसने लगी.

अवी-क्या हुआ हंस क्यू रही हो

रज़िया-रात मे तुम ने किया ही ऐसा था कि हसी आ रही थी.

अवी-क्या किया मैं ने

रज़िया-रूको बताती हूँ, देखो हम चुदाई करके पूरी तरह से थक गये थे.

अवी-हाँ

रज़िया-तुम ज़्यादा थक गये थे. मैं भी थक गई थी पर तुमसे कम

अवी-हम 3र्ड टाइम चुदाई कर रहे थे उसके बाद का बताओ

रज़िया-मेरा पानी निकलते ही हम दोनो वैसे ही सो गये.

अवी-हाँ.

रज़िया-तुम्हें पता है अगर हम ज़्यादा थके होते है तो ठीक से सो नही पाते, जैसे की सोते हुए बाते करते है, उठ कर बैठना और फिर सो जाना, बेड पर इधर से उधर बन्दरो की तरह उछल कर सोते है.हमे रात मे क्या हुआ याद नही रहता.नीचे गिर जाते है ये भी याद नही रहता अगर किसी ने हमे वापस बेड लिटा दिया तो

अवी-हाँ.

रज़िया-ऐसा ही तुम्हारे साथ हुआ होगा. तुम रात मे उठ गये होंगे, और चुदाई करना शुरू कर दिया.हम कॉर्नर पर सो रहे थे जिस की वजह से मैं नीचे गिर गई और मेरे सर मे दर्द हुआ ,इस लिए मेरी आँखे खुल गई .मैं ने देखा तुम्हारे लंड से वीर्य गिर रहा है. और मैं नीचे ज़मीन पर गिरी थी. तुम्हारा वीर्य मेरे पेट पर गिर गया. मुझ मे उठ ने की ताक़त नही थी इस लिए ज़मीन पर वैसी सो गई.

अवी-बोला था ना मज़ा आएगा.

और हम दोनो हँसने लगे.

अवी-तुम बेड पर सो जाओ ,मुझे मंदिर जाना है.

रज़िया बेड पर सो गई और मैं फ्रेश होकर घर चला गया.

फिर हम सब मंदिर चले गये. विद्या मुझे धोती मे देख कर शॉक्ड हो गई.

हम ने मंदिर मे जाकर पूजा की और आज सिर्फ़ रणजीतसिंघ ,कामिनी और पायल आई थी. मुझे पता था कि बाकी क्यू नही आए.

पूजा हो जाने के बाद हम ठाकुर के साथ बाते करने के बाद घर आ गये.

आज नाश्ता विद्या ने बनाया था.

नास्टा करने के बाद मैं पंडिताइन की तरफ चला गया.

 


526

मैं पंडिताइन के घर चला गया

मुझे पंडिताइन को सच बताना होगा तभी पंडिताइन की चुदाई करने मिलेगी.

मैं ने गेट खटखटाया .पंडिताइन ने गेट खोलने के लिए टाइम लगाया.

पंडिताइन ने कुछ सोच कर ही गेट खोला.

मैं अंदर जाकर बेड पर लेट गया .और पंडिताइन मेरे पास आकर खड़ी हो गई और मुझे घूर कर देखने लगी.

पंडिताइन-तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए टी लेकर आती हूँ

अवी-(टी ,दूध के बजाय टी मतलब पंडिताइन ने अपना इरादा बदल दिया है. पंडिताइन मुझे चुदाई करने नही देगी. फिर भी सच बता कर पंडिताइन को सोचने पर मज़बूर कर दूँगा.कुछ दिन बाद शायद अपना इरादा बदल दे ) रुकिये मुझे आप से बात करनी है.

पंडिताइन रुक गई. और मेरे पास आकर बैठ गई.

पंडिताइन-(ये क्या कहना चाहता है) हाँ बोलो

अवी-मैं ने आप से झूठ कहा था.

पंडिताइन-झूठ ,किस बारे मे

अवी-यही कि मुझे चुदाई के बारे मे कुछ पता नही है. मैं पहले भी चुदाई कर चुका हूँ

पंडिताइन-क्या ,तुम ने मुझ से इतनी बड़ी बात छुपाई

अवी-छुपानी पड़ी

पंडिताइन-(ये तो मुझे सच बता रहा है, शायद इसको समझ मे आ गया होगा कि झूठ बोलने से कुछ नही होता.) क्या वजह थी कि तुम्हें ये बात छुपानी पड़ी

अवी-वो पहली बार आपको देखा था तभी आपकी चुदाई करना चाहता था. पर आप डरी हुई थी. और वो जगह सही नही थी. इस लिए मैं ने आपकी चुदाई नही की.

पंडिताइन-ये कोई वजह नही हुई झूठ बोलने की

अवी-उस दिन के बाद मैं सपनो मे आपको देखता था. आपकी चुदाई के सपने देखता था. मुझे आपकी चुदाई करने का पागलपन सवार हो गया.

पंडिताइन-(तो इसको मैं पसंद हूँ, चलो अच्छा है किसी को तो मैं पसंद हूँ) आगे बोलो

अवी-फिर एक दिन हिम्मत करके आप से मिलने यहाँ आ गया.

पंडिताइन-(मैं भी शॉक्ड हुई थी तुम्हें यहाँ देख कर) फिर

अवी-फिर मैं ने आपको चूत दिखाने को कहा. मैं चाहता था कि आप चूत दिखाएँगी और मैं आपकी चुदाई कर लूँगा. पर आपने एक झटके मे चूत दिखा कर कपड़े नीचे कर दिए.

पंडिताइन-(तो ये इसका प्लान था. )फिर

अवी-फिर मुझे लगा मैं आप की कभी चुदाई नही कर पाउन्गा पर मेरा पागलपन और किस्मत मे कुछ और लिखा था. आपने मुझे चुदाई करना सीखने का फ़ैसला किया. और मुझे लगा मेरा सपना पूरा हो जाएगा.

पंडिताइन-(पूरा हो जाता अगर जल्द बाज़ी नही करते तो, मेरे कहने के हिसाब से करते तो आज मेरी चुदाई कर रहे होते) फिर अपना सपना पूरा करने की बजह मुझे ये सब बताने की ज़रूरत क्या थी.

अवी-मैं आपकी चुदाई कर तो लेता पर दिल मे एक दर्द रहता कि आप से झूठ बोल कर अपना सपना पूरा किया. ऐसा सपना पूरा करने से मेरे दिल को वो सुख नही मिलता जो आपको सच बता कर मिल रहा है

पंडिताइन-तुम्हें पता है तुम्हारे सच बताने के बाद क्या होगा

अवी-हाँ, आप चुदाई करने से मना करोगी.

पंडिताइन-फिर भी तुम ने सच बताया.अपने सपने के बारे मे नही सोचा

अवी-ऐसा सपना पूरा होना किस काम का जो मुझे ये अहसास दिलाता रहता कि मैं ने ग़लत रास्ते का इस्तेमाल करके अपना सपना पूरा किया है.

पंडिताइन-तुम बात तो ठीक कर रहे हो ,पर तुम्हें क्या लगता है अब मैं क्या करूँगी.

अवी-ये बताना मुश्किल होगा.पर आप जो फ़ैसला करेंगी वो मुझे मंज़ूर होगा.

पंडिताइन-अगर मैं मना कर दूं तो

अवी-फिर भी मैं आपकी चुदाई करूँगा.

पंडिताइन-क्या?

अवी-सपने मे

पंडिताइन-(ये तो डरा के मार रहा है) और अगर हाँ करू तो

अवी-फिर सपने मे किसी और की चुदाई करूँगा.

पंडिताइन मेरी बात सुनकर हँसने लगी.

अवी-(हसी तो फसि, पर पंडिताइन के हां करने के बाद भी मैं चुदाई नही करूँगा. जब तक पंडिताइन खुद मेरे पास ना आए. और मेरी बात सुनकर पंडिताइन ज़रूर मेरे पास आएगी)

पंडिताइन-(ये दूध पिलाने लायक है. )तुम बैठो मैं दूध लेकर आती हू

अवी-(दूध, पंडिताइन चुदाई करने के लिए तैयार है.पर दूध तो पंडिताइन का बाद मे पीऊंगा ,पंडिताइन की आग तो भड़कने देना होगा. पंडितजी अभी पंडिताइन की चुदाई नही करेंगे.रणजीतसिंघ के पास लड़कियों की कमी नही है. पंडिताइन को आना मेरे पास ही पड़ेगा. और मेरे पागल पन की स्टोरी सुनकर पंडिताइन ज़रूर मेरे बारे मे सोचती रहेंगी. उनका दीवाना जो सपनो मे उनकी चुदाई करता है)

पंडिताइन अंदर के कमरे मे चली गई. और मैं गेट खोल कर बिना पंडिताइन को बताए यहाँ से चला गया.

पंडिताइन की शकल देखने लायक होगी जब मुझे वहाँ नही देखेंगी तो.पर ये देखने के लिए मैं रुक नही सकता था.

मैं मंदिर के पास चला गया तो मुझे मोना का कॉल आया.

मैं ने मोना को घर3 बुलाया.

थोड़ी देर बाद मैं मोना के साथ घर3 मे बेड पर मोना की चुदाई कर रहा था.

आआअहह और ज़ोर से मारो आआअहह फाड़ दो मेरी चूऊत को मैं गैिईई

मेरा भी निकल रहा है.

मेरे मुँह मे डालो

मैं ने अपना वीर्य मोना को पिला दिया. और बेड पर लेट गया.

थोड़ी देर बाद हम नॉर्मल हो गये

मोना-क्या हुआ, कुछ सोचा कुवरसिंघ के बारे मे

अवी-एक प्लान बनाया था

मोना-प्लान ,मुझे बताओ

अवी-तुम्हें कुवरसिंघ के साथ चुदाई करनी होगी. फिर हम कुवरसिंघ पर ज़बरदस्ती करने का केस करेंगे.

मोना-ये तो मेरे प्लान जैसा लग रहा है.

अवी-हां,पर ये प्लान शुरू करने से पहले फैल हो गया

मोना-क्यू?

अवी-कल मैं ने ठाकुर की ताक़त देकी, पोलीस उनकी मुट्ठी मे है.

मोना-फिर क्या करे

अवी-मेरे पास नया प्लान है

मोना-कितने प्लान है तुम्हारे पास

अवी-ये प्लान हमे कामयाबी देगा.

मोना-बताओ

अवी-तुम कुवरसिंघ को अपनी तरफ अट्रॅक्ट करो.सेक्सी ड्रेस पहन कर अपनी तरफ अट्र्क्ट करो

मोना-उस से क्या होगा.

अवी-करो तो पहले ,बाद मे बताउन्गा.

मोना-कुवरसिंघ को बोतल मे उतार दूँगी.

अवी-सेक्सी ड्रेस पहन कर मेले मे अट्रॅक्ट करना. सिर्फ़ मेले मे

मोना-वो क्यू?

अवी-जितना कहा है उतना करो.

मोना-कब तक करना होगा.

अवी-आज और कल दिन भर अपनी तरफ अट्रॅक्ट करना

मोना-उसके बाद

अवी- फिर कल रात मे कुवरसिंघ को अपने मालिक के बारे मे बता देना. और कुवरसिंघ के साथ चुदाई कर के मेला ख़तम होने तक का टाइम माँग लेना

मोना-मुझे तुम्हारा प्लान तो बताओ

अवी-पहले इतना करो ,और कुवरसिंघ के साथ चुदाई करने से पहले और बाद मे मुझ से आकर मिलना ,फिर आगे का प्लान बताउन्गा.

मोना-ठीक है,

अवी-जाओ काम पर लग जाओ

मोना-पहले कपड़े तो पहनने दो

मोना अपने काम मे लग गई .और मैं मंदिर मे जाकर काम कैसा चल रहा है ये देखने लगा.

 


527

मोना को काम पर लगाने के बाद मैं दोपेहर मे मंदिर मे काम कैसा चल रहा है ये देखने के लिए चला गया.

रणजीतसिंघ की सेक्रेटरी ने मुझे पूरी रिपोर्ट दी.

मैं अपना काम कर रहा था कि हवेली से 2 लोग मेरे पास आ गये.

नौकर-तुम्हे हवेली मे बुलाया है

अवी-किस ने बुलाया रणजीतसिंघ ने

नौकर-ठकुराइन ने बुलाया है, चलो हवेली

अवी-(ये ठकुराइन का क्या करूँ समझ नही आ रहा.) तुम चलो मैं काम ख़तम कर के आता हू

नौकर-तुम जिस हालत मे हो उस हालत मे ,इसी वक्त लेकर आने को कहा है.

अवी-(ठकुराइन को गुस्सा दिला कर मैं ने ग़लती की .आज मेरी खैर नही) तुम चलो तो मैं तुम्हारे पीछे आता हूँ

नौकर-नही, तुम को हमारे साथ चलना होगा. हमे ज़बरदस्ती लेकर जाने पे मज़बूर मत करो

अवी-(लगता है ठकुराइन आज मेरी जान लेकर रहेंगी.) चलो

मैं नौकर के साथ हवेली चला गया.

मुझे हवेली मे कोई नही दिख रहा था.

पता नही सब कहाँ गये है.

नौकर ने मुझे हॉल मे बैठने को कहा. और ठकुराइन को बताने के लिए चला गया.

हवेली मे ठकुराइन की अलावा कोई नही है इसका मतलब ठकुराइन ने मुझे,,,,,,,

ठकुराइन हॉल मे आ गयी. ठकुराइन ने नौकर को बाहर जाने को कहा और मेरे सामने आकर बैठ गयी.

थोड़ी देर मुझे देखती रही

ठकुराइन-मेरे पीछे आओ

ठकुराइन मुझे अपने कमरे मे ले गयी.

ठकुराइन-मैं कौन हू

मैं ने कोई जवाब नही दिया.

ठकुराइन-मेरे गाल पर थप्पड़ मार कर ,ज़ोर से चिल्ला कर मैं कौन हूँ

अवी-आप गाओं की ठकुराइन है,

ठकुराइन-इतना पता होने के बाद भी तुम्हारी इतनी हिम्मत हुई कि मेरे कहने के बाद भी हवेली नही आए.

अवी-मैं तो आप के हुकुम का पालन कर रहा था.

ठकुराइन-मैं ने कहा था कि हवेली तुम्हे आना होगा 1 महीने के लिए और तुम नही आए, और कह रहे हो कि हुकुम का पालन कर रहा था.

अवी-आपने जैसा कहा वैसा ही किया मैं ने

ठकुराइन-मुझे गुस्सा मत दिलाओ,मैं ने तुम्हे हवेली आने को कहा था कि नही

अवी-हाँ कहा था

ठकुराइन-1 महीने के लिए

अवी-हां

ठकुराइन-तुम ने आने का वचन दिया था

अवी-हां

ठकुराइन-फिर आए क्यू नही, तुम्हें पता है ना कि मैं क्या क्या कर सकती हू.ठकुराइन हू मैं

अवी-आपके पूछने के बाद मैं ने कहा था कि 1 महीना मेला है.

ठकुराइन-आगे बोलो

अवी-फिर आपने कहा कि "मेले के बाद जो समय मिलेगा .उस वक्त हवेली मे काम करना होगा"

ठकुराइन-तो तुम आए कहाँ

अवी-आपने कहा मेले के बाद जो समय मिलेगा. मुझे लगा कि मेला ख़तम हो जाने के बाद मुझे हवेली मे 1 महीने के लिए आना होगा.

ठकुराइन-ऐसा लगा था तो पूछ नही सकते थे कि ,मैं ने कहा था कि मेला देखने के बाद आ जाना मतलब 1 2 घंटे के लिए आने को कहा था

अवी-मैं आप से कैसे पुछु

ठकुराइन-(मेरी ग़लती है मुझे ठीक से बताना चाहिए था.ये तो मुझ से डरा हुआ है. मेरी मुट्ठी मे है, ) ठीक है.आगे से ध्यान रखना

अवी-आगे से मतलब

ठकुराइन- तुम्हे मेला ख़तम हो जाने के बाद 1 महीना हवेली मे काम करना होगा.

अवी-जी

ठकुराइन-और मुझसे होशियारी करने की जुर्रत मत करना .ये याद रखना मैं ठकुराइन हूँ. मेला ख़तम होते ही हवेली मे दिखाई देने चाहिए नही तो ,मुझ से बुरा कोई नही होगा.

अवी-समझ गया.

ठकुराइन-वो जाने दो मुझे ये बताओ तुम्हे मेरी याद नही आई

अवी-(तेरी याद करके क्या करू) रोज आती थी.

ठकुराइन-रोज आती थी तो हवेली क्यू नही आए

अवी-आपका हुकुम था कि मेला ख़तम हो जाने के बाद हवेली मे आना

ठकुराइन-(कितना भोला है .ये तो हमेशा के लिए मेरी मुट्ठी मे रहेंगा.) कोई बात नही, ये बताओ याद करके क्या करते थे

अवी-वो नही बता सकता मुझे शरम आती है.

ठकुराइन-(ऐसा ही लड़का चाहिए मुझे जो मेरे हुकुम के नीचे रहे) मुझ से क्या शरमाना

अवी-वो आप को याद करके लंड खड़ा हो जाता था.

ठकुराइन-(मुझे देख कर तो लंड की लाइन लग जाती है,इसके साथ तो चुदाई कर चुकी हूँ. ये हाल तो होगा ही.)फिर क्या करते थे

अवी-आपकी फोटो पर

ठकुराइन-मेरी फोटो वो कहाँ से आई तुम्हारे पास

अवी-(ये तो मुझे भी नही पता,मेरे पास कोई फोटो नही है ) वो पिछली बार हवेली से चुपके से ले गया था.

ठकुराइन-(ये तो मेरा दीवाना हो गया)ठीक है फिर क्या करते थे

अवी-आप बुरा मत मानीएगा.

ठकुराइन-नही मानूँगी

अवी-नही, आप पिछली बार गुस्सा हुई थी.

ठकुराइन-(ये ऐसे नही मानेगा.) बताते हो या थप्पड़ खाने के बाद बताओगे

अवी-वो पिछली बार आपके मूह मे वीर्य डाला था ना और आपने पिया था उसे याद करके आपके फोटो पर मूठ मार कर वीर्य डाल देता था.

और मैं ने अपनी मुन्डी नीचे की.

ठकुराइन मेरी बात सुनकर हँसने लगी.

ठकुराइन-तो तुम्हे मुझे वीर्य पिलाना पसंद है

अवी-हाँ.

ठकुराइन-चलो आज मोका मिला है तो तुम्हारी इच्छा पूरी करती हू

अवी-(मेरा लंड चूसना है ऐसा बोल ना) अभी डोपेहर मे कैसे ,कोई आ गया तो

ठकुराइन-आया तो क्या हुआ मैं ठकुराइन हूँ, किस की हिम्मत है जो मेरे सामने बोल सके

अवी-ठाकुरजी आ गये तो

ठकुराइन-वो हॉस्पिटल गये है. और बाकी सब भी गये है.

अवी-फिर आप जैसा कहे

ठकुराइन-तुम बैठो मैं नौकर को समझा कर आती हू

ठकुराइन चली गयी और मैं अपने कपड़े निकाल कर बेड पर लेट कर ठकुराइन का इंतज़ार करने लगा

 


528

ठकुराइन चली गई और मैं अपने कपड़े निकाल कर बेड पर लेट कर ठकुराइन का इंतज़ार करने लगा.

थोड़ी देर बाद ठकुराइन कमरे मे वापस आ गई.और मुझे अपने बेड पर नंगा देख कर खुश हुई पर बाद मे पता नही क्या हुआ जो मुझे थप्पड़ मार दिया.

ठकुराइन-तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई बेड पर लेटने की, ये मेरा बेड है इस पे लेट ने के लिए ठाकुर मेरी इजाज़त लेता है.और तुम हो कौन ,नौकर हो तो नौकर रहो मालिक बन ने की कोशिस मत करना.

मैं बेड से नीचे उतर गया

अवी-(जिस दिन मेरे हाथ मे गेम होगा तब बताउन्गा तुम्हें) वो आपने कहा था ना कि मेरी इच्छा पूरी करोंगी तो मैं...

ठकुराइन-ज़्यादा दिमाग़ लगाने की ज़रूरत नही है.मैं जैसा कहूँ वैसा करो,नही तो तुम्हारी खाल निकाल दूँगी.

अवी-दुबारा ऐसा नही होगा.

ठकुराइन-दुबारा करने के बारे मे सोचने का मोका नही देती मैं ,

और ठकुराइन ने मेरे लंड को पकड़ कर ज़ोर से मरोड़ दिया.

अवी-आआहह ठकुराइन माफ़ कर दो

ठकुराइन ने लंड को छोड़ दिया.

ठकुराइन-दुबारा करने के बारे मे 10 बार सोचना.

अवी-जी (रुक तुझे ऐसा सबक सिखाउन्गा की मुझे ज़िंदगी भर याद रखेगी)

ठकुराइन-चल जा दूसरे कमरे मे और मेरा इंतज़ार कर

मैं ने अपने कपड़े पहन लिए और दूसरे कमरे मे चला गया.

और सोचने लगा कि ठकुराइन का क्या करूँ.

क्यू ना मैं ठकुराइन और मेरी चुदाई का वीडियो बना लूँ और फिर ठकुराइन से बदला लूँ ,अपने इशारो पे नाचने पर मज़बूर करूँ

ऐसा किया तो ,अगर वो वीडियो ग़लती से बड़ी चाची के पास गया या फिर ठकुराइन ने बड़ी चाची को मिर्च मसाला डाल कर बता दिया तो.

बड़ी चाची मुझे वैसे देख नही पाएँगी.

ठकुराइन को सबक सिखाने के लिए ठकुराइन की कमज़ोरी ढूँढनी पड़ेंगी.

ठकुराइन की जगह ठकुराइन की कमज़ोरी पर पैर रखना होगा.

ये ठीक रहेंगा.

मैं ठकुराइन के आने का इंतज़ार करने लगा.

थोड़ी देर बाद ठकुराइन कमरे मे आ गई.

ठकुराइन-तुम समझ दार हो जो खड़े रह कर मेरा इंतज़ार कर रहे हो

अवी-फिर से बेड पर लेट कर इंतज़ार करता तो आप गुस्सा हो जाती.

ठकुराइन-मैं खुश हुई.पर दुबारा कोई ग़लती की तो वो तुम्हारी आख़िरी ग़लती साबित होगी.

अवी- दुबारा ऐसा नही होगा.

ठकुराइन-ऐसे ही मेरी बात मानोंगे वो तुम्हारे लिए अच्छा होगा. चलो अब मुझे खुश करो

और ठकुराइन बेड पर लेट गई.

ठकुराइन-इधर आओ

मैं ठकुराइन के पास आ गया.

ठकुराइन-मेरी सारी के अंदर जाकर मेरी चूत चूसो और खबरदार जो मेरी सारी उपर की तो

मैं ठकुराइन के पैरो के बीच आ गया.

ठकुराइन ने अपने पैरो को आपस मे जोड़ रखा था.

मैं ने ठकुराइन के पैरो का फैलाया और सारी के अंडर घुस ने लगा.

ठकुराइन बहुत कमिनि थी, मेरे अंदर जाते ही अपने पैरो से मुझे दबोच लिया.

मैं बस ठकुराइन के घुटने तक आया था.

मुझे अपने पैरो मे फसा हुआ देख कर हँसने लगी.

ठकुराइन-चल चूस जल्दी

मैं कोशिस कर रहा था कि ठकुराइन की चूत तक पहुँच जाउ .पर मेरी कोशिस कामयाब नही हुई.

ये उस तरह हो रह था जैसे मैं किसी का सर पकड़ कर लंड को उसके मुँह मे पेलता हूँ.

मुझ पे ठकुराइन लगातार हंस रही थी.

थोड़ी देर बाद ठकुराइन ने मुझे चूत तक जाने दिया.

ठकुराइन-चल चूस जल्दी

मैं ठकुराइन की चूत पर टूट पड़ा.

ठकुराइन की चूत को चाटने लगा. सारी के अंदर जाकर चूत चूसने मे मुझे मज़ा नही आ रहा था. पर करना तो पड़ेगा. नही तो मेरी गर्दन और ठकुराइन का चाकू

मैं प्यार से आराम से ठकुराइन की चूत चूसने लगा.

अगर ठकुराइन को पसंद नही आया तो पता नही मेरे साथ क्या करेंगी.

एक तरफ मैं कितनी चूतो को अपने लंड के नीचे लाया था और ये ठकुराइन मेरे लंड को शर्मिंदा कर रही है.

अगर ये गाओं की ठकुराइन नही होती तो मैं इसको दिखाता कि मैं क्या चीज़ हूँ

ठाकुर की पवर ,और ठकुराइन की मर्ज़ी के आगे ना झुकने वाले का क्या होता है इसके बारे मे मैं ने गाओं के लोगो से कही बार सुना है.

जिस ने भी ठाकुर या ठकुराइन की बात नही मानी वो दुबारा कभी गाओं मे दिखाई नही देता यहाँ तक मैं ने ठकुराइन के बारे मे सुना है .

इस लिए मैं ने भी ठकुराइन के आगे हार मान ली.

किसी ने कहा है कि हार मान लेने से कभी कभी फ़ायदा होता है. आज हार मान ली है ताकि मुझे समय मिले ठकुराइन को अपने सामने झुकाने का.

आज ठकुराइन के हाथ मे मेरा लंड है ,लेकिन एक दिन मेरे पैर के नीचे ठकुराइन की चूत होंगी.

मैं ठकुराइन की चूत चूस ने लगा. मुझे ठकुराइन से कैसे हॅंडल करना है ये बाद मे सोचूँगा पहले ठकुराइन की चूत चूसनी है अगर ठकुराइन को मेरा चूत चूसना पसंद नही आया तो साली फिर मेरे लंड को मसल देंगी.

मैं ने अपनी जीभ ठकुराइन की चूत मे डाल दी.

ठकुराइन की चूत मे जीभ जाते मैं एक पल के लिए भूल गया कि ठकुराइन ने मेरे साथ क्या किया.

ठकुराइन की चूत का टेस्ट मेरी जीभ से चखते ही मैं तो चूत का गुलाम हो गया.

मैं ठकुराइन की चूत को चूस्ता गया.

ठकुराइन मज़े मे शीष्कारी ले रही थी.

मैं लगातार ठकुराइन की चूत चूस्ता रहा. ठकुराइन मज़े लेते हुई शीष्कारी लेने के साथ अपने बूब्स दबा रही थी. क्यू की उसका बदन बार बार हिल रहा था.

ठकुराइन-आआआहह तू चूस्ता बहुत अच्छा है. और जोर्र्र्र से चूऊवस.

मैं ने ठकुराइन की बात मान कर चूत मे 2 उंगली डाल कर अपनी जीभ से दाने को चाट कर ठकुराइन को मज़ा देने लगा.

मैं ऐसी चूत चूस रहा था जिसे मैं 2 बार मार चुका था पर देखा अभी तक नही. पिछली बार कमरे मे अंधेरा था पर इस बार देखने का मोका है .और मैं चुदाई करते हुए ठकुराइन की चूत ज़रूर देखूँगा.

हाथ लगाने से ठकुराइन की चूत इतनी मस्त लग रही है. देखने से तो मेरा पानी ना निकल जाए.

मैं ने ज़ोर ज़ोर से ठकुराइन की चूत मे उंगली अंदर बाहर करते हुए चूत को जीभ से चाट रहा था.

ठकुराइन लगातार शीष्कारी ले रही थी.सस्स्स्स्स्सिईईईईईईईईईईई

ऊऊऊीीईईईईईईईईईईई

आआआआहह और जोर्र्र्र से

मैं ने चूत चूसना वैसे ही चालू रखा.ताकि मुझे और ठकुराइन को मज़ा मिले .

ठकुराइन अपने सर को इधर उधर कर रही थी. वो पूरी मदहोश होकर अपने हाथ और पर को पटक रही थी जिस से मुझे परेशानी हो रही थी पर ठकुराइन कुछ कहने की हिम्मत नही थी मुझ मे

मैं अपना काम करता गया.

ठकुराइन ने अचानक मेरे सर को फिर से अपने जांघों मे दबा दिया.

ठकुराइन की कमर झटके मारने लगी.

ठकुराइन की जांघों के बीच दबने से ठकुराइन की चूत का सारा पानी मेरे मुँह और नाक मे चला गया.

ठकुराइन की चूत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया था. जिस की वजह से मेरा पूरा मुँह ,चेहरा ठकुराइन के पानी से भर गया था.

ठकुराइन की जांघों के बीच फँसने से और चूत का पानी मुँह मे होने से मुझे साँस लेने मे मुश्किल हो रही थी.

पर ठकुराइन ने मेरे सर को तब तक अपने जांघों मे पकड़े रखा जब तक चूत से आख़िरी बूँद बाहर ना निकली.

तब तक मेरा क्या हाल हुआ होगा वो मैं जानता हू.

मैं ठकुराइन की जांघों के बीच छटपटा रहा था पर ठकुराइन अपने नशे मे चूर थी.

जब ठकुरानका नशा ठंडा पड़ गया तब ठकुराइन ने अपनी जांघों की गिरफ़्त ढीली कर दी.

मैं एक झटके मे ठकुराइन के सारी के अंदर से बाहर निकल गया.

और ज़ोर ज़ोर से हाँफने लगा.

मेरे चेहरे पे ठकुराइन की चूत का पानी फैला हुआ था.

हाँफने की वजह से मेरे मुँह मे से ठकुराइन की चूत का पानी नीचे टपकने लगा.

मैं सीधा जाकर सोफे पर बैठ कर अपनी सासे नॉर्मल करने लगा.

उधर ठकुराइन भी हाफ़ रही थी.

पर वो मुझ से पहले नॉर्मल हो गई.

और मेरी हालत देख कर हँसने लगी.

ठकुराइन-एक भी बूँद नीचे मत गिराना.इसके लिए पूरा गाओं तरस रहा है. और तुझे बिना कुछ किए दिया है. नीचे गिराना मत

मैं ने अपना मुँह बंद कर लिया. वो अच्छा हुआ कि जब मैं खड़ा था तब मेरे मुँह से पानी नीचे गिरते हुए ठकुराइन ने नही देखा था. वरना मैं गया था काम से

मैं अभी भी हाँफ रहा था कि ठकुराइन मुझे पे गुस्सा हो गई.

ठकुराइन-तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे कहने के बाद भी सारी को उपर उठाने की

मैं ने ठकुराइन की तरफ देखा ,ठकुराइन की सारी जांघों तक उपर आ गई थी.

शायद मेरे जल्दी से बाहर निकलने से सारी उपर हो गई.

पता नही अब ठकुराइन क्या करेंगी.

पर एक बात थी सारी उपर हो जाने के बाद भी मुझे ठकुराइन की चूत नही दिखी.

शक्कर खाने के बाद अगर सज़ा मिले तो वो सज़ा भी मीठी लगती है पर यहाँ तो शक्कर खाया या गुड खाया ये भी देखने को नही मिला और अब सज़ा मिलेंगी.

आगे क्या होने वाला है इसके किए मैं खुद को तैयार कर रहा था. और दूसरी तरफ ज़ोर ज़ोर से सासे ले रहा था.

ठकुराइन देर ना करते हुए मेरे पास आ गई और मेरी नाक को अपने हाथ मे पकड़ कर दबा दिया. जिस से मुझे साँस लेने मे मुश्किल होने लगी.

मैं ने अपना मुँह खोल कर सास लेने का सोचा था कि ठकुराइन ने उस पे भी रोक लगा दी.

ठकुराइन-अपना मुँह खोला तो समझ लेना कि ये आख़िरी साँस होगी तुम्हारी

अब तो मुँह भी नही खोल सकता था.

ठकुराइन मेरी जान लेकर रहेंगी.

एक तरफ दम घुट रहा था और दूसरी तरफ ठकुराइन को मज़ा आ रहा था.

मेरी हालत खराब हो रही थी. और ठकुराइन मुझ पे हँस रही थी.

 


529

ऐसी हालत मे सिर्फ़ एक काम कर के मैं बच सकता था.

वो था एक तो ठकुराइन की चूत मे लंड डालु या फिर से ठकुराइन की चूत चूस लूँ

मैं ने विदिन सेकेंड फ़ैसला कर लिया. कि मुझे क्या करना है

मैं ने ठकुराइन को जोरदार धक्का दे कर खुद को आज़ाद किया.

ठकुराइन धक्के के वजह से बेड पर जाकर गिर गई.

मैं ने 5 6 लंबी लंबी सासे ली.और ठकुराइन पर हमला बोल दिया.

ठकुराइन बेड पर इस तरह गिरी थी कि उसके पैर हवा मे थे.

ठकुराइन के कुछ करने से पहले मैं ठकुराइन के पैरो को पकड़ कर सारी के अंदर घुस गया.

इस बार अंदर घुसते हुए सारी का पूरा ख़याल रखा.

ठकुराइन की चूत के पास जाते ही मैं ने चूत के होंठो पर अपने होंठ रख कर चूत पे लंबा किस किया. ऐसा किस किया कि ठकुराइन पूरी तरह से हिल गई.

ठकुराइन को अपनी चूत मुझसे चूसवाने मे मज़ा ही मज़ा मिलता था.

मेरे होंठ ठकुराइन की चूत पर पड़ते ठकुराइन ने आँखे बंद की.

मैं ने पहले धीरे धीरे फिर जैसे मैं नॉर्मल हुआ तो ठकुराइन की चूत को खाने लगा.

चूत के होंठो को अपने होंठ रख कर सक करता गया.जीभ डाल कर चूत से ठकुराइन के दिमाग़ तक जाकर उनको शांत करने लगा.

ठकुराइन की चूत तब तक सक करता गया जब तक मैं ने ठकुराइन के मुँह से शीष्कारी ना सुनी.

ठकुराइन की शीष्कारी निकलते ही मैं चूत मे 2 उंगली डाल कर चूत को चूसने लगा.

मुझे ये सब करते हुए दम लग रहा था पर ये करना ज़रूरी था.

पिछली बार की तरह ठकुराइन इस बार भी अपनी चूत चूसवाने का मज़ा ले रही थी.

इस बार मैं जोश के साथ ठकुराइन की चूत चूस रहा था.जिस की वजह से ठकुराइन ने जल्दी से पानी छोड़ दिया.

मैं ने इस बार पहली बार की तरह मज़ा नही लिया पर जितना किया उसका फल मे ठकुराइन का पानी मिला जो पी कर ठकुराइन को फिर से खुश किया.

और आराम से सारी को कुछ ना होते हुए मैं बाहर आ गया.

ठकुराइन खुद को नॉर्मल कर रही थी. और मैं ने अपने कपड़े निकालने शुरू किए.

कपड़े निकालने के बाद ठकुराइन के कपड़े कैसे निकालूं ये सोच रहा था.

ठकुराइन ने मुझे सारी (पेटिकोट)को उपर ना करते हुए चूत चूसने को कहा था. और फिर सज़ा दी.

पर बिना कपड़े निकाले चूत मे लंड कैसे डालु.

पिछली बार मैं ने ठकुराइन को पेटिकोट मे देखा था. मतलब सारी निकाल सकता हूँ. पर पेटिकोट का क्या करूँ.

पेटिकोट मे तो नाडे के नीचे थोड़ा हिसा फटा हुआ रहता है. वही से लंड चूत मे डाल सकता हूँ.

ठकुराइन का पल्लू तो कब का बदन से अलग हुआ था.

मैं ने धीरे से सारी को ढीला करके थोड़ी नीचे कर ली जिससे कि मुझे वो पेटीकोत की जगह दिख जाए.

ठकुराइन अपनी चूत से पानी निकाल कर खुशी मे आँखे बंद कर के बेड पर लेटी हुई थी.

जहाँ से लंड चूत मे डालना है वो जगह मुझे दिखते ही मैं ठकुराइन के उपर आ गया.

ठकुराइन अभी भी आँखे बंद करके खुद को नॉर्मल कर रही थी.2 बार उसका पानी निकल चुका था जिस से वो ठंडी पड़ गई थी.

मैं ने लंड को पेटिकोट के अंदर डाल दिया और लंड ने खुद अपनी मंज़िल को ढूँढ लिया.

लंड चूत को टच होते ही ठकुराइन ने आँखे खोल ली .मुझे अपने उपर नंगा देख कर गुस्सा होने लगी.

पर ठकुराइन के कुछ बोलने से पहले एक झटके मे लंड ठकुराइन की चूत मे चला गया.

ठकुराइन मुझे गाली देने के लिए मुँह खोलने वाली थी. पर अब गाली की जगह एक चीख ठकुराइन के मुँह से निकल गई.

आआअहह मररररर गैिईई ,तूमम्म्मम ने ये क्य्ाआआ किय्ाआअ ,तुम्हेनीई मैंन्न्न् आआअहह मरररर गैइइ.

ठकुराइन बहुत बोलती है. मैं ने ठकुराइन के मुँह को बंद कर दिया.

मैं ठकुराइन के होंठो पे किस करने लगा.

मैं ने इस बार सोचा था कि कुछ ना करके सज़ा भुगतने से अच्छा है कि कुछ करके सज़ा भुगतू.

ठकुराइन तो मेरा बुरा हाल करेंगी.

चूत मार कर सज़ा भुगतना अच्छा होगा यही सोच कर मैं ने ठकुराइन की चूत मे लंड पेल दिया.

मेरा लंड एक झटके मे ठकुराइन की चूत मे जाते उनकी हालत पतली हो गई थी.

ठकुराइन लंड के झटके को बर्दस्त नही कर पाई.

उनकी आँखे दर्द से बड़ी हो गई .

ठकुराइन का बदन मेरे जोरदार धक्कों से थरथर काँप रहा था.

मैं ने ठकुराइन के मुँह से ज़्यादा चीखे निकलने से पहले उसका मुँह बंद कर दिया था.

ठकुराइन मुझे धक्का देने की कोशिस कर रही थी.

ठकुराइन मुझे धक्का देने की कोशिस कर रही थी.

मैं ने ठकुराइन के हाथो को अपने हाथो से पकड़ लिया फिर भी ठकुराइन अपना बदन हिला कर मेरे नीचे से निकलना चाहती थी

मैं ने ठकुराइन को शांत करने ले लिए उसके होंठो पे काट लिया .और बेदर्दी से उसके होंठो को चूसने लगा.

ठकुराइन मेरे नीचे तड़फ़ रही थी .उसने सोचा नही था कि मैं एक झटके मे लंड अंदर डालूँगा .

ठकुराइन के हाथो का मार खाने के बाद लंड को चूत की गहराई मे पेलने से ठकुराइन शॉक्ड थी.

मैं ने सिर्फ़ लंड डाला था इस के उपर कुछ नही किया , मेरे लंड ने ठकुराइन को उसकी नानी याद दिला दी.

थोड़ी देर मैं ठकुराइन के होंठो को चूस्ता रहा ,जब ठकुराइन का दर्द कम हुआ तब मैं ने धक्के लगाना शुरू किया.

धीरे धीरे धक्के मारते हुए चुदाई की शुरुआत की .पर ठकुराइन के होंठो को चूस्ता रहा.

ठकुराइन की चूत मार रहा था पर इस बार भी चूत देखने को नही मिली.

कोई बात नही फिर भी देखेंगे अभी तो लंड को चूत को अंदर से देखने दो

मैं ठकुराइन की चूत मे धीरे धीरे धक्के मारने लगा.

ठकुराइन तो सेक्स की देवी थी. जल्दी मेरे धक्को का मज़ा लेने लगी.

मेरे धक्के मारने से ठकुराइन ने मेरे होंठो को चूसना शुरू किया.

ठकुराइन के मस्ती मे आते ही मैं ने किस करना बंद किया और सिर्फ़ धक्के मारने पे ध्यान देने लगा.

लंड भी कमीना निकला .चूत मे जाते उसे प्यार हो गया . ठकुराइन की चूत उसे पसंद आ गई.वो बड़े प्यार से अंदर बाहर हो रहा था.

ठकुराइन मुझे ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने को कह रही थी.

लंड ने ठकुराइन की बात सुन ली .और अपनी स्पीड बढ़ा दी.और पलके झुकने तक पता नही कितनी बार अंदर बाहर हो रहा था.

मैं भी ठीक उसी तरह जैसे ठकुराइन बोल रही थी वैसे धक्के मारने लगा.

चूत मे जोरदार धक्के मारने से ठकुराइन को मज़ा आ रहा था पर मुझे दर्द हो रहा था.

एक तो ठकुराइन ने पहले मेरे लंड को मरोड़ा था

ये तो ठीक था पर मैं ठकुराइन की चूत पेटीकोत के छोटे से गॅप से लंड डाल कर मार रहा था.

पेटिकोट का नाडा बँधा हुआ था .थोड़ा ढीला हुआ हो गया था .जिस की वजह से जोरदार धक्के मारने से लंड उस गॅप से पेटीकोत से घिस रहा था. जिस से मुझे जलन हो रही थी.

पर ये करना ज़रूरी था. मैं धक्के मारता गया.

ठकुराइन शीष्कारी लेते हुए मज़ा ले रही थी.

और ज़ोर से मारो मेरा पानी निकलने वाला है.

ठकुराइन मस्ती मे आते मेरे लंड को नहाने के लिए तैयार हो गई.

मैं ने अपनी गति बढ़ा दी जिस से ठकुराइन ने पानी छोड़ दिया.

ठकुराइन के पानी छोड़ते ही मैं ने धक्के मारना बंद किया और ठकुराइन के उपर गिर गया.

मेरे इस तरह गिरते ठकुराइन ने मुझे गले लगा लिया

ठकुराइन-रुक क्यू गये

अवी-मैं इस पोज़िशन मे और चुदाई नही कर सकता.

ठकुराइन-क्यू क्या हुआ

अवी-वो मैं ने आपके पेटिकोट निकाले बिना आपकी चुदाई की है

ठकुराइन-इसी लिए तुम अभी तक मेरे उपर हो, नही तो ज़मीन के नीचे सो रहे होते.

अवी- पेटिकोट की वजह से मेरे लंड मे जलन हो रही है.

ठकुराइन -तो उठो मेरे उपर से

अवी-मेरा अभी तक हुआ नही है.

ठकुराइन-जितना कहा है उतना करो

मैं ठकुराइन के उपर से उठ कर बेड पर लेट गया.

ठकुराइन बेड से उठ कर टेबल पर रखी हुई क्रीम लेकर आ गई.

और मेरे लंड पर क्रीम लगा कर मेरे उपर बैठ गई.

ठकुराइन-क्रीम क्यू लगा रही हूँ पता है तुम्हें

अवी-मेरी जलन कम करने के लिए.

ठकुराइन-(तुम्हें खोना नही चाहती, तुम ठाकुर से भी अच्छे हो) मुझे और चुदाई करनी है इस लिए क्रीम लगा रही थी.

ठकुराइन एक कमिनि औरत है उस से कुछ आशा भी नही रख सकते.

ठकुराइन ने अपना पेटिकोट नही निकाला.

और मेरे लंड को अपनी चूत पर रख कर बैठ गई.

ठकुराइन धीरे धीरे लंड पर बैठ गई. जैसे कि वो मुझे ज़्यादा दर्द ना हो इसका ध्यान रख रही हो

ठकुराइन ने मुझे कुछ नही कहा सिर्फ़ चुदाई कर रही थी. मुझे तो लगा था कि मेरी अच्छी खबर लेगी. शायद चुदाई हो जाने के बाद मेरी परेड लेगी.

ठकुराइन ने लंड को पकड़ा रखा ताकि लंड फिसल ना जाए.

पेटिकोट की वजह से मुझे ठकुराइन की चूत नही दिखी.

लंड को चूत मे लेने के बाद ठकुराइन लंड पर उछलने लगी.

धीरे धीरे उछल रही थी. उसके ऐसा करने से मुझे अच्छा लग रहा था.

ठकुराइन धीरे धीरे उछल कर खुद मज़ा ले रही थी .और मुझे भी मज़ा दे रही थी.

क्रीम की वजह से मुझे काफ़ी हद तक राहत मिली थी.

क्रीम की वजह से जलन का पता ही नही चला. क्रीम का असर होते मुझे चुदाई मे और मज़ा मिलने लगा.

पर आज तो रणजीतसिंघ एक वर्जिन लड़की को भेजने वाला था , लंड की हालत देखते हुए रणजीतसिंघ को मना करना होगा.

उसको किसी और दिन भेजने को कहना होगा.

मैं आराम से लेट कर चुदाई का भरपूर मज़ा लेने लगा.

मैं बस लेटा रहा, जो कर रही थी वो ठकुराइन कर रही थी.

ठकुराइन लगातार उपर नीचे होते हुए लंड का मज़ा ले रही थी.

3 बार पानी निकालने के बाद भी ठकुराइन मे बहुत स्टॅमिना था.

तभी तो पूरा गाँव ठकुराइन के नाम से मूठ मारता है.

और ठकुराइन मेरे लंड की दीवानी है. अगर उसको मेरा लंड इतना पसंद है तो प्यार से करती ,इस तरह करने से क्या मिलता है.

ठकुराइन अपने संतरो को अपने हाथो से मसल्ते हुए लंड पर उछल रही थी.

ठकुराइन तब तक उछलती रही जब तक चूत से पानी ना निकल गया.

चूत से पानी निकलते ही ठकुराइन ने मेरे गाल पर थप्पड़ मार दिया.

ठकुराइन-क्या महाराजा की तरह लेटा है, चल नीचे से धक्के मार

अब ठकुराइन थोड़ी मेरे उपर झुक गई .और मैं नीचे से धक्के मारने लगा.

ठकुराइन तो मज़े से अपनी चूत मे लंड को फील कर रही थी.

इस पोज़िशन मे मैं जोरदार धक्के मार नही पा रहा था फिर भी जो कर रहा था उस से हम दोनो का मज़ा आ रहा था.

इसी तरह धक्के मार कर ठकुराइन की चूत मे वीर्य डालने की तैयारी करने लगा.

ठकुराइन को ये पता चलते ,वो मेरे उपर से अलग हो गई.

और मेरे लंड को हाथो मे पकड़ कर हिलाने लगी. और अपना मुँह खोल कर वीर्य पीने को तैयार थी.

ठकुराइन का हाथ गाल पर पड़ते दर्द होता है. और लंड पर आते मज़ा मिलता है.

ठकुराइन ने लंड हिला कर मेरा वीर्य निकाल दिया.

लंड की पिचकारी उड़ कर साइड ठकुराइन के मुँह मे चली गई.ठकुराइन ने मेरा वीर्य पी कर मुझे खुश कर दिया.

क्रीम लगाने से ठकुराइन ने लंड चूसा नही पर वीर्य पी कर मुझे खुश कर दिया.

चुदाई के वक्त चूत से पानी निकाल कर ठकुराइन भी थक गई.

दोनो का पानी निकलते ही, ठकुराइन मेरे बाजू मे गिर गई.

धीरे धीरे हम नॉर्मल होने लगे. चुदाई तो हो गई अब ठकुराइन क्या करेंगी इस बात से डर लग रहा था.

ठकुराइन ने चुदाई के वक्त कहा कि मुझे माफ़ कर दिया पर वो चुदाई का नशा था .अब वो होश मे है.

मैं यही सोच रहा था की ठकुराइन नॉर्मल हो गई और उट कर बाथरूम मे चली गई.

बच गया मैं.

ठकुराइन के बाथरूम मे जाते ही मैं ने अपने लंड को साफ किया .और टेबल पे रखी हुई क्रीम अपने लंड पर लगा ली.

उस क्रीम की वजह से लंड को ठंडक मिल गई.

फिर मैं ने अपने कपड़े पहन लिए. और ठकुराइन को बाथरूम से बाहर आने का इंतज़ार करने लगा

 
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