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521
रणजीतसिंघ उसके कमरे से बाहर निकलने का इंतज़ार कर रहा था.
उसके बाहर आने के बजाय उसका बाप बाहर आ गया. मुझे और रणजीतसिंघ को अंदर बुलाया
हम कमरे के अंदर चले गये.
गर्ल-मैं कंप्लेंट नही करूँगी...
मैं बीच मे बोल पड़ा
अवी-आपको इस को 5 लाख देने होंगे
रणजीतसिंघ-मिल जाएँगे
अवी-इसके माता पिता को 5 एकर ज़मीन देनी होगी.
वो गर्ल मेरी तरफ देखती रह गई.
रणजीतसिंघ-वो भी मिल जाएगी
अवी-इस की शादी कराने की ज़िम्मेदारी आपकी
रणजीतसिंघ-कुछ सोचते हुए, ये जहाँ रहती है वहाँ हमारी फॅक्टरी है, वहाँ के आसिटेंट मनेजर के साथ इस लड़की की शादी करा दूँगा.
अवी-वो मान जाएगा.
रणजीतसिंघ-वो अनाथ है, उसकी पढ़ाई ,और उसका सारा खर्च मेरे पिताजी ने किया था. वो हमारी बात मान जाएगा.
अवी-और कुछ
गर्ल का बाप-शुक्रिया बेटे, हमे पैसो से ज़्यादा इसकी शादी की चिंता हो रही थी. ये सब हो जाने के बाद इसके साथ शादी कौन करता. तुम ने हमारी सब से बड़ी मुश्किल हल कर दी.
रणजीतसिंघ-आप जाकर इनस्पेक्टर को बता दो
उसके माता पिता ,और रणजीतसिंघ इनस्पेक्टर के पास चले गये
गर्ल-तुम्हें तुम्हारी बात याद है ना
अवी-तुम टेन्षन मत लो ,कुवरसिंघ को सज़ा मैं दूँगा.
गर्ल-पर मुझे कैसे पता चलेगा उसे सज़ा मिली है
अवी-उसे जो सज़ा मिलेगी उसकी रेकॉर्डिंग करके तुम्हें दिखाउन्गा.
गर्ल-जब तक तुम उसे सज़ा नही दोगे तब तक मैं यही रुकूंगी.
अवी-ये ठीक रहेगा.
हम भी कमरे से बाहर आ गये.
रणजीतसिंघ ने इनस्पेक्टर को 1 लाख रुपये दिए.
उनको 5 लाख रुपये जो रणजीतसिंघ सेटल्मेंट करने लाया था वो उस के पिता को दे दिए.
वो अपने माता पिता के साथ चली गई.
अवी-अच्छा ,मैं चलता हूँ.
रणजीतसिंघ-तुम कहाँ जा रहे हो ,तुम मेरे साथ फार्म हाउस पर चलो तुम से बात करनी है
मेरे मना करने के बाद भी रणजीतसिंघ मुझे अपने साथ फार्महाउस पर ले गया.
फार्महाउस हवेली जैसा बनाया था.
रणजीतसिंघ मुझे अंदर ले गया. और नौकरानी को शराब लाने को कहा.
वो किसी भी तरह से नौकरानी नही लग रही थी.
नौकरानी शराब लेकर आ गई. और ग्लास मे शराब डालने लगी.
अवी-मैं नही पीता
रणजीतसिंघ-आज तुम ने मेरी मदद की है, हमारी इज़्ज़त बचाई है ,जश्न तो बनता है
अवी-पार्टी फिर कभी करेंगे. मैं आज जूस पीऊंगा.(मैं पार्टी कैसे कर सकता था, जिस दिन कुवरसिंघ को सज़ा दूँगा उसके बाद पार्टी करूँगा)
रणजीतसिंघ-इसके लिए कोल्ड्ड्रिंक लेकर आ जाओ .और म्यूज़िक लगाओ
रणजीतसिंघ ने टॉप टू बॉटम एक सीप मे पूरा ग्लास ख़तम कर दिया.
मैं कोल्ड ड्रिंक पीने लगा.
उस नौकरानी ने म्यूज़िक लगाया और रणजीतसिंघ के लिए एक और ग्लास बनाया और नाचने लगी.
रणजीतसिंघ ने फिर से एक सीप मे ग्लास ख़तम कर दिया
रणजीतसिंघ-देखो ,कैसे नाच रही है. पता है ये कओन है
अवी-कौन है
रणजीतसिंघ-रंडी है, इसको धोके से रंडी बनाया जा रहा था पर जब ये बात मुझे पता चली तो मैं ने इसको वहाँ से खरीद कर उस दलदल से बाहर निकाला. मैं ने सही समय पर उसको वहाँ से निकाल लिया.पर ये अपने घर जाने की बजाय यहाँ मेरे पास रहने की ज़िद्द करने लगी. और मैं ने रख लिया. यहाँ पर ये रानी की तरह रहती है. अपनी मर्ज़ी की मालिक है. मैं ने आज तक इसको हाथ नही लगाया.अगर मैं इसकी चुदाई करूँगा तो ये मना नही करेगी. पता है ये सब मैं तुम्हें क्यू बता रहा हू
अवी-क्यू बता रहे हो
रणजीतसिंघ-इस लिए कि अगर प्यार से काम होता है तो ज़बरदस्ती करने की ज़रूरत क्या है. मैं ने कितनो पे अहसान किए है मुझे पता नही .अगर मैं ने किसी को कहा तो कोई मना नही करेंगी. पर ज़बरदस्ती करने की ज़रूरत क्या है.
अवी-मैं आप की बात से सहमत हू
रणजीतसिंघ-मैं सब पे अहसान करता हूँ और तुम ने आज मुझ पर अहसान किया. हमारी इज़्ज़त बचाई है.
अवी-मैं ने सिर्फ़ दोस्ती निभाई है
रणजीतसिंघ-एक तुम हो और एक वो मेरा कमीना भाई कुवरसिंघ है.हमारे परिवार पर कलंक है.
अवी-फिर भी आप का भाई है
रणजीतसिंघ-भाई नही मेरी जान का दुश्मन है
अवी-जान का दुश्मन
और एक ग्लास खाली किया.
रणजीतसिंघ-2 बार मेरी जान लेने की कोशिस की उसने. वो तो अच्छा हुआ एक बार मेरी किस्मत अच्छी थी. और दूसरी बार मेरी बीवी ने जान बचाई
अवी-ये बात बड़े ठाकुर को पता है
रणजीतसिंघ-हाँ, इसी लिए मेले का काम मुझे दिया है
अवी-पर कुवरसिंघ ने ऐसा क्यू किया
रणजीतसिंघ-पूरी प्रॉपर्टी पे क़ब्ज़ा करना चाहता है.मैं तो तीन हिस्से करना चाहता था. पर वो है कि पूरी प्रॉपर्टी का मालिक बन ना चाहता है
अवी-तो आप क्यू ना उसे रास्ते से हटा देते है
रणजीतसिंघ-मैं ने ऐसा किया तो कुवर और मुझ मे क्या फरक रहेगा.
अवी-पर मुझे लगता है ,प्रॉपर्टी आप को मिलनी चाहिए( ठाकुर कुवरसिंघ को पैसे नही देते इसी लिए मोना के मालिक को ब्लॅकमेल कर रहा है)
रणजीतसिंघ-मुझे आधी भी मिली तो मैं खुश हो जाउन्गा.
और रणजीतसिंघ ने नौकरानी को मेरे पास बैठने को कहा.
वो मेरे पास आकर बैठ गई. और मेरे लंड को कपड़ो के उपर से सहलाने लगी.
रणजीतसिंघ-एक बात मेरी समझ मे नही आई कि तुम ने उस लड़की को समझाया कैसे
अवी-(क्या कहूँ) शादी के नाम से मान गई
रणजीतसिंघ-मुझे भी शादी की बात करनी चाहिए थी. तुम ने मुझ पर ,मेरी फॅमिली पर अहसान किया. हमारी इज़्ज़त
मैं ने उस नौकरानी का हाथ अलग कर दिया.
रणजीतसिंघ-एंजाय करो इस के साथ , ये अभी तक वर्जिन है, इसके साथ कुछ नही हुआ. मैं ने कुछ होने से पहले उसे बचा लिया था.
अवी-आज नही किसी और दिन
रणजीतसिंघ-कर लो ,बाद में और मिलेंगी.
मेरा मूड नही था. एक तो उस लड़की के साथ ये सब हुआ. और मेले मे जाने का समय हो रहा था.
अवी-आज नही फिर कभी
रणजीतसिंघ-तुम सच मे अजीब हो,सामने एक वर्जिन लड़की है और तुम हो कि मना कर रहे हो
अवी-मैं ऐसा ही हूँ
रणजीतसिंघ-मुझे तो लग रहा है कि कल मैं ने जिसे भेजा था उसके साथ किया या मना करते रहे
अवी-उसके साथ किया पर वो तो वर्जिन नही थी.
रणजीतसिंघ-तुम ने कहा था ना कि तुम पहली बार कर रहे हो इस लिए एक्सपीरियंस वाली को भेजी थी.आज वर्जिन ,इसे अपने साथ लेकर जाओ
अवी-ये तो मेरा जश्न है .इसकी सील मैं तोड़ूँगा पर अभी नही,और ये गिफ्ट है.और आज रात नही कल भेज ना. पर इसको नही.
रणजीतसिंघ-ठीक है किसी और को भेजूँगा. और ये तुम्हारी अमानत रहेगी मेरे पास. इसकी सील तुम तोड़ना जब तुम चाहो
और रणजीतसिंघ शराब पीने लगा.
वो नौकरानी फिर से मेरे लंड को सहलाने लगी.
अवी-ये ऐसे नही मानेगी.
रणजीतसिंघ-मना लो
अवी-तुम्हारा नाम क्या है
विधया-विद्या
अवी-तुम इतनी उतावली क्यूँ हो
विधया- तुम ने ठाकुर साब की मदद की ,मतलब मेरी मदद की, और ठाकुर साब ने कहा कि मैं तुम्हारी हूँ,तो आज से मुझ पर तुम्हारा हक है.
अवी-तुम ठाकुर की हर बात मानती हो
विधया-हाँ
अवी-क्यू?
विधया-ठाकुर साब ने मुझे रंडी बन ने से बचाया,मेरी जान बचाई है.
अवी-तुम्हारा घर कहाँ है
विधया-मैं अनाथ हू,मेरी माँ 3 महीने पहले मर गई.उसके बाद एक लड़के ने मेरा फ़ायदा उठाकर मुझे बेच दिया. वो अच्छा हुआ ठाकुर साब ने मुझे बचा लिया.अब मेरा सब कुछ ठाकुर साब का है और ठाकुर साब ने कहा कि मैं तुम्हारी हू तो, अब मेरा सब कुछ तुम्हारा है.
अवी-मेरे साथ मेरे घर चलोगि.
विधया-जहाँ ले जाओगे वहाँ चलूंगी.
अवी-मैं हमेशा के लिए कह रहा हूँ,
विधया-ठाकुर साब से पूछ लो.
अवी-रणजीतसिंघ
रणजीतसिंघ-हाँ बोलो
अवी-विद्या को मैं हमेशा के लिए अपने घर लेकर जाना चाहता हूँ
रणजीतसिंघ-तुम ने मेरी मदद की. विद्या को अपना गिफ्ट समझो.आज से विद्या पर सिर्फ़ तुम्हारा हक होगा. मैं भी इस से दूर रहूँगा. विद्या तुम जितनी हमारी सेवा और मदद और हमारी बात मानती थी आज से अवी की माना करो.जाओ विद्या समान पॅक करो.
अवी-विद्या मैं तुम पर फ़ैसला छोड़ता हूँ तुम चलना चाहोगी मेरे साथ
विद्या-हाँ, मुझे एक घर चाहिए था वो मुझे मिल गया.
अवी-जाओ समान पॅक करो
विद्या समान पॅक करने चली गई.
रणजीतसिंघ-विद्या के साथ क्या करोगे
अवी-चाची की मदद करने के लिए कोई चाहिए ना. रति है घर का काम करने के लिए पर बच्चों और चाची का ख़याल रखने के कोई तो चाहिए.( वैसे उसे देख कर पता नही मेरे मुँह से घर लेकर जाने की बात कैसे निकली. रति की शादी हो जाएगी. उसके बाद पार्मेनेंट चाची की मदद करने के लिए कोई चाहिए ना, ये अनाथ है ,यहाँ रहेंगी तो चार दीवारो मे क़ैद रहेंगी. मेरे साथ रहेंगी तो इसको नया घर मिलेगा, उसके लिए अच्छा होगा और मेरे लिए भी. और इस से रणजीतसिंघ के बारे मे पता भी कर सकता हू.)
रणजीतसिंघ-तुम अजीब हो, चलो कुछ काम की बात करते है
फिर मैं रणजीतसिंघ के साथ बाते करता गया.
विद्या ने बहुत समय लिया समान पॅक करने के लिए.
रणजीतसिंघ-विद्या अवी आज से तुम्हारा मालिक है.वो जो कहेंगा करना. हमारी नाक मत काट देना
विधया-आप बेफिकर रहिए, मेरी तरफ से कोई शिकायत नही होगी.
रणजीतसिंघ-खुश रहो.आज से तुम हमारी बात नही मनोगी बस अवी जो कहे वो करना ,
विद्या-जी,
फार्महाउस पर बहुत समय बर्बाद हुआ, शाम के 6.00 बज रहे थे. घर जाकर मेरी खैर नही होगी.
मैं विद्या को लेकर घर की तरफ निकल पड़ा.
रणजीतसिंघ उसके कमरे से बाहर निकलने का इंतज़ार कर रहा था.
उसके बाहर आने के बजाय उसका बाप बाहर आ गया. मुझे और रणजीतसिंघ को अंदर बुलाया
हम कमरे के अंदर चले गये.
गर्ल-मैं कंप्लेंट नही करूँगी...
मैं बीच मे बोल पड़ा
अवी-आपको इस को 5 लाख देने होंगे
रणजीतसिंघ-मिल जाएँगे
अवी-इसके माता पिता को 5 एकर ज़मीन देनी होगी.
वो गर्ल मेरी तरफ देखती रह गई.
रणजीतसिंघ-वो भी मिल जाएगी
अवी-इस की शादी कराने की ज़िम्मेदारी आपकी
रणजीतसिंघ-कुछ सोचते हुए, ये जहाँ रहती है वहाँ हमारी फॅक्टरी है, वहाँ के आसिटेंट मनेजर के साथ इस लड़की की शादी करा दूँगा.
अवी-वो मान जाएगा.
रणजीतसिंघ-वो अनाथ है, उसकी पढ़ाई ,और उसका सारा खर्च मेरे पिताजी ने किया था. वो हमारी बात मान जाएगा.
अवी-और कुछ
गर्ल का बाप-शुक्रिया बेटे, हमे पैसो से ज़्यादा इसकी शादी की चिंता हो रही थी. ये सब हो जाने के बाद इसके साथ शादी कौन करता. तुम ने हमारी सब से बड़ी मुश्किल हल कर दी.
रणजीतसिंघ-आप जाकर इनस्पेक्टर को बता दो
उसके माता पिता ,और रणजीतसिंघ इनस्पेक्टर के पास चले गये
गर्ल-तुम्हें तुम्हारी बात याद है ना
अवी-तुम टेन्षन मत लो ,कुवरसिंघ को सज़ा मैं दूँगा.
गर्ल-पर मुझे कैसे पता चलेगा उसे सज़ा मिली है
अवी-उसे जो सज़ा मिलेगी उसकी रेकॉर्डिंग करके तुम्हें दिखाउन्गा.
गर्ल-जब तक तुम उसे सज़ा नही दोगे तब तक मैं यही रुकूंगी.
अवी-ये ठीक रहेगा.
हम भी कमरे से बाहर आ गये.
रणजीतसिंघ ने इनस्पेक्टर को 1 लाख रुपये दिए.
उनको 5 लाख रुपये जो रणजीतसिंघ सेटल्मेंट करने लाया था वो उस के पिता को दे दिए.
वो अपने माता पिता के साथ चली गई.
अवी-अच्छा ,मैं चलता हूँ.
रणजीतसिंघ-तुम कहाँ जा रहे हो ,तुम मेरे साथ फार्म हाउस पर चलो तुम से बात करनी है
मेरे मना करने के बाद भी रणजीतसिंघ मुझे अपने साथ फार्महाउस पर ले गया.
फार्महाउस हवेली जैसा बनाया था.
रणजीतसिंघ मुझे अंदर ले गया. और नौकरानी को शराब लाने को कहा.
वो किसी भी तरह से नौकरानी नही लग रही थी.
नौकरानी शराब लेकर आ गई. और ग्लास मे शराब डालने लगी.
अवी-मैं नही पीता
रणजीतसिंघ-आज तुम ने मेरी मदद की है, हमारी इज़्ज़त बचाई है ,जश्न तो बनता है
अवी-पार्टी फिर कभी करेंगे. मैं आज जूस पीऊंगा.(मैं पार्टी कैसे कर सकता था, जिस दिन कुवरसिंघ को सज़ा दूँगा उसके बाद पार्टी करूँगा)
रणजीतसिंघ-इसके लिए कोल्ड्ड्रिंक लेकर आ जाओ .और म्यूज़िक लगाओ
रणजीतसिंघ ने टॉप टू बॉटम एक सीप मे पूरा ग्लास ख़तम कर दिया.
मैं कोल्ड ड्रिंक पीने लगा.
उस नौकरानी ने म्यूज़िक लगाया और रणजीतसिंघ के लिए एक और ग्लास बनाया और नाचने लगी.
रणजीतसिंघ ने फिर से एक सीप मे ग्लास ख़तम कर दिया
रणजीतसिंघ-देखो ,कैसे नाच रही है. पता है ये कओन है
अवी-कौन है
रणजीतसिंघ-रंडी है, इसको धोके से रंडी बनाया जा रहा था पर जब ये बात मुझे पता चली तो मैं ने इसको वहाँ से खरीद कर उस दलदल से बाहर निकाला. मैं ने सही समय पर उसको वहाँ से निकाल लिया.पर ये अपने घर जाने की बजाय यहाँ मेरे पास रहने की ज़िद्द करने लगी. और मैं ने रख लिया. यहाँ पर ये रानी की तरह रहती है. अपनी मर्ज़ी की मालिक है. मैं ने आज तक इसको हाथ नही लगाया.अगर मैं इसकी चुदाई करूँगा तो ये मना नही करेगी. पता है ये सब मैं तुम्हें क्यू बता रहा हू
अवी-क्यू बता रहे हो
रणजीतसिंघ-इस लिए कि अगर प्यार से काम होता है तो ज़बरदस्ती करने की ज़रूरत क्या है. मैं ने कितनो पे अहसान किए है मुझे पता नही .अगर मैं ने किसी को कहा तो कोई मना नही करेंगी. पर ज़बरदस्ती करने की ज़रूरत क्या है.
अवी-मैं आप की बात से सहमत हू
रणजीतसिंघ-मैं सब पे अहसान करता हूँ और तुम ने आज मुझ पर अहसान किया. हमारी इज़्ज़त बचाई है.
अवी-मैं ने सिर्फ़ दोस्ती निभाई है
रणजीतसिंघ-एक तुम हो और एक वो मेरा कमीना भाई कुवरसिंघ है.हमारे परिवार पर कलंक है.
अवी-फिर भी आप का भाई है
रणजीतसिंघ-भाई नही मेरी जान का दुश्मन है
अवी-जान का दुश्मन
और एक ग्लास खाली किया.
रणजीतसिंघ-2 बार मेरी जान लेने की कोशिस की उसने. वो तो अच्छा हुआ एक बार मेरी किस्मत अच्छी थी. और दूसरी बार मेरी बीवी ने जान बचाई
अवी-ये बात बड़े ठाकुर को पता है
रणजीतसिंघ-हाँ, इसी लिए मेले का काम मुझे दिया है
अवी-पर कुवरसिंघ ने ऐसा क्यू किया
रणजीतसिंघ-पूरी प्रॉपर्टी पे क़ब्ज़ा करना चाहता है.मैं तो तीन हिस्से करना चाहता था. पर वो है कि पूरी प्रॉपर्टी का मालिक बन ना चाहता है
अवी-तो आप क्यू ना उसे रास्ते से हटा देते है
रणजीतसिंघ-मैं ने ऐसा किया तो कुवर और मुझ मे क्या फरक रहेगा.
अवी-पर मुझे लगता है ,प्रॉपर्टी आप को मिलनी चाहिए( ठाकुर कुवरसिंघ को पैसे नही देते इसी लिए मोना के मालिक को ब्लॅकमेल कर रहा है)
रणजीतसिंघ-मुझे आधी भी मिली तो मैं खुश हो जाउन्गा.
और रणजीतसिंघ ने नौकरानी को मेरे पास बैठने को कहा.
वो मेरे पास आकर बैठ गई. और मेरे लंड को कपड़ो के उपर से सहलाने लगी.
रणजीतसिंघ-एक बात मेरी समझ मे नही आई कि तुम ने उस लड़की को समझाया कैसे
अवी-(क्या कहूँ) शादी के नाम से मान गई
रणजीतसिंघ-मुझे भी शादी की बात करनी चाहिए थी. तुम ने मुझ पर ,मेरी फॅमिली पर अहसान किया. हमारी इज़्ज़त
मैं ने उस नौकरानी का हाथ अलग कर दिया.
रणजीतसिंघ-एंजाय करो इस के साथ , ये अभी तक वर्जिन है, इसके साथ कुछ नही हुआ. मैं ने कुछ होने से पहले उसे बचा लिया था.
अवी-आज नही किसी और दिन
रणजीतसिंघ-कर लो ,बाद में और मिलेंगी.
मेरा मूड नही था. एक तो उस लड़की के साथ ये सब हुआ. और मेले मे जाने का समय हो रहा था.
अवी-आज नही फिर कभी
रणजीतसिंघ-तुम सच मे अजीब हो,सामने एक वर्जिन लड़की है और तुम हो कि मना कर रहे हो
अवी-मैं ऐसा ही हूँ
रणजीतसिंघ-मुझे तो लग रहा है कि कल मैं ने जिसे भेजा था उसके साथ किया या मना करते रहे
अवी-उसके साथ किया पर वो तो वर्जिन नही थी.
रणजीतसिंघ-तुम ने कहा था ना कि तुम पहली बार कर रहे हो इस लिए एक्सपीरियंस वाली को भेजी थी.आज वर्जिन ,इसे अपने साथ लेकर जाओ
अवी-ये तो मेरा जश्न है .इसकी सील मैं तोड़ूँगा पर अभी नही,और ये गिफ्ट है.और आज रात नही कल भेज ना. पर इसको नही.
रणजीतसिंघ-ठीक है किसी और को भेजूँगा. और ये तुम्हारी अमानत रहेगी मेरे पास. इसकी सील तुम तोड़ना जब तुम चाहो
और रणजीतसिंघ शराब पीने लगा.
वो नौकरानी फिर से मेरे लंड को सहलाने लगी.
अवी-ये ऐसे नही मानेगी.
रणजीतसिंघ-मना लो
अवी-तुम्हारा नाम क्या है
विधया-विद्या
अवी-तुम इतनी उतावली क्यूँ हो
विधया- तुम ने ठाकुर साब की मदद की ,मतलब मेरी मदद की, और ठाकुर साब ने कहा कि मैं तुम्हारी हूँ,तो आज से मुझ पर तुम्हारा हक है.
अवी-तुम ठाकुर की हर बात मानती हो
विधया-हाँ
अवी-क्यू?
विधया-ठाकुर साब ने मुझे रंडी बन ने से बचाया,मेरी जान बचाई है.
अवी-तुम्हारा घर कहाँ है
विधया-मैं अनाथ हू,मेरी माँ 3 महीने पहले मर गई.उसके बाद एक लड़के ने मेरा फ़ायदा उठाकर मुझे बेच दिया. वो अच्छा हुआ ठाकुर साब ने मुझे बचा लिया.अब मेरा सब कुछ ठाकुर साब का है और ठाकुर साब ने कहा कि मैं तुम्हारी हू तो, अब मेरा सब कुछ तुम्हारा है.
अवी-मेरे साथ मेरे घर चलोगि.
विधया-जहाँ ले जाओगे वहाँ चलूंगी.
अवी-मैं हमेशा के लिए कह रहा हूँ,
विधया-ठाकुर साब से पूछ लो.
अवी-रणजीतसिंघ
रणजीतसिंघ-हाँ बोलो
अवी-विद्या को मैं हमेशा के लिए अपने घर लेकर जाना चाहता हूँ
रणजीतसिंघ-तुम ने मेरी मदद की. विद्या को अपना गिफ्ट समझो.आज से विद्या पर सिर्फ़ तुम्हारा हक होगा. मैं भी इस से दूर रहूँगा. विद्या तुम जितनी हमारी सेवा और मदद और हमारी बात मानती थी आज से अवी की माना करो.जाओ विद्या समान पॅक करो.
अवी-विद्या मैं तुम पर फ़ैसला छोड़ता हूँ तुम चलना चाहोगी मेरे साथ
विद्या-हाँ, मुझे एक घर चाहिए था वो मुझे मिल गया.
अवी-जाओ समान पॅक करो
विद्या समान पॅक करने चली गई.
रणजीतसिंघ-विद्या के साथ क्या करोगे
अवी-चाची की मदद करने के लिए कोई चाहिए ना. रति है घर का काम करने के लिए पर बच्चों और चाची का ख़याल रखने के कोई तो चाहिए.( वैसे उसे देख कर पता नही मेरे मुँह से घर लेकर जाने की बात कैसे निकली. रति की शादी हो जाएगी. उसके बाद पार्मेनेंट चाची की मदद करने के लिए कोई चाहिए ना, ये अनाथ है ,यहाँ रहेंगी तो चार दीवारो मे क़ैद रहेंगी. मेरे साथ रहेंगी तो इसको नया घर मिलेगा, उसके लिए अच्छा होगा और मेरे लिए भी. और इस से रणजीतसिंघ के बारे मे पता भी कर सकता हू.)
रणजीतसिंघ-तुम अजीब हो, चलो कुछ काम की बात करते है
फिर मैं रणजीतसिंघ के साथ बाते करता गया.
विद्या ने बहुत समय लिया समान पॅक करने के लिए.
रणजीतसिंघ-विद्या अवी आज से तुम्हारा मालिक है.वो जो कहेंगा करना. हमारी नाक मत काट देना
विधया-आप बेफिकर रहिए, मेरी तरफ से कोई शिकायत नही होगी.
रणजीतसिंघ-खुश रहो.आज से तुम हमारी बात नही मनोगी बस अवी जो कहे वो करना ,
विद्या-जी,
फार्महाउस पर बहुत समय बर्बाद हुआ, शाम के 6.00 बज रहे थे. घर जाकर मेरी खैर नही होगी.
मैं विद्या को लेकर घर की तरफ निकल पड़ा.