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मैं और मेरा परिवार

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586

मोना को आगे क्या करना है वो बता कर मैं अपने काम मे लग गया.

मैं खेत मे आकर सविता को ढूँढने लगा.

सविता अपनी फॅमिली के साथ दर्शन करके आ गयी थी.

लेकिन एक बात मैं ने नोट की ,सविता खुश नही दिख रही थी.

कल उसने कुवरसिंघ के साथ चुदाई की फिर भी वो खुश नही थी.

लगता है कल कुवरसिंघ ने अपनी मन मानी की है.

सविता जिस तरह चल रही है उस से लग रहा है कि कल कुवरसिंघ ने उसकी गंद नही मारी.

हां, चद्दर पे खून लगा हुआ नही था.

ये भी तो हो सकता है क़ि सविता अपनी गंद पहले मरवा चुकी है.

हो तो सकता है,पर कल जिस तरह कुवरसिंघ को किस करते हुए अपनी गंद दबाने को कहा उस से तो नही लग रहा है

चलो मान लेते है कि सविता पहले गंद मरवा चुकी है, फिर भी कुवरसिंघ के साथ चुदाई करती तो लंगड़ा कर ज़रूर चलती.

कुवरसिंघ को जो पसंद है वही किया उसने, सविता की कल सिर्फ़ चूत मारी होगी.

लो नाम लिया और शैतान आ गया.

कुवरसिंघ सविता को देखने आ गया.

कुवरसिंघ सविता को इशारा कर रहा था पर सविता कुवरसिंघ को भाव नही दे रही थी.

लगता है सविता कुवरसिंघ पर बहुत ज़्यादा नाराज़ है.

पर कुवरसिंघ सविता को मना लेंगा.लेकिन थोड़ा टाइम लगेगा.

मैं तब तक के लिए आम के बगीचे मे चला गया.

मैं ने अपने मोबाइल से सिम कार्ड निकाल लिया. और जहाँ पर कल कुवरसिंघ और सविता किस कर रहे थे वहाँ पर मोबाइल पे वाय्स रेकॉर्डिंग शुरू करके पेड़ के पास छुपा दिया.

अगर कुवरसिंघ ने सविता को मना लिया तो वो यही पर आ सकते है.

ये जगह दिन मे थोड़ी मस्ती करने के लिए अच्छी थी. जिस को इस के बारे मे पता था वो इस पेड़ का पूरा फ़ायदा उठा लेता था.

अगर किस्मत अच्छी होगी तो कुवरसिंघ और सविता यहाँ आ सकते है

चलो चलके देखता हूँ कि कुवरसिंघ सविता को मनाता कैसे है.

मैं आम के बगीचे से वापस खेत मे आ गया.

ये क्या सविता आम के बगीचे मे टाय्लेट का डब्बा लेकर आ रही थी.

कुवरसिंघ अपनी जगह पर नही था. शायद वो भी दूसरे तरफ से आम के बगीचे मे गया हो.

मैं सविता के रास्ते से दूर हो गया. सविता आम के बगीचे मे चली गयी.

थोड़ी देर बाद मैं वापस आम के बगीचे मे चला गया.

मैं उस्दिन वाले पेड़ के पास चला गया जहाँ से मैं दोनो को देख सकता था.

कुवरसिंघ और सविता उसी पेड़ के पास थे जहा उस्दिन वो किस कर रहे थे और आज मैं ने वहाँ पर अपना मोबाइल छुपा दिया था.

मैं उन दोनो को देखने लगा.

सविता के चेहरे पे गुस्सा था और कुवरसिंघ सविता को मना रहा था.

सविता ने कुवरसिंघ को गुस्से मे कुछ कहा और पलट गयी.

कुवरसिंघ सविता को इतनी आसानी से हाथ से जाने नही देगा.

अगर मैं कुवरसिंघ की जगह होता तो मैं भी सविता को इतनी आसानी से जाने नही देता.

सविता थी ही कमाल की, सर से लेके पैरो तक अप्सरा थी. एक बार देखो तो बस देखते रहने का मन करता है.

सविता गुस्से से कुवरसिंघ की तरफ पीठ करके खड़ी थी.

कुवरसिंघ ने अपने गले की गोल्ड की चैन निकाल कर सविता के गले मे डाल दी.

कुवरसिंघ को लगा कि इस से सविता मान जाएगी पर ऐसा नही हुआ.

सविता अभी भी कुवरसिंघ की तरफ पीठ करके खड़ी थी.पर मेरी तरफ उसका चेहरा था.

जब कुवरसिंघ ने उसे गोल्ड की चैन पहनाई तब सविता के चेहरे पे मुस्कान आई.

सविता गोल्ड की चैन देख कर खुश तो हो गयी पर वो इतनी जल्दी मान ने वाली नही थी.

कुवरसिंघ ने फिर वो किया जिसके बारे मे सविता सोच रही थी.

कुवरसिंघ सविता के पीछे से चिपक गया और गंद मारने जैसे धक्के मारने लगा.

कुवरसिंघ का लंड अपनी गंद पर महसूस करते सविता के चेहरे मे मुस्कान आ गयी.

सविता को जो चाहिए था वो कुवरसिंघ उसको देने को तैयार था.

सविता ने कुवरसिंघ के लंड को अपनी खूबसूरती के सामने झुका दिया.

कुवरसिंघ की जगह अगर मैं होता तो साड़ी उपर कर गंद मारता

सविता कुवरसिंघ के ऐसा करने से खुश हो गयी.

कुवरसिंघ अपने धक्के लगाता गया जैसे सच मे सविता की गंद मार रहा हो

सविता अपनी गंद पे कुवरसिंघ का लंड फील करके अपनी गंद को पीछे कर रही थी.

थोड़ी देर बाद सविता पलट गयी. और कुवरसिंघ ने उसे किस करते हुए गंद मसलना शुरू किया.

सविता ने कुवरसिंघ पे काबू पा लिया था.और वो कुवरसिंघ को अपने हाथो पर नचा सकती है. गोल्ड का नेकक्लेस माँग सकती है, पर उसे सिर्फ़ अपनी गंद मे लंड चाहिए था.

सविता वो गोल्ड की चैन वापस तो नही करेगी पर अपनी गंद मरवाकर रहेगी. अपना मज़ा लेके रहेगी.

थोड़ी देर किस करने के बाद कुवरसिंघ और सविता बातें करने लगे.

बातें करते हुए कुवरसिंघ ने अपना हाथ सविता की गंद पर रखा ,जिस से सविता खुश थी.

कुवरसिंघ सविता को मनाने मे कामयाब हो गया.

सविता कुवरसिंघ को एक और चान्स दे रही थी.

दोनो ने ,एक बीच का रास्ता निकाला होगा जिस से दोनो खुश लग रहे थे

अब बस रेकॉर्डिंग सुन लूँ तो सब पता चल जाएगा.

दोनो ने फिर से किस किया ,और फिर सविता जाने लगी तो कुवरसिंघ ने सविता की गंद पर थप्पड़ मारा.

थप्पड़ खा कर सविता अपनी गंद को मटकाते हुए चलने लगी. और वापस खेत मे चली गयी.

कुवरसिंघ भी दूसरी तरहफ़ से वापस चला गया.

मैं जल्दी से पेड़ के पास आया और अपना मोबाइल उठा लिया.

रेकॉर्डिंग चालू थी. मैं ने रेकॉर्डिंग सेव की और घर3 चला गया.

अब सुन ना है कि कुवरसिंघ और सविता के बीच मे क्या समझौता हुआ है.

क्या सविता अपनी गंद मरवाने मे कामयाब होगी.

क्या कुवरसिंघ ने सविता को अपने दोस्तो के लिए मनाया होगा

क्या आज कुवरसिंघ अपने दोस्तो को बुलाने वाला है.

क्या सविता का हाल उस गर्ल की तरह होगा ,

 


587

मैं कुवरसिंघ और सविता की रेकॉर्डिंग लेकर घर3 आ गया.

घर3 आने पर मैं ने वो रेकॉर्डिंग प्ले की

रेकॉर्डिंग के स्टार्टिंग मे कुछ नही था जिस से मैं ने रेकॉर्डिंग फॉर्वर्ड की.

कुवरसिंघ-मुझे गंद मारना पसंद नही है.

सविता-मैं ने पहले ही कहा था कि तुम मज़े लो और मुझे मज़ा दो

लगता है ज़्यादा ही फ़ॉर्वाड़ हो गयी. मैं रेकॉर्डिंग को थोड़ा पीछे किया और रेकॉर्डिंग सुन ने लगा.

सविता-क्यू बुलाया मुझे ,

कुवरसिंघ-मेरी बात तो सुनो

सविता-मैं ने कहा ना कि मुझे कुछ नही सुनना है

कुवरसिंघ-ऐसा क्या कर दिया मैं ने जो इतना गुस्सा हो रही हो.

सविता-तुम्हारी शादी हो चुकी है.मेरी शादी हो चुकी है. ऐसे मे हम ने ये रिश्ता क्यूँ बनाया

कुवरसिंघ-क्यू कि मुझे तुम पसंद हो,

सविता-साफ साफ बोलो कि मेरे साथ मस्ती करना चाहते हो

कुवरसिंघ-हाँ,

सविता-और मैं भी तुम्हारे साथ मस्ती करना चाहती हूँ.वो मस्ती जो मैं अपने पति के साथ नही की

कुवरसिंघ-कल चुदाई ही तो की हमने, क्यूँ मज़ा नही आया

सविता-मज़ा आया पर मुझे पीछे से करना था.

कुवरसिंघ-मुझे गंद मारना पसंद नही है.

सविता-मैं ने पहले ही कहा था कि तुम मज़े लो और मुझे मज़ा दो

कुवरसिंघ-कल इतनी अच्छी चुदाई से तुम्हे मज़ा नही आया.

सविता-आया पर मुझे पीछे से भी करना था. और तुम ने नही किया. अब तुम मुझे भूल जाओ

और सविता पलट गयी. सविता कुवरसिंघ की तरफ पीठ करके खड़ी हो गयी.

थोड़ी देर इधर उधर की आवाज़े आनी शुरू हुई.

कुवरसिंघ ने सविता के गले मे गोल्ड की चैन पहना दी.

फिर सविता को पीछे से चिपक कर गंद मारने जैसे धक्के मारने लगा.

मैं ने रेकॉर्डिंग फॉर्वर्ड की

कुवरसिंघ-आज पक्का तुम्हे खुश कर दूँगा.

सविता-कैसे

कुवरसिंघ-तुम जो चाहती हो वही करेंगे. आज तुम्हारी गंद मारूँगा.

सविता-वो तो मारनी पड़ेगी

कुवरसिंघ-ऐसा क्यूँ बोल रही हो

सविता-कल मेरा मूड जो ऑफ हुआ उसका क्या

कुवरसिंघ-ये गोल्ड की चैन तुम्हारी हुई.

सविता- ऐसी तो मेरे पास बहुत है

कुवरसिंघ-फिर मैं तुम्हे ऐसा नेकक्लेस दूँगा जिसे देख कर तुम खुश हो जाओगी.

सविता-नेकक्लेस का मैं क्या करूँ , मुझे मज़ा चाहिए. नेकक्लेस जैसी चीज़ो पे मैं थूकती हूँ

मान गये सविता को. वो कुवरसिंघ से कुछ भी माँग सकती थी. पर उसने ऐसा नही किया.

सविता को ऐसा सुख चाहिए जिस के सामने गोल्ड डाइमंड कुछ भी नही है.

कुवरसिंघ-तुम कुछ भी कहो, तुम्हे मैं रात मे खुश करूँगा.नेकक्लेस दे कर और गंद मार कर

ये दुनिया का आठवाँ अजूबा

सविता-नेकक्लेस अपने पास रखो मुझे जो चाहिए वो दो

कुवरसिंघ-कहा ना तुम्हारी गंद मारूँगा.पर एक बार चूत मारनी पड़ेगी.

सविता-वो तो करना ही होगा. एक बार मेरा पानी निकाल कर फिर गंद...फिर मुझे खुश करना

कुवरसिंघ-जैसा तुम ने कहा है वैसा ही होगा. तुम कहो तो ज़िंदगी भर तुम्हारी गंद मारूँगा.

सविता-मज़ाक नही

कुवरसिंघ-मैं सच कह रहा हूँ ,मैं ज़िंदगी भर तुम्हारी गंद मार सकता हूँ

सविता-वो कैसे

कुवरसिंघ-अपने पति को छोड़ दो और मेरे साथ शादी करो

सविता-पति को छोड़ दूं ये हो नही सकता.

कुवरसिंघ-क्यूँ?

सविता-मेरी बहन की शादी मेरे पति के छोटे भाई से होने वाली है. और मैं अपने लिए 3 ज़िंदगी बरबाद नही करूँगी,

कुवरसिंघ-मैं तुम्हारी बहन की शादी भी करवा दूँगा.

सविता-मैं ने कहा ना कि नही तो नही, मैं अपने पति के साथ खुश हूँ, और ज़्यादा खुशी के लिए तुम्हारे साथ चुदाई कर रही हूँ,अगर मेरा पति मेरी गंद मारता तो तुम्हारी ज़रूरत भी नही पड़ती.

कुवरसिंघ-सोच लो

सविता-इसमे सोचना क्या है. मैं अपने पति को पसंद करती हूँ, मेरी बहन की लव मॅरेज है.क्या समझे

कुवरसिंघ-ठकुराइन बनाउन्गा तुम्हे

सविता-मैं पैसो की परवाह नही करती.

सविता की सुंदरता ने जितना मेरा दिल जीता था उस से ज़्यादा उसकी सोच ने जीता.

कुवरसिंघ-चलो वो बाद मे देखते हैं

सविता-बाद मे नही अभी ये बात ख़तम करो

कुवरसिंघ-ख़तम कर दी, आज रात हम मज़ा करेंगे

सविता-अगर आज तुम ने मैने जैसा कहा वैसा नही किया तो समझ जाना कल से मैं किसी और को ढूँढ लूँगी.

मेरा नंबर लग सकता है.

कुवरसिंघ-तुम्हे आज मैं इतना मज़ा दूँगा और इतना खुश करूँगा जिसके बारे मे तुम ने सोचा नही होगा.

सविता-वो तो रात मे पता चलेगा.

और फिर से किस करने की आवाज़ सुनाई दी

कुवरसिंघ-आज रात उसी समय पर

सविता-तुम कहाँ मिलोगे

कुवरसिंघ-कल जैसे गये थे वैसे ही जाएँगे.

सविता-उस खंडहर मे डर लगता है

कुवरसिंघ-मैं हूँ ना, वो सेफ जगह है.

सविता-मुझे देर हो रही ही,मैं चलती हूँ ,रात मे मिलेंगे

और एक थप्पड़ की आवाज़ सुनाई दी. कुवरसिंघ ने सविता की गंद पर थप्पड़ मारा.और रेकॉर्डिंग ख़तम हो गयी.

कुवरसिंघ ने अपने दोस्तो के बारे मे बात नही की.

मतलब आज कुवरसिंघ अकेले सविता का मज़ा लेगा.

ये मेरे लिए अच्छा था.

पर बाद मे किसी दिन कुवरसिंघ सविता को अपने दोस्तो से ज़रूर चुदवाएगा.

मुझे आज ही कुछ करना होगा. क्या पता कल कुवरसिंघ के साथ उसके दोस्त भी रह सकते है.

मैं ने रेकॉर्डिंग सेव कर ली. और रात के बारे मे सोचने लगा.

अगर रात मे मुझे जागना था तो ,कल जैसा आज ना हो इस लिए मैं अभी सो जाता हूँ.

मैं ने रणजीतसिंघ को कॉल किया और सो गया.

 
588

दोपहर मे 3 घंटे सोने के बाद मैं खुद को फ्रेश महसूस करने लगा.

मेला देखने का टाइम भी हो गया था.लेकिन आज मेले मे जाना पासिबल नही था. मुझे रात के लिए कुछ समान खरीदना था

मैं फ्रेश होकर घर चला गया.

घर पर सब मेरा इंतज़ार कर रहे थे.

स्वेता दीदी-अवी कहाँ थे तुम,

सीतल -हाँ आज देर कर दी.चलो जल्दी मेले मे जाना है

अवी-आज मेले मे नही जाएँगे.

राज-मुझे मेले मे जाना है

कविता-राज रूको, भैया मेले मे नही तो फिर कहाँ जाएँगे

लीना-मूवी देखने

अवी-मुझे एक ज़रूरी काम से शहर जाना है.इस लिए आज मेले मे नही जा सकते,

कविता-भैया ये चीटिंग है. मैं ने पढ़ाई की है ,मुझे मेले मे जाना है

पूनम दीदी-कविता रूको एक मिनिट,

स्वेता दीदी-शहर मे किस लिए जा रहे हो

अवी-रणजीतसिंघ के साथ मंदिर का समान लेना है. आज मुझे माफ़ कर दो, कल पक्का मेले मे जाएँगे.

स्वेता दीदी-राज कविता लीना, हम आज रात भर मूवी देखेंगे, मेरे पास नयी मूवी है.

कविता-नयी मूवी, लीना तुम क्या कहती हो

लीना-भैया काम मे बिज़ी है ,तो आज मूवी से काम चलाते है

राज को मेले मे जाना था

अवी-राज तुम्हारे लिए एक वीडियो गेम लाकर दूँगा

राज-फिर ठीक है, वरना मैं

स्वेता दीदी ने राज के गाल पकड़ लिए.

स्वेता दीदी-वीडियो गेम चाहिए,

चलो ,बहनों ने मुझे आज की छुट्टी दे दी.

अवी-दीदी ,थॅंक्स आपके बिना राज को मनाना मुश्किल होता

स्वेता दीदी-थॅंक्स के काम नही चलेगा. शहर से आते समय चॉक्लेट ले आना,

अवी-सब के लिए ले आउन्गा.

फिर मैं बाइक लेकर शहर चला गया.

और ज़रूरत का समान ले लिया.

फिर मैं ने सब के लिए चॉक्लेट और राज के लिए वीडियो गेम खरीद लिया.

समान खरीदने के बाद मैं पहले घर3 जाकर अपना समान रख दिया और बाद मे राज को वीडियो गेम देने चला गया.

सब स्वेता दीदी के कमरे मे बैठ कर टीवी देख रहे थे.स्वेता दीदी और सीतल दीदी फोन पर बात कर रही थी.

राज की नज़र पहले मुझे पर पड़ी.

राज-भैया मेरा वीडियो गेम

मैं ने राज को वीडियो गेम दे दिया. राज वीडियो गेम देख कर खुश हो गया.

लीना-भैया हमारे लिए कुछ नही लाए

अवी-मेरी चोकॉलेटी बहन के लिए चॉक्लेट लाया हूँ.

चॉक्लेट का नाम सुनते कविता और लीना के साथ सब खुश हो गये.

मेरे आते ही स्वेता दीदी और सीतल दीदी भी चॉक्लेट का मज़ा उठाने के लिए आ गयी.

चॉक्लेट निकलते ही मूवी पर किसी का ध्यान नही रहा.

चॉक्लेट के साथ उंगली ना खा जाए ऐसी हालत हो गयी थी.

अवी-अरे रानी तुम्हारे हाथो पे क्या लगा है.

सब रानी की तरफ देखने लगे.रानी भी अपने हाथ को देखने लगी.

और इसी बीच मे मैं ने रानी के हाथ मे जो चॉक्लेट था उसे खा लिया.

मेरे ऐसा करते पहले सब शॉक्ड हो गये फिर सब हँसने लगे.

रानी के कुछ करने से पहले मैं वहाँ से उठ कर स्वेता दीदी के पास जाकर बैठ गया.

रानी की चॉक्लेट कुछ ज़्यादा ही मीठी थी.

सब को लगा कि मैं रानी के साथ मज़ाक कर रहा हूँ

पर इसी का फ़ायदा उठाते हुए मैं ने रानी की बाइट की हुई चॉक्लेट खा ली.

रानी को मेरा ऐसा करना अच्छा लगा . सब के सामने सब की आँखो से सामने रानी को प्यार करने से मुझे ऐसा लगा कि मैं ने दुनिया जीत ली हो.

मेरे ऐसा करते कविता ने चान्स देख कर लीना की चॉक्लेट खा ली.

जिस से चॉक्लेट खाते हुए सब मस्ती करने का मज़ा लेने लगे.

किसी के नोस पे चॉक्लेट लगी थी, तो किसी के गाल पर चॉक्लेट लगी थी.

रानी तो मेरी तरफ देख कर अपने होंटो पे लगी हुई चॉक्लेट को जीभ से चाट रही थी.

रानी मुझे चिड़ा रही थी कि मैं ने उसका चॉक्लेट खा लिया है. पर उसके होंटो पे लगी हुई चॉक्लेट वो मुझे नही देगी.

मैं ने रानी को इशारा करके बाहर बुलाया पर उसने आने से मना किया

रानी का बार बार बहाना करके बाहर जाना ठीक नही था. किसी को शक हो सकता था

मैं ने सबको चॉक्लेट एंजाय करने दी और वहाँ से अपने घर जाने लगा.

फिर घर जाकर चाची के साथ खाना खा लिया और अपने काम मे लग गया.

पहले तो मैं घर3 चला गया.

मैं ने जो एक बॅग खरीदी थी उसमे मैं ने अपना एक ड्रेस डाल दिया और अपने शूज भी रख दिए.साथ मे एक बॉटल मे पेट्रोल डाल दिया. पेट्रोल लिया है तो माचिस भी ले ली. टॉर्च ,कॅमरा, पानी की बॉटल ,और कुछ ज़रूरत का समान रख दिया.

और बॅग को अपने साथ लेकर आम के बगीचे मे चला गया.

बॅग को मैं ने मेरी आम के बगीचे मे चुदाई वाली जगह पर छुपा दिया. और साथ मे एक छोटा सा खड्डा बना दिया.

फिर मैं जंगल मे जाकर खंडहर मे जो कुवरसिंघ ने चुदाई के लिए जगह बनाई वहाँ पर कॅमरा सेट किया.

कॅमरा अभी स्टार्ट नही किया था, साथ मे मैं ने अपने मोबाइल से सिम निकाल लिया और मोबाइल को भी खंडहर मे छुपा दिया.

फिर खंडहर मे ज़रूरत के हिसाब से कुछ चेंज किए.

सब सेट करने के बाद मैं वापस खेत मे आ गया.

और कुवरसिंघ के आने का इंतज़ार करने लगा.

अभी तो बहुत टाइम था ,और मुझे भी अपनी तैयारी करनी थी.लेकिन इतनी जल्दी कुछ करना ठीक नही होगा.

मैं रात के 10.00 बजने का इंतज़ार करने लगा.

 
589

मैं 10.00पीएम बजने का इंतज़ार करने लगा.

समय होते ही मैं ने मोना के पति के कपड़े पहन लिए. कल भी यही कपड़े पहने थे

सर पर मंकी कॅप , पैरो मे सिंपल सी चप्पल, फिर ठंड के लिए एक श्वाल अपने शरीर पर ले ली.और मूह मे सुपारी रख ली ताकि आवाज़ बदल जाए

जेब मे मैं ने एक टॉर्च रख दिया. और घर3 से बाहर आकर मैं कल वाली जगह पर बैठ गया.

आग जलाकर लोग ठंड से बचते हुए बातें कर रहे थे. मैं भी वही बैठ कर सविता की फॅमिली पर नज़र रखने लगा.

सविता की फॅमिली खाना खा रही थी. सब अपने समय पर हो रहा था.

खाना खाने के बाद सविता की फॅमिली मे जो मर्द थे वो घूमते हुए बातें करने लगे.

खाना पचाने के बाद सविता की फॅमिली बाकी के लोगो की तरह सोने की तैयारी करने लगे.

एक तरफ सब मर्द सोएंगे और दूसरी तरफ सब औरते सोने वाली थी.

सविता सब से आख़िर मे सोती थी. इस से उसे उठ कर जाने मे प्राब्लम नही होती थी.

सविता की फॅमिली के सोते ही मैं वहाँ से उठ कर आम के बगीचे मे चला गया.

आम के भागीचे से मैं खंडहर मे चला गया. खंडहर के पास छुप कर कुवरसिंघ और सविता के आने का इंतज़ार करने लगा.

खेत मे इंतज़ार करने से ज़्यादा ज़रूरी यहाँ खंडहर मे बैठ कर इंतज़ार करना था

उनको आना तो यही था,रास्ता कोई भी सेलेक्ट कर ले पर आएँगे तो यही पर.

थोड़ी देर इंतज़ार करने के बाद मुझे खंडहर की तरफ कोई आता हुआ दिखने लगा.

टॉर्च की लाइट मे 2 लोग इधर ही आ रहे थे.

मैं एक पेड़ के पीछे छुप गया और उनके यहाँ से गुजरने का इंतज़ार करने लगा.

वो मेरे पास से गुज़रते ही मैं ने दोनो को पहचान लिया.ये कुवरसिंघ और सविता है.

दोनो के आते ही मैं वहाँ से जाने लगा.

कुवरसिंघ और सविता के आते ही मैं वापस खेत मे आ गया.

सविता का पति अपनी फॅमिली के साथ आराम से सो रहा था.

मैं ने एक पत्थर उठा कर सविता के पास जो सो रही थी उसे फेक कर मारा.

कुम्भकरण की नानी थी वो ,ज़रा सा भी नही हिली वो

मैं ने फिर एक पत्थर फेक कर मारा. इस बार पत्थर उसके मूह पे लगा. उसकी नींद खुल गयी.

वो इधर उधर देखने लगी. अंधेरे की वजह से उसे कोई नही दिखा.

वो खड़ी हो गयी. और फिर से देखने लगी. उसके उठने से सविता का ब्लंकेट सरक गया.

सविता ने सिर्फ़ एक पिल्लो अपनी जगह पर रखा था. अगर कोई उस पिल्लो को देखता तो समझता कि सविता अपने सीने से लगाकर सोने के लिए पिल्लो को ऐसा रखा होगा.

जब वो फिर से सोने वाली थी कि उसकी नज़र सविता के बिस्तर पर गयी.

सविता तो यहाँ है नही.

उसके इतना करने तक मैं ने सविता की फॅमिली के मर्द जहाँ सो रहे थे उनपर 2 3 पत्थर फेक दिए.इनकी नींद खुल गयी.

वो औरत सविता को देखने लगी. पहले उसने सभी फॅमिली औरतों को देखा.

उसे लगा होगा कि सविता टाय्लेट को गयी होगी. पर रात मे अकेले कैसे जाएँगी. इस लिए उस औरत ने सब को देख लिया.

सभी तो यही पर है.फिर सविता किधर गयी. वो सविता को इधर उधर देखने लगी.

उसके ऐसा करने तक मैं ने जो 2 3 पत्थर सविता के पति की तरफ फेके थे उनमे से 2 लोग उठ गये.

आदमी2-क्या हुआ माँ,रात मे किसे ढूँढ रही हो

तो वो सविता की सास थी. सही औरत को जगाया मैं ने

सविता की सास-बेटा सविता बहू मेरे पास सो रही थी पता नही कहाँ चली गयी.

आदमी3-कहाँ जाएँगी भाभी, पेशाब करने गयी होगी.सो जाइए आप

सविता की सास-सविता पेशाब करने जाती वो भी इतनी रात को तो किसी को अपने साथ ले जाती ,अकेले थोड़ी जाती ना

आदमी2-माँ, अच्छे से देखो भाभी के साथ कोई गया हो

सविता की सास-मैं देखा है ,सब सो रहे हैं सिवाय सविता के, मुझे तो डर लग रहा है. अगर उसके साथ किसी ने कुछ ...

आदमी2-माँ आप सब को उठा कर पूछिए की भाभी को देखा है कि. और हाँ किसी और ये बात पता नही चलनी चाहिए.मैं भैया को उठाता हूँ

सविता की सास ने अपनी बाकी बहुओं को उठा लिया और सविता के बारे मे पूछने लगी.

आदमी2-भैया उठिए सविता भाभी कहीं चली गयी है,

आदमी1-सविता ,क्या कहा

सविता की फॅमिली के लोगो की नींद गायब हो गयी. सविता की फॅमिली मे 7 आदमी थे और सब भाई थे. सविता का पति आदमी1 उठ कर सविता को देखने लगा.

आदमी5-भैया भाभी जा कहाँ सकती है

आदमी1-मैं भी वही सोच रहा हूँ ,

सविता की सास-अब क्या सोचता रहेगा या कुछ करेगा भी. मुझे मेरी बहू वापस चाहिए.

आदमी1-माँ आप बाकियों के साथ यही रुकिये ,अगर सविता वापस आ गयी तो ,हम जाकर बाहर ढूँढते है.

7 भाई सविता को ढूँढने लगे.1 पति अपनी पत्नी को और 6 देवर अपनी भाभी को ढूँढने लगे.

ये सब मैं दूर से आम के बगीचे के पास खड़ा रह कर देख रहा था.

सविता का पति सविता को इधर उधर देखने लगे, पर सब लोग सो चुके थे ,वो किसे पूछता.

आदमी4-भैया, आम के बगीचे मे देखते है शायद वहाँ हो

आदमी1-मुझे भी यही लग रहा है.चलो जल्दी

सब मेरी तरफ आने लगे. मैं ज़मीन पर लेट गया ,जैसे कि मुझे किसी ने मारा हो ,और दर्द से आअहह करने लगा.

उन सब के मेरे पास आते ही मैं ज़ोर से करने लगा ताकि वो मेरी आवाज़ सुन सके

आदमी6-भैया रूको ,ये कौन दर्द से चिल्ला रहा है ,देखो ज़रा

आदमी2 ने मेरी तरफ अपनी टॉर्च घुमा दी.

आदमी2-यहाँ तो कोई दर्द से मर रहा है.

आदमी7-जाने दो इसे

आदमी1-रूको, इसे पूछते है सविता के बारे मे

सविता का पति मेरे पास आ गया.और मुझे अच्छे से बैठा दिया.

आदमी1-क्या हुआ भैया ऐसे यहाँ क्यू पड़े हो

अवी-पड़ा नही किसी ने मुझे मार कर गिराया है

आदमी1-किस ने

आदमी2-भैया भाभी के बारे मे पूछो

अवी-आप लोग कौन हो ,और किसे ढूँढ रहे हो

आदमी1-भैया मेरी पत्नी कही गायब हो गयी है, उसे ढूँढ रहे है. क्या आपने किसी को यहाँ देखा.

अवी-1 औरत को देखा है मैं ने

मेरी बात सुनते सविता के पति को आशा की किरण नज़र आई.

 


590

आदमी1-भैया मेरी पत्नी कहीं गायब हो गयी है, उसे ढूँढ रहे है. क्या आपने किसी को यहाँ देखा है.

अवी-थोड़ी देर पहले 1 औरत को देखा है मैं ने

मेरी बात सुनकर सब की आँखो मे एक चमक आ गयी.

आदमी1-कहाँ देखा जल्दी बताओ

अवी-मेरी ऐसी हालत उसकी ही वजह से हुई है

आदमी1-क्या मतलब

अवी-मैं आम के बगीचे मे सो रहा था कि

आदमी2-भैया जल्दी बताओ कि भाभी को कहाँ देखा

अवी-मैं सो रहा था कि किसी औरत के चिल्लाने की आवाज़ सुनकर मेरी नींद खुल गयी.

आदमी1-सविता चिल्ला रही थी ,

अवी-एक आदमी एक औरत के साथ ज़बरदस्ती कर रहा था.

मेरी बात सुनकर सब के पैरो के नीचे से ज़मीन खिसक गयी.

सविता का पति अपने सर पे हाथ रख बैठ गया.

आदमी2-भैया सम्भालो खुद को, हमे भाभी को बचाना होगा.

आदमी3-जल्दी बताओ आगे क्या हुआ

अवी-मैं उस औरत को बचाने चला गया. मैं ने उस औरत को उस आदमी के हाथो से छुड़ाया,पर उस आदमी का चेहरा देख कर मैं डर गया.

आदमी2-कौन था वो ,क्या तुम जानते हो उसे

अवी-वो ठाकुर का छोटा बेटा कुवरसिंघ था

आदमी6-भैया मैं ने कहा था कि वो कुवरसिंघ भाभी को घूरता रहता है. लेकिन आपने मेरी बात नही सुनी.

अवी-मैं बोलू, कुवरसिंघ को देख कर मैं डर गया और कुवरसिंघ ने मुझे मार कर गिरा दिया.

आदमी1-ज़ोर से सविता कहाँ है.

अवी-मुझे गिरता देख कर वो भाग गयी पर कुवरसिंघ ने उसे पकड़ लिया और खंडहर मे ले जाने की बात करने लगा.

आदमी1-ज़ोर से कहाँ है वो खंडहर

अवी-मुझे पता है पर मैं नही बताउन्गा

आदमी2-हम खुद ढूँढ लेंगे

अवी-7 जनम कम पड़ जाएँगे पर ढूँढ नही पाओगे.

आदमी1-भैया मैं अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता हूँ, मुझे बताओ कि वो कहाँ है कुछ ग़लत होने से बचाओ

अवी-ठीक है दिखाता हूँ, पर मेरा नाम नही आना चाहिए.

आदमी2-चलो जल्दी.

अवी-मेरे पीछे पीछे आओ

सविता के देवर पीछे और सविता का पति मेरे साथ चलने लगा.

मैं उनको आम के बगीचे मे लेकर आ गया.

अवी-कुवरसिंघ तुम्हारी पत्नी को

किसी ने कुछ नही कहा.

अवी-वहाँ जाकर तुम्हारी पत्नी मिल जाएगी पर कुवरसिंघ मिल सकता है या नही भी.

आदमी2-उसे हम कही से भी ढूँढ लेंगे

अवी-ढूँढ कर क्या करोगे

आदमी2-उसे तो

अवी-आप लोग कुवरसिंघ का कुछ नही बिगाड़ सकते

आदमी2-आज वो कुवरसिंघ मेरे हाथो मरेगा.

अवी-फिर तो तुम सब ठाकुर के हाथो से नही बचोगे.

आदमी2-उसके बाप का राज़ थोड़े है

अवी-हाँ, पूरा इलाक़ा ठाकुर का है. उसका कोई कुछ नही बिगाड़ सकता.

आदमी3-मैं तो उसे पोलीस मे दूँगा

अवी-पोलीस ठाकुर की जेब मे है

आदमी2-तुम अपनी बकवास बंद करो, और खंडहर दिखाओ बस

अवी-मुझे क्या है. मैं आपको बता रहा था कि ठाकुर की ताक़त क्या है. अगर मैं आपकी जगह होता तो

अचानक सविता का पति बोल पड़ा

आदमी1-तुम हमारी जगह होते तो

अवी-मेरे दादाजी कहते है कि थप्पड़ का जवाब थप्पड़ से देना चाहिए.

आदमी2-बकवास रास्ता है

आदमी1-क्या?

अवी-थप्पड़ का जवाब थप्पड़ से देना चाहिए, थप्पड़ मारने से बदला पूरा होता है, और आगे वाला उस थप्पड़ के बारे मे किसी को बताएगा नही.जिस से हम बच सकते है.

सविता का पति फिर चुप चाप चलने लगा.

आम का बगीचा ख़तम हो गया.

आदमी2-कहाँ है खंडहर

अवी-उस जंगल मे

सविता का एक देवर भागने लगा.

अवी-भाग कर फ़ायदा नही. जंगल बड़ा है, मेरे सिवा खंडहर ढूँढ नही पाओगे.

और मैं भी जंगल की तरफ भागने लगा.

मेरे पीछे पीछे सब जंगल की तरफ भागने लगे

जंगल के पास पहुँचते ही हमे सविता की चीख सुनाई दी.

लगता है कुवरसिंघ सविता की गंद मार रहा है.

सही समय पर मैं इन सब को यहाँ लेकर आ गया.

आदमी1-सविता

मैं ने सविता के पति के मूह पर हाथ रखा

अवी-चिल्लाना बंद करो और जल्दी चलो

मैं भागते हुए उन सब को जंगल के अंदर ले आया.

खंडहर जंगल की स्टार्टिंग मे था. जिस की वजह से खंडहर जल्दी आ गया.

खंडहर को देखते ही उनको कुछ बताने की ज़रूरत नही थी.

मैं उन सब के साथ खंडहर मे आ गया.

अंदर का नज़ारा देख कर सबकी आँखे फटी की फटी रह गयी.

खंडहर मे सविता नीचे लेटी हुई थी ,उसकी आँखो से पानी निकल रहा था.

कुवरसिंघ सविता के उपर था. उसका लंड सविता की गंद मे आधा गया हुआ था.

मतलब गंद मारना अभी शुरू हुई थी

गंद मे लंड लेने से सविता की आँखो से पानी और मूह से चीख निकल रही थी.

सविता की साड़ी पास मे पड़ी हुई थी.

पेटिकोट कमर तक उपर किया हुआ था.

कुवरसिंघ के हाथ ब्लाउस के उपर से बूब्स पर थे.

सविता पहली बार लंड अपनी गंद मे लेने से दर्द की वजह से अपने हाथो से कुवरसिंघ को अपने उपर से हटा रही थी.

सविता के पति को लग रहा होगा कि उसकी पत्नी बचने की कोशिस कर रही है.

सब जैसा सोचा था वैसा हुआ.

अब जो करना था वो सविता के पति और देवर को करना था.

 


594

अब सविता का देवर अपनी भाभी का बदला ले रहा था.

लगता है सविता सबकी चहेती है. देवर भी अपनी भाभी के लिए जान देने की बात कर रहे थे.

सविता का देवर(आदमी2) कुवरसिंघ की गंद मार रहा था.

उसका लंड सविता के पति से छोटा था पर जोश ज़्यादा था.

सब से आक्टिव देवर था सविता का, और अपने जोश और स्पीड से कुवरसिंघ की गंद मार रहा था.

कुवरसिंघ अपनी किस्मत पे रो रहा था. आज उसका दिन अच्छा गया होगा पर रात सब से भयानक जा रही थी.

जिसकी कभी कल्पना भी कुवरसिंघ ने की नही थी वो आज कुवरसिंघ के साथ हो रहा था.

पहले मार खाया और अब लंड खा रहा था.

कुवरसिंघ ने कभी नीचे गिरा हुआ फ्रूट नही खाया होगा, पर आज मिट्टी खानी पड़ी.

कुवरसिंघ को खुद पर बहुत घमंड था.कि वो जिसे चाहे उसे अपना वीर्य पिला सकता है. पर आज खुद उसे दूसरे का वीर्य पीना पड़ा.

कुवरसिंघ ने कितनी लड़कियो की आँखो से खून के आसू निकाले थे आज उसकी आँखो से खून के आसू निकल रहे थे.

उसकी गंद से खून निकल रहा था.

इन सब के बावजूद कुवरसिंघ को अपनी गंद का खून सविता के पति के लंड से चाट कर साफ करना पड़ा.

जिस खून की वजह से कुवरसिंघ इतना उछल रहा था वो खून पानी की तरह बह रहा था.

सविता का देवर बिना रुके अपनी भाभी का बदला ले रहा था.

सविता का पति मेरे पास आ गया. सविता अभी भी बेहोश थी. सविता का पति सविता के सर को अपनी गोद मे रख कर सहलाने लगा.

आदमी1-भैया तुम्हारा शुक्रिया

अवी-शुक्रिया किस बात का

आदमी1-तुम ना होते तो मेरी बीवी के साथ क्या हो जाता

अवी-कुछ नही होता, तुम्हारे जैसा पति जिसका हो उसे कुछ नही हो सकता, सविता लकी है जो तुम्हारे जैसे पति मिला है.

आदमी1-मैं लकी हूँ जो मुझे सविता मिली है.

अवी-तुम दोनो लकी हो .वैसे अब क्या करोगे

आदमी1-करना क्या है ,उसे मार डालूँगा

अवी-ऐसा मत करना ,वरना इसका बाप ठाकुर तुम्हे नर्क से ढूँढ निकालेगा

आदमी1-अगर इसे मारा नही तो ये बदला लेगा.

अवी-ये बदला लेने की हालत मे नही है, ये ना कुछ कर सकता है और ना किसी को बताएगा.

आदमी1-ये सही कहा.ये तो जीते जी मर चुका है.

फिर हम कुवरसिंघ की चुदाई देखने लगे.

सविता का एक देवर चुदाई कर रहा था ,और दूसरा देवर कुवरसिंघ के मूह मे पेशाब कर रहा था.

थोड़ी देर बाद सविता के देवर ने अपना लंड बाहर निकाला और कुवरसिंघ को अपना वीर्य पिलाया

अब सविता का दूसरा देवर कुवरसिंघ के उपर आने वाला था कि सविता के पति ने रोक दिया.

आदमी1-रूको ,

आदमी3-क्या हुआ भैया.

आदमी1-तुम इसे मज़ा दे रहे हो या दर्द

आदमी3-भाभी के साथ जो किया ...इसे दर्द दे रहा हूँ

आदमी1-ऐसे करोगे तो क्या खाक दर्द दोगे, उठाओ इसे

सविता के देवर ने कुवरसिंघ को खड़ा किया.

कुवरसिंघ के पैर काँप रहे थे. उसमे खड़े रहने की ताक़त नही थी.

कुवरसिंघ के पैर फैले हुए थे, और पैरो पे खून लगा हुआ था.

आदमी1-तुम यहाँ लेट जाओ

सविता का देवर चद्दर पे लेट गया. उसका लंड खड़ा होकर कुवरसिंघ की गंद मे जाने को तैयार था.

आदमी1-इसे पकड़ कर लंड पर बैठा दो

सविता के देवर(आदमी5 आंड आदमी 6) ने कुवरसिंघ को उठा कर अपने भाई के लंड पर बैठा दिया.

इसका लंड भी सविता के पति जैसा था. एक और दमदार लंड ,कुवरसिंघ गया काम से

लंड गंद मे जाते ही कुवरसिंघ के आँखो मे पानी आ गया, चीखे निकलने जितनी ताक़त नही थी कुवरसिंघ की.

लेकिन सविता का पति करना क्या चाहता है.

कुवरसिंघ की गंद मे सविता के दूसरे देवर(आदमी3) का लंड था.

सविता के पति ने अपने दूसरे भाई (आदमी 4) को पैंट निकालने को कहा.

आदमी1-इसे थोड़ा झुका दो

कुवरसिंघ को थोड़ा झुका दिया और कस्के पकड़े रखा.

आदमी1-तुम भी मारो इसकी गंद

आदमी4-भैया तो पहले से इसकी गंद मार रहे है

आदमी1-तुम भी डालो,

सविता के पति की बात सुनकर सब खुश हो गये.

आदमी1-एक बार मे पूरा डाल देना.और ये बेहोश हो जाए ऐसा दर्द होना चाहिए.

आदमी4-भैया ,इसकी ऐसी हालत करूँगा कि ये दुबारा किसी औरत को देखना पसंद नही करेगा.

और सविता के 2 देवर एक साथ कुवरसिंघ की गंद मारने वाले थे.

कुवरसिंघ की ये बात सुनकर डर के मारे हालत पतली हो गयी.

2 गधे जैसे लंड कुवरसिंघ की गंद मे जाने वाले थे.

सविता के पति का लंड दमदार था पर वो सविता की गंद नही मारता था जिस से सविता को कुवरसिंघ के पास जाना पड़ा.

सविता के देवरो का लंड भी दमदार थे पर वो अपनी भाभी की साथ कुछ नही करते.करना भी ठीक नही था.

और मेला ऐसी जगह है कि यहाँ चुदाई करो, फिर मेला ख़तम होते तुम कौन और मैं कौन वाली बात हो जाती.

मेले का यही फ़ायदा था कि मेले मे मज़ा करो, अपनी आइडेंटिटी छुपा कर रखो ,फिर मेला ख़तम होते अपने घर चले जाओ,

जो बात मेले मे शुरू हुई मेले मे ही ख़तम कर दो

इसी लिए मेले मे सब अपने अरमानो को पूरे करने आते है.

पर कुवरसिंघ अपने अरमानो को पूरा करने के चक्कर मे अपनी गंद गँवा बैठा है.

कुवरसिंघ की गंद मे एक साथ 2 लंड जाने वाले थे.

मैं तो बस सोच कर इमॅजिन कर रहा था. कि कुवरसिंघ की क्या हालत होगी.

सविता के देवर(आदमी 4) ने कुवरसिंघ की गंद पर अपना लंड सेट किया.

कुवरसिंघ की गंद मे एक लंड था और दूसरा लंड जाने की तैयारी मे था.

और सविता के देवर ने अपने लंड की परवाह नही की, और एक झटके मे पूरा लंड कुवरसिंघ की गंद मे डाल दिया

सविता के देवर ने पूरी ताक़त लगाकर झटका मारा था. ग़लती होने की गुंजाइश नही थी.

लंड गंद मे जाते ही एक साथ 3 चीखे सुनाई दी.

सविता के 2 देवर के मूह से चीख निकली.

दूसरी चीख कुवरसिंघ के मूह से निकली.

2 माइक गंद मे थे और एक स्पीकर से आवाज़ निकल रही थी.

कुवरसिंघ की चीख सुनकर मैं खड़ा हो गया. इतनी दर्दनाक चीख निकल गयी.

मैं खड़ा होकर कुवरसिंघ को देखने लगा कि वो ज़िंदा है या मर गया है.

ये चीख ने बता दिया कि कुवरसिंघ के दर्द की लिमिट क्रॉस हो रही है.

कुवरसिंघ के मूह से जो चीख निकली ,वो पहली वाली चीख से 2 गुना दर्दनाक थी.

चीखने के बाद कुवरसिंघ बेहोश हो गया.

कुवरसिंघ को ज़िंदा देख कर मैं रिलॅक्स हो गया.

कुवरसिंघ की गंद पूरी तरह फट गयी थी.

कुवरसिंघ सविता के 2 देवर के बीच मे फसा हुआ था.

2 गधे जैसे लंड लेने के बाद कोई भी बेहोश हो जाएगा.

यहाँ तो 2 लंड के साथ गुस्सा भी शामिल था ,बदला जो लेना था.

कुवरसिंघ किसी लाश की तरह सविता के देवर के बीच मे फसा हुआ था.

सविता के देवर की चीख निकली थी, पर चेहरे पे खुशी झलक रही थी, क्यू कि कुवरसिंघ बेहोश हो गया था.

सविता के देवर ने अपनी बात पूरी करके दिखाई.

अपने भाई और भाभी को दिखा दिया कि वो उनसे कितना प्यार करते है.

सविता के दूसरे देवर (आदमी 5 आदमी 6) ने कुवरसिंघ के हाथ को पकड़ रखा था.

2 लंड अंदर जाते सविता के देवर ने कुवरसिंघ के हाथ मरोड़ दिए थे.

हमारा ध्यान कुवरसिंघ की गंद मे जाते हुए लंड पर था .जिस से मैं ने सविता के दूसरे देवर पे ध्यान नही दिया.

कुवरसिंघ पूरे शरीर मे दर्द महसूस होते ,वो बेहोश हो गया.

और कुवरसिंघ एक दर्दनाक चीख के साथ बेहोश हो गया.

कुवरसिंघ की चीख सुनकर सविता को भी होश आ गया

 
595

कुवरसिंघ की चीख सुनकर सविता को भी होश आ गया

सविता ने अपने पति और देवर की तरफ देखा.

कुवरसिंघ को अपने देवरो के बीच मे नंगा फसा हुआ देख कर समझ गयी कि ये हो क्या रहा है.

कुवरसिंघ का शरीर खून से लत्पथ हो गया था.

सविता के दूसरे देवर ने कुवरसिंघ के हाथ मरोड़ दिए थे.

एक देवर कुवरसिंघ के बालों को नोच रहा था.

सविता ये सब देख कर समझ गयी कि उसने क्या किया है.

कुवरसिंघ के बेहोश होते ही सविता के एक देवर ने अपना लंड बाहर निकाल लिया .

उसके लंड पर खून लगा हुआ था. क्या पता उसका है या कुवरसिंघ का है.

उसने लंड को कुवरसिंघ के कपड़ो से साफ किया .और लंड को देखने लगा.

उसके लंड को कुछ नही हुआ था

आदमी1-क्या हुआ

आदमी4-कुछ नही भैया ,थोड़ा दर्द हुआ इस लिए देख रहा था.

आदमी1-कैसा है

आदमी4-रगड़ने से दर्द हुआ था, अब फिट है

आदमी1-तो लग जा ,और रुला रुला कर गंद मार इसकी

आदमी4-आप बस देखो कि इसकी कैसी हालत करता हूँ

सविता के देवर ने पेशाब करके कुवरसिंघ को होश मे लाया.

और फिर से 2 लंड गंद मे चले गये. और कुवरसिंघ को रुला रुला कर चोदने लगा.

कुवरसिंघ को लग रहा था कि बेहोश करके जो करना है कर लो ,ताकि उसे दर्द का पता ना चले.

पर सविता के पति को कुवरसिंघ की दर्द भरी चीखे सुनी थी

सविता के देवर उनको कम दर्द हो और कुवरसिंघ को ज़्यादा दर्द हो इस हिसाब से कुवरसिंघ की गंद मार रहे थे.

कुवरसिंघ को किस तरह दर्द देना है ये सविता का पति बता रहा था.

कुवरसिंघ की 2न्ड चीख सुनकर खंडहर के भूत जंगल मे छुप गये थे.

उनको भी कुवरसिंघ की चीख सुनकर डर लग रहा था.

सविता होश मे आ चुकी थी. और अपने पति और अपने देवर को देख रही थी.

उसके पति ने पहले कुवरसिंघ की बुरी हालत की थी और अब उसके देवर कुवरसिंघ की जान निकल रहे थे.

सविता को समझ नही आ रहा था कि हो क्या रहा है.

ग़लती उसकी भी है फिर उसे कोई कुछ क्यू नही बोल रहे थे

कुवरसिंघ की जैसी हालत हो रही थी वो भी सविता की समझ मे नही आ रहा था.

सविता का पति अपने भाई को बता रहा था कि कुवरसिंघ को कैसा दर्दनाक सबक सिखाना है

और सविता के साथ प्यार से बात कर रहा था ,उसे गले लगा कर रोया था.

सविता को लगा कि उसके पति ने कुवरसिंघ के साथ देख लिया है, अब वो अपने पति का सामना कैसे करेगी.

उधर कुवरसिंघ बीच बीच मे चिल्ला रहा था जिस से सविता को अपने पति और देवर के गुस्से का पता चल रहा था.

उसने अपनी लाइफ की सबसे बड़ी ग़लती की ,इतना प्यार करने वाले पति को धोका दिया है.

जान देने वाले देवर का विश्वास तोड़ा, वो कैसे इन सब का सामना करेंगी.

सविता ने कुछ सोचा और खड़ी हो गयी.

सविता के बदन पर अभी भी ब्लाउस और पेटीकोट था. साड़ी उसकी पास पड़ी हुई थी.

सविता की तरफ किसी का ध्यान नही था.

सविता खड़ी होते ही जंगल के अंदर की तरफ भागने लगी.

सविता के भागने की आवाज़ सुनकर हमारा ध्यान भागती हुई सविता पर गया.

सविता को भागता हुआ देख कर मैं ने टॉर्च ऑन किया

सविता का पति भी हरकत मे आ गया.

सविता के 5 देवर कुवरसिंघ के साथ बिज़ी थे.

सविता का पति सविता के पीछे भागने वाला था कि मैं ने उसे रोक दिया.

अवी-तुम रूको मैं ढूँढ कर लाता हूँ. इस जंगल के बारे मे मुझे पता है.

सविता के पति को मेरी बात सही लगी. उसने अपने दूसरे भाई को मेरे साथ जाने को कहा.

आदमी1-तुम(आदमी2) इसके साथ जाओ और सविता को ढूँढ लो मैं इसकी खबर लेता हूँ

मैं सविता के देवर के साथ सविता के पीछे पीछे भागने लगा.

सविता हम से ज़्यादा दूर नही थी.

उसके भागने की आवाज़ हमे सुनाई दे रही थी.

मैं भागते हुए सविता के देवर से बात करने लगा.

अवी-तुम्हे पता है तुम ने किस के साथ पंगा लिया है

आदमी2-पता है, यहाँ का ठाकुर है वो

अवी-वो तुम्हे छोड़ेगा नही.

आदमी2-उसकी टेन्षन तुम मत लो .भाभी भाभी

अवी-तुम ठाकुर को जानते नही हो

आदमी2-ठाकुर कोई भी हो, हमे यहाँ कोई नही जानता ,

अवी-कौन हो तुम

आदमी2-ये मत पूछो, हम ने हमारे बारे मे किसी को नही बताया, मेरे भाई ने कहा था कि कोई पूछे तो सिर्फ़ स्टेट का नाम बताने को कहा है.क्या समझे

अवी-मतलब तुम बहुत दूर से आए हो

आदमी2-हां, और कल सुबह यहाँ से चले, कल सुबह नही, अभी इसे सबक सिखाने के बाद,भाभी रुकिये

अवी-(ये तो बढ़िया न्यूज़ है) भाभी रुक जाइए

हम सविता को आवाज़ देते हुए भागने लगे

हम भागते हुए बहुत दूर आ गये थे.

अचानक हमे किसी के पानी मे गिरने की आवाज़ सुनाई दी.

आदमी2-भाभी, ये कैसी आवाज़ थी.

अवी-किसी ने पानी मे जंप मारी है.

हम भागते हुए आवाज़ जहाँ से आई वहाँ पहुँच गये.

ये तालाब था .मैं बिना वक्त गँवाए तालाब को टॉर्च से देखने लगा.

तालाब मे सविता ने जंप मारी थी

इन सब के बाद सविता ने ख़ुदकुशी करने का फ़ैसला किया था

सविता पानी मे डूब रही थी.

 
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मैं ने शॉल को निकाल दिया. साथ मे मंकी कप भी निकाल दी. और टॉर्च सविता के देवर को दिया और पानी मे छलान्ग लगाई.

जंगल मे तालाब भी है ये मुझे पता नही था.

ये तालाब कैसा है ये मुझे नही पता था.फिर भी मैं ने तालाब मे जंप मार ली.

सविता पानी मे डूब रही थी. जिसकी वजह से मैं देर ना करते हुए उसे बचाने मे लग गया.

सविता का देवर मुझे टॉर्च की मदद से सविता को दिखा रहा था.

मैं सविता के पास टाइम रहते पहुँच गया.और सविता को डूबने से बचा लिया.

सविता के देवर ने हमे किनारा दिखाया जिसकी वजह से हम तालाब से बाहर आ गये.

सविता का देवर अपनी भाभी की वजह से मुझे ठीक से देख नही पाया.

वो भी डर गया था सविता को तालाब मे डूबते हुए देख कर.

सविता को तालाब से निकाल कर ज़मीन पर लेटा दिया.

सविता को ज़मीन पर लिटाते ही सविता का देवर अपने भाभी को देखने लगा.

उस समय मे मैं ने अपनी मंकी कॅप पहन ली .

आदमी2-भाभी उठो ,

सविता का देवर सविता को उठाने की कोशिस करने लगा.

आदमी2-भाभी उठो ना

सविता की तरफ से कोई रियेक्शन नही मिला.

कही ये मर तो नही गयी.

अवी-अपनी भाभी की साँस चेक कर

सविता के देवर ने सविता को चेक किया.

आदमी2-भाभी साँस नही ले रही है.

अवी-क्या,उसे मूह से साँस दो

आदमी2-मैं कैसे ,ये मेरी भाभी

ऐसे तो सविता मर जाएँगी.

मैं ने सविता के देवर को धक्का दे कर बाजू मे किया और सविता को अपने मूह से साँस देने लगा.

फिर मैं ने सविता की चेस्ट को ज़ोर से दबाया और फिर से सविता को अपने मूह से हवा देने लगा.

इस बार मेरी मेहनत काम मे आ गयी.सविता के मूह से पानी बाहर निकलने लगा.

सविता बच गयी.

सविता का देवर अपनी भाभी को सही सलामत देख कर खुश हो गया.

पर सविता फिर से मरने की बात कर रही थी.

सविता-छोड़ो मुझे ,मुझे मरना है, मुझे जीने का कोई हक नही है

आदमी2-भाभी आप ये क्या कह रही हो,

सविता-मुझे मरना है, मैं ने ये क्या किया.

और सविता रोने लगी

आदमी2-भाभी, आप ये क्या कह रही हो ,आपने कुछ नही किया.

सविता-ये मैं ने क्या किया. मुझे जीने का कोई हक नही है, मुझे मरने दो

ऐसे तो सविता सच बता कर अपना नुकसान कर देगी.

मुझे कुछ करना होगा .वरना सविता बुरी तरह से फस जाएगी.

मुझे सविता का मूह बंद करना होगा.

मैं ने सविता के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ मारा

अवी-चुप ,एक दम चुप

सविता के गाल पर थप्पड़ पड़ते ही वो चुप हो गयी.

पर सविता के देवर को मुझ पे गुस्सा आ रहा था.

आदमी2-तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई भाभी को थप्पड़ मारने की

अवी-थप्पड़ मार कर तुम्हारी भाभी को होश मे लाया है. वरना फिर तालाब मे जंप मार लेती.

मेरी बात सुनकर सविता के देवर को समझ मे आ गया कि थप्पड़ मारना ज़रूरी था.

आदमी2-भाभी आप ये क्या कर रही थी.

सविता-मैं इसी लायक हूँ

आदमी2-भाभी इन सब मे आपकी क्या ग़लती है.

सविता-मैं

सविता कुछ बोलने वाली थी कि मैं बीच मे बोल पड़ा.

अवी-तुम पागल हो ,ये सवाल पूछने का समय नही है. ये जंगल है चलो यहाँ से

आदमी2-तुम ठीक कह रहे हो ,चलो भाभी.

सविता उठने वाली थी कि एक ज़ोर की चीख के साथ फिर से बैठ गयी.

आदमी2-भाभी क्या हुआ

अवी-अपनी भाभी का पैर देखो

सविता के पैर से खून निकल रहा था.

जंगल मे भागते हुए चोट लग गयी होगी या फिर तालाब मे जंप मारने से शायद चोट लग गयी.

आदमी2-भाभी ये क्या हुआ,

अवी-(अकल का अँधा.)तालाब मे जंप मारने से चोट लग गयी होगी.

आदमी2-अब क्या करे

अवी-एक काम हो सकता है, मैं जाकर तुम्हारे भाई को बुला कर लाता हूँ तुम अपनी भाभी के साथ यहीं रूको

आदमी2-जंगल मे ,तुम यहाँ रूको मैं भाई को बुलाकर लाता हूँ

अवी-ये नही हो सकता

आदमी2-ये जंगल के बारे मे तुम्हे पता है, भाभी को चोट लगी है.ऐसे मे जंगली जानवर आ गये तो, ऐसे मे तुम भाभी का ध्यान अच्छे से रख सकते हो,तुम जंगल को जानते हो

अवी-मैं

आदमी2-हाँ तुम, और मैं भैया को लेकर आता हूँ

अवी-ठीक है, पर अपने भैया के साथ अपनी माँ को लेकर आना

आदमी2-माँ को क्यूँ

अवी-तुम्हारी भाभी को चोट लगी है,और कपड़े गीले है, तुम्हारी माँ को लेकर आ जाना और साथ मे कपड़े लेकर आ जाना.

आदमी2-अभी गया और अभी आया

अवी-(बच्चू मुझे खंडहर का रास्ता पता नही है ,तो तुझे कैसे मिल जाएगा. भागते हुए तो यहाँ आ गये, पता नही खंडहर कहा है) ठीक है जल्दी आना,अपना मोबाइल दो मुझे

आदमी2-मोबाइल क्यूँ

अवी-यहाँ क्या मैं अंधेरे मे रहूँगा.

आदमी2-ये लो मोबाइल .और टॉर्च मैं लेकर जाता हूँ.

अवी-जल्दी आना (हम दोनो सविता को उठा कर खंडहर तक ले जा सकते थे. पर मुझे सविता से अकेले मे बात करनी थी .जिस की वजह से सविता के देवर को अकेले खंडहर तक मदद लाने भेज दिया.

सविता का देवर ईडियट निकला ,यहाँ रुकना उसके लिए सेफ रहता, जंगल मे भटकने से यहाँ रुक जाता तो उसके लिए अच्छा होता, शायद वो डर रहा होगा कि अगर जंगली जानवर आ गया तो वो अपनी ज़ख्मी भाभी को बचा नही पाएगा. और उसे लग रहा होगा कि भाग कर जाएगा और भैया को भुला कर लाएगा.)

सविता का देवर टॉर्च लेकर चला गया.पीछे जंगल मे रह गये सविता और मैं

 


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सविता का देवर टॉर्च लेकर चला गया.पीछे जंगल मे रह गये सविता और मैं

मेरे मूह से सुपारी तालाब मे गिर गयी थी. फिर भी मेरी आवाज़ मे थोड़ा चेंज था.

सविता मेरे हाथ से थप्पड़ खाने के बाद सहमी हुई बैठी थी.

ये तालाब, पानी ,ठंड इसके बारे मे मैं ने सोचा नही था.

मैं ने पहले अपना गीला शर्ट निकाल दिया.

शर्ट निकालते ही सविता मेरी तरफ देखती रह गयी.

मैं जंगल मे रुकने के लिए जगह ढूँढने लगा

मैं मोबाइल की मदद से जंगल मे शुरक्षित जगह देखने लगा.

मुझे सुखी घास और एक बड़ा पेड़ जिस के नीचे बैठे सकते है मिल गया.

मैं ने घास को उठाकर पेड़ के नीचे रख दिया. और बैठने के लिए जगह बना ली

सविता मेरी तरफ देखने लगी.

मैं सविता के पास आ गया और उसने उठाने वाला था कि वो पीछे सरक गयी.

मैं ने फिर भी सविता की उठा लिया. वो बस मुझे देखती रही.

मैं सविता को उठाकर पेड़ के पास जाने लगा.

सविता को कुछ समझ नही आ रहा था कि मैं क्या कर रहा हूँ

मैं ने सविता को उस घास पर बैठा दिया.

जंगल मे हम दोनो अकेले, मेरी शर्ट नही है, वो ब्लाउस और पेटिकोट मे है और घास लगाई है.

सविता डरने लगी.

मैं ने सविता को आराम से घास पर बैठा दिया.

अवी-अपने कपड़ो निकालो

मेरी ये बात सुनकर सविता शॉक्ड हो गयी.

सविता-तुम क्या कर रहे हो

मैं वापस उस जगह पर गया जहाँ पर सविता को पहले बैठाया था.

और अपनी शॉल लेकर सविता के पास आ गया.

अवी-अपने कपड़े निकालो,नही तो ठंड से मर जाओगी.

अब जाकर सविता को मेरी बात समझ मे आ गयी.

सविता-तुम्हारे सामने ,

अवी-ये ड्रामा मत करो, मरना है तो मर जाओ मुझे क्या है.

सविता ने कुछ सोचा,

सविता-उधर देखो

मैं पलट गया और सविता ने अपने कपड़े निकाल दिए

और शॉल को अपने बदन पर ले लिया था.

मैं ने एक बार सविता की तरफ देखा और फिर सविता का ब्लाउस और पेटिकोट उठा कर पास के पत्थर पे रख दिए.

और मैं सविता के पास जाकर बैठ गया. मैं ने अभी भी मंकी कॅप पहनी हुई थी.

हम दोनो पास मे बैठे हुए थे पर कोई कुछ नही बोल रहा था.

सविता भी अब नॉर्मल हो चुकी थी. एक थप्पड़ ने उसे होश मे ला दिया था.

सविता के पैर पे चोट लगी हुई थी.

मैं ने सविता के पैर को टच किया था कि उसने अपना पैर पीछे ले लिया.

मैं ने अपनी जेब से रुमाल निकाला और सविता को दिखाया.

अवी-तुम्हारी चोट पर पट्टी लगा रहा हूँ

सविता ने चुप चाप अपना पैर आगे किया.

मैं ने सविता के पैर पे पट्टी लगा ली.

फिर से हम चुप चाप बैठे रहे.

अवी-तुम्हे ये सब करके क्या मिला

सविता मेरी तरफ देखती रह गयी.

सविता को अभी तक पता नही था कि उसका पति समझ रहा है कि सविता का रेप हुआ है.

अवी-मैं ने कहा ,तुम्हे ये सब करके क्या मिला.

मेरी बात सुनकर सविता रोने लगी.

अवी-तुम्हारा पति तुमसे इतना प्यार करता है फिर भी तुम कुवरसिंघ के साथ ये सब कर रही थी.

सविता और ज़ोर से रोने लगी.

अवी-तुम्हारी सास वहाँ तुम्हारी लिए परेशान हो रही है, कह रही है कि मेरी बेटी सविता कहाँ है

सविता को अपनी ग़लती का अहसास होने लगा.

अवी-तुम्हे जान देने वाले देवर मिले है और तुम हो कि

सविता इस पे क्या बोलेगी,

अवी-तुम ने सोचा कि ये सब करने के बाद तुम्हारी फॅमिली का क्या होगा.

इस बार सविता ने कुछ कहा

सविता-मेरी बहन

और सविता पूरी ताक़त लगा कर खड़ी हुई ,और भागने लगी.

सविता के इस तरह भागने से मैं समझ गया कि वो फिर से तालाब मे जंप मारने जा रही है.

मेरे पास सविता के हर प्राब्लम का सल्यूशन था .

पर सविता को अपने प्राब्लम का एक ही सल्यूशन दिख रहा था.

वो था ख़ुदकुशी करके जान दे देना.

पर मैं सविता को मरने नही दे सकता.

और मुझे फिर से गीला नही होना था.

इस बार तो हमारे पास टॉर्च भी नही है.

मैं सविता के पीछे भागने लगा

सविता के पैर मे चोट लगी थी .ऐसे मे वो मेरे हाथ मे जल्दी आ गयी. तालाब मे जंप मारने से पहले सविता को मैं ने पकड़ लिया.

 
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मैं सविता के पीछे भागने लगा और तालाब मे जंप मारने से पहले पकड़ लिया.

सविता-मुझे मर जाने दो ,मुझे जीने का कोई हक नही है.

अवी-मर कर क्या करोगी,

सविता मेरी पकड़ से निकलने की कोशिस करने लगी.

सविता एक बात भूल गयी थी कि वो मेरी बाहों मे नंगी है.

इस तरह अचानक भागते हुए उसके बदन पर जो एक शॉल थी वो वही पेड़ के नीचे पड़ी हुई थी.

सविता ये भूल गयी थी कि उसने ब्लाउस और पेटिकोट निकाल दिया था.

सविता का नंगा बदन मेरे शरीर से रगड़ रहा था.

इतने मे चाँद(मून)के सामने से बादल भी हट गये थे.चाँद की रोशनी मे सविता का बदन चमक रहा था.

मैं ने खुद पर कंट्रोल किया और सविता का चेहरा अपनी तरफ किया.

सविता-मुझे मर जाने दो, मैं बदनाम होकर नही जी सकती

अवी-ऐसे कैसे मरोगी. मैं मरने नही दूँगा

सविता-तुम हो कौन ,मुझे मरने दो

सविता फिर मेरे हाथो से निकलने की कोशिस करने लगी.

ये ऐसे नही मानेगी. मैं ने सविता के गाल पर एक थप्पड़ मार दिया.

ये क्या ,थप्पड़ खाने के बाद भी सविता मेरे हाथो से निकलने की कोशिस करने लगी. मैं ने फिर एक थप्पड़ मारा.

सविता-मारो, और मारो, मार मार कर मेरी जान निकालो

सविता मेरे हाथ को पकड़ कर अपने गाल पर मारने लगी.

ये ऐसे नही मानेगी.

मैं ने वो किया जो मैं करना नही चाहता था.

लेकिन इसके सिवा सविता को नॉर्मल करने का दूसरा रास्ता नही था.

मैं ने सविता के सर को पकड़ कर उसके होंटो पर अपने होन्ट रख दिए

सविता को इस बात की उम्मीद नही थी. उसने सोचा नही था कि मैं उसके साथ ऐसा करूँगा.

सविता को किस करते ही पहले सविता शॉक्ड हो गयी.

फिर सविता मुझे दूर धकेलने की कोशिस करने लगी.

वो मेरे पकड़ मे थी ,और मेरे पकड़ से निकलना आसान नही था.

वो अपने हाथ पैर पटक रही थी. मुझे किस करने से रोक रही थी.

पर उसकी कोशिस किसी काम की नही थी. वो कुछ भी कर ले मुझे किस करने से रोक नही सकती थी.

वो अगर नॉर्मल हो जाए तब मैं किस करना बंद कर सकता था

लेकिन सविता को किस करते हुए मैं भूल गया कि मैं किस क्यू कर रहा हू. मैं ने किस किस लिए किया है

सविता के होंटो मे एक अलग नशा था ,उसके होंटो को छुते ही वो नशा मेरे दिलो दिमाग़ मे घुस गया.

जिस की वजह से ,मैं भूल गया कि मैं किस क्यू कर रहा हूँ.बस मुझे इतना पता था कि मुझे सविता के होंटो का नशीला रस पीना है.

इतनी हसीन रात, चाँद की चमक मे सविता को किस करना ,सविता का पति लकी इंसान था.

थोड़ी देर पहले हम दोनो ठंड की वजह से काँप रहे थे ऐसे मे किस करके जो गर्मी पैदा हो रही थी ,वो हमे सुखद आनंद दे रही थी.

सविता का हर कोई इसी लिए दीवाना था क्यूँ कि सविता लाखो मे एक थी. सविता जैसी दूसरी कोई नही हो सकती.

सविता के पैरो मे चोट लगी हुई थी,थोड़ी देर पहले गंद मे लंड लिया था. ऐसे मे वो ज़्यादा देर खड़ी नही रह सकती थी.

वो जितना विरोध कर रही थी उसकी वजह से वो कमजोर पड़ रही थी.

सविता थोड़ी देर मुझे किस करने से रोक रही थी. पर ठंडी मे मेरी गर्माहट से वो पिघलती गयी.

आख़िर मे सविता मेरे सामने हार गयी. उसने विरोध करना बंद कर दिया ,पर कोई रेस्पॉन्स भी नही दे रही थी.

वो बस मेरे किस ख़तम करने का इंतज़ार करने लगी.

मे बी सविता मेरे किस को एंजाय कर रही हो, औरत कब क्या कर सकती है पता नही चलता.

पहले सविता कुवरसिंघ के साथ एंजाय कर रही थी. फिर अपने पति को देख कर शॉक्ड हो गयी, फिर मरने के लिए तालाब मे जंप मारी ,और अब मेरी बाहों मे मेरे किस को एंजाय कर रही है शायद.

सविता के शांत होने के बाद भी मैं सविता को किस करता गया.

सविता का जादू मेरे सर चढ़ कर बोल रहा था.

ऐसा लग रहा था कि ये किस कभी ख़तम ही ना हो.

पर साँस लेने के लिए मुझे किस ख़तम करना पड़ा.

किस ख़तम करते ही मैं ने सविता को छोड़ दिया. सविता नीचे ज़मीन पर गिर गयी.

सविता होश मे थी, पर पैर की चोट की वजह से वो खड़ी नही रह सकती थी.

वो ज़मीन पर पड़ी थी और मैं खड़ा होकर उसे देख रहा था.

सविता ने फिर थोड़ी हिम्मत जमा की और खड़ी होने की कोशिस करने लगी.

उसके चेहरे से पता चल रहा था कि उसे बहुत दर्द हो रहा है फिर भी वो खड़ी होने की कोशिस करने लगी.

मैं ने सविता को सहारा दे कर खड़ा किया.

सविता खड़ी हो गयी. उसने अपना एक पैर उपर करके रखा था.

सविता ने खड़े होते ही मेरे गाल पर एक जोरदार थप्पड़ मारा.

मंकी कॅप की वजह से थप्पड़ ज़ोर से नही लगा. पर ये थप्पड़ क्यू पड़ा ये मैं जानता था.

मैं ने थप्पड़ का जवाब नही दिया ,बस सविता को देखता रहा.

सविता-तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे किस करने की

और सविता ने फिर से मुझे थप्पड़ मार दिया.

मैं ने फिर भी कुछ नही कहा बस सविता को देखता रहा.

सविता-जवाब दो ,तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे

मैं लगातार सविता को देखता रहा. सविता ने जब ये बात नोटीस कि तो वो खुद को देखने लगी.

सविता ने देखा कि वो मेरे सामने नंगी खड़ी है.

उसे ये अहसास होते ही वो नीचे बैठ गयी और अपने हाथो से खुद को छुपाने लगी.

मैं फिर भी उसे देखता रह गया.

 
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