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मैं और मेरा परिवार

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उसे ये अहसास होते ही वो नीचे बैठे गयी और अपने हाथो से खुद को छुपाने लगी.

मैं फिर भी उसे देखता रह गया.

सविता अपने खूबसूरत बदन को छुपाने की पूरी कोशिस कर रही थी.

मैं ने सविता को ज़्यादा शर्मसार नही किया और पेड़ के पास जाकर शॉल लेकर आ गया.

शॉल को सविता के बदन पर डाल दिया. सविता ने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर शॉल से अच्छे तरीके से अपने बदन को ढक लिया.

सविता सोच रही होगी कि अभी तो मैं ने उसको किस किया. मैं उसके साथ कुछ भी कर सकता था. वो खुद को बचा भी नही सकती. ऐसे मे मैं ने उसका फ़ायदा उठाने की जगह उसके बदन को छुपा दिया है.

सविता के दिमाग़ मे जो चल रहा था वो मेरे बारे मे मे होगा.

सविता मेरे बारे मे सोच रही थी.

मैं सविता को उठाने के लिए झुका था कि वो पीछे होने लगी.

अवी-डरो मत, मैं तुम्हे पेड़ के पास लेकर जा रहा हूँ, वो जगह सेफ है.

सविता को मेरी बात मान नी पड़ी और मेरा साथ देने लगी.

मैं ने फिर से सविता को अपनी गोद मे उठा लिया.

इस बार मैं सविता के बदन को अपने हाथो से महसूस करने लगा.

सविता को उठाकर मैं ने घास पर रख दिया और उसके बाजू मे बैठ गया.

वो शायद ये दुआ कर रही थी कि मैं उसके साथ ऐसा वैसा कुछ ना करूँ.

पहले मुझे सविता के साथ कुछ करने का मन नही था, पर किस करने के बाद मैं दुविधा मे था कि मुझे सविता के साथ कुछ करना चाहिए या नही.

औरत के चक्कर मे काफ़ी लोगो को मन भटक गया और वो जीती हुई बाज़ी हार गये .

मुझे ये बात पता थी फिर भी मेरा मन भटकने को तैयार हो रहा था.

सविता को किस करने से मेरे दिमाग़ सविता की खूबसूरती के नशे मे झूम ने लगा.

मैं अपने ख़याल मे खोया था और सविता अपने.

फिर मैं ने बात करनी शुरू की.

अवी-सॉरी

सविता ने मेरी तरफ देखा

अवी-सॉरी ,मुझे तुम्हे किस नही करना चाहिए था ,पर इसके सिवा दूसरा रास्ता नही था.

सविता-दूसरा रास्ता नही था का क्या मतलब

अवी-पहली बार तुम मरने की बात कर रही थी तो मैं ने तुम्हे थप्पड़ मारकर शांत किया. पर इस बार

सविता-इस बार क्या

अवी-इस बार तुम थप्पड़ खाने के बाद भी शांत नही हुई इस लिए मैं ने तुम्हे शांत करने के लिए किस किया.तुम्हारे देवर ने तुम्हारी ज़िम्मेदारी मुझे दी है अगर तुम मर जाती तो मैं तुम्हारे देवर को क्या जवाब देता.

सविता को मेरी बात समझ मे आ गयी. मैं ने उसे किस क्यू किया.

सविता-सॉरी ,मैं ने बिना सोचे समझे तुम्हे थप्पड़ मार दिया.

अवी-इसमे तुम्हारी ग़लती नही है.तुम्हारी जगह कोई और होती तो वो भी मुझे थप्पड़ मारती

सविता-काश मेरी जगह कोई और होती

अवी-क्या मतलब

सविता-मैं ने आज वो गुनाह किया जो मुझे नही करना चाहिए था.मैं खुद की नज़रों मे गिर गयी हूँ ,अपने पति को धोका दिया है.

अवी-धोका ,मैं समझा नही

सविता-तुम ने सब देखा है फिर भी ये पूछ रहे हो, मैं ने अपने पति के होते हुए दूसरे आदमी के साथ ये सब कर रही थी.

अवी-अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ

सविता-अब मेरी मदद कोई नही कर सकता.

अवी-मैं कर सकता हूँ ,अगर तुम मुझे सब कुछ बता दो तो,

सविता-मेरी मदद सिर्फ़ भगवान कर सकता है, वो भी मुझे अपने पास बुला के

अवी-समझो कि भगवान ने मुझे तुम्हारी मदद के लिए भेजा है तो

सविता-क्या मतलब

अवी-मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ ,तुम्हे अपनी जान देने की ज़रूरत नही है.

सविता-मुझे तो सिर्फ़ एक ही रास्ता दिख रहा है. वो है जान देने का

अवी-मैं कहूँ कि मैं तुम्हे दूसरा रास्ता दिखा सकता हूँ तो

सविता-तो मेरी जान तुम्हारी गुलाम हो जाएगी.

अवी-क्या कहा

सविता-मुझे मरने के सिवा दूसरा रास्ता नही दिख रहा है. अगर तुम दूसरा रास्ता दिखा सकते हो तो मैं अपनी जान नही दूँगी.ऐसे मे मेरी जान तुम्हारी गुलाम हो जाएगी ना.

अवी-देखो मैं तुम्हे रास्ता दिखा दूँगा,तुम्हे वैसा ही करना होगा जैसा मैं कहूँगा तभी तुम बच सकती हो

सविता-ठीक है मैं वैसा ही करूँगी जैसा तुम कह रहे हो. पर कैसे करोगे मेरी मदद ये बता दो

अवी-पहले तुम अपनी कहानी बताओ फिर मैं बताता हूँ.

सविता-मेरी कहानी, कहाँ से शुरू करू समझ नही आ रहा

अवी-शॉर्ट मे, आज सुबह से शुरुआत करो

सविता-मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूँ, मेरे पति ने मेरा हर सपना पूरा किया ,सिवाय एक को छोड़ कर

अवी-कौन सा सपना

सविता-अब तुम्हे मैं कैसे बताऊ

अवी-बिंदास बताओ ,जितना खुल के बताओगी उतनी तुम्हारी लिए मदद कर पाउन्गा

सविता-मुझे अपनी गन्न्द मर्वानी थी,पर मेरे पति को वहाँ करना पसंद नही था.

अवी-तो तुमने क्या किया

सविता-करना क्या है, मैं अपने पति को मनाने लगी.पर वो मेरी बात सुन ने को तैयार नही थे

अवी-फिर क्या किया

सविता-फिर हम इस मेले मे आ गये, मेले मे लोग मुझे घूर घूर कर देखने लगे. भीड़ मे मेरे पीछे हाथ लगा देते

अवी-फिर

सविता-फिर एक आदमी मुझे रोज देखता रहता था. उसका नाम कुवरसिंघ था, मैं ने भी एक 2 बार स्माइल की

अवी-क्यूँ?

सविता-क्यूँ कि मैं ने अपना सपना यहाँ पूरा करने का सोचा. यहाँ मुझे कोई जानता नही था .ऐसे मे यहाँ अपना सपना पूरा करने से ख़तरा नही था.

अवी-तो तुम ने कुवरसिंघ को सेलेक्ट किया

सविता-हाँ. वो ठाकुर था, दिखने मे अच्छा था इस लिए उसके साथ बात करना शुरू की

अवी-फिर तुम ने उसे अपने सपने के बारे मे बताया

सविता-हाँ, पहले तो वो मना करने लगा ,पर फिर मेरा सपना पूरा करने मे मेरा साथ देने के लिए तैयार हो गया.

अवी-और आज तुम अपना सपना पूरा करने वाली थी.

सविता-सपना तो कल पूरी करने वाली थी और फिर उस से दूर चली जाती पर उसने कल आगे से किया.

अवी-फिर क्या हुआ

सविता-मैं ने उसे मेरा सपना पूरे करने की धमकी दी ,अगर सपना पूरा नही हुआ तो मैं तुम्हे भूल जाउन्गी. वो मान गया.

अवी-फिर

सविता-फिर जब मेरा सपना पूरा होने वाला था कि बीच मे मेरा पति आ गया. और मैं बरबाद हो गयी.

अवी-एक सपने ने तुम्हे अपने पति की नज़रों मे गिरा दिया.

सविता-हाँ, इसलिए मैं मरना चाहती हूँ, मैं कैसे अपने पति का सामना करूँगी. पर तुम हो कि मुझे मरने नही दे रहे हो

अवी-तुम्हारे देवर के आने के बाद जो करना है कर लेना. पर एक बात पुछु

सविता-पूछो

अवी-तुम बहन नाम लेकर फिर मरने क्यूँ जा रही थी(ये बात मुझे पता थी)

सविता-मेरे छोटे देवर की शादी मेरी बहन से होने वाली है.ये सब होने के बाद मेरी बहन की शादी टूट जाएगी. मैं कैसे अपनी बहन का सामना करती.

अवी-तुम्हे ये सब पहले सोचना चाहिए था.

सविता ने अपना सर झुका लिया

अवी-मैं तुम्हे एक तरीका बता सकता हूँ जिस से तुम्हे मरने की ज़रूरत नही होगी.

सविता ने मेरी तरफ देखा

अवी- तुम अपने पति की नज़रों मे अच्छी साबित हो सकती हो, तुम्हारी बहन की शादी नही टूटेगी.

सविता-वो कैसे

अवी-बताता हू लेकिन पहले मेरे सवालो का जवाब दो

सविता-पूछो

अवी-कुवरसिंघ ने कॉंडम लगाया था या तुम गोली खाने वाली थी

सविता मेरी बात सुनकर शरमा गयी.

अवी-शरमाती रहोगी तो मैं तुम्हारी मदद नही करूँगा.

सविता-मैं ने उसे कॉंडम लगाने को कहा था.

अवी-क्यूँ?

सविता-क्यू कि मैं ने सुना था कि उसने मेले मे एक लड़की का रेप किया है.

अवी-ये किसने बताया तुम्हे

सविता-मेरी सास ने

अवी-(ये तो काम की बात है) फिर भी तुम ने उसके साथ ये सब किया.

सविता-उसने कहा कि कोई उसे बदनाम करना चाहता है. अगर उसने रेप किया होता तो वो जैल मे होता

अवी-तो तुम ने उसे कॉंडम लगाने को कहा.

सविता-हाँ, क्या पता वो कैसा हो,क्या सच है मुझे पता नही था. इस लिए मैं रिस्क लेना नही चाहती थी.

अवी-एक काम की बात है

सविता-क्या मतलब,

अवी-बताता हूँ ,पर तुमसे और सवाल पूछना बाकी है.

सविता-तुम मदद कर रहे हो ,ऐसा मुझे नही लग रहा है.वैसे तुम हो कौन ,और ये अपना चेहरा क्यू छुपाके रखा है.

 


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सविता-तुम मदात कर रहे हो ,ऐसा मुझे नही लग रहा है.वैसे तुम हो कौन ,और ये अपना चेहरा क्यूँ छुपाके रखा है.

अवी-मैं तुम्हारी तरह मेले देखने आया हूँ और पास के गाओं मे रहता हूँ. आज देर हो गयी तो यहीं रुक गया.

सविता-ये चेहरा क्यू छुपा रखा है

अवी-वो जिसके साथ तुम वो सब कर रही थी वो मुझे जानता है. अगर उसने मुझे देख लिया तो मेरी जान ले लेगा.तुम्हारा क्या है तुम कल यहाँ से चले जाओगे मुझे तो यहीं रहना है. तुम्हारी मदद के बदले वो मेरी जान ले सकता है.

सविता-यहाँ तो वो नही है. फिर चेहरा क्यूँ छुपा रखा है

अवी-(मुझे अपना चेहरा दिखना होगा)

सविता का विश्वास पाने के लिए मुझे अपने चेहरे से मुखौटा निकालना होगा

मैं ने मंकी कॅप निकाल ली

अवी-ये लो,

सविता-अब मेरी मदद कैसे कर सकते हो ये बताओ

अवी-बताता हूँ, पहले ये बताओ तुमने कुवरसिंघ को अपने बारे मे बताया है. अपने गाओं के बारे मे

सविता-मुझे जो करना था वो छुप कर करना था. मैं नही चाहती थी कि वो बाद मे मेरे पीछे आए, इस लिए उसे सिर्फ़ मेरा नाम पता है.

अवी-फिर तो तुम 100%सेफ हो

सविता-वो कैसे

अवी-मेरी कहानी सुनो, मैं यहाँ मेले देखने आया था. आज देर ज़्यादा हुई इस लिए यहाँ रुक गया.

रात मे मैं पेशाब करने उठा तो तुम्हे कुवरसिंघ के साथ जाते हुए देखा

सविता-तुमने हमें देखा था. मतलब तुम मेरे पति को यहाँ लेकर आए हो

अवी-(ये तो मोना से ज़्यादा ईडियट है, तब से इसकी मदद कर रहा हूँ और ये अब समझी ) हाँ, मैं तुम्हारे पति को यहाँ लेकर आया हूँ

सविता-तुम ने ऐसा क्यूँ किया ,तुम ने मुझे बरबाद किया

अवी-मैं ने तुम्हे बर्बाद नही किया ,तुम्हे बर्बाद होने से बचाया है

सविता-क्या मतलब

अवी-तुम्हारा पति और देवर तुम्हे हर तरफ ढूँढ रहे थे ,

सविता-ढूँढने देते ,मैं उन्हे कुछ बहाना बता देती, तुम यहाँ क्यूँ लेकर आए

अवी-मैं क्या करता ,तुम्हारा पति मरने की बात कर रहा था. तुम्हारे देवर पागलो की तरह तुम्हे ढूँढ रहे थे. तुम्हारा पति तो पागल हो गया था. मेरे पैर पकड़ रहा था.

सविता-और तुम ने बता दिया.

अवी-हाँ पर कुछ ऐसा बताया जिस से तुम बदनाम होने से बच गयी.

सविता-क्या बताया

अवी-मैं ने कहा कि तुम आम के बगीचे मे पेशाब कर रही थी ,कि तभी कुवरसिंघ ने तुम्हारे साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिस की

सविता-ज़बरदस्ती, झूठ क्यूँ कहा

अवी-झूठ बोला तभी तो तुम बच गयी

सविता-कैसे

अवी-मैं ने तुम्हारे पति की हालत देख कर तुम्हारे बारे मे बताने का फ़ैसला किया. पर ऐसा करने से तुम ग़लत साबित होती इस लिए तुम्हारे पति को झूठ कहा.

सविता-मतलब सब समझ रहे हैं कि मेरा रेप हो रहा है.

अवी-हाँ, इस लिए तो तुम्हारा पति तुम्हे गले लगाकर रो रहा था.

सविता-इस का मतलब है,

अवी-कि सब समझ रहे हैं कि तुम्हारी कोई ग़लती नही है.

सविता-ये पहले बता देते तो मैं तालाब मे जंप थोड़े ही मारती,अच्छा हुआ तुम ने मुझे बचा लिया.बिना वजह मैं अपनी जान दे रही थी

अवी-अगर तुम मर जाती तो सब समझते कि तुम्हारी भी ग़लती है इस लिए मैं तुम्हे बचा रहा था.

सविता-थॅंक्स, चलो यहाँ से ,मुझे अपने पति से मिलना है.

अवी-ज़्यादा खुश होकर कोई ग़लती मत कर देना.हमे यहीं रुक कर सब का इंतज़ार करना होगा. तुम्हारी और मेरी बातें एक जैसी होनी चाहिए

सविता-हाँ, बोलो तुम ने मेरे पति को क्या कहा है.

अवी-मैने ने कहा कि मैं ने तुम्हे बचाने की कोशिस की थी पर बचा नही पाया. फिर कुवरसिंघ तुम्हे खंडहर मे ले आया.

सविता-फिर क्या बताया

अवी-फिर क्या था , तुम्हारे पति ने तुम्हारी चीख सुनी,और तुम्हे दर्द मे देख कर समझ गये कि तुम्हारा रेप हो रहा है.

सविता-हाँ वो पहली बार दर्द होता है इस लिए चीख निकल गयी. तो अब जाकर मुझे अपने पति को बताना है कि मेरा रेप हो रहा था

अवी-ऐसा मत करना. खुद बताने से गड़बड़ हो जाएगी.

सविता-वो क्यूँ?

अवी-बताता हूँ , मैं जैसा कहूँ वैसा करना होगा तब तुम बच सकती हो

सविता-बताओ मुझे क्या करना है.

अवी- देखो ,मैं ने तुम्हारे पति को कहा कि तुम्हारा रेप हो रहा है. तुम्हारे पति ने तुम्हारी चीख सुनी, तुम्हे ऐसी हालत मे देखा है, तुम्हे दर्द होते हुए देखा. तुम कुवरसिंघ को अपने उपर हटने को कह रही थी जिस से तुम्हारे पति को लगा कि तुम विरोध कर रही हो.ऐसे मे तुम कुछ मत बताना बस मेरी कहानी बता कर इतना कहना कि वो तुम्हारा रेप कर रहा था.

सविता-समझ गयी

अवी-एक बात तुमने अच्छी की

सविता-कौन सी

अवी-मरने की. इस से तुम्हारे पति को लगेगा कि तुम इस घटना की वजह से स्यूयिसाइड कर रही थी.

सविता-हाँ,ये तो अच्छा हो गया.

अवी-और एक बात ,तुम्हारे पति ने अगर कुवरसिंघ का कॉंडम देख लिया तो गड़बड़ हो सकती

सविता-हाँ, ये तो मैं ने सोचा नही.

अवी-इस पे भी एक सल्यूशन है.

सविता-क्या?

अवी-तुम बताना कि उसने कुछ दिन पहले रेप किया था ,इस बार वो रेप मे फँसना नही चाहता था इस लिए शायद उसने कॉंडम इस्तेमाल किया होगा. डीएनए टेस्ट से बचने के लिए

सविता-तुम बहुत स्मार्ट हो

अवी-और एक बात

सविता-अब क्या है.

अवी-तुम्हारी सास को यहाँ बुलाया है, अपनी सास को कुवरसिंघ का नाम बताना, ताकि वो समझ जाए कि ये पहले भी रेप कर चुका है.जिस से तुम पूरी तरह से सेफ हो जाओगी.

सविता-हाँ मेरी सास को पता है कुवरसिंघ के बारे में ,मेरी सास ने ही मुझे बताया था.

अवी-और कोई खंडहर मे चद्दर के बारे मे पूछेगा तो

सविता-तो

अवी-बोल देना कि कुवरसिंघ काफ़ी दिन से तुम पे नज़र रखे हुआ था. उसने पूरी तैयारी करके रखी थी. ये बात तुम्हारे देवर को पता है कि कुवरसिंघ तुम पे नज़र रखे हुए था.

सविता-हाँ, मेरे देवर ने मुझे उस से दूर रहने को कहा था.

अवी-लो हो गयी तुम्हारी मदद,अब जैसा कहा है वैसा करना,

सविता-थॅंक्स, तुम ने मेरी बहुत मदद की, तुम्हारा ये अहसन मैं ज़िंदगी भर नही भूलूंगी. मेरी जान तुम्हारी वजह से बच गयी.

अवी-अभी काम पूरा नही हुआ.

सविता-अब क्या बाकी है

अवी-तुम्हारा रेप हुआ है ऐसा दिख नही रहा है.

सविता-मैं समझी नही

अवी-तुम्हारे कपड़े फटे हुए नही है ,और तुम्हारे उपर ज़ोर ज़बरदस्ती के निशान नही है.

सविता-ये तो मैं ने सोचा ही नही.

अवी-कुछ नही होगा, अब फाड़ देते है.

सविता-वो ठीक है पर मेरे पति ने मुझे देख लिया है,तब मेरे कपड़े ठीक थे

अवी-तब हालात ऐसे थे कि किसी ने इस बात पर ध्यान नही दिया होगा.

सविता-लाओ मेरे कपड़े ,थोड़े फाड़ देती हूँ.

अवी-ऐसा नही कर सकते, तुम्हारे कपड़े ,तुम्हारा बदन पर निशान सही जगह पर होने चाहिए.

सविता-तो क्या करेंगे

अवी-तुम कपड़े पहन लो ,मैं सही जगह से फाड़ दूँगा और निशान बना लूँगा.

सविता-ये ठीक रहेंगा. मैं निशान नही बना पाउन्गी.तुम बना दो

अवी-लेकिन एक बात याद रखना, ग़लती से हॉस्पिटल या पोलीस मे मत जाना .और किसी को जाने मत देना ,नही तो मैं फँस जाउन्गा.

सविता-तुम उसकी टेन्षन मत लो मैं वो संभाल लूँगी. और थॅंक्स मेरी मदद करने के लिए,सच मे तुम्हे भगवान ने भेजा है मेरी मदद करने के लिए.

 


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सविता-तुम उसकी टेन्षन मत लो मैं वो संभाल लूँगी. और थॅंक्स मेरी मदद करने के लिए

मैं ने सविता के कपड़े उठा लिए और सविता को दे दिए. सविता के कपड़े अभी भी गीले थे.

सविता-उधर देखो

मैं ने दूसरी तरफ देखा और सविता ने कपड़े पहन लिए.

सविता-लो हो गया. अब फाडो मेरे कपड़े

अवी-तुम घास पर लेट जाओ.

सविता-लेटने की क्या ज़रूरत है,

अवी-तुम खड़ी नही हो सकती, और वैसे भी तुम कुवरसिंघ के साथ लेटी हुई थी.

सविता ने मेरी बात मान ली और घास पर लेट गयी.

मैं सविता के उपर आ गया.और उसकी चूत मार रहा हूँ इस पोज़िशन मे आ गया.

और सविता के ब्लाउज को कंधो से उपर से हल्का फाड़ दिया और अपने नाख़ून से सविता के बदन पर खरॉच दिया.

सविता-आराम से करो ,

नाकुन से खरोचने से सविता को दर्द हुआ.

फिर मैं ने ब्लाउस के 2 हुक तोड़ दिए.और एक बूब्स को बाहर निकाल लिया.

सविता-ये बाहर क्यूँ निकाला ,तुम करना क्या चाहते हो

अवी-मैं देख रहा था कि हुक टूटने के बाद बूब्स बाहर निकलते है कि नही.

सविता-ठीक है,

सविता ने अपने बूब्स वैसे ही रहने दिए.

ये सब करते हुए और थोड़ी देर पहले सविता को किस करने से मेरा लंड खड़ा हो गया.

मेरा लंड सविता की चूत को टच हो रहा था पर मैं अपने काम मे लगा हुआ था.

मैं ने सविता के पेटिकोट को हल्के से घुटने से फाड़ दिया. ज़्यादा फाड़ना मतलब शक पैदा हो सकता था.

फिर मैं ने नाडे को एक झटके मे खीच कर निकाल लिया. ऐसा करने से पेटिकोट एक जगह से थोड़ा फट गया ,और सविता की चीख निकली.

सविता-ये क्या किया .मुझे दर्द हो रहा है.

अवी-रेप करने वाला पेटिकोट एक झटके मे निकलता है. और ऐसे करने से तुम्हारे बदन पर निशान पड़ गये.

सविता-हो गया

अवी-गर्दन पे कुछ निशान बना देता हूँ

मैं वापस सविता के उपर आ गया.इस बार हालात अलग थे.

मेरा लंड खड़ा हो चुका था. सविता का पेटिकोट खुल चुका था,चूत का हिस्सा थोड़ा दिख रहा था.ब्लाउस से एक बूब्स बाहर निकाला था.

इस बार मेरा लंड सविता की चूत पर अच्छे से रगड़ रहा था.

ठंडी ठंडी हवा हमारे बदन के साथ खेल रही थी. और हमारे बदन एक दूसरे से रगड़ कर गर्माहट पैदा कर रहे थे.

मैं सविता के उपर आ गया.सविता के बूब्स मेरी चेस्ट के नीचे दब रहे थे.

मेरा लंड झटके मार रहा था जो सविता को पता चल गया.

मैं उसकी गर्दन के पास आते उसे मेरी गरम साँसे गरमाहट दे रही थी

मैं ने सविता की गर्दन पर काट लिया.

सविता नरम बदन पर काटते ही मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं उसे प्यार करूँ , उसके बदन को कच्चा खा जाउ

उसके टेस्टी बदन का टेस्टी मेरे मूह को मिलते मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा

मेरे दिमाग़ पार्लियामेंट का मैदान हो गया जहाँ पर एक दिमाग़ कह रहा था कि सविता को कच्चा खा जाउ दूसरा दिमाग़ कह रहा था कि अपने प्लान के बारे मे सोचो

मैं पूरी तरह से कन्फ्यूज़ हो चुका था

सविता मेरे नीचे आधी नंगी लेटी हुई थी , सविता कपड़ो मे सब को घायल कर देती है यहाँ तो वो आधी नंगी है

मेरा क्या हाल हो रहा है ये मैं ही जानता हूँ

मैं ने कुछ किया तो सविता को बुरा लग जाएगा , सविता की मर्ज़ी के बिना मैं कुछ नही करूँगा

सविता उस हालत मे नही है कि मेरे साथ कुछ करने का सोचे

या सोच भी सकती है , औरत के दिमाग़ मे क्या चल रहा होता है ये भगवान

भी नही बता सकता

एक पल मे ममता का सागर बन जाती है तो दूसरे पल सूनामी बन कर सब को तबाह कर सकती है

मैं ने सविता के गर्दन पर काट तो दिया पर मैं ने एक प्रेमी की तरह उसके बदन पर काटा था

उसका का असर होगा ये मुझे जल्दी पता चल गया

उसकी गर्दन पर काटते ही सविता ने इस बार अपनी आँखे बंद कर ली.

और ये नही कहा कि उसे दर्द हो रहा है.

मुझे रोका भी नही

सविता के उपर सेक्स का नशा चढ़ने लगा.

सविता सेक्स की देवी थी. उसपे मेरा नशा छाने लगा था.

मेरे प्यार करने से पत्थर भी पिघल जाता है, रोते हुए को हँसना सिखा देता है मेरा प्यार

मुझसे प्यार करते हुए अपने सारे दर्द को भूल जाते है , बस याद रहता है मेरा प्यार करना

मेरे प्यार ने अब तक कितनों को मेरे दिवाना बना दिया था

जितनों को मैं ने प्यार किया वो बार बार मुझे प्यार करना चाहती है , मेरे ना होते वो उस प्यार को याद करते है जो मैं ने उनको दिया है

सविता भी मेरी दीवानी बन रही थी

जैसे सविता को देख कर सब उस प्यार करना चाहते है वैसे ही मुझ से प्यार करने के बाद सब मेरी बन कर रहना चाहती है

मेरे शरीर की गरमी उसके दिमाग़ को काम करने से रोक रही थी.

उसका दिमाग़ अब सिर्फ़ मेरे बारे मे सोच रहा था

सविता मेरी धड़कनो को अपने धड़कनो से मिला कर एक बना रही थी.

मेरा लंड जिस तरह सविता की चूत पे रगड़ रहा था उस से सविता की आँखे अपने आप बंद हो गयी.

सविता मेरे लंड को अपनी चूत पर फील करते ही मेरे लंड की ताक़त को महसूस करने लगी

मैं ने 2 3 जगह पर काटने के निशान बना दिए.

फिर से गर्दन पर काटने से सविता ने अपनी आँखे बंद कर ली थी

वो मेरे काटने के मीठे दर्द को अंदर तक महसूस कर रही थी

उसका बदन मेरे मीठे दर्द को फील करके मेरे शरीर से रगड़ रहा था

सविता की आँखे बंद थी और उसकी साँसे तेज़ चल रही थी.

उसकी गरम गरम साँसे मुझे गरमाहट दे रही थी

सविता ने अपने हाथो मे घास को पकड़ लिया था ,

सविता की मुट्ठी जितनी टाइट थी उतना उस पे मेरा जादू चढ़ रहा था

मेरे काटने से उसे मीठा दर्द हो रहा था.

ऐसा दर्द जो वो कुवरसिंघ से पाना चाहती थी.

कुवरसिंघ से उसे वो दर्द नही मिला पर मेरे काटने से सविता पूरी मस्ती मे झूमने लगी

सविता भूल गयी थी कि थोड़ी देर पहले क्या हुआ था.

मेरा जादू ऐसा था कि उसे मेरे अलावा कुछ और सोचने नही दे रहा था

मैं ने उस पर ज़्यादा ध्यान नही दिया और अपना काम करता गया था

क्यू कि एक औरत सब आबाद कर सकती है तो सब कुछ बर्बाद भी कर सकती है

हर कोई कहता है कि ओसामा बिन लादेन सबसे ख़तरनाक इंसान है , जिस ने भी ये कहा होगा उसे औरत की ताक़त का पता नही होगा ,

सविता के गर्दन पर निशान बनाने के बाद मैं दूसरी जगह पर निशान बनाने लगा

मैं सविता के बूब्स पर निशान बनाने लगा .

सविता के बूब्स पर काट ते ही सविता के मूह से शीष्कारी निकल गयी.

जिस का मुझे डर था वही हो रहा था

इसमे सविता की ग़लती नही है, मैं ही उसे बहका रहा था

मैं नॉर्मल तरीके से काटने की जगह बड़े प्यार से काट रहा था जिस से सविता खुद पे कंट्रोल नही रख पा रही थी

सविता पे सेक्स का नशा हावी हो रहा था.

सविता एक सेक्स की देवी थी. उसे हर कोई पाना चाहता था.

मैं बस अपना काम कर रहा था. मेरा सविता के साथ सेक्स करने का कोई इरादा नही था.

पर मेरा लंड तो कुछ और चाह रहा था.

ये मैं सोच रहा था पर सविता क्या सोच रही थी ये मैं महसूस कर रहा था

सविता की शीष्कारी निकल गयी पर मैं ने उसे नज़र अंदाज़ कर दिया.

क्यू कि मुझ पे सविता की खूबसूरत का नशा हावी हो रहा था

पर सविता ने शीष्कारी लेने के बाद मेरे सर पर हाथ रख दिया और मेरे बालों को सहलाने लगी.

ये मेरे लिए एक मेसेज था कि मैं उसे प्यार करूँ

जैसे मैं उसे शांत करने के लिए किस कर रहा था पर किस करते हुए मैं भूल गया था कि मैं किस क्यूँ कर रहा हूँ , मैं सविता को किस करते हुए पूरी तरह से खो गया था

अब भी वही हो रहा है , मैं अपने प्लान से भटक रहा था

मैं सविता के बदन पर निशान बना रहा था पर निशान बनाते हुए उसकी खूबसूरती मे खोता जा रहा था

सविता जैसी सेक्स की देवी के सामने मैं कितने देर कंट्रोल कर के खुद को रख सकता था

सविता की शीष्कारिया और उसका मेरे बालों को सहलाना इस बात का सबूत था कि वो मुझे आगे बढ़ने को कह रही थी

सविता खुद को रोक नही पा रही थी ऐसे मे क्या मैं खुद रोक पाउन्गा.

जैसे सविता मदहोश हो रही थी वैसे मैं भी मदहोश हो रहा था.

मैं ने सविता का हाथ अपने उपर से हटा दिया.

और सविता के होंटो पर एक किस किया

ये देखने के लिए कि वो क्या सोच रही है

मेरे किस करते करते सविता ने भी मुझे एक किस करके बता दिया कि वो क्या चाहती है

मे बी सविता मुझे थॅंक्स कहना चाहती हो

मैं ने उसकी ज़िंदगी बचाई है , उसे जीने का रास्ता बताया है इसीलिए शायद वो मुझे थॅंक्स कह रही हो

छोटी चाची कहती है कि किसी के अहसान जल्दी चुका देना और दूसरो को अपने अहसान चुकाने जा पूरा मोका देना

अहसान के नीचे आने के बाद कर कोई चैन से नही जी सकता

जितनी जल्दी हो सके उसको अपने अहसान चुकाने देना चाहिए

ताकि उसके दिल से बोझ हल्का हो सके

सविता के किस करते ही मैं उसके चेहरे को देखने लगा

मैं छोटी चाची की बताई हुई बातों पे चलता हूँ

ऐसे मे छोटी चाची की बातों का इस्तेमाल करने का समय आ गया है

 
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सविता मुझसे क्या चाहती है मैं समझ गया था

सविता ने मुझे किस करके बता दिया कि वो क्या चाहती है

मैं सविता के हसीन चेहरे को देख रहा था , सविता अपनी आँखे बंद करके तेज सासे ले रही थी

उसकी सासे इतनी तेज चल रही थी कि उसकी आवाज़ 20 फीट से सुनाई देंगी

मैं ने सविता के माथे पे एक किस किया

सविता ने अपनी आँखे नही खोली उसकी धड़कने तेज चलने लगी थी

फिर मैं ने सविता के होंटो पे किस किया और किस करके उसके नशीले होंटो को चूसना सुरू किया

मुझे लगा नही था कि सविता मुझे उस तरह मिल जाएगी ये मेरे प्लान का हिस्सा नही था

पर सविता खुद मुझे प्यार करने को कह रही है तो मैं क्यू पीछे हटु

सविता को प्यार करके अपना प्लान आगे बढ़ा सकता हूँ

सविता को आख़िर मैं ने पा लिया, सविता ने खुद मुझे स्वीकार किया इस से ज़्यादा मुझे क्या चाहिए था.

सविता के नाज़ुक रसीले होंटो को चूसने मे इस बार बहोत मज़ा आ रहा था.क्यू कि सविता भी मेरा साथ दे रही थी.

पिछली बार सविता मेरे किस को एंजाय कर रही थी पर रेस्पॉन्स नही दे रही थी

पर इस बार सविता को किस करते ही वो मेरे होंटो को चूसने लगी

मैं ने ये सोचा नही था कि सविता के साथ चुदाई करूँगा.अगर सोचा होता तो पूरी तय्यारी के साथ आता

मैं तो खंडहर मे सविता को चुपके से ये बात बताने वाला था कि कुवरसिंघ उसका रेप कर रहा है.

पर सविता ने भाग कर प्लान मे नया ट्विस्ट लाया.और मेरा काम आसान हुआ.

आसान नही फ़ायदेमंद रहा. सविता जो मिल गयी.

सविता के रसीले होंटो मे रस की कोई कमी नही थी. सविता का रस पीने से साथ हम एक दूसरे की जीभ के साथ खेल रहे थे.

सविता तो सेक्स की देवी थी, जितना मैं उसे किस करने मे जोश दिखा रहा था उस से ज़्यादा जोश से वो मुझे किस कर रही.

मैं किस करते हुए उसके ब्लाउस को निकाल रहा था

सविता इस मे मेरा पूरा साथ दे रही थी , उसका ब्लाउस नही निकाला तो भी चल जाता पर उसके बदन को मैं अच्छे से फील करना चाहता था

सविता कल इस मेले मे नज़र नही आएगी पर इस हसीन पल को मैं हमेशा याद करूँगा

सविता का ब्लाउस निकल कर उसका बदन मेरे शरूर से रगड़ने लगा

उसके बूब्स जिसको टच करने के लिए लोग जान देते है वो मेरे शरीर से रगड़ रहे थे

सविता अपने बदन को मेरे शरीर से रगड़ कर गर्मी पैदा कर रही थी

सविता के ऐसा करने से उसका पेटीकोटे नीचे सरक रहा था

मुझे सविता का पेटिकोट नही निकालना पड़ा वो अपने आप सविता के बदन से दूर चला गया

सविता का बदन और मेरे शरीर रगड़ कर महॉल को गरम कर रहे थे

सविता पूरी नंगी हो चुकी थी और मैं आधे नंगा उसके उपर आकर किस कर रहा था

हमारे बदन एक दूसरे से रगड़ने कर गर्मी पैदा कर रहे थे. उस गर्मी मे हम जल रहे थे और साथ मे जंगल की ठंडी हवा भी गरम हो रही थी.

मैं ने घास को पेड़ के पीछे बिछा दिया था.क्यू की सविता के देवर को लगे कि उसकी भाभी को मैं ने सेफ जगा रखा है , उसका अलग फ़ायदा हो रहा था , अब अगर सविता का देवर आया तो हमे थोड़ा टाइम मिल जाएगा ,खुद को ठीक करने का.

मैं जो करता हूँ वो किसी ना किसी तरीके से मेरे काम आ जाता है

सविता के देवर के बारे मे सोचते मेरे दिमाग़ मे एक डर छाने लगा

ये मैं क्या कर रहा हूँ. अगर स्टेप बाइ स्टेप करता रहा तो बहोत समय लग जाएगा ,हमारे पास उतना समय नही है.

मुझे एक समय पर 2 काम करने होगे

मैं ने सविता को किस करते हुए उसके कपड़े तो निकाल दिए थे

वैसे ही मुझे अपने कपड़े निकालने होगे

वरना इधर मैं सविता को प्यार कर रहा हूँ और अचानक मुझे पता चले कि सविता का देवर मेरे पीछे खड़ा है

मैं ने किस करते अपने पैंट के हुक और ज़िप खोल कर पैंट को थोड़ा नीचे कर दिया

सविता मेरे होंटो को चूस रही थी जिस से मैं ने अपने हाथ से पैंट और अंडरवेर निकाल दी

अंडरवेर निकलते ही लंड बाहर आकर सविता की चूत को किस करने लगा

सविता के नशीले होंटो मे रस की कोई कमी नही थी

अभी थोड़ी देर पहले कुछ करके रस पी लिया था फिर भी सविता के होंटो मे काफ़ी रस बचा हुआ था

मैं वो भी रस पीने लगा

सविता के होंटो को अपने होंटो के बीच मे लाकर उसके होंटो को मरोड़ कर रस निकालने लगा

सविता भी मेरा पूरा साथ दे रही थी

सविता अपने होंटो को बदल बदल कर मेरे मूह मे दे रही थी

साथ मे अपनी जीभ को मेरे मूह मे डाल कर चूसने को कह रही थी

सविता के होंटो को चूसने के साथ उसके जीभ को चूस कर उसे मज़ा देने लगा

साथ ही अपनी जीभ उसके मूह मे डाल कर उसे मेरी जीभ चूसने दे रहा था

हमारी जीभ प्यार वाला गेम खेल रही थी

जीभ के साथ खेलते हुए हम एक दूसरे के होंटो को चूस रहे थे

मेरे साथ साथ मेरा लंड भी सविता की चूत को किस कर रहा था

मेरा लंड सविता की चूत को बड़े प्यार से किस कर रहा था

सविता के हाथ मेरे बालो मे घूम रहे थे

वो पूरी तरह से मेरे प्यार मे खो चुकी थी

किस करता रहूँगा तो मेरा लंड भूका रह जाएगा

मैं ने किस करना बंद कर दिया

और खड़ा हो कर सविता की सुंदरता को

देखने लगा

सविता अपनी आँखो को बंद किए हुए थी पर अपने मन से मुझे सवाल पूछ रही थी , और मैं उसका जवाब दे रहा था

सविता-किस करना बंद क्यू किया

अवी-चुदाई करते हुए किस करता हूँ ,हमारे पास समय कम है

सविता-ये कपड़े कब निकाले

अवी-किस करते हुए निकाले , हमारे पास समय कम है ,

मैं सविता के बदन को देख रहा था और उसके कपड़ो को उठा कर पास के पत्थर पे सुखाने को रख दिए

सविता-मेरे कपड़े

अवी-तुम्हारे कपड़े सुखाने के लिए रखे है

सविता-अगर कोई आ गया तो

अवी-तुम शौल से अपने बदन को छुपा देना

सविता-समझ गयी. तुम स्मार्ट हो,

अवी-और तुम सेक्स की देवी

सविता के मन ने जितने सवाल पूछे उतने जवाब उसे दे दिए

और मैं ने सविता के पैरो को फैला दिया.

पैरो को फैलाने से सविता की चूत पर चाँद की रोशनी पड़ गयी.

चाँद की रोशनी चूत पे पड़ते ही चूत ऐसे चमक रही थी कि उसकी चमक ने मेरी आँखो को अपने वश मे कर लिया.

सविता का दूध सा सफेद बदन ,उस पे गुलाबी चिकनी चूत ,वो भी चाँद की रोशनी मे देखना एक ख्वाब सा लग रहा था.

सविता की चूत ऐसी थी कि बस देखते रहने का मन कर रहा था.

सविता की चूत ने खुद मुझे अपने पास बुला लिया.

मैं तो यही चाहता था .सविता की चूत के पास जाते उसकी खुसबू मेरी रग रग उसके नशे मे झूमने लगी.

उसके खुश्बू के नशे मे मैं ने सविता की चूत पर एक किस किया.

किस करते मैं खुद को किस्मत वाला समझ ने लगा

सविता जैसी अप्सरा को मुझे प्यार करने को मिल रहा था

ऐसी सेक्स की देवी को ज़िंदगी भर प्यार करने का मन हो रहा था

मेरे पास टाइम कम था पर मैं थोड़ी देर सविता की चूत चूस सकता हूँ.

मैं ने अपनी जीभ को बाहर निकाल कर सविता की जादुई चूत का टेस्ट लेना सुरू किया.

सविता की चूत को चाट कर मैं ने उसके नशीलेपन का पता लगा लिया. एक साथ 100 लंड का पानी निकाल देने का दम रखती है.

मैं ने बड़े प्यार से सविता की चूत मे अपनी जीभ डाल कर दाने को चाटने लगा.

मेरे ऐसा करते सविता पे मस्ती का भूत सवार हो गया.

खंडहर की भूतनी सविता के अंदर जा चुकी थी कि,वो भूतनी मुझे खा रही थी

सविता अपने सर को इधर उधर घुमा कर शीष्कारिया ले कर मुझे बता रही थी कि उसे मेरा प्यार करना पसंद आया है.

सविता ने अपने पैरो से मेरे सर को पकड़ लिया ताकि मैं चूत चूसना बंद ना करूँ.

मैं क्यू बंद करूँगा. आधी रात मे जंगल के बीच मे ठंडी हवा का मज़ा लेते हुए गरम चूत चूसना कौन बंद करेगा.

मैं तो जितनी हो सके उतनी जीभ सविता की चूत मे डाल कर चूत को चाट रहा था चूस रहा था चोद रहा था.

जंगल मे जुगनू हमारे पास आकर अपनी लाइट हमारे उपर डाल रहे थे.

तालाब से आती हुई ठंडी हवा मुझे सविता की गरम चूत चूसने पे मज़बूर कर रही थी.

सविता भी जंगल मे मंगल मनाने का सोच रही थी.

सविता की चूत चूसने मे मैं पूरा समय लगा दूँगा तो उसका देवर आने तक मैं सविता की चुदाई पूरी नही कर पाउन्गा.

सविता के मिलने के बाद मैं अपने सारे अरमान पूरे करना चाहता था ,पर समय की कमी की वजह से जितना मिल रहा है उसी मे खुश था.

मैं ने लास्ट मे सविता की चूत पर किस किया.चूत पर किस करने से सविता के मूह से शीष्कारी निकल गयी.

शायद सविता को चूत चूसवाना पसंद है तभी एक किस ने शीष्कारी निकाल दी

सविता की चूत चूस कर मैं ने उसे पूरी तरह से अपना दीवाना बना दिया

सविता की चूत तो मुझे चूसते रहने को कह रही थी

पर अब लंड के प्यार करने का समय आ गया था

मैं ने अपने लंड को सविता की चूत पे रख दिया. मैं ने पहली बार सविता को देखा तब से इस समय का इंतज़ार करने लगा था. मुझे लगा था कि सविता मुझे कभी नही मिलेगी. पर सविता ने खुद मुझे अपना बदन सौंप दिया.

मैं ने अपने लंड को सविता की चूत से मिलन करवा दिया.

लंड को पहले सविता की चूत को फील करने दिया.

लंड को चूत पे रगड़ने लगा.सविता की चूत को अपने लंड का दीवाना बनाने लगा.

चूत पे मेरे लंड की दीवानगी छाते ही मैं ने धीरे धीरे स्टेप बाइ स्टेप अपने लंड पर दबाव लाना सुरू किया.और लंड चूत मे धीरे धीरे अपनी जगह बनाने लगा.

चूत ने मेरे लंड के लिए अपने गेट खोल दिए. और प्यार से मेरे लंड का स्वागत करने लगी.

सविता ने थोड़ी देर पहले कुवरसिंघ के साथ चुदाई की थी. अब देखना है कुवरसिंघ ने क्या किया है.

लंड 4 इंच तक आराम से सविता की चूत मे चला गया.सविता के पति का लंड भी दमदार था जिसकी वजह से सविता की चूत थोड़ी खुली हुई थी.

सविता ने आधा लंड आराम से लिया और अब एक झटके की बारी थी.

मैं ने एक जोरदार झटका मार कर अपना लंड सविता की प्यारी चूत मे डाल दिया.

सविता के मूह से चीख निकलने वाली थी लेकिन मैं ने सविता के होंटो को अपने होंटो से लॉक कर दिया.

ऐसा करते ही सविता ने अपने हाथों को मेरे पीठ पर रख कर अपने उपर दबा दिया

सविता तो नही चिल्लाई पर उल्लू ने चीखना सुरू किया.

जंगल मे आधी रात मे इस तरह उल्लू के चिल्लाने से किसी को भी डर लगेंगा .पर सविता को डर लग रहा था मेरे लंड का .

मेरे लंड की ताक़त का उसे पता चल गया था.

मेरा लंड ऐसा था कि उसकी ताक़त के सामने चूत झुकती नही थी मेरे लंड को प्यार करती थी.

फाइनली मेरा लंड सविता की चूत मे चला गया. मुझे लगा था कि सविता मुझे कभी नही मिलेंगी. पर कहते हैना कभी कभी बिना कुछ किए सपना पूरा होता है. अगर काम अच्छा करो तो फल अच्छा मिलता है.आज मेरा सपना पूरा हुआ.

मैं ने सविता की चूत मे लंड डाल दिया .और सविता के होंटो को चूसने लगा.

होंटो को चूसने के साथ मैं अपनी कमर को हिलाने लगा.

सविता की चुदाई एक बढ़िया जगह हो रही थी.

रात के अंधेरे मे

ठंडी हवाओं के साथ

जंगल के बीच मे

तालाब के पास

पेड़ के नीचे

घास पर

इतना कुछ हो जाने के बाद भी सविता इस प्यारी लोकेशन मे चुदाई को एंजाय कर रही थी.

सविता की चूत मे धक्के मारने के साथ जो आवाज़ आ रही थी वो जंगल को और डरावना बना रही थी.

उपर से उल्लू भी चीख रहा था .हमारी चुदाई की पच पच आवाज़ जंगल मे गूँज रही थी.

मैं ने सविता के हाथो को अपने उपर से अलग किया और. उसके हाथों पर अपने हाथ रख कर चूत मे धक्के मार रहा था.

सविता की नशीली चूत मे मेरा लंड अपना वीर्य डालने के लिए बेताब था

मैं ने अपने लंड को चूत की गहराई को अच्छे से फील करने के लिए लंबे धक्के मार रहा था.

मेरे ऐसा करने से सविता का बदन मेरे धक्का ,मेरे लंड को ज़्यादा अंदर लेने के लिए उपर हो जाता .

सविता की चूत को चूस कर मैं ने गरम कर दिया था अब बस लंड को चूत से गरम पानी निकालना था.

और सविता की चूत से पहला अमृत जल्दी निकल गया.

सविता ने अपने पैर से मेरी कमर मे कस लिया .और झड़ने लगी.

सविता के झड़ते ही मैं ने सविता के होंटो को छोड़ दिया .सविता लंबी लंबी सास लेने लगी.

चाँद अपनी चाँदनी के साथ हमारे मिलन को देख रहे थे.

चाँदी की रोशनी मेरे लंड को चूत मे जाने का रास्ता दिखा रही थी.

सविता को मैं ने सासे लेने दिए पर अपने धक्के बंद नही किए.

मैं ने सविता के बूब्स को चूस्ते हुए धक्के मारना जारी रखा.

सविता के बूब्स का शेप पर्फेक्ट था. उसके निपल आराम से मेरे मूह मे आ रहे थे .

ऐसे बूब्स थे कि खुद चूसने को तय्यार रहते थे.

सविता के बूब्स चाँद की रोशनी मे चमक रहे थे .जिस से मैं सविता के बूब्स को प्यार से दबाते हुए चूस रहा था.

सविता मेरे प्यार करने के तरीके से घायल हो गयी. और अपनी कमर को हिलाने लगी.

अगर मेरे पास समय होता तो सविता की एक चुदाई करने के लिए पूरी एक रात लगा देता.

सविता की तरह सविता की चूत भी जादुई थी,पहले तो लंड को आराम से ले लिया पर अब लंड को कस के पकड़े हुई थी ऐसा लग रहा था.

सविता के बदन को अपने शरीर के नीचे मसल्ने मे मज़ा आ रहा था.

सविता की चूत मे मैं ज़्यादा ज़ोर से धक्के नही मार रहा था पर जो कर रहा था उसका मज़ा दोनो को बराबर आ रहा था.

ऐसी नशीली चूत के पीछे हज़ारो लंड होगे पर आज ये चूत मेरे नीचे थी.

सविता का ख़याल रखते हुए मैं धक्के मार रहा था.उसके पैर मे चोट लगी है इस बात का पूरा ध्यान रख रहा था.

सविता के नाज़ुक बदन को कम से कम दर्द हो और ज़्यादा से ज़्यादा प्यार मिले इसका पूरा ध्यान रख रहा था.

कम समय मे मैं सविता के बदन के हर एक हिस्से का मज़ा लूँ इसका पूरा ध्यान रख रहा था

.

धक्के मारते हुए होंटो को चूसना,

धक्के मारते हुए बूब्स को मसलना

धक्के मारते हुए बूब्स को चूसना

धक्के मारते हुए सविता के बदन को अपने शरीर से रगड़ना

चूत के हर एक हिस्से पे अपनी पेन्सिल से नाम लिख रहा था

सविता थी तो सेक्स की देवी ना, सविता ने फिर पानी छोड़ दिया.

 
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सविता के पानी छोड़ते ही मैं ने धक्के मारना और बूब्स चूसना रोक दिया.

मेरे रुकते ही सविता की चूत मेरे लंड से बात करने लगी

सविता की चूत-तुम्हारा हो गया

अवी का लंड-अभी नही

सविता की चूत-फिर रुके क्यू

अवी का लंड -क्या कुवरसिंघ ने तुम्हारा सपना पूरा किया

सविता की चूत-नही बस शुरुआत की थी कि तुम सब आ गये थे

अवी का लंड-मैं करूँ तुम्हारा सपना पूरा

सविता की चूत-सच मे मेरा सपना पूरा करोगे.

अवी का लंड -हां, अगर तुम चाहो तो

सविता की चूत -मैं ने अपने पति को कितनी बार कहा पर उसने कुछ नही किया. कुवरसिंघ को कितनी बार कहने के बाद वो तय्यार हो गया .और तुम ने खुद मुझे पूछ लिया. करो मेरी इजाज़त है,

मैं ने सविता की चूत से लंड निकाल लिया और सविता की गंद पर रख दिया..

सविता की गंद जिसे साड़ी के उपर से देखने पे पानी निकल जाता है.

सविता की गंद जिसे एक बार टच करने के लिए लोग उसके पति के हाथ की मार खाने को तय्यार हो जाए.

ऐसी गंद मुझे मिल गयी है. ऐसी गंद को मेरा लंड खोलने जा रहा है.

सविता की चूत के पानी से मेरा लंड गीला था .जिस से मैं ने लंड को गंद पे रगड़ना सुरू किया.

अवी का लंड -तुम्हे दर्द होगा.

सविता की गंद -तुम करो ,मैं बर्दास्त कर लूँगी. तुम ने मेरी जान बचाई, मुझे बदनाम होने से बचाया, मुझे मेरे पति से मिलाया. अब मेरा सपना पूरा कर रहे हो. तुम्हारे इतने उपकर हो गये मेरे उपर, तुम करो

मैं ने लंड पे दबाव डालना सुरू किया .पर लंड फिसल रहा था.

सविता की गंद मेरे लंड के साथ पहले खेलना चाहती है

मैं ने अपने लंड को सविता की गंद पर रगड़ कर उसके गंद के छेद को गरम कर दिया

गरम चीज़ जल्दी कंट्रोल होती है

जैसा चाहो वैसा शेप दे सकते है , सविता की गंद गरम होते ही मैं ने फिर से लंड को गंद के छेद पर रखा और एक जोरदार झटका मार दिया.

लंड का टोपा सविता की गंद मे चला गया. सविता को दर्द हुआ पर उसने मेरे लिए दर्द बर्दास्त किया.

इस बार वो चिल्ला कर ग़लती नही करेगी

उसे अपना सपना पूरा करना है , मेरे अहसान चुकाने है अपना, कल का सूरज उसके लिए नयी सुबह लेके आने वाला है

इस काली रात मे जो होना है वो हो जाने देने मे सबकी भलाई थी सबकी, कल से वो सिर्फ़ अपने पति की बन के रहेगी

क्यू कि थोड़ी देर इसी दर्द ने क्या किया उसे पता था.

उसकी टाइट गंद ने मेरे लंड को कस के पकड़ लिया.

मेरा टोपा सविता की गंद मे फस चुका था मेरे लंड की सास रुक गयी थी

लंड को सविता की गंद मे और अंदर जाकर चैन मिलेगा

मैं ने एक और झटका मार कर थोड़ा लंड अंदर डाल दिया

मेरा लंड पूरी तरह से सविता की गंद मे फस चुका था ऐसे मे मेरे और सविता के बीच मे प्यार ट्रान्स्फर करने का पाइप बन गया था मेरा लंड

उसके कमर हिलाते मेरा शरीर भी हिल रहा था

मैं ने भी अपने लंड को उतना ही अंदर रखा ,अभी 3 इंच अंदर जाना बाकी था

पर जितना भी गया था उतना सविता का सपना पूरा करने के लिए काफ़ी था

सविता के होंटो को चूस्ते हुए अपने लंड को सविता की गंद मे अड्जस्ट करने लगा

सविता की गंद पे अपने लंड की मोहर लगानी सुरू की.

जिस तरह मेरा लंड सविता की गंद पे अपना नाम लिख रहा था उसे देखने के लिए उल्लू ने अपनी आँखे बड़ी कर ली.

सविता की चूत के पानी से मेरी पेन्सिल ने उसकी गंद पर अपना नाम लिख दिया.

बदन पर नाम लिखने से दर्द तो होता ही है. उस दर्द को कम करने के लिए मैं ने सविता के होंटो को चूसना सुरू रखा.

सविता ने अपने नाख़ून मेरे पीठ मे गढ़ दिए. और अपने दर्द को कंट्रोल करने लगी.

अगर तेल होता तो सविता को ज़्यादा दर्द नही होता .मैं ने उतने ही लंड को बाहर निकाल कर धीरे धीरे गंद मे डालने लगा.

सविता मेरे लंड को अपनी गंद मे जाने नही दे रही थी.

उसकी गंद इतनी टाइट थी कि मेरा लंड बड़ी मुश्किल से अंदर बाहर हो रहा था.

लेकिन मुझे मज़ा आ रहा था .मेले की सुंदरी की टाइट गंद मारने मे मुझे जो आनंद मिल रहा था उसकी कोई सीमा नही थी.

मैं ने सविता के होंटो को चूसना बंद किया .और उतने ही लंड से सविता की कसी हुई गंद मारने लगा.

उसकी गंद को ऐसे खोलने लगा जैसे सविता चाहती है.

सविता का सपना मैं पूरा कर रहा था .और अपने लंड को मेले की सुंदर गंद का मज़ा लेने दे रहा था.

सविता की गंद मे मेरा लंड जाते ही ऐसा फूलने लगा कि सविता की गंद को मेरा लंड दुगने साइज़ का लगने लगा

मेरा लंड भी सविता की गंद मे जाने की खुशी मे इतना अँधा हो गया कि ,मुझे भूल कर सविता के सपने को याद कर के गंद को प्यार से खोल रहा था.

लंड को अंदर बाहर करने से मुझे मज़ा आ रहा था और सविता को दर्द हो रहा था. पर वो मुझे धक्के मारने को कह रही थी. और मैं भी वही कर रहा था.

सविता की गंद को खोलने का चान्स मुझे मिला ,और मैं ने उस चान्स का गोल्ड बना दिया.

सविता की टाइट गंद मेरे लंड लिए जगह बना रही थी और मैं धक्के मारकर सविता की गंद को जगह बनाने मे मदद कर रहा था.

कुछ देर बाद सविता की गंद मेरे लंड को आराम से लेने लगी.

मेरे लंड ने सविता की गंद को प्यार देना सुरू किया. ऐसा प्यार को वो ज़िंदगी भर याद रखेगी.

मेरा लंड जो एक बार अपने अंदर लेती हो वो बाद मे भीड़ मे हज़ारो लोगो के बीच मे कपड़ो के उपर से मेरे लंड को टच करके पहचान सकती है कि ये मैं हूँ

सविता मस्ती.मे अपनी कमर हिला रही थी

यही मोका था ,मैं सविता के उपर आ गया और उसके होंटो को चूस्ते हुए एक जोरदार झटका मार कर पूरा लंड सविता की गंद मे डाल दिया

झटका मारते ही मौन सविता के उपर झुक कर किस करने लगा.

इस झटके के साथ मेरा पूरा लंड सविता की गंद मे चला गया

मेरा दमदार लंड सविता की गंद मे जाते ही सविता अपने सपने से बाहर निकल गयी

उसका सपना पूरा हो गया

गंद मे मेरा लंड जा चुका था

सपना पूरा होने की खुशी मे या मेरे लंड के दर्द की वजह से सविता का मूह खुल रहा था ये बताना मुश्किल था

सविता का मूह अगर खुल गया तो जंगल डर जाएगा , जंगल को फिर से डराने का मन नही हो रहा था

मैं ने सविता के होंटो को अपने होंटो से मिला दिए

जिस से सविता की चीख मेरे मूह मे दब गयी .उसे दर्द होने लगा पर कुवरसिंघ की तरह मुझे बाहर निकालने को नही कहा.

क्यू कि गंद मे लंड डालने से पहले इतना प्यार जो किया था

पूरा लंड अपने अंदर लेते सविता की आँखो से पानी निकलने लगा. पर उसने मुझे रोका नही. लेकिन मैं ने उसकी चीख रोक दी.

सविता के होंटो को चूस्ते हुए मैं धक्के मारने लगा.

सविता अपना सपना पूरा होने की खुशी मना रही थी. और मेरा पूरा साथ देने लगी.

सविता का जोश देख कर मैं गंद मे धक्के मारने लगा.

मैं ने सविता की चूत फिर कातिलाना गंद भी मार ली ,ये तो मेरे लिए एक सपना था.

जब सपना पूरा होता है तो जो खुशी होती है वो बता नही सकते. यहाँ तो दोनो के सपने पूरे हुए

सविता की कातिल गंद से मैं ने खून निकाल लिया.

सविता की गंद मुझे हमेशा याद रहेगी.

मैं खुद मज़ा ले रहा था और सविता को भी मज़ा देने लगा.

सविता को मुझसे अपनी गंद मरवा कर दर्द कम और प्यार ज़्यादा मिला .

इसी लिए सविता अपनी गंद को उपर उठा कर मेरे लंड को अपनी गंद मे ले रही थी.

सविता की गंद को मैं ने इतने अच्छे तरीके से प्यार से मारा कि वो मेरे लंड को कभी भूलेंगी नही.

मैं भी सविता को कभी भूलूंगा नही.

सविता की टाइट गंद ज़्यादा देर मार कर सविता को ज़्यादा दर्द देने का इरादा नही था.

सविता की गंद -अब रुक जाओ

अवी का लंड -क्या हुआ

सविता की गंद -आगे से करो मुझे दर्द हो रहा है

मैं ने सविता की गंद से अपना लंड निकाल लिया और खड़े होकर अपना शर्ट ले आया. मेरा शर्ट अभी भी गीला था.

मैं ने लंड को शर्ट से साफ किया और वापस सविता के पैरो के बीच आ गया और लंड को सविता की चूत मे डाल दिया

और इस बार मैं अपनी गति बढ़ा कर धक्के मारने लगा.

सविता मेरे लंड को चूत मे लेकर बहोत खुश थी.

मैं भी सविता की चूत और गंद मार कर खुश था.

मेरा पानी निकलने की लास्ट स्टेज मे था.

मैं वीर्य कहाँ निकालु ,ये सोचते हुए मैं ने वीर्य सविता की चूत मे डाल दिया.

वीर्य की पहली पिचकारी निकलते ही मैं ने सविता को कस के पकड़ लिया. और सविता की चूत के अंदर तक मेरा वीर्य चला गया.

चूत की गहराई मे वीर्य डालने के लिए मैं ने कस के सविता को गले लगा लिया.

मेरे वीर्य ने सविता की चूत को पूरा भर दिया .वीर्य निकालने के बाद कुछ देर मैं सविता के उपर पड़ा रहा.

 
मैं ने सविता की चूत मे अपना वीर्य डाल दिया.

मैं सविता के साथ कुछ करना नही चाहता था पर सविता की खूबसूरती मे मैं अपने प्लान से भटक गया.

वो अच्छा हुआ कि हमारी चुदाई के समय उसका देवर नही आया.

मैं गंद मे वीर्य डाल सकता था पर चूत मे डालना ज़्यादा सेफ था.

कुवरसिंघ ने कॉंडम इस्तेमाल किया था ऐसे मे वीर्य सविता की चूत मे किसी ने देख लिया तो

मैं भी ईडियट हूँ,सविता क्या सब को अपनी चूत दिखाती फ़िरेगी.

सविता की चूत को साफ करने के लिए तालाब का पानी है.

मैं अपना वीर्य सविता की छूट मे डालने के बाद उसके उपर लेटा रहा.

सविता ने पूरी चुदाई के समय अपनी आँखे बंद रखी थी.

जैसे कि ये सब उसके सपने मे हुआ हो.

मैं सविता के उपर से अलग हो गया.

सविता की चूत से अपना लंड बाहर निकाल लिया.

सविता की चूत से मेरे लंड के साथ वीर्य भी निकलने लगा

लंड को चूत से बाहर निकलते देख सविता ने धीरे से अपनी आँखे खोल दी.

जैसे कि वो कोई सपना देख कर जाग रही हो.

सविता ने आँखे खोलते अपने उपर पास मे रखी हुई शॉल ले ली.

और मेरी तरफ देखने लगी.

सविता-ये तुम ने क्या किया मेरे साथ

अवी-मैं क्या किया .वही किया जो तुम चाहती थी

सविता-मैं ने कब कहा था

अवी-कहा तो नही, पर रोका भी तो नही.

सविता-मुझे लगा की सपने मे मेरा पति मेरे साथ कर रहा है.

अवी-मतलब मैं ने (जैसे ये बहोत स्मार्ट हो ऐसे बोल रही है)

सविता-तुम ने

अवी-सॉरी ,

सविता-सॉरी कहने से क्या सब ठीक हो जाएगा.

अवी-ठीक तो नही होगा. पर थोड़ा सुकून मिलेंगा. तुम भी बोल दो सॉरी

सविता-मैं क्यू बोलू सॉरी

अवी-ये ड्रामा करना बंद करो,

सविता-तुम्हे ये ड्रामा लग रहा है.

अवी-तुम्हारा पति सपने मे भी तुम्हारी गंद नही मार सकता.

सविता-तुम काफ़ी स्मार्ट हो

अवी-तुमने जो किया वो ग़लत था.

सविता-मैं ने क्या किया

अवी-तुम्हे मेरे साथ सेक्स नही करना चाहिए था.

सविता-इसके सिवा मैं तुम्हारा अहसान चुका नही सकती थी.

अवी-मैं ने इस लिए तुम्हारी मदद नही की थी.

सविता-अगर तुम मदद ना करते तो मैं अब तक खुद्खुसि कर लेती

अवी-वही रास्ता तुम्हारे लिए ठीक था.

सविता-तुम ही ने कहा था कि भगवान ने तुम्हे मुझे रास्ता दिखाने भेजा है

अवी-हां, पर तुम फिर से रास्ता भटक रही हो

सविता-तो तुम्हे मुझे रोकना चाहिए था.पर तुम ने ऐसा नही किया.

अवी-तुम्हे खुद को रोकना चाहिए था.

सविता-मैं तो कल की सूरज की पहली किरण से खुद को रोकना सुरू कर दूँगी.

अवी-तो आज कुछ भी करोगी.

सविता-कुछ भी नही. बस जो सही है वही कर रही हूँ

अवी-तुम्हे लगता है हम ने जो किया वो सही किया.

सविता-पता नही, पर एक पल के लिए भी मुझे ऐसा नही लगा कि मैं ग़लत थी.

अवी-वो क्यू

सविता-पता नही. पर तुम्हे जो मिलना चाहिए वो तुम्हे मैं ने दे दिया है.

अवी-मैं ने कुछ पाने के लिए ये नही किया था.

सविता-पता है मुझे, तुम अच्छे इंसान हो ,अगर मैं पहले कहती तो तुम मना कर देते ,और तुम खुद कहने वाले नही थे.

अवी-क्या कहा

सविता-तुम्हे मुझे प्यार करना था

अवी-तुम ये किस बुनियाद पे बोल रही हो

सविता- तुम जिस तरह मज़े लेकर मुझे किस कर रहे थे,उसी से

अवी-वो तुम्हे शांत करने के लिए किया था.

सविता-मेरे शांत होने के बाद भी तुम किस करते रहे.

अवी-वो मैं

सविता-देखो तुम ने मुझे नयी ज़िंदगी दी है, इस पे थोड़ा हक तुम्हारा भी है.

अवी-वो ठीक है पर तुम्हारा पति उसके बारे मे नही सोचा

सविता-उनके बारे मे सोच कर ही बोल रही हूँ, तुम्हारी वजह से मैं उनको वापस मिल रही हूँ, तुम्हारे लिए जो कर सकती हूँ वही किया मैं ने

अवी-सोच कर देखो, थोड़ी देर पहले तुम क्या थी और अब क्या हो ,तब क्या सोच रही थी और अब क्या सोच रही हो

सविता-सोच लिया. तुम ने जो किया है ये उसके लिए था

अवी-देखो तुम फिर अपने पति को धोखा दे रही हो

सविता-जो धोखा दिया है उसे पूरा कर रही हूँ.

अवी-क्या मतलब

सविता-मैं अपना सपना पूरा करने आई थी. वो अधूरा रह गया. उसी को पूरा कर लिया

अवी-अगर मैं कुछ नही करता तो

सविता-मेरी जान तुम ही ने बचाई है. अगर तुम दूसरा रास्ता नही दिखाते तो मैं खुद्खुसि कर लेती. ऐसे मे मेरी जान तुम्हारी गुलाम है.

अवी-फिर तो मुझे तुम्हारी मदद नही करनी चाहिए थी.

सविता-तुम ग़लत समझ रहे हो

अवी-मैं सही समझ रहा हूँ.

सविता-देखो ,मैं कोई बार बार अपने पति को धोका नही देने वाली थी. मैं तो बस कुवरसिंघ के साथ एक बार अपना सपना पूरा करना चाहती थी.

अवी-फिर भी

सविता-कल का नया सूरज मेरी ज़िंदगी की नयी शुरुआत होगी ,जिस पे सिर्फ़ मेरे पति का हक होगा. मैं नही चाहती कि बाद मे तुम आकर कहो कि.... इस काली रात मे जो होना है वो हो जाने दो ,वैसे भी तुमने मेरी जान बचाई है. तुम्हारा अहसान चुकाए बिना मुझे चैन नही आएगा.

अवी-तो ये बात है

सविता-मुझे पता था तुम्हारा दिल हाँ कर रहा है.

अवी-तुम्हे कुछ नही लग रहा है. तुम्हारा पति उधर...

सविता-मेरा पति भी तुम्हारे अहसान नही भूलेंगा. वो तो आज के बाद तुम्हारे लिए अपनी जान दे सकते है .वो भी यही सोचेंगे कि कैसे तुम्हारा अहसान चुकाए.

मैं ने कुछ नही कहा.

सविता-तुम अजीब हो ,तुम ने मुझे नयी ज़िंदगी दी है ,ऐसे मे मुझ पर तुम्हारा अहसान है. कभी मुझे अहसान चुकाने का मोका नही मिलता.और बाद मे मैं चुका भी नही पाती. जब तक तुम्हारा अहसान ना चुकाती तब तक मेरी जान तुम्हारी गुलाम बन के रहती.

अवी-मैं तुम्हे गुलाम नही बनाना चाहता था.

सविता-अब मैं मुक्त हूँ.

अवी-सच कहूँ

सविता-हाँ

अवी-तुम बहोत खूबसूरत हो.

सविता-आज कहा है कल मत कहना ,कल से सिर्फ़ मेरा पति ये कहेगा मुझे

अवी-(छोटी चाची सही कहती है. छोटी चाची कहती है कि किसी के अहसान जल्दी चुका देना और दूसरो को अपने अहसान चुकाने का पूरा मोका देना. )

सविता खुद कह रही थी जिस से मैं ने उसका सपना पूरा करके उसे उसके पति का बना दिया.

एक बात अच्छी हुई जो सविता का देवर वापस नही आया ,वो इतनी जल्दी वापस भी नही आ सकता था, पहले तो उसे खंडहर ढूँढना होगा. फिर खेत मे जाकर अपनी माँ और कपड़े लाने होगे. और फिर से तालाब ढूंढता होगा.इसमे बहोत समय लगना था.

वरना मेरा प्लान फैल हो जाता.

सविता की चुदाई भी हो गयी और मेरा प्लान को कुछ नही हुआ.

सविता के साथ चुदाई कर के रिस्क लिया था.अगर उन लोगो ने मुझे सविता के साथ देख लिया होता तो कुवरसिंघ जैसा मेरा हाल हो जाता

लेकिन भगवान भी यही चाहता था जिस से हमारे चुदाई के समय सविता का देवर नही आया.
 
605

ज़्यादा देर मैं सविता के साथ ऐसा पड़ा नही रह सकता था.

मैं खड़ा हो गया और अपना पैंट ठीक किया.सविता वैसे ही पड़ी थी.

मैं ने अपने शर्ट को कंधे पे रखा और सविता को अपने गोद मे उठा लिया.

सविता-ये क्या कर रहे हो

अवी-ऐसे ही रहने का इरादा है या पानी से खुद को साफ करोगी.

मैं सविता को तालाब से पास ले गया .सविता को तालाब के पास बैठा दिया.

अवी-जल्दी करना. तुम्हारा पति कभी भी आ सकता है.

सविता अपनी गंद और चूत साफ करने लगी.

सविता ने पानी से खुद को जल्दी साफ किया .मैं ने अपना शर्ट सविता को दिया.

अवी-ये लो शर्ट से साफ करो

सविता-शर्ट खराब हो जाएगा ,ये ऐसे ही सुख जाएगा

अवी-तुम्हारे देवर को पता चला कि अभी तक तुम गीली हो तो उसे शक हो जाएगा.

सविता ने शर्ट से अपने बदन का पानी पोंछ दिया. फिर मैं ने सविता को उठा कर घास पे बैठा दिया.

अवी-ये तो शॉल से अपने बदन को ढक दो

सविता ने शॉल ओढ़ कर बैठ गयी.

मैं ने मंकी कप पहन ली.

सविता-फिर से चेहरा क्यू छुपा लिया

अवी-तुम्हारा पति आ जाएगा फिर हमे जाना होगा.

मैं अपना शर्ट लेकर तालाब के पास आ गया .और शर्ट को साफ करने लगा.

आदमी2-भाभी, भाभी कहाँ हो

ये तो सविता का देवर है. अच्छा हुआ सब हो जाने के बाद आ गये.

अवी-इधर, मेरी आवाज़ की तरफ आ जाओ

आदमी2-आ रहे है

मैं अपना शर्ट पहनने लगा.कि मेरे उपर किसी ने टॉर्च की लाइट गिरा दी.

मैं ने अपने आँखो के सामने हाथ कर दिया.

फिर लाइट दूसरी तरफ चली गयी. सविता को ढूँढने के लिए.

मैं भी लाइट की तरफ देखने लगा.

लाइट सविता के कपड़ो पर पड़ी. फिर पेड़ की तरफ चली गयी.

लाइट ने सविता को ढूँढ लिया. सविता सिर्फ़ शौल लेकर बैठी थी.

सविता को ऐसा देख कर एक औरत की आवाज़ आई.ये सविता की सास थी.

सविता की सास-सविता ,सविता

सविता की सास मेरे पास आ गयी और मेरे गाल पर एक थप्पड़ मारा. मैं ने मंकी कप पहना हुआ था जिस की वजह से थप्पड़ का ज़्यादा असर नही हुआ

पर थप्पड़ मारा क्यूँ

सविता का पति भी मेरे पास आ गया और मैं ने जितनी शर्ट पहनी हुई थी उसको पकड़ लिया.

आदमी1-तुम पे भरोसा किया और तूने मेरी पत्नी के साथ

अवी-मेरी बात तो सुनो

सविता के पति ने भी मुझे थप्पड़ मारा.

तभी सविता का देवर आ गया जो मेरे साथ सविता के पीछे भागा था

आदमी2-भैया इसे क्यू मार रहे हो

आदमी1-इस पे भरोसा किया था और इसने तेरी भाभी के साथ

आदमी2-ये आप क्या कह रहे हो

आदमी1-देख तेरी भाभी वहाँ बिना कपड़ो के बैठी है.इसका क्या मतलब होता है ये बताना ज़रूरी नही है

मैं ने सविता की तरफ देखा, सविता के पास उसकी सास ,और एक औरत थी.

आदमी2-मुझे नही लगता कि इसने कुछ किया है.

अवी-मेरी बात सुनो फिर जो करना है कर लेना

आदमी2-भैया इसकी बात सुन लेते है.

आदमी1-बोलो क्या बोलना है

अवी-तुम्हे पता है ना तुम्हारी भाभी ने तालाब मे जंप मारी थी.

आदमी2-हाँ, मैं ने भैया को बताया था

अवी-तो तुम्हारी भाभी के कपड़े गीले हो गये थे ,उनको ठंड ना लगे ,इस लिए शॉल दी है.

आदमी2-देखा भैया मैं कह रहा था कि ये ऐसा नही कर सकता

आदमी1-तुम्हारी भाभी को ऐसी हालत मे देखा और ये कपड़े ऐसे पड़े दिखे तो मुझे लगा.

अवी-ये कपड़े पड़े हुए नही है ,उनको पत्थर पे रखे है सुखाने के लिए.जाकर देख लो

सविता के देवर ने जाकर देख लिया.

आदमी2-भैया ये कपड़े सुखाने के लिए रखे है. वैसे भी इसने भाभी के लिए पेड़ के पीछे जगह बनाई है. इस से पता चलता है ये भाभी से दूर था.

आदमी1-सॉरी यार ,ग़लती से तुम पर शक कर लिया

अवी-कोई बात नही.

और मैं ने सविता के पति को थप्पड़ मारा

अवी-मेरे दादाजी कहते है थप्पड़ का जवाब थप्पड़ से देना चाहिए

सविता के पति ने मुझे कुछ नही कहा .बल्कि मेरे गले लग गया.

उदार सविता की सास ने और उस औरत ने सविता को दूसरे कपड़े पहना दिए.

हम सविता के पास चले गये.

आदमी2-चलो भैया हमे यहाँ से और इस गाओं से चला जाना चाहिए

आदमी1-हाँ चलो

आदमी2-भैया भाभी के पैर मे चोट लगी है.

सविता के पति ने सविता को गोद मे उठा लिया.

मैं ने सविता की सास के हाथो से अपना शॉल ले लिया.

सविता की सास- बेटा मुझे माफ़ करना ,जिस ने हमारी मदद की उसी पे हाथ उठा लिया.

अवी-माजी कोई बात नही, वैसे मैं लॅडीस को थप्पड़ का जवाब थप्पड़ से नही देता.

सविता की सास-इसने क्या कहा

आदमी1-कुछ नही माँ, चलो यहाँ से

अवी-ये कपड़े

सविता के देवर ने सविता के कपड़ो पे टॉर्च घुमाया.

सविता की सास-ये तो फट गये है ,जाने दो इनको

मैं ने सविता के कपड़े उठा लिए,

आदमी2-ये तुम क्या कर रहे हो

अवी-जंगल मे पोल्यूशन नही करना चाहिए, मैं इनको बाहर फेक दूँगा.

आदमी2-जो करना है करो, चलो यहाँ से

अवी-मेरा टॉर्च दो

आदमी2-ये लो

अवी-ये मेरा टॉर्च नही है. वो है

आदमी1-दे दो इसे इसका टॉर्च

आदमी2-ये लो

टॉर्च लेने के बाद हम खंडहर की तरफ जाने लगे

 


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टॉर्च लेने के बाद हम खंडहर की तरफ जाने लगा.

सविता का देवर आगे चलते हुए हमे रास्ता दिखा रहा था. उसके पीछे वो औरत थी. उसकी पीछे सविता की सास थी. फिर सविता का पति सविता को लेकर चल रहा था ,और मैं सब से लास्ट मे चल रहा था.

सविता की सास-बेटी ये सब कैसे हुआ

आदमी1-जाने दो माँ, क्यू सविता को सवाल पूछ कर परेशान कर रही हो,

सविता की सास-सविता को मैं अपनी बहू नही बेटी मानती हूँ, मुझे उसे पूछने दो

सविता की सास-बेटी ये सब कैसे हुआ.

सविता-माँ रात को मैं पेशाब करने उठी थी और ये सब हो गया.

सविता की सास-मुझे उठा देती इतनी रात मे अकेले क्यू गयी.

सविता-माँ मैं आपकी नींद खराब नही करना चाहती थी और मैं रोज रात को जाती थी जिसके वजह से आज भी अकेले चली गयी.

सविता की सास-ये कौन है

आदमी1-माँ इसकी वजह से हम सही समय पर सविता को बचा पाए

आदमी2-हाँ माँ, भाभी ने तो मरने के लिए तालाब मे जंप मारी थी वहाँ पर भी इसने भाभी को बचाया था.

सविता की सास-क्या नाम है इसका

आदमी2-हम ने तो इसका नाम पूछा ही नही.

सविता की सास-तुम्हारा नाम क्या है बेटा

अवी-माजी मुझे इसी गाओं मे रहना है. आप नाम मत पूछिए ,अगर किसी को पता चला तो मैं गया काम से.

सविता की सास-ठीक है ,वैसे ये किया किसने

सविता-माँ आपने कुवरसिंघ के बारे मे बताया था ना कि उसने कुछ दिन पहले एक लड़की का रेप किया था

सविता की सास-हाँ

सविता-वही था वो जिस ने मेरे साथ, और सविता रोने लगी.

सविता की सास-रो मत सविता ,इसमे तुम्हारी क्या ग़लती है, उस कमिने को मैं नही छोड़ूँगी

आदमी2-माँ भैया ने उसे अच्छा सबक सिखाया है.

सविता की सास-क्या किया ,

आदमी2-माँ ,भैया ने उसका रेप किया अब वो ज़िंदगी भर मर मर कर जिएगा.

सविता की सास-ये अच्छा किया ,मारने से ये कही गुना अच्छा सबक सिखाया उसे,

आदमी1-माँ इसे कहते है थप्पड़ का जवाब थप्पड़ से

सविता की सास-अब समझी, शुक्रिया बेटे ,तुम ने हमारे लिए इतना कुछ किया.

अवी-ये तो मेरा फ़र्ज़ है.

ऐसी बाते करते हुए हम खंडहर मे आ गये.

इन सब मे मैं कुवरसिंघ को भूल गया.

खंडहर मे जाते ही मैं ने कुवरसिंघ को देखा.

कुवरसिंघ की बहोत बुरी हालत हो चुकी थी. और सविता का आख़िरी देवर कुवरसिंघ के मूह मे अपना वीर्य डाल रहा था.

ये अचाहा हुआ जो कुवरसिंघ की चुदाई पूरी हो गयी.

कुवरसिंघ ज़मीन पर गिर गया. वो एक बाजू मे होकर ज़मीन पर पड़ा रहा.

सविता की सास ने जब कुवरसिंघ को देखा तो उनका गुस्सा सातवे आसमान पर चला गया.

सविता की सास ने खंडहर मे पड़ी हुई लकड़ी उठाई और ज़ोर से कुवरसिंघ के आंडो पे मारी.

कुवरसिंघ एक जोरदार चीख के साथ बेहोश हो गया.

सविता की सास- मेरी बेटी के साथ ,मर यहाँ पर

कही सविता की सास ने कुवरसिंघ को मार तो नही दिया.

मैं ने कुवरसिंघ की चेस्ट पे पैर रखा .कुवरसिंघ की धड़कने चालू थी. मरा नही अभी तक

मैं ने सविता की साड़ी उठा ली और हम सब खंडहर से बाहर आ गये

 
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