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Guest
599
उसे ये अहसास होते ही वो नीचे बैठे गयी और अपने हाथो से खुद को छुपाने लगी.
मैं फिर भी उसे देखता रह गया.
सविता अपने खूबसूरत बदन को छुपाने की पूरी कोशिस कर रही थी.
मैं ने सविता को ज़्यादा शर्मसार नही किया और पेड़ के पास जाकर शॉल लेकर आ गया.
शॉल को सविता के बदन पर डाल दिया. सविता ने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर शॉल से अच्छे तरीके से अपने बदन को ढक लिया.
सविता सोच रही होगी कि अभी तो मैं ने उसको किस किया. मैं उसके साथ कुछ भी कर सकता था. वो खुद को बचा भी नही सकती. ऐसे मे मैं ने उसका फ़ायदा उठाने की जगह उसके बदन को छुपा दिया है.
सविता के दिमाग़ मे जो चल रहा था वो मेरे बारे मे मे होगा.
सविता मेरे बारे मे सोच रही थी.
मैं सविता को उठाने के लिए झुका था कि वो पीछे होने लगी.
अवी-डरो मत, मैं तुम्हे पेड़ के पास लेकर जा रहा हूँ, वो जगह सेफ है.
सविता को मेरी बात मान नी पड़ी और मेरा साथ देने लगी.
मैं ने फिर से सविता को अपनी गोद मे उठा लिया.
इस बार मैं सविता के बदन को अपने हाथो से महसूस करने लगा.
सविता को उठाकर मैं ने घास पर रख दिया और उसके बाजू मे बैठ गया.
वो शायद ये दुआ कर रही थी कि मैं उसके साथ ऐसा वैसा कुछ ना करूँ.
पहले मुझे सविता के साथ कुछ करने का मन नही था, पर किस करने के बाद मैं दुविधा मे था कि मुझे सविता के साथ कुछ करना चाहिए या नही.
औरत के चक्कर मे काफ़ी लोगो को मन भटक गया और वो जीती हुई बाज़ी हार गये .
मुझे ये बात पता थी फिर भी मेरा मन भटकने को तैयार हो रहा था.
सविता को किस करने से मेरे दिमाग़ सविता की खूबसूरती के नशे मे झूम ने लगा.
मैं अपने ख़याल मे खोया था और सविता अपने.
फिर मैं ने बात करनी शुरू की.
अवी-सॉरी
सविता ने मेरी तरफ देखा
अवी-सॉरी ,मुझे तुम्हे किस नही करना चाहिए था ,पर इसके सिवा दूसरा रास्ता नही था.
सविता-दूसरा रास्ता नही था का क्या मतलब
अवी-पहली बार तुम मरने की बात कर रही थी तो मैं ने तुम्हे थप्पड़ मारकर शांत किया. पर इस बार
सविता-इस बार क्या
अवी-इस बार तुम थप्पड़ खाने के बाद भी शांत नही हुई इस लिए मैं ने तुम्हे शांत करने के लिए किस किया.तुम्हारे देवर ने तुम्हारी ज़िम्मेदारी मुझे दी है अगर तुम मर जाती तो मैं तुम्हारे देवर को क्या जवाब देता.
सविता को मेरी बात समझ मे आ गयी. मैं ने उसे किस क्यू किया.
सविता-सॉरी ,मैं ने बिना सोचे समझे तुम्हे थप्पड़ मार दिया.
अवी-इसमे तुम्हारी ग़लती नही है.तुम्हारी जगह कोई और होती तो वो भी मुझे थप्पड़ मारती
सविता-काश मेरी जगह कोई और होती
अवी-क्या मतलब
सविता-मैं ने आज वो गुनाह किया जो मुझे नही करना चाहिए था.मैं खुद की नज़रों मे गिर गयी हूँ ,अपने पति को धोका दिया है.
अवी-धोका ,मैं समझा नही
सविता-तुम ने सब देखा है फिर भी ये पूछ रहे हो, मैं ने अपने पति के होते हुए दूसरे आदमी के साथ ये सब कर रही थी.
अवी-अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ
सविता-अब मेरी मदद कोई नही कर सकता.
अवी-मैं कर सकता हूँ ,अगर तुम मुझे सब कुछ बता दो तो,
सविता-मेरी मदद सिर्फ़ भगवान कर सकता है, वो भी मुझे अपने पास बुला के
अवी-समझो कि भगवान ने मुझे तुम्हारी मदद के लिए भेजा है तो
सविता-क्या मतलब
अवी-मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ ,तुम्हे अपनी जान देने की ज़रूरत नही है.
सविता-मुझे तो सिर्फ़ एक ही रास्ता दिख रहा है. वो है जान देने का
अवी-मैं कहूँ कि मैं तुम्हे दूसरा रास्ता दिखा सकता हूँ तो
सविता-तो मेरी जान तुम्हारी गुलाम हो जाएगी.
अवी-क्या कहा
सविता-मुझे मरने के सिवा दूसरा रास्ता नही दिख रहा है. अगर तुम दूसरा रास्ता दिखा सकते हो तो मैं अपनी जान नही दूँगी.ऐसे मे मेरी जान तुम्हारी गुलाम हो जाएगी ना.
अवी-देखो मैं तुम्हे रास्ता दिखा दूँगा,तुम्हे वैसा ही करना होगा जैसा मैं कहूँगा तभी तुम बच सकती हो
सविता-ठीक है मैं वैसा ही करूँगी जैसा तुम कह रहे हो. पर कैसे करोगे मेरी मदद ये बता दो
अवी-पहले तुम अपनी कहानी बताओ फिर मैं बताता हूँ.
सविता-मेरी कहानी, कहाँ से शुरू करू समझ नही आ रहा
अवी-शॉर्ट मे, आज सुबह से शुरुआत करो
सविता-मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूँ, मेरे पति ने मेरा हर सपना पूरा किया ,सिवाय एक को छोड़ कर
अवी-कौन सा सपना
सविता-अब तुम्हे मैं कैसे बताऊ
अवी-बिंदास बताओ ,जितना खुल के बताओगी उतनी तुम्हारी लिए मदद कर पाउन्गा
सविता-मुझे अपनी गन्न्द मर्वानी थी,पर मेरे पति को वहाँ करना पसंद नही था.
अवी-तो तुमने क्या किया
सविता-करना क्या है, मैं अपने पति को मनाने लगी.पर वो मेरी बात सुन ने को तैयार नही थे
अवी-फिर क्या किया
सविता-फिर हम इस मेले मे आ गये, मेले मे लोग मुझे घूर घूर कर देखने लगे. भीड़ मे मेरे पीछे हाथ लगा देते
अवी-फिर
सविता-फिर एक आदमी मुझे रोज देखता रहता था. उसका नाम कुवरसिंघ था, मैं ने भी एक 2 बार स्माइल की
अवी-क्यूँ?
सविता-क्यूँ कि मैं ने अपना सपना यहाँ पूरा करने का सोचा. यहाँ मुझे कोई जानता नही था .ऐसे मे यहाँ अपना सपना पूरा करने से ख़तरा नही था.
अवी-तो तुम ने कुवरसिंघ को सेलेक्ट किया
सविता-हाँ. वो ठाकुर था, दिखने मे अच्छा था इस लिए उसके साथ बात करना शुरू की
अवी-फिर तुम ने उसे अपने सपने के बारे मे बताया
सविता-हाँ, पहले तो वो मना करने लगा ,पर फिर मेरा सपना पूरा करने मे मेरा साथ देने के लिए तैयार हो गया.
अवी-और आज तुम अपना सपना पूरा करने वाली थी.
सविता-सपना तो कल पूरी करने वाली थी और फिर उस से दूर चली जाती पर उसने कल आगे से किया.
अवी-फिर क्या हुआ
सविता-मैं ने उसे मेरा सपना पूरे करने की धमकी दी ,अगर सपना पूरा नही हुआ तो मैं तुम्हे भूल जाउन्गी. वो मान गया.
अवी-फिर
सविता-फिर जब मेरा सपना पूरा होने वाला था कि बीच मे मेरा पति आ गया. और मैं बरबाद हो गयी.
अवी-एक सपने ने तुम्हे अपने पति की नज़रों मे गिरा दिया.
सविता-हाँ, इसलिए मैं मरना चाहती हूँ, मैं कैसे अपने पति का सामना करूँगी. पर तुम हो कि मुझे मरने नही दे रहे हो
अवी-तुम्हारे देवर के आने के बाद जो करना है कर लेना. पर एक बात पुछु
सविता-पूछो
अवी-तुम बहन नाम लेकर फिर मरने क्यूँ जा रही थी(ये बात मुझे पता थी)
सविता-मेरे छोटे देवर की शादी मेरी बहन से होने वाली है.ये सब होने के बाद मेरी बहन की शादी टूट जाएगी. मैं कैसे अपनी बहन का सामना करती.
अवी-तुम्हे ये सब पहले सोचना चाहिए था.
सविता ने अपना सर झुका लिया
अवी-मैं तुम्हे एक तरीका बता सकता हूँ जिस से तुम्हे मरने की ज़रूरत नही होगी.
सविता ने मेरी तरफ देखा
अवी- तुम अपने पति की नज़रों मे अच्छी साबित हो सकती हो, तुम्हारी बहन की शादी नही टूटेगी.
सविता-वो कैसे
अवी-बताता हू लेकिन पहले मेरे सवालो का जवाब दो
सविता-पूछो
अवी-कुवरसिंघ ने कॉंडम लगाया था या तुम गोली खाने वाली थी
सविता मेरी बात सुनकर शरमा गयी.
अवी-शरमाती रहोगी तो मैं तुम्हारी मदद नही करूँगा.
सविता-मैं ने उसे कॉंडम लगाने को कहा था.
अवी-क्यूँ?
सविता-क्यू कि मैं ने सुना था कि उसने मेले मे एक लड़की का रेप किया है.
अवी-ये किसने बताया तुम्हे
सविता-मेरी सास ने
अवी-(ये तो काम की बात है) फिर भी तुम ने उसके साथ ये सब किया.
सविता-उसने कहा कि कोई उसे बदनाम करना चाहता है. अगर उसने रेप किया होता तो वो जैल मे होता
अवी-तो तुम ने उसे कॉंडम लगाने को कहा.
सविता-हाँ, क्या पता वो कैसा हो,क्या सच है मुझे पता नही था. इस लिए मैं रिस्क लेना नही चाहती थी.
अवी-एक काम की बात है
सविता-क्या मतलब,
अवी-बताता हूँ ,पर तुमसे और सवाल पूछना बाकी है.
सविता-तुम मदद कर रहे हो ,ऐसा मुझे नही लग रहा है.वैसे तुम हो कौन ,और ये अपना चेहरा क्यू छुपाके रखा है.
उसे ये अहसास होते ही वो नीचे बैठे गयी और अपने हाथो से खुद को छुपाने लगी.
मैं फिर भी उसे देखता रह गया.
सविता अपने खूबसूरत बदन को छुपाने की पूरी कोशिस कर रही थी.
मैं ने सविता को ज़्यादा शर्मसार नही किया और पेड़ के पास जाकर शॉल लेकर आ गया.
शॉल को सविता के बदन पर डाल दिया. सविता ने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर शॉल से अच्छे तरीके से अपने बदन को ढक लिया.
सविता सोच रही होगी कि अभी तो मैं ने उसको किस किया. मैं उसके साथ कुछ भी कर सकता था. वो खुद को बचा भी नही सकती. ऐसे मे मैं ने उसका फ़ायदा उठाने की जगह उसके बदन को छुपा दिया है.
सविता के दिमाग़ मे जो चल रहा था वो मेरे बारे मे मे होगा.
सविता मेरे बारे मे सोच रही थी.
मैं सविता को उठाने के लिए झुका था कि वो पीछे होने लगी.
अवी-डरो मत, मैं तुम्हे पेड़ के पास लेकर जा रहा हूँ, वो जगह सेफ है.
सविता को मेरी बात मान नी पड़ी और मेरा साथ देने लगी.
मैं ने फिर से सविता को अपनी गोद मे उठा लिया.
इस बार मैं सविता के बदन को अपने हाथो से महसूस करने लगा.
सविता को उठाकर मैं ने घास पर रख दिया और उसके बाजू मे बैठ गया.
वो शायद ये दुआ कर रही थी कि मैं उसके साथ ऐसा वैसा कुछ ना करूँ.
पहले मुझे सविता के साथ कुछ करने का मन नही था, पर किस करने के बाद मैं दुविधा मे था कि मुझे सविता के साथ कुछ करना चाहिए या नही.
औरत के चक्कर मे काफ़ी लोगो को मन भटक गया और वो जीती हुई बाज़ी हार गये .
मुझे ये बात पता थी फिर भी मेरा मन भटकने को तैयार हो रहा था.
सविता को किस करने से मेरे दिमाग़ सविता की खूबसूरती के नशे मे झूम ने लगा.
मैं अपने ख़याल मे खोया था और सविता अपने.
फिर मैं ने बात करनी शुरू की.
अवी-सॉरी
सविता ने मेरी तरफ देखा
अवी-सॉरी ,मुझे तुम्हे किस नही करना चाहिए था ,पर इसके सिवा दूसरा रास्ता नही था.
सविता-दूसरा रास्ता नही था का क्या मतलब
अवी-पहली बार तुम मरने की बात कर रही थी तो मैं ने तुम्हे थप्पड़ मारकर शांत किया. पर इस बार
सविता-इस बार क्या
अवी-इस बार तुम थप्पड़ खाने के बाद भी शांत नही हुई इस लिए मैं ने तुम्हे शांत करने के लिए किस किया.तुम्हारे देवर ने तुम्हारी ज़िम्मेदारी मुझे दी है अगर तुम मर जाती तो मैं तुम्हारे देवर को क्या जवाब देता.
सविता को मेरी बात समझ मे आ गयी. मैं ने उसे किस क्यू किया.
सविता-सॉरी ,मैं ने बिना सोचे समझे तुम्हे थप्पड़ मार दिया.
अवी-इसमे तुम्हारी ग़लती नही है.तुम्हारी जगह कोई और होती तो वो भी मुझे थप्पड़ मारती
सविता-काश मेरी जगह कोई और होती
अवी-क्या मतलब
सविता-मैं ने आज वो गुनाह किया जो मुझे नही करना चाहिए था.मैं खुद की नज़रों मे गिर गयी हूँ ,अपने पति को धोका दिया है.
अवी-धोका ,मैं समझा नही
सविता-तुम ने सब देखा है फिर भी ये पूछ रहे हो, मैं ने अपने पति के होते हुए दूसरे आदमी के साथ ये सब कर रही थी.
अवी-अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ
सविता-अब मेरी मदद कोई नही कर सकता.
अवी-मैं कर सकता हूँ ,अगर तुम मुझे सब कुछ बता दो तो,
सविता-मेरी मदद सिर्फ़ भगवान कर सकता है, वो भी मुझे अपने पास बुला के
अवी-समझो कि भगवान ने मुझे तुम्हारी मदद के लिए भेजा है तो
सविता-क्या मतलब
अवी-मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ ,तुम्हे अपनी जान देने की ज़रूरत नही है.
सविता-मुझे तो सिर्फ़ एक ही रास्ता दिख रहा है. वो है जान देने का
अवी-मैं कहूँ कि मैं तुम्हे दूसरा रास्ता दिखा सकता हूँ तो
सविता-तो मेरी जान तुम्हारी गुलाम हो जाएगी.
अवी-क्या कहा
सविता-मुझे मरने के सिवा दूसरा रास्ता नही दिख रहा है. अगर तुम दूसरा रास्ता दिखा सकते हो तो मैं अपनी जान नही दूँगी.ऐसे मे मेरी जान तुम्हारी गुलाम हो जाएगी ना.
अवी-देखो मैं तुम्हे रास्ता दिखा दूँगा,तुम्हे वैसा ही करना होगा जैसा मैं कहूँगा तभी तुम बच सकती हो
सविता-ठीक है मैं वैसा ही करूँगी जैसा तुम कह रहे हो. पर कैसे करोगे मेरी मदद ये बता दो
अवी-पहले तुम अपनी कहानी बताओ फिर मैं बताता हूँ.
सविता-मेरी कहानी, कहाँ से शुरू करू समझ नही आ रहा
अवी-शॉर्ट मे, आज सुबह से शुरुआत करो
सविता-मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूँ, मेरे पति ने मेरा हर सपना पूरा किया ,सिवाय एक को छोड़ कर
अवी-कौन सा सपना
सविता-अब तुम्हे मैं कैसे बताऊ
अवी-बिंदास बताओ ,जितना खुल के बताओगी उतनी तुम्हारी लिए मदद कर पाउन्गा
सविता-मुझे अपनी गन्न्द मर्वानी थी,पर मेरे पति को वहाँ करना पसंद नही था.
अवी-तो तुमने क्या किया
सविता-करना क्या है, मैं अपने पति को मनाने लगी.पर वो मेरी बात सुन ने को तैयार नही थे
अवी-फिर क्या किया
सविता-फिर हम इस मेले मे आ गये, मेले मे लोग मुझे घूर घूर कर देखने लगे. भीड़ मे मेरे पीछे हाथ लगा देते
अवी-फिर
सविता-फिर एक आदमी मुझे रोज देखता रहता था. उसका नाम कुवरसिंघ था, मैं ने भी एक 2 बार स्माइल की
अवी-क्यूँ?
सविता-क्यूँ कि मैं ने अपना सपना यहाँ पूरा करने का सोचा. यहाँ मुझे कोई जानता नही था .ऐसे मे यहाँ अपना सपना पूरा करने से ख़तरा नही था.
अवी-तो तुम ने कुवरसिंघ को सेलेक्ट किया
सविता-हाँ. वो ठाकुर था, दिखने मे अच्छा था इस लिए उसके साथ बात करना शुरू की
अवी-फिर तुम ने उसे अपने सपने के बारे मे बताया
सविता-हाँ, पहले तो वो मना करने लगा ,पर फिर मेरा सपना पूरा करने मे मेरा साथ देने के लिए तैयार हो गया.
अवी-और आज तुम अपना सपना पूरा करने वाली थी.
सविता-सपना तो कल पूरी करने वाली थी और फिर उस से दूर चली जाती पर उसने कल आगे से किया.
अवी-फिर क्या हुआ
सविता-मैं ने उसे मेरा सपना पूरे करने की धमकी दी ,अगर सपना पूरा नही हुआ तो मैं तुम्हे भूल जाउन्गी. वो मान गया.
अवी-फिर
सविता-फिर जब मेरा सपना पूरा होने वाला था कि बीच मे मेरा पति आ गया. और मैं बरबाद हो गयी.
अवी-एक सपने ने तुम्हे अपने पति की नज़रों मे गिरा दिया.
सविता-हाँ, इसलिए मैं मरना चाहती हूँ, मैं कैसे अपने पति का सामना करूँगी. पर तुम हो कि मुझे मरने नही दे रहे हो
अवी-तुम्हारे देवर के आने के बाद जो करना है कर लेना. पर एक बात पुछु
सविता-पूछो
अवी-तुम बहन नाम लेकर फिर मरने क्यूँ जा रही थी(ये बात मुझे पता थी)
सविता-मेरे छोटे देवर की शादी मेरी बहन से होने वाली है.ये सब होने के बाद मेरी बहन की शादी टूट जाएगी. मैं कैसे अपनी बहन का सामना करती.
अवी-तुम्हे ये सब पहले सोचना चाहिए था.
सविता ने अपना सर झुका लिया
अवी-मैं तुम्हे एक तरीका बता सकता हूँ जिस से तुम्हे मरने की ज़रूरत नही होगी.
सविता ने मेरी तरफ देखा
अवी- तुम अपने पति की नज़रों मे अच्छी साबित हो सकती हो, तुम्हारी बहन की शादी नही टूटेगी.
सविता-वो कैसे
अवी-बताता हू लेकिन पहले मेरे सवालो का जवाब दो
सविता-पूछो
अवी-कुवरसिंघ ने कॉंडम लगाया था या तुम गोली खाने वाली थी
सविता मेरी बात सुनकर शरमा गयी.
अवी-शरमाती रहोगी तो मैं तुम्हारी मदद नही करूँगा.
सविता-मैं ने उसे कॉंडम लगाने को कहा था.
अवी-क्यूँ?
सविता-क्यू कि मैं ने सुना था कि उसने मेले मे एक लड़की का रेप किया है.
अवी-ये किसने बताया तुम्हे
सविता-मेरी सास ने
अवी-(ये तो काम की बात है) फिर भी तुम ने उसके साथ ये सब किया.
सविता-उसने कहा कि कोई उसे बदनाम करना चाहता है. अगर उसने रेप किया होता तो वो जैल मे होता
अवी-तो तुम ने उसे कॉंडम लगाने को कहा.
सविता-हाँ, क्या पता वो कैसा हो,क्या सच है मुझे पता नही था. इस लिए मैं रिस्क लेना नही चाहती थी.
अवी-एक काम की बात है
सविता-क्या मतलब,
अवी-बताता हूँ ,पर तुमसे और सवाल पूछना बाकी है.
सविता-तुम मदद कर रहे हो ,ऐसा मुझे नही लग रहा है.वैसे तुम हो कौन ,और ये अपना चेहरा क्यू छुपाके रखा है.