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मैं और मेरा परिवार

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607

12थ डे

हम खंडहर से बाहर आ गये.

आदमी3-भैया अब हम क्या करेंगे

आदमी1-करना क्या है ,जितनी जल्दी हो सके यहाँ से वापस अपने गाओं चलते है.

सविता की सास-हमारे गाओं मे हम सेफ रहेंगे.वैसे भी मेरे हाथ से मार खा कर वो मर गया होगा.

आदमी4-मेरी एक बात समझ मे नही आई कि वो रेप कॉंडम पहन कर क्यू कर रहा था.

आदमी2-मेरी भी समझ मे ये बात नही आई.

अवी-अपनी सुरक्षा के लिए पहना होगा.

आदमी4-क्या मतलब

अवी-कुछ दिन पहले उसने एक लड़की का रेप किया था, हॉस्पिटल से वो क्या कहते है डीएनए टेस्ट से पता चल गया कि रेप इसने किया है. तो इसने उस लड़की को पैसे दे कर चुप कराया.इस बार ऐसा ना हो इस लिए शायद कॉंडम इस्तेमाल किया हो

आदमी4-यही हो सकता है.

सविता की सास-तुम चुप रहो. अपनी माँ के सामने कैसी बाते करते हो

फिर हम चुप चाप चलने लगे.आम के बगीचे से जाते समय मैं ने सविता के कपड़े चुपके से पेड़ के पास फेक दिए.

खेत मे वापस आते ही सब अपने काम मे लग गये. सविता के देवर की पत्नी ने समान पॅक करके रखा था.

शायद सविता का देवर जब अपनी माँ को बुलाने आया था तब बताया होगा कि समान पॅक करके रख

अबी सुबह के 4.00 बज रहे थे. लोग थोड़ी देर मे उठ जाएँगे.

आदमी1-दोस्त एक काम कर सकते हो

अवी-हाँ बोलो

आदमी1-शहर तक जाने के लिए कुछ मिल जाता तो ,

अवी-वो ट्राक्टेर देख रहे हो उनको कुछ पैसे दो वो तुम सब को शहर छोड़ देंगे.

सविता का पति ट्रॅक्टर वाले से बात करने लगा.

ट्रॅक्टर वाला तय्यार हो गया.सविता के देवर अपना समान ट्रॅक्टर मे रखने लगे.

सविता ,सविता का पति और सविता की सास मेरे पास आ गये.

आदमी1-तुमने जो हमारी मदद की है वो मैं मरते दम तक नही भूलूंगा. अगर तुम्हे कभी मदद की ज़रूरत हो तो ये मेरा नंबर रख लो, तुम ने जो हमारे लिए किया उसका शुक्रिया जान देकर भी नही चुका सकते है.

अवी-कैसी बात कर रहे हो, ये तो मेरा फ़र्ज़ था.

सविता की सास-बेटा तुम ने हमारी मदद की उसके बदले मे मैं ने अंजाने मे तुम्हे थप्पड़ मारा ,हो सके तो मुझे माफ़ करना

अवी-उसमे आपकी ग़लती नही थी.आपकी जगह अगर कोई और होता तो वो भी वही करता जो आपने किया है

सविता-भैया मैं आप का सुक्रिया कैसे अदा करू, आपने मुझे नयी ज़िंदगी ,

और सविता रोते हुए मेरे गले लग गयी. सविता का पति सविता कीहालत को समझ रहा था.

सविता ने गले लग कर मेरे कान मे कुछ कहा.

सविता-थॅंक्स अवी,

मेरा नाम सविता को कैसे पता चला. मैं तो भूल ही गया मैं ने सविता को अपना चेहरा दिखाया था. चाँद की रोशनी मे सविता ने मुझे पहचान लिया.

अच्छा हुआ सविता को पता तो चला कि उसका सपना किसने पूरा किया है.

सब ट्रॅक्टर मे बैठ गये.

आदमी2-थॅंक्स, कभी मिले तो मैं तुम्हारी मदद करके ये अहसान चुका दूँगा.

अवी-किस्मत मे लिखा हो तो ज़रूर मिलेंगे

सविता की फॅमिली रात के अंधेरे मे अपने गाओं की तरफ चली गयी.

सविता की फॅमिली जाते ही मैं आम के बगीचे मे चला गया.

मैं ने बॅग मे से कपड़े निकाल कर मोना के पति के कपड़े जो मैं ने पहन रखे थे उनको बॅग मे रख दिया.और अपने कपड़े पहन लिए .

फिर सविता के कपड़े, और मेरी चप्पल को खड्डे मे डाल कर उस पे पेट्रोल डाल कर जला दिए.

कपड़े जलते ही मैं ने खड्डे को बुझा दिया और बॅग को वापस छुपा दिया.

फिर मैं खंडहर की तरफ चला गया.

और ऐसे आक्टिंग करने लगा जैसे मैं अभी यहाँ आया हूँ.

अवी-कौन है वहाँ पर

कुवरसिंघ होश मे आया होगा तो ऐसी आवाज़ देना ज़रूरी था.

अवी-कौन चीख रहा था.

मैं ऐसे आवाज़ दे कर खंडहर मे चला गया. कुवरसिंघ अभी तक बेहोश था.

मैं ने कॅमरा और मोबाइल ले लिया.

फिर मैं ने कुवरसिंघ को उसके फटे हुए कपड़े पहना दिए .और कुवरसिंघ को उठा कर घर3 की तरफ जाने लगा

कुवरसिंघ का वेट ज़्यादा था पर ये सब करना ज़रूरी था.और मैं किसी की मदद ले भी नही सकता था.

लोगो के उठने से पहले मैं कुवरसिंघ को कैसे भी कर के घर3 लेकर आ गया.

कुवरसिंघ अभी तक बेहोश था.

मैं ने कुवरसिंघ के हाथ पैर रस्सी से बेड को बाँध दिए. और कुवरसिंघ के मूह पे टेप लगा दिया.

कुवरसिंघ को घर3 लाने के बाद मैं ने घर3 पे रखा हुआ कॅमरा ऑन किया.(खंडहर के लिए दूसरा कॅमरा खरीदा था )

फिर मैं ने हार्ड डिस्क ,रानी का लॅपटॉप ,खंडहर वाला कॅमरा और अपना मोबाइल बॅग मे डाल दिया और बॅग लेकर आम के बगीचे मे चला गया.

ये सब सामान कुवरसिंघ के साथ घर3 मे रखना डेंजर हो सकता था. और कुवरसिंघ मेरे ना रहने पे क्या करता है ये देखने के लिए एक कॅमरा घर3 मे ऑन किया था.

आम के बगीचे मे जो कपड़ो का बॅग रखा था उसे अपने साथ लेकर घर चला गया

कल शाम मे मैं विद्या के लिए मोबाइल लाया था ,मैं ने उसे कॉल किया .पर कॉल लगा नही, शायद सिम आक्टीवेट नही हुआ होगा.

मैं दोनो बॅग लेकर घर चला गया. चाची मुझे इतनी सुबह घर पर देख कर सर्प्राइज़्ड हुई.

मैं ने चाची को बहाना बना दिया. अच्छा हुआ सीमा चाची थी, अगर छोटी चाची होती तो सवाल पूछ कर परेशान करती

इतनी सुबह कैसे आए? ये 2 बॅग मे क्या है? बॅग लेकर कहाँ गया था?

मैं अपने कमरे मे चला गया और लॅपटॉप वाला बॅग अलमारी मे लॉक कर के रख दिया.

फिर मैं ने विद्या को अपने कमरे मे बुला लिया.

अवी-विद्या मोबाइल स्टार्ट हो गया

विद्या-मोबाइल तो स्टार्ट हो गया पर फोन नही लग रहा.

अवी-4 5 घंटो मे सिम आक्टीवेट हो जाएगा.और ये मोबाइल अपने पास रखना ,मैं कभी भी कॉल कर सकता हूँ

विद्या-ये मेरे पास ही रहेगा.

अवी-ये लो विद्या. इस बॅग मे कपड़े है उनको क्लीन कर देना

विद्या-कर दूँगी

अवी-तुम्हे जल्दी करना है. एक काम करो आज मंदिर मत आना ,और ये कपड़े वॉशिंग मशीन मे क्लीन कर देना.

विद्या-कर दूँगी. 2 घंटे मे कपड़े तुम्हे वापस दे दूँगी.

अवी-थॅंक्स. वैसे तुम्हे...जाने दो,

विद्या-क्या बात है

अवी-कुछ नही. फिर कभी आराम से बात करेंगे.

विद्या-जैसा तुम कहो ,मैं चलूं ,मुझे बहुत काम है.

अवी-ठीक है जाओ,पर एक किस तो दे दो

मैं ने विद्या को अपनी गोद मे बैठा दिया.

विद्या-लो ना जल्दी ,मुझे काम भी करना है

अवी-ले तो रहा हूँ, तुम्हे नीचे कुछ फील नही हो रहा.

विद्या-तुम भी ना, बोल देते तो सलवार निकाल देती

अवी-ऐसे ही मज़ा आता है.

थोड़ी देर विद्या के साथ टाइम पास करने के बाद हम तय्यार होके मंदिर चले गये.

मंदिर मे सब नॉर्मल था.कुवरसिंघ तो ऐसे रात भर बाहर रहता था, उसमे नयी बात नही थी.

पर कुवरसिंघ की पत्नी रेशमा कुछ परेशान थी.पता नही वो क्यू परेशान थी.

मंदिर मे पूजा करते ही मैं जल्दी से अपनी फॅमिली के साथ घर आ गया.

 


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घर आने पर मैं ने विद्या से कपड़े लेकर प्लास्टिक मे डाल दिए.और घर3 की तरफ जाने लगा.

घर3 आकर मैं ने कुवरसिंघ को देखा वो अभी तक बेहोश था.

मैं ने उसे इसी तरह रहने दिया और खंडहर की तरफ चला गया.

खंडहर मे सब तहस नहस होकर पड़ा था.

मैं देखने लगा कि यहाँ पर कुछ रह तो नही गया.

वो चद्दर खून से लाल हो चुकी थी. चद्दर के पास कॉंडम और सविता की चूड़ीयान पड़ी थी. मैं ने दोनो को उठा लिया .फिर से इधर उधर देखने लगा.

मुझे पास की झाड़ियों मे एक चमकती हुई चीज़ दिखाई दी. मैं ने ठीक से देखा तो वो एक नेक्लेस था.

ये तो मैं भूल गया था.कुवरसिंघ ने सविता को नेक्लेस देने की बात की थी. अच्छा हुआ मैं वापस देखने आ गया.

ये नेक्लेस मैं ने कहीं देखा है. ये तो कुवरसिंघ की पत्नी रेशमा का है. मैं ने नेक्लेस अपने पास रख दिया.

फिर मैं ने चद्दर और लकड़ी उठा ली और तालाब की तरफ जाने लगा.

तालाब थोड़ी मुश्किल से मिल गया. मैं ने सविता की चूड़ियाँ और कॉंडम को तालाब के पास खड्डे मे फेक दिया .और चद्दर को जला दिया. लकड़ी को जंगल मे फेक दिया.

तालाब के पास कुछ रह गया ये देखने लगा.यहाँ पर कुछ नही मिला.

फिर मैं वापस चला गया.

वापस आकर मैं ने मोना को कॉल किया .मोना ने एक झटके मे कॉल उठा लिया.

अवी-हेलो मोना

मोना-हाँ,बोलो

अवी-तुम्हारा पति गया

मोना-नही, वो बस जा रहे है.

अवी-जाने मत देना, मैं तुम्हारे घर आ रहा हूँ.

मोना-बात क्या है.

अवी-आकर बताता हूँ

मोना-ठीक है. जल्दी आना

मैं मोना के पति के कपड़े लेकर मोना के घर आ गया.मोना को घर के बाहर बुलाया .

मोना-क्या हुआ, ऐसे अचानक आ गये ,एक मिनिट हमारा काम हो गया ?

अवी-उस पे बाद मे बात करेंगे,ये लो तुम्हारे पति के कपड़े

मोना-तो तुम कपड़े देने आए हो

अवी-हाँ, वो तुम्हारा पति जा रहा है तो देने आ गया .और तुम्हारे लिए शॉल खरीदी है.

मोना-मेरे लिए गिफ्ट लाए हो, कोई साड़ी लेकर आते शॉल क्यू लाए.

अवी-क्यू कि तुम गरम रहो,

मोना-मैं तो ऐसे ही गरम रहती हूँ.

अवी-लो कपड़े, अपने पति को यही कपड़े पहना कर शहर भेजना ,और तुम शॉल पहन कर उसे अलविदा करने जाना.

मोना-वो क्यू?

अवी-क्यू कि तुम्हारे पति को ऐसा ना लगे की उसके कपड़े गायब थे. और मैं तुम्हे शॉल मे देखना चाहता हूँ कि तुम कैसी दिखती हो.

मोना-पहन लूँगी. पर हमारे काम का क्या हुआ

अवी-मैं बाद मे कॉल करके बताउन्गा .अभी मुझे एक काम है.

मोना-ये तो बता दो हुआ कि नही

अवी-बाद मे आराम से बताउन्गा.

और मैं गाओं के बस स्टॉप पर मोना और उसके पति का इंतज़ार करने लगा.

थोड़ी देर मे मोना और उसका पति बस स्टॉप पर आ गये.

रात मे मैं ने जो कपड़े पहने थे वही मोना के पति ने पहन रखे थे. और मोना ने मेरी दी हुई शॉल पहन ली.

मैं ने उनके उन ड्रेस मे 3 4 फोटो निकाल दिए. मोना के पति ने मेरी मंकी कॅप भी पहन रखी थी.

उनके फोटो निकालने के बाद मैं घर3 चला गया

कुवरसिंघ अभी तक बेहोश था.

मैं ने कुवरसिंघ के मूह पर से टेप हटा दिया.

अब कुवरसिंघ को होश मे लाने का समय हो गया था.

मैं कुवरसिंघ के मूह पे पानी छिड़कने लगा.

पानी छिड़कने से कुवरसिंघ होश मे आ गया.

कुवरसिंघ को आँखे खोलने मे परेशानी हो रही थी.रात भर रोने से कुवरसिंघ की आँखे दुखने लगी थी.

कुवरसिंघ अपने हाथ हिलाने लगा. शायद आँखे खोलने के लिए हाथ इस्तेमाल करना चाह रहा था.मैं ने उसके हाथ बाँध रखे थे .

कुवरसिंघ को लगा कि अभी तक वो उनलोगो की हाथ मे है. कुवरसिंघ की आँखे तो नही खुली पर वो चिल्लाने लगा.

कुवरसिंघ-छोड़ दो मुझे ,मैं दुबारा ऐसा नही करूँगा. मुझे छोड़ दो.भगवान के लिए मुझे जाने दो

कुवरसिंघ की आवाज़ भी बदल गयी थी. ऐसा लग रहा था कि उसका गला पोखर हो गया है.

अवी-कुवरसिंघ आप ये क्या कह रहे हो

कुवरसिंघ-मुझे जाने दो,

और कुवरसिंघ रोने लगा.

मैं ने कुवरसिंघ के हाथ खोल दिए.

हाथ खोलते ही कुवरसिंघ अपनी आँखे खोलने की जगह हाथ जोड़ कर माफी माँगे लगा.

कुवरसिंघ-मुझे छोड़ दो मैं दुबारा ऐसा नही करूँगा.मुझे जाने दो

कुवरसिंघ सदमे मे था,उसे अभी तक लग रहा था कि उसका और बुरा हाल होने वाला है.

मैं ने कुवरसिंघ के मूह पर पानी डाल दिया .इस बार पूरा पानी उडेल दिया.

अब जाकर कुवरसिंघ होश मे आया.

 
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पानी डालते ही कुवरसिंघ होश मे आ गया.

कुवरसिंघ ने आँखे खोल ली और जो पानी उनके चेहरे पे डाला था वो चाट कर पीने लगा.

और मैं ने जो कुवरसिंघ को गंद को नीचे रख कर सुलाया था ,वो एक साइड मे हो गयी. पर पैर रस्सी से बाँध कर रखे थे जिसकी वजह से उपर का पार्ट थोड़ा पलट गया,और गंद का हिस्सा उपर आ गया.

कुवरसिंघ ना साइड लेट सकते थे क्यू की गंद मे दर्द हो रहा था और ना उलटे सो सकते थे क्यू कि सविता की सास ने लकड़ी जो मारी थी.

मैं ने कुवरसिंघ के पैर खोल दिए ,अब जाकर कुवरसिंघ ठीक से लेट पाया.

कुवरसिंघ ठाकुर से कुत्ता बन गया.

अवी-कुवरसिंघ ये आपको क्या हुआ.

कुवरसिंघ ने मेरी तरफ देखा और मरते हुए लोग जिस तरह पानी माँगते है उस तरह पानी माँगने लगे.

मैं ने कुवरसिंघ को मग मे पानी दिया.

अब हालत ऐसी थी कि ना कुवरसिंघ उठ सकता था और ना बैठ सकता था और ना खड़े रह सकता था.

ऐसी हालत मे कुवरसिंघ ने मेरे हाथ से मग ले लिया. इस मग से मैं नहाता था. ये बात ज़्यादा मायने नही रखती थी क्यू कि कुवरसिंघ को पानी की सख़्त ज़रूरत थी.

कुवरसिंघ ने हाथ को मूह के पास पकड़ लिया और पानी पीने की कोशिस करने लगे.

दर्द मे सोते हुए पानी पीना मुश्किल था.कुवरसिंघ फिर भी पानी पी रहा था. और बीच बीच मे कुत्ते की तरह चाट कर पानी पी रहा था.

कुवरसिंघ के मूह मे मिट्टी, सविता के पति और देवर का वीर्य और सविता के देवर का पेशाब था.कुवरसिंघ ने पानी मूह मे लेकर थूकने की कोशिस नही की. करते भी कैसे जान बचाने के लिए पानी पीना ज़रूरी था.

कुवरसिंघ के साथ जो हुआ अच्छा हुआ.

कुवरसिंघ ने पानी पी लिया .और फिर से पानी माँग लिया.

मैं बाथरूम से फिर पानी लेकर आ गया,

इस बार कुवरसिंघ ने पानी को अपने सर पे डाल दिया. और आँखे बंद कर ली.

अवी-कुवरसिंघ

कुवरसिंघ ने आँखे खोली और मुझे देखने लगा.

अवी-कुवरसिंघ ये सब कैसे हुआ

कुवरसिंघ रात की बात याद करने लगा.रात के बारे मे सोचते हुए कुवरसिंघ रोने लगा.

अवी-कुवरसिंघ तुम रो क्यू रहे हो, आख़िर ये सब हुआ कैसे

कुवरसिंघ फिर से रोने लगा.

अवी-रहने दो बाद मे बताना ,चलो मैं तुम्हे डॉक्टर के पास लेकर चलता हूँ.

कुवरसिंघ-नही, डॉक्टर के पास नही

अवी-डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है. आपकी हालत देखिए

कुवरसिंघ-नही ,डॉक्टर के पास नही जाना, ऐसे सब को पता चल जाएगा.

अवी-लेकिन

कुवरसिंघ-डॉक्टर के पास गये तो सबको पता चल जाएगा .मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूँ ,ये बात किसी को मत बताना ,

अवी-ठीक है नही बताउन्गा. लेकिन ये सब हुआ कैसे (कुवरसिंघ अगर डॉक्टर के पास नही गया तो मेरा प्लान आगे कैसे बढ़ेगा,सारा और ज़ोया का ईस्तमाल करने का सोच रहा था. पर कुवरसिंघ डॉक्टर के पास जाने से मना कर रहा है. मैं जाड़ा फोर्स नही कर सकता)

कुवरसिंघ-वो बाद मे बता दूँगा ,पहले इस दर्द का कुछ करो, मुझे बचा लो.मुझे और बर्दास्त नही हो रहा है

अवी-इसी लिए कह रहा हूँ की डॉक्टर के पास चलो (हाँ बोल दो)

कुवरसिंघ-डॉक्टर के पास नही. तुम कुछ करो ,मैं ज़िंदगी भर तुम्हारा गुलाम बन के रहूँगा. इस दर्द का कुछ करो ,

अवी-मैं क्या कर सकता हूँ

कुवरसिंघ-कुछ भी करो ,मुझे बचा लो ,मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूँ

अवी-मेरे पास एक पेन किल्लर है ,

कुवरसिंघ-हाँ, पेन किल्लर दो मुझे ,माआआ

मैं ने पेन किल्लर कुवरसिंघ को दे दी.कुवरसिंघ को इतना दर्द हो रहा था कि उसने गोली को चबा लिया और फिर पानी पी लिया.

कुवरसिंघ-और दो ,माआअ,

अवी-मेरे पास सिर्फ़ एक पेन किल्लर थी.

कुवरसिंघ-तुम कहीं से लेकर आओ, मेरी मदद करो, मैं भीख माँगता हूँ ,मुझे इस दर्द से बचाओ

अवी-पेन किल्लर का असर होने मे टाइम लगेगा.

कुवरसिंघ-कुछ करो ना,

अवी-धीरज रखो ,सब ठीक हो जाएगा.वैसे ये सब हुआ कैसे

कुवरसिंघ-वो ..माआ मेरी पैंट

अवी-क्या हुआ

कुवरसिंघ-मेरी पैंट निकालो ,बहोत दर्द हो रहा है

मैं ने कुवरसिंघ की पैंट निकाल ली.

कुवरसिंघ ने हाथ लगाकर गंद को देखा.हाथ लगाते ही कुवरसिंघ दर्द से चिल्लाने लगा.

अवी-क्या हुआ

कुवरसिंघ-ये दर्द, मैं मर जौंगा ,कुछ करो .मुझे बचा लो

अवी-मैं इस से ज़्यादा कुछ नही कर सकता ,

कुवरसिंघ-मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूँ ,कुछ करो ,मुझे बचा लो

कुवरसिंघ डॉक्टर के पास जाने से मना कर रहा है.

कुवरसिंघ डॉक्टर के पास नही जाएगा तो मुझे अपना प्लान चेंज करना होगा.

कुवरसिंघ को ऐसे यहाँ रखा तो वो दर्द से मर जाएगा.

मुझे कुवरसिंघ को मरने नही देना है.

विद्या को बुला लूँ यहाँ पर ,कुवरसिंघ की मदद करने,

विद्या घर से ज़्यादा देर गायब रहेगी तो छोटी चाची को पता चल जाएगा.

मोना को बुलाता हूँ. वो ये काम कर सकती है.

प्लान मे थोड़ा चेंज लाना ज़रूरी है.

मोना को फिर से गेम मे इम्पोर्टेंट रोल प्ले करना होगा. बिना उसे कुछ पता लगे ,

अवी-मैं कुछ नही करूँगा. लेकिन मैं मेरी फ्रेंड को बुला सकता हूँ

कुवरसिंघ-किसी को मत बुलाओ, ये बात सब को पता चल जाएगी. मैं जीते जी मर जाउन्गा.

अवी-फिर मैं कुछ नही कर सकता. तुम कहते हो डॉक्टर के पास नही जाना, मेरी फ्रेंड को मत बुलाओ दोनो मे से एक काम करना होगा.

कुवरसिंघ-माआ, कौन है तुम्हारी फ्रेंड

अवी-इसी गाओं मे रहती है,

कुवरसिंघ-वो किसी को बताएगी तो नही

अवी-उसके बताने का सवाल पैदा नही होता, मैं एक काम करता हूँ तुम्हारे चेहरे पे कुछ रख देता हूँ

कुवरसिंघ-क्या?

अवी-मंकी कॅप (दूसरी वाली)है मेरे पास ,

कुवरसिंघ-दो जल्दी, और बुला लो उसे, ये दर्द बर्दास्त नही हो रहा.

मैं ने कुवरसिंघ को मंकी कॅप पहना दी .और कुवरसिंघ के मूह पे टेप लगाने लगा.

कुवरसिंघ-ये क्या कर रहे हो

अवी-तुम उसके सामने चिल्लाओगे इस लिए टेप लगा रहा हूँ

कुवरसिंघ-उसे मेरा नाम मत बताना

मैं ने कुवरसिंघ के मूह पे टेप लगा लिया और घर3 को बाहर से लॉक लगाया.

 
मैं ने कुवरसिंघ के मुँह पे टेप लगा लिया और घर3 को बाहर से लॉक लगाया.

और मोना को कॉल किया .

अवी-हेलो मोना

मोना-हेलो

अवी-तुम्हारा पति शहर चला गया.

मोना-हाँ,

अवी-तो तुम वहाँ क्या कर रही हो ,मेरे पास आ जाओ

मोना-10 मिनट मे आती हूँ,

मोना को कुवरसिंघ के बारे मे पता नही चलना चाहिए.

मोना को कुछ और बताना होगा.

10 मिनट होने से पहले मोना मेरे पास आ गयी.

मोना ने शॉल पहन रखी थी. ये मोना मरवाएगी मुझे .

मोना-तुम बाहर क्यूँ खड़े हो

अवी-मैं भी अभी आया हूँ.

मोना-चलो अंदर

अवी-चलते है ,पर पहले मेरी बात सुनो

मोना-मुझे पता है तुम क्या कहना चाहते हो

अवी-क्या कहना चाहता हूँ मैं

मोना-यही कि हमारा काम हो गया ,और तुमने मुझे पार्टी करने को बुलाया है

अवी-मोना,हमारा काम नही हुआ है

मोना-क्या?

अवी-कल मैं हवेली नही जा सका

मोना-क्यू? हवेली पे कुवरसिंघ था

अवी-कुवरसिंघ हवेली पे नही था.

मोना-तुम ने इतना अच्छा चान्स छोड़ दिया.

अवी-कल ऐसा कुछ हुआ कि मैं हवेली नही जा सका

मोना-चलो अंदर चलते है, फिर बताना की क्या हुआ है.

अवी-अंदर जाने से पहले मेरी बात सुन लो

मोना-बोलो

अवी-मेरे फ्रेंड पे कुछ गुन्डो ने हमला किया और उसकी बुरी हालत की

मोना-फिर

अवी-मेरे फ्रेंड ने उन गुन्डो से बच कर मुझे कॉल किया. मैं हवेली की जगह मेरे फ्रेंड के पास चला गया

मोना-फिर तुम उसे हॉस्पिटल ले गये,अच्छा किया जो हवेली नही गये, काम तो आज भी हो सकता है.

अवी-मेरे फ्रेंड ने हॉस्पिटल जाने से मना किया ,इस लिए उसे मैं यहाँ लेकर आ गया.

मोना-हॉस्पिटल तो जाना चाहिए था.

अवी-हॉस्पिटल जाते तो उसकी बदनामी हो सकती थी.इस लिए मैं उसे यहाँ लेकर आया

मोना-वो क्या पॉलिटीशियन है

अवी-वो पोलीस ऑफीसर है, गुन्डो ने उसकी ऐसी हालत की है कि वो किसी को मुँह नही दिखा सकता.

मोना-पोलीस ऑफीसर, ऐसा क्या किया गुन्डो ने

अवी-अंदर जाकर खुद देख लेना

मोना-वो अंदर है

अवी-हाँ,

मोना-पर ये सब तुम मुझे क्यू बता रहे हो

अवी-तुम्हे उसकी मदद करनी है, उसका इलाज तुम्हे करना है

मोना-मैं डॉक्टर नही हूँ

अवी-जितना कर सकती हो उतना करना है.

मोना-तुम्हारा फ्रेंड है मैं क्यू कुछ करूँ

अवी-वो पोलीस ऑफीसर है ,तुम उसकी मदद करो, वो हमारी मदद करेगा.

मोना-हमारी मदद करेगा वो

अवी-हाँ,

मोना-बताओ क्या करना है मुझे

अवी-तुम्हे उसके जख्म का इलाज करना है. और ये बात अपने तक रखना

मोना-ठीक है ,जितना हो सकेंगा उतना करूँगी

अवी-और एक बात, तुम अंदर कुछ मत बोलना

मोना-क्यूँ?

अवी-वो बोलने की हालत मे नही है.

मोना-लेकिन मैं तो हूँ

अवी-जितना कहा है उतना करो,

मोना-गुस्सा मत करो, वरना मैं चली जाउन्गी

अवी-मोना डार्लिंग अंदर कुछ मत बोलना,और उसकी हालत देख कर हँसना मत

मोना-नही बोलूँगी.

अवी-ये काम अगर तुम ने कर दिया तो हमारा काम हो जाएगा.

मोना-इस बार पक्का हो जाएगा ना

अवी-हाँ

मोना-फिर चलो अंदर

अवी-चलते है ,पहले ये बताओ तुम्हे ठंड लग रही है.

मोना-नही.

अवी-फिर ये शॉल क्यू पहन रखी है.

मोना-तुम ने तो कहा कि मुझे शॉल मे देखना था.

अवी-इस शॉल मे तुम गंदी दिख रही हो.

मोना-कोई साड़ी देने की बजाय ये शॉल तुम ही ने तो दी है

अवी-शॉल मुझे दो, शाम को मैं तुम्हे साड़ी दूँगा.

मोना-अच्छी वाली देना.

अवी-तुम्हे पसंद आएगी वैसी दूँगा.

और मैं ने वो स्वाल मोना से वापस ले ली.जिस काम के लिए मोना को शॉल दी थी वो काम हो गया था.

मैं ने शॉल अपने पास रख दी और लॉक खोल कर मैं मोना को लेकर अंदर चला गया.

 


611

मोना को लेकर मैं अंदर आ गया.

मोना कुवरसिंघ को देखने लगी. कुवरसिंघ कमर से नीचे नंगा था. उसकी गान्ड पर खून लगा हुआ था. उसके आंडो पर भी चोट के निशान थे, उसके शरीर पे हर जगह चोट के निशान थे.

मोना-ये किसने किया ,

मैं ने मोना की तरफ चुप रहने का इशारा किया.

अवी-जॉन उठो

कुवरसिंघ ने आवाज़ सुनकर हमारी तरफ देखा.

अवी-जॉन देखो मैं मेरी फ्रेंड को लेकर आया हूँ.ये तुम्हारी मदद करेगी.

कुवरसिंघ मोना को जानता था. पर इस वक्त उसे दर्द से मुक्ति चाहिए थी.

ऐसे मे कुवरसिंघ की तरफ ज़्यादा ध्यान नही दिया.

अवी-मोना, मेरे फ्रेंड की गुन्डो ने गंद मारी है,रात भर उसकी गंद मारी है. और बहुत कुछ किया है. तुम जल्दी काम पर लग जाओ

मोना को हँसी आ रही थी पर उसने कंट्रोल किया.

अवी-जॉन की टी-शर्ट निकाल कर काम पे लग जाओ

मोना-पहले मुझे देखना होगा कि कहाँ कहाँ चोट लगी है.

मोना ने कुवरसिंघ को नंगा कर दिया.और कुवरसिंघ के शरीर को देखने लगी.

कुवरसिंघ के पेट और पीठ पर चोट के निशान थे. सारे शरीर पे चोट के निशान थे. गंद पर लगा हुआ खून सुख गया था. आंडो की बुरी हालत थी. जाँघो पर भी खून और चोट लगी थी.नाक पे लगा हुआ खून सुख चुका था.उसके आँखे बुरी तरह से डॅमेज हो गयी थी.उसके दाँत टूट चुके थे

मोना-जॉन की तो बुरी हालत की गयी है.

अवी-तुम कुछ भी करो, मेरे फ्रेंड की मदद कर दो

मोना-इसके लिए गरम पानी ,कपड़ा और कॉटन लगेगा.

अवी-बस इतना ही.

मोना-एक विट और विट गरम करने के लिए चूल्हा

अवी-गरम पानी मिल जाएगा, कपड़ा भी मिल जाएगा. कॉटन, पिल्लो से निकाल लेंगे, विट तो बाहर मिल जाएगी. कॅंडल से विट गरम कर लेना.

मोना-तो मैं काम चालू करती हूँ

मोना बाथरूम मे चली गयी और पानी गरम करने को रख दिया.मैं ने मोना को कपड़ा दिया और पिल्लो को फाड़ कर कॉटन निकाल लिया.

बाहर से ब्रिक्स लाकर रस्सी से बाँध कर कॅंडल पर रख दी.

कुवरसिंघ हम दोनो की तरफ देख रहा था. हम दोनो को कुवरसिंघ ने परेशान किया फिर भी हम उसकी मदद कर रहे थे.

मोना ने पानी गरम कर लिया.

मोना-जॉन को ज़मीन पर लिटा दो

अवी-दोनो तरफ से डॅमेज हुआ है.

मोना-एक बाजू की सिकाई करने के लिए दूसरी बाजू को दर्द तो होगा ही

अवी-मेरी मदद करो,

मोना ने कुवरसिंघ के पैर पकड़ लिए और मैं ने हाथ ,और कुवरसिंघ को ज़मीन पर लिटा दिया.

मोना-जखम साफ करने के लिए डेटॉल चाहिए

अवी-डेटॉल नही है. डेटॉल सोप है उस से काम चला लो

मोना-वो कैसे

अवी-गरम पानी मे सोप डाल कर सल्यूशन बना लो.

मोना-सोप से जलन होगी

अवी-उतना तो होगा ही. तुम करो बाकी मैं संभाल लूँगा.

मोना ने सोप को मग मे रख दिया और पानी सोप का बना दिया.

फिर मोना ने कॉटन को मग मे डाल कर भिगो दिया और कॉटन से कुवरसिंघ की पीठ को साफ करने लगी.

कुवरसिंघ को जलन होने लगी पर पेन किल्लर की वजह से दर्द कम था.

मोना अपना काम करने लगी. और मैं बैठ कर देखने लगा.

मोना ने कुवरसिंघ की पीठ को साफ किया .फिर कुवरसिंघ के पैरो पे सूखा हुआ खून और चोट को साफ किया.

अब बारी थी कुवरसिंघ की गंद की.

मोना ने कुवरसिंघ के पैरो को फैला दिया और चूतड़ को पकड़ कर फैला कर देखने लगी.

कुवरसिंघ की गंद काफ़ी खुल चुकी थी.गंद के छेद पर लगा हुआ खून सुख चुका था.

मोना ने गंद को ठीक से देखा

मोना-खून सुख चुका है.

अवी-साफ कर दो

मोना-अंदर खून सुख चुका होगा तो

अवी-अंदर भी साफ करो,

मोना-मैं नही करने वाली.

अवी-जितना कर सकती हो उतना करो

मोना-अगर तुम्हारे पास कुछ नरम चीज़ हो तो अंदर डाल कर साफ कर सकते है

अवी-ऐसी तो चीज़ नही है.

मोना-कोई बात नही ,गरम पानी को ज़ोर से मार कर ट्राइ करते है.

अवी-जैसा करना है करो जल्दी

मोना ने कुवरसिंघ की गंद को बाहर से साफ किया.

मोना-पलटा दो

अवी-पानी नही मरोगी,

मोना-वो बाथरूम मे करेंगे.

मैं ने कुवरसिंघ को पलट दिया. कुवरसिंघ की आँखे से पानी निकल रहा था.शायद दर्द हो रहा होगा. अच्छा हुआ मुँह पर टेप लगा दिया

मोना ने आगे से कुवरसिंघ को साफ किया .और फिर लंड और आंडो की बारी थी.

मोना ने लंड को हाथ लगाकर देखा, उसे छिलने के निशान थे, अंडे बुरी तरह से डॅमेज हो गये थे.

ये लंड मोना ले चुकी थी पर अब लंड किसी काम का नही था.

मोना ने लंड को साफ किया.

मोना-लो हो गया.

अवी-अब

मोना-इसे ले चलो बाथरूम मे

मैं और मोना कुवरसिंघ को उठाकर बाथरूम मे ले गये.

मोना ने कुवरसिंघ को बाथरूम मे लेटा दिया और चुतड़ों को फैला कर गंद मे मीडियम पानी डालने लगी.

गरम पानी की वजह से कुवरसिंघ को अच्छा लगने लगा.

मोना ने 2 बकेट पानी इस्तेमाल किया .फिर कुवरसिंघ को वापस ले आए.

अवी-ये तो हो गया

मोना-अब सिकाई करनी होगी

अवी-उसके बाद

मोना-मल्लम लगाना होगा.

अवी-मल्लम तो नही है (मेरे पास लंड पर लगाने वाली क्रीम है पर कुवरसिंघ ऐसे दर्द मे अच्छा लगता है)

मोना-तो ले आओ

अवी-मल्लम बाद मे लगाना, पहले सिकाई कर लो

मोना-ब्रिक्स गरम हो गयी.

अवी-देख लो

ब्रिक्स गरम हो चुकी थी. मोना ने कपड़ा गरम पानी मे डाला और कपड़े को कुवरसिंघ की चूतड़ मे फँसा दिया.

और गरम ब्रिक्स से कुवरसिंघ की पीठ की सिकाई करने लगी.

पहले मोना ने कुवरसिंघ के शरीर की ब्रिक्स से सिकाई की. और फिर गरम पानी से गंद की.

कुवरसिंघ की जितनी मदद मोना कर सकती थी उतनी मदद उसने की

कुवरसिंघ को थोड़ी राहत मिली पर अभी बहुत कुछ बाकी था,उसका दर्द ख़तम होने मे 3 4 दिन तो लग जाएँगे.

 


612

मोना-लो,हो गया तुम्हारे फ्रेंड की चोट का इलाज

अवी-इस से जॉन को आराम मिल जाएगा

मोना-मिल तो जाएगा पर मल्लम लगा देती तो जल्दी चोट भर जाती

अवी-मैं शाम मे शहर से ले आउन्गा

मोना-शाम मे, मुझे फिर आना होगा.

अवी-हाँ, और साथ मे मेरे फ्रेंड के लिए खाना भी लेकर आना है तुम्हे

मोना मेरी तरफ गुस्से से देखने लगी.

पर मैं ने उसे चुप करा दिया.

अवी-चलो तुम्हे छोड़ आता हूँ

मोना के कुछ कहने से पहले मैं मोना को लेकर बाहर आ गया.

मोना-ये क्या नया चक्कर मे फँसा रहे हो,मैं कोई खाना वाना नही लाने वाली

अवी-मेरा फ्रेंड पोलीस ऑफीसर है ,तुम्हारे मदद करने से हमारे काम आ सकता है

मोना-पर

अवी-पर वर छोड़ो ,बस 15लाख के बारे मे सोचो ,

मोना-ठीक है,

अवी-मैं रात मे 8.00 के आस पास तुम्हे कॉल करूँगा तब तुम आ जाना

मोना-कहा ना आ जाउन्गी.

अवी-इतना गुस्सा क्यू हो रही हो, ये हमारे प्लान का हिस्सा है

मोना-ठीक है, लेकिन मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं तुमसे ज़्यादा काम कर रही हूँ.

अवी-मुझसे ज़्यादा, ठीक है तुम ज़्यादा पैसे रख लेना ,

मोना मेरी बात सुनकर खुश हो गयी.

फिर मैं ने मोना को घर छोड़ दिया और वापस कुवरसिंघ के पास आ गया.

मोना की मालिश के वजह से कुवरसिंघ को थोड़ी राहत मिली दर्द से .

मेरे आने तक कुवरसिंघ सो चुका था. वही ज़मीन पर

मैं ने कुवरसिंघ को सोने दिया और मंदिर की तरफ चला गया.

मंदिर मे मेरे आने तक रणजीतसिंघ वापस जा चुका था .और रणजीतसिंघ की सेक्रेटरी अपना काम कर रही थी.

कुवरसिंघ शाम से पहले उठेगा नही. इस लिए मैं ने कुवरसिंघ के बारे मे सोचना बंद किया.

मेरा आगे का प्लान सब सेट करके रखा हुआ था.कुवरसिंघ को उस प्लान के हिसाब संभालना था

लेकिन एक बात और थी, शाम मे मैं मेला देखने नही जा पाउन्गा. कल भी नही गया था. राज और मेरी बहनों को मनाने के लिए कुछ सोचना होगा.

पर मेरे दिमाग़ मे एक भी आइडिया नही आया.निराश होकर मैं मोबाइल मे वीडियो देखने लगा.

तभी मुझे अपने भाई बहनों को मनाने का आइडिया मिल गया.

चलो ये काम तो हो गया,पर इस लंबी दोपहर मे क्या करू.

मैं मंदिर मे बैठ कर लोगो को देखने लगा.

पहले दिन की तरह आज भी लोग दूर दूर से दर्शन करने आ रहे थे.

पंडित जी लोगो को दर्शन करवा रहे थे.और पंडिताइन पंडितजी की मदद कर रही थी.

पंडिताइन का नाम दिमाग़ मे आते ,मेरे लंड ने हलचल करना शुरू कर दी.

चलो पंडिताइन से बात करता हूँ ,कुछ दिन तो कुवरसिंघ मेरे घर3 मे रहेंगा मतलब वहाँ कुछ नही कर सकता ,रणजीतसिंघ को भी मैं ने लड़कियो को भेजने से मना किया था.रुकसाना और रज़िया भी चली गयी,

अब बस पंडिताइन का सहारा है.

मैं पंडिताइन को देखने लगा. पंडिताइन को थोड़ी देर बाद ये बात पता चल गयी.

पर पंडिताइन मुझे इग्नोर करने लगी.

जैसे मैं ने पंडिताइन के साथ किया था वैसा पंडिताइन कर रही थी.

1 घंटा तो बस इशारा करने मे चला गया.

फिर पंडितजी ने पंडिताइन को कुछ सामान स्टोर रूम मे रखने को कहा.

पंडिताइन सामान लेकर स्टोर रूम की तरफ चली गयी. उस तरफ लोगो को जाने की इजाज़त नही थी.पर रणजीतसिंघ और मैं जा सकता था.

मैं पंडिताइन के पीछे पीछे स्टोर रूम मे आ गया.

पंडिताइन झुक कर सामान रख रही थी. मैने स्टोर रूम मे जाकर गेट अंदर से बंद किया.

पंडिताइन ने पलट कर देखा .मुझे खड़ा देख कर फिर से अपने काम मे लग गयी.

 


613

पंडिताइन के तरफ से ऐसा रिएक्ट मिला जैसे उसको मेरे आने से कोई फरक नही पड़ता था

अवी-पंडिताइन

पंडिताइन-अब क्या लेने आए हो यहाँ, या फिर से झूठ बोलने आए हो

अवी-झूठ? ,मैं ने आपको सब सच बता दिया था ना,

पंडिताइन-सच बता दिया तो तुम यहाँ क्यू आए हो,

अवी-उस दिन मैं ने सच बता दिया था पर आपने कुछ नही कहा.

पंडिताइन-क्या कहती ,तुम तो चले गये थे, वो भी बिना बताए

अवी-जाना ज़रूरी था

पंडिताइन-अपने सपने से भी ज़्यादा ज़रूरी था

अवी-हां, सपना तो किसी और दिन भी पूरा किया जा सकता था पर उस दिन मेरा जाना ज़रूरी था

पंडिताइन पलट गयी

पंडिताइन-अपने सपने से ज़्यादा ऐसा क्या काम था.

अवी-(अब पंडिताइन को फिर से झूठ बोलना पड़ेगा) मेरे फ्रेंड का आक्सिडेंट हुआ था. उसे हॉस्पिटल मे अड्मिट किया गया था

पंडिताइन-क्या?आक्सिडेंट

अवी-हाँ, उसका इस दुनिया मे कोई नही था ,इस लिए मुझे उसकी मदद करने के लिए जाना पड़ा.

पंडिताइन-अब कैसा है तुम्हारा फ्रेंड

अवी-कल ही डिसचार्ज मिला ,और आज मैं फ्री हो गया.

पंडिताइन-ये झूठ है. तुम तो हर दिन पूजा करने आते थे ,और मैं ने तो तुम्हे प्रषाद भी दिया था.

अवी-मंदिर मे पूजा करने नही आता तो मेरी जगह पूजा कौन करता, और मैं अपने फ्रेंड के बारे मे अपनी फॅमिली को बताना नही चाहता था.इस लिए मैं यहाँ पर नॉर्मल और टाइम मिलते हॉस्पिटल चला जाता.

पंडिताइन-तो ये बात थी मुझे लगा कि

अवी-आपको क्या लगा

पंडिताइन-कुछ नही, ऐसे ही सोचा था कि तुम मुझे तडपा रहे हो

अवी-(ये आपने सही सोचा) मैं क्यू तडपाता आपको, मुझे तो आपसे ज़्यादा अपना सपना पूरे करने की इच्छा थी.

पंडिताइन-जाने दो वो सब ये बताओ यहाँ क्यू आए हो

अवी-उस दिन आपने मेरे सच बताने के बाद अपने जवाब नही दिया था ,.

पंडिताइन-(कितना भोला है, मतलब इसे अभी तक पता नही चला कि मैं इसका सपना पूरा करने को तय्यार हूँ.चलो थोड़ी मज़ा लेती हूँ इसकी ) अब जवाब नही दे सकती. तुम्हारे अचानक जाने से मुझे गुस्सा आया था.

अवी-(ये भी मेरी तरह ड्रामे बाज़ है)ऐसा मत कहिए ,वरना मैं ज़िंदगी भर सो नही पाउन्गा.

पंडिताइन-अच्छा है ना रात मे मेरे सपने देख पाओगे

अवी-ऐसा मत कहिए, सपने देखने के बाद कही मैं पागल पन मे किसी का रेप ना कर दूं

पंडिताइन-(ये तो, इसके लिए मैं भी तड़प रही हूँ .चलो इसका सपना पूरा कर देती हूँ) तुम्हे जवाब चाहिए ,इसके लिए मुझे सोचना पड़ेगा.

अवी-जल्दी सोचिए

पंडिताइन-ऐसे कैसे जल्दी सोच लूँ ,सोचना मतलब मुश्किल का काम होता है

अवी-मैं सोचने मे मदद करूँ

पंडिताइन-(ये क्या मदद करेगा ,चलो देखते है क्या मदद करता है) तुम कैसे मदद कर सकते हो

अवी-सिंपल है, मैं एक काम करूँगा अगर आपको पसंद आया तो हाँ बोलना नही तो ना करना

पंडिताइन-क्या करोगे

अवी-वही पिछली बार आपने सिखाया था.

पंडिताइन-क्या? किस करना

अवी-किस करना नही ,चूसना

पंडिताइन-(इसे क्या सिखाया था, अरे हाँ ,चूत चूसना सिखाया था ,पिछली बार तो इसने मुझे बहुत मज़ा करवाया था) ठीक है.पर जल्दी करना ,

मैं पंडिताइन के पास आ गया. और पंडिताइन के पीछे हाथ डाल कर गंद पे रख दिए.

पंडिताइन ने अपनी आँखे बंद की .मैं ने पंडिताइन के चेहरे पे फुक मारी,पंडिताइन के बदन मे एक लहर दौड़ गयी

मैं वैसे ही अपने हाथ को पंडिताइन के बदन पर घूमाते हुए जाँघो तक आ गया.

पंडिताइन के जाँघो को पकड़ते ही मैं ने साड़ी को उपर करना शुरू किया.

पंडिताइन की साड़ी उपर जा रहे थी और साँसे तेज हो रही थी.

पंडिताइन की साड़ी जाँघो तो उपर करते पंडिताइन ने मुझे धक्का दे दिया.

और गेट के पास चली गयी.

अवी-क्या हुआ

पंडिताइन-कुछ नही.

अवी-फिर मुझे धक्का क्यू दिया

पंडिताइन-तुम....तुमने अपना काम कर दिया.

अवी-कहाँ किया, अभी तो शुरुआत हुई है.

पंडिताइन-जितना किया उतना काफ़ी है.

और पंडिताइन ने गेट खोल लिया.

अवी-जवाब तो दो

पंडिताइन-कल दूँगी

और पंडिताइन वापस चली गयी. मैं ने अपने पास की की से स्टोर रूम बंद किया और वापस मंदिर के सामने की तरफ आ गया.

 


614

पंडिताइन के जाने के बाद मैं वापस अपनी जगह पर आ गया.

इस बार मेरे साथ पंडिताइन भी इशारा कर रही थी. मैं पंडिताइन को जवाब माँग रहा था और पंडिताइन नकारे कर रही थी.

पंडितजी-तुम्हारा ध्यान कहाँ है, मैं ने कुमकुम माँगा था ये हल्दी क्यू दे रही हो

पंडिताइन-ये लीजिए कुमकुम

पंडिताइन ने मुझे इशारा करने से मना किया पर मैं कहाँ मानने वाला था , ऐसे पंडिताइन के साथ टाइम पास करते हुए दोपहर निकल गयी.

फिर मैं घर3 चला गया.वहाँ जाकर कुवरसिंघ को देखा .वो अभी तक वैसे ही नंगा लेटा हुआ था.

कुवरसिंघ को वैसे ही रहने दिया.क्यूँ की घर पे मेरे भाई बहन मेले मे जाने के लिए मेरा इंतज़ार कर रहे थे.

लेकिन आज कुवरसिंघ की वजह से मेले मे जा नही सकता था .मेले मे ना जाने की कीमत कैसे चुकानी है ये मुझे पता था.

मैं कुवरसिंघ के पास से सीधा घर चला गया. जैसा सोचा था वैसा ही हुआ ,सब मेले मे जाने के लिए तय्यार होकर मेरा इंतज़ार कर रहे थे.

मेरे भाई बहनों के कुछ कहने से पहले मैं ने उनको एक झटका दिया.

अवी-सॉरी ,आज भी मैं मेले मे नही जा सकता ,मुझे रणजीतसिंघ के साथ मेले के काम से बाहर जाना है.

मेरी बात सुनकर सब के चेहरे उतर गये.

लीना-भैया ये चीटिंग है.

कोमल-हाँ, हम पढ़ाई कर के आपका इंतज़ार कर रहे है और आप हो की मेले मे जाने से मना कर रहे हो

स्वेता दीदी-अवी आज मैं कविता के बात से सहमत हूँ,

रानी-दीदी ,अवी काम के वजह से मेले मे नही जा रहा है.

सीतल दीदी-दल बदलु,(पार्टी चेंज)रानी तुम हमारे तरफ से हो या अवी के

रानी-मैं, आपकी तरफ से

अवी-मेरी बात तो सुनो

कोमल ,स्वेता दीदी-कहो ,

अवी-आज मेले मे जा नही सकते ,लेकिन मेरे पास इसका एक हल है जिस से सब को मेले से ज़्यादा मज़ा आएगा.

राज-मेले से ज़्यादा मज़ा ,वो कैसे भैया

अवी-मेरे पास एक वीडियो है जिसे देख कर मेले मे जाने का नाम नही लेगा कोई.

सीतल -कौनसा वीडियो ,क्या मैं ने देखा है

अवी-आपने नही देखा ,पर देखना ज़रूर चाहोगी.

पूनम दीदी- दिखाओ ना बाते करने मे टाइम वेस्ट क्यू कर रहे हो

अवी-वीडियो हम सब साथ मे देखेंगे .और वीडियो देखने के लिए लॅपटॉप चाहिए

कोमल-मेरा लॅपटॉप लेकर आती हूँ

अवी-साथ मे बुआ को बुला लेना ,

कोमल रानी के साथ घर चली गयी, और मैं ने सब के लिए जगह बनाने के लिए कह कर बाकियो को काम पे लगा दिया .और मैं अपने कमरे मे चला गया.

अपने कमरे मे आकर मैं ने कल की कुवरसिंघ की वीडियो रेकॉर्डिंग कॅमरा से लॅपटॉप मे सेव की .और कॅमरा अपने साथ ले लिया. घर2 जो कॅमरा कुवरसिंघ की रेकॉर्डिंग कर रहा था उसकी जगह ये कॅमरा रखना था.

थोड़ी देर बाद चाची ,बुआ ,सब हॉल मे बैठ कर मेरा इंतज़ार कर रहे थे.मैं हॉल मे आकर वीडियो को लॅपटॉप मे कॉपी करने लगा.

सी चाची-अवी क्या दिखाने वाले हो

अवी-थोड़ी देर मे पता चल जाएगा.

नीता बुआ-कुछ खास होगा तभी हम सब को बुलाया है.

पूजा बुआ-क्या हो सकता है.

इधर बुआ बाते कर रही थी और वीडियो कॉपी हो गया.

अवी-अब मैं वीडियो शुरू कर रहा हूँ ,

सबकी नज़रें लॅपटॉप के स्क्रीन पर थी. और वीडियो शुरू हो गया.

वीडियो की स्टार्टिंग मे सिर्फ़ फर्श दिख रहा था. और पिक्चर हिल रही थी.

सीतल-ये क्या लगाया है मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा

स्वेता दीदी-सीतल चुप रहो ,देखो किसी की आवाज़ सुनाई दे रही है.

आवाज़ के साथ चेहरा भी दिखाई दिया.

सी चाची-ये तो मेरी माँ है,

सबने छोटी चाची की तरफ देखा और फिर से लॅपटॉप की तरफ देखने लगे.

मोबाइल से रेकॉर्ड किया हुआ वीडियो था.अब मोबाइल एक जगह सेट कर दिया था.

लॅपटॉप की स्क्रीन पर बड़ी चाची और पूजा बुआ दिख रही थी. और साथ मे तीन झूले लगे हुए थे.

छोटी चाची और सीमा चाची बच्चो को झूले मे रख रही थी.

नीता बुआ-ये तो नामकरण का है.

बी चाची-अवी तूने कब बनाया ये वीडियो

सी चाची-दीदी ये वीडियो मैं ने बनाया था .अवी को देखना था कि नामकरण कैसे होता है

स्वेता दीदी-मामी आपने ये अच्छा किया वीडियो बनाकर ,हम तो आ नही सके थे, वीडियो देख ये कमी पूरी हो गयी.

पूजा बुआ -मीना वीडियो बनाकर अच्छा किया,चलो देखते है.

सब वीडियो देखने लगे.

कविता-ये मैं हूँ,

सीतल-दिख रहा है, अच्छा ड्रेस है तुम्हारा

कविता- भैया ने दी थी.

पूनम दीदी-चुप रहो,ये कौन है

स्वेता दीदी-ये तो

कोमल-मैं और रानी

रानी को देखने के लिए तो वीडियो बनाया था.

नेहा बुआ-दोनो कितनी प्यारी लग रही है.

स्वेता दीदी-तुम दोनो तो दुल्हन की तरह सजी थी.

कोमल-ये रानी का आइडिया था,

नेहा बुआ-दोनो बहनें लग रही है.

नीता बुआ-हमारी तरह, मैं रानी और तुम कोमल

पूजा बुआ-मुझे भूल रही हो,

नीता बुआ-आप तो हमारी माँ हो.

पूजा बुआ-बस ज़्यादा मस्का मत लगा.

म चाची-सस्शहू, मैं भी हूँ वीडियो मे

सीतल दीदी-मामी तो बहुत खूबसूरत दिख रही थी.

स्वेता दीदी-18 साल की खूबसूरत लड़की दिख रही है मामी.

स्वेता के मुँह से अपनी तारीफ सुनकर सीमा चाची खुश हो गयी.

म चाची-मैं इतनी भी कुछ खास नही दिख रही हूँ.

स्वेता दीदी-मामी आपकी स्माइल आपको खूबसूरत बनाती है.

ब चाची-स्वेता ने सही कहा. सीमा की स्माइल बहुत प्यारी है.

सीमा चाची की ख़ुसी का कोई ठिकाना नही था.

ऐसे एक एक करके सब वीडियो मे खुद को देख कर खुश हो रहे थे.

स्वेता दीदी, सीतल दीदी, और पूनम दीदी वीडियो देख कर उस समय ना होने पे खुद को कोस रही थी.

ज्योति बुआ हम सब मे नही थी. पूजा बुआ ने कहा कि ज्योति बुआ अपनी सहेली से मिलने के लिए शहर गयी है.

ज्योति बुआ को ना देख कर मैं चाचा के बारे मे सोचने लगा.

अवी-चाची चाचा कहाँ है.

ब चाची-वो कमरे मे आराम कर रहे थे.

चाचा यहाँ है तो ज्योति बुआ कहाँ गयी. मुझे तो लगा ज्योति बुआ चाचा के साथ चुदाई करने गयी होगी.

चलो अच्छा है चाचा ज्योति बुआ से दूर रह रहे है.

विद्या तो वीडियो को ऐसे देख रही थी जैसे अपने दिमाग़ मे ये पल हमेशा के लिए क़ैद कर रही हो.

विद्या मेरी फॅमिली का हिस्सा बन कर खुश थी.

हर कोई ऐसी फॅमिली का हिस्सा बनना चाहती है,

सब बाते करते हुए वीडियो देखने लगे. सब रानी और कोमल की तारीफ कर रहे थे.

रानी पूरे वीडियो की शान थी.

वीडियो बहुत लंबा था. इतनी देर तक मैं रुक नही सकता था.मुझे कुवरसिंघ के पास जाना था.

मैं ने रानी की तरफ देख कर इशारा किया ,

अवी-आप सब वीडियो देखो ,मैं चलता हूँ ,

सीतल दीदी-हाँ ,तुम जाओ हमे तो वीडियो देखना है.

मैं उठ कर रशोई घर की तरफ चला गया. थोड़ी देर बाद रानी भी रशोई घर मे आ गयी.

रानी-क्या हुआ ,यहाँ क्यूँ बुलाया

अवी-मुझे प्यास लगी थी

रानी-तो पानी पी लो मुझे क्यूँ बुलाया

अवी-तुम्हारे हाथो से पानी पीना था

रानी-तुम भी ना

और रानी पानी लेने के लिए आगे आते ही मैं ने रानी को गले लगा लिया.

रानी-अवी क्या कर रहे हो ,कोई आ जाएगा.

अवी-आने दो ,

रानी-चाची आ जाएगी.

मैं ने रानी को छोड़ दिया.

अवी-तुम डरना बंद करो, बस प्यार करने पे ध्यान दो

मेरे इतना कहते ही रानी ने मुझे किस करना शुरू किया.

मैं यही तो चाहता था कि रानी के होंटो का रस पी कर अपनी प्यास बुझाऊ

रानी इस बार बिना डर के बिंदास किस करते हुए अपने प्यार का इज़हार कर रही थी.

मैं भी कहाँ पीछे रहने वाला था ,मैं भी रानी को किस करने लगा.

रानी के साथ ज़्यादा देर तक किस करते रहना रिस्की था.

यहाँ सब रानी की तारीफ कर रहे थे और रानी यहाँ मुझे किस कर रही थी.

वहाँ रानी की तारीफ हो रही थी. अगर रानी वहाँ जल्दी नही गयी तो कोई ना कोई रानी को ढूँढते हुए यहाँ ज़रूर आ जाएगा.

मैं ने रानी को किस करना बंद किया

अवी-बस इतना काफ़ी है

रानी-बस इतना ही.

अवी-हां मेरी माँ ,मैं हार गया.

रानी-इतनी जल्दी हार गये

अवी-हारने का गिफ्ट इतना प्यारा मिल रहा हो तो हार जाना सही होता है.

रानी-तुम हारे कहाँ ,तुम तो जीत गये,तुम्हे जो चाहिए था वो मिल गया,

अवी-जिस दिन तुम मिली उस्दिन मैं जीत गया था. अब जाओ, वहाँ सब तुम्हारी तारीफ कर रहे है.

रानी-तुम नही करोगे

अवी-मेरा तारीफ करने का तरीका अलग है.

रानी-दिख रहा है.

अवी-क्या दिख रहा है.

रानी-किस करके तारीफ कर रहे हो

अवी-मेरे साथ रह कर स्मार्ट होती जा रही हो

मेरे पेट पर मुक्का मार कर

रानी-तुम मेरे साथ रह कर स्मार्ट होते जा रहे हो.

और रानी हॉल मे चली गयी और मैं भी उसके पीछे पीछे हॉल मे आ गया.

हॉल मे आते मुझे एक झटका लगा.

चाचा भी वीडियो देखने के लिए उठ गये थे.

चाचा अपने बच्चों को लॅपटॉप पर देख कर खुश थे.

चाचा हमेशा की तरह बड़ी चाची के पास बैठ थे.

चाचा के आने से बड़ी चाची की खुशी दुगनी हो गयी.

चाचा और बड़ी चाची बाते करते हुए बच्चों को नामकरण देख रहे थे.

चाचा और चाची को साथ मे देख कर मुझे अछा लगने लगा. मेरे बच्चे चाचा और चाची को पास ला रहे थे.

मैं ने थोड़ी देर अपने फॅमिली के साथ वीडियो देखा फिर कॅमरा लेकर बाहर चला गया.

 
615

अब मैं फ्री हो गया.

लेकिन पहले मुझे जखम पर लगाने के लिए मलम और कुछ चीज़े लेनी थी. अगर ऐसा नही किया तो कुवरसिंघ को शक हो सकता है.

लंड पर लगाने के लिए ट्यूब लेना होगा. ज़ोया और सारा ने मुझे जो ट्यूब बताया था उस से कुवरसिंघ जल्दी ठीक हो जाएगा और ये मैं नही चाहता ,

इस लिए मैं ने एक नॉर्मल सा ट्यूब और मलम और पेन किल्लर शहर से मॅंगा लिया .मलम और ट्यूब और पेन किल्लर,और नींद की गोलिया लेने के बाद मैं ने मोना को कॉल किया.

अवी-हेलो मोना

मोना-हाँ बोलो

अवी-खाना तय्यार है

मोना-हाँ

अवी-तो एक काम करो शाम 8.00 बजे लेकर खेत मे आ जाना

मोना-तुम ने मुझे समझ क्या रखा है

अवी-क्या हुआ

मोना- तुम मुझे नौकरानी की तरह काम करवा रहे हो

अवी-नौकरानी, तुम भूल रही हो कि शहर मे तुम नौकरानी का काम करती हो

मोना-वो अलग बात है,यहाँ पर हम पार्ट्नर है.

अवी-(मोना का क्या करूँ) तुम बड़ी पार्ट्नर और मैं छोटा पार्ट्नर हूँ

मोना-ये क्या बोल रहे हो

अवी-(मोना को खुश करना होगा) लगता है तुम भूल गयी हो, काम तुम ज़्यादा कर रही हो और पैसे तुम्हे ज़्यादा मिलेंगे,यही कल डिसाइड किया था ना

मोना-ज़्यादा मतलब कितना

अवी-तुम्हे जितना ज़्यादा चाहिए उतना ,अब खुश

मोना-हाँ, खाना लेकर आ जाउन्गी.

अवी-टाइम पर आ जाना

मोना-आ जाउन्गी

चलो मोना का काम हो गया.अब जाकर देखता हूँ कि कुवरसिंघ की नींद खुली की नही.

मैं घर3 आ गया.

कुवरसिंघ अब तक सो रहा था. जिस तरह सविता ने पति ने उसकी हालत की और उसके बाद मोना के हाथो की मालिश से कुवरसिंघ आराम मिल गया .

लेकिन कल से कुवरसिंघ नंगा ही था.उसके शरीर पर मार के निशान अभी तक ताज़ा थे,

कुवरसिंघ अभी भी एक तरफ होकर सो रहा था.उसकी गंद और लंड की हालत ऐसी थी की लंड पर मक्खी भी बैठे से कुवरसिंघ को दर्द हो सकता था.

कहाँ कुवरसिंघ कल तक शान से चलता था और आज अगर चलने की कोशिस करेगा तो ऐसा लगेगा जैसे सुहागरात के दूसरे दिन दुल्हन चलती है.

कुवरसिंघ को वैसे ही सोने दिया और मैं ने कॅमरा बदल दिया.

मलम और पेन किल्लर टेबल पर रख कर कुवरसिंघ को जगाने लगा.

कुवरसिंघ आवाज़ सुनकर जागने वाला नही था.

मैं ने जैसे ही कुवरसिंघ के शरीर पे हाथ लगाया वैसे ही कुवरसिंघ जो अब तक एक तरफ होकर सो रहा था वो गंद के बल गिर गया.

गंद पर ज़ोर पड़ते ही कुवरसिंघ के मुँह से चीख निकल गयी.

कुवरसिंघ बिना वक्त गवाए फिर से पहले वाली पोज़िशन पर आ गया..

पेन किल्लर और मोना की मालिश का असर ख़तम हो गया था. अब फिर से कुवरसिंघ को दर्द होना शुरू हो गया.

कुवरसिंघ की हालत देखते हुए ऐसा लग रहा था कि कुवरसिंघ को ठीक होने मे बहुत समय लगेगा.

कुवरसिंघ ने खुद को इस तरह लिटा लिया कि उसको कम से कम दर्द हो.

अवी-क्या हुआ ,

कुवरसिंघ-बहुत दर्द हो रहा है.

अवी-थोड़ी देर बर्दस्त करो मोना आती ही होगी.

कुवरसिंघ-कब आएगी वो ,मुझे और बर्दास्त नही हो रहा है.

अवी-चलो फिर हॉस्पिटल

कुवरसिंघ-हॉस्पिटल नही, यहीं पर कुछ करो

अवी-यहाँ करना है तो रुकना होगा.

कुवरसिंघ-रुकता हूँ ,पर ये दर्द

अवी-ये दर्द नही तुम्हारे करमो की सज़ा है.तुम जो लोगो के साथ करते हो ये उसकी सज़ा मिल रही है ,

मेरी बात सुनकर कुवरसिंघ की आँखे से पानी आ गया.

अवी-अब रो क्यूँ रहे हो, जो जैसा करता है उसे वैसी सज़ा मिलती है.

कुवरसिंघ फिर रो ने लगा.

अवी-ये रोना बंद करो ,और ये बताओ ये सब हुआ कैसे

कुवरसिंघ-तुम्हे क्या बताऊं ,तुम्हे तो सब दिख रहा है.

अवी-तुम्हे देख कर लगता है कि तुम्हारा रेप हुआ है

रेप नाम सुनकर कुवरसिंघ फिर से रोने लगा ,

अवी-अब क्या हुआ,

कुवरसिंघ कुछ बोलने वाला था कि गेट पर किसीने खटखटाया

लगता है मोना आ गयी.

अवी-ये रोना बंद करो ,मोना के सामने कुछ मत बोलना ,

मैं ने कुवरसिंघ को मंकी कॅप पहना दिया और गेट खोल दिया.

 
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