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मैं और मेरा परिवार

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18थ डे

सुबह हम सब मंदिर चले गये.

मंदिर जाकर पूजा करने के बाद रणजीतसिंघ मेरे साथ बाते करना चाहता था .

अवी-आज तुम काम देख लो मैं आज अपनी फॅमिली के साथ शॉपिंग करने जा रहा हूँ.

रणजीतसिंघ-आज फॅमिली टाइम है

अवी-हाँ, दादाजी ने कहा था कि मेले का काम देखने के बाद सबको गिफ्ट देने है.

रणजीतसिंघ-ये अच्छा सोचा

अवी-तो मैं आज सब को शॉपिंग कराने ले जा रहा हूँ ,

रणजीतसिंघ-यहाँ की टेन्षन मत लो ,यहाँ मैं देख लूँगा.

अवी-अब सीधा कल मिलते है.

रणजीतसिंघ से बात करने के बाद मैं अपनी फॅमिली के साथ घर आ गया.

मैं ने बुआ को उनके घर जाने नही दिया.

सी चाची-क्या बात है अवी, सब को एक साथ क्यूँ बुलाया है

अवी-आज हम सब शहर जाने वाले है.

बी चाची-शहर ,वो किस लिए

अवी-वो तो शहर जाकर पता चलेगा

नीता बुआ-शहर जा कर क्या करना है वो तो बताओ ,

अवी-वो शहर जाकर आपको खुद पता चल जाएगा.

स्वेता दीदी-कही कोई लड़की तो पसंद नही कर ली.जो हम सब को उसके घर ले जा रहे हो

पूजा बुआ-अवी ,स्वेता क्या कह रही है

बी चाची-अवी

अवी-चाची, दीदी मज़ाक कर रही है ,हम किसी और काम से जा रहे है.

म चाची-अवी बता ना , अगर तू नही बताएगा तो मैं नही आउन्गि

सीतल दीदी-मैं नही आने वाली.

अवी-छोटी चाची की तरफ देख कर ,ठीक है मत चलो

और मैं अपने कमरे मे चला गया

कोमल-क्या दीदी आपने अवी को नाराज़ कर दिया.

सीतल दीदी-मुझे क्या पता था कि अवी को गुस्सा आ जाएगा.

सी चाची-दीदी अवी इतना कह रहा है तो हमे उसके साथ जाना चाहिए ,शायद अवी हमे सर्प्राइज़ देना चाहता हो

नेहा बुआ-पर ऐसे कैसे चले जाए ,

पूजा बुआ-मीना ठीक कह रही है, शायद वो हमे कही ले जाना चाहता हो

रानी-मैं सोच रही थी कि..........

पूनम दीदी-तुम क्या सोच रही हो

रानी-मुझे ऐसा लग रहा है कि ,अवी अपना प्रॉमिस पूरा करने के लिए शहर ले जा रहा होगा.

म चाची-कैसा प्रॉमिस

रानी-मेले की शुरुआत मे हम ने अवी से गिफ्ट माँगे थे ,शायद वही प्रॉमिस पूरा करना चाहता होगा.

सी चाची-अब तो मुझे भी ऐसा लग रहा है.

ब चाची-अगर ऐसा है तो हमे शहर जाना चाहिए

पूजा बुआ-हाँ, चलो चलके देखते है अवी किस लिए शहर ले जा रहा है. वैसे वो हमारा इतना ख़याल रखता है और हम है कि उसको नाराज़ कर दिया.

नीता बुआ-चलो अवी को मनाते है.

स्वेता दीदी-नही, हम अवी को ये नही दिखाएँगे कि हमे सब पता है ,बस उसके साथ चलने को हाँ कर देंगे ...

नीता बुआ-हाँ चलो चलते है

चाचा-कहाँ जाने की बाते हो रही है.

सीतल दीदी-मामा अवी के साथ हम शहर जा रहे है.

चाचा-सब जा रहे है

कविता लीना-हाँ

चाचा-कब निकल रहे हो

सी चाची-आप नही आ रहे

चाचा-नही. मुझे यहाँ एक ज़रूरी काम है.तुम सब जाओ

ब चाची-आप साथ चलते तो अवी को अच्छा लगता .

चाचा-मैं आ जाता पर मुझे ठाकुरजी से मिलने जाना था. तुम्हे तो पता है. मेरा जाना ज़रूरी है.

म चाची-कल भी तो मिल सकते है ठाकुरजी से

चाचा-सुमन तुम्हे तो पता है.

ब चाची- आप ठाकुरजी से मिल लीजिए हम अवी के साथ शहर जाते है.

सब के डिसाइड करने के बाद स्वेता दीदी मेरे कमरे मे आ गयी.

स्वेता दीदी-अवी नाराज़ हो

अवी-मैं क्यू नाराज़ रहूँगा.

स्वेता दीदी-मुझे पता है तू नाराज़ है. और मैं यहाँ तेरी नाराज़गी दूर करने आई हूँ.

अवी-आप को पता हैना मैं किस बात से नाराज़ हूँ

स्वेता दीदी-हाँ, अब सुन ,सब शहर जाने की तय्यारी कर रहे है. तू भी तय्यार हो जा, ये धोती छोड़ो और जीन्स पहन ले

अवी-सब तय्यार हो गये

स्वेता दीदी-हाँ ,अब बता कितने बजे निकलना है

अवी-10 बजे ,खाना खा कर निकलते है

स्वेता दीदी-ठीक है मैं सब को बता कर आती हूँ.

सब खाना बनाने मे लग गये.

मैं ने पायल को कॉल करके बता दिया कि वो 10 बजे मेरे यहाँ आ जाए.

खाना बन ने तक मैं बच्चों को शहर ले जाने के लिए आइडिया लगाने लगा.

बच्चों को ज़्यादा देर बाहर रखना ठीक नही होगा.

मैं ने डिसाइड किया कि पहले चाची की खरीददारी कर दूँगा और उनको एक कार मे वापस भेज दूँगा.

जब तक चाची खरीदी करेगी बच्चों के पास विद्या और रति रुक जाएगी.

पंकज की मामी के साथ जिस शॉप मे गया था वहाँ पर बच्चों को खेलने के लिए एक रूम था वहाँ पर बच्चे सेफ रहेंगे

चाची को कहूँगा कि बीच बीच मे बच्चों को देखती रहे.

पहले छोटी चाची को शॉपिंग करवाउन्गा तब तक रानी बच्चों के पास रुक जाएगी.

फिर रानी और छोटी चाची अपनी जगह एक्सचेंज करेगी.

सब फिक्स हो गया.

इस बार मेले की तरह ग़लती नही होगी.

हम खाना खाने के बाद शहर जाने के लिए तय्यार हो गये.

पूजा बुआ ,नीता बुआ और ज्योति बुआ घर जाकर सब के मोबाइल लेकर आ गयी.

पायल भी अपने समय पर आ गयी.

पायल को देख कर सब शॉक्ड हुए पर मैं ने बताया कि कार ज़्यादा रहेंगी तो ट्रॅवेलिंग मे प्राब्लम नही होगी.

सब आराम से 3 कार मे अड्जस्ट हो गये

विद्या चाची और पूजा बुआ एक कार मे बैठ गयी.

नीता बुआ ,नेहा बुआ ,मेरे बहनें और रति नेक्स्ट कार मे

पायल की कार मे कविता ,लीना और राज आ गया.

और मेरी बाइक पे कोमल और रानी बैठ गयी.

मैं सब से आगे और हमारे पीछे कार आने लगी.

अवी-कोमल और रानी तुम्हे मेरा एक काम करना है.

कोमल-हाँ बोलो

अवी-तुम को पता है हम शहर क्यूँ जा रहे हैं

कोमल-नही

अवी-हम शॉपिंग करने जा रहे है.

कोमल-शॉपिंग

अवी-हाँ, अब सुनो जब तक चाची की शॉपिंग नही होती तुम दोनो बच्चों के साथ रहोगी.

कोमल-ठीक है ,

अवी-चाची को शॉपिंग करवाने के बाद हम शॉपिंग करेंगे

कोमल-समझ गयी.

रानी और कोमल को उनका काम बता कर हम शहर की तरफ जाने लगे.

शहर जाकर मैं ने अपनी बाइक शॉप के सामने रोक दी.

सब कार से नीचे उतर गये

सी चाची-ये कहाँ ले आए हो हमें

अवी-सर्प्राइज़्ड ,हम शॉपिंग करने आए है.

मेरी बात सुनकर सब मन ही मन मे स्माइल करने लगे

किसी के चेहरे पे शॉकिंग एक्सपेस्षन ना देख कर मैं शॉक्ड हो गया.

तभी स्वेता दीदी मेरे मन की बात समझ गयी.

स्वेता दीदी-शॉपिंग या हुउऊउ

स्वेता दीदी के साथ सब ने दिया और सब खुश हो गये.

फिर हम सब शॉप मे चले गये.

 
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हम सब शॉप मे आ गये.

हमारे आते ही एक लड़की हमारे पास आ गयी.

शॉप गर्ल-सर आप ,आइए

सी चाची-अवी तुम यहाँ आ चुके हो

अवी-हाँ ,एक बार आया था तभी आप सब को यहाँ लेकर आ गया.

शॉप गर्ल-सर आइए मेरे साथ, मैं आपकी मदद करूँगी शॉपिंग करने के लिए

स्वेता दीदी-अच्छी शॉप है ,मैं पहली बार यहाँ आई हूँ. शायद ये नयी शॉप है

शॉपगर्ल-मेडम आपने सही फरमाया है, ये नयी शॉप है. तो कहिए आप किस तरह की शॉपिंग करना पसंद करेगी.

अवी-पहले चाची और बुआ को शॉपिंग करवाते है.

ब चाची-हाँ, हम शॉपिंग करके चले जाएँगे फिर तुम सब आराम से शॉपिंग करना.

सी चाची-और बच्चों का क्या

शॉप गर्ल-उसके लिए हमारे यहाँ एक स्पेशल रूम है.

ब चाची-लेकिन उनके साथ किसी को रुकना होगा.

कोमल-मामी मैं और रानी रुकते है

सी चाची-विद्या और रति भी रुक जाएगी. तुम दोनो की मदद करने के लिए

बच्चों का सेटल्मेंट करने के बाद हम सारी के सेक्षन मे चले गये.

शोपगिर्ल चाची और बुआ को साड़ी दिखाने लगी.

शोपगिर्ल ने 6 लॅडीस को साड़ी दिखाने को कहा.

6लॅडीस, 7 होने चाहिए ,ये ज्योति बुआ कहाँ रह गयी.

मैं ने पूजा बुआ को एक तरफ बुलाया

अवी-ज्योति बुआ कहाँ है

पूजा बुआ-ज्योति दीदी नही आई है

अवी-क्यू क्या हुआ ज्योति बुआ को

पूजा बुआ-हम मोबाइल लेने घर तब आते हुए ज्योति दीदी रास्ते पे गिर गयी. और उसके पैर मे मोच आ गयी.

अवी-ये बात आपने पहले क्यू नही बताई

पूजा बुआ-मैं भूल गयी. जाने दो वो घर पे आराम कर रही होगी.

मैं ने ज्योति बुआ पे ज़्यादा ध्यान नही दिया .और चाची को साड़ी लेने मे मदद करने लगा.

बड़ी चाची आज बहुत खुश थी.बेटा माँ को साड़ी देता है वो दिन माँ के लिए सब से खास दिन होता है.

शॉप मे एक से बढ़कर एक साड़ी थी.

चाची हमेशा सिंपल साड़ी पहनती थी और आज इतनी अच्छी अच्छी मॉडर्न सारी देख कर वो खुश हो गयी.

लॅडीस कोई भी हो ,छोटी हो या बड़ी हो,शॉपिंग के मामले मे सब एक जैसी होती है.

साड़ी देखते भूल गयी कि उनको शॉपिंग जल्दी करनी है.

एक साथ एक फॅमिली की इतनी औरतों को साड़ी दिखाना मतलब कसरत का काम था.

किसी को एक पसंद आती तो दूसरी को दूसरी पसंद आती.

और एक दूसरे से पूछने पर तो अलग अलग सजेशन मिलने पे चाची और बुआ फिर से दूसरी साड़ी देखने मे लग जाती.

किसी साड़ी का कलर पसंद आ जाता तो उसकी डिज़ाइन पसंद नही आती.

बड़ी चाची को साड़ी पसंद आ गयी तो सीमा चाची वो साड़ी खुद के लिए ले लेती.

एक बार तो ऐसा हुआ कि एक साड़ी इतनी अच्छी थी कि एक तरफ से चाची ने उठा ली तो दूसरी तरफ से बुआ ने.

दोनो के हाथ मे एक साड़ी देख कर सब हँसे लगे.

फिर शुरू हुआ नया खेल ,चाची कहती बुआ को कि तू रख ले तुझ पे अच्छी दिखेगी.तो बुआ कहती नही चाची पे अच्छी दिखेगी.

इसी बात का फ़ायदा सीमा चाची ने उठा लिया.पूजा बुआ और बड़ी चाची के हाथ से साड़ी लेकर सीमा चाची ट्राइ करने चली गयी.

चाची और बुआ साड़ी देख कर ट्राइ करके देखने लगी.

और मेरी बहनें उनको साड़ी चाय्स करने मे मदद करने लगी.

कविता-माँ ,येल्लो वाली देखो कितनी अच्छी है.

स्वेता दीदी-बड़ी मामी ये नही वो वाली देखो ,उसकी डिज़ाइन आप पे अच्छी लगेगी

पूनम दीदी-ये मुझ पे अच्छी लगेगी.

पूजा बुआ-दुल्हन की तरह दिख रही है.

सीतल दीदी-छोटी मामी ये लीजिए ,इसमे आप सेक्सी लगेंगी.

सीतल दीदी की बात सुनकर सब उसकी तरफ देखने लगे

पूजा बुआ आँखे निकाल कर सीतल दीदी को घूर्ने लगी.

सीतल दीदी-मेरा मतलब था कि अच्छी लगेंगी

सीतल दीदी का छोटा ड्रामा हो जाने के बाद फिर से शॉपिंग शुरू हो गयी.

पायल भी चाची की मदद करने लगी.

मैं शॉप गर्ल के पास आ गया.

शॉप गर्ल-सर आप अपनी गर्लफ्रेंड को साथ नही लाए

अवी-किस गर्लफ्रेंड की बात कर रही हो

शॉप गर्ल-वही जिसका बॅग एक्सचेंज हो गया था

अवी-(पंकज की मामी) उसके साथ ब्रेकप हो गया है, आज फॅमिली के साथ आया हूँ.

शॉप गर्ल-आप अपनी चाची को साड़ी गिफ्ट कर रहे हो

अवी-हाँ

शॉपगर्ल-तो नीचे एक पेटॅनी साड़ी का सेक्षन है वहाँ एक से बढ़कर एक साड़ी मिलेंगी

अवी-चलो फिर

शॉप गर्ल-इनको नही ले जाओगे

अवी-उनको अपनी पसंद की खरीद ने दो मैं अपनी पसंद की खरीद कर देता हूँ

शॉप गर्ल-तो फिर चलिए

पहले मैं रानी और कोमल के पास गया .और उनको अपने साथ चलने को कहा

रानी-अवी बच्चे

अवी-विद्या देख लेगी. हम बस 10 मिनट मे वापस आ जाएँगे

शॉपगर्ल-10 मिनट ,समझ गयी ,आप बस देखते जाओ

हम पेटॅनी साड़ी के सेक्षन मे आ गये.

शोपगिर्ल ने 3 लड़कियो को पास बुला कर समझा दिया कि इनको बेस्ट साड़ी जल्द से जल्द दिखाओ

मैं ने रानी की तरफ इशारा किया और जल्दी सेलेक्ट करने को कहा.

रानी की चाय्स अच्छी थी और

स्पीड जबरदस्त थी. वो शॉपिंग करने मे एक्सपर्ट थी.

लड़कियो ने पेटनी निकाल कर टेबल पर रख दी.

रानी आगे आकर टेबल पर रखी हुई साड़ी को एक एक करके अलग करने लगी.

जो अच्छी लगती वो साड़ी कोमल को देती .

रानी ने सभी साड़ीयों ने से 15 साड़ीयां अलग की.

फिर कोमल और रानी उन साड़ीयों मे से अच्छी साड़ी निकालने लगी.

देखते देखते साड़ी सेलेक्ट हो गयी.

मैं साड़ी लेकर चाची के पास आ गया और रानी कोमल बच्चों के पास चली गयी.

चाची और बुआ ने अपने लिए साड़ी निकाल ली.सब से ज़्यादा सीमा चाची ने साड़ीयाँ निकाली.

साड़ी लेने के बाद मॅचिंग ब्लाउस पीस और पेटिकोट लेने चले गये.

चाची और बुआ ने अपनी शॉपिंग 2 घंटे मे पूरी की. काफ़ी लंबी चली थी शॉपिंग.

मैं ने शॉपगर्ल को बिल बनाने को कहा.

चाची बुआ को मैं ने अपनी ली हुई साड़ी दे दी.

अवी-ये मेरी पसंद की साड़ी. आपके लिए

चाची और बुआ मेरी दी हुई साड़ी देखने लगी.

मेरी पसंद की साड़ी देख कर चाची और बुआ खुश हो गयी.

चाची और बुआ ने मुझे गले लग कर उनको साड़ी कितनी पसंद आई ये बताने लगी .नेहा बुआ ने सिर्फ़ मेरे सर मे प्यार से हाथ घुमा कर अपना प्यार मुझे दिया.

फिर शॉपगर्ल ने बिल बना दिया.

शॉपगर्ल ने चाची और बुआ की साड़ी अलग अलग पॅक की.

रानी और कोमल भी बच्चों को लेकर आ गयी.

अवी-चाची आप खुश हो ना

ब चाची-तू हमेशा खुश रहा कर इसी मे मुझे खुशी मिलती है

सी चाची-हमारी शॉपिंग तो हो गयी.अब आगे का क्या प्लान है

अवी-मेरी बहनों की शॉपिंग अभी बाकी है

नीता बुआ-स्वेता ,आज कोई कसर मत छोड़ना पूरा वसूल करना ,

सीतल दीदी-वो मैं कर लूँगी ,आज तो अवी का पॉकेट खाली कर दूँगी.

चाची और बुआ को उनकी शॉपिंग के साथ घर भेज दिया. साथ मे थोड़ी शॉपिंग बच्चों के लिए भी कर ली चाची ने.

इसमे बुआ ने चाची की मदद की जिस से बच्चो की शॉपिंग जल्दी हो गयी.

चाची और बुआ 2 कार लेकर गयी ,मैं ने राज को चाची के साथ भेजा और एक कार मे वापस आने को कहा.

चाची और बुआ को घर भेजने के बाद सब मेरी तरफ देख रही थी.

बस मेरे एक हाँ की देर थी.

और शॉप को लूटना शुरू हो जाता.

अवी-ऐसे क्या खड़ी हो ,टूट पडो ,जो चाहिए वो लो

सीतल दीदी-नो लिमिट

अवी-नो लिमिट

मेरे इतना कहते ही सब अलग अलग सेक्षन की तरफ चली गयी.

विद्या और रति मेरे पास खड़ी थी.

अवी-तुम भी जाओ

विद्या और रति भी अपने लिए ड्रेस लेने चली गयी.

मैं अकेला रह गया.राज का इंतज़ार करते हुए.

 
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थोड़ी देर बाद राज भी आ गया.

राज और मैं ,राज के लिए कपड़े लेने चले गये. राज के कपड़े लेने मे कोई दिक्कत नही हुई. वो तो चुटकी बजाते हो गया.

फिर राज स्वेता दीदी के साथ घूमने लगा.

देखते देखते शॉप मे लोगो की भीड़ हो गयी.

अच्छा हुआ मैं ने चाची और बुआ को जल्दी घर भेज दिया.वरना भीड़ मे उनको शॉपिंग करने मे प्राब्लम होती.

इनकी शॉपिंग बहुत लंबी चलने वाली थी.

मैं विद्या के पास चला गया.

अवी-कुछ पसंद आया

विद्या-हाँ, 2 ड्रेस सेलेक्ट किए है

अवी-ट्राइ नही किए

विद्या-वो देखो कितनी लड़कियाँ वेटिंग पर है ,ड्रेस ट्राइ करने के लिए

मैं ट्राइयल रूम की तरफ देखा ,वहाँ पर रानी कोमल पायल भी खड़ी थी.

अवी-रूको मैं कुछ करता हूँ

मैं शॉप गर्ल के पास आ गया.

अवी-ये क्या है

शॉप गर्ल-क्यूँ क्या हुआ

अवी-वो देखो मेरी बहने लाइन मे खड़ी है

शॉप गर्ल-पहले क्यू नही बताया अभी कुछ करती हूँ

अवी-क्या करोगी

शॉप गर्ल-2न्ड फ्लोर पे कंट्रक्षन का काम चल रहा है. काम पूरा हो गया बस ओपनिंग बाकी है, वहाँ के ट्राइयल रूम खाली है

अवी-जाकर मेरी बहनों को बता दो

शॉप गर्ल-अभी बताती हूँ

शोपगिर्ल ने रानी ,पायल ,कोमल और विद्या को बता दिया कि उपर ट्राइयल रूम है.

शोपगिर्ल उनको बता कर अपने काम मे लग गयी.

रानी अपने ड्रेस ले के उपर जाने लगी. कोमल विद्या और पायल बाकियो को बताने चली गयी कि उपर भी ट्राइयल रूम है.

रानी को उपर जाते हुए देख कर मेरा दिल रानी के साथ मस्ती करने को मचल रहा था.

उपर जाने के लिए दो तरफ से सीडिया थी,

रानी एक तरफ से उपर जाने लगी .मैं भी दूसरी तरफ से उपर जा रहा था कि राज ने मुझे रोक लिया.

राज ने थोड़ी देर मुझे परेशान किया .

राज से फ्री होते ही मैं रानी से मिलने उपर चला गया.

उपर जाकर ट्राइयल रूम के पास आ गया.ट्राइयल रूम के पास थोड़ा अंधेरा था.

मैं ट्राइयल रूम मे रानी को ढूँढने लगा.लास्ट वाले ट्राइयल रूम का लाइट चालू थी. ट्राइयल रूम का गेट खुला हुआ था. मतलब रानी गेट लगा रही थी.

मैं ने रानी को डराने के लिए ज़ोर से गेट को धक्का दिया.

गेट खुलने से रानी पीछे सरक गयी ,और दीवार से टकरा गयी जिस से स्विच ऑफ हो गया और लाइट बंद हो गया.

मैं अंदर चला गया. अंदर अंधेरा था. रानी डर गयी ,मैं ने रानी को और डराने के लिए उसके मुँह पर हाथ रख दिया.

और उसको पकड़ लिया. वो मेरे हाथो से निकलने लगी.

ये बहुत हो गया.

अवी-शोर मत करो ,मैं अवी हूँ

मेरा नाम सुनते वो रिलॅक्स हो गयी.

अवी-मैं हाथ हटा रहा हूँ ,तुम चिल्लाना मत

उसने गर्दन हाँ मे हिला दी. मेरे हाथ हटते ही वो मुझे मारना चाह रही थी कि मैं ने उसके होंठो पे किस करना शुरू किया.

मेरे किस करते उसने हाथ हिलाना बंद किया.

उसका बदन ढीला पड़ गया .उसने खुद को मेरे हवाले कर दिया.

उसको मैं पकड़ कर किस ना करता तो वो नीचे गिर जाती.

वो मेरे किस के ,मेरे प्यार के सहारे खड़ी थी.

उसके किस ना करने से भी मैं उसके प्यार को फील कर रहा था.

ऐसा लग रहा था कि बस रानी को प्यार करता रहूं.

कभी कभी तो ऐसा लगता कि अभी किसी मंदिर मे जाकर रानी से शादी कर लूँ

रानी का प्यार और चाची का प्यार मेरे जीने का सहारा था.

रानी मुझे किस नही कर रही थी बस मूर्ति की तरह खड़ी थी

शायद वो डरने की वजह से साथ नही दे रही थी.मुझे पता था उसे कैसे मनाना है.

मैं रानी के होंठो को चूसना शुरू किया. रानी के होंठो मे जादू था.

उसके होंठो को चूस्ते ऐसा लग रहा था कि हमारी साँस एक हो गयी है.

रानी को प्यार करने से हंसिन पल कोई दूसरा हो ही नही सकता.

चाची का प्यार और रानी का प्यार ,दोनो को मैं एक किस से पहचान सकता हूँ.दोनो का प्यार मेरी सांस को छु कर अपना बना लेता है.

रानी को रेस्पॉन्स ना देता हुआ देख कर मैं ने किस करना बंद किया.

अवी-मेरे इस तरह करने से नाराज़ हो तुम

उसने कुछ नही कहा.

अंधेरा होने से मुझे उसका चेहरा नही दिख रहा था वरना उसके एक्सप्रेशन देख लेता जिस से उसको मनाना आसान होता.

अवी-मैं क्या करता ,आज कंट्रोल नही कर पाया ,तुम इतनी खूबसूरत दिख रही थी कि आज मैं सब कुछ भूल कर तुम्हारे पीछे पीछे यहाँ आ गया.तुम्हे प्यार करने के लिए.

फिर भी रानी ने कुछ नही कहा बस मेरी बात सुन रही थी.

अवी-कब तुम अपनी पढ़ाई पूरी करोगी और कब मैं तुम्हे प्यार करूँगा,कब हम एक होंगे ,कब तक ऐसे चुपके प्यार करना, मुझ से कंट्रोल नही हो रहा,आइ लव यू

मेरी बात सुनकर उसने कुछ हरकत की

अवी-मुझे पता है तुम गुस्सा हो, मैं प्रॉमिस करता हूँ ऐसा दुबारा नही करूँगा. तुम जल्द से जल्द अपनी पढ़ाई पूरी करो ,डॉक्टर बन जाओ,फिर हम शादी करेंगे. तब तक हम दूर रहेंगे ,फ्रेंड की तरह रहेंगे .और रही चाची की बात उनको मैं मना लूँगा.

फिर भी रानी ने कुछ नही कहा.

अवी-कुछ तो बोलो,

मेरी बात सुनते उसने मुझे किस किया और मुझे पीछे धक्का दे कर गेट खोल कर भाग गयी.

धक्का देने से मेरा कंट्रोल लॉस हो गया.

जब तक मैं खुद को संभाल पाता तब तक रानी वहाँ से जा चुकी थी.

रानी को क्या हो गया , वो ऐसे अजीब हरकते क्यूँ कर रही है.

मैं ने खुद को ठीक किया और ट्राइयल रूम से बाहर आ गया.

और सीडियो से नीचे आ गया. जब मैं आख़िरी सीडी पर था तो मुझे शॉप के गेट से रानी बाहर से अंदर आते हुए दिखाई दी.

रानी वहाँ कब चली गयी

अभी तो मैं उसे किस कर रहा था इतनी जल्दी वो बाहर कैसे गयी.

मैं यही सोच रहा था कि रानी मेरे पास आ गयी

रानी-तुम्हारा मोबाइल देना मुझे

अवी-क्या?

रानी-मेरा बॅलेन्स ख़तम हो गया. रीचार्ज करने बाहर गयी थी पर रीचार्ज नही मिला .अपना मोबाइल दो

अवी-तुम बाहर कब गयी

रानी-बहुत देर हो गयी ,यहाँ रीचार्ज मिला नही

अवी-तुम उपर से इतनी जल्दी बाहर कैसे गयी.

रानी-मैं कब उपर गयी थी. मतलब उपर जा रही थी पर बीच मे मम्मी का मेसेज आया. मेरे पास बॅलेन्स नही था तो मैं बाहर चली गयी.

अवी-(अगर रानी बाहर गयी थी तो उपर मैं किस के साथ था.)

रानी-अवी क्या हुआ

अवी-कुछ नही वो ,ये तो मोबाइल .आंटी से बात कर लो.

रानी मेरा मोबाइल लेकर आंटी को कॉल करने लगी.

अगर रानी बाहर थी तो उपर मेरे साथ कौन था. कोमल वो नही हो सकती ,विद्या वो होती तो वो मेरा रेप कर देती, पायल हो सकती है, पूनम दीदी उनकी हाइट ज़्यादा है, कविता लीना स्वेता दीदी सीतल दीदी इन मे से कोई नही होगा.

क्या पायल थी. मैं जाकर पूछ लेता हूँ.

मैं पायल की तरफ जा रहा था कि वो शॉपगर्ल मिल गयी.

अवी-(इस पूछता हूँ) तुम ने उपर वाले ट्राइयल रूम के बारे मे किस किस को बताया

शॉप गर्ल-क्यूँ पूछ रहे हो

अवी-मुझे जान ना है

शॉप गर्ल-तुम्हे और हमारे खास कस्टमर को बताया है

अवी-(वो कस्टमर से कोई एक होगा) मुझे दिखा सकती हो किसे बताया है

शॉप गर्ल-चलो मेरे साथ

शॉपगर्ल ने पहला कस्टमर दिखाया ,ये तो हरीश और उसकी गॅंग है.

इनमे से ,हो सकता है ,अगर हुआ तो कुछ प्राब्लम नही होगा.

फिर शॉपगर्ल ने और 4 5 फॅमिली को दिखाया ,जिसमे से 2 फॅमिली की लड़किया मेरी क्लासमेट थी.

उनकी नज़र मुझ पे पड़ते उन लड़कियो ने मेरी तरफ देख कर स्माइल की

ये भी हो सकती है. मतलब कोई भी हो सकती है

किस चक्कर मे मैं फस गया.

रानी को किस करने से मेरे दिल को जो सुकून मिलता है वैसा उसको किस करने से लग रहा था.

क्या करूँ ,कुछ समझ नही आ रहा था. मैं जिस लड़की की तरफ देखता तो ऐसा लगता वो वही है.

मैं चेयर पे जाकर ख़यालो मे डूब गया. रानी को किस करना और माला को किस करना एक जैसा था ,क्या वो माला थी .

माला और रानी की पर्सनॅलिटी एक जैसी है.हाँ वो माला ही होगी तभी वो मुझे किस करके भाग गयी ताकि मैं उसे देख ना सकूँ

क्या माला मेले मे आई है. आ सकती है पर गाओं मे तो दिखी नही. शायद आज के लिए आई हो.

मैं माला को शॉप मे ढूँढने लगा. पहले बाहर जाकर देखा पर वो वहाँ नही दिखी फिर शॉप मे अलग अलग जगह डुँदने लगा.पर माला कही नही दिखी.

मैं शॉप मे उधर घूमते हुए माला को देखने लगा पर माला कही नही मिली

शायद मेरे किस करने से वो मेरा सामना करने की जगह यहाँ से चली गयी

फाइनली मैं ने माला को ढूँढना बंद किया .माला मेले मे तो आई होगी. वही देख लूँगा.

फिर मैं रानी के पास चला गया. और उसको अपने पसंद के ड्रेस खरीद कर देने लगा.

माला और रानी मे कितना फरक है

माला ने अपने बारे मे सोचा और रानी हमेशा खुद से ज़्यादा मेरे बारे मे सोचती है

रानी मना कर रही थी पर मेरे आगे उसकी कहाँ चलने वाली थी.मैं ने माला को अपने दिमाग़ से निकालने के लिए रानी के साथ समय बिताने लगा

रानी को मैं ने अपनी पसंद की साड़ी खरीद कर देने लगा

माला को दिमाग़ से निकाल ने का एक तरीका था वो थी रानी. मैं रानी के साथ समय बिताकर माला को दिमाग़ से निकालने लगा.

फिर रानी को मैं ने एक बढ़िया सी साड़ी खरीद कर दी. रानी साड़ी देख कर खुश हो गयी.

रानी- अवी अच्छी साड़ी है.

अवी-ट्राइ करके देखो

रानी साड़ी और ड्रेस ट्राइ करने चली गयी. रानी के जाते ही मैं फिर से माला के बारे मे सोचने लगा.

रानी के दूर होते माला ने फिर से मेरे दिमाग़ मे घर बनाना शुरू किया

ये माला ने मेरा जीना हराम कर दिया है

मैं अपने ख़यालो मे खोया था कि मेरे बहनें मेरे सामने आकर खड़ी हो गयी.

स्वेता दीदी-अवी कहाँ खो गये

सीतल दीदी-बिल की टेन्षन हो रही होगी.

अवी-(मैं क्यू माला के बारे मे मे सोच कर इतना अच्छा दिन खराब करू,उसे मेरी फिकर नही थी तो मैं क्यू उसके बारे मे सोचु.) हो गयी शॉपिंग

कविता-हो गयी

अवी-तुम सब बैठो मैं पेमेंट करके आता हूँ

पायल-मैं अपना पेमेंट खुद करूँगी

अवी-वो नही हो सकता,तुम्हे मैं ने इन्वाइट किया है ,

फिर मैं शॉप गर्ल के साथ जाकर पेमेंट कर दिया.

शॉप गर्ल भी खुश थी क्यूँ कि उसके हाथ से इतनी बड़ी शॉपिंग हुई.

मैं ने शॉप गर्ल को कुछ पैसे दिए. वो मुझे बाहर छोड़ने आ गयी.

 


670

अवी-पूनम दीदी और रानी तुम्हारा प्रॉमिस पूरा हुआ

पूनम दीदी-तुम्हे याद था

अवी-हाँ, अब स्वेता दीदी और सीतल दीदी की बारी है पर

सीतल दीदी-पर क्या

अवी-स्वेता दीदी ने कहा था कि उनको स्कूटी चाहिए .मैं दीदी को स्कूटी की जगह नेकक्लेस दूँगा.

स्वेता दीदी-अवी इसकी क्या ज़रूरत है.

अवी-ज़रूरत है. मेरी बहनों ने कुछ माँगा हो और मैं पूरा ना करूँ ये हो नही सकता

शॉपगर्ल-सर मैं कुछ बोलू

अवी-तुम गयी नही.

शॉप गर्ल-आप को नेकक्लेस लेना है तो हमारे बॉस की ज्यूयलरी की शॉप है .वो सामने दिख रही है वही. वहाँ से खरीद सकते है

अवी-ये तो अच्छी बात है

शॉप गर्ल-मैं आपका समान कार मे रखवा देती हूँ ,फिर नेकक्लेस लेने चलेंगे.

शॉप गर्ल ने समान कार मे रखवा दिया.

पायल-मैं चलती हूँ

अवी-तुम कहाँ जा रही हो

पायल-पिताजी का कॉल आया है. मुझे हवेली बुलाया है

अवी-(एक कार मे अड्जस्ट हो जाएगा)ठीक है ,और हां आज मेले मे नही जाना है

पायल अपनी ड्रेस लेके चली गयी.

हम ज्यूयलरी शॉप मे चले गये.

शॉप मे जाते ही सीतल दीदी ने मोर्चा अपने हाथ मे लिया.

सब सीतल दीदी और स्वेता दीदी की मदद करने लगे.

स्वेता दीदी नेककलेस की कीमत देख कर पसंद कर रही थी.

सीतल दीदी डिज़ाइन देख कर नेककलेस पसंद कर रही थी.

यही फरक होता है बड़े होने मे और छोटे होने मे

स्वेता दीदी बजट ज़्यादा ना हो ये देख कर नेककलेस देख रही थी तो सीतल दीदी बिंदास तरीके से नेककलेस देख रही थी

स्वेता दीदी हम सभी भाई बहनों को साथ लेकर चलती है

ग़लती की तो सज़ा देती है और प्यार भी उस से कही ज़्यादा करती है

फाइनली स्वेता दीदी और सीतल दीदी ने नेककलेस पसंद कर लिया.

मैं ने अपना बजट और बिल देखा ,बिल ज़्यादा था ,पर मैं मेनेज कर लूँगा.चाचा का एटीएम है मेरे पास.

अवी-तुम सब क्या देख रही हो, तुम इयररिंग ले सकती हो

मेरी बात सुनकर सब के चेहरे पे चमक आ गयी.

मैं भी उनके साथ इयररिंग देखने लगा.

कोमल इयररिंग देखने के साथ कुछ सोच रही थी.

मैं ने एक इयररिंग पसंद की और कोमल के पास आ गया.

अवी-कोमल क्या हुआ

कोमल-कुछ नही

अवी-कोई इयररिंग पसंद आई.

कोमल-नही

अवी-ये ट्राइ करो, तुम पे अच्छी लगेंगी.

कोमल ने इयररिंग पहन कर देख ली.

अवी-मैं ने कहा था ना कि तुम पे अच्छी दिखेंगी.तुम सब से सुंदर दिख रही हो

कोमल शरमा गयी.

अवी-अब बताओ क्या सोच रही थी.

कोमल-वो मैं

अवी-देखो तुम ज़्यादा सोचा मत करो,बस लाइफ को एंजाय करो ,और पढ़ाई का टेन्षन मत लो ,मुझे पता है तुम बहुत अच्छी डॉक्टर बनोगी.

कोमल-तुम्हे मुझ पे इतना यकीन है

अवी-तुम मेरी फ्रेंड हो ,और मैं तुम्हे बहन से ज़्यादा अपना बेस्ट फ्रेंड मानता हूँ ,तुम मेरे लिए स्पेशल हो ,

कोमल-लेकिन

अवी-लेकिन वेकीन छोड़ो ,बस जल्दी डॉक्टर बन जाओ फिर देखना.......

मेरी बात पूरी होने से पहले कोमल मेरे गले लग गयी.

अवी-अब कभी कोई परेशान होगी तो मुझे बताना अपने फ्रेंड को,मैं तुम्हारी सारी परेशानी दूर करूँगा.

कोमल-थॅंक्स ,

कोमल का मूड ठीक हो गया. स्वेता दीदी और सीतल दीदी का प्रॉमिस पूरा हुआ.

वो शॉप गर्ल भी खुश थी. उसके हाथो से इतनी बड़ी खरीदी हुई थी.

अवी-अब कविता और लीना और राज की बारी

कविता-मुझे लेटेस्ट वाला मोबाइल चाहिए

राज-मुझे

अवी-राज तुम्हे कॅमरा दिया है. वीडियो गेम भी दिया है.अब बस साइकल मिलेंगी.

फिर हम सब एलेक्ट्रॉनिक शॉप मे चले गये.

यहाँ पर काम जल्दी हो गया.

कविता और लीना ने मोबाइल का नाम बताया और मोबाइल ले लिया.

दोनो पहले से सब सोच कर पर्फेक्ट प्लान के साथ तय्यार रहती है

लॅपटॉप लेने मे रानी स्वेता दीदी और कोमल ने मदद की. वो लॅपटॉप लेने लगी.

मैं राज को लेकर बाहर आ गया. उसको साइकल लेके देने के बहाने मे बाहर आ गया.

और राज को लेकर बॅंक मे गया .चाचा की ड्यूप्लिकेट सिग्नेचर करके मैं ने बॅंक से 2.50 लाख निकाल लिए.

क्यू कि बजट मे थोड़ी गड़बड़ हो गयी थी.

2.50 लाख से अब बजट फिर से ठीक हो गया.

पैसे निकाल कर मैं ने राज को साइकल खरीद कर दी और वापस अपनी बहनो के पास आ गया.

अवी-अब कोमल की बारी

सीतल दीदी-कोमल ने तो तुम्हारी पसंद का गिफ्ट माँगा था.

अवी-वैसे देखा जाए तो कोमल को मैं ने अपने पसंद के इयररिंग दिए है,पर कोमल को कुछ और भी मिलेंगा.

कविता-क्या मिलेंगा दीदी को

अवी-कोमल को स्कूटी मिलेंगी.

स्कूटी का नाम सुनते सब खुश हो गये .पर कोमल गुस्सा होकर कार के पास चली गयी

स्वेता दीदी-कोमल को क्या हुआ. उसे स्कूटी मिल गयी.फिर वो ऐसे क्यू चली गयी

अवी-मैं देखता हूँ आप ये लॅपटॉप का देखो

मैं कोमल के पास आ गया.

अवी-क्या हुआ .गिफ्ट पसंद नही आया.

कोमल-मुझे स्कूटी नही चाहिए

अवी-पर क्यू

कोमल-तुम मेरा साथ छोड़ रहे हो ,अभी थोड़ी देर पहले क्या कहा था और अब स्कूटी दे कर मुझसे पीछा छुड़वा रहे हो

अवी-तुम्हे ऐसा लग रहा है कि मैं तुम्हे कॉलेज मे लेकर नही जाउन्गा.

कोमल-तभी तो मुझे स्कूटी दे रहे हो

अवी-तुम ग़लत समझ रही हो. मैं तुम्हे स्कूटी इस लिए दे रहा हू कि सम्मर मे तुम्हे एंट्रास एग्ज़ॅम के लिए क्लास लगा लोगि और तुम्हे क्लासस मे जाने के लिए स्कूटी दे रहा हूँ.ताकि तुम्हारी पढ़ाई मे कोई परेशानी ना हो.

कोमल-लेकिन तुम भी तो

अवी-तुम्हे कॉलेज मैं लेकर जाउन्गा ,पर क्लासस मे तुम्हे जाना होगा. मुझे खेत मे जाना होता है.

कोमल-पक्का मुझे कॉलेज लेकर जाओगे

अवी-प्रॉमिस.

कोमल को मनाने के बाद हम शोरुम मे चले गये.

कोमल ने अपनी पसंद की स्कूटी सेलेक्ट की.

कोमल को स्कूटी चलानी नही आती इस लिए स्कूटी रानी ने ली.

कोमल मेरे साथ बाइक पर बैठ गयी.

कोमल के चेहरे पे एक नयी चमक नज़र आ रही थी

शायद शॉपिंग के वजह से हो

पर कुछ भी हो कोमल को खुश देख मुझे अच्छा लगता है

कोमल को खुश देख कर पता नही पर ऐसा लगता है जैसे मुझे सब कुछ मिला हो ,

कोमल की खुशी आज कुछ और बयान कर रही थी पर मैं समझ नही पा रहा था

कोमल खुश है , तो नेहा बुआ भी ज़रूर खुश हो जाएगी

हम फिर से एलेक्ट्रॉनिक्स शॉप मे आ गये.

लॅपटॉप तय्यार हो गये. हम ने लॅपटॉप ले लिए और पेमेंट कर दिया.

सभी के प्रॉमिस पूरे किए.

फिर सब को जूस पिलाने के लिए होटेल ले गया.

आज सभी खुश थे.

खास करके कोमल खुश थी ,

"उसकी खुशी देख कर ऐसा लग रहा था कि उसे जिसका इंतज़ार था वो मिल गया हो "

सब को खुश देख कर मैं भी खुश हो गया.

मैं ने अपने लिए कुछ नही क्यूँ कि मुझे मेरे फॅमिली ने अपना प्यार दिया

फिर हम सब घर आ गये.

सब अपने साथ अपनी शॉपिंग बॅग लेकर अंदर आ गयी.

इतनी सारी शॉपिंग देख कर चाची शॉक्ड हो गयी.

मैं ने कविता लीना के मोबाइल और लॅपटॉप अपने अलमारी मे रख दिए.

सब अपनी शॉपिंग का समान एक दूसरे को दिखाने लगे.

कविता-मेरा मोबाइल का बॅग कहाँ है

लीना-लॅपटॉप भी नही दिख रहे

स्वेता दीदी-देखो यही पर होगे.

कविता-नही है

सीतल दीदी-कार मे होगे .जाकर देखो

अवी-मेरे पास है

कविता-भैया ,मुझे अपना लॅपटॉप देखना है

अवी-तुम दोनो को लॅपटॉप और मोबाइल नही मिलेगा.

लीना-हमे चाहिए

अवी-मोबाइल और लॅपटॉप एग्ज़ॅम के बाद मिलेंगे .जैसा हम ने डिसाइड किया था.

लीना-भैया ये चीटिंग है

नीता बुआ-अवी ने सही कहा. लॅपटॉप मोबाइल एग्ज़ॅम के बाद

अवी-और अगर एग्ज़ॅम का रिज़ल्ट खराब लगा तो लॅपटॉप और मोबाइल मैं वापस ले लूँगा

कविता-भैया ,

अवी-नही बोला तो नही.

लीना ने कविता के कान मे कुछ कहा.

कविता-ठीक है,

फिर सब अपनी शॉपिंग की बाते करने लगी.

 


670 ए

सब अपने साथ अपनी शॉपिंग बॅग लेकर अंदर आ गयी.

इतनी सारी शॉपिंग देख कर चाची शॉक्ड हो गयी.

मैं ने कविता लीना के मोबाइल और लॅपटॉप अपने अलमारी मे रख दिए.

सब अपनी शॉपिंग का समान एक दूसरे को दिखाने लगे.

इसमे सब से आगे थी कविता और लीना.

कविता और लीना शॉपिंग के बॅग मे अपने मोबाइल और लॅपटॉप वाली बॅग देखने लगी.

कविता-मेरा मोबाइल का बॅग कहाँ है

लीना-लॅपटॉप भी नही दिख रहे

स्वेता दीदी-देखो यही पर होगे.

कविता-नही है

सीतल दीदी-कार मे होगे .जाकर देखो

अवी-मेरे पास है

कविता-भैया ,मुझे अपना लॅपटॉप देखना है

अवी-तुम दोनो को लॅपटॉप और मोबाइल नही मिलेंगा.

लीना-हमे चाहिए

अवी-मोबाइल और लॅपटॉप एग्ज़ॅम के बाद मिलेंगे .जैसा हम ने डिसाइड किया था.

लीना-भैया ये चीटिंग है

नीता बुआ-अवी ने सही कहा. लॅपटॉप मोबाइल एग्ज़ॅम के बाद

अवी-और अगर एग्ज़ॅम का रिज़ल्ट खराब लगा तो लॅपटॉप और मोबाइल मैं वापस ले लूँगा

कविता-भैया ,

अवी-नही बोला तो नही.

लीना ने कविता के कान मे कुछ कहा.

कविता-ठीक है,

फिर सब अपनी शॉपिंग की बाते करने लगी.

सीतल दीदी-माँ ये नेककलेस कैसा दिख रहा है.

पूजा बुआ-ये तो काफ़ी महँगा दिख रहा है.

सीतल दीदी-अवी ने कहा कि नो लिमिट तो मैं ने खरीद लिया.

पूजा बुआ-अवी ने कहा और तूने इतना महँगा नेककलेस खरीद लिया. स्वेता से कुछ सीखो

अवी-बुआ मैं ने कहा था वरना सीतल दीदी तो नेककलेस खरीद ही नही रही थी.

राज-भैया झूठ बोल रहे है.

स्वेता दीदी-राज तेरी साइकल दिखा मुझे

पूजा बुआ-स्वेता रूको ,राज क्या कहा तुमने

अवी-जाने दो ना बुआ ,अब खरीदी हो जाने के बाद क्या सोचना.

पूजा बुआ-मैं उसे बता रही हूँ की उसे कैसा रहना चाहिए .अगले साल उसकी शादी होगी ,और ये है कि

नीता बुआ-हमारी सीतल जल्दी सीख जाएगी ,

नेहा बुआ -स्वेता हैना ,वो सीतल को सीखा देगी.

स्वेता दीदी-मैं सीतल का पूरा ध्यान रखूँगी.

म चाची-जो बाते करने है बाद मे करना. पहले शरबत पी लो

सीमा चाची ने सबको शरबत पिला दिया.

ब चाची-ये सारी किस की है.

नीता बुआ-बहुत संदर है. मीना तेरी है.

सी चाची-नही. मैं तो अपनी सारी अपने कमरे मे रख दी है.

रानी-मेरी है.

नेहा बुआ-तुम्हारी पसंद अच्छी है.

नीता बुआ-डिज़ाइन भी नयी है.

म चाची-मुझे पता होता कि रानी की पसंद इतनी अच्छी हैतो मेरी साड़ी रानी को सेलेक्ट करने को कहती.

रानी को ये साड़ी मैं ने दी थी.

रानी-अच्छी लगी तो बिना सोचे समझे खरीद ली.

पूजा बुआ-सच मे बहुत अच्छी है साड़ी

स्वेता दीदी-रानी की पसंद देख कर मैं सोच रही थी कि मेरे शादी की शॉपिंग मैं रानी के साथ करूँगी

सीतल दीदी-मैं भी.

रानी-हम साथ मे करेंगे जिस से शॉपिंग अपने आप बेस्ट हो जाएगी.

नेहा बुआ-कोमल तुम ने क्या लिया.

कोमल-कुछ खास नही

कविता-माँ भैया ने दीदी को स्कूटी दी है

नेहा बुआ-स्कूटी

कोमल-अवी ने खुद दी ,मैं तो

कविता-आपको पसंद ना हो तो मैं रख लेती हूँ

कोमल-मेरी है वो

लीना-दीदी देखा जाए तो वो जल्दी हमारी हो जाएगी

सीतल दीदी-वो कैसे

लीना-अभी नही. जब हमारी होगी तब अपने आप पता चल जाएगा.

नीता बुआ-क्या चल रहा है तुम दोनो का

कविता-कुछ नही

नेहा बुआ-आँखे दिखा कर कविता

कविता-अगले साल हम कॉलेज जाएगी. शहर मे अड्मिशन लेंगी. तो

नेहा बुआ-तो क्या

लीना-दीदी भैया के साथ शहर जाती है. तो हम दोनो

नीता बुआ-तुम दोनो बड़े दूर की सोचती हो

स्वेता दीदी-चलो स्कूटी चलाते है

कोमल-हां चलो

कोमल अपनी जगह से उठ गयी और अपने पर्स से की निकाल रही थी कि

ब चाची-कोमल वैसी ही रहो

कोमल-क्या हुआ मामी

बड़ी चाची कोमल के पास आ गयी.

और कोमल के इयररिंग देखने लगी.

ब चाची-कोमल ये इयररिंग तुम पर बहुत अच्छे लग रहे है.

सी चाची-हां दीदी,कोमल की खूबसूरती और बढ़ गयी है इस इयररिंग से

नेहा बुआ-देखू

नेहा बुआ भी कोमल के इयररिंग देखने लगी.

नेहा बुआ-कोमल कहाँ से लिए. इतने अच्छे इयररिंग

कोमल-स्वेता दीदी ने नेककलेस लिए तब....

कविता-माँ ,मैं ने भी लिए

नेहा बुआ-तूने भी

लीना -हम सब ने लिए है.

पूजा बुआ-इतनी शॉपिंग

पूजा बुआ बड़ी चाची की तरफ इशारा करके कुछ पूछ रही थी

मैं समझ नही पाया पर छोटी चाची ने मुझे अपने कमरे मे जाने का इशारा किया.

बड़ी चाची के कुछ कहने से पहले मैं वहाँ से अपने कमरे मे चला गया.

उनकी बाते शॉपिंग की चलती रही.

पूजा बुआ-स्वेता पूनम कहाँ है.

स्वेता दीदी-यही तो थी.

सीतल दीदी-दीदी के बॅग भी यही पर है.

पूजा बुआ-कही उसे शहर मे तो नही भूल गये.

विद्या-पूनम दीदी ज्योति बुआ से मिलने गयी है.

पूजा बुआ-तुम्हे बताया उसने

विद्या-कार से निकलते वो आपके घर की तरफ चली गयी.

पूजा बुआ-स्वेता ,पूनम को कॉल कर के पूछ लो

स्वेता दीदी ने पूनम दीदी को कॉल करके पूछ लिया.

पूनम दीदी पूजा बुआ के घर पे थी.

पता नही पूनम दीदी घर क्यू चली गयी. वो भी किसिको बिना बताए

फिर से सब अपनी शॉपिंग की बाते करने लगे और मैं अपने कमरे मे थोड़ी देर आराम करने लगा.
 
671

अभी तक सब शॉपिंग की बाते कर रहे थे.

मैं ने पायल को कॉल किया.

अवी-पायल ,क्या कर रही हो

पायल-कुछ नही, टीवी देख रही हूँ

अवी-टीवी देख रही हो ,मेरे कार सीखने का क्या हुआ.

पायल-आज छुट्टी है

अवी-किस बात की,

पायल-शॉपिंग मे गये थे तो

अवी-अब आ गया हूँ ,मैं इंतज़ार कर रहा हूँ मैदान पे

पायल-ठीक है आ रही हूँ,

पायल को कॉल करके मैं मैदान मे चला गया.

पायल भी मुझे सिखाने के लिए कार लेकर आ गयी.

अवी-मेडम आज क्या सिखाने वाली हो

पायल-मैं खुद कन्फ्यूज़ हू कि तुम्हे कैसे सिखाऊ

अवी-क्या मतलब कैसे सिखाऊ

पायल-मैं तुम्हे नही सिखा सकती

अवी-तुम सिखा नही सकती या मुझ से डर लग रहा कि मैं कुछ कर ना दूं

पायल-सच कहूँ तो ,कार सिखाने के लिए हमे एक सीट पर बैठ ना होगा और इसका मतलब तुम समझते हो ना

अवी-इतनी सी बात, मैं प्रॉमिस करता हूँ की तुम हाथ नही लगाउन्गा.

पायल-फिर भी ,बॉडी टच होने प्राब्लम होगी

अवी-तुम ने जीन्स पहना है. कोई पतली सलवार नही. जीन्स होने से ज़्यादा प्राब्लम नही होगी.

पायल-पर

अवी-रहने दो फिर ,

पायल-ठीक है पर अपना प्रॉमिस याद रखना

अवी-मैं प्रॉमिस पूरा करता हूँ ,तोड़ ता नही.

पायल-चलो फिर

पायल ड्राइविंग सीट पर बैठ गयी. और सीट को थोड़ा पीछे अड्जस्ट किया.

पायल-मेरे आगे बैठ जाओ

अवी-ये जोक था ना

पायल-तुम कार सीख रहे हो ,तुम्हे आगे बैठना होगा.

अवी-तुम कह रही हो तो ये भी करते है

मैं पायल के सामने बैठ गया.

ये अजीब लग रहा था

पायल के पैरो के बीच मे मैं बैठा था.

पायल ने कार स्टार्ट की .और मैं ने गियर डाला .और धीरे धीरे क्लच छोड़ दिया.

पायल ने आक्सेलेटर दबाना शुरू किया पर उसे प्राब्लम हो रही थी. उसके पैर नही पोछ रहे थे.

पायल ने अड्जस्ट करके आक्सेलेटर दबा दिया. जिस से उसका पैर फिसल गया और उसका कंट्रोल कार से हटता चला गया.

और हमे झटका लगा और मैं आगे जाकर पीछे हो गया जिस से पायल के बूब्स मेरे पीठ मे दब गये .उसके मुँह से चीख निकल गयी. आआहह

मैं ने अपना पैर ब्रेक पर दबा दिया. और कार रोक ली.

मैं पायल की गोद से उठ गया .पायल भी कार से उतर गयी.

पायल कार से उतरते ही मेरे सामने अपने बूब्स को सहलाने लगी.

शायद उसे दर्द हुआ है जिस से वो मेरे रहते अपने बूब्स को सहला रही थी.

अवी-तुम ठीक हो ना

पायल-हाँ, मैं ने कहा था कि तुम्हे सिखाना मुश्किल है

अवी-दिल से चाहो तो कुछ भी कर सकते है.

पायल-पर

अवी-अब मेरे हिसाब से तुम मुझे कार चलाना सिख़ाओगी.

पायल-ठीक है, कैसे सिखाऊ

अवी-तुम मेरी गोद मे बैठो ,

पायल-ये नही हो सकता

अवी-पायल तुम्हारी हाइट मुझसे कम है और तुम आगे बैठ कर ब्रेक संभालना बाकी मैं देख लूँगा.

पायल-इतना कॉन्फिडेन्स

अवी-क्लिच कंट्रोल करना तो हो गया ,अब आज एक्सीलेटर पे फोकस करूँगा.

पायल-ये भी ट्राइ करके देखते है

मैं सीट पर बैठ गया और पायल मेरी गोद मे

पायल मेरी गोद मे बैठ खुद को अड़जस्ट करने लगी.

फिर भी मेरे लंड का पायल की गंद से मिलन हो गया.

मैं ने पायल को प्रॉमिस किया कि मैं सिर्फ़ कार सीखूंगा.

मैं ने अपना ध्यान पायल की गंद से कार के क्लच पर लगा दिया.

मैं ने क्लच और आक्सेलेटर पे पैर रख दिए .और कार स्टार्ट कर दी.

और क्लच दबा कर गियर डाल दिया.

और धीरे धीरे क्लच छोड़ दिया और धीरे धीरे आक्सेलेटर दबाने लगा.

कार स्लोली आगे चलने लगी.

पायल-तुम तो जल्दी सीख गये

अवी-इसे सीखना कहते हो,जब कार 50 की स्पीड से चलाउन्गा तब बोलना

पायल-देखो धीरे धीरे स्पीड बढ़ाओ ,और गियर चेंज करो

जैसा पायल ने कहा मैं ने वैसा किया और 2न्ड गियर डाल दिया.

पायल-बस ऐसे ही चलाते रहो ,यहाँ ब्रेक दबाने की ज़रूरत नही है.

मैं ने फिर गियर चेंज किया और ऐसे कार चलाने लगा.

अचानक बीच मे स्पीड कम ज़्यादा होने से कार कंट्रोल छोड़ देती ,पायल ब्रेक मार के कंट्रोल करती.

मैं ऐसे ही कार चलाता रहा. एक दो बार पायल स्टियरिंग व्हील से जा टकराई थी.

पर मैं ने उसे हाथ नही लगाया.

सूरज ढल गया फिर भी मैं वैसे कार चलाता गया.

मुझे पता था कि अभी मैं ने कुछ नही किया पर जितना था वो काफ़ी था

पायल-अंधेरा हो रहा है

अवी-तो क्या हुआ ,आज चलाने दो क्या पता कल भूल जाउ,

पायल-वैसे तुम फास्ट सीख रहे हो

अवी-मेडम इतनी हॉट हो तो स्टूडेंट जल्दी सीख जाता है.

पायल-तुम फिर शुरू हो गये.

अवी-सच कह रहा हूँ तुम हॉट हो

पायल-क्यू गर्मी लग रही है.

अवी-मेरी हालत खराब हो रही है.

पायल-तो रोक दो कार

मैं ने कार रोक दी. पायल मेरी गोद से उतर गयी.

पायल के उठ ते ही मैं ने अपने लंड को अड्जस्ट किया.

पायल के सामने मैं ने लंड को अड्जस्ट किया.

पायल-तुम्हे कुछ लगता नही कि लड़की के सामने ऐसा कर रहे हो

अवी-मेरी हालत पर तरस खाने की जगह ,ऐसी बात कर रही हो.

पायल-तुम

अवी-क्या मैं

पायल-चलो बहुत देर हो गयी मुझे जाना चाहिए

अवी-हवेली जाकर क्या करोगी. मेरे साथ बैठ कर बाते करो

पायल-मज़ाक मत करना वरना मैं चली जाउन्गी

अवी-इतने अच्छे मौसम मे सीरीयस बाते करेंगे

पायल-तुम से जीतना मुश्किल है

अवी-एक दिन तुम जीत जाओगी.

पायल मेरे बाजू वाली सीट पर आकर बैठ गयी.

मैं पायल के साथ बाते करते हुए कार चालू बंद कर रहा था

फिर अचानक मैं ने कार स्टार्ट करके गियर डाल दिया.

ये मेरी ग़लती थी. मैं अकेले कार चलाना चाहता था.

कुछ भी सीखने मे जल्द बाज़ी नही करनी चाहिए.

लेकिन इतनी जल्दी ,कार मेरे कंट्रोल से बाहर चली गयी.

पायल ने स्टियरिंग व्हील को घूमना शुरू किया और रेत के पहाड़ से टक्कर हो गयी.

अच्छा हुआ जो कुछ ज़्यादा चोट ना लगते हुए कार रुक गयी.

पायल गुस्से मे मेरी तरफ देख रही थी.

पायल-तुम खुद को समझते क्या हो, 3 दिन मे कार चलाना चाहते हो

अवी-सॉरी

पायल-अच्छा हुआ आक्सिडेंट नही हुआ

अवी-तुम थी ना ,बेस्ट मेडम

पायल-अब मस्का मत लगाओ

अवी-मस्का लगाना पड़ता है,

पायल-ठीक है. आज के लिए इतना काफ़ी है.

अवी-थॅंक्स

पायल-थॅंक्स ,शॉपिंग करवाने लिए

अवी-तुम ने क्या खरीदा था

पायल-वो कल पता चल जाएगा.

अवी-बाइ

पायल-बाइ

पायल हवेली चली गयी और मैं घर चला गया.

 


672

मैं कार सीखने के बाद घर चला गया.

घर जाकर मैं सबको देख कर शॉक्ड हो गया. सब ने नये कपड़े पहन रखे थे.

आज जो शॉपिंग मे ड्रेस लिए थे वही सबने पहन रखे थे

ऐसा लग रहा था कि मेरे घर मे दीवाली सेलेब्रेट हो रही हो

सब मेरी खातिर दारी करने मे लग गये. मेरे आते मुझे पानी दिया. मुझे सोफे पर बैठा दिया.

मेरे शूस भी मुझे निकाल ने नही दिए.

मैं सब के बिहेवियर से शॉक्ड हो गया.

अवी -ये क्या हो रहा है

सीतल दीदी- तुम्हारी खातिर दारी कर रहे है. आज हम ने डिसाइड किया कि तुम्हारी सेवा करेंगे

अवी-ऐसा करने की सोचना भी मत ,आप सब जैसे हर दिन रहते है वही मुझे अच्छा लगता है. आपका प्यार ,गुस्सा, नाराज़ होना ,ये मुझे अच्छा लगता है. आपको कुछ स्पेशल करने की ज़रूरत नही है. आप सब जैसे है वैसे मेरे लिए स्पेशल हो ,

स्वेता दीदी-मैं ने कहा था, अवी को पसंद नही आएगा

अवी-कैसे पसंद आएगा .आप मुझसे बड़ी है .अगर आप मेरे पैरो को हाथ लगाएगी तो मुझे कैसे अच्छा लगेगा.

नीता बुआ-अवी सही कह रहा है.

अवी-हम सब साथ है. यही मेरे लिए आपकी तरफ से गिफ्ट है.

म चाची-तूने तो मुझे रुला दिया.

अवी-चाची आप भी ना, चलो साथ मे मूवी देखते है

कविता-ये हुई ना बात ,मेरे नये लॅपटॉप मे देखते है

अवी-कविता तेरे लॅपटॉप मे मूवी नही है. और एग्ज़ॅम से पहले लॅपटॉप नही मिलेगा.कुछ भी कर लो पर लॅपटॉप नही मिलेगा.

कोमल घर जाकर अपना लॅपटॉप ले आई.

हम मूवी देखने लगे और चाची हमारे लिए भजिया लेकर आ गयी. आज खाने मे स्पेशल बनाया था.

हम ने मूवी देख ली .फिर खाना खाना स्टार्ट किया.

सब ने हॉल मे जगह बना दी. और एक राउंड बना कर खाना खाने लगे.

चाचा अपने दोस्त के घर से जल्दी आ गये .क्यू कि उनको भी हमारे साथ मिलकर खाना खाने का मन हो रहा था.

खाना खाते हुए हम ने बहुत मस्ती की.

खाना खाने के बाद छोटी चाची को अपने कमरे मे बुलाया.

अवी-चाची आप खुश हो ना

सी चाची-हाँ,

अवी-आपने कितनी साड़ी खरीदी

सी चाची-4 मेरी पसंद की और 1 तुम्हारी पसंद की

अवी-कैसी लगी मेरी पसंद जी साड़ी.

सी चाची-मुझे तुम्हारी दी हुई हर चीज़ अच्छी लगती है

अवी-और

सी चाची-अब मेरी बारी है तुम्हे एक किस देने की

अवी-क्या बात है आज आपने कहा कि मुझे किस करेगी.

सी चाची-तुम ने आज का दिन सब के लिए स्पेशल बनाया है तो तुम्हे कुछ देना तो पड़ेगा ना.

अवी-और

सी चाची-और कुछ नही

और चाची ने मुझे किस किया.

अवी-चाची अब जाके मेरे लिए ये दिन स्पेशल हुआ.

सी चाची-पता है तुझे क्या पसंद होता है वैसे तेरे पास इतने पैसे कहाँ से आए

अवी-वो अभी नही बता सकता

सी चाची-दीदी को क्या बताओगे

अवी-इसी लिए तो आपको बुलाया है.

सी चाची-लेकिन इसमे मैं क्या कर सकती हूँ

ब चाची-क्या बाते हो रही है

अवी-कुछ नही वो शॉपिंग के बारे मे बाते कर रहे थे.

ब चाची-मैं भी तुम से इसी सिलसिले मे बात करने आई थी

सी चाची-आप बाते कीजिए मैं बाद मे करूँगी

ब चाची-अवी ,तुमने मेरा सर हमेशा उँचा रखा है. आज मैं बहुत खुश हू कि मेरा बेटा ज़िम्मेदारी उठाने लायक हो गया है

अवी-सब आपके प्यार के वजह से हो पाया है

ब चाची-पर मुझे तुम्हारी फिकर हो रही थी.

अवी-क्या हुआ

ब चाची-तुम्हारे पास इतने पैसे कहाँ से आए

अवी-वो वो रणजीतसिंघ ने दिए है

ब चाची-रणजीतसिंघ से पैसे क्यूँ लिए मुझ से माँग लेते

अवी-लिए नही कमाए है

ब चाची-कमाए है

अवी-वो मैं ने रणजीतसिंघ की मदद की उसके बदले मे मुझे पैसे मिले(झूठ)

ब चाची-कैसी मदद

अवी-वो मैं ने कंप्यूटर मे प्रेजेंटेशन बनाया था उसके वजह से रणजीतसिंघ को बहुत प्रॉफिट हुआ और मुझे कुछ पैसे दिए

ब चाची-मीना मुझे कुछ समझ नही आया

सी चाची-दीदी मैं समझ गयी. मैं आपको बाद मे बता दूँगी

ब चाची-ठीक है. और अवी कभी कुछ ज़रूरत हो तो मुझे माँग लिया कर

अवी-जी,चाची मैं वो

ब चाची-हाँ बोल ना

अवी-मैं ने चाचा के अकाउंट से कुछ पैसे निकाल लिए थे. शॉपिंग के लिए कम पड़ गये थे पैसे

ब चाची-अच्छा किया निकाल लिए. और कभी भी पैसे कम लगे तो निकाल लिया करो. तुम्हारे चाचा को मैं संभाल लूँगी.

अवी-जी चाची

और बड़ी चाची मेरे माथे पर किस करके चली गयी.

सी चाची-ये झूठ था ना

अवी-क्या

सी चाची-रणजीतसिंघ वाली बात झूठ थी ना.

अवी-हाँ, मैं मेले के बाद आपको सब बता दूँगा.

सी चाची-ठीक है. मैं दीदी को संभाल लूँगी.

अवी- चाची वैसे आप से एक बात करनी थी

सी चाची- बोल ना , इस मे पूछने की क्या ज़रूरत है

अवी-(चाची को शॉप मे जो हुआ वो बताऊ कि नही, माला ने चाची को कितना बरा बुरा कहा था , ऐसे मे माला के बारे मे चाची को बता कर इतने अच्छे दिन को खराब करना अच्छा नही होगा ) कुछ नही

सी चाची- कुछ तो है

अवी- फिर कभी बताऊँगा आज काफ़ी थक गया हूँ

सी चाची- ठीक है , आराम कर

छोटी चाची से बात करने के बाद मैं हॉल मे आ गया.

अभी तक मेरी बुआ और मेरी बहन घर नही गयी थी. ज्योति बुआ भी मेरे घर आ चुकी थी.

अवी-बुआ आप अभी तक घर नही गयी.

पूजा बुआ-आज हम सब यही पर सो ने वाले है.

अवी-ये तो अच्छी बात है.

फिर हम ने हॉल मे सोने के लिए जगह बना दी.

बच्चो की वजह से चाची अपने कमरे मे सोने वाली थी.

इसका मतलब हॉल मे मेरी बुआ बहने और मैं सोने वाला था.

तीनो चाची एक कमरे मे सो गयी .

दिन भर शॉपिंग और मस्ती के बाद सब थक गये थे ,जिस के वजह से जिसे जो जगह मिली वो वहाँ सो गया.

लेकिन कविता और लीना कुछ और मूड मे थी.

कविता और लीना ने मुझे अपने तरफ सोने को कहा.मैं उन दोनो के बीच मे सो गया ,हम सीडियों के पास थे ,और बाथरूम के दूसरी तरफ थे.

सभी लाइट ऑफ हो गयी.

दिन भर की मस्ती की वजह से सब जल्दी सो गये.

मैं भी गद्दे पर लेट ते ही सो गया.

 


672ए

आधी रात मे मुझे ऐसा लगा कि मुझे कोई उठा रहा है.

मैं ने आँखे खोल कर देखा तो ये कविता थी.

अवी-क्या हुआ कविता

कविता-भैया आवाज़ मत करो , मुझे आप से ज़रूरी बात करनी है

अवी-इतनी रात मे

कविता-हाँ, वो हमे कुछ लड़के

अवी-क्या कहा,कुछ लड़के

कविता-हम यहाँ बात नही कर सकते.छत पर चलते है

कविता की बात से मुझे टेन्षन आने लगा.

अवी-ठीक है चलो ,

कविता पहले उपर चली गयी. फिर मैं सीडियों से उपर जाने लगा.

छत पर अंधेरा है.ठंड भी थी.

अवी-क्या बात है कविता ,कोई परेशान कर रहा है तुम्हे

कविता-आपके होते हुए मुझे कौन परेशान करेगा.

अवी-क्या मतलब

कविता-भैया आज कितना अच्छा दिन है

अवी-रात मे तुम्हे दिन दिख रहा है.

कविता-भैया आपने हमे गिफ्ट दिया ,अब मैं आपको गिफ्ट देना चाहती हूँ

अवी-क्या मतलब

कविता-भैया कितने दिन हो गये हमे प्यार किए हुए ,आज इस दिन को और स्पेशल करते है

अवी-कहीं तुम लॅपटॉप और मोबाइल के लिए तो नही कर रही हो

कविता-क्या भैया ,आप भी ना

अवी-तो सिर्फ़ प्यार करना है

कविता-हाँ, इतनी ठंडी मे प्यार करने ही आए है.

अवी-पर हम ने क्या डिसाइड किया था ,कि तुम्हारे बर्थ डे पे प्यार करेंगे

कविता-बर्तडे के लिए टाइम है. आज आप ने हमे गिफ्ट दिया है और अब मेरी बारी है गिफ्ट देने की और आपने मना किया तो

अवी-तो

कविता-मैं आप से कभी बात नही करूँगी.कभी भी नही

अवी-ठीक है, तुम जीती मैं हारा, अब खुश

कविता-ये हुई ना बात

अवी-तो चले नीचे

कविता-नीचे कहाँ यही पर करेंगे

अवी-यहाँ ठंड है

कविता-तो क्या हुआ हम तो गरम है

अवी-तुम भी ना,

कविता-भैया सोचो ना छत पे ,खुले आसमान के नीचे ,ठंड मे हमारे बदन जलते हुए प्यार करेंगे

अवी-तुम ने कहा तो सही है पर ये बताओ ये तुम्हारे दिमाग़ मे कहाँ से आया ऐसा आइडिया

कविता-आपकी बहन हूँ, लॅपटॉप पे एक वीडियो देखा था

अवी-लॅपटॉप, तुम्हे तुम्हारा लॅपटॉप मिल गया तो तुम क्या क्या करती रहोगी

कविता-कुछ नही. पढ़ाई के साथ एक्सट्रा नॉलेज लूँगी.

अवी-ज़्यादा पढ़ाई करना वरना सब मुझे कहेंगे की मैं ने तुम्हे बिगाड़ा है.

कविता-आपको हमारे वजह से कोई परेशानी नही होगी.

अवी-होने भी मत देना

कविता-भैया ये बाते बहुत हो गयी ,अब प्यार करे

अवी-तुम्हे बहुत जल्दी है प्यार करने की.

कविता-भैया

अवी-कविता यहाँ पर करना मुश्किल होगा.नीचे सब सो रहे है, अगर किसी ने हमे नीचे सोते हुए ना देखा तो गड़बड़ हो जाएगी

कविता-कोई गड़बड़ नही होगी. लीना सब संभाल लेंगी

अवी-लीना को पता है हम उपर आए है

कविता-भैया हम एक दूसरे के बिना कुछ नही करते ,लीना ने आपकी और मेरी जगह पे पिल्लो रख दिया है.और कोई उठ गया तो लीना संभाल लेंगी.

अवी-तुम दोनो बहुत स्मार्ट हो,वैसे लीना भी उपर आएगी

कविता-हाँ, पर मेरे नीचे जाने के बाद

अवी-मतलब मुझे हलाल करने का पूरा बंदोबस्त किया है.

कविता-हलाल नही, प्यार करने का इंतज़ाम किया है

अवी-ठीक है, मैं कुछ करता हूँ

मैं ने छत पर रखे हुए पुराने कपड़े नीचे बिछा दिए.

कविता ने तब तक अपने कपड़े निकाल दिए.

अवी-ये क्या किया पूरे कपड़े क्यू निकाले

कविता-इसी मे मज़ा आता है

अवी-कोई आ गया तो,

कविता-नही आएगा ,लीना हैना वो संभाल लेंगी.आप भी मेरी तरह कपड़े निकाल दो

मैं ने भी अपने कपड़े निकाल दिए.

 
673

हम दोनो नंगे हो गये .और नीचे डाली हुए बेडशीट पर बैठ गये

अवी-कविता ,उस दिन के बाद तुम दोनो ने क्या क्या किया

कविता-आप नही थे तो हम नेक्स्ट बर्तडे पार्टी की प्लॅनिंग करने लगी.

अवी-क्या प्लॅनिंग की

कविता-वो मेरे बर्थदे के दिन पता चलेगा

अवी-ठीक है ,आव मेरी गोद मे बैठो ,

कविता मेरी गोद मे बैठ गयी. और मैं कविता को किस करने लगा.कविता भी मुझे किस करने लगी.

काफ़ी कुछ सीख गयी थी कविता ,कविता पिछली बार से बहोत अच्छे ने किस करने लगी थी,

फर्स्ट टाइम जिस तरह किस कर रही थी उस से इस बार किस करने मे फरक था.

कविता किस करने मे कुछ ज़्यादा ही जोश दिखा रही थी.

कविता वाइल्ड तरीके से किस कर रही थी.

कविता को ठंड लग रही होगी जिस से वो अपना पूरा ध्यान किस पे लगा रही थी.जिस से उसका ध्यान ठंड से हट रहा था.

मेरी बहन जिस तरह मुझे प्यार कर रही थी उस की वजह से मैं भी रात के ठंड मे कविता को गर्मी देने लगा.

मैं अपनी छोटी बहन को प्यार करने मे कोई कमी नही रख रहा था.

कविता को किस करने से मेरे शरीर मे गरमी बढ़ रही थी.

ठंड के वजह से मेरा शरीर ठंडा पड़ गया था पर कविता के नाज़ुक होंटो का रस पीने से मुझे गर्मी मिल रही थी.

कविता का नाज़ुक बदन मेरे शरीर से रगड़ने से हवाए गरम हो रही थी.

हमारी गरम सासे ठंडी हवा को हमारे पास नही आने दे रही थी.

हमारे होन्ट एक दूसरे के होंटो मे लॉक हो गये .ऐसा लॉक जो हमे इतना मज़ा दे रहा था कि उसकी कल्पना हम ने कभी की नही थी.

ये लॉक जितना मज़ा दे रहा था उस से ज़्यादा लॉक खुलने मे मज़ा मिलने लगा.

होंटो का लॉक खुलते ही हम एक दूसरे की जीभ को चूसने लगे.

कविता अपनी जीभ मेरे होन्ट पे घुमाने लगी. मेरे होंटो को गीला कर के फिर से किस करने लगी.

कविता बहोत कुछ सीख चुकी थी. जिस से हमे प्यार करने मे ज़्यादा मज़ा आ रहा था.

कविता को किस करते हुए मैं अपने हाथों को उसकी पीठ पे घुमाने लगा.

मैं कविता की पीठ को सहलाने के साथ रगड़ रहा था जिस से उसका बदन गरम हो जाए.

कविता मुझे किस करने के साथ अपनी कमर को गोल गोल घुमाने लगी.

कविता के ऐसा करने से मेरा लंड उसकी प्यारी चूत पे रगड़ रहा था.

किस करने के बाद मैं कविता के बूब्स चूसना चाहता था.पर मैं ने ये सोच कर अपना इरादा पूरा नही किया क्यू कि कविता के बूब्स पर अभी से मेहनत करना शुरू किया तो वो जल्दी बड़े हो जाएँगे जिस से कविता की नॅचुरल ब्यूटी मे कमी आ जाएगी. जो मैं कभी होने नही दूँगा.

किस करने के बाद मैं बेडशीट पर लेट गया.

कविता-क्या हुआ भैया

अवी-69 के बारे मे पता है

कविता-हाँ,

कविता मेरे मूह पे अपनी प्यारी चूत ले आई और खुद मेरे लंड के पास अपना मूह ले गयी.

कविता की चूत अभी तक वैसी थी जैसा मैं छोड़ गया था.

मैं ने कविता की चूत के होंठ को खोल दिए. और अपनी लप्लपाती जीभ चूत मे डाल दी

मेरी जीभ अपनी चूत पर महसूस करते ही कविता ने लंड पे काटा, और फिर अपने मूह मे लेकर चूसने लगी.

मुझे कविता और लीना के साथ जो करना था वो जल्दी करना था पर जल्दी करने के चक्कर के साथ दोनो को खुश करना था.

मैं ने डिसाइड किया कि दोनो का 2 बार पानी निकाल कर खुश करूँगा.

मैं कविता की प्यारी चूत पे किस करने के साथ अपनी जीभ से दाने को छेड़ने लगा.

मुझे सिर्फ़ चूत चूसना था, पानी नही निकालना था पानी तो मेरा लंड निकालेगा.

कविता मेरे लंड को खड़ा कर के चूस रही थी. और इधर मैं कविता की चूत को गीला करने लगा.

हम दोनो ठंडी की काली रात मे चूसने का मज़ा ले रहे थे.

थोड़ी देर चूसने के बाद मैं ने कविता को अपने उपर से अलग कर दिया.

कविता को बेडशीट पर लिटा दिया. और कविता के पैरो को फैला दिया.

अवी-कविता मैं अंदर डालने वाला हूँ

कविता-भैया लव यू

कविता की सहमति मिलने के बाद मैं ने अपने लंड को थूक से और गीला किया.

और लंड को कविता की चूत पर सेट किया.और धीरे धीरे अंदर पुश करने लगा.

मैं इस बार पूरा लंड पुश कर के अंदर डालना चाहता था. मैं अब कविता को दर्द देने मे इंट्रेस्टेड नही था.

मैं ने अपने लंड पे ज़ोर लगाना सुरू किया.

चूत के होंठ मेरे लंड को अंदर जाने देने लगे.

लंड धीरे धीरे आड़ा ,हल्का दर्द देते हुए अंदर जाने लगा.

ठंडी ठंडी हवा मुझे पीछे से पुश करने लगी.

ठंडी हवा के पुश करने से मेरा लंड चूत की गहराई मे जाने लगा.

अब इस से आगे मुझे झटका मारना होगा और मैं ने ऐसा ही किया.

एक ही झटके मे बाकी का लंड कविता की चूत मे चला गया. झटका मारने के साथ ही मैं कविता के उपर गिर कर उसके होंटो पर अपने होन्ट रख कर उसके दर्द को पीने लगा.

चाँद की चाँदनी मे कविता को प्यार करने मे मज़ा आ रहा था.

ठंड और अब दर्द की वजह से कविता का बदन काप रहा था .

पर मेरे लंड की गर्मी से ठंड से मुक्ति मिली और किस करने दर्द कम होने लगा.

साथ मे ऐसे खुले आसमान के नीचे प्यार करने से कविता कुछ ज़्यादा एग्ज़ाइट हो गयी थी.

जिस से कविता अपने दर्द को भूलने लगी

थोड़ी देर ऐसे किस करने के बाद मैं मे धीरे धीरे कविता की चुदाई करना सुरू किया.

कविता की बस एक बार चुदाई हुई थी उसके बाद आज फिर से मेरे लंड से, दर्द तो होना ही था

कविता को पता था कि उसका भैया सिर्फ़ प्यार देगा ,और वो भी इस प्यार को पाने के लिए जल्दी मेरा साथ देने लगी.

ठंडी हवा के झोंके मेरी गंद को ज़ोर से धक्के मारने को मज़बूर कर रहे थे.

मैं ने धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ा दी ताकि दोनो का मज़ा मिले

अब तो हम रोमॅंटिक तरीके से चुदाई का मज़ा ले रहे थे.

कविता मेरे होंटो को लगातार चूस रही थी.

कविता का जोश बढ़ने से उसका बदन अकड़ने लगा. और कविता ने मेरी पीठ मे अपने नाख़ून जमा दिए और ठंडी पड़ गयी.

कविता के ठंडे पड़ते ही मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया.

कविता-भैया आप जैसा कोई नही होगा इस दुनिया मे

अवी-तुम खुश हो ना

कविता-हाँ, पर आप हर बार कुछ नया करते है ,पिछली बार की तरह कुछ नया करो ना

अवी-नया ,सोचने दो, सीसव खेलना चाहोगी.

कविता-सीसव वो कैसे

अवी-देखो अब तुम नीचे हो और मैं उपर इस मे मैं10 बार धक्के मारूँगा, फिर ऐसे ही हम दोनो बैठ जाएँगे वहाँ पर हम दोनो 10 धक्के मरेंगे. फिर चूत मे लंड रख कर मैं दूसरी तरफ नीचे लेट जाउन्गा जिस से तुम मेरे उपर आ जाओगी फिर तुम 10 बार मेरे लंड पर उछलना ,फिर से हम लंड बाहर निकाले बिना बैठ जाएँगे.फिर से हम किस करते हुए सेक्स करेंगे उसके बाद तुम अपनी तरफ नीचे लेट जाना और मैं तुम्हारे उपर आ जाउन्गा और मैं 10 धक्के मारूँगा.

कविता-समझ गयी. इसमे बहोत मज़ा आएगा. लव यू भैया

फिर क्या था मैं कविता को पकड़ कर लंड को चूत मे वैसा रख कर बैठ गया .मतलब कविता मेरी गोद मे बैठ गयी लंड को अपनी चूत मे लेकर और हम दोनो किस करते हुए चुदाई करने लगे.

कविता को ये नया तरीका अच्छा लगा जिस से हम दोनो इस काली रात को एंजाय करने लगे.

फिर मैं अपनी तरफ लेट गया ,लंड अभी भी कविता की चूत मे था .

मेरे लेट ते ही कविता मेरे लंड पर उछलने लगी.

कविता का जोश सीसव खेलने से बढ़ गया था.

कविता मेरे चेस्ट पे हाथ रख कर लंड पे उछलने लगी.

कविता ठीक 10 बार मेरे लंड पर उछलती रही.

कविता के उछलने के बाद हम फिर से ईक्वल पोज़िशन मे आ गये और किस करते हुए चुदाई करने लगे

फिर कविता अपनी तरफ लेट गयी और मैं उसकी चूत मे धक्के लगाने लगा.

मुझ से ज़्यादा कविता मे जोश ज़्यादा था.

सीसव खेलने मे कविता को बहोत मज़ा आने लगा.

कविता इस तरह चुदाई करने से बहोत खुश हुई. मैं कविता को देख कर खुश होने लगा.

हमारा खेल ऐसे चलता गया ,कभी कविता नीचे तो मैं उपर होता ,फिर हम दोनो बैठे होते ,फिर मैं नीचे और कविता उपर होती.

इस बार कविता मेरे उपर थी और मेरे लंड पे उछल रही थी.

उसके उछलने की स्पीड ज़्यादा थी जिस की वजह से मैं समझ गया कि उसका पानी निकलने वाला है.

मैं ने भी नीचे से धक्के मारना सुरू किया

कविता-भैया मेरा निकलने वाला है,

अवी-उछलती रहो ,

कविता मेरे लंड पे उछलती हुई झड गयी.

इस प्यार भरी चुदाई मे कविता थक गयी थी. उसने अपने हाथ मेरे चेस्ट पे रख दिए.

अवी-कैसा था सीसव

कविता-भैया ऐसा मैं ने वीडियो मे भी नही देखा था.

अवी-तुम खुश हो ना

कविता-हाँ

अवी-तो फिर कपड़े पहन लो

कविता-पर आपका हुआ नही अभी तक

अवी-अब लीना की बारी है

कविता-मैं तो भूल गयी. मैं नीचे जाकर लीना को भेजती हूँ उपर

अवी-संभाल के भेजना

कविता-मैं देख कर भेजूँगी. और उसे भी सीसव वाला प्यार करना

अवी-तुम दोनो को मैं एक जैसा प्यार करता हूँ

फिर कविता कपड़े पहन कर नीचे चली गयी.

 
673 ए

कविता मेरे साथ सीसव खेल ने के बाद नीचे चली गयी.

कविता ने लीना का नाम सुनते मुझे और प्यार करने को नही कहा.

लीना और कविता का प्यार देख कर मुझे अच्छा लगता था.

लीना और कविता जिस तरह एक दूसरे से प्यार करती थी उस से उनकी ताक़त बढ़ जाती थी

कविता के जाने के बाद मैं वैसे ही लेटा रहा. जब तक लंड चूत मे था तब तक मुझे ठंड नही लग रही थी पर जैसे लंड चूत से बाहर निकला ठंड लगनी सुरू हुई.

कहाँ हो लीना जल्दी आ जाओ नही तो तुम्हारे भाई के लंड की कुलफी बन जाएगी.

लीना ने मेरे मन की बात सुन ली थी. वो जल्दी उपर आ गयी.

उपर आते ही बात किए बिना लंड को मूह मे लेकर चूसने लगी.

कविता के नीचे आने तक लीना का क्या हाल हुआ होगा वो उसके लंड चूसने से समझ मे आ गया.

लीना भूकी शेरनी की तरह लंड चूस रही थी.

अवी-लीना आराम से

लीना-भैया कब से इसके इंतज़ार मे थी ,अब रुका नही जा रहा

अवी-रूको मत पर हमारे पास ज़्यादा समय नही है, मुझे आराम भी करना है.

लीना-तो क्या मैं इसे चूसना बंद करू,

अवी-मैं ऐसा नही कह रहा हूँ, तुम चूसो मैं भी चूस्ता हूँ

लीना मेरी बात समझ गयी और अपना लोवर निकाल दिया.

फिर लीना भी 69 पोज़िशन मे आकर मेरा लंड चूसने लगी.

कविता की तरह लीना की चूत भी देखने लायक थी. दोनो ने अपनी चूत का पूरा ध्यान रखा हुआ था.

मेरे लिए जैसे संभाल कर रखा हो

दोनो के दिमाग़ मे क्या चलता है ये नेहा बुआ और नीता बुआ को भी पता नही चलता.

दोनो सेफ्टी के साथ मुझे प्यार कर रही थी.

इतने छोटे दिमाग़ मे ऐसे आइडिया कहाँ से आते है.

एक सब पे नज़र रख रही है तो दूसरी मेरा लंड चूस रही है.

लीना के आने तक जो मेरा लंड ठंड से काँप रहा था वो लीना के मूह मे जाते गरम होने लगा

लीना पूरी कसर निकाल रही थी तो मैं भी उसका पूरा साथ दे रहा था.

चूत की सुंदरता देख कर फिर से मेरी जीभ बग़ावत करने लगी.

मैने अपनी जीभ से पंगा ना लेते हुए उसे चूत मे जाने की इजाज़त दे दी.

लीना की प्यारी चूत मे जाते जीभ इतनी खुश हुई कि वो ज़ोर ज़ोर से चूत को चाटने लगी.

मेरी जीभ इधर अपना काम कर रही थी उधर लीना की जीभ अपना काम कर रही थी.

मैं ने लीना के साथ भी वैसा ही किया ,लीना की चूत चूसी पर पानी नही निकाला.

चूसने का प्रोग्राम हो जाने के बाद अब चुदाई करना बाकी था.

अवी-लीना अब बस करो, चूसना बहोत हुआ ,अब तुम बेडशीट पर लेट जाओ

लीना ने चूसना बंद किया और अपने पैर फैला कर लेट गयी.

और उपर आसमान मे चमकते हुए चाँद की तरफ देखने लगी.

इस ठंडी रात मे लीना मुझे प्यार करने के लिए चाँद से थोड़ी रोशनी माँग रही थी जिस से उसका बदन गरम हो जाए

चाँद अपनी चाँदनी को छोड़ कर लीना को अपनी रोशनी दे रहा था.

लीना का बदन इस काली रात मे चाँद की रोशनी से चमकने लगा.

आज रात के लिए लीना चाँद की चाँदनी बन गयी थी.

चाँद की चाँदनी को मैं प्यार करने को तय्यार हो गया.

मैं लीना के पैरो के बीच मे आ गया और लंड को चूत पर रगड़ते हुए लीना को किस करने लगा.

लीना के होंटो पर कविता का पानी लगा हुआ था जो मेरे लंड चूस ने से लगा गया होगा

. लीना किस करते हुए खुद की बनाई हुई दुनिया मे खो गयी.

मैं ने इसकी फ़ायदा उठाते हुए लंड को लीना की चूत पर सेट करते हुए अंदर पुश करने लगा.

लीना की चूत कविता की चूत से टाइट थी. जिस से झटके मारे बिना काम नही चलेगा.

मैं ने लीना को किस करना बंद किया और लंड को चूत पर सेट किया

चूत ने मेरे लंड को पहचान लिया.

चूत-कहाँ थे इतने दिन से

लंड-थोड़ा बिज़ी था ,अब आ गया हुआ ना ,मुझे अंदर आने दो

चूत-नही आने दूँगी, यहाँ तुम्हारे इंतज़ार मे मेरा रो रो के बुरा हाल हो रहा था और तुम एक बार भी मुझे देखने नही आए

लंड- समझा करो, मैं रोज रोज तुमसे मिलने आता तो तुम फट जाती, मैं तुम्हारे बारे मे सोच कर नही आया ,अब आने दो ना अंदर बाहर बहोत ठंडी है.अगर और थोड़ा देर बाहर रुका तो मैं ठंड से मुरझा जाउन्गा.

चूत-मुरझाए तुम्हारे दुश्मन ,अब आओ अंदर नही तो मुझे पाप लग जाएगा.

लंड-लव यू डियर

चूत-अब मस्का मत मारो,आओ अंदर

चूत और लंड की प्यारी बाते सुनकर मैं धीरे धीरे झटके मार कर पूरा लंड चूत मे डालने लगा.

लीना को दर्द हो रहा था .उसका दर्द कम करने के लिए थोड़ी देर रुक कर लीना को किस करने लगा.

चूत मे लंड जाते मेरा शरीर गरम होने लगा. चूत ने ठंड मे गर्मी का अहसास दिलाया.

मेरी तरह लीना भी लंड चूत मे लेकर तरोताज़ा हो गयी थी. और मुझे धक्के मारने को कह रही थी.

मैं कविता की तरह लीना को किस करते हुए धीरे धीरे धक्के मारने लगा.

लीना मेरे धक्के के साथ अपनी नज़र चाँद से हटा कर मुझे देखने लगी.

लीना ने मेरे पीठ को पकड़ कर मुझे अपने अंदर लेने के कोशिस करने लगी

ऐसा करने से लंड चूत की गहराई तक चल जाता.

लीना अपनी गरम गरम सासो से मुझे हवा देने लगी.जिस से एक 2 जो पसीने की बूंदे मेरे चेहरे पे आई थी वो हवा मे उड़ गयी.

ठंड के मौसम मे लगभग 2 कुवारि चूत का मज़ा मिल जाए तो जीवन सफल हो जाता है.

और चूत से पानी निकाल कर दिल खुश होकर ज़ोर ज़ोर से धड़कते हुए डॅन्स करने लगता है

मेरे दिल के साथ लीना का दिल भी ज़ोर से धड़कने लगा.

और लीना अपना कंट्रोल खो बैटी.और लीना की चूत से पानी निकल गया. जिस से लीना खुश हो गयी

मुझे तो लगा लीना थोड़ी देर मुझे रुकने को कहेगी पर लीना तो सीसव खेलने की बात करने लगी.

लीना-भैया मेरे साथ सीसव खेलो ना.

अवी-तुम्हे भी खेलना है.

लीना-हां, कविता ने कहा कि बहोत मज़ा आता है सीसव खेलने मे

मैं ने लीना को सीसव कैसे खेलते है ये बता दिया.

लीना-भैया इसमे तो बहोत मज़ा आएगा.

अवी-सुरू करूँ

लीना-हाँ,

फिर मैं लीना के साथ सीसव खेलने लगा.

ठंडी हवाए हमे सीसव खेलने मे मदद करने लगी.

ठंडी हवाए कभी लीना के मेरे उपर कर देती तो कभी मैं लीना के उपर हो जाता.

हमारे इस खेल को देख कर चाँद भी खुशी मे चमक रहा था.

तारे हमारे साथ कभी इधर झुकते तो कभी उधर

पुच पच की आवाज़ के साथ हवाए अपना संगीत बजा रही थी.

लीना को मैं ने ज़्यादा देर मेरे उपर उछाल दिया.

जिस से सीसव के गेम मे लीना मज़े लेने लगी.

लीना को मेरी गोद मे बैठ कर किस करते हुई चुदाई करने मे कुछ ज़्यादा ही मज़ा आ रहा था.

कविता के साथ जितनी देर ये खेल खेला था उस से ज़्यादा लीना के साथ खेल रहा था

लीना का पानी निकल गया था पर खेल चालू था क्यू कि मेरा पानी निकलने वाला बाकी था.

मैं ने अपनी गति बढ़ा कर चूत मे धक्के मारने लगा.

चूत मे वीर्य डाला तो लीना को बाथरूम मे जाना होगा ,

इस लिए मैं ने अपना वीर्य लीना के पेट पर डाल दिया

लीना चुदाई करके थक गयी थी .और मैं दोनो की चुदाई करके मर गया था.

चुदाई करने के बाद मैं थोड़ी देर ऐसे पड़े रहे

लीना-भैया आपका जवाब नही, लव यू

अवी-कैसा लगा

लीना-भैया आज तो जन्नत घूम कर आई हूँ

अवी-तो चलो नीचे

लीना-चलते है ,पहले मुझे आप से कुछ कहना है

अवी-जो कहना है वो कल,अब चलो नीचे

मैने लीना पे ज़ोर दे कर नीचे भेज दिया .फिर थोड़ी देर बाद मैं भी नीचे चला गया.

और कविता लीना के बीच मे जाकर लेट गया.

दोनो मुझ से लिपट कर सो गयी.

 
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