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मैं और मेरा परिवार

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अपडेट 930ए

कविता और लीना मेरे लिए डेट ढूँढ लेती.

उनकी पसंद एक से बढ़ कर एक थी.

उनके साथ डेटिंग करने से मेडिसिन वाला पहचान का हो गया .क्यूँ कि कॉंडम जो इतने खरीदने पड़ रहे थे.

कभी सिनिमा हॉल मे मस्ती करता तो कभी पार्क मे तो कभी घर2 पे

साथ ही मैं पढ़ाई भी कर रहा था.

इस साल मैं ने ज़्यादा क्लास मिस नही किए.

लाइब्रेरी मे भी जाने लगा था.

कोमल के साथ रोज शाम मे पढ़ाई करने तो जाता ही था.

पढ़ाई के साथ मस्ती चल रही थी.

मेरे जूनियर तो थे ही ,मैं उनके साथ हसी मज़ाक कर लेता.

जूनियर हमारे ग्रूप मे जाय्न होके खुश थे.और मैं उनके साथ छेड़छाड़ करके खुश था.

उनके लिए मैं सिंगल था ,जिसका मैं पूरा फ़ायदा उठा रहा था

इसी बीच एक वीकॅंड पर राजेश आ गया.

राजेश तो अगस्त मे आने वाला था पर कुछ काम की वजह से आ नही पाया.

राजेश फिर से गाँव आकर खुश था. राजेश सिर्फ़ 2 दिन के लिए आया था.

नीता बुआ औरनेहा बुआ तो राजेश का साथ नही छोड़ रही थी

राजेश इस बार हम सबको अपने कॉलेज ले जाने आया था.

राजेश के टॉप करने से उसके कॉलेज मे एक फंक्षन रखा था.

साथ मे कुछ अलग फंक्षन भी थे जिसके लिए राजेश हमे ले जाने आया था.

राजेश के लिए फंक्षन रखा है ये सुन कर नीता बुआ का सर उचा हो गया.

नेहा बुआ और नीता बुआ तो एक झटके मे तैयार हो गयी राजेश के कॉलेज मे जाने को

राजेश के लिए फंक्षन हो और कविता लीना ना जाए ये हो नही सकता.

कविता लीना को तो जाना ही था फिर तो राज ने भी ज़िद किया.

प्राब्लम मेरा था.

राजेश मुझे साथ लेकर जाएगा ही. उसने मेरे साथ कॉलेज की लड़कियो के साथ मस्ती जो करनी थी.

छोटी चाची को मैं ने बताया कि राजेश मुझे कॉलेज क्यूँ ले जा रहा है.

छोटी चाची ने तो अपने तरीके से बड़ी चाची को मना लिया

बाकी सब तो एक दिन के लिए जा रहे थे पर मुझे वहाँ कुछ दिन रुकना था.

मैं क्यूँ रुक रहा हूँ ये सवाल पैदा होते ही मैं ने नीता बुआ को कोपचे मे लिया ,और बताया कि अगर मैं कुछ दिन राजेश के साथ रहूँगा तो पता लागासकता हूँ कि राजेश क्या करता है कॉलेज मे

मेरी बात सुनते ही नीता बुआ ने मुझे कुछ दिन राजेश के साथ रहने की इजाज़त दी.

बड़ी चाची को ये देख कर अच्छा लगा कि राजेश मुझे कितना मानता है.

और हम राजेश के कॉलेज के लिए निकल गये

जिस दिन राजेश का फंक्षन था हम उसी दिन सुबह कॉलेज मे पहोच गये

कॉलेज मे आते ही टीचर और प्रिन्सिपल के मूह से राजेश की तारीफ सुनकर बुआ खुश हो गयी.

फंक्षन शुरू होते ही बुआ राजेश के क़िस्से सुनकर राजेश की पीठ थप थपाने लगी.

प्रिन्सिपल ने राजेश को ट्रोपी दी .और बुआ का भी स्टेज पे बुला के सत्कार किया.

फंक्षन के बाद हमारे लिए खाने का प्रोग्राम भी रखा था.

पूरे दिन बुआ राजेश की वजह से अपना सर उचा करके चल रही थी.

फंक्षन शाम तक ख़तम हुआ और हम ने बुआ को घर की बस मे बिठा दिया.

कोमल पूछ रही थी कि वो कॉलेज कैसे जाएँगी .तो मैं ने इसका हल भी बता दिया

बाकी सब चले गये. मैं राजेश के कॉलेज मे रुक गया.

राजेश को यही तो चाहिए था.

बुआ के जाते ही मैं राजेश के साथ उसके कमरे मे जाने की बजाय राजेश मुझे प्रिंसीपल मेडम के घर मे ले गया.

राजेश ने पूरी तैयारी करके रखी थी.

प्रिन्सिपल मेडम और उनकी बेटी की हम ने रात भर चुदाई की

राजेश पे इनवेस्ट करने का अब फ़ायदा हो रहा था.

मिसेज़ दुबे मिसेज़ पंवार और रिया को राजेश के साथ शेर करने से अब राजेश अपनी सेट्टिंग मेरे साथ शेर कर रहा था.

जिनको कोई प्राब्लम नही था उनके साथ राजेश और मैं मस्ती कर रहे थे.

शुरुआत तो प्रिन्सिपल से हुई पता नही एंड किस के साथ होगा.

प्रिन्सिपल मेडम इस एज मे 2 दमदार लंड लेकर पूरे जोश के साथ हमारा साथ दे रही.

प्रिन्सिपल मेडम की बेटी भी कुछ कम नही थी. राजेश की चाय्स कमाल की थी.

अब तो राजेश के कॉलेज मे मज़ा आ जाएगा.

मैं उस लड़की से भी मिला जिसने मुझे राजेश के बारे मे बताया था. मिसेज़ वर्मा की स्टूडेंट

उसको ज़्यादा भाव नही दिया क्यूँ कि उसकी तो मैं पहले ही ले चुका था

राजेश ने मुझे अपनी गर्लफ्रेंड से मिलाया.

राजेश ने कहा कि वो इसी के साथ शादी करेगा.

राजेश की गर्लफ्रेंड के साथ फॅमिली मेंबर की तरह मिला.

राजेशको कहा कि बुआ से क्यूँ नही मिलाया .राजेश की माँ से अभी मिलने को राजेश की गर्लफ्रेंड ने मना किया था.

मैं जितने दिन राजेश की कॉलेज मे रहा उतनी रात हम ने पार्टी की

ऐसी पार्टी की सुबह देर से नींद खुल जाती.

राजेश थोड़ी देर के लिए अपने क्लास मे जाता तब मैं चाची को कॉल कर देता और थोड़ी पढ़ाइकर लेता.

ये मेरे लिए एक टूर जैसा था.

राजेश ने मेरा पूरा ध्यान रखा था.

राजेश के साथ कुछ दिन मज़े मे बिता कर मैं अपने गाँव वापस आ गया.

अपने गाँव की हवा अलग है. गाँव आते ही सुकून मिलता है.
 
अपडेट 931

राजेश के साथ उसके कॉलेज मे मस्ती करके मज़ा आ गया.

मैं ने सोचा था इस साल ज़्यादा मस्ती नही करूँगा पढ़ाई मे ज़्यादा ध्यान दूँगा.

लड़की की सेट्टिंग मे काफ़ी समय लग जाता है जिस से पढ़ाई नही हो पाती

पर थॅंक्स कहूँगा कविता लीना और राजेश को जो मेरे लिए फरिश्ते बन कर आए थे.

कविता लीना अपने कॉलेज की लड़कियो के साथ मैं बन कर चॅट करती है. उनको मेरे लिए सेट करती है. फिर मैं डेट पे जाकर मस्ती करता हूँ.

इसी तरह राजेश ने अपने कॉलेज बुला कर एक से बढ़ कर एक माल मेरे लिए सेट किया.मैं रंजेश केसाथ उन सबकी बजा देता

पंकज की गर्लफ्रेंड और करीम की गर्लफ्रेंड ने हमारे ग्रूप मे जूनियर जाय्न करकेमेरी मदद कर दी

पंकज की गर्लफ्रेंड और करीम की गर्लफ्रेंड अपने बाय्फ्रेंड के साथ एंजाय करती है और मैं जूनियर के साथ फन करता हूँ.

इस साल मुझे ज़्यादा मेहनत नही करनी पड़ी.

एक तरफ कविता लीना मेरा ध्यान रख रही थी,दूसरी तरफ राजेश मेरे साथ मिलके लड़कियो की चुदाई करना चाहता था. और हमारे कॉलेज की जूनियर वो तो एक आँख मारते ही मेरी बाइक पर बैठ जाएँगी.

सेट्टिंग ना करने से मैं उस समय मे पढ़ाई करने लगा.

जब मैं ने कविता लीना और राजेश के बारे मे छोटी चाचिको बताया तो चाची खुश हो गयी.

मैं चाची को सब बातें बता रहा था सिर्फ़ टूर पे जो हुआ वो नही बताया.

राजेश के कॉलेज की मस्ती सुनकर और देख कर चाचीनेमुझे इतने किस किए कि पूरा चेहरा लाल हो गया.

अवी-चाची राजेश ने तो हर दिन पार्टी दी मुझे

सी चाची- तेरे एक दिन के पार्टी के बदले राजेशने तुज़े माला माल कर दिया.

अवी-राजेश के कॉलेज मे मस्ती की. थ्रीसम उसमे बहुत मज़ा आया.राजेश ने उम्मीद से ज़्यादा पार्टी दी

सी चाची- तूने नीता बुआ को खुशी देने के लिए ,राजेश को फॅमिली इंपॉर्टेन्स बताने के लिए राजेश को बदल दिया और उसका फल तुम्हें इस तरह मिल रहा है , इतना मीठा फल मिल रहा है तेरे तो मज़े है.

अवी-किया कुछ और था, और हो कुछ और गया, और मिल रहा है इतना मज़ा

सी चाची- तू अच्छे काम करता है और फल अपने आप मिल जाते है

अवी-वो तो है.राजेश ने अपने कॉलेज बुला कर पार्टी दी.और कविता लीना तो मेरे लिए डेट ढूँढ रही है.

सी चाची- वो दोनो तुझे बहुत प्यार करती है . तू उनको खुशी देता है आज वो तुम्हें खुशी दे रही है

अवी-उनको मना किया फिर भी वो ऐसा कर रही हैं.

सी चाची- तू क्यूँ मना कर रहा है,उनको कुछ नही होगा.सब को लगता है अवी चॅट कर रहा है. वो सेफ है औरतेरे मज़े है

अवी-कविता लीना की वजह से मुझे मस्ती के साथ पढ़ाई करने के लिए भी टाइम मिल रहा है

सी चाची- तू कुछ नही कर रहा.

अवी-मुझे किसी लड़की के पीछे जाने की ज़रूरत नही. हमारे कॉलेज की जूनियर हैं ना, वो मेरे पीछे लगी रहती है

सी चाची- तेरे तो भले भले हो रहे है

अवी-मुझे फल अपने आप मिल रहे है.

सी चाची- और तू फल टेस्ट कर रहा है ये इम्पोर्टेंट है

अवी-आपको उस फल के टेस्ट के बारे मे बताता हूँ वो इम्पोर्टेंट है.

सी चाची- मेरा प्यारा बेटा ,अपनी चाची को हर बात बताता है.

अवी-पर आप कुछ नही बताती,जब कुछ पूछता हूँ तो कहती है सही समय आने दो

सी चाची- अब तो लग रहा है वो समय पास आ रहा है

अवी-सच चाची

सी चाची- हाँ, तू बड़ा हो रहा है. चल अब सो जा

अवी-आप यही मेरे साथ सो जाइए ना

सी चाची- आज नही, फिर कभी. मैं अमित के पास जाती हूँ वो उठ गया होगा.

और चाची ने मुझे गुड नाइट किस किया .और अपने कमरे मे चली गयी.

और मैने ने विद्या को अपने पास सोने को बुलाया.सिर्फ़ सोने को ,चुदाई करने नही बुलाया.

विद्या तो मेरे साथ चैन से सो गयी और मैं उसे चिपक कर सो गया.

ऐसे मस्ती मज़ाक के साथ दिन कट रहे थे.

कभी कोल्लेज तो कभी घर, कभी शहर तो कभी गाँव,

कभी चाची तो कभी बुआ

कभी रानी तो कभी कोमल

कभी भाई तो कभी बहन

इनके साथ हसी खुशी दिन कट रहे थे.

रानी के साथ प्यार करना. कोमल का मेरे साथ अजीब सी हरकत करना ,इसी मे दिन कट रहे थे.

देखते देखते ऑक्टोबर महीना भी आ गया और ख़तम भी होने लगा.

ऑक्टोबर महीने मे तो अमित सुमित और परी का बर्तडे आता है.

उनका पहला बर्तडे ,मैं ने तो चाची को बताया था कि हम खेतो मे सेलेब्रेट करेंगे

चाची क्या सोच रही है एक बार देख लेता हूँ

मैं चाची से मिलने उनके कमरे मे जा पहुँचा.

सी चाची- अच्छा हुआ अवी तू आ गया.

अवी-क्या चल रहा है चाची

म चाची-भूल गये बच्चू 1 हफ्ते बाद अमित सुमित परी का बर्तडेहै

अवी-चाची मैं कैसे भूल सकता हूँ ,मैं तो उसी के बारे मे पूछने आया था कि प्लान क्या बनाया है

म चाची- प्लान बनाने का काम मीना का है.

ब चाची- अवी बैठो , तुम कहो हमे क्या करना चाहिए

अवी-मैं छोटी चाची को बता चुका हूँ कि हमे क्या करना चाहये

ब चाची- मीना अवी ने क्या बताया

सी चाची- मैं पूरा प्लान बताती हूँ. और साथ मे अवी का प्लान भी बताती हूँ.

म चाची- बताना जल्दी

सी चाची- अवी चाहता है हम बर्तडे खेत मे आम के बगीचे मे मनाएँगे. जहा हमारी पूरी फॅमिली होगी.रानी के बर्तडे जैसे खेत मे मस्ती करेंगे और खेत मे खाना भी बनाएँगे

ब चाची- अवी तुम जैसा कह रहे हो वैसा ही करेंगे. खेत मे बर्तडे मनाना अच्छा रहेगा. पर गाँव वालो का क्या सोचा है

सी चाची- हम शाम तक खेत मे बर्तडे मनाएँगे .तब तक घर3 के पास गाँववालो के लिए खाना बनेगा .और शाम को गाँव वालो को दावत देंगे

म चाची- एक सवाल. खेत मे और घर3 मे अलग खाना बनेगा.

सी चाची- हाँ, खेत मे हम सबके लिए खाना बनाएँगे और गाँव वालो के लिए हलवाई खाना बनाएगा.

म चाची- मुझे तो प्लान पसंद आया.

ब चाची- शाम मे अवी के चाचा से बात करेंगे .उनकी राय ज़रूरी है.

अवी-चाची क्यूँ ना हम गाँव वालो को ड्रेस और औरतों को साड़ी गिफ्ट द्दे ताकि उनका आशीर्वाद बच्चों को मिले

ब चाची- इसमे बहुत खर्चा होगा. तुम्हारे चाचा नही मानेंगे

म चाची- मुझे गिफ्ट वाला आइडिया पसंद आया.

ब चाची- सीमा तुझे तो सब पसंद आता है

विद्या-मैं कुछ बोलू

सी चाची- तुम पूछा मत करो .जो दिल मे आता है वो बोल दिया करो

विद्या-अवी रणजीतसिंघ का दोस्त है. रणजीतसिंघ की गारमेंट से कंपनी है तो वहाँ से कम दाम मे ड्रेस मिल जाएँगे

सी चाची- दीदी ,विद्या जो कह रही है वो हुआ तो अवी के चाचा मना नही करेंगे

ब चाची- अगर नही हुआ तो

अवी-(विद्या ने आइडिया अच्छा दिया.साथ मे मेरे अकाउंट मे पैसे तो बहुत है ,उनका ईस्तमाल करूँगा और चाची को लगेगा कि कम दाम मे गिफ्ट लिए है)चाची गिफ्ट का मेरी तरफ छोड़ दीजिए .वो मैं देख लूँगा.

ब चाची- तू कर पाएगा.

अवी-चाची मैं बड़ा हो गया हूँ.बस आप चाचा को संभाल लीजिए

ब चाची- हम शाम मे तेरे चाचा से बात करेंगे. विद्या

विद्या-जी चाची

ब चाची- अवी की बुआ के घर जाओ और उनको कहना शाम को मैं ने बुलाया है

विद्या-अभी जाती हूँ.

सी चाची- और हाँ विद्या ,तुम्हें थोड़ी ज़्यादा मेहनत करनी होगी .अगर मेहमान आ गये तो,

विद्या-चाची मैं शिकायत का मौका नही दूँगी वैसे कौन कौन आएगा

म चाची- हमारे माता पिता आएँगे ,कुछ और रिश्तेदार आ सकते है. स्वेता आएगी. और ठाकुर की फॅमिली होगी. हैं ना दीदी

ब चाची- सीमा तुम ने सही कहा. तुम लिस्ट बनाना कौन कौन आएगा.

अवी-तो मैं काम पे लग जाता हूँ

सी चाची- किस को क्या करना है वो शाम मे पता चलेगा.

ब चाची- चलो साथ मे खाना खाते है.

अवी-मैं हाथ धोने बाथरूम मे नही जाउन्गा

सी चाची- सीधा सीधा बोल ना दीदी के हाथो से खाना है.

ब चाची- इसमे बोलना क्या है. मैं तो आज अवी को पेट भर के खाना खिलाउन्गि

और हम बर्तडे मे क्या करेंगे इस की बातें करते हुए खाना खाने लगे.

बड़ी चाची का हाथ लगते खाना टेस्टी हो जाता है. और मैं पेट भर के खाना ख़ाता हूँ.
 
चॅप्टर 932

शाम मे चाचा और बुआ के आते ही हमारी बातें ,बच्चो के जनमदिन की बातें शुरू हो गयी.

छोटी चाची अपना प्लान बताती गयी और चाचा बुआ अपनी गर्दन हाँ मे हिलाते गये.

छोटी चाची के प्लान को सुनकर चाचा कॅल्क्युलेटर लेकर बैठ गये. दीवानी जी चाचा को पूरा खर्च बता रहे थे.

1 साल मे काफ़ी खर्च हुआ था. चाची की डेलीएरी ,बच्चों का नाम करण, मेला, मेरा टूर, फॅमिली टूर, गिफ्ट्स, घर का समान एट्सेटरा, इतने खर्च के बाद पूरे गाँव को खाना और गिफ्ट देना ,चाचा दीवान जी को हिसाब पूछ रहे थे.

एक साथ इतने खर्च होने से चाचा सोचने लगे कि क्या किया जाए.

ऐसे मे बड़ी चाची ने कहा कि गाँव वालो के गिफ्ट अवी देखने वाला है. रणजीतसिंघ की वजह से ज़्यादा खर्च नही होगा गिफ्ट पे.

बड़ी चाची की बात सुनते ही चाचा के चेहरे पे उम्मीद दिखी.चाचा ने दीवांजी से पूछा तो दीवान जी ने हरी झंडी दिखा दी

चाचा के हां ना करने से बुआ ने कुछ पैसे लगाने की बात कही पर बड़ी चाची ने बुआ के पैसे लेने से मना किया. आगे जाकर स्वेता दीदी की शादी होगी ऐसे मे उनको पैसो की ज़रूरत ज़्यादा होगी. इस लिए बड़ी चाची ने बुआ से पैसे लेने से मना किया.

बड़ी चाची की बात को चाचा मना नही करते,और दीवान जी के हिसाब किताब करने के बाद चाचा ने हाँ कर दी.

मैं ने दीवान जी को कोपचे मे लिया और ज़्यादा दिमाग़ लगाने से मना किया और पूरा हिसाब मैं देखूँगा ,ये अच्छे से दीवान जी को समझा दिया.

फिर हम सब काफ़ी देर तक बातें करते रहे.

कविता लीना अपने अजीब प्लान बता कर चाचा का टेन्षन बढ़ा रहे थे.

कोमल भी फिर से फॅमिली का गेट टुगेदर को एंजाय करने को बेकरार थी.

कोमल ने तो चाचा के हाँ करने से पहले रानी को बता दिया कि उसे फिर से गाँव मे आना होगा.

रानी तो गाँव मे आने का इंतज़ार कर रही थी. अब तो मज़ा मिलते ही रानी नंगे पैर भागती हुई गाँव मे आ जाएगी.

पूजा बुआ भी खुश थी क्यूँ की स्वेता दीदी गाँव आएँगी और सब ठीक रहा तो रोहन की फॅमिली को भी बुलाया जा सकता है.

छोटी चाची भी खुश थी उनकी माँ उनसे मिलने आएँगी .उनके पिताजी की तबीयत खराब है जिससे वो आ नही पाएँगे. पर छोटी चाची की माँ एक दिन के लिए तो आ सकती है.

सीमा चाची तो इस दिन का इंतज़ार कर रही थी उनके माता पिता जैसे पिछले साल नामकरण पे आए थे वैसे अब भी ज़रूर आएँगे.

मैं ने छोटी चाची को अपने कमरे मे बुलाया.

सी चाची-क्या हुआ अवी,

अवी-चाची मैं क्या बोल रहा था

सी चाची-कहो

अवी-प्रिया को भी इन्वाइट किया जाए तो ,वो भी तो मेरी बेटी है.

सी चाची-इसमे इतना क्या सोचना है. हम किरण और प्रिन्सिपल सर को बुला लेंगे.

अवी-लव यू चाची

सी चाची-जितना प्यार करना है अभी कर लो फिर कुछ दिन चान्स नही मिलेगा.

अवी-मेरी प्यारी चाची मुझे प्यार करने का कोई ना कोई रास्ता ढूँढ लेगी.

सी चाची-मस्का मत लगा. और हाँ ,काम के साथ मस्ती भी करना.

अवी-जी चाची

और हम वापस फंक्षन की बातें करने लगे

हमारे पास एक हफ़्ता है फंक्षन करने के लिए.

चाचा दूसरे दिन ही काम पर लग गये. आम के बगीचे मे जगह बनाने के काम मे लग गये.

चाची अपने रिश्तेदार को फोन करके इन्वाइट करने लगी.

स्वेता दीदी को फोन किया तो दीदी ने बताया कि वो 3 दिन बाद आएँगी उनके एग्ज़ॅम चल रहे है

पूजा बुआ ने रोहन की फॅमिली को इन्वाइट किया ,लेकिन दीवाली का सेशन होने से उन लोगो ने आने से मना किया

पूजा बुआ उनके ना आने से उदास हो गयी.

पर रोहन ने मुझे फोन करके बता दिया कि वो पिछली बार जैसे टूर पे आए थे वैसे एक दिन के लिए आने को तैयार हो गये.

ये बात स्वेता दीदी को पता थी पर पूजा बुआ को बताने से मना किया. क्यूँ कि पूजा बुआ को पता चला कि उनके दामाद आ रहे है तो वो उनको मेहमानो की तरह ट्रीट करेंगी और रोहन को ये पसंद नही है उसको मान सम्मान पसंद नही है.

रोहन सोहन आएँगे तो उनको देख कर पूजा बुआ खुश हो जाएगी.

कोमल ने दूसरे दिन रानी के साथ प्लान बना लिया कि वो कब क्या करेंगी.

रानी को मैं ने बता दिया कि उसे फंक्षन के एक दिन पहले आना होगा. और 3 दिन तक रुकने को कहा.

रानी 3 दिन गाँव मे रहेगी ये सुनते रानी को मेले के दिन याद आ गये .वो इस 3 दिन मे फिर से मेले को एंजाय करने की सोच रही थी.

बड़ी चाची ने रानी की मम्मी को खुद फोन करके इन्वाइट किया .रानी की मम्मी ने इन्विटेशन कबुल किया .

छोटी चाची की माँ और छोटी बहन आने वाली थी, सीमा चाची की माँ और पिताजी आएँगे और वो एक दिन रुकेंगे . बड़ी चाची की तरफ से उनकी माँ और पिताजी आएँगे.

मतलब फुल 2 धमाल होगा.फिर से फॅमिली गेट टुगेदर होगा.

सब अच्छे से मेनेज हुआ तो सब खुश हो जाएँगे.

राजेश की मुट्ठी मे प्रिन्सिपल मेडम होने से उसे पर्मिशन मिल गयी और वो भी इस फंक्षन का पार्ट बनेगा.

मैं चाचा और बड़ी चाची ने खुद हवेली जा कर ठाकुरजी को इन्वाइट किया.

ठाकुरजी को अच्छा लगा कि हम ने उनको अपने फॅमिली फंक्षन मे इन्वाइट किया.

ठाकुरजी और ठकुराइन दोनो फंक्षन मे आने को तैयार हुए.

रणजीतसिंघ और कामिनी अपने बच्चों से मिलने जाने वाले थे इस लिए उनका आना नही होगा.

ठकुराइन ने हमे हवेली से खाना खाए बिना जाने नही दिया.

ठाकुरजी जिस तरह मुझे रेस्पेक्ट दे रहे थे वो बड़ी चाची देख कर खुश हो गयी.

इधर मैं छोटी चाची के साथ किरण से मिलने गया.

प्रिन्सिपल सर मुझे देख कर खुश हो गये और इन्विटेशन मिलते ही आने को तैयार हो गये.

छोटी चाची ने किरण से मिलने से पहले प्रिया को अपनी गोद मे लिया .और प्यार करने लगी.

किरण ने मुझसे इशारो से पूछा कि ये क्या हो रहा है. मैं ने किरण को शांत रहने को कहा

प्रिया के गले मे मेरी दी हुई गोल्ड की चैन देख कर छोटी चाची को अच्छा लगा.

छोटी चाची ने प्रिया को गिफ्ट दिया और किरण को ज़ोर दे के आने को कहा.

सब को इन्वाइट करने के बाद मैं भी पढ़ाई ,कॉलेज जाने के साथ चाचा की मदद करने लगा.

किसी को शहर लेकर जाना.

गाँव वालो के लिए गिफ्ट लेना.

बुआ ने बताया हुआ काम करना.

चाची का काम भाग कर करना.

विद्या ने भी अपनी कमर कस ली थी. और चाची की मदद करने लगी.

मेहमानों के लिए जगह बना रही थी. बच्चो का ख़याल रख रही थी.

इसी बीच स्वेता दीदी गाँव आने के लिए निकल गयी.

पूजा बुआ ने मुझे स्वेता दीदी को शहर से गाँव लाने के लिए भेज दिया.

मैं तो समय से पहले बस स्टॉप पे जाके स्वेता दीदी का इंतज़ार करने लगा.

बस आते ही पहले स्वेता दीदी नीचे आई. स्वेता दीदी को इतने दिनो बाद देख कर अच्छा लगा

ये फॅमिली टुगेदर स्वेता दीदी सीतल दीदी के आने से मज़ेदार हो जाएगा.

सीतल दीदी तो बस से उतरते ही मेरे गले लग गयी.

अवी-दीदी गाँव चलें

मैं ने इतना कहा था कि बस से पूनम दीदी बाहर आई.

पूनम दीदी को तो मेले के बाद आज देखा है

पूनम दीदी मे काफ़ी चेंज आ गया था.

पूनम दीदी हॉट लग रही है. और सेक्सी इतनी दिख रही थी बस स्टॉप पे जो लड़के थे वो पूनम दीदी को देखने लगे.

पूनम दीदी आ गयी. अब तो बहुत मज़ा आएगा

पूनम दीदी-अवी मुझे भूले तो नही ना

अवी-दीदी आपको कैसे भूल सकता हूँ. आप ही मुझे भूल गयी

पूनम दीदी- भूली नही ,थोड़ी बिज़ी हो गयी थी.

अवी-अब तो आप फ्री हो ना

पूनम दीदी-हाँ, जॉब लग गयी है पर जाय्निंग आनी है. जाय्निंग आने तक फ्री हूँ

अवी-फिर तो मिल के धमाल करेंगे.

पूनम दीदी- उसी के लिए तो आई हूँ.

अवी-चले अब

स्वेता दीदी-रूको एक मिनिट बुआ कहाँ रह गयी.

ज्योति बुआ का नाम सुनते ही मैं हॅंग हो गया.

ज्योति बुआ को देखते ही मेरी खुशी गायब हो गयी.

ज्योति बुआ के आने से मेरा सारा मूड खराब हो गया

पर ज्योति बुआ के चेहरे पे एक अजीब सी खुशी दिख रही थी. जैसे इस बार पूरा गाँव लूट कर जाएगी.

ज्योति बुआ इतने दिन से चाचा से दूर थी तो चाचा फॅमिली को टाइम दे रहे थे.

ज्योति बुआ के आने से चाचा तो उनके पीछे लगे रहेंगे

इस बार मैं ज्योति बुआ को हल्के मे नही लूँगा.

इस बार मैं अपनी आँख ज्योति बुआ से हटाउंगा नही.

ज्योति बुआ की एक ग़लत चाल मैं चाची को सब कुछ बता दूँगा.

मैं ने सोच लिया कि ज्योति बुआ के साथ क्या करना है. और मैं दीदी को लेकर घर आ गया.
 
933

एक एक करके सारे मेहमान आते गये.

ज्योति बुआ और पूनम दीदी तो पूजा बुआ के घर रुके थे .

बाकी मेहमान हमारे यहाँ रुक गये.

स्वेता दीदी के आने से पूरी गॅंग फिर से एक हो कर मस्ती करने लगी .

मेले के दिनो मे की हुई मस्ती को याद करने लगे.

रानी भी अपना समान लेकर कोमल के यहाँ आ गयी थी.

जैसा हम ने डिसाइड किया था चाचा ने खेतो मे आम के बगीचे मे पूरा इंतज़ाम कर दिया था.

चाची के माता पिता एक दिन पहले आ गये जिस से चाची उनकी सेवा मे लग गयी.

अपने अपने रिश्तेदारो का ध्यान रखने मे चाची बिज़ी हो गयी तो बुआ ने फंक्षन की ज़िम्मेदारी अपने सर उठा ली.

मुझे छोटी चाची ने जो काम सोपा था वो मैं ने समय से पहले ख़तम कर दिया.

और जो गाँव वालो के लिए ड्रेस लिए ,साड़ी ली उनको घर3 मे रख दिया.

चाचा-अवी ड्रेस रख दिए

अवी-जी चाचा जी

चाचा-कितने पैसे लगे

अवी-पूरा खर्च दीवान जी को दिया है.

चाचा-पर पैसे कितने लगे

अवी-जितना आपने सोचा है उस से भी कम, रणजीतसिंघ ने ज़्यादा पैसे नही लिए

चाचा-सबाश .ऐसे ही पैसे बचाते रहना ,

अवी-(और आप ज्योति बुआ पे उड़ाते रहना) जी ,चाचा जी खेत का काम तो हो गया ना

चाचा-हाँ, पूरा इंतज़ाम कर लिया. बगीचे मे पूरी फॅमिली का इंतज़ाम किया है. और खेत मे गाँव वालो के लिए खाना बनेगा.

अवी-हलवाई को बता दिया ना कि खाना टेस्टी बनाना है. जिस से गाँव वाले इस दावत को याद रखे

चाचा-हलवाई मेरा दोस्त है ,वो इतना टेस्टी खाना बनाता है कि तुम तारीफ करते रहोगे. उसे मैं आज ही बुलाया है.

अवी-ये तो अच्छा किया आपने

चाचा-तुम देखना मैं अपने बच्चों का जनमदिन कितने धूमधड़ाके के साथ करता हूँ.

अवी-आप तो काफ़ी जोश मे आ गये.

चाचा-मेरे बेटो का जनमदिन है. पूरा गाँव याद रखेगा इस दिन को ,पिताजी अगर आज यहाँ होते तो कितने खुश हो जाते

अवी-दादाजी एक दिन हमारे साथ ज़रूर होंगे

चाचा-वो दिन जल्दी आ जाए.

अवी-भगवान ने चाहा तो सब अच्छा होगा.

चाचा-तू बातें तो अच्छा करने लगा है.

अवी-सब आप से सीखा है.

चाचा-मुझ से सीखने लायक कुछ नही है . ये तो शालिनी भाभी के गुण है जो तुझे विरासत मे मिले है.

अवी-चाचा जी एक बात पुछु

चाचा-हाँ पूछो,

अवी-सब कहते है मेरी माँ के संस्कारो से मैं ऐसा हूँ .पर कोई मेरे पापा के बारे मे बात क्यूँ नही करता.

चाचा-इसका क्या जवाब दूं तुम्हें समझ नही आ रहा

अवी-जो आपको पता है वो बता दीजिए.

चाचा-ये जो तुम आम का बगीचा देख रहा है. ये हम भाई बहनों ने मिल कर लगाया था. हमारा सारा बचपन इन खेतो मे बीता है. तुम्हारा पापा (मेरे भैया ) तुम्हारी बुआ और मैं ,हम ने मिलके बचपन मे एक दूसरे को बहुत प्यार किया.

अवी-फिर आगे क्या हुआ

चाचा-तुम्हारे पिताजी पढ़ाई मे अव्वल थे .उनके जितना तेज दिमाग़ वाला इस ज़िले मे दूसरा नही था, इसकी वजह से तुम्हारे पिताजी को शहर 3 भेजा जहाँ वो आगे की पढ़ाई करने लगे

अवी-ये तो अच्छी बात है

चाचा-हाँ, पर तुम्हारे पापा को शहर3 मे ऐसे दोस्त मिले कि क्या बताऊ

अवी-और मेरे पापा

चाचा-देखो ,मैं सब मे सबसे छोटा हूँ. मुझे तब सारी बातें पता नही होती थी. मैं तो अपने मस्ती मे फिरता रहता था. मुझे कोई कुछ बताता नही था

अवी-पर कुछ तो पता होगा.

चाचा-भैया कैसे थे ये मैं कैसे बता सकता हूँ. क्यूँ कि मुझे पूरी बात पता नही है. जितना पता है उस से तो मेरे लिए भैया हमेशा अच्छा सोचते थे. मेरा बहुत ख़याल रखते थे

अवी- (मैं बिना वजह परेशान हो रहा था .चाची और बुआ की बातों से लग रहा था कि मेरे पापा बुरे इंसान है पर चाचा तो कह रहे है मेरे पापा अच्छे थे. सबका ख़याल रक्ते थे) तो मेरे पापा सबका ख़याल रखते थे प्यार करते थे.

चाचा-तुम पूजा से पूछो वो तुम्हें बता सकती है पूरी बात

अवी- (चाचा ने फिर मुझे मुश्किल मे फसा दिया. पूजा बुआ कुछ नही बताएँगी) पूजा बुआ मुझे नही बताएँगी.

चाचा-देखो अवी ,मैं तब राज जितना था. आज राज को देखो वो कैसे अपनी दुनिया मे डूबा रहता है उसे फॅमिली मे क्या होता है उस से कुछ लेना देना नही , तो तुम समझ सकते हो कि मुझे ज़्यादा पता नही है

अवी-कुछ तो पता होगा. मैं शहर3 क्यूँ रहता था

चाचा-भैया और पिताजी मे कुछ बातों के वजह से ज़गदा हुआ था .जिस की वजह से पिताजी ने हमे तुमसे मिलने को मना किया था.

अवी- किस बात पे झगड़ा हुआ था.

चाचा-पता नही. पर माँ की डेथ के दूसरे दिन ही भैया को घर से निकाल दिया था.

अवी-दादी की डेथ तो बहुत पहले हुई थी.

चाचा-किसने कहा तुम्हें

अवी-वो फोटो के नीचे डेट लिखी है.औ चाची ने भी कहा

चाचा-वो तो ग़लती से पुरानी डेट प्रिंट हो गयी. माँ तो मेरी दूसरे शादी के पहले भगवान के पास गयी थी.

अवी-क्या ,लेकिन ये कैसे हो सकता है.

चाचा-यही सच है.

अवी-(चाची मुझे झूठ नही बोल सकती, डेट ग़लत प्रिंट होने से शायद मैं ही ग़लत समझ बैठा .रानी को प्रॉमिस किया है वरना अभी जाकर चाची से पूछ लेता) मैं ने कभी इसके बारे मे पूछा नही था.

चाचा-अब तो ग़लत फ़हमी दूर हुई.

अवी-हाँ,पर पापा और दादाजी मे झगड़ा क्यूँ हुआ था.

चाचा-मुझे नही पता .और झगड़ा हुआ कि नही ये भी मुझे नही पता ,मैं ने तो अंदाज़ा लगाया था

अवी-(मैं भी किसे पूछ रहा हूँ)पूजा बुआ से पूछ लूँगा.

चाचा-पूजा को सब पता होगा. या मीना को, दोनो पिताजी के बहुत करीब थी.

अवी-वैसे चाचा जी आप पूजा बुआ को दीदी कहने की जगह नाम से क्यूँ बुलाते है.

चाचा-वो नही बता सकता

अवी-बता दो ना चाचा जी ,मैं किसी को नही बताउन्गा.

चाचा-बताता हूँ पर हसना मत

अवी-मैं क्यूँ हसूँगा.

चाचा-बात ही ऐसी है

अवी-मैं प्रॉमिस करता हूँ हसूँगा नही.

चाचा-पूजा नेहा और नीता मुझसे बड़ी है. और मैं सबसे छोटा हूँ. तो ये सब मुझे छोटू कहते थे जो मुझे पसंद नही था.जिस से मैं गुस्सा हो कर उनको नाम से बुलाता था.

अवी-इसमे हँसने जैसा कुछ नही था. पर अब तो आप बड़े हो गये हो.फिर भी नाम से बुलाते हो

चाचा-आदत पड़ गयी.अब क्या कर सकते है.

अवी-तो क्या बुआ अभी भी आपको छोटू कहती है

चाचा-नही. बिना नाम लिए बुलाती है. इधर आ ,ये कर, वो कहाँ है, किधर था, कब बड़ा होगा.

अवी-और बचपन मे

चाचा-बचपन मे हम आम के बगीचे मे खेलते थे. बहुत मस्ती करते थे. नेहा और नीता तो दिन भर शैतानी करती रहती है.

अवी-आपको आज भी वो दिन याद आते है

चाचा-वो पल भूल नही सकते ,पिताजी मुझे अपने कंधे पे बिठा कर खेतो मे ले जाते थे ,नेहा नीता पिताजी की उंगली पकड़ कर चलती थी. भैया पूजा भाग कर हम से पहले खेतो मे आते थे.और हमको चिड़ाते थे

अवी-और क्या करते थे.

चाचा-पिताजी माँ खेत मे काम करते और हम बगीचे मे लपंचुपाई खेलते थे. पेड़ पे चढ़ कर मंकी बन जाते

अवी-फिर तो मज़ा आता होगा.

चाचा-हाँ, यहाँ खेलना ,हसना ,चिल्लाना .दिन भर पूरे खेत मे हमारी आवाज़ गूँजती रहती थी.

अवी-दादी कुछ नही कहती.

चाचा-माँ तो मुझे सबसे ज़्यादा प्यार करती थी .वो मेरे कहते ही अपना गुस्सा ख़तम कर देती और हमारे साथ खेलने लग जाती. पिताजी भी हमारा बच्पना देख कर छोटे बच्चे बन जाते
 
अवी-फिर तो बहुत मज़ा आता होगा.

चाचा-हाँ, पिताजी हमे हफ्ते मे एक बार शहर ले जाते घुमाने के लिए ,बैलगाड़ी पे हम एक साथ शहर घूम कर आ जाते ,सिनिमा देखते ,नेहा जो बोलती वो पिताजी करते.

अवी-दादाजी नेहा बुआ से ज़्यादा प्यार करते थे

चाचा-माँ भैया और मुझे प्यार करती और पिताजी पूजा बुआ को शेरनी ,नेहा नीता को चंचल तितलिया कहते थे.

अवी-आपने बचपन मे कितनी मस्ती की होगी ये सोच कर मुझे आप से जलन हो रही थी

चाचा-तुम क्या पूरा गाँव जलता था. हमारा प्यार देख कर सबको लगता कि हम हमेशा साथ रहेंगे

अवी-पर ये हो नही पाया

चाचा-हाँ, पता नही किसकी नज़र लग गयी कि हमारा बचपन कहीं खो गया.

अवी-हुआ क्या था.

चाचा-पिताजी हमे शहर ले जाते तो भैया हमेशा शहर के स्कूल वहाँ के बच्चों को पढ़ाई करते हुए देखा करते थे.

अवी-फिर

चाचा-पिताजी ने भैया की आँख मे जो सपना था वो देख लिया .और भैया को शहर3 भेज दिया पढ़ाई करने के लिए और हमारे ग्रूप से भैया शहर3 की रौनक मे खो गये

इतना बोल कर चाचा के आँख मे आँसू आ गये.

अवी-चाचजी आप रो रहे है

चाचा-नही. जब भी पुराने दिन याद करता हूँ तो रोना आता है

अवी-चाची कहती है पुराने दिनो को याद करके रोने की जगह आज को इतना स्पेशल बनाओ कि पुराने दिन याद ना आए

चाचा-सुमन ने कहा होगा

अवी-आपको कैसे पता

चाचा-सुमन को मुझसे अच्छे से कौन जान सकता है.

अवी-तो आप पुराने दिन भूल जाइए और कल के बारे मे सोचिए

चाचा-इस आम के बगीचे को देखता हूँ तो पुराने दिन याद आते है.

अवी-इसमे मैं कुछ नही कर सकता.

चाचा-एक दिन तो मैं इनको काटने वाला था पर मेरे हाथ मेरा साथ नही दे रहे थे

अवी-अपने बचपन को काटना आसान नही होता.

चाचा-सही कहा .चलो तुम्हें एक खास जगह दिखाता हूँ.

अवी-खास जगह.

चाचा-जहाँ हमने अपने बचपन को क़ैद किया है

और चाचा मुझे आम के बगीचे मे ले गये.

आम के बगीचे के बीचो बीच एक बड़ा आम का पेड़ था.

चाचजी मुझे उस आम के पेड़ के पास ले गये.

अवी-चाची जी यहाँ क्या खास बात है

चाचा-ये पहला पेड़ था जो हम भाई बहनों ने मिलके लगाया था.

अवी-बीच मे से शुरुआत की थी.

चाचा-पिताजी ने हमे एक आम का पौधा दिया और कहा कि खेत मे लगा दो .और हम ने खेत के बीचो बीच लगाया.

अवी-फिर तो दादाजी गुस्सा हुआ होगे

चाचा-नही. पिताजी को उस पेड़ मे हमारा प्यार नज़र आया. ये पेड़ हमारे प्यार का सबूत बन गया

अवी-तो आगे क्या हुआ.

चाचा-एक दिन ज़्यादा बारिश हो गयी और आम का पौधा झुक गया .पर टूटा नही.

अवी-फिर तो आपको बुरा लगा होगा.

चाचा-हाँ, नेहा बहुत रोई .और हम सब भी रोने लगे. तो पिताजी ने इस पेड़ को सहारा मिले इस लिए इस पेड़ के आजू बाजू मे आम के पेड़ लगा दिए. और हमारा लगाया हुआ पेड़ फिर से बड़ा होने लगा.

अवी-तो दादाजी ने इतना बड़ा आम का बगीचा बनाया

चाचा-नही. पहले छोटा था पर मैं ने और तुम्हारी चाची ने मिल के बड़ा आम का बगीचा बना दिया.

अवी-तो इस पेड़ के साथ आपकी यादे जुड़ी है

चाचा-हां, रूको तुम्हें कुछ और दिखाता हूँ.

और चाचा ने ज़मीन से 2 फीट उपर जो मिट्टी लगी थी पेड़ पर वो साफ की.

मैं भी चाचा की मदद करने लगा.

फिर चाचा ने पेड़ के बर्क को निकाल लिया.

ऐसा लगा कि ये बार्क नही तिजोरी का गेट हो

ये क्या बर्क निकालते ही पेड़ मे एक छोटा होल हो गया.

चाचा ने उस होल मे से बॉक्स निकाला .

मैं तो ये सब देखता रहा.

चाचजी ने उस बॉक्स को ओपन किया .

उस बॉक्स मे कुछ खिलोने रखे थे.

चाचा-अवी ये हमारे बचपन के खिलोने है जो हम ने यहाँ छुपा के रखे थे .

अवी-(इस तरह अपने बचपन की यादो को छुपा कर रखना ,कितना अच्छा लगता होगा जवान होने पे इस खिलोने को देख कर बचपन को याद करना.)

चाचा-अवी ये जो डॉल हैं ना ये पूजा की है. माँ ने अपने हाथो से पूजा के लिए बनाई थी.

अवी-और ये क्या है

चाचा-ये नेहा नीता की डॉल है. माँ ने दोनो को अलग अलग डॉल बनाकर दी थी तो नेहा नीता ने उनको आपस मे जोड़ दिया. जैसे वो जुड़वा थी वैसे उनकी डॉल जुड़वा बन गयी.

अवी-नेहा बुआ नीता बुआ मे बहुत प्यार था.

चाचा-था नही. आज भी है.एक को चोट लगती है तो दूसरी को दर्द होता है.

अवी-ये गन किस की है.

चाचा-ये मेरी गन थी. दीवाली पे पिताजी ने लेकर दी थी जब मुझे ये गन दी थी तब मैं इतना खुश हुआ था कि पूरे गाँव मे भाग कर दिखाने लगा.

अवी-ये कॉंपस बॉक्स किसका है

चाचा-ये तुम्हारे पापा का है. उनके पास होने पे हम सब ने कुछ पैसे बचा कर खरीदा था. तुम्हारा पापा कहते थे कि ये उनके लिए बेस्ट गिफ्ट था.

अवी-ये रिब्बिन, पेन्सिल, ये गोलियाँ ,ये रंगीन पत्थर ये सब आपके है

चाचा-ये हमारा पूरा बचपन है.

अवी-ये झुमके किसके है

चाचा-एक नेहा का है और एक नीता का है. दोनो ने अपना एक एक झुमका यहाँ रखा .और दूसरे झुमके को मिला के पूजा बुआ को दिया था.

अवी-यहाँ तो सब कुछ है.

चाचा-हम ने जितनी हो सके उतनी चीज़े यहाँ छुपाई थी.

अवी-ये राजेश खन्ना की फोटो

चाचा-ये नीता का है. नीता को राजेश खन्ना बहुत पसंद था. पता नही उसे ये राजेश खन्ना की औउटोग्राफ़ी वाली फोटो कहाँ से मिली थी , उसने संभाल के रखी थी .

अवी-बताया था बुआ ने कि उनको राजेश खन्ना कितना पसंद था. राजेश का नाम उन्ही के नाम पे रखा था.

चाचा-हाँ, नीता तो दीवानी थी राजेश खन्ना की ,जब उसको पता चला कि राजेश खन्ना की शादी हो चुकी है तो वो उस दिन बहुत रोई थी.

अवी-फिर क्या हुआ

चाचा-पिताजी ने नीता को ये कह के चुप कराया कि उसकी शादी राजेश खन्ना के बेटे से कराएँगे. और वो मान गयी पगली.

अवी-आपके बचपन की बातें मज़ेदार है

चाचा-किसी को बताना मत

अवी-नही बताउन्गा.

चाचा-मैं ने आज तक किसी को इसके बारे मे नही बताया .पता नही क्यूँ पर आज तुम्हें बता दिया.

अवी-मैं किसिको नही बताउन्गा.

और चाचा जी ने बॉक्स वापस छुपा दिया . और उस जगह से मिट्टी से छुपा दिया.

और इधर उधर देखने लगे कि कोई है तो नही.

चाचा-तुम्हें एक और बात दिखाता हूँ.

और चाचा जी मुझे उसी पेड़ के दूसरी तरफ लेकर गये.

और पत्तियॉं को हटा कर मुझे पेड़ पे लिखे हुए उनके नाम दिखाने लगे

चाचा-ये हमारा फॅमिली ट्री जैसा है.

अवी-फॅमिली ट्री

चाचा-देखो उपर पिताजी और माँ का नाम है.

अवी-हाँ है. ये आपने लिखा.

चाचा-भैया ने लिखा.ये उनका आइडिया था ,हर जेनरेशन अपना नाम लिखेंगी यहाँ पर

अवी-आपके नाम कहाँ है

चाचजी ने दादाजी के नाम के नीचे की जगह साफ की .

चाचा-ये देखो हमारा नाम

अवी-जयसिंघ (मेरे पिताजी)

पूजा

नेहा

नीता

छोटू

चाचा-ये देखा क्या किया पूजा नेहा नीता मे

अवी-आपके नाम की जगह छोटू क्यूँ लिखा है

चाचा-ये उनकी मस्ती है इसी लिए उनको दीदी नही कहता.

अवी-पर हुआ क्या था आपने लिखने कैसे दिया

चाचा-एक एक कर के सब अपना नाम लिख रहे थे. जब मेरी बारी आई तो मुझे पेशाब लगी. मैं पेशाब करने गया था कि पूजा ने यहाँ छोटू लिख दिया.

अवी-आपने चेंज क्यूँ नही किया.

चाचा-मुझे पता नही था कि छोटू लिखा है. पूजा ने कहा कि उसने मेरा नाम लिख दिया है. और मैं बिना देखे घर चला गया.

अवी-आपको कब पता चला

चाचा-1 महीना हम खेत मे आए नही. और जब आकर देखा तो नाम पर्मनेट हो गया था .उस दिन मैं ने पूजा से बात नही की. माँ ने पूजा को बहुत डाटा था.

अवी-हसी, मज़ाक, रतना मानना, छेड़छाड़, हसना ,रोना ,सब कुछ था आपके बचपन मे

चाचा-हाँ, वो पल आज भी याद आते है.

अवी-चाचा जी हम इसी पेड़ के नीचे जनमदिन मनाए तो कैसा रहेगा.

चाचा-पुराने दिन याद आएँगे और सब भावुक हो जाएँगे, इस लिए यहा जनमदिन नही मना सकते

अवी-आज आपके बचपन के बारे मे सुनकर अच्छा लगा.

चाचा-मुझे भी अच्छा लगा तुम्हें अपने दिल की बातें बता कर .चलो अब

अवी-हाँ चलते है

चाचा ने अपने बचपन की यादो को फिर से छुपा दिया .

हमारा बचपन चाचा जितना मज़ेदार नही था पर कुछ सालो से हम भी अपने बचपन को खुल के जी रहे थे .
 
चॅप्टर 934

चाचा ने मुझे अपने बचपन की बातें बता कर अच्छा किया.

मैं एक बात तो समझ गया कि मेरी पापा ,चाचा और बुआ मे बहुत प्यार था

मैं जो सोच रहा था कि पापा ने ग़लत किया होगा वो मे बी रॉंग हो.

इतनी जल्दी रिज़ल्ट पे नही आना चाहिए. क्या पता कुछ और बात हो.

मुझे पूरा सच पता करना होगा.

रानी के प्रॉमिस के वजह से मैं चाची से पूछ नही सकता.

सीमा चाची, नीता बुआ और चाचा ये तीनो मेरी बातों मे फस सकते है.

पर अब ये तीनो को फिर से बॉटल मे उतरना आसान नही होगा.

ऐसा क्या करूँ कि मुझे अपने माँ और पापा के बारे मे पता चल जाए.

ठाकुरजी से पूछ कर देखता हूँ. वो दादाजी के दोस्त है उनको ज़रूर पता होगा.

कल वो फंक्षन मे आएँगे तब पूछ लूँगा.

चाचा की बचपन की यादो से बाहर निकल कर हम खेत मे आ गये.

चाचा-अवी तुम देख लो कि कुछ कमी तो नही है.

अवी-मुझे तो सब ठीक लग रहा है.जो कुछ रह गया होगा को कल देख लेंगे

चाचा-वो तो सही कहा. जो कमियाँ है वो कल पता चलेगी.फिर भी तुम्हें एक बार पूरा प्लान बता देता हूँ

बगीचे मे जो जगह साफ की वहाँ हम जनमदिन मनाएँगे. वहाँ तुम्हारी चाची और बुआ के खाना बनाने का इंतज़ाम भी कर दिया है. बारिश होने पे पेड़ो पे कपड़ा लगाने का इंतज़ाम भी है.

यहाँ खेत मे गाँव के लोगो के लिए खाना बनेगा. और घर3 के पास जो जगह बनाई है वाहा पर गाँव वालो को खाना देंगे.

अवी-ये तो बढ़िया रहेगा. पर पहले तो हमे मंदिर जाना होगा.

चाचा-पहले नही. तुम्हारी चाची और बुआ के खाना बनाने के बाद उसे प्लेट मे रख कर बच्चो के साथ मंदिर मे जाएँगे. वहाँ पूजा करके वापस बगीचे मे आकर केक काट लेंगे और हम दावत शुरू करेंगे. हमारी दावत होते गाँव वालो की दावत शुरू कर देंगे

दावत होते ही लोगो को गिफ्ट देंगे.

अवी-अच्छा प्लान है. मैं राज और राजेश को बोल के कल सुबह पूरे गाँव मे बता दूँगा.

चाचा-ये ठीक रहेगा मैं तो बिज़ी रहूँगा.

अवी-ये तो स्वेता दीदी आ रही है इधर

चाचा-लगता है बगीचे को देखने आई है.

स्वेता दीदी पूरी गॅंग के साथ हमारे पास आ गयी. उनके साथ ज्योति बुआ भी थी.

ज्योति बुआ को देखते मुझे गुस्सा आया पर ज्योति बुआ खुश हो गयी चाचा को देख कर

अवी-दीदी आप सब यहाँ कैसे

स्वेता दीदी-हम तो खेत और बगीचा देखने आए है.

रानी-दीदी यहाँ जनमदिन मनाने मे मज़ा आएगा.

कोमल-बहुत मज़ा आएगा.

सीतल दीदी-चलो बगीचे मे घूमते है

राजेश-भैया चलो पेड़ो पे चढ़ कर इनको तंग करते है.

कविता-हम तुम्हें तंग करेंगे.

चाचा-अवी इनको बगीचे मे घुमा कर लाओ

ज्योति बुआ-मैं और नही चल सकती

पूनम दीदी ने अजीब नज़रों से ज्योति बुआ की तरफ देखा

अवी-आप पैदल चलना

चाचा-वो अकेली कहाँ घूमेंगी. आप मेरे साथ चलो ये मैं आपको साड़ी दिखाता हूँ जो कल गाँव वालों को दी जाएगी

रानी-गाँव वालो को गिफ्ट देना .अच्छा आइडिया है.

ज्योति बुआ-मैं तो साड़ी देखना पसंद करूँगी. तुम सब बगीच मे घूम लो

मुझे ज्योति बुआ की बातों से दाल मे कुछ काला है ऐसा लग रहा है.

ज्योति बुआ की स्माइल से मैं समझ गया कि चाचा और उनका अलग प्लान होगा.

स्वेता दीदी-चलो हम सब बगीचे मे चलते है.

मुझे तो ज्योति बुआ और चाचा पे नज़र रखनी थी पर स्वेता दीदी की वजह से मुझे बगीचे मे जाना होगा.

पूनम दीदी बगीचे मे जाते हुए बार बार पीछे मूड कर अपनी मम्मी की तरफ देख रही थी.

पर मैं कुछ नही कर सकता था.

मुझे अपने भाई बहनों के जाना पड़ा.

चाचा ज्योति बुआ के साथ घर3 मे चले गये.

यहा इतने लोगो के होते हुए वो कुछ नही कर पाएँगे.

हम बगीचे मे आकर पेड़ो ठंडी ठंडी छाँव के नीचे मस्ती करने लगे.

उधर पता नही चाचा क्या कर रहे होगे.

मैं यहाँ अपनी बहनों के साथ हूँ पर मेरा दिमाग़ चाचा के बारे मे सोचने लगा.

एक बार जाकर देख लेता तो चैन आ जाता.

अभी चाचा अपने बचपन की बातें बता कर कितने अच्छे बने हुए थे.

और ज्योति बुआ के आते ही मस्ती मे आ गये.

चाचा को समझना मुश्किल है.

मेरी बहनें और भाई अलग अलग ग्रूप बना रहे थे.

अचानक पूनम दीदी ने लुक्काछुप्पी खेलने का प्लान बनाया.

ये तो बढ़िया हो गया. इस बहाने से मैं एक चक्कर चाचा की तरफ मार सकता हूँ.

पूनम दीदी का प्लान सबको अच्छा लगा.

मैं ने राजेश को कोपचे मे लिया.

अवी-राजेश तू मेरा एक काम करेगा.

राजेश-आप बोलिए मैं कर दूँगा.

अवी-लुक्काछुप्पी मे तू सबको ढूँढना .और 2 3 बार पकड़ा जाना

राजेश-पर क्यूँ?

अवी-मुझे एक काम से घर जाना है. तुम सबको बिज़ी रखना मैं जल्दी जाकर आउन्गा.

राजेश-आप सबको बता भी सकते है.

अवी-चुपके से काम हो रहा है तो बता कर मज़ा खराब नही करना चाहिए

राजेश-ठीक है मैं 30 मिनिट तक उनको बिज़ी रखूँगा. बार बार पकड़ा जाउन्गा.

पूनम दीदी का गेम सुनते सब खेलने को तैयार हुए .पर पहले कौन सबको ढूंढेगा.

राजेश-मैं ढूंढेगा .तुम सब छुप जाओ

राजेश की बात सुनते ही सब इधर उधर भागने लगे. और राजेश 20 तक गिनती गिन ने लगा.

मैं घर3 के तरफ छुपाने चला गया.

पहले मैं छुप कर एक बार सब को देख लेता हूँ.

राजेश ने 20 तक काउंट किए और हमको ढूँढ ने लगा.

राजेश काफ़ी टाइम ले रहा था.

राजेश-1 राज

2स्वेता दीदी

3 रानी

4 कविता

और लीना ने पीछे से आकर राजेश को पकड़ लिया .

सब खुश हो गये और छुपने चले गये. राजेश फिर से 20 तक काउंट करने लगा.

ये तो राजेश संभाल लेगा. मैं चाचा को देख लेता हूँ.

मैं घर3 की तरफ आ गया.

आगे से जाना टिक नही होगा. मैं पीछे से जाता हूँ .अगर पीछे की खिड़की खुली मिल गयी तो काम हो जाएगा.

मैं घर3 के पीछे जाने लगा. जैसे मैं घर3 के पीछे गया तो मुझे वहाँ पूनम दीदी दिखी.

पूनम दीदी यहाँ क्या कर रही है.

पूनम दीदी घर3 की खिड़की से अंदर देख रही थी.

इस का मतलब ज्योति बुआ और चाचा पे सिर्फ़ मुझे शक नही है पूनम दीदी को भी शक है.

मैं वही से छुप कर पूनम दीदी को देखने लगा.

पूनम दीदी को चाचा और ज्योति बुआ के बारे मे पता है तो वो छुपी क्यूँ है.

पूनम दीदी को ज्योति बुआ से बात करके रोकना चाहिए था.

इसी लिए पूनम दीदी ने लुक्काछुप्पि खेलने का प्लान बनाया ताकि यहाँ आ सके.

पर चाचा कितने बड़े ईडियट है. खिड़की खुली रख दी. मैं मेले मे यहाँ रुका था तो एक दिन भी खिड़की ओपन नही की थी.

चाचा मे खुद अपने लिए खड्डा खोद लिया

ये क्या पूनम दीदी तो शो देख कर गरम हो रही है.

पूनम दीदी ने अपना एक हाथ सलवार मे डाल दिया.

पूनम दीदी ये क्या कर रही है. अपनी माँ को रोकने की जगह खुद शो देख कर मज़े कर रही है

इसमे पूनम दीदी को दोष नही है. चाचा और ज्योति बुआ के शो के बारे मे सोच कर मेरा लंड खड़ा हुआ तो पूनम दीदी को लाइव देख रही है.

पूनम दीदी अपनी सलवार को गीला करना शुरू कर दिया था

पूनम दीदी अपनी माँ की चुदाई देख कर उंगली कर रही थी और मैं पूनम दीदी को उंगली करता हुआ देख रहा था.

पूनम दीदी फिर यहाँ आई क्यूँ थी. शो देखने या ज्योति बुआ को पकड़ने ,पता नही क्या चक्कर है.

पर मुझे कुछ करना होगा. चाचा को ज्योति बुआ से दूर रखना होगा.

पर ये क्या पूनम दीदी ने अपनी पैंटी गीली कर दी.

पानी निकलते ही पूनम दीदी होश मे आ गयी.

पूनम दीदी ने इधर उधर देखा और वहाँ से बगीचे मे भाग गयी.

मुझे पूनम दीदी से बात करनी होगी.

पहले देख तो लूँ अंदर क्या चल रहा था. मैं खिड़की के पास आकर अंदर देखने लगा.

अंदर तो अलग खेल चल रहा था.

चाचा चेयर पे बैठ कर अपने लंड को साफ कर रहे थे .

ज्योति बुआ बावरची का काला मोटा लंड चूस रही थी.

ज्योति बुआ पूरी नंगी थी. कम से कम कपड़े पहन कर करती .कोई आता तो सम्भल जाती पर ये तो नंगी है.

हलवाई भी नंगा होकर अपने काले शरीर से ज्योति बुआ के गोरे बदन को मसल रहा था.

चाचा कपड़े पहने हुए थे .पर ज़िप से लंड बाहर निकाला था.

पता नही किसने ज्योति बुआ की चुदाई की होगी.

चाचा ने अपने दोस्त हलवाई के साथ ज्योति बुआ को शेयर किया.

पर ज्योति बुआ मान कैसे गयी.

इसका जवाब मुझे मिल गया.

हलवाई का लंड चाट कर ज्योति बुआ चाचा के पास गयी और अपना हाथ आगे किया.

चाचा ने एक 1000 रुपये की गड्डी ज्योति बुआ के हाथ मे रख दी.

पैसो के लिए काले गेंडा से चुदाई की ज्योति बुआ ने.

और चाचा अपने दोस्त के लिए लाखों रुपये ज्योति बुआपे उड़ा रहे है.

ऐसे तो चाचा जल्दी रोड पे आ जाएँगे

मुझे कुछ करना होगा. मुझे चाची को बताना होगा.

कल का दिन ,बच्चो का जनम दिन होते ही मैं चाची को बता दूँगा.

ज्योति बुआ पैसे लेकर अपने कपड़े पहने लगी और हलवाई अपनी लंगोट पहनने लगा.

मुझे पहले पूनम दीदी से बात करनी होगी फिर चाची को बता दूँगा.

मैं ने ज्योति बुआ के कपड़े पहनते हुए चाचा के साथ फोटो ली.

और वापस बगीचे मे चला गया.

राजेश ने अच्छे से मेनेज किया था.

मैं वापस आते ही पूनम दीदी के एक्सपेस्षन देखने लगा.सब नॉर्मल दिख रहा था.

मैं अब कुछ करूँगा तो कल के फंक्षन की वाट लगेगी.

मुझे एक दिन रुकना होगा.

पर इस बार मैं चाची को ज़रूर बताउन्गा.

और मैं थोड़ी देर अपने भाई बहनों के साथ खेलने लगा.

फिर हम वापस खेत मे आ गये.

ज्योति बुआ खुश दिख रही थी

एक तो अपना पानी निकाला और 1 लाख रुपये मिले.

आज खुश हो ले कल के बाद ज्योति बुआ रोएंगी.

पूनम दीदी ने ज्योति बुआ से कोई बात नही की .

इनका क्या चक्कर है वो देखना होगा.

थोड़ी देर बाद हम सब घर आ गये.

ज्योति बुआ 1 घंटे मे लखपती बन कर आ गयी.
 
चॅप्टर 935

मुझे ज्योति बुआ पे नज़र रखनी होगी.

वरना चाचा पूरे पैसे और अपने बच्चों का समय ज्योति बुआ पे बर्बाद करेंगे.

आज तो मैं ने फोटो निकाल ली .कल का फंक्षन हो जाने दो फिर देखता हूँ ज्योति बुआ को.

पिछली बार चाची की डेलिवरी के समय मैं ने उनको दूर किया था.

लेकिन मेले के समय मैं ने ज्योति बुआ और चाचा पे ज़्यादा ध्यान नही दिया .पता नही मेले मे क्या क्या किया होगा चाचा ने,

लेकिन इस बार मैं ऐसा वैसा कुछ नही होने दूँगा.

इस बार अगर चाचा और ज्योति बुआ ने फिर अपनी लिमिट क्रॉस की तो मैं चाची को सब कुछ बता दूँगा.

लेकिन मुझे पहले अपने बच्चो के बारे मे सोचना होगा.

कल उनका जनमदिन ऐसे मनाना है कि पूरा गाँव याद रखे.

कल का दिन बड़ा था. और मुझे कल बहुत काम करना होगा. अभी सो लेता हूँ कल जल्दी उठना होगा.

मैं तो सो गया .पर चाची अपने माता पिता के साथ बातें कर रही थी.

उनकी बातें तो चलती रहेगी इतने दिनो बाद जो मिले हैं

पर चाचा को इस बात से कुछ लेना नही था. चाचा ने बड़ी चाची को अपने कमरे मे बुला लिया.

सबको लगा था कि बड़ी चाची के माता पिता सीधा फंक्षन मे आएँगे .पर वो एक दिन पहले आ गये .जिस से बड़ी चाची खुश थी

बड़ी चाची को अपनी माँ से बहुत सी बातें करनी थी पर चाचा को इन सब से कुछ लेना नही था .चाचा ने बड़ी चाची अपने कमरे मे सोने के लिए बुला लिया.

बड़ी चाची को बुरा लगा कि वो अपनी माँ से बातें करते हुए जाना पड़ा.

मैं तो पहले ही सो गया था.

सुबह अलार्म की आवाज़ सुनकर मैं जल्दी उठ गया .

चाची देर से सोने के बाद भी जल्दी उठ कर अपने काम मे लग गयी थी.

मेहमान तो सो रहे थे पर हम उनके उठने से पहले काम मे लग गये.

रानी, कोमल ,स्वेता दीदी सुबह सुबह चाची की मदद करने के लिए आ गयी.

रानी को चाची की मदद करते हुए देख कर मुझे अच्छा लगा.

मैं ने मौका देख कर रानी को छत पे बुला लिया.

रानी-क्या है. ऐसे बीच मे क्यूँ बुलाया .मुझे काम को बीच मे छोड़ कर आना पड़ा.

अवी-तुम बदल गयी हो. पहले की तरह प्यार करने वाली रानी नही रही.

रानी-मैं वही रानी हूँ , पर तुम सिचुयेशन तो देखो.

अवी-पहले भी ऐसी सिचुयेशन थी पर तुम तब भी मुझे प्यार करने के लिए टाइम निकालती थी

रानी-क्या मैं सच मे बदल गयी हूँ

अवी-हाँ

रानी-मैं ऐसा तो नही चाहती थी ,ये क्या हो गया.

अवी-वही तो क्या हो गया तुम्हें

रानी-मैं पहले जैसी बनने की कोशिस करूँगी. तुम मेरा साथ दोगे.

अवी-(प्लान कामयाब हुआ अब तो रानी खुद टाइम निकालेगी मेरे लिए)मैं जब कहूँ तब प्यार करने के लिए टाइम निकाला करो

रानी-जैसा तुम कहोगे वैसा ही कहूँगी.

अवी-तो एक किस दो

रानी ने इधर उधर देखा और मुझे किस किया.

रानी-अब मैं जा सकती हूँ.

अवी-आइ लव यू

रानी-आइ लव यू टू

अवी-तुम्हारी मम्मी कब आ रही है

रानी-मम्मी जल्दी आएँगी. अब मुझे जाना चाहिए चाची को मदद करनी है

अवी-खूब मदद करना. चाची को कोई काम मत करने देना.

रानी-मैं कोमल और स्वेता दीदी पूरा काम कर लेगी.

रानी को ऐसे एमोशनल करना पड़ता है. ताकि वो और पर्फेक्ट हो जाए.

रानी तो चाची की मदद कर लेगी ,मुझे अपने काम करना होगा.

राजेश-भैया आप कहाँ थे ,कब से आपको ढूँढ रहा था.

अवी-मैं फ़ोन पे बात कर रहा था ,

राजेश-मेरे लिए कोई काम है

अवी-तुम राज के साथ जाकर गाँव के लोगो को इन्वाइट करो

राजेश-भैया मुझे यहाँ कौन पहचानता है. आप राज को विद्या दीदी के साथ भेज दो वो बतादेगी

अवी-तू भी साथ मे जाना .

राज-भैया मैं तो फोटो लूँगा.

अवी-फोटो दोपेहर मे लेना है. सुबह सबको इन्वाइट कर दो

राजेश-राज चल मेरे साथ

राजेश को उसका काम बता कर मैं चाचा के पास चला गया

चाचा अभी नींद से उठे थे ,

तो मैं मेहमानो के साथ बातें करने लगा.

सीमा चाची की माँ उनकी तरह मज़किया थी ,अपनी बातों से सबको हसा रही थी

छोटी चाची की माँ की एज ज़्यादा नही थी. वो छोटी चाची की तरह संदर थी

छोटी चाची की सौतेली बहनों से ज़्यादा बातें नही हुई. वो छोटी चाची के साथ चिपकी हुई रहती थी.

बड़ी चाची के माता पिता ज़मींदार थे जिस से वो उस हिसाब से बातें कर रहे थे

ओवरऑल सबसे साथ बातें करके अच्छा लगा.

उनको बारे मे जानना मेरे बारे मे बताना मज़ेदार था

पिछली बार जो हुआ था उसकी वजह से सीमा चाची की माँ मुझसे अच्छे से बात कर रही थी.

रानी और कोमल ने सबके लिए नाश्ता लाया.

नाश्ता करते हुए बातें करने का सिलसिला लंबा चला.

हमारे नाश्ता करने तक बुआ तैयार होके हमारे यहाँ आ चुकी थी.

साथ मे रानी की मम्मी नेहा बुआ के साथ आ गयी .

नेहा बुआ ने आंटी को पहले अपने यहाँ बुलाया था .वहाँ कुछ देर रुकने के बाद रानी की मम्मी हमारे यहाँ आ गयी

रानी की मम्मी के आते ही चाची ने उनका स्वागत उन्ही के अंदाज़ मे किया.

चाची को सबका ध्यान रखना था फिर भी वो रानी की मम्मी का पूरा ध्यान रख रही थी

रानी की मम्मी रानी को काम करते हुए, चाची के मूह से तारीफ सुनकर खुश हो गयी.

चाची ने नेहा बुआ को आंटी का ध्यान रखने को कहा.

और हम ज़रूरत का समान खेतो मे ले जाने को जमा कर रहे थे

चाचा तैयार होते ही हॉल मे आ गये.

ज्योति बुआ ने आज सेक्सी साड़ी पहनी थी. अपनी नाभि खुल के सबको दिखा रही थी

मुझे तो लगा चाचा हॉल मे आते ही ज्योति बुआ को देखेंगे पर ऐसा नही हुआ.

चाचा ने ज्योति बुआ की तरफ देखा भी नही .सीधे बच्चो को प्यार करने लगे.

ज्योति बुआ को इस बात पे गुस्सा आया. इतनी हॉट बनके आने पर चाचा ने उनकी तरफ देखा भी नही.

मुझे चाचा के इस रूप को देख कर झटका लगा. चाचा बच्चों को प्यार कर रहे थे. और चाची को पूछ रहे थे कि काम कैसा चल रहा है.

ज्योति बुआ की तरफ चाचा ने देखा भी नही

कल मैं ने जिस चाचा को देखा जो ज्योति बुआ की चुदाई कर रहे थे वो आज ज्योति बुआ की तरफ देख भी नही रहे थे

मैं तो चाचा के ऐसा करने से खुश था पर कन्फ्यूज़ हो गया कि मुझे चाची को चाचा के बारे मे बताना चाहिए कि नही.

आज तो सब ठीक ठाक दिख रहा था .

चाचा काफ़ी देर तक बच्चो को प्यार करते रहे.

फिर चाची को बता कर खेतो मे चले गये. मुझे सबको खेतो मे लाने का काम सोपा गया.

ज्योति बुआ का चेहरा देखने लायक था .वो इतना गुस्सा हुई कि पूजा बुआ से की माँग कर घर चली गयी.

मैं ने उनका पीछा किया तो देखा वो पूजा बुआ के घर जा रही थी .अच्छा हुआ चाचा खुद ज्योति बुआ से दूर रह रहे है

मैं सबको खेत मे ले जाने का इंतज़ाम करने लगा.

मेहमान और समान खेत मे ले जाना था.

अच्छा हुआ रानी की मम्मी कार लेकर आ गयी.

अवी-आंटी आप से एक काम था

रानी की मम्मी-क्या काम था

अवी-आपकी कार चाहिए

रानी की मम्मी-ये लो की ,

कार मिलते ही मैं पहले अपनी बहनों को खेत मे के गया.साथ मे डिकी मे समान भी ले जाने लगा.

मेले की वजह से हमारे खेत तक जाने के लिए अच्छा रोड बन गया था.

मैं एक एक करके सबको खेत मे ले जाने लगा.

पूरे मेहमानों को ले जाने के बाद बुआ ,फिर चाची को लेकर खेत मे आ गया.

लास्ट चक्कर मे पूनम दीदी ,विद्या और बच्चो का समान रह गया था.

अवी-दीदी चलें

पूनम दीदी-हां चलो

अवी-ज्योति बुआ कहाँ रह गयी उनको ही जाना बाकी है

पूनम दीदी-उनके सर मे दर्द है वो बाद मे आ जाएगी

अवी-आप को कैसे पता

पूनम दीदी-मैं देख कर आई हूँ. वो पूजा मामी के घर पे सो रही है.

अवी-(चलो अच्छा है ज्योति बुआ दूर रहेगी तो चाचा फंक्षन पे ध्यान देंगे.) मैं उनको बाद मे लेने आउन्गा.

और हम बाकी का समान लेकर और पूनम दीदी के साथ खेत मे आ गया.

बगीचे मे रानी कोमल ने काम करना शुरू किया था.

चाची के साथ हर कोई काम कर रहा था.

मदद तो करनी पड़ती है. हम एक फॅमिली जो है.

चाचा जी चाची के पिताजी के साथ बैठ कर उनकी मेहमान नवाज़ी कर रहे थे.

राज सबकी फोटो निकाल रहा था.

कविता लीना सबको जो लग रहा था वो लाके दे रही थी.

सीतल दीदी पूनम दीदी बच्चो का ध्यान रख रही थी.

मैं और राजेश घर3 से समान लाके दे रहे थे .

सब कुछ कितना अच्छा लग रहा था.

पूरी फॅमिली को एक दूसरे की मदद करते हुए देखना कितना अच्छा लग रहा था.

फॅमिली मे जो प्यार था वो देख कर बड़ी चाची खुश दिख रही थी.

पूजा बुआ को सबको एक साथ एक छत के नीचे देख कर ,अपनी ज़िम्मेदारी पूरी कर रही थी.

चाचा जी जिस तरह इस फंक्षन मे सबके साथ थे उसके वजह से हमारी खुशिया बढ़ गयी.

ज्योति बुआ के खूबसूरती को ठुकरा कर चाचा ने अच्छा किया.

उनके इस फ़ैसले से मैं सोचने पे मज़बूर हो गया कि मुझे छोटी चाची को बताना चाहिए कि नही.

देखते है अगर आगे कुछ हुआ तो मैं अपना कदम उठा लूँगा

लेकिन अब तो फॅमिली टाइम है.

हम काम करते हुए मस्ती मज़ाक करने लगे.
 
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