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फ्लॅशबॅक 967
जयसिंघ ने अपनी परेशानी शालिनी को बता दी
शालिनी को सोचने के लिए टाइम चाहिए था
प्राब्लम ऐसा था कि शालिनी बिना सोचे समझे कुछ नही कर पाएगी
शालिनी ऐसा रास्ता ढूँढने का सोच रही थी की सब खुश हो जाएँ
उस के लिए शालिनी को टाइम चाहिए था क्यूँ कि ज़्यादा सोचेगी तो उसका असर बच्चे पे होगा
लेकिन शालिनी को एक बात अच्छी लगी
इस 1 हफ्ते मे सारी फॅमिली खुश थी
जयसिंघ सिर्फ़ अपने ख़यालो मे डूबा था
सवाल उसके बच्चे का था
एक साथ पूरी फॅमिली मिलकर मस्ती करते हुए हसीन दिन एंजाय करने लगे.
साथ मे सुबा नाश्ता करना ,दिन भर बाते करते हुए हसी मज़ाक करना ,एक दूसरे को छेड़ छाड़ करना .
कभी नेहा नीता के झगड़े तो कभी छोटू को परेशान करना.
पिताजी अपनी फॅमिली को हँसता हुआ देख कर खुश थे .
पिताजी को लगा कि पूरी फॅमिली फिर से एक साथ रहेगी.उनका पोता या पोती आएगी
पिताजी तो चाहते थे कि उसकी बेटियाँ शादी करके इसी गाँव मे रहे .वो अपनी बेटियो को अपनी आँख के सामने देखना चाहते थे.पर ऐसा थोड़ी होता है
पूजा के आने की बात सुनते ही पिताजी खुश हो गये
क्यूँ कि पूजा अपने पति के साथ एक साल के लिए यहाँ रहने वाली थी.ये खबर तो पिताजी के लिए नये जनम जैसी खुशी लेकर आई थी
पूजा यहाँ रहेगी इस से ज़्यादा पिताजी को क्या चाहिए था
पूजा के पति रमेश को उसके शहर2 वाली कंपनी ने 1 साल के लिए वापस शहर वाली कंपनी मे भेजा था.
पिताजी को ये बात अच्छी लगी कि ,कंपनी के बहाने क्यूँ ना हो, उसकी बेटी गाँव मे आती रहेगी.
पूजा शहर भी रह सकती है और गाँव मे भी. काश नेहा और नीता के लिए ऐसा लड़का मिल जाए.तो कितना अच्छा होगा.
जयसिंघ तो बहुत कम आता था पर पूजा महीने मे एक बार ज़रूर आती थी.और इस बार तो 1 साल केलिए आ रही थी.
पिताजी अपने फॅमिली के बारे में सोच रहे थे कि जयसिंघ अपने पिताजी के पास आ गया.
जयसिंघ-पिताजी मुझे आप से बात करनी है.
पिताजी-हाँ कहो
जयसिंघ-मुझे वापस जाना है.
पिताजी-क्यूँ ?
जयसिंघ- एक इंपॉर्टेंट काम छोड़ कर आया हूँ
पिताजी- अपने बच्चे से ज़्यादा इंपॉर्टेंट है
जयसिंघ- बच्चा होने मे बहुत टाइम है तब तक यहाँ नही रुक सकता
पिताजी- मुझे कुछ नही सुनना है
जयसिंघ-पिताजी मेरी बात तो सुनिए
पिताजी-मैं ने क्या कहा तुम ने सुना नही.
जयसिंघ-पिताजी शालिनी यही रहेंगी बस मैं जा रहा हूँ.
पिताजी-तो ऐसा बोलना ,तुझे जाना है तो जा पर बहू यही रहेगी.
जयसिंघ-पर पिताजी वहाँ मेरा घर है मेरी कंपनी है.
पिताजी-तो ये क्या है,क्या है घर नही है.मतलब हम तेरे लिए कुछ नही है.
जयसिंघ-मेरा ये कहने का मतलब नही था.
पिताजी-तू क्या कहना चाहता है ये पता है मुझे, तू यहाँ से जा सकता है पर बहू कहीं नही जाएगी.
जयसिंघ-आप जैसा कह रहे है वैसा ही होगा.
पिताजी-कब जा रहे हो .
जयसिंघ-शाम को निकल रहा हूँ.
पिताजी-पूजा के आने तक रुक जाता
जयसिंघ-जाना ज़रूरी है.पिछली बार शादी के समय ज़्यादा दिन रुकने से कंपनी लॉस मे चल रही है , वरना मैं रुक जाता
पिताजी- सच बोल रहा है
जयसिंघ- शादी के बाद 9 महीने रुका था ना मैं यहाँ पर
पिताजी-ठीक है. तू जा सकता है , शालिनी की चिंता मत करना हम है यहाँ पर , और मैं तुझे हर हफ्ते खत भेज दूँगा
जयसिंघ- जी पिताजी
जयसिंघ अपने पिता के सामने कुछ नही बोल पाया.
पिताजी को भी गुस्सा आ रहा था. सब अच्छा चल रहा था ये अचानक क्या हो गया .
पिताजी ने अपना गुस्सा कभी बाहर आने ही नही दिया , हमेशा शांति से काम लेते थे
पर बाद मे पिताजी अपना गुस्सा शांत करने के लिए ठाकुर से मिलने चले गये . ठाकुरजी ने पिताजी का गुस्सा कम करने के लिए एक लड़की को पिताजी के सामने खड़ा कर दिया.
पिताजी उस लड़की की गुस्से मे ऐसी चुदाई करने लगे कि वो लड़की बेहोश हो गयी.
ठाकुरजी को पता था कि पिताजी चुदाई करके शांत हो जाएँगे ,वैसा ही हुआ पिताजी ने अपना गुस्सा वीर्य मे निकाल कर ठंड कर दिया.
पिताजी दिन भर वही ठाकुरजी की हवेली पे रुक गये .
इधर घर पे जयसिंघ भी परेशन था कि वो अपनी बीवी को शहर3 कैसे ले जाएगा .
जयसिंघ वैसे ही सोचते हुए दोपेहर मे सो गया .और शालिनी अपनी ननंद के साथ इस सब से दूर खेत देखने गयी.
खेत देख कर शालिनी खुश थी.नेहा और नीता अपनी भाभी को खेत के बारे में बताने लगी. भाभी को 1 हफ्ते मे पूरा गाँव दिखा दिया.
खेत देखने के बाद जब शालिनी घर आई तो जयसिंघ को परेशान देख कर उनके पास चली गयी.
शालिनी-क्या हुआ
जयसिंघ-कुछ नही,
शालिनी-पिताजी से बात हुई
जयसिंघ- हाँ
शस्लिनी- पिताजी ने क्या कहा
जयसिंघ- मैं उनको बता कर थक गया कि यहाँ गाँव मे क्या रखा है. शहर3 चलते है. पर वो मेरी बात सुनते ही नही.
शालिनी-गाँव मे पिताजी अपना बचपन ,जवानी और बाकी की ज़िंदगी बिताना चाहते है
जयसिंघ-पर वो मुझ से इतनी उम्मीद क्यूँ रखते है
शालिनी-उनको लगता है कि आप उनके बाद उनका नाम आगे बढ़ाएँगे ,मेले मे पूजा करोगे
जयसिंघ-वो शहर3 मे रह कर भी तो किया जा सकता है.
शालिनी-आप दोनो एक जैसे हो, आप शहर3 पे रुके हो और पिताजी गाँव पर पता नही मेरा क्या होगा. मेरे बच्चे का क्या होगा.
जयसिंघ-वो शहर3 मे रहेगा.
शालिनी-अगर बेटा हुआ तो पिताजी जाने नही देंगे
जयसिंघ-ऐसे कैसे जाने नही देंगे ,मैं भी देखता हूँ
शालिनी-आप शांत हो जाइए ,इस पे बाद मे बात करेंगे, मैं हल ढूँढ लूँगी
जयसिंघ-क्या बाद मे ,तुम भी सुन लो अगर तुमने सल्यूशन नही ढूँढ निकाला तो हम तुम्हारी डेलिवरी होते ही शहर3 जाएँगे
शालिनी-आप जहाँ रहेंगे मैं वही रहूंगी ना,आपकी बीवी हूँ मैं
जयसिंघ-पिताजी का क्या है ,वो छोटू पे ध्यान देने की जगह मेरी ज़िंदगी मे टाँग अड़ा रहे है.
शालिनी-बड़े भाई होने के नाते आपको छोटू को सुधारना चाहिए
जयसिंघ-मैं तो उसे अच्छा बना दूँगा. शहर3 ले जाने को तय्यार हूँ पर पिताजी है कि एक बात नही सुनते मेरी, मैं ने छोटू के लिए भी बहुत कुछ सोचा था पर क्या हुआ किसी ने मेरा साथ नही दिया
शालिनी-शहर3 ले जाने के बाद क्या करते
जयसिंघ-जाने दो उस बात को , वो पुरानी बात है
शालिनी- शाम हो रही है ,आपका समान पॅक कर देती हूँ ,आपको जाना भी तो है
जयसिंघ-तुम भी गाँव मे दिल ना लगा लेना ,हम अच्छे थे शहर3 मे ,जाने दो ,अपना ख़याल रखना, मैं ने क्या बताया था याद है ना कुछ भी हुआ तो पूजा से बात करना उसको पता है इन सब के बारे में
शालिनी-नेहा और नीता है मेरा ख़याल रखने के लिए
जयसिंघ-वो दोनो है तो मैं बेफिकर रह सकता हूँ
शालिनी-हाँ ,दोनो कितना खुश रखती है मुझे ,दोनो की शादी के बाद पता नही इतना हसी मज़ाक कर पाएँगे कि नही
जयसिंघ-शादी ,अभी तो वो बच्ची है.
शालिनी-उनकी शादी की उमर हो गयी है
जयसिंघ-तुम कह तो सही रही हो, उनकी शादी के लिए लड़का देखना होगा .पता नही पिताजी कैसा लड़का ढूंढ़ेंगे
शालिनी-पूजा का पति तो अच्छा है
जयसिंघ-वो पूजा ने खुद सेलेक्ट किया था
शालिनी-लव मॅरेज थी
जयसिंघ-कुछ ऐसा ही, दोनो मिले ,एक दूसरे को पसंद किया और जीजाजी सीधे घर आ गये
शालिनी-क्या मतलब
जयसिंघ-सुबह देखा, दोपेहर मे बाते की ,और शाम मे वो घर पे आए पिताजी से बात करने
शालिनी-क्या था ये
जयसिंघ-ऐसा ही हुआ था. एक दिन मे प्यार और शादी भी फिक्स हो गयी.
शालिनी-अच्छे से बताइए ना
जयसिंघ-परसो पूजा आ रही है उसी से पूछ लेना मुझे जाना है
शालिनी-थोड़ा बताइएना वरना मुझे नींद नही आएगी
जयसिंघ-पूजा अच्छे से बताएगी, उसी से पूछ लेना .मुझे जाना है लंबा सफ़र है ,
शालिनी-ठीक है पूजा से पूछूंगी,( वैसे पिताजी ने बताया तो था पर पूजा की कहानी वही अच्छे से बता सकती है ,क्यूँ की उसकी शादी के अलग क़िस्से थे पिताजी ने कुछ और बताया था , माँ ने कुछ अलग ही बताया था अब पूजा से पूछूंगी )
जयसिंघ ने अपनी परेशानी शालिनी को बता दी
शालिनी को सोचने के लिए टाइम चाहिए था
प्राब्लम ऐसा था कि शालिनी बिना सोचे समझे कुछ नही कर पाएगी
शालिनी ऐसा रास्ता ढूँढने का सोच रही थी की सब खुश हो जाएँ
उस के लिए शालिनी को टाइम चाहिए था क्यूँ कि ज़्यादा सोचेगी तो उसका असर बच्चे पे होगा
लेकिन शालिनी को एक बात अच्छी लगी
इस 1 हफ्ते मे सारी फॅमिली खुश थी
जयसिंघ सिर्फ़ अपने ख़यालो मे डूबा था
सवाल उसके बच्चे का था
एक साथ पूरी फॅमिली मिलकर मस्ती करते हुए हसीन दिन एंजाय करने लगे.
साथ मे सुबा नाश्ता करना ,दिन भर बाते करते हुए हसी मज़ाक करना ,एक दूसरे को छेड़ छाड़ करना .
कभी नेहा नीता के झगड़े तो कभी छोटू को परेशान करना.
पिताजी अपनी फॅमिली को हँसता हुआ देख कर खुश थे .
पिताजी को लगा कि पूरी फॅमिली फिर से एक साथ रहेगी.उनका पोता या पोती आएगी
पिताजी तो चाहते थे कि उसकी बेटियाँ शादी करके इसी गाँव मे रहे .वो अपनी बेटियो को अपनी आँख के सामने देखना चाहते थे.पर ऐसा थोड़ी होता है
पूजा के आने की बात सुनते ही पिताजी खुश हो गये
क्यूँ कि पूजा अपने पति के साथ एक साल के लिए यहाँ रहने वाली थी.ये खबर तो पिताजी के लिए नये जनम जैसी खुशी लेकर आई थी
पूजा यहाँ रहेगी इस से ज़्यादा पिताजी को क्या चाहिए था
पूजा के पति रमेश को उसके शहर2 वाली कंपनी ने 1 साल के लिए वापस शहर वाली कंपनी मे भेजा था.
पिताजी को ये बात अच्छी लगी कि ,कंपनी के बहाने क्यूँ ना हो, उसकी बेटी गाँव मे आती रहेगी.
पूजा शहर भी रह सकती है और गाँव मे भी. काश नेहा और नीता के लिए ऐसा लड़का मिल जाए.तो कितना अच्छा होगा.
जयसिंघ तो बहुत कम आता था पर पूजा महीने मे एक बार ज़रूर आती थी.और इस बार तो 1 साल केलिए आ रही थी.
पिताजी अपने फॅमिली के बारे में सोच रहे थे कि जयसिंघ अपने पिताजी के पास आ गया.
जयसिंघ-पिताजी मुझे आप से बात करनी है.
पिताजी-हाँ कहो
जयसिंघ-मुझे वापस जाना है.
पिताजी-क्यूँ ?
जयसिंघ- एक इंपॉर्टेंट काम छोड़ कर आया हूँ
पिताजी- अपने बच्चे से ज़्यादा इंपॉर्टेंट है
जयसिंघ- बच्चा होने मे बहुत टाइम है तब तक यहाँ नही रुक सकता
पिताजी- मुझे कुछ नही सुनना है
जयसिंघ-पिताजी मेरी बात तो सुनिए
पिताजी-मैं ने क्या कहा तुम ने सुना नही.
जयसिंघ-पिताजी शालिनी यही रहेंगी बस मैं जा रहा हूँ.
पिताजी-तो ऐसा बोलना ,तुझे जाना है तो जा पर बहू यही रहेगी.
जयसिंघ-पर पिताजी वहाँ मेरा घर है मेरी कंपनी है.
पिताजी-तो ये क्या है,क्या है घर नही है.मतलब हम तेरे लिए कुछ नही है.
जयसिंघ-मेरा ये कहने का मतलब नही था.
पिताजी-तू क्या कहना चाहता है ये पता है मुझे, तू यहाँ से जा सकता है पर बहू कहीं नही जाएगी.
जयसिंघ-आप जैसा कह रहे है वैसा ही होगा.
पिताजी-कब जा रहे हो .
जयसिंघ-शाम को निकल रहा हूँ.
पिताजी-पूजा के आने तक रुक जाता
जयसिंघ-जाना ज़रूरी है.पिछली बार शादी के समय ज़्यादा दिन रुकने से कंपनी लॉस मे चल रही है , वरना मैं रुक जाता
पिताजी- सच बोल रहा है
जयसिंघ- शादी के बाद 9 महीने रुका था ना मैं यहाँ पर
पिताजी-ठीक है. तू जा सकता है , शालिनी की चिंता मत करना हम है यहाँ पर , और मैं तुझे हर हफ्ते खत भेज दूँगा
जयसिंघ- जी पिताजी
जयसिंघ अपने पिता के सामने कुछ नही बोल पाया.
पिताजी को भी गुस्सा आ रहा था. सब अच्छा चल रहा था ये अचानक क्या हो गया .
पिताजी ने अपना गुस्सा कभी बाहर आने ही नही दिया , हमेशा शांति से काम लेते थे
पर बाद मे पिताजी अपना गुस्सा शांत करने के लिए ठाकुर से मिलने चले गये . ठाकुरजी ने पिताजी का गुस्सा कम करने के लिए एक लड़की को पिताजी के सामने खड़ा कर दिया.
पिताजी उस लड़की की गुस्से मे ऐसी चुदाई करने लगे कि वो लड़की बेहोश हो गयी.
ठाकुरजी को पता था कि पिताजी चुदाई करके शांत हो जाएँगे ,वैसा ही हुआ पिताजी ने अपना गुस्सा वीर्य मे निकाल कर ठंड कर दिया.
पिताजी दिन भर वही ठाकुरजी की हवेली पे रुक गये .
इधर घर पे जयसिंघ भी परेशन था कि वो अपनी बीवी को शहर3 कैसे ले जाएगा .
जयसिंघ वैसे ही सोचते हुए दोपेहर मे सो गया .और शालिनी अपनी ननंद के साथ इस सब से दूर खेत देखने गयी.
खेत देख कर शालिनी खुश थी.नेहा और नीता अपनी भाभी को खेत के बारे में बताने लगी. भाभी को 1 हफ्ते मे पूरा गाँव दिखा दिया.
खेत देखने के बाद जब शालिनी घर आई तो जयसिंघ को परेशान देख कर उनके पास चली गयी.
शालिनी-क्या हुआ
जयसिंघ-कुछ नही,
शालिनी-पिताजी से बात हुई
जयसिंघ- हाँ
शस्लिनी- पिताजी ने क्या कहा
जयसिंघ- मैं उनको बता कर थक गया कि यहाँ गाँव मे क्या रखा है. शहर3 चलते है. पर वो मेरी बात सुनते ही नही.
शालिनी-गाँव मे पिताजी अपना बचपन ,जवानी और बाकी की ज़िंदगी बिताना चाहते है
जयसिंघ-पर वो मुझ से इतनी उम्मीद क्यूँ रखते है
शालिनी-उनको लगता है कि आप उनके बाद उनका नाम आगे बढ़ाएँगे ,मेले मे पूजा करोगे
जयसिंघ-वो शहर3 मे रह कर भी तो किया जा सकता है.
शालिनी-आप दोनो एक जैसे हो, आप शहर3 पे रुके हो और पिताजी गाँव पर पता नही मेरा क्या होगा. मेरे बच्चे का क्या होगा.
जयसिंघ-वो शहर3 मे रहेगा.
शालिनी-अगर बेटा हुआ तो पिताजी जाने नही देंगे
जयसिंघ-ऐसे कैसे जाने नही देंगे ,मैं भी देखता हूँ
शालिनी-आप शांत हो जाइए ,इस पे बाद मे बात करेंगे, मैं हल ढूँढ लूँगी
जयसिंघ-क्या बाद मे ,तुम भी सुन लो अगर तुमने सल्यूशन नही ढूँढ निकाला तो हम तुम्हारी डेलिवरी होते ही शहर3 जाएँगे
शालिनी-आप जहाँ रहेंगे मैं वही रहूंगी ना,आपकी बीवी हूँ मैं
जयसिंघ-पिताजी का क्या है ,वो छोटू पे ध्यान देने की जगह मेरी ज़िंदगी मे टाँग अड़ा रहे है.
शालिनी-बड़े भाई होने के नाते आपको छोटू को सुधारना चाहिए
जयसिंघ-मैं तो उसे अच्छा बना दूँगा. शहर3 ले जाने को तय्यार हूँ पर पिताजी है कि एक बात नही सुनते मेरी, मैं ने छोटू के लिए भी बहुत कुछ सोचा था पर क्या हुआ किसी ने मेरा साथ नही दिया
शालिनी-शहर3 ले जाने के बाद क्या करते
जयसिंघ-जाने दो उस बात को , वो पुरानी बात है
शालिनी- शाम हो रही है ,आपका समान पॅक कर देती हूँ ,आपको जाना भी तो है
जयसिंघ-तुम भी गाँव मे दिल ना लगा लेना ,हम अच्छे थे शहर3 मे ,जाने दो ,अपना ख़याल रखना, मैं ने क्या बताया था याद है ना कुछ भी हुआ तो पूजा से बात करना उसको पता है इन सब के बारे में
शालिनी-नेहा और नीता है मेरा ख़याल रखने के लिए
जयसिंघ-वो दोनो है तो मैं बेफिकर रह सकता हूँ
शालिनी-हाँ ,दोनो कितना खुश रखती है मुझे ,दोनो की शादी के बाद पता नही इतना हसी मज़ाक कर पाएँगे कि नही
जयसिंघ-शादी ,अभी तो वो बच्ची है.
शालिनी-उनकी शादी की उमर हो गयी है
जयसिंघ-तुम कह तो सही रही हो, उनकी शादी के लिए लड़का देखना होगा .पता नही पिताजी कैसा लड़का ढूंढ़ेंगे
शालिनी-पूजा का पति तो अच्छा है
जयसिंघ-वो पूजा ने खुद सेलेक्ट किया था
शालिनी-लव मॅरेज थी
जयसिंघ-कुछ ऐसा ही, दोनो मिले ,एक दूसरे को पसंद किया और जीजाजी सीधे घर आ गये
शालिनी-क्या मतलब
जयसिंघ-सुबह देखा, दोपेहर मे बाते की ,और शाम मे वो घर पे आए पिताजी से बात करने
शालिनी-क्या था ये
जयसिंघ-ऐसा ही हुआ था. एक दिन मे प्यार और शादी भी फिक्स हो गयी.
शालिनी-अच्छे से बताइए ना
जयसिंघ-परसो पूजा आ रही है उसी से पूछ लेना मुझे जाना है
शालिनी-थोड़ा बताइएना वरना मुझे नींद नही आएगी
जयसिंघ-पूजा अच्छे से बताएगी, उसी से पूछ लेना .मुझे जाना है लंबा सफ़र है ,
शालिनी-ठीक है पूजा से पूछूंगी,( वैसे पिताजी ने बताया तो था पर पूजा की कहानी वही अच्छे से बता सकती है ,क्यूँ की उसकी शादी के अलग क़िस्से थे पिताजी ने कुछ और बताया था , माँ ने कुछ अलग ही बताया था अब पूजा से पूछूंगी )