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मैं और मेरा परिवार

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फ्लॅशबॅक 967

जयसिंघ ने अपनी परेशानी शालिनी को बता दी

शालिनी को सोचने के लिए टाइम चाहिए था

प्राब्लम ऐसा था कि शालिनी बिना सोचे समझे कुछ नही कर पाएगी

शालिनी ऐसा रास्ता ढूँढने का सोच रही थी की सब खुश हो जाएँ

उस के लिए शालिनी को टाइम चाहिए था क्यूँ कि ज़्यादा सोचेगी तो उसका असर बच्चे पे होगा

लेकिन शालिनी को एक बात अच्छी लगी

इस 1 हफ्ते मे सारी फॅमिली खुश थी

जयसिंघ सिर्फ़ अपने ख़यालो मे डूबा था

सवाल उसके बच्चे का था

एक साथ पूरी फॅमिली मिलकर मस्ती करते हुए हसीन दिन एंजाय करने लगे.

साथ मे सुबा नाश्ता करना ,दिन भर बाते करते हुए हसी मज़ाक करना ,एक दूसरे को छेड़ छाड़ करना .

कभी नेहा नीता के झगड़े तो कभी छोटू को परेशान करना.

पिताजी अपनी फॅमिली को हँसता हुआ देख कर खुश थे .

पिताजी को लगा कि पूरी फॅमिली फिर से एक साथ रहेगी.उनका पोता या पोती आएगी

पिताजी तो चाहते थे कि उसकी बेटियाँ शादी करके इसी गाँव मे रहे .वो अपनी बेटियो को अपनी आँख के सामने देखना चाहते थे.पर ऐसा थोड़ी होता है

पूजा के आने की बात सुनते ही पिताजी खुश हो गये

क्यूँ कि पूजा अपने पति के साथ एक साल के लिए यहाँ रहने वाली थी.ये खबर तो पिताजी के लिए नये जनम जैसी खुशी लेकर आई थी

पूजा यहाँ रहेगी इस से ज़्यादा पिताजी को क्या चाहिए था

पूजा के पति रमेश को उसके शहर2 वाली कंपनी ने 1 साल के लिए वापस शहर वाली कंपनी मे भेजा था.

पिताजी को ये बात अच्छी लगी कि ,कंपनी के बहाने क्यूँ ना हो, उसकी बेटी गाँव मे आती रहेगी.

पूजा शहर भी रह सकती है और गाँव मे भी. काश नेहा और नीता के लिए ऐसा लड़का मिल जाए.तो कितना अच्छा होगा.

जयसिंघ तो बहुत कम आता था पर पूजा महीने मे एक बार ज़रूर आती थी.और इस बार तो 1 साल केलिए आ रही थी.

पिताजी अपने फॅमिली के बारे में सोच रहे थे कि जयसिंघ अपने पिताजी के पास आ गया.

जयसिंघ-पिताजी मुझे आप से बात करनी है.

पिताजी-हाँ कहो

जयसिंघ-मुझे वापस जाना है.

पिताजी-क्यूँ ?

जयसिंघ- एक इंपॉर्टेंट काम छोड़ कर आया हूँ

पिताजी- अपने बच्चे से ज़्यादा इंपॉर्टेंट है

जयसिंघ- बच्चा होने मे बहुत टाइम है तब तक यहाँ नही रुक सकता

पिताजी- मुझे कुछ नही सुनना है

जयसिंघ-पिताजी मेरी बात तो सुनिए

पिताजी-मैं ने क्या कहा तुम ने सुना नही.

जयसिंघ-पिताजी शालिनी यही रहेंगी बस मैं जा रहा हूँ.

पिताजी-तो ऐसा बोलना ,तुझे जाना है तो जा पर बहू यही रहेगी.

जयसिंघ-पर पिताजी वहाँ मेरा घर है मेरी कंपनी है.

पिताजी-तो ये क्या है,क्या है घर नही है.मतलब हम तेरे लिए कुछ नही है.

जयसिंघ-मेरा ये कहने का मतलब नही था.

पिताजी-तू क्या कहना चाहता है ये पता है मुझे, तू यहाँ से जा सकता है पर बहू कहीं नही जाएगी.

जयसिंघ-आप जैसा कह रहे है वैसा ही होगा.

पिताजी-कब जा रहे हो .

जयसिंघ-शाम को निकल रहा हूँ.

पिताजी-पूजा के आने तक रुक जाता

जयसिंघ-जाना ज़रूरी है.पिछली बार शादी के समय ज़्यादा दिन रुकने से कंपनी लॉस मे चल रही है , वरना मैं रुक जाता

पिताजी- सच बोल रहा है

जयसिंघ- शादी के बाद 9 महीने रुका था ना मैं यहाँ पर

पिताजी-ठीक है. तू जा सकता है , शालिनी की चिंता मत करना हम है यहाँ पर , और मैं तुझे हर हफ्ते खत भेज दूँगा

जयसिंघ- जी पिताजी

जयसिंघ अपने पिता के सामने कुछ नही बोल पाया.

पिताजी को भी गुस्सा आ रहा था. सब अच्छा चल रहा था ये अचानक क्या हो गया .

पिताजी ने अपना गुस्सा कभी बाहर आने ही नही दिया , हमेशा शांति से काम लेते थे

पर बाद मे पिताजी अपना गुस्सा शांत करने के लिए ठाकुर से मिलने चले गये . ठाकुरजी ने पिताजी का गुस्सा कम करने के लिए एक लड़की को पिताजी के सामने खड़ा कर दिया.

पिताजी उस लड़की की गुस्से मे ऐसी चुदाई करने लगे कि वो लड़की बेहोश हो गयी.

ठाकुरजी को पता था कि पिताजी चुदाई करके शांत हो जाएँगे ,वैसा ही हुआ पिताजी ने अपना गुस्सा वीर्य मे निकाल कर ठंड कर दिया.

पिताजी दिन भर वही ठाकुरजी की हवेली पे रुक गये .

इधर घर पे जयसिंघ भी परेशन था कि वो अपनी बीवी को शहर3 कैसे ले जाएगा .

जयसिंघ वैसे ही सोचते हुए दोपेहर मे सो गया .और शालिनी अपनी ननंद के साथ इस सब से दूर खेत देखने गयी.

खेत देख कर शालिनी खुश थी.नेहा और नीता अपनी भाभी को खेत के बारे में बताने लगी. भाभी को 1 हफ्ते मे पूरा गाँव दिखा दिया.

खेत देखने के बाद जब शालिनी घर आई तो जयसिंघ को परेशान देख कर उनके पास चली गयी.

शालिनी-क्या हुआ

जयसिंघ-कुछ नही,

शालिनी-पिताजी से बात हुई

जयसिंघ- हाँ

शस्लिनी- पिताजी ने क्या कहा

जयसिंघ- मैं उनको बता कर थक गया कि यहाँ गाँव मे क्या रखा है. शहर3 चलते है. पर वो मेरी बात सुनते ही नही.

शालिनी-गाँव मे पिताजी अपना बचपन ,जवानी और बाकी की ज़िंदगी बिताना चाहते है

जयसिंघ-पर वो मुझ से इतनी उम्मीद क्यूँ रखते है

शालिनी-उनको लगता है कि आप उनके बाद उनका नाम आगे बढ़ाएँगे ,मेले मे पूजा करोगे

जयसिंघ-वो शहर3 मे रह कर भी तो किया जा सकता है.

शालिनी-आप दोनो एक जैसे हो, आप शहर3 पे रुके हो और पिताजी गाँव पर पता नही मेरा क्या होगा. मेरे बच्चे का क्या होगा.

जयसिंघ-वो शहर3 मे रहेगा.

शालिनी-अगर बेटा हुआ तो पिताजी जाने नही देंगे

जयसिंघ-ऐसे कैसे जाने नही देंगे ,मैं भी देखता हूँ

शालिनी-आप शांत हो जाइए ,इस पे बाद मे बात करेंगे, मैं हल ढूँढ लूँगी

जयसिंघ-क्या बाद मे ,तुम भी सुन लो अगर तुमने सल्यूशन नही ढूँढ निकाला तो हम तुम्हारी डेलिवरी होते ही शहर3 जाएँगे

शालिनी-आप जहाँ रहेंगे मैं वही रहूंगी ना,आपकी बीवी हूँ मैं

जयसिंघ-पिताजी का क्या है ,वो छोटू पे ध्यान देने की जगह मेरी ज़िंदगी मे टाँग अड़ा रहे है.

शालिनी-बड़े भाई होने के नाते आपको छोटू को सुधारना चाहिए

जयसिंघ-मैं तो उसे अच्छा बना दूँगा. शहर3 ले जाने को तय्यार हूँ पर पिताजी है कि एक बात नही सुनते मेरी, मैं ने छोटू के लिए भी बहुत कुछ सोचा था पर क्या हुआ किसी ने मेरा साथ नही दिया

शालिनी-शहर3 ले जाने के बाद क्या करते

जयसिंघ-जाने दो उस बात को , वो पुरानी बात है

शालिनी- शाम हो रही है ,आपका समान पॅक कर देती हूँ ,आपको जाना भी तो है

जयसिंघ-तुम भी गाँव मे दिल ना लगा लेना ,हम अच्छे थे शहर3 मे ,जाने दो ,अपना ख़याल रखना, मैं ने क्या बताया था याद है ना कुछ भी हुआ तो पूजा से बात करना उसको पता है इन सब के बारे में

शालिनी-नेहा और नीता है मेरा ख़याल रखने के लिए

जयसिंघ-वो दोनो है तो मैं बेफिकर रह सकता हूँ

शालिनी-हाँ ,दोनो कितना खुश रखती है मुझे ,दोनो की शादी के बाद पता नही इतना हसी मज़ाक कर पाएँगे कि नही

जयसिंघ-शादी ,अभी तो वो बच्ची है.

शालिनी-उनकी शादी की उमर हो गयी है

जयसिंघ-तुम कह तो सही रही हो, उनकी शादी के लिए लड़का देखना होगा .पता नही पिताजी कैसा लड़का ढूंढ़ेंगे

शालिनी-पूजा का पति तो अच्छा है

जयसिंघ-वो पूजा ने खुद सेलेक्ट किया था

शालिनी-लव मॅरेज थी

जयसिंघ-कुछ ऐसा ही, दोनो मिले ,एक दूसरे को पसंद किया और जीजाजी सीधे घर आ गये

शालिनी-क्या मतलब

जयसिंघ-सुबह देखा, दोपेहर मे बाते की ,और शाम मे वो घर पे आए पिताजी से बात करने

शालिनी-क्या था ये

जयसिंघ-ऐसा ही हुआ था. एक दिन मे प्यार और शादी भी फिक्स हो गयी.

शालिनी-अच्छे से बताइए ना

जयसिंघ-परसो पूजा आ रही है उसी से पूछ लेना मुझे जाना है

शालिनी-थोड़ा बताइएना वरना मुझे नींद नही आएगी

जयसिंघ-पूजा अच्छे से बताएगी, उसी से पूछ लेना .मुझे जाना है लंबा सफ़र है ,

शालिनी-ठीक है पूजा से पूछूंगी,( वैसे पिताजी ने बताया तो था पर पूजा की कहानी वही अच्छे से बता सकती है ,क्यूँ की उसकी शादी के अलग क़िस्से थे पिताजी ने कुछ और बताया था , माँ ने कुछ अलग ही बताया था अब पूजा से पूछूंगी )
 
फ्लश बॅक 968

जयसिंघ शालिनी को गाँव मे छोड़ कर शहर3 चला गया.

शालिनी जयसिंघ के जाने से थोड़ी उदास हो गयी .पर नेहा नीता के होते हुए उनकी भाभी उदास रहे ये हो नही सकता.

नेहा-भाभी आपके बारे में बताइए ना ,शहर3 मे आप कैसे रहती है

शालिनी-शहर3 के बारे में मत पूछ.

नेहा-क्यू? भैया तो बहुत तारीफ करते रहते है शहर3 की

शालिनी-उनको ही पसंद है. मुझे तो गाँव मे रहना पसंद है. बचपन से गाँव मे रह चुकी हूँ तो शहर3 की हवा मे दम घुटने लगता है

नीता-फिर भैया कैसे रह लेते है

शालिनी-उनके दोस्त है ना ,उनके साथ तुम्हारे भैया को रहना पसंद है. मैं तो घर मे अकेली बोर हो जाती हूँ.

नेहा-अच्छा हुआ हम भैया के साथ शहर3 नही गये

शालिनी-उतना भी बुरा नही होता, मैं अकेली रह जाती हूँ इस लिए अछा नही लगता .पूजा को देखो उसके घर मे उसकी सास है,स्वेता सीतल है.

नेहा-आप के घर मे भी तो नया मेहमान आने वाला है

शालिनी-उसकी वजह से तुम्हारे भैया और पिताजी लड़ते रहते है. एक कहता है शहर3 मे चलो दूसरे कहते है गाँव मे रहो. पता नही मेरे बच्चे के दुनिया मे आने के बाद क्या होगा

नीता-हम है ना भाभी,हम उसको इतना प्यार देंगे कि आप सब परेशानी से दूर हो जाओगी

नेहा-हाँ, भाभी उसको हम प्यार की कोई कमी नही होने देंगे

शालिनी-तुम दोनो पर मुझे पूरा विश्वास है.पर ये क्या हर बार मेरी बाते करती रहती हो,

नेहा-फिर बात करने के लिए कुछ बचा ही क्या है

शालिनी-तुम्हारे भैया कल पूजा के बारे में बता रहे थे

नेहा-क्या बताया

शालिनी-उसकी शादी कैसे हुई, पर पूरी बात बताने से पहले शहर3 चले गये.तुम बताओ पूजा की शादी कैसे हुई

नेहा-हमे भी पूरी बात नही पता, कल दीदी आएँगी तो पूछ लेंगे

शालिनी-क्या मतलब तुम्हें नही पता. तुम्हें तो पूजा ने बताया होगा. तुम्हारे सामने शादी हुई

नीता-हाँ हमारे सामने शादी हुई ,पर हमे ज़्यादा पता नही है. दीदी हर बार बात को टाल देती है

नेहा-आप पूछना ,आपको ज़रूर बताएँगी.इसी बहाने से हमे भी पता चल जाएगा .

शालिनी-ठीक है पर तुम्हें मेरा साथ देना होगा.

नेहा-हम भी तो जान ना चाहते है कि पूजा दीदी ने इतने हॅंडसम जीजाजी को ढूँढा कैसे.

शालिनी-मतलब तुम्हें कुछ पता नही है.

नेहा-तब हम मामा के घर गये थे. और जब आए तो दीदी की सगाई चल रही थी . पिताजी तो मेरे लिए भी रुके नही थे ,, मुझे तो बहुत गुस्सा आया था पर पूजा दीदी ने कहा कि उन्हो ने ज़िद्द की थी जिस से पिताजी को हाँ करनी पड़ी

नीता-फिर क्या था , सगाई होते ही हम भी शादी मे लग गये. दीदी से पूछा था ,बस थोड़ी कहानी बताई कि जीजाजी ने अकेले 3 पहलवान को मार गिराया और सीधे दीदी से शादी के लिए पूछ लिया और दीदी ने हाँ कर दिया.

शालिनी-ठीक है.कल पूजा से पूछ लेंगे.वैसे ये छोटू कहाँ गया है.

नीता-अपने दोस्तो के साथ घूमने गया होगा.

शालिनी-दोस्तो के साथ ज़्यादा ही रहता है.

नेहा-उसके दोस्त तो आप से भी बड़े है.

नीता-जाने दो ,चलिए खाना खाते है

भाभी और ननंद की बाते ऐसे चलती रही.

माँ और पिताजी भी बहुत खुश थे ,बहू और अपनी बेटियो का प्यार देख कर

छोटू भी अपनी भाभी के लिए थोड़ा टाइम निकाल ही लेता था.

शालिनी को अपने सुसराल मे मायके जैसा प्यार मिल रहा था उसे कोई काम करने नही देता था.

शालिनी को ये बात अच्छी नही लगती थी वो अपना दिमाग़ लगा कर नेहा और नीता को बतो मे फसा कर काम कर ही लेती थी.

बहू के आने से माजी को लगा था कि उसकी इस हालत मे उनको ज़्यादा काम करना होगा.

पर नेहा और नीता किसी को कुछ करने नही देती थी. शालिनी और नेहा नीता बाते करते हुए खाना बना लेती थी.

आज तो रात का खाना शालिनी ने बनाया था. सब ने बहुत कॉसिश की शालिनी को खाना ना बनाने देने की ,पर शालिनी के आयेज सब हार गये. जिसका फल उनको एक स्वादिष्ट खाना खा कर मिला.

सब ने खाने की और शालिनी की तारीफ की.

खाना खाने के बाद नेहा और नीता अपने भाभी के कमरे मे जाकर बाते करने लगी.

माजी और पिताजी अपने कमरे मे चले गये. आज रात वो अपने कमरे मे सोएंगे ,कल से इस कमरे मे पूजा और जीजाजी रहेंगे.

माँ-सुनिए

पिताजी-मैं सुन रहा हूँ

माँ-अपनी बहू शहर3 जाकर थोड़ी भी नही बदली

पिताजी-हाँ, शालिनी जैसी बहू पाकर ऐसा लगता है कि एक बेटी मिली है.

माँ-मुझे तो लगता है बहू जय को बदल देंगी. वो जय को गाँव मे रहने के लिए मना लेगी

पिताजी-काश ऐसा हो ,जय गाँव मे कभी नही रहेगा, उसे पढ़ाई के लिए शहर3 भेज कर हम ने ग़लती की. वो शहर3 मे रह कर गाँव को भूल गया है. वहाँ की रंगीन दुनिया मे गाँव की हर्याली को भूल गया है.

माँ-मेरा दिल कहता है कि वो एक दिन गाँव मे ज़रूर आएगा

पिताजी-आना ही होगा. गाँव की मिट्टी उसे अपने से दूर नही रख पाएगी.और बहू पे हमे पूरा विश्वास है.शालिनी ने वादा किया है मुझसे

माँ-मैं सोच रही थी कि छोटू के लिए भी शालिनी जैसी लड़की देखेंगे

पिताजी-पहले नेहा और नीता की शादी करनी होगी. फिर छोटू का सोचेंगे ,

माँ-हाँ दोनो बड़ी हो गयी है. दामाद जी जैसा लड़का मिल जाए तो बेटियाँ शहर के साथ साथ गाँव मे भी रहेंगी.

पिताजी-मैं तो उनको गाँव मे ही रखूँगा ,लेकिन तुम्हारी बात भी सही है. पूजा महीने मे एक बार मिलने आती है. जयसिंघ भी आए तो मुझे उसके शहर3 रहने से प्राब्लम नही है. बहू और पोते को यही रहने दे और पास वाले शहर मे काम भी कर सकता है

माँ-सबके बारे में आप सोच रहे है .छोटू के बारे में कुछ सोचिए ना

पिताजी-उसका क्या है. एक साल और घूमने दो फिर अपने साथ खेत मे ले जाया करूँगा. और उसकी शादी ...वो ज़मींदार की बेटी सुमन को देखा है ना तुम ने

माँ-हाँ, अच्छी लड़की है

पिताजी-उसी को माँग लेंगे ,छोटू के लिए वही ठीक रहेगी

माँ-हाँ, वो छोटू को ठीक कर देगी.

पिताजी-जो होगा तब होगा पहले मुझे प्यार तो करने दो

माँ-आप फिर सुरू हो गये.

पिताजी-तुम्हारे बदन की गर्मी से मेरे अंदर ज्वाला मुखी फुट रहा है , अपने प्रेम रस से मेरे ज्वाला मुखी को शांत कर दो ,

माँ-हाँ ,अच्छे से जानती है. 27 साल से इसके नखरे देख रही हूँ. मेरी तो जान लेते हो हर रात को

पिताजी-कितना झूठ बोलती हो, तुम ही तो कहती हो और प्यार करो

माँ-क्यूँ ना कहूँ, आप जैसा पति किस्मत वालो को मिलता है. अब आइए जल्दी वरना मैं सो जाउन्गा

पिताजी-बिना प्यार किए सोने नही दूँगा

और माँ ने अपने कपड़े निकाल दिए ,

चूत को देखते ही पिताजी का लंड चूत मे जाने को झटके मारने लगा.

पिताजी ने अपनी पसंदीदा चूत मे लंड धीरे धीरे डालना सुरू किया.

पिताजी ने माँ के दूध को मसल्ते हुए अपना लंबा लंड धीरे धीरे पुश करना सुरू किया.

पिताजी हमेशा अपना आधा लंड पुश करके डालते थे .और बाकी का लंड झटका मार कर

माँ को इस लंड को अंदर लेने का 27 साल का एक्सपीरियेन्स था .

फिर भी पिताजी ने आधा लंड डालने के बाद झटका मार कर पूरा लंड अंदर डालते ही माँ की चीख निकल गयी.

माँ-मरररर गाइिईई,

पिताजी-कब से लंड ले रही हो और अभी भी चिल्लाति हो.

माँ-क्या करूँ, आप के लंड को खुश जो करना होता है. बस थोड़ी देर रुक जाइए.

पिताजी-तुम्हारे लिए तो ज़िंदगी भर रुक सकता हूँ

थोड़ी देर पिताजी रुक गये और माँ के दूध को चूसने लगे.

माँ-आप जादूगर हो,5 बच्चो को दूध पिला चुकी हूँ फिर भी आपके चूस्ते ही मज़ा आ जाता है.

पिताजी माँ के दूध को अपने हाथो से मसल्ते हुए चूस रहे थे

माजी-अब धक्के मारो

माँ की इजाज़त मिलते ही पिताजी धक्के मारने लगे.

पिताजी का लंड चूत मे अंदर बाहर हो रहा था.

माँ की चूत लंड के हर धक्के को खुशी खुशी झेल रही थी. ये चूत इसी लंड के लिए बनी हुई थी.

पिताजी धीरे धीरे धक्के मारते हुए माँ को उसका हक दे रहे थे.

भले ही पिताजी बाहर कितनी चूत मारते होगे पर माँ की चूत के जादू ने लंड को अपना दीवाना बना के रखा था.

माँ भी अपने प्यारे लंड को खुश करने के लिए अपनी गंद हिला कर उनका साथ दे रही थी

पिताजी तब तक धीरे धीरे धक्के मारते थे जब तक माँ उनको ज़ोर से धक्के मारने को ना कहे.

माँ शीष्कारी लेते हुए उनको ज़ोर से धक्के मारने को कहती ,और पिताजी खुशी खुशी उसका इन्विटेशन स्वीकार करते थे.

पिताजी धक्के मारने की गति बढ़ा कर चूत से पानी निकाल के काम मे लग गये.

पिताजी लगातार माँ की चूत मे धक्के मार रहे थे ,

और माँ अपनी चूत से पानी निकाल कर उनकी जीत हुई ये बता कर शीष्कारी लेती थी

शीष्कारी बाहर सुनाई ना दे इसका पूरा ख़याल रख कर शीष्कारी ले रही थी.

पिताजी आज धीरे धीरे चुदाई कर रहे थे क्यूँ कि बहू के साथ बेटियाँ अभी तक बाते कर रही थी.

लेकिन कुछ भी हो ,चुदाई मे दोनो को पूरा मज़ा मिल रहा था.

माँ की चूत ने इतने सालो मे खुद मे काफ़ी चेंज किए थे.

लंड के धक्को की पुरानी पहचान होने से चूत काफ़ी समय बाद पानी छोड़ती थी.

लेकिन पिताजी का लंड भी चूत को अच्छे से समझ चुका था.जिस से वो अपनी चुदाई मे 2 बार चूत से पानी निकाल ही देता था.

पिताजी अपने पहलवाना शरीर की ताक़त माँ के नाज़ुक बदन पर बराबर डालते थे

और पिताजी ने हमेशा की तरह माँ की चूत मे वीर्य डाल कर चुदाई को ख़तम कर दिया.

वीर्य निकालते ही पिताजी थक गये और वैसे ही माँ से चिपक कर सो गये
 
फ्लॅशबॅक 969

पूजा आज 1 साल के लिए अपने घर आ रही थी .साथ मे पूजा का पति रमेश और बच्चे भी आ रहे थे.

पूजा-उठो ना ,हमको गाँव जाना है

रमेश-सोने दो ना

पूजा-रात भर मस्ती करने को किसने कहा था.

रमेश-तुम्हें देखते ही खुद को रोक नही पाता

पूजा-तुम ने मुझे भी अपने जैसा बना दिया. 4 साल मे 2 बच्चो की माँ बना दिया

रमेश-मैं तो हर साल तुम्हें एक बच्चे की माँ बना ना चाहता हूँ

पूजा-आप को जितनी मस्ती करनी है करो ,पर 3 4 साल बाद फिर माँ बना देना. तब तक स्वेता सीतल भी बड़ी हो जाएगी.

रमेश-मुझे पता है. वो तो सीतल के वक्त ध्यान ही नही रहा

पूजा-जाने दीजिए, पर अब सिर्फ़ मस्ती करेंगे ,माँ कुछ साल बाद बना देना.

रमेश-जैसा तुम कहो,वैसे स्वेता सीतल काफ़ी है,मुझे बेटे का कोई लालच नही ,

पूजा-मुझे भी नही. पर एक बार फिर से माँ बन ना चाहती हूँ.

रमेश-तुम जब कहोगी तब बना दूँगा. पहले इसको प्यार तो करो

पूजा-मैं नही करने वाली ,मुझे तय्यारी भी करनी है.और तुम्हारी बहन

रमेश-फिर सुरू मत होना. हमारे जाने के बाद माँ की देख भाल करने के लिए ज्योति को बुलाया है

पूजा-सासुमा को उसके घर भी तो भेज सकते है.

रमेश-ज्योति को यहाँ रहना पसंद है. और जीजाजी भी तो आ रहे है

पूजा-ठीक है, चलिए उठ जाइए ,

रमेश-मैं तभी उठुंगा जब इसको(लंड) प्यार करोगी.

पूजा-आप ऐसे नही मानेंगे .

और पूजा ने अपने नाइटी मे हाथ डाल कर पैंटी निकाल दी

और रमेश के लंड पर बैठ गयी.

पूरा लंड एक झटके मे चूत मे लेकर पूजा चीखते हुए लंड पर बैठ गयी.

पूजा-माआ मरररर गयीइ ,फाड़ दीई

रमेश-किसने कहा एक झटके मे बैठने को

पूजा-आआहह मैंन्णणन् मररर्र्र्र्र्ररर रहियीईईईईईईईई हुउऊुुुुुुुुउउ और्र्र्र्र्र्ररर तुम हूऊऊऊऊ कीईईईईईईईईईईईई

रमेश-तुम ने खुद अपनी चूत पे लंड मार लिया है

पूजा-कुछ करो नाअ

रमेश-मेरे उपर झुक जाओ

पूजा रमेश के उपर झुक गयी और रमेश के होंटो पे किस करने लगी.

रमेश अपनी बीवी के दर्द को कम करने की पूरी कोशिश कर रहा था

रमेश का लंड पूजा की चूत मे दर्द पैदा कर रहा था ,और रमेश के होन्ट पूजा का दर्द कम कर रहे थे

पूजा घायल शेरनी की तरह रमेश के होंटो को चूस रही थी.

दोनो किस करने मे इतना खो गये कि लंड और चूत को भूल गये.

दोनो जैसे एक दूसरे के लिए बने थे ये उनके किस करने से दिख रहा था.

किस करते हुए रमेश ने पूजा की गंद को मसलना सुरू किया.

गंद को मसल्ने से पूजा को अपनी चूत मे लंड वापस फील होने लगा.

पूजा ने किस करना बंद किया और लंड पर बैठ कर रमेश की तरफ देखने लगी.

पूजा-तुम वैसे रहना, आज मैं तुम्हारी चुदाई करूँगी.

रमेश-ये किस खुशी मे कर रही हो

पूजा-क्यूँ कि आप मुझे गाँव लेकर जा रहे हो,

रमेश-अब समझा अपने दीवाने से मिलने के लिए मुझे खुश कर रही हो, क्या नाम था उसका राकेश

पूजा-आपको ऐसा लगता है ,जाइए मैं आप से बात नही करती.

रमेश-मैं तो मज़ाक कर रहा था.

पूजा-दुबारा ऐसा मज़ाक मत करना. वैसे राकेश ,वो तो मेरे इशारो पे नाचता है.

रमेश-तुम मेरे लंड मे नाचना सुरू करो

और पूजा ने रमेश के लंड पे नाचना सुरू किया

पूजा धीरे धीरे अपने दूध से भरे चुचो को पकड़ कर लंड पर उछलने लगी.

लंड पर उछलने मे पूजा को मज़ा आ रहा था. और अपनी पत्नी को मज़ा लेता हुआ देख कर रमेश खुश था.

कितना प्यार करती है पूजा उस से, पूजा का प्यार मिलते ही रमेश की तरक्की हो गयी थी.

पूजा से शादी करते ही उसे प्रमोशन मिल गया था ,

इस खुशी को रमेश और पूजा ने ऐसा सेलेब्रेट किया कि 2 बच्चे पैदा कर लिए.

पूजा मज़े लेते हुए रमेश के लंड पर उछलकर रमेश को खुश कर रही थी.

2 बेटी की माँ बन ने से पूजा थोड़ी मोटी हो गयी थी जिस से जो ज़्यादा देर लंड पर उछल नही पाई.

रमेश ने देख लिया कि पूजा हाफ़ रही है.

रमेश ने पूजा को अपने उपर झुकने को कहा और नीचे सेपूज़ा की चूत मे धक्के मारने लगा.

ऐसे धक्के मार रहा था कि पूजा आगे की तरफ सरक रही थी.

रमेश ने एक ऐसा धक्का मारा क़ी पूजा आगे मूव हो गयी. और उसके होंठ रमेश के होंटो से जा मिले

पूजा धक्के खाते हुए रमेश को किस कर रही थी.

पूजा के किस करने से रमेश जोश मे आकर धक्के मारने लगा.

कमरे मे पुतछ पुतछ की आवाज़ गूँज रही थी.

पूजा-रमेश और्र जोर्र्र मेरा निकलने वाला है

रमेश-मेरा भी निकलने वाला है

और रमेश ने ऐसे धक्के मारे ,ऐसे धक्के मारे कि दोनो का पानी निकल गया

दोनो अपना अपना पानी निकाल कर एक दूसरे से चिपक कर हाफ़ ने लगे.

रमेश पूजा को अपनी पत्नी बना कर खुश था.

उसका फ़ैसला सही था पूजा को अपनी पत्नी बनाने का,पहली नज़र मे प्यार हुआ था रमेश को पूजा से.

पूजा मे रमेश ने जो देखा था वो उस मिल गया था.

पूजा जितनी सेक्स की दीवानी थी उतनी ही घर के कामों मे भी महारत हाशील थी.

पूजा सेक्स करते हुए अपने पति को खुश करती थी .और घर के काम करके अपनी सास को

सिर्फ़ ज्योति को पूजा पसंद नही थी. क्यूँ कि पूजा के आने के बाद उसके भाई ने उसे पैसे देना बंद किया था.

ज्योति अपने पति के साथ उसी शहर मे रहती थी.उसके पति की पेमेंट ईएमआइ मे कट ने से ज्योति अपने भाई से पैसे मांगती थी.

रमेश खुशी खुशी अपनी बहन को पैसे देता था .

पर पूजा ने ज्योति को पैसे देने से मना किया था. रमेश ने दिमाग़ लगा कर दोनो को खुश रखा. प्रमोशन मे पेमेंट कम दिखा कर थोड़े पैसे वो अपनी बहन को देता था. पूजा को ये बात भी पता थी पर उसने रमेश को ज़्यादा परेशान नही किया.

पूजा अपने पति के साथ खुश थी.

खुश क्यूँ ना हो, हर रोज़ प्यार जो मिल रहा था, महीने मे एक बार पूजा को उसके गाँव लेकर जाता था.2 बच्चों की माँ जो बन गयी थी.इतना प्यारा घर मिल गया था. माँ जैसी सास मिली थी.

पूजा और रमेश प्यार करके एक दूसरे के बाहों मे आराम कर रहे थे

पूजा की सास-बहू बहू ,

पूजा-आई माजी

पूजा ने खुद को ठीक किया .और अपने काम मे लग गयी.

सीतल और स्वेता की तय्यारी कर के दी और गाँव जाने की तय्यारी करने लगी.

पूजा की सास- बेटी इतने दिन के लिए जाने की क्या ज़रूरत है

पूजा-माजी, इनकी कंपनी का काम है. इस लिए जा रही हूँ

पूजा की सास-रमेश को जाने दे ,तुम और बच्चे यही रुक जाओ

पूजा-वो हमारे गाँव के पास रहेंगे ,और गाँव नही जाएँगे तो पिताजी को बुरा लगेगा. मैं जाउन्गी तो हम मेरे घर मे रुक सकते है.

पूजा की सास- तेरी बात भी ठीक है ,पर बच्चों के बिना मन नही लगता

पूजा-ज्योति दीदी आ रही है अपने बच्चों के साथ.

पूजा की सास-स्वेता सीतल की बात अलग है

पूजा-मैं बीच बीच मे आती रहूंगी. और इनको काम जल्दी ख़तम करने को कहूँगी.

पूजा की सास-जल्दी आना

सुरेश-भाभी जी मैं अंदर आ सकता हूँ

पूजा-तुम्हें कब से पूछने की ज़रूरत पड़ी है.

सुरेश- भाभी मैं ने सुना कि आप भी गाँव जा रही है

पूजा-हाँ, वो भी पूरे 1 साल के लिए

सुरेश- मैं भी आपके गाँव आना चाहता हूँ पर इस बार रमेश को अकेले भेज दिया कंपनी मे

पूजा-सुनिए आपका दोस्त आया है. सुरेश आया है

रमेश फ्रेश होकर हॉल मे आ गया.

रमेश-अच्छा हुआ तू आ गया ,मैं तुझे बुलाने वाला था.

सुरेश- किस लिए

रमेश-हमे बस स्टॉप पर छोड़ देना ,समान कुछ ज़्यादा है.

सुरेश- कूली बना रहा है. कोई बात नही ,पर साले इस बार अकेले गाँव जा रहा है. बीवी मिली तो हमे भूल गया

रमेश-फॅमिली वाला हो गया हूँ

सुरेश- पिछली बार कितने मज़े किए थे भूल गया

रमेश-उसे कैसे भूल सकता हूँ. उसी की वजह से पूजा मिली .

सुरेश- तुझे तो मिल गयी ,मेरा भी कुछ सोच ना

रमेश-क्या मतलब

सुरेश- तेरी साली की बात कर रहा हूँ, नेहा ,मुझे वो अच्छी लगती है

रमेश-मैं कुछ नही करूँगा. जो करना है तू कर ,अगर मदद चाहिए तो वो कर सकता हूँ.

सुरेश- इस बार गाँव मे आता तो मैं खुद कुछ कर लेता

रमेश-तू मेरा दोस्त कम भाई ज़्यादा है. मैं कुछ करता हूँ. पूजा से बात करूँगा तुम्हारे बारे में

सुरेश-तुझे करना ही होगा. मैं ने माँ पिताजी को नेहा की फोटो भी दिखा दी है

रमेश-पहले नेहा से तो पूछ लेता ,

सुरेश-पूजा भाभी को देख कर माँ ने नेहा के लिए हाँ कर दी

रमेश-तूने कहाँ फसा दिया ,

सुरेश-मेरे लिए इतना तो कर

रमेश-ठीक है, गाँव जाकर पूजा से बात करूँगा. पर जैसे मैं नेपूज़ा को प्रपोज़ किया उस से पूजा ने हाँ कहा, मुझे नही लगता पूजा इसके लिए हाँ कहेगी. वो कहेगी सुरेश को खुद नेहा से बात करनी होगी.

सुरेश-वो भी कर लूँगा ,जल्दी नेहा से मिलने आउन्गा

पूजा-क्या बाते हो रही है

रमेश-कुछ नही

सुरेश- मैं कह रहा था कि भाभी के गाँव देखने के लिए आना होगा ,

पूजा-तुम कभी भी आना ,तुम्हारी भाभी तुम्हें पूरा गाँव दिखा देगी. चलिए अब टाइम हो गया.

और पूजा अपने पति रमेश और अपनी बेटियो के साथ गाँव की तरफ निकल गयी.
 
mitro aaj se pahle maine itne logon ko ek sath login hote hue nahi dekha ....... aaj kya koyi khas baat hai
 
फ्लॅशबॅक 970

पूजा के आते ही पिताजी की खुशी का कोई ठिकाना नही था.

पूजा को पिताजी बेटी कम बेटा ज़्यादा मानते थे.

जयसिंघ के पढ़ाई के लिए शहर3 जाते ही पिताजी ने पूजा को बेटे के तरह प्यार करना सुरू किया.

पूजा के आते ही नेहा और नीता की गॅंग पूरी हो गयी ,अब तीनो वापस मिल गयी

एक तरफ भाभी के आने की खुशी थी और दूसरी तरफ पूजा दीदी भी आ गयी.

पूजा दीदी के आते ही नेहा ने स्वेता को और नीता ने सीतल को अपनी गोद मे उठा लिया .और अपने जीजाजी का स्वागत करने लगी.

जीजाजी साली मिलते ,क्या कहें ,नेहा नीता अपने जीजाजी का इस तरह वेलकम कर रही थी जैसे वो अपने दोस्त को वेलकम करती है.

दामाद जी के पैर पे पानी डाले बिना उनको अंदर कैसे आने देती. दामाद एज मे माँ से छोटे थे फिर भी रिस्ता बड़े होने से माँ उनके पैर छु रही थी.

दामाद जी के आते ही पिताजी और माँ सावधान हो गयी. और एक दूसरे को रेस्पेक्ट देने का प्रोग्राम सुरू हो गया.

दामाद जी के घर मे आते ही सासू माँ ने सर पे घूँघट ले लिया .और रशोई घर से दामाद जी और नेहा के पिताजी की बाते सुन ने लगी.

दामाद जी के खड़े होते ही पिताजी भी खड़े हो जाते. उनके बैठने के बाद पिताजी भी बैठ जाते

पहले दामाद जी को टी दी गयी फिर पिताजी को, अब तक हमेशा पिताजी को पहले टी दी जाती थी पर आज उनको बाद मे दी गयी.

रमेश-पूजा पूजा

पिताजी-क्या हुआ दामाद जी

रमेश-पूजा

पूजा-क्या हुआ ,

रमेश-समान लो हम यहाँ नही रहेंगे

दामाद जी की बात सुनते ही पिताजी खड़े हो गये

पिताजी-क्या हुआ, हम से कोई ग़लती हो गयी

पूजा -क्या हुआ ,बताइए तो

रमेश-यहाँ मैं तुम्हारे कहने पे रुकने को तय्यार हुआ हूँ. अगर यहाँ ऐसा चलने वाला है तो हम यहाँ नही रुकेंगे

पूजा-हुआ क्या है ये तो बताइए

रमेश-तुम्हें कहा था कि मुझे रेस्पेक्ट पसंद नही है.तुम्हारे पिताजी मेरे खड़े होते ही खड़े हो जाते है. और ..मैं यहाँ उनका बेटा बनकर रहने आया हूँ ना कि दामाद बनकर

पूजा- पिताजी ,हम 1 साल के लिए यहाँ रुकने आए है. आप क्या चाहते है हम 1 दिन मे चले जाएँ

पिताजी-पर बेटी वो हमारे दामाद जी है

रमेश-आप दामाद की तरह रखना चाहते हो तो मैं बता दूं कि दामाद सिर्फ़ 2 3 लिए रुकता है. अगर बेटे की तरह रखना चाहते हो तो ...

रमेश-आप मुझे बेटा मान रहे हो तो मैं रुकुंगा वरना हम जा रहे है.

पिताजी-तुम जैसा चाहोगे वैसा ही होगा. सब ने सुन लिया

छोटू-मैं ने नही सुना

पूजा-तू इधर आ ,कहाँ था ,तुझे पता था मैं आ रही हूँ

छोटू-हाँ, आपके लिए रबड़ी लाने गया था. आपको पसंद है ना

पूजा-तू तो समझदार हो गया और बड़ा भी हो गया

छोटू-देखा दीदी ने भी कहा मैं बड़ा हो गया हूँ.

नेहा-दीदी ने बड़ा कहा तो उनको दीदी कहा ,तू कितना भी बड़ा हो जा रहेगा तो छोटू ही

पिताजी-तुम फिर सुरू मत हो जाना. जाओ अपनी भाभी को उठा दो कहो कि पूजा आई है.

पूजा-भाभी को मैं उठाती हूँ .

पूजा नेहा और नीता के साथ शालिनी के कमरे मे चली गयी

पिताजी- और कहो बेटा शहर2 मे सब कैसा है. समधन की तबीयत तो ठीक है ना

रमेश-माँ ठीक है. आपके बारे में पूछ रही थी.

पिताजी- उनको साथ ले आते, वो वहाँ अकेली

रमेश-अकेली कहाँ ,ज्योति है वहाँ पर.

पिताजी-मैं कह रहा था कि यहाँ आती तो गाँव की ताजी हवा मे अच्छा महसूस करती

रमेश-आपकी बात भी सही है .पर वहाँ घर की देखभाल करना भी तो ज़रूरी है.

पिताजी-जैसा तुम ठीक समझो,

रमेश-वैसे अपनी पोती को देखने आने की बात कर रही थी.

पिताजी-चलो इसी बहाने से उनसे मुलाकात हो जाएगी. शादी मे उनसे ठीक से बात करने को नही मिला.

रमेश-इस बार आएँगी तो मैं उनको कुछ दिन रुकने को कहूँगा.

पिताजी- अपने बारे में मे भी बताओ, कैसा चल रहा है काम

रमेश-सब अच्छा चल रहा है. प्रमोशन मिला काम बढ़ गया.

पिताजी-पूजा को टाइम देते हो कि नही

रमेश-उसके लिए तो याद से टाइम निकालता हूँ.

पिताजी- मैं कह रहा था कि तुम शहर की कंपनी मे हमेशा केलिए ट्रान्स्फर क्यूँ नही कर लेते.पूजा को यहाँ गाँव मे रहने को मिल जाता.

रमेश-वहाँ शहर2 मे हमारा घर है ,माँ ,मेरी बहन है उनको छोड़ कर कैसे यहाँ आ सकता हूँ

पिताजी- मैं बस एक सुझाव दे रहा था.

रमेश-मैं यहाँ महीने मे एक बार आता रहता हूँ. अब तो लंबे समय के लिए आया हूँ. इसको ऐसा ही चलने दीजिए .

पिताजी- ठीक है. लो नाश्ता भी आ गया

पिताजी अपने दामाद जी के साथ नाश्ता करने लगे.

पूजा अपनी भाभी को उठाने मे लग गयी.

पूजा-भाभी उठो

शालिनी-सोने दो ना नेहा ,पूजा के आने के बाद उठाना

पूजा-भाभी मैं पूजा ,

शालिनी-नेहा मज़ाक मत कर, सोने दे ना

नेहा-भाभी दीदी आ गयी है.

पूजा के आने की बात सुनते ही शालिनी उठ गयी

शालिनी-पूजा तू कब आई, नेहा तूने उठाया क्यूँ नही

नेहा-मैं ने तो उठाया था पर आप भैया के सपनो मे इतना डूब गयी कि हमारी आवाज़ सुनाई नही दी

शालिनी-जाने दे, पूजा कैसी है तू और स्वेता सीतल कहाँ है.

पूजा-कहाँ होगी. अपनी मौसी के पास है.

नीता ने सीतल को भाभी को दिया

शालिनी-कितनी प्यारी है, पूजा पर गयी है. वही आँख, वही नाक,

नीता-नाक मेरी जैसी है

नेहा-कुछ भी, भाभी ने कहा ना दीदी जैसी है

शालिनी-रूको, नीता ने सही कहा ,

पूजा-भाभी आप भी ना ,नेहा नीता के साथ कुछ दिन रह कर उनके जैसी हो गयी है

शालिनी-दोनो ने कब मुझे अपने जैसा बनाया पता नही चला, पर दोनो बहुत प्यारी

पूजा-बहन किस की है

नेहा-वो तो तब पता चलेगा ,जब हमे गिफ्ट मिलेंगे

पूजा-गिफ्ट, मैं तो वही भूल गयी

नीता-दीदी आप हम से झूठ बोल नही सकती ये आपको भी पता है

पूजा-तुम्हारे जीजाजी के पास है. वो देंगे तुम को

नेहा-पहले क्यूँ नही बताया,चलो नीता

शालिनी-नेहा रूको, वो अभी आए होगे थोड़ा आराम करने दो फिर गिफ्ट लेना

पूजा-हाँ, भाभी ने सही कहा, उनको आराम करने दो .गिफ्ट तो तुम्हें मिल ही जाएँगे

नीता-ठीक है

शालिनी-स्वेता इधर आओ ,मैं तुम्हारी मामी ,मामी के पास आओ

स्वेता नये चेहरा देख कर डर के अपनी माँ के पीछे छुप गयी.

शालिनी-स्वेता कितने साल की है,

पूजा-सीतल से बड़ी है

शालिनी-सीतल भी तो बड़ी हो गयी है.

पूजा-हाँ 2 महीने बाद उसका 1स्ट बर्थडे होगा,वैसे आपकी डेट कब की है.

शालिनी-मेरी डेट 3 महीने बाद की है, वैसे तूने कुछ जल्दी नही कर दी, बच्चो केलिए

पूजा-हाँ, वो ध्यान नही रहा ,लेकिन अब 3र्ड के लिए रुकने वाले है.

शालिनी-ये अच्छा सोचा.

पूजा-वैसे आप कितने

शालिनी-एक

पूजा-पिताजी को पता है

शालिनी-नही

पूजा-पोता हुआ तो ठीक है वरना 2 के बारे में सोचना होगा

शालिनी-डरा मत , चल तू आराम कर मैं फ्रेश होती हूँ.

पूजा-हाँ, काफ़ी लंबा सफ़र था सीतल ने तो ठीक से बैठ भी नही दिया

शालिनी-अब आराम कर लो स्वेता सीतल को नेहा नीता संभाल लेंगी.

पूजा-नेहा

नेहा-आप बिंदास आराम करो हम संभाल लेंगे

नेहा और नीता स्वेता सीतल के साथ खेलने लगी. और पूजा आराम करने लगी
 


फ्लॅशबॅक 971

नेहा नीता को पहले भैया की तरफ से गिफ्ट मिले,फिर जीजाजी के तरफ से

एक साथ इतने सारे गिफ्ट और प्यार मिलने से दोनो खुश थी .

छोटू भी अपने ड्रेस पहन कर अपने दोस्तो को दिखाने चला गया.

रमेश ने दूसरे दिन से कंपनी मे जाना सुरू कर दिया.

गाँव से शहर अपडाउन करके वो अपना काम भी कर रहा था और अपनी बीवी को उसके मायके लाकर उसको भी खुश कर दिया.

लेकिन जो सवाल शालिनी के दिमाग़ मे चल रहा था उसका जवाब अब तक नही मिला था.

शालिनी ने नेहा और नीता को पकड़ कर पूजा को अपने कमरे मे बुला लिया

पूजा को लगा कि हर दिन की तरह कुछ बात करनी होगी.इसी लिए वो आकर बेड पे बैठ गयी.

पूजा के आते नेहा ने डोर अंदर से बंद किया और स्वेता को अपनी गोद मे बैठा कर पूजा की तरफ देखने लगी.

पूजा-तुम दोनो ऐसे क्या देख रही हो

नेहा-हमे आपके और जीजाजी की पहली मुलाकात के बारे में जान ना है

पूजा-बताया था ना

नीता-नही बताया, क्या एक दिन मे सब होता है.

पूजा-मेरे साथ तो हुआ था.और आज लगता है तुम सब पूरी प्लॅनिंग के साथ मुझे पकड़ा है

नेहा- आप हमे तो बताती नही पर भाभी को तो बताना होगा

शालिनी-पूजा बता ना ,तूने तो मुझ से पहले शादी कर ली.

पूजा-लड़का अच्छा हो तो शादी जल्दी करनी चाहिए

शालिनी-इतनी भी जल्दी क्या थी. तू तो तब 18 की भी नही हुई थी.

पूजा-रन्निंग था

नीता-दीदी हमे तो लगा था कि आप राकेश से शादी करेंगी.

पूजा-उस से ,मैं क्या पागल दिखती हूँ तुम्हें, पिताजी के सामने आते पेशाब निकल गयी थी राकेश की याद है ना तुझे

नेहा- हाँ याद है ,

शालिनी-ये राकेश कौन है.

पूजा-मेरी सहेली का भाई है. मेरे पीछे दीवानो जैसा लगा हुआ था

नीता-वो भी तो अच्छा था.

पूजा-वो फटतू, उसके साथ मैं शादी करती, ना मैं ने कभी उसे प्यार किया और ना उसे ज़्यादा भाव दिया

शालिनी-क्या मतलब

पूजा-मैं उसको हल्के मे लेती थी पर वो सच मे मुझे प्यार करता था,

शालिनी-तो ऐसा क्या हो गया जो राकेश की जगह रमेश से शादी की.

पूजा-राकेश को मैं ने कभी प्यार नही किया. वो बिना वजह मेरे पीछे पड़ा था. ये बात पिताजी को पता चली

शालिनी-पिताजी ने तो तेरी पिटाई की होगी

पूजा-सुनो तो ,पिताजी ने राकेश के बारे में सुना तो मुझे अपने कमरे मे बुलाया

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पिताजी-पूजा मैं क्या सुन रहा हूँ

पूजा-क्या हुआ पिताजी

पिताजी-तू उस राकेश जैसे लड़के के साथ ,मुझे तुमसे ये उम्मीद नही थी.

पूजा-पिताजी आपने ये कैसे सोच लिया कि मैं राकेश जैसे लड़के के साथ

पिताजी-तो मैं ने जो सुना वो क्या है.

पूजा-पिताजी वो मेरे पीछे पड़ा है,मुझसे शादी करना चाहता है.

पिताजी-और तू

पूजा-मैं उसके जैसे लड़के साथ कैसे शादी कर सकती हूँ. वो तो आपके सामने आते पेशाब कर देता है,

पिताजी-तो तुम उसके साथ शादी नही करोगी.

पूजा-नही,मैं तो उसके साथ शादी करूँगी जो आपके सामने मेरा हाथ पकड़ कर ले जाएगा.जो आपको चुनौती देगा , जो आपसे भी ना डरे , जिसमे मुझे बचाने की ताक़त हो

पिताजी-मैं तुमसे यही उम्मीद करता हूँ. वो राकेश ,अगर ज़्यादा परेशान कर रहा होगा तो बता देना

पूजा-उसके लिए तो मैं ही काफ़ी हूँ, प्यार करना गुनाह थोड़े है. वो मुझे करता है ,करने दो ,मुझे वो पसंद नही है तो मैं क्या कर सकती हूँ

पिताजी-अपने पढ़ाई पे ध्यान दे,और कोई पसंद आए तो बता देना

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नेहा-तो राकेश

पूजा-हम जिसे प्यार करे वो भी हमे प्यार करे ऐसा हो ज़रूरी नही होता.

शालिनी-रमेश भाईसाब के बारे में बता

पूजा-रमेश को मुझे सुबा प्यार हुआ और शाम तक हमारी शादी फिक्स हुई

शालिनी-अच्छे से बता ना

पूजा-वो दिन मेरी ज़िंदगी का यादगार दिन था

नेहा-हमे भी बता दो

पूजा-उस दिन सनडे था.

मैं अपनी सहेली के साथ मार्केट मे गयी थी

नेहा-सहेली ,राकेश की बहन मंदा

पूजा-हाँ. वो मेरी खास सहेली है, उसी ने कहा था कि मेरे लिए उसका भाई ठीक नही रहेगा.इतनी खास थी मेरे लिए

शालिनी-अच्छी सहेली थी टुमरी.

पूजा- बेस्ट फ्रेंड है मेरी और आज भी है ,

नीता- दीदी वो हम मंदा के बारे में भाभी को बता देंगे आप अपनी कहानी बताइए

पूजा-सनडे का दिन था हम मार्केट मे घूमने गये थे. सनडे को मार्केट दिन रहता है. पूरे हफ्ते की खरीद सनडे को करनी पड़ती है

आपको हमारे गाँव का मंदिर तो पता है. और मेला जिस से हमारा गाँव फेमस है

ऐसे 3 जवान लड़के हमारा गाँव घूमने आए थे.

रमेश सुरेश और जतिन

रमेश और सुरेश दोनो बचपन से एक दूसरे को जानते थे, एक ही स्कूल मे थे, कॉलेज मे साथ मे गये, दोनो ने साथ मे ग्रॅजुयेशन किया ,और जॉब भी सेम कंपनी मे करने लगे.

उनकी कंपनी की एक ब्रांच शहर2 मे थी. एक ब्रांच शहर मे है.और दुबई मे भी उनके मालिक की कंपनी थी.वो यहाँ एक प्रॉजेक्ट के सिलसिले मे आए थे.

और जतिन सुरेश के घर के बाजू मे रहता है. जतिन के पापा और सुरेश के पापा खास दोस्त थे. जतिन के मम्मी पापा उसको बचपन मे उसे छोड़ कर भगवान के पास चले गये .जतिन को सुरेश के मम्मी पापा ने बड़ा किया. वो वही उनके साथ रहता था ,अब जॉब करने से वो खुद के घर मे रहता है पर खाना सुरेश के घर मे ख़ाता है.

हर दिन काम करके बोर होने से रमेश ने सनडे को हमारे गाँव मे घूमने का प्लान बनाया था.

वो हमारे गाँव मे आते गाँव की खूबसूरती मे खो गये.

शहर2 मे रहने से गाँव मे आते ही वो गाँव की हरियाली मे खो गये.

वो घूमते हुए मार्केट मे आ गये .

वहाँ पहली बार रमेश ने मुझे देखा ,मुझे देखते वो सपनो को खो गया.

उसे जिस का इंतज़ार था वो हमसफ़र , उसे मुझ मे दिखाई देने लगी.

वो ऐसे मुझे गुर रहा था की जैसे उस ने पहली बार कोई लड़की देखी हो.

उसके इस तरह मुझे घूर्ने से उसके दोस्त सुरेश और जतिन उसे होश मे लाने की कोशिश करने लगे

सुरेश-अब क्या हुआ तुझे कोई भूत देख लिया क्या

जातीं-भूत नही परी देखी है

सुरेश-कहा है परी

जातीं-वो देख सामने,

उनके इस तरह गड़बड़ करने से मेरी सहेली मंदा ने उनकी तरफ देखा.और मुझे घूरता हुआ देख कर मुझे बताने लगी.

मंदा-पूजा

पूजा-क्या है

मंदा-वो लड़के तुम्हें घूर रहे है,

पूजा-तेरा भाई होगा

मंदा-मैं अपने भाई को पहचानती हूँ, देख तो सही. शहर से आए है

पूजा-मुझे नही देखना

मंदा-देख तो सही. 3 है शायद तेरा राजकुमार इन मे से होगा तो

मैं ने धीरे से तिरछी नज़र से उन लड़को की तरफ देखा.

रमेश बीच मे खड़ा था. मेरी नज़र उसी पे जाकर रुक गयी.

मेरी सहेली ने कहा तो ठीक था ,रमेश दिखने मे किसी हीरो की तरह था.

ये शहर के लड़के ,गाँव की भोली भली लड़कियो को बहला कर ईस्तमाल करते है.

ये मेरा राजकुमार कैसे हो सकता है.

पूजा-चल यहाँ से

मंदा-चल ना बात करते है.

पूजा-ये शहर के लड़के इनका क्या भरोसा, चल यहाँ से

मैं अपनी सहेली को लेकर जाने लगी.

सुरेश-वो तो जा रही है, अबे अब तो होश मे आ जा

रमेश-क्या हुआ कहा हूँ मैं

जतिन-ये तो सो रहा था ,हमे लगा कि उस लड़की को देख रहा होगा.

रमेश-तुम चुप रहो, वो कहाँ गयी. अभी तो यहाँ थी ,

सुरेश-वो तो गयी ,

रमेश-ऐसे कैसे गयी.

और रमेश भागते हुए उसे दुकान के पास आया ,जहाँ मैं समान ले रही थी.

मुझे पागलों जैसा इधर उधर देखने लगा.

उसने उस दुकान वाले से मेरे बारे में पूछा ,दुकान वालो को मेरे बारे में पता था , उस ने उनको घूर के देखा और आवारा लड़के समझ कर भगा दिया.

फिर भी वो मुझे इधर उधर ढूँढ रहा था.

मैं अपनी सहेली मंदा के साथ वही छुप कर रमेश को देख रही थी.

 
फ्लॅशबॅक 972

हम उनको छुप कर देख रहे थे.

मंदा-देख कैसे तुझे ढूँढ रहा है.

पूजा-तू चुप रह ,मुझे देखने दे

मंदा-देखने से कुछ नही होगा, चल मेरे साथ

उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे वापस मार्केट मे ले गयी.

मेरे मार्केट आते ही रमेश की आँख ने मुझे ढूँढ लिया .इस बार वो मुझे देखते रहने की जगह मेरे पास आ गया

रमेश-माफ़ कीजिए,मैं ने सुना है गाँव मे एक मंदिर है ,आप बता सकती है वो कहाँ है.

पूजा-(ये क्या पूछ रहा है, मुझे लगा मेरा नाम पूछेंगा) वो

मंदा-वो यहा से सीधा चलते जाओ, सामने जो जंगल है वही पर है मंदिर

मंदिर का पता चलते रमेश वापस जाने के लिए पलट गया.पर कुछ सोच कर वापस हमारी तरफ देखने लगा.

रमेश-जंगल ,वहाँ तो जंगली जानवर होगे,

मंदा-हाँ, (झूठ)

रमेश-क्या आप हमे मंदिर तक ले जा सकती है. वो क्या है ना हम जंगल मे खो गये और जंगली जानवर मिल गये तो

पूजा-(ये तो राकेश से भी बड़ा फटतू है)

मंदा-क्यूँ नही, चलिए ,आप मेहमान है गाँव मे ,हमे आपको मंदिर दिखाने मे कोई प्राब्लम नही होंगी

मैं अपनी सहेली को बाजू मे ले गयी.

पूजा-तू ये क्या कर रही है. वो तो तेरे भाई से ज़्यादा फटतू है

मंदा-हम बस उनको मंदिर दिखा देंगे ,और क्या ,चल अब

मंदा के वजह से मुझे रमेश और उसके दोस्तो के साथ मंदिर मे जाना पड़ा

पहले तो मैं अपनी सहेली के साथ चल रही थी .और रमेश अपने दोस्तो के साथ

फिर अचानक रमेश आगे आकर मेरे साथ चलने लगा.

और हमसे बात करने लगा

रमेश-आपकी मदद के लिए शुक्रिया

पूजा-ये तो हमारा फ़र्ज़ है. गाँव मे आए हुए लोगो को मंदिर दिखाने का,इसमे शुक्रिया कहने की ज़रूरत नही है

रमेश-आप हमारी मदद कर रही है और मैं ने आपको अपना नाम भी नही बताया. मेरा नाम रमेश है.और आपका

पूजा-पूजा,पूजा नाम है मेरा

रमेश-पूजा ,प्यारा नाम है

मेरी सहेली नाम बता रही थी कि उसके दोस्त ने चोट लगने का नाटक किया .और मेरी सहेली उसकी मदद करने चली गयी. मैं भी जाने वाली थी कि रमेश ने रोक लिया

रमेश-वो उनको संभाल लेंगी,

मेरी सहेली के उनके पास जाते ही उसका दोस्त ठीक हो गया.और मुझे उसके साथ चलते रहना पड़ा

रमेश-मैं ने ग्रॅजुयेशन किया है .आप कहाँ तक पढ़ी है.

पूजा-ये क्यूँ पूछ रहे हो

रमेश-सफ़र लंबा है और बात करते हुए जाएँगे तो पता नही चलेगा कि मंदिर कब आ गया.

पूजा-मैं 12थ मे हूँ

रमेश-आप यहीं रहती है,

पूजा-हाँ, मेरी फॅमिली यहाँ से बिलॉंग करती है

रमेश-मैं 2 साल से जॉब कर रहा हूँ, मेरी आगे 24 साल है. मेरे घर मे मेरी माँ और मेरी बहन है.उसकी शादी भी हो गयी है.

पूजा-(ये पागल तो नही है)मुझे क्यूँ बता रहे हो

रमेश-आपने बताया तो मैं ने भी बताया दिया.

पूजा-यहाँ कैसे आना हुआ

रमेश-यहाँ शहर मे कंपनी के काम से आया था ,फिर इस गाँव के बारे में सुना तो देखने आ गया ,बड़ा प्यारा गाँव है आपका

पूजा-हाँ, इस गाँव मे एक बार जो आता है यही का हो जाता है

रमेश-मैं भी यही का होके रहना चाहता हूँ.

पूजा-क्या मतलब

रमेश-सोच रहा हूँ यही की किसी लड़की को पसंद करके शादी कर लूँ

पूजा-(ये तो मुझे इनडाइरेक्ट लाइन मार रहा है) मंदिर आ गया.

मंदिर आते ही वो बात वही पर ख़तम करके हम मंदिर मे चले गये.

मंदिर मे जाते ही सब ने दर्शन किए, रमेश मेरे बाजू मे खड़ा होकर दर्शन करने लगा.

अचानक रमेश के दोस्त ने पानी पीने का बहाना किया

सुरेश-यहाँ कही पानी मिलेगा.

पंडितजी-मेरा घर है पीछे वहाँ मिल जाएगा .

जातीं-मैं अकेला नही जाउन्गा. और पीछे तो जंगल दिख रहा है

सुरेश-क्या तुम भी

मंदा-चलो ,मैं दिखाती हूँ , मुझे भी प्यास लगी है

मेरी सहेली रमेश के दोस्तो के साथ पंडितजी के घर जाने लगी.

मंदिर मे मैं रमेश पंडितजी और ठाकुर के 3 आदमी जो मंदिर की देख रेख के लिए रखे गये थे

मैं रमेश के साथ मंदिर मे अकेले रहने से अजीब सा फील हो रहा था.

कही रमेश जानबूझ कर तो मुझे यहाँ लेकर नही आया ,कही वो मुझसे अकेले मे बात करना चाहता हो

हुआ भी ऐसा ही.रमेश ने मेरा हाथ पकड़ लिया.

रमेश-पूजा,मैं रमेश ,यहाँ भगवान के घर मे तुम्हें अपने दिल की बात कहना चाहता हूँ,मैं तुम्हें से शादी करना चाहता हूँ, मुझसे शादी करोगी.

रमेश के इस तरह प्रपोज़ करने से मैं कुछ सोचने समझने की शक्ति खो चुकी है.

ये क्या पागलपन है

डाइरेक्ट शादी की बात

ना प्यार ना पहचान और डाइरेक्ट शादी की बात

मैं क्या कहूँ उसे ,मुझे लगा वो प्यार करने की बात कहेगा पर डाइरेक्ट शादी.

शादी के बारे में तो अभी मैं ने सोचा नही है.

रमेश ने सही जगह सेलेक्ट की थी ,प्रपोज़ करने के लिए .

भगवान के घर मे प्रपोज़ करने से उसकी सच्चाई और उसके प्यार को फील कर रही थी मैं

रमेश मेरे हाँ या ना करने का इंतज़ार कर रहा था.

पंडितजी मुझे अच्छे से जानते थे उनको लगा कि शहर का आवारा लड़का मुझे परेशान कर रहा है.

पंडितजी ने ठाकुरजी के आदमियो को आवाज़ दी.

पंडितजी-ये लड़का हमारे गाँव की लड़की को परेशान कर रहा है ,इस यहाँ से भगा दो

आदमी-क्या है बे ,चल निकल यहाँ से

रमेश-पूजा ,क्या तुम मुझसे शादी करोगी.

आदमी- बेटी तुम जाओ इसको हम देखते है

रमेश- पूजा

आदमी-ये ऐसे नही मानेगा.

और ठाकुरजी के आदमी रमेश को वहाँ से उठा कर बाहर ले गये .और रमेश को मारने लगे

ये लोग तो इस फटतू को मार देंगे .मुझे रोक ना होगा वरना बेवजह वो पिटा जाएगा.

मैं उन लोगो को रोकने वाली थी कि रमेश ने उन ठाकुरजी के आदमियो को मारना सुरू किया.

रमेश अकेला उनको मार रहा था .रमेश के दोस्त पंडितजी के घर पे थे.

रमेश अकेला ठाकुरजी के 3 पहलवान पर भारी पड़ रहा था.

मैं तो इसे फटतू समझ रही थी. ये तो हीरो निकला, एक साथ 3 पहलवान को पटक रहा था.

कहीं ये फटतू बनकर मुझे मंदिर लाया हो .और मुझे प्रपोज़ किया .ऐसी जगह कि ,जहा कोई झूठ नही बोलता ,कही और प्रपोज़ करता तो मैं मना कर देती ,पर यहाँ.

शोर शराबा सुनकर रमेश के दोस्त आ गये .उनके आते ही मैं ने अपनी सहेली को भागने को कहा

क्या पता वो तीनो कुछ भी कर सकते है.

मैं अपनी सहेली को लेकर भागने लगी. रमेश भी हमारे पीछे भागने लगा अपने सवाल का जवाब ढूँढ ने

उसके दोस्त भी उसके साथ भागने लगे. वो हमे कभी भी पकड़ सकते थे पर रमेश ने ऐसा नही किया.

उसने ऐसा क्यूँ नही किया ये देखने के लिए मैं ने पीछे देखा तो वो हमारे पास ही था.

हम कहाँ तक भाग सकते है, थक कर धीरे धीरे चलने लगे. रमेश उतनी दूरी बना कर चलने लगा.

रमेश करना क्या चाहता है. मुझे पकड़ सकता है पर ,मैं इसी सोच मे चलती जा रही थी.

गाँव आ गया .और रमेश ने अपने दोस्तो से कुछ कहा ,वो वहाँ से दूसरे तरफ जाने लगे.अकेला रमेश मेरे पीछे आ गया.

मेरी सहेली डर के मारे अपने घर मे घुस गयी . अब मैं और रमेश रह गये.

मेरा घर भी आ गया पर वो अभी भी मेरे पीछे था,ये तो यहाँ से मार खा कर जाएगा .ठाकुरजी के आदिमियो को मारा था

मैं ने एक बार उसकी तरफ देखा और अपने घर मे घुस गयी.

लगा कि मैं ने उस से पीछा छुड़ा लिया है.

लेकिन उसका क्या होगा ,उसने ठाकुरजी के आदमी को मारा है. आदमी को मारा ,अकेले 3 लोगो को मारा है.

काफ़ी हिम्मत है उसमे ,

एक ऐसी जगह मुझे प्रपोज़ किया जहाँ पर उसके सचाई का पता चल रहा था.

मुझे उसे हा कर देनी चाहिए थी ,क्या मैं वापस उसके पास जाउ

मैं हान्फते हुए सोच रही थी कि पिताजी की नज़र मुझ पे पड़ी .

मेरी ऐसी हालत देख कर वो घबरा गये ,मेरा बदन पसीने मे भीगा हुआ था ,मेरी सास तेज चल रही थी.

पिताजी-क्या हुआ बेटी

पूजा-पिताजी वो मंदिर मे

मैं पिताजी से बात कर रही थी कि रमेश घर के अंदर आ गया.

उसे घर के अंदर देखते ही मेरे पसीने छूटने लगे.

पिताजी कभी मेरी तरफ तो कभी रमेश के तरफ देख रहे थे

रमेश ने पिताजी की परवाह नही की,

और मेरा हाथ पकड़ लिया.

रमेश-पूजा,मैं रमेश, तुम्हारे पिता के सामने तुम्हें अपने दिल की बात बता रहा हूँ ,मुझ से शादी करोगी.

मैं क्या कहूँ, फिर से वही सवाल, अब मेरे पिताजी के सामने

मैं रमेश की आँख मे देखने लगी.उसके प्यार की सच्चाई देखने लगी.

पहली नज़र वाला प्यार हो गया था हमे

और पिताजी कभी मुझे तो कभी रमेश को देखने लगे.
 
फ्लश बॅक 973

पूजा रमेश की बातों से उसकी तरफ आकर्षित हो रही थी

रमेश दिखने मे अच्छा था

एक साथ तीन आदमियो को मार गिराया

पिताजी के सामने डटके खड़ा रहा

पिताजी से डरा भी नही

वरना गाँव के अच्छे अच्छे लड़के पिताजी के सामने खड़े भी नही रह पाते

पूजा रमेश की हिम्मत देखती रह गयी

पिताजी के सामने पूजा को प्रपोज़ किया

यहाँ तक कहा कि अगर पूजा हाँ करेगी तो वो पूजा के पिताजी का सामना करने को भी तय्यार है

जैसा पूजा को राजकुमार चाहिए था वैसा मिल गया

रमेश से पूजा को प्यार हो गया

पर पूजा बात करना चाहती थी रमेश से

पूजा रमेश को लेकर अपने कमरे मे गयी

कमरे मे जाते ही दोनो मे जो बाते हुई उसके बाद दोनो एक दूसरे के होकर रहना चाहते थे

पूजा- तुम हो कौन ,और ये सब क्या नाटक है

रमेश- मैं रमेश हूँ भूल गयी तुम

पूजा- क्या हम पहले मिल चुके है

रमेश- हाँ , रोज तो मिलते है

पूजा- मज़ाक मुझे पसंद नही है

रमेश- सच हम रोज मिलते है , और तुम मुझे रोज एक किस देती हो

पूजा- किस और मैं, पागल तो नही हो गये हो

रमेश- तुम तो भूल गयी , रोज तो मेरे सपनो ने आकर मुझे किस देती हो , प्यार करती हो , प्यारी प्यारी बाते करती हो

पूजा- (ये सपने की बात कर रहा है ) मुझे लगा था कि तुम थोड़े पागल होंगे पर तुम तो पूरे पागल हो

रमेश- सच कहा , कल तक मैं आधा पागल था पर जब से तुम्हारे प्यार मे पड़ गया हू तब से पागल होता जा रहा हूँ

पूजा- तुम्हें डॉक्टर की ज़रूरत है

रमेश- सही कहा , मुझे ऐसे डॉक्टर की ज़रूरत है जिस के पास प्यार वाली मेडिसिन हो , और वो डॉक्टर तुम हो ,

पूजा- तुम क्या मूवी ज़्यादा देखते हो

रमेश- नही , पर तुम्हारे लिए देख लूँगा

पूजा- क्या मतलब मेरे लिए

रमेश- बीवी की ख्हाहिशें पूरी करनी पड़ती है

पूजा- कौन किस की बीवी

रमेश- भूल गयी , कल सपने मे तो हमने शादी की थी

पूजा- (ये मेरा दिमाग़ खराब कर देगा) मज़ाक बहुत हो गया ,

रमेश- सीरीयस बात करते है

पूजा- तुम्हें पता मैं कौन हूँ

रमेश- पूजा , मेरी बीवी

पूजा- मज़ाक नही , वरना मेरे पिताजी को बुलाउन्गी तो इस जंगल मे गायब कर देंगे

रमेश- मैं तो तुम्हारे प्यार मे गायब होना चाहता हूँ

पूजा- कहा ना मज़ाक नही

रमेश- सीरीयस बात करते है

पूजा- तुम्हें पता है मेरे पिताजी कौन है

रमेश- हाँ , मेरे ससुर है

पूजा- पहलवान है , तुम्हें उठा कर फेक सकते है

रमेश- तो क्या हुआ मैं उठ कर वापस आ जाउन्गा , सिर्फ़ तुम्हारे लिए

पूजा- तुम सच मे पागल हो

रमेश- तुम्हारे सवाल ख़तम हुए

पूजा- तुमसे तो बात करना ही बेकार है

रमेश- अब मैं कुछ सवाल पुच्छू

पूजा- पूछो , पर मेरा दिमाग़ खाना सुरू मत करना

रमेश- तुम क्या बचपन से इतनी सुंदर हो

पूजा- ऐसे बकवास सवाल का जवाब मैं नही देती

रमेश- मैं तो तुम्हारे तुम्हारे सवाल का जवाब दिया है

पूजा- मैं बचपन से ऐसी ही हूँ

रमेश- फिर तो हमारे बच्चे भी तुम्हारे जैसे सुंदर होंगे

पूजा- तुमसे शादी नही करने वाली मैं

रमेश- क्यूँ ?

पूजा- जान ना पहचान मैं तेरा मेहमान

रमेश- मैं तो तुम्हें देखते शादी करने का फ़ैसला कर दिया है , अगर तुम ना कहोगी तो तुम्हारी फोटो से शादी कर लूँगा

पूजा- वो वहाँ फोटो है लेकर जाओ

रमेश- अब फोटी से शादी क्यूँ करूँ , तुम तय्यार हो ना

पूजा- मैं और तुमसे शादी करूँगी , भूल जाओ

रमेश- तुम्हें भूल जाउ ये हो नही सकता , और तुम मुझे भूक जाओ ये होने नही दूँगा

पूजा- तुमने तो कहा कि मूवी नही देखते फिर ये मूवी के डायलॉगे क्यूँ मार रहे हो

रमेश- ये तो दिमाग़ मे आया और बोल दिया

पूजा- इसी तरह ये बात भी दिमाग़ मे डाल दो कि मैं तुमसे शादी नही करने वाली

रमेश- क्यूँ , ?

पूजा- तुम कौन हो मैं नही जानती और ऐसे कैसे शादी को हाँ कर दूं

रमेश- शादी नही करनी है तो अब तक मेरे गले क्यूँ लगी हो

पूजा- मैं कहाँ , तुम.मेरे गले लगे हो

रमेश- देख लो , तुमने मुझे पकड़ रखा है

पूजा- बड़े चालू हो तुम , पहले खुद गले लगाया और अब मुझ पे इल्ज़ाम लगा रहे हो

रमेश- तुम हाँ तो कहो , ऐसे ज़िंदगी भर रहूँगा

पूजा- पागल हो तुम ,

रमेश- तुम्हारे प्यार मे पागल हो गया हूँ

पूजा- पर मैं तुमसे प्यार नही करती

रमेश- क्यूँ ?

पूजा- तुम्हारे जैसे शहर के लड़को का क्या भरोसा , बाद मे मुझे भूल जाओगे तो

रमेश- मैं अलग तरह से सोचता हूँ

पूजा- क्या मतलब

रमेश- पहले शादी करते है फिर प्यार करेंगे , मतलब प्राब्लम ख़तम कि मैं प्यार करके धोका दूँगा

पूजा- क्या पता शादी करके धोका दोगे तो

रमेश- ऐसा लग रहा है तो अब तक तुम्हें किस कर रहा होता

पूजा- किस करते तो मूह नोच लेती

रमेश- पूरा का पूरा खा लो

पूजा- तुम क्या ऐसे ही हो

रमेश- हाँ ,

पूजा- तुम्हें हो कौन ये तो बताओ

रमेश- मैं रमेश हूँ , इंजिनियर हू , शहर2 मे रहता हूँ ,

पूजा- तुम्हारे घर मे कौन कौन है

रमेश- एक माँ , जिसको तुम्हारी जैसी बहू चाहिए , और एक बहन ज्योति , जिसकी शादी हो गयी है ,

पूजा - क्या ?

रमेश-मेरी एक बहन है , मेरे पिता की डेत हो चुकी है , मेरी माँ को तुम्हारी जैसी बहू चाहिए , और मुझे तुम चाहिए तुम आधी पागल और मैं आधा पागल, शहर2 मे मेरा खुद का घर है , मेरी बहन की शादी हो चुकी है , मेरे 2 खास दोस्त है , उनके साथ ही एक कंपनी मे काम करता हूँ , शहर मे एक प्रॉजेक्ट की वजह से आया हूँ , और यहा आकर मुझे मेरी जीवन साथी मिल गयी

पूजा- तुमने उस से पहले कितनी लड़कियो को प्यार किया है

रमेश- रोज अलग लड़की से प्यार करता हूँ

पूजा- व्हाट

रमेश- हर रात सपने मे जिस लड़की को प्यार करता हूँ उसकी शकल ही नही दिखती थी जिस से ऐसा लगता कि रोज नयी लड़की से प्यार कर रहा हूँ , पर आज तुम्हें देख कर समझ गया कि सपने मे जिस से प्यार करता था वो तुम हो

पूजा- तुम्हारी बाते अजीब है

रमेश- तुम भी अजीब बन जाओ , क्या तुम मेरे सपने नही देखती हो

पूजा- मैं अपने राजकुमार के सपने देखती हूँ

रमेश- मैं ही हूँ तुम्हारा राजकुमार

पूजा- भूल जाओ , तुम्हें ऐसा क्या है जो तुमसे शादी कर लूँ

रमेश- अच्छा ख़ासा कमाता हूँ ,, खुद का घर है , एक माँ है , इतनी ताक़त रखता हूँ की अपनी फॅमिली की रक्ष कर सकता हूँ , और जितने चाहिए उतने बच्चे पैदा कर सकता हूँ और क्या चाहिए

पूजा- ये तो कोई भी कर सकता है

रमेश- तुम बताओ कि क्या करूँ जिस से तुम मेरी हो जाओ

पूजा- (मैं तो कब की तुम्हारी हो गयी हूँ) मेरे पिताजी को कुस्ति मे हरा दो

रमेश- ये नही कर सकता , मुझे लाल लंगोट पहनना पसंद नही है

पूजा- जीन्स पहन कर कुस्ति खेलो

रमेश- तुम्हारे साथ कुस्टी खेलने के लिए तुम्हारे पिताजी को हराना होगा

पूजा- उनको हरा दो मैं अपना दिल हार जाउन्गी

रमेश- तुम्हारे लिए ये भी कर लूँगा

पूजा- अब तक मेरे पिताजी हारे नही है

रमेश- तो क्या हुआ , अब तक मुझे प्यार भी नही हुआ था

पूजा- हरा दो मेरे पिताजी को

रमेश- तुम मज़ाक नही कर रही हो

पूजा- मैं सीरीयस हूँ

रमेश- तो अपने उपर से उठने तो दो

पूजा- क्या ?

रमेश- देखो हम कहाँ है

पूजा बेड पर लेटी हुई थी और रमेश उसके उपर था

पूजा- हम कब बेड पर आए

रमेश- मुझे क्या पता ,

पूजा- उठो मेरे उपर से

रमेश- मेरी बीवी के उपर हूँ

पूजा- मैं तुम्हारी बीवी नही हूँ

रमेश- तुम्हारे दिल मे क्या है मैं देख चुका हूँ , अब बोल भी दो , मैं ने अपनी माँ को बुलाया है

पूजा- तुम्हारी माँ को क्यू बुलाया है

रमेश- तुम्हारे पिताजी से बात करने को ,

पूजा- पहले मुझसे तो बात कर लो

रमेश- मेरे दोस्त को भेजा है , मेरी माँ शाम तक आ जाएगी रिंग लेकर

पूजा- रिंग

रमेश- आज तुम्हें अपना बनाना है , आज ही सगाई करते है और एक महीने बाद शादी

पूजा- रूको , तुम कहाँ से कहाँ तक सोच रहे हो , क्या पता बच्चो के नाम भी सोच लिया हो

रमेश- वो तुम्हारी पसंद से रखेंगे

पूजा- तुम पागल हो

रमेश- तुम्हारे पिताजी से तुम बात करोगी

पूजा- मुझे नही करनी तुमसे शादी

रमेश- मत करो , पर एक किस मिलेगा क्या

पूजा- भूल जाओ

रमेश- तो तुम अपने होंटो पे जीभ क्यू घुमा रही हो

पूजा- मैं तो

रमेश- बोलो जल्दी हाँ कि नही

पूजा- ना

रमेश- सोच लो , तुम ना करोगी तो तुम्हारी सहेली से बात करूँगा

पूजा- ऐसा थप्पड़ पड़ेगा कि मुझे याद रखोगे

रमेश- थप्पड़ क्यूँ मारोगी तुम

पूजा- पहले मुझसे बात पूरी कर लो

रमेश- तुम्हारी सहेली तुमसे भी अच्छी है

पूजा ने रमेश की धक्का दिया

रमेश बेड से नीचे गिर गया

पूजा- क्या कहा , अभी तुम्हें मैं सुंदर दिख रही थी और अब मेरी सहेली की बात कर रहे हो

र्समएश- मैं ने तो मंदिर मे भगवान से यही दुआ माँगी कि शादी करूँगा तो इसी गाँव मे

पूजा- तो क्या मंदा से शादी करोगे

रमेश- तुम मना कर रही हो तो मंदा से बात करनी होंगी , वो एक झटके मे हाँ कर देंगी

पूजा- खबरदार जो मंदा से बात की तो

रमेश- तुमने तो मना किया है मेरे पास टाइम नही है , शाम तक माँ आ जाएगी

पूजा-मुझे सोचने दो

रमेश- तुम सोचती रहो मैं चला मंदा से पूछने

और रमेश कमरे से बाहर आ गया

पूजा को खुद पे गुस्सा आ रहा था

रमेश को मना क्यूँ किया

और रमेश बिना पूजा का जवाब सुने मंदा से बात करने जा रहा था

पूजा- ये मैं क्या कर रही हूँ , मेरे राजकुमार की सारी खूबिया है रमेश मे , मैं रमेश से प्यार करने लगी हूँ , मैं रमेश को खो नही सकती

पूजा ने खुद अपने बाल नोच लिए खुद पे गुस्सा आ रहा था उसको और भाग कर कमरे से बाहर आ गयी

रमेश बस घर से बाहर जाने वाला था कि पूजा ने उसका हाथ पकड़ लिया और कमरे मे वापस ले जाने लगी

पिताजी माँ ये सब देखते रह गये

पूजा कर क्या रही है

पूजा का रमेश को इस तरह कमरे मे ले जाना पिताजी को पसंद नही आया पिताजी को गुस्सा आ रहा था

उनके हाथ मे गन थी

अगर गुस्सा बढ़ गया तो कुछ भी हो सकता था

शायद रमेश मंदा के नाम से पूजा मे जलन पैदा करके पूजा के प्यार को बाहर लाना चाहता है

और शायद रमेश इस मे कामयाब भी हो गया है
 
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