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Guest
ये कहकर भाभी ने मेरा कड़क सोट जैसा लंड अपने हाथ में ले लिया और उसे प्यार से पुच्कार्ते हुए उसका गरम सुपाडा अपने मूह में भर लिया…!!
मे पलंग के नीचे खड़ा था और भाभी अपने घुटने मोड़ कर पलंग के सिरे पर घोड़ी बनी मेरा लंड मूह में लिए थी.., कभी वो मेरे लंड को आधे तक अंदर ले लेती तो कभी खाली सुपाडे को अपनी जीभ गोल-गोल घूमाकर उसे चाटने लगती..,
मेरा लंड भाभी की लार से पूरी तरह लिथड गया.., मोटाई ज़्यादा होने के कारण उमके गले तक की लार अब मूह से टपकने भी लगी.., जिसे वो उसे पूरा बाहर निकाल कर फिरसे उसपर चुपड देती…!
भाभी लंड चूस्ते हुए इस समय किसी पॉर्न स्टार की तरह लग रही थी…!
सुबह सुबह का एरेक्षन कुछ अलग ही होता है.., वैसे भी खाली पेट लंड में कुछ अलग ही स्टॅमिना रहता है..,
मेने अपना हाथ लंबा करके भाभी का गाउन पीछे से उठाकर उनके गले से बाहर निकालकर निशा के उपर फेंक दिया..,
तभी निशा की आँख खुल गयी, अपने सामने खुलेआम रासलीला होते देख वो मूह फाडे हमारी तरफ देखने लगी…, अपनी आँखों के सामने अपनी बड़ी बेहन की चौड़ी गान्ड देख कर वो कुछ कहने ही वाली थी…!
इससे पहले कि वो कुछ बोले – मेने उंगली से उसे चुप रहने का इशारा किया..,
भाभी मेरा लंड चूसने में मगन थी.., तभी पीछे से निशा ने भी अपना मूह भाभी की गान्ड की खुली दरार में घुसा दिया…!
एक साथ गान्ड पर निशा की जीभ का गीलापन पाकर उनकी गान्ड एक पल के लिए इधर से उधर हिली.., वो मेरे लंड से अपना मूह हटाकर पीछे को मुड़कर देखना चाहती थी लेकिन मेने अपने दोनो हाथों से उनके सिर को अपने लंड पर दबाए रखा…!
झुक कर मेने भाभी की गोरी चौड़ी चिकनी पीठ को चूमकर उनके दोनो लटकते हुए खरबूजों को अपने हाथों में थाम लिया और उन्हें मीँजने लगा…!
पीछे से चूत की चटाई, मूह में गरम गरम मोटा तगड़ा लंड और चुचियों की मीन्जायि से भाभी की चूत निशा के होठों के बीच फड़ फडाने लगी…!
मेरा लंड अपने मूह से बाहर करके मेरी ओर देखते हुए बोली – अब डाल दो लल्ला इसे मेरी चूत में.., अब ये पूरी तरह से अंदर जाने के लिए तैयार है.., और अब मुझे भी सबर नही हो पा रहा…!
जो हुकुम मेरे आका कहकर मेने भाभी को पलंग पर धकेल दिया, नीचे खड़े खड़े ही उनकी मोटी-मोटी केले के तने जैसी चिकनी जांघों के नीचे हाथ डालकर उपर किया..,
ऐसा करने से उनकी चूत के होठ अपने आप खुल गये.., खुले हुए होठों के बीच मेने अपना खूँटा टीकाया, अपना एक घुटना पलंग पर टिका कर मेने उनकी रस से सराबोरे मुनिया में पूरा का पूरा लंड एक ही झटके में जड़ तक पेल दिया…!
आअहह…. मूह से कराह निकालते हुए भाभी का मूह खुल गया और वो आगे को सिर उठाकर दोहरी होकर अपनी चूत को देखने लगी…!
हाए लल्लाअ…आहह…पूरा ही डाल दिया तुमने.., थोड़ा आराम से डाला करो…!
सॉरी भाभी.., आपकी चूत के खुले होठ देख कर इस मादरचोद को सबर नही हुआ..,
भाभी ने हँसते हुए एक चपत मेरी जाँघ पर मारी और एक लंबी साँस छोड़ते हुए बोली – बदमाश.. कहीं के.. बहाने बनाना तो कोई तुमसे सीखे…!
ये क्यों नही कहते कि औरत को कराहने पर मजबूर करने की तुम्हें आदत सी पड़ गयी है.., चलो अब शुरू करो.., ये कहते हुए उन्होने खुद ही अपनी गान्ड को उचका दिया…!
मेने अपने मूसल को एक बार भाभी की रसीली चूत से बाहर खींचा.., और फिर से अंदर पेल दिया…,
आअहह….सस्सिईइ…लल्लाअ… क्या मस्त मूसल है तुम्हारा.., साली चूत पड़पाड़ने लगती है.., उउउफ़फ्फ़ पेलो मेरे देवर रजाअ…, अपनी भाभी की चूत को फाड़कर उसका पोखरा ही बना दो…!
निशा भाभी के बाजू में मेरी तरफ गान्ड औंधी करके बैठ गयी और वो दोनो एक दूसरे के होठों को चूसने लगी.., साथ ही उनके हाथ एक दूसरे की चुचियों से खेल रहे थे…!
मेने भाभी की चूत में धक्के लगाते हुए अपना एक हाथ निशा की मखमली गद्देदार गान्ड पर फिराया और फिर अपनी उंगलियों को उसकी मदमस्त गान्ड की गहरी दरार में सैर करने के लिए छोड़ दिया…!
कुछ देर में ही भाभी का मज़ा बढ़ने लगा.., अब वो भी नीचे से अपनी गान्ड उचका उचका कर मेरे लंड को अपनी चूत की गहराइयों में उतारने लगी…!
मेने निशा की कमर में हाथ डालकर भाभी के उपर खींच लिया.., अब वो भाभी के दोनो तरफ अपने घुटने मोड़ कर मेरे सामने अपनी गान्ड करके घोड़ी की तरह औंधी हो गयी…!
मेने उसकी सुर्मयि गान्ड के फूल को अपनी उंगलियों से सहलाते हुए अपना अंगूठा उसके छेद में सरका दिया…!
भाभी की चुचियों का रस चचोर्ते हुए उसने अपनी गान्ड के छेद को मेरे अंगूठे पर कस दिया…,
भाभी को अब रुकना मुश्किल होता जा रहा था.., उनकी गान्ड के उच्छलने की रफ़्तार तेज़ी पकड़ती जा रही थी.., कुछ ही धक्कों में उनकी कमर हवा में लहराई और अपनी चूत को मेरे लंड पर दबाकर वो बुरी तरह से झड़ने लगी…!
दो पल तरकर मेने अपना मूसल जैसा लंड उनकी चूत से बाहर निकाला जो भाभी की चूत के कमरस से सराबोर होकर चमक रहा था…!
मेरे सामने औंधी खड़ी निशा की चूत भी अब टपकने लगी थी.., सो भाभी की चूत से लंड निकालकर मेने निशा की चूत में पेल दिया…!
करारे धक्के की वजह से निशा बुरी तरह से हिल गयी.., उसका सिर उपर को हवा में उठ गया.., मेने उसे भाभी की चुचियों पर दबाते हुए अपने धक्के लगाने शुरू कर दिए…!!!
दोनो घोड़ियों को चोदते चोद्ते आधा घंटा से भी ज़्यादा बीत चुका था.., आख़िरकार मेरा भी लंड जबाब दे गया और मे भी निशा के साथ ही झड़कर उसकी चौड़ी चकली पीठ पर पसर गया जो अब मेरे वजन से भाभी के उपर गिर पड़ी थी…!!!
शाम को रूचि की ट्यूशन क्लास होती थी.., मेने ललित को उसके साथ जाने के लिए बोल दिया था.., साथ ही वो भी उसकी मेडम से कुछ सीख लेगा..,
एग्ज़ॅम में ज़्यादा समय तो नही था.., लेकिन मेने रूचि के स्कूल में ही जो कि अब मे ही उसका चेर्मन था सो ललित को 9थ का एग्ज़ॅम देने की व्यवस्था करा दी थी.!
अगर पास ना भी हो तो भी वो अगले साल बोर्ड का एग्ज़ॅम तो दे सकेगा…!
मे पलंग के नीचे खड़ा था और भाभी अपने घुटने मोड़ कर पलंग के सिरे पर घोड़ी बनी मेरा लंड मूह में लिए थी.., कभी वो मेरे लंड को आधे तक अंदर ले लेती तो कभी खाली सुपाडे को अपनी जीभ गोल-गोल घूमाकर उसे चाटने लगती..,
मेरा लंड भाभी की लार से पूरी तरह लिथड गया.., मोटाई ज़्यादा होने के कारण उमके गले तक की लार अब मूह से टपकने भी लगी.., जिसे वो उसे पूरा बाहर निकाल कर फिरसे उसपर चुपड देती…!
भाभी लंड चूस्ते हुए इस समय किसी पॉर्न स्टार की तरह लग रही थी…!
सुबह सुबह का एरेक्षन कुछ अलग ही होता है.., वैसे भी खाली पेट लंड में कुछ अलग ही स्टॅमिना रहता है..,
मेने अपना हाथ लंबा करके भाभी का गाउन पीछे से उठाकर उनके गले से बाहर निकालकर निशा के उपर फेंक दिया..,
तभी निशा की आँख खुल गयी, अपने सामने खुलेआम रासलीला होते देख वो मूह फाडे हमारी तरफ देखने लगी…, अपनी आँखों के सामने अपनी बड़ी बेहन की चौड़ी गान्ड देख कर वो कुछ कहने ही वाली थी…!
इससे पहले कि वो कुछ बोले – मेने उंगली से उसे चुप रहने का इशारा किया..,
भाभी मेरा लंड चूसने में मगन थी.., तभी पीछे से निशा ने भी अपना मूह भाभी की गान्ड की खुली दरार में घुसा दिया…!
एक साथ गान्ड पर निशा की जीभ का गीलापन पाकर उनकी गान्ड एक पल के लिए इधर से उधर हिली.., वो मेरे लंड से अपना मूह हटाकर पीछे को मुड़कर देखना चाहती थी लेकिन मेने अपने दोनो हाथों से उनके सिर को अपने लंड पर दबाए रखा…!
झुक कर मेने भाभी की गोरी चौड़ी चिकनी पीठ को चूमकर उनके दोनो लटकते हुए खरबूजों को अपने हाथों में थाम लिया और उन्हें मीँजने लगा…!
पीछे से चूत की चटाई, मूह में गरम गरम मोटा तगड़ा लंड और चुचियों की मीन्जायि से भाभी की चूत निशा के होठों के बीच फड़ फडाने लगी…!
मेरा लंड अपने मूह से बाहर करके मेरी ओर देखते हुए बोली – अब डाल दो लल्ला इसे मेरी चूत में.., अब ये पूरी तरह से अंदर जाने के लिए तैयार है.., और अब मुझे भी सबर नही हो पा रहा…!
जो हुकुम मेरे आका कहकर मेने भाभी को पलंग पर धकेल दिया, नीचे खड़े खड़े ही उनकी मोटी-मोटी केले के तने जैसी चिकनी जांघों के नीचे हाथ डालकर उपर किया..,
ऐसा करने से उनकी चूत के होठ अपने आप खुल गये.., खुले हुए होठों के बीच मेने अपना खूँटा टीकाया, अपना एक घुटना पलंग पर टिका कर मेने उनकी रस से सराबोरे मुनिया में पूरा का पूरा लंड एक ही झटके में जड़ तक पेल दिया…!
आअहह…. मूह से कराह निकालते हुए भाभी का मूह खुल गया और वो आगे को सिर उठाकर दोहरी होकर अपनी चूत को देखने लगी…!
हाए लल्लाअ…आहह…पूरा ही डाल दिया तुमने.., थोड़ा आराम से डाला करो…!
सॉरी भाभी.., आपकी चूत के खुले होठ देख कर इस मादरचोद को सबर नही हुआ..,
भाभी ने हँसते हुए एक चपत मेरी जाँघ पर मारी और एक लंबी साँस छोड़ते हुए बोली – बदमाश.. कहीं के.. बहाने बनाना तो कोई तुमसे सीखे…!
ये क्यों नही कहते कि औरत को कराहने पर मजबूर करने की तुम्हें आदत सी पड़ गयी है.., चलो अब शुरू करो.., ये कहते हुए उन्होने खुद ही अपनी गान्ड को उचका दिया…!
मेने अपने मूसल को एक बार भाभी की रसीली चूत से बाहर खींचा.., और फिर से अंदर पेल दिया…,
आअहह….सस्सिईइ…लल्लाअ… क्या मस्त मूसल है तुम्हारा.., साली चूत पड़पाड़ने लगती है.., उउउफ़फ्फ़ पेलो मेरे देवर रजाअ…, अपनी भाभी की चूत को फाड़कर उसका पोखरा ही बना दो…!
निशा भाभी के बाजू में मेरी तरफ गान्ड औंधी करके बैठ गयी और वो दोनो एक दूसरे के होठों को चूसने लगी.., साथ ही उनके हाथ एक दूसरे की चुचियों से खेल रहे थे…!
मेने भाभी की चूत में धक्के लगाते हुए अपना एक हाथ निशा की मखमली गद्देदार गान्ड पर फिराया और फिर अपनी उंगलियों को उसकी मदमस्त गान्ड की गहरी दरार में सैर करने के लिए छोड़ दिया…!
कुछ देर में ही भाभी का मज़ा बढ़ने लगा.., अब वो भी नीचे से अपनी गान्ड उचका उचका कर मेरे लंड को अपनी चूत की गहराइयों में उतारने लगी…!
मेने निशा की कमर में हाथ डालकर भाभी के उपर खींच लिया.., अब वो भाभी के दोनो तरफ अपने घुटने मोड़ कर मेरे सामने अपनी गान्ड करके घोड़ी की तरह औंधी हो गयी…!
मेने उसकी सुर्मयि गान्ड के फूल को अपनी उंगलियों से सहलाते हुए अपना अंगूठा उसके छेद में सरका दिया…!
भाभी की चुचियों का रस चचोर्ते हुए उसने अपनी गान्ड के छेद को मेरे अंगूठे पर कस दिया…,
भाभी को अब रुकना मुश्किल होता जा रहा था.., उनकी गान्ड के उच्छलने की रफ़्तार तेज़ी पकड़ती जा रही थी.., कुछ ही धक्कों में उनकी कमर हवा में लहराई और अपनी चूत को मेरे लंड पर दबाकर वो बुरी तरह से झड़ने लगी…!
दो पल तरकर मेने अपना मूसल जैसा लंड उनकी चूत से बाहर निकाला जो भाभी की चूत के कमरस से सराबोर होकर चमक रहा था…!
मेरे सामने औंधी खड़ी निशा की चूत भी अब टपकने लगी थी.., सो भाभी की चूत से लंड निकालकर मेने निशा की चूत में पेल दिया…!
करारे धक्के की वजह से निशा बुरी तरह से हिल गयी.., उसका सिर उपर को हवा में उठ गया.., मेने उसे भाभी की चुचियों पर दबाते हुए अपने धक्के लगाने शुरू कर दिए…!!!
दोनो घोड़ियों को चोदते चोद्ते आधा घंटा से भी ज़्यादा बीत चुका था.., आख़िरकार मेरा भी लंड जबाब दे गया और मे भी निशा के साथ ही झड़कर उसकी चौड़ी चकली पीठ पर पसर गया जो अब मेरे वजन से भाभी के उपर गिर पड़ी थी…!!!
शाम को रूचि की ट्यूशन क्लास होती थी.., मेने ललित को उसके साथ जाने के लिए बोल दिया था.., साथ ही वो भी उसकी मेडम से कुछ सीख लेगा..,
एग्ज़ॅम में ज़्यादा समय तो नही था.., लेकिन मेने रूचि के स्कूल में ही जो कि अब मे ही उसका चेर्मन था सो ललित को 9थ का एग्ज़ॅम देने की व्यवस्था करा दी थी.!
अगर पास ना भी हो तो भी वो अगले साल बोर्ड का एग्ज़ॅम तो दे सकेगा…!