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लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस) complete

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मेरी बात सुनकर उसने उपेक्षा से सर घुमा लिया…

फिर मेने अपने मोबाइल में एक फोटो ओपन कर के उसके सामने कर दिया जिसमें

मालती नंग-धड़ंग अपने घुटनों पर बैठी, अपनी चूत में उंगली डाले हुए मेरा लंड चूस रही थी…

मेरा चेहरा तो उसमें था नही… वो फोटो दिखाते हुए मेने कहा – इस फोटो को देख कर बताना… ये कॉन है…?

फोटो देखते ही भानु के होश उड़ गये… उसके होंठ सुख गये, आवाज़ गले में ही अटकी रह गयी…

मेने फिर पूछा – बताओ भानु भैया… ये कॉन है…?

वो हकलाते हुए बोला – य.ये.ये…ये फोटो तुम्हें कहाँ से मिली… और ये लड़का कॉन है…?

मे – मेने इस फोटो के बारे में पूछा है.. क्या तुम इस लड़की को जानते हो…?

वो – नही ! मे नही जानता ये कॉन है…!

मे – चलो कोई नही, फिर तो कोई बात ही नही है…, चलो ऐसा करते हैं, थोड़ा मनोरंजन करवा देता हूँ तुम्हें और मेने मालती के साथ की हुई चुदाई का वीडियो चला दिया,

जिसमें मेरी आवाज़ म्युट की हुई थी, और सिर्फ़ मेरा पिच्छवाड़ा ही दिखाई दे रहा था..,

अगर कहीं मेरा थोबड़ा दिखना होता, वहाँ शेड कर दिया था,

ऑडियो और वीडियो जैसे- 2 चलता गया…, भानु के होश गुम होते गये… गुस्से में उसकी आँखें लाल हो गयी…गला सूखने लगा…

इससे पहले की वो छोटी सी क्लिप ख़तम हो पाती उसके गले से गुर्राहट निकलने लगी.. और वो मेरे मोबाइल की ओर झपटा…

मेने अपना हाथ पीछे खींच लिया…, तो वो गुर्राते हुए बोला – मे तेरा खून पी जाउन्गा हरामजादे…ये कहते ही उसने मेरे ऊपर झपट्टा मारा…

तडाक….मेरा भरपूर तमाचा उसके गाल पर पड़ा…., वो पीछे को उलट गया…, फिर मेने उसका गिरेबान थाम कर एक और तमाचा उल्टे हाथ का दूसरे गाल पर जड़ दिया..

और सर्द लहजे में मेने उससे कहा - जब तुझे पता है, कि तू मेरी झान्टे भी नही उखाड़ सकता तो ये हिमाकत क्यों की…?

दूसरी बात ! जब तू इस लड़की को जानता ही नही.. तो फिर इतना भड़क क्यों रहा है…?

वो चिल्लाते हुए बोला – ये मेरी बीवी है हरामज़ादे… बता ये वीडियो कब और किसके साथ लिया है तूने…?

मे – चिल्लाना बंद कर भानु..! वरना वो गत करूँगा.. कि तेरा बाप भी तुझे पहचानने से इनकार कर देगा…!

इससे पहले कि में तेरे खानदान की इज़्ज़त की और धज्जियाँ उड़ा दूं.. और इस वीडियो को इंटरनेट पर डाउनलोड करूँ,

जिसे सारी दुनिया के मर्द देख-देख कर तेरी मस्त जवान बीवी के बदन को सोच-सोच कर मूठ मारें…!

और अगर फिर भी तुझे अपनी बीवी की इज़्ज़त प्यारी ना हो तो मे इसे अदालत में भी पेश कर सकता हूँ, जहाँ दो मिनिट में ये साबित हो जाएगा की तू कितना बड़ा झूठा है,

तू सारी दुनिया के सामने नंगा हो जाएगा…, फिर बजाते रहना अपने खानदान की इज़्ज़त की धज्जियाँ…

इसलिए अब मेरी बात ध्यान से सुन…अगर तू चाहता है कि ये वीडियो कोई और ना देखे, या अदालत के सामने ना आए…, तो तुझे मेरी कुछ शर्तें माननी पड़ेंगी…

वो झट से मेरी तरफ देखने लगा, उसके पास और कोई चारा नही बचा था, सो अपने कंधे झुका कर हथियार डाल दिए और गिड-गिडाते हुए बोला…

मुझे तुम्हारी हर शर्त मंजूर है अंकुश, पर इस वीडियो को किसी और को मत दिखाना प्लीज़… वरना मेरे खानदान की इज़्ज़त मिट्टी में मिल जाएगी…,

हम किसी को मुँह दिखाने लायक नही रहेंगे, हम बर्बाद हो जाएँगे…

मे – तो अब मेरी शर्तें सुन…

शर्त नंबर. 1 – तुझे राजेश के खिलाफ किया गया केस वापस लेना होगा, ये कह कर कि चाकू मेरी ही ग़लती से लगा था, वो तो सिर्फ़ अपना बचाव कर रहा था…

वो – लेकिन ऐसे तो मे फँस जाउन्गा…

मे – तुझे जैल नही होगी, ये वादा है मेरा, हां कुछ मुआवज़ा ज़रूर देना पड़ेगा… जो तेरे लिए कोई बड़ी बात नही है…

उसने हां में गर्दन हिला दी…

शर्त नंबर. 2 – तू मालती से कुछ नही कहेगा, और उसे एक अच्छे पति की तरह ही रखेगा… अगर तूने उसे कुछ भी नुकसान पहुँचाया तो समझ ले मे क्या कर सकता हूँ…,

वो तुरंत बोल पड़ा – मुझे मंजूर है…

शर्त नंबर. 3 – निशा की इज़्ज़त पर तूने किसी के कहने पर हाथ डाला था, मुझे उसका नाम और कारण चाहिए…

मेरी ये शर्त सुनकर वो सोच में पड़ गया… जब बहुत देर तक उसने कुछ नही बका… तो मेने उसे फिरसे धमकाया…

देख भानु… मुझे पता है… कि ये काम तूने किसी के कहने पर किया था… जिसके लिए तुझे मोटी रकम भी मिली थी…

मेरे मुँह से ये सब सुनकर उसका मुँह खुला का खुला रह गया… लेकिन फिर भी वो बोला कुछ नही… तो मेने फिर आगे कहा…

अगर तूने सच नही बताया तो ये मत समझना कि मे इसका पता नही लगा पाउन्गा… आज नही तो कल, मे ये जानकार ही रहूँगा कि इस सब के पीछे कॉन है…

लेकिन उस सूरत में मेरी कोई गारंटी नही होगी, कि ये वीडियो कोई और ना देख पाए.. तो बेहतर होगा..कि तू इस काम में मेरी मदद कर…

जब सारे रास्ते बंद होते दिखाई दिए तो वो किसी तोते की तरह शुरू हो गया… और उसने सारा राज उगल दिया…. जिसे सुन कर मेरी आँखें फटी रह गयीं…!

मेने भानु को उसकी बिल्डिंग के पास छोड़ा, उसके बाद अपनी बुलेट रानी को घर की तरफ दौड़ा दिया…!

रास्ते में एक बस स्टॉप था, जब मे वहाँ से गुजर रहा था, तो दूर से ही मुझे बीच सड़क पर एक औरत खड़ी दिखाई दी, जो अपने दोनो हाथ ऊपर कर के मुझे रुकने का इशारा कर रही थी…

जैसे ही मे थोड़ा उसके नज़दीक पहुँचा, तो उसे देखते ही मे चोंक पड़ा…, और गाड़ी उसके पास लेजा कर रोड की साइड में खड़ी कर के बोला – अरे वर्षा भौजी आप और यहाँ…?

तब तक उसका पति रवि, बेटे को गोद में लिए वहाँ आ पहुँचा..! मेने उसे देखते हुए कहा-

अरे वाह ! आज तो मियाँ-बीवी दोनो ही शहर में, क्या बात है, भाई… भौजी को साथ रखने लगे हो क्या..?, ये बहुत अच्छा किया आपने…,

कम से कम दोनो साथ रहोगे तो आपस में प्यार बढ़ेगा, और आपको भी खाने-पीने की चिंता नही रहेगी…!

इससे पहले की रवि कुछ बोलता, की वर्षा मुँह बीसूरते हुए बोली – उउन्न्नह…ऐसी अपनी किस्मेट कहाँ देवेर्जी, जो ये हमें शहर में रख सकें… !

वो तो बिट्टू को बड़े हॉस्पिटल में दिखाने लाए थे, इसलिए आ गयी, वरना तो वहीं चूल्हे चौके में ही सारी जिंदगी निकल जाएगी मेरी तो…!

 
मेने चिंतित होते हुए पूछा – अरे क्या हुआ बिट्टू को..? मुझे बताती, मे अच्छे हॉस्पिटल में दिखा देता, मेरी पहचान की डॉक्टर भी है यहाँ सहयोग में…!

रवि – वहीं दिखाया था, कई दिनो से फीवर था इसको, जा ही नही रहा था, पिताजी ने मुझे खबर भेजी, तब मे इन दोनो को ले आया…! वैसे अब ठीक है ये..!

मे – तो अब दो-चार दिन तो और रखोगे भौजी को यहाँ शहर में…!

रवि – अरे भाई कहाँ से रखूं, इतनी जगह ही नही है, शेरिंग में एक कमरा ले रखा है दूसरे एक दोस्त के साथ…!

अभी सोच ही रहा था, कि इन दोनो को गाँव छोड़कर कैसे जल्दी आउ, नाइट शिफ्ट भी करनी है आज…!

तुम्हारी बुलेट की आवाज़ सुनकर वर्षा ही बोली, की शायद ये तो अंकुश देवर्जी की गाड़ी की आवाज़ लगती है, सो इसने रोक लिया…

अब अगर तुम गाँव की तरफ जा रहे हो तो इन दोनो को भी ले जाओ प्लीज़…, मेरी परेशानी बच जाएगी, और आज रात की शिफ्ट भी कर लूँगा…

मे – अरे रवि भैया…, इसमें प्लीज़ कहने की क्या ज़रूरत है, मे तो जा ही रहा हूँ गाँव, ले जाउन्गा, फिर मेने वर्षा की तरफ मुस्कराते हुए कहा-

लेकिन क्या भौजी मेरे साथ आना चाहेंगी…?

वो मेरी मज़ाक को समझते हुए मेरी तरफ देखकर शरारत के साथ इठलाते हुए बोली – हुनह…मे ऐसे ही किसी के साथ कैसे चली जाउ..,

रवि उसकी बात सुनकर हड़बड़ाते हुए बोला…अरे ! ये कैसी बात कर रही हो तुम, अंकुश अपने घर के मेंबर जैसा है, तुम इसके ऊपर शक़ कर रही हो…?

वर्षा और अपने पति की परेशानी बढ़ाते हुए बोली – शक़ की क्या बात है, ये गबरू जवान आदमी, मे बेचारी अकेली जान, कहीं इनकी नीयत बदल गयी तो, ये कहकर उसने मेरी तरफ एक आँख मार दी…!

रवि बैचैन सा होकर बोला– ये कैसी बातें कर रही हो तुम… पागल तो नही हो गयी कहीं…?

इतने भले परिवार का लड़का है, और अभी-अभी शादी हुई है इसकी…

इसपर ऐसा इल्ज़ाम लगा रही हो.. कुछ तो लिहाज करो.. ये बेचारा तो हमारी मदद कर रहा है, और तुम उसी पर शक़ कर रही हो…

मे अपनी बुलेट रानी की सीट पर बैठा, उन दोनो मियाँ बीवी की नोक-झोंक का मज़ा लेते हुए मन ही मन मुस्करा रहा था…!

वर्षा ने एक बार मेरी तरफ तिर्छि नज़र से देखा, जिसमें एक प्रणय निवेदन छिपा था, फिर वो अपने बेटे से बोली – अच्छा तू बता बिट्टू, इन अंकल के साथ गाँव चलें क्या..?

बिट्टू तपाक से बोला - हां मम्मी, मे तो अंकल के साथ ही जाउन्गा, ये अंकल मुझे बहुत अच्छे लगते हैं, मुझे बहुत प्यार करते हैं…!

रवि – देखा ! बिट्टू भी अच्छे बुरे को समझता है, और तुम हो की…

वो बेचारा अभी अपनी बात ठीक से ख़तम भी नही कर पाया था, कि वर्षा मुँह मटकाते हुए बोली – ठीक है, ज़्यादा सफाई देने की ज़रूरत नही है, चले जाएँगे हम इनके साथ, आप अपनी ड्यूटी करो…

ये बात उसने ऐसे अंदाज में कही मानो, कोई बहुत बड़ा एहसान कर दिया हो बेचारे के ऊपर…

मेने बिट्टू को अपने आगे बिठाया, और वर्षा रानी मेरे पीछे ऐसे बैठ गयी, जैसे कोई बहुत बड़ी पतिव्रता स्त्री, मजबूरी में किसी के साथ बैठ कर जा रही हो…

रवि को बाइ बोलकर हम वहाँ से चल दिए, वो जैसे ही वर्षा की आँखों से ओझल हुआ, कि वो पट्ठी मेरी पीठ से किसी छिपकलि की तरह चिपक गयी…

और मेरे गले पर किस कर के मेरे कान में फुफुसा कर बोली – बिट्टू के पापा ! बहुत दिनो में हाथ आए हो, आज नही छोड़ूँगी तुम्हें…

मेने थोड़ा सर उसकी तरफ मोड़ कर कहा – ये क्या कह रही हो..? बिट्टू साथ में है, कैसे वो सब….?

वो ठुनक कर बोली – वो सब मुझे कुछ नही पता, बस आज होना है तो होना है..चाहे कैसे भी करो…!

मेने गाड़ी चलाते हुए ही सारा प्लान बना लिया था, फिर दोनो माँ बेटों को एक अच्छी सी दुकान में ले गया, उनके मन पसंद के कपड़े दिलवाए…

फिर कुछ और शॉपिंग करवाई, बिट्टू को खिलौने दिलवाए, दोनो बहुत खुश हो गये…, उसके बाद एक पार्क में ले जाकर घुमाया, बिट्टू को झूलों पर झूलाया..

शाम तक उन्हें शहर घुमाकर एक होटेल में ले गया, और एक रूम रात भर के लिए किराए पर लेकर रात गुजारने की सोची…

मेरी प्लॅनिंग देखकर वर्षा भाव-भिभोर हो गयी…

कमरे में आकर फ्रेश हुए, जल्दी खाना खाया, खाना खाते हुए मेने बिट्टू से पूछा – बिट्टू बेटा ! कैसा लगा अपने अंकल के साथ घूमकर…

उसने जबाब देने से पहले मेरे बगल में खड़े होकर गाल पर किस किया और तब बोला – थॅंक यू अंकल, बहुत मज़ा आया मुझे…!

मे – लेकिन बेटा अंकल की एक बात मानोगे..? वो मेरी तरफ देखने लगा, मानो पुच्छ रहा हो कि क्या..?

मेने कहा – मे तुम्हें ऐसे ही खिलौने और चॉकलेट खिलाया करूँगा अगर ये बात किसी को नही बताओगे तो, कि तुमने आज मेरे साथ मज़ा किया…

उसने अपना सर हिलाकर हामी भर दी, फिर सारे दिन की भागदौड़, और बिट्टू की तबीयत अभी भी थोड़ी नाज़ुक थी, सो दवा देकर वो टॅप से सो गया…!

वर्षा इसी पल के इंतेज़ार में थी, सो उसके सोते ही वो मेरे बदन से जोंक की तरह चिपक गयी, चुंबनों से उसने मेरे पूरे चेहरे को गीला कर दिया और नम आँखों से बोली…

थॅंक यू देवर जी, आज मेरी इच्छा का सम्मान कर के आपने साबित कर दिया कि अभी भी आपके दिल में हमारे लिए कितना प्यार है…!

आज हमारे बेटे ने भी जाना है, कि माँ-बाप का बच्चों के प्रति कैसा प्यार होना चाहिए…, बेचारा ऐसे प्यार के लिए कब्से तड़प रहा था…!

मेने उसे अपनी बाहों में भरकर उसके रसीले होंठों को चूमकर कहा – लेकिन बिट्टू को समझा देना कि ये सब बातें वो घर पर किसी को ना बताए, वरना खम्खा सब लोग शक़ करेंगे..!

वो मेरे बालों भरे सीने में अपनी उंगलिया घूमाते हुए बोली – वो सब आप मुझपर छोड़ दो, वैसे भी मे घर में किसी की परवाह नही करती..

ये कहकर वो मेरे लंड को नंगा कर के अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी…

कुछ ही पलों में हम दोनो के शरीर से कपड़े गायब हो गये…वर्षा इतनी चुदासी हो रही थी, उससे सब्र करना दूभर हो रहा था,

सो मुझे पलंग पर धक्का देकर, मेरे मूसल जैसे लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर अपनी रस से लब-लबा रही चूत के मुँह पर रखा, और उसपर बैठती चली गयी..!

बहुत दिनो बाद वो मेरे लंड को अपनी चूत में ले रही थी, सो जब मेरा मोटा सोट जैसा लंड उसकी कसी हुई चूत को चीरता हुआ अंदर गया…

दर्द की एक लहर उसके बदन में दौड़ गयी, लेकिन उसने अपने होंठों को कसकर भींच लिया, और धीरे-2 कर के मेरे पूरे लंड को अपनी चूत में निगल लिया…

फिर हाँफती हुई सी वो मेरे ऊपर लेट गयी, और मेरे होंठों को चूमकर बोली – आअहह…..कितने दिनो से राह देख रही थी इसकी…असल लंड तो ये है…

 
अबतक तो जैसे उंगली से ही काम चला रही थी…, आज मुझे इतना प्यार दो मेरे राजा, कि मे सारी दुनिया को भूल जाउ…

फिर उसने धीरे – 2 मेरे लंड पर उठना-बैठना शुरू किया…मेने उसकी गदराई हुई गोल-गोल दूध जैसी गोरी-गोरी मखमल जैसी मुलायम चुचियों को अपने हाथों में भर लिया…

चुचियों को मीजते ही वो सिसकियाँ भरने लगी और अपनी कमर को तेज़ी से चलाने लगी…

उसकी कसी हुई चूत मारने में मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था…

उस रात वर्षा, ना तो खुद सोई, और ना ही मुझे सोने दिया.. सारी रात अलग-अलग तरीकों से मेने उसकी सालों पुरानी प्यास को बुझा दिया…!

कितनी ही देर वो सुबक्ते हुए मेरे सीने पर पड़ी रही…फिर जब लगा कि अब बिट्टू जागने वाला है, तब हम दोनो अलग हुए…

फ्रेश होकर चाय नाश्ता किया और उन दोनो माँ-बेटों को अपनी बुलेट पर बिठाकर गाँव की तरफ चल दिया…!

आज राजेश के केस की सुनवाई थी…, एक दिन पहले मे राजेश को लेकर उनकी ससुराल गया….

उनके जैल जाने के बाद ही उनकी पत्नी भी घर छोड़कर अपने मायके जाकर बैठ गयी थी.. जो ये दर्शाता था, कि उसको भी अपने पति पर विश्वास नही था…

राजेश तो जाने से ही मना कर रहे थे, लेकिन मेरे और वाकी लोगों के समझाने के बाद वो जाने के लिए तैयार हुए…

राजेश की पत्नी शर्मिंदगी के मारे नज़र चुरा रही थी… मेने उससे कहा –

भाभी जी, पति पत्नी के रिश्ते की नींव एक अटूट विश्वास पर टिकी होती है.. भले ही दुनिया उसके पति के खिलाफ खड़ी क्यों ना हो जाए, अगर उसकी पत्नी उसके साथ है तो वो हर कठिनाई का मुकाबला कर सकता है…

लेकिन आपने तो उनका साथ उस समय पर छोड़ दिया, जब उन्हें आपके साथ की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, क्या सात फेरों में यही वचन याद किए थे आपने…?

वो रोते हुए बोली – मुझे माफ़ कर दीजिए जीजा जी… मेने इन पर विश्वास नही किया… अब मे अपने बच्चे की कसम खाती हूँ आइन्दा ऐसी ग़लती कभी नही होगी..

और वो राजेश के पैरों में गिर पड़ी, रोते गिड-गिडाते हुए माफी माँगने लगी.. राजेश ने मेरी तरफ देखा…

मेने इशारा किया.. तो उसने उसके कंधे पकड़ कर उठाया.. और उसके आँसू पोन्छ्ते हुए कहा – कोई बात नही नीलू ग़लती इंसान से ही होती है…

फिर वो हमारे साथ ही विदा होकर आ गयी.., राजेश भाई उसे अपने घर लेगये…

दूसरे दिन कोर्ट में…………….,

अब मात्र फॉरमॅलिटीस ही वाकी थी, मुझे पता था भानु अपनी ग़लती मान कर केस वापस ले लेगा..

और हुआ भी यही…, पोलीस कोई सबूत दे नही पाई, और भानु ने अपना गुनाह कबूल कर लिया…

कोर्ट ने उसे गुमराह करने के जुर्म में 10 लाख जुर्माने के तौर पर रकम राजेश को देने के लिए कहा.. जो उसने मान लिया…

सूर्या प्रताप इसके लिए तैयार नही था, वो तो अपने लड़के द्वारा लिए गये इस निर्णय के ही खिलाफ था, फिर ना जाने भानु ने उसे क्या कहा कि वो भी ठंडा पड़ गया…

राजेश को कोर्ट ने बा-इज़्ज़त बरी कर दिया… सभी खुश थे…

लेकिन मे इस जड्ज्मेंट से खुश नही था, इसलिए मेने पोलीस पर मान हानि का केस डाल दिया… जिसकी लापरवाही, या कहें मुजरिम का साथ देने का मामला बनाया गया…

उस समय कोर्ट में उस एरिया का इनस्पेक्टर ही उपस्थित था… जिसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी…

जड्ज साब ने पोलीस को फटकार लगाते हुए… मामले पर सफाई देने को कहा… और जल्दी से जल्दी अगली तारीख मुक़र्रर कर दी…

घर के सभी बड़े लोगों ने मुझे समझाने की कोशिश की लेकिन मेने उनसे कहा… कि राजेश भाई को सताने वालों को अपनी करनी का ख़ामियाजा भुगतना ही होगा…

मेरी पहली सफलता जो कि पहली ही सुनवाई में एक 307 के केस को रफ़ा दफ़ा करा दिया था.. पूरे डिस्टिक लेवल पर फैल गयी… और लोगों की ज़ुबान पर मेरा नाम आने लगा…

अब मेने डिसाइड कर लिया कि मुझे यहीं रह कर अपनी प्रॅक्टीस शुरू कर देनी चाहिए..

अपने गुरु की पर्मिशन और आशीर्वाद लेकर, डिस्टिक कोर्ट के बाहर मेने भी अपनी दुकान जमा दी… और एक लड़के को वहाँ बिठा दिया………!

एक रोज़ सनडे का दिन था, हम सभी चौपाल पर बैठे ऐसे ही घर गाँव की चर्चा कर रहे थे आपस में,

भैया और बाबूजी के अलावा छोटे और मनझले चाचा और उनका बेटा सोनू भी थे..

तभी हमें पोलीस सायरेन की आवाज़ सुनाई दी जो धीरे- 2 हमारे घर की तरफ ही बढ़ रही थी…

हम सब चौपाल की तरफ आने वाले रास्ते पर देखने लगे… मुझे कुछ- 2 संभावना थी इसकी, लेकिन वाकी लोगों को ये किसी अनिष्ट की आशंका लग रही थी सो बाबूजी बोल पड़े..

अब ये पोलीस हमारे यहाँ क्यों आ रही है…?

मे – आने दीजिए बाबूजी… ? उन्हें हमसे कोई काम होगा..?

भैया – लेकिन हमसे पोलीस को अब क्या काम पड़ गया… पहले तो कभी आई नही..

मे – आप लोग इतने चिंतित क्यों हो रहे हैं.. आने दीजिए, देखते हैं.. क्या काम है…!

इतने में सिटी एसपी की कार, उसके पीछे को की जीप और एक लोकल थाने की जीप हमारे चौपाल के पास आकर रुकी…

पोलीस की तीन-2 गाड़ियों को हमारे यहाँ आया देख मोहल्ले के दूसरे लोग भी आ गये…

 
एसपी की गाड़ी से कृष्णा भैया..उतर कर चौपाल पर आए… पीछे – 2 अन्य पोलीस वाले भी थे…

हमने सबके बैठने की लिए कुर्सी डाल दी… लेकिन वो अपने ऑफीसर के सामने बैठ नही सकते थे… सो आकर खड़े हो गये…

भैया ने बाबूजी के पाँव छुये… मुझे ये देख कर बड़ा ताज्जुब हुआ कि उन्होने भैया और वाकी बड़ों के पैर नही छुये…

खैर मेने बड़े भाई के नाते उनके पैर छुये… तो वो कॉँमेंट पास करते हुए बोले – अरे आप रहने दीजिए वकील साब… वरना और कोई केस लाद देंगे हमारे ऊपर…

बाबूजी को उनकी ये बात नागवार गुज़री, अतः वो थोड़े नाराज़गी वाले स्वर में बोले–

आते ही ऐसी बातें ना करो कृष्णा.. वो छोटे भाई के नाते तुम्हारे पैर लग रहा है…, पद के घमंड में तुम तो अपने बड़ों को भूल ही गये हो…

बाबूजी की बात सुनकर वो खिसियानी सी हसी हँसते हुए बोले – ऐसा कुछ नही है बाबूजी.. और फिर भैया और चाचों के भी पैर छु लिए…

फिर बाबूजी ने मुझसे कहा – जा बेटा, अंदर जा कर सबके लिए चाय पानी का इंतेज़ाम करवा दे…

मे अंदर जाने लगा तो कृष्णा भैया ने रोकते हुए कहा – चाय –वाय रहने दे अंकुश, तू यहीं बैठ, मुझे तुमसे ही बात करनी थी…

मे – बस 10 मिनिट की बात है, तब तक आप बाबूजी से बात करिए.. मे अभी चाय लेकर आता हूँ..

इतना कहकर मे अंदर गया, तो भाभी ने पुच्छ लिया – ये बड़े देवर जी क्यों आए हैं अब यहाँ…?

मे – आपको तो पता ही है, पोलीस बिना गर्ज के तो आती नही है… मुझसे ही काम है.. नाक में नकेल जो डाल रखी है मेने…

निशा – मुझे तो डर लग रहा है दीदी… कहीं कुछ गड़बड़ ना हो…

मेने हँसते हुए कहा – तुम किधर से पढ़ लिख गयी हो यार निशु… इतना भी नही समझती.. कि मेने पोलीस के ऊपर मानहानि का केस किया हुआ है.. तो डर किसको होगा…?

भाभी – पोलीस का कोई भरोसा नही होता है लल्ला जी… कब क्या केस लगा दे..

मे – आप चिंता छोड़ो, और फिलहाल 8-10 चाय का जल्दी से इंतेज़ाम करो… वाकी सब अपने इस लाड़ले पर छोड़ दो… मे सब संभाल लूँगा…

मे जब चाय लेकर बाहर आया, सबको चाय सर्व की, फिर चाय पीते हुए बाबूजी बोले – बेटा छोटू, कृष्णा का कहना है, कि तुमने पोलीस के ऊपर जो केस किया है, उसे वापस ले लो..

सुनकर मेरे चहरे पर मुस्कान आ गयी.. और मेने उनसे कहा – आप क्या कहते हो बाबूजी… क्या मेने कुछ ग़लत किया है…?

पोलीस की ग़लती की वजह से एक इंसान को 6-7 महीने जैल में काटने पड़े… उसके परिवार को कितनी मुशीवतें उठानी पड़ी…

यही नही.. आप लोग कितने परेशान रहे.. राजेश भाई की बीवी अपने बच्चे को लेकर चली गयी… उसको नौकरी से निकाल दिया गया… किसकी वजह से, क्या ये ग़लत नही हुआ उनके साथ…?

एक तरह से उनकी पूरी लाइफ बरवाद हो गयी, किसकी ग़लती की वजह से..?

कृष्णा – मे मानता हूँ भाई… कि राजेश के साथ ग़लत हुआ है… और उसके लिए मेने उस सारे स्टाफ को लाइन हाज़िर कर दिया है…

मे – वाह भैया… वाह ! क्या सज़ा दी है. उन चोरों को आपने जिन्होने सूर्य प्रताप से पैसे खाकर एक निर्दोष को फसाया… और उसे जैल में सड़ने पर मजबूर कर दिया..

ऐसा कर के तो आपने अपने चम्चो की गिनती ही बढ़ा ली है…

वो – इससे ज़्यादा मे उन्हें सज़ा नही दे सकता था… लेकिन अब इस केस का सीधा असर मेरे ऊपर पड़ सकता है, इस सबका मुझे ही जबाब देना पड़ रहा है… ये तो तुम भी जानते हो..

मे – तो क्या आप ज़िम्मेदार नही हो इसके..? आज आप भाई के रिश्ते की दुहाई दे रहे हो, उस दिन तो बाबूजी का भी मान नही रखा था आपने… और कोर्ट की दुहाई देकर चले गये थे…

क्या मे ये भी समझाऊ कि उस वक़्त आप क्या कर सकते थे, या आपको पता नही था, कि आपकी पोलीस क्या कर रही है..?

वो – तू कहना क्या चाहता है.. कि मेने इसे जानबूझ कर नज़र अंदाज़ किया था…?

मे – बिल्कुल ! मे यही कहना ही नही चाहता… बल्कि कह रहा हूँ…! अगर आप चाहते तो राजेश भाई एक दिन भी जैल में नही रहते… लेकिन आपने ऐसा नही किया…

वो – मे भला ऐसा क्यों चाहूँगा… वो मेरा भी रिश्तेदार है…

मे – एग्ज़ॅक्ट्ली ! यही तो वो कारण था, जिसने आपको हम लोगों की मदद करने से रोक दिया था…,

और वो वजह मे जानता हूँ… तो बेहतर होगा… कि अब हम कोर्ट में ही मिलें….!

मेरी कोर्ट में मिलने की धमकी से कृष्णा भैया सकपका गये, उनके चेहरे पर मायूसी छा गयी…

उन्होने अपने मात-हतों को बाहर भेज दिया…, और गिड गिडाते हुए बोले….

मे मानता हूँ मुझसे ग़लती हुई थी, और वो भी किसी के दबाब में आकर, अब मे तेरे आगे हाथ जोड़ता हूँ…

किसी तरह अपने भाई की इज़्ज़त बचा ले भाई…, वरना तू तो जानता है, कि अगर ये मामला कोर्ट के थ्रू सेट्ल हुआ तो मुझे अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ सकता है…

उनकी गिड-गिडाहट देख कर बाबूजी समेत वाकी के चेहरों पर दया के भाव दिखाई देने लगे… फिर भी उनमें से किसी ने हमारे बीच में बोलने की कोई कोशिश नही की…

 
मेने फिर भी अपने अटॅक जारी रखते हुए कहा – ये बात आपको पहले सोचनी चाहिए थी एसपी साब, अगर मे ये केस अपने हाथ में ना लेता तो क्या फिर भी आप इसी तरह अफ़सोस जताते..?

इस घर ने क्या नही दिया आपको, पढ़ाया लिखाया, इस काबिल बनाया और आप बाबूजी की बात को भी दरकिनार कर के अपने ऊपर के प्रेशर में आ गये…

वैसे बताना चाहेंगे… कि वो प्रेशर किधर से आया था…?

वो मेरी बात सुनकर सकपका गये… जल्दी ही कोई जबाब नही सूझा उन्हें,… मेने फिरसे चोट करदी…या मे बताऊ, वो प्रेशर किधर से आया था…?

उनके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी… गिड-गिडाते हुए मेरा हाथ पकड़ा.. और मुझे एक तरफ को लेकर चल दिए…

सब लोगों से दूर मुझे एक कोने में ले जाकर बोले – मेरी इज़्ज़त बचा ले भाई… वादा करता हूँ.. फिर कभी अपने परिवार के खिलाफ नही जाउन्गा…

कामिनी की बातों में आकर मेने बहुत बड़ी भूल कर दी,…एक बार माफ़ कर्दे यार ! अपने भाई का कुछ तो मान रखले…

मे – ठीक है भैया, मे अपना केस वापस लेने को तैयार हूँ… लेकिन मेरी एक बात का जबाब देना होगा आपको…

एक आशा की किरण नज़र आते ही वो बोल पड़े… बोल भाई किस बात का जबाब चाहिए तुझे…मे तेरे हर सवाल का जबाब देने को तैयार हूँ…

मे – तो बताइए… ऐसी कॉन सी बात थी, जिसकी वजह से कामिनी भाभी ने आपको मदद करने से रोका था…?

भैया – शायद वो मोहिनी भाभी से नफ़रत करती है…, उस समय उसने हट ठान ली कि मे उस केस में उनकी कोई मदद ना करूँ, वरना वो शूसाइड कर लेगी…,

और उसकी इस हट के आगे मुझे झुकना पड़ा…

मे समझ गया कि भैया को असल बात पता नही है इसलिए उन्होने ये अस्यूम कर लिया है,

मे – तो फिर अब मुझसे मदद माँगने के बाद उनसे क्या कहेंगे..? क्या अब वो नही रोकेंगी आपको मदद लेने के लिए…?

वो थोड़ा दुखी स्वर में बोले – सच कहूँ मेरे भाई, तो मुझे भी अब उससे नफ़रत सी होने लगी है, उसकी आदतें बहुत खराब हैं… जिन्हें मे तुम्हें बता भी नही सकता…

वो अपने बाप की पॉवर का फ़ायदा उठाकर ना जाने क्या – 2 ग़लत सलत काम करती है..और मुझे भी करने के लिए उकसाती रहती है…

मुझे तो लगता है उसका चरित्र भी ठीक नही है, मे अब उससे किसी तरह छुटकारा पाना चाहता हूँ… लेकिन क्या करूँ मजबूर हूँ.

मेने अपनी नज़रें उनके चेहरे पर जमा दी, और उनके चेहरे को पढ़ने की कोशिश करने लगा, जहाँ मुझे एक बेबस इंसान ही नज़र आया…

अतः उनकी मजबूरी समझते हुए मेने कहा – ठीक है भैया…मे अपना केस वापस ले रहा हूँ, लेकिन वादा करिए… जाने से पहले आप मोहिनी भाभी से माफी ज़रूर माँगेंगे…

उन्होने मुझे अपने गले से लगा लिया, उनकी आँखों से आँसू निकल पड़े… और रुँधे गले से बोले – भाभी मुझे माफ़ कर देंगी…?

मे – बहुत बड़ा दिल है उनका… आइए मेरे साथ…

फिर हम दोनो घर के अंदर गये… भाभी और निशा आँगन में ही बैठी थी, जो हम दोनो को देखते ही उठ कर खड़ी हो गयी…

भैया दौड़ कर भाभी के पैरों में गिर पड़े, और रोते हुए बोले – अपने देवर को माफ़ कर दीजिए भाभी… मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गयी..

भाभी ने उनके कंधे पकड़ कर उठने को कहा और बोली – परिवार में एक दूसरे से माफी नही माँगी जाती देवर जी, कुछ फ़र्ज़ निभाने होते हैं…, जिन्हें शायद आप भूल गये थे…

अब अगर एक देवर अपनी भाभी से बात कर रहा है… तो भाभी कभी अपनों से नाराज़ ही नही हुई… हां एक पोलीस ऑफीसर को मे कभी माफ़ नही कर पाउन्गी…

फिर उन्होने निशा को इशारा किया, उसने भैया के पैर छुये…, तो वो उसकी ओर हैरत से देखने लगे…

भाभी मुस्कराते हुए बोली – अपने छोटे भाई की पत्नी को आशीर्वाद दीजिए देवर जी…

भाभी की बात सुनकर उन्होने मेरी तरफ मूड कर देखा… मे खड़ा-2 मुस्करा रहा था…

भैया – ये क्या भाई… इतनी नाराज़गी… अपने भाई को बुलाया तक नही…

मे – रामा दीदी तक को भी नही बुलाया, ये सब जल्दबाज़ी में और सिंपल तरीक़े से ही हुआ…, और वादा करिए, अभी ये बात आप भी किसी को नही बताएँगे…

वो कुछ देर और भाभी के पास रहे, गिले सिकवे दूर किए, और फिर बाहर चले गये…,

कुछ देर घर में ठहरकर मेने भाभी और निशा को बताया कि, मेने अपना केस वापस लेने का फ़ैसला लिया है, जो उन्होने भी उचित ठहराया..

भैया ने अपने साथ आए पोलीस वालों को वापस भेज दिया, और वो उस रात हमारे साथ ही रुके,

आज हम सभी एक साथ मिलकर बहुत खुश थे, रात में बैठ कर गीले शिकवे दूर करते रहे और फिर एक नयी सुबह के इंतेज़ार में सोने चले गये…

दूसरी सुबह घर से ही हम दोनो भाई सीधे कोर्ट गये, जहाँ मेने अपनी कंप्लेंट वापस ले ली.. इस तरह से मेने अपने भटके हुए भाई को वापस पा लिया था…!

दूसरे दिन बड़े भैया को यूनिवर्सिटी जाना था, कोई ट्रैनिंग प्रोग्राम में, दो दिन का टूर था, तो वो सुवह ही घर से निकल गये…

मेरे पास कोई काम नही था…, एक दो छोटे मोटे केस थे, जो मेरे असिस्टेंट ने ही संभाल लिए थे…तो मे सारे दिन घर पर ही रहा…पूरा दिन ऐसे ही निकाल दिया,

थोड़ा खेतों की तरफ निकल गया… बाबूजी से गॅप-सॅप की, चाचियों के यहाँ टाइम पास किया…

छोटी चाची के बच्चे के साथ खेला, उनके साथ रोमॅंटिक छेड़-छाड़ की.. और सारा दिन इन्ही बातों में गुजर गया… रात का खाना खाकर बाबूजी अपने चौपाल पर चले गये…

घर का काम काज निपटाकर भाभी और निशा दोनो ही मेरे रूम में आ गयी… उस वक़्त मे रूचि के साथ खेल रहा था…

वो मेरे पेट पर बैठी थी, मे उसकी बगलों में गुद-गुदि कर रहा था, जिससे वो इधर-उधर मेरे ऊपर कूदते हुए खिल-खिला रही थी…

जब हम तीनो आपस में बातें करने लगे.., थोड़ी देर में ही रूचि सोगयि तो भाभी उसे अपने रूम में सुलाने ले गयी,…

वापस आकर भाभी हमारे पास ही पलंग पर आकर बैठ गयी, और मुझसे अपने देल्ही के दिनो के बारे में पूछने लगी…

भाभी – आज थोड़ा अपने देल्ही में बिताए हुए दिनो के बारे में कुछ बताओ लल्ला जी, क्या कुछ किया इन 4 सालों में…

मे निशा की तरफ देखने लगा… तो भाभी… मज़े लेते हुए बोली -

अच्छा जी ! तो अब भाभी से ज़्यादा बीवी हो गयी… उसकी पर्मिशन चाहिए बोलने को… कोई बात नही, निशा तू ही बोल इनको ….

वो तो बस नज़र झुकाए मुस्कराए जा रही थी..

मेने कहा – ऐसी बात नही है भाभी… बस ऐसी कुछ खट्टी-मीठी यादें हैं, जो शायद निशा हजम ना कर सके..

भाभी – क्यों ऐसा क्या किया जो उसे हजम नही होंगी..? कोई लड़की वाडकी का चक्कर था क्या…?

मे – ऐसा ही कुछ समझ लीजिए…

 
निशा शिकायत भरे लहजे में बोली – मेने आपसे एक बार कह दिया है ना, कि आपकी निजी जिंदगी से मुझे कोई प्राब्लम नही है फिर भी आप…बार-बार ऐसा क्यों कहते हैं…जी.

मे – चलो ठीक है बताता हूँ…. और फिर मे उन दोनो को अपने देल्ही में गुज़रे सालों के बारे में बताने लगा…

पहले साल तो ज़्यादा कुछ ऐसा नही था, जो कह सके कि बताने लायक हो, ऐसी ही कुछ सामान्य सी बातें, कॉलेज हॉस्टिल की…

फिर मेने दूसरे साल के बारे में हुई घटना उन्हें कह सुनाई…, कैसे मेने नेहा की इज़्ज़त बचाई, जिसकी वजह से मुझे गोली लगी और मे घायल हो गया..!

गोली लगने की बात सुनकर भाभी और निशा दोनो के ही चेहरों पर पीड़ा के भाव आ गये, भाभी अपने माथे पर हाथ मारते हुए बोली –

हे राम ! कहाँ लगी थी गोली लल्ला…? मेने उन्हें अपने कंधे के निशान को दिखाया…

वो – शुक्र है भगवान का की कंधे पर ही लगी…. फिर क्या हुआ….?

फिर कैसे नेहा मुझे वहाँ से लेकर आई, मेरा इलाज़ कराया…

नेहा के मम्मी दादी से मुलाकात हुई, नेहा के दादी प्रोफेसर राम नारायण जो हमारे कॉलेज के सबसे काबिल प्रोफेसर थे…

उस घटना के बाद मे उनका फेवोवरिट स्टूडेंट बन गया… और मेरा उनके यहाँ आना-जाना शुरू हो गया….!

मेने अपने देल्ही में गुज़ारे हुए वक़्त के बारे में भाभी और निशा को बताते हुए आगे कहा –

प्रोफेसर राम नारायण हमारे कॉलेज के सबसे काबिल प्रोफेसर ही नही, सुप्रीम कोर्ट के जाने माने वकील भी हैं…

उनकी बेटी नेहा लॉ ख़तम कर के उनके अंडर ही प्रॅक्टीस कर रही थी…

उस घटना के बाद मेरा उनके घर आना जाना शुरू हो गया… अगर मे एक हफ्ते उनके यहाँ नही जा पाता तो, या तो खुद प्रोफेसर मुझे कॉलेज में बोलते, नही तो नेहा का फोन आ जाता…

एक तरह से मे उनके घर का सदस्य जैसा हो चुका था, आंटी भी मुझे बहुत प्यार करती थी, बिल्कुल अपने सगे बेटे की तरह….

नेहा और मे जब भी अकेले होते, तो एक दूसरे के साथ छेड़-छाड़ करते रहते, दिनो-दिन हम दोनो के बीच की दूरियाँ कम होती जा रही थी…

हँसी मज़ाक के दौरान, एक दूसरे के शरीर इतने पास हो जाते की एकदुसरे के बदन की गर्मी महसूस होने लगती…,

कभी-2 वो मुझे मारने दौड़ती, जब में उससे पिट लेता तो उसके बाद वो मेरे कंधे पर अपना सर टिका कर सॉरी बोलती…

इसी बीच अगर जब भी हमारी नज़रें टकराती, तो उन में एक दूसरे के लिए चाहत के भाव ही दिखाई देते…

दिन बीतते गये, सेकेंड एअर के फाइनल एग्ज़ॅम का समय नज़दीक था, नेहा मुझे कोर्स से संबंधित ट्रीट देती रहती थी… अब मे ज़्यादातर समय उनके यहाँ ही बिताने लगा था…

जब वो अपने काम से फ्री होती, मुझे बुला लेती, वैसे वो भी जड्ज के सेलेक्षन एग्ज़ॅम के लिए प्रेपरेशन कर रही थी…

एक दिन सॅटर्डे शाम को मे और नेहा एक साथ स्टडी कर रहे थे, प्रोफ़ेसर. और आंटी देल्ही के बाहर गये हुए थे किसी रिलेटिव के यहाँ फंक्षन अटेंड करने…

मेने नेहा को एक प्राब्लम के बारे में पूछा, हम दोनो एक ही सोफे पर बैठे थे…

उसने मेरी प्राब्लम को पढ़ा, बुक मेरी जांघों पर ही रखी थी… वो मुझे बुक में से ही मेरी ओर झुक कर समझा रही थी…

नेहा एक बहुत ही खूबसूरत, फिट बॉडी, परफेक्ट फिगर वाली 25-26 साल की लड़की थी, उसका फिगर 33-28-34 का था…

इस समय वो एक हल्के से कपड़े का स्लीव्ले टॉप, जो कुकछ डीप नेक था, और एक सॉफ्ट कपड़े की ढीली सी लोवर, जो उसके कुल्हों पर टाइट फिट, लेकिन नीचे वो काफ़ी ढीली-ढली पाजामी जैसी थी…

जब वो झुक कर मुझे समझा रही थी… तो उसके गोल-गोल, दूधिया बूब्स लगभग आधे मेरी आँखों के सामने दिखने लगे…

ना चाहते हुए मेरी नज़र उसके सुंदर से दूधिया चट्टानों पर जम गयी…

समझाते हुए जब उसने मेरी तरफ देखा, तो उसने मुझे उसके दूधिया उभारों को ताकते हुए पाया…

उसके चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान आ गयी…उसे पता था, कि मेरी नज़रें उसके सुंदर वक्षो का बड़े प्यार से अवलोकन कर रही हैं…

उसने मुझे कुछ नही कहा, और अपना एक हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया.. जिसके कारण वो थोड़ा सा और झुक गयी… अब मे उसके उभारों को और अच्छी तरह से देख पा रहा था…

अब बस मुझे उसके नुकीले निपल ही नही दिख पा रहे थे…लेकिन वो मेरी नज़रों का स्पर्श पाकर उत्तेजना के कारण कड़क हो गये थे… जिसका सबूत वो उसके टॉप के मुलायम कपड़े को उठाकर दे रहे थे…

ऐसा लग रहा था, वो मानो उसके कपड़े को चीर कर पार ही हो जाएँगे…

शायद नेहा ने ब्रा नही पहना था… जो उसने बाद में बताया भी था, कि वो बाहर से आते ही अपनी ब्रा और पेंटी निकाल देती है…

कुछ देर वो ऐसे ही झुक कर मुझे समझाती रही.. और धीरे-2 मेरी जाँघ को अपने बोलने के इंप्रेशन के साथ कभी दबा देती, कभी सहला देती, मानो अपने बोलने का डाइरेक्षन उसके हाथ से दे रही हो….

फिर अचानक मुझे छेड़ने के लिए, उसने मुझसे उसी सब्जेक्ट से संबंधित सवाल पुच्छ लिया… मेरा ध्यान तो उसकी चुचियों की सुंदरता में खोया हुआ था…

तो मे उसके सवाल पर ध्यान ही नही दे पाया, उसने अपना सवाल फिर से रिपीट किया… तो मे हड़बड़ा कर बोला…

क.क.क्ककयाअ पूछा आपने दीदी….??

वो खिल खिलकर हँस पड़ी…. और बोली तुम्हारा ध्यान कहाँ है मिसटर… लगता है, मे बेकार में ही अपनी एनर्जी वेस्ट कर रही हूँ…

मे – नही..नही.., ऐसी बात नही है, दरअसल मे कुछ सोच रहा था… और झेन्प्ते हुए मेने अपनी नज़रें झुका ली…

वो – मुझे पता है, तुम क्या सोच रहे थे…? लेकिन अभी पढ़ने पर ध्यान दो, सोचने पर नही…

मे – सॉरी दीदी… वो मे. .. वो…..

वो फिर हँसने लगी… और शरारत से बोली – इट्स ओके.. होता है.. सामने इतना अच्छा सीन हो तो ध्यान भटक ही जाता है… है ना..!

मे – नही मे.. ..वो… ऐसा नही है…

वो – क्या तुम्हें अच्छे नही लगे वो ….?

मे – क्या…? आप किस बारे में बोल रही हैं… मेरी तो कुछ समझ में नही आ रहा…

वो – मुझे बेवकूफ़ समझते हो… अब बोल भी दो… मुझे अच्छा लगेगा…

मे – क्या बोल दूं.. दी..?

वो – वही की तुम्हें मेरे बूब्स अच्छे लगे… क्यों है ना अच्छे… बोलो…

मे शरमाते हुए बोला – हां ! बहुत सुंदर हैं…सच में आप बहुत ही सुंदर हैं दी…

वो – तो अब तक चुप क्यों थे… या आज ही देखा है तुमने मुझे…!

मे – नही मुझे तो आप हमेशा से ही सुन्दर लगती थी, लेकिन कह नही सका…ये कहते हुए मेने उनके फूले हुए रूई जैसे मुलायम गाल पर एक किस कर दिया…

शर्म से उसका चेहरा लाल हो गया… और चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान गहरा गयी…! नज़र झुका कर वो बहुत ही धीमे स्वर में बोली…

मुझे भी तुम बहुत अच्छे लगते हो अंकुश… आइ लव यू !

उसके मुँह से ये शब्द सुनते ही मेने उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों पर एक किस जड़ दिया…

उसने भी अपनी मांसल गोरी-गोरी बाहें मेरे इर्द-गिर्द लपेट दी.. और मुझे पलटकर किस कर दिया…

उसके सुन्दर से गोल-मटोल चेहरे को अपनी हथेलियों में लेकेर मे उसकी बड़ी-बड़ी, काली आँखों में झाँकते हुए बोला ….

आप बहुत सुंदर हो दीदी… आइ लव यू टू… और उसके सुर्ख रसीले होंठों को चूसने लगा… वो अपनी आँखें बंद कर के मेरा साथ देने लगी…

 
हम दोनो की साँसें भारी होने लगी, आँखों में वासना के लाल-लाल डोरे तैरने लगे…बिना ब्रा के उसके सुडौल गोल-गोल संतरे… मेरे सीने में दब रहे थे..

मेने उसकी कमर में हाथ डाल कर उसे अपनी गोद में बिठा लिया, अब वो मेरे दोनो ओर अपने घुटने मोड़ कर मेरी गोद में बैठी थी….

मेरे दोनो हाथ उसके संतरों पर पहुँच गये और उन्हें धीरे से सहलाने लगा…

इसस्स्शह….. आआहह….अंकुश… ज़ोर से दबाओ इन्हेन्न…प्लीज़…,

उसकी तड़प देखकर मेने उसके टॉप को निकाल दिया, और गोल-गोल चुचियों को दोनो हाथों में लेकर मसल दिया…

सस्स्सिईईईईईई………आआहह…….बेड रूम में चलें…नेहा तड़प कर बोली…

मे – दीदी, क्या आप मेरे साथ ये सब करना चाहती हैं….?

वो आश्चर्य के भाव अपने चेहरे पर लाते हुए बोली – तो अब तक क्या तुम यौन ही.. ये सब कर रहे थे…? जल्दी चलो.. अब नही रुक सकती मे…आअहह…

मेने उसे उसी पोज़िशन में उठा लिया.. उसकी बाहें मेरे गले में लिपटी हुई थी.. उसके गोल-मटोल तरबूज जैसे चुतड़ों को मसलते हुए उसके बेड रूम में ले आया..

उसे बेड पर पटक कर मे उसके ऊपर आ गया, और उसके होंठों को एक बार और चूम कर उसकी चुचियों को चूसने लगा….

उसके सुडौल सम्पुरन गोलाई लिए कड़क चुचियों की सुंदरता देख कर मे बबला सा हो गया… और झपट्टा सा मार कर उन पर टूट पड़ा….

उन्हें चूस्ते हुए मेने कहा – आपकी चुचियाँ बहुत सुंदर हैं दीदी….जी करता है खा जाउ इनको….

आआहह….हाआंणन्न्…खा जाऊओ..सस्सिईइ…उउउम्म्म्म….और ज़ोर से चूसो इन्हें…

मेने उसके कंचे जैसे कड़क निप्प्लो पर अपने दाँत मार दिए….

वो मज़े और पीड़ा से बिल-बिला उठी….और मुझे ज़ोर से अपनी बाहों में कस लिया…..

मेरी और नेहा के पहले मिलन की दास्तान भाभी और निशा दम साधे हुए सुन रही थी…वो दोनो एक तरह से मानो उस सीन में खो सी गयी…

उन दोनो की साँसें धीरे-2 अनियंत्रित होती जा रही थी…

मेने एक नज़र उन दोनो पर डाली… उनकी अवस्था देख कर मेरे चेहरे की मुस्कान गहरी हो गयी…

मुझे चुप होते देख… वो दोनो मेरी तरफ देखने लगी…फिर उन्होने एक दूसरे की तरफ देखा… और फिर शरमा कर अपनी नज़रें झुका ली…

भाभी से इंतेज़ार नही हुआ सो बोल पड़ी… आगे भी बोलो देवेर जी… फिर क्या हुआ ?

मेने निशा की कमर में हाथ डालकर अपनी ओर खींच लिया, और उसकी कमर सहलाते हुए आगे बोलना शुरू किया….!

नेहा की मस्त मोटी-मोटी गदराई हुई चुचियाँ जो एकदम पेरफक्त गोलाई लिए हुए थी, देखकर मेरा संयम खो गया और मे उन पर बुरी तरह से टूट पड़ा…

पहले तो उन्हें दोनो हाथों में भर कर सहलाया, फिर एक को मुँह में लेकर चूसने लगा…

नेहा मज़े से आहें भरने लगी, और अपने हाथ का दबाब मेरे सर पर डाल कर चुचि चुसवाने का मज़ा लेने लगी..

एक हाथ से मे उसके दूसरे आम को मसल रहा था, उसके निपल लाल सुर्ख किसी जंगली बेर जैसे लग रहे थे… जिसे मेने अपने दाँतों में दबा कर खींच दिया…

वो एकदम से उच्छल पड़ी.. और उसके मुँह से एक मादक सिसकी फुट पड़ी…

ईीीइसस्स्स्स्स्स्सस्स……आअहह….खाजाओ…ईसीईए अंकुश….प्लीज़ और चूसो इन्हें….

बड़ा मज़ा आरहा है…मेरी जानणन्न्…आआययईीीईईई……मुम्मिईीईई…..उउफफफ्फ़….

मेने उसकी चुचियों को चूस-चूस कर लाल कर दिया…

उसने मेरी टीशर्ट को खींच कर निकाल दिया और मेरी नंगी पीठ को सहलाने लगी..

मे पीछे खिसकते हुए पलंग के नीचे आ गया और उसके ढीले ढाले लोवर को खींच कर निकल फेंका… वो बिना पेंटी के ही थी…

अब उसकी मुनिया मेरी आँखों के सामने थी…जिसपर छ्होटे-2 बाल थे, शायद एक हफ्ते के तो रहे होंगे…

मेने पलंग पर घुटने टेक कर उसकी मुनियाँ के आस-पास की फसल को सहला दिया…

सीईईईईईईईईई……ऊहह….गोद्ड़द्ड…इतना मज़ाअ…. वो सिसक पड़ी… उसकी मुनिया गीली हो चुकी थी… जिसे मेने चाट कर और गीला कर दिया…

नेहा ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठों पर टूट पड़ी…, साथ में एक हाथ से मेरे लोवर को नीचे कर दिया, फिर पैर से उसे मेरे पैरों तक ले गयी…

मेरा शेर पूरी तरह पोज़िशन में आ चुका था, जो अब उसकी टाँगों के बीच उच्छल-कूद मचा रहा था…

एक बार उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर उसे मुट्ठी में कसकर उसकी सख्ती को चेक किया… फिर मेरे होंठ चूसना बंद कर के वो बोली…

तुम्हारा ये तो बहुत बड़ा है… अपने अंदर कैसे ले पाउन्गि मे इसे…?

मेने कहा – पहले किसी का नही लिया है क्या…?

वो – लिया तो है एक-दो बार पर वो तो… इतना बड़ा नही था…

मेने कहा – कोई नही, ये भी आराम से चला जाएगा.. आप चिंता ना करो…

वो उसे दबाते हुए बोली – तो अब जल्दी करो… डियर, अब और ज़्यादा सबर नही हो रहा मुझसे….

मेने उसकी टाँगों के बीच बैठ कर उसके घुटने मोड़ दिए और उसकी गीली चूत को एक बार चाट कर अपनी जीभ से ऊपर से नीचे तक और गीला कर दिया…

फिर उसकी फूली हुई चूत की फांकों को खोलकर अपने मूसल को उसके छेद पर टिकाया… और एक धक्का धीरे से लगा दिया…

सच में उसकी चूत ना के बराबर ही चुदि थी… मुश्किल से मेरा मोटा सुपाडा उसमें फिट हो पाया… उसने अपने होंठों को कस कर बंद कर लिया…

मेने एक और ज़ोर का धक्का लगाया… मेरा मोटा लंड सरसरकार आधे से ज़्यादा उसकी कसी हुई चूत में घुस गया…

उसके मुँह से कराह निकल गयी….

अहह……धीरीई…अंकुशह…दर्द..होरहाआ…है…उ…..माआ…

मेने थोड़ा रुक कर फिर से एक धक्का और लगाया, अब मेरा पूरा लंड उसकी सन्करि चूत में फिट हो गया था… दर्द से उसके आँसू निकल पड़े…

और उसने बेडशीट को अपनी मुत्ठियों में कस लिया….

मेने उसके होंठ चुस्कर अपने हाथों से उसकी चुचियाँ सहलाने लगा… कुछ देर में उसका दर्द कम हो गया… और वो नीचे से अपनी कमर उचकाने लगी…

मेने इशारे को समझ कर धीरे-2 लयबद्ध तरीक़े से अपने धक्के लगाने शुरू कर दिए, शुरुआत में कुछ देर आराम से आधे लंबाई में…

फिर जब मेरा लंड उसके कामरस से गीला हो गया, तो पूरे शॉट लगाते हुए मेने अपनी स्पीड बढ़ा दी.. नेहा भी फुल मस्ती में अनप शनाप बड़बड़ाती हुई मज़े से चुदाई का मज़ा लेने लगी….!

एक उसके झड़ने के बाद मेने उसे पलंग पर घोड़ी बना लिया, और पीछे से उसकी चूत में लंड डालकर वो रगड़ाई की….

 
वो हाई..तौबा मचाती हुई, चुदाई में लीन हो गयी… हम दोनो को ही बहुत मज़ा आ रहा था……,

20-25 मिनिट की धुआँधार चुदाई के बाद मेने अपना पानी उसकी गरम-2 चूत में उडेल दिया… वो फिर एक बार झड़ने लगी…

इस तरह से हम दोनो के बीच शरीरक संबंध बन गये…

फिर तो जब भी मौका मिलता… हम एक दूसरे में समा जाते… वो मुझे बहुत प्यार करने लगी थी…

धीरे – 2 समय गुज़रता गया, एक दो अटेंप्ट में उसका सेलेक्षन हो गया, और वो लोवर कोर्ट की जड्ज बन गयी…

उसके बाद भी हम मिलते रहे… जब मेरे फाइनल एअर के एग्ज़ॅम हो गये, और रिज़ल्ट का वेट कर रहा था, तभी प्रोफेसर साब ने उसकी शादी करदी, एक आइएएस ऑफीसर के साथ…

रिज़ल्ट आने के बाद उन्होने मुझे अपने साथ प्रॅक्टीस करने को कहा, अब उनसे अच्छा गुरु कहाँ मिलता सो मेने हां करदी…

शादी के बाद भी नेहा मुझसे मिलने आ जाती थी, फिर मेने एक दिन उसे समझाया, कि अब हम दोनो को नही मिलना चाहिए,

ये उसके और उसके दोनो परिवारों की प्रतिष्ठा के लिए ठीक नही है…वो मानना नही चाहती थी, फिर मेरे ज़्यादा ज़ोर देने पर वो मान गयी, और हम दोनो का मिलना धीरे-2 कम होता गया…

मे ये कहानी पलंग पर बैठ कर ही बता रहा था, सिरहाने से टेक लिए हुए… मेरे एक तरफ निशा बैठी थी और दूसरी तरफ भाभी…

कहानी सुनते-2 निशा उत्तेजित होकर और अपना आपा खो बैठी, भाभी की मौजूदगी में ही वो मेरे बदन से चिपक गयी, और मेरे सीने को सहलाने लगी,

उसकी मिडी जांघों तक चढ़ि हुई थी, और वो अपनी एक टाँग मेरे ऊपर रखकर अपनी सुडौल मक्खन जैसी चिकनी जाँघ से मेरे लंड को मसल रही थी…

भाभी थोड़ा दूरी बनाए हुए अढ़लेटी सी बैठी अपनी मदहोश नज़रों से निशा की हरकतों को देख रही थीं..,

लेकिन अपनी बेहन के पति के साथ उसकी मौजूदगी में पहल नही कर पा रही थी, सो मेने उनकी कमर में हाथ डालकर अपनी तरफ खींच लिया.. और बोला…

अब आप क्यों शरमा रही हो भाभी…जब छुटकी को कोई प्राब्लम नही है तो…

वो हँसते हुए मुझसे चिपक गयी और मेरे होंठों पर किस कर के बोली…

मे तो तुम्हारे रिक्षन का वेट कर रही थी…ये कह कर उन्होने मेरी टीशर्ट निकाल फेंकी और मेरे निप्प्लो को जीभ से चाट लिया…

सस्सिईईईईईई………अहह… भाभी….आप जादूगरनी हो सच में….निशु डार्लिंग…. कुछ सीखले अपनी बडकी से…….

मेरी बात सुन कर दोनो खिल खिला कर हँसने लगी…, फिर उन दोनो ने मिलकर मेरे ऊपर हमला बोल दिया…

उन दोनो के बीच की सारी शर्म लिहाज की दीवार ढह गयी, अब वो दोनो मदरजात नंगी मेरे आगोश में लिपटी हुई थी…

भाभी ने मेरे लंड पर कब्जा कर लिया, तो निशा ने मेरे उपरी हिस्से को संभाला, हम तीनों ही एक दूसरे को भरपूर आनंद देने की कोशिश में जुट गये…

फिर शुरू हुआ चुदाई का दौर… मेने निशा की टाँगें चौड़ी कर के भाभी से कहा –

भाभी मेरी इच्छा है, कि आप अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ कर अपनी छुटकी की चूत पर रखें…

भाभी ने हंस कर प्यार से मेरी पीठ पर एक धौल जमाई… और फिर मेरे मूसल जैसे लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर उसे निशा की चूत के होंठों पर रगड़ा....

निशा इसी कल्पना में कि उसकी बड़ी बेहन उसके पति का लंड चूत पर रगड़ रही है, उसकी चूत ने लार बहाना शुरू कर दिया…

फिर उन्होने उसे उसके संकरे छेद पर सेट कर के अपनी एक उंगली मेरी गान्ड के छेद में डाल दी…

ऊुउउक्छ ! ऑटोमॅटिकली मेरी गान्ड में झटका लगा, और मेरा लंड सरसरकार निशा की गीली चूत में चला गया…

भाभी की चुचियाँ चूस्ते हुए मेने धक्के लगाना शुरू कर दिया..

दोनो की कामुक सिसकियों से कमरे का वातावरण चुदाईमय हो गया था…

हम तीनों रात भर रासलीला में मस्त रहे… सुबह के 5 बज गये, लेकिन उनमें से कोई हार मानने को तैयार नही थी…

कभी में भाभी को घोड़ी बनाकर चोद रहा होता तो निशा उनके नीचे लेटकर चूत सहलाती, जीभ से उनकी क्लिट को चाटती…

दूसरे सीन में जब निशा मेरे लंड का स्वाद ले रही होती, और भाभी अपनी चूत मेरे मुँह पर रखा कर उसे चटवा रही होती…

तीनों की आहों करहों और सिसकियों से कमरे का वातावरण बहुत ही मादक हो गया था, वातावरण में वीर्य और कामरस की सुगंध फैली हुई थी…

मे एक बार झड़कर साँसें इकट्ठी करता, कि दूसरी मेरा लंड चुस्कर उसे फिरसे तैयार करने में जुट जाती…

आज मुझे उन दोनो को देखकर ऐसा लग रहा था, मानो उनके अंदर सेक्स की देवी रति की आत्मा घुस गयी हो…

आख़िर में मुझे ही हथियार डालने पड़े, और हाथ जोड़कर बोला…अब मुझे माफ़ करो मेरी मल्लिकाओ… मेरी टंकी अब पूरी खाली हो गयी…

भाभी ठहाका लगा कर बोली – हाहाहा….क्यों लल्लाजी…निकल गयी सारी हेकड़ी… एक अकेली को तो कितना रौन्द्ते हो…

उनकी बात सुनकर मेरी और निशा की भी हसी छूट गयी…

फिर वो दोनो अपने-2 कपड़े पहनकर मुझे किस कर के बाहर निकल गयी क्योंकि अब उन दोनो के सोने का समय नही था…

उनके निकलते ही मे चादर तान कर लंबा हो गया… और सीधा 10 बजे जाकर उठा…!

 
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