S
StoryPublisher
Guest
मेरे मुँह से अपनी बेहन के लिए ऐसे अप-शब्द सुनने की उसे उम्मीद नही थी.. वो दाँत भींचते हुए मेरी तरफ बढ़ते हुए चीखा…उसके साथ उसके चम्चे भी बढ़े…
अब तू जिंदा नही बचेगा हरामजादे…
मेने उसे हाथ के इशारे से रोका… और कहा –
अगर तू असल बाप से पियादा है… तो अकेला लड़ के दिखा…फिर देख कॉन हरामजादा है और कॉन नही…..
उसे मेरी बात लग गयी.. और उसने अपने साथियों से कहा – कोई मेरे साथ नही आएगा… इससे में अकेला ही निपटाउंगा…उसके साथी जहाँ थे वहीं खड़े रह गये…
मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी…और मेने उसे अपनी उंगली का इशारा कर के अपनी तरफ आने को कहा…
मेरे इस तरह इशारा करने से उसकी झान्टे और ज़्यादा सुलग उठी…वो अपने दाँत पीसते हुए मेरी ओर झपटा……….!
मे अपनी टाँगें चौड़ा कर, कमर पर हाथ रखे खड़ा उसका इंतेज़ार कर रहा था… कोई 10 फीट दूर से उसने तेज़ी से मेरे ऊपर झपट्टा मारा, जैसे आम तौर पर गुंडे मार-पीट में करते हैं…..
वो पूरी तरह कॉन्फिडेंट था, कि इस कल के लौन्डे को दो मिनिट में ही धूल चटा देगा…
मेने अपनी रोज़ की एक्सर्साइज़ का दाव अपनाते हुए, मे अपने एक पैर पर बैठ गया.. और दूसरा पैर ज़मीन के पॅरलेल रखा,
चूँकि में साइड में एक पैर पर बैठ चुका था, तो वो सीधा झोंक में मेरे बगल से गुज़रता चला गया, जिधर मेरा दूसरा पैर ज़मीन के समानांतर था, तभी मेने उसी पैर से उसको अड़ंगी मार दी…
वो झोंक में पैर की अड़ंगी लगने से भडाम से मेरे पीछे जाकर मुँह के बल ज़मीन पर गिरा…
मे उसके पीछे जाकर फिर से खड़ा हो गया.., अब वो और गुस्से में आ चुका था… उसका चेहरा गुस्से से तम तमा उठा… मे भी यही चाहता था..
वो उठ कर खड़ा हुआ और पलट कर किसी भैंसे की तरह हुंकारता हुआ फिर से पूरा दम लगाकर मेरे ऊपर झपटा..
मे वहीं के वहीं अपने एक पैर पर घूम गया… वो झोंक में आगे को बढ़ता चला गया… इतने में मेने फिरकी लेते हुए, पीछे से उसकी गान्ड पर किक जमा दी…
वो अपने को संभाल ना सका और फिरसे मुँह के बल जा गिरा…, इस बार वो ज़्यादा तेज़ी से पक्की ज़मीन पर गिरा था, सो इस वजह से उसका होंठ फट गया और उसमें से खून रिसने लगा…
कॉलेज के तमाम लड़के-लड़कियाँ वहाँ जमा हो चुके थे… वो कुछ देर तक पड़ा रहा.. तो मेने उसको ललकारा… उठ… आ.. आजा.. क्या हुआ… निकल गयी तेरी सारी हेकड़ी..
ये कहते हुए मे उसके सर के ऊपर जा खड़ा हुआ.., यहाँ उसने फुर्ती दिखाते हुए मेरे दोनो पैर पकड़ लिए और एक तेज झटका दिया.. मे पीछे को अपनी गान्ड के बल जा गिरा…
इतना ही नही, उसने फुर्ती दिखाते हुए मेरे ऊपर जंप भी लगा दी, और मेरे सीने पर सवार हो गया…
वो मेरे सीने पर बैठकर उसने मेरे गले को कस कर पकड़ लिया और उसे पूरा दम लगाकर दबाने लगा…
दाँत पीसते हुए बोला – तू तो गया लौन्डे, ग़लत आदमी से पंगा ले बैठा तू मादर्चोद….
मेरे गले की नसें तक फूलने लगी थी, मेने मन ही मन सोचा कि अब अगर जल्दी ही कुछ नही किया, तो ये मेरे ऊपर हाबी हो जाएगा…
ये सोचते ही मेने अपने दोनो टाँगों को फुर्ती से हवा में लहराया, यहाँ तक कि मेरी कमर भी हवा में उठ गयी…और देखते ही देखते मेने अपनी लंबी टाँगों को उसकी गर्दन में केँची की तरह लपेट दिया…
टाँगों में एक जोरदार झटका देकर मेने उसे अपने से दूर उछाल दिया…
इससे पहले कि वो उठ कर मुझ पर अगला वार कर पाता.. मे अपनी साँसों को नियंत्रित कर के फुर्ती से उच्छल कर उठ खड़ा हुआ…
वो भी खड़ा हो चुका था, और उसने मुझे मारने के लिए अपना मुक्का चलाया…, जिसे मेने हवा में ही थाम लिया.. और उसी बाजू को लपेटते हुए, उसके शरीर को अपनी पीठ पर लेकर एक धोबी पछाड़ दे मारा…
धोबी पछाड़ एक ऐसा दाँव है, जिसके बाद अच्छे-अच्छे पहलवान दोबारा उठ नही पाते…
पक्की सड़क पर ज़ोर से वो पीठ के बल पड़ा, ….साले की कमर ही चटक गयी…
अपने बॉस का हश्र देख कर उसके चम्चे आगे बढ़े… तो उनमें से एक को सोनू भाई ने लपक लिया.. और तीन को मेने लात घूँसों पर रख लिया..
फिर वाकी के स्टूडेंट्स को भी लगा.. कि ये ग़लत हो रहा है, तो वो भी हमारी हेल्प के लिए आ गये…
मार-मार कर उन पाँचों का भुर्ता बना दिया… 10 मिनिट में ही वो साले ज़मीन पर पड़े कराह रहे थे… मेने रागिनी के भाई को कॉलर पकड़ कर जबर्जस्ती से खड़ा किया और उसका मुँह दबाकर बोला-
बेटा ! अभी तो ये ट्रेलर था, मुझे अभी अपनी औकात दिखाना वाकी है… आशा करता हूँ.. तेरे भेजे में ये बात आ गयी होगी… कि सब जगह तुम लोगों की दबन्गयि नही चल सकती…!
सच्चाई जाननी हो तो अपनी उस नासमझ बेहन से पुच्छना, कि असल बात क्या थी….!
इतना कहकर मेने उसे पीछे को धक्का दिया और वहाँ से चल दिया…..
पीछे से सभी स्टूडेंट्स तालियाँ बजकर मुझे अप्रीश्षेट कर रहे थे…!
अब तू जिंदा नही बचेगा हरामजादे…
मेने उसे हाथ के इशारे से रोका… और कहा –
अगर तू असल बाप से पियादा है… तो अकेला लड़ के दिखा…फिर देख कॉन हरामजादा है और कॉन नही…..
उसे मेरी बात लग गयी.. और उसने अपने साथियों से कहा – कोई मेरे साथ नही आएगा… इससे में अकेला ही निपटाउंगा…उसके साथी जहाँ थे वहीं खड़े रह गये…
मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी…और मेने उसे अपनी उंगली का इशारा कर के अपनी तरफ आने को कहा…
मेरे इस तरह इशारा करने से उसकी झान्टे और ज़्यादा सुलग उठी…वो अपने दाँत पीसते हुए मेरी ओर झपटा……….!
मे अपनी टाँगें चौड़ा कर, कमर पर हाथ रखे खड़ा उसका इंतेज़ार कर रहा था… कोई 10 फीट दूर से उसने तेज़ी से मेरे ऊपर झपट्टा मारा, जैसे आम तौर पर गुंडे मार-पीट में करते हैं…..
वो पूरी तरह कॉन्फिडेंट था, कि इस कल के लौन्डे को दो मिनिट में ही धूल चटा देगा…
मेने अपनी रोज़ की एक्सर्साइज़ का दाव अपनाते हुए, मे अपने एक पैर पर बैठ गया.. और दूसरा पैर ज़मीन के पॅरलेल रखा,
चूँकि में साइड में एक पैर पर बैठ चुका था, तो वो सीधा झोंक में मेरे बगल से गुज़रता चला गया, जिधर मेरा दूसरा पैर ज़मीन के समानांतर था, तभी मेने उसी पैर से उसको अड़ंगी मार दी…
वो झोंक में पैर की अड़ंगी लगने से भडाम से मेरे पीछे जाकर मुँह के बल ज़मीन पर गिरा…
मे उसके पीछे जाकर फिर से खड़ा हो गया.., अब वो और गुस्से में आ चुका था… उसका चेहरा गुस्से से तम तमा उठा… मे भी यही चाहता था..
वो उठ कर खड़ा हुआ और पलट कर किसी भैंसे की तरह हुंकारता हुआ फिर से पूरा दम लगाकर मेरे ऊपर झपटा..
मे वहीं के वहीं अपने एक पैर पर घूम गया… वो झोंक में आगे को बढ़ता चला गया… इतने में मेने फिरकी लेते हुए, पीछे से उसकी गान्ड पर किक जमा दी…
वो अपने को संभाल ना सका और फिरसे मुँह के बल जा गिरा…, इस बार वो ज़्यादा तेज़ी से पक्की ज़मीन पर गिरा था, सो इस वजह से उसका होंठ फट गया और उसमें से खून रिसने लगा…
कॉलेज के तमाम लड़के-लड़कियाँ वहाँ जमा हो चुके थे… वो कुछ देर तक पड़ा रहा.. तो मेने उसको ललकारा… उठ… आ.. आजा.. क्या हुआ… निकल गयी तेरी सारी हेकड़ी..
ये कहते हुए मे उसके सर के ऊपर जा खड़ा हुआ.., यहाँ उसने फुर्ती दिखाते हुए मेरे दोनो पैर पकड़ लिए और एक तेज झटका दिया.. मे पीछे को अपनी गान्ड के बल जा गिरा…
इतना ही नही, उसने फुर्ती दिखाते हुए मेरे ऊपर जंप भी लगा दी, और मेरे सीने पर सवार हो गया…
वो मेरे सीने पर बैठकर उसने मेरे गले को कस कर पकड़ लिया और उसे पूरा दम लगाकर दबाने लगा…
दाँत पीसते हुए बोला – तू तो गया लौन्डे, ग़लत आदमी से पंगा ले बैठा तू मादर्चोद….
मेरे गले की नसें तक फूलने लगी थी, मेने मन ही मन सोचा कि अब अगर जल्दी ही कुछ नही किया, तो ये मेरे ऊपर हाबी हो जाएगा…
ये सोचते ही मेने अपने दोनो टाँगों को फुर्ती से हवा में लहराया, यहाँ तक कि मेरी कमर भी हवा में उठ गयी…और देखते ही देखते मेने अपनी लंबी टाँगों को उसकी गर्दन में केँची की तरह लपेट दिया…
टाँगों में एक जोरदार झटका देकर मेने उसे अपने से दूर उछाल दिया…
इससे पहले कि वो उठ कर मुझ पर अगला वार कर पाता.. मे अपनी साँसों को नियंत्रित कर के फुर्ती से उच्छल कर उठ खड़ा हुआ…
वो भी खड़ा हो चुका था, और उसने मुझे मारने के लिए अपना मुक्का चलाया…, जिसे मेने हवा में ही थाम लिया.. और उसी बाजू को लपेटते हुए, उसके शरीर को अपनी पीठ पर लेकर एक धोबी पछाड़ दे मारा…
धोबी पछाड़ एक ऐसा दाँव है, जिसके बाद अच्छे-अच्छे पहलवान दोबारा उठ नही पाते…
पक्की सड़क पर ज़ोर से वो पीठ के बल पड़ा, ….साले की कमर ही चटक गयी…
अपने बॉस का हश्र देख कर उसके चम्चे आगे बढ़े… तो उनमें से एक को सोनू भाई ने लपक लिया.. और तीन को मेने लात घूँसों पर रख लिया..
फिर वाकी के स्टूडेंट्स को भी लगा.. कि ये ग़लत हो रहा है, तो वो भी हमारी हेल्प के लिए आ गये…
मार-मार कर उन पाँचों का भुर्ता बना दिया… 10 मिनिट में ही वो साले ज़मीन पर पड़े कराह रहे थे… मेने रागिनी के भाई को कॉलर पकड़ कर जबर्जस्ती से खड़ा किया और उसका मुँह दबाकर बोला-
बेटा ! अभी तो ये ट्रेलर था, मुझे अभी अपनी औकात दिखाना वाकी है… आशा करता हूँ.. तेरे भेजे में ये बात आ गयी होगी… कि सब जगह तुम लोगों की दबन्गयि नही चल सकती…!
सच्चाई जाननी हो तो अपनी उस नासमझ बेहन से पुच्छना, कि असल बात क्या थी….!
इतना कहकर मेने उसे पीछे को धक्का दिया और वहाँ से चल दिया…..
पीछे से सभी स्टूडेंट्स तालियाँ बजकर मुझे अप्रीश्षेट कर रहे थे…!