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Guest
अभी 15 मिनिट ही हुए होंगे कि मेरे लंड पर फिरसे कुछ गीला – 2 सा एहसास हुआ, मेने आँखें खोल कर देखा तो श्यामा मेरे लंड को चूस रही थी, और बगल में बैठी दुलारी उसे देख कर मुस्करा रही थी…
मेरा हाथ उसके सर पर चला गया… और उसे सहलाने लगा…उसने लंड चूस्ते हुए मेरी तरफ देखा…
मे – अभी और मन है, इसे लेने का…?
वो – हां ! फिर ना जाने कब मौका मिले…..?
अब तक मेरा लंड एक बार फिर से खड़ा हो चुका था… सो मेने उसका बाजू पकड़ कर अपने उपर खींच लिया, और वो मेरे उपर आ गयी…
दुलारी ने मेरे लंड को उसके छेद पर सेट कर दिया, और उसे धीरे – 2 उसपर बैठने का इशारा किया…
अब श्यामा मेरे उपर से अपनी चूत में लंड ले रही थी… उसकी छोटी – सी लेकिन गोल-गोल गान्ड और पतली सी कमर उपर-नीचे होते हुए बड़ी प्यारी लग रही थी…
मेने उसके दोनो अनारों को मसल्ते हुए अपने उपर झुका लिया और उसके होठ चूसने लगा…
कुछ देर बाद वो थक गयी … तो मेने उसे अपने नीचे लिया, और जम कर उसकी धुनाई करने लगा, जैसे धुन्ना, रूई को धुनता है…
इस बीच दुलारी बोली – पांडिजी इस बार अपना माल इसकी चूत में ही डालना, जिससे बेचारी की गरम चूत ठंडी हो जाए…
मेरे नीचे दुबली पतली श्यामा धक्कों को बड़ी मुश्किल से झेल पा रही थी.., उसके मुँह से उन्माद में डूबी सिसकियाँ और कराहों से पूरा माहौल चुदाइमय हो गया…
आधे घंटे की चुदाई से श्यामा की चूत पस्त हो गयी, वो अनगिनत बार पानी छोड़ चुकी थी…
आख़िरकार मेने भी अपना वीर्य उसकी नयी चुदि चूत में भरकर उसे तरबतर कर दिया…और ढंग से उसकी चूत की प्यास बुझा दी…
श्यामा मेरे सीने से लग कर सुबकने लगी… मे उसकी गान्ड सहला कर उसे चुप करने लगा…
दुलारी ने कहा – तू चिंता मत कर मेरी बेहन, पंडितजी, मौका लगते ही तेरी चुदाई कर दिया करेंगे…
कुछ देर बाद हम सबने फ्रेश होकर कपड़े पहने, चाय नाश्ता किया…
फिर उन दोनो को गाओं की बस में बिठा कर मेने उन्हें रवाना कर दिया… !
रामदुलारी और श्यामा के जाने के बाद मे दो घंटे के लिए सो गया, दो-तीन घंटे की चुदाई समारोह के बाद काफ़ी थकान महसूस हो रही थी…
दो घंटे की नींद लेने के बाद मेने उस्मान को अपने सीक्रेट नंबर से कॉल किया…
कॉल लगने के बाद मेने उससे मिलने के लिए हां कर दी… तो उसने मुझे आज रात ही 9 बजे रीक्सन होटेल के रूम नंबर 403 में मिलने को कहा…
मेने उसे हां बोलकर कॉल कट करदी… और उससे मिलने के बारे में प्लॅनिंग करने लगा..
मे उस्मान से मिलने के बारे में सोच ही रहा था, कि प्राची अपनी मम्मी और छोटे भाई के साथ आ पहुँची, फ्लॅट देख कर उसकी मम्मी बड़ी खुश हुई..
मेने आज पहली बार उसकी मम्मी को देखा था, काम और ज़िम्मेदारियों के बोझ ने समय से पहले उनके चेहरे को बुझा सा दिया था, अन्यथा उनका फिगर किसी 28-30 साल की औरत जैसा ही था..
एकदम परफेक्ट स्लिम बॉडी, बस कुछ ज़्यादा था तो वो थे उनके दो पके दशहरी आम और तरबूज जैसी गान्ड, जो मेहनत करने की वजह से कुछ ज़्यादा ही पीछे को निकल आई थी…
शक्ल सूरत से वो प्राची की बड़ी बेहन लगती थी.., बस चेहरे की मलिनता को अनदेखा कर दिया जाए तो मुझे मधु आंटी एक परफेक्ट महिला लगी..
साड़ी में कसे हुए उनके हिप्पस देखकर तो मेरे अंदर कुछ-कुछ होने लगा…
मेने अपने दोनो हाथ जोड़कर उन्हें नमस्ते किया, जिसका उन्होने मुस्काराकर जबाब दिया…
कुछ देर बैठकर वो अपना ज़रूरी समान लेने के लिए चली गयी, उन्होने मेरे फ्लॅट में रहने का निर्णय ले लिया था…
दूसरी चाबी प्राची के पास ही थी सो मेरा घर पे रहना ना रहना कोई मायने नही रखता था
उनके जाते ही मेने कुछ काम निपटाए और शाम होते ही अपना हुलिया चेंज किया और समय पर उस्मान से मिलने चल दिया………..!
रीक्सन होटेल, शहर का सबसे आलीशान होटेल है, रात के ठीक 9 बजे मेने जोसेफ के गेटप में रूम नंबर. 403 की डोर बेल दबाई…
तकरीबन 5 मिनिट के इंतेज़ार के बाद भी जब कोई रेस्पॉन्स नही मिला, तो मेने डोर पर अपने हाथ का दबाब बनाया जो शायद अनलॉक था.., दबाब डालते ही वो खुलता चला गया…,
मे धड़कते दिल से अंदर गया, दरअसल मुझे अभी भी अपने पहचाने जाने का अंदेशा ही था…
अंदर लाउन्ज में टीवी चालू था, जिसपर कोई हॉलीवुड मूवी चालू थी, लेकिन कोई दिखा नही, मे थोड़ी देर इधर-उधर घूमकर उसकी भव्यता देखने लगा…
तभी अंदर के बेडरूम से मर्द और औरत के आहें और सिसकने की आवाज़ें सुनाई दी.., उत्सुकता बस मे उस रूम की तरफ बढ़ गया…
मेरा हाथ उसके सर पर चला गया… और उसे सहलाने लगा…उसने लंड चूस्ते हुए मेरी तरफ देखा…
मे – अभी और मन है, इसे लेने का…?
वो – हां ! फिर ना जाने कब मौका मिले…..?
अब तक मेरा लंड एक बार फिर से खड़ा हो चुका था… सो मेने उसका बाजू पकड़ कर अपने उपर खींच लिया, और वो मेरे उपर आ गयी…
दुलारी ने मेरे लंड को उसके छेद पर सेट कर दिया, और उसे धीरे – 2 उसपर बैठने का इशारा किया…
अब श्यामा मेरे उपर से अपनी चूत में लंड ले रही थी… उसकी छोटी – सी लेकिन गोल-गोल गान्ड और पतली सी कमर उपर-नीचे होते हुए बड़ी प्यारी लग रही थी…
मेने उसके दोनो अनारों को मसल्ते हुए अपने उपर झुका लिया और उसके होठ चूसने लगा…
कुछ देर बाद वो थक गयी … तो मेने उसे अपने नीचे लिया, और जम कर उसकी धुनाई करने लगा, जैसे धुन्ना, रूई को धुनता है…
इस बीच दुलारी बोली – पांडिजी इस बार अपना माल इसकी चूत में ही डालना, जिससे बेचारी की गरम चूत ठंडी हो जाए…
मेरे नीचे दुबली पतली श्यामा धक्कों को बड़ी मुश्किल से झेल पा रही थी.., उसके मुँह से उन्माद में डूबी सिसकियाँ और कराहों से पूरा माहौल चुदाइमय हो गया…
आधे घंटे की चुदाई से श्यामा की चूत पस्त हो गयी, वो अनगिनत बार पानी छोड़ चुकी थी…
आख़िरकार मेने भी अपना वीर्य उसकी नयी चुदि चूत में भरकर उसे तरबतर कर दिया…और ढंग से उसकी चूत की प्यास बुझा दी…
श्यामा मेरे सीने से लग कर सुबकने लगी… मे उसकी गान्ड सहला कर उसे चुप करने लगा…
दुलारी ने कहा – तू चिंता मत कर मेरी बेहन, पंडितजी, मौका लगते ही तेरी चुदाई कर दिया करेंगे…
कुछ देर बाद हम सबने फ्रेश होकर कपड़े पहने, चाय नाश्ता किया…
फिर उन दोनो को गाओं की बस में बिठा कर मेने उन्हें रवाना कर दिया… !
रामदुलारी और श्यामा के जाने के बाद मे दो घंटे के लिए सो गया, दो-तीन घंटे की चुदाई समारोह के बाद काफ़ी थकान महसूस हो रही थी…
दो घंटे की नींद लेने के बाद मेने उस्मान को अपने सीक्रेट नंबर से कॉल किया…
कॉल लगने के बाद मेने उससे मिलने के लिए हां कर दी… तो उसने मुझे आज रात ही 9 बजे रीक्सन होटेल के रूम नंबर 403 में मिलने को कहा…
मेने उसे हां बोलकर कॉल कट करदी… और उससे मिलने के बारे में प्लॅनिंग करने लगा..
मे उस्मान से मिलने के बारे में सोच ही रहा था, कि प्राची अपनी मम्मी और छोटे भाई के साथ आ पहुँची, फ्लॅट देख कर उसकी मम्मी बड़ी खुश हुई..
मेने आज पहली बार उसकी मम्मी को देखा था, काम और ज़िम्मेदारियों के बोझ ने समय से पहले उनके चेहरे को बुझा सा दिया था, अन्यथा उनका फिगर किसी 28-30 साल की औरत जैसा ही था..
एकदम परफेक्ट स्लिम बॉडी, बस कुछ ज़्यादा था तो वो थे उनके दो पके दशहरी आम और तरबूज जैसी गान्ड, जो मेहनत करने की वजह से कुछ ज़्यादा ही पीछे को निकल आई थी…
शक्ल सूरत से वो प्राची की बड़ी बेहन लगती थी.., बस चेहरे की मलिनता को अनदेखा कर दिया जाए तो मुझे मधु आंटी एक परफेक्ट महिला लगी..
साड़ी में कसे हुए उनके हिप्पस देखकर तो मेरे अंदर कुछ-कुछ होने लगा…
मेने अपने दोनो हाथ जोड़कर उन्हें नमस्ते किया, जिसका उन्होने मुस्काराकर जबाब दिया…
कुछ देर बैठकर वो अपना ज़रूरी समान लेने के लिए चली गयी, उन्होने मेरे फ्लॅट में रहने का निर्णय ले लिया था…
दूसरी चाबी प्राची के पास ही थी सो मेरा घर पे रहना ना रहना कोई मायने नही रखता था
उनके जाते ही मेने कुछ काम निपटाए और शाम होते ही अपना हुलिया चेंज किया और समय पर उस्मान से मिलने चल दिया………..!
रीक्सन होटेल, शहर का सबसे आलीशान होटेल है, रात के ठीक 9 बजे मेने जोसेफ के गेटप में रूम नंबर. 403 की डोर बेल दबाई…
तकरीबन 5 मिनिट के इंतेज़ार के बाद भी जब कोई रेस्पॉन्स नही मिला, तो मेने डोर पर अपने हाथ का दबाब बनाया जो शायद अनलॉक था.., दबाब डालते ही वो खुलता चला गया…,
मे धड़कते दिल से अंदर गया, दरअसल मुझे अभी भी अपने पहचाने जाने का अंदेशा ही था…
अंदर लाउन्ज में टीवी चालू था, जिसपर कोई हॉलीवुड मूवी चालू थी, लेकिन कोई दिखा नही, मे थोड़ी देर इधर-उधर घूमकर उसकी भव्यता देखने लगा…
तभी अंदर के बेडरूम से मर्द और औरत के आहें और सिसकने की आवाज़ें सुनाई दी.., उत्सुकता बस मे उस रूम की तरफ बढ़ गया…