S
StoryPublisher
Guest
मे – हां, तो भाभी की जगह और कॉन लेगा..? फिर मेने चाची के हाथ अपने हाथों में लेकर उन्हें सहलाते हुए कहा – आप अपने आपको अकेला क्यों समझने लगी चाची..
शहर कोई इतना दूर तो है नही की आने जाने में कई-कई दिन लग जायें, जब भी आपको हमारी ज़रूरत पड़े हम सब हाज़िर हो जाएँगे…
अब आप तो खुद समझदार हैं, हमारी आने वाली पीढ़ी का भविश्य गाओं में नही है, उनके लिए हमें अभी से शुरुआत करनी पड़ेगी…
अंश को हम अपने पास यहाँ शहर में रख कर उसकी सिक्षा दीक्षा का पूरा ख़याल रखेंगे, आप निशिंत रहिए, हम पहले भी आपके अपने थे, आज भी है और आने वाले कल में भी रहेंगे…!
मेरी बात से संतुष्ट होकर चाची मेरे कंधे से लगकर सूबकते हुए बोली – भगवान तुम्हारे जैसा बेटा सबको दे… जीते रहो बेटा, ये कहकर उन्होने मेरा माथा चूम लिया…!
वहाँ बैठे लगभग सभी की आँखें नम थी, फिर कृष्णा भैया शिकायत वाले लहजे में बोले – वो सब तो ठीक है, लेकिन मे तेरे से बहुत नाराज़ हूँ भाई…!
मे जानता हूँ भैया, आप क्यों नाराज़ हो, लेकिन मे सबको एक साथ सर्प्राइज़ देना चाहता था, सो सॉरी भैया, मुझे माफ़ कर देना, ये कहकर मेने अपना सिर उनके चौड़े सीने में रख दिया…!
उन्होने प्यार से मेरे बाल पकड़ कर खींचे और बोले – अब तू है ही सबसे छोटा, तुझे तो मार भी नही सकता, वरना यहाँ बैठे सब लोग मुझ पर टूट पड़ेंगे…
इस बात पर सब लोग ठहाका लगा कर हँसने लगे, जो माहौल कुछ क्षण पूर्व गमगीन हो रहा था, वो अब फिर से हसी खुशी में बदल गया…!
ऐसे ही पलों के लिए परिवार का होना ज़रूरी होता है, जॉइंट फॅमिली क्या होती है, ये आज देखने को मिल रहा था, सभी एक दूसरे से कितना प्यार करते हैं, ये जाना…!
काश आज दोनो चाचाओं के परिवार भी यहाँ होते, तो खुशी और भी दुगनी हो जाती….!
दूसरे दिन शाम को पार्टी थी, हम सब लोग 10 बजे से ही शॉपिंग को निकल गये, साथ में मधु आंटी भी थी,
एक बड़े से माल में जाकर सबके लिए शहरी पार्टी के हिसाब से कपड़े सेलेक्ट करवाए, भाभी और चाची थोड़ा हिचक रही थी, लेकिन प्राची ने उन्हें लेने पर मजबूर कर दिया…!
बाबूजी और भैया को भी थ्री पीस सूट दिलवाए, जिससे कोई ये ना समझे कि ये लोग निरे ग्रामीण ही हैं…!
होटेल लक्ष्मी गुप्ता जी का अपना खुद का ही होटेल था, सो आज उसे उन्होने इसे सिर्फ़ पार्टी में आने वाले मेहमानों के लिए ही रखा,
पार्टी शाम 8 बजे से शुरू होनी थी, सब लोगों को घर छोड़कर में 4 बजे से होटेल पहुँच गया, सारे इंतेज़मत का जायज़ा लिया.
गुप्ता जी ने मुझे खुलकर एंजाय कने की खुली छूट दे रखी थी…, एक तरह से इस सबका करता धर्ता ही बना दिया…!
होटेल के बड़े से लॉन को अच्छे से सजाया गया था, और उसी में चारों तरफ खाने और पीने के सारे इंतेज़मत रखे,
होटेल के अंदर पार्टी एंजाय करने के बाद जहाँ जिसको रूम अलॉट किए उनमें जाकर सो सकते थे, जिन्हें अपने घर जाना वो घर चला जाए…!
8 बजे से लोगों के आने का ताँता शुरू हो गया, गुप्ता जी के परिवार के साथ साथ मुझे भी वेलकम करने के लिए एंट्री पर खड़ा होना पड़ा…!
आज सेठानी कुछ ज़्यादा ही चहक रही थी, थोड़ा भारी बदन के बबजूद भी आज वो एक वन पीस ड्रेस में बहुत सुंदर दिख रही थी…
खुशी के तो कहने ही क्या, वो एक अत्याधुनिक टाइनी सी ड्रेस में अपने कर्वी बदन से सबकी निगाहों का केंद्र बनी हुई थी…!
क्या जवान, क्या अधेड़ जिसको मौका लगा उसी ने उसके उफ्फान मारते युवा यौवन का रस्पान करने की भरकस कोशिश की..,
लोगों का आना शुरू हो गया, करीब शाम 8:30 पर कृष्णा भैया के नेतृत्व में मेरी फॅमिली भी पार्टी में शामिल होने के लिए आ पहुँची…..!
ये अंतर होता है गाओं की जिंदगी और शहरी जीवन में…, गाओं की गोरी अगर थोड़ा भी बन-संवर ले तो शहर की औरत उसका मुक़ाबला कभी नही कर सकती…!
कारण है, शुद्ध ख़ान-पान, और कमरतोड़ मेहनत जो शरीर को मेनटेन करके रखता है…!
मेरे घर की तीनों औरतों ने थोड़ा बनाव-शृंगार क्या कर लिया, थोड़े शहरी लिबास क्या पहने, पार्टी में मौजूद हर मर्द की नज़र उनपर फिसल रही थी…!
प्राची उन्हें दो घंटे पहले किसी ब्यूटी पार्लर में ले गयी, जहाँ उनका काया कल्प ही हो गया था…,
एनीवेस, मेने अपने परिवार के सभी लोगों को गुप्ता जी और उनके रिलेटिव्स के साथ इंट्रो दिया, सेठानी और खुशी निशा और भाभी से प्रभावित हुए बिना नही रह पाई…!
खुशी मेरे कान में फुसफुसाई.., थॅंक्स भैया.. इतनी सुंदर हॉट भाभी के होते हुए आपने मेरी बात मान ली…!
बाबूजी और बड़े भैया भी सूट बूट में जॅंच रहे थे, गुप्ता जी उन्हें अपने साथ लेकर एक तरफ के बढ़ गये, जिधर उनके अपने लेवल के लोग थे, छोटे चाचा भी साथ हो लिए…
कृष्णा भैया और प्राची को छूट मिल गयी, और वो दोनो, एक दूसरे की कमर में हाथ डाले पार्टी एंजाय करने लगे…!
निशा ज़्यादा चल फिर नही सकती थी, सो उन तीनो को एक सेफ जगह बिठाकर, एक वेटर को उनका ख्याल रखने के लिए छोड़ दिया…!
कुछ देर बाद पीने पिलाने का दौर शुरू हुआ, हममें से कोई इस चीज़ का शौकीन नही था, लेकिन कृष्णा भैया के कुछ कुलीग ज़्यादा पीछे पड़ गये सो उन्होने एक लाइट ड्रिंक ले लिया…!
मे अपने घर की तीनों औरतों को लेकर पार्टी में एंजाय कर रहा था,
रूचि भी हमारे ही साथ थी, चाची ने अंश को चाचा के सुपुर्द कर दिया था, और सुवंश भाभी की गोद में मज़े कर रहा था…!
मे नज़र बचा कर तीनों के मज़े ले लेता, इस तरह हमने खूब पार्टी एंजाय की, फिर खाना पीना खाकर बाबूजी और भैया ने लौटने की पर्मिशन ली…
गुप्ता जी ने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन निशा की वजह से ज़्यादा देर रुकना सही नही था इसलिए मुझे छोड़कर वाकी सभी लोग अपने फ्लॅट पर लौट गये…!
मुझे यहीं रुकना था, सारे इंतेज़मत की ज़िम्मेदारी जो थी मेरे सिर पर..,
उन सबके जाते ही कृष्णा भैया और प्राची मेरे पीछे पड़ गये और उन्होने मुझे भी थोड़ी स्कॉच पिला ही दी,
शहर कोई इतना दूर तो है नही की आने जाने में कई-कई दिन लग जायें, जब भी आपको हमारी ज़रूरत पड़े हम सब हाज़िर हो जाएँगे…
अब आप तो खुद समझदार हैं, हमारी आने वाली पीढ़ी का भविश्य गाओं में नही है, उनके लिए हमें अभी से शुरुआत करनी पड़ेगी…
अंश को हम अपने पास यहाँ शहर में रख कर उसकी सिक्षा दीक्षा का पूरा ख़याल रखेंगे, आप निशिंत रहिए, हम पहले भी आपके अपने थे, आज भी है और आने वाले कल में भी रहेंगे…!
मेरी बात से संतुष्ट होकर चाची मेरे कंधे से लगकर सूबकते हुए बोली – भगवान तुम्हारे जैसा बेटा सबको दे… जीते रहो बेटा, ये कहकर उन्होने मेरा माथा चूम लिया…!
वहाँ बैठे लगभग सभी की आँखें नम थी, फिर कृष्णा भैया शिकायत वाले लहजे में बोले – वो सब तो ठीक है, लेकिन मे तेरे से बहुत नाराज़ हूँ भाई…!
मे जानता हूँ भैया, आप क्यों नाराज़ हो, लेकिन मे सबको एक साथ सर्प्राइज़ देना चाहता था, सो सॉरी भैया, मुझे माफ़ कर देना, ये कहकर मेने अपना सिर उनके चौड़े सीने में रख दिया…!
उन्होने प्यार से मेरे बाल पकड़ कर खींचे और बोले – अब तू है ही सबसे छोटा, तुझे तो मार भी नही सकता, वरना यहाँ बैठे सब लोग मुझ पर टूट पड़ेंगे…
इस बात पर सब लोग ठहाका लगा कर हँसने लगे, जो माहौल कुछ क्षण पूर्व गमगीन हो रहा था, वो अब फिर से हसी खुशी में बदल गया…!
ऐसे ही पलों के लिए परिवार का होना ज़रूरी होता है, जॉइंट फॅमिली क्या होती है, ये आज देखने को मिल रहा था, सभी एक दूसरे से कितना प्यार करते हैं, ये जाना…!
काश आज दोनो चाचाओं के परिवार भी यहाँ होते, तो खुशी और भी दुगनी हो जाती….!
दूसरे दिन शाम को पार्टी थी, हम सब लोग 10 बजे से ही शॉपिंग को निकल गये, साथ में मधु आंटी भी थी,
एक बड़े से माल में जाकर सबके लिए शहरी पार्टी के हिसाब से कपड़े सेलेक्ट करवाए, भाभी और चाची थोड़ा हिचक रही थी, लेकिन प्राची ने उन्हें लेने पर मजबूर कर दिया…!
बाबूजी और भैया को भी थ्री पीस सूट दिलवाए, जिससे कोई ये ना समझे कि ये लोग निरे ग्रामीण ही हैं…!
होटेल लक्ष्मी गुप्ता जी का अपना खुद का ही होटेल था, सो आज उसे उन्होने इसे सिर्फ़ पार्टी में आने वाले मेहमानों के लिए ही रखा,
पार्टी शाम 8 बजे से शुरू होनी थी, सब लोगों को घर छोड़कर में 4 बजे से होटेल पहुँच गया, सारे इंतेज़मत का जायज़ा लिया.
गुप्ता जी ने मुझे खुलकर एंजाय कने की खुली छूट दे रखी थी…, एक तरह से इस सबका करता धर्ता ही बना दिया…!
होटेल के बड़े से लॉन को अच्छे से सजाया गया था, और उसी में चारों तरफ खाने और पीने के सारे इंतेज़मत रखे,
होटेल के अंदर पार्टी एंजाय करने के बाद जहाँ जिसको रूम अलॉट किए उनमें जाकर सो सकते थे, जिन्हें अपने घर जाना वो घर चला जाए…!
8 बजे से लोगों के आने का ताँता शुरू हो गया, गुप्ता जी के परिवार के साथ साथ मुझे भी वेलकम करने के लिए एंट्री पर खड़ा होना पड़ा…!
आज सेठानी कुछ ज़्यादा ही चहक रही थी, थोड़ा भारी बदन के बबजूद भी आज वो एक वन पीस ड्रेस में बहुत सुंदर दिख रही थी…
खुशी के तो कहने ही क्या, वो एक अत्याधुनिक टाइनी सी ड्रेस में अपने कर्वी बदन से सबकी निगाहों का केंद्र बनी हुई थी…!
क्या जवान, क्या अधेड़ जिसको मौका लगा उसी ने उसके उफ्फान मारते युवा यौवन का रस्पान करने की भरकस कोशिश की..,
लोगों का आना शुरू हो गया, करीब शाम 8:30 पर कृष्णा भैया के नेतृत्व में मेरी फॅमिली भी पार्टी में शामिल होने के लिए आ पहुँची…..!
ये अंतर होता है गाओं की जिंदगी और शहरी जीवन में…, गाओं की गोरी अगर थोड़ा भी बन-संवर ले तो शहर की औरत उसका मुक़ाबला कभी नही कर सकती…!
कारण है, शुद्ध ख़ान-पान, और कमरतोड़ मेहनत जो शरीर को मेनटेन करके रखता है…!
मेरे घर की तीनों औरतों ने थोड़ा बनाव-शृंगार क्या कर लिया, थोड़े शहरी लिबास क्या पहने, पार्टी में मौजूद हर मर्द की नज़र उनपर फिसल रही थी…!
प्राची उन्हें दो घंटे पहले किसी ब्यूटी पार्लर में ले गयी, जहाँ उनका काया कल्प ही हो गया था…,
एनीवेस, मेने अपने परिवार के सभी लोगों को गुप्ता जी और उनके रिलेटिव्स के साथ इंट्रो दिया, सेठानी और खुशी निशा और भाभी से प्रभावित हुए बिना नही रह पाई…!
खुशी मेरे कान में फुसफुसाई.., थॅंक्स भैया.. इतनी सुंदर हॉट भाभी के होते हुए आपने मेरी बात मान ली…!
बाबूजी और बड़े भैया भी सूट बूट में जॅंच रहे थे, गुप्ता जी उन्हें अपने साथ लेकर एक तरफ के बढ़ गये, जिधर उनके अपने लेवल के लोग थे, छोटे चाचा भी साथ हो लिए…
कृष्णा भैया और प्राची को छूट मिल गयी, और वो दोनो, एक दूसरे की कमर में हाथ डाले पार्टी एंजाय करने लगे…!
निशा ज़्यादा चल फिर नही सकती थी, सो उन तीनो को एक सेफ जगह बिठाकर, एक वेटर को उनका ख्याल रखने के लिए छोड़ दिया…!
कुछ देर बाद पीने पिलाने का दौर शुरू हुआ, हममें से कोई इस चीज़ का शौकीन नही था, लेकिन कृष्णा भैया के कुछ कुलीग ज़्यादा पीछे पड़ गये सो उन्होने एक लाइट ड्रिंक ले लिया…!
मे अपने घर की तीनों औरतों को लेकर पार्टी में एंजाय कर रहा था,
रूचि भी हमारे ही साथ थी, चाची ने अंश को चाचा के सुपुर्द कर दिया था, और सुवंश भाभी की गोद में मज़े कर रहा था…!
मे नज़र बचा कर तीनों के मज़े ले लेता, इस तरह हमने खूब पार्टी एंजाय की, फिर खाना पीना खाकर बाबूजी और भैया ने लौटने की पर्मिशन ली…
गुप्ता जी ने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन निशा की वजह से ज़्यादा देर रुकना सही नही था इसलिए मुझे छोड़कर वाकी सभी लोग अपने फ्लॅट पर लौट गये…!
मुझे यहीं रुकना था, सारे इंतेज़मत की ज़िम्मेदारी जो थी मेरे सिर पर..,
उन सबके जाते ही कृष्णा भैया और प्राची मेरे पीछे पड़ गये और उन्होने मुझे भी थोड़ी स्कॉच पिला ही दी,